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MP का नमकीन हुआ महंगा, 20-40 रुपए किलो बढ़े दाम, युद्ध और सप्लाई ठप होने से 80 देशों पर पड़ा असर

इंदौर  देश की नमकीन राजधानी माने जाने वाले इंदौर का नमकीन उद्योग इस समय दोहरी चुनौतियों से जूझ रहा है। एक ओर उत्पादन लागत में तेज़ बढ़ोतरी के कारण नमकीन के दाम 20 से 40 रुपए प्रति किलो तक बढ़ गए हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर दिख रहा।  इंदौर से रोजाना करीब 100 टन नमकीन देश-विदेश में भेजा जाता है। यह सप्लाई भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ 80 से अधिक देशों तक पहुंचती है। हालांकि मौजूदा हालात में घरेलू बिक्री (डोमेस्टिक सेल) के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय (इंटरनेशनल) कारोबार भी प्रभावित हुआ है। इंदौर नमकीन मिठाई महासंघ के सचिव अनुराग बोथरा के मुताबिक, लागत बढ़ने के कारण नमकीन की कीमतों में औसतन 20 रुपए प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है, जिससे ग्राहकी पर असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि पीएनजी गैस की सीमित उपलब्धता (करीब 60%) और मूंगफली तेल के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ी है। इसके अलावा पैकिंग मटेरियल के दाम में भी बड़ा उछाल आया है- जो पहले 190–195 रुपए प्रति किलो मिलता था, वह अब करीब 300 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। नमकीन उद्योग में इस्तेमाल होने वाली हींग की कीमतों में भी 5% से 15% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे लागत और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में इंदौर के नमकीन उद्योग को और बड़े आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। दाम आगे भी बढ़ने के संकेत इंदौर के नमकीन बाजार में कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इंदौर नमकीन मिठाई महासंघ के सचिव अनुराग बोथरा ने बताया कि अभी जो दाम बढ़ाए गए हैं, वे सालभर स्थिर रहेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है। मौजूदा युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं। उनका कहना है कि अगले 10 दिनों में क्या स्थिति होगी, इसका भी अनुमान लगाना मुश्किल है। 40 रुपए किलो तक की बढ़ोतरी नमकीन व्यापारी हीतेश जैन के मुताबिक, सामान्य नमकीन जो पहले 260 से 280 रुपए प्रति किलो मिलता था, अब 280 से 300 रुपए प्रति किलो हो गया है। वहीं प्रीमियम नमकीन 280–300 रुपए से बढ़कर 300 से 340 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। एक्स्ट्रा प्रीमियम नमकीन, जिसमें ड्रायफ्रूट्स का उपयोग होता है, उसमें करीब 40 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि मूंगफली तेल, मिर्च-मसाले और पैकिंग सामग्री महंगी होने के कारण लगभग 20 रुपए प्रति किलो तक कीमत बढ़ानी पड़ी है। विदेश पहुंचने का समय दोगुना हुआ इंदौर में सेंव की खपत भी काफी अधिक है। शहर में रोजाना करीब 45 टन सेंव की खपत होती है। संगठित क्षेत्र के कारखानों में प्रतिदिन 30 टन सेंव तैयार होती है, जिसमें से 15 टन शहर में खपती है, जबकि असंगठित क्षेत्र के छोटे कारोबारी करीब 30 टन सेंव का उत्पादन कर स्थानीय मांग पूरी करते हैं। वैश्विक हालात का असर निर्यात पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पहले इंदौर से दुबई या ओमान तक नमकीन पहुंचने में करीब 30 दिन लगते थे, लेकिन अब सुरक्षित मार्गों से भेजने पर 60 दिन तक का समय लग रहा है, जिससे लॉजिस्टिक लागत दोगुनी हो गई है। इसी तरह यूएसए और कनाडा में पहले 40–45 दिन में पहुंचने वाला माल अब 90 दिन तक ले रहा है। खाड़ी देशों के लिए सप्लाई फिलहाल पूरी तरह से प्रभावित है। निर्यातकों के अनुसार 40 से 50 कंटेनर रास्ते में फंसे हुए हैं, जिससे उत्पादन और सप्लाई समय 25–30 दिन से बढ़कर 50–60 दिन हो गया है और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।

