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वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की तत्परता से दो लाख रुपये की सहायता, आधुनिक कृत्रिम पैर लगने से लौटी आत्मनिर्भरता

रायपुर  संवेदनशील प्रशासन और समय पर मिली सहायता ने रायगढ़ जिले की 27 वर्षीय बबीता यादव के जीवन में नई उम्मीद का संचार किया है। एक गंभीर दुर्घटना के बाद अपना बायां पैर गंवाने वाली बबीता अब आधुनिक कृत्रिम पैर की सहायता से आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रही हैं। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की त्वरित पहल से उन्हें दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उनका कृत्रिम पैर लगवाया जा सका। रायगढ़ जिले के ग्राम मुरालपाली निवासी बबीता यादव के साथ वर्ष 2025 में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद उनके बाएं पैर में गंभीर संक्रमण हो गया। संक्रमण हड्डियों तक फैल जाने के कारण चिकित्सकों को 27 जनवरी 2025 को उनका बायां पैर काटना पड़ा। इस घटना के बाद बबीता के सामने शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गईं और उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया। विपरीत परिस्थितियों में भी बबीता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी तथा कलेक्टर से कृत्रिम पैर लगवाने के लिए सहायता की मांग की। उनकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल दो लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की और संबंधित अधिकारियों को शीघ्र आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला प्रशासन के समन्वय से रायपुर स्थित इंडो लाइट्स संस्थान में बबीता को आधुनिक कृत्रिम पैर लगाया गया। कृत्रिम पैर लगने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब वे सहज रूप से चल-फिर रही हैं, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर रही हैं तथा आत्मनिर्भर होकर पहले की तरह सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं। बबीता यादव ने कहा कि कृत्रिम पैर मिलने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उनका जीवन फिर से पटरी पर लौट आया हो। उन्होंने इस मानवीय सहयोग और संवेदनशील पहल के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, राज्य शासन तथा जिला प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपर कलेक्टर से भेंट कर भी इस सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि समय पर मिली सहायता ने उन्हें नया जीवन और नई उम्मीद प्रदान की है।

बनारस रोप-वे प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, 90 वर्ष की लीज पर भूमि आवंटित; VDA को मिली बड़ी सौगात

 वाराणसी वाराणसी रोप-वे पायलट परियोजना के निर्माण की राह अब और आसान हो गई है। टावर संख्या-29 एवं स्टेशन संख्या-5 के निर्माण के लिए कोतवालपुरा स्थित एक बिस्वा 19 धूर नजूल भूमि को वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) को 90 वर्ष की लीज पर प्रतीकात्मक एक रुपये प्रीमियम के साथ आवंटित करने का प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा गया है। इस प्रस्ताव को नगर विकास, वित्त और राजस्व विभाग की सहमति प्राप्त है। भूमि का उपयोग केवल रोप-वे परियोजना के लिए किया जाएगा और यदि तीन वर्ष तक इसका उपयोग नहीं होता या उद्देश्य बदलता है, तो भूमि वापस ले ली जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार, कोतवालपुरा स्थित नजूल आराजी संख्या-88 के कुल चार बिस्वा 19 धूर क्षेत्रफल में से एक बिस्वा 19 धूर भूमि रोप-वे परियोजना के टावर संख्या-29 और स्टेशन संख्या-5 के निर्माण के लिए वाराणसी विकास प्राधिकरण को 90 वर्ष की लीज पर प्रतीकात्मक एक रुपये प्रीमियम के साथ दी जाएगी। लीज का प्रत्येक 30 वर्ष पर नवीनीकरण होगा। सरकार ने वीडीए को सार्वजनिक इकाई मानते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव में यह शर्त रखी गई है कि भूमि का उपयोग केवल रोप-वे परियोजना के लिए होगा। यदि तीन वर्ष तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होता या भूमि का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जाता है, तो उसे वापस लिया जा सकेगा। यह भी स्पष्ट किया गया है कि भूमि को किसी निजी संस्था या व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा और भविष्य में इस आवंटन को अन्य मामलों के लिए उदाहरण भी नहीं माना जाएगा। इस प्रकार, वाराणसी में रोप-वे परियोजना के लिए आवश्यक भूमि आवंटन की प्रक्रिया में तेजी आई है, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के कार्यान्वयन में मदद मिलेगी। इस परियोजना के माध्यम से वाराणसी में परिवहन की सुविधा में सुधार होगा और यह शहर के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। वाराणसी विकास प्राधिकरण द्वारा इस भूमि आवंटन के साथ ही रोप-वे परियोजना की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है।

