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बिहटा एयरपोर्ट की उड़ानों पर संकट, 460 करोड़ का टर्मिनल सिर्फ 2% बना

पटना  बिहार की राजधानी पटना से सटे बिहटा एयरपोर्ट से नागरिक विमानों की उड़ान की महत्वाकांक्षी परियोजना अधर में लटक गई है। दरअसल, बिहटा में एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन के निर्माण कार्यों को पूरा करने का जिम्मा जिस कंपनी को दिया गया था, उसने पूरी तरह से काम बंद कर दिया है। लगभग 460 करोड़ की लागत से टर्मिनल भवन के निर्माण का जिम्मा पिछले वर्ष अप्रैल में रूस की कंपनी ज्वाइंट स्टॉक कंपनी इंडस्ट्रियल एसोशिएशन बोजरोजदिनी को मिला था। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार अब तक टर्मिनल भवन का मात्र दो प्रतिशत काम ही हो सका है। मई से कंपनी ने मजदूरों और मशीनों को हटाना शुरू कर दिया था। पिछले एक माह से टर्मिनल भवन का काम पूरी तरह से ठप है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने एयरपोर्ट अथॉरिटी और इंडिया के केंद्रीय कार्यालय को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है। स्थानीय पदाधिकारी अब निर्माण परियोजना के संबंध में केंद्रीय निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बिहटा एयरपोर्ट के निर्माण का काम लेने वाले रूस की कंपनी ने तय लागत से 31 प्रतिशत कम की राशि पर निर्माण का जिम्मा दिया था। पूर्व से ही लेटलतीफ चल रही इस परियोजना को पूरा करने के लिए समयबद्ध तरीके से काम करने का निर्देश एएआई ने दिया था। आरंभ से ही कंपनी ने निर्माण कार्यों को लेकर धीमी गति रही। एक साल बीतने के बाद संबंधित एजेंसी ने टर्मिनल भवन का निर्माण कार्य पूरी तरह बंद कर दिया। फिलहाल मामले को लेकर स्थानीय अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। इस परियोजना को 14 मार्च 2027 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। आईआईटी, एनआईटी सहित कई संस्थान हैं एयरपोर्ट के निर्माण की प्रतीक्षा स्थानीय लोगों के लिए दूसरे राज्यों के लोग भी कर रहे हैं। यहां आईआईटी, एनआईटी, एफडीडीआई, नाइलिट जैसे कई केंद्रीय शिक्षण संस्थान हैं जहां दूसरे राज्यों के छात्र पढ़ते हैं। पटना से बिहटा की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए दानापुर स्टेशन से बिहटा तक एलिवेटेड रास्ता भी तैयार किया जा रहा है। ऐसे में एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन का निर्माण बंद होने से परियोजना पूरा होने का इंतजार कर रहे लोगों को झटका लगा है। मामले में फिलहाल केंद्रीय मुख्यालय के निर्देशों की प्रतीक्षा है। 1413 करोड़ से अधिक की है परियोजना परियोजना पर 1400 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जानी है। दो मंजिला टर्मिनल भवन को 50 लाख सालाना यात्रियों की क्षमता का बनाया जाना तय हुआ है। दस विमानों के लिए पार्किंग, एयरोब्रिज, आवासीय परिसर, प्रशासनिक भवन, मल्टीलेबल कार पार्किंग व अन्य नागरिक सुविधाएं विकसित की जानी है। हालांकि परिसर में एप्रॉन का निर्माण कार्य जारी है। इसे 50 करोड़ से 15 महीने में पूरा करना था।

पटना में 2-3 दिन बारिश के आसार, बिहार के कई जिलों में वज्रपात और तेज हवा की चेतावनी

 पटना राजधानी पटना और इसके आसपास के इलाकों में मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पटना केंद्र द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक पटना सहित दक्षिण-मध्य बिहार के विभिन्न इलाकों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश दर्ज की जा सकती है। मौसम केंद्र के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान पटना में बारिश दर्ज नहीं की गई है और मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहा। मौसम विभाग के अनुसार आज 10 सितंबर को गया, नवादा, रोहतास और सीवान में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। कल कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार 11 सितंबर को बिहार के उत्तर-पूर्वी भागों में मेघ गर्जन और वज्रपात के साथ 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में हल्की से भारी बारिश हो सकती है। हालांकि, हवा में नमी अधिक बनी हुई है, जहां सुबह के समय सापेक्षिक आर्द्रता 89 प्रतिशत तक दर्ज की गई। तापमान की बात करें तो पटना का अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। आने वाले दो-तीन दिनों तक अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने के आसार हैं, जिससे तापमान में बहुत बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। मौसम विभाग ने की अपील मौसम विभाग ने सतर्क करते हुए अलर्ट जारी किया है कि बारिश के दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और मेघ गर्जन के साथ वज्रपात (आकाशीय बिजली) गिरने की आशंका है। खराब मौसम को देखते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को खुले स्थानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

शराबबंदी पर CM सम्राट चौधरी का बड़ा बयान, बोले- बिहार को सालाना ₹20 हजार करोड़ का नुकसान; फिर भी जारी रहेगी नीति

 पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दो टूक कहा है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी आगे भी लागू रहेगी। इससे कोई समझौता नहीं होगा। भले ही इससे बिहार को सालाना 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन यह ऐतिहासिक फैसला बिहार की आधी आबादी के सम्मान से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने एक समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में राज्य में शराबबंदी, बाढ़, रोजगार, पलायन से लेकर कई राजनीतिक मु्द्दों पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के आग्रह पर राज्य में शराबबंदी लागू की थी। इसका सकारात्मक असर हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में नेपाल से आने वाली कोसी और गंडक आदि के जरिए बाढ़ आती है। हाईलेवल डैम बनाने को लेकर डीपीआर की सहमति बनी है। अभी जो बाढ़ की स्थिति बनी है, उसके लिए राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। नदियों के भीतरी इलाकों में रहने वाले 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर लाया गया। सामुदायिक रसोई चलाकर उन्हें भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2030 के पहले बिहार से पलायन रुक जाएगा। 2030 तक पढ़ाई से लेकर नौकरी तक की बेहतर व्यवस्था हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार के साथ 30 सालों से काम कर रहा हूं। वह मेरे पितातुल्य हैं। एक सवाल पर उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का नेता कौन होगा, यह पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करता है। यह पार्टी का आंतरिक मामला है। नीतीश कुमार को बताया पिता तुल्य मुख्यमंत्री ने नीतीश कुमार के साथ अपने लंबे राजनीतिक संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह पिछले 30 सालों से नीतीश कुमार के साथ काम कर रहे हैं. उन्होंने नीतीश कुमार को पिता तुल्य बताया।  भाजपा के अगले नेता को लेकर पूछे गए सवाल पर सम्राट चौधरी ने कहा कि यह फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है. उन्होंने इसे भाजपा का आंतरिक मामला बताया।  2030 तक पलायन रोकने का दावा मुख्यमंत्री ने बिहार से पलायन को लेकर भी बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि 2030 से पहले राज्य से पलायन रोक दिया जाएगा. उनके मुताबिक, तब तक पढ़ाई से लेकर रोजगार तक बेहतर व्यवस्था तैयार हो जाएगी. सरकार का जोर राज्य में ही युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है।  बाढ़ को लेकर हाईलेवल डैम की तैयारी बाढ़ के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल से आने वाली कोसी और गंडक जैसी नदियों के कारण बिहार में बाढ़ की समस्या आती है. हाईलेवल डैम बनाने को लेकर डीपीआर की सहमति बन चुकी है।  फिलहाल बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. नदियों के भीतरी इलाकों में रहने वाले करीब 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. उनके लिए सामुदायिक रसोई भी चलाई जा रही है।  फरक्का बराज को लेकर भी उठाया सवाल सम्राट चौधरी ने फरक्का बराज को भी बिहार के लिए नुकसानदायक बताया. उन्होंने कहा कि इसके कारण गंगा नदी में गाद जमा हो रही है. इससे नदी की चौड़ाई अलग-अलग जगहों पर बढ़ गई है।  मुख्यमंत्री के अनुसार, बक्सर में गंगा की चौड़ाई करीब 4 किमी, पटना में 11 किमी, बेगूसराय में 17 किमी और भागलपुर में 26 किमी तक हो जाती है।  उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि को लेकर बिहार की मांग स्पष्ट है. राज्य को पीने, खेती और उद्योग के लिए जरूरत के अनुसार किसी भी समय पानी लेने का अधिकार मिलना चाहिए. इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से बातचीत की गई है।  फरक्का बराज से बिहार को नुकसान मुख्यमंत्री ने कहा कि फरक्का बराज से बिहार को नुकसान है। इससे गंगा नदी में गाद जमा हो गयी है। इस कारण बक्सर के पास गंगा की चौड़ाई चार किमी, पटना में 11 किमी, बेगूसराय में 17 किमी और भागलपुर में 26 किमी हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि फरक्का जल संधि पर बिहार की ओर से यह आग्रह है कि हमें पीने, खेती करने और उद्योग के लिए किसी भी समय पानी लेने का अधिकार हो। इसके लिए हमने केंद्र सरकार से बात की है।

बार में हथियार लेकर घुसे तो ₹1 लाख जुर्माना! नई नियमावली पर अब तक नहीं हुआ फैसला

 रांची  राज्य में बार में मारपीट, हथियार लहराने, गोली चलाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए, कार्रवाई करने के लिए जो नियमावली बनी, उसे धरातल पर नहीं उतारा जा सका। करीब सात महीने पहले सात फरवरी को उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने बार संचालन के लिए ''झारखंड उत्पाद होटल, रेस्तरां, बार एवं क्लब (अनुज्ञापन एवं संचालन) नियमावली 2026'' का ड्राफ्ट स्टेक होल्डर्स व आम लोगों के लिए जारी किया था। उक्त नियमावली पर सुझाव व आपत्तियां मंगाई गई थी, ताकि उसमें सुधार करते हुए संशोधित नियमावली को धरातल पर उतारा जा सके। सात महीने पूरे हो गए, लेकिन नियमावली धरातल पर नहीं उतारी जा सकी। अब भी राज्य में पुरानी नियमावली के तहत ही बार का संचालन हो रहा है। जो नियमावली बनी थी, वह फाइलों में ही रह गई। प्रस्तावित नियमावली में यह उल्लेख है कि होटल, रेस्टोरेंट, बार परिसर में अस्त्र-शस्त्र के साथ प्रवेश करने पर हथियार धारण करने वाले व्यक्ति को एक लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। स्टाक रजिस्टर प्रस्तुत नहीं करने पर दस हजार, उसे अद्यतन नहीं भरने पर दस हजार रुपये के जुर्माने का प्रविधान है। बार में जाने वाले ग्राहकों की सुरक्षा व सुविधा को ध्यान में रखकर नियमावली का प्रारूप बनाया गया था। नियम तोड़ने वाले बार संचालकों के लिए जुर्माने का प्रविधान प्रस्तावित है। माप से कम शराब परोसने पर, गंदा परिसर रखने पर, निर्धारित आवाज से अधिक आवाज में म्यूजिक बजाने पर, नो स्मोकिंग जोन में स्मोकिंग करने पर भी जुर्माने का प्रविधान प्रस्तावित है। बार व रेस्तरा में शराब परोसने के लिए नियम व शर्तों को प्रभावी बनाया जाना था। इसी उद्देश्य से यह नियमावली प्रस्तावित थी, लेकिन अब तक उस नियमावली पर विचार नहीं किया जा सका। तो पांच सितारा होटलों में सुबह के चार बजे तक शराब परोसी जाती राज्य में ''झारखंड उत्पाद होटल, रेस्तरां, बार एवं क्लब (अनुज्ञापन एवं संचालन) नियमावली 2026'' लागू होती तो विभिन्न क्षेत्रों व होटलों में नियम के अनुसार शराब परोसने के समय निर्धारित होते। जैसे प्रस्तावित नियमावली में पांच सितारा होटलों में सुबह के चार बजे तक शराब परोसे जाने का प्रविधान प्रस्तावित है। वर्तमान में होटल हो या रेस्टोरेंट, हर तरह के बार में रात में 12 बजे तक ही शराब परोसने का प्रविधान किया गया है। नई नियमावली में सुरक्षा के जो प्रविधान प्रस्तावित हैं, वह पुरानी नियमावली में नहीं है। सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर ही नई नियमावली का प्रस्ताव तैयार किया गया था। हालांकि, स्टेक होल्डर्स टैक्स के बिंदु पर आपत्ति जता चुके हैं, जिसपर विभाग को समीक्षा करना था। समीक्षा के बाद ही नियमावली पर आगे कोई निर्णय लिया जाना था। अब तक सभी बिंदुओं पर मामला लंबित है।  

