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30 लाख की वसूली के आरोप में फंसे पूर्व SP: ग्वालियर कोर्ट ने 4 पुलिसकर्मियों को किया तलब

ग्वालियर  ग्वालियर के विशेष सत्र न्यायालय ने दो साल पुराने मामले में भोपाल के DIG राजेश सिंह चंदेल (तत्कालीन ग्वालियर एसपी) समेत तत्कालीन टीआई, एसआई और हवलदार पर डकैती का मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं. परिवाद मामले की सुनवाई करते हुए स्पेशल कोर्ट ने ये आदेश दिया. पीड़ित ने पुलिस के खिलाफ याचिका लगाई थी। धोखाधड़ी केस में 30 लाख वसूलने का आरोप मामले के अनुसार ग्वालियर के थाटीपुरा थाना पुलिस ने दिसंबर 2024 में ग्वालियर के विक्रम राणा समेत दो लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था. इसी मामले में समझौते के नाम पर 30 लाख रुपये वसूलने का आरोप विक्रम के भाई अनूप राणा ने परिवाद में लगाया था. सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने आईपीसी राजेश चंदेल सहित 03 पुलिसकर्मियों पर डकैती, साजिश रचने और सबूत मिटाने का मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। शिकायत की तो उल्टा जेल भेज दिया शिकायतकर्ता पक्ष के मुताबिक, अनूप राणा के भाई पर थाटीपुर थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज था, जिसमें फरियादी से समझौता हो चुका था। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने पहले 5 लाख रुपए लिए और बाद में और पैसों की मांग करने लगी। कोर्ट में दी गई दलील के अनुसार, तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ सिंह के इशारे पर हवलदार संतोष वर्मा ने अनूप राणा के घर से 9.50 लाख रुपए और मामले से जुड़ी एक महिला आरोपी के घर से 15 लाख रुपए लिए। एसपी से की थी लिखित शिकायत अनूप राणा ने जब तत्कालीन SP राजेश चंदेल से इसकी लिखित शिकायत की, तो कार्रवाई करने के बजाय मामला दोबारा थाटीपुर थाने भेज दिया गया। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने अनूप राणा को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने साल 2024 में अदालत का दरवाजा खटखटाया। CCTV फुटेज डिलीट होने पर कोर्ट सख्त सुनवाई के दौरान कोर्ट ने थाटीपुर थाने के CCTV फुटेज मांगे थे। इस पर पुलिस की ओर से कहा गया कि 3 जनवरी 2024 से पहले के फुटेज डिलीट हो चुके हैं। कोर्ट ने इस जवाब पर सख्त नाराजगी जताई। मामले में रेडियो पुलिस अधीक्षक की जांच का भी जिक्र सामने आया, जिसमें थाने के स्टाफ को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके थे। अदालत ने इसे भी रिकॉर्ड पर लिया। नौकरी के नाम पर ठगी केस से शुरू हुआ विवाद पुलिस का दावा है कि यह मामला नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह की जांच से जुड़ा है और अनूप राणा व उसका भाई उसी रैकेट का हिस्सा थे। वहीं, अनूप राणा का कहना है कि वह खुद ठगी का शिकार हुआ था और अपने भाई की मदद के लिए थाने पहुंचा था, लेकिन पुलिस ने उसे ही आरोपी बना दिया। आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को बचाते हुए उससे और उसके भाई से लाखों रुपए वसूले। आखिर क्या है पूरा मामला ? फरियादी के वकील अशोक प्रजापति के मुताबिक "फ़रवरी 2024 में इन पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के ख़िलाफ़ लगाये गए परिवाद में बताया गया है विक्रम राणा और चन्द्रलेखा जैन के ख़िलाफ़ दिसंबर 2023 में धोखाधड़ी का मामला थाटीपुर थाने में दर्ज किया गया था. थाटीपुर पुलिस ने उस केस के फ़रियादी से समझौता कराने के नाम पर 5 लाख 80 हज़ार रुपये लिए. इसके बाद 24 दिसंबर 2023 को दोनों आरोपियों विक्रम और चंद्रलेखा को थाने बुलाया, जहां 25 लाख रुपये की और डिमांड की गई. इस पर दोनों आरोपियों विक्रम से 9 लाख 75 हज़ार और चंद्रलेखा के घर से 15 लाख रुपये (कुल 24 लाख 75 हज़ार रुपये) मंगवा कर रख लिये गए. पुलिस द्वारा 30 लाख रुपये और देने का दबाव बनाया गया. जब फिर से और रुपये मांगे गए तो फरियादियों ने रुपये देने से इंकार कर दिया। एसपी पर आरोप- शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं की परिवाद में दावा किया गया कि जब पुलिस को और रुपये नहीं मिले तो उन्होंने फरियादी को षड्यंत्रकारी बनाकर जेल भिजवा दिया गया. परेशान होकर मामले की शिकायत विक्रम के भाई अनूप राणा ने तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल से भी की लेकिन उन्होंने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की. इन हालतों से परेशान हो कर फ़रियादी ने न्यायालय में पुलिस के ख़िलाफ़ ही याचिका दायर की. न्यायालय ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने के आदेश दिए।   साक्ष्य मिटाने और साजिश के आरोप फरियादी के अधिवक्ता अशोक प्रजापति के मुताबिक "न्यायालय ने पुलिस से थाटीपुर थाने में लगे सीसीटीवी के फुटेज बतौर साक्ष्य मांगे लेकिन पुलिस ने हलफनामा दिया, जिसमें लिखा था कि 3 जनवरी 2024 से पहले के सीसीटीवी फुटेज डिलीट हो चुके हैं. पुलिस पर लापरवाही और ऐसे जवाब पर नाराजगी जताते हुए विशेष सत्र न्यायालय ने सभी तथ्यों को संज्ञान में लिया और सोमवार को इस परिवाद में तत्कालीन एसपी आईपीएस राजेश चंदेल, तत्कालीन थाटीपुर थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ, उपनिनिरीक्षक अजय सिंह सिंह सिकरवार और आरक्षक संतोष वर्मा के खिलाफ लूट, डकैती, साक्ष्य मिटाने और साजिश रचने का केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

