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देश के लिए मिसाल : कचरे को रिसाइकिल कर बनाया अनोखा संविधान पार्क

लखनऊ. संविधान को समझना अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा। बागपत के बड़ौत नगर पालिका परिसर में ऐसा अनोखा संविधान पार्क विकसित किया गया है, जहां बच्चे खेल-खेल में संविधान के मूल्यों को सीखेंगे, युवा नागरिक कर्तव्यों से जुड़ेंगे और आमजन स्वस्थ जीवन के साथ जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा पाएंगे। कचरे को रिसाइकिल कर बनाए गए इस पार्क ने “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को जमीन पर उतारते हुए देश के लिए एक नई मिसाल पेश की है। सहजता से जुड़ सकेगा हर आयु वर्ग का व्यक्ति यह पार्क सिर्फ हरियाली या टहलने की जगह नहीं, बल्कि एक ओपन क्लासरूम और स्ट्रीट लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया गया है। न्याय, समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे संविधान के मूल आदर्शों को प्रतीकों, बोर्डों और संरचनाओं के माध्यम से इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि हर आयु वर्ग का व्यक्ति सहजता से उनसे जुड़ सके। बच्चों के लिए यह पार्क सीखने का आनंददायक माध्यम बन गया है, जहां पढ़ाई बोझ नहीं, अनुभव बन जाती है। संविधान पार्क की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित 600 किलोग्राम की संविधान की किताब की विराट प्रतिकृति है। 11 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी यह प्रतिकृति न केवल आकार में भव्य है, बल्कि अपने संदेश में भी अत्यंत प्रभावशाली है। संविधान की मूल प्रस्तावना की प्रतिकृति बड़ौत नगर पालिका में स्थापित की गई है। इसका लोकार्पण राज्य मंत्री केपी मलिक और जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने किया है। आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी आंदोलन की भावना को जीवंत करता राष्ट्रपिता का चरखा पूरी तरह रिसाइकल्ड मटीरियल से निर्मित यह प्रतिकृति पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार विकास का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह दिखाती है कि कचरा भी नवाचार और संदेश का माध्यम बन सकता है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि पार्क में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चरखा आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी आंदोलन की भावना को जीवंत करता है। वहीं बागपत के प्राचीन नाम ‘व्याघप्रस्थ’ की थीम पर विकसित वाटर कियोस्क स्थानीय संस्कृति और इतिहास से जुड़ाव को दर्शाता है। बदलते शहरी परिवेश में भी अपनी जड़ों से जुड़े रहने का यह संदेश पार्क को खास बनाता है। शारीरिक मजबूती के साथ मानसिक और बौद्धिक समृद्धि संविधान पार्क में अधिकारों और कर्तव्यों से जुड़े बोर्ड, बुक प्वाइंट, लाइब्रेरी और स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों की व्यवस्था की गई है। यहां आने वाला व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से सक्रिय होता है, बल्कि मानसिक और बौद्धिक रूप से भी समृद्ध होता है। यही कारण है कि यह पार्क युवाओं के साथ-साथ बच्चों और बुजुर्गों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। देश के लिए प्रेरक मॉडल बनकर उभरा संविधान पार्क जिलाधिकारी अस्मिता लाल के अनुसार, बागपत का संविधान पार्क बेहतर सेहत के साथ-साथ नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों की समझ देता है। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें विकास के साथ संस्कार, आधुनिकता के साथ संविधान और सेहत के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को जोड़ा गया है। संविधान पार्क आज केवल बागपत की पहचान नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है।

