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नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद कौन बनेगा सीएम, भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने दिए अहम संकेत

पटना बिहार के नए मुख्यमंत्री का ऐलान आगामी 10 अप्रैल को हो सकता है, भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इस बारे में सकेत दिए हैं। मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा सांसद का कार्यकाल भी 10 अप्रैल से शुरू होने की संभावना है। 10 अप्रैल को होगा बिहार के नए मुख्यमंत्री का ऐलान? भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने दिए संकेत  नीतीश कुमार के बाद बिहार का मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर अटकलों का दौर चल रहा है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के सांसद एवं भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी ने बता दिया कि नए सीएम पर स्थिति कब साफ होगी। उन्होंने कहा कि नीतीश के बाद बिहार का सीएम कौन होगा, इस पर अभी कुछ नहीं बता सकते हैं, 10 तारीख को पता चल जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि नए सीएम का ऐलान 10 अप्रैल को होगा। नीतीश कुमार ने बीते 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव जीता था। राज्यसभा सांसद बनने के लिए उन्हें नियमानुसार 14 दिनों के भीतर एमएलसी पद से इस्तीफा देना था। सीएम ने 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। अब आगामी दिनों में उनका राज्यसभा का कार्यकाल शुरू हो जाएगा। चर्चा है कि राज्यसभा सांसद की शपथ लेते ही वे मुख्यमंत्री पद भी छोड़ देंगे। इसके बाद बिहार में नया सीएम बनेगा। बिहार दौरे पर पहुंचे दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भी कहा है कि 10 तारीख तक स्थिति साफ हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत यह सब होना है, इसलिए अभी इस पर वे कुछ नहीं बोल सकते हैं। पूर्व में भाजपा एवं जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) के नेताओं ने कहा था कि एनडीए के शीर्ष नेता मिलकर बिहार के नए सीएम का चुनाव करेंगे। भाजपा से हो सकता है नया मुख्यमंत्री बिहार का अगला मुख्यमंत्री भाजपा से हो सकता है। पिछले महीने नीतीश के राज्यसभा जाने की घोषणा के बाद से ही सियासी गलियारों में इस पर चर्चा जोरों से हो रही है। भाजपा में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम रेस में सबसे टॉप पर माना जा रहा है। उनके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का भी नाम चल रहा है। इसके अलावा, दूसरे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा, मंत्री दिलीप जायसवाल, मंगल पांडेय समेत कई अन्य नेताओं का नाम भी रेस में है। वहीं, भाजपा किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर चौंका भी सकती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, दिल्ली जैसे राज्य इसके उदाहरण हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स में एनडीए सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भाजपा बिहार में ऐसा प्रयोग नहीं करेगी। क्योंकि भाजपा बिहार में जेडीयू समेत अन्य सहयोगी दलों के बलबूते सरकार चला रही है। यहां की जनसांख्यिकी और जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए नए सीएम के नाम पर मुहर लगाई जाएगी। जेडीयू के वरीय नेताओं का यह भी कहना है कि बिहार का अगला सीएम, नीतीश कुमार की मर्जी से ही बनेगा।

स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा कदम: रांची नगर निगम बनाएगा इंडोर स्टेडियम

