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2200 करोड़ की जमीन से कब्जा हटाने पहुंची टीम पर विरोध, कार्रवाई रुकी

जयपुर जयपुर में को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उस समय हालात बिगड़ गए, जब हाउसिंग बोर्ड की टीम को स्थानीय लोगों के विरोध और पथराव का सामना करना पड़ा. मामला बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिसकी कीमत 2200 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है. हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद हाउसिंग बोर्ड प्रशासन कब्जा लेने की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचा था. उप-आवासन आयुक्त संजय शर्मा के नेतृत्व में टीम जेसीबी मशीनों के साथ पहुंची और अवैध निर्माणों को हटाने की शुरुआत की. इस दौरान बाउंड्री वॉल और अस्थायी ढांचों को तोड़ा जाने लगा. तभी प्रशासन की टीम को मौके पर विरोध झेलना पड़ा. महिलाओं ने जेसीबी पर फेंके पत्थर कार्रवाई शुरू होते ही वहां रह रहे लोगों ने विरोध जताया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया. कुछ महिलाओं द्वारा जेसीबी पर पत्थर फेंके जाने के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसके चलते प्रशासन को कुछ समय के लिए कार्रवाई रोकनी पड़ी. भू-माफियाओं ने किया घोटाला! बताया जा रहा है कि संबंधित जमीन का अधिग्रहण हाउसिंग बोर्ड ने वर्ष 1989 में किया था और 1991 में इसकी प्रक्रिया पूरी हो गई थी, लेकिन लंबे समय तक कब्जा नहीं लिया जा सका. इसी बीच कथित तौर पर भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यहां कॉलोनी विकसित कर दी और प्लॉट बेच दिए. सूत्रों के अनुसार, पुराने दस्तावेजों के सहारे जमीन का सौदा दिखाकर कई लोगों को कम दामों में भूखंड आवंटित किए गए. साल 2019 में कॉलोनी के नियमितीकरण का मामला उठा. तब जयपुर विकास प्राधिकरण ने एनओसी मांगी, लेकिन हाउसिंग बोर्ड ने इसे खारिज कर दिया. इसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच एसीबी को सौंप दी गई थी. फिलहाल, प्रशासन की सख्ती और स्थानीय विरोध के बीच यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है.

