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मुरादाबाद में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को हटाने का आदेश, नोटिस से मचा हड़कंप

सहारनपुर यूपी के सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर में बनी सौ साल पुरानी मस्जिद गिराने का मामला गरमाया हुआ है। सपा, कांग्रेस, आजाद समाज पार्टी समेत तमाम विपक्षी दलों ने इसे लेकर मोर्चा खोला हुआ है। इस बीच यूपी के ही मुरादाबाद में अब सरकारी जमीन पर मस्जिद का आरोप लगाते हुए बुलडोजर चलाने की तैयारी कई गई है। दिल्ली रोड स्थित पाकबड़ा थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बनी सालों पुरानी मस्जिद को लेकर खुद तोड़ने की नोटिस एमडीए ने दी है। एमडीए सचिव की ओर से मस्जिद के मुतवल्ली को नोटिस जारी कर अवैध निर्माण को खुद ही हटाने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में इसके लिए 15 दिन की समय सीमा दी गई है। निर्धारित अवधि में निर्माण नहीं हटाए जाने पर प्राधिकरण द्वारा बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी। एमडीए की नोटिस से मस्जिद कमेटी में हड़कंप मचा है। करीब 300 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया गया है। एमडीए की ओर से इसे अवैध निर्माण माना गया है। सड़क किनारे मस्जिद के निर्माण से यातायात व्यवस्था भी आए दिन बाधित होती रहती है। कमेटी के लोगों के द्वारा मस्जिद सालों पुरानी बताई जा रही है। पहले भी की जा चुकी है बुलडोजर कार्रवाई सरकारी जमीन पर बने अवैध धार्मिक निर्माणों को लेकर प्रशासन पहले भी कार्रवाई कर चुका है। कांठ रोड सिद्ध अस्पताल के पास सड़क किनारे बनाए गए मस्जिदनुमा निर्माण को प्रशासन ने पुलिस बल की मौजूदगी में हटाया था। विवाद से बचने के लिए प्रशासन की टीम ने सुबह तड़के बुलडोजर कार्रवाई शुरू की थी। लोगों की नींद खुलने तक अवैध निर्माण का नामोनिशान साफ हो गया था। इसी तरह एमडीए की सेक्टर-10 योजना में पार्क की जमीन पर बनी मीनार के निर्माण को बुलडोजर से हटाकर पार्क की जमीन खाली कराई गई थी। एमडीए उपाध्यक्ष अनुभव सिंह का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। नोटिस दिए जाने की कार्रवाई की गई है। सहारनपुर मामले पर आज हाईकोर्ट में दायर होगी याचिका सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला अब हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। मस्जिद प्रकरण में सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। मस्जिद के मुतवल्ली की ओर से यह अपील दाखिल की जाएगी। याचिका के जरिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को चुनौती दिए जाने के साथ प्रकरण में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासन की ओर से की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद अब मुतवल्ली की ओर से कानूनी रास्ता अपनाया जा रहा है। हाईकोर्ट में दाखिल होने वाली याचिका में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से जुड़े आदेश, प्रक्रिया और अन्य संबंधित बिंदुओं को आधार बनाया जाएगा। मुतवल्ली पक्ष का कहना है मस्जिद से संबंधित दस्तावेज और अभिलेख उनके पास मौजूद हैं। ऐसे में कार्रवाई को लेकर न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा जाएगा। याचिका दाखिल होने के बाद अदालत की ओर से सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। वहीं, पुलिस-प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की जा रही है।

किसान आंदोलन पर आज आएगा निर्णायक फैसला, सरकार से बातचीत के बाद मोर्चा खत्म करने के संकेत

