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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

यूपी पुलिस के बेड़े में शामिल हुए 87 नए इंटरसेप्टर वाहन   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना   प्रदेश में अब 35 चार-पहिया और 137 दो-पहिया इंटरसेप्टर वाहन, यातायात नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई   आठ माह में सड़क दुर्घटनाओं में सात और मृतकों की संख्या में आठ प्रतिशत की कमी   75 जिलों के 700 सर्वाधिक दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों में 801 विशेष टीमें कर रहीं निगरानी    लखनऊ  सड़क हादसों में कमी लाने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के बेड़े में गुरुवार को 87 नए इंटरसेप्टर वाहन शामिल हो गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 चार-पहिया और 62 दो-पहिया इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही प्रदेश में इंटरसेप्टर वाहनों की संख्या बढ़कर 172 हो गई है। इनमें 35 चार-पहिया और 137 दो-पहिया वाहन हैं।   नए इंटरसेप्टर वाहनों से तेज रफ्तार, नशे में वाहन चलाने, काली फिल्म, प्रेशर हॉर्न और रैश ड्राइविंग जैसे यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई में मदद मिलेगी। इनमें स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर, टिंट मीटर और डेसिबल मीटर जैसे उपकरण हैं। जरूरत पड़ने पर इन वाहनों का इस्तेमाल ट्रैफिक रिस्पॉन्स व्हीकल के रूप में भी किया जा सकेगा।   700 दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों पर नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीजीपी राजीव कृष्ण के नेतृत्व में शुरू की गई जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) योजना सभी 75 जिलों के 700 सर्वाधिक दुर्घटना-बाहुल्य थाना क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है। इसके तहत 801 विशेष टीमों में करीब 3,500 पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। ये टीमें क्रिटिकल कॉरिडोर और ब्लैक स्पॉट पर नियमित पेट्रोलिंग, निगरानी और यातायात नियमों का पालन करा रही हैं।   पिछले आठ माह में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में करीब सात प्रतिशत और मृतकों की संख्या में करीब आठ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में करीब 1,107 लोगों की जान बचाई गई।   109 मार्गों पर रियल टाइम निगरानी शहरों में जाम की समस्या से निपटने के लिए RTC योजना के तहत 20 प्रमुख जिलों के 109 मार्गों की UP GATI प्लेटफॉर्म से रियल टाइम निगरानी की जा रही है। रूट मार्शल और संबंधित विभाग जाम के कारणों की पहचान कर मौके पर कार्रवाई करते हैं। मार्च 2026 में इन मार्गों पर 16,723 कंजेशन पॉइंट दर्ज किए गए थे, जो अगस्त तक घटकर 8,569 रह गए। इस तरह करीब 49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।   कैमरों से निगरानी, नियम तोड़ने पर ई-चालान यातायात व्यवस्था की निगरानी के लिए ITMS और Safe City कैमरा नेटवर्क की भी मदद ली जा रही है। ANPR के साथ रेड लाइट और गति सीमा के उल्लंघन की पहचान करने वाले कैमरों तथा कमांड सेंटर की लाइव फीड से यातायात पर नजर रखी जाती है। जरूरत पड़ने पर जाम और भीड़ वाले इलाकों में ड्रोन से भी निगरानी की जाती है। कैमरों और फील्ड टीमों से मिली जानकारी के आधार पर नियम तोड़ने वालों के ई-चालान के साथ मौके पर भी कार्रवाई की जा रही है।

मोहाली में फैक्टरी के पास भड़की आग, सूखी झाड़ियों ने पकड़ी लपटें

मोहाली. फेज-5 में किसान मंडी के पास गुरुवार सुबह करीब सात बजे सूखी झाड़ियों और कचरे में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और धुएं का गुबार आसपास फैल गया। आग की लपटों के पास ही स्वराज ट्रैक्टर फैक्टरी स्थित होने के कारण बड़ा हादसा होने का खतरा पैदा हो गया था। आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया। फायर अफसर लखविंदर सिंह ने बताया कि यदि हवा का रुख फैक्टरी की तरफ होता तो ट्रैक्टर फैक्टरी को नुकसान पहुंच सकता था। मौके पर पहुंचे सीनियर डिप्टी मेयर आर.पी. शर्मा ने आग बुझाने वाले कर्मचारियों को आवश्यक हिदायतें दीं।

EVM विवाद पर मंत्री टंकराम वर्मा का पलटवार, कांग्रेस को दिलाया पुराना दौर

रायपुर. कांग्रेस की बैलट पेपर से चुनाव कराए जाने की मांग पर कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर का जमाना खत्म हो गया है. EVM के उपयोग से कांग्रेस ने भी सरकार बनाई है. कांग्रेस को कोई नहीं समझा सकता, कांग्रेस समझने को तैयार ही नहीं है. कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने लल्लूराम डॉट कॉम से चर्चा में कांग्रेस के आरोपों पर कहा कि EVM से निष्पक्ष चुनाव होता है, रिजल्ट भी तुरंत आ जाता है. चाहे विधानसभा चुनाव हो, या लोकसभा चुनाव हो. सभी में EVM का उपयोग होता है. EVM में सही निर्णय आता है. वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनमें आपस में ही द्वंद्व चल रहा है. उन्होंने कहा कि जब से 2023 विधानसभा चुनाव हारे हैं, तब से एक-दूसरे के ऊपर ठीकरा फोड़ रहे हैं. जब सरकार उनकी थी. मिल बांटकर भ्रष्टाचार किए है. देखे हैं छत्तीसगढ़ में किस प्रकार से भ्रष्टाचार हुआ है. शराब, कोयला, पीएससी… नाना प्रकार के घोटाले किए हैं, जिसमें सभी की सहभागिता रही थी. अब किसी को मिल नहीं रहा है तो आपस में लड़ रहे हैं. बाढ़ में प्रभावित लोगों को लेकर राजस्व-आपदा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अच्छी बारिश हुई है. बारिश के कारण कई जिलों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है. कई लोग प्रभावित हुए हैं. जो स्थिति हुई है, उसमें कई मकान ढह गए हैं, कई लोगों को क्षति हुई है. कुछ सड़क और पुल-पुलिया भी उसमें बहे हैं. मंत्री ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री ने बस्तर का दौरा किया. मैंने भी तीन-चार जिले का दौरा किया है. इस बाढ़ में मकान टूटे और कई फसल भी चपेट में आई है. बाढ़ में आए प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. इसका हमने ध्यान रखा है. जिला प्रशासन को बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए रहने-खाने की व्यवस्था कराने निर्देश दिए हैं. टंक राम वर्मा ने कहा कि मैं भी सिचुएशन की मॉनिटरिंग कर रहा हूं. बाढ़ में फंसे हुए लोगों की बात रही, तो अब पानी सामान्य हो गया है. हमारा राजस्व का अमला वहां जाएगा, और जो क्षति हुई है, उसका सर्वे करेगा. क्षति के हिसाब से प्रभावितों को मुआवजा राशि का वितरण किया जाएगा.

मध्य प्रदेश से मानसून की होगी विदाई, भारी बारिश का अलर्ट नहीं; हल्की बूंदाबांदी संभव