रांची. सिर्फ राजधानी रांची की साफ सफाई ही नहीं खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए रांची नगर निगम पहली बार इंडोर स्टेडियम बनाने जा रहा है। वार्ड-3 एदलहातू मोरहाबादी में बनने वाले इस अत्याधुनिक इंडोर के निर्माण पर निगम करीब पांच करोड़ रुपये खर्च करेगा। एक साल में स्टेडियम बनाने का लक्ष्य निगम ने रखा है। जारी टेंडर के अनुसार इंडोर स्टेडियम में चार बैडमिंटन कोर्ट बनाए जाएंगे। बैडमिंटन कोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। जहां वार्मअप से लेकर चेजिंग रूम, शौचालय, पार्किंग की भी व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा इंडोर स्टेडियम के साथ लैंडस्केपिंग कार्य भी कराया जाएगा। वर्तमान में रांची में बैडमिंटन खेलने के लिए इंडोर स्टेडियम की संख्या गिनी चुनी है। खिलाड़ी के अलावा आम लोग में खेल सकेंगे इस परियोजना की अनुमानित लागत 4 करोड़ 9 लाख 52 हजार 68 रुपये तय की गई है। इच्छुक एजेंसियां 2 अप्रैल 2026 से 17 अप्रैल 2026 शाम 5 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से अपनी बोली जमा कर सकेंगी। वहीं, टेंडर खोलने की तिथि 18 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, इस इंडोर स्टेडियम के बनने से स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को निखारने का अवसर मिलेगा। खिलाड़ी के अलावा शहरवासी भी बैडमिंटन खेल सकेंगे। इसके एवज निगम कितना शुल्क लेगा इसकी घोषणा स्टेडियम का निर्माण पूरा होने के बाद होगा। इंडोर स्टेडियम की देखरेख का जिम्मा निगम निजी कंपनी को देगा। खिलाड़ियों के लिए कोचिंग की सुविधा मिलेगी। नगर आयुक्त ने उठाए बड़े कदम व्यापक डोर टू डोर सर्वे सत्यापन शहर के सभी वार्डों में विशेष अभियान चलाकर अज्ञात और छूटे हुए होल्डिंग्स की पहचान संपत्तियों के भौतिक सत्यापन के माध्यम से टैक्स बेस को मजबूत किया वार्ड स्तरीय लक्ष्य और दैनिक मानिटरिंग प्रत्येक वार्ड के लिए स्पष्ट राजस्व संग्रह लक्ष्य निर्धारित किए दैनिक और साप्ताहिक समीक्षा के माध्यम से प्रगति की निरंतर निगरानी कम प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में विशेष फोकस कर अभियान चलाया गया डिजिटल प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन प्रोपर्टी टैक्स मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से रीयल टाइम डेटा ट्रैकिंग की गई डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देकर पारदर्शिता और सुविधा में वृद्धि की गई बड़े बकायेदारों पर विशेष कार्रवाई उच्च बकाया वाले मामलों की पहचान कर विशेष वसूली अभियान चलाया गया आवश्यकतानुसार नोटिस, दंडात्मक कार्रवाई एवं प्रवर्तन उपाय अपनाए गए नागरिक सहभागिता और जागरूकता अभियान विभिन्न माध्यमों से नागरिकों को कर भुगतान के लिए प्रेरित किया गया समय पर भुगतान करने वाले करदाताओं को प्रोत्साहित किया गया फील्ड में टीमों की सक्रियता और समन्वय पर विशेष ध्यान टैक्स कलेक्टरों और फील्ड स्टाफ की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की टीम-आधारित कार्यप्रणाली से कार्य में गति एवं परिणाम दोनों प्राप्त हुए

नीतीश सीएम की कुर्सी छोड़ने को तैयार, BJP के इशारे का इंतजार! कब होगा बिहार में सरकार का बदलाव?

