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पंजाब में बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए अहम फैसला, बर्थ सर्टिफिकेट पर मिली राहत, नई हिदायतें लागू

लुधियाना. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की तरफ से 8वीं और 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। बोर्ड ने इन दोनों कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल बर्थ सर्टीफिकेट अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही विद्यार्थियों और स्कूलों को राहत देते हुए बोर्ड पोर्टल पर अब 'अंडरटेकिंग' का ऑप्शन भी शुरू कर दिया गया है। जिन विद्यार्थियों का बर्थ सर्टीफिकेट अभी तक नहीं बना है या डिजिटल नहीं है, उनके स्कूल अब अंडरटेकिंग अपलोड कर सकते हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि बिना लेट फीस के रजिस्ट्रेशन के लिए अंतिम तिथि 10 जुलाई तय है, जबकि ऑनलाइन फीस जमा करवाने के लिए अंतिम तिथि 15 जुलाई निर्धारित की गई है। सर्टिफिकेट में अब गलतियां नहीं होंगी पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) से आठवीं, दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षा पास करने वाले स्टूडेंट्स के सर्टिफिकेट में अब गलतियां नहीं होंगी। बोर्ड ने सर्टिफिकेट को त्रुटि-रहित बनाने के लिए नई पहल शुरू की है। खास बात यह है कि पर्टिकुलर में करेक्शन के लिए पेरेंट्स या स्कूल संचालकों को अब बोर्ड दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सात दिन के भीतर पेरेंट्स को स्कूल में जाकर प्रिंसिपल से मिलना होगा और उन्हें सही जानकारी देकर करेक्शन करवा सकेंगे। PSEB के इस फैसले से सर्टिफिकेट में नाम, पिता का नाम, मां का नाम, डेथ ऑफ बर्थ में किसी तरह की गलतियां नहीं होंगे। बोर्ड के पोर्टल में स्टूडेंट के सही पर्टिकुलर एक बार अपलोड हो जाएंगे वो हमेशा के लिए दर्ज रहेंगे। इससे स्टूडेंट्स व पेरेंट्स से किसी तरह की फीस नहीं वसूली जाएगी।

पंजाब सरकार का बड़ा तोहफा! मशरूम यूनिट शुरू करने पर ₹80 हजार तक की आर्थिक सहायता मिलेगी

अमृतसर  पंजाब सरकार फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने के प्रयासों के तहत 'राज्य योजना' के अंतर्गत मशरूम उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए अधिकतम 80,000 रुपये तक की रियायत दे रही है। बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत ने कहा कि किसान लगभग दो लाख रुपये की अनुमानित लागत से एक छोटी मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित कर सकते हैं। इस योजना के तहत, बागवानी विभाग पात्र लाभार्थियों को 40 प्रतिशत की रियायत प्रदान करता है, और इसकी अधिकतम सीमा 80,000 रुपये तय की गई है। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती के लिए तुलनात्मक रूप से कम भूमि और पानी की आवश्यकता होती है, जबकि कम निवेश में इससे आकर्षक मुनाफा मिलता है। भगत ने बताया कि एक छोटी मशरूम उत्पादन इकाई को लगभग 1,800 वर्ग फुट क्षेत्र में स्थापित किया जा सकता है। इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी इस योजना का लाभ उठाना संभव हो सकेगा। योजना की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि यह इकाई लगाने के इच्छुक किसान 'राज्य योजना' के तहत आवेदन करने के लिए अपने नजदीकी जिला बागवानी अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विभाग किसानों को मशरूम की खेती सफलतापूर्वक शुरू करने में मदद करने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सभी आवश्यक सहायता भी प्रदान करता है। पंजाब के बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत ने बताया कि किसान लगभग 2 लाख रुपये की अनुमानित लागत से एक छोटी मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित कर सकते हैं। राज्य योजना के तहत बागवानी विभाग पात्र किसानों को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत अनुदान देता है, जिसकी अधिकतम सीमा 80,000 रुपये निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती कम निवेश, कम पानी और सीमित भूमि में शुरू की जा सकती है, जबकि इसकी बाज़ार में अच्छी माँग होने के कारण किसानों को बेहतर आमदनी मिलने की संभावना रहती है। 1,800 वर्ग फुट में लग सकती है उत्पादन इकाई मोहिंदर भगत ने बताया कि एक छोटी मशरूम उत्पादन इकाई करीब 1,800 वर्ग फुट क्षेत्र में स्थापित की जा सकती है। यही वजह है कि छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार लंबे समय से किसानों को पारंपरिक फसल चक्र से बाहर निकालकर फसल विविधीकरण की दिशा में काम कर रही है और मशरूम उत्पादन पर दी जा रही सब्सिडी इसी रणनीति का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को आय का एक अतिरिक्त और बेहतर स्रोत मिलेगा। आवेदन के साथ मिलेगा प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान 'राज्य योजना' के तहत आवेदन करने के लिए अपने नज़दीकी ज़िला बागवानी अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। विभाग किसानों को आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और आवश्यक दस्तावेज़ों की जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा सरकार केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दे रही, बल्कि मशरूम उत्पादन शुरू करने वाले किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और उत्पादन इकाई के सफल संचालन के लिए विशेषज्ञ सहायता भी उपलब्ध कराएगी, ताकि नए किसान बिना किसी तकनीकी कठिनाई के मशरूम की खेती शुरू कर सकें।

