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सीएम योगी ने संक्रांति पर्व पर लॉन्च किया खास कैलेंडर, परंपरा और संस्कृति की दिखेगी झलक

गोरखपुर सीएम योगी आदित्यनाथ मकर संक्रांति के मौके पर गोरखपुर में हैं। यहां बुधवार की सुबह उन्होंने गोरखपुर नगर निगम के ‘वार्षिक स्वच्छता कैलेंडर 2026’ का विमोचन किया। इस दौरान गोरखपुर के महापौर डॉ मंगलेश कुमार श्रीवास्तव, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्र और कई पार्षद मौजूद रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 की नगर निगम की उपलब्धियों के लिए महापौर और नगर आयुक्त समेत सभी पार्षदों और महानगरवासियों को शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही महानगर को गारबेज फ्री सिटी में 7 स्टॉर का लक्ष्य हासिल करने का लक्ष्य भी दिया। नगर निगम का वार्षिक स्वच्छता कैलेंडर 2026 सिर्फ तिथियों का संग्रह न होकर नगर निगम की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का दस्तावेज है, जिसमें स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में प्राप्त 5-स्टार रेटिंग और सफाई मित्र सुरक्षित शहर में देश के शीर्ष तीन शहरों में स्थान बनाने जैसी गौरवशाली उपलब्धियों को दर्शाया गया है। इसमें अर्बन फ्लड मैनेजमेंट, अर्बन फैसिलिटेशन सेंटर, और राप्ती नदी के संरक्षण के लिए फाइटोरेमेडिएशन जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ 'वेस्ट टू वंडर' और लिगेसी वेस्ट निस्तारण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का विवरण दिया है। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि इस कैलेंडर का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और जन-भागीदारी के माध्यम से गोरखपुर को एक 'आदर्श एवं आधुनिक नगर' के रूप में विश्व पटल पर स्थापित करना है। महापौर डॉ मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यह कैलेंडर स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के थीम स्वच्छता की एक पहल – बढ़ाये हाथ करे सफाई साथ को जोड़ते हुए आम जनमानस में भी जागरूकता फैलाने का कार्य करेगा। कल बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाएंगे सीएम योगी गोरक्षपीठाधीश्वर एवं सीएम योगी आदित्यनाथ मकर संक्रांति पर गुरुवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी अर्पित करेंगे। साथ ही वे समूचे जनमानस की सुख-समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना करेंगे। नाथपंथ की यह विशिष्ट व ऐतिहासिक परंपरा सदियों से आस्था का केंद्र रही है।  

गोरखनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का ज्वार

बुधवार भोर से ही बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के लिए मंदिर में लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतार श्रद्धालुओं को न हो कोई दिक्कत, व्यवस्थाओं की खुद मॉनिटरिंग करते रहे मुख्यमंत्री मकर संक्रांति के पुण्य काल में आज आस्था की खिचड़ी चढ़ाएंगे गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ गोरखपुर,  मकर संक्रांति का मुख्य पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा लेकिन इससे एक दिन पहले बुधवार को ही गोरखनाथ मंदिर में आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ को आस्था की खिचड़ी चढ़ाने के लिए मंदिर परिसर से लेकर बाहर तक भोर से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। लाखों श्रद्धालुओं ने मुख्य पर्व से एक दिन पहले ही बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाई। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त में मकर संक्रांति के पुण्य काल में महायोगी गोरखनाथ को आस्था की खिचड़ी भोग अर्पित करेंगे। बाबा गोरखनाथ के दरबार में खिचड़ी चढ़ाने के लिए मंगलवार रात से ही श्रद्धालुओं ने डेरा डालना शुरू कर दिया था। बुधवार भोर में मंदिर के कपाट खुलते ही खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच समूचा मंदिर परिसर गुरु गोरखनाथ के जयकारों से गूंज उठा। सुख समृद्धि की मंगलकामना को लेकर उत्तर प्रदेश, पड़ोसी राज्य बिहार और मित्र राष्ट्र नेपाल से आए श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर भगवान गुरु गोरखनाथ को श्रद्धा की खिचड़ी निवेदित की। उसके बाद मंदिर परिसर में स्थित सभी देवी देवताओं का पूजन कर ब्रह्मलीन महंत बाबा गंभीरनाथ, ब्रह्मलीन महंत दिग्विजनाथ एवं ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर माथा टेक आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में अलग-अलग गेट और बैडिकेडिंग से श्रद्धालुओं की भीड़ को संभाला जा रहा था। श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन हुआ। मंगलवार रात से गोरखनाथ मंदिर में प्रवास कर रहे गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिगत खुद सभी व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रहे थे। मंगलवार रात को मंदिर परिसर का निरीक्षण करने के बाद बुधवार सुबह भी उन्होंने परिसर का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सीएम योगी ने की गोसेवा, बच्चों को दुलारा गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार सुबह मंदिर की गोशाला में जाकर गोसेवा की। उन्होंने गोवंश को अपने हाथों से गुड़ खिलाया और उनकी समुचित देखभाल के लिए गोशाला के कार्यकर्ताओं को जरूरी निर्देश दिए। इसी क्रम में मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए सीएम योगी ने श्रद्धालुओं के साथ आए उनके बच्चों को दुलारकर आशीर्वाद और चॉकलेट दिया।

ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस, डिजिटल गवर्नेंस और बड़े पैमाने पर सुधारों ने बदली उत्तर प्रदेश की तस्वीर

पिछले साढ़े आठ वर्षों में प्रदेश भर में हुए संरचनात्मक सुधारों का परिणाम सामने आया “मिनिमम गवर्नमेंट–मैक्सिमम गवर्नेंस” के सिद्धांत को व्यवहार में उतारते हुए नीतियों, प्रक्रियाओं और डिजिटल प्रणालियों को किया लागू सरकार की नीतियों का उद्योग और निवेशकों के साथ ही आम नागरिकों को भी मिला सीधा लाभ विभागों के चक्कर घटे, मंजूरियां तेज हुईं और शासन व्यवस्था बनी अधिक पारदर्शी लखनऊ, उत्तर प्रदेश अब "बॉटलनेक" से "ब्रेकथ्रू" राज्य में परिवर्तित हो चुका है। और, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रदेश के लिए ऐसा कहना केवल एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि पिछले साढ़े आठ से अधिक वर्षों में हुए संरचनात्मक सुधारों का परिणाम है। राज्य सरकार ने प्रशासनिक बाधाओं, पुरानी प्रक्रियाओं और जटिल अनुमतियों की संस्कृति को बदलते हुए निवेश और विकास के लिए एक नया मॉडल खड़ा करने में सफलता हासिल की। “मिनिमम गवर्नमेंट–मैक्सिमम गवर्नेंस” के सिद्धांत को व्यवहार में उतारते हुए नीतियों, प्रक्रियाओं और डिजिटल प्रणालियों को इस तरह जोड़ा गया कि उद्योग, निवेशक और आम नागरिके, तीनों को सीधा लाभ हुआ। विभागों के चक्कर लगाने की परंपरा ध्वस्त हुई, त्वरित मंजूरी की व्यवस्था स्थापित की गई और शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में छलांग ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने 2017-18 में 12वें स्थान से आगे बढ़ते हुए 2019 में दूसरा स्थान हासिल किया। वर्ष 2022 और 2024 में राज्य को ‘टॉप अचीवर’ का दर्जा मिला, जबकि लॉजिस्टिक्स रैंकिंग में भी राज्य लगातार ‘अचीवर्स’ की श्रेणी में रहा। वाणिज्य एवं उद्योग श्रेणी में गुड गवर्नेंस इंडेक्स 2021 में उत्तर प्रदेश शीर्ष स्थान पर रहा, यानी सुधार केवल कागज़ों पर नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर मान्य और मापनीय रहे। यही नहीं, सरलीकरण और भूमि प्रशासन में उत्तर प्रदेश को ‘टॉप अचीवर’ घोषित किया गया, जिसने निवेश के रास्ते की पारंपरिक बाधाओं को हटाने में बड़ी भूमिका निभाई। डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम बना गेमचेंजर ‘निवेश मित्र’ पोर्टल ने प्रदेश में औद्योगिक मंजूरियों की पूरी तस्वीर बदल दी। 45 विभागों की 525 से अधिक सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गईं, 20 लाख से अधिक स्वीकृतियां डिजिटल रूप से जारी हुईं और 97% से अधिक आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण हुआ। उपयोगकर्ताओं में 96% संतोष दर्ज होना इस व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रमाण है। अब निवेश मित्र 3.0 विकसित किया जा रहा है, जो AI आधारित डैशबोर्ड, रीयल-टाइम ट्रैकिंग, स्वचालित सूचनाओं और राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम से एकीकृत व्यवस्था के साथ अगले स्तर का स्मार्ट गवर्नेंस मॉडल प्रस्तुत करेगा। नियामक अनुपालन का सरलीकरण उद्योग जगत की सबसे बड़ी शिकायत, जटिल अनुपालन प्रणाली को योगी सरकार ने व्यवस्थित तरीके से संशोधित किया। 65 विभागों में 4,675 अनुपालन कम किए गए। 4,098 अनुपालनों का डिजिटलीकरण एवं सरलीकरण किया गया। 577 अनुपालन अपराधमुक्त (डीक्रिमिनलाइज) किए गए। 948 पुराने अधिनियम/नियम/विनियम निरस्त किए गए। इसके साथ ही, ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त हुई, 20 से कम कर्मचारियों वाली दुकानों के लिए पंजीकरण आवश्यकता हटाई गई और श्रम, अग्निशमन, परिवहन, विधिक माप विज्ञान में अपराधों की कम्पाउंडिंग व्यवस्था लागू कर व्यवसाय-हितैषी वातावरण बनाया गया। यूपी की निवेश नीतियों को केंद्र ने भी दी मान्यता डी-रेगुलेशन के क्षेत्र में किए गए इन सुधारों को केंद्र सरकार ने भी औपचारिक रूप से मान्यता दी है। केंद्र द्वारा संचालित “डी-रेगुलेशन 1.0” कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त हुआ है। यह रैंकिंग केवल कागजी मूल्यांकन नहीं, बल्कि जमीन पर लागू किए गए सुधारों के आधार पर दी गई है। अनावश्यक अनुपालन समाप्त करने, लाइसेंस प्रक्रियाओं को सरल बनाने और दंडात्मक प्रावधानों को घटाकर सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से उद्योगों के कामकाज में गति आई है। इस मान्यता ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया और उत्तर प्रदेश को एक स्थिर, पारदर्शी और एक ऐसे राज्य के रूप में स्थापित किया है, जहां निवेशकों को नियमों की अनिश्चितता नहीं झेलनी पड़ती। उद्योग स्थापना से बदली जमीनी तस्वीर एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, औद्योगिक पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स हब, इन सबने उत्तर प्रदेश को उभरते औद्योगिक पावरहाउस के रूप में स्थापित किया है। नए निवेश ने रोजगार, निर्यात और एमएसएमई क्षेत्र को नई ऊर्जा दी है और वैश्विक निवेशकों का विश्वास राज्य के प्रति बढ़ा है। आगे की दिशा उत्तर प्रदेश में सुधारों का दौर अब “नीति निर्माण” से आगे बढ़कर तेज क्रियान्वयन और परिणाम देने के चरण में प्रवेश कर चुका है। आने वाले समय में परियोजनाओं की निगरानी और भी सख्त होगी, निवेशकों को द्रुतगामी सुविधाएं मिलेंगी और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। योगी सरकार ने बाधाओं को अवसर में बदलते हुए यह साबित किया कि उत्तर प्रदेश अब सचमुच ‘बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू’ राज्य बन चुका है और अगला लक्ष्य इसे वैश्विक निवेश एवं विकास के अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी के साथ मौके पर पंजीकरण एवं नवीनीकरण की मिल रही सुविधा