मोहाली  मोहाली-चंडीगढ़ बार्डर पर पिछली 1 सितंबर से चल रहा किसानों का धरना सोमवार को 7वें दिन में पहुंच गया है। इससे पहले रविवार को पंजाब सरकार के दो मंत्रियों व किसान नेताओं के बीच मीटिंग पंजाब भवन चंडीगढ़ में हुई। सूत्रों के अनुसार मीटिंग पाजिटिव रही और कई मांगों को जो पंजाब सरकार के तहत पूरी हो सकती है उनमें से कई को मान लिया गया। सरकार की ओर से कृषि मंत्री गुरमीत सिंह मुंडिया और सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह मीटिंग में हाजिर हुए जबकि किसानाें की कई जत्थेबंदियों के नेता पहुंचे। सरकार की ओर से किसानों को आश्वासन दिया गया कि एक महीने के अंदर विधान सभा का विशेष सत्र बुला कर पानी के मसले पर बात की जाएगी।बाकी केंद्र से पूरी होने वाली मांगों को लेकर केंद्र से बातचीत का आश्वासन मंत्रियों ने किसान नेताओं को दिया। सोमवार को किसान जथेबन्दीयों के नेता आपस में मीटिंग करेंगे। उसके बाद स्टेज से सरकार-किसानों के बीच हुई मीटिंग के बारे बताया जाएगा। इस दौरान पंजाब सरकार का कोई नुमाइंदा जो मांगों काे पंजाब सरकार ने माना है उसका लिखित मसौदा लेकर मोर्चे में पहुंच सकता है। कुल मिला कर आज बार्डर पर लगा किसानों का मोर्चा खत्म हो सकता है। राकेश टिकैत पहुंचे मोर्चे में किसान नेता राकेश टिकैत रविवार को किसान मोर्चे में पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को सरकारों को मान लेना चाहिए । उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलना चाहिए। किसानों की मुख्य मांगें किसानों की ओर से अमेरिका के साथ ट्रेड डील न करने, पानी के मुद्दे को लेकर सेक्शन 78,79,80 रद्द करने, किसानों का पूरा कर्ज़ माफ़ करने, फसलों का दाम स्वामीनाथन रिपोर्ट के हिसाब से तय करने, बिजली बिल 2025 और बीज बिल 25 वापस लेने, गन्ने का दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, लैंड पुलिंग स्कीम रद्द करने सहित कई अन्य मांगों को लेकर मोहाली में पक्का मोर्चा लगाया गया है। किसान नेताओं और प्रशासन से बातचीत के बाद किसानों ने 1 से 7 सितंबर तक मोहाली से चंडीगढ़ जाने वाली मुख्य सड़क की एक तरफ मोहाली बार्डर पर लगाया है। मोर्चे में पंजाब भर से पहुंचे किसानों की ट्रैक्टर-ट्रालियां खड़ी करने में जगह न मिलने कारण किसानों ने सड़क की दूसरी तरफ भी ट्रालियां खड़ी कर दी है। फिलहाल सड़क की एक तरफ से चंडीगढ़ से मोहाली आने जाने वालों के लिए रास्ता खुला हुआ है।

बेटी के साथ संबंधों का आरोप, पिता पर ब्लैकमेलिंग का खेल… SO की मौत के बाद सामने आया मामला