MP में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 19 जिलों के SP होंगे बदले, IPS ट्रांसफर लिस्ट लगभग तैयार

भोपाल  मध्य प्रदेश पुलिस महकमे में जल्द ही बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स और विभागीय हलचलों के अनुसार राज्य में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के तबादलों की व्यापक सूची लगभग तैयार हो चुकी है, जिसके तहत करीब 25 आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर होने की संभावना जताई जा रही है। इनमें लगभग 19 से 20 जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) में बदलाव प्रस्तावित बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों के कार्य प्रदर्शन को लेकर वरिष्ठ स्तर पर असंतोष की स्थिति बनी हुई थी। वहीं कुछ अधिकारियों के खिलाफ संगठन स्तर पर लगातार शिकायतें भी प्राप्त हो रही थीं। इसके अलावा कुछ जिलों में तैनात पुलिस अधीक्षकों के प्रमोशन के चलते भी पद रिक्त होने की स्थिति बन रही है, जिसके कारण यह व्यापक फेरबदल आवश्यक माना जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शाजापुर, शिवपुरी, डिंडौरी, मंडला, छतरपुर, बुरहानपुर, निवाड़ी और नीमच जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षकों के बदलाव लगभग तय माने जा रहे हैं। इसके साथ ही दमोह, सिवनी, आगर मालवा, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में भी बदलाव की चर्चा तेज है, हालांकि यहां नए नामों पर अंतिम निर्णय अभी लंबित बताया जा रहा है। इसके अलावा खंडवा के एसपी मनोज राय, एसपी रेल भोपाल राहुल लोढ़ा, एसपी रेल जबलपुर सिमाला प्रसाद, भिंड के एसपी असित यादव, धार के एसपी मयंक अवस्थी, रीवा के एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान, डीसीपी भोपाल विवेक सिंह, डीसीपी इंदौर कुमार प्रतीक तथा झाबुआ के एसपी डॉ. शिवदयाल के प्रमोशन के बाद इन पदों पर भी नए अधिकारियों की तैनाती तय मानी जा रही है। प्रशासनिक हलकों में इस संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि नई सूची जारी होने के बाद कई जिलों में पुलिस नेतृत्व में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जिसका सीधा असर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार या पुलिस मुख्यालय की ओर से आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन विभागीय स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में बताई जा रही हैं।

