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किसानों को नहीं होगी डीएपी की कमी, छत्तीसगढ़ को माह जुलाई में 46,500 टन डीएपी सप्लाई की आपूर्ति प्राप्त

रायपुर मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर प्रदेश में पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के अपने संकल्प पर लगातार प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। खरीफ वर्ष 2026 के लिए 30 जून तक की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ को माह जुलाई में 46,500 टन डीएपी सप्लाई की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। इससे अब किसानों के लिए पर्याप्त डीएपी उपलब्ध हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि अब तक भंडारित कुल रासायनिक खाद पिछले साल इसी अवधि में भंडारित रासायनिक खाद की तुलना में 1.08 लाख मीट्रिक टन अधिक है।    वहीं प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के भण्डारण और वितरण की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार ने खेती के मौसम से पहले ही किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि किसान परिवारों की समृद्धि और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  बता दें कि केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए खरीफ वर्ष 2026 में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध 30 जून की स्थिति में 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण किया जा चुका है। इनमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी तथा एसएसपी जैसे सभी प्रमुख उर्वरक शामिल हैं। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि किसानों को बुआई के दौरान खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सरकार ने पहले से व्यापक तैयारी की है।  उल्लेखनीय है कि प्रदेश के किसानों को अभी तक 7 लाख 27 हजार 833 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है। यह वितरण किसानों की वास्तविक मांग के अनुरूप लगातार किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश में 5 लाख 88 हजार 673 मीट्रिक टन उर्वरकों का शेष भण्डार उपलब्ध है, जिससे आगामी दिनों में भी किसानों को निर्बाध रूप से खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी। यदि गत वर्ष की समान अवधि से तुलना करें तो इस वर्ष की उपलब्धियां और भी उत्साहजनक हैं। 30 जून 2025 तक प्रदेश में 12 लाख 25 हजार 929 मीट्रिक टन उर्वरकों का भण्डारण हुआ था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 13 लाख 16 हजार 506 मीट्रिक टन हो गया है। अर्थात लगभग 90 हजार 577 मीट्रिक टन अधिक खाद का भण्डारण सुनिश्चित किया गया है। इसी प्रकार, गत वर्ष 30 जून तक 7 लाख 66 हजार 161 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया था। इस वर्ष अब तक लगभग 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद किसानों तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में वर्तमान में उपलब्ध 5.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक का शेष भण्डार आगामी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और यह सरकार की दूरदर्शी योजना एवं मजबूत आपूर्ति प्रबंधन का परिचायक है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के किसी भी किसान को खाद के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। यही कारण है कि राज्य सरकार खाद की उपलब्धता, भण्डारण, परिवहन एवं वितरण की सतत निगरानी कर रही है, जिससे खरीफ सीजन में किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं।

पंडवानी की विश्वविख्यात साधिका का पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; हजारों लोगों ने दी अंतिम श्रद्धांजलि

रायपुर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने वाली विश्वविख्यात पंडवानी गायिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई को रविवार को उनके पैतृक गांव गनियारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। राज्य शासन के निर्णय के अनुरूप पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों तथा हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों से लोककला की इस महान विभूति को अंतिम प्रणाम किया। डॉ. तीजन बाई के निधन से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के कला एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने अपने अद्वितीय गायन, प्रभावशाली अभिनय और ओजपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी जैसी लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत शैली में प्रस्तुत करने की उनकी विलक्षण कला ने देश-विदेश के असंख्य दर्शकों को भारतीय लोकसंस्कृति से जोड़ने का कार्य किया। ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्व मंच तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, साधना और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। अनेक सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर ऐसी पहचान बनाई, जिसने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी। भारतीय लोककला में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें पद्म, पद्मभूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया। वे भारतीय लोक परंपरा की ऐसी प्रतिनिधि थीं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से देश की सांस्कृतिक अस्मिता को विश्वभर में गौरवान्वित किया। राज्य शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप उनके अंतिम संस्कार के अवसर पर राजकीय सम्मान की सभी औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। गनियारी गांव में आयोजित अंतिम संस्कार में उपस्थित जनसमूह ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को सदैव जीवित रखने का संकल्प व्यक्त किया। डॉ. तीजन बाई का निधन भारतीय लोककला के एक स्वर्णिम युग का अवसान है, किंतु उनकी स्वर-साधना, पंडवानी की समृद्ध परंपरा और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए उनका आजीवन समर्पण सदैव अमर रहेगा। उनकी अनुपम कला, ओजस्वी व्यक्तित्व और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

