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लखनऊ में दवा कीमतें बढ़ीं, इंसुलिन और जरूरी मेडिसिन हुईं महंगी

 लखनऊ  महंगाई की मार अब रोगियों पर भी पड़ने लगी है। डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की दवाओं की कीमतों में 15-20 प्रतिशत तक वृद्धि कर दी गई है। पिछले साल भी करीब 10-15 प्रतिशत तक इजाफा हुआ था जिसका सीधा असर मधुमेह रोगियों की जेब पर पड़ रहा है। डायबिटीज से ग्रसित मरीजों को जीवनभर नियमित दवाएं और इंसुलिन लेनी पड़ती हैं। खासकर, डायबिटीज-1 के रोगी इंसुलिन पर निर्भर होते हैं। दवा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों, आयात लागत और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी के कारण फार्मा कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं। लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता विकास रस्तोगी का कहना है कि डायबिटीज की कई दवाओं में इस्तेमाल होने वाला एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट विदेशों से आयात किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल और शिपिंग लागत बढ़ने से दवाओं की उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है हाल के वैश्विक तनावों और सप्लाई चेन प्रभावित होने का असर भी दवा उद्योग पर पड़ा है। लखनऊ में डायबिटीज की दवाओं और इंसुलिन का सालाना करीब 80-90 करोड़ रुपये की खपत है। डायबिटीज के मरीजों का मासिक खर्च अब पहले की तुलना में 20 प्रतिशत तक बढ़ेगा। नई तकनीक वाली दवाओं और इंजेक्शन का उपयोग करने वाले मरीजों पर यह खर्च और अधिक पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह कई कंपनियों ने नई रेट लिस्ट जारी की हैं। कुछ ब्रांडेड दवाओं की कीमतों में पहले ही 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि आने वाले समय में यह वृद्धि 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। डायबिटीज रोगी सर्वाधिक प्रभावित उत्तर प्रदेश में करोड़ों लोग डायबिटीज रोग से पीड़ित हैं। ऐसे मरीजों को रोजाना दवाएं लेनी पड़ती हैं। दाम बढ़ने का असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के मरीजों पर सीधे पड़ता है। कई मरीज पहले ही महंगी दवाओं के कारण इलाज बीच में छोड़ देते हैं, ऐसे में कीमतों में और वृद्धि चिंता बढ़ाने वाली है। आईसीएमआर एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में लगभग 4.9% वयस्क आबादी मधुमेह से पीड़ित है। हालांकि, यूपी में मधुमेह की दर देश में सबसे कम है, लेकिन चिंता की बात यह है कि यहां 18% लोग प्री-डायबिटिक हैं, जो भविष्य में डायबिटिक हो सकते हैं। दवा का नाम                                          पुराना दाम (₹)              नया दाम (₹) इंसुलिन ह्यूमलाग मिक्स-25 कार्ट्रिज              5,350                         6,000 रोजडे टैबलेट                                           212                            235 इस्टामेट टैबलेट                                       175                           195     दवाओं के दाम बढ़ाने-घटाने का निर्णय केंद्र सरकार करती है। हालांकि, हमारे विभाग को डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की दवाएं महंगी होने की कोई सूची नहीं मिली है। सोमवार को इसके बारे में जानकारी करने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।                                      ब्रजेश कुमार, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन

स्वगणना प्रक्रिया शुरू, अनाज वाले सवाल पर बढ़ी चर्चा

लखनऊ यूपी में जनगणना 2027 के लिए स्वगणना शुरू हो चुकी है। अब लोग स्वगणना करा रहे हैं। पूछे जाने वाले सवाल उनको परेशान कर रहे हैं। परिवार कौन से मुख्य अनाज का उपयोग करता है? इसके विकल्प है गेहूं, चावल, बाजरा। अब उत्तर भारत में मुख्य रूप से गेहूं और चावल दोनों का उपयोग किया जाता है। समस्या यह है कि दोनों को विकल्प के रूप में नहीं रखा जा सकता है। अगर गेहूं चुनेंगे तो चावल मिट जाएगा और चावल विकल्प में चुनेंगे तो गेहूं मिट जाएगा। लोगों का कहना है कि एक साथ दोनों क्यों नहीं रखा जा सकता है। सहायक निदेशक जनगणना जेके श्रीवास्तव का कहना है कि इस सवाल को रखने का मुख्य उद्देश्य था कि किस क्षेत्र के लोग कौन सा मुख्य अनाज खाते हैं। जिससे आगे कुछ योजनाएं बनानी हो तो उसके अनुसार की जाए। प्रयागराज डीएम, मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस वक्त स्वगणना हो रही है। तीन दिनों में अच्छा रिस्पांस मिला है। हम जिले के सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वो स्वगणना में हिस्सा लें और अपना फॉर्म समय रहते भरें। ऐसा करने पर बाद में किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। इस पोर्टल पर कराएं स्वगणना http://se.census.gov.i n पोर्टल पर जाकर अपना राज्य, जिला भरकर भाषा व मोबाइल नंबर डालें और ओटीपी के बाद परिवार का मुखिया, गूगल मैप पर घर की लोकेशन भरने के बाद पूछे गए सवालों के जवाब देकर आसानी से स्वगणना कराई जा सकती है। अफसरों का कहना है कि प्रक्रिया में 10 से 15 मिनट का वक्त लगता है। छह हजार से अधिक ने करा ली स्वगणना आंकड़ों के अनुसार प्रयागराज में अब तक छह हजार से अधिक लोगों ने स्वगणना करा ली है। तीसरे दिन यूथ एवं स्पोर्ट्स डे के रूप में मनाया गया। जिला जनगणना अधिकारी विनीता सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग के अध्यक्ष सहित हंडिया तहसील व जसरा ब्लॉक के खिलाड़ियों, ग्रुप मुख्यालय 15 यूपी बटालियन के एनसीसी कैडेटों, अफसरों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों ने अपना स्वगणना फॉर्म भरा व इसे ऑनलाइन भी किया। जिला जनगणना अधिकारी ने बताया कि अभियान 21 मई तक चलेगा। उन्होंने प्रत्येक वर्ग से अपील की है कि सभी लोग आवेदन करें और जनगणना 2027 में सहयोग करें। 22 मई से 20 जून के बीच जब प्रगणक उनके घर आएं तो उसे अपने स्वगणना के बाद मिले नंबर को जरूर बताएं।