एमपी में 345 विधायक और 45 सांसद, 33% महिला आरक्षण लागू होने से सत्ता के समीकरण में होगा बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश के चुनावी परिदृश्य में एक ऐसा बड़ा बदलाव आने वाला है, जो अगले कई दशकों की राजनीति को नई दिशा देगा। 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में प्रस्तावित 33% महिला आरक्षण और परिसीमन बिल (131वां संविधान संशोधन) पेश होने जा रहा है। इस मास्टर प्लान के लागू होने से मध्य प्रदेश में न केवल महिला प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, बल्कि विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी होगी। विधानसभा में होंगी 114 महिलाएं प्रस्तावित बदलावों के तहत, मध्य प्रदेश विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 230 से बढ़ाकर 345 किए जाने की योजना है। इस विस्तारित सदन में महिलाओं के लिए 114 सीटें आरक्षित होंगी, जो वर्तमान में मात्र 27 महिला विधायकों की तुलना में एक बड़ी छलांग है।सीटों की संख्या बढ़ने के साथ ही सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़े में भी बदलाव आएगा। अब राज्य में बहुमत साबित करने के लिए 116 के बजाय 174 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। यह बदलाव न केवल छोटे दलों की भूमिका को प्रभावित करेगा, बल्कि बड़े दलों को भी अपनी चुनावी रणनीति नए सिरे से तैयार करने पर मजबूर करेगा। कैबिनेट का भी होगा विस्तार परिसीमन का असर सिर्फ सदन की सीटों तक सीमित नहीं रहेगा। नियमों के मुताबिक, विधानसभा की कुल संख्या का 15% हिस्सा मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। ऐसे में प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों की अधिकतम संख्या 35 से बढ़कर 52 हो जाएगी। यानी आने वाले समय में मध्य प्रदेश में मंत्रियों की एक बड़ी फौज नजर आएगी। लोकसभा के मोर्चे पर भी एमपी की ताकत बढ़ेगी। राज्य से लोकसभा सांसदों की संख्या 29 से बढ़कर 43 करने का प्रस्ताव है। इनमें महिला सांसदों की संख्या भी मौजूदा 6 से बढ़कर 14 होने की उम्मीद है। यह पूरा ढांचा 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों से प्रभावी होने की संभावना है। विधानसभा सीटें 230 345 +115 बहुमत का आंकड़ा 116 174 +58 महिला विधायक (आरक्षित) 27 (अनुमानित) 114 ऐतिहासिक वृद्धि लोकसभा सीटें 29 43 +14 मंत्री परिषद की क्षमता 35 52 तक +17

नारी वंदन को मिशन-2029 में सोशल क्रांति बनाने की रणनीति, MP भाजपा का बड़ा कदम

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी की कोर कमेटी की बैठक  में जिसमें संगठनात्मक मजबूती, आगामी कार्यक्रमों और खास तौर पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर चर्चा हुई। भारतीय जनता पार्टी इस कानून को वर्ष 2029 के चुनावों में बड़ा “गेम चेंजर” बनाने की दिशा में काम कर रही है। पहली बैठक को औपचारिक माना गया, लेकिन इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। मंडल स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग पहले ही पूरे किए जा चुके हैं और अब जिला व प्रदेश स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विस्तार दिया जाएगा। ताकि संगठन को और मजबूत किया जा सके।  