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मुख्यमंत्री योगी बोले—हर प्रोजेक्ट के लिए नियुक्त हों नोडल अधिकारी

हर प्रोजेक्ट के लिए तय हों नोडल अधिकारी : मुख्यमंत्री योगी अधिकारियों के साथ बैठक में सीएम योगी ने दिए निर्देश एक निश्चित अवधि पर प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग की रिपोर्ट ली जाए – योगी आदित्यनाथ  गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि हर प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल अधिकारी तय करते हुए उनसे मॉनिटरिंग की साप्ताहिक या पाक्षिक रिपोर्ट ली जाए। हर परियोजना की एक समय सीमा तय होती है और कार्य में तेजी लाते हुए उसे उसी अवधि में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की जो परियोजनाएं अगले साल मानसून के बाद पूरी होनी हैं, उनके कार्यों में और तेजी लाकर मानसून से पहले ही पूरा करने के विशेष प्रयास किए जाएं। गोरखपुर दौरे पर आए सीएम योगी गोरखनाथ मंदिर के बैठक कक्ष में अधिकारियों के साथ गोरखपुर में गतिमान परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके और गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए एक नोडल अधिकारी को पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी जाए। नोडल अधिकारी एक निश्चित अवधि पर प्रगति की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को उपलब्ध कराए। वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस पर पूरा ध्यान देना होगा। उन्होंने नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की हिदायत भी अफसरों को दी।   कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति बरकरार रहनी चाहिए। उन्होंने ठंड की दस्तक होने के साथ ही पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए। ट्रैफिक प्रबंधन को और सुदृढ़ करने पर जोर देते हुए सीएम योगी ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सड़कों पर जाम न लगने पाए।

सीएम योगी आज आ सकते हैं अयोध्या : प्रशासन व पुलिस अधिकारियों के साथ करेंगे समीक्षा बैठक

अयोध्या प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 25 नवंबर को होने वाले राम मंदिर के ध्वजारोहण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए आज अयोध्या आ सकते हैं। सीएम योगी के दोपहर एक बजे के बाद यहां पहुंचने की संभावना है। सीएम योगी अयोध्या पहुंच कर प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। यह बैठक रामजन्मभूमि परिसर में होगी। बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधि शामिल रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री की ओर से राम मंदिर परिसर में ध्वजारोहण समारोह से जुड़े कार्यक्रम स्थलों का भी निरीक्षण किया जाएगा। उनकी ओर से पीएम और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की मौजूदगी में होने वाले कार्यक्रम की रूपरेखा को लेकर निर्देश दिए जाएंगे। अब राम मंदिर में मोबाइल नहीं ले जा सकेंगे मेहमान  राम मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करते हुए ट्रस्ट व प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। ध्वजारोहण समारोह में आने वाले किसी भी मेहमान को मोबाइल फोन लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। शुरुआत में मेहमानों को मोबाइल साथ ले जाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन दिल्ली में हुए विस्फोट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ाने की सिफारिश की। इसके बाद ट्रस्ट और प्रशासन ने संयुक्त समीक्षा के बाद मोबाइल पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। 25 नवंबर को राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह आयोजित है। समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी, संघ प्रमुख मोहन भागवत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल समेत आठ हजार मेहमान शामिल होंगे। मेहमानों को भेजे गए आमंत्रण पत्र में बताया गया था कि 25 नवंबर को सभी को सुबह आठ से 10 बजे के भीतर मंदिर में प्रवेश करना होगा। वे अपने साथ मोबाइल रख सकते हैं, लेकिन अब इस निर्णय को बदल दिया गया है। मेहमानों को खाली हाथ समारोह के लिए आना होगा। परिसर में उनके भोजन, जलपान की व्यवस्था ट्रस्ट की ओर से की जाएगी। समारोह को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। राम जन्मभूमि परिसर में अतिरिक्त मेटल डिटेक्टर, डॉग स्क्वॉड और सर्विलांस बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार बड़े आयोजन, बढ़ती भीड़ और राष्ट्रव्यापी सतर्कता को देखते हुए यह कदम आवश्यक था। मंदिर के आसपास 24×7 निगरानी के लिए नए कैमरे, हाईटेक कंट्रोल रूम और अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी तैनात किए जा रहे हैं। प्रशासन ने सभी आगंतुकों से अनुरोध किया है कि वे मोबाइल साथ न लाकर सहयोग करें, ताकि मंदिर परिसर में सुरक्षा, अनुशासन और व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

नाथनगरी में गूंजेगी सभ्यता की 5000 साल पुरानी गाथा, योगी सरकार का पर्यटन और रोजगार पर विशेष जोर