 बस्ती पहले मुलाकात, फिर दोस्ती और उसके बाद नजदीकियां… पुलिस का दावा है कि बस्ती में एक हनीट्रैप गिरोह इसी तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था. इसके बाद प्राइवेट बातचीत, तस्वीरों और वीडियो को ब्लैकमेलिंग का हथियार बनाया जाता था. पैसे की मांग होती थी और इनकार करने पर बदनाम करने की धमकी दिए जाने का आरोप है. इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ, जब बस्ती में वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह ने 29 अगस्त को अपने सरकारी आवास पर आत्महत्या कर ली. उनकी मौत की जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले, जिनसे एक महिला, उसके पिता और एक वकील की भूमिका सामने आई. पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 32 वर्षीय प्रियंका चौधरी, उसके पिता राम नयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव के रूप में हुई है।  बस्ती के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) संजीव त्यागी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की जानकारी दी. 29 अगस्त का दिन था. वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह अपने सरकारी आवास पर थे. कुछ समय बाद उनकी मौत की खबर सामने आई. पुलिस के मुताबिक, सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी. एक पुलिस अधिकारी की इस तरह हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए. सूर्य प्रकाश सिंह के बेटे संदीप सिंह ने 5 सितंबर को बस्ती कोतवाली थाने में FIR दर्ज कराई. शिकायत में कई लोगों पर आपसी मिलीभगत से ऐसे कृत्य करने का आरोप लगाया गया, जिनके कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. पुलिस ने सूर्य प्रकाश सिंह के मोबाइल फोन, कॉलिंग पैटर्न की पड़ताल शुरू की. इसी दौरान जांच की कड़ियां एक महिला और उसके संपर्क में रहे कुछ लोगों तक पहुंचीं।  पहले नजदीकी, फिर प्राइवेट तस्वीरें और वीडियो पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का कथित तरीका बेहद योजनाबद्ध था. जांच में सामने आया कि प्रियंका चौधरी कथित तौर पर लोगों से संपर्क करती थी. बातचीत आगे बढ़ने के बाद दोस्ती और फिर प्रेम या अंतरंग संबंध जैसे हालात बनाए जाते थे. पुलिस का दावा है कि इसी दौरान बातचीत, तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड कर लिए जाते थे. इसके बाद शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का खेल. आरोप है कि निजी तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने या परिवार और समाज में बदनाम करने का डर दिखाकर लोगों से पैसे मांगे जाते थे. पुलिस का कहना है कि इस तरीके से कई लोगों को कथित तौर पर निशाना बनाया गया।  अकेली नहीं थी प्रियंका, पिता और वकील भी भूमिका में पुलिस की जांच में प्रियंका के साथ उसके पिता राम नयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है. पुलिस के मुताबिक, प्रियंका कथित तौर पर लोगों से संपर्क बनाती थी और उन्हें अपने जाल में फंसाती थी. इसके बाद उसके पिता और विजय प्रकाश यादव कथित ब्लैकमेलिंग और वसूली में भूमिका निभाते थे.  पुलिस ने दावा किया है कि गिरोह ने कई लोगों से पैसे की कथित वसूली की. अब जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन आरोपियों ने कितने लोगों को निशाना बनाया और इस नेटवर्क में इनके अलावा कोई और व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।  गंधार गांव में पिता के साथ रहती थी प्रियंका पुलिस के मुताबिक, प्रियंका चौधरी वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के गंधार गांव में अपने पिता के साथ रहती थी. पुलिस ने बताया कि प्रियंका करीब 10 साल से अपने पति से अलग रह रही थी. वह मुंबई में ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटरों में भी काम कर चुकी थी. पुलिस अब उसकी पुरानी गतिविधियों और संपर्कों की भी जानकारी जुटा रही है. जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित तौर पर जिन लोगों को निशाना बनाया गया, उनसे संपर्क कैसे हुआ और बाद में ब्लैकमेलिंग की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी. सूर्य प्रकाश सिंह की मौत की जांच में कॉल डिटेल ने भी पुलिस का ध्यान खींचा।  DIG संजीव त्यागी के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण से सिंह का प्रियंका चौधरी और विजय प्रकाश यादव से संपर्क सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन की कॉलिंग भी जांच में अहम रही. 29 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट पर विजय प्रकाश यादव ने सूर्य प्रकाश सिंह को आखिरी कॉल की थी.  अब पुलिस इस कॉल को लेकर भी जांच कर रही है. अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बातचीत में क्या हुआ था और क्या इसका संबंध सिंह की मौत से पहले की परिस्थितियों से था. पुलिस का कहना है कि कॉलिंग पैटर्न और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को एक साथ देखने पर आरोपियों और सिंह के बीच संपर्क की कड़ी मजबूत हुई।  क्या ब्लैकमेलिंग के दबाव में दी जान  पुलिस को संदेह है कि सूर्य प्रकाश सिंह को आरोपियों की ओर से कथित तौर पर परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा था. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी दबाव के कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, कॉल डिटेल, आरोपियों से पूछताछ और अन्य संभावित पीड़ितों से मिली जानकारी को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की तस्वीर तैयार कर रही है. पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कथित गिरोह ने सिर्फ एक व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया था. कई अन्य लोगों से भी कथित तौर पर पैसे की वसूली किए जाने की बात सामने आई है. अब पुलिस इन संभावित पीड़ितों की पहचान करने की कोशिश कर रही है. उनसे पूछताछ के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि उनके साथ किस तरह संपर्क किया गया, क्या रिकॉर्ड किया गया और बाद में किस तरह पैसे की मांग की गई. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों के पास लोगों की निजी तस्वीरें और वीडियो किस तरह पहुंचते थे और क्या इनका इस्तेमाल दूसरे लोगों को भी डराने के लिए किया गया।  हॉस्पिटल चौराहे से तीनों गिरफ्तार DIG संजीव त्यागी के मुताबिक, तीनों आरोपियों को हॉस्पिटल चौराहे से गिरफ्तार किया गया. अब आरोपियों से पूछताछ के जरिए पुलिस कथित नेटवर्क की दूसरी कड़ियां तलाश रही है. पुलिस यह भी जांच कर रही है … Read more

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को मिला नया चीफ जस्टिस, विरोध के बावजूद जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने ली शपथ