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून अब विदाई की दहलीज पर है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 2 से 3 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रदेश से लौट सकता है। विदाई से पहले नमी के असर से कुछ इलाकों में बूंदाबांदी और गरज-चमक देखने को मिलेगी, हालांकि फिलहाल प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। इस बीच प्रदेश के 55 जिलों में से 30 जिले ऐसे हैं, जहां अब तक सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया है। वहीं आज प्रदेश के 8 जिलों में बूंदाबांदी के आसार हैं। प्रदेश में सामान्य से 4% कम बारिश 1 जून से 30 सितंबर तक के मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है। प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश का आंकड़ा 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच है। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 4% कम बारिश हुई है। प्रदेश के 55 जिलों में से 30 जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो सका, जबकि भोपाल और ग्वालियर समेत 25 जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई है। सबसे ज्यादा कमी आलीराजपुर में रही, जहां सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी पूरी नहीं हो सकी। वहीं निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से अधिक बारिश दर्ज की गई। 55 में से 30 जिलों में बारिश का कोटा अधूरा 1 जून से 30 सितंबर तक के मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच है। इस हिसाब से प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 4% कम बारिश हुई है। प्रदेश के 55 जिलों में से 30 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया। वहीं भोपाल और ग्वालियर समेत 25 जिलों में सामान्य से ज्यादा या सामान्य बारिश दर्ज हुई है। सबसे ज्यादा कमी आलीराजपुर में रही, जहां सामान्य की आधी बारिश भी पूरी नहीं हो सकी। इसके उलट निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। प्रदेश में औसत 35.8 इंच बारिश ही रिकॉर्ड IMD के मुताबिक- प्रदेश में अब तक 908.4 मिमी, यानी 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। ओवर-ऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है। पूर्वी एमपी में ज्यादा, पश्चिमी हिस्से में कमी मानसून के दौरान प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का प्रदर्शन पश्चिमी हिस्से से बेहतर रहा। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसतन 4% ज्यादा बारिश हुई है। हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश हुई। पश्चिमी मध्य प्रदेश में कमी ज्यादा रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज की गई।  पूर्वी MP में बारिश बेहतर, पश्चिमी हिस्से में कमी मानसून के दौरान प्रदेश के पूर्वी हिस्से में पश्चिमी हिस्से की तुलना में बारिश की स्थिति बेहतर रही। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसतन 4% अधिक बारिश दर्ज की गई। हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश हुई। वहीं पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज की गई। जून की कमी आखिर तक नहीं भर पाई इस बार मानसून के आंकड़े कम रहने की बड़ी वजह जून में हुई कम बारिश है। मौसम विभाग के अनुसार जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14% कम पानी गिरा था। जुलाई की शुरुआत में हुई तेज बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून में दो बार ब्रेक आया। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश का आंकड़ा सामान्य या उससे ऊपर रहा, लेकिन जून में हुई कमी पूरी नहीं हो सकी। इसी वजह से मानसून सीजन खत्म होने के बाद भी प्रदेश का कुल आंकड़ा सामान्य से करीब 4% नीचे है। प्रदेश की सामान्य मानसूनी बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 38 से 39 इंच रहता है। आज इन 8 जिलों में बूंदाबांदी मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बूंदाबांदी के साथ गरज-चमक हो सकती है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर और जबलपुर समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से साफ रहने और तेज धूप निकलने का अनुमान है। 4 दिन का मौसम 1 अक्टूबर: पूर्वी हिस्से में कुछ जगह बूंदाबांदी, बाकी जगह धूप। 2 अक्टूबर: नमी के असर से कुछ जिलों में हल्की बारिश संभव। 3 अक्टूबर: बारिश की गतिविधियां और सीमित होने के आसार। इसके बाद: मानसून की विदाई के साथ बारिश का दौर लगभग थमने लगेगा।  जून की कमी आखिर तक पूरी नहीं हो सकी इस मानसून सीजन में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहने की बड़ी वजह जून में हुई कम बारिश रही। मौसम विभाग के अनुसार जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में हुई तेज बारिश से स्थिति में सुधार आया, लेकिन इसके बाद मानसून में दो बार ब्रेक की स्थिति बनी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश सामान्य या … Read more

रिहायशी इलाकों में फिर खुलीं सील दुकानें, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर निगम की कार्रवाई सवालों में

