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आईआईएम रायपुर में पंजीयन विभाग की दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न, सुधारों पर जोर

आईआईएम रायपुर में पंजीयन विभाग की दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न, प्रशासनिक सुधारों को मिलेगी राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पहचान पंजीयन विभाग के नवाचारों, चुनौतियों और समाधान पर तैयार होंगी केस स्टडी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशन की पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में विभागीय सुधारों को अकादमिक जगत तक पहुंचाने की अभिनव पहल आईआईएम रायपुर के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को दिया केस स्टडी लेखन, शोध और प्रकाशन का प्रशिक्षण रायपुर,   छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में किए जा रहे नवाचारों को अब राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक पहचान दिलाने की पहल की जा रही है। इसी उद्देश्य से नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आयोजित दो दिवसीय 'वर्कशॉप ऑन केस राइटिंग एंड कोलैबोरेटिव पब्लिकेशन' 15 अक्टूबर को संपन्न हुई। 14 एवं 15 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यशाला में विभागीय सुधारों, महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों, उनके क्रियान्वयन में आई चुनौतियों तथा अधिकारियों द्वारा विकसित व्यावहारिक समाधानों को केस स्टडी के रूप में तैयार कर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित कराने की प्रक्रिया पर प्रशिक्षण दिया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ पंजीयन विभाग द्वारा विगत तीन वर्षों में अनेक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार एवं जनहितकारी पहल की गई हैं। महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक पुष्पेंद्र मीणा के नेतृत्व में विभाग द्वारा पंजीयन सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन सुधारों के क्रियान्वयन से प्राप्त अनुभवों को अब व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकृत कर शोध, अध्ययन और प्रशासनिक प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने की पहल की गई है। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक नवाचारों से सीख सकेंगे देश-दुनिया के नीति-निर्माता कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य पंजीयन विभाग में हुए सुधारों को केवल प्रशासनिक उपलब्धियों तक सीमित न रखकर उन्हें अध्ययन और शोध के उपयोगी उदाहरणों के रूप में विकसित करना है। विभागीय सुधारों को लागू करते समय अधिकारियों के सामने अनेक व्यावहारिक चुनौतियां आईं, जिनका समाधान स्थानीय परिस्थितियों, प्रशासनिक अनुभवों और नवाचारों के माध्यम से किया गया। इन अनुभवों को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत करने से देश-दुनिया के शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, प्रशासकों और नीति-निर्माताओं को छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से सीखने का अवसर मिलेगा। यह पहल प्रशासनिक सुधारों के अनुभवों को संस्थागत ज्ञान में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सफल कार्यप्रणालियों, निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और समस्याओं के व्यावहारिक समाधान को अन्य विभागों एवं संस्थानों के साथ साझा करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। दो दिनों तक केस स्टडी लेखन, शोध और प्रकाशन की बारीकियों पर प्रशिक्षण कार्यशाला के प्रथम दिन विशेषज्ञों ने केस स्टडी लेखन की आवश्यकता, उसकी संरचना, उपयुक्त विषयों के चयन, समस्याओं की पहचान तथा प्रशासनिक अनुभवों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि विभागीय कामकाज के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय, उनके पीछे की परिस्थितियां, क्रियान्वयन में आई कठिनाइयां और उनके समाधान किस प्रकार एक उपयोगी एवं प्रभावशाली केस स्टडी का आधार बन सकते हैं। दूसरे दिन केस स्टडी तैयार करने की व्यावहारिक प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। इसमें आवश्यक सूचनाओं का संकलन, तथ्यों का सत्यापन, संबंधित व्यक्तियों के साक्षात्कार, केस की रूपरेखा तैयार करने और विश्लेषणात्मक लेखन की विधियों पर प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही टीचिंग नोट तैयार करने, उपयुक्त अकादमिक जर्नल एवं प्रकाशन मंच के चयन, समीक्षा तथा प्रकाशन की प्रक्रिया के संबंध में भी विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन प्रदान किया। आईआईएम रायपुर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव कार्यशाला में पंजीयन विभाग के डीआईजी मदन लाल कोर्पे एवं डीआईजी श्रीमती उषा साहू सहित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। आईआईएम रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर, कार्यक्रम निदेशक प्रो. प्रणित कुमार रॉय, प्रो. सत्यसिबा दास, प्रो. मनोजीत चट्टोपाध्याय, प्रो. अर्चना पाराशर तथा प्रो. आर.के. जना सहित अन्य विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। विशेषज्ञों ने प्रशासनिक अनुभवों को शोधपरक एवं तथ्यात्मक तरीके से प्रस्तुत करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अच्छी केस स्टडी न केवल किसी समस्या और उसके समाधान को सामने लाती है, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया, उपलब्ध विकल्पों और उनसे प्राप्त सीख को भी स्पष्ट करती है। प्रशासनिक सुधारों के दस्तावेजीकरण से सुशासन को मिलेगी मजबूती पंजीयन विभाग की यह पहल छत्तीसगढ़ में किए जा रहे प्रशासनिक नवाचारों को व्यवस्थित रूप से संकलित करने और उन्हें व्यापक अध्ययन का विषय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभागीय अनुभवों पर आधारित केस स्टडी तैयार होने से भविष्य में अधिकारियों के प्रशिक्षण, नीति निर्माण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। कार्यशाला के समापन अवसर पर पंजीयन विभाग के डीआईजी मदन लाल कोर्पे, आईआईएम रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर तथा कार्यक्रम निदेशक प्रो. प्रणित कुमार रॉय ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। यह आयोजन पंजीयन विभाग और प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान के बीच ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।

