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खेतों में आग से तबाही: पंजाब के चार गांवों में 400 एकड़ फसल जलकर खाक

अबोहर. मलोट के गांव कबरवाला में शुक्रवार सुबह खेतों में लगी आग इतनी तेजी से फैली कि अबोहर के गांव जोधपुर तक चार गांवों में करीब 400 एकड़ फसल जलकर राख हो गई। इस दौरान मलोट व अबोहर से पहुंची फायर ब्रिगेड के अलावा किसानों की ओर से कड़ी मशक्कत से आग पर काबू पाया गया। जानकारी के अनुसार आग मलोट के गांव कबरवाला में सुबह 11 खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को आग लग गई, जोकि तेज हवा के कारण पक्की टिब्बी और गुरपुसर से फैलते हुए बललूआना क्षेत्र के गांव जोधपुर तक पहुंच गई। देखते ही देखते आग ने खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को अपनी चपेट में ले लिया और किसानों की साल भर की मेहनत मिनटों में राख हो गई। सूचना मिलने पर मलोट और अबोहर से फायर ब्रिगेड की लगभग 4 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए अभियान शुरू किया। इसके साथ ही किसानों ने भी हिम्मत दिखाते हुए ट्रैक्टरों से मिट्टी डालकर और खेत जोतकर आग के फैलाव को रोकने की कोशिश की। फायर ब्रिगेड के कर्मचारी राजकुमार व किसानों ने बताया कि आग लगने के कारणों का तो पता नहीं चला है, लेकिन अनुमान है कि इस आग से करीब 400 एकड़ के करीब गेहूं की फसल राख हो गई है। उन्होंने बताया कि इनमें कई छोटे किसान भी शामिल है जिनकी पांच से 10 एकड़ तक फसल राख हो गई, व जबकि कई लोगों ने ठेके पर जमीन लेकर भी बिजाई कर रखी थी। इस दौरान सरपंच सतनाम सिंह जोधपुर, साहिब सिंह नंबरदार, सुरजीत सिंह, हरि कृष्ण सिंह, प्रीतम सिंह, दर्शन सिंह और बूटा सिंह ने कहा कि आग के कारण उनकी साल भर की मेहनत बर्बाद हो गई है। इसलिए सरकार और प्रशासन से मांग की गई है कि हुए नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों ने कहा कि अगर समय रहते आग पर काबू न पाया जाता तो आग गांव मलूकपुरा में फैल सकती थी। इसके अलावा गांव राजपुरा में सरकंडी को आग लगने से आग घरों तक फैलने का खतरा पैदा हो गया, जिस पर समय रहते काबू पा लिया गया।

हाईकोर्ट का अहम निर्णय: हिरासत में लेना ही माना जाएगा गिरफ्तारी

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि किसी व्यक्ति को जैसे ही पुलिस या जांच एजेंसी उसके जाने की आजादी से रोक देती है, उसी क्षण से उसे गिरफ्तार माना जाएगा। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की 24 घंटे की संवैधानिक समय सीमा भी उसी पल से शुरू होती है, न कि उस समय से जब कागजों में गिरफ्तारी दर्ज की जाती है। यह मामला अमृतसर में ट्रामाडोल टैबलेट की बरामदगी से जुड़ी जांच से सामने आया। याचिकाकर्ता को 31 अक्टूबर 2025 की रात देहरादून से करीब 11 बजे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अपने साथ रखा। हालांकि, उसकी औपचारिक गिरफ्तारी 1 नवंबर की रात 9 बजे दिखाई गई और अगले दिन दोपहर करीब 2 बजे उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। जस्टिस सुमित गोयल ने एनसीबी द्वारा हिरासत में रखे गए याची की रिहाई का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि संबंधित व्यक्ति को न्यायिक अनुमति के बिना 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया, जो संविधान के प्रविधानों का उल्लंघन है। अदालत ने उस प्रचलित व्यवस्था को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें एजेंसियां पूछताछ के लिए हिरासत या जांच के लिए रोककर रखना जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर औपचारिक गिरफ्तारी को टालती हैं। गिरफ्तारी एक तथ्यात्मक स्थिति है, जिसे शब्दों के सहारे बदला नहीं जा सकता। यदि किसी व्यक्ति की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है और वह अपनी इच्छा से कहीं जा नहीं सकता, तो वह गिरफ्तारी ही मानी जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी मेमो या पुलिस रिकार्ड में दर्ज समय अंतिम सत्य नहीं हो सकता। न्यायालय ने कहा कि यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया है, जिसे वास्तविक गिरफ्तारी के समय का निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता। साथ ही अदालत ने मजिस्ट्रेटों को भी सचेत किया कि वे केवल दस्तावेजों पर निर्भर न रहें, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए यह तय करें कि गिरफ्तारी कब हुई। अदालत ने यह भी माना कि गिरफ्तारी के सही समय का निर्धारण किसी तय फार्मूले से नहीं किया जा सकता। इसके लिए प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को देखना होगा जैसे व्यक्ति को रातभर थाने में रखा गया या नहीं, क्या उसे बाहर जाने की अनुमति थी, क्या वह स्वजन या मित्रों से मिल सकता था और क्या वह अपनी मर्जी से वहां से जा सकता था या नहीं।

बाढ़ से बचाव की तैयारी तेज: पंजाब में नदियों-नालों से गाद निकालने की मंजूरी

चंडीगढ. मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में पंजाब मंत्रिमंडल ने मानसून से पहले बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने दरियाओं, चोओं और सेम नालों से गाद निकालने की प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से जमीन मालिकों को अपनी लागत पर सफाई की अनुमति दे दी है। साथ ही, खुदाई से निकली सामग्री को मुफ्त उपयोग करने का अधिकार भी प्रदान किया गया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से न केवल गाद निकालने के काम में तेजी आएगी, बल्कि दरियाओं के पानी के प्रवाह में भी सुधार होगा। इससे संभावित बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी और सार्वजनिक व निजी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। यह निर्णय सतलुज, ब्यास और सिसवां समेत अन्य दरियाओं और नालों की सफाई के लिए लिया गया है। लंबे समय से इन जल स्रोतों में जमा गाद के कारण पानी का बहाव प्रभावित हो रहा था, जिससे मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ की स्थिति बन जाती थी। सरकार ने ऐसे 9 संवेदनशील स्थानों की पहचान भी की है, जहां मानसून से पहले गाद निकालना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते इन क्षेत्रों में सफाई नहीं की गई, तो पानी का प्रवाह बाधित हो सकता है और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसको देखते हुए संबंधित जमीन मालिकों को आगे आकर इस कार्य में सहयोग देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने पंचायत स्तर पर आरक्षण व्यवस्था में संतुलन बनाने के लिए भी अहम निर्णय लिया है। सरपंचों, जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के पदों के लिए आरक्षण नियम-6 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन का उद्देश्य विभिन्न वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देना है। नई व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति, महिलाओं और सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण का रोस्टर पुनः निर्धारित किया जाएगा, ताकि हर वर्ग को बराबर अवसर मिल सके। कैबिनेट के फैसले जमीन मालिकों को आप सरकार ने दी सफाई की अनुमति। खोदाई से निकली सामग्री को मुफ्त उपयोग का भी अधिकार।

पंजाब में RTE के तहत प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन शुरू, एजुकेशन डिपार्टमेंट ने लिंक किया लाइव पोर्टल

चंडीगढ़  पंजाब में राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब व डिसएडवांटेज्ड स्टूडेंट्स के एडमिशन का प्रोसेस शुरू हो गया। एजुकेशन डिपार्टमेंट में एडमिशन के लिए पोर्टल लाइव कर दिया है। गरीब व डिसएडवांटेज्ड स्टूडेंट्स पोर्टल पर अप्लाई करके किसी भी प्राइवेट स्कूल में एडमिशन ले सकेंगे। स्टूडेंट्स सिर्फ एंट्री क्लास में ही फ्री एडमिशन ले सकेंगे। डिपार्टमेंट ने राज्यभर के स्कूलों को एंट्री क्लास में 25 फीसदी सीटें रिजर्व रखने के आदेश भी दिए हैं। जो भी इलिजिबल स्टूडेंट प्राइवेट स्कूल्स में एडमिशन लेना चाहता है उसे इस पोर्टल पर ऑनलाइन अप्लाई करते हुए आवश्यक दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे। दस्तावेज अपलोड न होने पर वह फ्री सीट का हकदार नहीं होगा। प्राइवेट स्कूल्स में फ्री एडमिशन के लिए क्या क्राइटीरिया होगा, जानिए…     आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन व स्टडी के लिए आर्थिक तौर पर कमजोर स्टूडेंट्स इलिजिबल होंगे। EWS स्टूडेंट्स के लिए 25 प्रतिशत में से 12.5% सीटें रिजर्व रहेंगी। दाखिले के वक्त पेरेंट्स को इनकम और प्रॉपर्टी सर्टिफिकेट देना होगा। बिना इनकम सर्टिफिकेट के इस कैटागिरी में बच्चे का एडमिशन नहीं होगा।     डिसएडवांटेज्ड ग्रुप्स: प्राइवेट स्कूलों में ईडब्न्ल्यूएस के अलावा डिसएडवांटेज्ड ग्रुप के स्टूडेंट्स भी फ्री एडमिशन के लिए इलिजिबल होंगे।  उनके लिए भी 25 प्रतिशत में से 12.5 प्रतिशत सीटें रिजर्व रहेंगी। इसमें अनुसूचित जाति (SC), ओबीसी, वार विडो के बच्चे, दिव्यांग, स्पेशल चाइल्ड, अनाथ बच्चे शामिल होंगे।     नाइवरहुड स्कूल: स्टूडेंट को एडमिशन के लिए कम से कम दो स्कूलों के नाम भरने होंगे। पहला ऑप्शन 0 से 3 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए जबिक दूसरा ऑप्शन 3-6 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए।     बस का खर्च पेरेंट्स खुद उठाएंगे: एडमिशन पोर्टल पर ही डिपार्टमेंट ने स्पष्ट कर दिया है कि एडमिशन के लिए पेरेंट्स को नजदीकी स्कूल सलेक्ट करना होगा। अगर वो स्कूल दूर सलेक्ट करते हैं तो स्कूल बस का खर्च उन्हें अपने स्तर पर उठाना होगा।     ऐज क्राइटीरिया: डिपार्टमेंट ने एंट्री क्लास में एडमिशन के लिए मिनिमम ऐज क्राइटीरिया फिक्स किया है। नर्सरी में एडमिशन के लिए 3 साल, केजी में 4 साल, यूकेजी में 5 साल और फर्स्ट में 6 साल होने जरूरी हैं। स्टूडेंट्स की यह उम्र 1 अप्रैल 2026 को पूरी होनी चाहिए। एडमिशन प्रक्रिया को स्टेपवाइज जानिए…     ऑनलाइन करना होगा आवेदन: प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के सिर्फ ऑनलाइन प्रक्रिया से ही होगा। स्कूल सीधे अपने स्तर पर एडमिशन नहीं देंगे। rte.epunjabschool.gov.in पोर्टल पर एडमिशन के लिए ऑनलाइन अप्लाई करना होगा।     रजिस्ट्रस्टेशन करना जरूरी: पेरेंट्स को एडमिशन के लिए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद ऑनलाइन ही फार्म भरना होगा। आखिर में उसमें डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे। पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद फाइनल सब्मिशन होगा।     ये सर्टिफिकेट जरूरी: ऑन लाइन फार्म भरते वक्त पेरेंट्स को बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट या अस्पताल का रिकार्ड, आंगनबाड़ी रिकार्ड अपलोड करना होगा। अगर कुछ भी उपलब्ध नहीं है तो पेरेंट्स को मजिस्ट्रेट से अटेस्टेड एफिडेविट देना होगा। रेजिडेंस सर्टिफिकेट के तौर पर आधार, वोटर आईडी, बिजली बिल पानी का बिल या राशन कार्ड अपलोड करना होगा। वहीं इलिजिबिलिटी के लिए कास्ट सर्टिफिकेट, इनकम सर्टिफिकेट, दिव्यांग सर्टिफिकेट, वार विडो या अनाथ का सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा।     गलत जानकारी दी तो कानूनी कार्रवाई: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व फार्म भरते समय गलत जानकारियां दी गई या फिर कोई फर्जी डॉक्यूमेंट लगाए गए तो बच्चे का एडमिशन रद्द कर दिया जाएगा और अभिभावकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डिपार्टमेंट किसी भी लेवल पर दस्तावेजों की वेरिफिकेशन कर सकता है। स्कूलों के लिए गाइड लाइन – कोई स्क्रीनिंग टेस्ट या कैपिटेशन फीस नहीं – RTE बच्चों के साथ कोई भेदभाव नहीं – उन्हें अलग कक्षा या अलग समय पर नहीं पढ़ाया जाएगा – लाइब्रेरी, कंप्यूटर, खेलकूद और अन्य सुविधाओं में बराबर अधिकार – कक्षाएं समावेशी और सुरक्षित रखनी होंगी – स्कूलों को पोर्टल पर नामांकन और उपस्थिति नियमित अपडेट करनी होगी। स्कूलों को फीस ऐसे मिलेगी -सरकार स्कूल को प्रति बच्चा व्यय या वास्तविक फीस जो भी कम होगा उसे देगी। -स्कूल को इसके लिए अलग बैंक खाता खोलना होगा, जिसमें केवल RTE राशि आएगी। -सरकार से सब्सिडी ले चुके स्कूलों को सरकार कोई राशि नहीं देगी। ऐसे कर सकेंगे शिकायत आरटीई से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए जिला शिक्षा अधिकारी शिकायत निवारण अधिकारी होंगे। अगर कोई आवेदन रद्द होता है तो एक सप्ताह के अंदर पेरेंट्स को लिखित शिकायत देनी होगी। जिला शिक्षा अधिकारी को 15 दिन में शिकायत का निपटारा करना होगा। जिला शिक्षा अधिकारी के फैसले के खिलाफ पंजाब स्टेट कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट के पास अपील कर सकेंगे। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी को समय समय पर स्कूलों की जांच करनी होगी। अभिभावकों और स्कूलों के लिए अहम बातें यह SOP सिर्फ 2026-27 सत्र के लिए है, लेकिन विभाग समय-समय पर इनमें संशोधन कर सकता है। पंजाब में 1500 से ज्यादा प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर रजिस्टर हो चुके हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अपील की है कि पेरेंट्स तय समय पर सही दस्तावेज अपलोड करके बच्चों का रजिस्ट्रेशन करवाएं। स्कूल प्रबंधन बच्चों के साथ किसी तरह का भेदभाव न करें। भेदभाव करने की स्थिति में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने फटकार लगाई तो शुरू किया पोर्टल पंजाब के प्राइवेट स्कूल्स में आरटीई के तहत एडमिशन न होने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंचा। कोर्ट के आदेश पर पिछले साल सरकार ने सभी प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपल्स को 25 प्रतिशत सीटें खाली रखने के आदेश दिए लेकिन उन सीटों पर एडमिशन ही नहीं करवाए। कोर्ट ने फटकार लगाई तो एजुकेशन डिपार्टमेंट ने आरटीई पोर्टल पर स्कूलों की रजिस्ट्रेशन करवाई और अब एडमिशन का लिंक लाइव कर दिया।

डॉ. बलजीत कौर ने जारी की 352 करोड़ की राशि, बुजुर्ग पेंशन के लिए बड़ा कदम

चंडीगढ़   सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री पंजाब डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के तहत बुजुर्ग पेंशन योजना के अंतर्गत 352 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार बुजुर्गों की भलाई और आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।मंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा हर महीने 23,51,338 से अधिक उम्रदराज लाभार्थियों को वक्त रहते पेंशन के रूप में आर्थिक सहायता मिलती रहे, इस मंतव्य को ध्यान में रखते हुए 4000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि कई बुजुर्गों के लिए यह पेंशन जीवन का महत्वपूर्ण सहारा साबित हो रही है, जिससे वे अपनी दैनिक जरूरतें पूरी कर आत्मनिर्भर जीवन जी पा रहे हैं। यह योजना सरकार द्वारा बुजुर्गों को सम्मान और सुरक्षा देने के उद्देश्य को दर्शाती है। मंत्री के अनुसार, 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के पुरुष और 58 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाएं, जिनकी वार्षिक आय 60,000 रुपये से अधिक नहीं है, इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि जिन आवेदकों के पास 2.5 एकड़ तक सिंचित जमीन, या 5 एकड़ तक असिंचित (बारानी) जमीन, या पानी वाले क्षेत्र में 5 एकड़ तक जमीन (पति-पत्नी की संयुक्त जमीन सहित) है, वे भी इस योजना के लिए पात्र हैं। कैबिनेट मंत्री ने जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेंशन का समय पर वितरण सुनिश्चित किया जाए और लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा किया जाए। उन्होंने नियमित निगरानी और फील्ड स्तर पर जांच करने के भी निर्देश दिए, ताकि कोई भी पात्र बुजुर्ग लाभ से वंचित न रहे और पारदर्शी तरीके से राशि लाभार्थियों तक पहुंचे। डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का हर बुजुर्ग सम्मान, आत्मनिर्भरता और सुरक्षा के साथ जीवन व्यतीत कर सके।

केंद्र ने पंजाब-चंडीगढ़ के किसानों को गेहूं खरीद के लिए दी विशेष छूट, राहत की खबर

चंडीगढ़  बेमौसम बारिश से जूझ रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने हालात को देखते हुए बड़ा फैसला लेते हुए पंजाब और चंडीगढ़ में गेहूं की खरीद के लिए विशेष छूट को मंजूरी दे दी है, जिससे किसानों को बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी दी है। उन्होंने लिखा," अनियमित वर्षा के चलते गेहूं खरीद में छूट देने का अनुरोध 9 अप्रैल 2026 को प्राप्त हुआ था। इसके तुरंत बाद 10 अप्रैल को सभी जिलों में हालात का जायजा लेने के लिए टीमों को तैनात किया गया। प्रभावित किसानों को मिलेगी तुरंत राहत मैदानी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र (RMS) 2026–27 के तहत यह अहम फैसला लिया है। मंत्री ने बताया कि इस कदम से किसानों को मजबूरी में फसल बेचने (डिस्ट्रेस सेल) से बचाया जा सकेगा और उन्हें उचित मूल्य मिल सकेगा। सरकार का कहना है कि ये छूटें RMS 2026–27 की शुरुआत से ही लागू होंगी, जिससे प्रभावित किसानों को तुरंत राहत मिलेगी। किसानों ने चक्का जाम का फैसला टाला केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में पत्र राज्य सरकार को भेज दिया है। उन्होंने कहा कि यह आदेश आज से ही लागू हो जाएंगे। किसानों ने रेल का चक्का जाम करने की घोषणा की थी हालांकि बाद में उसे टाल दिया था। केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्‌टू ने भी सुबह ही इस संबंध में जानकारी दे दी थी। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने एफसीआई के जरिए राज्य सरकार को गेहूं खरीद के मानकों में बदलाव की जानकारी दे दी थी। केंद्र सरकार के पत्र के अनुसार गेहूं खरीद के मानकों में दी गई छूट 1. कलर लॉस (चमक में कमी) वाले गेहूं की सीमा पूरे पंजाब और चंडीगढ़ (यू.टी.) में 70% तक बढ़ा दी गई है। 2. सिकुड़े हुए एवं टूटे हुए दानों की सीमा, जो पहले 6% थी, उसे बढ़ाकर 15% तक कर दिया गया है। 3. क्षतिग्रस्त एवं आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त दानों का कुल प्रतिशत 6% से अधिक नहीं होगा। 4. नए मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं को अलग से रखा जाएगा और उसका अलग हिसाब रखा जाएगा। 5. नए मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं के भंडारण के दौरान गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की गिरावट के लिए पंजाब सरकार और चंडीगढ़ (यू.टी.) स्वयं जिम्मेदार होंगे। 6. नए मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं के स्टॉक का निपटान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। 7. इस छूट के कारण उत्पन्न किसी भी वित्तीय या परिचालन संबंधी प्रभाव की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

पंथक मुद्दों पर सीएम मान की घेराबंदी, शिअद और सुखबीर बादल बने निशाने पर

अमृतसर  पंजाब की सियासत में इन दिनों एक पंथक मुद्दे पर खूब सियासत गरमाई हुई है। इस बार निशाने पर है शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष एवं पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल।  सुखबीर के एक बयान से शुरू हुए इस विवाद पर पंथक नेताओं के साथ-साथ अब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी आक्रामक दिख रहे हैं जबकि सुखबीर बादल इसे अपने और अपनी पार्टी के खिलाफ साजिश बता रहे हैं। बादल का दावा है कि शिअद पंथ और गुरुघर की सेवा करने वाली पार्टी है। दरअसल, यह सियासत 2 दिसंबर 2024 के उस हुक्मनामे से जुड़ी है जिसे श्री अकाल तख्त ने सुखबीर बादल के खिलाफ जारी किया था। बेअदबी के एक मामले में बादल और शिअद की समूची लीडरशिप श्री अकाल तख्त के समक्ष पेश हुई थी और तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने बादल को तनखाहिया घोषित उन्हें धार्मिक सजा दी थी। 13 अप्रैल को विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान भी सीएम ने इस मसले का जिक्र किया। विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे ज्ञानी रघुबीर सिंह ने भी बादल के इस बयान पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। सीएम अब रैलियों के दौरान इस मुद्दे को खूब उछाल रहे हैं। सुखबीर बादल का दावा, उन्हें खत्म करने की साजिश सुखबीर बादल ने दावा किया था कि जिस दिन बहिबलकलां और बरगाड़ी की घटनाएं हुई थीं वे पंजाब से बाहर थे मगर यह विवाद खत्म करने के लिए उन्होंने सब कुछ अपनी झोली में पड़वा लिया था। बादल ने कहा था कि उन पर कई सियासी हमले हुए। कुछ लोग जो खुद को धार्मिक नेता कहते थे, वे उनकी सियासत को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने यहां तक साजिश कर दी थी कि सजा के दौरान उन्हें श्री हरिमंदिर साहिब के बाहर बिना सुरक्षा बैठने का हुक्म दिया गया। उन पर जानलेवा हमला हुआ मगर परमात्मा का हाथ उनके सिर पर था। फैसला साजिश थी, साबित करें बादल : ज्ञानी रघुबीर बादल के बयान पर श्री अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कहा कि बादल का यह बयान श्री तख्त साहिब की पवित्रता का अपमान है। सजा किसी साजिश के तहत नहीं बल्कि बयानों पर आधारित थी। अकाली लीडरशिप ने अपने कामों को माना था। अपने कामों का इकबाल किया था और उन्हें रिवायती धार्मिक सेवा करने का मौका दिया गया था। सेवा करने के बावजूद सुखबीर बादल ने अपने कामों से इन्कार कर दिया है। बादल यदि श्री अकाल तख्त साहिब आकर यह साबित कर दें कि उस वक्त दिया फैसला एक साजिश का हिस्सा था तो वे सिख परंपराओं के अनुसार किसी भी धार्मिक सजा को स्वीकार करने को तैयार हैं। 2 दिसंबर 2024 का फैसला पंथक रिवायतों और कबूल किए हुए गुनाहों के मुताबिक था। अकाली दल बेअदबी के लिए दोषी है : मान इसी विवाद पर सीएम मान हमलावर हैं। उन्होंने कहा कि शिअद श्री गुरु साहिब जी की बेअदबी के लिए दोषी है। इन नेताओं के पाप माफ नहीं किए जा सकते। ये अवसरवादी नेता हैं जो अपनी सुविधा और निजी सियासी हितों के अनुसार गिरगिट की तरह अपने रंग और रुख बदलते रहते हैं। जो लोग बेअदबी के लिए जिम्मेदार हैं वे श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश हुए और पूरी जनता के सामने अपना अपराध कबूल किया। हालांकि यह उनकी राजनीतिक इच्छाओं के अनुसार नहीं था इसलिए उन्होंने कुछ समय बाद यू-टर्न ले लिया और कहने लगे कि कुछ लोग केंद्रीय एजेंसियों के हाथों की कठपुतली बनकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे। अब पूरे प्रदेशवासी इन नेताओं का असली चेहरा जान गए हैं।  

पंजाब में रेल रोको आंदोलन तीन दिन के लिए स्थगित, किसान यूनियनों का अहम फैसला

चंडीगढ़  पंजाब की मंडियों में गेहूं खरीद शुरू न होने से नाराज किसानों ने आज रेल रोको आंदोलन का एलान किया था। अब इसे तीन दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि यह फैसला रणनीति के तहत लिया गया है।  पंधेर ने सरकार के रवैए पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत के बजाय टालमटोल की नीति अपना रही है, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तो किसान फिर से आंदोलन को तेज करेंगे। पंधेर ने स्पष्ट किया कि किसान अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और जरूरत पड़ी तो ‘रेल रोको’ आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से फसल पहले ही प्रभावित है लेकिन सरकार खरीद को लेकर गंभीर नहीं दिख रही। मंडियों में गेहूं खराब हो रहा है और कीमतों में कटौती की जा रही है। किसानों ने तुरंत खरीद शुरू करने बारदाने की कमी दूर करने और मंडियों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी है। 

NOON कंपनी ने UAE में राइडर्स की भर्ती की घोषणा, हर महीने 1 लाख तक कमाई का अवसर

जालंधर/फरीदकोट  खाड़ी देशों (UAE) में करियर बनाने का सपना देख रहे भारतीय युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। दुनिया की प्रसिद्ध ई-कॉमर्स और डिलीवरी कंपनी ‘नून’ (Noon) बड़े स्तर पर डिलीवरी राइडर्स की भर्ती कर रही है। बता दें कि ‘नून’ मशहूर ‘एमार ग्रुप’ (Emaar Group) का हिस्सा है, जिसने दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा का निर्माण किया है। ​लाखों में कमाई और बेहतरीन सुविधाएं ​कंपनी की ओर से चुने गए उम्मीदवारों को न केवल बेहतर वेतन, बल्कि अन्य आकर्षक सुविधाएं भी दी जा रही हैं:     ​सैलरी: 2500 दिरहाम बेसिक सैलरी।     ​कुल कमाई: कमीशन और टिप्स मिलाकर एक राइडर हर महीने 3500 से 5000 दिरहाम तक कमा सकता है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग ₹75,000 से ₹1,00,000 तक होती है।     ​अतिरिक्त लाभ: जब तक कैंडिडेट को दुबई का ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिल जाता, तब तक कंपनी फ्री रहने, खाने और काम करने की सुविधा प्रदान करेगी। ​भर्ती के लिए क्या है योग्यता? ​इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कंपनी ने निम्नलिखित शर्तें रखी हैं:     ​आयु: 20 से 40 वर्ष के बीच।     ​शिक्षा: कम से कम 10वीं पास होना अनिवार्य।     ​अनिवार्य दस्तावेज: कैंडिडेट के पास वैध भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए। ​इंटरव्यू का समय और स्थान ​भारत सरकार से मान्यता प्राप्त एजेंसी ‘श्रमण ओवरसीज’ (Shraman Overseas) इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को संचालित कर रही है। इच्छुक उम्मीदवारों के लिए क्लाइंट इंटरव्यू की तारीखें इस प्रकार हैं:     ​23 अप्रैल: जालंधर     ​24 अप्रैल: फरीदकोट ​कैसे करें आवेदन? ​रजिस्ट्रेशन और अधिक जानकारी के लिए उम्मीदवार सीधे ऑफिस में संपर्क कर सकते हैं:         ​पता: 243, मोनिका टावर, मिलाप चौक, जालंधर।         ​हेल्पलाइन नंबर: +91 77079-30303, +91 98883-47348, +91 93177-70773     ​नोट: विदेश में नौकरी के लिए आवेदन करते समय सभी दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच स्वयं जरूर कर लें।  

परिवहन मंत्री ने PRTC कंडक्टर के परिवार को 40 लाख रुपये की सहायता दी, ड्यूटी के समय हुई थी मृत्यु

चंडीगढ़  वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल चीमा ने आज पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) के दिवंगत कंडक्टर रमनदीप सिंह के परिवार के साथ गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें 40 लाख रुपये का बीमा चेक भेंट किया। रमनदीप सिंह ने ड्यूटी के दौरान दुखद रूप से अपनी जान गंवा दी थी। जिला श्री मुक्तसर साहिब के गांव घुमियारा के निवासी रमनदीप सिंह 2 जनवरी 2017 को आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से पीआरटीसी में कंडक्टर के रूप में भर्ती हुए थे। इस अवसर पर मंत्री द्वारा मृतक के पिता प्रगट सिंह को यह चेक सौंपा गया। मंत्री ने कहा कि यह मुआवजा पीआरटीसी और पंजाब एंड सिंध बैंक के बीच हुए बीमा समझौते के तहत निर्धारित कॉर्पोरेट बीमा शर्तों के अनुसार प्रदान किया गया है, जिसका उद्देश्य शोकग्रस्त परिवार को आर्थिक सहायता देना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि पंजाब सरकार अप्रत्याशित कार्यस्थल हादसों के मद्देनज़र अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों की भलाई और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस मौके पर पीआरटीसी के चेयरमैन हरपाल जुनेजा, मैनेजिंग डायरेक्टर बिक्रमजीत सिंह शेरगिल तथा पंजाब एंड सिंध बैंक के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे और उन्होंने परिवार के साथ संवेदना व्यक्त की।