 भोपाल  रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों और भवन नियमों के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश के बावजूद नगर निगम की कार्रवाई अब तक जमीन पर दिखाई नहीं दे रही है। 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मौजूदा मास्टर प्लान और भवन नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। आदेश को करीब एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन निगम ने अब तक कोई बड़ा अभियान शुरू नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश बेअसर सबसे गंभीर स्थिति उन प्रतिष्ठानों की है, जिन्हें निगम ने स्वेच्छा से बंद कराने के बाद पंचनामा तैयार किया था। इनमें से भी बड़ी संख्या में प्रतिष्ठान अब दोबारा खुलने लगे हैं। यानी जिन दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बंद होने का निगम ने बाकायदा दस्तावेज तैयार किया, वे ही फिर से संचालित हो रहे हैं। सीलिंग पर कोर्ट में पहुंची शिकायतें 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान भोपाल के रहवासियों की शिकायतों का हवाला दिया गया था। इनमें बताया गया कि कुछ प्रतिष्ठानों को दिन में सील किया गया, लेकिन शाम को वे फिर खोल दिए जाते हैं। कुछ मामलों में सीलिंग के कुछ घंटे या दिन बाद बिना किसी नए घटनाक्रम, शो-कॉज के जवाब या सक्षम प्राधिकरण के निर्णय के परिसर दोबारा खोले जाने की बात भी सामने आई। कोर्ट ने इन शिकायतों को रिकार्ड पर लेते हुए स्पष्ट किया कि सीलिंग के निर्देशों का सख्ती से पालन होना चाहिए। अधिकारियों को बिना भेदभाव कार्रवाई करने और ‘पिक एंड चूज’ से बचने के निर्देश भी दिए गए। इसके बावजूद निगम की ओर से अब तक ऐसा अभियान नजर नहीं आया, जिससे लगे कि इन निर्देशों को लेकर गंभीरता से कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मास्टर प्लान-2047 जारी, फिर भी कार्रवाई का इंतजार सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद प्रदेश सरकार मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट भी जारी कर चुकी है। हालांकि, निगम प्रशासन को कार्रवाई मौजूदा नियमों के अनुसार ही कार्रवाई करनी है। इसके बावजूद रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों की जांच, चिन्हांकन और कार्रवाई को लेकर निगम की सुस्ती सवाल खड़े कर रही है।     नगर निगम द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कार्रवाई की जा रही है।- भुवन गुप्ता, उपायुक्त, नगर निगम।  

अदम्य साहस दिखाने वाले पुलिसकर्मियों को CM योगी ने किया सम्मानित, ‘संघर्ष’ पुस्तक का विमोचन

अदम्य साहस व कर्तव्यनिष्ठा का प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया सीएम योगी ने वीरता पदक से अलंकृत किया पुलिसकर्मियों को, शहीद निरीक्षक सुनील कुमार की पत्नी को किया सम्मानित यूपी के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया मुख्यमंत्री ने लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  अदम्य साहस, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा का प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को वीरता पदक प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया।  पुलिस सेवा में सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने एसटीएफ के शहीद निरीक्षक सुनील कुमार की पत्नी मुनेश देवी को नगद धनराशि एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। निरीक्षक सुनील कुमार ने 20 जनवरी 2025 को शामली के झिंझाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में चार अपराधियों को मार गिराने में अदम्य साहस का परिचय दिया था। कर्तव्य पालन करते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की थी। स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किए जाने की घोषणा भी की गई। गणतंत्र दिवस 2025 के अवसर पर घोषित वीरता पदक 1. देवदत्त सिंह – आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 2. राजन कुमार – आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 3. रितुल कुमार वर्मा – आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 4. निपुण अग्रवाल, आईपीएस – सेनानायक, नवमी वाहिनी पीएसी, मुरादाबाद 5. स्वतंत्र कुमार सिंह – अपर पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर 6. मुन्ने सिंह – उपनिरीक्षक, नागरिक पुलिस, मेरठ 7. नीरज कुमार पाल – आरक्षी, नागरिक पुलिस, कमिश्नरेट गाजियाबाद 8. अशोक कुमार मीणा, आईपीएस – पुलिस अधीक्षक, हरदोई 9. कुलदीप कुमार – पुलिस उपाधीक्षक, जनपद संभल 10. गीतेश कपिल – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, शाहजहांपुर 11. प्रवीण अहलावत – आरक्षी, नागरिक पुलिस, जनपद सहारनपुर 12. अमित – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 13. अंगद सिंह यादव – उपनिरीक्षक, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 14. डॉ. दीक्षा शर्मा – पुलिस उपायुक्त, कमिश्नरेट लखनऊ 15. संदीप कुमार – आरक्षी, नागरिक पुलिस, कमिश्नरेट गाजियाबाद 16. रिपुदमन सिंह – निरीक्षक, नागरिक पुलिस गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर घोषित वीरता पदक 1. धर्मेंद्र सिंह राठौर – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, बुलंदशहर 2. केशव शांडिल्य – उपनिरीक्षक, एसटीएफ 3. राहुल कुमार – मुख्य आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 4. अजय कुमार वर्मा – उपनिरीक्षक, नागरिक पुलिस, जनपद मथुरा 5. घनश्याम यादव – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 6. अवनीश कुमार त्यागी – उपनिरीक्षक, नागरिक पुलिस, जनपद मैनपुरी 7. अमित त्रिपाठी – आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 8. अमित – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, एसटीएफ 9. मनीष बिष्ट – निरीक्षक, नागरिक पुलिस, कमिश्नरेट गाजियाबाद 10. रणधीर सिंह – मुख्य आरक्षी, नागरिक पुलिस, एसटीएफ

