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साइबर ठगी पर बड़ा वार: बिहार पुलिस ने चिन्हित किए हजारों म्यूल अकाउंट्स

पटना बिहार पुलिस की साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट ने बढ़ते साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए फिर से बड़ा अभियान छेड़ दिया है। ‘साइबर प्रहार 3.0’ के तहत राज्यभर में व्यापक कार्रवाई करते हुए 5036 म्यूल अकाउंट्स की पहचान की गई है। इस कार्रवाई के दायरे में 22 बैंक शाखाओं के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है, जिसकी गहन जांच की जा रही है। साइबर अपराध इकाई द्वारा कई संदिग्ध बैंक खातों को चिन्हित कर लिया गया है, जिनका उपयोग ठगी के पैसों के लेन-देन में किया जा रहा था। लालच देकर बैंक खाते का इस्तेमाल करते थे साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट की जांच में पता चला कि साइबर फ्रॉड लोगों को पैसों की लालच देकर उनके बैंक खाते का इस्तेमाल करते थे। पासबुक, सिम कार्ड और एटीएम अपने पास रख लेते थे। इन खातों में ठगी की रकम मंगाई जाती थी। बिहार पुलिस का कहना है कि इन खातों के जरिए बड़े स्तर पर साइबर ठगी के नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था। कई संदिग्धों को नोटिस जारी किए गए अभियान के तहत अब तक 72 करोड़ रुपये से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामलों में कानूनी शिकंजा कसा गया है। कई संदिग्धों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि कुछ की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच के दौरान बैंकिंग सिस्टम में संभावित मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। इसी को देखते हुए संबंधित बैंक अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। क्या होते हैं म्यूल अकाउंट्स? बोलचाल की भाषा में म्यूल का मतलब 'खच्चर' होता है, जिसका इस्तेमाल सामान ढोने के लिए किया जाता है। कुछ इसी तरह का काम म्यूल अकाउंट्स का भी होता है। म्यूल अकाउंट्स दरअसल ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल फाइनेंशियल फ्राड में किया जाता है। यह अकाउंट्स या तो फर्जी नाम-पते पर रजिस्टर्ड होते हैं या इन्हें कोई और यूज कर रहा होता है। इस तरह के अकाउंट्स का इस्तेमाल फाइनेंशियल फ्रॉड में पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। चूकिं म्यूल अकाउंट में दी गई जानकारी सही नहीं होती, इन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।  

EO Murder Case: सम्राट चौधरी ने घोषित की 25 लाख की मदद, राजकीय सम्मान से होगी अंत्येष्टि

पटना. सुल्तानगंज नगर परिषद में दिनदहाड़े कार्यपालक पदाधिकारी कृष्‍ण भूषण कुमार की हत्‍या पर मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरी संवेदना व्‍यक्‍त की है। उन्‍होंने कहा कि कृष्‍ण भूषण कुमार ने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। शोक संतप्त परिजनों के प्रति इस अपूरणीय क्षति पर गहरी संवेदनाएं प्रकट करते हैं। उनके परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। दिवंगत अधिकारी अंत्‍येष्‍ट‍ि राजकीय सम्मान के साथ सम्पन्न कराई जाएगी।  बता दें कि मंगलवार को भागलपुर जिले के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में अपराधियों ने कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण की गोली मारकर हत्या कर दी। वे बिहार लोक सेवा आयोग के 59वें बैच के अधिकारी थे। सभापति की हालत गंभीर हमले में नगर परिषद सभापति राजकुमार गुड्डू भी घायल हो गए। उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। मेडिकल डायरेक्टर डॉ. रविशंकर के अनुसार, उन्हें पेट और सिर में गोली लगी है और वे न्यूरो ICU में इलाजरत हैं। इधर घटना के बाद पुलिस एक्‍शन में आई। हत्‍या मामले में पुलिस ने आरोपित का एनकाउंटर कर दिया है।   अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी  इधर घटना के बाद बिहार नगर सेवा संघ ने इस घटना के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी।48 घंटे की मोहलत दी थी। संघ के महासचिव अरविंद कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, गृह विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव, बिहार पुलिस प्रमुख (DGP), मानवाधिकार आयोग और लोकायुक्त को पत्र लिखकर अपनी मांगें रखी । कर्तव्यनिष्ठा का परिचय – अत्यंत ही दुःखद घटना में सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी श्री कृष्ण भूषण कुमार जी का असामयिक निधन हो गया। उन्होंने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। शोक संतप्त परिजनों के प्रति इस अपूरणीय क्षति पर गहरी संवेदनाएँ प्रकट… — Samrat Choudhary (@samrat4bjp) April 29, 2026 