चंडीगढ़  पंजाब सरकार के विरोध के बीच जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ताैर पर शपथ ली। शपथ समारोह पंजाब गवर्नर हाउस में हुआ। पंजाब के गवर्नर गुलाबचंद कटारिया ने मिश्रा को शपथ दिलाई। कार्यक्रम में सीएस केपी सिन्हा, हरियाणा के राज्यपाल असीम घोष और हरियाणा के सीएम नायब सैनी माैजूद रहे।  मिश्रा को नियुक्त करने के खिलाफ पंजाब सरकार ने रविवार को कैबिनेट में प्रस्ताव पास किया था। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई बैठक में मांग की गई कि राज्य सरकार की सहमति लिए जाने तक जस्टिस मिश्रा का शपथग्रहण न करवाया जाए।मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार कैबिनेट ने आरोप लगाया कि नियुक्ति में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। राज्य सरकार से राय मांगे जाने के बावजूद उसका जवाब आने से पहले ही नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी गई। सरकार ने इसे पंजाब की अनदेखी बताया।  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार ने केंद्र पर संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप लगाया है। रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में केंद्र सरकार के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति का विरोध किया था। CM भगवंत मान का तर्क था कि जस्टिस मिश्रा की इस नियुक्ति को लेकर उनसे सहमति नहीं ली गई। उन्होंने शपथग्रहण समारोह रोकने की भी मांग की थी। इसी वजह से CM भगवंत मान या पंजाब सरकार का कोई मंत्री शपथग्रहण समारोह में नहीं पहुंचा। हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी और राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष समारोह में मौजूद रहे। एक दिन पहले, रविवार (6 सितंबर) को पंजाब CM भगवंत मान ने इमरजेंसी कैबिनेट मीटिंग बुलाकर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति के खिलाफ प्रस्ताव पास किया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि पंजाब सरकार की सहमति मिलने तक चीफ जस्टिस को शपथ न दिलाई जाए। पंजाब सरकार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से भी इस मामले में अपील की थी। सीएम मान के मुताबिक, केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की सहमति लिए बिना पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति कर दी है। संवैधानिक नियमों की उल्लंघना मान सरकार का कहना है कि यह नियुक्ति तय प्रक्रिया ( मेमोरेंडम आफ प्रोसीजर) और संवैधानिक नियमों की सीधी उल्लंघना है। तय प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति में संबंधित राज्य सरकार से राय लेना अनिवार्य होता है। लेकिन पंजाब व हरियाणा के ताजा नियुक्त किए गए चीफ जस्टिस के मामले में ऐसा नहीं किया गया है। सीएम मान ने केंद्र और पंजाब के बीच टकराव का कारण रहे पुराने लंबित मामलों 9000 करोड़ के पेंडिग ग्रामीण विकास फंड और बाढ़ राहत की राशि का भी जिक्र किया। साथ ही मान सरकार ने केंद्र पर बीबीएमबी के नियमों में एकतरफा बदलाव की ही तरह अब न्यायपालिका की नियुक्तियों में सीधा दखल देने का आरोप लगाया है। केंद्र की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं सीएम मान ने कहा कि केंद्र की यह दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमारी मांग है कि इस नियुक्ति को तुरंत रोका जाए और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए सूबे की राय को बनता सम्मान दिया जाए। ध्यान रहे कि आज दोपहर के वक्त वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा था कि राज्य सरकार पंजाब के राज्यपाल को भी पत्र लिखकर आग्रह करेगी कि नव नियुक्त चीफ जस्टिस को पद की शपथ न दिलाई जाए क्योंकि यह नियुक्ति पंजाब को अनदेखा करके की गई है। राज्य सरकार की राय बाध्यकारी नहीं उधर, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति अश्वनी शर्मा की नियुक्ति पर पंजाब सरकार के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण और अनावश्यक बताया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 217(1) के तहत की है और न्यायाधीशों की नियुक्ति की तय प्रक्रिया का पूरी तरह पालन हुआ है। उनके अनुसार, छह अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने नियुक्ति की सिफारिश की थी और 10 अगस्त को पंजाब व हरियाणा सरकारों से राय मांगी गई। हरियाणा ने समय पर राय दे दी, जबकि पंजाब ने अब तक अपनी राय नहीं भेजी। उन्होंने कहा कि राज्य की राय जरूरी है, लेकिन बाध्यकारी नहीं और सरकार के पास वीटो अधिकार नहीं है। न्यायपालिका में हस्तक्षेप पर बार नाराज परमप्रीत सिंह बाजवा (हैरी) ऑनरेरी सेक्रेटरी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति का पंजाब सरकार द्वारा विरोध किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। बार एसोसिएशन ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है और कार्यपालिका को न्यायिक नियुक्तियों पर राजनीतिक दबाव नहीं बनाना चाहिए। एसोसिएशन के अनुसार, संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नियुक्ति होने के बाद राजनीतिक मतभेदों के आधार पर इसे विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। आपात बैठक में कार्यकारिणी ने पंजाब सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया का सम्मान करने और हाईकोर्ट की गरिमा बनाए रखने की अपील की। एसोसिएशन ने न्यायपालिका के साथ मजबूती से खड़े रहने का संकल्प लिया। पंजाब सरकार ने क्या एतराज जताए, 4 पॉइंट में पढ़िए…     चीफ जस्टिस की नियुक्ति में स्टैंडर्ड प्रोसीजर फॉलो नहीं: पंजाब के वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति का मामला संवेदनशील है। इस नियुक्ति में स्टैंडर्ड प्रोसीजर (मानक प्रक्रिया) को फॉलो नहीं किया गया। इससे बड़ा सवाल भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार के खिलाफ खड़ा होता है। पंजाब को इग्नोर किया गया।     जस्टिस संधावालिया की नियुक्ति को सहमति नहीं दी थी: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर मोस्ट जस्टिस जीएस संधावालिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश 11 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट के CJI और पूरे कॉलेजियम ने की थी। इसके बावजूद BJP की केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी नियुक्ति को 2 महीने से ज्यादा समय तक मंजूरी नहीं दी। 11 जुलाई को सिफारिश के बाद 17 सितंबर तक उनकी नियुक्ति पर सहमति नहीं दी गई।     नियुक्ति में … Read more

बस्तर में विकास को लेकर भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहने की अपील, मुख्यमंत्री ने कहा -स्थानीय जनता की इच्छा और हित सर्वोपरि

