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जांच समिति अब तक गायब, बरगी क्रूज हादसे में बयानबाजी तेज; कांग्रेस ने सरकार को घेरा

जबलपुर  बरगी क्रूज हादसे के पर्यटकों के बयान दर्ज करने के बाद शुक्रवार को प्रशासनिक दल बरगी मेकल रिसार्ट पहुंचा। यहां जबलपुर एसडीएम अभिषेक सिंह, तहसीलदार पूर्णिमा समेत प्रशासनिक कर्मचारियों ने एक-एक कर कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। बयानों की वीडियो रिकार्डिंग की गई इस दौरान क्रूज हादसे में पर्यटकों को बचाने वाले बचाव दल के सदस्यों से भी पूछताछ कर उनके बयानों की वीडियो रिकार्डिंग की गई। उन मजदूरों को भी बयान दर्ज कराने बुलाया गया था, जिन्होंने पर्यटकों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। सुबह से देर शाम तक लगभग 30 से ज्यादा प्रत्यक्षदर्शियों, रिसार्ट कर्मचारियों और मजदूरों से पूछताछ की गई। हालांकि यहां भी घटना की जांच के लिए बनी कमेटी के सदस्य मौजूद नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति में ही बयान दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे जांच समिति और इसकी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।  

अब आधार अपडेट करवाने के लिए नहीं लगेंगे लंबे इंतजार, 3 जिलों में नए सेंटर शुरू

 जालंधर  आधार कार्ड धारकों के लिए राहत भी खबर सामने आई है। होशियारपुर, गुरदासपुर व जालंधर में नए आधार सेवा केंद्रों (एएसके) शुरू करके, यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI), क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ ने पंजाब में सेवा वितरण नेटवर्क को मजबूत किया है। जालंधर में ये नवीनतम आधार सेवा केंद्र रविवार सहित सप्ताह के सातों दिन खुले रहेगें।  केंद्रों का उद्देश्य नागरिक सुविधा बढ़ाने व आधार संबंधी सेवाओं के सहज वितरण सुनिश्चित करने हेतु हैं। निवासी आधार नामांकन, नाम, पता व जन्म तिथि जैसे जनसांख्यिकीय विवरणों के अपडेट के साथ-साथ बायोमेट्रिक अपडेट अधिक बेहतर व आसान तरीके से प्राप्त कर सकते हैं। इन केंद्रों के जुड़ने से UIDAI निवासियों, विशेषकर नजदीकी कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए पहुंच सुधारने व यात्रा समय घटाने की प्रतिबद्धता जारी रखे हुए है। केंद्र आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षित स्टाफ व सुव्यवस्थित प्रक्रियाओं से सुसज्जित हैं ताकि न्यूनतम प्रतीक्षा समय व सुगम सेवा अनुभव सुनिश्चित हो। मानकीकृत व नागरिक हितैषी वातावरण बनाकर, मौजूदा केंद्रों पर भीड़ घटाकर व अनुरोधों की तेज प्रक्रिया सुनिश्चित करके, इन ASKs की स्थापना सेवा वितरण की समग्र गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाने की उम्मीद है। यह आधार सेवाओं में पारदर्शिता व विश्वसनीयता भी बढ़ाएगा। इसके अलावा, ये केंद्र वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं व दिव्यांग व्यक्तियों सहित समाज के सभी वर्गों के लिए आधार सेवाओं को आसानी से सुलभ बनाकर व्यापक समावेशन को बढ़ावा देंगे। बेहतर पहुंच सुगमता अधिक निवासियों को आधार विवरण अपडेट रखने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे विभिन्न सरकारी व वित्तीय सेवाओं तक बेहतर पहुंच संभव होगी। UIDAI पंजाब के निवासियों को अपने नामांकन और अपडेट संबंधी जरूरतों के लिए इन आधार सेवा केंद्रों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने साथ वैध सहायक दस्तावेज रखें और अतिरिक्त सुविधा के लिए वे ऑनलाइन अपॉइंटमेंट भी बुक कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए, निवासी UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं या अपने निकटतम आधार सेवा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। जालंधर में यह केन्द्र बस स्टैंड के निकट जवाहर नगर में अपैक्स टावर के ग्राउंड फ्लोर स्थित शाप नम्बर 2 में खोला गया है l