घर में टीवी तक नहीं, नीरू का कबड्डी में कमाल; 2 दिन में 3 मेडल

जींद. जब जींद जिले के संगतपुरा गांव की रहने वाली सुदेश देवी बीपीएल राशन कार्ड पर अनाज लेने के लिए घर से निकली थीं तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनकी बेटी सात समंदर पार जापान में तिरंगा फहराने जा रही है। 2026 एशियाई खेलों से आई इस खबर ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी। मां सुदेश ने एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि वे गरीबी रेखा के तहत मिलने वाला राशन लेने जा रही थी तभी उन्हें नीरू के गोल्ड मेडल जीतने का पता चला। एक तरफ राशन लेने की मजबूरी थी तो दूसरी तरफ पोडियम पर सबसे ऊपर खड़ी उनकी बेटी नीरू ढांडा, जिन्होंने एशियाई खेलों की महिला ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में भारत के लिए पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 30 में से 28 सटीक निशाने और नया एशियाई रिकॉर्ड 26 साल की नीरू ने निशानेबाजी के फाइनल दौर में जबरदस्त एकाग्रता दिखाई। उन्होंने 30 में से 28 निशाने एकदम सटीक लगाए और नया एशियाई खेल रिकॉर्ड कायम किया। चीन की दिग्गज निशानेबाज सन युनोंग 26 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। नीरू के लिए यह मेडल केवल एक खेल प्रतियोगिता की जीत नहीं है बल्कि उस लंबे आर्थिक और सामाजिक संघर्ष का नतीजा है जिसे उनके परिवार ने सालों तक झेला है। कबड्डी के मैदान से गन थामने तक की कहानी नीरू शुरुआत से शूटिंग में नहीं थीं। वे स्कूल और स्टेट लेवल पर कबड्डी खेला करती थीं। साल 2018 में जब उनके चचेरे भाई लक्ष्य श्योराण ने जकार्ता एशियन गेम्स में सिल्वर जीता, तब नीरू के मन में भी इस खेल को अपनाने का विचार आया। सुदेश देवी ने द इंडियन एक्सप्रेस को दिए अपने बयान में कहा, 'हमारे पास केवल दो एकड़ जमीन और कुछ पशु हैं। नीरू कबड्डी खेलती थी, लेकिन लक्ष्य के पदक जीतने के बाद उसने शूटिंग करने की इच्छा जताई। हमारी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि हम बंदूक खरीद सकें या ट्रेनिंग का खर्च उठा सकें।' तालाब किनारे टीन के डिब्बों पर साधे शुरुआती निशाने जब जेब खाली हो तो महंगे खेलों का सपना देखना भी भारी पड़ता है। ऐसे में नीरू के चाचा सोमवीर श्योराण मदद के लिए आगे आए। शुरुआत में नीरू के पास अभ्यास के लिए अपनी राइफल तक नहीं थी इसलिए वे लक्ष्य की गन से ही प्रैक्टिस करती थीं। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए अपने बयान में नीरू ने उस दौर को याद करते हुए कहा, 'मेरे चाचा मुझे एक तालाब के पास ले गए और उन्होंने मुझे टीन के एक छोटे टुकड़े पर निशाना लगाने को कहा। मैंने खुद से कहा कि चलो देखते हैं मैं क्या कर सकती हूं, और मैंने वह टेस्ट पास कर लिया।' इसके बाद वे औपचारिक कोचिंग के लिए मध्य प्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी (भोपाल) पहुंचीं। भारतीय सेना में नायब सूबेदार आज नीरू भारतीय सेना की कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं और महू स्थित आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट में अपनी ट्रेनिंग करती हैं। खेल मंत्रालय ने उन्हें TOPS स्कीम के डेवलपमेंट ग्रुप में भी शामिल किया है। 2022 में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने वाली नीरू ने 2025 एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था।

