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न्यू बिलिंग सिस्टम लागू होने से डिजिटल बिजली सेवाओं पर अस्थायी रोक, उपभोक्ताओं को राहत भी मिली

 पटना बिहार के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा विभाग की ओर से एक बेहद जरूरी सूचना जारी की गई है। अगर आप भी अपने घर या दुकान का बिजली बिल ऑनलाइन जमा करते हैं या स्मार्ट मीटर रिचार्ज करने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे राज्य में बिजली उपभोक्ताओं को आज रात से अगले 24 घंटे तक किसी भी प्रकार की ऑनलाइन डिजिटल सेवाएं नहीं मिल सकेंगी। बिजली कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को भविष्य में अधिक सुरक्षित, सुगम और आधुनिक डिजिटल सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक न्यू बिलिंग सिस्टम को लागू किया जा रहा है। इसी तकनीकी अपग्रेडेशन और मेंटेनेंस कार्य के चलते बिजली से जुड़ी तमाम डिजिटल सुविधाओं को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया गया है। शनिवार की रात 8 बजे से 28 जून की रात 8 बजे तक बंद रहेगा पूरा पोर्टल इस तकनीकी बदलाव के कारण राज्य के उत्तर और दक्षिण दोनों बिजली डिस्कॉम के उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। इस वजह से शनिवार की रात 8 बजे से लेकर अगले दिन यानी 28 जून की रात 8 बजे तक बिजली उपभोक्ताओं से संबंधित सभी ऑनलाइन सेवाएं पूरी तरह और अस्थायी रूप से बंद कर दी जाएंगी। इस 24 घंटे की अवधि के दौरान उपभोक्ता न तो आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपना नया बिल देख पाएंगे और न ही पुराने बकाए बिल का भुगतान डिजिटल माध्यम से कर सकेंगे। इसके साथ ही नए कनेक्शन के आवेदन या लोड बढ़ाने जैसे ऑनलाइन काम भी इस दौरान पूरी तरह से रुके रहेंगे। रीचार्ज खत्म होने पर भी नहीं कटेगी बत्ती हालांकि, इस तकनीकी शटडाउन के बीच ऊर्जा विभाग ने राज्य के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को एक बहुतबड़ी राहत दी है, जिससे आम जनता को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस मेंटेनेंस अवधि के दौरान यदि किसी स्मार्ट मीटर उपभोक्ता का बैलेंस खत्म हो जाता है और रिचार्ज नहीं हो पाता है, तो भी उस स्थिति में उनके घर या प्रतिष्ठान की बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की जाएगी। यानी बैलेंस शून्य या माइनस में जाने के बावजूद उपभोक्ताओं की बत्ती गुल नहीं होगी। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे इस अवधि में धैर्य बनाए रखें, क्योंकि रविवार रात 8 बजे के बाद नई बिलिंग प्रणाली शुरू होते ही सभी सेवाएं पहले से अधिक तेज और बेहतर तरीके से काम करने लगेंगी।

खान सर मामले में नई केस डायरी दाखिल, अदालत ने बहस के लिए दी तारीख

पटना बिहार के हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक, खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैजल खान उर्फ खान सर और उनके सहकर्मियों से जुड़ी एक बड़ी खबर पटना सिविल कोर्ट से सामने आई है। शनिवार को अदालत में इस मामले को लेकर बेहद सरगर्मी तेज रही। कोर्ट के पिछले आदेश का पालन करते हुए कदमकुआं थाना पुलिस और जांच अधिकारी ने आखिरकार मामले की पूरी तरह से 'अपडेटेड केस डायरी' अदालत के समक्ष सबमिट कर दी है। पुलिस द्वारा नई डायरी पेश किए जाने के बाद अदालत ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका पर अंतिम बहस और अगली सुनवाई के लिए 30 जून मंगलवार की तारीख दी है। अदालत ने केस डायरी का लिया संज्ञान शनिवार को हुई इस विशेष अदालती कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच कानूनी दांव-पेंच देखने को मिले। रौशन आनंद के वकील सत्यम झा ने कोर्ट परिसर में मीडिया से बात करते हुए बताया कि पुलिस द्वारा पहले जमा की गई डायरी अधूरी थी, जो सिर्फ 19 तारीख तक की ही थी। आज पुलिस ने जब नई अपडेटेड डायरी कोर्ट में पेश की, तो उसे रिकॉर्ड पर ले लिया गया। इसके तुरंत बाद रौशन आनंद के पक्ष के वकीलों ने इस नई और विस्तृत डायरी का गहराई से अध्ययन करने के लिए अदालत से कुछ समय की मांग की। अदालत ने इस व्यावहारिक मांग को स्वीकार करते हुए दोनों पक्षों को डायरी के नए पन्नों को पढ़ने और समझने के लिए तीन दिन का पर्याप्त समय दे दिया है। खान सर को 30 जून तक मिली बड़ी राहत इस सुनवाई के दौरान अदालत ने फैजल खान की गिरफ्तारी पर लगी रोक की अंतरिम सुरक्षा को आगामी 30 जून तक के लिए बरकरार रखा है। खान सर के वरिष्ठ वकील अरविंद कुमार महुआ ने स्पष्ट किया कि कोर्ट में खान सर के साथ-साथ उनके स्टाफ और कलीग्स की एंटिसिपेटरी और रेगुलर बेल दोनों याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। चूंकि शनिवार की सुबह ही पुलिस ने अपडेटेड डायरी सौंपी है, इसलिए अब मंगलवार को इस मामले पर कोर्ट में आमने-सामने बहस होगी।

अब ऑफलाइन नहीं होगी रजिस्ट्री: बिहार सरकार की नई डिजिटल व्यवस्था से मिलेगी बड़ी राहत

पटना  बिहार में जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया जल्‍द ही पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। राज्य सरकार ने 15 जुलाई से सभी जिला निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद आवेदन से लेकर दस्तावेजों की जांच, सत्यापन और रजिस्ट्री पूरी होने के बाद डीड उपलब्ध कराने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ही होगी जानकारी के अनुसार, 15 जुलाई के बाद रजिस्ट्री के लिए किसी भी प्रकार के ऑफलाइन दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सबकुछ हो जाएगा ऑनलाइन आवेदकों को सभी आवश्यक प्रमाणपत्र और दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। दस्तावेजों का सत्यापन भी डिजिटल माध्यम से किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी होगी। नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री पूरी होने के बाद आवेदकों को डीड की हार्ड कॉपी के लिए कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे उन्‍हें राहत मिलेगी। विभाग की ओर से पंजीकृत डीड का पीडीएफ लिंक सीधे आवेदक के मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा। जरूरत पड़ने पर इसे कभी भी डाउनलोड कर सुरक्षित रखा जा सकेगा। सभी निबंधन कार्यालयों में ट्रायल हुआ पूरा विभाग ने राज्य के सभी जिला निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस सिस्टम का ट्रायल पूरा कर लिया है। ट्रायल सफल रहने के बाद अब इसे पूरे बिहार में लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। बताया जाता है कि नई व्यवस्था से रजिस्ट्री प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और रिकॉर्ड के रखरखाव में भी आसानी होगी। पेपरलेस सिस्टम लागू होने के बाद लोगों को दस्तावेजों की फोटो कॉपी बार-बार जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे उन्‍हें काफी सहुलियत होगी। ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल रिकॉर्ड के कारण भविष्य में दस्तावेजों की खोज, सत्यापन और रिकॉर्ड प्रबंधन भी अधिक आसान हो जाएगा। साथ ही कागजी कार्रवाई कम होने से पारदर्शिता बढ़ने और अनावश्यक विलंब में कमी आने की उम्मीद है। राज्य सरकार इसे ई-गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है।    

प्लेटफॉर्म 1 से 7 तक आसान सफर, मोबाइल से घर बैठे होगी कार बुकिंग सुविधा

धनबाद  धनबाद रेलवे स्टेशन पर अब सावन माह से बैट्री चलित कार की सुविधा शुरू होगी। बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों के लिए स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में ही यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सर्कुलेटिंग एरिया से प्लेटफार्म एक से प्लेटफार्म सात तक बैट्री चलित कार पर बैठ कर पहुंच सकेंगे। कार की प्री-बुकिंग के लिए मोबाइल नंबर जारी किया जाएगा। यात्री अपनी सुविधा के लिए मोबाइल से बैट्री आपरेटेड कार बुक करा सकेंगे। वैसे यात्री जो पहले से बुक नहीं कराएंगे, उन्हें पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर यह सुविधा मिलेगी। पहले इसी माह से सेवा शुरू करने की योजना थी। 30 जुलाई से सावन माह शुरू होगा। उससे पहले सेवा शुरू होगी, जिसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। घर बैठे 24 घंटे बुकिंग, स्टेशन पहुंचते ही मिलेगी कार बैट्री कार संचालक एजेंसी यात्रियों के लिए मोबाइल नंबर जारी करेगी। मोबाइल पर घर बैठे 24 घंटे कार की बुकिंग कराई जा सकेगी। इससे स्टेशन पहुंच कर इंतजार नहीं करना होगा। सुबह से रात तक की ट्रेन की टाइमिंग के अनुसार कार बुक करा कर निर्धारित समय पर संबंधित प्लेटफार्म तक पहुंच सकेंगे। ट्रेन से उतर कर बाहर आने को भी मिलेगी सुविधा दूसरे शहर से धनबाद आनेवाले बुजुर्ग, बीमार, गर्भवती महिला या आम यात्रियों को प्लेटफार्म से बाहर सर्कुलेटिंग एरिया तक लाने के लिए भी बैट्री आपरेटेड कार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मोबाइल पर बुक कार कोच के बाहर खड़ी रहेगी, जो यात्री को सर्कुलेटिंग तक ले जाएगी। इससे अलेप्पी एक्सप्रेस से आनेवाले बीमार यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। ट्रेन प्रस्थान के 45 मिनट पहले पहुंचे, छूटने पर एजेंसी जिम्मेवार नहीं बैट्री चलित कार की सुविधा लेने के लिए यात्री को ट्रेन प्रस्थान के 45 मिनट पहले बोर्डिंग करना होगा। लेट पहुंचने पर ट्रेन छूट गई तो इसके लिए कार आपरेटर एजेंसी जिम्मेवार नहीं होगी। फिलहाल दो बैट्री चलित कार चलेंगी। प्रत्येक कार में पांच यात्री बैठ सकेंगे। प्रति यात्री किराया 50 रुपये चुकाना होगा। प्रत्येक यात्री अपने साथ अधिकतम 10 केजी सामान ले जा सकेंगे। पार्सल ले जानेवाले मार्ग से प्लेटफार्म तक पहुंचेगी कार स्टेशन के प्लेटफार्म एक के हावड़ा छोर पर जिस स्थान से पार्सल वाहनों की आवाजाही होती है, उसी स्थान से बैट्री चलित कार भी दो से प्लेटफार्म सात तक पहुंचेगी। आवागमन मार्ग को सुगम बनाने की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग विभाग को सौंपी गई है। पेट्रोल पंप की खाली जमीन पर सितंबर अंत से कोच रेस्टोरेंट धनबाद स्टेशन के पास पेट्रोल पंप की खाली जमीप पर कोच रेस्टोरेंट संचालन की तैयारियां अब अंतिम चरण में है। सितंबर माह के अंत तक कोच रेस्टाेरेंट का संचालन शुरू होने की उम्मीद है। एजेंसी ओर से शुल्क जमा करने के साथ ही रेलवे की कागजी प्रक्रिया पूरी हो गई है। जल्द ही पटरी बिछा कर उस पर रेल कोच खड़ी की जाएगी। स्टेशन के दक्षिणी छोर के बाद शहर में यह दूसरा रेल कोच रेस्टोरेंट होगा, जहां ट्रेन के अंदर बैठ कर मनपसंद व्यंजन का लुत्फ उठा सकेंगे।

जल जीवन मिशन में पिछड़ा झारखंड: लाखों घर अब भी पाइपलाइन पानी से वंचित

रांची झारखंड में जल जीवन मिशन के तहत चल रही हर घर नल जल योजना की प्रगति चिंताजनक है. देश के 100 सबसे पिछड़े प्रखंडों की सूची में झारखंड के 14 प्रखंड शामिल हैं, जहां पेयजल आपूर्ति की स्थिति खराब है. इन 14 प्रखंडों के कुल 3,40,291 घरों में से अब तक मात्र 29,433 घरों तक ही पाइपलाइन से शुद्ध पेयजल पहुंच सका है. यानी इन क्षेत्रों में औसत प्रगति केवल 8.65 प्रतिशत है. पलामू का मोहम्मदगंज की स्थिति सबसे बदतर सबसे बदतर स्थिति पलामू के मोहम्मदगंज प्रखंड की है, जहां 9,823 घरों में से सिर्फ 39 घरों तक ही पानी पहुंच पाया है. योजना के सात वर्ष बीत जाने के बाद भी राज्य के लगभग 27.89 लाख ग्रामीण परिवार आज भी प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं. झारखंड के ग्रामीण इलाकों में कुल 62.52 लाख घर हैं, जिनमें से अब तक केवल 34.62 लाख घरों (55.38 प्रतिशत) को ही कवर किया जा सका है, जबकि इस योजना का राष्ट्रीय औसत 82.03 प्रतिशत है. इससे झारखंड करीब 26.65 फीसदी पीछे चल रहा है. वर्ष 2019 में शुरू हुई इस योजना की अवधि दिसंबर 2024 में समाप्त हो गई थी, जिसे केंद्र सरकार ने अब बढ़ाकर 2028 तक विस्तार दिया है. सिमडेगा सबसे आगे जिलेवार प्रदर्शन की बात करें तो सिमडेगा की स्थिति राष्ट्रीय स्तर से भी बेहतर है. सिमडेगा में 92.93 प्रतिशत घरों (1,30,131 में से 1,20,932 घर) तक पानी पहुंचाया जा चुका है. वहीं, रांची, गुमला और पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों में प्रगति 70 प्रतिशत से कम है. राज्य में सबसे खराब स्थिति पाकुड़ जिले की है, जहां मात्र 12.85 प्रतिशत और गोड्डा में केवल 19.33 प्रतिशत घरों तक ही नल का जल पहुंच पाया है.  

दक्षिण बिहार के गया, नवादा और औरंगाबाद में नई सोलर परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी

 पटना  ग्रीन इनर्जी के क्षेत्र में बिहार की स्थिति यह है कि सोलर इनर्जी के क्षेत्र में गतिविधियां अधिक है। अपेक्षाकृत कम क्षमता वाले सोलर इनर्जी यूनिट उत्तर बिहार की तुलना में दक्षिण बिहार स्थित जिलों में अधिक आ रहे। अब तक की सबसे बड़ी यूनिट लखीसराय के कजरा में लगी है जिसकी क्षमता 185 मेगावाट है। यह कजरा की प्रथम यूनिट है। बिजली कंपनी से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार साेलर इनर्जी के क्षेत्र में अभी 367.1 मेगावाट की कुल क्षमता की अलग-अलग यूनिट पर काम हो रहा है। गयाजी में कई यूनिट पर हो रहा काम दक्षिण बिहार के गयाजी जिले में कई यूनिटों पर काम हो रहा है। इनमें एक यूनिट गयाजी के शेरघाटी में है जिसकी क्षमता 10 मेगावाट है। गयाजी के ही आमस में 15 मेगावाट और 10 मेगावाट वाली अलग यूनिट, बहेरा में 15 मेगावाट क्षमता की यूनिट अस्तित्व में आने वाली है। इसी तरह नवादा जिला स्थित अकबरपुर में 10 मेगावाट, दरियापुर में तीन मेगावाट की सोलर यूनिट अस्तित्व में आ रही है। औरंगाबाद में 20 मेगावाट की सोलर यूनिट आ रही। उत्‍तर बिहार के कई ज‍िलों में चल रहा काम पटना के बिक्रम में नहर किनारे दो मेगावाट की सोलर यूनिट कमीशंड है। उत्तर बिहार की बात करें तो पश्चिम चंपारण के रामनगर में पांच मेगावाट, मुडेरा में 10 मेगावाट, दरभंगा के मुंदरपुर में 1.6 मेगावाट, सुपौल में फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट0.5 मेगावाट यूनिट पर काम हो रहा। कजरा के बाद सबसे अधिक क्षमता 50 मेगावाट वाली यूनिट बांका में है। बांका में इसके अतिरिक्त दो अन्य यूनिट पर काम हो रहा। इसमें एक की क्षमता 15 और एक की 10 मेगावाट है। यानी वहां 75 मेगावाट क्षमता की सोलर इनर्जी उपलब्ध होगी। बांका के बौंसी में पांच मेगावाट क्षमता की एक यूनिट अलग से है।  