पटना  बिहार में सरकार का बदलना तय है. नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने को तैयार हैं. विधान परिषद से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. यानी अब अगर-मगर की कोई गुंजाइश नहीं बची है. जल्द ही इस आशंका पर भी विराम लग जाएगा कि वे संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्यसभा की शपथ लेने के बाद 6 महीने तक सीएम रह सकते हैं. नीतीश ने अब दिल्ली की राजनीति में जाने का पक्का मन बना लिया है. यही वजह रही कि उन्होंने ससमय विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के लिए भी वे तारीख तय होने का इंतजार कर रहे हैं. अनुमान है कि सीएम पद से इस्तीफा की औपचारिकता भी अप्रैल के दूसरे सप्ताह में पूरी हो जाएगी।  इस्तीफा शपथ के पहले या बाद में? यह सवाल जरूर बनता है कि नीतीश कुमार सीएम पद कब छोड़ेंगे. राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के पहले पद छोड़ देंगे या बाद में, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है. चूंकि नीतीश कुमार ने मीडिया से मुखातिब होना बंद कर दिया है, इसलिए इसे लेकर संशय बना हुआ है. तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. कोई कह रहा कि वे इस्तीफा अभी नहीं देंगे. 6 महीने की संवैधानिक व्यवस्था का लाभ लेते हुए वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे. हालांकि जेडीयू के सूत्र बता रहे हैं कि नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता की शपथ लेने के पहले ही इस्तीफा दे सकते हैं, बशर्ते भाजपा चेहरा घोषित कर दे. चर्चा यह भी है कि सरकार के स्वरूप पर एनडीए में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, इसीलिए विलंब हो रहा है. इतना तो तय है कि मुख्यमंत्री भाजपा का ही बनेगा. लेकिन, कौन बनेगा, इसे लेकर भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. जेडीयू के बड़े नेता लगातार कहते रहे हैं कि सीएम भाजपा से ही बनेगा, लेकिन वह नीतीश के मन मुताबिक होगा।  अगला सीएम नीतीश की पसंद का? सीएम के लिए नीतीश कुमार की पसंद की बात करें तो उन्होंने अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान इशारों-इशारों में अपनी पसंद जाहिर कर दी है. यात्रा के दौरान जनसंवाद के दौरान वे मंच पर सम्राट के कंधे पर हाथ रखते रहे. इतना ही नहीं, उन्होंने कई जगह कहा भी कि अब ये ही सब काम देखेंगे. अब इससे बड़ा संकेत क्या हो सकता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नीतीश के चयन पर मुहर लगाती है या पुरानी परिपाटी निभाते हुए कोई चौंकाने वाला नाम घोषित करती है. भाजपा ने 2014 से ही यह परिपाटी शुरू की है कि सीएम वह नहीं बनता, जिसकी सर्वाधिक चर्चा होती है. हरियाणा में मनोहर खट्टर और झारखंड में रघुवर दास के नाम चौंकाने वाले थे. मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में भी भजपा ने यही किया।  बिहार की राजनीति में सम्राट फिट बिहार का मिजाज जातीय समीकरण को पसंद करता है. नीतीश कुमार ने भले जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिया, लेकिन उनके उत्थान के पीछे लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण सहायक बना. इस समीकरण को अक्षुण्म रखते हुए नीतीश ने हर जाति में अपने रणनीतिक कौशल से वोट बैंक बनाया. कुर्मी-कोइरी की 10 फीसद से भी कम आबादी के बावजूद वे 20 साल तक बिहार के सीएम बनते रहे. चूंकि सम्राट चौधरी कोइरी जाति से आते हैं, इसलिए नीतीश के पैटर्न में दूसरों के मुकाबले ज्यादा फिट बैठेंगे. नीतीश अगर उन्हें अपना उत्तराधिकारी बता रहे हैं तो इसकी बड़ी वजह यही हो सकती है. भाजपा भी वोट बैंक की राजनीति में माहिर है. संभव है, वह दूसरे राज्यों के प्रयोग से बिहार में बचे।  भाजपा भी बढ़ाती रही है सम्राट को सम्राट का पलड़ा एक और वजह से भारी दिखता है. भाजपा में आने के बाद उन्हें बड़ा फलक मिला है. भाजपा ने उन्हें पहले प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी. उन्हें दूसरी बार डेप्युटी सीएम बनाया. इस बार तो भाजपा ने नीतीश के पास शुरू से ही रहने वाला गृह विभाग भी उनसे लेकर सम्राट को सौंप दिया है. सम्राट के प्रमोशन के संकेत उस वक्त भी मिले थे, जब लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मंच साझा करने के अलावा बोलने का भी अवसर दिया. मसलन भाजपा सम्राट को प्रमोट करने का काम शुरू से ही इसीलिए कर रही है कि समय आने पर उन्हें सूबे की कमान सौंपी जा सके।  नीतीश कर रहे BJP का इंतजार जेडीयू के सूत्र बताते हैं कि नीतीश ने अब सीएम पद का मोह छोड़ दिया है. वे इंतजार कर रहे हैं कि भाजपा नए सीएम का ऐलान करे तो वे बागडोर सौंप कर मुक्त हो जाएं. यानी वे भाजपा के ग्रीन सिग्नल का इंतजार कर रहे हैं. जानकारी तो यह भी मिल रही है कि राज्यसभा की शपथ के पहले ही भाजपा नाम की घोषणा कर देगी. चूंकि लंबे इंतजार के बाद भाजपा को बिहार में सरकार बनाने का मौका मिल रहा है, इसलिए वह इस आयोजन को भव्य बनाना चाहती है. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत केंद्रीय स्तर के नेता नए सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत कर सकते हैं. 5 राज्यों में चुनाव प्रचार तेज होने के कारण सबका शिड्यूल देखा जा रहा है. नए नेता के चुनाव की औपचारिकताएं भी पूरी करनी हैं. अनुमान है कि अप्रैल के दूसरे हफ्ते के आरंभ में नेता चयन की रस्म पूरी कर ली जाएगी. इसके साथ ही शपथ ग्रहण की तैयारी भी शुरू हो जाएगी. बंगाल चुनाव शुरू होने से पहले भाजपा बिहार में नई सरकार का गठन कर लेगी। 

JAC मॉडल स्कूल एंट्रेंस टेस्ट का सफल आयोजन, मेरिट से होगा कक्षा 6 में नामांकन

 रांची झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची द्वारा संचालित राज्य के 82 मॉडल विद्यालयों में कक्षा 6 में सत्र 2026–27  के नामांकन  के लिए झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा आज 28 मार्च (शनिवार) को राज्य भर के 19 जिलों के 60 परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई. परीक्षा का आयोजन पूर्वाह्न 11:00 बजे से अपराह्न 1:00 बजे तक किया गया. सभी परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों का आगमन समय से पहले ही प्रारंभ हो गया था, जिससे विद्यार्थियों में इस परीक्षा को लेकर उत्साह, अनुशासन एवं आत्मविश्वास स्पष्ट रूप से देखने को मिला. 100 अंकों की ऑब्जेक्टिव परीक्षा परीक्षा 100 अंकों की  बहुविकल्पीय  प्रश्न आधारित थी, जिसमें अंग्रेजी (30 अंक), गणित (30 अंक) एवं सामाजिक विज्ञान (40 अंक) से प्रश्न पूछे गए.  जिसमें प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी, जिसके पश्चात चयनित छात्र मॉडल विद्यालयों में नामांकन करा सकेंगे. परीक्षा के सफल संचालन हेतु सभी जिला प्रशासन, जिला शिक्षा पदाधिकारी, केंद्राधीक्षक एवं संबंधित कर्मियों द्वारा समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई. सभी केंद्रों पर कदाचार मुक्त एवं शांतिपूर्ण वातावरण में परीक्षा सम्पन्न कराई गई. मॉडल स्कूल का उदेश्य क्या है? झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची द्वारा संचालित मॉडल विद्यालयों में JAC बोर्ड के अंतर्गत अंग्रेजी माध्यम से कक्षा 6 से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाती है. इन विद्यालयों का उद्देश्य ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उत्कृष्ट एवं आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकें. परिषद राज्य के अभिभावकों एवं विद्यार्थियों से अपील करता है कि वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य हेतु इन मॉडल विद्यालयों में अधिक से अधिक नामांकन कराएं तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ उठाएं.

खेला हो गया: बीजेपी जुटा रही बहुमत का जादुई आंकड़ा, जेडीयू के बिना सरकार बनाने का प्लान तैयार, कांग्रेस में बड़ी टूट की आहट

