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Sangrur में हिंसक झड़प, ट्रक यूनियन विवाद के बीच पुलिस पर हमला

संगरूर. संगरूर जिले के भवानीगढ़ क्षेत्र में ट्रक यूनियन की प्रधानगी को लेकर शुरू हुआ विवाद शनिवार देर रात हिंसक रूप ले बैठा। नेशनल हाईवे जाम करने और पुलिस पर पथराव करने के मामले में पुलिस ने दर्जन भर लोगों के खिलाफ इरादा कत्ल सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। इस घटना में दो पुलिस कर्मचारी घायल हो गए, जबकि पुलिस की दो गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। जानकारी के अनुसार, ट्रक यूनियन की प्रधानगी को लेकर दो गुटों के बीच पहले से तनाव बना हुआ था। शनिवार को प्रधानगी के चयन के लिए दिन तय किया गया था। इस दौरान एक पक्ष को डीएसपी दफ्तर बुलाकर वहीं बैठा लिया गया, जबकि दूसरे गुट की ओर से मालविंदर सिंह माला को प्रधान घोषित कर दिया गया। प्रधान घोषित करते ही विवाद हुई शुरू जब इस फैसले की जानकारी दूसरे पक्ष को मिली तो क्षेत्रीय विधायक नरिंदर कौर भराज डीएसपी दफ्तर पहुंचीं और अपने समर्थकों को वहां से बाहर निकाला। इसके बाद उनके समर्थकों ने लवली शर्मा काकड़ा को अपना प्रधान घोषित कर दिया। इसी को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद और अधिक बढ़ गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लवली शर्मा को हिरासत में ले लिया। इसके विरोध में उनके समर्थकों ने बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे को देर रात तक जाम रखा। जब पुलिस ने हाईवे खुलवाने की कोशिश की तो गुस्साए ट्रक आपरेटरों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। इस दौरान पुलिस कर्मियों को चोटें आईं और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। हिंसक धाराओं के तहत मामला दर्ज एसएसपी सरताज सिंह चाहल ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें हत्या के प्रयास, सरकारी काम में बाधा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अलग-अलग स्थानों पर दबिश दी और अब तक दस से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून हाथ में लेने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।

Ravi River और Sutlej River में माइनिंग पर कोर्ट सख्त, Punjab सरकार को समयसीमा तय

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने रावी और सतलुज दरिया के क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में पंजाब सरकार को जिम्मेदार अधिकारियों पर तीन हफ्ते के भीतर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने यह आदेश ड्रोन सर्वे रिपोर्ट के आधार पर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि निर्धारित खनन क्षेत्र से बाहर खुदाई पाई जाती है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाए। चंडीगढ़ निवासी गुरबीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि पंजाब में अवैध खनन का कार्य जोरों पर चल रहा है, जिससे राज्य सरकार को हर वर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अमृतसर बार्डर और रावी दरिया किनारे में अवैध रेत खनन अभी भी जारी है। सुनवाई के दौरान सर्वे आफ इंडिया द्वारा प्रस्तुत ड्रोन आधारित सर्वे रिपोर्ट को अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। रिपोर्ट में हाई रिजोल्यूशन इमेजरी और डिजिटल टेरेन माडल के माध्यम से यह संकेत मिला कि कई स्थानों पर खुदाई निर्धारित खनन क्षेत्र से बाहर की गई है। हालांकि, ड्रोन सर्वे अभी केवल कुछ गांवों तक सीमित है और पूरे रावी-सतलुज बेल्ट का आकलन बाकी है। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधूरी रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक स्थिति का आकलन संभव नहीं है। कोर्ट ने सर्वे आफ इंडिया को निर्देश दिया कि शेष क्षेत्रों का व्यापक सर्वेक्षण तीन सप्ताह के भीतर पूरा कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे, ताकि पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। अदालत ने पंजाब सरकार को भी निर्देशित किया कि जैसे ही अंतिम रिपोर्ट प्राप्त हो, अवैध खनन से जुड़े मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जाए। इस पहले सुनवाई पर केंद्र सरकार ने भी बताया था कि बीएसएफ, सेना और केंद्र सरकार अवैध खनन और इसके जरिये सीमा क्षेत्र में होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने की दिशा में काम कर रही है। हाई कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय को आदेश दिया था कि वह बताएं कि सीमा के निकट कैसे वैध खनन की अनुमति दी जा सकती है। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कहा था कि सीमा पर अवैध खनन बंद है और केवल रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही खनन की इजाजत दी जा रही है।

Punjab में सुरक्षा पर सियासत तेज, Harbhajan Singh की Z सिक्योरिटी हटी, केंद्र सरकार ने संभाली जिम्मेदारी

चंडीगढ़. पंजाब की राजनीति में उठापटक के बीच मान सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व क्रिकेटर और आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य हरभजन सिंह की जेड प्लस सुरक्षा वापस ले ली है। रविवार सुबह जालंधर स्थित उनके आवास से सुरक्षाकर्मियों को हटा लिया गया। इस कदम ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी के भीतर टूट और बगावत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा वापस लेने का निर्णय हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनजर लिया गया है। इससे पहले आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा में भी बदलाव किया गया था। बाद में उन्हें केंद्र की ओर से जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिल गई थी। अब हरभजन सिंह को भी केंद्र सरकार ने तुरंत सुरक्षा दे दी है।  दरअसल, राघव चड्ढा ने दावा किया था कि आप के सात राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं, जिनमें हरभजन सिंह का नाम भी शामिल बताया गया। हालांकि, हरभजन सिंह ने इस पूरे मामले पर अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, आप नेतृत्व ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि केवल तीन सांसदों ने ही पार्टी छोड़ी है। इधर, पार्टी छोड़ने की खबरों के बीच आप कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। जालंधर, लुधियाना और फगवाड़ा में कुछ सांसदों के आवास और संस्थानों के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए। दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे गए, जिससे माहौल और गरमा गया। पुलिस मौके पर मौजूद रही, लेकिन प्रदर्शन को लेकर सख्ती कम नजर आई। राष्ट्रपति से मिलने के लिए सीएम मान ने मांगा समय राजनीतिक तनाव के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। माना जा रहा है कि वे पार्टी बदलने वाले सांसदों के खिलाफ संवैधानिक कार्रवाई की मांग उठा सकते हैं। दूसरी ओर, आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी उपराष्ट्रपति से मुलाकात कर इन सांसदों की सदस्यता रद करने की मांग करेंगे। पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति को चुनावी मोड में ला दिया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की उठापटक को बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह संकट गहराता है तो इसका असर पार्टी के संगठन और चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल, हरभजन सिंह की चुप्पी और सुरक्षा वापसी के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि वे इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और पंजाब की सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है।

Punjab Politics: इस्तीफों से गरमाई सियासत, Harbhajan Singh के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन

जालंधर. सात राज्यसभा सदस्यों के आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने के बाद पंजाब की राजनीति में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में शनिवार को जालंधर में राज्यसभा सांसद व क्रिकेटर रहे हरभजन सिंह के घर के बाहर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने दीवारों पर नारे लिखे और विरोध जताते हुए गुस्से का इजहार किया। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने हरभजन सिंह के घर के बाहर दीवार पर ‘गद्दार’ लिख दिया, जिससे पूरे इलाके में माहौल गरमा गया। बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने सिर पर काले कपड़े बांध रखे थे, जो उनके विरोध का प्रतीक माना जा रहा है। उन्होंने नारेबाजी करते हुए इस्तीफा देने वाले नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। कार्यकर्ताओं को फूटा गुस्सा जानकारी के अनुसार, हाल ही में सात राज्यसभा सदस्यों के पार्टी छोड़ने के बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है। उनका आरोप है कि जिन नेताओं को जनता और पार्टी ने सम्मान दिया, उन्होंने अचानक दल बदलकर भरोसे को ठेस पहुंचाई है। इसी गुस्से के चलते कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस भी मौके पर मौजूद रही और स्थिति पर नजर बनाए रखी। हालांकि किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने की अपील की। मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में और तूल पकड़ सकता है। पार्टी के अंदर और बाहर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे को लेकर आगे भी विरोध जारी रखेंगे और पार्टी नेतृत्व से सख्त कदम उठाने की मांग करेंगे। फिलहाल जालंधर में हुए इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि इस्तीफों का असर केवल राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

किसानों के मुद्दों पर CM Nayab Singh Saini का बयान, बोले- उनकी समस्याओं से हूं परिचित

चंडीगढ़. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि वे प्रदेश के राजा नहीं, बल्कि एक किसान के बेटे हैं। उन्होंने स्वयं खेती की है। इसलिए किसानों की समस्याओं से भलीभांति परिचित है। वे किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए सदैव तत्परता से लगातार कार्य कर रहे हैं। हरियाणा निवास में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में नायब ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गरीब व जनहितैषी योजनाओं को लागू किया है। इनका लाखों लोगों ने लाभ उठाया है और वे गरीबी रेखा से बाहर हुए हैं। कांग्रेसी नेताओं द्वारा मंडियों के लगातार दौरों से जुड़े सवाल पर कहा कि विपक्ष ऐसा वातावरण खड़ा करने में लगा है, जैसे उनके समय में किसान बहुत खुश थे। वे केवल झूठ की दुकान खोलकर आमजन को गुमराह करने में लगे हैं, लेकिन जनता इन्हें अच्छे से समझती है। कांग्रेसी चुनाव के समय पोर्टल बंद करने की बात करते थे लेकिन जनता ने इन्हीं का पोर्टल बंद कर दिया है। वर्ष 2014 से लगातार डबल इंजन की सरकार विकास कार्यों को तेजी से कर रही है। नायब ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी ने मतदाताओं को खूब सब्जबाग दिखाए थे। इनमें किसानों का कर्जा माफ करना, युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाना, पंजाब को नशे से मुक्त करना, महिलाओं को लाभ देने जैसे वादे शामिल हैं। इसके उलट पंजाब में नशा बढ़ गया है और युवा नशे की गिरफ्त में हैं। उन्होंने कहा कि चुटकुलों से जनता का पेट नहीं भरता, इसके लिए जनकल्याण के कार्य करने पड़ते हैं। हरियाणा में किसानों, महिलाओं, युवाओं के लिए अनेक योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। पंजाब में भाजपा की सरकार बनते ही हरियाणा में लागू सभी योजनाएं एवं व्यवस्थाएं हुबहू लागू की जाएंगी। हरियाणा में आयुष्मान चिरायु योजना के तहत अब तक 27 लाख परिवारों ने इलाज करवाकर स्वास्थ्य लाभ उठाया है। पंजाब में आप सरकार ने मोहल्ला क्लीनिक बनाए थे, वे अब हल्ला क्लीनिक बन गए हैं। पंजाब की जनता अब इनसे अपना पिंड छुड़वाना चाहती है। कानून व्यवस्था की सख्ती से निगरानी मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति की सख्ती से मानिटरिंग की जा रही है। यदि कोई ड्रग व नशा बेचते पाया जाता है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। लोगों को नशा मुक्ति केंद्रों में भेजकर नशे से निजात दिलाई जा रही है। जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को नशे से सचेत किया जा रहा है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती पर 14 अप्रैल को पंचकूला में मैराथन का आयोजन किया गया, जिसका उद्वेश्य लोगों को नशे से दूर करना ही था।

AAP सांसदों पर CM Bhagwant Mann का वार, बोले- ‘स्वाद बढ़ा सकते हैं, पर वजूद नहीं’