Punjab Health Alert: शिशु मृत्यु दर बढ़ने से बढ़ी चिंता, अमृतसर में सबसे ज्यादा मामले, जालंधर-लुधियाना भी प्रभावित

 जालंधर/लुधियाना  पंजाब में शिशु मृत्यु दर में 17.56 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। शहरों में स्थिति ज्यादा गंभीर है जहां शिशु मृत्यु दर के कुल मामलों में से 90% मौतें हो रही हैं। अमृतसर में शिशु मृत्यु दर अधिक है। उसके बाद जालंधर और लुधियाना में अधिक मौतें हो रही हैं। नागरिक पंजीकरण प्रणाली पर आधारित महत्वपूर्ण सांख्यिकी रिपोर्ट 2024 में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ साल से प्रदेश में शिशु मृत्यु के मामले बढ़ते जा रहे हैं। वर्ष 2023 में शिशु मृत्यु के 2272 मामले सामने आए थे जो 2024 में बढ़कर 2671 हो गए हैं। वर्ष 2020 में 1884, 2021 में 1830, 2022 में 2336 बच्चों की मौत हुई। इनमें समय से पहले प्रसव, जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी, संक्रमण और प्रसवपूर्व देखभाल की कमी है। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छता की कमी, कुपोषण और दस्त रोग भी शिशु मृत्यु दर के प्रमुख कारण हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर शिशु मृत्यु दर में 17.12% की कमी आई है। वर्ष 2023 में जहां 1.45 लाख बच्चों की मौत हुई थी जो अब कम होकर 1.20 लाख हो गई है। शहरों में स्थिति अधिक गंभीर प्रदेश में गांवों के मुकाबले शहरों की स्थिति अधिक गंभीर है जहां शिशु मृत्यु दर के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। वर्ष 2024 के दौरान जहां ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर के 258 मामले सामने आए हैं। वहीं शहरों में 2413 बच्चों की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गांवों और शहरों में स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रयास किया जा रहा है ताकि मृत्यु दर को कम किया जा सके। जिला, सब डिवीजनल अस्पतालों और कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है। पीजी कोर्स जॉइन करने के बॉन्ड सरकार सख्ती से लागू कर रही है। प्रदेश में शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रसवपूर्व देखभाल में सुधार, कुपोषण को कम करना, स्वच्छता में सुधार और संक्रमण को रोकने के लिए विभिन्न उपायों पर काम किया जा रहा है।   अमृतसर में सबसे अधिक 835 व जालंधर में 368 मौतें  रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान अमृतसर में सबसे अधिक 835 बच्चों की मौत हुई है। जालंधर 368 और लुधियाना में 348 बच्चों की मौत हुई है। यही कारण है कि इन जिलों में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग की तरफ से यहां अस्पतालों में अधिक सुविधाएं दी जा रही हैं। साथ ही डॉक्टरों और स्टाफ की कमी पूरी किया जा रहा है। लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि इन शहरों में शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। बाकी जिलों में यह है स्थिति   जिला – मौतें अमृतसर – 835 बरनाला – 18 बठिंडा – 187 फरीदकोट – 169 फाजिल्का – 32 फतेहगढ़ साहिब – 5 फिरोजपुर – 8 गुरदासपुर – 32 होशियारपुर – 60 जालंधर – 368 कपूरथला – 12 लुधियाना – 348 मालेरकोटला – 12 मानसा – 5 मोगा – 55 श्री मुक्तसर साहिब – 15 पठानकोट – 36 पटियाला – 331 रूपनगर – 4 संगरूर – 16 मोहाली – 87 एसबीएस नगर – 25 तरनतारन – 11