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद सदस्यता से इस्तीफा देकर राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया है, लेकिन सीएम की कुर्सी अभी तक नहीं छोड़ी है. ऐसे में नीतीश ने पूरी तर खामोशी अख्तियार कर रखी है, जिसके चलते मुख्यमंत्री को लेकर कशमकश बनी हुई है. ऐसे में बीजेपी सीएम चेहरे पर पत्ते खोलने के बजाय बिहार की सियासत में खुद को 'आत्म निर्भर' बनाने से आगे की दिशा में जुट गई है. बीजेपी पहली बार बिहार की राजनीति में अपना मुख्यमंत्री बनाने की स्थिति में खड़ी नजर आ रही है. अभी तक नीतीश कुमार की बैसाखी के सहारे ही सत्ता में भागीदार बनती रही है, लेकिन पहली बार सत्ता की स्टैरिंग उसके हाथ में होगी. नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने और विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद यह तय है कि बीजेपी जल्द ही अपना मुख्यमंत्री बना लेगी. इससे पहले बीजेपी अपने सीटों के समीकरण को दुरुस्त करने की स्टैटेजी पर काम कर रही है ताकि आगे की राह में किसी तरह की कोई मुश्किल न आ सके, ऐसे में बीजेपी की नजर कांग्रेस के बागी विधायकों पर है, जिन्हें अपने पाले करने की है. बिहार में बना रहा नया दिलचस्प समीकरण बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव के दौरान एक नया सियासी समीकरण बनाकर उभरा है. पांच राज्यसभा सीटों में से विपक्ष एक सीटें जीत सकता था, लेकिन बीजेपी ने ऐसी रणनीति चली कि आरजेडी चारो खाने चित हो गई. नंबर गेम के बाद भी विपक्ष नहीं जीत सका और एनडीए सभी पांचों सीटें जीतने में कामयाब रहा. बीजेपी ने कांग्रेस के बागी विधायकों को अपने साथ मिलाने की स्टैटेजी पर इन दिनों काम कर रही है. राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के तीन विधायक और आरजेडी के एक विधायक ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था. इसके चलते ही एनडीए सूबे की पांचों राज्यसभा सीटे जीतने में सफल रही थी. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इन तीनों विधायकों के खिलाफ़ कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन पार्टी चाहकर भी उनके खिलाफ एक्शन नहीं ले पा रही है. हालांकि, इसके पीछे कुछ तकनीकी पहलू ऐसे हैं कि कांग्रेस के लिए इन तीनों विधायकों के खिलाफ़ कार्रवाई करना आसान नहीं है, जिसने बीजेपी को एक नई उम्मीद जगा दी है. ऐसे में कांग्रेस के विधायक अगर पाला बदल कर बीजेपी के साथ भी चले जाते हैं तो भी पार्टी कुछ नहीं कर पाएगी. इसके चलते बिहार में सीटों का नया समीकरण बन सकता है? कांग्रेस MLA पाला बदलते ही बदलेगा गेम बिहार में पिछले साल नवंबर में हुएविधानसभा चुनाव में कांग्रेस के छह विधायक जीते थे. चुने गए विधायकों का एक नेता चुना जाता है, जिसको विधायक दल का नेता कहा जाता है. चार महीने बीत जाने के बाद भी आजतक बिहार में कांग्रेस विधायक दल के नेता का चयन नहीं हो पाया है. विधायक दल का नेता नहीं चुने जाने के चलते यह हुआ कि आजतक बिहार में पार्टी विधायक दल का कोई सचेतक या व्हिप भी नियुक्त नहीं हो सका है. विधायक दल के नेता और व्हिप की नियुक्ति की औपचारिक और विधिवत जानकारी विधानसभा स्पीकर को देनी होती है. व्हिप का काम ही होता है तमाम मौकों पर अपने विधायकों को वोट देने के लिए आदेश या व्हिप जारी करना. ऐसे में राज्यसभा चुनाव में वोटिंग से दूर रहने वालों तीनों विधायक अगर बीजेपी में शामिल हो जाएं तो सदस्यता नहीं जाएगी. इसके अलावा बीजेपी की नजर एक और भी विधायक पर है. बिहार में कांग्रेस के छह में से चार विधायक अलग होकर बीजेपी में शामिल हो जाते हैं तो वे दलबदल क़ानून के दायरे में नहीं आएंगे. इस तरह बीजेपी के विधायकों की संख्या भी बढ़ जाएगी और कांग्रेस से बगावत करने वाले विधायकों की सदस्यता भी बची रह सकती है.   बीजेपी का आत्म निर्भर बनने से आगे का प्लान बीजेपी बिहार की राजनीति में लंबे समय से आत्म निर्भर बनने की कवायद में है, लेकिन अभी तक सफल नहीं हो सकी है. नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव जाने के बाद ये तो साफ है कि बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बना लेगी, लेकिन जेडीयू पर उसकी निर्भरता बनी रहेगी, क्योंकि नंबर गेम अभी उसके पक्ष में नहीं है. 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 89 और जेडीयू को 85 सीटें मिली थी. इस तरह दोनों के बीच में सिर्फ चार सीटों का अंतर है, लेकिन एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के पास 28 विधायक हैं. जेडीयू के अलावा एनडीए के सहयोगी चिराग पासवान की पार्टी के पास 19, जीतनराम मांझी के पास 5 और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के पास 4 विधायक हैं. दिलचस्प बात ये है कि चिराग, मांझी और कुशवाहा की वफादारी बीजेपी के पक्ष में है, क्योंकि एनडीए में उन्हें जेडीयू नहीं बल्कि बीजेपी लेकर आई है. ऐसे में बीजेपी के ही करीबी माने जाते हैं, इस तरह 28 विधायकों को बीजेपी के 89 विधायकों के साथ जोड़ लिया जाता है तो यह संख्या 117 हो जाती है. बीजेपी कैसे जुटा रही बहुमत का नंबर गेम चिराग-मांझी-कुशवाहा के विधायकों को मिलने के बाद बहुमत के आंकड़े से बीजेपी सिर्फ पांच सीटें पीछे है. ऐसे में कांग्रेस के चार विधायकों को बीजेपी अपने साथ जोड़ती है तो फिर जेडीयू के बिना एनडीए बहुमत के आंकड़े से केवल एक दूर रह जाएगी. ऐसे में अगर ज़रूरत पड़ने पर बीजेपी की जेडीयू पर निर्भरता नहीं रहेगी, लेकिन केंद्र में मोदी सरकार की जेडीयू पर निर्भरता है. सके बारह सांसदों के समर्थन की बीजेपी को ज़रूरत रहेगी, लेकिन बीजेपी ने बिहार में आत्म निर्भर बनने की दिशा में अपने कदम बढ़ा रही है.