सियासी समीकरणों में बदलाव, बीजेपी के सवर्ण वोट बैंक में असंतोष

पटना  कहते हैं कि राजनीति में नेता भले ही अपने वोट बैंक के भरोसे रहें, लेकिन उनकी एक गलती बना-बनाया वोट बैंक न सिर्फ बिगाड़ सकती है बल्कि भड़का भी सकती है। सोशल मीडिया पर इन दिनों जिस तरह की चर्चा चल रही है, उसको देख कर बीजेपी के मामले में भी ऐसा ही लग रहा है। एक तरफ विजय कुमार सिन्हा का त्याग-तपस्या-बलिदान वाला बयान और दूसरी तरफ श्रेयसी सिंह की चुप्पी। उधर नीतीश ने इसी बहाने अपनी तरफ से मरहम लगा दिया। समझिए कैसे। बिहार में बीजेपी से कोर वोटर हुए नाराज बिहार में बीजेपी को सत्ता में लाने में भूमिहार ब्राह्मणों का बड़ा हाथ माना जाता रहा है। 2005 में जब ये वोटर लालू प्रसाद यादव के चलते कांग्रेस से बिदके थे, तो उन्होंने अपना सारा समर्थन बीजेपी की झोली में डाल दिया। पटना का बिक्रम विधानसभा क्षेत्र हो या फिर बेगूसराय में 2015 को छोड़ बाकी विधानसभा चुनाव। भूमिहार ब्राह्मण और ब्राह्मण बिरादरी बहुल क्षेत्रों में लोगों ने बीजेपी को हाथों-हाथ लिया। हालांकि कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस को फिर से इसी समाज का समर्थन मिला और उसने वापसी भी की। लेकिन अब यही समाज बीजेपी से फिर से नाराज है। और तो और बीजेपी के कुछ चुनिंदा 'राय' यानी यादव वोटर भी नाराज दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर दिख रही नाराजगी सोशल मीडिया साइट्स पर आप जाएंगे तो आपको कई ऐसे पोस्ट मिलेंगे, जिसमें खुल कर बिहार बीजेपी को कोसा जा रहा है। यहां तक कहा जा रहा है कि बीजेपी को जब सरकार बनाने का मौका मिला तो अपने उन कोर वोटरों को ही भूल गई, जिसने उन्हें सत्ता के इस मुकाम तक पहुंचाया। अपनी पार्टी के किसी नेता को छोड़ बाहर से आए चेहरे पर भरोसा किया गया। ऐसे में कोर वोटरों को सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनाए जाने से ज्यादा ऐतराज अपनी अनदेखी का है। वहीं जिस तरह से सियासी हवा में श्रेयसी सिंह का नाम तैरा, उसके बाद राजपूत वोटरों के एक तबके में भी नाराजगी दिख रही है। इन सबका असर भी देखने को मिला। बिहार में पहली बार बीजेपी सत्ता की ड्राइविंग सीट पर है, लेकिन इसकी खुशी बीजेपी के ज्यादातर कार्यकर्ताओं में ही नहीं दिख रही है। कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि एक बार पटना बीजेपी ऑफिस घूम आइए, आपको सहज अंदाजा मिल जाएगा।     2005 में बीजेपी को नीतीश के जरिए सत्ता में लाने में सवर्ण वोटरों की बड़ी भूमिका     सवर्ण वोटरों ने बीजेपी को एकजुट होकर एकमुश्त वोट दिया था और देते रहे     लेकिन अब नए समीकरण गढ़ने पर बीजेपी को यही वोटर सुना रहे     नाराजगी सम्राट चौधरी को सीएम बनाने से नहीं बल्कि अपनी अनदेखी होने से नीतीश ने इसी मौके का उठाया फायदा पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की गद्दी तो छोड़ दी लेकिन जाते-जाते उन्होंने जातीय समीकरणों की ऐसी गोटी फिट की, जो भले ही सरकार को बनाए रखने में नींव का काम करे। लेकिन बीजेपी के लिए मुसीबत ही बनेगी। नीतीश कुमार ने अपने भरोसेमंद मंत्री विजय कुमार चौधरी (भूमिहार) और बिजेंद्र प्रसाद यादव (यादव) को उपमुख्यमंत्री बनवाकर बीजेपी के कोर वोटरों के दिल पर मरहम लगा दिया। बात ये रही कि कुर्मी जाति से किसी को बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली, तो जदयू में निशांत के नाम और राजनीति में आने के बाद संतुष्टि है, नाराजगी नहीं। अब क्या करेगी बीजेपी? ये फैसला कोई नहीं कर सकता कि बीजेपी क्या करेगी? ये पूरी तरह से उसका अंदरुनी मसला है, लेकिन विधायक दल की बैठक के बाद जिस तरह से विजय कुमार सिन्हा ने त्याग-तपस्या-बलिदान और कमांडर वाली बात की, उससे उन्होंने काफी हद तक बीजेपी में भूमिहार वोटरों की सहानुभूति अपनी ओर खींच ली। ऐसे में अब बिहार बीजेपी के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है कि वो अपने कोर वोटरों को मनाए कैसे, क्योंकि ये वोटर ऐसी जमात है जो नाराज होने पर शिफ्ट होने में देर नहीं करते। अब बीजेपी इन्हें फिर से कैसे पाले में लाती है, जाहिर है इसके लिए उसके थिंक टैंक में मंथन जरूर हो रहा होगा।