योगी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल: 8 नेताओं को मिला मंत्री पद, जातीय संतुलन पर फोकस

 लखनऊ  योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार दोपहर 3.30 बजे से जन भवन में हुआ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आठ मंत्रियों पद की शपथ दिलाई। भूपेन्द्र चौधरी और मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री और डॉ. सोमेंद्र तोमर व अजीत पाल ने राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के पद की शपथ ली। इनके साथ कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेन्द्र दिलेर व हंसराज विश्वकर्मा ने राज्यमंत्री के पद की शपथ ली। योगी आदित्यनाथ सरकार 2.0 में अभी मुख्यमंत्री, दो उपमुख्यमंत्री समेत 21 कैबिनेट मंत्री हैं। इनके साथ 14 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 18 राज्य मंत्री हैं। सरकार में 54 मंत्री हैं तो अधिकतम 60 मंत्री ही बनाये जा सकते है। बिना किसी को मंत्रिमंडल से हटाए आठ को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। योगी आदित्यनाथ सरकार एक में कैबिनेट मंत्री रहे पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी व रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री के पद की शपथ ली। इनके साथ अति पिछड़ी जाति से आने वाले वाराणसी के विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, फतहेपुर की खागा सीट से विधायक अनुसूचित जाति की कृष्णा पासवान, अलीगढ़ के खैर से विधायक सुरेन्द्र दिलेर और कन्नौज के तिर्वा से विधायक कैलाश सिंह राजपूत ने पहली बार राज्यमंत्री के पद की शपथ ली। इन मंत्रियों ने ली पद की शपथ उत्तर प्रदेश जन भवन में आज आठ मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। इनमें दो राज्यमंत्रियों के कद में बढ़ोतरी गई है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी व मनोज कुमार पाण्डेय ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली। चौधरी इससे पहले योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार (2017-2022) में  पंचायती राज मंत्री  रह चुके हैं। रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक और अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मनोज कुमार पाण्डेय ने योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री पद शपथ ली। लेंगे। कन्नौज के तिर्वा से विधायक विधायक कैलाश सिंह राजपूत मंत्रिपद की शपथ लेंगे। वाराणसी में भाजपा के जिलाध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा अलीगढ़ के खैर से भाजपा के विधायक सुरेंद्र दिलेर फतेहपुर के खागा से भाजपा की विधायक कृष्णा पासवान मेरठ दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर का कद बढ़ाया गया है। वह सरकार में राज्य मंत्री ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत हैं, अब इनको राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। कानपुर देहात के सिकंदरा से भाजपा के विधायक अजीत पाल योगी आदित्यनाथ सरकार में राज्य मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग है। इनको प्रोन्नत किया गया है। अब यह राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के पद की शपथ लेंगे। दो वर्ष पहले हुआ था पहला विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल का पहला विस्तार लोकसभा चुनाव से पहले पांच मार्च 2024 को हुआ था। तब सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए पिछड़े, दलित, अगड़े के साथ ही पूरब से पश्चिम को साधते हुए चार नए कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे। इनमें सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर, भाजपा एमएलसी दारा सिंह चौहान, मुजफ्फरनगर की पुरकाजी सीट से रालोद विधायक अनिल कुमार और गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट से भाजपा विधायक सुनील कुमार शर्मा मंत्री बने थे। इसके साथ कैबिनेट मंत्रियों की संख्या मुख्यमंत्री योगी सहित 22 हो गई, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री बन गए थे। इस तरह से वर्तमान में 21 कैबिनेट मंत्री हैं। मौजूदा मंत्रिमंडल का जातीय समीकरण योगी आदित्यनाथ 2.0 सरकार जब गठित हुई उस समय पिछड़ा वर्ग के 20, आठ दलित, सात ब्राह्मण, छह राजपूत, चार वैश्य, दो भूमिहार मंत्री बनाय गये थे। पहले विस्तार में दो पिछड़े वर्ग मंत्रियों में बढ़ोत्तरी हुई, जिससे मंत्री पिछड़े वर्ग के मंत्रियों की संख्या 22 हो गई। इसके अतिरिक्त एक सुनील शर्मा ब्राह्मण को मंत्रिमंडल में स्थान मिला, लेकिन जितिन प्रसाद केंद्रीय मंत्री बन गये, जिससे ब्राहमण मंत्रियों की संख्या सात ही रही। अलबत्ता अनिल कुमार के रूप में दलित मंत्रियों की संख्या बढ़कर नौ हो गई थी। भाजपा विधायकों का जातीय समीकरण वर्तमान में भाजपा के पास 258 विधायक हैं। इनमें से 45 राजपूत, 42 ब्राह्णण, ओबीसी के 84, एससी के 59 और अन्य सवर्ण विधायक की संख्या 28 हैं। इसी तरह 100 सदस्यों वाली विधान परिषद में भाजपा के 79 सदस्य हैं। इनमें राजपूत 23, ब्राहम्ण 14, ओबीसी 26, मुस्लिम 02 और अन्य सवर्ण 12 और एससी वर्ग के दो सदस्य हैं। जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ आठ महीने ही है। इसको देखते हुए भाजपा यूपी में योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश करेगी। जहां छह और मंत्री बनाए जा सकते हैं वहीं मौजूदा राज्यमंत्रियों में से कुछ को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा। राज्यसभा चुनाव में सपा से बगावत करने वाले विधायकों में से दो को मंत्री पद का पुरस्कार मिल सकता है। वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक सहित कुल 54 मंत्री। राज्य में अधिकतम 60 मंत्री बन सकते हैं। जातीय व क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों के छह रिक्त पदों को भरा जाएगा।  