बैठक में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। नेताओं का मानना है कि सरकार की योजनाओं और पार्टी के कार्यक्रमों के बीच तालमेल मजबूत होगा, तो उसका सीधा लाभ जनता तक पहुंचेगा। इस दौरान यह रणनीति भी बनी कि विधायक और सांसद नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के सशक्तिकरण के बड़े कदम के रूप में जनता के बीच प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करेंगे। पार्टी इसे केवल एक कानून के रूप में नहीं, बल्कि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में मजबूत करने वाले ऐतिहासिक फैसले के रूप में प्रचारित करने की तैयारी में है। ताकि आने वाले चुनावों में पार्टी को उसका लाभ मिले।   भाजपा का मानना है कि महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान गेम-चेंजर साबित होगा। इसे केवल एक कानूनी उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति के रूप में जनता के बीच ले जाया जाएगा। सरकार अपनी योजनाओं के जरिए और संगठन अपने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के जरिए हर घर तक यह संदेश पहुंचाएगा कि भाजपा ही महिलाओं की सच्ची हितैषी है। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता के जरिए भेदभाव दूर करने का संदेश घर-घर पहुंचाया जाएगा। कोर ग्रुप की यह पहली बैठक थी। इससे पहले आठ सदस्यीय छोटी टोली संगठन ने सत्ता-संगठन में समन्वय के लिए बनाई गई थी। इसके बाद 20 सदस्यों का कोर ग्रुप बनाया गया है। बैठक में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा, प्रदेश प्रभारी डा महेंद्र सिंह, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मंत्री राकेश सिंह, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल एवं अजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व लोकसभा सदस्य विष्णुदत्त शर्मा, मंत्री संपतिया उइके, लता वानखेड़े, डा नरोत्तम मिश्रा, अरविंद भदौरिया और फग्गन सिंह कुलस्ते उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान बिहार में भाजपा विधायक दल की बैठक के चलते इसमें शामिल नहीं हो सके। साझा अभियान के प्रमुख कार्यक्रम     जन-जागरण पखवाड़ा: मध्य प्रदेश में 25 अप्रैल 2026 तक एक विशेष पखवाड़ा मनाया जाएगा, जिसमें महिलाओं को उनके राजनीतिक अधिकारों जैसे 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।     नारी शक्ति पदयात्रा: आगामी 15 और 16 अप्रैल को प्रदेश के हर लोकसभा क्षेत्र में 'नारी शक्ति पदयात्रा' निकाली जाएगी। इसके साथ ही महिला कार्यकर्ताओं द्वारा बाइक रैलियों का आयोजन भी किया जाएगा।     सम्मेलन और टाउन हाल: प्रदेश भर में टाउन हॉल कार्यक्रम और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं (जैसे लाड़ली बहना योजना) और आरक्षण कानून के लाभ बताए जाएंगे। संगठनात्मक तालमेल: सभी मंत्री और पार्टी पदाधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर महिलाओं से सीधा संवाद करेंगे। मिस्ड काल अभियान: अभियान के समर्थन में जनमत जुटाने के लिए एक मिस्ड काल नंबर भी जारी किया गया है, जिसके जरिए लोग इस कानून के प्रति अपनी सहमति दर्ज करा सकते हैं। प्रशिक्षण महा अभियान की भी समीक्षा की कोर ग्रुप की बैठक में भाजपा द्वारा चलाए गए पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महा अभियान की भी समीक्षा की गई। मंडल स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग संपन्न हो चुके हैं, अब जिले और प्रदेश स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। कहां कितना काम हुआ इसकी रिपोर्ट कोर ग्रुप की बैठक में रखी गई। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल व क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया।

