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राहुल गांधी से मुलाकात के बाद अनिल जोशी का कांग्रेस में शामिल होना लगभग तय

पंजाब  पंजाब की राजनीति में एक और बड़ा फेरबदल होने वाला है। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के वरिष्ठ नेता और अमृतसर (उत्तर) से दो बार विधायक रह चुके अनिल जोशी जल्द कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। जानकारी के अनुसार, उन्होंने हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा जाहिर की। माना जा रहा है कि इसका औपचारिक ऐलान जल्द किया जाएगा। अनिल जोशी ने 20 नवम्बर 2024 को अकाली दल से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, जून 2025 में लुधियाना (पश्चिम) उपचुनाव के समय वे दोबारा अकाली दल में लौट आए। इसी साल हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने अमृतसर से अकाली दल के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले, 2007 से 2017 तक जोशी भाजपा के टिकट पर अमृतसर (उत्तर) से लगातार दो बार विधायक रहे। साल 2021 में किसानों के आंदोलन के दौरान भाजपा की नीतियों की आलोचना करने पर उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अकाली दल का दामन थाम लिया। जोशी 2012 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार में स्थानीय निकाय तथा चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान मंत्री भी रह चुके हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अनिल जोशी का कांग्रेस में शामिल होना अमृतसर और आसपास के इलाकों में पार्टी की स्थिति को मजबूत कर सकता है।

सियासी हलचल तेज, पंजाब के अनुभवी नेता कांग्रेस में शामिल होने वाले

चंडीगढ़ पंजाब की सियासत में बड़ी हलचल की खबर सामने आ रही है। अकाली दल के वरिष्ठ नेता और उप-प्रधान अनिल जोशी कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल से मुलाकात की। इसके बाद से यह कयास तेज हो गए हैं कि वे जल्द ही कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। अनिल जोशी 2022 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल की टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। इससे पहले वे भारतीय जनता पार्टी में थे और भाजपा की टिकट पर अमृतसर नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने गए। अकाली-भाजपा गठबंधन के दौरान उन्हें मंत्री पद भी मिला था। किसान आंदोलन के समय अनिल जोशी ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया और अकाली दल में शामिल हो गए थे। अब उनकी कांग्रेस में संभावित एंट्री को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। 

