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भारत-नेपाल सीमा पर बड़ा फैसला, नेपाली नंबर गाड़ियों को ईंधन नहीं मिलेगा

 सीतामढ़ी नेपाल में ईंधन की बढ़ती कीमतों, आपूर्ति संकट और फ्यूल लॉकडाउन के बीच भारत ने भी कड़ा कदम उठाया है। सीमावर्ती इलाकों के पेट्रोल पंपों पर नेपाली नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल देने पर रोक लगा दी है। तेल कंपनियों ने प्रशासन के आदेश के बाद यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। भारत और नेपाल के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी अंतर लंबे समय से तस्करी को बढ़ावा दे रहा था। नेपाल के तराई क्षेत्र जैसे वीरगंज, विराटनगर, जनकपुर, नेपालगंज, अमलेखगंज, भालवाड़ी, धनगढ़ी आदि जगहो पर नेपाली 216.50 रुपया (भारतीय 135.35 भारतीय रुपया) पेट्रोल की कीमत है। जो की नेपाल से सटे भारतीय सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल दाम से 28.79 रुपया अधिक है। वही डीजल की कीमत 204.50 (127.82 भारतीय रुपया) है। जो 31.82 रुपया अधिक है। इसी कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध रूप से ईंधन खरीदकर नेपाल में बेचने का कारोबार तेजी से बढ़ रहा था। नेपाल सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दामों में अंतर ने कालाबाजारी और तस्करी के नेटवर्क को मजबूत कर दिया था, जिससे स्थानीय उपभोक्ताओं को भी परेशानी हो रही थी। नए आदेश के बाद सीतामढ़ी के सोनबरसा, सुरसंड, भिट्ठामोड़ और बैरगनिया समेत अन्य सीमावर्ती जिलों के पेट्रोल पंपों पर नेपाली वाहनों को तेल देना वर्जित कर दिया गया है। भारत नेपाल सीमा स्थित बैरगनिया सीमा से सटे नंदवारा स्थित पेट्रोल पंप पर नेपाली को तेल न देने का पोस्टर भी लगा दिया गया हैं। बिहार इनके इन सात सीमवर्ती जिले में 400 अधिक पंप सीतामढ़ी जिले कुल 48 पेट्रोल पंप है। जिनमें नेपाल सीमा से सटे सोनबरसा, सुरसंड, परिहार, बैरगनिया, चोरौत और मेजरगंज के 5 से 10 किमी के दायरे में करीब 15 से ज्यादा पेट्रोल पंप है। वही नेपाल से सटे भारतीय सीमा के सात जिलों सीतामढ़ी, बेतिया, मोतिहारी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज मे लगभग 400 से अधिक पेट्रोल पंप है। इसमें बॉर्डर से 10 किलो मीटर के समीप 120 से ज्यादा पेट्रोल पंप है। नेपाली नंबर के वाहनों को ईंधन देने पर रोक सीतामढ़ी के जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि कंपनी के अधिकारियों एवं पेट्रोल पंप संचालकों से लगातार यह शिकायत प्राप्त हो रही थी कि नेपाली वाहनों द्वारा पेट्रोल, डीजल की कालाबाजारी एवं तस्करी की जा रही है। इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए तथा इसे रोकने के उद्देश्य से नेपाली नंबर के वाहनों को ईंधन देने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि, आवश्यक परिस्थितियों में केवल गंतव्य स्थान तक पहुंचने हेतु सीमित मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जायेगा। स्थानीय उपभोक्ताओं ने मिली राहत सीतामढ़ी पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित कुमार ने कहा कि नेपाली वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण स्थानीय उपभोक्ताओं, खासकर किसानों को डीजल के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा था। कई बार स्टॉक खत्म होने की स्थिति भी बन रही थी। नए नियम लागू होने के बाद अब स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है और आपूर्ति व्यवस्था बेहतर हुई है। आपात स्थिति में दे सकते हैं ईंधन प्रशासन ने सख्ती के बीच मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा है। निर्देशों के अनुसार, आपात स्थिति में नेपाली नागरिकों को 50 से 100 रुपये तक का सीमित ईंधन दिया जा सकता है। लेकिन, टैंक फुल या व्यावसायिक उपयोग के लिए ईंधन देने पर पूरी तरह रोक रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था केवल जरूरतमंदों की मदद के लिए है, न कि किसी भी प्रकार के व्यापारिक उपयोग के लिए। नेपाल में फ्यूल लॉकडाउन क्यों लगा? नेपाल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति बाधित होने के कारण ईंधन संकट गहरा गया है। हालात ऐसे हैं कि सरकार को सप्ताह में दो दिन का फ्यूल लॉकडाउन लागू करना पड़ा है। पिछले 75 वर्षों से भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल के लिए मदद करता रहा है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है और उसे कई जरूरी सामान कम कीमत पर देता है, जिसमें पेट्रोल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स सबसे अहम हैं। भारतीय तेल कंपनियों के जरिए भारत नेपाल की लगभग 100% तेल जरूरतें पूरी करता है।  

साइबर फ्रॉड: पटना में बैंक अधिकारी को निवेश के नाम पर लगाया 97.06 लाख का चूना

पटना राजधानी पटना में एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से साइबर अपराधियों ने 97.06 लाख की ठगी की है। अब उन्होंने इसकी शिकायत साइबर थाना में की है। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी अमरेंद्र कुमार सिन्हा हैं, जो खुद बैंकिंग प्रणाली के विशेषज्ञ थे। वह अगस्त 2024 में पूर्णिया जिला में होम लोन ब्रांच में मुख्य प्रबंधक के पद से रिटायर हुए थे। वर्तमान में पटना के पुनाईचक इलाके में रहते हैं। फेसबुक विज्ञापन से हुई शुरुआत अमरेंद्र कुमार सिन्हा की ठगी की कहानी एक सोशल मीडिया विज्ञापन से शुरू हुई। फेसबुक पर उन्होंने वेपलोग नामक एक विज्ञापन पर क्लिक  किया था, जिसके बाद अमरेंद्र कुमार सिन्हा एक युवती के संपर्क में आए। उस युवती ने खुद का परिचय साक्षी अग्रवाल के रूप में दी थी। साक्षी ने खुद को मुंबई स्थित वीवी कंस्ट्रक्शन का सीईओ बताया। उसने अपने कार्यालय का पता खोजा सोसाइटी, वैशाली नगर, जोगेश्वरी, वेस्ट मुंबई बताया था। साक्षी ने बातचीत के दौरान अमरेन्द्र कुमार सिन्हा का भरोसा जीत लिया। फिर दोनों के बीच व्हाट्सएप चैट और वीडियो कॉल के जरिए नियमित बातचीत होने लगी, जिससे अमरेंद्र का उस पर भरोसा  लगातार गहरा होता चला गया। कमीशन और ऑडिट के नाम पर वसूली साक्षी ने अमरेंद्र को पॉलीअस फाइनेंस पिक नामक एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर 45 लाख रुपए निवेश करने के लिए कहा, लेकिन अमरेंद्र कुमार सिन्हा से मात्र 43 हजार रुपये निवेश किए। ज्यादा ठगी करने के लिए विशवास जीतना जरुरी था, इसलिए अमरेन्द्र  कुमार सिन्हा का विश्वास जीतने के लिए उन्हें 1,978 रुपए की निकासी करने दी। जब उनके पोर्टफोलियो की एसेट्स वैल्यू 3.50 लाख रुपए दिखने लगी, तो जालसाजों का असली खेल शुरू हुआ। अमरेंद्र कुमार सिन्हा अब 1 लाख रुपए की निकासी करने की कोशिश की तो साक्षी ने अमरेन्द्र सिन्हा से 45 लाख रुपए एक्सचेंज एंड कमीशन के तौर पर जमा करवा लिए। फिर ऑडिट के नाम पर 5.33 लाख रुपए जमा करने को कहा तो अमरेन्द्र कुमार सिन्हा ने 5.33 लाख रुपए जमा कर दिए। मां के नाम पर भी की ठगी साक्षी ने अमरेंद्र कुमार सिहा को व्यक्तिगत रूप से भी ठगा। उसने अपनी माँ की बीमारी का बहाना बनाया और कहा कि डॉक्टर को डॉलर में भुगतान करना है। अमरेंद्र ने उसकी मदद के लिए 1 लाख रुपये को डॉलर में कन्वर्ट करवाकर भेज दिए। करोड़ों का निवेश और हाथ में शून्य जैसे-जैसे निवेश की राशि बढ़ती गई, उसे निकालने की शर्तें भी कठिन होती गईं। कंपनी ने कहा कि कुल एसेट्स निकालने के लिए 95 लाख रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट देने होंगे। साक्षी ने नाटक किया कि उसने खुद इसकी व्यवस्था कर दी है, लेकिन 5 लाख रुपये कम पड़ रहे हैं। अमरेंद्र ने भरोसा करके वह 5 लाख भी दे दिए। इसके बाद स्टाफ की सैलरी के नाम पर 1.20 लाख रुपए भी लिए गए। जब अक्टूबर 2025 में उनका खाता फ्रीज कर दिया गया, तो साक्षी ने दिल्ली जाने और खाता खुलवाने के नाम पर 30 हजार रुपए और ऐंठ लिए। इस तरह धीरे-धीरे रिटायर्ड बैंक अधिकारी ने अपनी जीवन भर की कमाई के 97.06 लाख रुपये गंवा दिए। सभी जानकारी निकले फर्जी मामला दर्ज होने पर पुलिस ने मामले की जांच की तो पता चला कि साक्षी के द्वारा दे गई साड़ी जानकारियां झूठी थी। उसने खुद के बारे में जो कुछ बताया या फिर उसने अपने कार्यालय के बारे में जो कुछ भी बताया था, सब कुछ फर्जी था। पटना के साइबर थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और अब मामले की जांच की जा रही है।  

CBSE 10वीं रिजल्ट 2026: भागलपुर में शानदार प्रदर्शन, 32 स्कूलों का रिजल्ट जारी, 98% अंक लाकर टॉपर बना छात्र

भागलपुर. CBSE 10th Result 2026 BHAGALPUR : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम इस वर्ष पूरी तरह डिजिटल माध्यम से जारी किया गया, जिससे छात्रों को परिणाम देखने और अंकपत्र डाउनलोड करने में काफी सहूलियत मिली। विद्यार्थी उमंग एप और डिजिलॉकर जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने परिणाम आसानी से देख सके। इस बार भी भागलपुर जिले के छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। परिणाम जारी होने के बाद छात्र-छात्राओं में उत्साह देखने को मिला। डिजिटल व्यवस्था के कारण इस बार विद्यार्थियों को लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ा और वे तुरंत अपना रिजल्ट देख सके। स्कूलों में भी परिणाम को लेकर हलचल और खुशी का माहौल रहा। जिले के 5200 परीक्षार्थियों ने दी परीक्षा इस वर्ष भागलपुर जिले के लगभग 5200 विद्यार्थियों ने 32 विद्यालयों से परीक्षा में भाग लिया था। परिणाम घोषित होने के बाद कई स्कूलों में जश्न का माहौल देखने को मिला। विद्यार्थियों ने एक-दूसरे को बधाई देकर अपनी सफलता साझा की। डीएवी बरारी का शानदार प्रदर्शन, यश राज बने जिला टॉपर जिले में सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन डीएवी पब्लिक स्कूल, बरारी के यश राज ने किया, जिन्होंने 98.80 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिला टॉप किया। उनके इस प्रदर्शन ने विद्यालय और जिले दोनों का नाम रोशन किया है। विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों ने उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। चार विद्यार्थियों ने हासिल किए 97 प्रतिशत अंक जिले में चार विद्यार्थियों ने 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इनमें डीएवी पब्लिक स्कूल, बरारी के देंवाश, चौहान पब्लिक स्कूल की स्वाति मिश्रा, बाल भारती विद्यालय, नवगछिया के मयंक माधव तथा न्यू होराइजन स्कूल की प्रिया कुमारी शामिल हैं। इन सभी ने मेहनत और अनुशासन से यह उपलब्धि हासिल की। 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले मेधावी विद्यार्थी भागलपुर जिले के कई विद्यार्थियों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिनमें राधा कुमारी (96.9%, चौहान पब्लिक स्कूल), सुतिक्षण वत्स झा (96.80%, हैप्पी वैली स्कूल), रिया चौधरी (96.7%, चौहान पब्लिक स्कूल), अंशु कुमार (96.6%, डीएवी पब्लिक स्कूल), सोनाक्षी कुमारी (96.2%, जवाहर नवोदय विद्यालय नगरपारा), मन्नू जी (96%, आनंदराम ढांनढानियां सरस्वती विद्या मंदिर), रचना शर्मा (95.8%, चौहान पब्लिक स्कूल), हर्षित राज (95.8%, एसकेपी विद्या विहार), आकृति राज (95.8%, डिवाइन हैप्पी स्कूल), देविका (95.2%, नवयुग विद्यालय) और मानव विशाल (95%, डीएवी पब्लिक स्कूल) शामिल हैं। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने बढ़ाया मान चौहान पब्लिक स्कूल, एसकेपी विद्या विहार, डिवाइन हैप्पी स्कूल, हैप्पी वैली स्कूल, डीएवी पब्लिक स्कूल, जवाहर नवोदय विद्यालय नगरपारा, आनंदराम ढांढनियां सरस्वती विद्या मंदिर और नवयुग विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। सभी विद्यालयों के छात्रों ने जिले का गौरव बढ़ाया। सीबीएसई अधिकारियों ने दी जानकारी और अवसर की घोषणा सीबीएसई के सिटी कोऑर्डिनेटर सुमंत कुमार ने बताया कि इस वर्ष जिले में कुल 5200 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों को एक विषय में सफलता नहीं मिली है, उन्हें सुधार का अवसर दिया जाएगा। वे मई में दूसरी परीक्षा और आवश्यकता पड़ने पर जुलाई में कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। आनंद राज का बेहतर प्रदर्शन DLS इंटर पब्लिक स्कूल, बाराहट (इशीपुर, भागलपुर) के छात्र आनंद राज ने सभी विषयों में संतुलित और प्रभावशाली अंक प्राप्त कर सफलता हासिल की है। आनंद राज ने अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य में 92 अंक (72 थ्योरी + 20 इंटरनल), हिंदी कोर्स-A में 94 अंक (74+20), गणित स्टैंडर्ड में 80 अंक (61+19), विज्ञान में 92 अंक (72+20) तथा सामाजिक विज्ञान में 98 अंक (78+20) प्राप्त किए हैं। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) में भी उन्होंने 96 अंक (46+50) हासिल कर अच्छा प्रदर्शन किया।

पटना में बीपीएससी परीक्षा घोटाला, 22 गिरफ्तार, बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

पटना बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा 14 व 15 अप्रैल को आयोजित सहायक शिक्षा विकास अधिकारी (एडीईओ) परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़ा गिरोह का खुलासा हुआ है। परीक्षा पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से 15 से 20 लाख रुपये तक की वसूली की जा रही थी। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में मास्टरमाइंड, तीन लाइनर और 18 अभ्यर्थियों समेत कुल 22 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी के आवेदन पर मुफ्फसिल थाना में बिहार परीक्षा संचालन अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तार आरोपियों में मास्टरमाइंड सूजल कुमार (भगतचौकी), लाइनर समीर कुमार (पटना), प्रियांशू कुमार (धरहरा) और प्रशांत कुमार (कहलगांव, भागलपुर) शामिल हैं। सभी लाइनरों को होटल से तथा मास्टरमाइंड को उसके घर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस को आरोपियों के मोबाइल से एक व्हाट्सएप ग्रुप मिला है, जिसमें सैकड़ों अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड पाए गए हैं। यह गिरोह कई जिलों में सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस इस ग्रुप की गहन जांच कर बड़े सरगना तक पहुंचने में जुटी है। बायोमेट्रिक के दौरान होता था खेल पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद के अनुसार, मास्टरमाइंड सूजल अपने अधीन तीन लाइनरों के जरिए पूरे नेटवर्क का संचालन करता था। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक प्रक्रिया के दौरान ऑपरेटर से मिलीभगत कर प्रश्नपत्र की तस्वीर मोबाइल से खींचकर मास्टरमाइंड को भेजी जाती थी। इसके बाद हल प्रश्नपत्र वापस लाइनर के पास पहुंचता, जो अभ्यर्थियों को उत्तर भरने में मदद करता था। गिरफ्तार लाइनरों के पास से छोटे इलेक्ट्रॉनिक चिप भी बरामद किए गए हैं, जिनमें प्रश्नपत्र और उसके उत्तर सुरक्षित पाए गए हैं। कोचिंग सेंटर की भूमिका संदिग्ध जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार सभी 18 अभ्यर्थियों ने एक ही कोचिंग सेंटर के माध्यम से इस गिरोह से संपर्क किया था। पुलिस ने कोचिंग सेंटर की पहचान कर ली है और उसके संचालक के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। केंद्राधीक्षक निलंबित, केस दर्ज उपेन्द्र ट्रेनिंग स्कूल परीक्षा केंद्र की केंद्राधीक्षक अर्चना कुमारी को निलंबित कर दिया गया है। उनके विरुद्ध कोतवाली थाना में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने बायोमेट्रिक ऑपरेटर को एंड्रॉयड मोबाइल उपयोग करने की अनुमति दी, जिससे फर्जीवाड़ा संभव हो सका। जानें एसपी ने क्या कहा? एसपी सैयद इमरान मसूद ने बताया कि परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़ा गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल से मिले व्हाट्सएप ग्रुप में बिहार के कई जिलों के संदिग्धों और सैकड़ों अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले हैं। पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही बड़े खुलासे की संभावना है।  

गैस लीकेज से हड़कंप: धनबाद-बोकारो सड़क धंसी, सुरक्षा के लिए पुलिस ने किया बैरिकेडिंग

धनबाद/केंदुआ. केंदुआ में एक बार फिर से भूधंसान हो रहा है। जहरीली गैस का रिसाव अभी पूरी तरह से बंद नहीं हुआ था कि इसी बीच बुधवार की सुबह करीब 8:30 बजे धनबाद-बोकारो मुख्य सड़क दब गई। सड़क करीब दो फीट तक नीचे दबी है। यह घटना भी पुराना महाप्रबंधक आवास के पास घटी है। इस स्थल से जहरीले गैस का भी रिसाव हुआ था। फिलहाल सड़क के दबने के बाद से इस पथ पर आवागमन को पूरी तरह से रोक दिया गया है। वाहनों को केंदुआ पुल से पुराना थाना मोड़ होते हुए धनबाद भेजा जा रहा है। केंदुआडीह थाना पुलिस ने आसपास के लोगों को भी हटा रही है। पुलिस के अनुसार मंगलवार की देर शाम को ही सड़क दबी हुई दिख रही थी, लेकिन इसका अत्यधिक प्रभाव सुबह में दिखा। इसके बाद पुलिस ने तत्काल इस फोर लेन सड़क के दोनों तरफ बैरिकेटिंग लगाकर आवागमन को रोक दिया। सड़क के दबने के साथ ही आसपास के इलाकों में जमीन पर दरारें भी पड़ रही हैं। इससे लोगों में काफी दहशत है। दरारों का यह दायरा लगातार बढ़ रहा है। इससे भूधंसान और मकानों के जमींदोज होने का भी खतरा बढ़ र हा है। सीआइएसएफ तैनात, बीसीसीएल कर्मचारियों ने शुरू की घेराबंदी घटना के बाद से पुलिस के साथ यहां सीआइएसएफ को तैनात कर दिया गया है। इसके अलावा बीसीसीएल की ओर से इलाके की घेराबंदी की जा रही है। ताकि घटना स्थल की तरफ कोई भी न जाए और जान-माल की सुरक्षा हो सके। हालांकि अभी तक घटना स्थल पर प्रशासन या फिर बीसीसीएल के अधिकारी नहीं पहुंचे हैं। छह अप्रैल को तीन दुकानों में पड़ी थी दरार इसी माह के छह अप्रैल को यहां पर तीन दुकानों में दरारें पड़ी थी। यह दुकानें भी पुराना महाप्रबंधक बंगाल की चाहरदीवारी से सटी हुई थीं। इन दुकानों को खाली कराने के साथ ही बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से मिठ्ठी भराई का काम कराया गया था। लगातार हो रही है नाइट्रोजन भराई केंदुआ स्थिति पुराना महाप्रबंधक आवास और इसके आसपास इलाको में दिसंबर 2025 में कार्बन मानोक्साइड गैस का रिसाव हुआ था। कई लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से राहत कार्य शुरू किया गया था। बीते चार माह से इस इलाके में जहरीली गैस को रोकने के लिए जमीन के अंदर नाइट्रोजन गैस की भराई लगातार हो रही है।  

रांची में हड़कंप,ट्रेजरी गड़बड़ी की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित

रांची झारखंड में ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले की वजह से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. सरकार इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की तैयारी में है. वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने प्रोजेक्ट भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि इस घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए दो स्तरों पर जांच कराई जाएगी. वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया जा रहा है, जिसकी फाइल मुख्यमंत्री को भेज दी गई है. इसके साथ ही मामले के आपराधिक पहलुओं को उजागर करने की जिम्मेदारी सीआईडी (CID) को सौंपी गई है. वेतन के नाम पर हुई गड़बड़ियों की होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ वित्त मंत्री ने विशेष रूप से हजारीबाग, बोकारो और रांची में वेतन मद में हुई अवैध निकासी का जिक्र किया है. उन्होंने कहा है ”शुरुआती जांच में सामने आया है कि नियमों को ताक पर रखकर मोटी रकम निकाली गई है”. आईएएस अधिकारियों की कमेटी यह जांच करेगी कि तकनीकी स्तर पर चूक कहां हुई और किन अधिकारियों की मिलीभगत से ट्रेजरी के सुरक्षा तंत्र को तोड़ा गया. वहीं, सीआईडी उन चेहरों को बेनकाब करेगी जिन्होंने साजिश रचकर सरकारी राशि का गबन किया है. राज्य के सभी 33 कोषागारों की ऑनलाइन निगरानी सरकार ने केवल तीन जिलों तक ही अपनी जांच सीमित नहीं रखी है. वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि राज्य के सभी 33 कोषागारों (Treasuries) का विस्तृत ऑडिट और जांच कराई जाएगी. उन्होंने बताया कि विभाग के वेब पोर्टल के माध्यम से सभी कोषागारों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है. यदि कहीं भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन या डाटा में हेरफेर पाया जाता है, तो वहां तत्काल विशेष टीम भेजकर कार्रवाई की जाएगी. दोषियों के लिए कोई रियायत नहीं सरकार के कड़े रुख से यह स्पष्ट है कि इस बार दोषियों को बचाने का कोई रास्ता नहीं छोड़ा जाएगा. वित्त मंत्री ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि रिपोर्ट आने के बाद संलिप्त अधिकारियों और कर्मियों पर न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि उन पर सख्त कानूनी मुकदमा भी चलाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य इस कार्रवाई के जरिये एक ऐसी उदाहरण पेश करना है जिससे भविष्य में सरकारी सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके.

मिसिर बेसरा दस्ते से एनकाउंटर, कोबरा और झारखंड जगुआर का ऑपरेशन जारी

 सारंडा झारखंड के सारंडा जंगल में बुधवार को एक बार फिर सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई. यह मुठभेड़ कुख्यात इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा के दस्ते के साथ हो रही है. जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बल इलाके में लंबे समय से चल रहे सर्च ऑपरेशन के तहत जंगल में तलाशी अभियान चला रहे थे. इसी दौरान नक्सली अचानक सामने आ गए और उन्होंने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी. अचानक हुई इस गोलीबारी के बाद सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की. कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर की संयुक्त कार्रवाई मौके पर सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस बल के जवान मौजूद हैं. ये सभी यूनिट्स नक्सल विरोधी ऑपरेशन में विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षाबलों को खुफिया सूचना मिली थी कि कुख्यात नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा अपने दस्ते के साथ सारंडा के जंगलों में सक्रिय है. इसी सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन तेज किया गया था. कैंप शिफ्ट कर रहे नक्सलियों से टकराव बताया जा रहा है कि मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब नक्सली जंगल के अंदर अपने ठिकाने को बदल रहे थे. इसी दौरान सुरक्षाबलों की टीम वहां पहुंच गई और दोनों का आमना-सामना हो गया. पुलिस को देखते ही नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए उन्हें घेरने की कोशिश की. कई नक्सलियों के मारे जाने की आशंका, पुष्टि नहीं सूत्रों के अनुसार, इस मुठभेड़ में कई नक्सलियों के मारे जाने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, अभी तक किसी भी नक्सली का शव बरामद नहीं हुआ है और न ही सर्च ऑपरेशन में जुटे सुरक्षा बलों के अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि ही की गई है. जंगल का घना इलाका और लगातार फायरिंग के कारण सुरक्षाबलों को सटीक स्थिति का आकलन करने में समय लग रहा है. इलाके में हाई अलर्ट, ऑपरेशन जारी फिलहाल पूरे इलाके को घेर लिया गया है और अतिरिक्त बलों को भी तैनात कर दिया गया है. सुरक्षाबल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं, ताकि नक्सलियों को पूरी तरह से खत्म किया जा सके. अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक इलाके को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता. बीच-बीच में फायरिंग कर रहे नक्सली: एसपी जिले के एसपी अमित रेणू ने बताया कि कोबरा जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है. नक्सलियों की ओर से बीच-बीच में फायरिंग हो रही है, जिसका सुरक्षा बल सतर्कता के साथ जवाब दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सामने आ पाएगी. फिलहाल पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और सुरक्षा बलों द्वारा सघन सर्च अभियान जारी है. नक्सल गतिविधियों का गढ़ है सारंडा सारंडा का घना जंगल लंबे समय से नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई से नक्सल गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन बीच-बीच में इस तरह की मुठभेड़ की घटनाएं सामने आती रहती हैं.

निर्माण कार्यों पर सख्ती: एम्स दरभंगा और ई-पैक्स की समीक्षा, समयसीमा में देरी पर चेतावनी

पटना. बिहार में केंद्र प्रायोजित प्रमुख परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (पीएमजी) और प्रगति योजनाओं की संयुक्त समीक्षा करते हुए सभी विभागों को डेडलाइन के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में एम्स दरभंगा परियोजना पर विशेष फोकस रहा। 400 केवीए हाई टेंशन लाइनों को 15 मई 2026 तक हर हाल में शिफ्ट करने को कहा गया। साथ ही, कैंपस में मिट्टी भराई और रिंग बांध निर्माण के लिए प्रस्ताव शीघ्र केंद्र को भेजने के निर्देश दिए गए। औद्योगिक विकास के मोर्चे पर गया स्थित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर ग्रुप गया को लेकर भी सरकार गंभीर दिखी। इस परियोजना से करीब 1.10 लाख रोजगार सृजन की उम्मीद जताई गई है। डोभी में औद्योगिक थाना और हेलीपैड निर्माण के साथ-साथ बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। जल मार्ग विकास परियोजना की प्रगति 76.78 प्रतिशत बताई गई। संबंधित विभागों को आईडब्ल्यूटी उत्कृष्टता केंद्र के लिए भूमि हस्तांतरण जल्द पूरा करने का निर्देश मिला। सहकारिता क्षेत्र में राज्य ने लगभग शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल कर ली है। 4477 में से 4476 पैक्स को ई-पैक्स में बदला जा चुका है और शेष को भी सप्ताह भर में ऑनलाइन करने का लक्ष्य रखा गया है। सभी पैक्स में ई-आरपी सॉफ्टवेयर के पूर्ण उपयोग पर जोर दिया गया। शहरी स्वच्छता के तहत 45 डंपसाइट में से नौ का निस्तारण पूरा हो चुका है, जबकि 13 पर काम जारी है। पटना में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और पटना-मुंगेर में वेस्ट-टू-वंडर पार्क विकसित करने की दिशा में भी पहल तेज करने को कहा गया। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी। भूमि अधिग्रहण, वन क्लीयरेंस और बिजली शिफ्टिंग जैसे मामलों में विभागीय समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, नगर निकायों में जीपीएस आधारित निगरानी और रीयूज-रिसाइकिल मॉडल को सख्ती से लागू कर कचरा मुक्त शहरों की रैंकिंग सुधारने पर बल दिया गया।

गैस प्रभावित क्षेत्र में डेढ़ फीट जमीन धंसी, बीसीसीएल ने शुरू की जांच

 धनबाद झारखंड के धनबाद जिले के केंदुआडीह कोलियरी के गैस प्रभावित क्षेत्र ओल्ड जीएम बंगला के पास धनबाद केंदुआ मुख्य मार्ग पर बुधवार को कई जगह करीब डेढ़ फीट जमीन धंस गई. घटना से गैस प्रभावित क्षेत्र में भू- धसान का खतरा बढ़ गया है. हालांकि इस घटना में जान माल की क्षति नहीं हुई है. सुरक्षा के मद्देनजर रास्ता किया गया डायवर्ट स्थानीय प्रशासन ने मामले को देखते हुए फिलहाल सुरक्षा के लिए दरार क्षेत्र को बैरिकेडिंग कर आवागमन पुराना थाना के रास्ते डायवर्ट कर दिया है. बीसीसीएल प्रबंधन ने लिया जायजा इधर घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय बीसीसीएल प्रबंधन भी घटना स्थल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. बीसीसीएल प्रबंधन और प्रशासन मामले की लगातार मॉनिटरिंग करने में जुटी हुई है. सड़क की जमीन धसने वाले जगह को बीसीसीएल ने पहले से ही भू धसान और अग्नि प्रभावित क्षेत्र घोषित कर रखा है. सड़क की दरार के जद में कुछ घर भी आ सकते है, जिसका आकलन करने में बीसीसीएल प्रबंधन जुटा हुआ है. जानकारी के अनुसार बीसीसीएल प्रबंधन गैस प्रभावित क्षेत्र में रहनेवाले दर्जनों घरों के परिवारों को शिफ्टिंग कराने को प्रयासरत है. स्थानीय लोगों में आक्रोश स्थानीय लोगो ने सड़क पर पहुंच बीसीसीएल के कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर विरोध जता रहे है. स्थानीय लोगों का कहना है बीसीसीएल पिछले चार माह से गैस कि समस्या से लोगो निजात दिलाने के लिए वैज्ञानिकों कि टीम के साथ कार्य कर रही है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकाल पाई. ऐसे में समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया गया तो  बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है.   अधिकारियों का बयान इधर, पीबी एरिया जीएम जीसी साहा ने कहा कि गैस प्रभावित क्षेत्र में मुख्य मार्ग में सड़क के दोनों ओर दरार के साथ जमीन दब गई है. जमीन के नीचे पुराना गैलरी चला हुआ है, जिसका पिलर भूमिगत आग से ध्वस्त होने के भू धसान का खतरा है. गैलरी के जद में कई घर भी आ सकते है, जिनका आकलन किया जा रहा है. प्रशासन को भी मामले से अवगत करा दिया गया है. फिलहाल सड़क डायवर्ट कर दिया गया है.

रणधीर वर्मा चौक पर प्रदर्शन, निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ विरोध

 धनबाद धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर झारखंड अभिभावक महासंघ ने एकदिवसीय धरना दिया। धरना मे झारखंड अभिभावक महासंघ के अध्यक्ष पप्पू सिंह ने छौ घंटे का उपवास धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर झारखंड अभिभावक महासंघ के बैनर तले एकदिवसीय धरना का आयोजन किया गया. इस धरना का मुख्य मुद्दा निजी विद्यालयों द्वारा की जा रही अवैध शुल्क वसूली और न्यायालय तथा न्यायाधिकरण के आदेशों की अनदेखी था. बड़ी संख्या में अभिभावक इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अपनी नाराजगी जाहिर की. महासंघ अध्यक्ष ने रखा छह घंटे का उपवास धरना के दौरान महासंघ के अध्यक्ष पप्पू सिंह ने छह घंटे का उपवास भी रखा. उन्होंने कहा कि अभिभावकों के हितों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उनके उपवास को बाद में झारखंड ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की सदस्य श्वेता किन्नर ने जूस पिलाकर समाप्त कराया. अवैध शुल्क वसूली पर गंभीर आरोप अभिभावकों का आरोप है कि जिले के अधिकांश निजी विद्यालय झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण के आदेशों का उल्लंघन कर मनमानी फीस वसूल रहे हैं. स्कूल “री-एडमिशन” के नाम पर विभिन्न प्रकार के शुल्क जैसे परीक्षा शुल्क, विकास शुल्क, वार्षिक शुल्क, लाइब्रेरी शुल्क और खेलकूद शुल्क के रूप में भारी रकम वसूल रहे हैं, जो पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है. जबरन किताब और सामान खरीदने का दबाव धरना में यह भी आरोप लगाया गया कि कई विद्यालय अभिभावकों को चिन्हित दुकानों से ही किताबें, कॉपियां और स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर करते हैं. इतना ही नहीं, जूते, मोजे और अन्य सामग्री भी तय दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जाता है. यह प्रथा न केवल अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालती है, बल्कि नियमों का भी उल्लंघन है. कानूनी प्रावधानों की अनदेखी अभिभावकों ने बताया कि यह सभी गतिविधियां झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम, 2017 के खिलाफ हैं. साथ ही शिकायत वाद संख्या 01/2005, एक्जीक्यूशन केस 1/2005 और शिकायत वाद संख्या 8/2008 में दिए गए निर्देशों की भी अवहेलना हो रही है. इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें झारखंड अभिभावक महासंघ ने जिला प्रशासन से कई मांगें रखीं. इनमें निजी विद्यालयों की शुल्क संरचना की जांच, अवैध वसूली पर रोक, किताब-कॉपी और अन्य सामग्री की जबरन खरीद पर प्रतिबंध और दोषी स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शामिल है. महासंघ का कहना है कि इन मांगों को जल्द पूरा किया जाना चाहिए. चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी धरना के दौरान महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि चार दिनों के भीतर जिला प्रशासन अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन के साथ बैठक कर कोई समाधान नहीं निकालता है, तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो यह आंदोलन व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी. सैकड़ों अभिभावकों की रही भागीदारी इस धरना में महासंघ के महासचिव मनोज मिश्रा, वरीय उपाध्यक्ष मुकेश पाण्डेय, कोषाध्यक्ष प्रेम ठाकुर, मीडिया प्रभारी रतिलाल महतो सहित कई पदाधिकारी और सैकड़ों अभिभावक शामिल हुए. सभी ने एकजुट होकर निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाई. इस धरना-प्रदर्शन में दिलीप सिंह, उदय प्रताप सिंह, बॉबी पाण्डेय, पूजा रत्नाकर, पिंकी सिंह, सोहराब खान, जीतेन्द्र अग्रवाल, रवि कुमार, टिंकू सरकार, मिहिर दत्ता, मगधेश कुमार, रविंदरनाथ सोनार, अभिषेक सिंह, भगवान दास शर्मा, तारकेश्वर तिवारी, रोबिन धिवर, श्याम पाण्डेय, मंटू सिंह, गणेश चौरसिया, प्रभात सूरौलिया, अजय वर्मा, शालिनी मिश्रा, प्रवीण गोधा, अविनाश पाण्डेय, कुल्लू चौधरी, प्रेम पाण्डेय, धीरेन्दर ब्रह्मचारी, विनय अग्रवाल, विक्की जायसवाल, श्रीकांत रक्षित, कन्हैया कुमार, सुकुमार कुम्भकार, सचिन ठाकुर, सत्येंदर पाण्डेय, राज गुप्ता,सुरेश यादव आदि भी उपस्थित थे.