राज्य गठन के बाद पहली बार मिली इतनी बड़ी राशि, झारखंड के गांवों में आएगी विकास की क्रांति

रांची विकसित गांव और समृद्ध झारखंड का सपना अब साकार होने जा रहा है। झारखंड की 4345 पंचायतों पर वित्तीय वर्ष 2025 से 26 में छप्पर फाड़ पैसे की बारिश हुई है। राशि के अभाव में पिछड़ रहे गांव, अब विकास की रफ्तार भरने को तैयार हैं। झारखंड के हर पंचायत को मिली 52 लाख से ज्यादा की राशि, बांटे गए 2254 करोड़ रुपए विकसित गांव और समृद्ध झारखंड का सपना अब साकार होने जा रहा है। झारखंड की 4345 पंचायतों पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में छप्पर फाड़ पैसे की बारिश हुई है। राशि के अभाव में पिछड़ रहे गांव, अब विकास की रफ्तार भरने को तैयार हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक झारखंड को 15वें वित्त आयोग के तहत करीब 2254 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई है। इस राशि को राज्य के पंचायतों को मिलने वाली राशि के नजरिए से आंकें तो हर एक पंचायत के हिस्से में पिछले एक साल में करीब 51 लाख 80 हजार रुपए आएंगे। राज्य गठन के बाद पंचायतों को हिस्से में आई सबसे ज्यादा राशि 15वें वित्त आयोग के तहत झारखंड के हिस्से में मिलनी वाली राशि पर गौर करें तो वित्तीय वर्ष 2021-22 में 624.50 करोड़, वित्तीय वर्ष 2022-23 में 1271 करोड़, वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1300 करोड़, वित्तीय वर्ष 2024-25 में 653.50 करोड़, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में ये राशि सर्वाधिक 2254 करोड़ रुपए राज्य की पंचायतों को मिले हैं। राज्य वित्त आयोग से पहली बार अनुदान राशि ये राशि राज्य गठन के बाद से अब तक मिलने वाली सर्वाधिक राशि है। सबसे बड़ी उपलब्धि ये है कि राज्य वित्त आयोग से पहली बार पंचायतों को अनुदान राशि दी गई है। 15वें वित्त आयोग से झारखंड का हिस्सा लेने में लंबी प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ा। राज्य की ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के प्रयास और केंद्र सरकार के साथ लगातार पत्राचार, केंद्रीय सचिव और केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक के बाद ये संभव हो पाया है।

बिहार में स्वास्थ्य सुरक्षा बढ़ी: JE रोकथाम के लिए पंचायत स्तर पर एंबुलेंस सेवा

समस्तीपुर. एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) पर नियंत्रण को राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। राज्य स्वास्थ्य समिति ने 12 जिलों को निर्देश जारी करते हुए मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत संचालित एंबुलेंसों को प्रत्येक पंचायत से टैग करने को कहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। इसके लिए जिला परिवहन पदाधिकारी से समन्वय स्थापित कर एंबुलेंसों की सूची तैयार की जाएगी। इसमें संचालकों के मोबाइल नंबर भी शामिल होंगे। यह सूची प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर उपलब्ध रहेगी। स्वास्थ्य समिति ने एंबुलेंस संचालकों के साथ एकरारनामा करना अनिवार्य किया है, ताकि मरीज को परिवहन में किसी प्रकार की बाधा न हो। साथ ही, टैग वाहनों और उनके संचालकों की जानकारी सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित करने का भी निर्देश दिया गया है, जिससे आमजन को आसानी से जानकारी मिल सके। इस सेवा के लिए 20 किलोमीटर तक 400 रुपये, 21 से 40 किलोमीटर तक 600 रुपये, 41 से 60 किलोमीटर तक 800 रुपये और 61 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए अधिकतम 1000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इन जिलों के पंचायतों में होगी टैगिंग मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना अंतर्गत परिचालित एंबुलेंस का प्रत्येक पंचायत के साथ टैगिंग करना है। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने समस्तीपुर, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, सारण, सीवान एवं गोपालगंज जिले को पत्र जारी किया है। निजी वाहन से लाने पर भी मिलेगा खर्च राज्य स्वास्थ्य समिति ने एईएस प्रभावित जिलों में मरीजों को अस्पताल तक लाने में होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था वर्ष 2026 में भी जारी रखने का निर्देश दिया है। इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और सिविल सर्जन को पत्र भेजा गया है। समिति ने अपने पत्र में कहा है कि एईएस प्रभावित क्षेत्रों में अक्सर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाने निजी एंबुलेंस या अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में मरीज के परिजन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पहले से ही मरीज के परिवहन खर्च की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था कर दी है। इस व्यवस्था को वर्ष 2026 में भी जारी रखने का फैसला लिया गया है, ताकि किसी भी परिवार को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। समिति ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2020, 2021, 2022, 2023, 2024 और 2025 की तरह ही 2026 में भी निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान किया जाएगा। गर्मी और बारिश में बढ़ता है एईएस का खतरा एईएस का प्रकोप आमतौर पर गर्मी और बारिश के मौसम में अधिक होता है। ऐसे समय में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है। समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए परिवहन सुविधा को मजबूत करना प्राथमिकता है। सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि राज्य स्तर से पत्र जारी किया गया है। इस दिशा में प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