दिव्यांग बच्चों की जिंदगी में नई उम्मीद, मान सरकार ने खोले अवसरों के दरवाजे

पंजाब  पंजाब की मान सरकार ने दिव्यांग बच्चों को सशक्त बनाने और उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। अगस्त 2025 में, पंजाब ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत सांकेतिक भाषा के दुभाषियों, अनुवादकों और विशेष शिक्षकों को नियुक्त करने वाला भारत का पहला राज्य बनकर एक मिसाल कायम की है। यह फैसला उन बच्चों के लिए वरदान साबित होगा, जिन्हें सुनने या बोलने में परेशानी होती है और जिन्हें अक्सर कानूनी और शैक्षिक प्रक्रियाओं में अनदेखा कर दिया जाता है। यह सिर्फ एक सरकारी फैसला नहीं, बल्कि एक बच्चे की खामोश दुनिया में गूंजती हुई उम्मीद की कहानी है। जब कोई बच्चा जन्म से ही सुनने और बोलने में अक्षम होता है, तो उसका संसार शब्दों के शोर से दूर, एक शांत और सीमित दायरे में सिमट जाता है। उसकी आँखों में अनगिनत सवाल होते हैं, मन में बहुत कुछ कहने की चाह होती है, लेकिन जुबान खामोश रहती है। न्याय के गलियारों में, जहाँ शब्दों का ही राज चलता है, ऐसे बच्चों के लिए अपनी बात रखना किसी पहाड़ से कम नहीं होता। लेकिन पंजाब की मान सरकार ने इन बच्चों की खामोशी को अपनी आवाज बना दिया। यह सिर्फ एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि एक बच्चे के दिल से निकली दुआ का परिणाम है। यह पहल केवल कानूनी और राजनीतिक तक सीमित नहीं है। पटियाला में एक तकनीकी समाधान “साइन लिंगुआ फ्रैंका” ‘sign lingua franca’ को विकसित करने का फैसला लिया गया है, जो बोले गए शब्दों को सांकेतिक भाषा में बदल देता है। यह तकनीक उन लाखों लोगों के जीवन को बदल सकती है जो सुनने में असमर्थ है। मान सरकार केवल योजनाओं की घोषणा नहीं कर रही, बल्कि तकनीक और मानवीय संवेदना का संगम करके वास्तविक बदलाव ला रही है। मान सरकार की पहल यह दर्शाती है कि शासन केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि दिल से चलता है। यह सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा है—एक ऐसी यात्रा जो एक खामोश बच्चे को उम्मीद की राह दिखाती है। इस कदम से पंजाब ने न केवल एक मिसाल कायम की है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि जब संवेदना और इच्छाशक्ति एक साथ मिलती है, तो बड़े से बड़े अवरोध भी दूर हो जाते हैं। मान सरकार का यह हर दिव्यांग बच्चे के लिए एक मुस्कान और एक नए, सशक्त भविष्य का वादा है।   यह पहल लाखों मूक-बधिर बच्चों और उनके परिवारों के लिए सम्मान और उम्मीद की किरण है। जब एक बच्चा अपनी बात कह पाता है और उसे समझा जाता है, तो यह उसके आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देता है। यह फैसला इन बच्चों को यह महसूस कराता है कि वे भी समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी आवाज़ भी मायने रखती है, भले ही वह आवाज़ शब्दों में न हो। मान सरकार का यह कदम एक मानवीय पहल है। यह दिखाता है कि एक संवेदनशील सरकार कैसे समाज के सबसे कमजोर तबके के लिए बदलाव ला सकती है। पंजाब, दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए अपनी विधानसभा में सांकेतिक भाषा लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने दिव्यांगजनों की चिंताओं को दूर करने के लिए यह अनूठी पहल की है। जिसने दिव्यांगों को यह अहसास कराया कि वे भी इस समाज का अभिन्न अंग हैं। इससे उन्हें सरकार की नीतियों को समझने और अपनी राय रखने का मौका मिला। डॉ. बलजीत कौर ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 40 के तहत, दिव्यांगजनों को उनके मानवाधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए संचार प्रणालियों को सुलभ बनाना आवश्यक है। इसी क्रम में, पंजाब विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण, बजट सत्र और अन्य महत्वपूर्ण चर्चाओं का प्रसारण भी सांकेतिक भाषा में किया गया | यह फैसला भारत के अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणा बनेगा। मान सरकार की अगवाई मे पंजाब ने एक ऐसा रास्ता दिखाया है, जहाँ हम सभी को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि हमारे समाज का कोई भी हिस्सा पीछे न छूटे। यह एक ऐसी कहानी है, जो दिलों को छू लेती है और हमें यह याद दिलाती है कि जब हम सब मिलकर चलते हैं, तो कोई भी दूरी असंभव नहीं होती। पंजाब मे मान सरकार ने दिखा दिया कि एक छोटी सी शुरुआत कैसे एक बड़े और सकारात्मक बदलाव की नींव रख सकती है। यह केवल एक ‘काम’ नहीं, बल्कि एक ‘क्रांति’ है। “मान सरकार ने साबित किया – सच्चा विकास तब होता है जब समाज का हर वर्ग अपनी ‘भाषा’ में खुद को व्यक्त कर सके।”  

सेवा की नई पहचान: डॉ. बलबीर सिंह का घर बनेगा आम आदमी क्लिनिक

पंजाब  पंजाब की ईमानदार सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसके नेता जनता की भलाई के लिए अपने निजी हितों से ऊपर उठकर सोचते हैं। इसकी सबसे बड़ी मिसाल स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह द्वारा अपने पैतृक घर और उससे जुड़ी दुकानों की इमारत सरकार को समर्पित करना है, ताकि गांव भौरा (जिला नवांशहर) में आम आदमी क्लिनिक बनाया जा सके। यह कदम न केवल उनकी ईमानदारी और जनता के प्रति समर्पण को दर्शाता है, बल्कि पंजाब की राजनीति में एक अनोखा संदेश भी देता है कि सच्चे जन–प्रतिनिधि कौन होते हैं। डॉ. बलबीर सिंह के इस प्रेरणादायक फैसले से गांव भौरा के लोगों को बहुत लाभ मिलेगा। अब उन्हें उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर-दराज़ के शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। क्लिनिक बनने से लोगों को नज़दीक ही इलाज की सुविधाएँ मिलेंगी, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बचेगा। यह सरकार के उस वादे को पूरा करता है कि स्वास्थ्य सेवाओं को हर गांव और हर मोहल्ले तक पहुँचाया जाए। आम आदमी क्लिनिकों में जनता को मुफ्त इलाज, मुफ्त दवाइयां और मुफ्त लैब टेस्ट की सुविधाएँ मिलती हैं। ये वही सुविधाएँ हैं जो पहले केवल बड़े शहरों के अस्पतालों में ही उपलब्ध थीं। डॉ. बलबीर सिंह के इस कदम से अब ये सेवाएँ गांव स्तर पर भी आसानी से लोगों तक पहुँचेंगी। यह जनता–केंद्रित सोच पंजाब सरकार की स्वास्थ्य नीति को और अधिक मजबूत करती है। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका उद्देश्य सिर्फ यह है कि कोई भी पंजाबी इलाज से वंचित न रह जाए। हर वर्ग के लोग, चाहे गरीब हों या अमीर, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बराबर हकदार हैं। सरकार द्वारा चलाए जा रहे ये क्लिनिक जनता के बीच भरोसा बढ़ाते हैं कि सरकार उनकी सेहत के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गांव भौरा में क्लिनिक बनाने के लिए अपनी निजी संपत्ति देना किसी आम राजनेता की बात नहीं, यह केवल वही कर सकता है जो जनता की ज़रूरतों को अपने स्वार्थ से ऊपर रखता हो। डॉ. बलबीर सिंह का यह कदम केवल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए क्रांतिकारी नहीं है, बल्कि पंजाब की राजनीति के लिए भी एक मिसाल है। यह जनता को यह संदेश देता है कि यदि नेता चाहें तो वे अपनी संपत्ति भी जनता की भलाई के लिए समर्पित कर सकते हैं। यह कदम सिर्फ गांव भौरा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पंजाब के लिए एक प्रेरणा है। इससे साबित होता है कि पंजाब सरकार की सोच जनता–केंद्रित है और वह अपने हर फैसले में जनता की भलाई को सबसे ऊपर रखती है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह की यह पहल लोगों के दिलों में सरकार के प्रति विश्वास को और अधिक मजबूत कर रही है।  

किसानों को राहत: खेत से रेत हटाने के लिए सरकार देगी ₹7200 प्रति एकड़ सहायता

चंडीगढ़ पंजाब के बाढ़ प्रभावित लोगों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जिलों में ‘जिसदा खेत, उसदी रेत’ योजना के तहत किसानों को अपने खेतों से रेत निकालने के लिए 7200 रुपए प्रति एकड़ देने की घोषणा की। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान चर्चा को समेटते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत किसानों को अपने खेतों से बाढ़ के कारण जमा हुई रेत, मिट्टी निकालने और यदि वे चाहें तो उसे बेचने की अनुमति दी गई है। बाढ़ के कारण डूबे गांवों के कई खेतों में रेत और मिट्टी जमा हो गई है, इसलिए यह निर्णय लिया गया है। बाढ़ पीड़ितों को बड़ी राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने एसडीआरएफ नियमों के तहत फसल नुकसान के मुआवजे में बढ़ोतरी की है। 26 से 33 प्रतिशत फसल नुकसान के लिए मुआवजा 2000 रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रति एकड़, 33 से 75 प्रतिशत फसल नुकसान के लिए 6800 रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रति एकड़, और 75 से 100 प्रतिशत फसल नुकसान के लिए 6800 रुपए से बढ़ाकर 20,000 रुपए प्रति एकड़ किया गया है। 20,000 रुपये प्रति एकड़ के मुआवजे में राज्य सरकार 14,900 रुपए का योगदान देगी, जो देश में सबसे अधिक है। वह कल (मंगलवार) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर राज्य के विभिन्न मुद्दों को उठाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत के लिए 1.20 लाख रुपए और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए मुआवजा 6500 रुपए से बढ़ाकर 35,100 रुपए कर दिया गया है। बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी पहले से ही तय समय के भीतर चल रही है। राज्य सरकार उन किसानों को प्रति हेक्टेयर 47,500 रुपए (18,800 रुपए प्रति एकड़) देगी, जिनकी जमीन नदियों में बह गई है। पंजाब एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक आलोचना का हमेशा स्वागत है क्योंकि आलोचक ही सच्चे दोस्त होते हैं जो सरकार के कामकाज में कमियों को उजागर करते हैं। उन्होंने बाढ़ के दौरान निस्वार्थ सामाजिक सेवा करने वालों का विशेष रूप से धन्यवाद करते हुए कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने पुनर्वास के लिए शानदार काम किया है। राशन और अन्य बाढ़ राहत सामग्री अन्य राज्यों के वालंटियर्स द्वारा भी प्रदान की गई, जो वास्तव में प्रशंसनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुनर्वास के लिए गांवों को गोद लिया है। सेना और एनडीआरएफ ने राहत कार्यों के लिए अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए हैं।  अब पुनर्वास का समय है और राज्य सरकार इस संबंध में एक विधेयक पेश कर रही है। राज्य सरकार दीवाली के त्योहार से पहले 15 अक्टूबर से बाढ़ प्रभावित लोगों को मुआवजा वितरित करना शुरू कर देगी। पंजाब सरकार ने राज्य के सेम प्रभावित क्षेत्रों के लिए पहले ही 4.50 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। मौसम की भविष्यवाणी के लिए उन्नत तकनीक विकसित करने के लिए आईआईटी खड़गपुर और बेंगलुरु के साथ-साथ थापर यूनिवर्सिटी, पटियाला को भी शामिल किया गया है। थापर यूनिवर्सिटी ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को रोकने और कम करने के लिए मौसम संबंधी भविष्यवाणियों के लिए अपना सैटेलाइट लॉन्च करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भारत सरकार से बाढ़ के मुआवजे को बढ़ाकर 50,000 रुपए प्रति एकड़ करने की मांग की है। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि प्रधानमंत्री के पास महत्वपूर्ण मुद्दों पर राज्यपाल से मिलने का समय है, जबकि लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने राहत कार्यों के लिए प्रधानमंत्री से मुलाकात की मांग की, लेकिन प्रधानमंत्री के पास चुने हुए प्रतिनिधियों के लिए समय नहीं है। इस गंभीर संकट की घड़ी में भी केंद्रीय मंत्री राज्य सरकार और लोगों की मदद करने के बजाय केवल बाढ़ पर्यटन के लिए तस्वीरें खिंचवाने के लिए राज्य में आए। प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1600 करोड़ रुपए भी राज्य के साथ एक क्रूर मजाक है। उन्होंने कहा कि यह भी सुनने में आ रहा है कि राज्य को एसडीआरएफ से मिलने वाले 240 करोड़ रुपए भी इसमें शामिल कर दिए गए हैं। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री चुनावी राज्यों जैसे बिहार में बड़े राहत पैकेज की घोषणा कर रहे हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सौतेली मां जैसा व्यवहार का कड़ा विरोध करता है और वह मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री के सामने ये मुद्दे उठाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ऐसी नीच चालों से लोगों के जनादेश को दरकिनार कर रही है, जो पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने ‘अघोषित राष्ट्रपति शासन’ लागू किया हुआ है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भगवंत सिंह मान ने कहा कि केंद्र सरकार संविधान के मूल संघीय ढांचे को नष्ट कर रही है, जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। विपक्षी नेता के विरोध पर कड़ा प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने पूछा कि राज्य सरकार द्वारा स्थापित रंगला पंजाब फंड का विरोध करने के पीछे उनका क्या तर्क है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने यह फंड सी.एस.आर. और अन्य सामाजिक संस्थाओं, जो बाढ़ पीड़ितों की मदद करना चाहती हैं, से योगदान प्राप्त करने के लिए स्थापित किया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि विपक्षी नेता उन कारणों से, जिनसे वे अच्छी तरह वाकिफ हैं, इस संबंध में आधारहीन बयान जारी कर रहे हैं।  

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट: डीजीपी बोले- आईएसआई को कामयाब नहीं होने देंगे