MOU के बाद ग्वालियर की विरासत को विश्व पटल पर लाने की तैयारी, 10 जुलाई को अहम बैठक

ग्वालियर मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा ग्वालियर किले और राज्य पुरातत्व संरक्षित स्मारकों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। यह बैठक आगामी 10 जुलाई को दोपहर 12 बजे आयोजित की जाएगी। टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉक्टा अभय अरविंद बेड़ेकर द्वारा जारी पत्र के अनुसार, यह बैठक इंडिगो और आगाखान हेरिटेज ट्रस्ट के साथ चल रहे प्रोजेक्ट के सिलसिले में होगी। इस बैठक का आयोजन वर्चुअली (आनलाइन) किया जाएगा, जिसमें जिला कलेक्टर सहित प्रोजेक्ट कमेटी के सदस्य भाग लेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा ग्वालियर किले के संरक्षण, आकर्षक लाइटिंग और अन्य प्रस्तावित कार्यों की योजना तैयार करना है। बैठक के दौरान पिछली प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और इम्प्लीमेंटेशन कमेटी की बैठक में लिए गए निर्णयों और एक्शन टेकन रिपोर्ट की भी समीक्षा की जाएगी। यह पूरी योजना इंडिगो और आगाखान हेरिटेज ट्रस्ट के साथ 21 फरवरी 2025 को हुए एमओयू के तहत बनाई गई है, जिससे ग्वालियर के ऐतिहासिक स्थलों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिल सके। ग्वालियर किले पर एमओयू के बाद की प्रक्रिया शुरू करने से पहले मप्र टूरिज्म, इंडिगो एयरलाइंस और एकेसीएसएफ की टीम निरीक्षण कर चुकी है। इस एमओयू में ग्वालियर किले के कर्ण महल, गूजरी महल, जहांगीर महल, शाहजहां महल, हुमायू महल और जौहर कुंड सहित कई ऐतिहासिक संरचनाओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण शामिल है। राज्य पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य पूर्व में भी किया गया है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर यहां संरक्षण कार्य किए थे। वहीं अब यहां लगभग 75 लाख रुपए से अधिक खर्च कर रिनोवेशन कार्य किए जा रहे हैं।  

बेतवा नदी को बचाने का बड़ा अभियान, 2053 तक सफाई के लिए 30 साल का ब्लूप्रिंट तैयार