पुष्पा साहू बनीं माध्यमिक शिक्षा मंडल की सचिव, रोक्तिमा यादव को कोरिया कलेक्टर की कमान

रायपुर राज्य शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के कार्यभार में फेरबदल करते हुए नई नियुक्तियां जारी की हैं। इस आदेश के तहत शिक्षा और जिला स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।  वर्ष 2012 बैच की आईएएस अधिकारी  पुष्पा साहू को सचिव, माध्यमिक शिक्षा मण्डल के पद पर नियुक्त किया गया है। ज्ञातव्य है कि 6 मई 2026 को जारी आदेश के तहत  पुष्पा साहू को कलेक्टर जिला-कोरिया पदस्थ किया गया था, जिसमें जिसमें आंशिक संशोधन करते हुए सचिव, माध्यमिक शिक्षा मण्डल के पद पर पदस्थ किया गया है।            वर्ष 2016 बैच की आईएएस अधिकारी श्रीमती रोक्तिमा यादव को जिला-कोरिया का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वे आगामी आदेश तक अस्थाई रूप से इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगी।  6 मई 2026 को जारी आदेश के तहत श्रीमती रोक्तिमा यादव, द्वारा आयुक्त, उच्च शिक्षा के पद पर पदस्थ किया गया था, जिसमें आंशिक संशोधित करते हुए कलेक्टर जिला-कोरिया पदस्थ किया गया है।          वर्ष 2019 बैच की आईएएस अधिकारी श्रीमती रीता यादव को आयुक्त, उच्च शिक्षा के पद पर पदस्थ किया गया है। इसके साथ ही उन्हें प्रबंध संचालक, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। उनके पदभार संभालते ही इस पद को वरिष्ठ वेतनमान के संवर्गीय पद के समकक्ष माना जाएगा।

दिल्ली को मिलेगा नया मेडिकल कॉलेज, 250 MBBS सीटों के साथ बढ़ेगी सुविधा

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने राजधानी के हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए द्वारका में नया सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल कॉलेज बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल परिसर में अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल निर्माण परियोजना को मंजूरी दे दी गई। इस महत्वाकांक्षी योजना पर 805.99 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज के निर्माण को वर्ष 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। सीएम रेखा गुप्ता के मुताबिक मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इसके बनने से हर साल 250 एमबीबीएस सीटों पर दाखिले बढ़ेंगे। 150 छात्रों के साथ शुरू की जाएगी पढ़ाई उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में 150 छात्रों के साथ पढ़ाई शुरू की जाएगी। परियोजना के पहले चरण में अकैडमिक ब्लॉक, स्टूडेंट्स के अलग हॉस्टल और फैकल्टी के लिए रेजिडेंशल ब्लॉक बनाए जाएंगे। इसके निर्माण से स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली को मेडिकल एजुकेशन का प्रमुख केंद्र बनाना है। 1.17 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में किया जाएगा निर्माण सीएम ने बताया कि मेडिकल कॉलेज, हॉस्टल और रेजिडेंशल ब्लॉक का निर्माण करीब 1.17 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में होगा, जिसमें बेसमेंट पार्किंग और अन्य सुविधाएं भी रहेंगी। प्रोजेक्ट में ग्रीन बिल्डिंग मानकों का पालन किया जाएगा।     परिसर में सोलर पावर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, वॉटर रीसाइक्लिंग, प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। बिल्डिंग को भूकंपरोधी और दिव्यांगों के अनुकूल बनाया जाएगा।  सरकार के मुताबिक, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयसीमा पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। लोक निर्माण विभाग (PWD) निर्माण कार्य करेगा, जबकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग परियोजना की मॉनिटरिंग करेगा। दिल्ली को एक नया मेडिकल कॉलेज मिलने से बड़ा फायदा होगा। पहला, छात्रों के लिए MBBS की सीटों में इजाफा होगा। दूसरा, दिल्ली सरकार के अस्पतालो में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। द्वारका के जिस इंदिरा गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल परिसर में यह कॉलेज बनेगा, वहां भी डॉक्टर्स की कमी है। इसके चलते अस्पताल पूरी क्षमता से काम नही कर रहा है। मेडिकल कॉलेज बनने, एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई शुरू होने के साथ अस्पताल को भी पूरी क्षमता के साथ चलाने में भी मदद मिलेगी। द्वारका के साथ-साथ दिल्ली के आसपास के इलाकों, बाहरी दिल्ली के इलाकों से आने वाले लोगों के लिए मेडिकल सुविधाएं बढ़ेगी।  