पटना मौसम अपडेट: 28 जून को बिजली-बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, कई जिलों में सतर्कता जरूरी

पटना  पटना मौसम विज्ञान केंद्र की तरफ से जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, 28 जून को बिहार में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिलने वाला है। एक तरफ कुछ जिलों में बादलों की गड़गड़ाहट, कड़कती बिजली और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की अनुमान लगाया गया है। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, कटिहार, भागलपुर और पूर्णिया जिलों के कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की गई है। वहीं मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, समस्तीपुर, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, रोहतास, भभुआ, भोजपुर, बक्सर, अरवल और औरंगाबाद जिलों में मेघगर्जन आकाशीय बिजली गिरने के आसार हैं। इसके अलावा, इन इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। दूसरी ओर, राज्य के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। इस क्षेत्र के कुछ जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। तापमान की बात करें तो दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार, जिनमें पटना, गया, बक्सर और भोजपुर जैसे जिले शामिल हैं, वहां अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। जबकि उत्तर बिहार और दक्षिण-पूर्व बिहार के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। राज्यभर में न्यूनतम तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने की संभावना है।

झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार पर जोर, 100 गुणवत्ता मानकों पर परखे जाएंगे सीएचसी अस्पताल

रांची  रांची जिले के अनगड़ा और रातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वास) अवार्ड दिलाने की तैयारी तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग दोनों अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने में जुटा है। यदि दोनों अस्पताल करीब 100 गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं तो उन्हें एनक्वास प्रमाणन के साथ 50 लाख रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा। यह राशि अस्पताल के विकास, मरीजों की सुविधाओं और चिकित्सा सेवाओं को और बेहतर बनाने में खर्च की जाएगी। रांची जिले में इससे पहले सदर अस्पताल को वर्ष 2024 में एनक्वास अवार्ड मिल चुका है। वहीं ओरमांझी सीएचसी और कुच्चू पीएचसी भी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। जिले के 80 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) भी एनक्वास प्रमाणन प्राप्त कर चुके हैं। अब विभाग की नजर अनगड़ा और रातू सीएचसी पर है। ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित होना है बाकी सिविल सर्जन डा. प्रभात कुमार बताते हैं कि दोनों अस्पतालों में अधिकांश स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन एनक्वास के लिए कुछ महत्वपूर्ण कमियां अभी भी दूर की जानी हैं। सबसे बड़ी चुनौती दोनों अस्पतालों में ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित करना है। योजना के तहत सदर अस्पताल स्थित मदर ब्लड बैंक से रक्त लाकर यहां सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि विशेषकर गर्भवती महिलाओं और आपातकालीन मरीजों को तत्काल रक्त उपलब्ध कराया जा सके। अनगड़ा सीएचसी में रेडियोलाजी विभाग को भी पूरी तरह सुदृढ़ किया जाना बाकी है, जबकि रातू सीएचसी में यह सुविधा पहले से संचालित है। वहीं सर्जरी की सुविधा दोनों अस्पतालों में है, लेकिन रातू सीएचसी में सबसे अधिक सीजेरियन आपरेशन किए जाते हैं। अनगड़ा में सर्जिकल सेवाएं अभी सीमित हैं। यहां जरूरत पड़ने पर निजी विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाकर आपातकालीन सर्जरी कराई जाती है, जबकि गंभीर मरीजों को उच्च संस्थानों में रेफर करना पड़ता है। कई मानकों पर होती है जांच एनक्वास प्रमाणन केवल भवन या उपकरणों के आधार पर नहीं मिलता। इसके लिए अस्पतालों को करीब 100 गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना पड़ता है। इनमें मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता, दवा उपलब्धता, प्रशिक्षित मानव संसाधन, प्रयोगशाला एवं रेडियोलाजी सेवाएं, प्रसव एवं नवजात देखभाल, आपातकालीन चिकित्सा, रिकार्ड प्रबंधन, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, मरीजों की शिकायतों का निस्तारण और अस्पताल प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर की टीम अस्पताल का निरीक्षण करती है और निर्धारित अंक मिलने के बाद ही एनक्वास प्रमाणन दिया जाता है। अस्पताल और मरीजों दोनों को मिलेगा लाभ एनक्वास अवार्ड मिलने के बाद अस्पताल को 50 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलती है। इस राशि का उपयोग नई चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने, उपकरण खरीदने, मरीजों के लिए आधारभूत सुविधाएं बढ़ाने और गुणवत्ता सुधार कार्यों में किया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ मरीजों को मिलता है। अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता बढ़ती है, संक्रमण का खतरा कम होता है, दवाओं और जांच सेवाओं की उपलब्धता बेहतर होती है तथा रेफरल की आवश्यकता भी घटती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को अपने जिले या प्रखंड स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलने लगता है। तीन वर्ष बाद फिर कराना पड़ता है मूल्यांकन एनक्वास प्रमाणन स्थायी नहीं होता। इसकी वैधता तीन वर्ष की होती है। इसके बाद अस्पताल को दोबारा आवेदन कर पुनर्मूल्यांकन कराना पड़ता है। यदि गुणवत्ता मानकों का पालन जारी नहीं रहता तो प्रमाणन समाप्त भी हो सकता है। यही कारण है कि एनक्वास प्राप्त अस्पतालों को लगातार अपनी सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखनी पड़ती है। एनक्वास क्या है? एनक्वास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन प्रणाली है। जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को यह प्रमाणन दिया जाता है। अस्पताल का मूल्यांकन मरीजों की सुरक्षा, इलाज की गुणवत्ता, स्वच्छता, मानव संसाधन, संक्रमण नियंत्रण और प्रबंधन समेत लगभग 100 गुणवत्ता मानकों पर किया जाता है। प्रमाणन मिलने पर अस्पताल को गुणवत्ता सुधार के लिए 50 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलती है। झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में जिला अस्पतालों, सीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को एनक्वास से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।

विवेकानंद स्कूल मोड़ से नयासराय तक 6.089 किमी सिक्स लेन सड़क, रांची में यातायात को मिलेगा नया स्वरूप

रांची झारखंड की राजधानी रांची में सड़क ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ी परियोजना शुरू होने जा रही है. करीब 177 करोड़ रुपये की लागत से शहर का पहला सिक्स लेन स्मार्ट रोड बनाया जाएगा. यह परियोजना पथ निर्माण विभाग के तहत स्टेट हाईवे अथॉरिटी ऑफ झारखंड द्वारा क्रियान्वित की जाएगी. टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सितंबर तक इसे अंतिम रूप देने की योजना है. इसके बाद इसी वर्ष निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है. किन इलाकों से होकर गुजरेगी यह सड़क यह प्रस्तावित सिक्स लेन सड़क विवेकानंद स्कूल मोड़ से शुरू होकर जगन्नाथ मंदिर, झारखंड हाईकोर्ट के पास से गुजरते हुए नयासराय आरओबी तक जाएगी. कुल 6.089 किलोमीटर हिस्से को सिक्स लेन में विकसित किया जाएगा. इसके बाद नयासराय आरओबी से आगे रिंग रोड तक लगभग 2.12 किलोमीटर हिस्से का चौड़ीकरण किया जाएगा, जिसे टू लेन के रूप में विकसित किया जाएगा. आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा सड़क ढांचा इस स्मार्ट रोड परियोजना में सिर्फ सड़क चौड़ीकरण ही नहीं बल्कि आधुनिक शहरी सुविधाओं का भी समावेश किया गया है. सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड बनाए जाएंगे ताकि स्थानीय यातायात को सुगम बनाया जा सके. इसके साथ ही साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ का निर्माण भी किया जाएगा, जिससे शहर में सुरक्षित और व्यवस्थित आवागमन को बढ़ावा मिलेगा. सौर ऊर्जा से जगमगाएगी सड़क इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता सड़क किनारे लगाई जाने वाली सोलर लाइटिंग व्यवस्था है. पूरी सड़क को सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था से रोशन किया जाएगा, जिससे ऊर्जा की बचत होगी और पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्था विकसित की जा सकेगी. यह पहल रांची को स्मार्ट सिटी की दिशा में एक कदम और आगे ले जाएगी. सुरक्षा और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान परियोजना में उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री के उपयोग के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा. सड़क डिजाइन को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यातायात दबाव को आसानी से संभाला जा सके और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो. पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि काम की गुणवत्ता में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शहर के विकास में अहम भूमिका यह सड़क न केवल रांची के यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि शहर के विभिन्न हिस्सों को बेहतर तरीके से जोड़ने में भी मदद करेगी. इससे हाईकोर्ट, शैक्षणिक संस्थानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी. साथ ही, यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था और शहरी विकास को भी गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

बिहार में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की योजना तेज, 2 हजार पंचायतों में सहायकों की तैनाती का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा गया

पटना बिहार के पंचायतों में दो हजार मत्स्य सहायक की नियुक्ति होगी। फिलहाल दो हजार पंचायतों में मत्स्य सहायकों की नियुक्ति की जाएगी। इससे मछली उत्पादक किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से लेकर तालाब और मत्स्य पालन संबंधी समस्याओं के समाधान तक समय पर सहायता मिल सकेगी। साथ ही, राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। मत्स्य सहायक के पदों के लिए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग की प्रशासी पदवर्ग समिति को भेज दिया है। प्रशासी पदवर्ग समिति से हरी झंडी मिलने के बाद विभाग इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजेगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इन पदों पर नियुक्ति तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से की जाएगी। पहले मत्स्य सहायकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर करने की तैयारी थी, लेकिन अब इन्हें नियमित आधार पर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। योग्यता और वेतन फिशरीज (मात्स्यिकी) में स्नातक या समकक्ष डिग्री अथवा इससे उच्च डिग्री रखने वाले अभ्यर्थी इस पद के लिए पात्र होंगे। वेतन एवं अन्य भत्ते कृषि विभाग के कृषि समन्वयक के समान होंगे। कृषि समन्वयक का पे ग्रेड 2800 रुपये है तथा मूल वेतन 5200 से 20200 रुपये है। क्यों है जरूरत राज्य सरकार ने अगले तीन वर्षों में सालाना 25 लाख टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में राज्य में मछली उत्पादन 10 लाख 28 हजार टन है। आवश्यकता की पूर्ति के लिए अभी आंध्रप्रदेश सहित अन्य राज्यों से मछली मंगानी पड़ती है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डेयरी, फिशरीज एवं पशु संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक में मछली उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य दिया था। वर्तमान में पंचायत स्तर पर मत्स्य अधिकारी नहीं होने के कारण मछली उत्पादक किसानों को समय पर उचित सलाह नहीं मिल पाती। मत्स्य सहायकों की नियुक्ति होने पर वे किसानों को समेकित खेती के तहत तालाब निर्माण और मछली पालन के लिए प्रोत्साहित करेंगे। बिहार में फिलहाल दो हजार पंचायतों में मत्स्य सहायकों की नियुक्ति की जाएगी। इससे मछली उत्पादक किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से लेकर तालाब और मत्स्य पालन संबंधी समस्याओं के समाधान तक समय पर सहायता मिल सकेगी। साथ ही, राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। कैबिनेट से मंजूरी का इंतजार मत्स्य सहायक के पदों के लिए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग की प्रशासी पदवर्ग समिति को भेज दिया है। प्रशासी पदवर्ग समिति से हरी झंडी मिलने के बाद विभाग इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजेगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इन पदों पर नियुक्ति तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से की जाएगी। पहले मत्स्य सहायकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर करने की तैयारी थी, लेकिन अब इन्हें नियमित आधार पर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। फिशरीज (मात्स्यिकी) में स्नातक या समकक्ष डिग्री अथवा इससे उच्च डिग्री रखने वाले अभ्यर्थी इस पद के लिए पात्र होंगे। वेतन एवं अन्य भत्ते कृषि विभाग के कृषि समन्वयक के समान होंगे। कृषि समन्वयक का पे ग्रेड 2800 रुपये है तथा मूल वेतन 5200 से 20200 रुपये है। आयोग द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा।