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दिल्ली अग्निकांड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताया गहरा शोक

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली के मालवीय नगर क्षेत्र में हुई भीषण अग्नि दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इस हादसे में हुई जनहानि को अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक बताते हुए शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने संदेश में कहा कि दिल्ली में दुर्भाग्यपूर्ण भीषण अग्नि दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रभु राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से शोक संतप्त परिवारों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की भी प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में उनकी संवेदनाएं सभी प्रभावित परिवारों के साथ हैं।

यूपी पंचायत चुनाव मामला: ग्राम प्रधानों की नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त, ओबीसी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

इलाहाबाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में ग्राम प्रधानों को प्रदेश में पंचायत चुनाव होने और नए प्रधान चुने जाने तक प्रशासक नियुक्त करने संबधी राज्य सरकार के आदेश को चुनौती दी गई। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मामले में बुधवार हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई। याची अमरेंद्र नाथ ने बताया कि सुनवाई के दौरान सरकार से सवाल किया कि उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव कब कराए जाएंगे। कोर्ट ने राज्य सरकार से उत्तर पनिर्वाचन आयोग को आदेश दिया कि अगली सुनवाई 10 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावित डेट बताएं। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान ओबीसी आयोग की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ व न्यायमूर्ति एके चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने स्थानीय अधिवक्ता ओम प्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया है। याचिका में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने संबधी राज्य सरकार के 25 मई के आदेश को चुनौती दी गई है। कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 के तहत प्रधानों का कार्यकाल उनके शपथ लेने के पश्चात से सिर्फ पांच वर्ष का ही हो सकता है। सरकार ने समय पर पंचायत चुनाव न करा के मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया। इस प्रकार से उनका कार्यकाल अनिश्चितकाल तक के लिए बढ़ा दिया गया है जो कि विधि विरूद्ध है। याचिका में मांग की गई कि पूर्व व्यवस्था के तहत यदि पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पा रहे तो एडीओ पंचायत या किसी अन्य अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाय। प्रधानों ने प्रशासक के रूप में 27 मई से काम संभाला है यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव न हो पाने पर पहली बार 57694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब उनके काम के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया गया है। प्रशासक की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब नए काम वो डीएम की अनुमति से ही करा सकेंगे। ग्राम पंचायतों के निवर्तमान प्रधानों ने प्रशासक के रूप में 27 मई से काम संभाला है। ऐसे में अब इस तिथि से वह कोई भी नया काम कराने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से डीएम को प्रस्ताव भेजेंगे। फिर डीएम की अनुमति से ही वह कोई नया काम करा सकेंगे। सिर्फ ग्राम पंचायतों के प्रशासक नियुक्त किए जाने से पूर्व की तिथि से स्वीकृत व अनुमोदित दैनिक, निर्माणाधीन, मरम्मत कार्य और पूर्ण हो चुके कामों का भौतिक व तकनीकी मूल्यांकन कराते हुए भुगतान प्रशासक पूर्व की भांति कर सकेंगे।

बरेली विकास प्राधिकरण की बड़ी योजना: आवासीय और औद्योगिक टाउनशिप से बदलेगा शहर का नक्शा

बरेली  उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में दो नई और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम में तेजी आ गई है। इस शहर के विस्तार और भविष्य की आवश्यकताओं के मद्देनजर बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) के अधिकारियों इसे लेकर मंगलवार को एक बैठक की। बैठक में दोनों योजनाओं के लिए अब तक 445.27 करोड़ रुपए खर्च कर 88 हेक्टेयर भूमि खरीद पर चर्चा की है। अधिकारियों ने दोनों परियोजनाओं के लिए बाकी जमीन के अधिग्रहण और पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया। बीडीए उपाध्यक्ष डा. ए मनिकंडन का कहना है कि दिल्ली-लखनऊ बड़े बाईपास और बरेली-पीलीभीत राजमार्ग से सटे नौ गांवों की 267.19 हेक्टेयर भूमि पर नई आवासीय टाउनशिप विकसित की जाएगी। बीडीए अब तक 424.36 करोड़ रुपए खर्च कर 78 हेक्टेयर भूमि खरीद चुका है। योजना में 45 मीटर और 30 मीटर चौड़ी जोनल सड़कें प्रस्तावित हैं, जबकि सभी आंतरिक सड़कें 18 मीटर चौड़ी होंगी। 132 केवी विद्युत उपकेंद्र, एम्यूजमेंट पार्क, कम्युनिटी सेंटर विकसित की जाएंगी। दोनों परियोजनाओं में शामिल 38 हेक्टेयर ग्राम समाज और शासकीय भूमि के पुनर्ग्रहण की कार्रवाई भी जारी है। बीडीए अधिकारियों का मानना है कि योजनाएं पूरी होने के बाद बरेली में नियोजित शहरी विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। दिल्ली रोड पर बनेगा रोजगार का नया केंद्र दूसरी परियोजना दिल्ली रोड से सटी 126.30 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित औद्योगिक टाउनशिप है। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप यहां सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन विकसित किया जाएगा। इसके लिए बीडीए 20.91 करोड़ रुपए खर्च कर 10 हेक्टेयर भूमि खरीद चुका है। इस इंडस्ट्रियल हब में उद्योगों के लिए चौड़ी सड़कें, भूमिगत बिजली नेटवर्क, जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, हरित क्षेत्र, ई-चार्जिंग स्टेशन, गैस लाइन, कॉमन पार्किंग, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम और फायर स्टेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी

सूर्या हत्याकांड के बाद खोड़ा में बड़ा एक्शन, अवैध मदरसों पर कार्रवाई और अपराधियों की परेड

 गाजियाबाद  यूपी के गाजियाबाद में पुलिस-प्रशासन का 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' जारी है. सूर्या हत्याकांड के बाद खोड़ा इलाके को अपराध मुक्त करने के लिए चलाए जा रहे इस ऑपरेशन के तीसरे और फाइनल दिन मंगलवार को तीन अवैध मदरसों को सील कर दिया. वक्फ निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा. पुलिस ने घर-घर जाकर 600 अपराधियों का सत्यापन किया, संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और पुराने बदमाशों से अपराध न करने की शपथ दिलवाई।  खोड़ा के तीन अवैध मदरसे किए गए सील आपको बता दें कि गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे रविन्द्र गौड़, डीएम रविन्द्र एम और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कैलाश चन्द्र तिवारी की संयुक्त टीम ने इस ऑपरेशन की अगुवाई की. मोहल्ले-मोहल्ले जाकर अपराधियों की शिनाख्त की गई और कानूनी एक्शन लिया गया।  इन सबके बीच प्रशासन की टीम ने खोड़ा के मदरसा रहमानिया अरबिया कासिम-उल उलूम (मोहल्ला बीरबल), सुल्तान अलारफीन मदरसा और एक अन्य मदरसे को सील कर नोटिस चस्पा कर दिया है. यह कार्रवाई मदरसों के गैर-मान्यता प्राप्त होने, अवैध संचालन, कार्यालय में पंजीकृत न होने और परिसर में अग्निशमन व विद्युत सुरक्षा विभाग की एनओसी (NOC) न होने के कारण की गई. संचालक को अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।  अपराधियों का सत्यापन और थानों में ली शपथ 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' का असर अब पूरे गाजियाबाद जिले में दिखने लगा है. खोड़ा कॉलोनी में घर-घर जाकर 3 दिन के अंदर 600 अपराधियों और हिस्ट्रीशीटर्स का वेरिफिकेशन किया गया. इसके अलावा, साहिबाबाद, इंदिरापुरम और खोड़ा थानों में करीब 150 पुराने अपराधियों को बुलाकर चेतावनी दी गई, जिसके बाद करीब 80 लोग तख्ती लेकर साहिबाबाद थाने पहुंचे और भविष्य में कभी अपराध न करने की शपथ ली।  संदिग्ध किराएदारों की जांच और असद के घर पर नोटिस खोड़ा के घने आबादी वाले इलाके में बिना वेरिफिकेशन के रह रहे किराएदारों और कमर्शियल जगहों की लिस्ट खंगालकर चेकिंग चलाई जा रही है. मुख्य आरोपी असद के घर के दरवाजे पर एसडीएम (SDM) का नोटिस लगा है, जिसे सोमवार को कुछ लोगों ने तोड़ने की कोशिश की थी. पड़ोसी ललित के मुताबिक असद के पिता नवाब ने यह मकान 6 महीने पहले किसी डीलर को बेच दिया था, लेकिन असद कभी-कभार गली में आया करता था।  असद के मददगार गिरफ्तार, सारिक मेवाती फरार पुलिस ने इस मामले में गहराई से जांच करते हुए कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ जारी है और कुछ को छोड़ दिया गया है. मुख्य आरोपी असद के एनकाउंटर के बाद पुलिस ने साजिश रचने और मदद करने के आरोप में उसके पिता नवाब, फरहान और आतिफ को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं, मामले का एक अन्य आरोपी सारिक मेवाती अभी भी पुलिस की गिरफ्त से फरार है। 

