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मध्य प्रदेश में बेसमेंट के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक, रेस्टोरेंट से हॉस्टल तक नहीं बना सकेंगे

 इंदौर  मध्य प्रदेश में बड़ी इमारतों में फायर सेफ्टी रूल्स को लेकर बड़ी सख्ती की गई है। मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा नियम-2026 में अब नियमों को तोड़ने पर एफआईआर के साथ बड़ा जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अब इमारतों में जांच के बाद कमियों को दूर करने के लिए केवल 30 दिन का ही समय दिया जाएगा। नए नियमों के तहत अधिकारियों की ओर से होने वाली कोई भी ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कमियां दूर न करने पर इमारत या भवन को असुरक्षित घोषित कर सील कर दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर कोई सील तोड़कर बिना किसी एनओसी के फिर से इमारत में अपना काम जारी रखता है तो उसके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं ऐसे मामले में बड़ा जुर्माना भी लगाया जा सकता है। बेसमेंट में किचन और बैटरी रखने पर भी पांबदी नए नियमों के तहत इमारतों के बेसमेंट में किसी भी तरह के व्यावासायिक गतिविधि पर पूरी तरह से रोक लगाई गई। यहां किचन, रेस्टोरेंट, रूम, हॉस्टल नहीं बनेंगे। इसके साथ ही बेसमेंट में ज्वलनशील पदार्थ और बैटरी और यूपीएस भी नहीं रखा जा सकेगा। अधिकारी समय-समय पर इसको लेकर इमारतों की जांच करेंगे। अगर नियमों का उल्लंघन मिलता है तो तुरंत कार्रवाई होगी। पेट्रोल-डीजल और ईवी के लिए सेंसर बेसमेंट में ईलेक्ट्रिक व्हीकल के चार्जिंग और पार्किंग के लिए रेट ऑफ राइज हीट सेंसर लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही जहां बेसमेंट में पेट्रोल-डीजल वाहन पार्क होते हैं वहां कार्बन मोनोऑक्साइड सेंसर लगाना होगा। इससे धुआं उठने या जहरीली गैस बेसमेंट में होने की स्थिति में सेंसर तुरंत अलट करेगा। आम लोगों के लिए फायर सेफ्टी नियमों की 8 जरूरी बातें 1. घर और फ्लैट के लिए क्या नियम हैं? आवासीय भवनों पर भी फायर सेफ्टी नियम लागू होंगे। 24 मीटर से अधिक ऊंचाई या प्रति फ्लोर 750 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भवनों को फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र लेना होगा। निर्धारित दोनों सीमाओं के भीतर आने वाले भवनों को प्रमाण पत्र से छूट दी गई है। पुराने प्रमाणपत्र वाले भवनों के लिए अलग प्रावधान हैं। 2. दुकानों, बाजारों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा जरूरी दुकानों, मॉल, होटलों, कार्यालयों और अन्य व्यावसायिक परिसरों में भवन की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार फायर सेफ्टी इंतजाम करने होंगे। इनमें फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट, पानी की उपलब्धता और आपातकालीन निकास शामिल हो सकते हैं। 3. अस्पतालों और स्कूलों में भी सुरक्षा मानक जरूरी अस्पतालों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक भवनों को अपनी श्रेणी के अनुसार फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। इसका उद्देश्य आग लगने पर मरीजों, बच्चों, कर्मचारियों और आम लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। 4. फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र कितने समय तक वैध रहेगा? नियमों के अनुसार, फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र सामान्यतः पांच साल और फायर प्लान की मंजूरी तीन साल तक वैध रहेगी। प्रमाण पत्र के नवीनीकरण के लिए उसकी वैधता समाप्त होने से कम से कम 60 दिन पहले आवेदन करना होगा। 