अयोध्या जेल की सुरक्षा फेल, दो गंभीर आरोपी फरार, 7 अधिकारियों पर कार्रवाई

अयोध्या यूपी के अयोध्या में जिला कारागार से दो बंदी फरार हो गए। दोनों बंदियों ने बैरक मे लगी ग्रिल काट कर बाहर निकले, उसके बाद बांस के सहारे जिला कारागार के पीछे जहां कैमरे का सर्विलांस नहीं था उस क्षेत्र से चारदीवारी फांद कर भाग गए। सूचना पर जिला पुलिस ने तीन टीमों को बनाकर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए। इसमें अमेठी निवासी गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरी पुत्र साधु राम निवासी, मुसाफिरखाना और सुल्तानपुर निवासी शेर अली नाम के बंदी शामिल हैं। दोनों बंदियों के फरार होने की जानकारी पर जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली उन्होंने मौका का मुआयना किया। उन लोगों ने जेल के पिछले हिस्से जिस तरफ हरियाली ज्यादा है वहां बांस के ऊंचे पेड़ों के सहारे दीवार फान गए। हमने उनकी गिरफ्तारी के लिए तीन टीमों को लगा दिया है जल्द सफलता मिलेगी। इनमें एक बंदी हत्या के प्रयास के मामले में व दूसरा बलात्कार के आरोप में जेल में निरुद्ध थे। जेल अधीक्षक समेत 7 सस्पेंड अयोध्या जिला कारागार अयोध्या से दो बंदियों के फरार होने पर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। डीजी जेल पीसी मीणा ने ऐक्शन लेते हुए वरिष्ठ जेल अधीक्षक यूसी मिश्रा को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही जेलर जेके यादव,डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी को भी निलंबित कर दिया है। यही नहीं ड्यूटी पर तैनाती के दौरान लापरवाही पर हेड जेल वॉर्डर व 3 जेल वॉर्डर को भी सस्पेंड कर दिया है। उधर मामले की जांच के लिए डीआईजी जेल ए के मैत्रेय अयोध्या पहुंच गए हैं । कुछ देर पहले ही जिलाधिकारी निखिल टीकाराम एवं एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोवर भी जेल पहुंच गए। जिला जेल से दो बंदियों के फरार होने के मामले में जांच करने पहुंचे डीआईजी जेल मैत्रीए ने कहा कि दोनों बंदी विशेष चार नंबर बैरक में बंद थे। रोशनदान की ईंट तोड़कर दोनों बाहर निकले थे। मौके से 25 फीट का बांस, 30 फुट की सरिया व कंबल बरामद हुआ है। कंबल की रस्सी बनाकर बाउंड्री वाल कूदे थे दोनों।

योगी सरकार का शिक्षा वर्ग पर मेगा फैसला: इलाज कैशलेस, 30 अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर

लखनऊ यूपी की योगी सरकार ने शिक्षकों और शिक्षा मित्रों को बड़ी सौगात दी है। योगी कैबिनेट ने गुरुवार को शिक्षा जगत के लिए ऐतिहासिक कैशलेस मेडिकल बीमा की मंजूरी दे दी है।पांच लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त हो सकेगा। लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में करीब दो घंटे तक हुुई कैबिनेट की बैठक में 32 प्रस्ताव रखे गए थे। इनमें से 30 प्रस्तावों पर मुहर लगी है। विधानसभा का बजट सत्र बुलाने पर भी मुहर लगी है। नौ फरवरी से बजट सत्र बुलाया गया है। 11 को बजट पेश होगा।   योगी सरकार ने माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के साथ ही रसोइयों और कार्मिकों को भी कैशलेस मेडिकल बीमा की सुविधा दी है। अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों और स्ववित्तपोषित स्कूलों के शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित स्कूलों के शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षा मित्रों, विशेष शिक्षकों, अनुदेशकों, कस्तूरबा गांधी विद्यालय के स्टाफ और रसोइयों (PM पोषण योजना) को सपरिवार कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी। सरकार के फैसले से बेसिक शिक्षा के कुल 11 लाख 95 हजार 391 शिक्षकों और कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी इसी तरह माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन 2 लाख 97 हजार 589 को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज मिल सकेगा। सीएम फैलो को राज्य लोकसेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तहत होने वाली भर्तियों में आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट और अनुभव के आधार पर भारांक मिलेंगे। जिलों के लिए विशेष विकास कार्य बरेली और मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को अपने-अपने जनपदों में विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला बनाने के लिए कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। गोरखपुर में ₹721 करोड़ और वाराणसी के 18 वार्डों के लिए ₹266 करोड़ के सीवरेज प्रोजेक्ट्स को वित्तीय मंजूरी दी गई है। लखनऊ-हरदोई बॉर्डर पर बनने वाले टेक्सटाइल पार्क के लिए ₹458 करोड़ से अधिक की जलापूर्ति योजना को पास कर दिया गया है। मानवीय और अन्य निर्णय पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए विस्थापित हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वास के लिए भूमि और सुविधाओं की व्यवस्था को मंजूरी मिली है। उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा और सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) नियमावली में संशोधन के प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी गई है।  