केंद्र ने ठुकराई ₹2.4 करोड़ की फंडिंग, अब चंडीगढ़ प्रशासन को अपने बजट से उठाना होगा खर्च

चंडीगढ़  केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा योजना 2026-27 के तहत चंडीगढ़ प्रशासन की स्पेशल एजुकेटर्स और क्लस्टर रिसोर्स सेंटर (CRC) कोऑर्डिनेटर्स के वेतन के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता बढ़ाने की मांग को ठुकरा दिया है।  प्रशासन ने 23 स्पेशल एजुकेटर्स के लिए प्रति शिक्षक वार्षिक सहायता 6.699 लाख रुपए से बढ़ाकर 10.5 लाख रुपए करने का प्रस्ताव भेजा था। प्रशासन का तर्क था कि वार्षिक वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता (DA) और एरियर के कारण खर्च बढ़ गया है। इस प्रस्ताव के अनुसार कुल 2.4 करोड़ रुपए की मांग की गई थी। हालांकि प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) ने पुराने मानक के अनुसार ही प्रति शिक्षक 6.699 लाख रुपए मंजूर किए। इससे कुल स्वीकृत राशि करीब 1.5 करोड़ रुपए रही। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त राशि चंडीगढ़ प्रशासन अपने बजट से उपलब्ध कराए। CRC कोऑर्डिनेटर्स के लिए प्रस्ताव खारिज स्पेशल एजुकेटर्स के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता बढ़ाने का प्रस्ताव दूसरे साल खारिज हुआ है। वर्ष 2025-26 में भी प्रशासन ने प्रति शिक्षक सहायता 7.71 लाख रुपए करने की मांग की थी, लेकिन तब भी केंद्र ने 6.699 लाख रुपए के पुराने मानक को ही लागू रखा था। केंद्र ने CRC कोऑर्डिनेटर्स के वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव भी स्वीकार नहीं किया। प्रशासन ने 20 CRC कोऑर्डिनेटर्स के लिए प्रति व्यक्ति 16.8 लाख रुपए वार्षिक सहायता के हिसाब से 3.3 करोड़ रुपए की मांग की थी। केंद्र ने केवल 1.1 करोड़ रुपए मंजूर किए। इसके तहत 15 कार्यरत कोऑर्डिनेटर्स का 12 महीने का वेतन और पांच खाली पदों के लिए नौ महीने का वेतन 48,708 रुपए प्रतिमाह की दर से स्वीकृत किया गया। एक करोड़ का फर्नीचर-कंप्यूटर ग्रांट भी नहीं मिली चंडीगढ़ प्रशासन ने 20 क्लस्टर रिसोर्स सेंटरों के लिए एक करोड़ रुपए का फर्नीचर और कंप्यूटर ग्रांट भी मांगा था, लेकिन PAB ने इसे यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि यह सहायता हर पांच साल में एक बार ही दी जाती है और वर्ष 2024-25 में पहले ही मंजूर की जा चुकी है। सभी 20 CRC के लिए रखरखाव, पढ़ाई का सामान, अन्य जरूरी खर्च, बैठक और यात्रा भत्ता तय नियमों के अनुसार मंजूर कर दिया गया है।