सुल्तानगंज हत्याकांड में बड़ा एक्शन: मुख्य आरोपी रामधनी यादव का एनकाउंटर

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि भागलपुर के सुल्तानगंज में अपराधियों की गोलियों के शिकार हुए कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ट्वीट किया है कि अत्यंत ही दुखद घटना में सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार का असामयिक निधन हो गया। उन्होंने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। शोक संतप्त परिजनों के प्रति इस अपूरणीय क्षति पर गहरी संवेदनाएँ प्रकट करते हैं। उनके परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा दिवंगत अधिकारी के दाह-संस्कार को राजकीय सम्मान के साथ सम्पन्न कराने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा, ‘अत्यंत ही दुःखद घटना में सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी श्री कृष्ण भूषण कुमार जी का असामयिक निधन हो गया। उन्होंने अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। शोक संतप्त परिजनों के प्रति इस अपूरणीय क्षति पर गहरी संवेदनाएँ प्रकट करते हैं। उनके परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा दिवंगत अधिकारी के दाह-संस्कार को राजकीय सम्मान के साथ सम्पन्न कराने का निर्णय लिया गया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य एवं संबल दें। ओम शांति!’ 12 घंटे के अंदर एनकाउंटर हुआ- संतोष सुमन हम सेकुलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन ने कहा कि भागलपुर में सरकारी अधिकारी की हत्या निंदनीय है, लेकिन उससे भी बड़ा सच यह है कि अब बिहार में अपराधियों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। महज 12 घंटे के अंदर आरोपी की पहचान, पीछा और एनकाउंटर यह बताता है कि अब सरकार जीरो टॉलरेंस पर सिर्फ बोलती नहीं, कार्रवाई करके दिखाती है। उन्होंने कहा कि अपराधियों ने पुलिस पर गोली चलाई, जवाब में उन्हें उसी भाषा में जवाब मिला। जो लोग कभी अपराधियों को संरक्षण देकर जंगलराज खड़ा करते थे, आज वही कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। कलेजे पर फटाफट गोली- जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कार्यपालक अधिकारी की हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रामधनी यादव को अपराध का सनक चढ़ गया था। सुल्तानगंज के नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी का परिवार और उनके बच्चे रो रहे हैं। लोकतंत्र में जनता की अदालत से चुने गए सभापति पर गोलियों की बौछार करना। कानून का राज है। अभी तक तो पैर पर गोली लग रही थी। पुलिस पर हमला करने की कोशिश की तो कलेजे पर फटाफट गोली…फटाफट गोली। अपराध करोगे तो ना सिर्फ कड़ा अंजाम होगा बल्कि मुकम्मल ऐसी कार्रवाई होगी कि बिहार नजीर के तौर पर दिखेगा। ईओ के घर चीख-पुकार इधर बुधवार को करीब 10 बजे जैसे ही कार्यपालक पदाधिकारी का पार्थिव शरीर उनके पैतृक घर पहुंचा तो वहां कोहराम मच गया। नगर आयुक्त उमेश भारती, सदर एसडीओ चंदन कुमार झा, सदर एसडीपीओ अमित कुमार, ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार, पुलिस लाइन डीएसपी जितेन्द्र प्रसाद, नगर थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर मनोज कुमार, ट्रैफिक थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर नीलमणि रंजन, नगर पंचायत जयनगर के कार्यपालक पदाधिकारी सुनील कुमार, बेनीपट्टी नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी गौतम आनंद एवं अन्य पुलिस व प्रशासनिक अफसर वहां मौजूद थे। मृतक की पत्नी, भाई सूर्यभूषण कुमार, अजय कुमार एवं घर के अन्य सदस्यों का रो रोकर बुरा हाल था। हत्याकांड का मुख्य आरोपी रामधनी यादव मारा गया सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त और नगर परिषद की उपसभापति नीलम देवी के पति रामधनी यादव का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है। अभियुक्त के साथ मुठभेड़ में पुलिस के तीन पदाधिकारी भी जख्मी हुए हैं जिनमें डीएसपी लॉ एंड ऑर्डर नवनीत कुमार, सुल्तानगंज इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार और तकनीकी शाखा प्रभारी परमेश्वर सब शामिल हैं।

फर्जी एफडी से ग्रामीण बैंक में बड़ा घोटाला, कोर्ट ने आर्थिक अपराध को बताया गंभीर

 पटना  पटना हाईकोर्ट ने बैंकिंग धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में आरोपी धर्मेंद्र कुमार सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान इसे व्यापक जनहित का विषय मानते हुए मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया है।न्यायाधीश पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि आर्थिक अपराध अलग श्रेणी के होते हैं। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता से अधिक सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। करीब ₹1.89 करोड़ के गबन से जुड़े इस मामले को अदालत ने गंभीर मानते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई। फर्जी एफडी के जरिए करोड़ों की हेराफेरी मामला उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक के पूर्व कर्मी धर्मेंद्र कुमार सिंह से जुड़ा है, जिस पर 2013 से 2024 के बीच ग्रामीण ग्राहकों को फर्जी एफडी प्रमाणपत्र जारी कर सुनियोजित तरीके से धन की हेराफेरी करने का आरोप है। जांच में खुलासा हुआ कि कई मामलों में ग्राहकों की पासबुक में प्रविष्टि तो की गई, लेकिन बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) में खाते खोले ही नहीं गए। एक मामले में ₹15 लाख जमा करने वाले ग्राहक की राशि बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं पाई गई। अदालत ने टिप्पणी की कि यह धोखाधड़ी इतनी संगठित और तकनीकी रूप से जटिल थी कि करीब एक दशक तक इसका खुलासा नहीं हो सका। पैसे निकालने का प्रयास करते समय सामने आया मामला जब ग्राहकों ने अपनी जमा राशि निकालने का प्रयास किया, तब जाकर मामला सामने आया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे व्हाइट कॉलर क्राइम न केवल सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करते हैं। ये देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा हैं। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि 2014 की स्टाफ अकाउंटेबिलिटी पॉलिसी में निर्धारित समय-सीमा का लाभ धोखाधड़ी या आपराधिक कृत्यों में नहीं दिया जा सकता। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अपने आदेश की प्रति भारतीय रिजर्व बैंक, गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को भेजने का निर्देश दिया है तथा कार्रवाई रिपोर्ट की मांग की है।  

निगरानी का शिकंजा: 2.5 लाख रिश्वत के साथ विश्वविद्यालय के सहायक कुल सचिव पकड़े गए

पटना मौलाना मजहरूल हक अरबी व फारसी विश्वविद्यालय के सहायक कुल सचिव (असिस्टेंट रजिस्ट्रार) मो. सनाउल्लाह खान को निगरानी ब्यूरो ने मंगलवार को 2.5 लाख रुपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया है। सनाउल्लाह खान को उनके मीठापुर स्थित कार्यालय कक्ष से गिरफ्तार किया गया। आरोपित से फिलहाल पूछताछ हो रही है। इसके बाद इन्हें निगरानी की विशेष कोर्ट में पेश किया जाएगा। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार रोसड़ा जिला समस्तीपुर के रहने वाले रामानंद महतो ने शिकायत दर्ज कराई थी कि समस्तीपुर स्थित केआरसी 402 व 403 में नामांकित सभी छात्रों का परीक्षा फल प्रकाशित होने के बाद दोनों छात्रों का प्रैक्टिल मार्क्स रिजल्ट में नहीं था। प्रैक्टिकल मार्क्स चढ़ाने और लंबित परीक्षाफल प्रकाशित करने के लिए सहायक कुल सचिव रिश्वत मांग रहे थे। चूंकि मामला बड़े अधिकारी से जुड़ा था, लिहाजा इसका सत्यापन कराया गया। जिसमें आरोप सही पाए गए। जिसके बाद निगरानी डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार के निर्देश पर डीएसपी श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में एक धावा दल बनाया गया। मंगलवार को सहायक कुल सचिव जिस सनाउल्ला खान जिस वक्त रिश्वत के ढ़ाई लाख रुपये ले रहे थे उसी वक्त उन्हें विवि कैंपस स्थित उनके कार्यालय कक्ष से गिरफ्तार कर लिया गया। निगरानी ब्यूरो आगे की जांच में जुटा है। कार्यपालक पदाधिकारी को एसवीयू ने 50 हजार रिश्वत के साथ दबोचा दूसरी ओर विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने एक बड़ी कार्रवाई में नगर पंचायत सिकंदरा, जमुई के कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार को 50 हजार रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया है। उनकी यह गिरफ्तारी राजेश मिश्रा नामक एक व्यक्ति की लिखित शिकायत पर की गई। कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार पर आरोप लगाया गया था कि ये प्रधानमंत्री आवास योजना की फाइल करने के लिए प्रति फाइल ढ़ाई हजार रुपये की दर से 162500 रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा है कि यदि रिश्वत की यह रकम नहीं मिलती है तो काम नहीं होगा। शिकायत के आधार पर विशेष निगरानी इकाई ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। आरोपित को पूछताछ के बाद कोर्ट पेश कयया जाएगा।  

PET परीक्षा में बड़ी सफलता: बिहार पुलिस ड्राइवर भर्ती में 11,847 उम्मीदवार पास

पटना. केंद्रीय चयन पार्षद (CSBC)ने 28 अप्रैल को बिहार कॉन्स्टेबल ड्राइवर पद के लिए आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के परिणाम अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिए हैं। वे सभी उम्मीदवार जो इस शारीरिक परीक्षा में शामिल हुए थे, अब अपना रिजल्ट csbc.bihar.gov.in पर जाकर देख सकते हैं। बता दें कि शारीरिक दक्षता परीक्षा में कुल 14,624 उम्मीदवार उपस्थित हुए थे और 888 उम्मीदवार अनुपस्थित थे। इसके साथ ही वाहन चालन दक्षता परीक्षा के लिए कुल 11,847 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। अगला चरण: ड्राइविंग टेस्ट इस सूची में उन सफल उम्मीदवारों के रोल नंबर दिए गए हैं जिन्होंने शारीरिक परीक्षा (PET) पास कर ली है। अब ये अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया के अगले चरण, यानी ड्राइविंग दक्षता परीक्षा (Driving Efficiency Test) के लिए पात्र माने जाएंगे। अपना रिजल्ट कैसे चेक करें? सफल उम्मीदवारों की सूची देखने के लिए आप इन आसान चरणों का पालन कर सकते हैं: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले csbc.bihar.gov.in पोर्टल खोलें। सही लिंक चुनें: होमपेज पर 'Bihar Police' टैब के अंदर "Results: List of Successful Candidates in PET (Advt. No. 02/2025)" वाले लिंक पर क्लिक करें। PDF डाउनलोड करें: क्लिक करते ही एक पीडीएफ फाइल खुलेगी, जिसे आप अपने डिवाइस में सेव कर लें। रोल नंबर खोजें: इस फाइल में अपना Roll Number सर्च करें। यदि आपका नंबर लिस्ट में है, तो इसका मतलब है कि आपने PET पास कर लिया है और अब आपको ड्राइविंग टेस्ट की तैयारी करनी होगी।