संगरूर ऑपरेशन संधूर’ के बाद आईएसआई लगातार पंजाब का माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है, लेकिन पंजाब पुलिस उनके नापाक इरादों को कभी कामयाब नहीं होने देगी। डीजीपी पंजाब गौरव यादव ने सोमवार को अमृतसर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अब सीमा पार से हेरोइन की खेप के साथ-साथ छोटे हथियार भी आने लगे हैं, जिसके तहत अब तक कई तस्करों को हथियारों और हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के सीजन को देखते हुए राज्य भर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसके मद्देनजर पंजाब पुलिस के अलावा बीएसएफ और अर्धसैनिक बल के जवान हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखेंगे। इस दौरान उन्होंने ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ अभियान के तहत अब तक के प्रदर्शन की विस्तृत जानकारी भी साझा की। डीजीपी ने कहा कि पंजाब पुलिस का कई देशों में आतंकवादियों और गैंगस्टरों के खिलाफ अभियान चल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अपराधी यह न सोचें कि वे विदेश में बैठकर सुरक्षित हैं। कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है। उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में सीमावर्ती जिलों में बीएसएफ की सात कंपनियां तैनात की जाएंगी। पिछले दिनों हुई बरामदगी और गिरफ्तारियां इस बात का सबूत हैं कि बीएसएफ और पंजाब पुलिस सीमा पर पूरी तरह तैयार है। अगले साल होगी 3400 कांस्टेबलों की भर्ती डीजीपी ने कहा कि आने वाले साल में पुलिस में 3400 कांस्टेबलों की भर्ती की जाएगी। 150 इंस्पेक्टर, 450 सब इंस्पेक्टर और 1000 एएसआई को पदोन्नत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस की ओर से एक नया हेल्पलाइन नंबर 1800330110 जारी किया गया है। उन्होंने जनता से इस नंबर पर गैंगस्टरों के खिलाफ सूचना देने की अपील की।  पंजाब के डीजीपी‌ गौरव यादव सोमवार को अमृतसर में मीडिया को संबोधित करते हुए। निस‘ऑपरेशन संधूर’ के बाद आईएसआई लगातार पंजाब का माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है, लेकिन पंजाब पुलिस उनके नापाक इरादों को कभी कामयाब नहीं होने देगी।  

दर्दनाक बस हादसा: पंजाब में यात्रियों की चीख-पुकार से मचा कोहराम

तलवाड़ा/ हाजीपुर प्राइवेट कंपनी की एक मिनी बस अनियंत्रित होकर सफेदे के पेड़ से टकरा गई। इसमें 7 सवारियों को चोटें आई हैं। जानकारी के अनुसार यह मिनी बस दसूहा से तलवाड़ा आ रही थी कि वह झीर दा खूह बस स्टाफ से पीछे ही कुछ दूरी पर सफेदे के पेड़ से टकरा गई। बस के एक भाग को काफी क्षति पहुंची है। यह मिनी बस जब पेड़ से तो बीच सवारियों की चीखें निकलनी शुरू हो गईं। आसपास से लोग हादसा स्थल पर पहुंचे। बस में सवार घबराई कुछ सवारियों ने तो जैसे-तैसे बाहर आ निकलने में हिम्मत जुटा ली, लेकिन जो सवारियां घबराहट की परिस्थितियों में बीच ही सहारा ढूढ़ रही थीं उन्हें लोगों ने बड़ी हिम्मत से बाहर निकाला। हादसे की सूचना मिलते ही एम्बुलैंस गाड़ी भी घटनास्थल पर पहुंच गईं। पुलिस ने भी मौके पर आकर हादसे के कारणों को जानना शुरू कर दिया। कुछ के घायल सवारियों को अस्पताल उपचार हेतु भेजा गया। ड्राइवर सहित जिन 7 सवारियों को हल्की चोटें आईं उनमें तारा चंद पुत्र महिंदर सिंह वहीफतो (ड्राइवर), ममता रानी पत्नी निर्मल सिंह कराडी, प्रीतपाल सिंह पुत्र तरसेम लाल श्रीपन्डायान, सुरेश कुमारी जालंधर, अमरजीत कौर पत्नी गुरदीप सिंह मीर दसूहा, सुरजीत सिंह पुत्र शिव सिंह पंडोरी, कमलजीत कौर पत्नी सुरजीत सिंह शामिल हैं। चोटिल सवारियां इलाज के बाद अपने गंतव्य स्थानों को चली गईं।  

सरेआम मेडिकल स्टोर पर धावा: जालंधर में फिल्मी अंदाज में अंजाम दी वारदात

जालंधर  जालंधर में चोरों और लुटेरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। इसी बीच जालंधर के लद्देवाली इलाके में फिल्मी स्टाइल में नकाबपोश लुटेरों द्वारा वारदात को अंजाम दिया गया। बताया जा रहा है कि गत शाम मेडिकल स्टोर में दुकानदार अकेला था कि 3 लुटेरे तेजधार हथियारों के साथ दुकान में आए और दुकानदार पर हमला कर लूट की वारदात को अंजाम दिया। यह पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। दुकानदार बलविंदर के अनुसार लुटेरों ने उसका मोबाइल और ₹5000 नगद छीन लिया। दुकानदार के चिल्लाने की आजाव सुनकर आसपास के लोग आ गए और एक लुटेरे को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पकड़ा गया लुटेरा थाना बिलगा गांव शेखपुरा का रहने वाला है, जबकि बाकी दो लुटेरे अभी फरार हैं। वहीं सवाल खड़े हो रहे हैं कि शाम के समय इलाके में चहल-पहल होती है पर फिर भी बेखौफ होकर लुटेरों द्वारा वारदात को अंजाम दिया गया। थाना रामा मंडी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और इलाके में गश्त बढ़ाने की बात कही है। 