पंजाब कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल मिशन पर भूपेश बघेल, चन्नी-वड़िंग विवाद खत्म कराने की कोशिश

चंडीगढ़. पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले उभरी अंदरूनी खींचतान को शांत करने के लिए पार्टी हाईकमान ने सक्रियता बढ़ा दी है। पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल सोमवार दोपहर तकरीबन 3 बजे चंडीगढ़ पहुंचेंगे। सूत्रों के अनुसार वह अगले करीब पांच दिनों तक पंजाब में रहकर पार्टी नेताओं से अलग-अलग बैठकें करेंगे और विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा करेंगे। छत्तीसगढ़ से रवाना होने से पहले भूपेश सिंह बघेल ने कहा— ""पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर मैं पंजाब दौरे पर जा रहा हूं। चुनाव को लेकर कांग्रेस की ओर से कमेटियां गठित की जा चुकी हैं। यूथ कांग्रेस के चुनाव भी हो चुके हैं। पंजाब के सभी साथियों से मिलकर चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी।"" सूत्रों के मुताबिक, चुनाव समिति के गठन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं की नाराजगी के बीच हाईकमान डैमेज कंट्रोल में जुटा है। इसी क्रम में भूपेश बघेल सबसे पहले चन्नी और कुछ वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे। इसके बाद उनकी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत अन्य नेताओं के साथ भी बैठकें प्रस्तावित हैं। संगठन मजबूत करने पर हाईकमान का फोकस बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल चुनाव समिति में किसी तरह के बदलाव के पक्ष में नहीं है। पार्टी का फोकस संगठन को एकजुट कर विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देना है। इस बीच एआईसीसी के पंजाब के तीन सह प्रभारी हीना कावरे, रविंदर डलवी और सूरज ठाकुर भी चंडीगढ़ पहुंच रहे हैं। सभी नेता प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालात और संगठन की स्थिति का फीडबैक लेंगे। हाईकमान मतभेद दूर करने में जुटा सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने चुनावी रणनीति को लेकर नेताओं से वन-टू-वन मुलाकातों का दौर शुरू कर दिया है। दूसरी ओर चरणजीत सिंह चन्नी भी अपने समर्थक नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। ऐसे में हाईकमान की कोशिश दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर कर चुनाव से पहले एकजुटता का संदेश देने की है। कांग्रेस नेतृत्व राहुल गांधी के विदेश दौरे से 7 जुलाई तक लौटने से पहले पंजाब के हालात पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना चाहता है। भूपेश बघेल दौरे के बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को पंजाब की राजनीतिक स्थिति और चुनावी तैयारियों पर रिपोर्ट सौंपेंगे। दिल्ली में रवाना होने से पहले भूपेश बघेल ने भी कहा कि कांग्रेस में किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है और सभी नेता मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

Punjab-Haryana High Court में नई ग्रीन पार्किंग का शुभारंभ, 6.23 एकड़ में हाईटेक सुविधा, विजिटर्स को मिलेगी राहत

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट आने वाले वकीलों, वादकारियों (लिटिगेंट्स) और आम लोगों के लिए राहत की खबर है। चंडीगढ़ प्रशासन ने लंबे समय से लंबित पार्किंग परियोजना को पूरा कर हाईकोर्ट परिसर के पास नई ग्रीन सरफेस पार्किंग शुरू कर दी है। करीब 3.41 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस पार्किंग में एक समय में 750 से अधिक चारपहिया और दोपहिया वाहन खड़े किए जा सकेंगे। इसके शुरू होने से हाईकोर्ट के आसपास वर्षों से चली आ रही पार्किंग समस्या और ट्रैफिक जाम से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। 6.23 एकड़ क्षेत्र में विकसित की गई पार्किंग नई पार्किंग हाईकोर्ट से सटी 6.23 एकड़ जमीन पर विकसित की गई है। यह क्षेत्र पहले कच्चा और पथरीला था, जहां अनियमित तरीके से वाहन खड़े किए जाते थे। यूटी इंजीनियरिंग विभाग ने इसे आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया है। पार्किंग में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन पेवर ब्लॉक्स लगाए गए हैं। इससे हरियाली बनी रहेगी और बारिश के पानी की निकासी भी बेहतर होगी। प्रशासन का कहना है कि इस तकनीक से जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। यूनेस्को हेरिटेज क्षेत्र होने के कारण बरती गई विशेष सावधानी यह पार्किंग कैपिटल कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में स्थित है, जिसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा प्राप्त है। इसी कारण निर्माण कार्य के दौरान हेरिटेज मानकों का विशेष ध्यान रखा गया। परियोजना का टेंडर सितंबर 2025 में जारी हुआ था और अक्टूबर 2025 से निर्माण कार्य शुरू किया गया। इस स्थान पर पहले से लोग वाहन खड़े करते थे, इसलिए काम चरणबद्ध तरीके से किया गया। अधिकांश निर्माण कार्य हाईकोर्ट की छुट्टियों के दौरान पूरा किया गया ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो। प्रशासन ने पार्किंग का डिजाइन तैयार करने के लिए लैंडस्केप कंसल्टेंट की भी मदद ली, जिससे कैपिटल कॉम्प्लेक्स की मूल संरचना और हेरिटेज वैल्यू प्रभावित न हो। रॉक गार्डन के पास भी बनेगी नई पार्किंग हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद यूटी प्रशासन अब रॉक गार्डन के समीप खाली पड़ी जमीन पर एक और पार्किंग विकसित करने की तैयारी कर रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 27 मई को प्रशासन को 90 दिनों के भीतर इस परियोजना पर काम शुरू करने के निर्देश दिए थे। प्रारंभिक सर्वे के अनुसार यहां 70 से 80 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इस परियोजना में एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। मौजूदा हरित क्षेत्र को सुरक्षित रखते हुए पार्किंग का डिजाइन तैयार किया जा रहा है। नई पार्किंग बनने के बाद हाईकोर्ट, रॉक गार्डन और आसपास के क्षेत्रों में पार्किंग व्यवस्था और अधिक सुचारु होने की उम्मीद है।  

Diljit Dosanjh की फिल्म पर फिर विवाद! रिलीज के 2 दिन बाद OTT से हटाई गई, एक्टर ने कहा- मुझे इसका अंदाजा था

चंडीगढ़  दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'पंजाब 95' को 3 जुलाई को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर नाम बदलकर रिलीज किया गया था, पर दो दिन बाद ही इसे हटा दिया गया। अब अगले आदेश तक इसे भारत में OTT पर नहीं दिखाया जाएगा। तीन साल तक सेंसर बोर्ड के साथ विवाद में फंसे रहने के बाद 'सतलज' बड़ी मुश्किल से अब रिलीज की रोशनी देख पाई थी, पर अचानक हटाए जाने से न सिर्फ आम जनता में गुस्सा है, बल्कि सेलेब्स भी गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। 'सतलज' को हटाए जाने पर अब सियासी घमासान तेज हो गया है। अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने इसे 'अभिव्यक्ति की आजादी' पर हमला बताया। एक्टर रणवीर शौरी से लेकर फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने भी नाराजगी जाहिर की है। 'सतलज' की कहानी ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा पर आधारित है। उन्होंने 90 के दशक में 25 हजार लापता सिखों के लिए लड़ाई लड़ी थी। साथ ही 2000 लोगों की मौत का पता लगाया था, जिनकी लाशों को लावारिस बताकर जला दिया गया था। पर बाद में पुलिस ने खालरा का ही फेक एनकाउंटर कर लाश को नदी में फेंक दिया था। 'सतलज' को बंपर रिस्पॉन्स, फिल्म देख रो पड़े थे लोग 3 जुलाई को जब 'सतलज' OTT पर आई, तो जिन्होंने भी फिल्म देखी वो रो पड़े और सभी से इसे देखने की अपील की। यहां तक कि IMDb पर भी इसे 9.7/10 रेटिंग मिली है। लेकिन अब अचानक ही इस फिल्म को OTT से भारत में हटा दिया है। इससे जनता और सेलेब्स भड़के हुए हैं। सुखबीर सिंह बादल भड़के- अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने 'सतलज' हटाए जाने पर गुस्सा निकालते हुए X पर लिखा, 'भारत में ZEE5 से 'सतलज' को मनमाने ढंग से हटाए जाने से मैं स्तब्ध और दुखी हूं। यह सशक्त फिल्म, जो पंजाब के दर्दनाक इतिहास को साहसपूर्वक उजागर करती है और एस. जसवंत सिंह जी खालरा के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करती है, उसे इस तरह चुप नहीं कराया जा सकता। यह केवल सेंसरशिप नहीं है, यह हमारी सामूहिक स्मृति, सत्य और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। मैं इस कदम की कड़ी निंदा करता हूं। पंजाब को अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करने का अधिकार है, दमन का नहीं।' यह सशक्त फिल्म, जो पंजाब के दर्दनाक इतिहास को साहसपूर्वक उजागर करती है और एस जसवंत सिंह जी खालरा के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करती है, उसे इस तरह चुप नहीं कराया जा सकता। यह केवल सेंसरशिप नहीं है, यह हमारी सामूहिक स्मृति, सत्य और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। रणवीर शौरी ने यूं जाहिर किया गुस्सा रणवीर शौरी ने भी गुस्सा निकालते हुए X पर लिखा, 'यह सुनकर बहुत निराशा हुई कि 'सतलज' को हटा दिया गया है। मैं इसे देखने का इंतजार कर रहा था। जिस देश का इतिहास और विरासत कहानियों से सीखने का रहा है, वहां न जाने क्यों हम कहानियों को दबाने या खत्म करने वाले कल्चर को बढ़ावा देते रहते हैं।' मैं इसे देखने का इंतजार कर रहा था। जिस देश का इतिहास और विरासत कहानियों से सीखने का रहा है, वहां न जाने क्यों हम कहानियों को दबाने या खत्म करने वाले कल्चर को बढ़ावा देते रहते हैं। पहले फिल्म के बारे में जानिए…     मानवाधिकार कार्यकर्ता पर आधारित, 2022 में बननी शुरू हुई: मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के नाम पर 2022 में फिल्म बनाने की घोषणा की। फिल्म का शुरुआती नाम 'घल्लूघारा' रखा गया था, जिसका अर्थ 'नरसंहार' होता है। फिल्म की शूटिंग पंजाब के विभिन्न हिस्सों, खासकर अमृतसर में पूरी हुई। अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाने के लिए अपने लुक और शारीरिक बनावट में बदलाव किया।     सेंसर बोर्ड ने नाम बदलवाया: साल 2023 में फिल्म बनकर तैयार हो गई। इसके बाद इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास मंजूरी के लिए भेजा गया, तो बोर्ड ने फिल्म के टाइटल पर आपत्ति जताई और कई बदलाव तथा कट्स सुझाए। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर 'पंजाब 95' रखा गया।     127 कट लगाने को भी कहा: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBFC ने फिल्म में 127 कट्स और कई बदलाव सुझाए। इनमें कुछ ऐतिहासिक संदर्भों, स्थानों और पात्रों के नामों में बदलाव की मांग भी शामिल थी। हालांकि, CBFC ने सार्वजनिक रूप से इन सभी प्रस्तावित बदलावों का विस्तृत आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया। भारत में सेंसर बोर्ड की मंजूरी नहीं मिलने के कारण फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी।     विदेशों में रिलीज नहीं हो सकी: इसके बाद 7 फरवरी 2025 को इसे चुनिंदा देशों में रिलीज किया गया। इसके बाद साल 2023 में फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहां इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ के अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।     सिर्फ OTT पर रिलीज करने की छूट मिली: इसके बाद इसे OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने की छूट मिली। उसमें किसी तरह के कट नहीं लगाए गए थे। 2 दिन के भीतर पंजाब में इस फिल्म को खूब देखा गया। जिसके बाद अचानक OTT प्लेटफॉर्म से फिल्म हट गई। इसके बारे में सिर्फ इतना कहा गया कि अगले आदेश तक फिल्म हटा दी गई है। फिल्म हटाने पर दिलजीत दोसांझ ने क्या कहा…     इंसानियत होती है, जो मर गई: फिल्म को हटाए जाने पर दिलजीत ने कहा कि मैं लोगों के मुंह की तरफ देखता हूं। एक इंसानियत होती है, लेकिन वह इंसानियत मर गई। कमाल है। फिल्म इंटरनेट से हट गई, इसलिए मैं उदास नहीं हूं। फिल्म तो लोगों तक पहुंच ही गई। अब वह कहीं नहीं जाने वाली। एक प्यार, इत्तेफाक और इंसानियत होती है, लेकिन लोगों का रवैया कमाल का है। बस इसी बात का थोड़ा दुख है।     मुझे पहले पता था ऐसा होना है: दिलजीत ने कहा- मुझे पहले से ही पता था कि ऐसा होना है। मैंने सोचा था कि अगर फिल्म दो-तीन दिन भी चल जाए तो हमारा काम हो जाएगा। इंटरनेट पर एक बार कोई चीज आ जाए, तो उसे पूरी तरह हटाना आसान नहीं होता। इनके सलाहकार … Read more

अमृतसर में 11 किलो हेरोइन जब्त, पंजाब पुलिस का ड्रग्स माफिया पर बड़ा वार; तस्करी नेटवर्क खंगालने में जुटी जांच एजेंसियां

 अमृतसर पंजाब में नशा तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना घरिंडा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 11 किलो 960 ग्राम हेरोइन बरामद की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पंजाब को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर कार्रवाई करते हुए यह बड़ी खेप बरामद की गई। बरामद हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है। तस्करी नेटवर्क की जांच शुरू पुलिस ने इस मामले में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किस स्थान तक पहुंचाया जाना था। जांच एजेंसियां इस तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुट गई हैं। पुलिस का सख्त संदेश और जनता से अपील पंजाब पुलिस का कहना है कि राज्य में नशा तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और किसी भी सूरत में नशे के कारोबार को पनपने नहीं दिया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी और इस अवैध कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास किसी प्रकार की नशा तस्करी की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि समाज को नशे के जाल से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।  

नेशनल हाईवे पर पंजाब पुलिस की सख्ती, एंट्री पॉइंट सील, संदिग्धों की जांच तेज

लुधियाना. पंजाब के डीजीपी गौरव यादव और पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा के दिशा निर्देश आज थाना लाडोवाल की पुलिस ने नेशनल हाईवे पर नाकाबंदी करते हुए महानगर का एंट्री पॉइंट पूरी तरह से सील कर दिया गया जिस बारे में जानकारी देते हुए थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुखविंदर सिंह काहलों ने बताया कि शहर में जाने वाले प्रत्येक शकी वाहनो की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि  नाकाबंदी महानगर के एंट्री पॉइंट पर की गई है ताकि कोई भी संबंधित व्यक्ति शहर में प्रवेश न कर सके। उन्होंने बताया कि इस नाकाबंदी के दौरान कई संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ करने के बाद उनके वाहनों को आगे जाने दिया जा रहा है। थाना प्रभारी ने बताया कि इस स्पेशल नाकाबंदी के दौरान कई वाहन चालकों के चालान भी काटे जा रहे हैं।

9 जुलाई से पंजाब के DC कार्यालयों में कलम छोड़ हड़ताल, कर्मचारियों ने किया बड़ा ऐलान

मोगा. डी.सी. दफ्तर कर्मचारी यूनियन की एक राज्य स्तरीय बैठक आज मोगा में प्रदेश अध्यक्ष तेजिंदर सिंह नंगल तथा प्रदेश सचिव नरिंदर सिंह चीमा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में पंजाब भर के प्रदेश पदाधिकारियों के अलावा जिला अध्यक्षों एवं महासचिवों ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश सचिव ने बताया कि डी.सी. कार्यालयों में वरिष्ठ सहायक का पदोन्नति कोटा 100 प्रतिशत किया जाए तथा रिक्त पदों को पदोन्नति के माध्यम से भरा जाए। उन्होंने सुपरिंटैंडैंट ग्रेड-2 (राजस्व एवं रिकॉर्ड) से तहसीलदार पद पर पदोन्नति के लिए आवश्यक अनुभव 2 वर्ष करने, वरिष्ठ सहायक से नायब तहसीलदार पदोन्नति का कोटा बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने, निर्धारित पैनल के अनुसार तहसीलदार पद पर पदोन्नतियां देने तथा तहसीलों में सुपरिंटैंडैंट (राजस्व एवं रिकॉर्ड) के पद सृजित करने की मांग दोहराई। इसके अलावा जिला राजस्व अधिकारियों की अदालतों में रीडर का पद वरिष्ठ सहायक का करने तथा एक अहलमद (क्लर्क) का पद सृजित करने, डी.सी. कार्यालयों के सुपरिंटैंडैंट ग्रेड-1 को अगली पदोन्नति मंडल स्तर पर अवर सचिव के रूप में देने, डी.सी., एस.डी.एम., तहसील एवं उप-तहसील कार्यालयों में निर्धारित मानकों के अनुसार नए पद सृजित करने तथा अंतर-जिला तबादलों से संबंधित लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने की मांग भी उठाई गई। यूनियन ने रजिस्ट्री क्लर्क की परीक्षा उत्तीर्ण सभी कर्मचारियों को रजिस्ट्री क्लर्क नियुक्त करने, डी.सी. कार्यालयों, एस.डी.एम., तहसील एवं उप-तहसील कार्यालयों के कर्मचारियों को 5 प्रतिशत प्रशासनिक भत्ता देने, सुपरिंटैंडैंट ग्रेड-1 के रिक्त पदों पर पदोन्नतियां करने, आऊटसोर्स एवं ठेका कर्मचारियों का वेतन बढ़ाकर उन्हें नियमित करने, 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मचारियों को भी पुराने कर्मचारियों के समान प्रारंभिक वेतन देने, पुरानी पैंशन योजना और ए.सी.पी. योजना बहाल करने आदि मांग भी सरकार के समक्ष रखी। यूनियन ने यह भी मांग की कि प्रदेश अध्यक्ष तेजिंदर सिंह नंगल के साथ थाना जंडियाला गुरु (जिला श्री अमृतसर साहिब) की पुलिस द्वारा कथित अमानवीय व्यवहार एवं मारपीट करने वाले संबंधित पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यूनियन नेताओं ने बताया कि 7 मई 2026 को वित्तीय आयुक्त (राजस्व) तथा 30 जून 2026 को पंजाब के राजस्व मंत्री के साथ हुई बैठकों में उनकी किसी भी मांग पर सहमति नहीं बनी। इसके विरोध में मोगा में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सरकार को नोटिस भेजते हुए पंजाब भर में 9 जुलाई 2026 से 12 जुलाई 2026 तक कलम छोड़ो/कम्प्यूटर बंद हड़ताल की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस दौरान भी सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो 12 जुलाई को ऑनलाइन बैठक कर आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा आगामी संघर्ष की रूपरेखा तय की जाएगी। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष दलवीर सिंह सिद्धू, महासचिव गुरजीत सिंह औलख, जोनल सचिव (फिरोजपुर मंडल) गुरजीत सिंह, मनिंदर सिंह, कुलदीप सिंह घाली, हरजिंदर सिंह सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।