चंडीगढ़. आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक दिलचस्प और तंज भरा ट्वीट कर राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया। उनका यह ट्वीट ठीक उस समय आया जब पार्टी को बड़ा झटका लगते हुए राघव चड्ढा समेत सात सांसद भाजपा में शामिल हो गए। मुख्यमंत्री मान ने अपने पोस्ट में लिखा कि 'अदरक, लहसुन, जीरा, मेथी पाउडर, लाल मिर्च, काली मिर्च और धनिया – ये सात चीजें मिलकर सब्जी को स्वादिष्ट बना देती हैं, लेकिन इनकी अपनी कोई सब्जी नहीं बन सकती।' उनके इस बयान को सीधे तौर पर उन सात नेताओं से जोड़कर देखा जा रहा है, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मान का यह ट्वीट एक प्रतीकात्मक हमला है, जिसमें उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि कुछ नेता मिलकर भले ही किसी व्यवस्था को मजबूत करें, लेकिन अकेले उनकी राजनीतिक पहचान टिकाऊ नहीं होती। गौरतलब है कि शुक्रवार को आप के सात राज्यसभा सदस्य- राघव चड्ढा, पद्मश्री राजिंदर गुप्ता, पद्मश्री विक्रमजीत सिंह साहनी, एलपीयू के चांसलर अशोक मित्तल, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, संदीप पाठक और स्वाति मालिवाल भाजपा में शामिल हो गए। इनमें से अधिकांश सदस्य पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे। इस बड़े घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में आप की ताकत 10 से घटकर महज तीन रह गई है। अब सदन में पार्टी की ओर से संजय सिंह, एनडी गुप्ता और संत सीचेवाल ही सदस्य बचे हैं। वहीं पंजाब से केवल संत सीचेवाल ही एकमात्र आप सांसद रह गए हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद राघव चड्ढा ने कहा कि सातों सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ दो-तिहाई सदस्यों के विलय का नोटिस राज्यसभा के सभापति को सौंप दिया गया है। इस कदम के बाद भाजपा की राज्यसभा में संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जबकि राजग का आंकड़ा 146 तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विलय संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत वैध माना जाएगा, इसलिए इन सांसदों की सदस्यता पर कोई खतरा नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भगवंत मान का ट्वीट अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। इसे आप की ओर से पहला बड़ा और प्रतीकात्मक जवाब माना जा रहा है, जो सीधे शब्दों में नहीं बल्कि व्यंग्य के जरिए दिया गया है।

जालंधर में हरभजन का विरोध, AAP कार्यकर्ताओं ने घर पर लिखा ‘गद्दार’; मित्तल भी शिकार

जालंधर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह के पार्टी छोड़ने पर गुस्सा थम नहीं रहा। शनिवार को पंजाब में पार्टी कार्यकर्ता भड़के हुए नजर आए। नाराज कार्यकर्ताओं ने हरभजन के जालंधर स्थित आवास पर गद्दार लिख दिया। गौरतलब है कि पंजाब से राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह शुक्रवार को राघव चड्ढा के नेतृत्व में भाजपा में शामिल हो गए। आम आदमी पार्टी के कुल सात सांसदों ने भाजपा का दामन थामा है। वहीं, एक अन्य वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें अशोक मित्तल की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के गेट पर आप कार्यकर्ता गद्दार लिख रहे हैं। वीडियो में क्या आया नजर इसका वीडियो भी वायरल हुआ है। वीडियो में नजर आ रहा है कि आम आदमी पार्टी के कुछ कार्यकर्ता हरभजन सिंह के आवास पर पहुंचे हैं। यह लोग उनके घर की दीवार पर स्प्रे पेंट से गद्दार लिख रहे हैं। इस दौरान वहां सुरक्षा में तैनात पुलिस के जवान उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं। हालांकि पुलिस के रोकने के बावजूद यह लोग अपने मकसद में कामयाब हो जाते हैं। ब्लैक स्प्रे पेंट से अंग्रेजी और पंजाबी में दीवार पर गद्दार लिखा नजर आ रहा है। मित्तल काे भी नहीं छोड़ा कुछ ऐसा ही हाल अशोक मित्तल का भी हुआ है। अशोक मित्तल की लवली प्रोफेशन यूनिवर्सिटी के गेट के बाहर बड़ी संख्या में आप कार्यकर्ता पहुंचे। इन लोगों ने गेट पर ब्लैक स्प्रे पेंट से लिखा है, ‘पंजाब का गद्दार’। बताया जाता है कि इन राज्यसभा सांसदों के आप छोड़ने के बाद से पार्टी कार्यकर्ता काफी ज्यादा नाराज हैं। गौरतलब है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहाकि इन लोगों ने पंजाब की पीठ में छुरा घोंपा है और गद्दारी की है। ‘आप’ का क्या कहना है आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह ने शनिवार को कहा कि पार्टी राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर उन सात सांसदों को सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग करेगी, जिन्होंने एक दिन पहले पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था। संजय सिंह ने कहाकि दल-बदल विरोधी कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि राज्यसभा और लोकसभा में किसी भी प्रकार का विभाजन या गुटबंदी नहीं हो सकती। इसे कोई कानूनी मान्यता नहीं मिलती, भले ही दो-तिहाई बहुमत हो। उन्होंने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची और दल-बदल विरोधी कानून दोनों ही राज्यसभा या लोकसभा में किसी भी प्रकार के विभाजन, अलग गुट या धड़े को मान्यता नहीं देते, चाहे दो-तिहाई बहुमत ही क्यों न हो।