भोपाल  बेतवा नदी पुनर्जीवन परियोजना को दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ तैयार किया जा रहा है। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केवल वर्तमान आवश्यकताओं पर आधारित नहीं होगी, बल्कि वर्ष 2053 तक की अनुमानित आबादी, सीवेज उत्पादन और शहरी विस्तार को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य भविष्य में बढ़ती आबादी और नई कॉलोनियों के बावजूद नदी को प्रदूषण से मुक्त रखना और बार-बार नई परियोजनाओं की आवश्यकता को कम करना है। डीपीआर में इंटरसेप्शन नेटवर्क, सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता भविष्य की जरूरतों के अनुसार तय की जाएगी। इसके साथ ही अतिरिक्त क्षमता और विस्तार की व्यवस्था भी डिजाइन का हिस्सा होगी, ताकि आने वाले वर्षों में सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। नदी में मिलने से पहले रोका जाएगा हर गंदा नाला परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इंटरसेप्शन और डायवर्जन सिस्टम होगा। इसके तहत बेतवा नदी में मिलने वाले सभी नालों की पहचान और मैपिंग की जाएगी। प्रत्येक नाले के प्रवाह का आकलन करने के बाद नदी में मिलने से पहले इंटरसेप्शन स्ट्रक्चर बनाकर गंदे पानी को रोक लिया जाएगा। इसके बाद सीवेज को सीवर नेटवर्क या राइजिंग मेन के माध्यम से एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। जहां गुरुत्वाकर्षण आधारित प्रवाह संभव नहीं होगा, वहां पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। वहीं, बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए अलग बायपास सिस्टम बनाया जाएगा, जिससे एसटीपी पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा। मंडीदीप और विदिशा बने प्रमुख प्रदूषण स्रोत प्रस्तुति में बेतवा नदी की मौजूदा स्थिति का भी विस्तृत विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार मंडीदीप क्षेत्र से घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और खुले नालों का गंदा पानी सीधे नदी में पहुंच रहा है। मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में अभी तक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) नहीं होने से प्रदूषण की समस्या और गंभीर बनी हुई है। इसके अलावा विदिशा के तीन प्रमुख नालों का बिना उपचार किया गया सीवेज भी सीधे बेतवा नदी में छोड़ा जा रहा है। कोलार जलशोधन संयंत्र का बैकवॉश पानी भी नदी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। कई स्थानों पर जलकुंभी (वाटर हायसिंथ) और अत्यधिक जैविक प्रदूषण (यूट्रोफिकेशन) की स्थिति भी सामने आई है। 15 वर्ष तक संचालन और ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था परियोजना में केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि 15 वर्षों तक संचालन एवं रखरखाव (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी भी शामिल की जाएगी। एससीएडीए (SCADA) और ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) के माध्यम से संयंत्रों के प्रदर्शन और जल गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जाएगी। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकेगी। सर्वे से लागत तक हर चरण होगा तय डीपीआर चरणबद्ध तरीके से तैयार होगी। सबसे पहले नदी, नालों, जलग्रहण क्षेत्र, मिट्टी और भू-आकृति का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। इसके बाद सीवेज की मात्रा का आकलन, उपचार तकनीक का चयन, इंजीनियरिंग डिजाइन, ड्रॉइंग, परियोजना लागत, वित्तीय व्यवहार्यता और पर्यावरणीय स्वीकृतियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। परियोजना लागत का निर्धारण नवीनतम शेड्यूल ऑफ रेट (एसओआर) के आधार पर किया जाएगा। प्रस्तुति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृति के बाद लागत बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त वित्तीय भार परियोजना लागू करने वाली एजेंसी को उठाना पड़ सकता है, इसलिए प्रारंभिक लागत का सटीक आकलन किया जाएगा। दीर्घकालिक नदी संरक्षण पर रहेगा फोकस बेतवा नदी पुनर्जीवन परियोजना को केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे दीर्घकालिक नदी संरक्षण योजना के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना के चार प्रमुख आधार—पर्यावरण संरक्षण, वित्तीय स्थिरता, संस्थागत जवाबदेही और सामाजिक भागीदारी—रहेंगे। परियोजना का उद्देश्य नदी की जल गुणवत्ता में सुधार, प्रदूषण भार को कम करना, स्थानीय निकायों के लिए संचालन को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना तथा आम लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पूरी योजना को वर्ष 2053 तक प्रभावी बनाए रखने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। .

उच्च शिक्षा विभाग ने 29 अंशकालीन जिला संगठकों की सूची की जारी

​रायपुर छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की गतिविधियों को और अधिक सुचारू, प्रभावी और गतिशील बनाने के लिए राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 29 अंशकालीन जिला संगठकों  की नियुक्ति की गई है, जिसमें संबंधित प्राध्यापकों व व्याख्याताओं को उनके वर्तमान शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ आगामी 02 वर्षों के लिए जिला संगठक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।   कलेक्टरों के समन्वय से गठित होगी 'जिला स्तरीय सलाहकार समिति' उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची में राज्य के सभी प्रमुख जिलों और अंचलों को शामिल किया गया है। सभी नवनियुक्त जिला संगठकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों के कलेक्टर से तत्काल संपर्क स्थापित कर 'जिला स्तरीय सलाहकार समिति' का गठन सुनिश्चित करें और नियमानुसार बैठकों का आयोजन करें। सभी संगठकों को हर महीने अपना दौरा कार्यक्रम, कार्यों का संकलित प्रतिवेदन और निरीक्षण रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में संबंधित विश्वविद्यालयीन रासेयो प्रकोष्ठ और राज्य एनएसएस प्रकोष्ठ को अनिवार्य रूप से भेजनी होगी।   जिला संगठक अपने क्षेत्र में आने वाले सभी प्रकार के रासेयो इकाईयों, जिसमें कृषि व तकनीकी शिक्षा से संबंधित इकाईयां भी शामिल हैं,के सुचारू संचालन में सहयोग करेंगे और इसकी रिपोर्ट संबंधित विश्वविद्यालयीन प्रकोष्ठ को देंगे।