लखनऊ, योगी सरकार द्वारा निर्माण श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत करने तथा उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ उपलब्ध कराने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के कल्याण हेतु संचालित विभिन्न योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं श्रमिकों के पंजीयन/नवीनीकरण के उद्देश्य से बुधवार को लेबर अड्डा मोहनलालगंज, लेबर अड्डा बुद्धेश्वर तथा लेबर अड्डा बाराबिरवा, आशियाना, लखनऊ में जागरूकता अभियान एवं पंजीयन शिविर का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार, उनके बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा तथा सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इन्हीं प्रयासों के अंतर्गत ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। इस जागरूकता अभियान के माध्यम से बड़ी संख्या में श्रमिकों ने योजनाओं के प्रति रुचि दिखाई और पंजीयन प्रक्रिया का लाभ उठाया। मौके पर पात्र श्रमिकों का कराया गया पंजीकरण शिविर के माध्यम से निर्माण श्रमिकों को कन्या विवाह सहायता योजना, मातृत्व, शिशु एवं बालिका मदद योजना, संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना, गंभीर बीमारी सहायता योजना तथा अटल आवासीय विद्यालय योजना सहित बोर्ड द्वारा संचालित प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इस दौरान मौके पर ही पात्र पाए गए श्रमिकों का पंजीकरण भी कराया गया। अटल आवासीय में अधिकाधिक आवेदन पर जोर जागरूकता शिविर में विशेष रूप से अटल आवासीय विद्यालय योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 हेतु कक्षा-06 एवं कक्षा-09 में प्रवेश के लिए अधिकाधिक आवेदन कराने पर जोर दिया गया। बोर्ड के अंतर्गत न्यूनतम तीन वर्ष की अवधि पूर्ण कर चुके श्रमिकों को अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवेदन करने हेतु प्रेरित किया गया। लाभार्थियों के लिए पंजीकरण अनिवार्य शिविर के आयोजन में विज्ञान फाउंडेशन एवं अन्य कार्यदायी संस्थाओं के साथ श्रम प्रवर्तन अधिकारी शक्तिराय, संतोष कुमार एवं सुनील कुमार की सक्रिय उपस्थिति रही। अधिकारियों ने श्रमिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने हेतु समय से पंजीयन एवं नवीनीकरण कराने की आवश्यकता पर बल दिया। अपर श्रमायुक्त, लखनऊ क्षेत्र, कल्पना श्रीवास्तव ने बताया कि बोर्ड द्वारा संचालित किसी भी योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निर्माण श्रमिक का बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत होना एवं पंजीयन का नियमानुसार नवीनीकरण अनिवार्य है। श्रमिक अपना पंजीकरण एवं नवीनीकरण सी.एस.सी. ई-डिस्ट्रिक्ट सेंटर, सी.एस.सी. ई-गवर्नेंस सेंटर अथवा बोर्ड की वेबसाइट upbocw.in के माध्यम से करा सकते हैं।