5. हर साल फायर सेफ्टी ऑडिट जरूरी भवन मालिक या संचालक को हर वित्तीय वर्ष 30 जून तक फायर ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी। उसे सुरक्षा इंतजाम चालू रखने और सालाना घोषणा देने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। 6. सुरक्षा में कमी मिली तो 30 दिन में सुधार करना होगा निरीक्षण में फायर सेफ्टी की कमियां मिलने पर सक्षम प्राधिकारी भवन मालिक या संचालक को नोटिस दे सकता है। सामान्य प्रक्रिया में कमियां दूर करने के लिए अधिकतम 30 दिन मिल सकते हैं। आदेश का पालन नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित कर आगे कार्रवाई की जा सकती है। 7. शादी, धार्मिक आयोजनों और पंडालों पर भी नियम लागू अस्थायी पंडाल, टेंट, मंडप और सार्वजनिक आयोजनों में निर्धारित फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। आयोजक को कार्यक्रम से कम से कम 48 घंटे पहले सुरक्षा संबंधी घोषणा और तय लेआउट जमा करना होगा। गंभीर खामी मिलने पर अस्थायी ढांचे को असुरक्षित घोषित कर सील किया जा सकता है। 8. फायर टैक्स और सेवा शुल्क कितना लगेगा? नियमों में संपत्ति कर के कम से कम 2% की दर से फायर टैक्स लगाने का प्रावधान है। इसकी दर राज्य सरकार तय कर सकती है, लेकिन आवासीय संपत्तियों को फायर टैक्स से छूट दी गई है। कुछ फायर सेवाओं के लिए शुल्क लिया जा सकता है। हालांकि, सरकारी अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, मान्यता प्राप्त गैर-सरकारी संगठनों और प्राकृतिक आपदाओं जैसी निर्धारित परिस्थितियों में सेवा शुल्क से छूट मिलेगी।। 1. हर इमारत के लिए अलग फायर सेफ्टी मानक नियमों में भवनों को उपयोग के आधार पर आवासीय, शैक्षणिक, संस्थागत, असेंबली, व्यावसायिक, बाजार, औद्योगिक, भंडारण और खतरनाक गतिविधियों वाली श्रेणियों में बांटा गया है। अग्निशमन उपकरणों की संख्या, निकास द्वार और सुरक्षा इंतजाम भवन की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार तय होंगे। 2. फायर सेफ्टी की जिम्मेदारी भवन मालिक की भवन मालिक या संचालक को फायर सेफ्टी इंतजाम चालू हालत में रखने होंगे। सालाना घोषणा में इनकी स्थिति की पुष्टि करनी होगी। निरीक्षण के दौरान अधिकारी कमियों की रिपोर्ट तैयार कर साक्ष्य दर्ज कर सकते हैं और सुधार के निर्देश दे सकते हैं। नोटिस के बाद भी कमियां दूर नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित किया जा सकता है। गंभीर मामलों में उसे सील करने या बिजली-पानी की आपूर्ति काटने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। 3. आग लगने पर दमकल, पुलिस और चिकित्सा सेवाओं में समन्वय नियमों के तहत फायर कंट्रोल रूम, दमकल, पुलिस, चिकित्सा सेवाओं और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय किया जाएगा। आग की सूचना मिलने पर घटनास्थल, फंसे लोगों और संभावित नुकसान का ब्योरा दर्ज होगा। जरूरत के अनुसार बिजली बंद कराने, एंबुलेंस बुलाने, भीड़ हटाने और मलबा हटाने में संबंधित विभागों की मदद ली जा सकेगी। दमकल अधिकारी दूसरे फायर स्टेशनों से भी कर्मचारी और उपकरण बुला सकेंगे। आपात स्थिति में सरकारी विभागों और निजी संस्थाओं के संसाधनों का भी उपयोग किया जा सकेगा। 4. फायर सेफ्टी के काम के लिए एजेंसी को लाइसेंस जरूरी फायर सेफ्टी का काम करने वाली एजेंसियों को लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए संबंधित तकनीकी क्षेत्र में योग्यता और कम से कम तीन साल का अनुभव जरूरी है। आवेदन शुल्क ₹10,000 है और लाइसेंस पांच साल तक वैध रहेगा। … Read more

वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ एकजुट हुए 35 गांवों के आदिवासी, जमीन के दस्तावेज लेकर भोपाल आएंगे

भोपाल  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लोकसभा क्षेत्र में आने वाले 35 गांवों के आदिवासी इकट्‌ठा होकर भोपाल आ रहे हैं। वे यहां मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलेंगे। उन्हें वन विभाग की कार्रवाई के संबंध में बताएंगे। वे कब्जे की जमीन के दस्तावेज भी दिखाएंगे। वन विभाग ने पिछले दिनों सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ दिए थे। कुएं को मिट्टी से भर दिया था।इसके बाद शिवराज ​सिंह चौहान भी कोसमी पहुंचे थे। वन विभाग की कार्रवाई पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने अपनी सरकार के खिलाफ धरना भी दिया था। अधिकारियों-कर्मचारियों को हटाए, कार्रवाई करें गांव में तीन दिन से आंदोलन चल रहा है। इसमें शामिल रमेश बारेला ने बताया कि धरने का तीसरा दिन है। उनकी प्रमुख मांग है कि कार्रवाई के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों को तत्काल हटाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। वर्षों से जिस जमीन पर कुआं बनाकर खेती कर रहे थे, उस जमीन का वैध अधिकार यानी पट्टा दिया जाए। प्रभावित परिवारों के रहने, भोजन और स्वास्थ्य की व्यवस्था करने के साथ फसलों के नुकसान का मुआवजा दिया जाए।बारेला ने कहा कि आदिवासी परिवार बाहर से आकर नहीं बसे। उसी वन क्षेत्र में रहते आए हैं, जहां उनके पूर्वज रहते थे। जंगल से उनकी आजीविका जुड़ी है। मकान टूटने से 12 परिवार बेघर हो गए हैं। 35 से अधिक गांवों में खेती रोकने का आरोप आदिवासी समाज का आरोप है कि खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों में जनजातीय किसानों को खेती करने से रोका जा रहा है। इससे परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। समाज ने इटावा खुर्द, जामुल झील पानी, पांगरी, छापरी, कोसमी, सनकोटा, नवलगांव, भीलखेड़ा, कुरी, बसंतपुर, लावापानी, बोरपानी, डोंगला पानी, बेड़ापानी, सिराली, बावड़ी खेड़ा, अमीरगंज, सुरई, खजूरी, आमाझिर, चतरकोटा, ठीकरी खेड़ा, यारनगर, मथार, भूरीटेक कावड़, ढाबा, पाट तलाई, भिलाई, मोगरा खेड़ा, भूराखेड़ा, सेवनिया, मंजाखेड़ी छाप, मोगली भुराट, गाडरीपुरा, झोलियापुरा और बीलपाटी समेत कई गांवों का उल्लेख किया है। खिवनी से विदिशा तक बेदखली की शिकायतें आदिवासी समाज ने खिवनी अभयारण्य, बुधनी के यार नगर और कोसमी के अलावा विदिशा जिले के ग्यारसपुर, मेहंदीपुर, डगरवाड़ा, बदनपुर, शमशाबाद, लटेरी और सिरोंज क्षेत्रों में भी जमीन से जुड़े विवादों और बेदखली की शिकायतें उठाई हैं। समाज का दावा है कि जून 2025 में खिवनी क्षेत्र में 50 से अधिक परिवारों के मकान तोड़े गए थे। यार नगर में 18 परिवारों के पट्टे अमान्य किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी। वहीं विदिशा के ग्यारसपुर में करीब 115 लोगों की फसलें नष्ट किए जाने का आरोप लगाया गया है।आदिवासी समाज ने सभी मामलों की निष्पक्ष जांच, पुराने पट्टों और जमीन से जुड़े दस्तावेजों के परीक्षण तथा प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा की मांग की है।रमेश बारेला ने स्पष्ट किया कि कृषि मंत्री के पदयात्रा में शामिल होने की कोई जानकारी नहीं है। उनके मुताबिक, आदिवासी समाज के लोग ही पदयात्रा करेंगे। प्रशासन की जांच रिपोर्ट में कब्जे अवैध बताए दूसरी ओर वन विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित परिवारों ने गलत तरीके से वन भूमि पर कब्जा किया था। सीहोर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे जिलों से आए लोगों ने वन भूमि पर कब्जा कर सागौन के पौधे काटे और खेती के लिए झोपड़ियां बनाईं। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2020 में 186.960 हेक्टेयर वन भूमि सामान्य वन मंडल से वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल को हस्तांतरित की गई थी।वर्ष 2021 में निगम ने इसके 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3,37,500 सागौन के पौधे लगाए। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 78,700 पौधे काटकर 31.48 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा किया गया। गूगल अर्थ की तस्वीरों को बनाया आधार जांच रिपोर्ट में गूगल अर्थ की टाइम लाइन तस्वीरों को साक्ष्य के रूप में पेश किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 तक संबंधित वन भूमि खाली दिखाई दे रही थी, जबकि वर्ष 2022 से वहां झोपड़ियां बनाकर खेती के लिए कब्जा किए जाने के संकेत मिले। रिपोर्ट में सुनील (पिता शैतान) और अन्य 11 लोगों का उल्लेख है। भैंरोंदा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्रवाई के दौरान बेदखल किए गए सभी 9 कब्जा धारियों के मूल गांव सिंधपुर और हल्लीबन नगर में पहले से पक्के मकान, मकान नंबर और वोटर आईडी कार्ड दर्ज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 11 अक्टूबर को अतिक्रमण हटाने के दौरान 9 झोपड़ियां हटाकर संबंधित जमीन को मलबे से भर दिया गया। पूरी कार्रवाई की ड्रोन वीडियोग्राफी भी कराई गई। रिपोर्ट के अनुसार, भैंरोंदा तहसील के लाड़कुई परिक्षेत्र में कोसमी बीट स्थित रिजर्व फॉरेस्ट के कंपार्टमेंट 426 की 31.48 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। कार्रवाई के विरोध में वन विकास निगम के डिपो के बाहर तीन दिन से धरना-प्रदर्शन चल रहा है। अब आदिवासी समाज मुख्यमंत्री के सामने अपना पक्ष रखने और जमीन से जुड़े दस्तावेज पेश करने के लिए भोपाल कूच की तैयारी में है।