रायपुर : बस्तर की जनता जैसा विकास चाहेगी, वैसा ही होगा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बस्तर में विकास को लेकर भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहने की अपील, मुख्यमंत्री ने कहा -स्थानीय जनता की इच्छा और हित सर्वोपरि प्रदेश की बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरा सौभाग्य, एक भाई के नाते उनकी सेवा और सुरक्षा के लिए सदैव संकल्पित – मुख्यमंत्री साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर के विकास की दिशा वहां की जनता की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप ही तय होगी। बस्तर की जनता को किसी प्रकार के भ्रम में रहने की आवश्यकता नहीं है। सरकार क्षेत्र में कृषि, पर्यटन, पशुपालन सहित स्थानीय संभावनाओं के अनुरूप आजीविका और विकास के अवसरों को आगे बढ़ा रही है। बस्तर के लोग जैसा विकास चाहेंगे, सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री साय ने निजी समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में विभिन्न सवालों के जवाब देते हुए बस्तर के विकास, नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता और महिला सशक्तीकरण सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखी। बस्तर से जुड़े एक प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा। आज जब नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई निर्णायक मुकाम पर पहुंची है और क्षेत्र में शांति एवं विकास का नया वातावरण बना है, तब कुछ लोग बस्तर की जनता के बीच यह भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि नक्सलवाद को समाप्त करने के पीछे सरकार का उद्देश्य बड़े उद्योगों के लिए रास्ता तैयार करना है। मुख्यमंत्री ने इसे स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। बस्तर का भविष्य वहां की जनता की आकांक्षाओं और इच्छाओं के अनुरूप ही तय होगा।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो लोग नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई में कभी साथ नहीं खड़े हुए अथवा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से उसका समर्थन करते रहे, वे अब नए नैरेटिव के माध्यम से लोगों में भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। बस्तर की जनता जागरूक है और ऐसे भ्रामक प्रयासों को भली-भांति समझती है। हमारी सरकार का उद्देश्य बस्तर की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संभावनाओं को आगे बढ़ाते हुए वहां के लोगों के जीवन में समृद्धि लाना है। उन्होंने कहा कि बस्तर में कृषि को सशक्त करने, पशुपालन को बढ़ावा देने और पर्यटन की अपार संभावनाओं को अवसरों में बदलने की दिशा में सरकार निरंतर काम कर रही है। शांति स्थापित होने के साथ अब दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंच रहा है और स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। हमारा प्रयास है कि बस्तर अपनी विशिष्ट पहचान और समृद्ध संस्कृति को सहेजते हुए विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे। बहनों का ‘भैया’ कहना मेरे लिए सबसे बड़ा सौभाग्य साक्षात्कार के दौरान प्रदेश की बहनों द्वारा विष्णु भैया नाम से पुकारे जाने और बहनों के मुख्यमंत्री से आत्मीय जुड़ाव को लेकर पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की बहनें उन्हें ‘भैया’ कहकर पुकारती हैं और अपने परिवार का सदस्य मानती हैं। इससे बड़ा सौभाग्य उनके लिए और क्या हो सकता है ? बहनों से मिलने वाला स्नेह और आशीर्वाद उन्हें जनसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक भाई के नाते प्रदेश की बहनों की सेवा, सुरक्षा और उनके जीवन में खुशहाली लाना उनका संकल्प है। सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके सम्मान, स्वाभिमान और सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि प्रदेश की हर बहन को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें और वह आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार तथा छत्तीसगढ़ की प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास और स्नेह ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। सरकार की प्रत्येक नीति और प्रत्येक निर्णय के केंद्र में छत्तीसगढ़ की जनता का हित है।  बस्तर के विकास से लेकर माताओं-बहनों के सशक्तीकरण तक सरकार का संकल्प स्पष्ट है – विकास ऐसा हो, जिसमें जनता की भागीदारी हो, स्थानीय आकांक्षाओं का सम्मान हो और उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

Major relief for villagers in Bihar: The decision to levy holding tax on pucca and semi-pucca houses will be reversed.

