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पेंशनरों के लिए खुशखबरी: छत्तीसगढ़ HC ने बकाया एरियर देने का आदेश जारी किया

 रायपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के पेंशनरों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सरकार को उनके बकाया एरियर का भुगतान 120 दिनों के भीतर करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा 49 के तहत दिया गया है। यह मामला छत्तीसगढ़ पेंशनर्स समाज के प्रांताध्यक्ष चेतन भारती द्वारा 12 अगस्त 2021 को दायर याचिका से जुड़ा है। उन्होंने लंबे समय तक मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर पेंशनरों की समस्याओं से अवगत कराया था। शासन स्तर पर समाधान नहीं मिलने के बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने स्पष्ट की धारा 49 की व्याख्या न्यायालय ने मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा 49(6) की व्याख्या करते हुए कहा कि वित्तीय भुगतान को लेकर राज्यों के बीच सहमति की अनिवार्यता पेंशनरों के अधिकारों में बाधा नहीं बन सकती। अदालत ने डॉ. सुरेंद्र नारायण गुप्ता के मामले का हवाला देते हुए छठे और सातवें वेतनमान (7th Pay commission) के एरियर भुगतान का मार्ग प्रशस्त किया। इन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ न्यायालय के फैसले के अनुसार, एक जनवरी 2006 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 32 माह का एरियर दिया जाएगा। यह एरियर 01 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक की अवधि का होगा। वहीं, एक जनवरी 2016 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 27 माह का एरियर मिलेगा, जो 01 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक की अवधि के लिए निर्धारित किया गया है। चार माह में भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49(8) के तहत यह पूरा भुगतान चार माह के भीतर सुनिश्चित किया जाए। इस फैसले के बाद राज्य के हजारों पेंशनरों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

डबरीपानी में कार्रवाई शुरू: बुलडोजर से महामाया पहाड़ के अतिक्रमण हटाए जाएंगे, पुलिस बल मौजूद

 अंबिकापुर  अंबिकापुर के महामाया मंदिर (Mahamaya Temple) और महामाया पहाड़ से लगे डबरीपानी के संरक्षित वन क्षेत्र में वन विभाग ने अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। शुक्रवार सुबह चार एक्सीवेटर और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मकानों को तोड़ा जाने लगा। पहले दिन 20 से अधिक मकानों को हटाने की तैयारी की गई है।मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं ताकि किसी प्रकार के विरोध या तनाव की स्थिति को रोका जा सके। कई वर्षों से जारी था कब्जे का खेल वन विभाग के अनुसार, अंबिकापुर शहर से लगे डबरीपानी, श्रीगढ़, खैरबार, नवागढ़ और बधियाचुआ क्षेत्र में लंबे समय से वनभूमि पर अवैध कब्जे किए जा रहे थे। ये क्षेत्र धीरे-धीरे नए आवासीय इलाकों के रूप में विकसित हो गए, जहां सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करा दी गई थीं। पिछले वर्ष वन विभाग ने श्रीगढ़ और चोरकाकछार क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन बाद में अभियान धीमा पड़ गया। विभाग ने कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया था, लेकिन किसी ने वैध दस्तावेज पेश नहीं किए। रात को चस्पा किया नोटिस, सुबह पहुंचा बुलडोजर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई डबरीपानी से शुरू की गई है। यहां के 54 लोगों को अंतिम बेदखली का नोटिस जारी किया गया था। कुछ अतिक्रमणकारियों ने अंतिम बेदखली का नोटिस जारी होने के बाद हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है। गुरुवार रात वन विभाग के कर्मचारी डबरीपानी पहुंचे और घरों को खाली करने का नोटिस चस्पा किया। शुक्रवार सुबह फारेस्ट एसडीओ श्वेता कम्बोज के नेतृत्व में वन विभाग और पुलिस जवानों का अमला बुलडोजर लेकर डबरीपानी पहुंचा और कार्रवाई शुरू की गई। पार्षद बोले- वन विभाग ने कार्रवाई में की देरी पार्षद आलोक दुबे ने बताया कि मार्च 2026 में ही रिजर्व फारेस्ट से 157 लोगों को अवैध कब्जा हटाने के लिए अंतिम बेदखली नोटिस की अवधि समाप्त हो गई थी। पुलिस बल दिए जाने के बाद भी डीएफओ अभिषेक जोगावत ने कार्रवाई नहीं की, तो इसकी शिकायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की गई थी। आलोक दुबे ने कहा कि यहां दूसरे राज्यों से आए समुदाय विशेष के लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आज से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। सभी चिन्हित अतिक्रमण हटाए जाएंगे- एसडीओ एसडीओ फारेस्ट श्वेता कम्बोज ने कहा कि 157 लोगों को अंतिम बेदखली नोटिस जारी हुआ है। इनमें महामाया पहाड़, नवागढ़, डबरीपानी के अतिक्रमणकारी शामिल हैं। डबरीपानी में 54 अतिक्रमणकारियों में जिन लोगों को हाईकोर्ट से स्टे मिला है, उनका अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा है। शेष लोगों को चिन्हित कर उनका कब्जा तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। श्वेता कम्बोज ने कहा कि सभी चिन्हित अतिक्रमणकारियों को अवैध कब्जा हटाया जाएगा। आज से यह कार्रवाई शुरू हो गई है। 27 मार्च को जारी हुआ था अंतिम नोटिस वन विभाग ने 27 मार्च 2026 को अतिक्रमणकारियों को अंतिम बेदखली नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर वनभूमि खाली करने को कहा था। इसके बावजूद कब्जाधारियों ने जमीन खाली नहीं की। कार्रवाई में देरी होने के कारण कई कब्जाधारी हाईकोर्ट पहुंच गए और उन्हें स्थगन आदेश मिल गया। भाजपा पार्षद आलोक दूबे ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (CM Vishnu Deo Sai) से की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने वनभूमि से नियमानुसार कब्जा हटाने के निर्देश दिए। रातभर रही हलचल, लोग हटाने लगे सामान गुरुवार देर शाम वन विभाग की टीम डबरीपानी पहुंची और शुक्रवार से कार्रवाई शुरू करने की मुनादी कराई गई। क्षेत्र में नोटिस भी चस्पा किए गए। इसके बाद से इलाके में हलचल बढ़ गई। कई अतिक्रमणकारियों ने रात में ही अपना सामान हटाना शुरू कर दिया था। शुक्रवार सुबह वन और राजस्व विभाग की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई शुरू करने से पहले लोगों को एक बार फिर सामान हटाने का समय दिया गया, जिसके बाद तोड़फोड़ शुरू हुई। 54 अतिक्रमणकारी डबरीपानी में चिन्हित भारतीय वन सेवा की प्रशिक्षु अधिकारी और अंबिकापुर एसडीओ फॉरेस्ट श्वेता काम्बोज ने बताया कि केवल डबरीपानी क्षेत्र में 54 अतिक्रमणकारियों को चिन्हित किया गया है। इनमें से कुछ लोगों को न्यायालय से स्थगन आदेश मिला है, जबकि कुछ के आवेदन FRA के तहत लंबित हैं। ऐसे मामलों को छोड़कर बाकी कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश और मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। 157 अतिक्रमणकारी चिन्हित वन विभाग के अनुसार, महामाया पहाड़ से लगे डबरीपानी, नवागढ़ और घुटरापारा के संरक्षित वन क्षेत्रों में कुल 157 अतिक्रमणकारी चिन्हित किए गए हैं। इन सभी को 27 मार्च 2026 को अंतिम नोटिस जारी किया गया था और 29 मार्च 2026 तक अतिक्रमण हटाने की समयसीमा तय की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, उस दौरान सरगुजा कलेक्टर अवकाश पर थे, जिसके कारण विभागीय स्तर पर कार्रवाई में देरी हुई। बाद में भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने आरोप लगाया कि झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल से आए लोगों ने वनभूमि पर कब्जा किया है। शिकायत के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। राजनीतिक मुद्दा बना वनभूमि अतिक्रमण महामाया पहाड़ से लगे वन क्षेत्रों में अवैध कब्जे का मामला राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। भाजपा लगातार कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति के तहत अतिक्रमण को बढ़ावा देने का आरोप लगाती रही है। वहीं कांग्रेस इन आरोपों को खारिज करते हुए कार्रवाई में पक्षपात का आरोप लगाती रही है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना: आज प्रदेशभर में 2300 से अधिक जोड़ों ने निभाई शादी