स्कॉर्पियो में गुप्त बॉक्स बनाकर रखे थे 1.29 करोड़ रुपये, तीन थानों की पुलिस ने 3 आरोपियों को पकड़ा

मंदसौर/गरोठ मंदसौर पुलिस ने बिना नंबर की स्कॉर्पियो से एक करोड़ 29 लाख कैश पकड़ा है। रकम कार में अलग-अलग बॉक्स बनाकर छिपाई गई थी। मामले में उत्तर प्रदेश के दो लोगों समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस पूछताछ कर रही है कि रकम किसकी है, कहां से आई और कहां ले जाई जा रही थी? इसके नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े होने की आशंका है। दरअसल, शामगढ़ थाना पुलिस को टिप मिली थी कि बरखेड़ा उदा गांव के सरपंच भवानी शंकर मीणा के घर दो संदिग्ध लोग पहुंचे हैं। उनकी स्कॉर्पियो में अवैध कैश है। सूचना पर शामगढ़, सुवासरा और भानपुरा थानों की संयुक्त टीम ने सरपंच के घर को घेर लिया। भवानी शंकर मीणा (49), मोहम्मद इस्लाम (47) और सूर्य प्रकाश गंगवार (59) को गिरफ्त में ले लिया। बारीकी से जांच की तो मिले गुप्त खाने इस्लाम और सूर्य प्रकाश उत्तर प्रदेश में बरेली के रहने वाले हैं। पुलिस ने उनसे एमपी आने की वजह पूछी तो वे गोलमोल जवाब देने लगे। इसके बाद पुलिस उनकी गाड़ी को शामगढ़ थाने ले आई। यहां मैकेनिक को बुलाकर कार की बारीकी से जांच कराई गई। इसमें गाड़ी के अंदर खास तौर पर बनाए गए गुप्त खानों से कुल 1 करोड़ 29 लाख रुपए कैश निकला। पुलिस ने आयकर विभाग को दी जानकारी पुलिस ने केस दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। नशे के नेटवर्क के बारे में तहकीकात की जा रही है। आयकर विभाग को भी इसकी जानकारी दे दी है।

सिंधिया परिवार के बंटवारा विवाद में नया मोड़, मसौदे पर धोखाधड़ी से हस्ताक्षर लेने के आरोपों पर सुनवाई