धनबाद में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी अपडेट, 2,939 मतदान केंद्रों में 27 जर्जर

धनबाद झारखंड में अप्रैल-मई 2027 में त्रिस्तरीय पंचायत संभावित है। इसको लेकर प्रशासनिक तैयारियां चल रही हैं। चुनाव और पंचायतों से संबंधित विभिन्न रिपोर्ट समय-समय पर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जा रही है। इस कड़ी में धनबाद जिला की पंचायतों, मतदाताओं और मतदान केंद्रों से संबंधित रिपोर्ट व सूची प्रकाशित की गई है। जिसके अनुसार जिले के नौ प्रखंडों के 242 पंचायतों में 10,61,604 मतदाता मतदान करेंगे। जबकि 2939 मतदान केंद्रों में से 27 मतदान केंद्र जर्जर हैं या फिर इन्हें स्थानांतरित करने अथवा इनके मरम्मति की आवश्यकता है। जर्जर मतदान केंद्रों की स्थानांतरित करने की जरूरत जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थित इन मतदान केंद्रों में से 27 की हालत खराब है। ये अत्यंत जर्जर हो चुके हैं या फिर इनकी मरम्मति की जरूरत है। ऐसे मतदान केंद्रों में बलियापुर प्रखंड के मुकुंदा पंचायत का बीसीसीएल बिजली घर गोल्डेन पहाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। जिसे करमाटांड शिफ्ट किया गया है। जबकि आंगनबाड़ी केंद्र ब्राम्हण टोला का मतदान केंद्र के निजी भवन में संचालित हैं। इसे करमाटांड शिफ्ट करने का प्रस्ताव है। पूर्वी टुंडी के चार केंद्रों जर्जर पूर्वी टुंडी प्रखंड के महोलीडीह पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र का मतदान भवन ध्वस्त हो चुका है। जबकि सामुदायिक भवन पंडुआ पूरी तरह से जर्जर है। रूपन में पुराना पंचायत भवन फुलपहाड़ी की हालत खस्ता है। वहीं लटानी और पांड्राबेजरा पंचायत के मतदान केंद्र प्राथमिक विद्यालय शंकरडीह में था। इस स्कूल को उत्क्रमित विद्यालय रघुनाथपुर में मर्ज कर दिया गया है। इसी प्रकार से प्राथमिक विद्यालय डुमरजोर को मध्य विद्यालय पोलकेरा में मिला दिया गया है। इनके जगह पर नए भवन को चिन्हित करना होगा। पूर्वी टुंडी की तरह ही कलियासोल प्रखंड का जमाकुदर, ऐलाकेंद्र, सालुकचपड़ा और कलियासोल पंचायत में सामुदायिक भवन फतेहपुर, मध्य विद्यालय कुशियारा, चासपाड़ा पुराना पंचायत भवन, प्राथमिक विद्यालय कालुबथान पूर्व और पश्चिम अत्यंत जर्जर हैं। एग्यारकुंड में 14 मतदान केंद्रों की हालत खराब एग्यारकुंड प्रखंड में सबसे अधिक 14 मतदान केंद्रों की हालत खराब है। चांच में एनपीएस डुमरीजोड भूधंसान की चपेट में आ चुका है। प्राथमिक विद्यालय हरिजन स्कूल बंद हो गया है। इन दोनों को पीएस बुटबाड़ी और सामुदायिक भवन पंचायत उपसचिवालय में भेजने का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं जोगरात पंचायत में पीएस जूनकूदर का कमरा नंबर एक व दो की स्थिति खराब है। गोपीनाथपुर में सामुदायिक भवन आदिवासी टोला, एग्यारकुंड उत्तर में जामबानी लोहिया भवन, शिवलीबाड़ी दक्षिण में सामुदायिक भवन गड़ियाखान और गोपालपुर में पुराना पंचायत भवन व सामुदायिक भवन राजापुर के मरम्मत की जरूरत बताई गई है। वहीं कालीपहाड़ी दक्षिण पंचायत में प्राथमिक विद्यालय डीवीसी रांची कालोनी का मतदान केंद्र संख्या 46 से 51 तक जर्जर है। भौगोलिक रूप से नहीं बदलेंगी पंचायतें, दावा आपत्ति की मांग अब यह भी साफ हो गया है कि आने वाले पंचायत चुनाव में इनके भौगोलिक स्वरूप में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं होगा। निर्वाचन आयोग से मांगी गई जानकारी पर धनबाद उपायुक्त ने जो रिपोर्ट भेजी है। उसमें बताया गया है कि पंचायत की सीमाओं को ही आधार बनाया गया है। जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से वोटर लिस्ट और मतदान केंद्रों को लेकर सूची भी जारी कर दिया गया है। जिस पर दावा आपत्ति की मांग किया गया है। बाघमारा में अधिक पंचायतें जिले के बाघमारा प्रखंड में सबसे अधिक 62 पंचायतें हैं और यहां मतदाताओं की भी संख्या सर्वाधिक 2,45,812 है। यहां सबसे अधिक 668 मतदान केंद्र भी हैं। जबकि सबसे कम केवल नौ पंचायतों वाला प्रखंड पूर्वी टुंडी है। यहां कुल मतदाता 39,229 हैं और मतदान केंद्र 112 हैं। प्रखंड – पंचायतें – मतदान केंद्र – कुल मतदाता बाघमारा – 62 – 668 – 2,45,812 बलियापुर – 23 – 283 – 99,844 धनबाद – 12 – 118 – 44,523 एग्यारकुंड – 23 – 231 – 90,735 गोविंदपुर – 39 – 479 – 1,77,966 कलियासोल – 20 – 226 – 79,115 निरसा – 27 – 293 – 1,08,611 पूर्वी टुंडी – 09 – 112 – 39,229 तोपचांची – 27 – 326 – 1,06,564 टुंडी – 17 – 203 – 69,205  

राम जानकी पथ के तीसरे-चौथे पैकेज को जल्द मिलेगी मंजूरी, 107 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

पटना राम जानकी पथ के शेष हिस्सा का निर्माण 8200 करोड़ रुपये से किया जाएगा। तीसरे और चौथे पैकेज में बनने वाली इस सड़क की डीपीआर तैयार कर ली गई है। जल्द ही यह डीपीआर केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजी जाएगी। मंत्रालय की स्वीकृति के बाद इस सड़क के निर्माण की निविदा जारी की जाएगी। राम जानकी पथ के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के मेहरौना घाट से बिहार-नेपाल की सीमा भिट्टा मोड़ तक 240 किलोमीटर सड़क बननी है। इनमें तीसरे और चौथे पैकेज में सारण जिले के मशरख से नेपाल की सीमा भिट्टा मोड़ तक 150 किलोमीटर फोरलेन सड़क बनेगी। तीसरे और चौथे पैकेज में 150 किमी सड़क किन-किन गावों से होकर गुजरेगी, इसका निर्धारण पहले ही कर लिया गया है। कुल 107 गावों की जमीन का इसमें अधिग्रहण किया जाएगा। इनमें सारण के दस, गोपालगंज के 13, पूर्वी चंपारण के 48, शिवहर के पांच और सीतामढ़ी के 31 गांव शामिल हैं। जल्द ही जमीन अधिग्रहण का कार्य भी शुरू होगा डीपीआर पर केंद्र की स्वीकृति मिलने के बाद इस पथ के लिए जल्द ही जमीन अधिग्रहण का कार्य भी शुरू होगा। वहीं, पहले और दूसरे पैकेज में करीब 90 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य पहले से जारी है। तीसरे पैकेज में 76 किलोमीटर सड़क बनेगी, जो मशरख से शिवहर तक जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में AI की एंट्री, सहिया से मरीजों तक डिजिटल मदद पहुंचाने की योजना

रांची  अब आपके स्वास्थ्य की देखभाल एआई फैमिली डॉक्टर जैसी आधुनिक तकनीक करेगी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को उनके नेपाल हाउस सचिवालय स्थित कार्यालय कक्ष में स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को लेकर बैठक आयोजित की गई, जिसमें इसपर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाने के लिए एआई असिस्टेंट और एआई फैमिली डॉक्टर जैसे डिजिटल संसाधन विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। अपर मुख्य सचिव ने दोनों प्लेटफार्म के विकास के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। एआई असिस्टेंट स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न स्तरों पर कार्यरत हेल्थ प्रोफेशनल्स और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए डिजिटल सहायक के रूप में कार्य करेगा। यह उन्हें उनके दैनिक कार्यों की जानकारी और समय पर रिमाइंडर एवं अलर्ट उपलब्ध कराएगा। इसके माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उन्हें कब, कहां, किसके साथ और कौन-सा कार्य करना है, कार्य के लिए कितने लोगों की आवश्यकता होगी तथा आवश्यक संसाधन क्या होंगे। उदाहरण के तौर पर एआई असिस्टेंट किसी सहिया को यह जानकारी दे सकेगा कि उसे किस स्थान पर, किस समय टीकाकरण करना है, कितने बच्चों का टीकाकरण होना है तथा इसके लिए किन तैयारियों की आवश्यकता है। इससे स्वास्थ्य कर्मियों को अपने कार्य समय पर और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी। बैठक में एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, संयुक्त सचिव दिनेश कुमार यादव, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला, उप सचिव ध्रुव प्रसाद सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। डिजिटल स्वास्थ्य सहायक के रूप में कार्य करेगा एआई फैमिली डाक्टर प्रस्तावित एआई फैमिली डाक्टर आम लोगों के लिए एक डिजिटल स्वास्थ्य सहायक के रूप में कार्य करेगा। यह मरीज द्वारा बताई गई स्वास्थ्य संबंधी समस्या के आधार पर संभावित बीमारी और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगा। हालांकि एआई द्वारा सुझाई गई किसी भी दवा को तब तक वैध चिकित्सकीय सलाह नहीं माना जाएगा, जब तक उसे किसी पंजीकृत चिकित्सक द्वारा अनुमोदित न किया जाए। इस व्यवस्था का उद्देश्य एआई की सुविधा का लाभ उठाते हुए चिकित्सकीय सुरक्षा और विशेषज्ञों की निगरानी सुनिश्चित करना है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगी योजना अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दोनों एआई प्लेटफॉर्म के विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और इसके लिए डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया। योजना के अनुसार, एआई फैमिली डाक्टर को प्रारंभिक चरण में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा सकता है। पायलट परियोजना के परिणाम सफल रहने पर इसे राज्य के व्यापक स्तर पर लागू करने की संभावना पर विचार किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से राज्य में स्वास्थ्य कर्मियों के दैनिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित करने के साथ-साथ आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

गंगा की बाढ़ में डूबा भागलपुर का सिल्क हब, जीआई टैग वाले तीन उत्पादों पर खतरा

पटना बिहार के रेशमी शहर की आर्थिक रीढ़ बाढ़ के थपेड़ों से टूट गई है। भागलपुर में गंगा की उफनाती लहरों और बाढ़ की विभीषिका ने न केवल लाखों लोगों को बेघर किया है, बल्कि यहां की पहचान माने जाने वाले तीन वैश्विक ब्रांड (तसर सिल्क, कतरनी धान और जर्दालू आम) के वजूद पर भी गहरा संकट खड़ा कर दिया है। बता दें कि तसर सिल्क, कतरनी धान और जर्दालू आम को जीआई टैग दिया गया है। कृषि और उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की बाढ़ से भागलपुर की अर्थव्यवस्था को ऐसा झटका लगा है, जिससे उबरने में सालों लग सकते हैं। नाथनगर और चंपानगर के सिल्क हब इस समय पानी में पूरी तरह डूबे हुए हैं। आर्थिक मामलों के स्थानीय जानकार अधिवक्ता राजेश सर्राफ ने बताया कि भागलपुर का सिल्क उद्योग लगभग 50 फीसदी घरेलू और 50 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर है। पावरलूम मशीनों और कच्चे माल के पानी में डूबने से करोड़ों का नुकसान हुआ है। नाथनगर स्थित बुनकर समाज के इनायत अंसारी बताते हैं कि विदेशों से मिले ऑर्डर की समय पर डिलीवरी नहीं होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमारी साख खतरे में है। यदि बुनकरों का बनारस या कोलकाता पलायन शुरू हुआ, तो इस पारंपरिक क्लस्टर को भारी क्षति पहुंचेगी। दूसरी ओर, जिले की कृषि अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ कतरनी धान और जर्दालू आम के बागों को भी प्रकृति का कहर झेलना पड़ रहा है। सुल्तानगंज के आभा रतनपुर निवासी कृषक एवं निर्यातक मनीष कुमार सिंह बताते हैं, बाढ़ का पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहने के कारण कतरनी धान के नाजुक पौधे पूरी तरह सड़ जाएंगे। इस अनूठे सुगंधित चावल का अंतरराष्ट्रीय बाजार ठप होने के कगार पर है। जर्दालू आम के बगीचे में जलभराव पर चिंता जताते हुए वो कहते हैं कि बगीचों में जलभराव सबसे खतरनाक होता है। पीरपैंती के आम उत्पादक पप्पू यादव कहते हैं कि बगीचे में एक सप्ताह से अधिक दिनों तक पानी जमा रह गया तो पेड़ सूख जाएंगे। इससे आम की उत्पादकता में कमी आएगी। सिल्क बुनकरों को विशेष राहत पैकेज मिले : चैंबर भागलपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष रामगोपाल पोद्दार बताते हैं कि बुनकर और किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं। सरकार को इस संकट से निपटने के लिए सिल्क बुनकरों के लिए विशेष राहत पैकेज और किसानों के लिए फसल बीमा का त्वरित भुगतान सुनिश्चित करना होगा, तभी इन जीआई टैग उत्पादों को बचाया जा सकता है। सरकारी आंकड़े में (सालाना) सिल्क: 100 करोड़ कतरनी धान की पैदावार : 2000 एकड़ कतरनी धान का कारोबार: 30 करोड़ जर्दालू आम की प्रतिवर्ष पैदावार-बाजार : 10,000 मीट्रिक टन

झारखंड में मतदाता सूची को लेकर सख्ती, कोई पात्र नागरिक नाम जुड़ने से न रहे वंचित

रांची मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बुधवार को सभी उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर एसआइआर के तहत दावा-आपत्ति एवं सुनवाई, युवा मतदाता पंजीकरण तथा मतदाता सेवाओं से संबंधित कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने सभी कार्य भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दावा-आपत्ति की सुनवाई के दौरान अनावश्यक भीड़ न लगने दें। एक साथ अधिक लोगों को बुलाने की जगह टोकन सिस्टम के माध्यम से क्रमवार सुनवाई कराई जाए। प्रत्येक व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर दिया जाए तथा उपलब्ध दस्तावेज एवं तथ्यों के परीक्षण के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाए। उन्होंने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को लंबित मामलों एवं प्रतिदिन हो रहे निष्पादन की नियमित समीक्षा करें। एक से पांच फार्म-6 वाले मतदान केंद्रों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने शून्य तथा एक से पांच फार्म-6 वाले मतदान केंद्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। कहा, ऐसे मतदान केंद्रों की मतदान केंद्रवार समीक्षा करते हुए बीएलओ के माध्यम से उन नए एवं युवा पात्र भारतीय नागरिकों की पहचान की जाए, जिनकी आयु एक अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष पूर्ण हो रही है, लेकिन उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है। ऐसे सभी पात्र नागरिकों से निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्म-6 एवं आवश्यक घोषणा-पत्र प्राप्त कर उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे। साथ ही साहिबगंज में सामने आई अनियमितता की पुनरावृत्ति किसी अन्य जिले में न हो, इसके लिए आवेदन, दस्तावेज, सत्यापन एवं निर्वाचन डेटा पर प्रभावी निगरानी रखी जाए तथा किसी भी अनियमितता पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब कार्यक्रमों की तैयारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने 19 एवं 20 नवंबर को राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब कार्यक्रमों की तैयारियां अभी से प्रारंभ करने का निर्देश दिया। इसके लिए ईएलसी को-आर्डिनेटर नियुक्त कर स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। स्कूल एवं कॉलेज स्तर पर कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर विद्यार्थियों एवं युवा मतदाताओं के बीच ईसीनेट का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तथा उन्हें उपलब्ध डिजिटल मतदाता सेवाओं की जानकारी दी जाए। उन्होंने एनवीएसपी पर प्राप्त शिकायतों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन तथा ईसीनेट की ‘बुक ए काल’ सुविधा के माध्यम से प्राप्त मतदाताओं की शिकायतों एवं समस्याओं पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

शिक्षा विभाग का नया निर्देश: 25 लाख से कम राशि की निकासी DEO/DSE के स्तर से होगी

 रांची  समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिलों में राशि की निकासी को लेकर नया दिशा-निर्देश जारी किया गया है। इसके तहत अब 25 लाख रुपये से अधिक की राशि की निकासी उपायुक्त की स्वीकृति के बाद ही की जा सकेगी। वहीं, 25 लाख रुपये से कम की राशि की निकासी जिला शिक्षा पदाधिकारी या जिला शिक्षा अधीक्षक के स्तर से की जा सकेगी समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिलों में विभिन्न कार्यक्रमों के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में राशि की निकासी को लेकर जारी नए दिशा-निर्देश में वित्तीय प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट व्यवस्था करने पर जोर दिया गया है। 25 लाख रुपये से अधिक की निकासी के लिए उपायुक्त की स्वीकृति अनिवार्य किए जाने से बड़ी राशि की निकासी उच्च स्तर की मंजूरी के बाद ही हो सकेगी। वहीं, इससे कम राशि की निकासी के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी या जिला शिक्षा अधीक्षक को जिम्मेदारी दी गई है। दिशा-निर्देश में प्रखंड से लेकर राज्य स्तर तक निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी नामित करने का प्रावधान भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इस दिशा-निर्देश का उद्देश्य केंद्र समग्र शिक्षा अभियान के कार्यक्रमों में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। राशि की निकासी के लिए निर्धारित इस व्यवस्था से अभियान के तहत होने वाली वित्तीय प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से संचालित करने पर जोर दिया गया है।