नई सरकार पर बड़ा अपडेट: 10 अप्रैल के बाद बिहार में होगा गठन

मुजफ्फरपुर. दस अप्रैल के बाद बिहार में नई सरकार का गठन हो जाएगा। कुढ़नी के चढ़ुआ में मंगलवार को केंद्रीकृत रसोईघर का शुभारंभ करने आए राज्य के ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने उक्त बात कही। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में विकास की रफ्तार लगातार जारी रहेगी। चल रही योजनाओं को समय पर पूरा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन इसे जनता के सहयोग से पूरा किया जाएगा। मंत्री ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके माता-पिता के शासनकाल में करीब 20 वर्षो तक विकास के बजाय लौंडा नाच और जंगलराज का दौर चला। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राज्य में विकास कार्य ठप थे और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी खराब थी। अब जब बिहार विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, तो विपक्ष को यह रास नहीं आ रहा है। मंत्री ने कहा कि केंद्रीकृत रसोईघर मध्याह्न भोजन योजना को सुदृढ़ बनाएगी। इससे बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा। 251 विद्यालयों के लिए एक ही स्थान पर भोजन पूर्व मंत्री मनोज कुशवाहा ने बताया कि इस नई व्यवस्था के तहत प्रखंड के 251 विद्यालयों के लिए एक ही स्थान पर भोजन तैयार किया जाएगा और उसे निर्धारित समय पर सभी स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा। यह सेवा एक अप्रैल से शुरू होगी। करीब 40 हजार बच्चों के लिए यहां भोजन तैयार किया जाएगा। कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान, विधायक केदार प्रसाद गुप्ता, विधायक बेबी कुमारी, विधान पार्षद संजय सिंह, जदयू अध्यक्ष अनुपम कुमार, जिप अध्यक्ष रीना पासवान, जदयू नेता शिशिर कुमार नीरज, शंकर कुशवाहा, शिवशंकर यादव, श्यामनंदन यादव, बबलू कुशवाहा, उमाकांत यादव, रामबाबू कुशवाहा, पप्पू सिंह, बबन सिंह, उषा सिंह, राजाबाबू, प्रखंड अध्यक्ष सुमन सौरभ, अबोध साह, अली इरफान, एसडीपीओ पश्चिमी टू एसी ज्ञानी आदि मौजूद थे।