ग्वालियर   सिंधिया राज परिवार की संपत्ति को लेकर चल रहे समझौता विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है. समझौता प्रतिवेदन पर कोर्ट में धोखाधड़ी के आधार पर आपत्ति लगाने वाली ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मराजे राणा की बेटी प्रतिमा देवी को लेकर कोर्ट ने अहम आदेश दिया है. कोर्ट ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं के खिलाफ अदालत में धोखाधड़ी के सबूत पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।  पद्मराजे राणा की बेटी ने लगाई बंटवारा विवाद में आपत्ति केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच सिंधिया राज परिवार के 40 हज़ार करोड़ रु के संपत्ति बंटवारा को लेकर चला आ रहा विवाद भले ही आपसी समझौते तक पहुंच गया हो लेकिन कोर्ट में नए दावेदार की आपत्ति के बाद मामला और उलझ गया था. ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्माराजे की बेटी प्रतिमा देवी ने संपत्ति में अपनी मां के अधिकार को लेकर हिस्सेदारी का दावा किया है. साथ ही सहमति से समझौते के मसौदे के लिए हस्ताक्षर धोखाधड़ी से लिए जाने का आरोप लगाया था।  पिछली सुनवाई में हुई थी प्रतिमा देवी के आरोपों पर बहस प्रतिमा देवी के आवेदन पर ग्वालियर कोर्ट ने मामले में उन्हें पक्ष रखने का मौका दिया था, जिसके तहत पिछली 7 अक्टूबर को उनके आवेदन पर बहस हुई थी. इसमें प्रतिमा देवी की और से दावा किया गया था कि, समझौते के लिए पूर्व में सहमति पत्र पर उनकी मां के हस्ताक्षर धोखे से लिए गए थे. जबकि इसके जवाब में उनकी तीनों मौसियों उषा राजे, वसुंधरा राजे और यधोधरा राजे सिंधिया की और से कोर्ट को कहा गया कि आरोप निराधार हैं. साथ ही यह भी बताया था की, हस्ताक्षर सहमति से हुए थे, इसके बाद फैमिली का रॉयल डिनर भी हुआ था और सबने फोटोग्राफ्स भी लिए थे. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपन फैसल सुरक्षित रख लिया था।  कोर्ट का आदेश- साक्ष्य से साबित करें धोखाधड़ी  जब इस केस पर दोबारा सुनवाई हुई तो अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आत्मा राम टोंक ने अपना फैसला सुनाते हुए प्रतिमा देवी को अगली हियरिंग में गवाही देने और धोखाधड़ी के सबूत पेश करने को कहा है. उन्हें साबित करना होगा कि, हस्ताक्षर धोखाधड़ी से कराए गए थे. इसके अलावा अगली सुनवाई पर ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं की और से बंटवारा आपसी राजीनामा होने का पक्ष रखा जाएगा. इस केस से जुड़े वकील एड शर्मा ने बताया कि अब अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। 

शिक्षकों की मनमानी पर सख्ती, छिंदवाड़ा में कार्यस्थल पर रहना अनिवार्य; BEO-BRC को नोटिस

छिंदवाड़ा  विकासखंड शिक्षा अधिकारी हो या फिर विकासखंड शिक्षा कोऑर्डिनेटर या फिर कोई भी शिक्षक जिसकी जहां पर ड्यूटी है उसे वहीं पर रहना होगा. ऐसा नहीं हुआ तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी. कलेक्टर ने आदेश जारी करते हुए चेतावनी दी है कि, शिक्षा में अगर सुधार नहीं हुआ तो लापरवाह की खैर नहीं।  जहां पर ड्यूटी वहीं पर रहना होगा वरना होगी कार्रवाई कलेक्टर हरेन्द्र नारायन ने बुधवार को शिक्षा विभाग की बैठक लेकर कहा कि, ''सरकारी स्कूलों की पढ़ाई का स्तर सुधारने के उद्देश्य से ही बीईओ, बीआरसी, बीएसी, जनशिक्षक जैसे पद बनाए गए हैं. स्कूलों का नियमित निरीक्षण और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित कराना इनकी जिम्मेदारी है, इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े सभी फील्ड अधिकारी अनिवार्य रूप से अपने मुख्यालय पर निवास करें और अधिकारी की अनुमति उपरांत ही मुख्यालय से बाहर जाएं।  उन्होंने लगातार लापरवाही बरतने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद भी सुधार न दिखने पर कड़ी नाराजगी जताई एवं बीईओ और बीआरसी परासिया के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक को दिये. कलेक्टर ने बैठक में बीईओ, बीआरसी सहित संबंधित सभी फील्ड अधिकारियों के मुख्यालय में निवास की स्थिति की फिर समीक्षा की और इस आशय का प्रमाण पत्र प्राप्त किया. प्रमाण पत्र संतोषप्रद नहीं पाए जाने पर उन्होंने स्पष्ट प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।  गंभीरता से कराएं अपार आईडी एन्ट्री का काम बैठक में कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों की अपार आईडी निर्माण में डाटा में गलती मिलने पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की और पोर्टल से ऑरिजनल डेटा देने के निर्देश दिए. कलेक्टर ने कहा कि, ''विद्यार्थियों की अपार आईडी क्रिएशन का काम बहुत जरूरी है, सभी बीईओ, बीआरसी इस काम की गंभीरता को समझें.'' उन्होंने सभी विकासखण्डों को सौ फीसदी अपार आई डी क्रिएशन का काम जल्द से जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए।  स्कॉलरशिप एवं आवास सहायता राशि टाइम पर करें कलेक्टर ने जनजातीय कार्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातीय वर्ग के सभी पात्र विद्यार्थियों का एमपी टास पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएं। इन सभी पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और आवास सहायता योजना का समय पर फायदा दिलाएं। 

ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे राज्यपाल मंगुभाई पटेल, CPU का लोकार्पण

 ग्वालियर ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह गुरुवार (15 अक्टूबर) को होगा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल के मुख्य आतिथ्य में दोपहर 3:30 बजे विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।  कार्यक्रम में प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंषाना और भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।​ समारोह से पहले होगा लोकार्पण दीक्षांत समारोह से 15 मिनट पहले, दोपहर 3:15 बजे राज्यपाल मंगुभाई पटेल कृषि महाविद्यालय स्थित सीएआईआई (CAII) में नवीन सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) का लोकार्पण करेंगे। 345 स्नातक और 294 स्नातकोत्तर विद्यार्थी समारोह में कुल 666 विद्यार्थियों को उपाधियां दी जाएंगी। इनमें 345 स्नातक (UG), 294 स्नातकोत्तर (PG) विद्यार्थी और 27 पीएचडी शोधार्थी शामिल हैं। चार विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल दिए जाएंगे। इनमें स्नातक के दो विद्यार्थी और स्नातकोत्तर व पीएचडी के एक-एक विद्यार्थी शामिल हैं। इसके अलावा, तीन विद्यार्थियों को ‘सिरताज बहादुर सिन्हा स्मृति नगद पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। एक साल में डिग्री पूरी करने वाले होंगे सम्मानित कुलगुरु प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने बताया कि समारोह में 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच डिग्री पूरी करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को उपाधियां दी जाएंगी। इस मौके पर विद्यार्थियों के साथ उनके परिजन भी सभागार में मौजूद रहेंगे।  

मातृ मृत्यु दर रोकने पर जोर, सुमन रोडमैप-2030 को लेकर हुई कार्यशाला

सुरक्षित मातृत्व सेवाओं से मातृ मृत्यु दर शून्य करने पर हुआ मंथन सुमन रोडमैप-2030 पर हुई कार्यशाला भोपाल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश द्वारा यूएनएफपीए मध्यप्रदेश के सहयोग से सुमन रोडमैप 2030 – देखभाल की निरंतरता में तेजी विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान एवं प्रबंधन, प्रसव कक्षों में गुणवत्ता सुधार, प्रसूति संबंधी जटिलताओं के प्रभावी प्रबंधन तथा मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत बनाने पर चर्चा की गई। कार्यशाला का उद्देश्य सुमन के तहत निर्धारित लक्ष्यों को जिला स्तर पर प्रभावी कार्ययोजनाओं में परिवर्तित कर प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व सेवाएं उपलब्ध कराना तथा रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को शून्य करना है। एनएचएम मध्यप्रदेश एवं यूएनएफपीए ने इस दिशा में जिलों को तकनीकी एवं कार्यक्रम संबंधी सहयोग प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यशाला को भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अपर आयुक्त डॉ. पवन कुमार ने वर्चुअल संबोधित किया। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस, मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना एवं मातृ स्वास्थ्य की वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. अर्चना मिश्रा ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की रणनीति पर विचार साझा किए। कार्यशाला में प्रदेश के सभी 52 जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी तथा कार्यक्रम प्रबंधक शामिल हुए।  

इंदौर में 28 अक्टूबर को होगा राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव, ₹2,753 करोड़ की परियोजनाओं पर रहेगा फोकस

अर्बन कॉन्क्लेव 2026 इंदौर में 28 अक्टूबर को आयोजित होगा राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव अर्बन चैलेंज फंड की 2,753.10 करोड़ रूपये की परियोजनाओं को मिलेगा नया आयाम बैंक अनुबंध और लेटर ऑफ अवार्ड होंगे जारी इंदौर  मध्यप्रदेश में समृद्ध एवं आधुनिक नगरीय अधोसंरचना के सर्वांगीण विकास, निवेश प्रोत्साहन तथा प्रदेश के शहरों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित बनाने के ध्येय से आगामी 28 अक्टूबर, 2026 को इंदौर स्थित ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय 'अर्बन कॉन्क्लेव' का आयोजन किया जा रहा है। कॉन्क्लेव में 'अर्बन चैलेंज फंड' के अंतर्गत स्वीकृत प्रमुख नगरीय विकास परियोजनाओं की भौतिक प्रगति, सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन एवं समयबद्ध क्रियान्वयन से जुड़े दूरगामी रणनीतिक पहलुओं पर गहन विचार-मंथन किया जाएगा। यह कॉन्क्लेव प्रदेश के शहरी परिदृश्य को नई ऊँचाइयों पर ले जाने तथा नगरीय विकास की भावी दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। अर्बन कॉन्क्लेव में ‘अर्बन चैलेंज फंड' के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं के लिए वित्तीय संस्थानों एवं बैंकों के साथ अनुबंध किये जाएँगे तथा संबंधित एजेंसियों को 'लेटर ऑफ अवार्ड' प्रदान किए जाएँगे । अर्बन चैलेंज फंड के तहत प्रदेश के विभिन्न नगरों में संचालित एवं प्रस्तावित विकास कार्यों की कुल स्वीकृत लागत 2,753.10 करोड़ रूपये है। इस वित्तीय नियोजन के माध्यम से इंदौर, उज्जैन और रीवा की महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को गति दी जा रही है। इसके अंतर्गत इंदौर शहर की जलप्रदाय व्यवस्था के वितरण तंत्र के सुदृढ़ीकरण तथा सीवरेज नेटवर्क एवं उपचार संयंत्रों के व्यापक उन्नयन कार्य शामिल हैं। इसी श्रृंखला में धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी उज्जैन में 'एकीकृत मंदिर क्षेत्र विकास' की महत्वाकांक्षी परियोजना तथा रीवा नगर की सर्वसमावेशी जलप्रदाय योजना के कार्यों को धरातल पर उतारा जा रहा है। कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश के नगरीय निकायों में आधारभूत सुविधाओं के अभूतपूर्व विस्तार, आधुनिक शहरी अधोसंरचना के निर्माण तथा वित्तीय संसाधनों के सर्वाधिक प्रभावी एवं पारदर्शी उपयोग की संभावनाओं को नए आयाम दिए जा रहे हैं। अर्बन चैलेंज फंड से संचालित ये परियोजनाएं न केवल शहरों में जन-सुविधाओं का विस्तार कर 'ईज़ ऑफ लिविंग' के उच्च मानक स्थापित करेंगी, बल्कि नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से स्वावलंबी बनाते हुए क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी संबल प्रदान करेंगी। राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव शहरी विकास के क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्रमुख निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, नवोन्मेषी स्टार्टअप्स तथा ऊर्जावान युवाओं को मध्यप्रदेश में सृजित हो रही अपार विकास संभावनाओं से सीधे जुड़ने का एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। कॉन्क्लेव में सहभागिता के इच्छुक निवेशक, स्टार्टअप्स एवं युवा आधिकारिक वेब पोर्टल ugconclave.mp.gov.in पर जाकर अपना ऑनलाइन पंजीयन (Registration) करा सकते हैं। राज्य सरकार की इस दूरदर्शी पहल से मध्यप्रदेश के शहरों में सतत्, समावेशी एवं आधुनिक विकास का नया अध्याय प्रारंभ होगा। 

मध्यप्रदेश की जेलों में राशन खरीदी पर सख्ती, रेट में अंतर और गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई व्यवस्था

भोपाल   मध्य प्रदेश जेल विभाग में वर्षों से खाद्यान्न सप्लाई का टेंडर कॉर्टेल चलाने वालों पर विभाग लगाम लगाने जा रहा है। सालाना 2400 करोड़ के कॉर्टेल को खत्म करने नई टेंडर पॉलिसी बनाई है। सभी जेलों को केंद्र के खरीद पोर्टल (जेम) से खरीदी करना अनिवार्य किया है। अभी सभी जेलों में अपने स्तर पर टेंडर किए जाते हैं। शिकायतें आ रही थी कि कुछ अफसर मिलीभगत कर एक ही फर्म या संबंधित फर्मों को ठेका दे रहे हैं। इस नीति से इस पर अंकुश लगेगा। यह नए वित्तीय वर्ष में लागू होगा। फल-सब्जियां खरीद सकेंगे प्रदेश की जेलों में एक माह में करीब 200 करोड़ की खाद्यान्न सामग्री लगती है। नई नीति के अनुसार उप जेलें टेंडर अपने स्तर पर नहीं कर सकेंगी। उन्हें जिला या सेंट्रल जेल से सप्लाई की जाएगी। वे सिर्फ रोजमर्रा की सामग्री जैसे फल, दूध, सब्जियों की खरीदी अपने स्तर पर कर सकेंगे। इसलिए बदली नीति ओवर बिलिंगः जेल मुख्यालय ने पांच साल के सभी जेलों के सलाना टेंडर की जांच की तो कई खाद्य सामग्री में ओवर बिलिंग के मामले सामने आए। रेट असमानताः खाद्यान्न सामग्री के रेट में भी बड़ी असमानताएं मिलीं। चावल, दाल और गेहूं में 50 प्रतिशत तक का अंतर मिला। गुणवत्ताः गुणवत्ता की शिकायतें भी लगातार आ रही थीं। शिकायतों के बाद बदली गई नीति अच्छा खाना देना हमारी प्राथमिकता है। लंबे समय से खाद्यान्न सामग्री की ओवर बिलिंग और गुणवत्ता की शिकायतें आ रही थीं। इसे देखते हुए नई नीति बनाई है।-वरुण कपूर, डीजी, जेल एमपी में जेल की रसोई पर AI की नजर मध्य प्रदेश की जेलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर कैदियों की शिकायतें अब सीधे एआई तक पहुंचेंगी। विभाग ने जेल किचन में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित सॉफ्टवेयर तैयार किया है। किचन में लगाए गए कैमरों के जरिए यह सिस्टम रोजाना तैयार भोजन की तस्वीर और स्थिति का विश्लेषण करेगा। इसमें दाल, सब्जी और रोटी की गुणवत्ता से जुड़े अलग-अलग मानकों की जांच की जाएगी। किसी जेल में लगातार गड़बड़ी मिलने पर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

मध्यप्रदेश की जेलों में AI से होगी खाने की निगरानी, खराब भोजन मिलने पर कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी रिपोर्ट

इंदौर  मध्य प्रदेश की जेलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर कैदियों की शिकायतें अब सीधे एआई तक पहुंचेंगी। विभाग ने जेल किचन में बनने वाले भोजन की गुणवत्ता की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित सॉफ्टवेयर तैयार किया है। किचन में लगाए गए कैमरों के जरिए यह सिस्टम रोजाना तैयार भोजन की तस्वीर और स्थिति का विश्लेषण करेगा। इसमें दाल, सब्जी और रोटी की गुणवत्ता से जुड़े अलग-अलग मानकों की जांच की जाएगी। किसी जेल में लगातार गड़बड़ी मिलने पर इसकी रिपोर्ट मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। इंदौर जेल डीजी द्वारा इसकी पुष्टि की गई है। नई व्यवस्था में जेल के अंदर खाना बनाने वाले कैदी भोजन तैयार होने के बाद उसे निर्धारित तरीके से कैमरे के सामने रखेंगे। कैमरे से मिली तस्वीरों को एआइ आधारित सॉफ्टवेयर जांचेगा। सिस्टम भोजन के रंग, स्थिति और दिखाई देने वाले अन्य मानकों का विश्लेषण करेगा। मसलन रोटी जली तो नहीं है, दाल ठीक तरह से बनी है या नहीं, सब्जी में पानी अधिक तो नहीं है जैसे ङ्क्षबदुओं पर जांच की जाएगी। हर दिन बनेगी रिपोर्ट भोजन की जांच केवल शिकायत आने के बाद नहीं होगी, बल्कि रोजाना की जाएगी। सॉफ्टवेयर से तैयार रिपोर्ट जेल मुख्यालय के कंट्रोल रूम में भेजी जाएगी। वहां तैनात अधिकारी अलग- अलग जेलों से आने वाली रिपोर्ट की निगरानी करेंगे। इससे किसी एक दिन की शिकायत के बजाय लगातार खराब हो रही भोजन व्यवस्था की पहचान करना आसान होगा। एक-दो बार गलती माफ, लगातार गड़बड़ी तो कार्रवाई इस संबंध में इंदौर जेल डीजी वरुण कपूर ने बताया कि कंट्रोल रूम में अधिकारी भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी रिपोर्ट की लगातार निगरानी करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी जेल में महीने में एक-दो बार गुणवत्ता से जुड़ी कमी सामने आती है तो उसे सामान्य गलती मानकर देखा जा सकता है, लेकिन किसी जेल में लगातार खराब गुणवत्ता की रिपोर्ट आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य जेलों में भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना है।