Indian Hockey को बड़ा झटका: Gurbux Singh नहीं रहे, ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट थे

मोहाली. भारतीय हॉकी के दिग्गज और 1968 मेक्सिको ओलंपिक के खिलाड़ी रहे गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का शुक्रवार शाम निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे और दिल का दौरा पड़ने से उन्होंने जीरकपुर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। गुरबख्श सिंह ग्रेवाल भारतीय हॉकी टीम के अहम सदस्य रहे, जिसने 1968 के मेक्सिको सिटी ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। वह अपने समय के बेहतरीन खिलाड़ियों में गिने जाते थे और उनकी खेल प्रतिभा ने भारतीय हॉकी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी एक और खास उपलब्धि यह रही कि उन्होंने अपने सगे भाई बलबीर सिंह ग्रेवाल के साथ एक ही ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह भारतीय हॉकी इतिहास में एक दुर्लभ और गौरवपूर्ण कीर्तिमान माना जाता है। खेल करियर के बाद भी उन्होंने हॉकी से जुड़ाव बनाए रखा। वह पश्चिम रेलवे में वरिष्ठ खेल अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे और मुंबई हॉकी एसोसिएशन के मानद सचिव के रूप में भी सेवाएं दीं। खिलाड़ी के साथ-साथ एक कुशल प्रशासक के रूप में भी उन्होंने खेल के विकास में अहम योगदान दिया। सुरजीत हॉकी सोसाइटी के पदाधिकारी इकबाल सिंह संधू सहित कई खेल संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इसे हॉकी जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया और परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की। जीरकपुर में हुआ अंतिम संस्कार, नम आंखों से दी विदाई गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का अंतिम संस्कार शनिवार सुबह जिरकपुर के श्मशान घाट में पूरे सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान खेल जगत से जुड़े कई लोगों, परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके योगदान को हमेशा याद रखने की बात कही।

Punjab Politics: Waris Punjab De लड़ेगा नगर निगम चुनाव, कैंडिडेट्स का ऐलान जल्द

मोगा. अकाली दल 'वारिस पंजाब दे' ने मोगा नगर निगम चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि नगर निगम के तहत आने वाले सभी 50 वार्डों में उतारे जाने वाले उम्मीदवारों के नामों का ऐलान जल्द ही किया जाएगा। प्रैस बयान में पार्टी के हलका इंचार्ज रछपाल सिंह सोसन ने कहा कि नगर निगम चुनाव लड़ने का फैसला पार्टी के संरक्षक बापू तरसेम सिंह और सांसद सरबजीत सिंह खालसा की मंजूरी के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी की तरफ से उतारे जाने वाले साफ छवि वाले उम्मीदवारों में हिंदू, सिख, ईसाई और मुस्लिम वर्गों के अलावा महिलाओं को भी काफी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह दुख की बात है कि पंजाब भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। उन्होंने कहा कि वह खुद एक व्यापारी हैं और व्यापारियों की समस्याओं को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने कहा कि अकाली दल 'वारिस पंजाब दे' मोगा शहर के हर तरफ के विकास, ड्रग्स के खात्मे और व्यापारियों के कारोबार से जुड़े मुद्दों पर नगर निगम चुनाव लड़ेगा। 

पंजाब में बासमती राइस के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना, क्रॉप डायवर्सिटी पर जोर

चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य में बासमती चावल के लिए एक हाई लेवल ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की जाएगी. इस पहल का उद्देश्य क्रॉप डायवर्सिटी को बढ़ावा देना, किसानों की आय में वृद्धि करना और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को कम करना है।  मुख्यमंत्री नीदरलैंड दौरे पर गए हैं, जहां उन्होंने कृषि और उद्योग क्षेत्र की एडवांस टेक्नोलॉजी को करीब से देखा और समझा. उन्होंने कहा कि पंजाब के किसानों ने देशहित में लंबे समय तक अपनी उपजाऊ जमीन और जल संसाधनों का अधिक उपयोग किया है, लेकिन अब गेहूं-धान के चक्र से बाहर निकलना समय की मांग है।  इस दिशा में क्रॉप डायवर्सिटी को बड़े स्तर पर बढ़ावा देना जरूरी है और इसमें नीदरलैंड महत्वपूर्ण सहयोगी साबित हो सकता है. मुख्यमंत्री ने रॉटरडैम में LT Foods की फैसिलिटी का दौरा किया, जहां उन्हें कंपनी के ग्लोबल प्रेजेंस और किसानों के साथ उसके मजबूत संबंधों के बारे में पता चला. उन्होंने सस्टेनेबल फार्मिंग पर जोर देते हुए कहा कि इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के मुताबिक उत्पादन के लिए कीटनाशकों के उपयोग में कमी लाना और बासमती चावल को वैश्विक बाजार में बढ़ावा देना आवश्यक है।  कंपनी ने पंजाब में बासमती के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने और कम कीटनाशक उपयोग वाली खेती को बढ़ावा देने का आश्वासन दिया है. मुख्यमंत्री ने डच कंपनियों और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के बीच रिसर्च और सहयोग को मजबूत करने की वकालत की. उन्होंने कहा कि घटते मुनाफे के कारण खेती अब कम लाभकारी हो गई है, जिससे किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।  उन्होंने उम्मीद जताई कि यह केंद्र बासमती चावल का उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाएगा. इसके साथ ही उन्होंने आल्समीयर स्थित विश्व के सबसे बड़े फूल बाजार का दौरा कर डच मॉडल को पंजाब में अपनाने की इच्छा भी जताई, जिससे कृषि वैल्यू चेन मजबूत होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नीदरलैंड सरकार के कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के साथ बैठक में तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए सहयोग पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि पंजाब ऑटोमेशन, एआई, ड्रोन और डेटा आधारित क्रॉप मैनेजमेंट जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए तैयार है. ग्रीनहाउस खेती को भी उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए उपयुक्त बताते हुए उन्होंने इसके विस्तार पर जोर दिया।  मुख्यमंत्री मान ने डच कंपनियों को पंजाब में निवेश के लिए आमंत्रित किया और राज्य की औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति-2026 तथा फास्टट्रैक पंजाब पोर्टल जैसी पहल की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि पंजाब निवेश के लिए तेजी से उभरता हुआ केंद्र बन रहा है. अंत में, भगवंत सिंह मान ने तकनीक आधारित, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर एकीकृत कृषि एवं औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।