चुनाव से पहले यूपी में बदलाव: मंत्रियों को नए जिलों का प्रभार, संगठन मजबूत करने की तैयारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में महत्वपूर्ण फेरबदल किए हैं। हाल ही में कैबिनेट में शामिल किए गए नए मंत्रियों को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है। कई वरिष्ठ मंत्रियों के जिलों के प्रभार भी बदले हैं। वहीं कुछ नए चेहरों को भी महत्वपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मिली जानकारी के अनुसार जयवीर सिंह, बेबी रानी मौर्य सहित कई मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बदलाव किया गया है। इन बदलावों को 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रशासन और संगठन की कमान और मजबूत बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। योगी सरकार के वरिष्ठ मंत्री भूपेंद्र चौधरी को आगरा के साथ कासगंज की भी जिम्मेदारी दी गई है। हाल में योगी कैबिनेट में शामिल हुए मनोज पांडेय को सीतापुर का प्रभार मिला है। इसके साथ ही अजीत पाल को फतेहपुर, समेंद्र तोमर को मुजफ्फरनगर, हंसराज विश्वकर्मा को सोनभद्र और सुरेन्द्र दलेर को बुलंदशहर जिले का प्रभारी बनाया गया है। किसे मिला है कौन सा जिला योगी सरकार के कैबिनेट मंत्रियों में सूर्य प्रताप शाही को अयोध्या और बस्ती, सुरेश कुमार खन्ना को वाराणसी और लखनऊ, स्वतंत्र देव सिंह को प्रयागराज और गोरखपुर, बेबी रानी मौर्य को इटावा और हाथरस, लक्ष्मी नारायण चौधरी को अलीगढ़ और फिरोजाबाद, जयवीर सिंह को झांसी और फर्रुखाबाद, धर्मपाल सिंह को गाज़ियाबाद और रामपुर, नन्द गोपाल गुप्ता "नन्दी" को मिर्जापुर और चित्रकूट, अनिल राजभर को आजमगढ़ और सिद्धार्थनगर, राकेश सचान को रायबरेली और कन्नौज, अरविन्द कुमार शर्मा को जौनपुर और भदोही, योगेन्द्र उपाध्याय को कानपुर नगर, आशीष पटेल को गोंडा, संजय निषाद को कानपुर देहात, ओम प्रकाश राजभर को अम्बेडकरनगर, दारा सिंह चौहान को कुशीनगर और श्रावस्ती, सुनील कुमार शर्मा को सहारनपुर, अनिल कुमार को मुरादाबाद का प्रभारी बनाया गया है। वहीं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) में से नितिन अग्रवाल को लखीमपुर खीरी, कपिल देव अग्रवाल को बिजनौर, रवीन्द्र जायसवाल को गाजीपुर, सन्दीप सिंह को मथुरा, गुलाब देवी को अमरोहा, गिरीश चन्द्र यादव को सुल्तानपुर, धर्मवीर प्रजापति को मैनपुरी, असीम अरूण को हरदोई और मेरठ, जे.पी.एस. राठौर को संभल और बरेली, दयाशंकर सिंह को देवरिया और मऊ, नरेन्द्र कुमार कश्यप को शाहजहांपुर, दिनेश प्रताप सिंह को बांदा और बहराइच, अरुण कुमार सक्सेना को बदायूं, दयाशंकर मिश्र "दयालु" को बलिया और महराजगंज का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। वहीं राज्य मंत्री में मयंकेश्वर शरण सिंह को प्रतापगढ़, दिनेश खटीक को शामली, संजीव गोंड को चंदौली, बलदेव सिंह ओलख को पीलीभीत, जसवन्त सिंह सैनी को बागपत, रामकेश निषाद को हमीरपुर, मनोहर लाल मन्नू कोरी को महोबा, संजय सिंह गंगवार को जालौन, बृजेश सिंह को गौतमबुद्धनगर, के.पी. मलिक को हापुड़, सुरेश राही को बाराबंकी, प्रतिभा शुक्ला को अमेठी, राकेश राठौर को औरैया, रजनी तिवारी को उन्नाव, सतीश चन्द्र शर्मा को बलरामपुर, दानिश आजाद अंसारी को ललितपुर, विजय लक्ष्मी गौतम को संतकबीरनगर, कृष्णा पासवान को कौशाम्बी और कैलाश सिंह राजपूत को एटा जिले का प्रभार सौंपा गया है।

