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छत्तीसगढ़ का अब तक का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट: ₹35,000 करोड़ से विकास और भविष्य की मजबूत नींव — ओपी चौधरी

रायपुर : छत्तीसगढ़ में अब तक का सबसे बड़ा ₹35,000 करोड़ का अनुपूरक बजट: विकास, अनुशासन और भविष्य की मजबूत नींव – वित्त मंत्री ओ पी चौधरी रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ₹35,000 करोड़ का अनुपूरक बजट प्रस्तुत कर विकास, वित्तीय अनुशासन और दूरदर्शी शासन की स्पष्ट प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह अनुपूरक बजट केवल संसाधनों की व्यवस्था नहीं, बल्कि निरंतर आर्थिक प्रगति और संतुलित विकास की मजबूत दिशा है। वित्त मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार द्वारा विभिन्न बोर्डों और निगमों पर छोड़े गए ₹45,000 करोड़ से अधिक के लंबित ऋण ने इन संस्थानों को लगभग निष्क्रिय स्थिति में पहुँचा दिया था। इस अनुपूरक बजट के माध्यम से सरकार ने मार्कफेड और नान (NAAN) जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को संबल प्रदान करने का गंभीर प्रयास किया है, जो राज्य में धान खरीदी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की रीढ़ हैं। इन संस्थाओं को सुदृढ़ किए बिना किसानों का कल्याण और नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने औद्योगिक विकास को भी समान प्राथमिकता दी है। राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने तथा विभिन्न औद्योगिक विकास एवं प्रोत्साहन योजनाओं को निरंतरता प्रदान करने के लिए अनुपूरक बजट में ₹360 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे निवेश, रोजगार और उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र और संतुलित विकास के लिए केवल राजस्व व्यय पर्याप्त नहीं होता, बल्कि दूरदर्शी पूंजीगत व्यय ही भविष्य की समृद्ध अर्थव्यवस्था और मजबूत अधोसंरचना का आधार बनता है। सड़क, पुल, सिंचाई, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में किया गया निवेश आने वाले दशकों तक विकास के स्थायी स्रोत तैयार करता है। इसी सोच के साथ सरकार ने पूंजीगत व्यय को अपनी विकास रणनीति का केंद्र बनाया है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद बीते 25 वर्षों में पूंजीगत व्यय में लगभग 55 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज हुई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में जहाँ पूंजीगत व्यय ₹13,320 करोड़ था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर ₹15,419 करोड़ और 2024-25 में ₹20,055 करोड़ तक पहुँचा। मुख्य बजट 2025-26 में पूंजीगत व्यय के लिए ₹26,341 करोड़ का प्रावधान किया गया है, साथ ही अनुपूरक बजट में अतिरिक्त ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि बजट के कुल आकार के अनुपात में भी पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहाँ पूर्व सरकार के समय यह लगभग 3.5 प्रतिशत था, वहीं वर्ष 2025-26 में इसके 4.1 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार दीर्घकालिक विकास और मजबूत अधोसंरचना निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। अपने वक्तव्य के समापन में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह सरकार वादों पर नहीं, बल्कि परिणामों पर विश्वास करती है। पूंजीगत व्यय के माध्यम से संकल्पों को कागज से जमीन तक उतारने का कार्य किया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य छत्तीसगढ़ को आर्थिक रूप से सशक्त, अधोसंरचना के दृष्टिकोण से मजबूत और देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करना है। अनुपूरक बजट में सड़क एवं भवन निर्माण क्षेत्र को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। अधोसंरचना से जुड़े निर्माण कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के उद्देश्य से अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण सड़क कार्यक्रम (आरआरपी फेज-2) हेतु ₹175 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं राज्य में प्रमुख सड़कों के उन्नयन एवं विस्तार के लिए छत्तीसगढ़ राज्य सड़क क्षेत्र परियोजना (एडीबी लोन-3) के अंतर्गत ₹150 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही चिरमिरी-नागपुर हॉल्ट रेल लाइन परियोजना के लिए ₹86 करोड़ की राशि का प्रावधान कर क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है। अनुपूरक बजट में कृषि विकास एवं किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यापक वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक एवं लाभकारी बनाने के उद्देश्य से कृषि उन्नति योजना के लिए अनुपूरक बजट में ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही किसानों को 5 एचपी तक के पंपों के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने हेतु ₹1,700 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है, जिससे सिंचाई लागत में कमी आएगी और कृषि उत्पादन को स्थायी बल मिलेगा। किसानों को बिना ब्याज के ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अनुपूरक में ₹187 करोड़ का प्रावधान कर उन्हें वित्तीय संबल प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त, फसल जोखिम से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत ₹122 करोड़ का प्रावधान किया गया है, वहीं कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन एवं सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना हेतु ₹35 करोड़ का प्रावधान किया गया है। कृषि नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के भवन निर्माण के लिए ₹4 करोड़ का प्रावधान कर राज्य में कृषि आधारित नवाचार एवं तकनीकी विकास को नई गति देने का प्रयास किया गया है। अनुपूरक बजट में खाद्य सुरक्षा एवं पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया है। पिछली सरकार द्वारा छोड़े गए लंबित भुगतानों के निपटान हेतु अनुपूरक बजट में कुल ₹19,224 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा तंत्र को स्थायित्व प्रदान किया जा सके। इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के तहत ₹6,800 करोड़ का प्रावधान किया गया है, ताकि पात्र हितग्राहियों को नियमित, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके। इसके साथ ही राज्य में धान खरीदी की महत्वपूर्ण व्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से मार्कफेड को धान खरीदी में हुई हानि के निपटान हेतु ₹12,424 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस प्रावधान से न केवल किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा, बल्कि राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा ढांचे को भी दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी, जिससे आम नागरिकों के पोषण एवं खाद्य अधिकारों की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। अनुपूरक बजट में सड़क सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने … Read more