भित्ति कला से बरेली बनेगी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगरी 19 फोकस वॉल से शहर बनेगा उत्तर प्रदेश का नया सांस्कृतिक–पर्यटन केंद्र फोकस वॉल से होगा सांस्कृतिक क्रांति का आगाज़, रोशन होगी आध्यात्मिक पहचान *अजंता–एलोरा की तर्ज पर बनेंगीं कलाकृतियाँ, नाथ परंपरा की मिलेगी झलक, योगी मॉडल का नया अध्याय से बरेली बनेगा अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मार्ग का आकर्षण बरेली,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी परियोजना से नाथ नगरी बरेली अब सांस्कृतिक–आध्यात्मिक कला के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित होने जा रही है। शहर के प्रमुख चौराहों, मार्गों, धार्मिक स्थलों और सरकारी परिसरों में 19 भव्य फोकस वॉल का निर्माण किया जाएगा। बरेली में दिखेगी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक झलक भित्ति वॉल पर भारत की प्राचीन सभ्यता, नाथ परंपरा, महाभारतकालीन इतिहास और स्थानीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों का ऐसा शानदार प्रदर्शन होगा, जैसा अब तक किसी भी शहर में नहीं देखा गया।  क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप युवाओं को भारत के गौरवशाली अतीत, प्राचीन और समृद्धशाली संस्कृति से परिचय करायेगी। युवाओं और पर्यटकों को बरेली के 5000 वर्ष पुराने इतिहास और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बनेगी। उन्होंने बताया कि फोकस वॉल का विचार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस परिकल्पना से प्रेरित है जिसमें उत्तर प्रदेश की सभ्यता को ग्लोबल टूरिज्म मॉडल से जोड़कर रोजगार, पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को बढ़ाना शामिल है। अजंता-एलोरा की तर्ज पर बनेगी भित्ति कला, जीवंत होंगी देवकथाएँ और नाथ परंपरा इन फोकस वॉल पर बनने वाले भित्ति–चित्र अजंता–एलोरा की शैली पर आधारित होंगे। इन चित्रों में भगवान शिव के त्रिशूल और डमरू, नाथ योगियों के प्रतीक, देवी–देवताओं की आकृतियां, बरेली की आध्यात्मिक पहचान, महाभारतकालीन नगर की विरासत और स्थानीय लोककला को जीवंत कलात्मक स्वरूप दिया जाएगा। पर्यटन विभाग ने सर्वे करने के बाद ऐसे स्थानों को चुना है। जहां से सबसे ज्यादा पर्यटक और राहगीर गुजरते हैं। जिससे उनकी नजर अनायास ही फोकस वाल पर चली जायेगी। फोकस वाल को आधुनिक रंग रोगन और सज्जा के साथ भव्य रूप दिया जा रहा है। जिससे वहां से गुजरने वालों की आंखे बरवस ही उस ओर खिंची चली जायेंगी। शहर के सर्वाधिक आवाजाही वाली जगह पर बनेगी फोकस वॉल मनोहर भूषण इंटर कॉलेज ग्राउंड, एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय, सुरेश शर्मा नगर चौराहा, डी.डी.पुरम पार्क, नियर स्टेडियम, कुदेशिया अंडरपास, बीसलपुर चौराहा, विकास भवन चौराहा, आयुक्त कार्यालय, उद्योग विभाग कार्यालय, त्रिवटी नाथ मंदिर मैकेनियर रोड, 100 फुटा तिराहा आदिनाथ चौक, इन्वर्टिस तिराहा बड़ा बाइपास, रेलवे स्टेशन, मिनी बाइपास इज्जतनगर रेलवे स्टेशन, झुमका तिराहा, और पर्यटन कार्यालय रोहिला होटल वॉल। पर्यटन, सांस्कृतिक गौरव और रोजगार-तीन मोर्चों पर बड़ा बदलाव नैनीताल, रामनगर, काठगोदाम, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, दुधवा नेशनल पार्क और उत्तराखंड की ओर जाने वाले हजारों पर्यटक रोज बरेली से गुजरते हैं, लेकिन शहर के वास्तविक सांस्कृतिक वैभव से अनजान रहते हैं। अब फोकस वॉल उन्हें पहली बार बरेली की आध्यात्मिक परंपरा, महाभारतकालीन पहचान, सांस्कृतिक विरासत और लोककला से परिचित कराएगी। यह परियोजना स्थानीय कलाकारों, पेंटरों, शिल्पियों और तकनीकी कार्यकर्ताओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी करेगी। पर्यटन विभाग के अनुसार, फोकस वॉल बनने के बाद नाथनगरी बरेली को उत्तर प्रदेश के धार्मिक–सांस्कृतिक पर्यटन मार्ग में शामिल करने का भी प्रस्ताव है। 6 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत से बदलेगा शहर तिराहा और चौराहा इस परियोजना पर कुल 621.33 लाख रुपये (लगभग 6 करोड़ 21 लाख 33 हजार रुपये) खर्च किए जाएंगे। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार ने कहा कि बरेली केवल झुमके तक ही सीमित नहीं है। यह योगियों, सिद्ध–नाथों, ऋषि–मुनियों और प्राचीन सभ्यता का नगर है। फोकस वॉल आने वाली पीढ़ियों को बरेली की असली आत्मा से परिचित कराएगी। यह न सिर्फ शहर के सौंदर्यीकरण की योजना है, बल्कि बरेली के सांस्कृतिक पुनरुद्धार और पर्यटन अर्थव्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