नंगल के गुरप्रीत सिंह को सऊदी में फांसी की सजा, परिवार ने मांगी मदद

नंगल. काम के सिलसिले में विदेश गए नंगल के पास पत्ती लोअर गांव के युवक गुरप्रीत सिंह उर्फ बब्बी को सऊदी अरब में कथित नशीले पदार्थ के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। इस सूचना के बाद परिवार में मातम का माहौल है। परिवार ने केंद्र और पंजाब सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर गुरप्रीत की सजा कम करवाने और उसकी वतन वापसी के लिए प्रयास करने की अपील की है। परिवार के अनुसार, गुरप्रीत सिंह को मिली मृत्युदंड की जानकारी नंगल के तहसीलदार के माध्यम से परिवार को दी गई। इससे पहले 24 सितंबर को रूपनगर के उपायुक्त को मस्कट स्थित भारतीय दूतावास की ओर से इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ था। पत्र के माध्यम से गुरप्रीत को सुनाई गई मौत की सजा की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाई गई। दिवंगत जरनैल सिंह का बेटा गुरप्रीत करीब चार वर्ष पहले काम के सिलसिले में मस्कट गया था। उसकी मां जसवंत कौर ने बताया कि गुरप्रीत उनका इकलौता बेटा है। बेटे को मौत की सजा मिलने की जानकारी से परिवार बेहद परेशान है। ट्रक चलाने का करता था काम परिवार और ग्रामीणों के अनुसार, गुरप्रीत सिंह ट्रक चालक के तौर पर काम करता था। काम के सिलसिले में उसका मस्कट से सऊदी अरब आना-जाना रहता था। परिवार का कहना है कि करीब दो वर्ष पहले उसके ट्रक से कथित तौर पर नशीले पदार्थ बरामद हुए थे। इसके बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। परिवार के अनुसार, गुरप्रीत करीब दो वर्ष तक जेल में रहा। इसके बाद उसे मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि परिवार का दावा है कि गुरप्रीत निर्दोष है और उसे इस मामले में फंसाया गया है। परिवार अब सरकारी स्तर पर हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहा है। मां बोली, इकलौते बेटे को बचाएं गुरप्रीत की मां जसवंत कौर ने कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस से संपर्क किया है। उन्होंने इस मुलाकात में मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से भी अपील की है कि उनके बेटे को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। जसवंत कौर का कहना है कि उनका बेटा परिवार का इकलौता सहारा है। उन्होंने सरकार से सऊदी अरब के अधिकारियों के साथ राजनयिक स्तर पर मामला उठाने और गुरप्रीत की सजा कम करवाने की दिशा में प्रयास करने की मांग की है। सरपंच ने भी सरकार से लगाई गुहार गांव की सरपंच मोनिका देवी ने कहा कि गुरप्रीत को मौत की सजा मिलने की जानकारी से गांव के लोग भी दुखी हैं। उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि मामले को गंभीरता से लेते हुए राजनयिक माध्यमों से सऊदी अरब के अधिकारियों के समक्ष उठाया जाए। परिवार को अब केंद्र और पंजाब सरकार से राहत की उम्मीद है। गुरप्रीत की मां और ग्रामीण चाहते हैं कि मामले में कानूनी और राजनयिक स्तर पर आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जाए, ताकि सजा के खिलाफ उपलब्ध विकल्पों पर कार्रवाई हो सके। मंत्री हरजोत बैंस उठाएंगे मर्सी पटीशन की मांग इस मामले में पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। मंत्री बैंस ने बताया कि वे गुरप्रीत सिंह की सजा माफ कराने (मर्सी पिटीशन) की याचिका को तुरंत भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के समक्ष रखेंगे, ताकि इसे कूटनीतिक स्तर पर सऊदी अरब सरकार के सामने उठाया जा सके। उन्होंने कहा कि युवक की सुरक्षित वतन वापसी और उसके परिवार की सहायता के लिए वे अपने स्तर पर हर संभव प्रयास करेंगे।