लोकतंत्र का प्रत्यक्ष अनुभव: बस्तर संभाग के सरपंचों का नए विधानसभा भवन का भ्रमण, उपमुख्यमंत्री से मुलाकात

रायपुर : बस्तर संभाग के सरपंचों ने नए विधानसभा भवन में देखी लोकतांत्रिक प्रक्रिया उपमुख्यमंत्री ने की सरपंचों से मुलाकात  रायपुर, बस्तर संभाग से आए विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचगणों ने  नवनिर्मित छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन का भ्रमण कर विधानसभा की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नजदीक से देखा। इस अवसर पर सरपंचों ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात भी की। बस्तर के जन जन में लोकतंत्र में विश्वास जगाने के लिए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल पर बस्तर संभाग के विभिन्न ग्रामों का प्रतिनिधित्व करने वाले सरपंचों को नवीन विधानसभा भवन का भ्रमण कराया गया।       इस दौरान सरपंचों को सदन की कार्यवाही, प्रश्नकाल, चर्चा एवं निर्णय प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। ग्राम स्तर पर लोकतंत्र को सशक्त बनाने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए यह अनुभव अत्यंत प्रेरणादायी रहा। उपमुख्यमंत्री ने उनसे उनके अनुभवों पर विस्तृत चर्चा की जिसमें सरपंचों ने कहा कि विधानसभा की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से देखने से उन्हें जनसेवा और शासन व्यवस्था की बेहतर समझ मिली है। जिस प्रकार हर समस्या और विषय पर दोनों पक्षों से सकारात्मक तरीके से चर्चा की जाती है वो सराहनीय है। इससे लगता है कि हमारी हर समस्या के लिए हमारे प्रतिनिधि बातें एवं मुद्दों को सामने रखते हैं।         उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सरपंचों से संवाद करते हुए कहा कि ग्राम पंचायतें लोकतंत्र की आधारशिला हैं और ग्रामीण विकास की योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में सरपंचों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बस्तर संभाग के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं और पंचायत सशक्तिकरण को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।       सरपंचों ने इस अवसर के लिए राज्य सरकार एवं उपमुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के अनुभव उन्हें अपने-अपने गांवों में बेहतर नेतृत्व और जवाबदेही के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगे।