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आज 8 मई को प्रदेशभर में भव्य सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किए जाएंगे। राज्य के सभी जिलों में होने वाले इस आयोजन में 2300 से अधिक जोड़े विवाह सूत्र में बंधेंगे। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह आयोजन केवल विवाह तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता, समानता और सामूहिक सहभागिता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। समारोह में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध समेत विभिन्न समुदायों और विशेष पिछड़ी जनजातियों के जोड़े अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह करेंगे। हर नवविवाहित जोड़े को मिलेगी आर्थिक सहायता मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत राज्य सरकार प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देना और बेटियों के विवाह को सम्मानजनक तरीके से संपन्न कराना है। इसके अलावा विवाह समारोह में दूल्हा-दुल्हन और उनके परिजनों के लिए भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य जरूरी इंतजाम भी किए गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया सामाजिक समरसता का प्रतीक मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समाज में समानता और सम्मान को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल है। उन्होंने कहा कि पहले गरीब परिवारों के लिए बेटियों का विवाह चिंता का कारण बनता था, लेकिन अब यह योजना उन्हें आर्थिक और सामाजिक संबल दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अंतिम व्यक्ति तक संवेदनशील शासन की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। पहले भी बना था वर्ल्ड रिकॉर्ड उल्लेखनीय है कि 10 फरवरी 2026 को रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 6,412 जोड़े विवाह बंधन में बंधे थे। इस आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया था। उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 1,316 नवविवाहित जोड़ों को प्रत्यक्ष रूप से आशीर्वाद दिया था, जबकि अन्य जिलों के जोड़े वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे। महिला एवं बाल विकास विभाग ने संभाली जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा सभी जिलों में आयोजन की व्यापक तैयारियां की गई हैं। प्रशासनिक अमला आयोजन स्थलों पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है, ताकि सभी जोड़ों और उनके परिवारों को सम्मानजनक वातावरण मिल सके।  

बस्तर का वेस्ट अब बनेगा बेस्ट: छिंद के बीजों से तैयार होगी कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी

रायपुर बस्तर के नैसर्गिक सौंदर्य और समृद्ध संसाधनों के बीच अब एक नई और सुगंधित क्रांति आकार ले रही है, जिसका श्रेय दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार को जाता है। बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की शिक्षा प्राप्त करने वाले विशाल ने अपनी जड़ों से जुड़े रहने और कुछ नया करने की चाह में छिंद (खजूर की एक स्थानीय प्रजाति) के उन बीजों से हर्बल कॉफी तैयार की है, जिन्हें अब तक बस्तर में पूरी तरह व्यर्थ समझा जाता था। इस अभिनव प्रयोग के पीछे विशाल का उद्देश्य न केवल बेकार पड़े प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करना है, बल्कि कॉफी के उन शौकीनों को एक स्वस्थ विकल्प प्रदान करना है जो स्वाद तो चाहते हैं लेकिन कैफीन के दुष्प्रभावों से बचना चाहते हैं। विशाल का यह सफर करीब दो वर्षों के गहन शोध और प्रयोगों का परिणाम है, जिसमें उन्होंने इंटरनेट की मदद और स्थानीय समझ का बखूबी तालमेल बिठाया है। विशाल की इस नवाचार को इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान मिला, जिसके लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के द्वारा सम्मानित किया गया। इस हर्बल कॉफी की सबसे प्रभावशाली विशेषता इसका पूरी तरह से कैफीन मुक्त होना है, जबकि इसमें छिंद के प्राकृतिक गुणों के कारण प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। विशाल का मानना है कि अधिकांश लोग केवल मानसिक सक्रियता के लिए ही नहीं, बल्कि कॉफी के अनूठे स्वाद और उसकी आदत के कारण इसका सेवन करते हैं, और उनकी यह खोज इसी वर्ग को ध्यान में रखकर की गई है। इस नवाचार को तब बड़ी पहचान मिली जब विशाल ने शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में अपना स्टॉल लगाया। वहाँ प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चैधरी सहित विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और आम जनता ने इस कॉफी का स्वाद चखा और इसकी खूब सराहना की। विशाल केवल एक उत्पाद बनाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के यूथ अप फाउंडेशन के माध्यम से स्थानीय युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि उनके इस आइडिया से बस्तर के ग्रामीणों को रोजगार मिले और गांवों और जंगल से मिलने वाले छिंद के बीजों से उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो सके। हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी भी टेस्टिंग और विकास के दौर में है और इसका आधिकारिक लॉन्च होना बाकी है, लेकिन विशाल के इस अटूट प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि यदि दृष्टि स्पष्ट हो तो स्थानीय वेस्ट को भी वैश्विक स्तर के बेस्ट उत्पाद में बदला जा सकता है। आने वाले समय में यह हर्बल कॉफी न केवल बस्तर की पहचान बन सकती है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक दुनिया के लिए एक अनूठा उपहार भी साबित हो सकती है।

