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योगी सरकार का बड़ा कदम, गोबर से बनेगी कमाई और ऊर्जा का नया स्रोत

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कृषि और पशुपालन के एकीकरण से ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, प्रदेश सरकार ने अब राज्य की गोशालाओं को आत्मनिर्भर 'बिजनेस मॉडल' के रूप में ढालने की तैयारी कर ली है। सरकार का लक्ष्य गोबर आधारित कम्पोस्ट, बायोगैस, जीवामृत और घनामृत के उत्पादन को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़कर एक मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क स्थापित करना है। केमिकल मुक्त खेती और मिट्टी की उर्वरता पर फोकस पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने हाल ही में कृषि और पशुपालन विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर जैविक खेती को मुख्यधारा में लाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रदेश में उपलब्ध लाखों मीट्रिक टन गोबर का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर उच्च गुणवत्ता वाली खाद बनाई जाए। गोबर खाद के उपयोग से मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ाकर बंजर होती जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने पर जोर दिया जाए। सफल मॉडलों का होगा प्रदेशव्यापी विस्तार झांसी, चंदौली, कानपुर और बाराबंकी जैसे जिलों में बायोगैस और जैविक खाद के सफल प्रयोगों को अब पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।     दोहरा लाभ: किसानों को बायोगैस से सस्ती ऊर्जा मिलेगी और संयंत्र से निकलने वाली 'स्लरी' का उपयोग खेतों में सर्वोत्तम खाद के रूप में होगा।     सीबीजी प्लांट: प्रदेश भर में कम्प्रेश्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों के जाल को विस्तार देने की योजना है, जिससे कचरे से कंचन बनाने की राह आसान होगी। मार्केटिंग और मानकीकरण सरकार केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। असली जोर गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर है।     मानकीकरण: खाद की पैकेजिंग, नमी और पोषक तत्वों के कड़े मानक तय किए जाएंगे ताकि किसानों का भरोसा बढ़े।     सहकारी नेटवर्क: सहकारी समितियों के माध्यम से जैविक उत्पादों की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।     रिसर्च: कृषि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे कम लागत वाले सरल मॉडल विकसित करें, जिन्हें आम किसान भी अपना सके।  

महंगाई की मार: सिलिंडर की कमी से थाली महंगी, छात्रों और छोटे कारोबारियों का बजट बिगड़ा

आगरा आगरा में एलपीजी संकट बरकरार है। गैस सिलिंडर की किल्लत ने महंगाई का तड़का लगा दिया है। चाय, समोसा से लेकर रेस्तरां में खाना तक महंगा हो गया है। महिलाओं और व्यापारियों से लेकर छात्र तक सभी का बजट बिगड़ रहा है। व्यावसायिक सिलिंडर में 40 और घरेलू सिलिंडर में 30 प्रतिशत की कटौती से आम आदमी पर दोहरी मार पड़ रही है। जिले में 13 लाख एलपीजी उपभोक्ता हैं। प्रतिदिन करीब 150 टन एलपीजी खपत है। प्रतिदिन करीब 40 हजार व्यावसायिक सिलिंडर की खपत है। 88 गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स हैं। इंडियन ऑयल, एचपी और भारत पेट्रोलियम गैस आपूर्ति करती हैं। कंपनियों की लापरवाही और प्रशासन के ढुलमुल रवैये से डिस्ट्रीब्यूटर्स से लेकर उपभोक्ता तक कटौती की मार झेल रहे हैं। करीब एक लाख से अधिक सिलिंडर का बैकलॉग है। व्यावसायिक सिलिंडर 935 रुपये और पांच किलो का छोटू सिलिंडर 230 रुपये महंगा हो गया है। इसके बावजूद भी उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद डिलीवरी नहीं मिल रही।   पीजी से लेकर छात्रावास तक प्रभावित छात्र गुरुप्रसाद ने कहा कि एलपीजी के व्यावसायिक और छोटू सिलिंडर महंगा होने से पीजी से लेकर छात्रावास तक प्रभावित हैं। छात्रों पर महंगाई की मार पड़ रही है। उनके लिए खाना बनाना महंगा हो गया है। किराए के कमरों में रहने वाले छात्रों को पांच किलो सिलिंडर ब्लैक में 2000 रुपये तक खरीदना पड़ रहा है। उठानी पड़ रही परेशानी छात्र सचिन का कहना है कि पीजी में रहने वालों को ब्लैक में सिलिंडर खरीदना पड़ रहा है। सिलिंडर बहुत महंगा है। पढ़ाई करने वाले छात्रों का बजट गड़बड़ा रहा है। रसोई गैस की कमी के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है।   हॉकर करते हैं मनमानी छात्र अतुल ने बताया कि रसोई गैस सिलिंडर ब्लैक में मिल रहे हैं, हॉकर मनमानी करते हैं। बाहर खाना खाना मजबूरी बन गया है। वहां भी दाम बढ़ गए हैं। गैस एजेंसियों में पांच किलो वाला गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है।   थाली पर बढ़े 40 रुपये छात्र यश का कहना है कि 120 रुपये की थाली अब 160 रुपये तक पहुंच गई है। छोटा सिलिंडर भी करीब 2000 रुपये में मिल रहा है। इतने महंगे सिलिंडर लेने से अच्छा है कि चूल्हे पर लकड़ियां जलाकर खाना बना लें। करना पड़ रहा लंबा इंतजार खंदारी निवासी शालू ने बताया कि सिलिंडर बुक कराने के बाद 25 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। पड़ोस से चूल्हा मांगना पड़ता है तो कभी आधा पका खाना छोड़ना पड़ता है।   महंगे दाम पर खरीदना मजबूरी नेहरू नगर कृतिका गौर का कहना है कि गरीब परिवार छोटा सिलिंडर वहन नहीं कर पा रहे हैं। मिलता भी आसानी से नहीं। ब्लैक में महंगे दाम पर खरीदना उनकी मजबूरी है। बड़े परिवारों में ज्यादा परेशानी दयालबाग निवासी सुंदरी ने बताया कि बड़े परिवारों में सिलिंडर की किल्लत और ज्यादा परेशानी खड़ी कर रही है। उनके घर में 10 से 12 सदस्य हैं, लेकिन एक ही सिलेंडर है। एक सिलेंडर 15-20 दिन भी नहीं चल पाता।  

