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वेटिंग लिस्ट में नंबर-1 अभ्यर्थी को मिलेगी नौकरी, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का आदेश

  चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब वक्फ बोर्ड में चपरासी पद की भर्ती से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए वेटिंग लिस्ट में पहले स्थान पर रहे अभ्यर्थी को नियुक्ति के लिए विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब चयनित अभ्यर्थियों में से कोई उम्मीदवार उपलब्ध पद पर नियुक्ति ग्रहण नहीं करता है और उसकी जगह रिक्ति बनी रहती है, तो मेरिट के अनुसार वेटिंग लिस्ट के अगले उम्मीदवार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। छह साल पहले शुरू हुई भर्ती की प्रक्रिया जस्टिस नामित कुमार की पीठ ने यह आदेश प्रदीप कुमार की याचिका पर सुनाया। पंजाब वक्फ बोर्ड ने 30 अगस्त 2020 को विभिन्न पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें चपरासी के 34 पद शामिल थे। बाद में इन पदों की संख्या घटाकर 24 कर दी गई। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 24 उम्मीदवारों का चयन किया गया, जबकि पांच अभ्यर्थियों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया। प्रदीप कुमार वेटिंग लिस्ट में पहले नंबर पर थे। याचिकाकर्ता के अनुसार चयनित 24 उम्मीदवारों में से केवल 23 ने चपरासी पद पर ज्वाइन किया। एक चयनित उम्मीदवार करनवीर सिंह ने चपरासी के पद पर ज्वाइन नहीं किया, बल्कि किसी अन्य पद पर नियुक्त हुआ। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में भी 24 में से 23 नियुक्तियां चपरासी पद पर होने और बाद में चार लोगों के इस्तीफा देने की बात सामने आई थी। इस तरह पांच पद रिक्त बताए गए थे। वेटिंग लिस्ट की अवधि एक वर्ष थी पंजाब वक्फ बोर्ड ने हाई कोर्ट में दलील दी कि वेटिंग लिस्ट की अवधि एक वर्ष थी और याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत अभ्यावेदन दिसंबर 2022 में प्राप्त हुआ था। इसी आधार पर उसकी नियुक्ति के दावे को फरवरी 2023 में खारिज कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने हालांकि पूर्व के न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वेटिंग लिस्ट में नाम होने मात्र से नियुक्ति का स्वत अधिकार नहीं बनता, लेकिन नियुक्ति प्राधिकारी को उपलब्ध रिक्ति और अभ्यर्थी की मेरिट को नजरअंदाज कर मनमाने ढंग से कार्रवाई करने की छूट भी नहीं है। अदालत ने कहा कि रिक्ति उपलब्ध होने पर मेरिट के अनुसार अगले अभ्यर्थी को नियुक्ति की पेशकश की जानी चाहिए। प्रदीप कुमार की नियुक्ति का दावा खारिज वाला आदेश रद हाई कोर्ट ने प्रदीप कुमार की नियुक्ति का दावा खारिज करने वाला आदेश रद कर दिया। पंजाब वक्फ बोर्ड को निर्देश दिया गया कि वह चपरासी पद पर उनकी नियुक्ति के मामले पर विचार करे और अन्य 23 उम्मीदवारों को नियुक्ति दिए जाने की तारीख से वरिष्ठता, वेतन निर्धारण समेत सभी काल्पनिक लाभ देने पर निर्णय ले। यह पूरी कार्रवाई आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर करनी होगी।  