उज्जैन पहुंचीं तमन्ना भाटिया, महाकाल के दरबार में लिया आशीर्वाद; बोलीं- यह अनुभव अविस्मरणीय

उज्जैन साउथ और बॉलीवुड इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री तमन्ना भाटिया मंगलवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। उन्होंने भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होकर बाबा का आशीर्वाद लिया। तड़के करीब 3 बजे मंदिर पहुंचीं तमन्ना भाटिया नंदी हाल में बैठकर भक्ति भाव से भस्म आरती में शामिल हुईं। इस दौरान वे मस्तक पर चंदन लगाए पूरी तरह बाबा महाकाल की भक्ति में लीन नजर आईं। करीब दो घंटे तक उन्होंने भस्म आरती का दिव्य नजारा देखा। आरती के बाद अभिनेत्री ने नंदीजी का पूजन-अभिषेक किया और नंदी के कान में अपनी मनोकामना कही। इसके बाद चांदी द्वार से भगवान महाकाल को पुजारी के हाथों जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया। भस्म आरती के बाद तमन्ना ने कहा, आज भगवान ने मुझे बुलाया था। बाबा महाकाल के बुलावे पर ही भक्त यहां आते हैं। यहां आकर बहुत अच्छा लगा। आज जो आरती देखने को मिली, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती। आरती में शामिल होकर बहुत ऊर्जा मिलती है। सब लोग एक साथ बैठकर जिस तरह आरती देखते हैं, ऐसा दृश्य कहीं और देखने को नहीं मिलता। मंदिर परिसर में अभिनेत्री की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी विशेष रूप से बढ़ाई गई थी।