जशपुर का ‘वेस्ट टू बेस्ट’ इको पार्क: कबाड़ को नवाचार और संरक्षण में बदलकर बना छत्तीसगढ़ में मॉडल

​कबाड़ में जान फूंक दी जशपुर के 'वेस्ट टू बेस्ट' इको पार्क ने, नवाचार और संरक्षण का बना छत्तीसगढ़ में मॉडल ​रायपुर      ​छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले ने स्वच्छता और नवाचार की दिशा में एक अनूठी मिसाल पेश की है। जिले के दुलदुला जनपद पंचायत के समीप विकसित किया गया "इको पार्क" आज न केवल स्थानीय पर्यटन का केंद्र बना हुआ है, बल्कि "वेस्ट टू बेस्ट" (कबाड़ से जुगाड़) की अवधारणा को धरातल पर उतारने वाला एक उत्कृष्ट मॉडल भी बन गया है। अनुपयोगी और बेकार समझी जाने वाली सामग्रियों से सजी इस सुंदर संरचना ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक नई सोच जागृत की है। ​कबाड़ से तैयार हुई कलाकृतियां     ​इस पार्क की सबसे बड़ी विशेषता इसका निर्माण है। यहाँ फेंके गए पुराने टायरों, लोहे के कबाड़ और अन्य बेकार वस्तुओं का इस्तेमाल कर अत्यंत आकर्षक कलाकृतियां बनाई गई हैं। लोहे के बेकार पार्ट्स से घोड़ा, मयूर और तितली जैसी सजीव आकृतियां गढ़ी गई हैं। इसी तरह पुराने टायरों को रंग-बिरंगे झूलों में तब्दील कर दिया गया है, जो बच्चों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं। ​स्वास्थ्य और मनोरंजन का संगम      ​इको पार्क को केवल सजावट तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे एक संपूर्ण सामुदायिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। युवाओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए आधुनिक ओपन जिम की सुविधा दी गई है। इसी तरह बच्चों के लिए झूलों और विभिन्न खेल सामग्रियों का प्रबंधन किया गया है। यह स्थान परिवारों के लिए शाम बिताने और मनोरंजन का पसंदीदा स्पॉट बनकर उभरा है। ​प्रशासन ने सराहा नवाचार, दिए हरियाली बढ़ाने के निर्देश    ​   हाल ही में जिला प्रशासन ने पार्क का बारीकी से निरीक्षण किया। कबाड़ के इस रचनात्मक उपयोग की प्रशंसा करते हुए ​परिसर में व्यापक पौधरोपण कर इसे और अधिक हरित बनाने का निर्णय लिया गया। ​नियमित साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ​आमजन के लिए सुविधाओं में निरंतर विस्तार करने के साथ यह पार्क समाज को स्वच्छता, पुनर्चक्रण (Recycling) और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी बनने की प्रेरणा देता है।       ​स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों का मानना है कि दुलदुला का यह इको पार्क राज्य के अन्य विकासखंडों के लिए एक पथप्रदर्शक का कार्य करेगा। यह साबित करता है कि कम लागत और रचनात्मक सोच के साथ हम पर्यावरण संरक्षण और जन-सुविधाओं का बेहतर समन्वय कैसे कर सकते हैं।