​उच्च शिक्षा मंत्री से मिले कुलपति प्रो. दयाल, विश्वविद्यालय के गुणात्मक विकास और समस्याओं पर हुई चर्चा

​उच्च शिक्षा मंत्री से मिले कुलपति प्रो. दयाल, विश्वविद्यालय के गुणात्मक विकास और समस्याओं पर हुई चर्चा ​रायपुर      कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने  छत्तीसगढ़ के माननीय उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान कुलपति ने मंत्री जी को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के भविष्य, शैक्षणिक सुधारों और बुनियादी ढाँचे के विकास को लेकर व्यापक चर्चा हुई। ​विकास के लिए मिले महत्वपूर्ण सुझाव     ​मुलाकात के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विश्वविद्यालय में संख्यात्मक विस्तार के साथ-साथ गुणात्मक विकास शिक्षा के स्तर में सुधार) पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय को और अधिक उन्नत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव और निर्देश साझा किए। इस अवसर पर उपस्थित कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा ने विश्वविद्यालय की लंबे समय से लंबित समस्याओं को मंत्री जी के समक्ष रखा, जिस पर सकारात्मक चर्चा हुई। ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर केंद्रित है पाठ्यक्रम   ​विश्वविद्यालय वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मूल उद्देश्यों—गुणवत्ता, समानता, पहुँच और वहनीयता—को ध्यान में रखकर अपने पाठ्यक्रमों का संचालन कर रहा है। यहाँ के मीडिया पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को रटने की पद्धति से दूर कर उनमें-​आलोचनात्मक सोच,​रचनात्मकता ​बहुविषयक शिक्षा और कौशल विकास ​पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक पत्रकारिता की चुनौतियों का सामना कर सकें। ​भीषण गर्मी को देखते हुए छात्रों के लिए बड़ी राहत लाइब्रेरी में बनेगा एयरकूल्ड रीडिंग रूम    ​कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने आगामी परीक्षाओं और छात्रों की पढ़ाई के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। भीषण गर्मी के प्रकोप को देखते हुए उन्होंने लाइब्रेरी में 'एयरकूल्ड रीडिंग रूम'  की व्यवस्था करने को कहा है, ताकि छात्र-छात्राएं बिना किसी परेशानी के सुचारु रूप से अपना अध्ययन जारी रख सके।