Mother’s Day 2026: मां के सम्मान पर बोले सीएम योगी, कहा– मां ही परिवार की असली शक्ति

लखनऊ मदर्स डे, यह दिन विशेष रूप से मां के प्रति कृतज्ञता, उनके निस्वार्थ प्रेम और योगदान को सम्मान देने को समर्पित है। लेकिन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रतिदिन हर मां की खुशी और अपने 25 करोड़ प्रदेशवासियों के परिवार के लिए समर्पित रहते हैं। वे प्रदेश की सभी मांओं के आंसू पोंछ परिवार में उजाला फैलाते हैं। कानपुर की खुशी गुप्ता व मायरा, लखनऊ की अनाबी अली, मुरादाबाद की वाची, गोरखपुर की पंखुड़ी त्रिपाठी समेत अनेक बच्चे इसके उदाहरण हैं, जिन्हें सीएम योगी के कारण उज्ज्वल भविष्य मिला और उनकी मांओं का दुख दूर हुआ।  जब खुशी ने पहला शब्द बोला- थैंक्यू योगी जी, भर आई थीं मां की आंखें मुख्यमंत्री ने कानपुर की मूक-बधिर बच्ची “खुशी” के जीवन में खुशी के इंद्रधनुषी रंग भरे। कानपुर की यह बच्ची न बोल सकती थी और न सुन सकती थी। खुशी नवंबर 2025 में बिना बताए कानपुर स्थित घर से निकलकर लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हुए लखनऊ पहुंच गई थी। किसी तरह उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलवाया गया। इस बच्ची ने अपने हाथों से बना चित्र सीएम को भेंट किया। मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और एक फाउंडेशन के सहयोग से खुशी के इलाज की व्यवस्था कराई। 26 जनवरी 2026 को खुशी का सफलता पूर्वक कॉक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन किया गया। अब खुशी सुन भी पा रही है और कुछ-कुछ बोलना भी शुरू कर दिया है। सर्जरी के बाद उसके मुंह से निकले पहले शब्द थे- “थैंक यू योगी जी।” बेटी की खुशी देख मां गीता गुप्ता की आंखों में पहली बार खुशी के आंसू छलक पड़े।  मायरा, पंखुड़ी, अनाबी, वाची का परिवार भी योगी का मुरीद कानपुर की नन्ही मायरा को सीएम योगी ने जनता दर्शन में न सिर्फ चॉकलेट दी, बल्कि शाम तक उसकी मुराद पूरी कर दी। सीएम के निर्देश पर कानपुर के एस्काटर्स वर्ल्ड स्कूल ने मायरा का एडमिशन किया। मुरादाबाद की वाची, लखनऊ की अनाबी का एडमिशन और गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफी भी सीएम योगी के निर्देश पर हुई। अब ये बच्चियां अपने-अपने शहर के प्रतिष्ठित विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। मायरा की मां नेहा कहती हैं कि हम खुशनसीब हैं कि योगी आदित्यनाथ हमारे मुखिया हैं। वृद्ध मां के दर्द से द्रवित सीएम ने कैंसर पीड़ित बेटे को भिजवाया अस्पताल सितंबर में ‘जनता दर्शन’ में कानपुर की रायपुरवा निवासी एक वृद्ध मां अपने कैंसर पीड़ित बेटे का दर्द लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंची थीं। उनकी तकलीफ देखकर सीएम द्रवित हो गए और कैंसर पीड़ित बेटे को एंबुलेंस से सीधे कल्याण सिंह सुपर स्पेशियिलिटी कैंसर इंस्टीट्यूट भिजवाकर उसका इलाज प्रारंभ कराया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं,  जहां सीएम योगी ने मां के आंसू पोंछकर परिवार में खुशियों के रंग भर दिए।

Mother’s Day Special: सालों बाद बेटी से बात हुई तो मां बोली – मुझे पूरी दुनिया मिल गई

कानपुर  मदर्स डे का दिन एक मां के लिए तब और भी खास हो जाता है, जब उसे अपनी संतान की सलामती का सबसे बड़ा तोहफा मिले। कानपुर की दो मांओं ग्वालटोली की गीता गुप्ता और केशवपुरम की नेहा फातिमा के लिए यह दिन खुशियों का एक अलग एहसास लेकर आया है। इन दोनों मांओं की कहानी अलग जरूर है, लेकिन जीवन में खुशियों का उजाला लाने वाले एक ही हैं- एक मां की पीड़ा को महूसस कर उसका त्वरित निवारण करने वाले अत्यंत संवेदनशील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। ग्वालटोली की गीता गुप्ता बताती हैं, "उनकी बेटी खुशी सुन और बोल नहीं पाती थी, लेकिन आज वह पूरी तरह ठीक होने की राह पर है। जब खुशी ने पहली बार मुझे सुना, तो मुझे लगा जैसे पूरी दुनिया मिल गई। एक मां के लिए इससे बड़ी जीत क्या होगी? ये सब योगी जी की वजह से हो पाया। मेरी बेटी को सरकार की मदद से इलाज मिला। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता ने मेरी बेटी की खामोश दुनिया बदल दी।" गीता बताती हैं कि खुशी पुलिस की वर्दी देखकर आकर्षित होती है। उन्हें भरोसा है कि उनकी बेटी एक दिन पुलिस अफसर बनकर देश का नाम रोशन करेगी।  केशवपुरम की रहने वाली नेहा फातिमा भी बेहद ख़ुश हैं। उनकी 5 साल की मासूम बेटी मायरा फातिमा अब स्कूल जाती है। नेहा ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा, "आज जब मैं मायरा को कॉपी-किताबों के साथ स्कूल जाते देखती हूं, तो मेरा दिल भर आता है। यह सब योगी जी के स्नेह और उनकी सरकार की मदद की वजह से मुमकिन हो पाया।" नेहा ने अपनी बेटी की एक प्यारी बात साझा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब बच्ची से मुलाकात की थी, तब उसे चॉकलेट दी थी। आज भी जब किसी का फोन आता है, तो मायरा चहकते हुए पूछती है- "उन्हीं अंकल का कॉल आया है, जिन्होंने मुझे चॉकलेट दी थी?" नेहा के लिए अपनी बेटी को दूसरे बच्चों की तरह अच्छे स्कूल में पढ़ते देखना मदर्स डे का सबसे अनमोल उपहार है।

खिलाड़ियों को सीएम की सीख: बैडमिंटन की तरह अपने सपनों को गिरने न दें

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खिलाड़ियों को जीवन का मूलमंत्र दिया। कहा कि बैडमिंटन-टेबल टेनिस में एकाग्रता व त्वरित निर्णय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। खेल के माध्यम से सीखे गए स्किल आपदा प्रबंधन के साथ ही विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करने को तैयार करते हैं। हर मेडल के पीछे संघर्ष और कभी हार न मानने के संकल्प की कहानी होती है। टैलेंट शुरुआत देता है, लेकिन मेहनत हमें लक्ष्य तक पहुंचाती है। जितना पसीना बहेगा, जीत उतनी ही बड़ी होगी। खेल गिरना, उठना और जीतना सिखाता है। बैडमिंटन में शटल कॉक को नहीं गिरने देते, वैसे ही जीवन में सपनों और हौसलों को टूटने नहीं देना चाहिए। जैसे हर खेल में स्टेप व शॉट का ध्यान जरूरी है, वैसे ही जीवन में निरंतर सुधार व अनुशासन के साथ लगातार किए जाने वाले प्रयास का परिणाम भी बेहतर तरीके से प्राप्त होता है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बाबू बनारसी दास यूपी बैडमिंटन एकेडमी गोमतीनगर में द्वितीय अखिल भारतीय पुलिस बैडमिंटन क्लस्टर (बैडमिंटन- टेबल टेनिस) प्रतियोगिता 2025-26 का शुभारंभ किया। सीएम ने बैडमिंटन भी खेला और स्मारिका का विमोचन किया। कपिल चौधरी ने खिलाड़ियों को शपथ दिलाई। यूपी में खेल व खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। 35वीं वाहिनी पीएसी के बैंड ने मधुर स्वर लहरियां प्रस्तुत कीं।  स्वस्थ शरीर के लिए खेलकूद को जीवन का हिस्सा बनाएं सीएम योगी ने कहा कि पहली बार उत्तर प्रदेश में हो रहे पांच दिवसीय अखिल भारतीय पुलिस बैडमिंटन कलस्टर में लगभग 1400 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। भारत में खेल व इसकी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की परंपरा प्राचीन काल से ही रही है। जीवन के जितने भी साधन हैं, वह स्वस्थ शरीर से ही संभव हो सकते हैं। स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक है कि दैनिक कार्यक्रमों के साथ खेलकूद की गतिविधियों को भी जीवन का हिस्सा बनाएं। कबड्डी, कुश्ती, खो-खो, धनुर्विद्या, मलखंभ, तलवारबाजी, शतरंज प्राचीन काल से ही जीवन का हिस्सा रहे हैं। सीएम ने अखाड़ा शब्द की व्याख्या करते हुए, बताया कि ज्ञान की परंपरा व शरीर को स्वस्थ रखने की कला को जिस क्षेत्र विशेष में प्रदर्शित किया जाए, वही अखाड़ा है। स्वस्थ शरीर से स्वस्थ मस्तिष्क व स्वस्थ मस्तिष्क से स्वस्थ चरित्र का निर्माण करके राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति का योगदान सुनिश्चित करना उस अभियान का हिस्सा बनाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।  एकाग्रता, अनुशासन व समर्पण के प्रतीक हैं अर्जुन सीएम ने प्राचीन धर्मग्रंथों की चर्चा कर अर्जुन का भी उल्लेख किया। कहा कि अर्जुन एकाग्रता, अनुशासन व समर्पण के प्रतीक हैं। मल्लयुद्ध की बात करते हैं तो बलराम जी व भीम जी का स्मरण हो जाता है। बलराम मतलब शक्ति और संतुलन का प्रतीक। गदायुद्ध में शक्ति, रणनीति व पराक्रम भी है। डबल इंजन सरकार इन प्राचीन विधाओं से प्रेरणा प्राप्त कर खेल के कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से बढ़ा रही है।  खेल के मैदान में जो पाठ पढ़ाए जाते हैं, उनका पुस्तकों में मिलना कठिन होता सीएम योगी ने कहा कि 25 करोड़ वाले उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत युवा हैं। खेल के मैदान में जो पाठ पढ़ाए जाते हैं, उनका पाठ्य पुस्तकों में मिलना कठिन होता है क्योंकि खेलकूद के बारे में जो व्यावहारिक रणनीति बताई जाएगी, वह सैद्धांतिक रूप से पुस्तकों में मिलना कठिन होता है। खेल के मैदान में अनुशासन, दृढ़संकल्प और समर्पण के बारे में खिलाड़ी को तैयार किया जाता है और उसके माध्यम से ऐसे व्यक्तित्व को तराशने का कार्य होता है, जो राष्ट्र को सशक्त, सुरक्षित और विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।  11 वर्ष में देश में नए स्पोट्र्स इकोसिस्टम का हुआ क्रियान्वयन सीएम ने कहाकि हम लोगों ने पीएम मोदी के विजन को यूपी में प्रभावी ढंग से लागू करने में सफलता हासिल की। 11 वर्ष में देश के अंदर नए स्पोट्र्स इकोसिस्टम का प्रभावी क्रियान्वयन सभी ने देखा है। खेल ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ व राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बना है। खेलो इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट, सांसद/विधायक खेलकूद प्रतियोगिता, यूपी में ग्रामीण लीग आदि प्रतियोगिताएं समाज के अंतिम पायदान पर बैठे खिलाड़ियों को प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रही हैं। इसी का परिणाम है कि ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स व विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिभाग बढ़ा है और हमें अभूतपूर्व सफलता भी मिल रही है।  2017 के पहले प्रतीक्षा सूची में दम तोड़ती थीं प्रतिभाएं सीएम ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में नाममात्र के स्टेडियम थे, इनमें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थीं। उनका उचित रखरखाव तक नहीं था। ट्रैक टूटे और स्वीमिंग पुल सूखे थे। खिलाड़ी उपेक्षित और कुशल खिलाड़ी कार्यालय-कार्यालय भटकने को मजबूर थे। प्रतिभाएं प्रतीक्षा सूची में दम तोड़ने को मजबूर होती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। उत्तर प्रदेश ने आज कुशल खिलाड़ियों के लिए सीधी भर्ती, पदोन्नति व नकद पुरस्कार की पारदर्शी व्यवस्था लागू की है। सीएम ने खिलाड़ियों के लिए किए कार्यों को गिनाया सीएम योगी ने कहा कि हमारी सरकार ने खिलाड़ियों के लिए नौकरियों में दो प्रतिशत हॉरिजेंटल रिजर्वेशन की व्यवस्था की है। खेल अब केवल शौक, टाइमपास नहीं बल्कि सम्मानजक कैरियर बन रहा है। हमारी सरकार इसकी गारंटी भी दे रही है।

यूपी में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, स्मार्ट मीटर हटे, हर महीने आएगा सामान्य बिजली बिल

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने काफी हंगामा मचने के बाद अब प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटर को वापस लेना शुरू कर दिया है। सरकार ने सभी वितरण कंपनियों को प्रदेश भर में लाखों उपभोक्ताओं के लिए पोस्टपेड बिल मॉडल बहाल करने की निर्देश दिया है। सरकार ने यह फैसला अनिवार्य प्रीपेड रिचार्ज, अचानक कनेक्शन काटने और प्रीपेड स्मार्ट मीटर से जुड़ी कथित बिलिंग अनियमितताओं को लेकर उपभोक्ताओं, व्यापारियों और किसान समूहों के महीनों के विरोध प्रदर्शन और शिकायतों के बाद लिया है। सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख वितरण निगमों- पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों, साथ ही आरडीएसएस के तहत लगाए गए सभी स्मार्ट मीटरों पर लागू होता है। उपभोक्ताओं के लिए अब क्या? रिचार्ज करने की जरूरत नहीं सरकार के इस कदम से अब उपभोक्ताओं को अपने बैलेंस को पहले से रिचार्ज करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय उन्होंने जितनी बिजली खर्च की, उसका हर माह बिल आएगा, बिल्कुल पहले की तरह। यानी आपने मई में बिजली खर्च की है तो आपको बिल जून में देना होगा। बिलिंग कैसे होगी? नई व्यवस्था के तहत स्मार्ट मीटर के बिल हर माह 10 तारीख तक तैयार किए जाएंगे और यह एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजे जाएंगे। उपभोक्ता आधिकारिक व्हाट्सऐप चैटबोट और 1912 बिजली हेल्पलाइन के माध्यम से भी बिल देख सकेंगे। जिन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी के दिक्कत है और जहां महीने की पांच तारीख तक ऑटोमैटिक रीडिंग नहीं मिलती, वहीं मीटर रीडिंग एजेंसियां बिलिंग प्रक्रिया पूरी करने के लिए मैन्युअल रीडिंग करेंगी। कैसे काम करेगी नई भुगतान प्रणाली? सरकार ने बताया कि उपभोक्ताओं को बिल जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा। अगर बिल जमा नहीं किया तो सात दिन के भीतर बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद बकाया बिल पर विलंब शुल्क यानी लेट फीस भी लगेगी। बकाया राशि का निपटान ब्याज दरों में छूट के साथ-साथ बकाया राशि में राहत की घोषणा की है। घरेलु उपभोक्ताओं को चार किस्तों में राशि चुकाने की अनुमति दी जाएगी। उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा, “जब पोस्टपेड उपभोक्ताओं को प्रीपेड में बदला गया, तो उनकी पिछली सुरक्षा राशि बिल में जोड़ दी गई। 6 मई के आदेश के अनुसार, उपभोक्ताओं से मौजूदा लागत मानदंडों के अनुसार नई सुरक्षा जमा राशि जमा करने की अपेक्षा की गई थी। हालांकि, हमने इसका कड़ा विरोध किया क्योंकि इससे उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा, “अब यूपीपीसीएल ने स्पष्ट किया है कि ली गई सुरक्षा राशि पहले की गणनाओं पर आधारित होगी और किश्तों में वसूल की जाएगी।” 15 मई से लगेगा विशेष शिविर शिकायतों के निवारण के लिए यूपीपीसीएल ने सभी डिस्कॉम को 15 मई से 30 जून के बीच कार्यकारी अभियंता और उपखंड कार्यालयों में विशेष स्मार्ट मीटर शिकायत शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि इन शिविरों में बिल संबंधी विवाद, मोबाइल नंबर में सुधार, मीटर रीडिंग संबंधी शिकायतें, स्मार्ट मीटर में परिवर्तन से संबंधित मुद्दे और खाता मिलान जैसे मामलों को निपटाया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार पर मुहर, जातीय समीकरण साधने में जुटी बीजेपी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार अपने सबसे बड़े राजनीतिक दांव की तैयारी में जुट गई है. लंबे समय से चर्चा में चल रहे मंत्रिमंडल विस्तार पर आखिरकार मुहर लग गई है और आज रविवार दोपहर लखनऊ के लोकभवन में नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की थी. योगी कैबिनेट में इस समय छह पद खाली हैं और माना जा रहा है कि इन सभी सीटों को भरा जाएगा. खास बात यह है कि इस बार किसी बड़े प्रयोग के बजाय सामाजिक और जातीय संतुलन साधने पर फोकस रखा गया है. बीजेपी ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि, लोधी और अति पिछड़ा वर्ग को साधने की रणनीति पर काम करती दिख रही है. यही वजह है कि जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है, वे अलग-अलग सामाजिक समूहों से हैं. योगी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तस्वीर लगभग साफ होती नजर आ रही है. सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार देर रात सभी संभावित मंत्रियों से मुलाकात कर अंतिम चर्चा कर ली है. मौजूदा राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल की प्रोन्नति लगभग तय मानी जा रही है. पश्चिम यूपी से आने वाले सोमेंद्र तोमर को कैबिनेट या स्वतंत्र प्रभार मिल सकता है, जबकि पाल बिरादरी से आने वाले सूचना एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री अजीत पाल का भी कद बढ़ाया जा सकता है. वहीं नए चेहरों में कन्नौज के तिर्वा से विधायक और लोधी समाज के नेता कैलाश राजपूत को मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय माना जा रहा है. अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक और वाल्मीकि समाज से आने वाले दलित नेता सुरेंद्र दिलेर भी नए मंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं. मनोज पांडेय: सपा से BJP तक, अब कैबिनेट की दहलीज पर रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडेय का नाम लगभग तय माना जा रहा है. कभी अखिलेश यादव के बेहद करीबी रहे मनोज पांडेय समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सपा से दूरी बनाकर बीजेपी का समर्थन किया और बाद में भगवा खेमे के साथ खुलकर खड़े नजर आए. मनोज पांडेय ब्राह्मण चेहरे के तौर पर बीजेपी के लिए अहम माने जा रहे हैं. राजनीति विज्ञान में पीएचडी कर चुके मनोज पांडेय का लंबा राजनीतिक अनुभव है. 2012 और 2017 में ऊंचाहार सीट से जीत हासिल कर चुके पांडेय अब बीजेपी के ब्राह्मण समीकरण को मजबूत करने वाले चेहरे के रूप में देखे जा रहे हैं. भूपेंद्र चौधरी: पश्चिम यूपी का बड़ा जाट चेहरा मुरादाबाद से आने वाले भूपेंद्र सिंह चौधरी बीजेपी के मजबूत संगठनात्मक नेताओं में गिने जाते हैं. आरएसएस से राजनीति की शुरुआत करने वाले भूपेंद्र चौधरी साल 1989 में बीजेपी में शामिल हुए थे. संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाने के बाद वे यूपी बीजेपी अध्यक्ष भी बने. जाट समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. पश्चिमी यूपी में बीजेपी को मजबूत करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है. योगी सरकार के पिछले कार्यकाल में वे पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि उन्हें फिर से कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. कृष्णा पासवान: पासी समाज की मजबूत महिला चेहरा फतेहपुर जिले की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है. पासी समाज से आने वाली कृष्णा पासवान बीजेपी की पुराने दलित चेहरों में शामिल हैं. उन्होंने कई बार चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की है. 2022 के चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी उम्मीदवार को करीबी मुकाबले में हराया था. बीजेपी दलित वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के लिए पासी समाज को प्रतिनिधित्व देना चाहती है. इसी रणनीति के तहत कृष्णा पासवान का नाम आगे बढ़ाया गया है. हंसराज विश्वकर्मा: अति पिछड़े वर्ग पर BJP की नजर वाराणसी से एमएलसी और बीजेपी जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा का नाम भी चर्चा में है. विश्वकर्मा समाज पूर्वांचल की अहम अति पिछड़ी बिरादरी मानी जाती है. हंसराज विश्वकर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी नेताओं में भी गिना जाता है. बीजेपी लंबे समय से गैर-यादव OBC वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. ऐसे में विश्वकर्मा समाज को कैबिनेट में जगह देकर पार्टी पूर्वांचल और अति पिछड़े वर्ग को बड़ा संदेश देना चाहती है.   सुरेंद्र दिलेर: वाल्मीकि समाज से नया दांव हाथरस से आने वाले सुरेंद्र सिंह दिलेर का नाम वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि के तौर पर चर्चा में है. उनका राजनीतिक परिवार लंबे समय से सक्रिय रहा है. उनके दादा किशन लाल दिलेर चार बार सांसद रहे, जबकि पिता राजवीर सिंह दिलेर विधायक और सांसद दोनों रहे. सुरेंद्र दिलेर लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं और वाल्मीकि समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. बीजेपी दलित वोट बैंक में वाल्मीकि समुदाय को मजबूत संदेश देना चाहती है. कैलाश राजपूत: लोधी वोट बैंक साधने की कोशिश कन्नौज की तिर्वा सीट से विधायक कैलाश राजपूत भी संभावित मंत्रियों की सूची में शामिल हैं. वे लोधी समाज से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली समुदाय माना जाता है. कैलाश राजपूत अलग-अलग दौर में हर बार सत्ता पक्ष के साथ रहे हैं. साल 1996 में बीजेपी, 2007 में बसपा और फिर 2017 में बीजेपी से विधायक बने. इसके बाद फिर से विधायक बने. कन्नौज और आसपास के इलाकों में लोधी वोट बैंक पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. चर्चा में रहा मनोज पांडे का नाम प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार में जहां छह और मंत्री बनाए जा सकते हैं, वहीं मौजूदा राज्यमंत्रियों में से कुछ को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और तीन को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है. सपा से अलग होकर भाजपा को समर्थन देने वाले विधायक मनोज पांडे का नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा है. लोकसभा चुनाव के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने भी मनोज पांडे और उनके परिवार से भेंट की थी. तभी से माना जा रहा था था कि उन्हें बीजेपी या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी. मनोज पांडे कल शाम लखनऊ आवास पहुंचे और सूत्रों के मुताबिक, सीएम योगी से मुलाकात की है. हालांकि, मुलाकात के बाद रात लगभग 10 बजे वह … Read more

मिशन 2027 के लिए यूपी में कैबिनेट फेरबदल, योगी की नई टीम की झलक

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में अगले कुछ घंटे बेहद हलचल भरे रहने वाले हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का विस्तार अब किसी भी वक्त हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलने के बाद संभावित मंत्रियों को आज शाम तक लखनऊ मुख्यालय पहुंचने के निर्देश दे दिए गए हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं, जिसके बाद शपथ ग्रहण की तारीख और समय पर आधिकारिक मुहर लग जाएगी।  2027 का ‘प्लान’ और विकास के साथ हिंदुत्व बीजेपी हमेशा 24X7 चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी मानी जाती है. अब पार्टी की निगाहें 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं. बीजेपी यूपी में जीत की ‘हैट्रिक’ लगाने की तैयारी में है. इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए पार्टी न केवल सरकार का चेहरा बदलेगी, बल्कि बोर्ड, निगम और आयोगों में भी कार्यकर्ताओं को जगह देकर संगठन को मजबूती देगी. रणनीति साफ है, पश्चिम बंगाल की तर्ज पर ‘विकास और हिंदुत्व’ के साथ-साथ मजबूत जातिगत समीकरणों को साधना।  महिला कोटे पर विशेष फोकस, अखिलेश के PDA को जवाब इस बार के विस्तार में सबसे खास बात ‘नारी शक्ति’ पर फोकस है. बीजेपी महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष, खासकर सपा को घेरने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी नारी शक्ति के अपमान पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते रहे हैं. ऐसे में योगी कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा रही है।      कृष्णा पासवान: फतेहपुर से तीन बार की विधायक कृष्णा पासवान का नाम सबसे आगे है. उनके जरिए बीजेपी न केवल महिला कार्ड खेलेगी, बल्कि दलित (पासी) समाज को भी साधेगी. यह अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट माना जा रहा है।      पूजा पाल: सपा की बागी विधायक पूजा पाल को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है. सपा के बागी और पुराने दिग्गजों की एंट्री मंत्रिमंडल में 6 नए चेहरों को जगह मिलने की पूरी संभावना है. इसमें जातिगत संतुलन का खास ख्याल रखा गया है:     मनोज पांडेय: सपा से आए ब्राह्मण चेहरा मनोज पांडेय को मंत्री बनाकर बीजेपी अवध क्षेत्र में अपना आधार मजबूत करना चाहती है.     चौधरी भूपेंद्र सिंह: पश्चिम यूपी के बड़े जाट नेता भूपेंद्र सिंह का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है.     अशोक कटारिया: गुर्जर समाज में पैठ रखने वाले पूर्व मंत्री और एमएलसी अशोक कटारिया को एक बार फिर मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है.     रोमी साहनी: खीरी क्षेत्र में सिखों और पंजाबी खत्री बिरादरी की नाराजगी दूर करने के लिए रोमी साहनी को मौका मिल सकता है. प्रमोशन और विभागों में फेरबदल की तैयारी सूत्रों का कहना है कि सिर्फ नए चेहरे ही शामिल नहीं होंगे, बल्कि पुराने मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर भी काम होगा. कुछ राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) को उनकी बेहतर परफॉर्मेंस, खासकर बंगाल चुनाव के दौरान किए गए कार्यों के लिए कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोट किया जा सकता है. साथ ही कई मंत्रियों के विभागों में बड़े बदलाव की भी चर्चा है।  बुजुर्ग मंत्रियों को नहीं हटाएगी पार्टी? सियासी गलियारों में चर्चा थी कि कुछ उम्रदराज मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, लेकिन पार्टी के एक धड़े का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले ऐसा करने से गलत संदेश जा सकता है. चूंकि यह विस्तार कुछ ही समय के लिए है और जल्द ही आचार संहिता लागू हो जाएगी, इसलिए बीजेपी क्षेत्रीय क्षत्रपों और बुजुर्ग नेताओं को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती। 

शहजाद भट्टी नेटवर्क का भंडाफोड़, टारगेट किलिंग और पीओके ट्रेनिंग का लालच

लखनऊ यूपी से पकड़े गए आईएसआई और पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के लिए काम करने वाले कृष्णा मिश्रा और दानियाल अशरफ को आईएसआईएस कैंप में ट्रेनिंग कराने और पीओके में कमांडर बनाने का लालच दिया गया था। इन्हें पुलिसकर्मियों और सेना के जवानों की टारगेट किलिंग के बाद वीडियो बनाकर शहजाद भट्टी को भेजनी थी, जिसके बाद इन्हें दुबई बुलाने का वादा किया गया था, साथ ही बड़ी रकम भी देनी थी। इसलिए ही दोनों ने भिवंडी थाना और यूपी के कुछ थानों की रेकी की थी। गजरौला में एक दरोगा की हत्या की कोशिश भी की थी, लेकिन ऐन मौके पर गोली नहीं चली। इससे पूर्व शहजाद भट्टी के माड्यूल से जुड़े 25 से ज्यादा लोगों को एसटीएफ वेसटयूपी से गिरफ्तार कर चुकी है। यूपी एटीएस और खुफिया एजेंसियों समेत स्पेशल सेल ने 5 मई को बाराबंकी के संदिग्ध आतंकी दानियाल अशरफ और कुशीनगर के कृष्णा मिश्रा को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों को शहजाद भट्टी ने हीं स्लीपर मॉड्यूल की तरह अपने नेटवर्क में शामिल किया था और देश में पुलिस और सेना के जवानों की टारगेट किलिंग का काम दिया था। दोनों को लालच दिया था कि जैसे ही काम पूरा होगा, इन्हें तुरंत दुबई भेजा जाएगा। वहां से आईएसआईएस के ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षित कराने के बाद पीओके यानी पाक अधिकृत कश्मीर में कमांडर बनाया जाएगा। बेशुमार पैसा देने का भी वादा किया गया था। इन आतंकी ट्रेनिंग कैंप की वीडियो भी कृष्णा और दानियाल को दिखाई गई थी। मॉड्यूल से जुड़े 25 लोग वेस्ट यूपी से हो चुके गिरफ्तार इसी नेटवर्क से जुड़े अजीम राणा को हापुड़ और मेरठ से आजाद अली को पकड़ा गया था। वहीं, कुछ दिन पहले ही एटीएस ने साकिब, अरबाब, लोकेश पंडित और विकास को एटीएस ने दबोचा था। इसके अलावा 23 अप्रैल को ही तुषार उर्फ हिजबुल्लाह और समीर की धरपकड़ हुई थी। इस नेटवर्क को खंगालने के दौरान एटीएस को कृष्णा मिश्रा और दानियाल अशरफ की सूचना मिली थी। इस माड्यूल से जुड़ा बिजनौर का संदिग्ध आतंकी आकिब दुबई में है उसका लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है। एटीएस अफसरों की मानें तो कृष्णा मिश्रा और दानियाल ने गजरौला में एक दरोगा को टारगेट किया था। फ्लाईओवर के नीचे दरोगा की हत्या का प्रयास किया गया था। शुक्र रहा कि इस दौरान गोली नहीं चल। चल पाई। आरोपियों की गोली हथियार में फंस गई थी, इसलिए टारगेट मिस हो गया।