बस्तर ओलंपिक का आगाज, पंजीयन शुरू; 3 चरणों में होंगे मुकाबले

रायपुर. बस्तर के युवाओं को खेलों के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी खेल प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से आयोजित होने वाले बस्तर ओलंपिक 2026 के लिए आज से पंजीयन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस वर्ष प्रतियोगिता का तीसरा आयोजन है। पंजीयन के बाद नवंबर में ब्लॉक स्तर पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। 11 खेल विधाओं में मिलेगा मौका बस्तर ओलंपिक 2026 में इस बार कुल 11 खेल विधाओं को शामिल किया गया है। युवा अपनी रुचि और खेल क्षमता के अनुसार इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकेंगे। ब्लॉक स्तर से प्रतियोगिता शुरू होने के कारण ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। आयोजन के जरिए स्थानीय स्तर पर खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। आज से शुरू हुआ पंजीयन बस्तर ओलंपिक के लिए पंजीयन प्रक्रिया आज से शुरू कर दी गई है। आयोजन को लेकर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। पंजीयन के बाद नवंबर में ब्लॉक स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। प्रशासन की कोशिश है कि अधिक से अधिक युवा इस आयोजन से जुड़ें और अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करें। युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना उद्देश्य बस्तर ओलंपिक का उद्देश्य केवल खेल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं है। इसके माध्यम से बस्तर के युवाओं को सकारात्मक और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के साथ उनकी प्रतिभा को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। खेलों के जरिए युवाओं को अनुशासन, टीम भावना और प्रतिस्पर्धा का अनुभव देने के साथ उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर है। तीसरे साल आयोजित हो रहा बस्तर ओलंपिक बस्तर ओलंपिक का आयोजन इस वर्ष तीसरी बार किया जा रहा है। जिला प्रशासन और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से प्रतियोगिता का संचालन किया जाता है। पिछले आयोजनों में बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया था। इस बार भी आयोजन को व्यापक स्तर पर आयोजित करने और ज्यादा से ज्यादा प्रतिभागियों को जोड़ने की तैयारी की जा रही है। नक्सल हिंसा से प्रभावित प्रतिभागी भी बनेंगे आकर्षण बस्तर ओलंपिक में नक्सल हिंसा में दिव्यांग हुए प्रतिभागियों और पुनर्वासित सदस्यों की भागीदारी भी खास आकर्षण का केंद्र रहती है। इन प्रतिभागियों को खेल के माध्यम से अपनी क्षमता दिखाने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलता है। इनकी भागीदारी बस्तर ओलंपिक के सामाजिक उद्देश्य को भी रेखांकित करती है। खेलों के माध्यम से प्रभावित युवाओं और पुनर्वासित सदस्यों को सम्मानजनक मंच देने की दिशा में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नवंबर में होंगे ब्लॉक स्तरीय मुकाबले पंजीयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवंबर में ब्लॉक स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसके बाद प्रदर्शन के आधार पर प्रतिभागियों को आगे के स्तर की प्रतियोगिताओं में अवसर मिलने की उम्मीद है। आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जारी हैं।