संवेदनशील पुलिसिंग की मिसाल

रायपुर छत्तीसगढ़ में गुमशुदा लोगों की तलाश अब केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशील पुलिसिंग और मानवीय जिम्मेदारी की मजबूत पहल बन गयी है। राज्य में वर्ष 2021 से अप्रैल 2026 तक कुल 1 लाख 3 हजार 766 गुम इंसानों की रिपोर्ट दर्ज हुई, जिनमें से 87 हजार 35 लोगों को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर उनके परिवारों तक पहुंचाया है।  उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पुलिस महकमे के आला अधिकारियों को राज्य में गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए प्रभावी अभियान संचालित करने के निर्देश दिए थे। छत्तीसगढ़ में पुलिस प्रशासन द्वारा संचालित ऑपरेशन तलाश और ऑपरेशन मुस्कान के जरिए बरामद लोगों में 2 हजार 785 बालक, 16 हजार 472 बालिकाएं, 18 हजार 671 पुरुष और 49 हजार 107 महिलाएं शामिल हैं। इन आंकड़ों ने यह साबित किया है कि छत्तीसगढ़ पुलिस लगातार संवेदनशीलता और तकनीकी दक्षता के साथ गुमशुदा लोगों की तलाश में सक्रिय है। राजधानी रायपुर सहित अविभाजित जिले में भी पुलिस की सक्रियता प्रभावी रही। यहां गुम नाबालिगों, महिलाओं और पुरुषों से संबंधित 15 हजार 632 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 12 हजार 456 लोगों को खोज निकाला गया। लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जा रही है और जिला स्तर पर विशेष टीमों की तैनाती के साथ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह रही कि इन मामलों में अब तक मानव तस्करी जैसे किसी बड़े संगठित अपराध की जानकारी सामने नहीं आई है। बरामद लोगों ने अपने कथनों में बताया कि अधिकांश लोग प्रेम संबंध, रोजगार की तलाश, परिजनों की डांट या घूमने जाने जैसी वजहों से घर छोड़कर चले गए थे। इनमें से कई लोग बाद में स्वयं भी वापस लौट आए। अप्रैल में चला ऑपरेशन तलाश 4056 लोगों की हुई बरामदगी गुमशुदा लोगों की तलाश को तेज गति देने के लिए अप्रैल 2026 में राज्यभर में “ऑपरेशन तलाश” अभियान चलाया गया। इस अभियान में छत्तीसगढ़ पुलिस को उल्लेखनीय सफलता मिली और केवल एक माह में 4 हजार 56 गुमशुदा लोगों को खोज निकाला गया। इनमें 545 बच्चे तथा 3511 महिला और पुरुष शामिल रहे। बरामद लोगों में 75 बालक, 470 बालिकाएं, 972 पुरुष और 2539 महिलाएं शामिल हैं। सभी को विधिवत उनके परिवारों से मिलाया गया। अभियान के दौरान पुलिस ने अंतर्राज्यीय समन्वय का भी प्रभावी उपयोग किया। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, झारखंड, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों से 182 गुमशुदा लोगों को खोजकर वापस लाया गया। इनमें 3 बालक, 63 बालिकाएं, 13 पुरुष और 103 महिलाएं शामिल हैं। जिलों की सक्रिय भूमिका से मिली बड़ी सफलता ऑपरेशन तलाश में जिला पुलिस इकाइयों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। बरामदगी के मामले में दुर्ग जिला सबसे आगे रहा, जहां 683 लोगों की पतासाजी की गई। इसके बाद बिलासपुर में 648, रायपुर में 426, राजनांदगांव में 280, रायगढ़ में 251 और महासमुंद में 183 गुम इंसानों को खोजा गया। इसी तरह बलौदाबाजार में 136, जांजगीर-चांपा में 134, सरगुजा में 114 और बालोद जिले में 106 लोगों को बरामद कर अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। अभिव्यक्ति अभियान से बढ़ रही जागरूकता महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर राज्य में “अभिव्यक्ति” जागरूकता अभियान भी लगातार चलाया जा रहा है। इसके तहत स्कूल, कॉलेज, छात्रावासों और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में पुलिस टीमें पहुंचकर लोगों को मानव तस्करी, साइबर अपराध, पॉक्सो एक्ट, नए कानूनों और आत्मरक्षा के बारे में जानकारी दे रही हैं। इसके साथ ही गुम बच्चों की खोज के लिए “ऑपरेशन मुस्कान” और गुम इंसानों की तलाश के लिए “ऑपरेशन तलाश” जैसे अभियान समय-समय पर संचालित किए जा रहे हैं। पुलिस तकनीकी संसाधनों, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और ईश्तहारों के माध्यम से भी लगातार निगरानी और खोजबीन कर रही है। हर बरामद व्यक्ति किसी परिवार की खुशी छत्तीसगढ़ पुलिस का मानना है कि हर गुमशुदा बच्चे, महिला या व्यक्ति की बरामदगी किसी परिवार की चिंता और पीड़ा का अंत होती है। यही कारण है कि पुलिस इसे केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय दायित्व मानकर काम कर रही है। संवेदनशील पुलिसिंग, तकनीकी सहयोग, मजबूत सूचना तंत्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के चलते हजारों परिवारों के चेहरे पर फिर मुस्कान लौट सकी है। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी व्यक्ति, खासकर नाबालिग, महिला या बुजुर्ग के गुम होने की सूचना तुरंत नजदीकी थाना, डायल 112 या पुलिस नियंत्रण कक्ष को दें, ताकि समय रहते उनकी सुरक्षित तलाश सुनिश्चित की जा सके।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल का बयान: निर्माणाधीन विकास कार्यों के पूरा होने से जिले का विकास तेज होगा