​जल जीवन मिशन के कार्यों को तेजी से पूर्ण कराएं, फंड की कोई कमी नहीं: मुख्यमंत्री

​वाराणसी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो दिवसीय दौरे पर मंगलवार को वाराणसी पहुंचे। उन्होंने सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की प्रगति और कानून-व्यवस्था की समीक्षा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। ​वाराणसी में गतिमान निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि एकीकृत मंडलीय कार्यालय का निर्माण कार्य 18 माह में पूरा कराने का हर संभव प्रयास किया जाए। उन्होंने गंगा नदी में नावों के सुचारु संचालन के संबंध में नाविकों के साथ बैठक करने के निर्देश दिए। साथ ही स्थानीय स्तर पर नगर निगम के माध्यम से छोटी नावों का पंजीकरण कराकर उन्हें लाइफ जैकेट आदि आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने को कहा। दालमंडी सड़क चौड़ीकरण के संबंध में उन्होंने अवशेष भवनों का नियमानुसार मुआवजा वितरित कर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही शीघ्रता से कराने के निर्देश दिए। ​जल जीवन मिशन के अंतर्गत कार्यों को तेजी से पूर्ण कराने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना में फंड की कोई कमी नहीं है, इसलिए किसी भी स्तर पर हीलाहवाली नहीं होनी चाहिए। पेयजल पाइपलाइन बिछाने के दौरान खोदी गई सड़कों का साथ-ही-साथ मरम्मत कार्य भी अवश्य कराया जाए। इसमें कहीं से भी शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। ​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में बन रहे रोप-वे की प्रगति की जानकारी लेते हुए उसे तय समय-सीमा में पूर्ण कराने का निर्देश दिया। इस दौरान मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने मुख्यमंत्री को बताया कि अगस्त माह तक रोप-वे का कार्य पूर्ण करा लिया जाएगा। ​शहर में अंडरग्राउंड केबलिंग के दौरान जगह-जगह सड़कें खोदकर छोड़ दिए जाने और उनकी ठीक से मरम्मत न होने के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इस पर मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि संबंधित कार्य से पहले अंतर्विभागीय बैठकें अवश्य कर ली जाएं, ताकि संबंधित विभाग सड़कों की मरम्मत का कार्य समय से करा सके। उन्होंने ऐसी सड़कों की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर कराने के निर्देश दिए। ​बैठक के दौरान वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष द्वारा विकसित की जा रही टाउनशिप 'आनंद काशी', 'रुद्र काशी' और 'काशी स्पोर्ट्स सिटी' की प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री ने समस्त आवश्यक कार्यवाहियों को समय से पूरा करने हेतु निर्देशित किया। उन्होंने शहर में पेयजल एवं सीवर पाइपलाइन बिछाने के दौरान रोड कटिंग के रेस्टोरेशन कार्यों को साथ-ही-साथ कराने पर विशेष जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने निर्माणाधीन यूनिटी मॉल के कार्य में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। ​मुख्यमंत्री ने पौधरोपण महाअभियान की पूरी तैयारी करने के निर्देश दिए। साथ ही बॉर्डर एरिया में पुलिस द्वारा विशेष सतर्कता बरतने, पेट्रोलिंग बढ़ाने और प्रत्येक 6 माह में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी बदलने के निर्देश दिए। उन्होंने आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन आदि माध्यमों से प्राप्त होने वाले शिकायती प्रार्थना पत्रों का मेरिट के आधार पर त्वरित निस्तारण करने को कहा। ​जिले की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने तय समय में प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। श्रावण मास की तैयारियों की समीक्षा के दौरान उन्होंने श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में काशीवासियों को दर्शन के