कंजक पूजन के दिन जालंधर मंदिर में अद्भुत नजारा, दर्शनों के लिए उमड़ी भीड़

जालंधर नवरात्रों के अवसर पर कंजक पूजन के दिन सूदा चौक स्थित मशहूर महावीर मंदिर में एक अनोखी घटना देखने को मिली। जानकारी के अनुसार मंदिर में विराजमान माता रानी की मूर्ति अचानक अपने आप हिलने लगी। इस घटना के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर के पुजारी ने बताया कि हर साल नवरात्रों में मंदिर में दुर्गास्तुति का पाठ किया जाता था, लेकिन इस बार किसी कारण यह पाठ प्रारंभ नहीं हो सका। हालांकि, आज माता की मूर्ति हिलने के बाद श्रद्धालुओं के आग्रह पर दुर्गास्तुति का पाठ शुरू कर दिया गया। एक श्रद्धालु महिला ने बताया कि सुबह करीब 9 बजे जब वह दर्शन करने पहुंची, तो माता की मूर्ति लगभग 10 बार हिलती हुई उसने खुद देखी। इसके बाद उसने मोहल्ले के लोगों को सूचना दी, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंचने लगे। दूसरे श्रद्धालु ने बताया कि करीब 11 बजे पुजारी के आने तक भी मूर्ति हिलती रही। सभी लोग इस घटना को माता रानी का चमत्कार मान रहे हैं। वर्तमान में मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं और लोग दर्शन के लिए लगातार पहुंच रहे हैं। 

चंडीगढ़ में बढ़ा पारा: दिल्ली के बाद अब उत्तर भारत में सबसे ज्यादा गर्मी

चंडीगढ़ पिछले 25 बरसों की चौथी सबसे ज्यादा बरसात झेलने के बाद अब सितंबर के आखिर में मौसम के तेवर पसीने छुड़ा रहे हैं। कुछ दिनों से कम न हो रही उमस के बीच अब बढ़ता तापमान गर्मी का एहसास करवा रहा है। तापमान में बढ़ौतरी के बीच सोमवार को पूरे दिन लोगों को गर्मी और उमस का तीखा एहसास हुआ। आलम ये रहा कि शाम होते होते मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक दिल्ली के बाद चंडीगढ़ में उत्तर भारत का सबसे गर्म दिन दर्ज हुआ। दिल्ली का अधिकतम तापमान 37.5 जबकि चंडीगढ़ शहर में पारा 37 डिग्री दर्ज हुआ। आने वाले दिनों में भी मौसम के यही तेवर झेलने पड़ सकते है, लेकिन अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में राहत मिल सकती है।  इसलिए मौसम के तेवर तीखे हो रहे महसूस मानसून की सामान्य से ज्यादा बारिश के बाद अचानक मौसम साफ हुआ। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो अूममन मानसून की विदाई के बाद मौसम पूरी तरह साफ होने में कुछ दिनों का समय लगाता है, लेकिन इस बार मानसून की विदाई के साथ ही मौसम पूरी तरह साफ होने के तापमान में बढ़ौतरी हो रही है। दूसरा अहम कारण इस बार की भारी बारिश के बाद हवा और जमीन में नमी की भारी मात्रा में उमस ने तापमान में बढ़ौतरी के बीच गर्मी के तेवर तीखे कर दिए।  विक्षोभ बारिश के साथ ही हवाओं की गतिविधि तेज करेगी  मौसम विभाग के मुताबिक एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। हालांकि इस गतिविधि से शहर पर कोई सीधा असर नहीं है लेकिन हिमाचल में ये विक्षोभ बारिश के साथ ही हवाओं की गतिविधि तेज करेगी। इस दौरान अगर ऊंचे पहाड़ों पर मामूली बर्फ गिर जाती है तो हवाओं की गतिविधियों से मैदानी इलाकों में भी तापमान में कमी आने के साथ ही ठंडी हवाएं मैदानों तक आने से नमी की मात्रा कम होगी।