निर्माणाधीन विकास कार्यों के पूर्ण होने से जिले के विकास की बढ़ेगी रफ्तार : उप मुख्यमंत्री शुक्ल जर्जर शासकीय विद्यालयों को चिन्हित कर कराएं मरम्मत शहडोल जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक हुई भोपाल  उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि जिले में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित निर्माणाधीन विकास कार्यों में तेजी लाकर उन्हें समय-सीमा में पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा स्वीकृत विकास कार्यों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करना अत्यंत आवश्यक है। विकास कार्यों के पूर्ण होने से शहडोल जिले के विकास को नई गति मिलेगी। उक्त निर्देश उप मुख्यमंत्री एवं शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री शुक्ल ने सर्किट हाउस बाणसागर में आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में विभागीय अधिकारियों को दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने शहडोल- उमरिया मार्ग, ब्यौहारी के विजयसोता पूल निर्माण में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहडोल- उमरिया मार्ग, ब्यौहारी के विजयसोता पूल, भन्नी सिंचाई परियोजना जैसे अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा कलेक्टर समय-सीमा की बैठक में अनिवार्य रूप से करें एवं जल्द से जल्द पूर्ण कर आमजन को उन सुविधाओं का लाभ दिलाए। उन्होंने कहा कि स्वीकृत विकास कार्यों को जमीनी स्तर पर कार्य करने की अत्यंत आवश्यकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य विभाग की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज एवं शहडोल जिले में निर्माणाधीन हेल्थ सेंटरो को यथाशीघ्र पूर्ण कर जनप्रतिनिधियों द्वारा शुभारंभ कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए की शहडोल जिले में संचालित शासकीय विद्यालय जो जर्जर हैं उन्हें सूचीबद्ध कर उनका मरम्मत कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने जिले में बनाए जा रहे सांदीपनि विद्यालय के कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर जल्द से जल्द से पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारी को दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जनहित को दृष्टिगत रखते हुए जनपद पंचायत कार्यालय ब्यौहारी के सामने संचालित शराब की दुकान हटाने के निर्देश कलेक्टर को दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बैठक में मेडिकल कॉलेज में रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया, भू अर्जन कार्य में प्रगति, टेटका – शहडोल मार्ग की प्रगति, जयसिंहनगर बाईपास, ब्यौहारी -सपटा मार्ग, जल जीवन मिशन के कार्य, प्रगतिरत कटनी से सिंगरौली डबल रेलवे लाइन के कार्य सहित अन्य विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। बैठक में जिला विकास सलाहकार समिति के सदस्यों द्वारा विकास कार्यों के लिये अपने अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए। बैठक में सांसद संसदीय क्षेत्र सीधी डॉ.राजेश मिश्रा, विधायक जयसिंह मरावी, शरद कोल,श्रीमती मनीषा सिंह, कलेक्टर डॉ.केदार सिंह, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत शिवम प्रजापति सहित अन्य जन प्रतिनिधि, अधिकारी एवं जिला विकास सलाहकार समिति के सदस्य उपस्थित रहे।  