दिल्ली में ‘No PUC, No Fuel’ लागू, PUC नहीं होने पर कटेगा ₹10 हजार तक चालान

 नई दिल्ली दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का दौर शुरू होने से पहले सरकार ने कुछ नए कदम उठाए हैं. इनमें सबसे अहम है 'नो पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, नो फ्यूल' नियम. इसके तहत अगर आपकी गाड़ी के पास वैध PUC (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट) नहीं है, तो पेट्रोल पंप पर आपको फ्यूल नहीं दिया जाएगा।  इस नियम को लागू करने के लिए दिल्ली के करीब 500 पेट्रोल पंप पर ऑटोमैटिक सिस्टम लगाया गया है. इन पेट्रोल पंप पर कैमरे लगाए गए हैं. ये कैमरे परिवहन के डेटाबेस से जुड़े हैं. सिस्टम गाड़ी का नंबर स्कैन करके यह पता करता है कि उसका PUC वैध है या नहीं।  जैसे ही बिना वैध PUC वाली गाड़ी पेट्रोल पंप पर पहुंचती है, सिस्टम उसका नंबर पहचान लेता है. इसके बाद ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट होता है. इसमें गाड़ी के नंबर के साथ बताया जाता है कि उसके पास वैध पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं है. ऐसी गाड़ी को तुरंत ईंधन देने से रोक दिया जाता है. यानी पेट्रोल या डीजल लेने से पहले वाहन मालिक को PUC बनवाना होगा।  पेट्रोल पंप पर ही PUC बनवाने की सुविधा सरकार ने वाहन मालिकों के लिए एक ऑप्शन भी रखा है. कई पेट्रोल पंप पर PUC बनवाने वाले कियोस्क लगाए गए हैं. अगर किसी वाहन का PUC वैध नहीं है, तो वह वहीं अपना प्रदूषण सर्टिफिकेट बनवा सकता है. इसके बाद वाहन में ईंधन भरवाया जा सकता है. यानी वाहन मालिक को PUC बनवाने के लिए अलग जगह जाने की जरूरत नहीं होगी।  अगर वाहन मालिक के पास PUC नहीं है, तो उसे इसे बनवाने के लिए कुछ समय दिया जा सकता है. लेकिन अगर तय समय के बाद भी वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं बनवाया गया, तो कार्रवाई हो सकती है. ऐसी गाड़ियों पर करीब ₹10 हजार तक का चालान लगाया जा सकता है।  दरअसल, दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण बड़ी समस्या बन जाता है. तापमान गिरने के साथ हवा की गुणवत्ता भी खराब होने लगती है. ऐसे में सरकार ने इस बार प्रदूषण बढ़ने से पहले ही कुछ कदम लागू किए हैं. अब करीब 500 पेट्रोल पंप पर यह सिस्टम काम कर रहा है. कैमरे, परिवहन डेटाबेस और ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट के जरिए नियम लागू किया जा रहा है।  हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि ऐसे कदमों से दिल्ली के प्रदूषण में कितना फर्क पड़ेगा. आने वाले दिनों में इसका असर साफ होगा. फिलहाल सरकार की कोशिश है कि बिना वैध PUC वाली गाड़ियों पर लगाम लगाई जाए और प्रदूषण को बढ़ने से पहले नियंत्रित किया जा सके।