विश्व रेडक्रॉस दिवस पर निकली जनजागरूकता रैली

विश्व रेडक्रॉस दिवस पर निकली जनजागरूकता रैली रेडक्रॉस सोसाइटी ने मरीजों को बांटे फल, लगाया स्वास्थ्य शिविर बिलासपुर विश्व रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर आज भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी बिलासपुर द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। सर्वप्रथम सिम्स चिकित्सालय में रेडक्रॉस सोसाइटी के प्रबंध समिति के चेयरमैन डॉ. बी.एल. गोयल ने सर हेनरी डूनॉट के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। सिम्स परिसर से गोल बाजार तेलीपारा होते हुए जिला चिकित्सालय तक जन जागरण रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में लोगों से उत्साह के साथ भाग लिया। इसके पश्चात जिला चिकित्सालय में एसएनसीयू, एचडीयू, चिल्ड्रन वार्ड, महिला वार्ड में भर्ती मरीजों को फल वितरित किए गए। इसके पश्चात स्थानीय उन्नत शिक्षा अध्ययन संस्थान में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया जिसमें महिलाओं के ब्रेस्ट कैंसर की जांच, सर्वाइकल कैंसर की जांच, बीपी, शुगर सहित अन्य बीमारियों का परीक्षण कर उचित सलाह दी गई।       कार्यक्रम में चेयरमेन प्रबंध समिति डॉ. बी एल गोयल, नोडल अधिकारी डॉ. एमए जीवानी, जिला समन्वयक सौरभ सक्सेना, प्रभारी रेडक्रॉस आदित्य पांडे  सहित लक्ष्मी नारायण मिश्रा, सुशील राजपूत, डॉ विद्याभूषण, रमेश सिंह, गीतेश्वरी चन्द्रा, नौरिश, अंजू राजपूत, नेहा, अंजलि आदि उपस्थित रहे।   

स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल की मौजूदगी में समाधान शिविर में सैकड़ों मुद्दों का तुरंत निवारण

संवाद से संपूर्ण समाधान शिविर बना जनविश्वास का केंद्र, स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल की मौजूदगी में सैकड़ों समस्याओं का त्वरित निराकरण मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी पहल “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत विकासखंड खड़गवां के ग्राम मझौली में आयोजित “गांव-गांव, द्वार-द्वार सुशासन तिहार जनसमस्या निवारण शिविर संवाद से संपूर्ण समाधान कार्यक्रम में जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने वाले इस विशाल शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण कर शासन ने संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन की मिसाल पेश की। ग्राम पंचायत अखराडांड, बरमपुर, मझौली, भूकभूकी, दुबछोला, ठग्गांव, दुग्गी, सिंघत, खड़गवां और पोडीडीह सहित कुल 10 ग्राम पंचायतों को शामिल करते हुए आयोजित इस शिविर में सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याएं और आवेदन लेकर पहुंचे। शिविर ने “समाधान आपके द्वार” की अवधारणा को साकार करते हुए लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत दिलाई। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, जिला पंचायत सदस्य प्रिया मसराम, जनपद सदस्य श्यामबाई मरकाम, उपाध्यक्ष बीरेन्द्र सिंह करियाम, जनपद सदस्य इंद्रावती सिंह, धर्मपाल सिंह, सोनमती उर्रे सहित जनप्रतिनिधियों द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। शुभारंभ के साथ ही पूरे शिविर परिसर में उत्साह, जनभागीदारी और भरोसे का वातावरण देखने को मिला। शिविर में एसडीएम विज्येन्द्र सारथी, जनपद सीईओ हेमंत बंजारे, तहसीलदार सिद्धि गबेल, सीपीएस दीपिका मिंज, सीएचएमओ अविनाश खरे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि शासन अब जनता की समस्याओं के समाधान के लिए गांव-गांव पहुंच रहा है। शिविर स्थल पर स्वास्थ्य, राजस्व, ग्रामीण यांत्रिकी, समाज कल्याण, कृषि, उद्यानिकी, वन, खाद्य, पुलिस, बिजली, लोक निर्माण, आयुष्मान कार्ड, महिला एवं बाल विकास, पशु चिकित्सा, पेयजल, बैंकिंग सेवाएं, आधार सेवा, मनरेगा और सामाजिक सुरक्षा सहित विभिन्न विभागों के आकर्षक एवं सुव्यवस्थित स्टॉल लगाए गए थे। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सभी स्टॉलों का निरीक्षण कर अधिकारियों को आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक संवेदनशीलता की झलक भी देखने को मिली, जब जनप्रतिनिधियों द्वारा गर्भवती महिलाओं बबीता, कदम कुंवर, रजंती, रोशनी, पप्पी, ममता, मानसी, सविता और उर्मिला की गोद भराई की रस्म संपन्न कराई गई। इससे शिविर केवल प्रशासनिक आयोजन न रहकर सामाजिक सरोकार का भी केंद्र बन गया। जनसमस्या निवारण शिविर में कुल 392 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा छह हितग्राहियों को राशन कार्ड, आठ हितग्राहियों को वन अधिकार पट्टा, पांच लोगों को जाति प्रमाण पत्र, अठारह किसानों को किसान किताब, पांच हितग्राहियों को आवास की चाबी, पांच लोगों को आयुष्मान कार्ड तथा सात लोगों को नवीन जॉब कार्ड वितरित किए गए। इसके अलावा दो क्षय रोगियों को फूड बास्केट भी प्रदान किया गया। कई आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर ग्रामीणों को तत्काल राहत दी गई, जबकि शेष आवेदनों को समय-सीमा में समाधान हेतु संबंधित विभागों को सौंपा गया। अपने संबोधन में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन की नई संस्कृति विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि अब सरकार केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और मौके पर समाधान कर रही है। उन्होंने “सुशासन तिहार 2026” को जनहित, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बताते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गरीबों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए लगातार ऐतिहासिक फैसले ले रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पेयजल, राशन, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सरल व्यक्तित्व, संवेदनशील कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आने वाले समय में सुशासन और विकास का आदर्श राज्य बनकर उभरेगा। कार्यक्रम के अंत में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विज्येन्द्र सारथी ने बताया कि शिविर में प्राप्त 392 से अधिक आवेदनों में से कई का मौके पर ही निराकरण कर हितग्राहियों को राहत प्रदान की गई है, जबकि शेष लंबित मामलों के त्वरित समाधान के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक आवेदन का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। कार्यक्रम में हृदय सिंह, रमेश जायसवाल, अशोक खरे, शंकर प्रताप गुप्ता, रामलाल साहू, हरबंस साहू, सतेन्द्र साहू, मनोज साहू, अंगद, सरपंच सुश्री जया सिंह मरावी, श्रीमती तुला, कुन्ती सिंह, सोनिया सिंह, सुनीता, रामबाई, संत कुमार सिंह, सुखीत लाल अगरिया, हरि सिंह, सचिव श्रीमती सुन्दर लली, उर्मिला, यशोदा, अनुराग दुबे, अशोक पाण्डेय, सीता सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