लाल आतंक को बड़ा झटका: छत्तीसगढ़ में 34 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, कुल इनाम 84 लाख

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में मंगलवार को सात महिलाओं समेत 34 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें आठ-आठ लाख रुपये के इनामी पांच प्रमुख नक्सली भी शामिल हैं। इनमें में 45 वर्षीय पांड्रू पुनेम, 25 वर्षीय रुकनी हेमला, 22 वर्षीय देवा उइका, 27 वर्षीय रामलाल पोयम और 21 वर्षीय मोटू पुनेम शामिल हैं। बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव ने बताया कि इनमें से 26 नक्सलियों पर सामूहिक रूप से 84 लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने कहा कि पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को कौशल विकास प्रशिक्षण और 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान की जाएगी। सात महिलाओं ने भी किया सरेंडर बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) जितेंद्र यादव ने बताया कि 7 महिलाओं सहित 34 नक्सलियों ने यहां वरिष्ठ पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के अधिकारियों के समक्ष सरेंडर किया। उन्होंने बताया कि यह नक्सली माओवादियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी, तेलंगाना राज्य कमेटी और आंध्र ओडिशा सीमा डिवीजन में सक्रिय थे। अधिकारी ने बताया कि सरेंडर करने वाले प्रमुख नक्सलियों में पांड्रू पुनेम (45), रुकनी हेमला (25), देवा उइका (22), रामलाल पोयम (27) और मोटू पुनेम (21) शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक पर आठ लाख रुपये का इनाम है।  सरकार की ओर से दी जाएंगी सुविधाएं एसपी जितेंद्र यादव ने बताया कि पुनर्वास नीति के तहत, सरेंडर करने वाले कैडरों को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से प्रदान की जाने वाली अन्य सुविधाओं जैसे कौशल विकास प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं के साथ-साथ 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों को हिंसा छोड़ने के लिए आकर्षित कर रही है। एसपी जितेंद्र यादव ने कहा कि सरेंडर करने वालों नक्सलियों के परिवार भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जिएं और समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें। दो साल में 2200 से अधिक नक्सलियों ने किया सरेंडर एसपी ने बताया कि सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर, पिछले दो सालों में दंतेवाड़ा जिले में 824 माओवादियों ने हिंसा छोड़ दी है और मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। पुलिस ने बताया कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में शीर्ष माओवादियों सहित 2200 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है। केंद्र सरकार ने मार्च, 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया है। सरेंडर करने वाले नक्सली पंडरू पूनेम उर्फ संजू (45), बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के मेटापाल एर्रापारा का रहने वाला. इनाम- 8 लाख रुपये. रूकनी हेमला (25), बासागुड़ा थाना क्षेत्र के कोरसागुड़ा मेटापारा गांव निवासी. इनाम- 8 लाख रुपये. देवा उईका (22), बासागुड़ा के सुकनपल्ली कुंजामपारा गांव निवासी. इनाम- 8 लाख रुपये. रामलाल पोयाम उर्फ रामलू (27), जांगला थाना क्षेत्र के कोतरापाल काकड़पारा निवासी. इनाम- 8 लाख रुपये. मोटू पुनेम उर्फ रवि (21), हिरोली सरपंचपारा निवासी. इनाम- 8 लाख रुपये. मीना माड़वी उर्फ जमली (26), एड़समेटा कड़ियापारा निवासी. इनामी- 5 लाख रुपये. सुदरू पुनेम (27), एड़समेटा निवासी. इनाम- 5 लाख रुपये लिंगे कुंजाम उर्फ सुमित्रा (25), दुरनदरभा कुरसमपारा निवासी, सुकमा. इनाम- 5 लाख रुपये. पाले उईका (25), मल्लेपल्ली स्कूलपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. सुखराम उरसा उर्फ गंगा (21), तुर्रेनार सरपंचपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. दिनेश करटाम उर्फ बामड़ा (30), दुरधा डोडरेपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. शंकर पोडियाम (25), परकेली स्कूलपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. सुखराम पोडियम (25), हकवा बोटेमपारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये मुन्ना पोयाम (35), जप्पेली स्कूलपारा निवासी बीजापुर. इनामी- 2 लाख रुपये. सुखमती बोड्डू (39), कमकानार तेलगापारा निवासी बीजापुर. इनाम- 2 लाख रुपये. लक्ष्मण गोंदे उर्फ डेंगा (25), पदमुर नदीपारा निवासी, बीजापुर. इनाम 2 लाख रुपये. लक्ष्मण हेमला (31), घुमरा थना नैमेड़ जिला बीजापुर इनाम- 2 लाख रुपये अर्जुन बोड्डू (29), कमकानार तेलगापारा थाना गंगालूर जिला बीजापुर इनाम- 2 लाख रुपये. पण्डरू मड़कम उर्फ सलीम (30), कोतरापाल लक्खापारा थाना जांगला जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. राजू कुरसम उर्फ दुरूम (22) ईसुलनार स्कूलपारा थाना गंगालूर जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. सोमारू मड़कम (25) कोतरापाल काकडीपारा थाना जांगला जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. संतो पोड़ियाम ऊर्फ संतोषी (20) पोंदुम कर्रेपारा थाना भैरमगढ़ जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. हिड़मा माड़वी ऊर्फ गुडडी (20) कोतरापाल लक्खापारा थाना जांगला जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. सुखमती उरसा (26) पोमरा पटेलपारा थाना मिरतुर जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. चमरू ओयाम (46) पदमुर सरपंचपारा थाना गंगालूर जिला बीजापुर इनाम- 1 लाख रुपये. पण्डरू बड़दी (47), बीजापुर पायकू ओयाम (45), बीजापुर सुखराम तेलम (33), बीजापुर जग्गू पोडियम (19), बीजापुर सन्नू कुरसम (18), बीजापुर राजू हेमला (40), बीजापुर फगनू मड़कम (21), बीजापुर सुरेश कुरसम (20), बीजापुर मोती उरसा (30), बीजापुर एसपी ने की नक्सलियों से ये अपील बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने माओवादियों से अपील करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति माओवादियों को आकर्षित कर रही है. पुनर्वास करने वालों के परिजन भी चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जियें और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें. उन्होंने आगे कहा कि माओवादी भ्रामक और हिंसक विचारधाराओं को त्यागकर निर्भय होकर समाज की मुख्यधारा में लौटें. सरकार की ‘पूना मारगेम' नीति उनके भविष्य को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वावलंबी बनाने के लिए हर संभव सुविधा प्रदान कर रही है. सीएम ने भी नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की     नक्सलियों के समर्पण पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी एक्स पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, "पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन, बस्तर में शांति की ओर निर्णायक कदम. बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में आज एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ी है. बीजापुर जिले में ₹84 लाख के इनामी 34 माओवादी कैडरों ने हिंसा और लाल आतंक का रास्ता छोड़कर भारतीय संविधान में आस्था जताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है.     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के अनुरूप छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर ठोस और मानवीय प्रयास कर रही है. ‘पूना मारगेम' नीति ने यह सिद्ध किया है कि संवाद, संवेदनशीलता और विकास हिंसा से कहीं अधिक प्रभावी समाधान हैं. यह आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने का नहीं, बल्कि भय से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का निर्णय है.     … Read more