गन्ना खेती होगी आधुनिक, किसानों को मशीनें किराये पर मिलेंगी

पटना  बिहार सरकार ने राज्य में गन्ना की खेती को आधुनिक बनाने के साथ ही छोटे और सीमांत किसानों की लागत कम करने के उद्देश्य से गन्ना उत्पादक वाले जिलों में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ (गन्ना सेवा केंद्र) स्थापित करने का निर्णय है लिया है । इसका मुख्य उद्देश्य मशीनीकरण को बढ़ावा देना, गन्ने की खेती में लागत को कम करना और उत्पादन को बढ़ाना है। विदित हो कि राज्य में गन्ना की खेती विस्तार करने के उद्देश्य से गन्ना उद्योग विभाग द्वारा कई योजनाएं शुरू की गई है, ताकि किसान गन्ना की खेती की तरफ आकर्षित हो सकें। किसानों को फायदा गन्ना की खेती को बढ़ावा देने के लिए गन्ना उद्योग विभाग द्वारा राज्य के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में गन्ना सेवा केंद्र की स्थापना करने का निर्णय लिया है, ताकि गन्ना की खेती करने के लिए किसान इस सेंटर से आधुनिक मशीनों को किराये पर ले सकेंगे। लघु एवं सीमांत किसानों को महंगी मशीन खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उनके जरूरत के समय इस सेंटर पर मशीनें उपलब्ध रहेंगी। बताया जाता है कि राज्य में ज्यादातर छोटे और सीमांत गन्ना किसान हैं, जिन्हें खेती के दौरान लंबे समय से विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ता है। गन्ना किसानों की समस्या जिसमें खेती की लागत बहुत अधिक होना और उत्पादन कम होना, अत्याधुनिक मशीनों का आभाव एवं मजदूरों के भरोसे ज्यादातर काम कराना शामिल है। गन्ना की खेती करने में भूमि की तैयारी से लेकर उसके बुवाई और कटाई जैसे काम हाथ से होने के कारण प्रति एकड़ लागत बहुत बढ़ जाती है। इसको देखते हुए गन्ना उद्योग विभाग ने जिलों में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। यहां उपलब्ध मशीनें गन्ना खेती के पूरे चक्र के लिए रहेंगी, जिससे की किसानों को मिट्टी की तैयारी करने से लेकर बीज उपचार, बुवाई, सिंचाई सहायता और कटाई में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही किसानों को प्रति एकड़ लागत कम होगी, समय पर खेती के काम होंगे और गन्ना का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ेंगे। गन्ना सेवा केंद्र ये सीएचसी आगे चलकर 'गन्ना सेवा केंद्र' के रूप में भी काम करेंगे। यह किसानों के लिए एक वन-स्टॉप समाधान होगा। यहां किसानों को खेती से जुड़ी सलाह, नई किस्मों की जानकारी, सरकारी योजनाओं और सब्सिडी की जानकारी, मिल और बाजार से जुड़ाव के बारे में भी जानकारी मिलेगी। इससे किसानों का समय और खर्च दोनों बचेंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिलेगा।  

परिवहन मंत्री ने PRTC कंडक्टर के परिवार को 40 लाख रुपये की सहायता दी, ड्यूटी के समय हुई थी मृत्यु

चंडीगढ़  वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल चीमा ने आज पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) के दिवंगत कंडक्टर रमनदीप सिंह के परिवार के साथ गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें 40 लाख रुपये का बीमा चेक भेंट किया। रमनदीप सिंह ने ड्यूटी के दौरान दुखद रूप से अपनी जान गंवा दी थी। जिला श्री मुक्तसर साहिब के गांव घुमियारा के निवासी रमनदीप सिंह 2 जनवरी 2017 को आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से पीआरटीसी में कंडक्टर के रूप में भर्ती हुए थे। इस अवसर पर मंत्री द्वारा मृतक के पिता प्रगट सिंह को यह चेक सौंपा गया। मंत्री ने कहा कि यह मुआवजा पीआरटीसी और पंजाब एंड सिंध बैंक के बीच हुए बीमा समझौते के तहत निर्धारित कॉर्पोरेट बीमा शर्तों के अनुसार प्रदान किया गया है, जिसका उद्देश्य शोकग्रस्त परिवार को आर्थिक सहायता देना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि पंजाब सरकार अप्रत्याशित कार्यस्थल हादसों के मद्देनज़र अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों की भलाई और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस मौके पर पीआरटीसी के चेयरमैन हरपाल जुनेजा, मैनेजिंग डायरेक्टर बिक्रमजीत सिंह शेरगिल तथा पंजाब एंड सिंध बैंक के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे और उन्होंने परिवार के साथ संवेदना व्यक्त की।  

ओंकारेश्वर में शंकराचार्य प्रकटोत्सव की धूम, मोहन यादव ने मांधाता पर्वत पर किया उद्घाटन