वर्षों से लापता लोगों की तलाश में जुटी एमसीबी पुलिस, आमजन से मांगा सहयोग

वर्षों से लापता लोगों की तलाश में जुटी एमसीबी पुलिस, आमजन से मांगा सहयोग बुजुर्ग महिला से लेकर युवाओं तक के कई मामलों में अब तक नहीं मिला सुराग, पुलिस ने जारी किए संपर्क नंबर मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में वर्षों से लापता लोगों की तलाश को लेकर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि यदि किसी भी गुमशुदा व्यक्ति के संबंध में कोई जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचित करें, ताकि उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचाया जा सके। पुलिस के अनुसार थाना चिरमिरी क्षेत्र से वर्ष 2020 में लापता हुई 75 वर्षीय श्रीमती कुसुमनी पति संतोष कुमार राय निवासी गोदरीपारा, चालिस घोड़ा का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। बताया गया कि 24 नवंबर 2020 की रात वे घर से बिना बताए कहीं चली गई थीं। परिजनों ने आसपास के क्षेत्रों एवं रिश्तेदारों के यहां काफी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसी तरह वर्ष 2019 में थाना चिरमिरी में दर्ज एक अन्य मामले में 20 वर्षीय विक्रम पिता सची शंकर निवासी छोटी बाजार, दलगंजन दफाई भी अचानक घर से लापता हो गया था। परिवार द्वारा लगातार खोजबीन किए जाने के बावजूद युवक का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। वहीं तीसरे मामले में 26 वर्षीय श्रीमती जयमती सारथी पति बहादुर सारथी निवासी परसिया थाना ओड़गी जिला सूरजपुर वर्ष 2020 से लापता हैं। जानकारी के अनुसार पारिवारिक विवाद के बाद वे घर से निकल गई थीं, जिनकी तलाश लगातार जारी है। इसी कड़ी में थाना चिरमिरी क्षेत्र से वर्ष 2020 में लापता हुई 82 वर्षीय वृद्ध महिला खिरो नायक का मामला भी पुलिस के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। गुम इंसान क्रमांक 15/2020 के तहत दर्ज मामले में खिरो नायक, पति स्वर्गीय धनु नायक निवासी हरीनगर ईवाई हल्दीबाड़ी थाना चिरमिरी, 19 अगस्त 2020 को दोपहर करीब 12 बजे घर से बिना बताए कहीं चली गई थीं। परिजनों द्वारा काफी खोजबीन के बाद 21 अगस्त 2020 को थाना चिरमिरी में गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। एमसीबी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गुमशुदा व्यक्तियों की तलाश उनकी प्राथमिकता में शामिल है और सभी थाना एवं चौकी प्रभारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को इन गुमशुदा लोगों के संबंध में कोई भी जानकारी प्राप्त होती है तो तत्काल पुलिस को सूचित करें। संपर्क हेतु पुलिस अधीक्षक एमसीबी – 9479194855, सीएसपी चिरमिरी – 9479193703, थाना चिरमिरी – 9479193709 तथा कंट्रोल रूम – 9479160180 पर जानकारी दी जा सकती है।

जनसमस्या निवारण शिविर में मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी, चेहरे पर आई खुशी

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देशानुसार आयोजित “सुशासन तिहार 2026” आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील समाधान का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में जांजगीर–चांपा जिले के जनपद पंचायत अकलतरा अंतर्गत ग्राम तिलई में आयोजित शिविर में ग्राम मुरलीडीह निवासी  त्रिवेणी रात्रे को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पक्के मकान की चाबी प्रदान की गई। वर्षों से पक्के घर का सपना देख रही त्रिवेणी रात्रे के लिए यह अवसर बेहद खुशी और संतोष लेकर आया।  त्रिवेणी रात्रे ने बताया कि उनका परिवार पहले कच्चे मकान में निवास करता था, जहां बारिश के दौरान पानी टपकने और गर्मी के मौसम में अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने से अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में जीवन यापन कर रहा है। उन्होंने कहा कि पक्का घर मिलने से परिवार में आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस कर रही हैं।   रात्रे ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार आम लोगों के लिए राहत और खुशियों का माध्यम बनकर सामने आया है तथा शासन की योजनाओं का लाभ अब सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।

9 करोड़ 45 लाख की लागत से बनेगा नदी पर उच्च स्तरीय पुल

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को एक और महत्वपूर्ण विकास परियोजना की सौगात मिली है। राज्य शासन द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट अंतर्गत कुनकुरी–तपकरा–लवाकेरा मार्ग पर नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य के लिए 9 करोड़ 45 लाख 85 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। यह मार्ग छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। उच्च स्तरीय पुल के निर्माण से तीनों राज्यों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित, सुगम और निर्बाध हो सकेगा। साथ ही व्यापार, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। वर्तमान में इस मार्ग पर स्थित सकरा पुल बरसात के मौसम में बड़ी समस्या बन जाता था। जलस्तर बढ़ने पर आवागमन बाधित हो जाता था और ग्रामीणों एवं राहगीरों को जोखिम उठाकर यात्रा करनी पड़ती थी। लंबे समय से क्षेत्रवासी उच्च स्तरीय पुल निर्माण की मांग कर रहे थे। अब प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार सीमावर्ती एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार जनहितकारी कार्य कर रही है। पुल निर्माण से हजारों लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी। क्षेत्रवासियों का मानना है कि नदी पर बनने वाला यह उच्च स्तरीय पुल जशपुर जिले के लिए विकास का नया द्वार साबित होगा तथा राज्य के दूरस्थ अंचलों को बेहतर संपर्क सुविधा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।