इंदौर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री में अव्वल, 21% राजस्व का योगदान अकेले इंदौर का

इंदौर  पंजीयन विभाग के 2025-26 के राजस्व आंकड़ों के अनुसार इंदौर जिले ने एक बार फिर पूरे प्रदेश में सबसे अधिक कमाई कर अपना दबदबा कायम रखा है। इंदौर ने पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा राजस्व अर्जित किया है। यहां कुल 2673.44 करोड़ की आय हुई है। वहीं भोपाल दूसरे, ग्वालियर तीसरे, जबलपुर चौथे और उज्जैन पांचवें स्थान पर रहा। भोपाल 1903.67, ग्वालियर 852.92 करोड़, जबलपुर 772.25 करोड़, उज्जैन 440.50 करोड़ की आय दे पाए हैं, जबकि इंदौर के महू नाका कार्यालय ने प्रदेश में चौथे नंबर पर कमाई दर्ज कराई है। इंदौर जिले के चारों कार्यालय इस बार भी प्रदेश में शीर्ष पर रहे। मोती तबेला स्थित पंजीयन कार्यालय ने 614.69 करोड़, ढक्कनवाला कुआं स्थित पंजीयन कार्यालय ने 674.06 करोड़, विजयनगर स्थित पंजीयन कार्यालय ने 756.98 करोड़, जबकि महू नाका स्थित पंजीयन कार्यालय ने 627.71 करोड़ रुपए की कमाई की। कुल मिलाकर इंदौर जिले का संयुक्त राजस्व 2673.44 करोड़ रुपए रहा, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। उधर, भोपाल-1 कार्यालय की 481.37 करोड़ रुपए, भोपाल-2 की 997.22 करोड़ रुपए, भोपाल-3 कार्यालय की कमाई 425.08 करोड़ रुपए दर्ज की गई। जबकि ग्वालियर जिले के दोनों कार्यालयों ने क्रमश: 396.58 करोड़ और 456.34 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाया। जबलपुर जिले में जबलपुर के दोनों कार्यालयों ने क्रमश: 371.36 करोड़ और 400.89 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया, जबकि सिंहस्थ के कारण उज्जैन से जो उम्मीद की जा रही थी वह पूरी नहीं हो सकी। इस वर्ष उज्जैन जिले ने मात्र 440.50 करोड़ रुपए की कमाई की। इंदौर ने रिकॉर्ड बनाया दरअसल, इंदौर ने पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 215.7 करोड़ रुपये अधिक राजस्व जुटाया है। वर्ष 2024-25 में जहां यह आंकड़ा 2528 करोड़ रुपये था, वहीं इस बार यह बढ़कर 2743.7 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह वृद्धि शहर में तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट कारोबार और निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। दस्तावेज पंजीयन के मामले में भी इंदौर ने रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2025-26 में जिले में एक लाख 91 हजार 400 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 5124 अधिक हैं। वरिष्ठ जिला पंजीयक अमरेश नायडू के अनुसार इंदौर में संपत्ति बाजार लगातार विस्तार कर रहा है और आने वाले समय में यह आंकड़े और भी ऊंचाई छू सकते हैं। प्रदेश के प्रमुख चार शहरों का राजस्व     इंदौर – 2743.7 करोड     भोपाल – 1943.64 करोड़     ग्वालियर – 870.9 करोड़     जबलपुर – 789.7 करोड़ मार्च में सर्वाधिक राजस्व इंदौर जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में सर्वाधिक राजस्व मार्च माह में 537.09 करोड़ रुपये जुटाया गया। इसी माह में सर्वाधिक 29086 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। दिसंबर माह में भी पंजीयन कार्यालय द्वारा 17441 दस्तावेज पंजीकृत किए गए और 238.28 करोड़ रुपये राजस्व जुटाया गया। सबसे कम राजस्व अप्रैल माह में 114.48 करोड़ रुपये राजस्व जमा हुआ और 7944 दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। विजयनगर क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन इंदौर जिले में सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन विजयनगर स्थित पंजीयन कार्यालय ने किया। आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र ने लक्ष्य के विरुद्ध 90.83 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की। यह प्रदर्शन न केवल जिले के भीतर सर्वोच्च रहा, बल्कि प्रदेशभर के कई बड़े कार्यालयों से भी बेहतर साबित हुआ। वर्ष-दर-वर्ष तुलना में भी इस कार्यालय की वृद्धि दर 11.63 प्रतिशत रही। यह आकड़े दर्शाते हैं कि जिले में संपत्ति पंजीयन की गतिविधियां तेज हुई हैं और बाजार की स्थिति में भी सुधार हुआ है। वर्ष 2024-25 में कार्यालय ने 677.75 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया था, जबकि वर्ष 2025-26 में यह बढक़र 756.98 करोड़ रुपए पहुंच गया। क्षेत्र में संपत्ति के पंजीयन, क्रय-विक्रय और वाणिज्यिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इंदौर-महूनाका ने भी दिखाया दम महू नाका स्थित पंजीयन कार्यालय ने लक्ष्य के 81.85 प्रतिशत के टारगेट को पूरा किया है। महू नाका क्षेत्र ने सबसे अधिक राजस्व में बढ़ोतरी करते हुए इंदौर को पहले पायदान पर खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। 22.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी से इस क्षेत्र ने पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की, जिसने जिले की रैंकिंग को ऊपर बनाए रखने में भूमिका निभाई। मोती तबेला स्थित कार्यालय लक्ष्य का केवल 61.41 प्रतिशत ही हासिल कर पाया। इंदौर-2 कार्यालय मार्च में 79.85 प्रतिशत का लक्ष्य पूरा कर पाया। पिछले वर्ष की तुलना में 2.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं ढक्कनवाला कुआं स्थित पंजीयन कार्यालय ने धीमी, लेकिन संतुलित प्रगति हासिल की। किसने पिछले वर्ष के मुकाबले कम कमाई की आंकड़ों के अनुसार कुल 4 कार्यालयों में पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व में गिरावट दर्ज हुई। इन कार्यालयों ने कम कमाई की- ग्वालियर-1 ने माइनस 1.96% ,ग्वालियर-2 ने माइनस 2.17% इंदौर-1 में माइनस 6.10% व उज्जैन भी 9.69 प्रतिशत कमी की सूची में सबसे निचले पायदान पर है। यहां सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है। उज्जैन ने 102 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध केवल 61.85त्न प्राप्त किया और सबसे अधिक 9.69 प्रतिशत की कमी दर्ज की।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा में सांदीपनि विद्यालयों के विकास कार्यों एवं प्रस्तावों की समीक्षा की