ओंकारेश्वर  देश में एकात्म धाम के रूप में विकसित आचार्य शंकराचार्य की तीर्थस्थली ओंकारेश्वर में आज शुक्रवार से एकात्मक पर्व का शुभारंभ किया गया है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर स्थित एकात्म धाम पहुंचकर 5 दिवसीय प्रकटोत्सव का शुभारंभ किया. इस अवसर पर उनके साथ जगतगुरु शंकराचार्य सदानंद सरस्वती के अलावा स्वामी शारदानंद सरस्वती एवं सुश्री निवेदिता भिड़े आदि मौजूद रहे. मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के शुभारंभ में पंचांग पूजन और यज्ञ वेदी के पूजन के साथ प्रकटोत्सव का शुभारंभ किया।  ओडिसी नृत्य की होगी प्रस्तुति आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस आयोजन में अद्वैत वेदांत की समकालीन परंपराओं पर विस्तृत चर्चा की गई. साथ ही अद्वैत एवं Gen-Z जैसे महत्वपूर्ण एवं समसामयिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हो रही है. इस दौरान स्वामी ब्रह्मा प्रज्ञानंद सरस्वती शतावधानी ललित द्वितीय एवं विशाल चौरसिया जैसे मर्मज्ञ अद्वैत की व्याख्या करेंगे. इस दौरान जय तीर्थ मेवुडी का शास्त्री गायन और सुवधावराड़ कर के ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति भी होगी।  यह प्रतिमा स्वामी शंकराचार्य के 12 वर्षीय बाल रूप को दर्शाती है, जिसका अनावरण 21 सितंबर 2023 को हुआ था. इसके बाद यहां एक विशाल संग्रहालय जो शंकराचार्य के जीवन दर्शन और भारतीय संस्कृति के गौरव को प्रदर्शित करता है विकसित किया गया है. यहां अद्वैत वेदांत के अध्ययन और अनुसंधान के लिए एक वैश्विक केंद्र भी स्थापित किया गया है. बता दें कि, मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की अध्यक्षता में मई 2025 में आयोजित कैबिनेट में 'अद्वैत लोक' संग्रहालय के निर्माण के लिए 2,195 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है।  जागरण का सुंदर संगम इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा-आद्य गुरु शंकराचार्य की पावन स्मृति और अद्वैत वेदांत के सार्वभौमिक संदेश को आम जन तक पहुंचाने के लिए एकात्म धाम, ओंकारेश्वर में आयोजित आचार्य शंकर प्रकटोत्सव  एकात्म पर्व में शामिल होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। यह उत्सव भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और एकात्म भाव के जागरण का सुंदर संगम है। अद्वैत का संदेश हमें याद दिलाता है कि पूरी सृष्टि एक ही चेतना से भरी हुई है।  अद्वैत दर्शन को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल ‘एकात्म पर्व’ के माध्यम से अद्वैत वेदांत के गूढ़ सिद्धांतों को सरल और आधुनिक तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। खासतौर पर युवाओं को भारतीय दर्शन से जोड़ने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझ सकें। आधुनिकता और अध्यात्म का संगम महोत्सव में अद्वैत दर्शन को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पर्यावरण और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर चर्चा से यह आयोजन नई सोच और आध्यात्मिकता का अनूठा मेल प्रस्तुत कर रहा है।  समापन में युवा शक्ति का सम्मान कार्यक्रम के अंतिम दिन नर्मदा तट पर दीक्षा समारोह आयोजित होगा, जिसमें सैकड़ों युवा ‘शंकरदूत’ के रूप में जुड़ेंगे। साथ ही अद्वैत दर्शन के प्रचार में योगदान देने वालों को सम्मानित किया जाएगा। मांधाता पर्वत पर शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची मूर्ति एकात्म धाम मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर मांधाता पर्वत पर स्थित एक भव्य आध्यात्मिक केंद्र है, जो अद्वैत वेदांत के दार्शनिक आदि गुरु शंकराचार्य को समर्पित है. यहां आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची स्टैचू ऑफ वननेस स्थापित की गई है. जो अद्वैत लोक संग्रहालय और अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद वेद संस्थान परिसर में स्थित है। 

मध्य प्रदेश में लू का कहर, नर्मदापुरम में तापमान 43 डिग्री, स्कूलों का समय हुआ बदल

भोपाल  मध्य प्रदेश में गर्मी ने अप्रैल में ही अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है. सूरज की तेज तपिश और झुलसाने वाली गर्म हवाओं से जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. गुरुवार को नर्मदापुरम 43 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे गर्म जिला बन गया है, वहीं आज भी एमपी के 20 जिलों में लू का येलो अलर्ट जारी किया गया है. इधर, तेज गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने भी बच्चों को हीट वेव से बचाने के लिए कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव कर दिया है. मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल गर्मी से राहत के संकेत नहीं दिए हैं, जिससे आने वाले दिनो में असर और व्यापक हो सकता है। पारा 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। आसमान से बरसती इस आग के बीच नौनिहाल स्कूल जाने को मजबूर हैं, जिससे उनका हाल बेहाल है।  नर्मदापुरम में 43 डिग्री, कई शहर 40 के पार गुरुवार को नर्मदापुरम में पारा 43 डिग्री तक पहुंचकर इस सीजन में अधिकतम रिकार्ड बना चुका है. वहीं रतलाम 42.8 डिग्री के साथ दूसरे स्थान पर है. दमोह और मंडला में 42 डिग्री, शाजापुर में 41.8 डिग्री और गुना में 41.7 डिग्री तापमान दर्ज किया गया है. मलाजखंड, टीकमगढ़ और छिंदवाड़ा में भी पारा 41.5 डिग्री तक पहुंच गया है. उमरिया और श्योपुर 41.4 डिग्री, जबकि धार और खजुराहो 41 डिग्री पर दर्ज किए गए. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे बड़े शहर भी 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुके हैं।  28 जिलों में 40 से 41 डिग्री तापमान दर्ज नर्मदापुरम शहर प्रदेश का सबसे गर्म रहा जहां पारा 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके साथ रतलाम में 42.8 और दमोह मंडला में 42-42 सहित 28 जिलों में 40 से 41 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। जो नार्मल टेंपरेचर से 4 से 5 डिग्री अधिक है।  सीजन में पहली बार भोपाल में पारा 40.5 डिग्री पहुंचा भोपाल में इस दौरान दिन का अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया,जो सीजन का सबसे गर्म दिन था। यहां 10 साल में तीसरी बार 20 अप्रैल से पहले इतनी गर्मी रही। इससे पहले  2016 में 42.6 डिग्री और 2017 में 42.7 डिग्री दर्ज हुआ था। इसके अलावा जबलपुर में 41.4, ग्वालियर में 40.5,इंदौर में 40.1,उज्जैन में 40.7 के करीब तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है, कुछ जिलों में 2-3 तो कुछ में एक से दो डिग्री तापमान बढ़ सकता है,वही हीट वेव चलने से लोगों को और परेशानियां होगी। आज 20 जिलों में लू का खतरा मौसम केंद्र भोपाल ने आज के लिए 20 जिलों में लू की चेतावनी जारी की है. इनमें रतलाम, झाबुआ, धार, अलीराजपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला और बालाघाट जैसे जिले शामिल हैं. मौसम वैज्ञानिक दिव्या ई सुरेंद्रन ने बताया कि, ''उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय तेज जेट स्ट्रीम और चक्रवातीय परिसंचरण की वजह से गर्म हवाओं का असर बढ़ रहा है. आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की आशंका है।   कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने स्कूली बच्चों को राहत देने के लिए अहम कदम उठाए हैं. अनूपपुर और डिंडौरी में स्कूलों का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक कर दिया गया है. डिंडौरी में यह आदेश नर्सरी से 8वीं तक लागू किया गया है. वहीं इंदौर, छिंदवाड़ा, सागर, देवास और अशोकनगर में भी कलेक्टरों ने स्कूल टाइम घटाने के निर्देश दिए हैं।  कुछ दिन तक राहत के आसार नहीं मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, ''प्रदेश में मौजूदा मौसम का सिस्टम काफी जटिल बना हुआ है. उत्तर हरियाणा और उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश के ऊपर चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय है. इसके साथ ही राजस्थान से मणिपुर तक ट्रफ लाइन गुजर रही है. एक अन्य ट्रफ लाइन मध्य प्रदेश से तमिलनाडु तक फैली हुई है. इन सबके बावजूद गर्मी से तत्काल राहत मिलने के संकेत नहीं हैं. मौसम विभाग के अनुसार 19-20 अप्रैल को कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन इससे तापमान में ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं है। 

सीएम मान का सवाल: परिसीमन के बाद पंजाब में लोकसभा सीटें 13 से बढ़कर 19 हो सकती हैं

चंडीगढ़  केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन कानून के लागू होने पर पंजाब की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नई व्यवस्था के तहत लोकसभा और विधानसभा सीटों में बढ़ोतरी के साथ राजनीतिक समीकरण भी बदलेंगे और दलों को नई रणनीति बनानी पड़ेगी।  अनुमान है कि परिसीमन के बाद पंजाब में लोकसभा सीटों की संख्या 13 से बढ़कर 19 हो सकती है जबकि विधानसभा सीटें 117 से बढ़कर करीब 140 तक पहुंच सकती हैं। इसके चलते नए हलकों का गठन होगा और कई शहर व गांव अपने पुराने क्षेत्रों से बदल जाएंगे जिससे चुनावी गणित पर सीधा असर पड़ेगा। सियासत भी गरमाई इस मुद्दे पर प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि परिसीमन किसी एक पार्टी के फायदे के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि या तो महिला आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर लागू किया जाए या सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ाई जाएं। मान ने आरोप लगाया कि जहां भाजपा मजबूत है वहां सीटें बढ़ाने और जहां कमजोर है वहां संख्या कम रखने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि परिसीमन निष्पक्ष होना चाहिए और इसके लिए आगामी जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किया जाना चाहिए। आप नेता मनीष सिसोदिया ने भी आरोप लगाया कि विधेयक की आड़ में सीटों की संरचना से छेड़छाड़ की जा रही है जो देश की जनसांख्यिकी के खिलाफ है। वहीं शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा कि इस कदम से सत्ता संतुलन हिंदी भाषी राज्यों की ओर झुक सकता है जिससे संघीय ढांचा कमजोर होगा। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन की कड़ी आलोचना की है।  इन बिलों से पंजाब में लोकसभा की करीब 6-7 सीटें बढ़ेंगी और इतनी ही सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएंगी। हालांकि महिलाओं के लिए रिजर्व सीटों की हर साल रोटेशन भी होगी। परिसीमन क्या है? परिसीमन का अर्थ है लोकसभा या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करने की प्रक्रिया. ये काम जनसंख्या के आधार पर किया जाता है. इसके लिए अलग से एक आयोग बनता है. इसका नोटिफिकेशन भारत राष्ट्रपति की ओर से जारी किया जाता है. परिसीमन आयोग के आदेशों को किसी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती है. इसके आदेशों की कॉपी लोकसभा और विधानसभा में रखी जाती है, लेकिन उन्हें इसमें संशोधन करने की परमिशन नहीं होती।  लोकसभा सीटों में होगा 50% का इजाफा गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में भरोसा दिया कि महिला आरक्षण के लागू होने से न तो पुरुषों को और न ही किसी राज्य को कोई नुकसान होगा. इसके तहत लोकसभा की मौजूदा संख्या में 50% का इजाफा होगा. अगर नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 बना रहता है, तो 2029 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण संभव नहीं होगा, क्योंकि यह अगली जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगा. अब जानिए, किन राज्यों में कितनी बढ़ जाएंगी सीटें? अकेले यूपी-बिहार में होंगी 180 सीटें परिसीमन का सबसे बड़ा फायदा उत्तर प्रदेश और बिहार को होगा. 2011 में यूपी की आबादी देश की कुल आबादी का 16% थी. इस लिहाज से अगर लोकसभा में राज्यों के लिए लोकसभा की सीटें 815 होंगी, तो जनसंख्या के लिहाज से यूपी की 80 सीटों में 40 सीटों का इजाफा होगा. यानी कुल 120 सीटें हो जाएंगी. इसी तरह बिहार में अभी 40 सीटें हैं. परिसीमन के बाद इसमें 20 सीटों का इजाफा होगा और कुल 60 सीटें हो जाएंगी।  गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड और दिल्ली गुजरात में अभी लोकसभा की 26 सीटें हैं, जो बढ़कर 39 हो जाएंगी. राजस्थान में 25 सीटें हैं, जो 38 हो जाएंगी. उत्तराखंड में 5 सीटें हैं, जो 8 हो जाएंगी. दिल्ली में 7 लोकसभा सीटें हैं, ये बढ़कर 11 हो सकती हैं. इसके अलावा विधानसभा की सीटों में भी 50% की बढ़ोतरी की जाएगी. इससे विधानसभा की कुल सीटें 4123 से बढ़कर 6186 हो जाएंगी।   

स्पाइसजेट की नई नाइट फ्लाइट से यात्रियों को बड़ी सुविधा

  जयपुर गुलाबी नगरी जयपुर (Jaipur) से माया नगरी मुंबई (Mumbai) के बीच सफर करने वाले हवाई यात्रियों के लिए आज का दिन नई सहूलियतें लेकर आया है. गुरुवार रात से दोनों शहरों के बीच एक नई फ्लाइट सेवा (New Flight Service Jaipur) का आगाज हो गया है, जिसने जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jaipur International Airport) की कनेक्टिविटी को और भी ज्यादा मजबूत कर दिया है. इस नई सेवा के शुरू होने के साथ ही अब जयपुर और मुंबई के बीच रोजाना संचालित होने वाली उड़ानों की कुल संख्या 11 पहुंच गई है. यानी अब यात्रियों के पास अपनी सुविधा के अनुसार फ्लाइट चुनने के लिए पहले से कहीं अधिक विकल्प मौजूद हैं. स्पाइसजेट की फ्लाइट का नया शेड्यूल इस नई सेवा की कमान स्पाइस जेट एयरलाइंस (SpiceJet) ने संभाली है. कंपनी ने अपनी फ्लाइट संख्या SG-169 और SG-170 को इस रूट पर तैनात किया है, जिसका संचालन गुरुवार रात से प्रभावी हो गया है. शेड्यूल के अनुसार, यह विमान मुंबई से उड़ान भरकर रात 10:35 बजे जयपुर पहुंच गया है. इसके तुरंत बाद, यही विमान जयपुर से अपनी वापसी यात्रा शुरू करता है. इस नई सर्विस के आने से जयपुर एयरपोर्ट पर रात के समय यात्रियों की चहल-पहल और बढ़ने की उम्मीद है. लेट नाइट यात्रियों के लिए वरदान फ्लाइट के समय को लेकर यात्रियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है. जयपुर एयरपोर्ट से यह फ्लाइट रात 11:25 बजे मुंबई के लिए रवाना होती है. यह लेट नाइट स्लॉट विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए डिजाइन किया गया है जो अपने दिन भर के काम या बिजनेस मीटिंग्स निपटाकर रात में सफर करना चाहते हैं. जानकारों का मानना है कि उड़ानों की संख्या 11 तक पहुंचने से न केवल कनेक्टिविटी सुधरी है, बल्कि इससे आने वाले दिनों में किराए में भी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा लाभ आम जनता को होगा.

पटना का कुख्यात गैंगस्टर भोला सिंह गिरफ्तार, फर्जी पहचान से रह रहा था गुजरात में

पटना  बिहार के मोस्ट वांटेड क्रिमिनल भोला सिंह को CBI की टीम ने गुजरात से दबोच लिया है। सूरत से गिरफ्तार भोला सिंह पटना जिले के पंडारक का रहने वाला है। वो अपना नाम बदल कर सूरत में रह रहा था। उसकी गिरफ्तारी अपहरण के 12 साल पुराने मामले में हुई है। बिहार का वांटेड भोला सिंह गिरफ्तार भोला सिंह को बिहार अलग-अलग थानों की पुलिस भी ढूंढ रही थी। उस पर इन थानों में 11 केस दर्ज हैं। भोला सिंह किडनैपिंग, मर्डर समेत कई बडे़ अपराधों का आरोपी है। बिहार पुलिस अब भोला सिंह को रिमांड पर लेने की तैयारी में है। उधर सीबीआई के अनुसार कोलकाता के दो लोग 14 जुलाई 2014 को ही गायब हुए थे। पुलिस जांच के बाद कोलकाता हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद CBI ने इस केस में भोला सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की थी। 11 साल से फरार भोला को CBI ने दबोचा भोला सिंह इस केस में 11 साल से फरार था। 2015 में सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की थी और तभी से भोला सिंह अंडरग्राउंड हो गया था। भोला सिंह ने सूरत में अमित शर्मा के नाम से फर्जी आईडी बनवा ली थी और सूरत जाकर भूमिगत हो गया था। सीबीआई ने इसी बीच टेक्निकल सर्विलांस के साथ मुखबिरों का जाल बिछाया तो उसके ठिकाने का पता चल गया। इसके बाद ट्रैप लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई के गिरफ्तार किए जाने के बाद भोला सिंह को कोलकाता पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है।     कभी मोकामा विधायक अनंत सिंह के लिए काम करता था भोला सिंह     अनंत सिंह के साथ NTPC में भोला सिंह करता था ठेकेदारी     15 साल पहले अनंत सिंह से हुआ विवाद तो हो गया अलग     बाद में भोला के भाई मुकेश ने अनंत सिंह के साथ कर ली थी सुलह CRPF कमांडो की ट्रेनिंग ले रखी है भोला ने पटना जिले से सटे पंडारक का रहने वाला भोला सिंह CRPF में भी भर्ती हुआ था और कमांडो की ट्रेनिंग भी ली थी। इसके बाद एक बाहुबली के साथ भोला सिंह ने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। कई बड़ी वारदातों को अंजाम देने के बाद भोला सिंह फरार हो गया था। उस वक्त पुलिस ने भोला और उसके भाई मुकेश पर 3 लाख रुपयों का इनाम भी रखा था। बाद में मुकेश सिंह ने आत्मसमर्पण कर बेल ले ली थी। 3 लेयर सिक्योरिटी में रहता था गैंगस्टर भोला सिंह गैंगस्टर भोला सिंह अपनी सुरक्षा को लेकर भी हद से ज्यादा सतर्क रहता था। उसने अपने लिए 3 लेयर सिक्योरिटी बनाई थी, जिसमें कुख्यात शूटर उसकी सुरक्षा करते थे। भोला सिंह ने साल 2008 में अनंत सिंह के रिश्तेदार विवेका पहलवान के भाई कॉन्ट्रैक्टर संजय सिंह की हत्या की थी। 2010 में उसकी दुश्मनी उसी बाहुबली के साथ हो गई, जिसके साथ उसने काम शुरू किया था। तब 2 करोड़ रुपयों के विवाद में भोला बाहुबली के खिलाफ हो गया था। पटना में ही 2013 में उसने खुलेआम कुख्यात राजीव सिंह को गोलियों से भून मौत के घाट उतार दिया था

बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार मई के पहले सप्ताह में, 70% पुराने चेहरे रहेंगे

पटना  बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार मई के पहले सप्ताह में होगा। यह विस्तार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद होगा। चुनावों के नतीजे 4 मई को आएंगे। हालांकि संभावना यही है कि बिहार का नया मंत्रिमंडल कोई खास सरप्राइज देने वाला नहीं होगा। कैबिनेट में करीब 70 प्रतिशत वही चेहरे होंगे जो नीतीश कुमार की पिछली सरकार के मंत्रिमंडल में थे। बीजेपी क्यों कर रही 5 विधानसभा चुनावों के नतीजों का इंतजार? बताया जाता है कि पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए सबसे खास है। इस चुनाव में दो चरणों में 23 और 29 मई को मतदान होना है। इससे पहले बीजेपी के तमाम बड़े नेता बंगाल में चुनाव प्रचार में जुटे हैं। यानी इस महीने बीजेपी के नेता फुरसत में नहीं हैं। दूसरी तरफ बिहार में पहली बार बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार बनी है। वह सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद होने वाले शपथ समारोह को भव्य बनाना चाहती है। बीजेपी चाहती है कि शपथ समारोह में पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहें। यही कारण है कि वह पश्चिम बंगाल सहित असम, तमिलनाडु, केरल और पुद्दुचेरी के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने का इंतजार कर रही है। उसे इस चुनाव में असम के साथ बंगाल में भी बीजेपी का परचम लहराने की उम्मीद है। इसी आशा में वह बिहार के शपथ समारोह में दोहरा जश्न मनाना चाहती है। नई कैबिनेट में 70 प्रतिशत पुराने चेहरे दिखने के आसार बिहार में सम्राट चौधरी की नई सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार 4 मई के बाद होने के आसार हैं। संभावना यही है कि बिहार सरकार के इस नए मंत्रिमंडल में 70 प्रतिशत मंत्री वही होंगे, जो इससे पहले नीतीश कुमार सरकार की कैबिनेट में थे। बताया जाता है कि शेष करीब 30 फीसदी मंत्री जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को साधते हुए बनाए जा सकते हैं। पिछली सरकार के कई मंत्रियों के बदल सकते हैं विभाग बिहार सरकार में पिछली सरकार के मंत्रियों में से कई के विभाग बदले जा सकते हैं। उनमें से कई को अधिक महत्वपूर्ण विभाग दिए जा सकते हैं। बताया जाता है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, जल संसाधन और वित्त जैसे विभाग पुराने मंत्रियों को ही दिए जा सकते हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के मुताबिक कैबिनेट में विस्तार पर अंतिम निर्णय बैठक में होगा। सम्राट चौधरी का कहना है कि बिहार में अब मोदी और नीतीश मॉडल चलेगा। उन्होंने अब नीतीश मॉडल के साथ पीएम मोदी का भी नाम जोड़ दिया है। पूर्व में सिर्फ नीतीश मॉडल की बात कही जाती रही थी। सत्ता के बंटवारे का समीकरण बताया जाता है कि नए मंत्रिमंडल में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाईटेड ( जेडीयू ) से ज्यादातर मंत्री पुराने ही होंगे। बीजेपी के कोटे से उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम), चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपी-आर) और जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा। एलजेपी-आर को दो, आरएलएम को एक और ‘हम’ को एक मंत्री पद मिल सकता है। बताया जाता है कि सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले मंत्रियों में से किसी को भी दो से अधिक विभाग नहीं दिए जाएंगे।