लिए अलग मार्ग की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इस पर पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने काशीवासियों की इस बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करने के लिए जनता की ओर से मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आगामी श्रावण मास के दौरान मैदागिन से गोदौलिया तक की जाने वाली बैरिकेडिंग से स्थानीय व्यापारियों को समस्या न होने देने तथा उक्त मार्ग पर पर्याप्त एम्बुलेंस की व्यवस्था रखने का आग्रह किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। ​बैठक में श्रावण मास के दौरान प्रशासन तथा पुलिस विभाग की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मंडलायुक्त एस. राजलिंगम द्वारा काशी विश्वनाथ धाम तथा वाराणसी परिक्षेत्र में स्थित विभिन्न शिवालयों में की जा रही तैयारियों का विस्तृत विवरण मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया। मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि श्रावण मास के दौरान प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और विद्युत विभाग आपस में बेहतर समन्वय स्थापित करके कार्य करें। परिवहन व रेलवे के साथ भी बेहतर तालमेल हो ताकि भीड़ नियंत्रण व श्रद्धालुओं को बेहतर सुरक्षा मिल सके। श्रद्धालुओं को सभी बुनियादी सुविधाएं जैसे साफ-सफाई, पेयजल, खोया-पाया केंद्र, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और निःशुल्क लॉकर आदि सुलभ कराए जाएं। ​मुख्यमंत्री ने गंगा नदी में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सावधानी बरतने, लाइफ जैकेट का अनिवार्य प्रयोग करने, सीसीटीवी से लगातार मॉनिटरिंग करने समेत जल पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने मैदागिन से गोदौलिया के बीच बैरिकेड्स को दुरुस्त करने को कहा ताकि किसी भी श्रद्धालु को चोट न लगे, साथ ही जर्जर भवनों के पास बैरिकेड्स लगाने में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में पूरे महीने भीड़ रहेगी, जिसके दृष्टिगत बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। मंदिर व्यवस्था में लगे कर्मियों की ड्यूटी रोटेशन के आधार पर बदली जाए ताकि वीआईपी दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं के साथ कोई धोखाधड़ी न हो। होटल, रेस्तरां तथा बस स्टैंडों पर मनमाना शुल्क न वसूला जाए, इस पर भी लगातार नजर रखने की जरूरत है। ​जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान बताया कि वर्ष 2014 से अब तक कुल 36,210 करोड़ रुपये की लागत के 536 प्रोजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं। वर्तमान में 25,007 करोड़ रुपये की 191 परियोजनाएं गतिमान हैं। उन्होंने जिले के सभी लाइव प्रोजेक्ट्स को एक-एक करके मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया। ​समीक्षा बैठक में पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने वाराणसी कमिश्नरेट की कानून-व्यवस्था समेत आगामी श्रावण मास के दौरान पुलिस विभाग की तैयारियों को पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किया। एडीजी पीयूष मोर्डिया ने जोन के सभी नौ जिलों में पुलिस कार्रवाई समेत गो-तस्करी, अवैध शराब तस्करी और 'ऑपरेशन वज्रपात' के दौरान की गई कार्रवाइयों का विवरण दिया। इस पर मुख्यमंत्री ने और बेहतर कार्य करने, फुट पेट्रोलिंग बढ़ाने, जनता से उचित व्यवहार करने, सदैव सजग रहने तथा बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ​बैठक के दौरान श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, खादी ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान, स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पूनम मौर्य, महापौर अशोक तिवारी, विधान परिषद सदस्य राय धर्मेंद्र सिंह, विधायक डॉ. … Read more

घर बैठे करें आवेदन, बुकिंग और मेंटेनेंस शुल्क का ऑनलाइन भुगतान

रायपुर रायपुर विकास प्राधिकरण (आर.डी.ए.) ने नागरिकों की सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए अपनी संपत्तियों की बुकिंग प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब इच्छुक नागरिक बिना कार्यालय आए घर बैठे ही प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपत्तियों की जानकारी प्राप्त कर ऑनलाइन आवेदन एवं बुकिंग कर सकेंगे। प्राधिकरण ने प्रथम चरण में लगभग 121 आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों को ऑनलाइन बुकिंग के लिए उपलब्ध कराया है। इनमें कमल विहार तथा रावभाटा सहित प्राधिकरण की प्रमुख योजनाओं की संपत्तियां शामिल हैं। कमल विहार में आवासीय फ्लैट, आवासीय एवं व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध हैं, जबकि रावभाटा में व्यावसायिक संपत्तियां बुकिंग के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। प्राधिकरण द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के हितग्राहियों के लिए भी आवासीय संपत्तियों का निर्माण किया गया है, ताकि प्रत्येक वर्ग के नागरिकों को उनकी आवश्यकता और सामर्थ्य के अनुरूप आवास उपलब्ध कराया जा सके। ऑनलाइन बुकिंग सुविधा के साथ अब हितग्राही घर बैठे ही वेबसाइट के माध्यम से मेंटेनेंस शुल्क का ऑनलाइन भुगतान भी कर सकेंगे। इससे नागरिकों को कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी और सेवाएं अधिक सुविधाजनक, समयबद्ध तथा पारदर्शी बनेंगी। रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदे साहू ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य नागरिकों को आधुनिक, पारदर्शी एवं जनहितैषी सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था से समय की बचत होगी, प्रक्रिया सरल बनेगी तथा संपत्तियों के आवंटन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित होगी। डिजिटल भुगतान की सुविधा से हितग्राहियों को त्वरित एवं बेहतर सेवाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने नागरिकों से इस ऑनलाइन व्यवस्था का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अवनीश कुमार शरण ने बताया कि लंबे समय से संपत्तियों की बुकिंग प्रक्रिया बंद थी। अब उपलब्ध सभी संपत्तियों को एक साथ ऑनलाइन पोर्टल पर लाइव कर दिया गया है, जिससे नागरिक पारदर्शी, त्वरित और सुविधाजनक तरीके से संपत्तियों की बुकिंग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का लक्ष्य अधिकाधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण कर नागरिकों को सहज, सरल और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना है। रायपुर विकास प्राधिकरण की यह पहल डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ-साथ नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऑनलाइन आवेदन, बुकिंग और डिजिटल भुगतान की सुविधा से संपत्तियों के आवेदन, भुगतान एवं आवंटन की पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और पारदर्शी हो जाएगी।

यूपीईएसएससी ने घोषित किया प्रवक्ता भर्ती-2022 का अंतिम परिणाम, 18 विषयों के 624 पदों पर चयन

लखनऊ  योगी सरकार की मंशा के अनुरूप प्रदेश में खाली विभिन्न पदों पर भर्ती अभियान जारी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज ने सहायता प्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता (बालक/बालिका) भर्ती-2022 का अंतिम चयन परिणाम घोषित कर दिया है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि18 विषयों के कुल 624 प्रवक्ता पदों के लिए लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार के उपरांत चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी कर दी गई है। अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के युवाओं को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से सरकारी सेवा में अवसर उपलब्ध कराना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में प्रवक्ता भर्ती-2022 की पूरी प्रक्रिया निष्पक्षता और शुचिता के साथ संपन्न कराई गई। उन्होंने सभी चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि प्रवक्ता भर्ती की लिखित परीक्षा 09 एवं 10 मई 2026 को आयोजित की गई थी। लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों का साक्षात्कार 15 जून से 27 जून 2026 तक संपन्न कराया गया। लिखित परीक्षा, अभिलेख सत्यापन एवं साक्षात्कार की समस्त प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग ने अंतिम चयन परिणाम घोषित कर दिया है। उन्होंने बताया कि भौतिकी, जीवविज्ञान, गृह विज्ञान, इतिहास, शिक्षा, अंग्रेजी, कृषि, वाणिज्य, समाजशास्त्र, नागरिक शास्त्र, गणित, अर्थशास्त्र, संस्कृत, मनोविज्ञान, रसायन विज्ञान, भूगोल, हिंदी तथा कला सहित कुल 18 विषयों के चयनित अभ्यर्थियों का विषयवार एवं श्रेणीवार विवरण आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है। अभ्यर्थी कटऑफ अंक एवं चयन संबंधी विस्तृत जानकारी भी वेबसाइट के माध्यम से देख सकते हैं। अभ्यर्थी अपने अनुक्रमांक एवं जन्मतिथि के माध्यम से आयोग की वेबसाइट www.upessc.up.gov.in पर उपलब्ध लिंक से एक सप्ताह तक अपने प्राप्तांक देख सकेंगे। इसके अतिरिक्त प्राप्तांकों से संबंधित कोई भी सूचना सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड नियमावली, 1998 के नियम 12(9) के अनुसार अभ्यर्थियों द्वारा साक्षात्कार पत्र डाउनलोड करते समय ऑनलाइन भरी गई संस्थाओं की अधिमानता तथा घोषित चयन पैनल के आधार पर नियम 12(10) के प्रावधानों के अनुरूप संस्था आवंटन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाएगी।

08 जुलाई को न्यू कन्वेंशन हॉल, रायपुर में आयोजित होगी बैठक

रायपुर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा मानसून 2026 के दौरान राज्य की औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा, समन्वय तथा आगामी कार्ययोजना तैयार करने के उद्देश्य से 08 जुलाई 2026 (बुधवार) को प्रातः 11:30 बजे न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, रायपुर स्थित न्यू कन्वेंशन हॉल में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल अंकित आनंद करेंगे। बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के अधिकृत प्रतिनिधि, मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव राजू अगसिमनी ने बताया कि बैठक में उद्योगों द्वारा प्रस्तावित एवं संचालित वृक्षारोपण कार्यों की प्रगति, पौधों के संरक्षण एवं रखरखाव की व्यवस्था, निगरानी तंत्र तथा उद्योगवार कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। साथ ही वृक्षारोपण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा पर्यावरण संरक्षण के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित औद्योगिक इकाइयों को अपने वृक्षारोपण लक्ष्य, अब तक की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना के साथ बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राज्य में हरित आवरण बढ़ाने के अभियान को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सके।

छत्तीसगढ़ स्टेट वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन के कर्मचारियों को उपहार निगम प्रबंधन एवं ऐक्सिस बैंक के मध्य करार

रायपुर स्टेट वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन के नवा रायपुर स्थित मुख्यालय भवन में निगम के अध्यक्ष  चंदूलाल साहू, की उपस्थिति में स्टेट वेयरहाउसिंग एवं ऐक्सिस बैंक के मध्य सैलरी एम ओ यू (समझौता ज्ञापन) निष्पादित किया गया। इस अवसर पर निगम के प्रबंध संचालक  आषीष कुमार टिकरिहा साथ ही निगम एवं ऐक्सिस बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।       एम ओ यू (समझौता ज्ञापन) के तहत ऐक्सिस बैंक में निगम कर्मियों के सैलरी एकाउंट खोलने पर निगम के नियमित कर्मचारियों एवं दैनिक वेतन श्रमिकों को 1.10 करोड़ रूपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा तथा 10 लाख का प्राकृतिक मृत्यु बीमा निःशुल्क कवर किया जाएगा। निगम कर्मचारियों की मृत्यु की स्थिति में परिवार को 8 लाख रूपये तक की शिक्षा सहायता राशि प्रदान की जायेगी। साथ ही मात्र रूपये 2499/- के वार्षिक प्रीमियम पर रूपये 30 लाख तक का हेल्थ टॉप-अप कवर एवं 30 लाख का पर्सनल ऐक्सिडेंट कवर की सुविधा का लाभ भी मिलेगा। निगम के अध्यक्ष  चंदूलाल साहू ने बताया की इस एम ओ यू से कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों को बेहतर बैंकिंग, बीमा सुरक्षा तथा वित्तीय सुविधाएं प्राप्त होगी।  इस एम ओ यू से निगम कर्मियों में हर्ष की लहर व्याप्त है तथा कर्मचारियों ने अध्यक्ष  चंदूलाल साहू का आभार व्यक्त किया है। आज ही निगम मुख्यालय में अध्यक्ष  चंदूलाल साहू द्वारा बैकुण्ठपुर (जिला-कोरिया) निवासी मती पूनम कूजुर को सी0सी0एच0 (चतुर्थ श्रेणी) पद पर अनुकम्पा निुयक्ति आदेश प्रदान किया गया।