बिहटा टेक्नोलॉजी सेंटर उद्घाटन: बिहार के विकास को लेकर सरकार का नया रोडमैप

पटना मंगलवार को पटना से सटे बिहटा में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की ओर से बनाए गए टेक्नोलॉजी सेंटर का उद्घाटन किया गया है। उस उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मौजूद थे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में इस टेक्नोलॉजी सेंटर को बिहार के विकास में एक अहम मोड़ बताया। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने बताया कि 28 नवंबर 2027 को नई सरकार के एक साल पूरा होने पर उनका टारगेट क्या है। सीएम ने इस दौरान उनकी सरकार द्वारा लिए गए तीन बड़े फैसलों का जिक्र भी किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार बदल रहा है। अगर बिहार को समृद्ध बनाना है तो सबसे पहले एमएसएमई की पूरी व्यवस्था खड़ी करनी होगी। एमएसएमई ने जितना काम किया है उसे देखकर मैं अचंभित हूं। बिहार में 1 करोड़ 86 लाख लोग MSME से जुड़े और लगभग एक लाख करोड़ का बाजार है। ये बिहार है। अब तक बिहार को कोई नहीं देखता था। लोग सोचते थे कि यहां जनसंख्या अधिक है तो यहां गरीबी इसी वजह से है। लेकिन अब भारत की अर्थव्यवस्था में 14 करोड़ बिहारी एक उपभोक्ता के तौर पर इस देश को जीएसटी देने का काम कर रहे हैं। इसलिए आज बिहार बदल रहा है और जब बिहार बदलेगा तब ही तो हम समृद्ध हो पाएंगे। सम्राट चौधरी ने आगे कहा, 'मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने सड़क, बिजली और घरों तक पानी पहुंचाने का काम किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने पूरी ताकत से बिजली से जुड़ी चीजों को मजबूती देने का काम किया है। लेकिन हमारा टारगेट है कि अगले 20 नवंबर को जब इस सरकार के एक साल पूरे हो तो हम जरुर आश्वस्त करते हैं कि हमारा प्रयास है कि बिहार में जो निवेश नहीं होता है तो सबसे पहले 5 लाख करोड़ का निवेश इसी बिहार की धरती पर लाने का काम किया जाएगा और सभी लोग उद्योग से जुड़ेंगे। ' सम्राट चौधरी ने गिनाए तीन बड़े फैसले इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी सरकार द्वारा लिए गए तीन बड़े फैसलों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन बड़े फैसले हमलोगों ने ली है। पहला- डिग्री कॉलेज। जिन बच्चों को पढ़ने के लिए दूसरे अनुमंडल या ब्लॉक में जाना पड़ता था। इस बार हमलोगों ने तय किया है कि जुलाई माह जितने भी बिहार में वैसे ब्लॉक हैं जो बिना डिग्री कॉलेज के हैं उन सभी ब्लॉक में डिग्री कॉलेज खोलने का काम किया जाएगा। इसके बाद सीएम ने कहा कि बिहार में लोग चिंतित रहते थे हमारे बच्चे अच्छे स्कूल में कैसे पढ़ेंगे। हमलोगों ने तय किया है कि 533 ब्लॉक में एक-एक मॉडल स्कूल खोलेंगे ताकि वहां के बच्चे वहीं पढ़ाई करेंगे उन्हें बाहर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। तीसरे बड़े फैसले के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इसके बाद मैंने कहा कि एक सहयोग कार्यक्रम चलाइए। इसके तहत हम महीने में 2 कैंप लगाएंगे। 2 कैंप लगाकर ब्लॉक, अंचल और थाने की समस्या को ऑन स्पॉट हमारे पदाधिकारी समाप्त करने का काम करेंगे।

बिहार टाउनशिप योजना: किसानों को चार गुना मुआवजा और विकास में साझेदारी

पटना बिहार की 11 नई सेटेलाइट टाउनशिप के दायरे में जो जमीन आयेगी, उसके मालिक किसान इसमें भागीदार होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि टाउनशिप क्षेत्र में जिस किसान की जमीन आयेगी, उसमें कोई भी भूमिहीन नहीं होगा। सरकार किसानों को 55 फीसदी जमीन विकसित कर वापस देगी। टाउनशिप के लिए खाता-खेसरा के साथ प्रारूप का प्रकाशन अक्तूबर-नवंबर तक होगा। इसके बाद प्रारूप पर लोगों से आपत्ति और सुझाव लिये जायेंगे। यह जानकारी नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने सोमवार को सूचना भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि जो किसान टाउनशिप के लिए जमीन नहीं देना चाहेंगे, सरकार उनसे बाजार दर से चार गुना अधिक कीमत पर खरीदेगी। जमीन अधिग्रहण डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी। विवाद का निपटारा ट्रिब्यूनल करेगा। जमीन मालिकों के साथ बैठक में सहमति के आधार पर सब तय होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नगर विकास एवं आवास विभाग के विशेष सचिव राजीव कुमार श्रीवास्तव, अपर सचिव मनोज कुमार भी उपस्थित थे। प्रस्तावित टाउनशिप के विशेष क्षेत्र में भूमि के लेनदेन पर अस्थायी प्रतिबंध जमीन भू-मालिकों के कल्याण के लिए है। विकास की सुगबुगाहट होते ही बिचौलिए किसानों को उनकी जमीन कम कीमत पर खरीद लेते हैं। यह रोक सुनिश्चित करती है कि भू-मालिक बेशकीमती जमीन कम कीमत पर न बेचे। योजना पूरी होने पर जब ढांचा तैयार हो जाएगा, तब वही भू-मालिक संपत्ति अच्छे दरों पर बेचने या विकसित करने के हकदार होंगे। यह कदम उनके आर्थिक हितों की रक्षा करने के लिए उठाया गया है। यह योजना पूरी तरह पारदर्शी है। ड्राफ्ट प्लान से लेकर प्लॉटों के पुनर्गठन तक, हर चरण में भू-मालिकों या सार्वजनिक परामर्श लिया जाएगा। सड़क व बुनियादी ढांचा के लिए 22 फीसदी क्षेत्र टाउनशिप में 22 प्रतिशत क्षेत्र सड़क और बुनियादी ढांचा के लिए होगा। पांच प्रतिशत जमीन में पार्क, खेल मैदान, उद्यान, खुला क्षेत्र, स्कूल, औषधालय, अग्निशमन जैसी सुविधाएं होंगी। सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवास के लिए तीन फीसदी भूखंड का उपयोग होगा। मूलभूत संरचना यथा-सड़क, बिजली, ड्रेनेज और सीवर आदि के विकास के लिए 15 फीसदी भूमि प्राधिकार के द्वारा लागत वसूली के लिए रखी जाएगी। प्रारूप पर सहमति के बाद हटेगी भूमि निबंधन पर रोक सेटेलाइट टाउनशिप के लिए चिह्नित क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक है। पटना, सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर के लिए 31 मार्च 2027 और मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी के लिए 30 जून 2027 तक रोक है। प्रारूप पर किसानों की सहमति बनते ही जमीन खरीद-बिक्री पर रोक हट जायेगी

23 निजी स्कूलों में गरीब बच्चों का एडमिशन, 580 में से 279 चयनित

  हजारीबाग झारखंड में हजारीबाग जिले के अलग-अलग 23 निजी स्कूलों के प्रवेश कक्षा में सत्र 2026-27 के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 279 बच्चों के नामांकन संबंधित पहली सूची शिक्षा विभाग ने जारी किया. इसमें मिले 580 आवेदनों में सत्यापन के बाद लगभग 180 आवेदन को विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है. शेष आवेदनों के साथ मौजूद कागजात पर अभिभावकों से उनका पक्ष मांगा गया है. आवेदक 28 अप्रैल शाम 4:00 बजे तक अपना पक्ष रख सकते हैं. जिला शिक्षा अधीक्षक सह अपर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आकाश कुमार ने बताया सत्यापित सभी 580 बच्चों की सूची को हजारीबाग nic.com पर डाला गया है. इसमें 180 आवेदन के आवश्यक कागजात जांच में सही मिलने पर सभी को विचाराधीन (अंडर कंसीडरेशन फॉर रेंडमाइजेशन) की श्रेणी में रखा गया है. क्या है मामला? निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 279 बच्चों के नामांकन को लेकर शिक्षा विभाग ने पोर्टल बनाकर निर्धारित समय सीमा यानी 14 मार्च 2026 तक 580 आवेदन प्राप्त किया है. नियम अनुसार इसमें अलग-अलग 23 निजी स्कूलों के लिए 279 बच्चों की सूची शिक्षा अधिकारी/कर्मी की एक टीम तैयार करने में जुटी है. अंतिम रूप से तैयार सूची संबंधित स्कूलों को भेजा जाएगा. आरटीई में गरीब बच्चों का नामांकन होना है. इसके लिए आरटीई के संकल्प पत्र में बच्चों के अभिभावकों को 72,000 का इनकम सर्टिफिकेट (आय प्रमाणपत्र) अनिवार्य किया गया है. हजारीबाग में आरटीई के तहत 23 निजी स्कूलों में 279 बच्चों के नामांकन के लिए पहली सूची जारी हुई है. कुल 580 आवेदन मिले थे, जिनमें करीब 180 आवेदन विचाराधीन रखे गए हैं. किस निजी स्कूल में कितना नामांकन बरही- डीएवी पब्लिक स्कूल – नर्सरी – 10 बड़कागांव-डीएवी पब्लिक स्कूल उरीमारी-एलकेजी-08 बरकट्ठा-डिवाइन पब्लिक स्कूल गंगपाचो-वन-20 चौपारण-सुरेखा प्रकाश भाई पब्लिक स्कूल बहेरा-वन-20 शहरी क्षेत्र-दिल्ली पब्लिक स्कूल-वन-15 शहरी क्षेत्र-जैक एंड जिल स्कूल सिंघानी-नर्सरी-10 शहरी क्षेत्र-लॉर्ड कृष्णा स्कूल अमृतनगर-वन-10 शहरी क्षेत्र-संत पॉल स्कूल-वन-10 शहरी क्षेत्र-सरस्वती शिशु विद्या मंदिर कुम्हारटोली-वन-10 शहरी क्षेत्र-नेशनल पब्लिक स्कूल-वन-20 शहरी क्षेत्र-संत स्टेफन स्कूल-वन-15 शहरी क्षेत्र-श्री रामकृष्ण शारदा मठ एंड मिशन-नर्सरी 12 शहरी क्षेत्र-माउंट एग्माउंट स्कूल-एलकेजी- 15 शहरी क्षेत्र-डीएवी पब्लिक स्कूल-नर्सरी-15 शहरी क्षेत्र-नमन विद्या-नर्सरी- 07 शहरी क्षेत्र- रोजबड स्कूल- एलकेजी- 07 शहरी क्षेत्र-ओएसिस स्कूल हजारीबाग-नर्सरी-10 शहरी क्षेत्र-न्यू हजारीबाग पब्लिक स्कूल हूपाद- नर्सरी-10 इचाक-चैंपियन बेसिक अकैडमी-वन-20- कटकमदाग-एंजेलस हाई स्कूल सिरसी-एलकेजी-10 कटकमदाग- दिल्ली पब्लिक स्कूल शंकरपुर-एलकेजी-10 कटकमसांडी-संत अगस्टिन हाई स्कूल कंचनपूर-वन-10 डाडी-डीएवी पब्लिक स्कूल गिद्दी-ए-नर्सरी-05

मखाना खेती पर सरकार मेहरबान, अररिया के किसानों को 75 फीसदी तक अनुदान

अररिया. मिथिलांचल की पारंपरिक पहचान और वैश्विक सुपरफूड मखाना अब अररिया के खेतों में अपनी सफेदी बिखेरने को तैयार है। बिहार सरकार ने मखाना विकास योजना का विस्तार करते हुए अररिया समेत राज्य के 16 जिलों को इसमें शामिल किया है। कोसी और सीमांचल के कुछ जिलों तक यह खेती अब तक मुख्य रूप से सीमित थी, लेकिन अब अररिया के किसान भी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठा सकेंगे। इस पहल के तहत मखाना की खेती करने वाले जिले के किसानों को लागत पर 75 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दिया जाएगा। इस निर्णय से जिले के कृषि क्षेत्र में नई क्रांति आने की उम्मीद है। जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि अररिया को मखाना उत्पादन के नए क्लस्टर के रूप में पहचान मिलेगी। एटीएम पंकज त्रिपाठी ने बताया कि बिहार सरकार ने मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है, जिसके तहत मखाना की खेती करने वाले किसानों को भारी सब्सिडी (अनुदान) मिलेगी। साथ ही कौशल विकास के तहत प्रखंड स्तर पर चयनित 10 किसानों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के तहत मखाना विकास योजना 2026-27 के तहत मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण पर 75% तक की सब्सिडी दी जा रही है। कौशल विकास के तहत, प्रखंड स्तर पर दस किसानों को मखाना की आधुनिक खेती (जैसे स्वर्ण वैदेही, सबोर मखाना) और उत्पादन के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। किसानों को बीज वितरण योजना के तहत रियायती दरों पर बीज मिलेगा। इसके अलावा, मखाना खेती के पारंपरिक उपकरणों के लिए भी 75% की सहायता प्रदान की जाएगी। प्रखंड क़ृषि पदाधिकारी राजीव कुमार झा ने बताया कि इस योजना से न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि आधुनिक तरीकों से मखाना की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।