प्रशांत सिंह के इस्तीफे पर सस्पेंस, GST विभाग में मचा हड़कंप, सरकार अनजान

लखनऊ अयोध्या में तैनात जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह द्वारा सार्वजनिक रूप से इस्तीफे का एलान किए जाने के बावजूद, अब तक उनका त्यागपत्र न तो शासन स्तर पर पहुंचा है और न ही राज्य कर आयुक्त कार्यालय में इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि हो सकी है. सूत्रों के मुताबिक, विभागीय अधिकारी स्पष्ट तौर पर कह रहे हैं कि जब तक लिखित रूप में इस्तीफा प्राप्त नहीं होता, तब तक आगे की किसी भी कार्रवाई पर निर्णय नहीं लिया जा सकता. प्रशांत कुमार सिंह ने इसी मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में भावनात्मक बयान देते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी. इस एलान ने न सिर्फ प्रशासनिक गलियारों में बल्कि सियासी हलकों में भी हलचल मचा दी थी. यह इस्तीफा एक राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा गया, लेकिन उसी दिन देर रात उनके बड़े भाई डॉक्टर विश्वजीत ने यह आरोप लगा दिया था कि प्रशांत फर्जी दिव्यांग प्रमाण के सहारे नौकरी पाई और जब कार्रवाई होने की तैयारी थी तो उससे बचने को इस रूप में इस्तीफे दिया. अब जब प्रशासनिक स्तर पर इसकी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है, तो पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े होने लगे हैं. राज्य कर आयुक्त से मांगी गई पूरी रिपोर्ट इस बीच, उत्तर प्रदेश शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य कर आयुक्त से प्रशांत कुमार सिंह से जुड़ी पूरी रिपोर्ट तलब कर ली है. शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रिपोर्ट में उनके खिलाफ चल रही जांच, अब तक की गई विभागीय कार्रवाई, जारी नोटिस और भविष्य में संभावित कार्रवाई से जुड़े सभी बिंदुओं को शामिल किया जाए. सूत्रों के अनुसार, शासन यह भी जानना चाहता है कि इस्तीफे की घोषणा किन परिस्थितियों में की गई और क्या इसका सीधा संबंध प्रशांत कुमार सिंह के खिलाफ चल रही जांच से है. रिपोर्ट शासन को मिलते ही आगे की रणनीति तय की जाएगी.  फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से नौकरी पाने का दावा पूरे विवाद की जड़ में प्रशांत कुमार सिंह के सगे भाई, डॉक्टर विश्वजीत सिंह द्वारा लगाए गए बेहद गंभीर आरोप हैं. डॉ. विश्वजीत सिंह का दावा है कि प्रशांत ने कथित रूप से फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी नौकरी हासिल की है. उन्होंने इस मामले में न सिर्फ विभागीय स्तर पर शिकायत की, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी बात पहुंचाई. डॉ. विश्वजीत सिंह के अनुसार, उन्होंने 20 अगस्त 2021 को औपचारिक रूप से प्रशांत कुमार सिंह के दिव्यांग प्रमाणपत्र की जांच कराने की मांग की थी. इसके बाद मंडलीय चिकित्सा परिषद ने दो बार प्रशांत को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने के लिए बुलाया, लेकिन दोनों ही मौकों पर वे पेश नहीं हुए. डॉ. विश्वजीत का कहना है कि यह अपने आप में संदेह पैदा करने वाला तथ्य है. यदि प्रमाणपत्र वैध और सही है, तो जांच से बचने की क्या आवश्यकता थी? डॉ. विश्वजीत सिंह ने उस पत्र को भी दिखाया है, जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दिव्यांग प्रमाणपत्र की विधिवत जांच कराने के निर्देश दिए गए थे. इस पत्र के सामने आने के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया. सूत्र बताते हैं कि मऊ से जुड़े प्रकरण में सीएमओ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जिसे शासन को भेजा जाना है. यह रिपोर्ट तय करेगी कि दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई या नहीं. बीमारी को लेकर सवाल डॉ. विश्वजीत सिंह ने एक और अहम सवाल उठाया है. उनका दावा है कि जिस आंख की बीमारी के आधार पर प्रशांत कुमार सिंह ने दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया, वह बीमारी चिकित्सकीय दृष्टि से 50 वर्ष की आयु से पहले होना अत्यंत दुर्लभ है. ऐसे में कम उम्र में उस बीमारी के आधार पर दिव्यांगता का प्रमाणपत्र मिलना, कई सवालों को जन्म देता है. यही नहीं, डॉ. विश्वजीत का कहना है कि 2021 से अब तक प्रशांत कुमार सिंह को कम से कम तीन बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन उन्होंने न तो व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखा और न ही लिखित जवाब दिया. राजनीतिक पृष्ठभूमि भी बनी चर्चा का विषय प्रशांत कुमार सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इन दिनों चर्चा में है. जानकारी के अनुसार, वे कभी वरिष्ठ नेता अमर सिंह की पार्टी ‘लोकमंच’ में जिलाध्यक्ष रह चुके हैं. इसके बाद उन्होंने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर सेल टैक्स विभाग में चयन पाया. उनका एक और पोस्टर वायरल हो रहा है जिसमें भगवा बैकग्राउंड के बीच वह अपनी फोटो लगाए हैं और उस पर अटल बिहारी वाजपेई की कविता लिखी है. बताया जा रहा है कि वह बीजेपी से टिकट के दावेदार भी थे.