अयोध्या के साधु-संत भड़के राहुल गांधी पर, कहा— कालनेमि जैसा आचरण

अयोध्या लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के राम मंदिर में दर्शन को लेकर चल रही अटकलों पर अयोध्या के संतों और महंतों ने प्रतिक्रिया दी। हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने कहा कि जो व्यक्ति हिंदुओं को हिंसक कहे, जो यह कहे कि युवा मंदिर लड़कियों को छेड़ने के लिए जाते हैं, जिनकी पार्टी राम मंदिर के विरोध में 17 वकील खड़े कर दे, जो हमेशा सनातन की संस्कृति की अवहेलना करे, लेकिन राम मंदिर का विरोध करने वाली पार्टी के नेता आते हैं तो स्वागत है। कालनेमि से सचेत होने की जरूरत है। जब ये सत्ता में होते हैं तो सनातन पर प्रहार करते हैं। हनुमानगढ़ी के देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि देखिए, सूचना मिली है कि वे आ सकते हैं। स्वागत योग्य है। देर ही सही, राम की शरण में आ रहे हैं, कल्याण होगा। रामलला का दर्शन कर रहे हैं तो उनकी पार्टी का भी कल्याण होगा। किसी भी राजनीतिक दल को राम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा कि राहुल गांधी तो भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे। सद्बुद्धि कहां से आ गई कि वे राम मंदिर आ रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राम पर सवाल उठाने वाले क्यों आ रहे हैं। यह राहुल गांधी की मानसिकता को दिखाता है कि वे राम विरोधी हैं। कभी कहते हैं हिंदू हिंसा फैलाता है, राम के वजूद पर सवाल उठाते हैं। वे राजनीति से प्रेरित होकर आ रहे हैं। सीताराम दास महाराज ने कहा कि राहुल गांधी के डीएनए में खोट है। समय-समय पर गिरगिट की तरह रूप बदलने वाले शुद्ध कालनेमी हैं। यूपी चुनाव को देखते हुए राम मंदिर आ रहे हैं। मैं पूछता हूं कि वे राम प्राण प्रतिष्ठा में क्यों नहीं आए। वे राम सेतु के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे। भगवान राम का दर्शन करने से उनका कल्याण नहीं होगा। इनकी पार्टी के लोग साधु-संतों पर अभद्र टिप्पणी करते हैं। इन्हें सनातन कभी स्वीकार नहीं करेगा। ये मजार पर चादर चढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि जो राम को काल्पनिक कहते थे, जो राम सेतु को काल्पनिक मानते हैं, अब राम की शरण में जाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?