सीएम योगी ने गोरखपुर में किया यूपी एसएसएफ द्वितीय वाहिनी के निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण

गोरखपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार शाम गोरखपुर में उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (यूपी एसएसएफ) की द्वितीय वाहिनी के निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जून माह के बाद बारिश से निर्माण कार्य प्रभावित होता है इसलिए लक्षित अवधि अक्टूबर 2026 से चार माह पूर्व ही इसे पूरा करने पर जोर दें। एसएसएफ द्वितीय वाहिनी के निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले इसके मॉडल का अवलोकन किया और इसके बाद निर्माण स्थल पर जाकर भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अफसरों से वाहिनी के विभिन्न आयामों, व्यवस्थाओं, क्षमता, कार्य में लगे मैनपॉवर, भौतिक प्रगति की जानकारी ली। अफसरों ने बताया कि इसकी कुल क्षमता एक हजार की है और निर्माण की भौतिक प्रगति अब तक दस प्रतिशत है। अभी पांच सौ लोग काम कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़े बहुमंजिला भवन के अलावा अन्य कार्य 31 अक्टूबर  2026 तक पूरे कर लिए जाएंगे। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि काम को और तेज करिए। जून के बाद बरसात शुरू हो जाती है और ऐसे में अक्टूबर 2026 तक का लक्ष्य हासिल करने में बाधा आएगी। सीएम योगी ने निर्देशित किया कि मशीनरी का उपयोग बढ़ाकर काम तेज करें। कोशिश होनी चाहिए कि अक्टूबर 2026 की बजाय जून 2026 तक ही प्रशासनिक भवन, बैरक और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनकर तैयार हो जाए। मिट्टी की समस्या दूर करने के लिए डीएम को निर्देशित किया सीएम ने यूपी एसएसएफ द्वितीय वाहिनी के निर्माण कार्य का निरीक्षण करने के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों से कार्य में आ रही परेशानी के बारे में भी पूछा। अधिकारियों ने कहा कि लो लैंड होने के चलते भराई के लिए मिट्टी मिलने में दिक्कत हो रही है। इस पर सीएम योगी ने डीएम दीपक मीणा को बुलाया और निर्देश दिए कि आसपास नाला और नदी की ड्रेजिंग कराकर शीघ्रता से मिट्टी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कार्यदायी संस्था को भी निर्देशित किया कि मिट्टी की अंतिम भराई से पहले मैक्सिमम फ्लड लेवल की जांच जरूर करे लें। सीएम ने पंपिंग स्टेशन बनाने के दिए निर्देश ताल जहदा क्षेत्र की जमीन नीची होने को लेकर जलभराव की समस्या का अभी से समाधान कराने के लिए भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए। उन्होंने डीएम से कहा कि मानीराम तटबंध पर रेगुलेटर के पास पंपिंग स्टेशन बनाया जाए। मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान पिपराइच के विधायक महेंद्रपाल सिंह, गोरखपुर ग्रामीण के विधायक विपिन सिंह, सहजनवा के विधायक प्रदीप शुक्ल, प्रशासन, पुलिस और कार्यदायी संस्था के उच्चाधिकारी मौजूद रहे। 343 करोड़ रुपये से 50 हेक्टेयर में हो रहा है एसएसएफ की दूसरी बटालियन का निर्माण गोरखपुर में गठित एसएसएफ की दूसरी बटालियन के लिए ताल जहदा में 50.157 हेक्टेयर क्षेत्रफल में करीब 343 करोड़ रुपये की लागत से आवासीय और अनावासीय भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। आवासीय भवनों के लिए योगी सरकार ने 186 करोड़ 33 लाख 43 हजार रुपये तथा अनावासीय भवनों के निर्माण के लिए 156 करोड़ 39 लाख 89 हजार रुपये स्वीकृत किए हैं। कार्यदायी संस्था के रूप निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड (भवन) द्वारा कराया जा रहा है। अत्याधुनिक और हाईटेक होगा एसएसएफ का भवन ताल जहदा में यूपी एसएसएफ द्वितीय वाहिनी का भवन अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त और हाईटेक होगा। इसके परिसर में लिफ्ट युक्त टाइप ए तथा बी (ग्राउंड प्लस 13 फ्लोर) और टाइप फोर व फाइव के बहुमंजिला भवन बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा लिफ्ट युक्त प्रशासनिक भवन (ग्राउंड प्लस 4 फ्लोर), क्वार्टर गार्ड, पार्किंग, संतरी पोस्ट, अस्पताल, इंडोर जिम, डॉग कैनेल, टॉयलेट ब्लॉक और 400 की क्षमता का बैरक बनाया जाएगा। यहां सलामी मंच के साथ भव्य परेड ग्राउंड का विकास भी होगा। सभी आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के साथ इसके परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का भी इंतजाम होगा। निर्माण कार्य 21 जून 2024 को शुरू हुआ था और टॉवर ए और बी के अलावा इसे 31 अक्टूबर 2026 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है। टॉवर ए और बी के निर्माण पूर्ण करने की समय सीमा 30 मार्च 2027 है। जून 2021 में हुआ था यूपी एसएसएफ का गठन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सितंबर, 2020 में न्यायालयों, प्रमुख धार्मिक स्थलों, प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल का गठन किया था। जिसके बाद जून, 2021 में यूपी एसएसएफ की पांच वाहिनी गठित की गई थीं, जिनमें लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज, मथुरा व सहारनपुर शामिल हैं। इसके बाद छठवीं वाहिनी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा के लिए गठित की गई। गोरखपुर के लिए गठित एसएसएफ की द्वितीय वाहिनी गोरखपुर और कुशीनगर एयरपोर्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठा रही है। एसएसएफ की द्वितीय वाहिनी अभी अपना कामकाज गोरखपुर के पीएसी कैम्पस से कर रही है। एसएसएफ भवन तक बन रहा एप्रोच मार्ग योगी सरकार यूपी एसएसएफ द्वितीय वाहिनी के भवन तक दो किमी लंबी एप्रोच सड़क भी बनवा रही है। इसके निर्माण पर 23.73 करोड़ रुपये की लागत आएगी। लोक निर्माण विभाग, निर्माण खंड तीन द्वारा 18 मार्च 2025 से शुरू इसके निर्माण की भौतिक प्रगति 30 प्रतिशत है। इस एप्रोच मार्ग के मार्च 2026 में बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है।

दुधवा नेशनल पार्क में ईको टूरिज्म को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगें ये प्रस्ताव

दुधवा नेशनल पार्क तक 226 करोड़ रूपये की लागत से होगा सड़कों का चौड़ीकरण व निर्माण विस्टाडोम कोच की यात्रा के अपग्रेडेशन के लिए 19.28 लाख रुपये स्वीकृत दुधवा नेशनल पार्क में 8 करोड़ रूपये की लागत से लगेगे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप साइनेज लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म बोर्ड ने दुधवा नेशनल पार्क और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। जिसमें दुधवा नेशनल पार्क तक सड़क, रेल और हवाई मार्ग के माध्यम से पर्यटकों की पहुंच को सुगम और सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया। इन प्रस्तावों का उद्देश्य न केवल प्रदेश में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देना है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करना है। राज्य सरकार के अनुमोदन के बाद जल्द ही ये परियोजनाएं धरातल पर उतरी जाएगीं, जो सीएम योगी के विजन के अनुरूप यूपी इको टूरिज्म का हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।   लखनऊ से लखीमपुर के बीच शुरू की गई एसी बस सेवा को पूरे इको पर्यटन सत्र तक जारी रखने का प्रस्ताव दुधवा नेशनल पार्क में सड़क मार्ग से पहुंच को सुगम बनाने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ से लखीमपुर के बीच पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई एसी बस सेवा को पूरे इको पर्यटन सत्र तक जारी रखने का प्रस्ताव रखा गया है। यह सेवा पर्यटकों को दुधवा नेशनल पार्क तक आरामदायक यात्रा प्रदान करेगी। इसी क्रम में, पलिया-मैलानी और बिछिया को जोड़ने वाली नई बस सेवा शुरू करने का सुझाव भी रखा गया है। यूपीएसआरटीसी को भेजे जाने वाले इन प्रस्तावों से नेशनल पार्क के आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन का विस्तार होगा। साथ ही रेलवे मार्ग से दुधवा नेशनल पार्क तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए दिल्ली से लखनऊ (मैलानी होते हुए) चलने वाली पुरानी ट्रेन को पुनः बहाल करने और इसमें एसी कोच जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है। यह कदम विदेश एवं दूरदराज के पर्यटकों के लिए विशष रूप से लाभदायक साबित होगा। हिंडन से पलिया तक विमान सेवा शुरू करने का जल्द जारी होगी टेंडर हवाई संपर्क को मजबूत करने के लिए हिंडन से पलिया तक विमान सेवा शुरू करने का टेंडर वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। पर्यटन विभाग और सिविल एविएशन के समन्वय से यह परियोजना चालायी जाएगी। पात्रता शर्तों में भारत में पंजीकृत कंपनी, 6 सीटों वाले सिंगल व ट्विन इंजन विमान की सेवा शुरू करने का प्रस्ताव है। जिसके लिए निजी व चार्टेड विमान का संचालन करने वाली कंपनियों की सेवा ली जाएगी।बोर्ड की मंजूरी से यह सेवा पर्यटकों को समय की बचत देगी। दुधवा नेशनल पार्क तक 226 करोड़ रूपये की लागत से होगा सड़कों का चौड़ीकरण व निर्माण दुधवा नेशनल पार्क, लखीमपुर खीरी तक सड़क मार्ग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पीडब्ल्यूडी के माध्यम से 226.82 करोड़ रुपये की कई परियोजनाओं का प्रस्तावित की गई हैं। इसके तहत लखनऊ से दुधवा तक चार लेन सड़क संपर्क सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभिन्न चेनेज पर चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य भी शामिल हैं। जिसमें 21.14 करोड़ रुपये की लागता से पलिया हवाई पट्टी का 3 मीटर से 10 मीटर चौड़ीकरण कार्य, किशनपुर रोड का 32.95 करोड़ रुपये की लागत से 5.7 किमी चौड़ीकरण, लखीमपुर-बिजुआ-भीरा-पलिया मार्ग पर 21.6 करोड़ रूपये की लागत से इंटरलॉकिंग और सिसईया-धौराहरा-पलिया रोड का 134.23 करोड़ रुपये की लागत से 38.35 किमी सुदृढ़ीकरण जैसे कार्यों का प्रस्ताव रखा गया है। इन प्रोजेक्टस के निर्माण से जहां एक ओर नेशनल पार्क आने वाले पर्यटकों की पहुंच सुगम होगी साथ ही आस-पास के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के लोगों की यातायात व्यवस्था एवं अर्थिक गतिविधियों में भी लाभप्रद साबित होगी। विस्टाडोम कोच की यात्रा के अपग्रेडेशन के लिए 19.28 लाख रुपये स्वीकृत नेशनल पार्क के क्षेत्र में साइनेज की कमी को दूर करने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 8 करोड़ रुपये की परियोजना प्रस्तावित है। जिसमें अंतरराष्ट्रीय/राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप साइनेज स्थापित किए जाएंगे, जो पर्यटकों को दिशा-निर्देश प्रदान करेंगे। इनकी सैंपल डिजाइन पहले से तैयार हैं, जिन्हें अनुमोदन के पश्चात शीघ्र ही पार्क में लगाया जाना है। इनके अलावा, अनुभवात्मक पर्यटन पर फोकस करते हुए 82 क्षमता वाले विस्टाडोम कोच की यात्रा के अपग्रेडेशन के लिए 19.28 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य में गेरुआ नदी पर वर्तमान दो बोट के अलावा दो अतिरिक्त बोट सफारी शुरू करने का प्रस्ताव है, जो इको बोर्ड द्वारा संचालित होंगी। ये प्रस्ताव न केवल दुधवा नेशनल पार्क को को पर्यटन हब बनाएंगे, बल्कि स्थानीय निवासियों एवं क्षेत्र में रहने वाले जनजातिय समुदायों के युवाओं को रोजगार के नये मौके देंगे। साथ ही पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इन परियोजनाओं के सफल क्रियांवयन से नेशनल पार्क में आने वाले वार्षिक पर्यटक संख्या में 30 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है, जो उत्तर प्रदेश को इको टूरिज्म में अग्रणी राज्य बनाएंगी।

आगरा में ‘गीता गोविंद वाटिका’ लिखेगी पर्यटन विकास का नया अध्याय

जोनल पार्क में 19 एकड़ क्षेत्र में ₹4.20 करोड़ से विकसित हो रही 'गीता गोविंद वाटिका' थीम लाइटिंग और लेजर शो बनेंगे रात्रि आकर्षण, पर्यटकों के रात्रि प्रवास की भी होगी सुविधा वाटिका में 'तुलसी की 100 से ज्यादा प्रजातियां बनेंगी औषधीय जानकारी के साथ प्राकृतिक आकर्षण का केंद्र आगरा, योगी सरकार ब्रज के पर्यटन को केवल ऐतिहासिक स्मारकों तक सीमित न रखकर, उसे ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जोड़कर एक नया आयाम दे रही है। इसी कड़ी में, ताजनगरी फेस टू स्थित जोनल पार्क के 19 एकड़ क्षेत्र में 'गीता गोविंद वाटिका' विकसित की जा रही है। इस वाटिका का प्राथमिक लक्ष्य ताजमहल और अन्य स्मारकों का दीदार करने आने वाले पर्यटकों के रात्रि प्रवास को बढ़ाना और उन्हें ब्रज की समृद्ध धार्मिक संस्कृति से परिचित कराना है।         मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना के तहत इस वाटिका को लगभग ₹4.20 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है। योजना में 50 प्रतिशत राशि राज्य सरकार और शेष 50 प्रतिशत आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) वहन कर रहा है। इस फंड से यहाँ थीम लाइटिंग और एक भव्य लेजर शो का आयोजन किया जाएगा, जो रात्रि में पर्यटकों के लिए एक नया और आकर्षक अनुभव होगा। आगरा बनेगा सांस्कृतिक पर्यटन का भी केंद्र आगरा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एम. अरून्मोली ने कहा कि प्रदेश सरकार लक्ष्य आगरा को सिर्फ ऐतिहासिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन का भी केंद्र बनाना है। 'गीता गोविंद वाटिका' हमारे इसी विजन का हिस्सा है। आगरा में आने वाले पर्यटक अब तक केवल दिन में स्मारक देखते थे। 'गीता गोविंद वाटिका' के माध्यम से हम उन्हें रात में रुकने के लिए एक सुंदर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध स्थान प्रदान कर रहे हैं। रात्रि प्रवास बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधे गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।" आस्था और प्रकृति का अनूठा संगम वाटिका के अंदर दो एकड़ भूमि पर एक विशाल मुक्ताकाशीय मंच तैयार किया जा रहा है, जहाँ भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं, रासलीला और विभिन्न धार्मिक आयोजनों का नियमित मंचन किया जाएगा। धार्मिक तत्वों को प्राथमिकता देते हुए यहाँ कृष्ण कालीन वनस्पतियों के पौधे लगाए जा रहे हैं, और सबसे महत्वपूर्ण, भगवान श्री कृष्ण के गीता उपदेश को आकर्षक तेल चित्रों एवं शिलालेखों पर अंकित कराया जा रहा है। इसके अलावा, एक एकड़ भूमि पर एक विशेष तुलसी वन बनाया जाएगा, जिसमें तुलसी की 100 प्रजातियाँ होंगी, जिनके औषधीय गुणों की जानकारी भी आगंतुकों को मिलेगी। पर्यटन उद्योग में उत्साह आगरा टूरिज्म गिल्ड के अध्यक्ष अमूल्य कक्कड़ ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि योगी सरकार का यह कदम पर्यटन उद्योग के लिए गेम चेंजर साबित होगा। आगरा को अब तक केवल वन डे डेस्टिनेशन (एक दिवसीय गंतव्य) के रूप में जाना जाता था। 'गीता गोविंद वाटिका' इसे ओवरनाइट डेस्टिनेशन (रात्रि प्रवास गंतव्य) में बदलने में मदद करेगी। सांस्कृतिक और धार्मिक प्रस्तुतियों का रात्रि में होना पर्यटकों को आकर्षित करेगा और हमारे स्थानीय व्यवसायों, जैसे होटल, रेस्तरां और गाइड सेवाओं को सीधे लाभ होगा। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल आगरा के पर्यटन को एक नया आयाम देगी, बल्कि योगी सरकार की नीतियों के तहत ब्रज की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रभावी ढंग से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगी।

मुख्यमंत्री ने बस्ती आकर दी नंदा बाबा को श्रद्धांजलि

विगत दिनों हो गया था नंदा बाबा का निधन गोरखनाथ मंदिर से रहा नंदा बाबा का गहरा लगाव बस्ती,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बस्ती आकर धार्मिक आयोजनों के लिए विख्यात रहे नंदा बाबा को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। नंदा बाबा का 3-4 नवंबर की रात निधन हो गया था। नंदा बाबा (देशबंधु नंदानाथ महाराज) को श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से श्रीकृष्ण पांडेय इंटर कॉलेज मैदान में बने हेलीपैड पर उतरे। यहां से वह दक्षिण दरवाजा स्थित नंदा बाबा के आश्रम में पहुंचे और नंदा बाबा के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। नंदा बाबा 1970 में जिला अस्पताल के पास दुर्गा पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना करने और सावन माह में कांवड़ियों की सेवा के लिए सुपरिचित रहे। उनका गोरखनाथ मंदिर से भी गहरा लगाव था। उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद मुख्यमंत्री ने श्रद्धांजलि सभा में आए साधु संतों से मुलाकात की और सनातन हित मे नंदा बाबा के योगदान को याद किया।

राम मंदिर ध्वजारोहण समारोह: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को अयोध्या में करेंगें उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

मुख्यमंत्री योगी ध्वजारोहण समारोह की तैयारियों का स्वयं करेंगे निरीक्षण राम मंदिर तक गोल्फ कार्ट से पहुंचाए जाएंगे अतिथि, पार्किंग पर ही जिला प्रशासन लगाएगा गोल्फ कार्ट मंदिर परिसर में ही बनेंगे दो खोया पाया कैंप प्रदेश की योगी सरकार अतिथि देवो भव: की तर्ज पर करेगी स्वागत   अयोध्या, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह के शिखर पर ध्वजारोहण का भव्य कार्यक्रम 25 नवम्बर को आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की पूरी संभावना है। कार्यक्रम की तैयारियों को परखने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं मंगलवार को अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर परिसर का दौरा करेंगे और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे। वहीं पीएम के कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण भी करेंगे। शिखर पर ध्वज फहराने के बाद मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगा। इसके बाद मंदिर आम भक्तों के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। अभी तक केवल गर्भगृह और प्रथम तल तक ही भक्तों को प्रवेश मिलता है, लेकिन शिखर कलश और ध्वजारोहण के बाद पूरे मंदिर परिसर में दर्शन की व्यवस्था शुरू हो जाएगी। कार्यक्रम में देश-विदेश से आने वाले संत-महंत, वीवीआईपी और विशेष अतिथियों की संख्या हजारों में होने का अनुमान है। इन सभी को सुगमता से मंदिर तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष योजना तैयार की है। पार्किंग स्थलों से राम मंदिर तक मेहमानों को गोल्फ कार्ट की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए सभी प्रमुख पार्किंग क्षेत्रों पर ही गोल्फ कार्ट तैनात रहेंगें। इससे पैदल चलने की परेशानी से मेहमानों को निजात मिलेगी और यातायात व्यवस्था भी सुचारू रहेगी। खोया-पाया कैंप बनेगा और होगा अतिथि सत्कार भीड़ प्रबंधन को देखते हुए मंदिर परिसर में ही दो बड़े खोया-पाया कैंप स्थापित किए जाएंगे। इन कैंपों में खोए हुए लोगों को तुरंत खोजने और उनके परिजनों से मिलाने की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा योगी सरकार ‘अतिथि देवो भव:’ की भावना के साथ मेहमानों का भव्य स्वागत-सत्कार करेगी। सभी अतिथियों के लिए ठहरने, भोजन और परिवहन की उच्चस्तरीय व्यवस्था की जा रही है। सुरक्षा के रहेंगे पुख्ता इंतजाम जिलाधिकारी निखिल टीकाराम ने बताया कि 25 नवम्बर के कार्यक्रम को देखते हुए अयोध्या में मल्टी लेयर सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। हजारों पुलिसकर्मी, पीएसी, सीआरपीएफ और खुफिया एजेंसियों की टीमें तैनात रहेंगी। ड्रोन और सीसीटीवी से पूरे शहर की निगरानी की जाएगी। राम मंदिर ट्रस्ट के एक सदस्य ने बताया कि शिखर पर ध्वज फहराने के बाद मंदिर का स्वरूप पूर्ण रूप से दिव्य हो जाएगा। नौ शिखरों वाले इस भव्य मंदिर में मुख्य शिखर पर भगवा ध्वज लहराता देख करोड़ों रामभक्तों की आंखें तर हो जाएंगी। मुख्यमंत्री स्वयं परखेंगे व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यह कार्यक्रम विश्व पटल पर भारत की आस्था और संस्कृति का प्रतीक बने। मंगलवार को समीक्षा बैठक में वे स्वयं हर व्यवस्था को परखेंगे व पीएम के कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण करेंगे। ताकि 25 नवम्बर का कार्यक्रम ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बन सके।

सौर ऊर्जा क्रांति : किसानों और छोटे कारोबारियों को मिल रही बड़ी राहत, 2.75 लाख से ज्यादा घर रोशन

मासिक खर्च में हो रही है 15-20% की बचत, छोटे व्यवसायों को मिली नई गति डबल इंजन सरकार द्वारा ₹1,808.09 करोड़ की सब्सिडी की गई है वितरित लखनऊ,  प्रदेश के पिछड़े और ग्रामीण इलाकों में पीएम सूर्य घर योजना नई उम्मीद बनकर उभरी है। सौर ऊर्जा आधारित इस योजना ने किसानों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के जीवन में आर्थिक राहत पहुंचाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने इस योजना के क्रियान्वयन में तेजी दिखाई है और राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में जगह बनाई है। अधिकृत आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 2,75,936 घरों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इससे उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली का लाभ मिल रहा है और ऊर्जा निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है। स्थापना के मामले में यूपी गुजरात और महाराष्ट्र के बाद तीसरे स्थान पर है, जबकि कुल आवेदनों में प्रदेश दूसरे स्थान पर है। इस योजना का सबसे बड़ा प्रभाव छोटे व्यवसायों पर दिखाई दे रहा है। बिजली कटौती से पहले जहां वेल्डिंग, आटा चक्की, किराना स्टोर, नाई की दुकान और मोबाइल रिपेयर जैसी इकाइयां प्रभावित होती थीं, वहीं अब सौर ऊर्जा से इनके संचालन में रुकावट नहीं होती। लगातार बिजली उपलब्ध होने से इन व्यवसायों की आय स्थिर हुई है और रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बिजली बिल लगभग शून्य होने से उनके मासिक खर्च में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी आई है। कई परिवार अब शिक्षा, स्वास्थ्य और बचत की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ पा रहे हैं। 31 अक्टूबर तक प्रदेश में ₹1,808.09 करोड़ की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है। सब्सिडी मिलने से योजना के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है और रूफटॉप सोलर स्थापना में तेजी आई है। लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर और बरेली इस योजना के प्रमुख लाभार्थी जिले हैं। अकेले इन चार जिलों में 8,000 से अधिक रूफटॉप सोलर यूनिट स्थापित हो चुकी हैं। आंकड़ों के मुताबिक लखनऊ में 4,271, वाराणसी में 1,672, कानपुर नगर में 1,410 और बरेली में 1,145 संयंत्र लगाए गए हैं। अन्य जिलों में भी स्थापना कार्य तेजी से जारी है।

सीएम योगी के निर्देशानुसार प्रदेश में युवा व महिला उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़ने पर फोकस

लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार युवाओं को कौशल, पूंजी और बाजार से जोड़कर राज्य में सूक्ष्म व परंपरागत उद्योगों की नई क्रांति खड़ी कर रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (CM-YUVA) के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.70 लाख युवाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि हर वर्ष 1 लाख से अधिक नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना का प्रयास किया जा रहा है। योगी सरकार की नीतियों का मूल उद्देश्य युवा, महिला और पारंपरिक हस्तशिल्प सभी को एक साझा आर्थिक विकास मॉडल से जोड़ना है। इस व्यापक दृष्टि ने स्वरोजगार, उद्यमिता और रोजगार सृजन की दिशा में प्रदेश में नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त किया है। युवा उद्यमिता को नई दिशा दे रही सीएम युवा योजना सीएम युवा योजना के तहत प्रदेश के 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को 5 लाख रुपये तक के उद्योगों और सेवा परियोजनाओं पर 100 प्रतिशत ब्याज-मुक्त तथा बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही, परियोजना लागत पर 10 प्रतिशत मार्जिन मनी का अनुदान भी दिया जा रहा है। न्यूनतम 8वीं पास और किसी मान्यता प्राप्त संस्था से कौशल प्रशिक्षण प्राप्त युवा इस योजना के लिए पात्र हो सकते हैं। प्रशिक्षण के बाद इनमें से अनेक युवा न सिर्फ खुद उद्यमी बन रहे हैं, बल्कि अन्य युवाओं और महिलाओं को भी रोजगार दे रहे हैं। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उद्योग आधारित आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को नए आयाम दे रही है। पारंपरिक कलाओं को मिली संजीवनी योगी सरकार ने ओडीओपी योजना के जरिए पारंपरिक हस्तकला एवं हस्तशिल्प को नया जीवन दिया है, जो 2017 से पहले समाप्ति के कगार पर थे। प्रदेश का शजर उद्योग इसका सबसे सशक्त उदाहरण है। देश में केवल केन नदी की रेत में मिलने वाला यह कीमती शजर पत्थर कभी मात्र कुछ हस्तशिल्प परिवारों की आजीविका का सहारा था। लेकिन सरकार ने इसे ओडीओपी से जोड़कर न सिर्फ इसका बाजारीकरण किया, बल्कि इसे जीआई टैग भी दिलाया। नतीजा यह रहा कि शजर उद्योग से जुड़े परिवारों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि सरकारी सहयोग, प्रशिक्षण और वित्तीय मदद कैसे किसी विलुप्तप्राय उद्योग को दोबारा जीवित कर सकती है। चाहें विश्वकर्मा श्रम सम्मान हो या टूलकिट वितरण हो, इन कार्यक्रमों के जरिए प्रदेश में कारीगरों को कुशल बनाकर उनकी आर्थिक उन्नति सुनिश्चित की जा रही है। उल्लेखनीय है कि शजर उद्योग के साथ ही प्रदेश भर में ओडीओपी के माध्यम से महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों और युवाओं को नए बाजार, प्रशिक्षण और डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं। इससे हजारों महिलाओं को स्वरोजगार मिला है और वे अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में सक्षम हुईं हैं। महिला स्वावलंबन, परंपरागत कारीगरी और आधुनिक विपणन का यह संगम अब उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक पहचान बनता जा रहा है।