आगरा में ताबड़तोड़ पुलिस एनकाउंटर, राज चौहान हत्याकांड का मुख्य आरोपी अरबाज मारा गया

आगरा यूपी के आगरा में हुए राज चौहान हत्याकांड के मामले में पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन हुआ है. हत्यारोपियों से पुलिस की तीन अलग-अलग मुठभेड़ हुईं जिसमें मुख्य आरोपी अरबाज खान उर्फ मंसूरी ढेर हो गया. वहीं, दो अन्य आरोपी आशु तिवारी और मोहित पंडित के पैर में गोली लगी है. इस मुठभेड़ के दौरान दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं.   आपको बता दें कि आगरा CP दीपक कुमार के निर्देश पर डीसीपी सिटी अली अब्बास के नेतृत्व में ये बड़ी कार्रवाई हुई है. तीनों आरोपियों पर पुलिस ने 25-25 हजार का इनाम रखा था. तीनों ही बीते 23 जनवरी को हुए राज चौहान हत्याकांड में फरार चल रहे थे. राज चौहान की गोली मारकर हत्या की गई थी. इस हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस ने 9 टीमें बनाई थीं. इनपुट मिलने पर आरोपियों की घेराबंदी की गई. बचने के लिए इन्होने पुलिस टीम पर फायर किया. आत्मरक्षा में पुलिस ने भी गोली चलाई. इसमें अरबाज मारा गया, जबकि आशु और मोहित घायल हो गए. उन्हें इलाज के लिए SN मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है. मुठभेड़ थाना ट्रांस यमुना और डोकी क्षेत्र में हुई.  आगरा पुलिस का बयान 'एक्स' पर जानकारी देते हुए बरेली पुलिस ने लिखा- पुलिस आयुक्त दीपक कुमार के निर्देशन में 29 जनवरी 2026 की रात चेकिंग के दौरान अभियुक्त मोहित पंडित को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में मोहित के पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक तमंचा, कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद की है. 23 जनवरी को हुई इस हत्या के बाद से ही पुलिस टीमें अपराधियों की तलाश में जुटी थीं. इसी तरह थाना डौकी पुलिस टीम द्वारा इनामिया अभियुक्त आशु तिवारी को पुलिस मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया गया. उसके कब्जे से 1 तमंचा, 1 जिंदा कारतूस व 1 खोखा कारतूस.315 बोर बरामद हुआ.   फिलहाल, आधी रात को हुई इन तीन मुठभेड़ों में एक बदमाश मारा गया जबकि दो को घायल अवस्था में गिरफ्तार किया गया. हत्याकांड में शामिल कई और लोगों को चिन्हित किया गया है. उनकी भी गिरफ्तारी की कोशिश जारी है.