पटना बिहार के लोगों को सम्राट चौधरी सरकार बड़ी राहत देने जा रही है। बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में अब सिर्फ व्यावसायिक कर ही लगेगा। गांवों और कस्बों में कच्चा मकान को छोड़ पक्का और अर्धपक्का मकान से होल्डिंग टैक्स (मकान कर) वसूलने के फैसले को सरकार वापस लेने जा रही है। इससे ग्रामीण इलाकों के लगभग 8 करोड़ से अधिक लोगों को राहत मिलेगी। पंचायती राज विभाग ग्रामीणों से शुल्क वसूली के प्रावधानों में संशोधन कर रहा है। संशोधन के बाद यह नया प्रावधान लागू होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक तरह के टैक्स लेने के प्रस्ताव पर 15 जुलाई को राज्य कैबिनेट की मुहर लगी थी। लेकिन अभी तक गजट प्रकाशित नहीं किया गया है। पंचायती राज विभाग ने इसकी अधिसूचना भी जारी नहीं की है। आवासीय मकानों से शुल्क वसूली संबंधी संशोधन से गांवों के किसान, मजदूर और गरीबों को राहत मिलेगी। सरकार के फैसले से लोगों में चौतरफा नाराजगी थी। विपक्ष भी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहा था। इसलिए राज्य सरकार त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थानों से जुड़े ग्रामीण इलाकों में नया कर वसूली के प्रावधानों को संशोधन के बाद ही लागू करने की तैयारी कर रही है। पीएम आवास योजना के तहत बने गरीबों के घरों के लिए सालाना होल्डिंग टैक्स सबंधित विभाग (ग्रामीण विकास विभाग) से लेना था, पर इस प्रावधान को भी हटाने की तैयारी है। पंचायत क्षेत्रों में व्यावसायिक मकान निर्माण कार्य के लिए आवश्यकतानुसार पंचायतों को कर वसूलने का हक होगा। पंचायतों का राजस्व बढ़ेगा व्यावसायिक, औद्योगिक व संस्थागत उपयोग वाले भवन पर 100 रुपये से 5 हजार रुपये तक सालाना कर लगना है। पेशा शुल्क भी लगेगा। व्यावसायी द्वारा स्थापित चावल मिल जिसकी क्षमता 2 टन प्रति घंटा से अधिक है, उस पर कर का प्रावधान है। सिनेमा हॉल, विवाह भवन, होटल, पेट्रोल पंप और रसोई गैस एजेंसी पर सालाना 5 हजार रुपये शुल्क वसूलने का प्रावधान किया गया था। हालांकि संशोधन के बाद इस शुल्क में भी कमी की जा सकती है। मेले में बिक्री होने पर पशु के लिए भी शुल्क लगेगा। सरकार ने क्यों लिया था फैसला पंचायतों की आय बढ़ा कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों से कर वसूलने का निर्णय लिया गया था। 16 वीं केंद्रीय वित्त आयोग ने देश भर की पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कर लगाने की अनुशंसा की है। वित्त आयोग की अनुशंसा है कि ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक घरों से सालाना औसतन 1200 रुपये वसूल कर पंचायत अपनी आय बढ़ाने का प्रयास करे। पहले यह कर की दर तय थी आवास के प्रकार कर की दर(प्रतिवर्ष) पक्का मकान 100 रुपए अर्द्ध पक्का मकान 50 रुपये कच्चा मकान कर नहीं पीएम आवास के मकान 25 रुपये (ग्रमाीण विभाग देगा) सफाई शुल्क 30 रुपये (प्रति घर मासिक) पेट्रोल पंप 5 हजार रुपये रसोई गैस एजेंसी 5 हजार रुपये ईंट चिमनी 5 हजार रुपये सिनेमा हॉल 5 हजार रुपये जलापूर्ति शुल्क 30 रुपये (प्रतिमाह)

सरकारी स्कूलों में पुस्तक परिवहन का मामला गरमाया, तीन दिन के अल्टीमेटम के बावजूद अब तक कार्रवाई लंबित

शाासकीय विद्यालयों में पुस्तक परिवहन में भारी गड़बड़ी?, एक माह पहले तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए डीपीसी से ने मांगा स्पष्टीकरण, आज तक नहीं हुई कार्रवाई कटनी  शासकीय स्कूलों में अध्यनरत बच्चों को निशुल्क पुस्तक उपलब्ध कराने के लिए शासन के द्वारा पर्याप्त व्यवस्था की गई है, जिसके तहत ठेका देकर मुख्यालय से निशुल्क पाठ्य पुस्तक स्कूलों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी एक समूह को जिला शिक्षा केंद्र के द्वारा प्रदान की गई है। लगभग एक माह पूर्व राष्ट्र रक्षक न्यूज़ चैनल ने खबर के माध्यम से पुस्तक वितरण घोटाला उजागर करते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए थे। जिसको लेकर कलेक्टर की फटकार के बाद जिला शिक्षा केंद्र कटनी के जिला परियोजना समन्वयक के द्वारा जिले के पुस्तक वितरण ठेका समूह से तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण देने का पत्र 3 अगस्त 2026 को जारी किया गया। पत्र जारी हुए एक माह से भी अधिक का समय बीत गया लेकिन आज भी इस गंभीर मामले में किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकी। पुस्तक वितरण में उजागर गड़बड़ी एवं लगातार हो रही शिकायतों ने एक बार फिर से जिला शिक्षा केंद्र की कार्यशैली को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। फिर हुई शिकायत पुस्तक वितरण में हो रही गड़बड़ी को लेकर एक बार फिर से जिला पंचायत सदस्य मोहिनी देवी पांडे ने कटनी कलेक्टर एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत देते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई एवं वसूली की बात कही है। उन्होंने पत्र के जरिए कहा की पुस्तक परिवहन को लेकर जिला शिक्षा केन्द्र कटनी में कार्यरत जिला परियोजना समन्वयक एवं उनके सहयोगियों ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुये वर्ष 2024 से निरंतर चालू वर्ष तक एक ही व्यक्ति को अलग-अलग नाम से परिवहन हेतु निविदा जारी की है। ठेकेदार द्वारा पुस्तकों का परिवहन न कर दबाव बनाकर शिक्षकों से पुस्तकों का परिवहन कराया गया। शिक्षक स्वयं के व्यय से पुस्तकें विद्यालय को उपलब्ध करा रहें है। जिसके चलते शासन की लगभग 75 लाख राशि का मिलीभगत करते हुए दुरूपयोग किया किया गया है। जांच पर खड़े किए सवाल शिकायतों एवं खबरों को संज्ञान में लेकर कलेक्टर के निर्देश पर जांच के आदेश जारी हुए इस जांच पर सवाल खड़े करते हुए जिला पंचायत सदस्य श्रीमती पांडे ने कहा की जिला परियोजना समन्वयक द्वारा जिला शिक्षा केन्द्र में पदस्थ ए.पी.सी. प्रीति सिंह एवं एक अन्य को जांच हेतु नियुक्त किया गया है जिनकी कार्यशैली विश्वसनीय एवं परदर्शी नहीं है। उन्होंने उक्त जांच जिला शिक्षा केन्द्र से हटकर किसी अन्य विभाग के अधिकारी द्वारा कराकर दोषियों के खिलाफ शासकीय राशि के दुरूपयोग किये जाने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही के साथ अपराधिक मामला पंजीबद्ध कराए जाने एवं ठेकेदार को ब्लेकलिस्टेिड कर किये गये भुगतान की वसूली कराए जाने की मांग की है। इनका कहना है इस संबंध में जानकारी देते हुए डीपीसी प्रेम नारायण तिवारी ने कहा कि जांच दल गठित है। जिसका प्रतिवेदन अभी प्राप्त नहीं हुआ है। प्रस्तुत पत्र पर वरिष्ठ कार्यालय के निर्देशानुसार कार्यवाही की जाएगी। अभी संबंधित एजेंसी को किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं किया गया है।