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा जिले में संचालित एवं प्रस्तावित सांदीपनि विद्यालयों के विकास कार्यों एवं प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सांदीपनि विद्यालय (पीके कन्या) रीवा में प्रस्तावित विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक एवं तकनीकी समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए, जिससे विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने वित्त सचिव लोकेश जाटव से चर्चा कर प्रस्ताव पर आवश्यक वित्तीय स्वीकृति के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा के सगरा एवं पांडे टोला में प्रस्तावित सांदीपनि विद्यालयों की स्वीकृति के लिए की जा रही कार्यवाही की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि दोनों स्थलों के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए भेज दिए गए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वीकृति मिलते ही आवश्यक अधोसंरचना विकास कार्य शीघ्र प्रारंभ किए जाएं, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। बैठक में प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा संजय गोयल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

झाबुआ के बोर्ड परिणामों में शानदार प्रदर्शन पर महिला बाल विकास मंत्री भूरिया ने दी बधाई

भोपाल.  मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित कक्षा 10वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणामों में झाबुआ जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पूरे प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हायर सेकेंडरी परीक्षा में प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल करने के साथ ही हाई स्कूल में शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाकर जिले ने सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस उपलब्धि पर महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिले के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने इसे “झाबुआ के बदलाव की नई इबारत” बताते हुए कहा कि यह सफलता आदिवासी अंचल में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और कड़ी मेहनत का परिणाम है। मंत्री भूरिया ने अपने संदेश में कहा कि झाबुआ के विद्यार्थियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती। सीमित साधनों के बावजूद विद्यार्थियों ने जिस समर्पण और परिश्रम से यह मुकाम हासिल किया है, वह सराहनीय है। उन्होंने शिक्षकों के योगदान की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और प्रतिबद्धता ने बच्चों को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता को निरंतर बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। भविष्य में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को और सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे जिले के विद्यार्थी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहरा सकें। मंत्री भूरिया ने उन विद्यार्थियों का भी हौसला बढ़ाया जो इस बार सफलता प्राप्त नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि परीक्षा के अंक जीवन का अंतिम पैमाना नहीं होते। असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से सकारात्मक सोच के साथ पुनः प्रयास करने का आह्वान किया।  