छत्तीसगढ़ में 900 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन, दो महीने के इलाज से स्वस्थ हुआ शिशु

छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं ने रचा जीवन रक्षा का नया अध्याय, महज 900 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दूरस्थ वनांचलों तक पहुंच रही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, जिला अस्पताल में दो माह के उपचार से स्वस्थ हुआ गंभीर नवजात गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों ने पेश की संवेदनशीलता और समर्पण की मिसाल, 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम हुआ शिशु का वजन रायपुर छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों के बीच गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय से एक सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे महज 900 ग्राम वजन के एक नवजात शिशु को चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने लगभग दो माह तक लगातार उपचार एवं विशेष देखभाल प्रदान कर नया जीवन दिया है। अत्यंत कम वजन, समय से पूर्व जन्म, सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया जैसी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे इस नवजात की सफल चिकित्सा ने जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की उपयोगिता और चिकित्सकीय टीम के समर्पण को रेखांकित किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने तथा दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों के नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण उपचार पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में जिला चिकित्सालयों में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात का सफल उपचार इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है। महज 900 ग्राम वजन के साथ जिंदगी की जंग लड़ रहा था नवजात गौरेला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम चुकतीपानी निवासी श्रीमती गोमती के नवजात शिशु का जन्म समय से पूर्व हुआ था। जन्म के बाद शिशु की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उसका वजन मात्र 900 ग्राम था। इसके साथ ही उसे श्वसन संबंधी परेशानी और गंभीर एनीमिया की समस्या भी थी। इतनी कम उम्र और अत्यंत कम वजन के कारण शिशु को विशेष चिकित्सकीय निगरानी एवं उपचार की आवश्यकता थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिशु को जिला चिकित्सालय की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल उपचार शुरू किया। नवजात के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की गई और उसकी चिकित्सकीय आवश्यकताओं के अनुरूप उपचार एवं पोषण संबंधी देखभाल सुनिश्चित की गई। दो सप्ताह ऑक्सीजन सपोर्ट, दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया उपचार के दौरान नवजात को सांस लेने में हो रही परेशानी के कारण लगभग दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट प्रदान किया गया। गंभीर एनीमिया की स्थिति में दो यूनिट रक्त ट्रांसफ्यूजन भी किया गया। इसके अतिरिक्त शिशु के शारीरिक तापमान को संतुलित रखने, पोषण सुनिश्चित करने और वजन बढ़ाने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी), नियमित फीडिंग तथा अन्य आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी एवं लगभग दो माह के उपचार से शिशु के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। उपचार के सकारात्मक परिणाम सामने आए और शिशु का वजन 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार होने पर 8 अक्टूबर 2026 को शिशु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। दूरस्थ वनांचल के परिवार के लिए जिला अस्पताल बना जीवनरक्षक सहारा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे वनांचल बहुल जिले में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशु का जिला स्तर पर सफल उपचार होना विशेष महत्व रखता है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों के लिए गंभीर स्वास्थ्य परिस्थितियों में समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है। जिला चिकित्सालय में उपलब्ध विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों की निरंतर निगरानी, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की सेवाओं और आवश्यक उपचार सुविधाओं के माध्यम से नवजात के स्वास्थ्य में सुधार संभव हो सका। यह उपलब्धि दर्शाती है कि जिला स्तर पर नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल सुविधाएं गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे परिवारों के लिए कितनी उपयोगी साबित हो सकती हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण, आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और शासकीय अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा जरूरतमंद नागरिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए जिला चिकित्सालयों में संचालित एसएनसीयू जैसी इकाइयां समय से पूर्व जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित बच्चों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में नवजात शिशु का सफल उपचार शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सेवाओं का एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह घटना स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के महत्व को भी रेखांकित करती है। इसी क्रम में जिला चिकित्सालय में गंभीर मरीजों एवं नवजात शिशुओं के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता, मरीजों की सतत निगरानी तथा उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण से मिली सफलता नवजात शिशु के सफल उपचार में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन तथा सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र सिंह पैकरा के निर्देशन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत भूषण त्रिपाठी, डॉ. अनिश ताम्रकार, डॉ. श्याम सहित एसएनसीयू के समस्त नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग दो माह तक शिशु के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी, आवश्यक उपचार, पोषण प्रबंधन और विशेष देखभाल सुनिश्चित की गई। चिकित्सकीय टीम के सामूहिक प्रयासों और समर्पित सेवाओं से गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात के स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार संभव हुआ। नवजात की मुस्कान बनी शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं की सार्थकता का प्रतीक मात्र 900 ग्राम वजन के साथ गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे नवजात का स्वस्थ होकर घर लौटना उसके परिवार के लिए बड़ी राहत है। यह सफलता न केवल चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण को दर्शाती है, बल्कि शासकीय अस्पतालों में उपलब्ध नवजात देखभाल सुविधाओं के महत्व … Read more

राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में छाईं बिलासपुर की बेटियां, रेणुका और त्रिशा ने लहराया परचम

बिलासपुर  नई दिल्ली भारत मंडपम के प्रगति मैदान में आयोजित इंसपायर-मानक’ राष्ट्रीय स्तरीय प्रदर्शनी (एनएलइपीसी) में बिलासपुर की दो प्रतिभावान बेटियों ने अपनी वैज्ञानिक सोच और हुनर से पूरे देश में परचम लहरा दिया है। हाल क्रमांक पांच के प्रथम तल पर सजी भव्य प्रदर्शनी में बिलासपुर की इन होनहार बाल विज्ञानियों ने अपने नवाचारों की ऐसी अनूठी छाप छोड़ी कि हर कोई देखता रह गया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवरीखुर्द बिल्हा की छात्रा रेणुका धनुहार ने अपनी मार्गदर्शक शिक्षिका एम गीता गायत्री के सहयोग से स्पिट डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम (थूक की पहचान एवं चेतावनी प्रणाली) का माडल तैयार किया। सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी फैलाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को मजबूती देने वाले अनूठे प्रोजेक्ट को रेणुका ने अत्यंत आत्मविश्वास और सहजता के साथ निर्णायक मंडल के सामने प्रस्तुत किया। उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और बेबाक जवाबों ने सबको प्रभावित किया। इसी तरह, बिलासपुर की दूसरी होनहार छात्रा त्रिशा कमलेश ने अपनी मार्गदर्शक शिक्षिका मधु जायसवाल के मार्गदर्शन में वेदर गार्ड स्मार्ट बैग’ (मौसम-सुरक्षा स्मार्ट बैग) का माडल प्रदर्शित किया। त्रिशा ने बहुत ही सरल अंदाज में समझाया कि कैसे यह स्मार्ट बैग बदलते मौसम, तेज धूप और बारिश के दौरान जरूरी सामानों को पूरी तरह सुरक्षित रख सकता है। उसकी रचनात्मक सोच और सधे हुए प्रस्तुतीकरण की हर तरफ सराहना हुई। शानदार उपलब्धि पर दोनों छात्राओं को प्रशस्ति-पत्र और विज्ञान किट से सम्मानित किया गया। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह द्वारा सम्मान मिलने से बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में हर्ष का माहौल है। स्वच्छता को तकनीकी धार देती रेणुका की अनूठी पहल रेणुका द्वारा तैयार किया गया ‘स्पिट डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम’ सार्वजनिक स्वच्छता के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। सेंसर और अलार्म पर आधारित यह तकनीक लोगों को खुले में थूकने से रोकने और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने में बेहद मददगार है। बदलते मौसम की हर चुनौती से लड़ेगा त्रिशा का स्मार्ट बैग त्रिशा का ‘वेदर गार्ड स्मार्ट बैग’ आधुनिक तकनीक और रोजमर्रा की जरूरत का बेहतरीन मेल है। यह बैग हर मौसम में न सिर्फ सामान की हिफाजत करता है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए सफर को भी आसान बनाता है। राष्ट्रीय मंच पर बेटियों की सफलता से बढ़ा जिले का मान देशभर के चुनिंदा बाल विज्ञानियों के बीच बिलासपुर की दोनों बेटियों ने अपनी प्रतिभा का जो लोहा मनवाया है, वह मील का पत्थर है। उनकी यह सफलता जिले के अन्य सरकारी स्कूलों के बच्चों में भी विज्ञान के प्रति नया जोश और प्रेरणा जगाएगी।