20 लड़कियों और एक लड़के की अजीब घटना, मेरठ में मांगी गई लोकेशन, मामला सनसनीखेज

 मेरठ मेरठ शहर में अनधिकृत रूप से चल रहे स्पा सेंटरों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी और एक साथ की गई कार्रवाई में ऐसा सच उजागर किया, जिसने सभी को हैरान कर दिया. बाहरी तौर पर मसाज और रिलैक्सेशन के नाम पर चल रहे इन स्पा सेंटरों के भीतर क्या हो रहा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस की छापेमारी में चार स्पा सेंटरों से 20 लड़कियों के साथ एक युवक को हिरासत में लिया. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से लगातार शिकायतें और सूचनाएं मिल रही थीं कि मेरठ के विभिन्न इलाकों में कुछ स्पा सेंटर बिना किसी वैध अनुमति के संचालित किए जा रहे हैं. इन सेंटरों की आड़ में अनैतिक गतिविधियां कराए जाने की भी आशंका जताई जा रही थी. इन्हीं सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने योजना बनाकर एक साथ चार स्थानों पर छापेमारी की. ऑनलाइन बुकिंग और ‘लोकेशन शेयर’ का खेल जांच में सामने आया कि इन स्पा सेंटरों की बुकिंग पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि व्हाट्सएप और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से की जाती थी. ग्राहक सीधे सेंटर पर नहीं पहुंचते थे, बल्कि पहले संपर्क किया जाता था. इसके बाद उनसे लोकेशन मांगी जाती थी या उन्हें सेंटर की लोकेशन भेजी जाती थी. यही वजह रही कि यह पूरा नेटवर्क लंबे समय तक पुलिस की नजरों से बचा रहा. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुछ मामलों में ग्राहक को सीधे सेंटर पर न बुलाकर पहले बातचीत की जाती थी और ‘सर्विस’ से जुड़ी जानकारी दी जाती थी. इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होती थी. इस तरीके ने न सिर्फ गोपनीयता बनाए रखी, बल्कि कानून से बचने का रास्ता भी तैयार किया. एक साथ चार जगह छापेमारी मंगलवार को पुलिस ने चार अलग-अलग टीमों का गठन किया और एक तय समय पर शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित स्पा सेंटरों पर छापा मारा. अचानक हुई कार्रवाई से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई. पुलिस ने मौके से 20 युवतियों और एक युवक को हिरासत में लिया. सभी से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है. छापेमारी के दौरान पुलिस को स्पा सेंटरों से रजिस्टर भी मिले हैं, जिनमें आने-जाने वालों की एंट्री दर्ज बताई जा रही है. इसके अलावा कई मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं. प्रारंभिक जांच में इन मोबाइल फोन से ऑनलाइन बुकिंग से जुड़े साक्ष्य मिलने की बात कही जा रही है. मोबाइल से मिले सबूत  पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए कुछ मोबाइल फोन में ऐसे फोटो और चैट मिले हैं, जो स्पा सेंटरों में हो रही गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं. हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इन गतिविधियों का दायरा कितना बड़ा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन स्पा सेंटरों को कौन संचालित कर रहा था, इनके पीछे कौन लोग थे और क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे. फिलहाल चारों स्पा सेंटरों के खिलाफ अनधिकृत रूप से संचालन करने के आरोप में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही है. सिर्फ एक युवक, 20 लड़कियां कई सवाल छापेमारी में 20 युवतियों के साथ केवल एक युवक का होना पुलिस के लिए भी चौंकाने वाला है. जांच अधिकारी इसे महज संयोग नहीं मान रहे हैं. माना जा रहा है कि युवतियों को अलग-अलग स्थानों से यहां लाया गया था और उनका इस्तेमाल स्पा सेंटर की ‘सर्विस’ के नाम पर किया जा रहा था. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इन युवतियों को किसी दबाव या लालच में यहां काम करने के लिए मजबूर किया गया था या वे स्वयं इसमें शामिल थीं. इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह के मानव तस्करी या जबरन काम कराने के पहलू को नजरअंदाज न किया जाए. लंबे समय से मिल रही थीं शिकायतें एसपी सिटी मेरठ आयुष विक्रम ने बताया कि पुलिस को बीते कई दिनों से इन स्पा सेंटरों को लेकर लगातार सूचनाएं मिल रही थीं. कुछ स्थानीय लोगों ने भी शिकायत की थी कि इन जगहों पर संदिग्ध गतिविधियां होती हैं और देर रात तक आवाजाही बनी रहती है. इन्हीं इनपुट्स के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की. उन्होंने कहा कि फिलहाल हिरासत में ली गई सभी युवतियों और युवक से पूछताछ की जा रही है. जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. यदि किसी बड़े नेटवर्क या अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे. पूरे नेटवर्क की जांच जारी पुलिस फिलहाल पूरे मामले को एक नेटवर्क के तौर पर देख रही है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ऑनलाइन बुकिंग का संचालन कौन कर रहा था, भुगतान कैसे होता था और क्या इसमें किसी तीसरे व्यक्ति या गिरोह की भूमिका थी. डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है. आने वाले दिनों में ऐसे अन्य स्पा सेंटरों पर भी नजर रखी जाएगी, जो बिना अनुमति संचालित हो रहे हैं या जिनके खिलाफ शिकायतें मिल रही हैं. फिलहाल चारों स्पा सेंटरों को सील करने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है. जांच पूरी होने के बाद कानूनी कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी. पुलिस का दावा है कि शहर में कानून व्यवस्था और सामाजिक माहौल से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.

केजीएमयू में रमीज ने तैयार की धर्मांतरण की योजना, दो हिंदू लड़कियों को बनाया लक्ष्य