संत समाज ने UGC नियमों पर जताया विरोध, सरकार से की हस्तक्षेप की अपील

वाराणसी यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नई गाइडलाइंस के बाद से ही लगातार आरोप लग रहे हैं कि यह हिंदू समाज और ऊंची जातियों के युवाओं के साथ भेदभाव को दिखाता है। झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ भी किसी तरह की कार्रवाई का प्रावधान नहीं रखा गया है। अब यूजीसी को लेकर संत-समाज में भी आक्रोश देखने को मिल रहा है। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रनंद सरस्वती ने पीएम मोदी से नई गाइडलाइंस बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रनंद सरस्वती ने नई गाइडलाइंस को लेकर कहा, "ये नई नियमावली भेदभाव वाली है और हिन्दू समाज को कई वर्गों में बांटने वाला फैसला है। हमारी समिति को यह नियमावली स्वीकार्य नहीं है और हम इसका विरोध करते हैं। संविधान ने सभी को समानता का अधिकार दिया है, लेकिन क्या यूजीसी की नई नियमावली इसे पूरा करती है?" उन्होंने कहा, "ऐसे में राष्ट्र के युवा के मन में भेदभाव की भावना को इस कदर भरा जा रहा है कि आने वाले समय में झूठी शिकायतों को लेकर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऊंची जाति में जन्म लेना अपराध है।" उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने भेदभाव करने वाली नियमावली बनाई है। चाहे वे यूजीसी के अध्यक्ष हों या शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अधिकारी, सभी से इस्तीफा लेना चाहिए और हिंदुओं को बांटने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। हमारा देश एक राष्ट्र, एक मन और एक जीवन के नियमों पर चलता है।" बता दें कि एसटी, एससी, ओबीसी, महिला और दिव्यांग छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को कम करने और निष्पक्ष जांच के लिए यूजीसी ने पुराने नियमों में बदलाव करते हुए इस साल इक्विटी इन हायर एजुकेशन रेगुलेशंस लागू किया है, जिसके लिए दो अलग केंद्र और कमेटी का गठन किया गया है। इसको लेकर विरोध हो रहा है।

ट्रैफिक अनुशासन पर बड़ा कदम: अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई, 117 होल्डिंग एरिया तय

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा माह चला रहा है। 1 से 31 जनवरी तक चल रहे सड़क सुरक्षा माह के तहत अवैध पार्किंग के खिलाफ प्रदेशव्यापी महा-अभियान चलाया जा रहा है। इस क्रम में परिवहन विभाग होल्डिंग एरिया उपलब्ध करवाने के साथ प्रदेशवासियों में जागरूकता फैला रहा है, वहीं दूसरी ओर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त प्रवर्तन कार्रवाई भी कर रहा है। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बताया कि सड़क सुरक्षा माह के तहत परिवहन विभाग विशेष रूप से एक्सप्रेस-वे, नेशनल हाईवे (एनएच), स्टेट हाईवे (एसएच) और अन्य प्रमुख सड़कों के किनारे अवैध रूप से खड़े वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक अभियान चला रहा है। इस दिशा में एक ओर प्रदेश में लगभग 117 पार्किंग स्थल या होल्डिंग एरिया चिन्हित किए गये हैं, वहीं दूसरी ओर दण्डात्मक प्रवर्तन कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस-वे और हाईवे की शोल्डर लेन अथवा सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े वाहन तेज रफ्तार यातायात के लिए ‘डेथ ट्रैप’ साबित होते हैं। पीछे से आने वाले वाहनों को अचानक रुकावट मिलने से गंभीर दुर्घटनाएं होती हैं। इसी खतरे को देखते हुए प्रवर्तन टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि सड़कों को पूरी तरह खाली करा कर, वाहनों की पार्किंग होल्डिंग एरिया में सुनिश्चित की जाए। इसके बाद भी नियम का उल्लघंन करने वालों के प्रति दण्डात्मक कर्रवाई की जाए।     परिवहन आयुक्त ने बताया कि विभाग द्वारा प्रदेश के एक्सप्रेस-वे, नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और अन्य प्रमुख सड़कों पर विशेष जांच अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत 1 से 27 जनवरी के बीच कुल 4,949 वाहनों की जांच की गई, जिनमें से 3,488 वाहनों के विरुद्ध अवैध पार्किंग एवं अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालान किए गए। गंभीर मामलों में 55 वाहनों को मौके पर ही सीज किया गया। इसके अतिरिक्त, यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए 1,847 वाहनों को क्रेन की सहायता से सड़कों से हटाया गया। इसके साथ ही विभाग द्वारा जागरूकता अभियान को और मजबूत किया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में एनसीसी, स्काउट गाइड्स और स्वयंसेवी संस्थाओं के युवाओं को यातायात नियमों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे समाज में सड़क सुरक्षा के संदेश को प्रभावी ढंग से पहुंचा सकें। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बताय कि विभाग का स्पष्ट संकल्प है कि जागरूकता और सख्त प्रवर्तन के माध्यम से प्रत्येक नागरिक का सफर सुरक्षित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