महिला T20 सीरीज के तीनों मैच मुफ्त देख सकेंगे दर्शक, स्टेडियम के पास 8 पार्किंग जोन

 रायपुर टीम इंडिया में आज से नए युग की शुरुआत होने जा रही है। हरमनप्रीत कौर के कप्तानी छोड़ने के बाद स्मृति मंधाना आज गुरुवार को पहली बार फुल टाइम कप्तान के रूप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अगुआई करेंगी। रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में भारत और जिंबाब्वे के बीच टी-20 सीरीज का पहला मैच खेला जाएगा। रायपुर में इतिहास बनेगा इस मैच के साथ कई इतिहास बनेंगे। जिंबाब्वे की महिला टीम पहली बार भारत के खिलाफ बाइलेटरल सीरीज खेलेगी। वहीं रायपुर में पहली बार इंटरनेशनल महिला क्रिकेट मैच का आयोजन हो रहा है। इस सीरीज के तीनों मैचों में महिलाओं के लिए स्टेडियम में एंट्री फ्री रखी गई है। टॉस और पिच का रहेगा अहम रोल मैच में ओस बड़ी भूमिका निभा सकती है। ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले बॉलिंग करना चाहेगी, क्योंकि दूसरी पारी में ओस की वजह से गेंदबाजी करना मुश्किल हो सकता है। रायपुर की पिच बैटिंग के लिए अच्छी मानी जा रही है। इसी मैदान पर जनवरी में भारत ने न्यूजीलैंड के 208 रन के टारगेट को चेज किया था। इसलिए पहले मैच में बड़े स्कोर की उम्मीद है। भारत ने जून में ऑस्ट्रेलिया से हारने के बाद लगातार 8 टी-20 इंटरनेशनल मैच जीते हैं। रायपुर में पहली बार विमेंस टी-20 इंटरनेशनल रायपुर में अब तक पुरुषों के इंटरनेशनल क्रिकेट मैच हो चुके हैं, लेकिन पहली बार महिला टी-20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले जाएंगे। भारत और जिम्बाब्वे की महिला टीमें 3 मैचों की सीरीज में आमने-सामने होंगी।पहला मैच आज 16 अक्टूबर, दूसरा 18 अक्टूबर और तीसरा मुकाबला 20 अक्टूबर को खेला जाएगा। तीनों मैच शाम 7 बजे से शुरू होंगे। पहली बार बाइलैटरल टी-20 सीरीज खेलेंगी दोनों टीमें भारत और जिम्बाब्वे की महिला टीमों के बीच यह पहली बाइलैटरल टी-20 सीरीज होगी। इसमें दोनों टीमें तीन मैच खेलेंगी। इस सीरीज में खिलाड़ियों को टी-20 फॉर्मेट में अपना प्रदर्शन दिखाने का मौका मिलेगा। रायपुर में होने वाले इन मुकाबलों को लेकर क्रिकेट फैंस में उत्साह है। फुलटाइम कप्तान के तौर पर स्मृति की पहली परीक्षा स्मृति मंधाना पहली बार फुलटाइम कप्तान के तौर पर टीम इंडिया की अगुआई करेंगी। वह लंबे समय तक टीम की उपकप्तान रही हैं। अब कप्तान के तौर पर उनके सामने टीम को सही दिशा देने और मैदान पर सही फैसले लेने की चुनौती होगी। रायपुर में पहला मैच उनकी कप्तानी के नए दौर की अहम शुरुआत होगा। पार्किंग के लिए 8 जोन, पुलिस और ट्रैफिक विभाग संभालेंगे व्यवस्था मैच देखने आने वाले दर्शकों के वाहनों की पार्किंग के लिए स्टेडियम के आसपास 8 जोन बनाए गए हैं। इन्हें पार्किंग A, B, C, D, E, F, G और H नाम दिया गया है। छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ (CSCS) पुलिस और ट्रैफिक विभाग के साथ मिलकर व्यवस्था संभालेगा। जिम्बाब्वे इस साल एक भी टी-20 नहीं जीता जिम्बाब्वे की विमेंस टीम ने इस साल 18 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं। सभी मुकाबलों में उसे हारा का सामना करना पड़ा। टीम की पिछली जीत सितंबर 2025 में नामीबिया के खिलाफ आई थी। दूसरी ओर भारत लगातार 8 टी-20 इंटरनेशनल मैच जीत चुका है। टीम ने हाल ही में एशिया कप ट्रॉफी और एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल किया था।