आगरा केजीएमयू में यौन शोषण और धर्मांतरण की कोशिश में पकड़ा गया डॉक्टर रमीज यहां काजी और मौलानाओं के साथ मिलकर धर्मांतरण की नर्सरी तैयार कर रहा था। एजेंसियों की जांच में इसका खुलासा हुआ। फिलहाल निशाने पर चार लड़कियों के होने की बात पता चली है। उसने खुद आगरा की महिला डॉक्टर का धर्मांतरण कराकर निकाह किया और दूसरी के साथ प्रयास। इसके साथ ही उसने अपने एक अन्य जूनियर को इसके लिए तैयार कर लिया था। जूनियर के निशाने पर दो हिंदू लड़कियां थी। पुलिस और एजेंसियों की जांच में रमीज की करतूतों की परत दर परत खुल रही है। इसके अलावा रमीज से जुड़े कई अन्य रेजीडेंट डॉक्टर और मेडिकल स्टॉफ हिंदू महिला डॉक्टर और कर्मचारियों को निशाने पर लिए थे। रमीज पर मुकदमा दर्ज होने और उसकी गिरफ्तारी के बाद सब अंडरग्राउंड हो गए। कई चुप्पी साथ गए और मामला तूल पकड़ता देख लड़कियों ने भी उन मुस्लिम लड़कियों से दूरियां बना ली। हालांकि रमीज से जुड़े कई लोग एजेंसियों की रडार पर हैं। इसके साथ ही रमीज के आगरा नेटवर्क के बारे में तमाम अहम जानकारियां पुलिस और एजेंसियों के अफसरों को मिली हैं। रमीज ने आगरा एसएनएमसी कॉलेज से वर्ष 2012 बैच में एमबीबीएस करने के दौरान ही धर्मांतरण गिरोह का तानाबाना बुनना शुरू कर दिया था। यहां से ही वह मौलानाओं और काजियों के संपर्क में आ गया। इसके बाद धर्मांतरण की नींव डाली। मौलानाओं के जरिए ही वह बाद में बस्ती मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों से जुड़ा। इसके बाद वहां भी मौलानओं और काजियों ग्रुप हॉस्टल में पहुंचने लगा था। बैचमेट अन्य मुस्लिम लड़कों का ब्रेनवाश कराता था। इसके बाद जब उसका दाखिला लखनऊ मेडिकल कॉलेज में हुआ तो यहां भी उसने धर्मांतरण की नर्सरी तैयार करनी शुरू कर दी थी। मौलानाओं और काजियों को यहां के हॉस्टल में भी बुलाता था। बैचमेट और जूनियरों की उनसे मुलाकात कराता उनके साथ बैठके करता था। मकसद सिर्फ एक हिंदू लड़कियों को टारगेट करना था। इस्लामिक मेडिकोज ग्रुप का ब्योरा खंगाल रहीं एजेंसियां जांच में लगी एजेंसियां 13 साल पहले आगरा एसएनएमसी में बनाए गए इस्लामिक मेडिकोज से जुड़े लोगों का ब्योरा जुटा रही है। इस ग्रुप की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। पूर्व में इस संगठन ने कहां बैठके की? उन बैठकों का मकसद क्या था? कितने लोग बैठकों मे शामिल होते थे? कौन-कौन लोग आते थे? इन सब बातों का ब्योरा जुटा रही हैं। साक्ष्य मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डॉक्टर रमीज के खातों से हुआ लाखों का लेनदेन, ब्योरा खंगाल रही एजेंसियां जेल भेजे गए डॉ. रमीज के बैंक खातों से उसकी फरारी के दौरान भी लाखों रुपये का लेनदेन हुआ। यह खुलासा पुलिस की तफ्तीश में हुआ। बताया जा रहा है कि पांच से सात लाख रुपये रमीज ने इस दौरान पश्चिमी यूपी से जुड़े एक व्यक्ति को भी भेजे थे। पुलिस और एजेंसियां अब इस दिशा में जांच कर रही हैं कि यह रुपये रमीज ने क्यों भेजे थे? साक्ष्य मिलने पर पुलिस अब उसके खिलाफ भी कार्रवाई करेगी। 23 दिसंबर को चौक कोतवाली में डॉक्टर रमीज के खिलाफ खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने, गर्भपात कराने, धमकी देने, धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 2021 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद एनबीडब्ल्यू जारी होते ही वह फरार हो गया था। फरारी के दौरान दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिमी यूपी समेत कई स्थानों पर होटलों और परिचितों के यहां रहा था। इस दौरान उसके खाते में लाखों रुपये के ट्रांजेक्शन हुए थे। तफ्तीश में पता चला है कि रमीज ने एक मोटा अमाउंट करीब पांच से सात लाख रुपये पश्चिमी यूपी से जुड़े एक बैंक खाते में भेजे थे। एजेंसियों ने यह तो पता लगा लिया है कि यह रुपये किसे भेजे गए? अब इसकी जानकारी जुटा रही हैं कि क्यों भेजे गए? जल्द ही खाता धारक से इस संबंध में पूछताछ की जाएगी। रमीज से जुड़े लोगों के बैंक खातों की पड़ताल पुलिस और एजेंसियों ने डॉक्टर रमीज और गिरोह जुड़े लोगों की फंडिंग के बारे में भी जांच शुरू कर दी है। फंडिंग उन्हें कहीं विदेशों से तो नहीं हुई। पुलिस और एजेंसियां रमीज के अलावा उसके करीबियों, रिश्तेदारों, माता-पिता और धर्मांतरण में फरार काजी जाहित व उसके साथी के बैंक खाते खंगाल रही हैं। उनके आर्थिक लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है। इस संबंध में पुलिस ने कई बैंकों को उक्त लोगों की डिटेल दी है।

फ्लिपकार्ट हब में बड़ा फर्जीवाड़ा, ₹2.89 लाख की हेराफेरी, तीन कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