देश व प्रदेश की जनजातियों के 200 से अधिक लुप्तप्राय वाद्य यंत्रों का किया जा रहा है संरक्षण

लखनऊ  प्रदेश के जंगलों, पहाड़ों और नदियों के किनारे गूंजने वाली जनजातीय वाद्य यंत्रों की धुनें आज आधुनिक संगीत की चकाचौंध में खोती जा रही हैं। लेकिन, उत्तर प्रदेश का लोक एवं जनजातीय संस्कृति संस्थान इन धुनों को फिर से जीवंत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। जनजातीय सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के उद्देश्य से संस्थान देश व प्रदेश की जनजातियों के 200 से अधिक लुप्तप्राय वाद्य यंत्रों का संरक्षण कर रहा है। इस दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में संस्थान द्वारा समय-समय पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनियां आयोजित की जा रही हैं। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से न केवल वाद्य यंत्रों को सहेजा जा रहा है, बल्कि उन्हें बजाने वाले जनजातीय कलाकारों को भी मंच मिल रहा है।  संरक्षित वाद्य यंत्रों में शामिल हैं प्राचीन ढोलक, नगाड़ा, डफ, ढफली, डमरू व थाली उत्तर प्रदेश के गोंड, थारू, बुक्सा, खरवार, सहरिया, बैगा, अगरिया, चेरो व माहीगीर जैसी जनजातियों के लोकजीवन में संगीत की विशेष भूमिका रही है। मंजीरा, चिमटा, खड़ताल व घुंघरुओं की खनक,  बीन व सारंगी की सुरमयी धुनें इन समुदायों की पहचान रही हैं। डिजिटल दौर में जब ये वाद्य यंत्र धीरे-धीरे विलुप्त हो रहे हैं, ऐसे समय में संस्थान का यह प्रयास सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की मिसाल बन रहा है। इस क्रम में संस्थान द्वारा जनजातियों के प्राचीन ताल वाद्य यंत्रों जैसे ढोलक, नगाड़ा, डफ, ढफली, डमरू, ढक व थाली का संरक्षण किया जा रहा है। वहीं, सुर वाद्यों में बांसुरी, बीन व सारंगी तथा लय वाद्यों में मंजीरा, चिमटा, घुंघरू व खड़ताल जैसे 200 से अधिक पारंपरिक वाद्य यंत्रों को भी संरक्षित किया जा रहा है। कला कुंभ व कला गांव में लगाई गई वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी  प्रदेश के लोक एवं जनजातीय संस्कृति संस्थान ने इस दिशा में पिछले वर्ष प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के अवसर पर कला कुंभ में इन वाद्य यंत्रों को प्रदर्शित किया था, जिसे देश-विदेश से आए कला प्रेमियों और पर्यटकों ने खूब सराहा। इसी तरह यूपी दिवस के अवसर पर कला गांव में भी इन वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसने युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर प्रदान किया। जनजातीय गौरव बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित जनजातीय भागीदारी महोत्सव में जब पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज सुनाई दी, तो यह स्पष्ट हो गया कि ये प्रयास केवल संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक खोती हुई विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी हैं। लोक एवं जनजातीय संस्कृति संस्थान की यह पहल संदेश देती है कि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाकर ही सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखा जा सकता है।

किसानों के लिए सुरक्षा कवच बनी योगी सरकार, 873.58 करोड़ रुपए की सहायता जारी

लखनऊ प्रदेश के किसानों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू की गई मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। साल 2019 से संचालित इस योजना के तहत अब तक 1 लाख 8 हजार से अधिक किसानों को आर्थिक सहायता मिल चुकी है। मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुरूप योजना का पूरी तरह डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे योजना के क्रियान्वयन में सरलता के साथ पारदर्शिता में भी बढ़ोतरी होगी। योजना न केवल दुर्घटना की स्थिति में किसान परिवार का संबल बनती है, बल्कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता प्रदान करती है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत दुर्घटनावश मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में किसान परिवार को 5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना के तहत राजस्व विभाग की ओर से 873.58 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं, जिससे प्रदेश के 18,145 किसानों या उनके परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में वर्ष 2023-24 में योजना का दायरा बढ़ाते हुए भूमिहीन किसानों व खेतिहर श्रमिकों को भी योजना में शामिल किया गया। वर्ष 2023-24 में योजना के अंतर्गत 944.72 करोड़ रुपए वितरित कर 23,821 किसानों को सहयोग प्रदान किया गया था। योजना की शुरुआत के वर्ष 2019 से अब तक 1,08,098 किसानों या उनके परिवारों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है, जो इन परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच साबित हो रही है। योजना के सुचारू व पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देश पर राजस्व परिषद योजना का पूरी तरह डिजिटलीकरण कर रहा है। इसके लिए एनआईसी की मदद से एक आधुनिक वेब पोर्टल और सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है, जो कि फरवरी 2026 तक पूरा हो जाएगा। योजना के पूरी तरह ऑनलाइन हो जाने से किसानों को बार-बार तहसील या जिला कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी समाप्त हो जाएंगी। इस पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया से लेकर लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे धनराशि हस्तांतरण तक संभव हो सकेगा। योजना में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के लिए इस पोर्टल को डैशबोर्ड से भी जोड़ा जा रहा है। योजना प्रदेश के किसानों को कठिन परिस्थितियों में आर्थिक संबल प्रदान कर योगी सरकार की किसान हितैषी सोच को मजबूती से आगे बढ़ा रही है।

नए UGC नियमों पर मायावती का बचाव, बोलीं विरोध सवर्णों तक सीमित नहीं होना चाहिए

लखनऊ नए यूजीसी नियमों को लेकर बसपा प्रमुख की प्रतिक्रिया सामने आई है. मायावती ने उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटियों के गठन को अनिवार्य बनाने वाले UGC के नए नियमों का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इस कदम का विरोध बिल्कुल भी जायज नहीं है. हालांकि, मायावती ने चेतावनी दी कि सामाजिक तनाव से बचने के लिए इन नियमों को व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाना चाहिए था. X पर कई पोस्ट में, मायावती ने कहा कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से UGC के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नियम, 2026 को 'जातिवादी मानसिकता' वाले लोगों द्वारा गलत तरीके से भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है. उन्होंने कहा- सरकारी कॉलेजों और निजी विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को हल करने के लिए 'इक्विटी कमेटियों' के गठन के नए UGC नियमों के कुछ प्रावधानों का विरोध केवल सामान्य वर्ग के वे लोग कर रहे हैं जिनकी जातिवादी मानसिकता है, और वे इन्हें साजिश और भेदभावपूर्ण बता रहे हैं. यह बिल्कुल भी उचित नहीं है.  बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना ​​है कि ऐसे नियमों को लागू करने से पहले सभी को विश्वास में लिया जाता तो बेहतर होता है. सरकारों और संस्थानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे कदम देश में सामाजिक तनाव का कारण न बनें. उन्होंने दलितों और पिछड़े वर्गों से भी अपील की कि वे स्वार्थी और अवसरवादी नेताओं के भड़काऊ बयानों के शिकार न बनें.  मायावती ने कहा, "ऐसे मामलों में, दलितों और OBC को भी अपने ही स्वार्थी और बिके हुए नेताओं के भड़काऊ बयानों के प्रभाव में नहीं आना चाहिए, जो उनकी आड़ में गंदी राजनीति करते रहते हैं. इन वर्गों को सतर्क रहना चाहिए." आपको बता दें कि UGC ने 13 जनवरी को नए नियमों को अधिसूचित किया, जिसमें सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए भेदभाव की शिकायतों को देखने और समावेश को बढ़ावा देने के लिए इक्विटी कमेटियों का गठन करना अनिवार्य कर दिया गया है. नियमों के अनुसार, इन कमेटियों में अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग व्यक्तियों और महिलाओं के सदस्य शामिल होने चाहिए. 2026 के नियम UGC के 2012 के इक्विटी नियमों की जगह लेते हैं, जो काफी हद तक सलाहकारी प्रकृति के थे. इस कदम से उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया है, जिसमें आलोचकों का आरोप है कि नियमों का दुरुपयोग किया जा सकता है. इन चिंताओं को दूर करते हुए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को आश्वासन दिया कि नए ढांचे के तहत कोई उत्पीड़न या भेदभाव नहीं होगा. प्रधान ने कहा, "मैं सभी को विनम्रतापूर्वक भरोसा दिलाना चाहता हूं कि किसी को भी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी, कोई भेदभाव नहीं होगा और किसी को भी भेदभाव के नाम पर नियम का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा."