samacharsecretary.com

अब मछली पालन के लिए नहीं जाना होगा हैदराबाद, पटना में ही मिलेगी आधुनिक ट्रेनिंग और सब्सिडी

 पटना बिहार के मछली पालकों को अब उन्नत तकनीक, भारी सब्सिडी और बेहतरीन मछली बीज के लिए हैदराबाद के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) ने पटना के नंदलाल छपरा में अपना क्षेत्रीय कार्यालय खोलने का फैसला किया है. इसके लिए 5.68 एकड़ जमीन का चयन भी कर लिया गया है. यह केंद्र न केवल बिहार, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए ‘नॉलेज और ट्रेनिंग हब’ के रूप में काम करेगा, जिससे बिहार की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने वाली है. अप्रैल के आखिरी हफ्ते से शुरू होगा कामकाज मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और केंद्रीय मंत्रालय के बीच दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह तय हुआ है कि फिलहाल एनएफडीबी का अस्थायी कार्यालय पटना के मत्स्य विकास भवन में अप्रैल के अंतिम सप्ताह से ही काम करना शुरू कर देगा. विभाग के सचिव कपिल अशोक के अनुसार, इस सेंटर के खुलने से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और पीएम मत्स्य किसान समृद्धि योजना जैसी बड़ी स्कीमों की मॉनिटरिंग सीधे पटना से होगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सरकारी फंड और सब्सिडी का पैसा बिना किसी देरी के सीधे मछली पालकों के बैंक खातों तक पहुंच सकेगा. लैब से सीधे तालाब तक पहुंचेगी आधुनिक तकनीक बिहार में मछली की खपत और उत्पादन के बीच हमेशा से एक बड़ा अंतर रहा है, जिसे पाटने के लिए यह केंद्र ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’ पर जोर देगा. अब बायोफ्लॉक जैसी अत्याधुनिक मछली पालन तकनीक को लैब से निकालकर सीधे गांवों के तालाबों तक पहुंचाया जाएगा. बिहार के विशाल ‘चौर’ क्षेत्रों (दलदली भूमि) को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने की योजना है. किसानों को अब दूसरे राज्यों पर निर्भर रहने के बजाय यहीं से उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज और फिश फीड की सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा. पड़ोसी राज्यों के लिए भी बनेगा ‘नॉलेज सेंटर’ पटना का यह रीजनल ऑफिस सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगा. यह झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के मत्स्य अधिकारियों और किसानों के लिए भी मुख्य प्रशिक्षण केंद्र बनेगा. इस पहल से बिहार न केवल मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के लिए समुद्री और जलीय व्यापार का एक बड़ा गेटवे भी साबित होगा.