छत्तीसगढ़ सरकार की बड़ी सर्जरी: 11 IAS ट्रांसफर, सरगुजा और कोरबा को मिले नए कलेक्टर

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। 11 IAS अफसरों का तबादला हुआ है। भोसकर विलास को अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी बनाया गया है। इसके अलावा 6 जिलों के कलेक्टर भी बदले गए हैं। इनमें सरगुजा, कोरबा, दंतेवाड़ा, सुकमा, बेमेतरा और नारायणपुर शामिल हैं। कलेक्टरों के तबादले का आदेश मंगलवार को गृह विभाग द्वारा जारी किया गया है। कोरबा जिले के कलेक्टर रहे अजीत वसंत को सरगुजा का नया कलेक्टर बनाया गया है। कुणाल दुदावत को दंतेवाड़ा से हटाकर कोरबा का कलेक्टर नियुक्त किया गया है। देवेश कुमार ध्रुव को सुकमा से ट्रांसफर कर दंतेवाड़ा जिले का कलेक्टर बनाया गया है। बेमेतरा और नारायणपुर जिले में भी बदलाव सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रतिष्ठा ममगाई को नारायणपुर से ट्रांसफर कर बेमेतरा का कलेक्टर बनाया है। वहीं नम्रता जैन को रायपुर से हटाकर नारायणपुर जिले की नई कलेक्टर नियुक्त किया गया है। अमित कुमार को नगर निगम बिलासपुर के आयुक्त पद से हटाकर सुकमा जिले का कलेक्टर बनाया गया है। अमित कुमार की जगह पर प्रकाश कुमार सर्वे को नगर निगम बिलासपुर का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम में फेरबदल बेमेतरा के कलेक्टर रहे रणबीर शर्मा को नई जिम्मेदारी देते हुए उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) का प्रबंध संचालक बनाया गया है। उनके पदभार संभालने के बाद संजीव कुमार झा को एनएचएम के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। जिला पंचायत और मंत्रालय में भी तबादले प्रशासनिक आदेश के तहत गजेन्द्र सिंह ठाकुर को जिला पंचायत धमतरी का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। वहीं रोमा श्रीवास्तव को धमतरी जिला पंचायत से हटाकर मंत्रालय में उप सचिव पद पर पदस्थ किया गया है। नगर निगम में फेरबदल बेमेतरा के कलेक्टर रहे रणबीर शर्मा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का प्रबंध संचालक बनाया गया है। संजीव कुमार झा को एनएचएम के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। गजेन्द्र सिंह ठाकुर को जिला पंचायत धमतरी का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। वहीं, रोमा श्रीवास्तव को धमतरी जिला पंचायत से हटाकर मंत्रालय में उप सचिव पद पर पदस्थ किया गया है। चुनाव आयोग भेजे गए सरगुजा कलेक्टर सरगुजा जिले के कलेक्टर भोसकर विलास को अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति अस्थाई रूप से की गई है। अधिकारियों के तबादले का ऑर्डर सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार के नाम से जारी किया गया है। कलेक्टरों का तबादला विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बीच किया गया है।  

पं. प्रदीप मिश्रा दुर्ग में सुनाएंगे शिव महापुराण कथा, श्रद्धालुओं के लिए जारी हुआ पूरा कार्यक्रम

दुर्ग  ग्राम नगपुरा में प्रस्तावित कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के शिव महापुराण आयोजन को दृष्टिगत रखते हुए यातायात पुलिस ने आवश्यक रूट डायवर्सन प्लान एवं – पृथक पार्किंग व्यवस्था निर्धारित की है, जिससे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं एवं आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की यातायात असुविधा न हो. ये शिव महापुराण 17 दिसंबर से आयोजित होने वाली है. यातायात पुलिस ने बताया कि गनियारी बोरई मार्ग श्रीराम पान पैलेस के पास दुर्ग, पुलगांव की ओर से आने वाली भारी वाहनों को ग्राम बोरई, घुमका, ठेलका डीह, राजनांदगांव की ओर से भेजा जाएगा. हरिओम किराना स्टोर के पास ग्राम बोरई तिराहा की ओर से भारी वाहनों को डायवर्सन करेंगे. सृष्टि इंजीनियर के पास चौराहा पर भारी वाहनों को डायवर्सन किया जाएगा. शनि मंदिर अंजोरा मोड नगपुरा, जल बांधा, खैरागढ़ मार्ग की ओर से भारी वाहनों का आवागमन रखा जाएगा. चिखली चौक, धमधा रोड से कार्यक्रम की ओर किसी भी प्रकार की भारी वाहन को प्रतिबंधित रखा जाएगा. रावण भाठा चौक नगपुरा की ओर से भारी वाहनों को दुर्ग की ओर डायवर्सन करेंगे दुर्ग, कोटनी, भिलाई, रायपुर की ओर से आने वाले श्रद्धालु गण बाजार चौक से बिजली सब स्टेशन के आगे पार्किंग में अपनी वाहनों को खड़ा करेंगे. बाईपास महमरा, गनियारी, अंजोरा की ओर से आने वाले श्रद्धालुगण नगपुरा पुलिस चौकी के बगल मैदान में वाहन पार्क करेंगे. खैरागढ़, जाल बांधा, धमधा की ओर से आने वाले श्रद्धालु गण नगपुरा चौकी के पहले दाएं बाएं और पार्किंग में वाहन पार्क करेंगे.

छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रदेश बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प – मुख्यमंत्री साय

‘पूना मारगेम’ से शांति की ओर मजबूती से बढ़ते कदम: बीजापुर में 34 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण रायपुर  बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बीजापुर जिले में ₹84 लाख के इनामी 34 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागते हुए भारतीय संविधान में आस्था जताई है और समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की दृढ़ इच्छाशक्ति के अनुरूप छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में चल रहे सतत और ठोस प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की ‘पूना मारगेम’ नीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि संवाद, संवेदनशीलता और विकास, हिंसा से कहीं अधिक प्रभावी समाधान हैं। यह आत्मसमर्पण केवल हथियार छोड़ने की घटना नहीं है, बल्कि भय और भ्रम से मुक्त होकर सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का निर्णय है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले सभी व्यक्तियों के पुनर्वास, सुरक्षा, आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्समावेशन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि वे समाज में आत्मनिर्भर बन सकें। मुख्यमंत्री ने आज भी भटके हुए युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे हिंसा का मार्ग त्यागें, लोकतंत्र और विकास के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें तथा प्रदेश और देश के निर्माण में सहभागी बनें। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को शांति, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रदेश बनाना राज्य सरकार का अटल संकल्प है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास जारी रहेंगे।

उज्ज्वला योजना ने बदली द्रोपदी यादव की रसोई और जिंदगी

स्वच्छ ईंधन से मिली राहत, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत रायपुर बेमेतरा जिला के ग्राम देवरबीजा निवासी द्रोपदी यादव के जीवन में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने एक सकारात्मक बदलाव ला दिया है। भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत उन्हें निःशुल्क एलपीजी गैस कनेक्शन प्राप्त हुआ, जिससे वर्षों से धुएँ से भरे परंपरागत चूल्हे पर खाना पकाने की मजबूरी समाप्त हो गई। गैस कनेक्शन मिलने के बाद द्रोपदी यादव और उनके परिवार को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक ईंधन उपलब्ध हुआ है। इससे न केवल रसोई का वातावरण स्वच्छ हुआ, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, समय और जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। अब उन्हें लकड़ी, कोयला या उपलों की व्यवस्था के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ता, जिससे उनका दैनिक जीवन पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और सुरक्षित हो गया है। गैस कनेक्शन मिलने पर द्रोपदी यादव ने भावुक होते हुए कहा कि उज्ज्वला योजना ने मेरी रसोई के साथ-साथ मेरी जिंदगी भी बदल दी है। अब धुएँ से आँखों में जलन और खांसी जैसी समस्याएँ नहीं होतीं। समय की बचत हो रही है, जिसे मैं अपने परिवार और बच्चों के साथ बिता पा रही हूँ। उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए राज्य शासन एवं केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उज्ज्वला योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराकर उन्हें धुएँ से होने वाली बीमारियों से बचाना और जीवन को सहज बनाना है। इस योजना के तहत गैस कनेक्शन मिलने से द्रोपदी यादव जैसी अनेक महिलाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है। ग्राम देवरबीजा में द्रोपदी यादव को गैस कनेक्शन मिलने के बाद अन्य ग्रामीण महिलाओं में भी योजना के प्रति जागरूकता और उत्साह देखा जा रहा है। महिलाएँ आगे बढ़कर आवेदन कर रही हैं और योजना का लाभ ले रही हैं। द्रोपदी यादव की यह कहानी उज्ज्वला योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।

कानन पेंडारी जू से आई दुखद खबर, बाघिन रागिनी का निधन

बिलासपुर बिलासपुर के कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क की 22 साल की बाधिन रागिनी ने दम तोड़ दिया है. रागिनी वर्ष 2018 में रायपुर के नंदन वन जंगल सफारी से एक्सचेंज के तहत कानन पेंडारी लाई गई थी. रागिनी को असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से रेस्क्यू किया गया था. वह उम्रदराज हो चुकी थी और पिछले सात वर्षों से पार्क के अस्पताल परिसर के केज में रखी गई थी. जू प्रशासन के अनुसार, जब रागिनी को 11 अगस्त 2018 को नंदन वन जंगल सफारी, रायपुर से कानन पेंडारी लाया गया था, तब जांच में सामने आया कि उसके के-नाइन दांत नहीं थे. इसी कारण वह कच्चा मटन नहीं खा पाती थी, और उसे रोजाना 5 से 6 किलो बारीक कीमा बनाकर दिया जाता था. पशु चिकित्सकों की सतत निगरानी और विशेष देखभाल के चलते रागिनी सात साल तक जीवित रही. वह ऑस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी से भी पीड़ित थी, जिसमें हड्डियों की संरचना प्रभावित हो जाती है. मृत्यु के बाद जिला स्तर की पशु चिकित्सक समिति ने पोस्टमार्टम किया. इस दौरान जू प्रशासन और नेचर क्लब बिलासपुर के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे. गौरतलब है कि काजीरंगा क्षेत्र में रागिनी और उसके तीन साथी बाघों ने लंबे समय तक आतंक फैला रखा था. रेस्क्यू के बाद तीन बाघों को गुवाहाटी जू भेजा गया, जबकि रागिनी को छत्तीसगढ़ लाया गया था. उसके साथ लाए गए बाघ शिवा की वर्तमान उम्र करीब 15 वर्ष बताई जा रही है. इस तरह कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क ने एक उम्रदराज और दुर्लभ बाधिन को खो दिया है. बाघ आकाश और शेर भीम ने तोड़ा था दम इससे पहले कानन पेंडारी जू के एक बाघ और शेर की मौत हुई थी. 5 मार्च, 2025 को शेर भीम की मौत हुई थी. वहीं 21 अप्रैल, 2025 में बाघ आकाश की तबियत बिगड़ने से मृत्यु हो गई थी.

रूसे जलाशय में लौटी दुर्लभ Steppe Gull, 5 वर्षों बाद दर्ज हुई खास मौजूदगी

खैरागढ़ मैकाल पर्वत श्रृंखला से घिरे खैरागढ़ के जंगलों ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण दिया है। करीब पांच वर्षों के अंतराल के बाद खैरागढ़ स्थित रूसे जलाशय में दुर्लभ प्रवासी पक्षी स्टेपे गल (Steppe Gull) की मौजूदगी दर्ज की गई है। पक्षी विज्ञानी प्रतीक ठाकुर ने इसे अपने कैमरे में रिकॉर्ड किया है। पक्षी विज्ञानी और विशेषज्ञों द्वारा इसकी पहचान की पुष्टि के बाद यह घटना छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य भारत के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है। स्टेपे गल मूल रूप से पूर्वी यूरोप, दक्षिणी रूस और मध्य एशिया की स्टेपी क्षेत्रों में प्रजनन करता है। सर्दियों के मौसम में यह हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया तक पहुंचता है। भारत में इसकी उपस्थिति अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है और वह भी अधिकतर समुद्री तटों तक सीमित रहती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ जैसे आंतरिक वन क्षेत्र के रूसे जलाशय में इसका दिखना वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रवासी गल का आंतरिक भू-भाग के जलाशय में ठहरना इस बात का संकेत होता है कि वहां जल गुणवत्ता, भोजन उपलब्धता और प्राकृतिक शांति का संतुलन बना हुआ है। यही कारण है कि स्टेपे गल जैसे संवेदनशील प्रवासी पक्षी इस क्षेत्र को अस्थायी आश्रय के रूप में चुन रहे हैं। रूसे जलाशय पहले से ही अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता रहा है। यह छत्तीसगढ़ का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां हर वर्ष कॉमन क्रेन जैसे दुर्लभ पक्षियों की नियमित उपस्थिति दर्ज होती है। इसके अलावा जलपक्षियों और प्रवासी पक्षियों की कई प्रजातियां यहां देखी जाती रही हैं, जो खैरागढ़ को पक्षी विज्ञान के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाती हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि स्टेपे गल की मौजूदगी इस बात की पुष्टि करती है कि रूसे जलाशय अब केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि प्रवासी और संभावित रूप से संकटग्रस्त पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में विकसित हो रहा है। यदि इस क्षेत्र में अवैध शिकार, अतिक्रमण और अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा गया, तो खैरागढ़ भविष्य में मध्य भारत के प्रमुख पक्षी क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। विशेषज्ञ यह भी सुझाव दे रहे हैं कि संरक्षण को प्राथमिकता में रखते हुए यहां बर्ड टूरिज्म की संभावनाओं को विकसित किया जाए। इससे न सिर्फ जैव विविधता के संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यावरणीय जागरूकता को भी बढ़ावा मिलेगा। रूसे जलाशय में स्टेपे गल की यह दुर्लभ उपस्थिति खैरागढ़ के लिए एक मजबूत संदेश है, यदि प्रकृति को संरक्षण और सम्मान दिया जाए, तो वह स्वयं अपनी पहचान और समृद्धि लौटाकर देती है।

वाहन छोड़ने के नाम पर प्रधान आरक्षक ने मांगे 80 हजार, SP की सख्त कार्रवाई

जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस महकमे की छवि को धूमिल करने वाला एक मामला सामने आया है, जहां गाड़ी छुड़वाने के नाम पर अवैध उगाही के आरोप में एक प्रधान आरक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक ने की है। मिली जानकारी के अनुसार, प्रार्थी मड़वा निवासी टी. आर. साहू ने अपनी गाड़ी किसी अन्य व्यक्ति के पास गिरवी रखी थी। उसी गाड़ी को दिलाने के नाम पर प्रधान आरक्षक विनोद दिवाकर ने 80 हजार रुपये की मांग की थी। जिसके बाद प्रार्थी ने पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडे से इसकी शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने तत्काल प्रधान आरक्षक को निलंबित कर दिया और जांच की पूरी जिम्मेदारी डीएसपी योगिता खापर्डे को सौंप दी है। प्रधान आरक्षक (प्र.आर. 138) विनोद दिवाकर को निलंबन के बाद रक्षित केंद्र जांजगीर-चांपा में संबद्ध किया गया है। नियमों के अनुसार निलंबन अवधि में उन्हें निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।