मुफ्त योजनाओं का दांव: पंजाब की राजनीति में गारंटियों का बढ़ता असर

चंडीगढ़  पंजाब में सियासी दलों की ओर से मुफ्त गारंटियों पर फिर दांव खेलने की तैयारी है। सूबे की सियासत में ये मुफ्त सुविधाएं अब महज लोकलुभावन घोषणाएं ही नहीं रहीं, बल्कि मतदाताओं तक असरदार पहुंच का एक बड़ा माध्यम बन चुकी हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार जहां इसे अपनी सियासी ताकत का एक बड़ा आधार मानती है वहीं सत्ता परिवर्तन के बाद पार्टी इन सबके बंद होने का डर भी दिखा रही है।अपने लोक मिलनी कार्यक्रमों के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान अब खुलेआम इस तरह की आशंका मतदाताओं के समक्ष जता रहे हैं।  पुराना है सियासी दांव मुफ्त गारंटियों व सुविधाओं की बात करें तो यह सियासी दांव नया नहीं है। पंजाब में पिछले चार चुनावों का ट्रेंड देखें तो इस तरह की लोकलुभावन घोषणाएं पहले की जाती रही हैं। सभी प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार इस तरह के वादे किए और उन्हें इसका लाभ भी मिला। साल 2022 में पहली बार पंजाब की सत्ता पर काबिज हुई आम आदमी पार्टी की सरकार को तो इसका बंपर फायदा मिला था। लिहाजा, इस बार भी आप इस पर बड़ा दांव खेलने जा रही है। ऐसे में दूसरे दल भी विभिन्न वर्ग के मतदाताओं को साधने के लिए इस तरह की मुफ्त गारंटियों का सहारा लेने की तैयारी में हैं। उधर, राजनीतिक मामलों के जानकार मलकीत सिंह कहते हैं कि चुनावी चौसर पर इन मुफ्त गारंटियों के बूते मिली जीत सूबे की अर्थव्यवस्था को बहुत प्रभावित करती है। मुफ्त बंट रहे राजस्व के कारण राज्यों का राजकोषीय घाटा बढ़ता है। सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों व नए रोजगार सृजन जैसे बुनियादी ढांचागत निवेश के लिए बजट की भारी कमी होती है।  सीएम की चेतावनी मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चेतावनी देते हुए कहा कि पारंपरिक विरोधी पार्टियों की सत्ता में वापसी से पंजाब की कल्याणकारी योजनाएं खतरे में पड़ जाएंगी। मान ने कहा कि विरोधी धड़े यदि सत्ता में आ गए तो मुफ्त बिजली व महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजनाएं और 1000-1500 रुपये की सम्मान राशि बंद कर देंगे। साथ ही, निजी संस्थानों को बढ़ावा देने के लिए मोहल्ला क्लीनिकों और सरकारी स्कूलों को कमजोर किया जाएगा। लोक मिलनी कार्यक्रमों में इस तरह की आशंका जताते हुए सीएम दोबारा आप को मौका देने की अपील कर रहे हैं। गेमचेंजर बनीं इन घोषणाओं से पलटे समीकरण साल 2022 : आप सरकार – 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली, दो माह में 600 यूनिट तक बिलिंग चक्र में शून्य बिल की व्यवस्था है। – महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त सफर। – मावां-धीयां सत्कार योजना : महिलाओं को हर महीने 1000 व एससी महिलाओं को 1500 रुपये आर्थिक राशि मिलती है। – मुख्यमंत्री सेहत योजना : हर परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा। आम आदमी क्लीनिक : क्लीनिकों में प्राथमिक इलाज, दवाओं और निर्धारित जांचें मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। – मेरी रसोई राशन किट : करीब 40 लाख परिवारों को तिमाही मुफ्त किट में चीनी, चना दाल, सरसों तेल, हल्दी और नमक देने की योजना। – सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा और किसानों के लिए मुफ्त बिजली। किशोरियों के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड। साल 2017 : कांग्रेस सरकार – किसानों के लिए मुफ्त बिजली और कर्ज माफी योजना। – अप्रैल 2021 से महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त सफर। – सरकारी स्कूलों की छात्राओं को मुफ्त साइकिल सुविधा। – आटा-दाल योजना में सब्सिडी वाला राशन। सामाजिक सुरक्षा पेंशन 2021 में 750 से बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रतिमाह की गई। – आशीर्वाद योजना : आर्थिक रूप से कमजोर-एससी परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए सहायता राशि साल 2021 में 21 से बढ़ाकर 51 हजार की गई। साल 2007-2017 : शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार – आटा-दाल योजना, 2016-17 तक करीब 36.35 लाख परिवार योजना के दायरे में थे। – किसानों को मुफ्त बिजली, एससी, बीसी व बीपीएल परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली। – माई भागो विद्या योजना : सरकारी स्कूलों की छात्राओं को स्कूल आने-जाने के लिए मुफ्त साइकिलें दी जाती थीं। – मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा : साल 2016 से विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए चयनित श्रद्धालुओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती थी। – शगुन योजना : गरीब व एससी परिवारों की बेटियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता योजना। 