खोड़ा में पुलिस-प्रशासन का बड़ा एक्शन, 600 अपराधियों का किया गया सत्यापन

गाजियाबाद यूपी के गाजियाबाद में पुलिस-प्रशासन का 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' जारी है. सूर्या हत्याकांड के बाद खोड़ा इलाके को अपराध मुक्त करने के लिए चलाए जा रहे इस ऑपरेशन के तीसरे और फाइनल दिन मंगलवार को तीन अवैध मदरसों को सील कर दिया. वक्फ निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा. पुलिस ने घर-घर जाकर 600 अपराधियों का सत्यापन किया, संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और पुराने बदमाशों से अपराध न करने की शपथ दिलवाई. खोड़ा के तीन अवैध मदरसे किए गए सील आपको बता दें कि गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे रविन्द्र गौड़, डीएम रविन्द्र एम और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कैलाश चन्द्र तिवारी की संयुक्त टीम ने इस ऑपरेशन की अगुवाई की. मोहल्ले-मोहल्ले जाकर अपराधियों की शिनाख्त की गई और कानूनी एक्शन लिया गया. इन सबके बीच प्रशासन की टीम ने खोड़ा के मदरसा रहमानिया अरबिया कासिम-उल उलूम (मोहल्ला बीरबल), सुल्तान अलारफीन मदरसा और एक अन्य मदरसे को सील कर नोटिस चस्पा कर दिया है. यह कार्रवाई मदरसों के गैर-मान्यता प्राप्त होने, अवैध संचालन, कार्यालय में पंजीकृत न होने और परिसर में अग्निशमन व विद्युत सुरक्षा विभाग की एनओसी (NOC) न होने के कारण की गई. संचालक को अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है. अपराधियों का सत्यापन और थानों में ली शपथ 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप' का असर अब पूरे गाजियाबाद जिले में दिखने लगा है. खोड़ा कॉलोनी में घर-घर जाकर 3 दिन के अंदर 600 अपराधियों और हिस्ट्रीशीटर्स का वेरिफिकेशन किया गया. इसके अलावा, साहिबाबाद, इंदिरापुरम और खोड़ा थानों में करीब 150 पुराने अपराधियों को बुलाकर चेतावनी दी गई, जिसके बाद करीब 80 लोग तख्ती लेकर साहिबाबाद थाने पहुंचे और भविष्य में कभी अपराध न करने की शपथ ली. संदिग्ध किराएदारों की जांच और असद के घर पर नोटिस खोड़ा के घने आबादी वाले इलाके में बिना वेरिफिकेशन के रह रहे किराएदारों और कमर्शियल जगहों की लिस्ट खंगालकर चेकिंग चलाई जा रही है. मुख्य आरोपी असद के घर के दरवाजे पर एसडीएम (SDM) का नोटिस लगा है, जिसे सोमवार को कुछ लोगों ने तोड़ने की कोशिश की थी. पड़ोसी ललित के मुताबिक असद के पिता नवाब ने यह मकान 6 महीने पहले किसी डीलर को बेच दिया था, लेकिन असद कभी-कभार गली में आया करता था. असद के मददगार गिरफ्तार, सारिक मेवाती फरार पुलिस ने इस मामले में गहराई से जांच करते हुए कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ जारी है और कुछ को छोड़ दिया गया है. मुख्य आरोपी असद के एनकाउंटर के बाद पुलिस ने साजिश रचने और मदद करने के आरोप में उसके पिता नवाब, फरहान और आतिफ को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं, मामले का एक अन्य आरोपी सारिक मेवाती अभी भी पुलिस की गिरफ्त से फरार है.

जी-20 बैठकों की सफल मेजबानी के बाद ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक काशी में आयोजित होने जा रही

वाराणसी में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक 4 और 5 जून को    जी-20 बैठकों की सफल मेजबानी के बाद ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक काशी में आयोजित होने जा रही योगी सरकार में वैश्विक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है उत्तर प्रदेश   ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक से वैश्विक मंच पर चमकेगी काशी की कला और संस्कृति बैठक के दौरान काशी के विश्व प्रसिद्ध जीआई टैग एवं ओडीओपी उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी लगेगी  इस बैठक में देश-विदेश के वरिष्ठ राजनयिक, नीति-निर्माता, सांस्कृतिक विशेषज्ञ एवं विशिष्ट प्रतिनिधि भाग लेंगे वाराणसी,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र एवं विश्व की प्राचीनतम जीवंत नगरी काशी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। जी-20 बैठकों की सफल मेजबानी के बाद अब 4 और 5 जून को वाराणसी में ब्रिक्स (BRICS) संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक आयोजित होने जा रही है। 4 -5 जून को ताज होटल में प्रस्तावित इस बैठक में देश-विदेश के वरिष्ठ राजनयिक, नीति-निर्माता, सांस्कृतिक विशेषज्ञ एवं विशिष्ट प्रतिनिधि भाग लेंगे।  योगी सरकार में उत्तर प्रदेश आज वैश्विक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन विकास, स्थानीय उत्पादों के संवर्धन और रोजगार सृजन के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों का ही परिणाम है कि काशी को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। बैठक के दौरान काशी के विश्व प्रसिद्ध जीआई टैग एवं ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) उत्पादों की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। इस प्रदर्शनी में वाराणसी की समृद्ध शिल्प परंपरा के 6 शिल्पियों के 6 विशिष्ट उत्पाद प्रदर्शित करेंगे। ये सभी उत्पाद काशी की सदियों पुरानी कला, शिल्प कौशल और सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक हैं। प्रदर्शनी के माध्यम से विदेशी प्रतिनिधियों को न केवल इन उत्पादों की विशिष्टता से परिचित कराया जाएगा, बल्कि स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का अवसर भी मिलेगा। योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों के संरक्षण, विपणन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की हैं। इन प्रयासों से हजारों शिल्पकारों, बुनकरों और कारीगरों को नई पहचान एवं रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। काशी के हस्तशिल्प उत्पाद आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया के अनेक देशों में अपनी विशेष पहचान बना रहे हैं। ब्रिक्स के सदस्य देश   ब्राजील ,चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान,रूस, सऊदी अरब ,दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ।  प्रदर्शित होने वाले प्रस्तावित जीआई और ओडीओपी उत्पादों के नाम वुडेन लेकर वेयर एंड टॉयज बनारस गुलाबी मीनाकारी क्राफ़्ट  बनारस ब्रोकेड एण्ड साड़ी वाराणसी सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क वाराणसी वुडेन लेकर वेयर एंड टॉयज बनारस मेटल रिपोजी क्राफ्ट बनारस ग्लास बीड्स   ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति स्थानीय कलाकारों और उद्यमियों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई है। विदेशी प्रतिनिधियों के समक्ष सीधे अपने उत्पादों का प्रदर्शन होने से निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और काशी के पारंपरिक शिल्प को नई वैश्विक पहचान प्राप्त होगी।     पद्मश्री रजनीकांत  जीआई ,विशेषज्ञ  अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से बड़ा मंच मिलता है, ब्रिक्स में हैंडीक्राफ्ट के प्रदर्शन से शिल्पियों के हाथ के हुनर को लोकल से ग्लोबल मार्केट  मिलेगा।   रामेश्वर सिंह  नेशनल अवार्डी  वाराणसी वुडेन लेकर एंड टॉयज  मोदी जी और योगी जी खुद जीआई एवं ओडीओपी उत्पादों के ब्रांड अंबेसडर हैं। जिन्होंने प्रदेश के हस्तशिल्प को नई पहचान देते हुए  प्राचीन मरती हुई कला को जीवित कर दिया है। इस प्रदर्शनी से वाराणसी के हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का प्रचार प्रसार होगा, देश-विदेश से आए विशिष्ट मेहमान काशी की इस कला से परिचित होंगे और हैंडीक्राफ्ट की बारीकियों को जानेंगे। इस मंच से ऑर्डर मिलेंगे की संभावनाएं बढ़ेंगी। कुञ्ज बिहारी  नेशनल अवार्डी, गुलाबी मीनाकारी  देश की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर रखने का मौका मिल रहा है, ऐसे अवसर देश की विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का मौका देते हैं।  दुर्गा प्रसाद पटेल  आर्टिजन ग्लास बिड्स

पिछ्ली सरकारों में ताल-पोखरों पर होता था कब्जा, हम कर रहे संरक्षण: सीएम योगी

चिलुआताल बनेगा ईको टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स का बेहतरीन केंद्र: सीएम योगी पिछ्ली सरकारों में ताल-पोखरों पर होता था कब्जा, हम कर रहे संरक्षण: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने किया चिलुआताल के पर्यटन विकास कार्यों का लोकार्पण 20 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निखारा गया है चिलुआताल को गोरखपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चिलुआताल पर्यटन विकास परियोजना के अगले चरणों में चिलुआताल को रामगढ़ताल की तर्ज पर ईको टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स के बेहतरीन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। पिछली सरकारों में ताल-पोखरों पर कब्जा होता था। अपनी बपौती समझकर कुछ लोग इस पर हवेली बनवा लेते थे। जिन ताल-पोखरों पर कब्जा नहीं हो पाता था, वे गंदगी और अपराध के गढ़ बन जाते थे। डबल इंजन सरकार ताल-पोखरों पर कब्जा नहीं होने देती, बल्कि प्रकृति संरक्षण के दायित्वों का निर्वहन करती है। उन्हें बेहतरीन पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित कर समाज को प्राकृतिक वातावरण में आनंदित होने का मंच देती है।  सीएम योगी मंगलवार शाम गोरखपुर के उत्तरी छोर पर स्थित प्राकृतिक झील चिलुआताल के पर्यटन विकास कार्यों का लोकार्पण करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। 20 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निखारे गए इस पर्यटन स्थल को जनता को समर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी सरकारें, अच्छी चीजें लेकर आती हैं। चिलुआताल में होगा 20 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन सीएम योगी ने कहा कि चिलुआताल में कोल इंडिया लिमिटेड के साथ मिलकर फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की कार्यवाही को आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे चिलुआताल में 20 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। पूरे शहर की बिजली आपूर्ति यहां से संभव हो सकेगी। सोलर एनर्जी ग्रीन एनर्जी होती है, इससे किसी तरह का कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। चिलुआताल में लगने वाला फ्लोटिंग सोलर प्लांट नेट जीरो के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी सहयोग करेगा।  नेचुरल है चिलुआताल का पानी सीएम योगी ने कहा अभी तक गोरखपुर में ईको टूरिज्म का प्रमुख केंद्र रामगढ़ताल ही था। पर, उसमें ड्रेनेज का पानी जाता था। रामगढ़ताल की सफाई कराई गई, ताल को डीसिल्ट किया गया। वहां आज भी पानी ट्रीटमेंट के बाद ही जाता है। यानी रामगढ़ताल का पानी पूरी तरह नेचुरल नहीं है, जबकि चिलुआताल का पानी नेचुरल है जो जंगलों से होकर आता है। खाद कारखाने के निर्माण में चिलुआताल को डीसिल्ट कर यहां से पानी दिया गया। सिल्ट का उपयोग निचले इलाकों के भराव में किया गया।  चिलुआताल में वाटर स्पोर्ट्स की असीम संभावनाएं  मुख्यमंत्री ने कहा कि रामगढ़ताल की तरह चिलुआताल में भी वाटर स्पोर्ट्स की असीम संभावनाएं हैं। कुछ दिनों पहले रामगढ़ताल में नेशनल जूनियर रोइंग चैंपियनशिप का सफल आयोजन हुआ। इसमें 22 राज्यों के 200 से अधिक खिलाड़ी आए। सबने रामगढ़ताल की खूब सराहना की। अब जब लोग चिलुआताल को देखेंगे तो यह और भी अच्छा लगेगा। उन्होंने चिलुआताल के प्राकृतिक वातावरण की तारीफ करते हुए कहा कि चिलुआताल के किनारे लहरों से होकर आ रही हवा तापमान को कम कर सुखद एहसास करा रही है। यहां पर लोग परिवार के साथ आकर घूम सकते हैं। स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं। यहां न प्रदूषण है और न ही किसी प्रकार की अव्यवस्था। अच्छे सिटी डेवपलमेंन्ट प्लान से बनती है अच्छी धारणा मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छे सिटी डेवपलमेंन्ट प्लान से लोगों के मन में शहर की अच्छी धारणा बनती है। हमें गोरखपुर को सेफ और स्मार्ट सिटी के साथ ही सस्टेनेबल डेवलपमेंट वाली सिटी बनाना है। विकास की प्रक्रिया सतत बढ़ती रहेगी, लेकिन इसके संरक्षण की जिम्मेदारी नागरिकों की है। उन्होंने आमजन से विकास का संरक्षण करने, सार्वजनिक संपति का नुकसान न करने, ऐसा करने वालों को जेल भिजवाने और गंदगी न करने की अपील की। उन्होंने रामगढ़ताल की सफाई के दौरान 56 बोरी प्लास्टिक मिलने का जिक्र करते हुए आह्वान किया कि गोरखपुर को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ-सुंदर शहर बनाने का संकल्प लेना होगा।  5 से 21 जून तक स्वच्छता, पौधरोपण और योग शिविर के आयोजन का दिया निर्देश मुख्यमंत्री ने भाजपा कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के सफलतम कार्यकाल के उपलक्ष्य में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून से लेकर विश्व योग दिवस 21 जून तक स्वच्छता, पौधरोपण और योग शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 5 जून को महानगर के दो मंडल सांसद व ग्रामीण विधायक के नेतृत्व में रामगढ़ताल और पांच मंडल चिलुआताल के किनारे 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधरोपण का वृहद अभियान चलाएं। इसके पहले 4 जून को स्वच्छता का वृहद अभियान चलाया जाए। 21 जून को विश्व योग दिवस पर 'करो योग रहो निरोग' के संकल्प के साथ रामगढ़ताल और चिलुआताल पर विशाल योग शिविरों का आयोजन किया जाए। एसएसबी नहीं होती तो बंद खाद कारखाने का स्क्रैप भी नहीं बचता सीएम ने कहा कि 31 वर्ष तक गोरखपुर का खाद कारखाना बंद पड़ा था। यहां एसएसबी नहीं होती तो कारखाने का स्क्रैप भी नहीं बचता। अब खाद कारखाना शुरू हो गया है। यहां एसएसबी है, केंद्रीय विद्यालय भी है, सैनिक स्कूल खुल गया है और चिलुआताल का पर्यटन विकास भी हो रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय के नए भवन के लिए धनराशि स्वीकृत कर दी गई है। सीएम योगी के विजन से खूबसूरत चित्र सा निखर गया है गोरखपुर: रविकिशन इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शिता बेमिसाल है। उनके विजन से गोरखपुर खूबसूरत चित्र सा निखर गया है। मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में गोरखपुर विकास के लिहाज से पूरे देश मे नजीर पेश कर रहा है। रामगढ़ताल के बाद अब चिलुआताल भी फिल्मों की शूटिंग का केंद्र बनेगा। सांसद रविकिशन ने चिलुआताल पर लिखा अपना एक गीत भी सुनाया।  सीएम योगी के नेतृत्व में गोरखपुर का कोई भी कोना विकास से अछूता नहीं: महापौर लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में गोरखपुर का कोई भी कोना विकास से अछूता नहीं रह गया है। यह मुख्यमंत्री जी का ही विजन है कि उन्होंने उपेक्षित रहे चिलुआताल को खूबसूरत पर्यटन स्थल बनवा दिया।   कार्यक्रम में एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह … Read more

गोवर्धन से गिरफ्तारी के बाद अभिषेक मिश्रा केस में नए खुलासे, डिजिटल रिकॉर्ड बने अहम सबूत

माथुरा मथुरा के गोवर्धन से गिरफ्तार IIT रुड़की से इंजीनियरिंग कर चुके अभिषेक मिश्रा को लेकर जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं. ऑनलाइन गीता प्रवचन के जरिए अपनी पहचान बनाने वाले अभिषेक के मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन चुके हैं. जांच अधिकारियों के मुताबिक कुछ फोटो और वीडियो ऐसे मिले हैं, जिन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. पुलिस के अनुसार, अभिषेक मिश्रा के संपर्क में आने वाली कई युवतियां उच्च शिक्षित थीं. इनमें बीटेक, एमटेक और MBA जैसी पढ़ाई कर चुकी युवतियों के नाम भी सामने आए हैं. आरोप है कि धार्मिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के नाम पर शुरू हुआ संपर्क धीरे-धीरे भरोसे, भावनात्मक निर्भरता और कथित शोषण में बदलता चला गया. जांच में जुटी टीम मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और आर्थिक लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है. मोबाइल से मिले फोटो-वीडियो क्यों बने जांच का केंद्र मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की ओर से कुछ ऐसे फोटो उपलब्ध कराए गए हैं जिनमें आरोपी युवतियों के साथ अंतरंग स्थिति में दिखाई दे रहा है. इन तस्वीरों और वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये सामग्री कब रिकॉर्ड की गई और इसके पीछे की परिस्थितियां क्या थीं. सूत्रों के अनुसार, मोबाइल फोन से मिले डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था और उसका नेटवर्क कितना बड़ा था. IIT की डिग्री और आध्यात्मिक छवि का असर जांच के दौरान सामने आया है कि अभिषेक मिश्रा ने IIT रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और बोलने की शैली ने कई युवाओं को प्रभावित किया. वह ऑनलाइन माध्यम से भगवद्गीता और आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा करता था, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग उससे जुड़ते गए. आरोप है कि इसी भरोसे का इस्तेमाल कर वह कुछ लोगों को अपने करीब लाने में सफल रहा. पुलिस का कहना है कि इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में पढ़ी-लिखी युवतियां उसके साथ रहने के लिए गोवर्धन पहुंचीं. गंधर्व विवाह का दावा और गंभीर आरोप मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार, एक पीड़िता ने आरोप लगाया है कि अभिषेक मिश्रा ने उसे यह विश्वास दिलाया कि दोनों का 'गंधर्व विवाह' हो चुका है. पुलिस के मुताबिक इसी आधार पर शारीरिक संबंध बनाए जाने का आरोप लगाया गया है. पीड़िता के बयान के बाद आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इसी तरह के दावे अन्य लोगों के सामने भी किए गए थे. परिवारों से पैसे मंगवाने के आरोप पुलिस जांच में एक और पहलू सामने आया है. अधिकारियों के मुताबिक कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि समूह में रहने वाले युवक-युवतियों के परिवारों से आर्थिक मदद मंगवाई जाती थी. यह भी जांच का विषय है कि क्या भावनात्मक दबाव बनाकर पैसे मंगवाए गए थे. फिलहाल पुलिस बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य आर्थिक गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है. पहले भी पहुंच चुके थे परिजन जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि करीब छह महीने पहले कुछ परिजन अपनी बेटी को वहां से वापस ले जाने पहुंचे थे. उस समय भी विवाद की स्थिति बनी थी. हालांकि मामला ज्यादा आगे नहीं बढ़ा, लेकिन अब पुलिस उस पूरे घटनाक्रम को भी दोबारा खंगाल रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि एक समय वहां दो दर्जन से ज्यादा युवक-युवतियां आते-जाते थे. बाद में अधिकांश लोग वहां से अलग हो गए. पुलिस अब यह समझने का प्रयास कर रही है कि आखिर इसके पीछे क्या वजह थी. पुलिस कार्रवाई के दौरान दो युवतियों और एक युवक को वहां से रेस्क्यू किया गया था. बाद में उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि सभी की काउंसलिंग कराई जा रही है ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें. अभी कई सवालों के जवाब बाकी अभिषेक मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऑनलाइन प्रवचन से शुरू हुई यह कहानी इतने गंभीर आरोपों तक कैसे पहुंची. मोबाइल फोन से मिले डेटा, फोटो-वीडियो, कथित आर्थिक लेन-देन और पीड़ितों के बयानों के आधार पर पुलिस पूरे मामले की तह तक जाने का दावा कर रही है. फिलहाल जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

गोवर्धन से गिरफ्तारी के बाद खुल रहे राज, ‘प्रवचनकर्ता’ पर दुष्कर्म और शोषण के आरोप