अंगिका और अन्य स्थानीय भाषाओं को परीक्षा में जगह देने पर मंथन शुरू

 महगामा  झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा में अंगिका सहित क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को शामिल करने की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। महागामा विधायक और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पहल पर राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। 13 अप्रैल को मंत्री ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर अंगिका, संथाली, मगही, मैथिली, भोजपुरी, कुड़माली और खोरठा जैसी स्थानीय भाषाओं को परीक्षा में विकल्प के रूप में शामिल करने की मांग की थी। मंत्री ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन में बताया कि संथालपरगना समेत राज्य के कई क्षेत्रों में अंगिका और अन्य क्षेत्रीय भाषाएं व्यापक रूप से बोली जाती हैं। परीक्षा व्यवस्था में इन भाषाओं का अभाव स्थानीय युवाओं को अवसरों से वंचित कर रहा है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में अंगिका को शामिल नहीं किए जाने पर छात्रों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी बढ़ी थी। इसके बाद, राज्य सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने 5 मई 2026 को अधिसूचना जारी कर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। यह समिति राज्य के विभिन्न जिलों में भाषाई स्थिति, जनभावनाओं और व्यावहारिक पक्षों का अध्ययन कर सरकार को अनुशंसा सौंपेगी। समिति में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर को समन्वयक बनाया गया है, जबकि श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, पेयजल मंत्री योगेन्द्र प्रसाद और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सदस्य हैं। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं का शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में समावेश झारखंड की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। अंगिका साहित्य कला मंच और अन्य सामाजिक संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया है। अब छात्रों और भाषा प्रेमियों की नजर समिति की रिपोर्ट और सरकार के अगले निर्णय पर है।  

रायपुर: वन मंत्री केदार कश्यप ने दी सुविधा, अब एक फोन कॉल पर मिलेगी बाजार और योजनाओं की जानकारी