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल अस्पताल पहुंचे, विधायक रायमुनि भगत का जाना हाल

जशपुर विधायक  रायमुनि भगत का कुशलक्षेम जानने अस्पताल पहुंचे पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल विधायक  भगत से मुलाकात कर ली स्वास्थ्य की जानकारी, शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की रायपुर छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज रायपुर स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचकर जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनि भगत से मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान मंत्री अग्रवाल ने विधायक श्रीमती भगत के स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा उनके शीघ्र एवं पूर्ण स्वस्थ होने की कामना की। मंत्री अग्रवाल ने विधायक श्रीमती भगत से  संवाद करते हुए उनके स्वास्थ्य के प्रति अपनी चिंता और संवेदनशीलता व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि श्रीमती भगत जल्द से जल्द पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने परिवार, शुभचिंतकों और क्षेत्र की जनता के बीच लौटें तथा पूर्व की भांति जनसेवा एवं क्षेत्र के विकास से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं। पर्यटन मंत्री अग्रवाल ने कहा कि अग्रवाल ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के बीच आत्मीयता, सहयोग और संवेदनशीलता की भावना सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण विशेषता है। विधायक श्रीमती रायमुनि भगत जनसेवा के प्रति समर्पित जनप्रतिनिधि हैं। उन्होंने जशपुर क्षेत्र की जनता के प्रति उनके समर्पण और सक्रियता का उल्लेख करते हुए उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि माता रानी की असीम कृपा और आशीर्वाद से श्रीमती भगत को उत्तम स्वास्थ्य, नई ऊर्जा एवं दीर्घायु प्राप्त हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे शीघ्र स्वस्थ होकर पुनः जनसेवा के अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगी। उन्होंने विधायक श्रीमती भगत के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं सुखमय जीवन की कामना की।

भय-उपेक्षा नहीं, अब सुरक्षा और प्रोत्साहन है यूपी की पहचान: मुख्यमंत्री

'पदक लाओ, पद पाओ’ के तहत खिलाड़ियों की सीधी भर्ती: मुख्यमंत्री नारीशक्ति के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अजेय पराक्रम का प्रतीक हैं मां कात्यायनी: मुख्यमंत्री भय-उपेक्षा नहीं, अब सुरक्षा और प्रोत्साहन है यूपी की पहचान: मुख्यमंत्री 2017 से पहले बेटियों के सपनों पर पहरे, हौसलों पर बंदिशें, अवसर के अभाव में दम तोड़ देती थी प्रतिभा: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि की बधाई दी। उन्होंने कहा कि समस्त बाधाओं और आसुरी प्रवृत्तियों का संहार करने वाली मां कात्यायनी नारीशक्ति के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अजेय पराक्रम का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने आस्था, विकास व विरासत के जरिए राज्य में आए बदलाव से अवगत कराते हुए कहा कि प्रदेश में अब ‘पदक लाओ, पद पाओ’ के तहत खिलाड़ियों की सीधी भर्ती हो रही है।  2017 से पहले चारदीवारी में कैद थे बेटियों के सपने मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट कर पिछली सरकार के कार्यकाल पर निशाना साधा। कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में भय और अराजकता का ऐसा माहौल था, जहां बेटियों के सपनों पर पहरे थे, हौसलों पर बंदिशें थीं और प्रतिभा अवसर के अभाव में दम तोड़ने को मजबूर थी। खेल के मैदान माफिया के कब्जे में थे, संसाधन नदारद थे और बेटियों की उड़ान को पंख देने के बजाय, उनके सपनों को चारदीवारी में कैद कर दिया गया था। अब सुरक्षा, प्रोत्साहन से लिखी जा रही बदलाव की नई गाथा मुख्यमंत्री ने 2017 के बाद आए बदलाव को भी इंगित किया। कहा कि विगत साढ़े 9 वर्षों में प्रदेश में बदलाव की नई गाथा लिखी गई है। भय का स्थान सुरक्षा ने लिया है, उपेक्षा का स्थान प्रोत्साहन ने लिया है और संसाधनों के अभाव का स्थान खेल सुविधाओं के विस्तार ने लिया है। गांव के खेल मैदानों और ब्लॉक स्तरीय मिनी स्टेडियम से लेकर जिला स्तरीय स्टेडियम, मंडल स्तरीय स्पोर्ट्स कॉलेज तथा मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय तक, बेटियों को अपनी प्रतिभा निखारने का सशक्त आधार मिल रहा है। प्रतिभा को प्रोत्साहन, उपलब्धियों को सम्मान और भविष्य को सुरक्षा मुख्यमंत्री ने बताया कि ओलंपिक, कॉमनवेल्थ एवं एशियन गेम्स के पदक विजेताओं को लाखों-करोड़ों के पुरस्कार और ‘पदक लाओ, पद पाओ’ के तहत सीधी भर्ती जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। सरकार खिलाड़ियों की प्रतिभा को प्रोत्साहन, उपलब्धियों को सम्मान और भविष्य को सुरक्षा प्रदान कर रही है। इस परिवर्तन की गूंज अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर भी सुनाई दे रही है। एथलेटिक्स में पारुल चौधरी, प्रियंका गोस्वामी, प्राची चौधरी और अन्नू रानी, जूडो में अस्मिता डे, क्रिकेट में दीप्ति शर्मा और मेघना सिंह, हॉकी में वंदना कटारिया, कुश्ती में दिव्या काकरान ने कॉमनवेल्थ एवं एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