मथुरा IIT रुड़की से पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक मिश्रा ने नौकरी नहीं, बल्कि प्रवचन का रास्ता चुना. कुछ ही वर्षों में वह ऑनलाइन माध्यम से युवाओं के बीच पहचान बनाने लगा. लेकिन मथुरा के गोवर्धन से हुई उसकी गिरफ्तारी के बाद वही पहचान जांच के घेरे में है. पुलिस का आरोप है कि आध्यात्मिक मार्गदर्शन के नाम पर उसने युवतियों का विश्वास जीता और फिर उन्हें अपने प्रभाव में लिया. अब हर दिन सामने आ रहे नए तथ्य इस मामले को और गंभीर बनाते जा रहे हैं. पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किया गया अभिषेक मिश्रा मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है. उसने वर्ष 2017 से 2021 के बीच IIT रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. बताया जा रहा है कि उसने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भगवद्गीता तथा आध्यात्मिक विषयों पर प्रवचन शुरू कर दिए. धीरे-धीरे उसकी पहचान एक ऐसे युवा प्रवचनकर्ता के रूप में बनने लगी जो आधुनिक शिक्षा और धार्मिक ज्ञान का मिश्रण पेश करता था. यहीं से उसकी पहुंच देश के अलग-अलग राज्यों तक बननी शुरू हुई. पहला कदम ऑनलाइन प्रवचन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी का सबसे बड़ा हथियार उसका ऑनलाइन नेटवर्क था. वह इंटरनेट के माध्यम से युवाओं से जुड़ता था. धार्मिक चर्चा, आत्मिक शांति, जीवन के उद्देश्य और आध्यात्मिक उन्नति जैसे विषयों पर बातचीत कर वह लोगों का विश्वास जीतता था. जांच में यह भी सामने आया है कि उसके संपर्क में आने वाली कई युवतियां इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा से जुड़ी थीं. कुछ बीटेक और एमटेक कर चुकी थीं तो कुछ उच्च शिक्षित परिवारों से थीं. पुलिस का मानना है कि आरोपी विशेष रूप से ऐसे लोगों को निशाना बनाता था जो जीवन में किसी भावनात्मक, मानसिक या आध्यात्मिक उलझन से गुजर रहे हों. पहले विश्वास कायम किया जाता था और फिर धीरे-धीरे उन्हें परिवार से दूर रहने तथा समूह के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाता था. गंधर्व विवाह का दावा और शारीरिक संबंधों के आरोप मामले में सबसे गंभीर आरोप एक पीड़िता के बयान के बाद सामने आए. पुलिस के अनुसार पीड़िता ने बताया कि अभिषेक मिश्रा कथित तौर पर यह कहकर युवतियों को भ्रमित करता था कि उनका गंधर्व विवाह हो चुका है. जांच अधिकारियों के मुताबिक, इसी आधार पर वह शारीरिक संबंध बनाता था. पीड़िता की शिकायत और दर्ज बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या ऐसी घटनाएं सिर्फ एक पीड़िता तक सीमित थीं या फिर अन्य युवतियां भी इसी तरह के दबाव और भ्रम का शिकार हुईं. पहले भी उठे थे सवाल, लेकिन नहीं खुल पाया था पूरा राज पूरे मामले का एक दिलचस्प और अहम पहलू यह भी है कि अभिषेक मिश्रा का नाम पहली बार विवादों में नहीं आया है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार लगभग छह महीने पहले भी एक परिवार अपनी बेटी को वहां से वापस ले जाने पहुंचा था. उस दौरान काफी हंगामा हुआ था. हालांकि बाद में जांच में सामने आया कि युवती के साथ आए लोग उसके परिजन ही थे. उस समय मामला ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया, लेकिन अब अधिकारियों का मानना है कि उसी दौरान कई संकेत मिल गए थे कि वहां कुछ असामान्य गतिविधियां चल रही हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक समय वहां करीब दो दर्जन युवक-युवतियां मौजूद थीं. हालांकि समय के साथ अधिकांश लोग वहां से अलग हो गए. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आखिर इतने लोग वहां क्यों पहुंचे और बाद में क्यों लौट गए. परिवारों से दूरी, भावनात्मक दबाव और पैसों की जांच मथुरा पुलिस अब सिर्फ दुष्कर्म के आरोपों तक सीमित नहीं है. जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार यह भी जानकारी मिली है कि समूह में रहने वाले कुछ लोगों से उनके परिवारों के जरिए पैसे मंगवाए जाते थे. आरोप है कि भावनात्मक दबाव बनाकर आर्थिक मदद लेने की कोशिश की जाती थी. इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि क्या किसी प्रकार का आर्थिक शोषण हुआ था और यदि हुआ तो उसकी प्रकृति क्या थी. पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है. मोबाइल में मिले फोटो और वीडियो बने जांच का अहम हिस्सा जांच के दौरान कुछ फोटो और वीडियो भी पुलिस के संज्ञान में आए हैं. अधिकारियों के मुताबिक परिजनों द्वारा उपलब्ध कराए गए कुछ चित्रों में आरोपी युवतियों के साथ आपत्तिजनक और अंतरंग स्थिति में दिखाई दे रहा है. हालांकि इन सामग्रियों की फोरेंसिक जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन पुलिस इन्हें केस के महत्वपूर्ण साक्ष्यों में शामिल कर रही है. इसके अलावा जिन परिवारों के पास इस तरह की कोई अन्य सामग्री मौजूद है, उनसे भी संपर्क किया जा रहा है ताकि जांच को और मजबूत बनाया जा सके. मां भी छोड़ गई थी साथ  पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती दिनों में अभिषेक की मां भी उसके साथ रहती थीं. लेकिन बाद में वह वहां से चली गईं. अधिकारियों का कहना है कि यह भी जांच का विषय है कि आखिर किन परिस्थितियों में उन्होंने वहां से दूरी बनाई. पुलिस कार्रवाई के दौरान वहां से दो युवतियों और एक युवक को बरामद किया गया था. बाद में उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि सभी की काउंसलिंग कराई जा रही है ताकि वे सामान्य जीवन में वापस लौट सकें. इस प्रक्रिया में विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं की भी मदद ली जा रही है.  स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है. पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने बयान दिए हैं कि आरोपी अपने समूह से बाहर भी स्थानीय युवतियों और परिवारों से संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहा था. यदि जांच में यह तथ्य पुष्ट होता है तो मामला और गंभीर हो सकता है. यही वजह है कि पुलिस आसपास के लोगों के बयान भी दर्ज कर रही है.