अलीगढ़  देश की नामी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के हब से इलेक्ट्रॉनिक सामान की डिलीवरी के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया है। कंपनी की शिकायत पर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के थाना रोरावर पुलिस ने तीन कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कंपनी के ईओ राकेश कुमार शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार, जुलाई और अगस्त माह के दौरान हब से डिलीवरी के लिए भेजे गए सैमसंग और शाओमी एलईडी टीवी, इन्वर्टर, एसी, इंडक्शन कुकर, प्रेशर कुकर और सूटकेस को कस्टमर उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर रिटर्न दर्शाया गया। असली सामान की जगह नकली वस्तुएं रख दी गईं इसके बाद डिब्बों से असली सामान निकालकर उनकी जगह नकली सामान रखकर उन्हें वापस हब में जमा करा दिया गया। जांच में सामने आया है कि तमोली पाड़ा, अलीगढ़ निवासी ईशु और सराय हकीम पोल निवासी यश मोहन वार्ष्णेय ने सुनियोजित तरीके से इस हेराफेरी को अंजाम दिया। एक दिसंबर 2025 को मथुरा माट और हस्तपुर क्षेत्र में एलईडी टीवी की डिलीवरी के दौरान भी इसी तरह की गड़बड़ी की गई, जिसमें श्रीरामपुरम प्रिंस नगर कॉलोनी निवासी राहुल कुमार की भूमिका भी सामने आई है। अब तक कुल 21 शिपमेंट में की हेराफेरी उजागर कंपनी प्रबंधन के अनुसार, अब तक कुल 21 शिपमेंट में इस तरह की हेराफेरी उजागर हो चुकी है, जिससे फ्लिपकार्ट को 2 लाख 89 हजार 265 रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। सभी संदिग्ध शिपमेंट की ट्रैकिंग आईडी और संबंधित दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए गए हैं। थाना रोरावर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

यूपी में बड़े सियासी फेरबदल के संकेत, 70% मंत्रियों की खिसक सकती है कुर्सी, चर्चाओं में ये नाम

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट में बड़े स्तर पर फेरबदल के आसार हैं. माना जा रहा है कि पिछले साल गुजरात में जिस तरह से कैबिनेट में बदलाव हुए और लगभग सारे चेहरे बदल दिए गए. कुछ ऐसा ही यूपी में भी हो सकता है. सूत्रों का दावा है कि 70 फीसदी से अधिक मंत्री बदले जा सकते हैं.  इन बदलावों का असर उन पर हो सकता है जो वर्ष 2017 और फिर साल 2022 की सरकार में भी मंत्री रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक बीते 8-9 सालों से जो मंत्री हैं उनमें से कुछ ही चेहरों को छोड़कर बाकियों पर फेरबदल की गाज गिर सकती है. सूत्रों के मुताबिक भले ही भारतीय जनता पार्टी की यूपी इकाई के अध्यक्ष का जिम्मा कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को दी है, उसके बाद भी नए विस्तार में कुर्मियों का बोलबाला रह सकता है. कुर्मी समाज से 2-3 नेताओं की एंट्री कैबिनेट में हो सकती है. यूपी कैबिनेट में इन नेताओं की हो सकती है एंट्री सूत्रों के अनुसार रामपुर में भारतीय जनता पार्टी के नेता और विधायक आकाश सक्सेना, अलीगढ़ से कुंवर जयवीर सिंह को नए मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है. इसके साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह, साध्वी निरंजन ज्योति, भूपेंद्र सिंह चौधरी, पूजा पाल, मनोज पांडेय, कृष्णा पासवान, राम रतन कुशवाहा, पद्मसेन चौधरी , अशोक कटारिया के नाम की भी चर्चा है. इसके अलावा दावा किया जा रहा है कि योगी सरकार में पहले मंत्री रह चुके महेंद्र सिंह की दोबारा काबीना में एंट्री हो सकती है. बीते वर्ष बीजेपी संगठन में बदलाव के बाद कैबिनेट में फेरबदल के आसार जताए जा रहे हैं. पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद कोरग्रुप की बैठक हुई थी. जिसमें संगठन से सरकार तक की किन को क्या जिम्मेदारी देनी है उनकी चर्चा हो चुकी है. इसी चर्चा के बाद पहले पंकज चौधरी दिल्ली आए और हाईकमान से मुलाकात की. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इन्हीं मुद्दों पर बीजेपी नेतृत्व से चर्चा की. माना जा रहा है कि हाईकमान से चर्चा के बाद यूपी में किसको संगठन से सरकार में लाया जाए और किन्हें सरकार से वापस संगठन में अहम जिम्मेदारी दी जाए, इसका फैसला हो जाएगा. मकर संक्रांति के बाद किसी भी दिन कैबिनेट फेरबदल की संभावना है. योगी सरकार में कुल 54 मंत्री, अभी कौन कौन कैबिनेट में शामिल? कैबिनेट में सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, सुरेश कुमार खन्ना, सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्र देव सिंह, बेबी रानी मौर्य, लक्ष्मी नारायण चौधरी, जयवीर सिंह, धर्मपाल सिंह, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, अनिल राजभर, राकेश सचान, अरविंद कुमार शर्मा, योगेंद्र उपाध्याय, आशीष पटेल, संजय निषाद, ओम प्रकाश राजभर, दारा सिंह चौहान, सुनील कुमार शर्मा, अनिल कुमार बतौर कैबिनेट मंत्री हैं. वहीं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की सूची में नितिन अग्रवाल, कपिल देव अग्रवाल, रवीन्द्र जायसवाल, संदीप सिंह, गुलाब देवी, गिरीश चन्द्र यादव, धर्मवीर प्रजापति, आसिम अरुण, जयेंद्र प्रताप सिंह राठौर, दयाशंकर सिंह, नरेन्द्र कुमार कश्यप, दिनेश प्रताप सिंह, अरुण कुमार सक्सेना, डॉ. दयाशंकर मिश्रा “दयालु” शामिल हैं. इसके अलावा राज्य मंत्रियों की लिस्ट में  मयंकेश्वर शरण सिंह,  दिनेश खटीक,  संजीव गोंड,  बालदेव सिंह ओलख,  अजीत पॉल,  जसवंत सिंह सैनी,  रामकेश निषाद,  मनोहर लाल मनु कोरी,  संजय सिंह गंगवार,  ब्रजेश सिंह,  के. पी. मलिक,  सुरेश रही,  सोमेंद्र तोमर,  प्रतिभा शुक्ला,  राकेश राठौर गुरु, राजनी तिवारी,  सतीश चन्द्र शर्मा,  दानिश आज़ाद अंसारी, विजय लक्ष्मी गौतम शामिल हैं.  

शादी के बाद भी राहत: विवाहित बेटियों को ससुराल में मिलेगा फ्री राशन, राशन कार्ड से नाम नहीं कटेगा

लखनऊ  विवाहित बेटियों को अब शादी के बाद ससुराल में ही मुफ्त राशन उपलब्ध कराया जाएगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला राशन अब उनके ससुराल की कोटा दुकान से मिलेगा। पूर्ति विभाग शादी के बाद बेटियों के हिस्से का राशन ससुराल के राशन कार्ड (Ration Card) में जोड़ देगा, जिससे मायके के राशन कार्ड से नाम कटवाने और ससुराल में जुड़वाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। लंबी प्रक्रिया से मिलेगी राहत अब तक विवाह के बाद बेटियों का नाम मायके के राशन कार्ड से कटवाकर ससुराल के राशन कार्ड में जोड़ने में काफी समय लगता था। यह प्रक्रिया 45 से 90 दिन तक खिंच जाती थी और तकनीकी समस्याएं भी सामने आती थीं। कई मामलों में नाम डुप्लीकेसी में चले जाने से लाभार्थियों को राशन से वंचित रहना पड़ता था। तकनीकी दिक्कतें होंगी खत्म पहले राशन कार्ड से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया के दौरान लाभार्थियों का डाटा नेशनल डाटा सेंटर और स्टेट डाटा सेंटर में भेजा जाता था। राउटर के माध्यम से तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने में लंबा समय लगता था। अब पूर्ति विभाग ने इसे सरल बनाते हुए दोनों राशन कार्ड प्रस्तुत करने पर तुरंत नाम स्थानांतरित करने की व्यवस्था लागू की है। गरीब परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ इस नई व्यवस्था से गरीब परिवारों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। विवाह के बाद बेटियों को राशन मिलने में अब कोई बाधा नहीं आएगी। पूर्ति विभाग यह सुविधा केवल विवाहिता महिलाओं को दे रहा है, ताकि उन्हें राशन पाने के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े। ब्लॉकों में तेजी से हो रहा नामांतरण पूर्ति विभाग अब तक दो सौ नाम दूसरे ब्लॉक में स्थानांतरित कर चुका है, जबकि तीन सौ नाम निचलौल ब्लॉक में जोड़े जा चुके हैं। यह प्रक्रिया लगातार जारी है, जिससे अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इसका फायदा मिल सके। जमीनी स्तर पर उदाहरण निचलौल ब्लॉक के लोड़िया की रहने वाली अन्नू का नाम सिसवा मीरगंज में जोड़ा गया है। वहीं हुस्नबानों का भारत खंड पकड़ी में, सोनम मौर्य का खेरहवा जंगल नौतनवा ब्लॉक से निचलौल के ग्राम टिकुलहिया में और गुलशन मोहनापुर का नाम जयश्री में जोड़ा गया है। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि विवाहिता महिलाओं को राशन से वंचित न रहने देने के लिए विभाग सक्रिय है। पूर्ति निरीक्षक कार्यालय में होगी प्रक्रिया बेटियों की शादी के बाद मायके और ससुराल दोनों के राशन कार्ड पूर्ति निरीक्षक कार्यालय में प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद विवाहिता का नाम तुरंत ससुराल के राशन कार्ड में जोड़ दिया जाएगा, जिससे उन्हें बिना रुकावट राशन मिल सकेगा।     खाद्य एवं रसद विभाग ने विवाहिता का राशन कार्ड काटने तथा जोड़ने में आती समस्या को देखते हुए ऑनलाइन स्थानांतरण की सुविधा दी है। यह प्रक्रिया काफी आसान है। दोनों पक्ष के राशन कार्ड को लेकर पूर्ति निरीक्षक कार्यालय पर आने के बाद नाम को जोड़ दिया जाता है। इससे विवाहिता को राशन का लाभ तुरंत मिले।     -इंद्रभान सिंह, पूर्ति निरीक्षक अधिकारी निचलौल