छत्तीसगढ़ में आस्था का महासंगम, 50 हजार लोगों के सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ ने बनाया रिकॉर्ड

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के जन्मदिन पर आस्था का ऐतिहासिक संगम, राज्यपाल और कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी में 50 हजार लोगों ने किया हनुमान चालीसा पाठ, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज… गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुई उपलब्धि, जुबिन नौटियाल के भव्य आयोजन में मनाया गया डॉ रमन सिंह का जन्मदिन राजनांदगांव छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं राजनांदगांव के लोकप्रिय विधायक तथा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी के जन्मदिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका जी तथा प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि, भाजपा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में राजनांदगांव के नागरिक इस विशेष अवसर के साक्षी बने।  इस अवसर पर लगभग 50 हजार लोगों ने एक साथ सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ कर श्रद्धा, भक्ति और सामूहिक आस्था का अद्भुत प्रदर्शन किया। इस ऐतिहासिक आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला। डॉ. रमन सिंह के जन्मदिवस पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने राजनांदगांव की धार्मिक आस्था, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक चेतना को एक नई पहचान दी। हजारों लोगों की एक साथ गूंजती हनुमान चालीसा ने पूरे स्टेडियम को भक्तिमय वातावरण से भर दिया। इस सामूहिक आयोजन की विशेषता रही कि इसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई और एक ऐतिहासिक उपलब्धि के सहभागी बने। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण बॉलीवुड के मशहूर गायक जुबिन नौटियाल की संगीतमय प्रस्तुति रही। अपनी सुरीली आवाज और लोकप्रिय गीतों से उन्होंने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उत्साह और उल्लास का रंग भर दिया। धार्मिक आस्था, संगीत और जनभागीदारी के इस अनूठे संगम ने डॉ. रमन सिंह जी के जन्मदिवस के आयोजन को यादगार बना दिया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी ने सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ की ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी सहभागी नागरिकों, आयोजकों, जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि राजनांदगांव की जनता की सामूहिक श्रद्धा, एकजुटता और सहभागिता का परिणाम है। सभी के सहयोग और उत्साह ने इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया है। डॉ. रमन सिंह जी ने कहा कि राजनांदगांव की जनता ने जिस प्रेम, स्नेह और आत्मीयता के साथ इस आयोजन में सहभागिता की, वह उनके लिए अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय अनुभव है। उन्होंने राज्यपाल श्री रमेन डेका जी, कार्यक्रम में उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं तथा राजनांदगांववासियों का हृदय से धन्यवाद किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

पेंशन पुनर्बहाली के लिए रमेश बैस से मिले पेंशनभोगी प्राध्यापक

पेंशन पुनर्बहाली के लिए रमेश बैस से मिले पेंशनभोगी प्राध्यापक रायपुर  छत्तीसगढ़ अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक पेंशनर्स संघ के प्रतिनिधि मंडल ने महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा वरिष्ठ नेता रमेश बैस से भेंट कर राज्य सरकार के अचानक पेंशन बंद करने के अमानवीय निर्णय से उपजी परिस्थितियों से उन्हें अवगत कराया। इस अवसर पर प्राध्यापक पेंशनर संघ तथा वर्तमान में कार्यरत प्राध्यापकों के प्रादेशिक संघ द्वारा उन्हें  ज्ञापन भी दिए। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और राज्य सरकार के इस निर्णय पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए अपने स्तर से पेंशन पुनर्बहाली हेतु मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से चर्चा करने का आश्वासन दिया। छत्तीसगढ़ अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक पेंशनर्स संघ के अध्यक्ष डॉ हरिनारायण दुबे, महासचिव डॉ डी एन शर्मा, डॉ  ए आर वर्मा, डॉ सरोज प्रकाश तथा प्रादेशिक अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ के महासचिव डॉ सुभाष चंद्राकर व कोषाध्यक्ष डॉ राजेंद्र शुक्ला प्रतिनिधि मंडल में शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 सितंबर 2026 को एक आदेश जारी कर प्रदेश के 13 शत–प्रतिशत अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों से सेवानिवृत हुए प्राध्यापकों व कर्मचारियों की 40 साल से निरंतर मिल रही पेंशन को अचानक बंद कर दिया। इसके फलस्वरुप पेंशनर्स के समक्ष रोटी, दवा और रोजाना के खर्चे के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस आदेश से सेवानिवृत प्राध्यापक व कर्मचारी ही प्रभावित नहीं होंगे बल्कि वर्तमान में कार्यरत प्राध्यापकों व कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति पर उन्हें पेंशन व ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिल पाएगा ।

उन्नत उपकरण सहायता योजना से टोकेश्वरी साहू को मिली राहत, बुनाई का काम हुआ आसान

सेवा की कहानी उन्नत उपकरण सहायता योजना से टोकेश्वरी साहू को बुनाई कार्य में मिली सहूलियत नए उन्नत करघे और सहायक उपकरण मिलने से आसान हुआ पारंपरिक बुनाई का काम, उत्पादन क्षमता बढ़ाने का मिला अवसर रायपुर,   हाथकरघा विभाग द्वारा संचालित उन्नत उपकरण सहायता योजना पारंपरिक बुनकरों के लिए आधुनिक सुविधाओं का माध्यम बन रही है। योजना के तहत बुनकरों को नए उन्नत करघे और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उनका कार्य आसान होने के साथ उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि हो रही है। योजना का लाभ राजनांदगांव जिले  के  मुख्यालय में गायत्री नगर वार्ड क्रमांक 13 निवासी एवं आशा नगर उप समिति की सदस्य श्रीमती टोकेश्वरी साहू को भी मिला है। श्रीमती टोकेश्वरी साहू लंबे समय से बुनाई कार्य से जुड़ी हुई हैं। पहले उन्हें लकड़ी की मशीन से काम करना पड़ता था। पारंपरिक मशीन से कार्य करने में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। काम में अधिक समय और मेहनत लगती थी तथा उत्पादन को बेहतर बनाना भी चुनौतीपूर्ण था। उन्नत उपकरण सहायता योजना के तहत उन्हें लोहे का नया उन्नत करघा उपलब्ध कराया गया। आधुनिक करघा मिलने से अब उनके बुनाई कार्य में काफी सहूलियत हो रही है। पहले की तुलना में काम करना आसान हुआ है और वे बेहतर गुणवत्ता के साथ अधिक उत्पादन करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इस उन्नत उपकरण सहायता योजना पारंपरिक बुनकरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, उनके कार्य को सुविधाजनक बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। श्रीमती साहू ने बताया कि उन्नत करघा मिलने से बुनाई कार्य में समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। अब वे अधिक सुविधा के साथ अपना काम कर पा रही हैं। आधुनिक उपकरण से उन्हें अपने कार्य को विस्तार देने और उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिला है। योजना से मिली सहायता उनके लिए आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है। योजना के माध्यम से बुनकरों को अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ बेहतर आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।श्रीमती टोकेश्वरी साहू ने उन्नत उपकरण सहायता योजना के तहत नया उन्नत करघा एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की इस सहायता से उनके बुनाई कार्य में नई सुविधा और आत्मविश्वास आया है।

बेटियों के लिए खास पहल, वीबी-जी रामजी से तैयार हुआ प्रदेश का पहला सौर ऊर्जा संचालित शौचालय

वीबी-जी रामजी से बना प्रदेश का पहला सोलर बालिका शौचालय, बेटियों को मिली आधुनिक सुविधाओं की सौगात ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के तहत ग्राम तर्रा में 7 लाख रुपए की लागत से निर्मित शौचालय में सौर ऊर्जा से प्रकाश व्यवस्था दिव्यांग बालिकाओं के लिए विशेष शौचालय और रैंप की सुविधा रायपुर,   विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण (वीबी-जी रामजी) के अंतर्गत संचालित ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के तहत रायपुर जिले के अभनपुर विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत तर्रा के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में प्रदेश का पहला सोलर बालिका शौचालय बनाया गया है। लगभग 7 लाख रुपए की लागत से निर्मित इस आधुनिक शौचालय में सौर ऊर्जा से प्रकाश व्यवस्था के साथ दिव्यांग बालिकाओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इससे विद्यालय की 70 छात्राओं और दो महिला शिक्षिकाओं को बड़ी राहत मिली है।      मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रदेश की बेटियों के सम्मान के लिए वीबी-जीरामजी के अंतर्गत राज्यव्यापी ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान प्रारम्भ किया है। इस अभियान के तहत 26 जनवरी 2027 के गणतंत्र दिवस तक पूरे राज्य के सभी ग्रामीण शासकीय विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालय का अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य बेटियों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना तथा विद्यालयों में उनकी नियमित उपस्थिति और शिक्षा को प्रोत्साहित करना है। सौर ऊर्जा से प्रकाश व्यवस्था, दिव्यांग बालिकाओं के लिए विशेष सुविधा      ग्राम तर्रा में शौचालय निर्माण के लिए वीबी-जी रामजी योजना से 5 लाख रुपए तथा कलेक्टर श्री गौरव सिंह द्वारा गौण खनिज विकास मद से 2 लाख रुपए प्रदान किए गए हैं। भवन की छत पर सोलर पैनल स्थापित किया गया है, जिससे प्रकाश की व्यवस्था होगी। पानी की उपलब्धता के लिए नल एवं सिंटेक्स टंकी लगाई गई है। इसके साथ बालिकाओं की सुविधा के लिए सेनेटरी पैड इंसिनिरेटर भी लगाया गया है। दिव्यांग बालिकाओं की सुविधा के लिए अलग शौचालय, रैंप और सहारे के लिए रेलिंग बनाई गई है। परिसर में पेवर ब्लॉक, पौधरोपण एवं साफ-सफाई की व्यवस्था भी की गई है।  जर्जर शौचालय से मिल रही थी परेशानी, अब छात्राओं में खुशी      ग्राम तर्रा के इस विद्यालय में पूर्व में निर्मित शौचालय पूरी तरह जर्जर हो चुका था। इसके कारण छात्राओं को कई बार शौचालय के उपयोग के लिए घर जाना पड़ता था, जबकि महिला शिक्षिकाओं को पंचायत भवन की सुविधा का सहारा लेना पड़ता था। इस समस्या से छात्राओं की पढ़ाई और स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहे थे। विद्यालय की आवश्यकता को देखते हुए नए शौचालय का निर्माण स्वीकृत किया गया, जिसे स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों, शिक्षकों और ग्रामीणों के सहयोग से पूर्ण किया गया।      नया शौचालय बनने से छात्राओं में खुशी है। उन्होंने बताया कि पहले शौचालय के अभाव में काफी परेशानी होती थी और कई बार विद्यालय आने का मन भी नहीं करता था। अब स्वच्छ एवं सुविधाजनक शौचालय उपलब्ध होने से वे बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगी। महिला शिक्षिकाओं ने भी इस सुविधा के लिए प्रसन्नता व्यक्त की है। अभनपुर जनपद में 94 बालिका शौचालयों के निर्माण की तैयारी      जनपद पंचायत अभनपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीं दयानंद देवांगन ने बताया कि ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के अंतर्गत जनपद क्षेत्र में 94 बालिका शौचालयों के निर्माण के लिए स्थान चिन्हित किए गए हैं। ग्राम तर्रा में निर्मित बालिका शौचालय की तरह अन्य चिन्हित स्थानों पर भी सुविधाजनक शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। इस शौंचालय को एयरपोर्ट के जैसे बनाया गया है। जिस प्रकार से एयरपोर्ट के शौंचालयों में सभी सुविधाएं दी जाती है, उसी तर्ज पर कलेक्टर श्री गौरव सिंह के मार्गदर्शन में सभी सुविधाओं के साथ बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखने हेतु सेनेटरी पैड इंसिनिरेटर भी लगाया जा रहा है।       ग्राम तर्रा की यह पहल ग्रामीण विद्यालयों में स्वच्छता, नवीकरणीय ऊर्जा और दिव्यांग अनुकूल अधोसंरचना के समन्वय का उदाहरण है। ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के माध्यम से बेटियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।