रायपुर : अब एक फोन कॉल पर मिलेगी बाजार और योजनाओं की जानकारी- वन मंत्री केदार कश्यप 13 लाख संग्राहक परिवारों को स्थानीय भाषाओं में मिलेगा आजीविका और बाजार भाव का अपडेट रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने वनांचल में रहने वाले वनोपज संग्राहकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने आज नया रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय से “छत्तीसगढ़ वनोपज संरक्षण वाणी” और आईवीआरएस (IVRS) आधारित सूचना एवं संवाद तंत्र का शुभारंभ किया। यह नवाचार राज्य के 13 लाख से अधिक वनोपज संग्राहक परिवारों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यह डिजिटल कदम छत्तीसगढ़ के वनांचल में आर्थिक क्रांति और जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगा। कैसे काम करेगी यह व्यवस्था? (मिस्ड कॉल सेवा)          संग्राहकों को जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी। संग्राहकों को टोल फ्री नंबर +91-9811125813 पर एक मिस्ड कॉल करना होगा। मिस्ड कॉल के बाद 911 से शुरू होने वाले नंबर से उपयोगकर्ता को कॉल बैक आएगा। कॉल रिसीव करते ही संग्राहक अपनी स्थानीय बोलियों जैसे हल्बी, गोंडी आदि में महत्वपूर्ण जानकारियां सुन सकेंगे। जानकारी सुनने के साथ ही उपयोगकर्ता अपनी राय, अनुभव और सुझाव भी रिकॉर्ड कर सकेंगे। ’प्रमुख लाभ और उद्देश्य’        स्थानीय बोलियों को प्राथमिकता के कारण वनांचल की क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी मिलने से सूचनाओं का प्रसार अधिक प्रभावी होगा। जंगल, वनोपज संरक्षण, सतत संग्रहण, बाजार भाव (Market Rates) और सरकारी योजनाओं की सटीक जानकारी सीधे संग्राहकों तक पहुंचेगी। बाजार भाव और मूल्य संवर्धन की सही जानकारी मिलने से बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और संग्राहकों की आय बढ़ेगी। यह केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि संग्राहकों और शासन के बीच संवाद का एक मजबूत मंच बनेगा। ’मंत्री केदार कश्यप का संदेश’        वनोपज संग्राहकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक जानकारी पहुँचाने का यह प्रयास राज्य के लाखों परिवारों के लिए आजीविका का संबल बनेगा। वनोपज संरक्षण वाणी तकनीक और जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। संचालन और महत्व        यह पहल छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित, रायपुर द्वारा संचालित की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आईवीआरएस आधारित यह संवाद तंत्र राज्य में वनाधारित आजीविका को संगठित और मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित की ईडी- श्रीमती संजीता गुप्ता, डीजीएम जाधव सागर रामचंद्र, महाप्रबंधक सुबीर कुमार दत्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए नियम में बदलाव की तैयारी

रांची  राज्य में सेवा देने वाले दूसरे राज्यों के चिकित्सकों को झारखंड में निबंधन से छूट मिलेगी। इसके लिए झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल रूल के संबंधित प्रविधानों में संशोधन किया जाएगा। झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए यह छूट प्रदान करने पर विचार किया जा रहा है स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव सह नोडल पदाधिकारी छवि रंजन की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में आयोजित बैठक में यह निर्णय लेते हुए झारखंड में निबंधन से छूट की अनुशंसा राज्य सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया। बैठक में झारखंड मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. साहिर पाल, रजिस्ट्रार सह सचिव डॉ. विमलेश कुमार सिंह तथा आईएमए, झारखंड के प्रतिनिधि डॉ. शंभू प्रसाद उपस्थित थे। बैठक में झारखंड स्टेट मेडिकल काउंसिल रूल, 2023 के नियम 55 की विस्तार से समीक्षा की गई। वर्तमान नियम के अनुसार, झारखंड में चिकित्सा सेवा देने वाले सभी चिकित्सकों के लिए राज्य में निबंधन अनिवार्य है। इसके तहत दूसरे राज्यों से आनेवाले चिकित्सकों को भी झारखंड में निबंधन अनिवार्य है। भले ही वे पहले से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग या किसी अन्य राज्य मेडिकल काउंसिल में निबंधित हों। झारखंड में बिना निबंधन वे राज्य में प्रैक्टिस नहीं कर सकते। बैठक में इस नियम से उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा हुई। सदस्यों ने कहा कि बाहर से आनेवाले विशेषज्ञ चिकित्सकों को अतिरिक्त औपचारिकताओं के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिससे राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता भी प्रभावित होती है। विमर्श के बाद नियम में आवश्यक संशोधन को लेकर राज्य सरकार को अनुशंसा भेजे जाने पर सहमति बनी।