रोहिणी के बाद गौरी बनी मिसाल, Ex IPS की पत्नी ने पिता को दिया जीवनदान

पटना. बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ने वाले और पूर्व आईपीएस अफसर शिवदीप लांडे (Ex IPS Shivdeep Lande) ने सोमवार (30 मार्च) को अपनी पत्नी गौरी के लिए फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखा है। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी पत्नी ने अपने पिता को नया जीवन देने के लिए किडनी दान करने का संकल्प लिया। शिवदीप लांड (Shivdeep Lande Wife Name) ने फेसबुक पर लिखा कि गौरी, जीवन में बहुत सी कठिनाइयां आईं, विपत्तियों ने घेरा और बहुत विपरीत परिस्थितियां भी मुझे कभी विचलित नहीं कर पाई, मैं सदैव अटल रहा, लेकिन तुम्हारे एक निर्णय, सिर्फ एक निर्णय ने मुझे झकझोर कर रख दिया। अपने पिता को नया जीवन देने के लिए जब तुमने अपनी किडनी दान करने का निर्णय/संकल्प लिया। 'सुब कुछ तुमने अकेले संभाला…' उन्होंने आगे लिखा कि तुम्हारा अपने पिता के प्रति निःस्वार्थ समर्पण, त्याग एवं जिद के आगे मैं नतमस्तक हूं। पिछले तीन महीनों में ऑपरेशन के लिए जरूरी दर्जनों मेडिकल टेस्ट, हजारों कागजों की भूलभुलैया, कानूनी जंजीरें, सब कुछ तुमने अकेले संभाला। मैं? बस मूक दर्शक बन तुम्हें निहारता रहा, और बस ये सोचता रहा कि भगवान बेटी को इंसान के जीवन में क्यों भेजता है? बकौल शिवदीप लांडे, शायद आज इस प्रश्न का उत्तर मुझे मिल गया वह यह कि शायद मां का साथ इंसान के जीवन में एक पड़ाव तक ही रहता है और पूरी उम्र उस मां की कमी को ईश्वर एक बेटी के रूप में पूरा करता है। पूरी उम्र। उन्होंने आगे लिखा– ""आज मुंबई के उस आईसीयू में… किडनी ट्रांसप्लांट के बाद… जब मैं तुम्हारे पास बैठा तुम्हारे मासूम चेहरे को देख रहा हूं तो आंखों से बहता पानी… रुकने का नाम ही नहीं लेता। क्यों? क्यों नहीं रुकते ये आंसू? आज समझ आया। रिश्तेदारों में भाई छोड़ दे, बेटा पीठ दिखा दे, बहन मुड़ जाए, यहां तक कि पत्नी भी… जीवन-मृत्यु के इस युद्धक्षेत्र में साथ छोड़ दे, लेकिन बेटी? वो निस्वार्थ खड़ी रहती है। अपना जीवन दांव पर लगाकर भी। तुम्हारी आंखें बंद हैं, गौरी… लेकिन तुम्हारा प्यार तुम्हारा त्याग हर पिता को सिखाता है कि बेटी ईश्वर का दिया हुआ सबसे बड़ा आशीर्वाद है।"" रोहिणी ने भी डोनेट की थी अपनी किडनी बता दें कि रोहिणी आचार्य भी अपने पिता लालू यादव के लिए किडनी दान चुकी हैं। हालांकि, अब वह अपने परिवार से अलग ही रहती हैं। बिहार चुनाव के बाद रोहिणी और उनके परिवार के बीच खटास पैदा हो गई थी।

विश्वनाथ ज्वेलर्स में सनसनीखेज वारदात, दुकानदार की नजर हटते ही गहनों का डिब्बा लेकर फरार हुआ चोर

जमशेदपुर झारखंड के जमशेदपुर में एक बार फिर अपराधियों के हौसले बुलंद नजर आए. ओलिडीह थाना क्षेत्र के रोड नंबर एक स्थित एक ज्वैलरी दुकान में मंगलवार को दिनदहाड़े बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया. इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और व्यापारियों में भय का माहौल बन गया. ग्राहक बनकर दुकान में घुसा बदमाश प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना सुबह करीब 11:30 बजे विश्वनाथ ज्वेलर्स की है. एक युवक ग्राहक बनकर दुकान में पहुंचा और दुकानदार से गहने दिखाने की बात कही. दुकानदार ने सामान्य ग्राहक समझकर उसे गहनों से भरा डिब्बा दिखाया. बदमाश ने बड़ी चालाकी से स्थिति का जायजा लिया और मौके की तलाश में रहा. मौका मिलते ही गहनों से भरा डिब्बा लेकर फरार इसी दौरान दुकानदार किसी दूसरे काम में व्यस्त हो गया. बस यही मौका देखकर बदमाश गहनों से भरा डिब्बा लेकर वहां से फरार हो गया. जब तक दुकानदार को घटना की भनक लगी, तब तक आरोपी दुकान से काफी दूर निकल चुका था. चोरी गए गहनों की कीमत लगभग 22 लाख रुपये बताई जा रही है. पुलिस ने शुरू की जांच, सीसीटीवी फुटेज खंगाले घटना की सूचना मिलते ही दुकानदार ने ओलिडीह थाना में शिकायत दर्ज कराई. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई, जिसमें आरोपी की तस्वीर कैद हो गई है. पुलिस अब उसी आधार पर आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है. इस घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों में डर और चिंता का माहौल है. दिनदहाड़े इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि बाजार क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.