छोटे निवेश से बड़ी कमाई: शिव राम ने पिग फार्मिंग से बदली किस्मत

संग्रामपुर. काम कोई छोटा या बड़ा नहीं होता बस उसे करने के लिए जज्बा होना चाहिए। यह कर दिखाया है वरवां पंचायत के शिव राम ने। महज दो सुअर से पालन से कार्य शुरू कर तीन सालो में मजबूती के साथ आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ाया है। प्रखंड के वरवा पंचायत के शिव राम ने वर्ष 2024 में महज दो सुअर के बच्चों को खरीद फार्मिग शुरू की। वर्तमान में प्रति वर्ष वह कम से कम 3 से 4 दर्जन सुअर के बच्चे बेचकर 3 लाख की आय का सृजन कर रहे हैं। 18 हजार से शुरू किया था बिजनेस  शिव बताते हैं कि शुरुआती दौर में वे 18 हजार की राशि एकत्रित करके पिपरा कोठी पिंग फार्म से एक नर और एक मादा सुअर का बच्चा खरीदा। इसके लिए दो कमरे का निर्माण कर उसको पालना शुरू किया। लगभग आठ माह के बाद मादा सुअर ने एक बार मे सात बच्चे दिए, फिर उनके द्वारा एक और कमरा निर्माण करवा कर उसमें पालने का काम शुरू किया। जब सात बच्चे एक क्विंटल से लेकर 80 किलो का वजन हुआ, तो उसको बेच कर फिर अपना काम आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि 7 सुअर के बच्चों को दाना खिलाना शुरू किया। 6 माह में सुअर के बच्चों का वजन लगभग अस्सी से नब्बे किलो हुआ। इसमें लगभग 70 हजार का दाना खिलाया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके पास 11 सुअर हैं, जिसमें तीन नर और चार मादा हैं, जो हर 6 माह पर एक मादा सुअर कम से पांच से छह बच्चे देती है। इस आय से उनका घर परिवार चलता है। सरकार से नहीं मिल रहा सपोर्ट शिव बताते हैं कि इसको बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए कई बार बैंक से ऋण के लिए संपर्क किया, लेकिन लगभग एक साल बैंक में आना जाना लगा रहा, लेकिन ऋण के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिला। इनका दर्द हैं कि एक तरफ सरकार सुअर पालन को लेकर योजना चल रही हैं। वहीं, जो व्यक्ति इसको धरातल पर उतारने का प्रयास करता है, उसे योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा हैं।

संकट में आशियाने, धनबाद-सिंदरी मार्ग के पास फटी जमीन और लोगों ने शुरू किया पलायन

  झरिया झारखंड की कोयलानगरी झरिया में एक बार फिर जमीन धंसने की घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. चौथाई कुलहि इलाके में धनबाद–सिंदरी मुख्य मार्ग के पास स्थित धर्मनगर और आसपास के क्षेत्रों में अचानक कई घरों में दरारें पड़ गई हैं. जमीन फटने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. एक दर्जन से अधिक घरों पर संकट स्थानीय लोगों के मुताबिक, एक दर्जन से ज्यादा घरों में गंभीर दरारें देखी गई हैं. कई मकानों की दीवारें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जबकि कुछ घरों के पूरी तरह गिरने का खतरा मंडरा रहा है. दरारों का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है, जिससे लोगों की नींद उड़ गई है. स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोग अपने घरों में रहने से डर रहे हैं. कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर अपने घर खाली कर दिए हैं और सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है. जमीन फटने से बढ़ी दहशत इलाके में जगह-जगह जमीन फटने की घटनाएं सामने आ रही हैं. लोगों का कहना है कि पहले छोटी दरारें दिखीं, लेकिन अब वे तेजी से चौड़ी होती जा रही हैं. इससे यह आशंका जताई जा रही है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. स्थानीय निवासी बेहद डरे हुए हैं और प्रशासन से तत्काल राहत और सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो कई परिवार बेघर हो सकते हैं. पुरानी खदान बना खतरे की वजह स्थानीय लोगों ने बताया कि इस क्षेत्र में पहले कोयला खदान संचालित होती थी. करीब 50 वर्षों से लोग यहां रह रहे हैं, लेकिन अब जमीन धंसने की घटनाएं तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि बंद पड़ी खदानों के नीचे खाली स्थान और कमजोर जमीन इसकी मुख्य वजह हो सकती है. झरिया क्षेत्र पहले भी इस तरह की घटनाओं के लिए जाना जाता रहा है, जहां भूमिगत आग और खदानों के कारण जमीन धंसने की समस्या लगातार बनी रहती है. प्रशासन और बीसीसीएल पर लापरवाही का आरोप घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है. लोगों का आरोप है कि अब तक जिला प्रशासन और बीसीसीएल के कोई भी अधिकारी मौके पर हालात का जायजा लेने नहीं पहुंचे हैं. निवासियों का कहना है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद प्रशासन की उदासीनता समझ से परे है. लोगों ने जल्द से जल्द राहत कार्य शुरू करने, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.

बिहार में बहार, मुख्यमंत्री ने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दी नौकरी की सौगात और सेवा का मंत्र

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में आयोजित एक भव्य समारोह में 4954 एएनएम (विमेन हेल्थ वर्कस) को नियुक्ति पत्र सौंपे. इस मौके पर राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री भी मौजूद रहे. यह पहल राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत बनाने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है.  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली रवाना होने से ठीक पहले बिहार के ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र को एक नई ऊर्जा से भर दिया है. पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित एक समारोह में सीएम ने 4954 नवनियुक्त एएनएम (महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता) को नियुक्ति पत्र सौंपे. यह केवल सरकारी नौकरी का वितरण नहीं था, बल्कि सुदूर गांवों तक ‘इलाज और एहतियात’ का भरोसा पहुंचाने की एक मुहिम है. ‘ईमानदारी से करें सेवा’ पटना के शास्त्रीनगर स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से तब गूंज उठा जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चयनित महिला अभ्यर्थियों को मंच पर बुलाकर नियुक्ति पत्र प्रदान किए. इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त एएनएम को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए एक मंत्र भी दिया. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि मानवता की सेवा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी एएनएम पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल करेंगी. इस नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने विभाग की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड समय में इन नियुक्तियों को पूरा करना सरकार की प्राथमिकता रही है. स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस मौके पर शिरकत की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि राज्य सरकार अब स्वास्थ्य और रोजगार को विकास के केंद्र बिंदु में रखकर काम कर रही है. ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती एक साथ 4954 एएनएम की तैनाती से बिहार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और उपकेंद्रों की तस्वीर बदलने वाली है. इस नियुक्ति से विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी सुधार आएगा. टीकाकरण अभियान से लेकर प्रसव पूर्व देखभाल तक, अब सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी नर्सों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी. इससे न केवल बड़े अस्पतालों पर मरीजों का बोझ कम होगा, बल्कि मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिलेगी. यह कदम बिहार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और समाज की मुख्यधारा में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है. नियुक्ति पत्र पाकर इन महिला स्वास्थ्य कर्मियों के चेहरे पर जो मुस्कान दिखी, वह राज्य के बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश की गवाही दे रही है.

शादी का कार्ड लेकर गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे लोग, महंगाई के कारण मेन्यू से हटे लाइव काउंटर

पटना    बिहार में शादियों का सीजन शुरू होते ही गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण शादी-विवाह के आयोजन अब पहले से काफी महंगे हो गए हैं, इसका सीधा असर कैटरिंग, मेन्यू और पूरे आयोजन के खर्च पर दिख रहा है. लोग खर्च कम करने के लिए मेन्यू छोटा कर रहे हैं.  बिहार में गैस सिलेंडर की भारी किल्लत के कारण कैटरिंग के दामों में 15 से 20 प्रतिशत तक का उछाल आया है. अब लोग शादी का कार्ड लेकर गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं ताकि किसी तरह व्यावसायिक सिलेंडरों का जुगाड़ हो सके. बढ़ती लागत के कारण अब शादियों का मेन्यू छोटा हो रहा है और ‘लाइव काउंटर’ बंद होने की कगार पर हैं. थाली की बढ़ी कीमत गैस की कमी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने प्रति प्लेट की दर 50 से 100 रुपये तक बढ़ा दी है. पहले जो शाकाहारी प्लेट 650 रुपये में मिल रही थी, अब उसकी कीमत 700 रुपये पार कर गई है. वहीं, मांसाहारी थाली 800 से बढ़कर 900 रुपये की हो गई है. पटना के पॉश इलाकों और बड़े होटलों में तो वेज थाली की दर 1000 से बढ़कर 1200 रुपये तक पहुंच गई है. इस खर्च को काबू करने के लिए अब लोग व्यंजनों की संख्या में कटौती कर रहे हैं. लाइव काउंटर और फंक्शन्स पर चली ‘कैंची’ गैस की खपत कम करने और लागत बचाने के लिए शादियों से डोसा, चाट, जलेबी और पाव-भाजी जैसे लाइव काउंटर हटाए जा रहे हैं. इतना ही नहीं, लोग अब हल्दी, मेहंदी और संगीत जैसे प्री-वेडिंग कार्यक्रमों को या तो रद्द कर रहे हैं या उन्हें बेहद सादगी से मना रहे हैं. इन कार्यक्रमों में अब व्यंजनों की लंबी फेहरिस्त की जगह ‘रेडिमेड नाश्ता’ परोसने की तैयारी है. शादी का कार्ड लेकर गैस एजेंसी पहुंच रहे लोग एलपीजी गैस वितरक संघ के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग शादी का कार्ड और आवेदन लेकर व्यावसायिक सिलेंडर के लिए गुहार लगा रहे हैं. तेल कंपनियों की ओर से शादियों के लिए अलग से सिलेंडर आवंटित करने का कोई विशेष प्रावधान नहीं है. कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का अनुमान है कि 15 अप्रैल से 11 जुलाई के बीच शादी के 28 मुहूर्त हैं, जिसमें केवल पटना जिले में ही डेढ़ लाख से ज्यादा सिलेंडरों की जरूरत होगी. यदि किल्लत बरकरार रही, तो शादियों का रंग और भी फीका पड़ सकता है.

छोटे लोन से बड़ा बदलाव: कालीन बिजनेस ने बदली जिंदगी, हर महीने अच्छी कमाई

मोहनियां. दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो इंसान परिस्थितियां विकास में बाधक नहीं बन सकतीं। कभी महिलाओं को अबला माना जाता था। आज ये अपनी मेहनत से समाज को दिशा दे रही हैं। जो अन्य महिलाओं के लिए मिसाल है। गरीबी को मात देकर परिवार का संबल बन रही हैं। मोहनियां प्रखंड के बेलौड़ी पंचायत के अमरपुरा गांव की सुमन देवी का परिवार कभी आर्थिक तंगी का शिकार था। आठ साल पहले पारिवारिक खर्च चलाना मुश्किल था। दोनों पैर से दिव्यांग पति मजदूरी करने में समर्थ नहीं थे। तब सुमन ने आत्मनिर्भर बनकर गरीबी को मात देने का संकल्प लिया। आज कालीन उद्योग से परिवार में समृद्धि आई है। अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रही हैं। इस कार्य में दिव्यांग पति का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। शंकर जीविका स्वयं सहायता समूह बना आधार बेलौड़ी पंचायत के अमरपुरा गांव के ओम प्रकाश राम दिव्यांग हैं। दोनों पैर से लाचार होने के कारण वे कुछ करने में असमर्थ थे। दो बच्चों की परवरिश करना मुश्किल था। परिवार आर्थिक तंगी से परेशान था। इस विकट परिस्थिति में सुमन दीदी अबला जीवन से उबरकर सबला बनने की ठानी। अमरपुरा गांव में जीविका समूह चलता था। इन्होंने सीएम दीदी से संपर्क किया तो उन्होंने समूह से जुड़ने का फायदा बताया। 16 नवंबर 2017 को सुमन दीदी सहारा जीविका महिला ग्राम संगठन के शंकर जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ गईं। कहा जाता है बूंद बूंद से तालाब भरता है। इसी को चरितार्थ करते हुए ये सप्ताह में 10 रुपये बचत करने लगीं। समूह से जुड़ने के बाद 50 हजार रुपए का मिला ऋण समूह से जुड़ने के बाद सुमन दीदी ने 50 हजार रुपये का ऋण लिया। जिससे छोटी सी दुकान की। इसकी आमदनी से धीरे धीरे समूह को ऋण का पूरा पैसा लौटा दिया। इसके बाद इनका चयन सतत जीविकोपार्जन योजना (एसजेवाई) के लाभार्थी के रूप में हुई। इस योजना के तहत सुमन दीदी को 37 हजार रुपये मिले। जिससे दुकान का विस्तार किया। इसके बाद इनके हौसले को पंख लग गए। कालीन बुनाई का लिया निर्णय दुकान से अच्छी आमदनी होने के बाद सुमन दीदी ने कालीन बुनाई का निर्णय लिया। इनके पति ओम प्रकाश राम कालीन बुनाई करना जानते थे। इन्होंने इस उद्योग में भविष्य की तलाश की। पति पत्नी दोनों कालीन बुनाई करने लगे। आज इस उद्योग और दुकान से सुमन दीदी को 20 से 25 हजार रुपये महीने का लाभ हो रहा है। अन्य महिलाओं के लिए सुमन दीदी प्रेरणास्रोत बन गई हैं। इनका कहना है कि जीविका ने जीवन को बदल दिया। अब ये आत्मनिर्भर बन गई हैं। पति दोनों पैर से दिव्यांग थे। परिवार में भोजन चलाना मुश्किल था। सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत चयन नहीं हुआ होता तो दर दर की ठोकरें खानी पड़ती। आज परिवार खुशहाल है। वे इस उद्योग को बहुत आगे बढ़ाना चाहती हैं। जिससे अन्य महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा। कालीन उद्योग में कैमूर जिला का नाम हो। दृढ़ इच्छा शक्ति से गरीबी को मात दी  सुमन दीदी ने दृढ़ इच्छा शक्ति से गरीबी को मात दी है। ये अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। सतत जीविकोपार्जन योजना से इनके परिवार में समृद्धि आई है। – उत्कर्ष शुक्ला, जीविका प्रबंधक  

फिर बदला मौसम का मिजाज, रांची समेत कई इलाकों में अगले 48 घंटों तक भारी बारिश और आंधी की चेतावनी

रांची झारखंड में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया है. कल भी राज्य के कई हिस्सों में बारिश हुई और आने वाले 24 से 48 घंटों के दौरान तेज हवा, बारिश और गर्जन के साथ वज्रपात की संभावना जताई गई है. कई जिलों में मौसम विभाग के द्वारा 8 अप्रैल को ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट राज्य के गोड्डा, साहेबगंज, पाकुड़, दुमका, देवघर, जामताड़ा, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा, रामगढ़, रांची, खूंटी, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों में कहीं-कहीं ओलावृष्टि के साथ गर्जन, वज्रपात हो सकती है. इन जिलों में आंधी-तूफान के साथ 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. 9 अप्रैल के लिए पूर्वानुमान मौसम विभाग के पूर्वानुमान के द्वारा राज्य के गोड्डा, साहेबगंज, पाकुड़, दुमका, देवघर, जामताड़ा, धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, खूंटी, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों में मौसम को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ वज्रपात और आंधी चलने की संभावना है. हवा की अधिकतम गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. सतर्क रहने की सलाह ओलावृष्टि के दौरान पेड़-पौधों, बागवानी और खड़ी फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका रहती है. इसके साथ ही खुले स्थानों पर मौजूद लोग और मवेशी भी ओलों की चपेट में आकर घायल हो सकते हैं. मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. ओलावृष्टि के समय खुद और जानवरों को छायादार और सुरक्षित जगह पर रखें. आंधी-तूफान के दौरान पेड़, बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान होने की संभावना रहती है. इसके साथ ही खुले स्थानों पर बिजली गिरने से लोगों और जानवरों के घायल होने का खतरा भी बना रहता है. इस दौरान घर के अंदर रहना सबसे सुरक्षित उपाय है, खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें और ट्रैवल करने से बचें. बाहर होने की स्थिति में किसी सुरक्षित स्थान पर आश्रय लें, लेकिन पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें.

व्हाट्सएप पर मिली शिकायत और 10 मिनट में एक्शन, अवैध गैस भंडारण के मामले में दुकान सील

 गढ़वा झारखंड के गढ़वा में गैस सिलेंडर की कालाबाजारी के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक व्यवसायी को रंगे हाथों पकड़ लिया. अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने व्हाट्सएप पर मिली शिकायत की पुष्टि करते हुए मौके पर छापेमारी की और दुकान को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया. इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. व्हाट्सएप शिकायत बनी कार्रवाई का आधार प्रशासन को यह सूचना व्हाट्सएप के जरिए मिली थी कि एक व्यक्ति घरेलू गैस सिलेंडर को अवैध रूप से 2700 रुपए में बेच रहा है. शिकायत मिलते ही एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत लोकेशन की जानकारी जुटाई. महज 10 मिनट के भीतर ही वे प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी राहुल मिंज के साथ मौके पर पहुंच गए. मौके पर पहुंचकर पकड़ा गया आरोपी जांच के दौरान आरोप सही पाए गए. संबंधित व्यवसायी मेन रोड स्थित विजय कश्यप के मकान में किराए पर किचन पार्ट्स और गैस चूल्हे की दुकान चला रहा था. इसी दुकान के पीछे बने बेसमेंट में अवैध रूप से गैस सिलेंडरों का भंडारण किया जा रहा था. प्रशासन ने तत्काल दुकान को बंद करवा दिया और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी. लंबे समय से चल रहा था अवैध कारोबार प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा था. घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाले एलपीजी सिलेंडरों को गलत तरीके से एकत्रित कर ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा था. यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है. मकान मालिक की भी तय होगी जिम्मेदारी एसडीएम संजय कुमार ने मौके पर मकान मालिक और आरोपी व्यवसायी से पूछताछ की और उनसे लिखित जवाब मांगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि घनी आबादी के बीच अवैध रूप से गैस सिलेंडर रखने की अनुमति देने के कारण मकान मालिक की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी. इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पूरे नेटवर्क की जांच में जुटा प्रशासन प्रशासन अब इस अवैध कारोबार के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गया है. एसडीएम ने कहा कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सिलेंडर कहां से लाए जा रहे थे और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं. संबंधित गैस एजेंसी की भूमिका की भी जांच की जाएगी. दोषी पाए जाने पर सभी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. कालाबाजारी पर सख्त रुख एसडीएम ने सख्त लहजे में कहा कि आपदा के समय में अवसर तलाशने वाले ऐसे लालची कारोबारियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी व्यक्ति इस तरह के अवैध कार्यों में संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. आम जनता से सहयोग की अपील प्रशासन ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है. एसडीएम ने कहा कि यदि कहीं भी गैस सिलेंडर की कालाबाजारी या अवैध भंडारण की सूचना मिले, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें. इससे समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी और बड़े हादसों को रोका जा सकेगा. सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला घनी आबादी वाले इलाके में गैस सिलेंडरों का अवैध भंडारण एक गंभीर सुरक्षा खतरा है. इससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. प्रशासन की इस कार्रवाई को न सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने बल्कि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. आगे भी जारी रहेगा अभियान एसडीएम संजय कुमार ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में इस तरह के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा. प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले में कालाबाजारी और अवैध भंडारण की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जाए, ताकि आम जनता को सुरक्षित और उचित दर पर गैस सिलेंडर उपलब्ध हो सके.

ठेकेदार की लापरवाही से चार दिनों से जलापूर्ति ठप, मानगो में पुलिस की मौजूदगी में थमा विवाद

जमशेदपुर  झारखंड के ​जमशेदपुर जिले के मानगो के शंकोसाई रोड नंबर 1 में एमजीएम अस्पताल के लिए बिछाई जा रही पानी की पाइपलाइन की वजह से स्थानीय निवासियों और कार्य कर रहे संवेदक (ठेकेदार) के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराना पड़ा. फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और स्थानीय लोग आज सुबह मरम्मत कार्य शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. स्थानीय निवासियों की शिकायत स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाइपलाइन बिछाने के दौरान ठेकेदार की लापरवाही के कारण दर्जनों घरों के पुराने घरेलू जल कनेक्शन टूट गए. इसके चलते पिछले चार दिनों से कई घरों में पानी की आपूर्ति ठप है और लोग पानी के लिए परेशान हैं. इसके कारण पिछले चार दिनों से क्षेत्र के कई घरों में जलापूर्ति ठप है और लोग पानी के लिए बहुत परेशान हैं. जब उन्होंने इसकी शिकायत की, तो संवेदक और संबंधित अधिकारी अपनी पावर का रौब दिखाकर बिना मरम्मत किए काम जारी रखा. ​ भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह मौके पर पहुंचे मामले की जानकारी मिलते ही भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह देर रात मौके पर पहुंचे. उन्होंने कार्यस्थल पर मौजूद कर्मचारियों और धमकाने वाले लोगों को  फटकार लगाते हुए काम को रुकवा दिया. जिससे विवाद बढ़ गया. उसके बाद देर रात हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस पहुंची. पुलिस की मौजूदगी में संवेदक और अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पहले क्षतिग्रस्त पाइपों की मरम्मत की जाए, उसके बाद ही आगे का कार्य शुरू होगा. ​ लापरवाही बरतने वालों पर दर्ज होगा मुकदमा ​विकास सिंह ने चेतावनी दी है कि अगर सुबह होते ही घरेलू पाइपों की मरम्मत सुनिश्चित नहीं की गई, तो संबंधित संवेदक और अधिकारियों के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी.

कैट का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने रेलवे की कार्रवाई को बताया भेदभावपूर्ण और मनमाना

रांची झारखंड हाईकोर्ट ने रेलवे भर्ती से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए कैट (केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण) की रांची सर्किट बेंच के 23 अक्टूबर 2024 के आदेश को निरस्त कर दिया. साथ ही अदालत ने रेलवे को निर्देश दिया कि चार सप्ताह के अंदर याचिककर्ता को नियुक्ति पत्र जारी किया जाए. भेदभावपूर्ण और मनमाना था निर्णय जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद व जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने कैट की रांची सर्किट बेंच के आदेश को रद्द कर दिया. खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि समान परिस्थितियों में अलग-अलग व्यवहार करना असंवैधानिक है. कहा कि समान परिस्थितियों में अन्य उम्मीदवारों को नियुक्ति दी गई है, लेकिन याचिककर्ता को नियुक्ति से वंचित किया गया. ऐसा करना भेदभावपूर्ण और मनमाना है. क्या है पूरा मामला प्रार्थी रविशंकर कुमार भारतीय सेना में 16 वर्षों से अधिक समय तक सेवा दे चुके थे. उन्होंने रेलवे की नॉन टेक्निकल पापुलर कैटिगरीज के तहत आवेदन किया था. नियम के मुताबिक अभ्यर्थी का 31 मार्च 2020 तक सेना से सेवानिवृत्त होना जरूरी था, जबकि प्रार्थी 30 अप्रैल 2020 को सेवानिवृत्त हुए थे. दस्तावेज सत्यापन के दौरान रेलवे ने उनकी उम्मीदवारी को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि वे कट-ऑफ तिथि के भीतर सेवानिवृत्त नहीं हुए और आवेदन में गलत जानकारी दी है.  इसके बाद प्रार्थी ने रेलवे के निर्णय को कैट में चुनाैती दी थी. कैट ने रविशंकर कुमार की याचिका खारिज करते हुए रेलवे के निर्णय को सही ठहराया था. याचिककर्ता रविशंकर कुमार ने कोर्ट में याचिका दायर कर कैट के आदेश को चुनाैती दी थी और अपनी नियुक्ति की मांग की थी.