112 करोड़ से ज्यादा की विकास परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे लोकार्पण-भूमिपूजन

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय 6 जुलाई को रायपुर जिले के समोदा में 112 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। इनमें 21 करोड़ 67 लाख रुपए के 67 कार्यों का लोकार्पण और 90 करोड़ 34 लाख रुपए लागत के 29 निर्माण कार्यों के भूमिपूजन शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन व लोक निर्माण मंत्री  अरुण साव कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। वन एवं पर्यावरण तथा रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री  केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और सांसद  बृजमोहन अग्रवाल कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आरंग क्षेत्र के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में लोक निर्माण विभाग के 9 करोड़ 43 लाख रुपए के तीन कार्यों, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के 79 लाख रुपए के पांच कार्यों, नगर पंचायत समोदा के 6 करोड़ 67 लाख रुपए के 20 कार्यों तथा आरंग नगर पालिका में 4 करोड़ 78 लाख रुपए के 39 कार्यों का लोकार्पण करेंगे।   साय लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जाने वाले 61 करोड़ 11 लाख रुपए लागत के 8 कार्यों, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के दो करोड़ 54 लाख रुपए के 11 कार्यों एवं समोदा नगर पंचायत के 8 करोड़ 70 लाख रुपए के 9 कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। वे स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवा रायपुर के सेक्टर-17,  कोटरा भाठा में 18 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे 100 बिस्तर अस्पताल का भी भूमिपूजन करेंगे।

शिक्षा मंत्री ने दी पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि, उनकी अंतिम संस्कार में रहे शामिल

रायपुर स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव ने आज विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्मविभूषण से सम्मानित एवं छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अप्रतिम धरोहर डॉ. तीजन बाई के गृहग्राम गनियारी स्थित निवास पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत वे उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए तथा दाह संस्कार कार्यक्रम तक उपस्थित रहकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने घोषणा किया कि उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण "डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी" के नाम से किया जाएगा।        शिक्षा मंत्री  यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना, ओजस्वी वाणी और आजीवन समर्पण के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के एक स्वर्णिम अध्याय का अवसान है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिजनों एवं असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख की घड़ी में संबल देने की प्रार्थना की।       मंत्री  यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का संपूर्ण जीवन लोकपरंपराओं, संस्कृति और कला के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उनकी कला साधना, संघर्ष और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने डॉ. तीजन बाई के सम्मान में उनके गृहग्राम गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नामकरण "डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी" के नाम से किया जाएगा। राज्य सरकार का यह निर्णय महान लोककलाकार के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगा तथा इससे भावी पीढ़ियों को उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व, जीवन-संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान से निरंतर प्रेरणा प्राप्त होती रहेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर के वन धन विकास केंद्र पंचक्की की महिला स्व-सहायता समूह को किया सम्मानित

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जशपुर के वन धन विकास केंद्र पंचक्की की महिला स्व-सहायता समूह को किया सम्मानित मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए जशपुर जिले के वन धन विकास केंद्र, पंचक्की से जुड़े महिला स्व-सहायता समूह को ‘सहकार प्रेरणा सम्मान’ से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम में प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जशपुर के वन धन विकास केंद्र पंचक्की के अनंत स्व-सहायता समूह को उत्कृष्ट कार्यों के लिए सहकार प्रेरणा पुरस्कार एवं लाभांश राशि प्रदान कर सम्मानित किया। यह समूह वन विभाग के अंतर्गत संचालित वन धन विकास केंद्र से जुड़ा है। अनंत स्व-सहायता समूह की 10 महिलाएं सामूहिक रूप से च्यवनप्राश सहित विभिन्न औषधीय उत्पादों का निर्माण करती हैं। समूह द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की आपूर्ति आयुष विभाग सहित अन्य संस्थानों एवं उपभोक्ताओं को की जाती है। वर्ष 2024-25 के दौरान समूह ने लगभग 36 लाख रुपये के उत्पादों का विक्रय कर महिला स्वावलंबन और ग्रामीण उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय ने देश में श्सहकार से समृद्धिश् के लक्ष्य को नई गति दी है। राज्य सरकार सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कृषि के साथ-साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूती प्रदान कर रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि 29 जून से 6 जुलाई तक प्रदेश में सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इसके लिए अब तक 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है।

*पर्यटन सचिव डॉ. एस. भारती दासन और एमडी विवेक आचार्य ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत*

रायपुर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक पर्यटन सुमन बिल्ला के रायपुर आगमन पर छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने रायपुर विमानतल पर उनका आत्मीय स्वागत किया। बिल्ला भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर द्वारा आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में पर्यटन विषय के प्रमुख वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर सुमन बिल्ला, डॉ. एस. भारती दासन एवं विवेक आचार्य के बीच छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रभावी ढंग से स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि छत्तीसगढ़ में पारिस्थितिकी पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, पुरातात्विक पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन, जनजातीय पर्यटन तथा ग्रामीण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का योजनाबद्ध विकास कर राज्य में रोजगार सृजन, स्थानीय उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की जा सकती है। स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए पर्यटन विकास का ऐसा मॉडल विकसित करने पर भी सहमति बनी, जिससे आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके। बैठक में पर्यटन अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल प्रचार-प्रसार, गृह-आवास (होम-स्टे) व्यवस्था को बढ़ावा देने, स्थानीय हस्तशिल्प एवं पारंपरिक व्यंजनों को पर्यटन से जोड़ने तथा जनजातीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्रभावी प्रचार-प्रसार और राज्य की सशक्त पहचान स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। पर्यटन मंत्रालय और छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का अधिकतम लाभ राज्य को दिलाने, पर्यटन स्थलों के समग्र विकास तथा निवेश को प्रोत्साहित करने के उपायों पर भी सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ। उल्लेखनीय है कि दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में सुमन बिल्ला ने "सतत समृद्धि के आधार के रूप में पर्यटन : छत्तीसगढ़ में आजीविका सृजन, संस्कृति का संरक्षण और प्रकृति की सुरक्षा" विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। इसके पश्चात उन्होंने "आगे की राह – विचार मंथन" विषय पर आयोजित संवादात्मक सत्र का संचालन भी किया। इन सत्रों में पर्यटन को सुशासन, सतत विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय आजीविका से जोड़ने के व्यावहारिक मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई। श्री सुमन बिल्ला के सुझावों तथा केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ का पर्यटन क्षेत्र नई दिशा प्राप्त करेगा। इससे राज्य की जैव विविधता, ऐतिहासिक धरोहर, जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य को वैश्विक पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

तीजन बाई की सफलता की कहानी, पुरुष प्रधान मंच पर कपालिक शैली से रचा इतिहास

दुर्ग. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव के साधारण परिवार में 8 अगस्त 1956 को तीजन बाई का जन्म हुआ। उन्होंने बचपन में नाना बृजलाल पारधी से महाभारत की कथाएं सुनकर पंडवानी सीखनी शुरू की। हालांकि, फिर उमेद सिंह देशमुख से उन्होंने विधिवत प्रशिक्षण लिया। स्वभाव के विपरीत उन्हें शांत बैठकर पारंपरिक वेदमती शैली में गाना पसंद नहीं था। ऐसे में उन्होंने पुरुषों के वर्चस्व वाली खड़े होकर गाने वाली कपालिक शैली को चुना। पद्म विभूषण तीजन बाई कपालिक शैली में गाने वाली पहली महिला पंडवानी गायिका थीं। 7 दशक पहले तक यह शैली एक तरह से लगभग पुरुषों के वर्चस्व वाली थी या यूं कहें कि महिलाओं के लिए वर्जित मानी जाती थी। 13 वर्ष की उम्र में पहले कार्यक्रम के मिले थे 10 रुपए महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुर्ग जिले के चंद्रखुरी गांव में पहला सार्वजनिक कार्यक्रम किया, जिसके लिए उन्हें 10 रुपए पारिश्रमिक मिला था। लोगों के ताने और विरोध के बीच कपालिक शैली में अपने हाव-भाव और अभिनय से अपनी एक अलग पहचान बनाई। भारत एक खोज में महाभारत के अंशों की दी थी प्रस्तुति मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने भारत एक खोज में महाभारत से जुड़े अंशों की प्रस्तुति दी थी। उनका अधिकांश गायन मंचीय प्रस्तुतियों और महाभारत के प्रसंगों पर आधारित रहा है। हालांकि, भारत सरकार, संगीत नाटक अकादमी या तीजन बाई ने कभी कार्यक्रमों की संख्या सार्वजनिक नहीं की। इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी समेत कई देशों में पहुंचाई कला 1980 के दशक से उन्होंने भारत के लगभग सभी राज्यों में अपनी प्रस्तुतियां दीं। साथ ही, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, तुर्की, ट्यूनीशिया, साइप्रस, रोमानिया, मॉरीशस समेत अनेक देशों में कार्यक्रम किए। हालांकि, उनके आखिरी विदेश या देश के कार्यक्रम की अधिकृत जानकारी नहीं है। छत्तीसगढ़ का पंडवानी लोकगायन क्या है? महाभारत की कथाओं पर आधारित पंडवानी शैली असल में सिर्फ छत्तीसगढ़ राज्य का पारंपरिक लोकगायन ही नहीं, बल्कि कथावाचन, लोकनाट्य और अभिनय का भी मिश्रण है। जिसे संवाद, हाव-भाव और संगीत के जरिए प्रस्तुत किया जाता है।  पांडवों की कथा में गायन पंडवानी का शाब्दिक अर्थ पांडवों की वाणी या पांडवों की कथा है। इसमें कलाकार भीम, अर्जुन, द्रौपदी, कर्ण और अन्य पात्रों के प्रसंगों का मंचन करता है। मुख्य कलाकार के हाथ में एकतारा और तंबूरा होता है। कुछ कलाकार भीम की गदा, अर्जुन के धनुष और कभी अन्य प्रतीकों के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं। पंडवानी लोकगायन की वेदमती और कपालिक दो शैलियां पंडवानी की दो प्रमुख शैलियां हैं। जिसमें कलाकार वेदमती शैली बैठकर शांत ढंग से कथा गाकर सुनाता है। जबकि कपालिक शैली में कलाकार खड़े होकर अभिनय, संवाद, हाव-भाव और नाटकीय अंदाज में प्रस्तुति देता है। यह अधिक ऊर्जावान और प्रभावशाली शैली माती जाती है।  ऋतु वर्मा, उषा बारले और शांतिबाई आगे बढ़ा रहीं कला तीजन बाई ने परंपरा को तोड़ा। जिसके बाद कई अन्य महिला कलाकारों ने पंडवानी की कपालिक शैली को आगे बढ़ाया। इनमें मुख्य रूप से ऋतु वर्मा, उषा बारले और शांतिबाई चेलक शामिल हैं, जो लोककला का सफलतापूर्वक मंचन कर रही हैं। यह प्रमुख पुरस्कार और सम्मान पद्म श्री 1988 में मिला। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1995 मानद डी लिट 2003 पद्म भूषण 2003 एम.एस. सुब्बुलच्मी शताब्दी पुरस्कार 2016 फुकुओका पुरस्कार जापान 2018 पद्म विभूषण 2019 अकादमी रत्न संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप 2023 इनके अलावा कई राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले।

मूसलाधार बारिश से छत्तीसगढ़ बेहाल, जलभराव और बाढ़ जैसे हालात, कई गांवों का संपर्क कटा

गरियाबंद. छत्तीसगढ़ में मानसूनी गतिविधियां तेज हो रही है. प्रदेश के सभी संभागों के अधिकांश जिलों में पिछले 24 घंटों में जमकर बारिश हुई. आसमान में काले बादलों ने डेरा डाला हुआ है. भारी बारिश के कारण गरियाबंद जिले के कुसमी-छुरा मार्ग पर पुराना कुसुमबोड़ा पुल टूट गया है. दर्जनभर गांव का छुरा मुख्यालय से संपर्क टूट गया है, जिससे आवाजाही पूरी तरह से थम गई है. दर्जन भर गांव का टूटा संपर्क जानकारी के मुताबिक, कई गावों को छुरा मुख्यालय से जोड़ने वाला कुसुमबोड़ा पुल लगभग 40 साल से भी ज्यादा पुराना था. समय के साथ यह पुल काफी जर्जर हो चुका था. पुल टूटने से कोसमी, नवापारा, सारागांव, चुरकीदादार, दुल्ला, बम्हनी सहित दर्जनों गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है. यह मार्ग ओडिसा के नुआपड़ा जिले को भी जोड़ता है, जहां से अंतरराज्यीय व्यापार होता आ रहा था. प्रभावित ग्रामीणों की प्रशासन से मांग है कि आवाजाही के लिए नए पुल का निर्माण किया जाए. छुरा और फिंगेश्वर तहसील में पिछले 24 घंटे में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है. दोनों तहसील में अबतक सर्वाधिक 100 मिमी से ऊपर बारिश अब तक दर्ज की जा चुकी है. फिंगेश्वर का कुम्हार पारा हुआ जलमग्न बारिश के चलते तापमान में गिरावट तो आई पर बारिश कुछ परिवार के लिए मुसीबत बन गई. फिंगेश्वर के कुम्हार पारा में जल भराव की स्थिति निर्मित हो गई. यहां कई कुम्हार मिट्टी को बर्तन बनाए हुए थे, लेकिन उनके घरों के पानी घुसने से बर्तन टूट गया है. कुम्हार परिवारों को दोहरा क्षति हुआ है. घरो में घुसे पानी को निकालन प्रभावित परिवार देर रात से जुटा हुआ है.

धमतरी में पुलिस पेट्रोलिंग के दौरान युवक की मौत, भागते समय आया हार्ट अटैक

धमतरी. धमतरी में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस पेट्रोलिंग वाहन को देखकर भाग रहे एक युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. घटना के बाद इलाके में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. बहरहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है. मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के लालबगीचा वार्ड का है. बताया गया 27 वर्षीय योगेश जांगड़े अपने कुछ दोस्तों के साथ रात में बैठा हुआ था, इसी दौरान नियमित गश्त पर निकली पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी वहां पहुंची. पेट्रोलिंग वाहन को देखते ही वहां मौजूद युवक अचानक भागने लगा. बताया जा रहा है कि भागते समय योगेश जांगड़े की सांस फूलने लगी और उसकी हालत बिगड़ गई. युवक के दोस्तों ने इसकी सूचना परिजनों को दी, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल में उपचार शुरू किया गया लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत और गंभीर हो गई डॉक्टरों ने जांच के बाद योगेश जांगड़े को मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में शोक का माहौल है. डॉक्टरों के अनुसार, युवक की मौत हार्ट अटैक के कारण हुई है. हालांकि, घटना के कई पहलुओं की जांच की जा रही है. वहीं यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर पुलिस पेट्रोलिंग वाहन को देखकर युवक और उसके साथी अचानक क्यों भागने लगे. फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी.

अवैध पेड़ कटाई मामले में सख्ती, प्रधान पाठक सस्पेंड, अध्यक्ष-सचिव के खिलाफ FIR के निर्देश

बालोद. बालोद जिले के गुरुर विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़भूम परिसर में पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने का एक गंभीर मामला सामने आया है. स्कूल परिसर में बिना किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के 29 हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया. मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने तत्काल जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. कलेक्टर के निर्देश पर विकास खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) गुरूर ने बीते 2 जुलाई को विद्यालय का आकस्मिक और विस्तृत निरीक्षण किया, जिसमें अवैध रूप से पेड़ों की कटाई की बात पूरी तरह सच और प्रमाणित पाई गई. जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद बीईओ ने 3 जुलाई को गुरुर थाना प्रभारी को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आवेदन दिया है. इसके साथ ही मुख्य आरोपी प्रधान पाठक के निलंबन की अनुशंसा उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है. समिति ने बाकायदा बैठक कर पास किया था प्रस्ताव जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पेड़ों की इस अवैध कटाई की बाकायदा साजिश रची गई थी. इसके लिए 23 अप्रैल को शाला विकास समिति की एक बैठक हुई, जिसमें नियमों को ताक पर रखकर पेड़ों को काटने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया. शाला विकास समिति के अध्यक्ष जीवन लाल उईके और सदस्य निर्मला उईके मुख्य तौर पर घटनाक्रम में शामिल रहे. प्रधान पाठक की भूमिका रही मुख्य पूरी प्रक्रिया में माध्यमिक स्तर के प्रधान पाठक और शाला विकास समिति के सचिव डोमर सिंह निषाद की मुख्य भूमिका रही, जिनकी सीधी देखरेख में सरकारी संपत्ति और पर्यावरण को यह नुकसान पहुँचाया गया. नियमानुसार पेड़ों की कटाई से पहले वन विभाग या राजस्व विभाग से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी, जो कि सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है. कड़ी कार्रवाई की तैयारी गुरूर बीईओ ललित चंद्राकर ने कहा कि मामले में नियमों का घोर उल्लंघन और पदीय कर्तव्यों का दुरुपयोग पाया गया है. थाना प्रभारी को नामजद FIR दर्ज करने के लिए पत्र दे दिया गया है. साथ ही संबंधित प्रधान पाठक डोमर सिंह निषाद एवं अन्य संलिप्त कर्मचारियों के निलंबन के लिए औपचारिक अनुशंसा उच्चाधिकारियों को भेजी गई है.