भोपाल एयरपोर्ट से नई उड़ानों की तैयारी: श्रीनगर-चेन्नई समेत कई रूट्स के लिए मांगे गए प्रस्ताव

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एयरपोर्ट से जल्द ही कोलकाता, जयपुर, देहरादून, केरलम, चेन्नई सहित देश के बड़े शहरों सीधे हवाई कनेक्टिविटी से जुड़ने जा रहे हैं. बड़े शहरों के अलावा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शुरू हो सकती हैं. इन उड़ानों के लिए प्रदेश सरकार ने एयरलाइंस ऑपरेटर्स से प्रपोजल मांगे हैं. इन उड़ानों के लिए कंपनियों को विशेष लाभ भी दिया जाएगा. एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इन उड़ानों के लिए कंपनियों से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल मांगे हैं. प्रपोजल के लिए 29 मई तक का समय दिया गया है। भोपाल से जुड़ेगा हर बड़ा शहर भोपाल के राजा भोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. आंकड़ों के मुताबिक एयरपोर्ट पर हर दिन करीबन 5 हजार से ज्यादा यात्री आवागमन कर रहे हैं. एयरपोर्ट से हर साल आवागमन करने वाले करीबन 8 लाख से ज्यादा यात्रियों की संख्या होती है. एयरपोर्ट से अभी देश के दिल्ली, हैदराबाद सहित चुनिंदा शहरों के लिए ही सीधी फ्लाइट उड़ान भरती है, लेकिन जल्द ही एयरपोर्ट से देश के सभी बड़े शहरों के बीच फ्लाइट उड़ान भरती दिखाई देगी। इसके लिए एयरपोर्ट प्रबंधन द्वारा प्रयास शुरू कर दिए गए हैं. राजा भोज एयरपोर्ट प्रबंधन ने श्रीनगर, चेन्नई, केरल, देहरादून, कोलकाता, जयपुर, चंडीगढ़ जम्मू सहित सभी बड़े शहरों के बीच हवाई सफर शुरू हो सकता है। सांसद भी ले चुके मीटिंग कुछ दिन पहले एयरपोर्ट पर एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें सांसद एवं कमेटी अध्यक्ष आलोक शर्मा की मौजूदगी में सुविधाओं, यात्री अनुभव, एयर-कनेक्टिविटी, स्वच्छता, ट्रैफिक व्यवस्था और भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा की थी। इससे पहले कमेटी के सदस्य मीक ने ऑनलाइन सुझाव मांगे थे। जिनमें हरीश मूलचंदानी, रजत सिंह, संदीप शर्मा, समीर सबरवाल, संजीव ठाकुर, अरुणेश्वर सिंहदेव, अलका कुमार, राजेश बहुगुणा, सुनील मालवीय, अमित दाधीच आदि ने अपने सुझाव दिए थे। इसके बाद मीक ने बैठक में यह सुझाव रखें। इनमें एयरपोर्ट पर बड़े बैकलिट डिस्प्ले, बेहतर पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, रिक्लाइनर और चेन्नई के लिए नॉन-स्टॉप फ्लाइट का सुझाव भी शामिल हैं।साथ ही पार्किंग व्यवस्था, वार्षिक फायर सेफ्टी ऑडिट और आपात स्थितियों में स्टाफ ट्रेनिंग पर जोर दिया। कोलकाता, चंडीगढ़, गोवा, श्रीनगर, जम्मू, जयपुर, उदयपुर और चेन्नई के लिए नियमित उड़ानों की मांग रखी। फ्लाइट संख्या, शहरों की कनेक्टिविटी, टर्मिनल विस्तार और मेट्रो कनेक्टिविटी का सुझाव दिया गया था। भोपाल स्थित राजा भोज एयरपोर्ट। ये सुझाव भी आए मीटिंग में हैदराबाद होते हुए चेन्नई, कोलकाता होते हुए बागडोगरा, लखनऊ होते हुए देहरादून, जयपुर होते हुए जम्मू और वाराणसी होते हुए अयोध्या जैसे व्यवहारिक रूट सुझाए गए थे। वहीं, राजा भोज एयरपोर्ट को “हेल्दी एयरपोर्ट” बनाने के लिए फ्रूट्स बार, पोहा स्टॉल और स्थानीय स्वाद को बढ़ावा देने का सुझाव मिला था। आगमन क्षेत्र के बाहर शौचालयों की स्वच्छता पर ध्यान दिलाया। एविएशन फ्यूल में राहत, एयरपोर्ट से शहर तक एसी बस सेवा, स्थानीय इतिहास, व्यंजन और पारंपरिक कारीगरी के प्रदर्शन के सुझाव रखे थे। कई विषयों पर पहले से सुझाव भी हुआ था। एयरलाइंस ऑपरेटर्स को मिलेगी राहत एयरपोर्ट प्रबंधन ने इसके लिए सभी एयरलाइंस ऑपरेटर्स से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल मांगे हैं. इन उड़ानों के लिए ऑपरेटर्स को वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जाएगा. इसमें घरेलू उड़ान के लिए 1 हजार रुपए प्रति किलोमीटर प्रति राउंड ट्रिप पर दिया जाएगा. यह अधिकतम 10 लाख तक होगा. अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए 1 हजार रुपए प्रति किलोमीटर प्रति राउंड ट्रिप होगा, जो अधिकतम 15 लाख रुपए तक होगा. 6 माह का सपोर्ट अतिरिक्त 6 माह तक और बढ़ाया जा सकेगा. राज्य शासन ने एयरलाइंस ऑपरेटर्स से 29 मई तक प्रपोजल मांगे हैं। मिलेगी शहर के विकास को गति उधर सरकार के इस फैसले को राजा भोपाल विमानतल सलाहकार समिति के सदस्य मनोज सिंह मीक ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा है कि "हाल ही में भोपाल सांसद आलोक शर्मा के नेतृत्व में हुई समिति की बैठक में बड़े शहरों के बीच उड़ान सेवाओं को जरूरी बताया गया था. शासन द्वारा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देने की पहल से एयरलाइंस को भोपाल जैसे केन्द्र से जुड़ने का ठोस आधार मिलेगा. भोपाल मध्य भारत का स्वाभाविक कनेक्टिविटी सेंटर है. बेहतर उड़ान सेवाएं पर्यटन, निवेश, उद्योग, शिक्षा, मेडिकल यात्रा, रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक और नॉलेज एंड एआई सिटी की संभावनाओं को गति मिलेगी।

हाईकोर्ट जज की अनोखी पहल: कार नहीं, साइकिल से पहुंचे अदालत; हर तरफ हो रही चर्चा

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस डी.डी. बंसल ने अपनी सादगी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का अनोखा उदाहरण पेश किया है। जस्टिस बंसल सरकारी वाहन छोड़ साइकिल से हाईकोर्ट पहुंचे, जिसे देखकर राहगीर से लेकर हाईकोर्ट परिसर तक हर कोई हैरान रह गया। आमतौर पर न्यायाधीशों के साथ प्रोटोकॉल और वाहनों का काफिला जुड़ा रहता है, लेकिन जस्टिस बंसल ने अलग संदेश देते हुए सादगीपूर्ण जीवनशैली को अपनाया। बताया जा रहा है कि जस्टिस बंसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण की अपील से प्रेरित हैं। पीएम मोदी लगातार ‘मिशन लाइफ’ के तहत पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने की बात करते रहे हैं। जस्टिस बंसल ने उसी संदेश को व्यवहार में उतारते हुए साइकिल से अदालत पहुंचकर लोगों को प्रदूषण कम करने और फिट रहने का संदेश दिया है। उनकी इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। जस्टिस बंसल की साइकिल यात्रा की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी उनकी जमकर सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि समाज के उच्च पदों पर बैठे लोग यदि इस तरह की पहल करेंगे तो आम जनता भी प्रेरित होगी। उनकी यह पहल उन लोगों के लिए भी संदेश मानी जा रही है जो छोटी दूरी के लिए भी वाहनों का उपयोग करते हैं। जज के साथ सुरक्षाकर्मी भी साइकिल पर सामान्य तौर पर हाई कोर्ट के जस्टिस का काफिला जब भी निकलता है तो ट्रैफिक रोक दिया जाता है. काफिले में जज साहब की गाड़ी के साथ पायलट भी चलता है. जबलपुर के सिविल लाइन इलाके में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में काम करने वाले सभी जज रहते हैं और सभी लोग सामान्य तौर पर अपनी कार से ही बंगले से हाई कोर्ट तक आते हैं. लेकिन मंगलवार सुबह का नजारा कुछ अलग था. जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल अपनी साइकिल पर बंगले से निकले और साइकिल से ही वह हाई कोर्ट पहुंचे. उनके साथ में उनके सुरक्षाकर्मी भी थे। सुबह रोजाना करते हैं साइकिलिंग जस्टिस डीडी बंसल ने बताया "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि लोग पेट्रोल का कम इस्तेमाल करें. इसलिए उन्होंने तय किया कि वह साइकिल से ही अपने बंगले से हाई कोर्ट तक जाएंगे. साइकिल चलाना उनके लिए कोई नई बात नहीं है. बचपन में भी साइकिल से ही स्कूल जाते थे. अभी भी डुमना रोड पर वह रोजाना साइकलिंग करते हैं. इसके साथ ही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा के साथ उन्होंने शहर के भीतर भी कई बार साइकिलिंग की है। तेज गर्मी के बावजूद असुविधा नहीं हुई जस्टिस डीडी बंसल का कहना है "ऐसा नहीं है कि हाई कोर्ट जज साइकिल से नहीं चल सकते. भले ही गर्मी है, थोड़ी सी परेशानी होती है लेकिन साइकिलिंग करना अच्छी बात है और उन्हें सिविल लाइन से हाई कोर्ट तक लगभग 3 किलोमीटर गर्मी में साइकिल चलाने में कोई असुविधा नहीं हुई." मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल ने जो उदाहरण पेश किया है, उसे दूसरे लोगों को भी अमल करना चाहिए. खासतौर पर अधिकारी-कर्मचारियों और नेताओं को, क्योंकि उनके राजनीतिक प्रशासनिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा ईंधन की बर्बादी होती है।

सादगी और पर्यावरण का संदेश: लाव-लश्कर छोड़ ई-रिक्शा में पहुंचे निगम अध्यक्ष

भोपाल इजराइल-ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक परिस्थितियों को देखते PM मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का संयमित उपयोग करने की अपील की है। जिसका असर अब स्थानीय तौर पर नजर आने लगा है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में नवनियुक्त अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण लाव लश्कर छोड़ ई रिक्शा से पदभार ग्रहण करने पहुंचे। उनकी सागदी की तस्वीरे अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।दरअसल, सत्येंद्र भूषण को मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में पदभार ग्रहण करने के लिए सत्येंद्र भूषण लग्जरी गाड़ियों की बजाय बैटरी चलित ई-रिक्शा से रवाना हुए। वे भोपाल के अवधपुरी स्थित अपने निजी आवास से ई-रिक्शा में सवार होकर भाजपा कार्यालय पहुंचे। हालांकि उनके साथ कई समर्थक गाड़ियों से पहुंचे। बता दें कि इससे पहले मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष BJP नेता सौभाग्य सिंह ठाकुर के पदभार ग्रहण को लेकर जमकर किरकिरी हुई थी। पीएम मोदी की अपील को दरकिनार करते हुए भौकाल जमाने के लिए सौभाग्य सिंह ने उज्जैन से भोपाल तक 700 गाड़ियों का लंबा काफिला निकाल दिया। जिसे लेकर सोशल मीडिया पर जमकर सवाल उठे और उनकी तस्वीरें वायरल हुई। कांग्रेस ने आरोप लगाए कि एक तरफ नरेंद्र मोदी देश को पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने का ज्ञान देते हैं, दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के नेता अपील की धज्जियां उड़ाते हैं।

जल संरक्षण में देवास का कमाल: मोरूखेड़ी ग्राम पंचायत ने शुरू की अनोखी पहल

सफलता की कहानी जल गंगा संवर्धन अभियान देवास जिले की ग्राम पंचायत मोरूखेड़ी ने पेश की जल संरक्षण की मिसाल 350 कंटूर ट्रेंच से लगभग 13 लाख लीटर वर्षा जल का किया जायेगा संचयन देवास देवास जिले में संचालित ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में विभिन्न जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। इसी क्रम में जनपद पंचायत देवास की ग्राम पंचायत मोरूखेड़ी ने जल संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय पहल करते हुए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। ग्राम पंचायत मोरूखेड़ी में जनभागीदारी से पंचायत क्षेत्र की पहाड़ी पर कंटूर ट्रेंच निर्माण कार्य किया गया है। लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्र में किए जा रहे इस कार्य के तहत कुल 350 कंटूर ट्रेंच बनाई गई हैं। इन ट्रेंचों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 13 लाख लीटर वर्षा जल का संचयन किया जा सकेगा। इसके अलावा ग्राम पंचायत में 03 पेरकोलेशन टैंक, 02 डगवेल, 05 रूफ वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 01 बोरिंग रिचार्ज एवं 02 चेक डेम का निर्माण भी किया गया है। इन संरचनाओं से लगभग 07 लाख लीटर जल का अतिरिक्त संचयन होगा। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के अंतर्गत निर्मित की जा रही इन संरचनाओं से वर्षा जल रुकने के साथ ही भू-जल स्तर में वृद्धि होगी। इससे क्षेत्र के आसपास के कुएं एवं बोरिंग पुनर्जीवित होंगे तथा ग्रामीणों को भविष्य में पेयजल और सिंचाई की समस्या से स्थायी राहत मिलने की संभावना है। ग्राम पंचायत मोरूखेड़ी की यह पहल जल संरक्षण एवं जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है।

महिला स्व-सहायता समूहों की सफलता: सीताफल से बढ़ी आमदनी

सफलता की कहानी सीताफल उत्पादन एवं प्रसंस्करण से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति में सुधार सिवनी जिला आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरा भोपाल  वर्तमान में मांगलिक आयोजनों, विशेषकर विवाह समारोहों में सीताफल से निर्मित व्यंजनों, जैसे सीताफल रबड़ी की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। इस बढ़ती मांग की पूर्ति के लिये ऑफ-सीज़न में भी सीताफल पल्प का प्रसंस्करण किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के सिवनी जिला में उत्पादित सीताफल ने स्थानीय स्तर पर महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन का प्रभावी माध्यम स्थापित किया है। पूर्व में आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में जीवन यापन कर रहीं महिलाओं की आय एवं जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है। आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में पहल सिवनी जिले के वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाले सीताफल के संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन का कार्य वर्तमान में स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित किया जा रहा है। छपारा विकासखंड के अंतर्गत खेरमटाकोल (भूतबंधानी) स्थित महादेव ग्राम संगठन की अध्यक्ष श्रीमती अभिलाषा ने बताया कि समूह से जुड़ने के पश्चात महिलाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध हुआ है। वे सीताफल की पैकिंग एवं विपणन के माध्यम से वार्षिक रूप से उल्लेखनीय आय अर्जित कर रही हैं। उत्पादों का विपणन स्थानीय बाजारों के साथ-साथ राज्य के प्रमुख शहरों एवं छत्तीसगढ़ तक किया जा रहा है। सिवनी जिले में उत्पादित सीताफल की गुणवत्ता एवं स्वाद के कारण इसकी मांग राष्ट्रीय स्तर, विशेषकर महानगरों में भी बढ़ रही है। वन क्षेत्रों में सीताफल पौधों के संरक्षण एवं रखरखाव का कार्य भी महिला समूहों द्वारा किया जा रहा है। आय के स्थायी स्रोत का सृजन बरोड़ा सिवनी विकासखंड के मां दुर्गा महिला आजीविका ग्राम संगठन की अध्यक्ष श्रीमती रामप्यारी ने बताया कि सीताफल आधारित गतिविधियों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है तथा वे प्रतिवर्ष एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। रोजगार सृजन एवं कौशल विकास आजीविका मिशन के अंतर्गत छपारा विकासखंड में 13 स्व-सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। प्रारंभिक चरण में 200 से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला। समूहों को विपणन, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग के माध्यम से उत्पादों को अन्य राज्यों तक सफलतापूर्वक भेजा जा रहा है। जिला परियोजना प्रबंधक श्री संजय रस्तोगी ने बताया कि सिवनी का सीताफल प्राकृतिक रूप से अत्यंत स्वादिष्ट एवं मीठा होता है। इस उत्पाद को “एक जिला एक उत्पाद” योजना में भी शामिल किया गया है, जिससे इसकी ब्रांड पहचान सुदृढ़ हुई है। सीताफल पल्प प्रसंस्करण की व्यवस्था बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सीताफल के गूदे (पल्प) का प्रसंस्करण एवं संरक्षण किया जा रहा है। जिले में स्थापित दो प्रसंस्करण इकाइयों में पल्प को निम्न तापमान पर संरक्षित कर वर्षभर उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। इससे बड़े आयोजनों एवं बाजार की मांग के अनुरूप निरंतर आपूर्ति संभव हो पाती है। आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर सिवनी एसआरएलएम भोपाल के राज्य परियोजना प्रबंधक (कृषि) श्री मनीष पंवार ने बताया कि सिवनी जिले की महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही हैं। अनुकूल जलवायु के कारण यहां उत्पादित सीताफल की गुणवत्ता उत्कृष्ट है, जिससे इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है। सिवनी जिला वर्तमान में आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है।  

उज्जैन जिले में जल संरक्षण और जनजागरूकता पर आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन

जल गंगा संवर्धन अभियान उज्जैन जिले में जल संरक्षण एवं जनजागरूकता के लिए आयोजित हुई विभिन्न प्रतियोगिताएं उज्जैन उज्जैन जिले में जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन के उद्देश्य से “जल गंगा संवर्धन अभियान 2026” का वृहद स्तर पर संचालन किया जा रहा है। शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय के मार्गदर्शन में जिले के शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों द्वारा विभिन्न जनजागरूकता एवं सामाजिक गतिविधियों का आयोजन कर विद्यार्थियों एवं आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अभियान से जल स्रोतों के संरक्षण, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण तथा भू-जल संवर्धन के प्रति सकारात्मक संदेश प्रसारित किया जा रहा है। शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय के नेतृत्व में “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” के अंतर्गत उज्जैन जिले के 15 शासकीय एवं 07 अशासकीय महाविद्यालयों में विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों में निबंध, पोस्टर, स्लोगन, वाद-विवाद, भाषण प्रतियोगिता, व्याख्यान तथा रैली शामिल थीं। इन कार्यक्रमों में 1866 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। अभियान अंतर्गत विद्यार्थियों एवं महाविद्यालयों द्वारा मानव श्रृंखला, रंगोली, वृक्षारोपण, तालाबों की सफाई, पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम तथा जल स्रोतों के संरक्षण जैसे रचनात्मक एवं सामाजिक कार्य भी किए गए। इसके माध्यम से जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। उज्जैन जिले के 13 महाविद्यालयों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध है। यह भू-जल स्तर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अतिरिक्त जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिले के 17 महाविद्यालयों द्वारा कार्य योजना तैयार की गई है, जिसके तहत 1086 वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना से पर्यावरण संरक्षण एवं जल संवर्धन को बढ़ावा दिया जाएगा। जल गंगा संवर्धन योजना के अंतर्गत आयोजित रैलियों में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा जल संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का पुरजोर प्रयास किया।  

UCC को लेकर MP में सक्रियता: जनसुनवाई जिलों में, दिल्ली में समिति की बैठक और आदिवासी प्रावधानों का मंथन

भोपाल  मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य सरकार द्वारा गठित समिति के गठन के बाद अब उसके कामकाज की रूपरेखा तैयार की जा रही है। समिति की अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई और अन्य सदस्यों की सेवा शर्तों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके साथ ही मंगलवार को दिल्ली में समिति की पहली बैठक आयोजित होने की संभावना है। सरकार प्रदेशभर में लोगों की राय जानने के लिए जिला स्तर और भोपाल में जनसुनवाई आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही एक विशेष वेबसाइट भी बनाई जा रही है, जहां नागरिक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। समिति का कार्यालय दिल्ली में स्थापित किए जाने की तैयारी है।   आदिवासी समुदाय को दायरे से बाहर रखने पर मंथन जानकारी के अनुसार, प्रदेश के आदिवासी समुदायों को यूसीसी के कुछ प्रावधानों से अलग रखने पर भी विचार किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में बड़ी आदिवासी आबादी निवास करती है और उनके पारंपरिक रीति-रिवाज व सामाजिक कानून लंबे समय से प्रचलित हैं। ऐसे में सरकार उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर आदिवासी परंपराओं को संरक्षित रखने के विकल्प पर मंथन कर रही है, ताकि किसी प्रकार का सामाजिक विवाद न उत्पन्न हो। यूसीसी के मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी विशेष प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। समिति को ऐसे संबंधों के पंजीयन, अधिकारों और जिम्मेदारियों पर सुझाव देने को कहा गया है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर उत्तराखंड और गुजरात की तुलना में अधिक सख्त रुख अपना सकती है।  

1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को मिलेगी 36वीं किश्त, CM यादव करेंगे अंतरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 13 मई को नरसिंहपुर से 1835 करोड़ की राशि का अंतरण 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को मिलेगी 36वीं किश्त नरसिंहपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 मई को मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सम्मान के लिये नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी करेंगे। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रूपये की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की जाएगी। लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान का आधार बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है, पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भूमिका मजबूत हुई है। योजना की शुरुआत से अब तक सशक्तिकरण की यात्रा निरंतर जारी वर्ष 2023 जून में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना में अप्रैल 2026 तक 35 मासिक किस्तों का सफलतापूर्वक अंतरण किया जा चुका है। मई 2026 में जारी की जा रही राशि योजना की 36वीं किश्त जारी होगी। जून 2023 से अप्रैल 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55,926.51 करोड़ रूपये की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है। राशि में क्रमिक वृद्धि: 1,000 से बढ़कर 1,500 रूपये प्रतिमाह योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रूपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रूपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रूपये प्रतिमाह कर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कम राशि प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त सहायता देकर कुल देय राशि सुनिश्चित की जा रही है। महिला कल्याण के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रूपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रूपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रूपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रूपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया व्यापक परिवर्तन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे उनमें वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्रामीण और शहरी महिलाओं के लिए समान रूप से उपयोगी योजना का लाभ ग्रामीण, आदिवासी, शहरी, कल्याणी, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाओं सहित व्यापक वर्ग को मिल रहा है। पात्र महिलाओं के सक्रिय और आधार-लिंक्ड बैंक खातों में राशि सीधे जमा होने से प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्वरित बनी है। राज्य सरकार ने विभिन्न विशेष अवसरों और त्योहारों पर अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर महिलाओं के जीवन में उत्साह और खुशियों का संचार किया है। इससे योजना केवल नियमित सहायता तक सीमित न रहकर भावनात्मक संबल का भी माध्यम बनी है।