ED की कार्रवाई पर AAP का पलटवार, कहा- ‘पंजाब नहीं झुकेगा’

चंडीगढ़. पंजाब में ईडी की कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा ईडी की रेड करवाने लगती है। पंजाब को दबाने के लिए चार लाख ईडी के अधिकारी भी भेज दिए जाएं तो पंजाबी डरने वाले नहीं हैं। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि भाजपा की नीयत पंजाब पर कब्जा करने की है और इसी उद्देश्य से ईडी को पंजाब भेजा गया है। उन्होंने कहा कि ईडी पंजाब में रेड करके कुछ नहीं पा सकेगी। सिसोदिया ने पंजाब में कट्टर ईमानदारी वाली सरकार चलने का दावा करते हुए कहा कि यहां ईडी को भ्रष्टाचार नहीं मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी के अधिकारी लोगों के घरों के ताले तोड़कर अंदर जा रहे हैं।

बेटी के MBBS एडमिशन के लिए फर्जी डेथ सर्टिफिकेट? बर्खास्त AIG राजजीत का मामला

चंडीगढ. ड्रग्स मामले में पंजाब सरकार द्वारा बर्खास्त किए गए पीपीएस अधिकारी राजजीत सिंह हुंदल का विवादों से लंबे समय से नाता रहा है। राजजीत ने तो अपना डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र) भी बनवाया था। राजजीत अपनी सैटिंग के दम पर हमेशा ही महत्वपूर्ण पदों पर रहा और बर्खास्तगी से पहले तक एनआरआइ विंग का एआइजी हेडक्वार्टर के पद पर तैनात था। राजनीतिक पहुंच के कारण राजजीत पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन एसआइटी की रिपोर्ट खुलने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बर्खास्त कर दिया था। राजजीत सिंह सबसे पहले 2013 में विवादों में आया था। जब उसने अपनी बेटी का मेडिकल कालेज में एमबीबीएस में दाखिला करवाने के लिए खुद का ही मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया था।

SIR पर सांसद तिवारी का सवाल, चंडीगढ़ में 1.99 लाख मतदाता कम कैसे हुए?

चंडीगढ़. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद 1,99,596 मतदाताओं की संख्या कम होना अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) प्रेरणा पुरी को पत्र लिखकर एसआईआर पर सवाल उठाए हैं। साथ हीवार्डवार और मतदातावार पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। तिवारी ने अपने पत्र में कहा है कि एक जून 2024 से 22 सितंबर 2026 तक चंडीगढ़ की मतदाता सूची में 1,99,596 मतदाताओं की कमी आई है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कम होने के बावजूद अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन मतदाताओं के नाम किस कारण से हटाए गए हैं। तीन स्तर पर मांगी जानकारी सांसद ने सीईओ से एक जून 2024 से अब तक हटाए गए अथवा अंतिम सूची में शामिल नहीं किए गए सभी मतदाताओं की वार्डवार पूरी जानकारी मांगी है। इसमें मतदाता का नाम, वार्ड और बूथ नंबर, ईपीआइसी नंबर, नाम हटाए जाने की तारीख और दर्ज कारण शामिल करने को कहा गया है। एसआईआर के बाद 1.99 लाख मतदाता घटे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मंगलवार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के साथ ही इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर मतदाता संख्या में आई कमी पर सवाल उठाए हैं। तिवारी के अनुसार, 1 जून 2024 से 22 सितंबर 2026 के बीच चंडीगढ़ में मतदाताओं की संख्या 1,99,596 घट गई, जो कुल मतदाताओं का 30.26 प्रतिशत है। उन्होंने इतनी बड़ी कमी के कारण सार्वजनिक करने की मांग की है। डुप्लीकेट और स्थानांतरित मतदाताओं का ब्योरा मांगा तिवारी ने कहा कि हटाए गए नामों में कितने डुप्लीकेट, कितने स्थानांतरित और कितने अन्य कारणों से सूची से बाहर हुए, यह स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग से श्रेणीवार जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि यदि हटाए गए मतदाता डुप्लीकेट थे तो अब किस स्थान पर पंजीकृत हैं। वहीं, यदि कोई फर्जी या घोस्ट वोटर था तो उसके नाम भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए। दस्तावेज नहीं होने पर नाम हटने का सवाल तिवारी ने यह भी पूछा कि कहीं निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण गरीब या अन्य मतदाताओं के नाम तो नहीं हटे। उन्होंने कहा कि हटाए गए मतदाताओं के नाम, पते और नाम हटाने के कारण सार्वजनिक होने से स्थिति स्पष्ट होगी। एसआईआर का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान कर मतदाता सूची को अद्यतन करना है। 

GAMADA ऑफिस में AAP कार्यकर्ताओं का हंगामा, 48 घंटे से ED की कार्रवाई जारी

मोहाली. ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) मुख्यालय पर 48 घंटे से चल रही ईडी की रेड के खिलाफ आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने वीरवार को मोर्चा खोल दिया है। आम आदमी पार्टी के समर्थकों और प्रतिनिधियों ने गमाडा मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए कार्यालय का घेराव किया। कार्यालय के बाहर खड़ी ईडी की टीम की गाड़ियों के शीशे तोड़े। प्रदर्शनकारियों की पुलिस से धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय का गेट तोड़ा और बड़ी संख्या में अंदर दाखिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गमाडा कार्यालय में चल रही ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी वरुण शर्मा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। ईडी की कार्रवाई चल रही होने के कारण कार्यालय परिसर में सुरक्षा को लेकर पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। आप समर्थकों ने कहा कि गमाडा कार्यालय में लगातार तीसरे दिन ईडी की कार्रवाई चल रही है। इसे लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। प्रदर्शन के कारण गमाडा कार्यालय के बाहर काफी देर तक माहौल गरमाया रहा। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने और व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया। पुलिस ने गमाडा ऑफिस के बाहर बैरिकेडिंग बढ़ा दी है। बता दें कि मंगलवार सुबह से ईडी की टीम ने गमाडा मुख्यालय और दो आईएएस अधिकारियों के घरों सहित दिल्ली, मोहाली और लुधियाना में कई ठिकानों पर छापेमारी शुरू की थी। ईडी की टीम ने गमाडा की तीन मंजिलों को सील कर रखा है। कैबिनेट मंत्री के घर पर भी रेड इसी बीच बुधवार को ईडी ने कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां के रिश्तेदार गुरप्रीत सिंह सैनी के लुधियाना स्थित घर पर भी रेड की थी। आप कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर पंजाब में डर का माहौल बना रही है। 

PU सीनेट चुनाव की मतगणना पर ब्रेक, 36 घंटे बाद रोकी गई काउंटिंग

चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट चुनाव की रजिस्टर्ड ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना लगातार 36 घंटे चलने के बाद वीरवार दोपहर एक बजे रोक दी गई। मतगणना में तैनात स्टाफ को लगातार काम के बाद आराम नहीं मिल पाने के कारण यह फैसला लिया गया। पीयू रजिस्ट्रार वाइपी वर्मा ने बताया कि अब शुक्रवार सुबह 9:30 बजे से दोबारा मतगणना शुरू होगी। 15 सीटों के लिए 51 प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे में मतगणना पर प्रत्याशियों और समर्थकों की लगातार नजर बनी हुई है। अब तक बूथवार रिकाॅर्ड के अनुसार 60,044 बैलेट पेपर की गिनती दर्ज की गई है। पंजाब के 212 बूथों से सबसे अधिक 49,422 वोट की गिनती हुई है। चंडीगढ़ के 33 बूथों से 5,446 और हरियाणा के 19 बूथों से 4,269 वोट दर्ज हुए। वहीं दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू से कुल 907 बैलेट पेपर की गिनती हुई है। मतगणना दोबारा शुरू होने के बाद रुझान और स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसके साथ ही 15 सीटों पर कौन प्रत्याशी जीत की ओर बढ़ रहा है, इसकी तस्वीर भी साफ होगी। सीनेट चुनाव के अंतिम परिणाम के लिए अब शुक्रवार की मतगणना पर सभी की नजर है।

खालसा मार्च में खलल की आशंका, प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने की अपील

अमृतसर एसजीपीसी की ओर से निकाले जा रहे मीरी-पीरी खालसा मार्च के अंतिम चरण के दौरान संभावित खलल को लेकर श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय ने प्रशासन को सतर्क किया है। सचिवालय के इंचार्ज बगीचा सिंह ने कहा कि विश्वसनीय जानकारी मिली है कि कुछ शरारती तत्व अंतिम दो दिनों में मार्च में व्यवधान पैदा करने का प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मीरी-पीरी खालसा मार्च का तीसरा चरण 25 सितंबर को श्री अकाल तख्त साहिब में संपन्न होगा। पहले, दूसरे और तीसरे चरण के दौरान पंजाब के सैकड़ों गांवों, शहरों और कस्बों में सिखी के प्रचार-प्रसार का अभियान चलाया गया। इस दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह समेत प्रमुख धार्मिक हस्तियों और प्रचारक जत्थों ने संगत को संबोधित किया। सचिवालय के मुताबिक, मार्च के दौरान बड़ी संख्या में सिख युवाओं ने सिख स्वरूप बनाए रखने और नशे से दूर रहने का संकल्प लिया है। बगीचा सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सरकारी शह पर मार्च में खलल डालकर संगत में इसके प्रति नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने भी चेतावनी दी है कि यदि अंतिम दो दिनों में किसी व्यक्ति की ओर से मार्च में व्यवधान पैदा किया जाता है और संगत उसका विरोध करती है तो ऐसी स्थिति के लिए पंजाब सरकार और संबंधित प्रशासन जिम्मेदार होगा।  श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय ने अमृतसर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से अपील की है कि मार्च के निर्धारित पड़ावों और रूट पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाए। साथ ही संभावित शरारती तत्वों की पहचान कर किसी भी अप्रिय घटना को पहले ही रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

₹8 लाख रिश्वत मामले में पूर्व DIG भुल्लर की कोर्ट में पेशी, शिकायतकर्ता देंगे बयान

चंडीगढ़  पंजाब पुलिस के निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े रिश्वत मामले में आज चंडीगढ़ स्थित CBI की विशेष अदालत में अहम सुनवाई होगी। इस दिन मामले के शिकायतकर्ता मंडी गोबिंदगढ़ के कारोबारी आकाश बत्ता पहली बार अदालत में गवाही देंगे। कोर्ट ने उन्हें समन जारी किया है। रिश्वत मामले में आरोप तय होने के बाद शिकायतकर्ता की गवाही मुकदमे की अहम कड़ी मानी जा रही है। CBI के अनुसार, बत्ता ने शिकायत दी थी कि आपराधिक मामले में कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे 8 लाख रुपए रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायत के आधार पर CBI ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन DIG भुल्लर और बिचौलिए कृष्णु शारदा को गिरफ्तार किया था। अब अदालत में आकाश बत्ता के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद उनके बयान और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुकदमा आगे बढ़ेगा। सेक्टर-40 स्थित घर पर तलाशी ली थी भुल्लर की गिरफ्तारी के बाद CBI ने उनके सेक्टर-40 स्थित घर पर तलाशी ली थी। जांच एजेंसी की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नकदी, सोना और अन्य कीमती सामान बरामद होने की जानकारी सामने आई थी। अलग मामले में CBI ने आय से अधिक संपत्ति की जांच भी शुरू की थी। आरोपमुक्त करने की अर्जी हो चुकी खारिज इस मामले में भुल्लर और कृष्णु शारदा की ओर से CBI अदालत में आरोपमुक्त किए जाने की अर्जी दाखिल की गई थी। दोनों की ओर से CBI की कार्रवाई और अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिस्चार्ज एप्लीकेशन खारिज कर दी थी। इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ रही है। रिश्वत की रकम बिचौलिए के जरिए मांगी गई थी CBI के मामले के अनुसार, कारोबारी आकाश बत्ता की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रिश्वत की रकम बिचौलिए के जरिए मांगी गई थी। मीडिया रिपोर्टों में भी बिचौलिए कृष्णु शारदा के खिलाफ भुल्लर की ओर से रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया था।  

CM मान से मुलाकात के बाद पटवारियों ने वापस ली हड़ताल, भर्ती पर बड़ा फैसला

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ बैठक के बाद राजस्व पटवार यूनियन ने अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। सरकार ने पटवारियों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताते हुए 1000 से अधिक राजस्व पटवारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई भर्ती से आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और राजस्व संबंधी रोजमर्रा के प्रशासनिक काम अधिक सुचारू होंगे। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि यूनियन ने अपनी जायज मांगें माने जाने पर अपनी हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है। राज्य सरकार ने पटवारियों के पटवारी कैडर को राज्य स्तरीय से वापस जिला स्तरीय कैडर करने की मांग को सैद्धांतिक रूप से मंजूर कर लिया है।” उन्होंने कहा, “इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया सुचारू होगी और वरिष्ठता तथा पदोन्नतियों संबंधी आ रही प्रशासनिक अड़चनें दूर होंगी। यह फैसला प्रशासनिक सुधारों और विभाग के कामकाज में सुधार की जरूरत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।” उन्होंने कहा, “जिला स्तर पर पटवारी कैडर को बहाल करने के लिए मंत्रिमंडल द्वारा जल्द ही औपचारिक मंजूरी दी जाएगी।” कर्मचारियों के कल्याण के प्रति पंजाब सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकार अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मैं पटवारियों से अपील करता हूं कि वे पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम करें और राज्य सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि सभी पटवारी सरकार द्वारा उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी को पूरी लगन और ईमानदारी से निर्धारित समय में निभाते रहेंगे।” मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों पर पूरी सहानुभूति के साथ विचार करेगी। उन्होंने कहा कि मैं यूनियन से साथ ही यह अपील करता हूं कि भविष्य में भी सेवा से जुड़े सभी जायज मुद्दों के समाधान के लिए किसी भी तरह की हड़ताल के बजाय बातचीत और आपसी विचार-विमर्श के माध्यम से समाधान निकालना सुनिश्चित करें।”  कर्मचारियों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता कर्मचारियों और जनता के बीच संतुलन बनाते हुए मुख्यमंत्री ने पटवारियों से अपील की कि वे पूरी ईमानदारी और लगन के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की हर जायज़ मांग पर पूरी सहानुभूति के साथ विचार करने को तैयार है, लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सरकारी योजनाएं बिना किसी रुकावट के सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचें। मुख्यमंत्री ने यूनियन को यह भी नसीहत दी कि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद या मांग को लेकर हड़ताल का रास्ता अपनाने के बजाय आपसी बातचीत और संवाद के जरिए ही समाधान निकाला जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को परेशानी का सामना न करना पड़े। AI मास्टरक्लास बैठक में पटवारी कैडर को राज्य स्तरीय से वापस जिला स्तरीय करने की मांग को भी सरकार ने सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पटवारियों की वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़ी प्रशासनिक अड़चनें दूर होंगी। जिला स्तरीय कैडर बहाल करने के प्रस्ताव को जल्द ही मंत्रिमंडल की औपचारिक मंजूरी दिलाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने यूनियन के हड़ताल वापस लेने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पटवारियों से सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचने की अपील भी की। मान ने भविष्य में सेवा संबंधी मांगों के समाधान के लिए हड़ताल के बजाय बातचीत और आपसी विचार-विमर्श का रास्ता अपनाने को कहा है।