संजीव अरोड़ा से जेल में मिलेंगे CM भगवंत मान, गिरफ्तारी के बाद बढ़ी सियासी हलचल

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत मान 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा से मिलने सोमवार को गुरुग्राम की भोंडसी जेल जाएंगे। भगवंत मान दूसरी बार मंत्री अरोड़ा से जेल में मिलने जा रहे हैं।  संजीव अरोड़ा को ईडी ने 9 मई को गिरफ्तार किया था। उसके बाद से वह जेल में हैं। निचली अदालत उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी है, जबकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका पर अभी सुनवाई चल रही है। संजीव अरोड़ा के जेल जाने के बाद भी पंजाब सरकार उनके साथ खड़ी है। अरोड़ा चार महीने से जेल में हैं, इसके बावजूद पंजाब सरकार ने उन्हें अभी तक मंत्री पद से नहीं हटाया है। आम आदमी पार्टी और खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं। चंडीगढ़ स्थित सरकारी कोठी से हुई थी गिरफ्तारी प्रवर्तन निदेशालय ने फर्जी बिलिंग और लेनदेन से जुड़े मामले में छापेमारी के बाद संजीव अरोड़ा को 9 मई को चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया था। इस दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे। गिरफ्तारी और शुरुआती पूछताछ में कोर्ट के आदेशानुसार संजीव अरोड़ा को हरियाणा की भोंडसी जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वह वहीं बंद हैं और उनकी कानूनी टीम जमानत के लिए प्रयासरत है। भाजपा पर राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार ने इस पूरी कार्रवाई को भाजपा की साजिश करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर गैर-भाजपा शासित राज्यों के नेताओं और मंत्रियों को निशाना बना रही है। मंत्रियों के विभागों में हुआ फेरबदल संजीव अरोड़ा के जेल जाने के बाद उनके अधीन आने वाले सभी प्रशासनिक विभाग पंजाब सरकार ने अन्य कैबिनेट मंत्रियों में बांट दिए, ताकि राज्य के विकास कार्य और विभागीय कामकाज प्रभावित न हों। कानूनी और राजनीतिक विवादों के बावजूद पंजाब सरकार ने संजीव अरोड़ा का इस्तीफा नहीं लिया है। वह अभी भी भगवंत मान कैबिनेट में मंत्री हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान व आप का समर्थन मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले भी संजीव अरोड़ा से जेल में जाकर मुलाकात कर चुके हैं। आज की मुलाकात भी इसी सिलसिले की एक कड़ी है। इसके जरिए मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी यह संदेश देना चाहते हैं कि संकट की इस घड़ी में वे अपने नेता के साथ खड़े हैं। संजीव अरोड़ा पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला क्या है? ED का आरोप है कि 2023-24 में संजीव अरोड़ा की कंपनी ने करीब 157.12 करोड़ रुपए के मोबाइल फोन की बिक्री दिखाई। इनमें 102.50 करोड़ रुपए के मोबाइल फोन UAE की दो कंपनियों को निर्यात किए जाने का दावा किया गया। इन लेन-देन में वास्तविक माल की आपूर्ति के बजाय फर्जी बिल, शेल/डमी कंपनियों और कागजी निर्यात का इस्तेमाल किया गया। ED का दावा है कि संजीव अरोड़ा ने फर्जी खरीद के बिल तैयार किए और कागजों में मोबाइल फोन का निर्यात दिखाकर सरकार से GST समेत अन्य फायदे लिए। जांच एजेंसी के अनुसार, करीब 102.50 करोड़ रुपए की रकम अवैध तरीके से कलेक्ट की गई। ED की चार्जशीट में अरोड़ा को इस मामले का ‘किंगपिन’ बताया गया है।