नूंह में दर्दनाक घटना: रेड के दौरान हादसा, यूपी पुलिस के 4 जवान समेत 5 की जान गई

जालौन अपहरण के एक मामले में कार्रवाई करने हरियाणा गई कोतवाली उरई पुलिस टीम मंगलवार सुबह भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गई। नूंह जनपद के तावड़ू सदर थाना क्षेत्र में हुए इस हादसे में चार पुलिसकर्मियों समेत एक वादी की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। मिली जानकारी के अनुसार, कोतवाली उरई में दर्ज एक अपहरण मामले में अपहृत व्यक्ति की बरामदगी के लिए पुलिस टीम हरियाणा रवाना हुई थी। टीम आरोपियों की तलाश में तावड़ू क्षेत्र पहुंची थी, तभी मंगलवार सुबह करीब 10 बजे उनकी गाड़ी हादसे का शिकार हो गई। ओवरटेक करने के चक्कर में हुआ हादसा बताया जा रहा है कि ओवरटेक के दौरान वाहन अनियंत्रित हो गया और सामने से आ रहे वाहन से टकरा गया, जिससे यह दर्दनाक दुर्घटना हुई। हादसे में उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, आरक्षी प्रदीप कुमार (सर्विलांस सेल) और आरक्षी अशोक कुमार (कोतवाली उरई) की मौके पर ही मौत हो गई। क्षतिग्रस्त वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकाला इसके अलावा मुकदमे के वादी अमरीक सिंह निवासी संगरूर (पंजाब) ने भी दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया गया। क्षतिग्रस्त वाहन में फंसे लोगों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस द्वारा हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। क्षतिग्रस्तवाहन को सड़क से हटवाकर खड़ा कराया गया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद उरई समेत पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।     एक मामले में कोतवाली की पुलिस टीम हरियाणा में दबिश देने गई थी। हादसे में चार पुलिसकर्मियों व वादी की मौत हुई है।  -विनय कुमार सिंह, एसपी जालौन सीएम योगी ने जताया शोक इस दर्दनाक हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने मृत पुलिसकर्मियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हरियाणा सरकार से समन्वय स्थापित कर मृतकों के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द उनके परिजनों तक पहुंचाया जाए और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं। प्रदेश में शोक की लहर एक साथ पांच लोगों की मौत से पुलिस विभाग में गहरा दुख है। जालौन समेत कन्नौज, कासगंज, रायबरेली और बांदा में मृतकों के घरों पर मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।  

जनता दर्शन में 200 लोगों की समस्याएं सुनीं सीएम योगी ने

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने मिलने आए लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा, चिंता मत करिए, सरकार हर समस्या का प्रभावी समाधान कराएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की समस्याओं पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाते हुए पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने कुर्सियों पर बैठे लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं। उनके प्रार्थना पत्र लिए तथा समीप खड़े अफसरों को समस्या समाधान हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिए। अलग-अलग मामलों से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध और निष्पक्ष होना चाहिए।  जमीन कब्जा किए जाने से संबंधित शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से कहा यदि कोई दबंग किसी की जमीन पर जबरन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। जनता दर्शन में हर बार की तरह इस बार भी कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्चस्तरीय इलाज का एस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। एस्टीमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी। जनता दर्शन में कुछ महिलाओं के साथ उनके बच्चे भी आए थे। मुख्यमंत्री ने इन बच्चों को दुलारा और चॉकलेट के साथ आशीर्वाद दिया।   गोशाला में गोवंश को दुलारकर खिलाया गुड़ गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने प्रातःकाल गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर मत्था टेका। सीएम योगी जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं तो गोसेवा उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रहती है। मंगलवार सुबह वह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए मंदिर की गोशाला में पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया। गोशाला में मुख्यमंत्री ने गोवंश के माथे पर हाथ फेरा, उन्हें खूब दुलारा और अपने हाथों से गुड़ खिलाया।

15 जुलाई तक टैक्स भुगतान पर छूट, ऑनलाइन पेमेंट करने पर मिलेगा 12% तक लाभ

वाराणसी उत्तर प्रदेश के एक नगर निगम में हाउस, वाटर और सीवर टैक्स को लेकर बहुत बड़ा फैसला लिया है। अब यहां पर दिव्यांग और दृष्टिबाधित यानी जिन्हें दिखाई नहीं देता है, ऐसे लोगों से किसी प्रकार का टैक्स नहीं लेना का फैसला किया गया है। नगर निगम कार्यकारिणी ने अबकी पहली बार दृष्टिबाधित और 80 प्रतिशत तक दिव्यांग भवनस्वामियों को सभी कर से छूट दे दी है। इसमें गृह, जल और सीवरकर शामिल है। वहीं सामान्य लोगों को 15 मई से 15 जुलाई तक गृहकर और सीवरकर जमा करने पर 10 फीसदी की छूट दी जाएगी। यदि कर ऑनलाइन जमा करते हैं तो यह छूट 12 प्रतिशत मिलेगी। वहीं लाइसेंस शुल्क में व्यापारियों को 10 प्रतिशत की राहत दी गई है। यह छूट वाराणसी के नगर निगम ने दी है। महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में सोमवार को निगम मुख्यालय में कार्यकारिणी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। करीब तीन घंटे चली बैठक में दृष्टिहीन और 80% दिव्यांग भवन स्वामियों के लिए कर में पूरी तरह छूट का निर्णय हुआ। लेकिन संबंधित भवनस्वामी को दिव्यांगता प्रमाण पत्र निगम कार्यालय में प्रस्तुत करना होगा। जिन भवन स्वामियों ने इस वित्तीय वर्ष का गृहकर, सीवरकर जमा कर दिया है, उनका अगले वित्तीय वर्ष में समायोजन होगा। उपसभापति नरसिंह दास ने सभी पूर्व महापौर और नगर प्रमुख के आवास तक जाने वाले मार्गों एवं गलियों की मरम्मत का मुद्दा उठाया। पार्षद प्रवीण राय ने पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग की बदहाली का मुद्दा उठाया। कार्यकारिणी ने नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को परिक्रमा पथ पर सड़कों की मरम्मत, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, शौचालय सुविधा का निर्देश दिया। मदन मोहन तिवारी ने वर्ष 2023 से 2026 तक हुए कार्यों का ब्योरा एक सप्ताह में प्रस्तुत करने को कहा। प्रमोद राय ने ठेकेदारों को हो रहे भुगतान के संबंध में सवाल उठाए। सुशील गुप्ता ने कहा कि सड़क की खोदाई के लिए एनओसी में कड़ी शर्तें रखी जाएं। अशोक मौर्या ने कांशीराम आवास योजना की बदहाली पर सवाल उठाए। बैठक में अमरदेव यादव, हनुमान प्रसाद, माधुरी सिंह, सुशीला देवी रहीं। रेलवे की जमीन लेकर सुविधाएं दी जाएं शहर में बुनियादी सुविधाओं के लिए नगर निगम ने रक्षा संपदा विभाग और रेलवे की कुछ जमीनों को लेने के संबंध में प्रस्ताव दिया है। रक्षा संपदा विभाग से कैंटोंमेंट स्थित गुडशेड बाजार में 1.2286 हेक्टेयर, फुलवरिया फ्लाईओवर के नीचे 3.8121 हेक्टेयर, डोमरी और सूजाबाद में 19.6690 हेक्टेयर, 160 एकड़ क्षेत्र में 34.259 हेक्टेयर शामिल है। इसी तरह रेलवे से घौसाबाद में 2830 वर्ग मीटर, लहरतारा से मंडुवाडीह मार्ग पर 2029.30 वर्ग मीटर, गुडशेड बाजार में लगभग 4100 वर्ग मीटर जमीन शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार नगर निगम रक्षा संपदा और रेलवे को इस कीमत की अपनी जमीन देगा।

गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने किसानों को बताए बचाव का उपाय

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार गन्ना किसानों की बेहतरी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने फसल को कीटों से बचाने के लिए अलर्ट जारी किया है। अपर गन्ना आयुक्त वीके शुक्ला के मुताबिक इस समय चूसक कीटों का खतरा मंडरा रहा है। इसको लेकर गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने जरूरी सुझाव दिए हैं। वर्तमान में तापमान अधिक होने के कारण उत्तर प्रदेश में गन्ने के पौध और पेड़ी फसल में चूसक कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है, जिससे फसल की वृद्धि और उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने इन चूसक कीटों की पहचान, लक्षण एवं प्रभावी नियंत्रण के संबंध में विस्तृत जानकारी किसानों के लिए साझा की है। कीटों की पहचान और नुकसान काला चिकटा (ब्लैक बग) काला चिकटा चूसक कीट काले रंग का होता है। इसका प्रकोप अधिक तापमान व शुष्क मौसम समान्यतः अप्रैल से जून में पेड़ी में अधिक व बावक फसल में कम दिखाई देता। प्रभावित पौधों की पत्तियों पीली हो जाती हैं और उन पर कत्थई रंग के धब्बे पाए जाते हैं। इसके शिशु पत्रकंचुक एवं गन्ने के गोंफ के मध्य में पाये जाते हैं। प्रौढ़ तथा शिशु दोनों पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे गन्ने की बढ़वार रुक जाती है। वहीं थ्रिप्स कीट बहुत छोटे लगभग 2-3 मिमी आकार के होते है। मादा कीट गहरे भूरे रंग व नर हल्के रंग के होते है। इसका प्रकोप अधिक तापमान व शुष्क मौसम में तेजी से होता है। थ्रिप्स पत्ती की उपरी सतह के अंदर अंडे देते है व निम्फ निकलकर पत्ती के रस चूसते हैं। पत्ती का अग्रभाग मुड़ कर नुकीला हो जाता है। प्रभावित पत्तियां ऊपर से नीचे की ओर सफेद/पीली हो जाती हैं। बारिश शुरू होते ही इनकी जनसंख्या में कमी होने लगती है। सैनिक कीट (कुतरकर खाने वाला कीट) की सूड़ी अवस्था गन्ने की पत्तियों को खाता है। मादा कीट पत्रकंचुक में एक समूह में अंडे देती है। पेड़ी फसल में इस कीट का प्रकोप अधिक होता है। तीनों कीटों के नियंत्रण की विधियां शोध वैज्ञानिकों के मुताबिक इन तीन कीटों पर नियंत्रण के लिए खेत की नियमित अंतराल पर सिंचाई करते रहें। खेत को खरपतवार या गन्ने की सूखी पत्तियों से मुक्त रखें। संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें। साथ ही सुबह या शाम को प्रोफेनोफॉस 40 प्रतिशत के साथ साइपरमेन्थिन 4 प्रतिशत ई.सी. 750 मिली (संयुक्त उत्पाद) अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल दर 200 मिली का प्रति हेक्टेअर की दर से 625 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

सीएम योगी के निर्देश पर प्रदेश के उपभोक्ताओं के हित में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय

लखनऊ उत्तर प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं की सुविधा और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब सभी प्रीपेड मीटर पोस्टपेड स्मार्ट मीटर के रूप में कार्य करेंगे। पहले की तरह ही बिजली बिल में बिल जमा करने की तिथि उल्लिखित रहेगी। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को अपना बकाया भुगतान 10 किस्तों में करने की बड़ी राहत भी दी गई है। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ए.के. शर्मा ने इस संबंध में बैठक के बाद विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिलिंग साइकिल वैसे ही रहेगा जैसे पहले पोस्टपेड मीटर में होता था। पूर्व की तरह 1 तारीख से माह के अन्त तक बिल की खपत का एक महीने का बिल एसएमएस और व्हाट्सएप पर दिया जायेगा। जिन उपभोक्ताओं का मोबाइल नम्बर बदला है, वे अपना नम्बर अपडेट करवा सकते हैं। इस फैसले से प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। बिलिंग प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होगी, भुगतान के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित होगा।  10 तारीख तक मिलेंगे बिल ऊर्जा मंत्री ने बताया कि सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को प्रत्येक माह की 10 तारीख तक बिल मिल जायेंगे। बिल मिलने की तिथि से भुगतान के लिए 15 दिन का समय दिया जायेगा। जिस उपभोक्ता को समय से बिल न प्राप्त हो वो व्हाट्सएप चैटबॉट्स पर संयोजन संख्या सूचित कर अपना बिल व बकाया बिल प्राप्त कर सकेंगे। यह बिल 1912 पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर भी प्राप्त किये जा सकेंगे।  10 किस्तों में जमा कर सकते हैं बकाया उपभोक्ताओं को सुविधा देने के लिए यह बड़ा निर्णय लिया गया है कि 30 अप्रैल तक (मई के बिल से पूर्व) उपभोक्ता का जो भी बिल बकाया रहेगा, वह 10 किस्तों में जमा कर सकता है। यदि किसी उपभोक्ता को बिल सम्बन्धी कोई समस्या है तो खण्ड एवं उपखण्ड स्तर पर मई एवं जून माह में वृहद् कैम्प का आयोजन कर स्मार्ट मीटर बिल सम्बन्धित शिकायत निस्तारण की सुविधा दी जायेगी। उपभोक्ता अपनी शिकायत 1912 पोर्टल पर भी दर्ज कर सकता है।  सिक्योरिटी राशि जमा करने में भी राहत जिन उपभोक्ताओं के परिसर में पोस्टपेड से प्रीपेड मीटर लगाए गए थे और उनकी सिक्योरिटी वापस कर दी गई थी, अब पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने पर उनसे सिक्योरिटी एकमुश्त न लेकर 4 किस्तों में ली जाएगी। बिजली आपूर्ति पर भी सख्त निर्देश ऊर्जा मंत्री ने विद्युत आपूर्ति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी क्षेत्रों में निर्धारित शेड्यूल के अनुसार निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब न हों और यदि कहीं खराब हों तो उन्हें तत्काल बदला जाए, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। बिल न मिलने पर यहां करें संपर्क पूर्वांचल: +91 8010968292 मध्यांचल: +91 7669003409 पश्चिमांचल: +91 7859804803 दक्षिणांचल: +91 8010957826 केस्को (कानपुर): +91 8287835233

डेटा आधारित मॉनिटरिंग से विकास योजनाओं की होगी सटीक समीक्षा, जिलों में आर्थिक रणनीति बनेगी मजबूत

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है। इसके तहत हर जिले में ओटीडी सीएम फेलो (वन ट्रिलियन डॉलर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम) लागू किया जाएगा, जिससे जिला स्तर पर विकास योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाया जा सके। हर जिले में दो फेलो की तैनाती कैबिनेट के निर्णय के अनुसार प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संचालित ओटीडी सेल को मजबूत करने के लिए दो विशेषज्ञ तैनात किए जाएंगे, एक आर्थिक विकास फेलो और एक डेटा विश्लेषक फेलो। ये दोनों मिलकर जिले की आर्थिक गतिविधियों की निगरानी और रणनीति निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। ये फेलो विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कृषि, उद्योग, निवेश, अवसंरचना, पर्यटन, रोजगार और जिला घरेलू उत्पाद (डीडीपी) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की नियमित समीक्षा करेंगे। नियोजन विभाग के डैशबोर्ड के माध्यम से ऑनलाइन रिपोर्टिंग और केपीआई आधारित मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तथ्यपरक और परिणामोन्मुख बनेगी। योग्यता और चयन प्रक्रिया तय ओटीडी सीएम फेलो बनने के लिए संबंधित विषय में परास्नातक डिग्री अनिवार्य होगी और अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष रखी गई है। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा (50 अंक), अधिमानी योग्यता (30 अंक) और साक्षात्कार (20 अंक) शामिल होंगे। चयन स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन उत्तर प्रदेश द्वारा किया जाएगा। चयनित फेलो को ₹50,000 प्रतिमाह पारिश्रमिक के साथ लैपटॉप, यात्रा भत्ता और आवासीय सुविधा/भत्ता प्रदान किया जाएगा। प्रारंभिक कार्यकाल एक वर्ष का होगा, जिसे प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा। ओटोडी सीएम फेलो स्थानीय संसाधनों, निवेश संभावनाओं और विकास अवसरों का विश्लेषण कर साक्ष्य-आधारित रणनीतियां तैयार करेंगे। इससे विभागीय योजनाओं का बेहतर प्राथमिकता निर्धारण और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। इस फैसले से जिलों में विकास कार्यों की निगरानी और योजना निर्माण अधिक पेशेवर और डेटा-आधारित होगा। इससे प्रदेश के ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ लक्ष्य को हासिल करने में ठोस आधार मिलेगा और स्थानीय स्तर पर विकास की गति तेज होगी। बॉक्स डिजिटल सिस्टम से साक्ष्य होंगे सुरक्षित, छोटे अपराधों में जेल के बजाय सेवा योगी कैबिनेट ने नई न्याय संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तीन महत्वपूर्ण नियम लागू किए हैं, पहला ई-साक्ष्य प्रबंधन नियम, दूसरा ई-समन (इलेक्ट्रॉनिक आदेशिका) नियम और तीसरा सामुदायिक सेवा गाइडलाइंस 2026 है। ये नियम न्याय प्रक्रिया को आधुनिक, तेज और ज्यादा प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं। ई-साक्ष्य के तहत अब डिजिटल सबूत सुरक्षित और मजबूत होंगे। नए ई-साक्ष्य प्रबंधन नियमों के तहत डिजिटल सबूत (जैसे मोबाइल डेटा, वीडियो, ईमेल आदि) को एक वैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा, सुरक्षित और अदालत में पेश किया जाएगा। इससे सबूत के साथ छेड़छाड़ की संभावना कम होगी। केस मजबूत होंगे और फैसले ज्यादा सटीक होंगे। वहीं, ई-समन नियम के तहत अब कोर्ट के समन और वारंट डिजिटल माध्यम से भेजे जा सकेंगे,जैसे ईमेल, मोबाइल मैसेज या अन्य ऐप्स के जरिए। इससे नोटिस जल्दी पहुंचेगा। साथ ही, प्रक्रिया पारदर्शी और ट्रैक करने योग्य बनेगी तो वहीं महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में पहचान गोपनीय रहेगी। सामुदायिक सेवा की नई गाइडलाइंस के अनुसार छोटे अपराधों में अब जेल भेजने के बजाय ‘सामुदायिक सेवा’ कराई जा सकेगी। इससे अपराधियों को सुधार का मौका मिलेगा। जेलों पर बोझ कम होगा और समाज के लिए उपयोगी कार्य (जैसे सफाई, वृक्षारोपण, गो-सेवा, ट्रैफिक मैनेजमेंट) होंगे।  150 सरकारी स्कूलों में बनेंगी ड्रीम स्किल लैब्स, छात्रों को मिलेगा आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण कैबिनेट ने मिलका नेटवर्क प्रोडक्ट्स लि. के सहयोग से प्रदेश के 150 राजकीय विद्यालयों में ड्रीम (डिजाइन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग) स्किल लैब्स स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य छात्रों को नई तकनीकों से जोड़कर उन्हें भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के अनुसार तैयार करना है। इन लैब्स के जरिए छात्रों को रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक डिजाइन जैसी स्किल्स सीखने का मौका मिलेगा। इससे न केवल उनकी तकनीकी समझ और व्यक्तित्व विकास होगा, बल्कि उन्हें पढ़ाई के बाद बेहतर नौकरी और प्लेसमेंट के अवसर भी मिलेंगे। इस परियोजना में 68% निवेश टाटा नेल्को नेटवर्क प्रोडक्ट्स लि. द्वारा और 32% राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। नोएडा-यमुना क्षेत्र को बड़ा पावर बूस्ट, 653 करोड़ से बनेगा नया हाईटेक बिजली उपकेंद्र कैबिनेट बैठक में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र (गौतमबुद्ध नगर) में नया आधुनिक बिजली उपकेंद्र बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सेक्टर-28, यीडा में 400/220 केवी का जीआईएस (गैस इंसुलेटेड) उपकेंद्र स्थापित किया जाएगा, जिसकी कुल क्षमता 3×500 एमवीए होगी। करीब ₹653.53 करोड़ की लागत से बनने वाला यह उपकेंद्र क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे उद्योगों को मजबूत बिजली आपूर्ति देगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, फिल्म सिटी और अन्य औद्योगिक इकाइयों को बिना रुकावट बिजली मिल सकेगी। यह परियोजना न सिर्फ वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि आने वाले समय में बढ़ने वाली बिजली की मांग को भी ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इससे पूरे क्षेत्र में ग्रिड की स्थिरता मजबूत होगी और बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनेगी।

योगी सरकार का बड़ा फैसला: हर महीने 10 तारीख को आएगा बिजली बिल, 25 तक भुगतान की मोहलत

लखनऊ यूपी में जिले-जिले में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर मचे घमासान के बीच यूपी की योगी सरकार ने इस व्यवस्था को ही खत्म कर दिया है। अब स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएंगे। पहले से जो स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, उन्हें पोस्ट पेड कर दिया जाएगा। सीएम योगी के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने इसे लेकर ऐलान किया और साथ ही नए नियमों के बारे में बताया है। अब हर महीने की 10 तारीख को बिजली का बिल आएगा। इसे जमा करने के लिए 15 दिनों यानी 25 तारीख तक का समय होगा। एक राहत यह भी है कि यदि एक महीने का बकाया होगा तो बिजली नहीं कटेगी। पुराने बिजली बिलों के बकाये के लिए भी व्यवस्था बना दी गई है। इसे अब किस्तों में जमा किया जा सकेगा। इसके साथ ही सिक्योरिटी मनी भी अब जमा करनी होगी। इसे भी किस्त में जमा करने की व्यवस्था कर दी गई है। हालांकि नए स्मार्ट मीटर लगने के बाद से ज्यादा बिल आने की शिकायतों का क्या होगा? इस पर अभी कुछ नहीं कहा गया है। समय से न मिले बिल तो यहां करें शिकायत ऊर्जा मंत्री न कहा कि सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बिल हर महीने की 10 तारीख तक दिए जाएंगे। बिल मिलने की तारीख से भुगतान के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। जिन स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को समय से बिल न मिले वे वितरण कंपनियों के नंबर पर कनेक्शन नंबर बताकर बिल प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए फोन नंबर भी जारी किए गए हैं। इसके अलावा टोल फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज करके भी बिल प्राप्त किए जा सकेंगे। एके शर्मा ने आदेश दिए हैं कि उपभोक्ताओं को बिल संबंधी किसी भी समस्या के निपटारे के लिए खंड और उपखंड स्तर पर कैंप लगाए जाएंगे। पूर्वांचल – 8010968292; मध्यांचल – 7669003409; पश्चिमांचल – 7859804803 दक्षिणांचल – 8010957826 केस्को – 8287835233 चार किस्तों में जमा करवाई जाएगी सिक्योरिटी पोस्टपेड मीटर में कनेक्शनधारकों से सिक्योरिटी राशि जमा करवाई जाती है जबकि प्रीपेड मीटर में सिक्योरिटी राशि नहीं देनी होती है। ऐसे में जिन उपभोक्ताओं के मीटर पोस्टपेड से प्रीपेड में बदले गए उनकी सिक्योरिटी राशि वापस कर दी गई थी। अब जब दोबारा प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदला जाएगा तो उपभोक्ताओं को सिक्योरिटी राशि जमा करनी होगी। एके शर्मा ने आदेश दिए हैं कि सिक्योरिटी राशि एकमुश्त न जमा करवाकर चार किस्तों में जमा करवाई जाए ताकि उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ न आए। अब लोगों पर दर्ज मुकदमे भी वापस लेने की मांग प्रीपेड मीटर की जबरिया लगाने के खिलाफ मुखर रहे अवधेश कुमार वर्मा ने प्रीपेड मीटर की व्यवस्था समाप्त होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया है। उन्होंने मीटर उखाड़कर फेंकने वाले उपभोक्ताओं पर दर्ज मुकदमे भी वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर पावर कॉरपोरेशन ने पहले ही नियम के मुताबिक फैसला ले लिया होता तो ऐसी घटना नहीं होती। यूपी में जबरिया लगाए जा रहे थे प्रीपेड मीटर पिछले संसद सत्र के दौरान केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने साफ कर दिया था कि मीटर प्रीपेड होगा या पोस्टपेड यह चुनने का अधिकार उपभोक्ताओं का है। विद्युत अधिनियम – 2003 की धारा 47 (5) में यही व्यवस्था है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने भी अधिसूचना जारी करके मीटरों के प्रीपेड मोड में होने की बाध्यता समाप्त कर दी थी।इसके बाद भी यूपी में लोगों के घरों पर जबरिया प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे थे। अचानक रिचार्ज खत्म होने पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इससे जिले-जिले आक्रोश फैल रहा था। इस आक्रोश के कारण ही चुनावी साल में सरकार किसी तरह का खतरा मोल लेना नहीं चाह रही थी। अंततः सोमवार को प्रीपेड की व्यस्था खत्म करने का ऐलान कर दिया गया।

वन ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य के लिए मुख्यमंत्री फेलोशिप शुरू, युवाओं को मिलेगा ₹50,000 मानदेय

लखनऊ औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नंदी ने सोमवार को इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में औद्योगिक विकास से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा। उन्होंने उच्चस्तरीय बैठक में लेटर आफ कम्फर्ट (एलओसी) से जुड़े आवेदनों की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में प्रमुख निवेश प्रस्तावों को एलओसी जारी करने की सिफारिश की गई। यह परियोजनाएं बरेली, फिरोजाबाद, वाराणसी, गौतमबुद्ध नगर और कानपुर देहात में स्थापित की जाएंगी और इनके माध्यम से 2,000 से अधिक रोजगार सृजित होने का अनुमान है। प्रस्तावित परियोजनाओं में स्टील व आयरन कास्टिंग, मेडिकल डिवाइस, पीईटी प्रीफार्म, कैप्स व क्लोजर्स, ईवी चार्जर्स, बीईएसएस चार्जर्स, इलेक्ट्रिकल एनक्लोजर और सोलर स्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में विनिर्माण गतिविधियां शामिल हैं। इन्हें सभी प्रोत्साहन व सब्सिडी प्रदान की जाएगी। बैठक में मंत्री ने कहा कि सभी आवेदनों का त्वरित व पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार सहित इन्वेस्ट यूपी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे वन ट्रिलियन डॉलर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम लागू उधर, प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए वन ट्रिलियन डालर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम (ओटीडी सीएम फेला) कार्यक्रम लागू किया गया है। कैबिनेट की बैठक में सोमवार को इसके प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। कार्यक्रम के तहत हर जिले में पहले से डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला ओटीडी सेल की कार्यक्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके लिए सभी जिलों में एक ओटीडी फेलो (आर्थिक विकास) और एक ओटीडी फेलो (डेटा विश्लेषक) को ओटीडी सीएम फेलो के रूप में तैनात किए जाने का निर्णय किया गया है। ओटीडी फेलो विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित कर कृषि, उ‌द्योग, निवेश, अवसंरचना, पर्यटन, रोजगार तथा जिला घरेलू उत्पाद (डीडीपी) से संबंधित संकेतांकों की नियमित समीक्षा में सहयोग करेंगे। डाटा का वैज्ञानिक विश्लेषण कर मासिक और त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट भी तैयार करेंगे। नियोजन विभाग विकसित डैशबोर्ड के माध्यम से आनलाइन रिपोर्टिंग और केपीएल आधारित मानिटरिंग व्यवस्था लागू करेगा। ओटीडी सीएम फेला के लिए संबंधित विषयों में परास्नातक की पात्रता तथा अधिकतम 40 वर्ष आयु सीमा निर्धारित की गई है। अनिवार्य अहर्ता की उपाधि में निर्धारित प्रतिशत, शोध प्रकाशन और प्रासंगिक अनुभव को वरीयता दी जाएगी। हर माह 50 हजार रुपये मिलेगा पारिश्रमिक ओटीडी फेलो को 50,000 प्रतिमाह पारिश्रमिक, लैपटाप, यात्रा भत्ता और आवासीय सुविधा/भत्ता प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम प्रारंभिक रूप से एक वर्ष के लिए होगा, जिसे प्रदर्शन के आधार पर नवीनीकृत किया जा सकेगा। कार्यक्रम के तहत ओटीडी सीएम फेलो का चयन स्टेट ट्रांसफारर्मेशन कमीशन (एसटीसी) करेगा। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा (50 अंक), अधिमानी अहर्ता (30 अंक) और साक्षात्कार (20 अंक) शामिल होंगे। प्रारंभिक कार्यकाल एक वर्ष होगा।