वार्ड क्रमांक 15 में सड़क नहीं, कीचड़ से गुजरने को मजबूर वार्डवासी

वार्ड क्रमांक 15 में सड़क नहीं, कीचड़ से गुजरने को मजबूर वार्डवासी कई बार पंचायत में शिकायत और सीएम हेल्पलाइन के बावजूद नहीं हुआ समाधान बिलासपुर  उमरिया जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत बिलासपुर के वार्ड क्रमांक 15 में सड़क नहीं होने के कारण वार्डवासियों को बरसात के दिनों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कच्चे रास्ते पर बारिश का पानी और कीचड़ जमा होने से लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत हो रही है। वार्डवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार ग्राम पंचायत में शिकायत की गई, लेकिन हर बार जल्द सड़क बनवाने का आश्वासन दिया जाता है। समस्या के समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की गई, इसके बावजूद अब तक सड़क निर्माण नहीं हो सका है। वार्डवासियों ने बताया कि बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और ग्रामीणों को कीचड़ भरे रास्ते से होकर आवागमन करना पड़ता है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत एवं संबंधित अधिकारियों से वार्ड क्रमांक 15 में जल्द सड़क निर्माण करवाने की मांग की है।  

रायपुर में ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शामिल हुए राज्यपाल रमेन डेका, बोले- परिश्रम ही सफलता की कुंजी

रायपुर : राज्यपाल रमेन डेका ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में हुए शामिल, कहा-समय का सदुपयोग और परिश्रम ही सफलता की कुंजी शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षक हुए सम्मानित रायपुर राज्यपाल रमेन डेका शिक्षक दिवस के अवसर पर एसईसीएल-डीएवी पब्लिक स्कूल, वसंत विहार, बिलासपुर में आयोजित ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शामिल हुए। इस अवसर पर शिक्षकों के उत्कृष्ट योगदान का सम्मान किया गया तथा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इंटरनेट और तकनीक का सदुपयोग करते हुए युवा सही दिशा में आगे बढ़े      कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि समय का सही उपयोग जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज का दौर इंटरनेट और तकनीक का दौर है तथा बच्चे तेजी से एक ऐसी दुनिया में बड़े हो रहे हैं, जहां ज्ञान और सूचनाएं आसानी से उपलब्ध हैं। ऐसे में बच्चों और युवाओं को समय का सदुपयोग करते हुए सही दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार एवं मूल्यों का समावेश भी आवश्यक       राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश के शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि पुराने समय में गुरुकुल परंपरा के माध्यम से गुरु विद्यार्थियों को शिक्षा और संस्कार प्रदान करते थे। समय के साथ शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हुए हैं और आज आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार एवं मूल्यों का समावेश भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि परिश्रम करने वालों को निश्चित रूप से सफलता मिलती है। जीवन में निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए और चुनौतियों से घबराना नहीं चाहिए। देशभक्ति और संस्कारों के महत्व पर जोर         राज्यपाल ने वरिष्ठ नागरिकों से भी जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीवन में जो कुछ मिला है, उसके प्रति संतोष और कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए तथा वर्तमान में रहकर जीवन का आनंद लेना चाहिए। उन्होंने देशभक्ति और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। बच्चों में देशभक्ति की भावना विकसित होने से देश को जागरूक और राष्ट्रभक्त नागरिक मिलेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के निर्माण में परिवार और शिक्षकों दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य नहीं करते, बल्कि समाज को शिक्षित और जागरूक बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ’शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित’         इस अवसर पर आयोजित ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ में शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित शिक्षकों के समर्पण और उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में एसईसीएल और डीएवी के बीच शिक्षा के क्षेत्र में स्थापित सहयोग और साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया। ‘द्रोणाचार्य संगम-2026’ शिक्षकों के सम्मान, उनके अनुभवों के आदान-प्रदान और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।       कार्यक्रम में संभागायुक्त सुनील जैन, कलेक्टर संजय अग्रवाल,  एसईसीएल के डायरेक्टर बिरंची दास, हिमांशु जैन, एसईसीएल के अन्य अधिकारी-कर्मचारी, डीएवी प्रबंधन, विभिन्न प्रोजेक्ट स्कूलों के प्रतिनिधि, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।