शहरी निकायों के विकास की गति देने के लिए दो दिवसीय कार्यशाला कल से

भोपाल.  प्रदेश के शहरी निकायों के विकास की गति को तेज करना और उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय 16 अप्रैल, गुरुवार को भौरी स्थित सुंदरलाल पटवा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन मैनेजमेंट (SPNIUM) में दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस कार्यशाला का प्राथमिक लक्ष्य नगरीय निकायों में राजस्व संवर्धन, शहरी सुधारों और सतत् वित्तीय प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर विचार-विमर्श करना है। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे कार्यशाला में विभागीय सुधारों पर अपना मार्गदर्शन  प्रदान करेंगे। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कार्यक्रम की रूपरेखा के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि 16 और 17 अप्रैल को आयोजित होने वाली कार्यशाला के दौरान मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए विषय विशेषज्ञ, अनुभवी अधिकारी और शहरी नियोजन के जानकार अपने नवाचारों और अनुभवों को साझा करेंगे। यह आयोजन प्रदेश के नगरीय निकायों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक प्रभावी मंच सिद्ध होगा। कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में शहरी सुधार से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इसमें मुख्य रूप से निकायों की खाली भूमि के आर्थिक उपयोग (लैंड मोनेटाइजेशन), शोधित जल (ट्रीटेड वाटर) के पुन: उपयोग की संभावनाओं, संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) संग्रहण में सुधार और लीज रेंट जैसे विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही, कार्यप्रणाली में आधुनिकता और पारदर्शिता लाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) आधारित टूल्स, जैसे यूसीएफ, एईबीएएस और स्पैरो के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जाएगी, ताकि प्रशासनिक कार्यों को और अधिक सुगम और उत्तरदायी बनाया जा सके। कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण विभिन्न नगर निकायों द्वारा सफलतापूर्वक अपनाई जा रही सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों (Best Practices) का आदान-प्रदान होगा। इसके माध्यम से अन्य निकायों को सफल आर्थिक और प्रशासनिक मॉडलों को समझने और उन्हें अपने स्थानीय स्तर पर लागू करने में मदद मिलेगी। इससे न केवल निकायों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि शहरी विकास की परियोजनाओं को भी नई ऊर्जा मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संवाद से स्थानीय निकायों के राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में मध्यप्रदेश के उन सभी नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे जिनकी जनसंख्या एक लाख से अधिक है। इसके साथ ही, विभाग के नवनियुक्त मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMOs) को भी इस आयोजन का हिस्सा बनाया गया है, ताकि वे अपने सेवा काल के शुरुआती दौर में ही शहरी प्रबंधन की आधुनिक बारीकियों और वित्तीय अनुशासन से परिचित हो सकें। यह कार्यशाला प्रदेश के शहरी नियोजन को एक नई ऊंचाई पर ले जाने और 'आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक सार्थक कदम साबित होगी।

प्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बनेगा देश का अग्रणी राज्य : मंत्री शुक्ला

भोपाल.  नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश में उल्लेखनीय कार्य हो रहा है। प्रदेश जल्द ही सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा। मंत्री शुक्ला ने रेस्को की विकासक इकाइयों को बेहतर गुणवत्तापूर्ण कार्य निर्धारित समय-सीमा में करने के निर्देश दिये। मंत्रालय में बुधवार को मंत्री शुक्ला की उपस्थिति में "प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना'' अंतर्गत प्रदेश में शासकीय भवनों की छतों पर रेस्को पद्धति के माध्यम से सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाने के लिये शासकीय संस्थाओं और रेस्को विकासक इकाइयों के बीच विद्युत क्रय अनुबंध (एमओयू) हुए। मंत्री शुक्ला ने बताया कि पुलिस, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा जेल विभाग के शासकीय भवनों में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापना के लिये शासकीय संस्थाओं एवं रेस्को विकासक इकाइयों के बीच हुए विद्युत क्रय अनुबंध में विभिन्न कार्य सम्पादित किये जायेंगे। पुलिस विभाग के स्पेशल ब्रांच पुलिस ट्रेनिंग सेंटर, श्यामला हिल्स (हुजूर) में 185 किलोवॉट, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत जिला चिकित्सालय बैरागढ़ में 100 किलोवॉट तथा जेल विभाग के अंतर्गत न्यू सेंट्रल जेल में 370 किलोवॉट क्षमता के सोलर रूफटॉप संयंत्र रेस्को मोड में स्थापित किए जाएंगे। मंत्री शुक्ला ने बताया कि इन परियोजनाओं के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम, होराइजन रेस्को एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड एवं संबंधित हितग्राही संस्थाओं के बीच विद्युत क्रय अनुबंध हुए हैं। विद्युत क्रय अनुबंधों पर पुलिस विभाग की ओर से उप पुलिस अधीक्षक अमिताभ श्रीवास्तव, स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी जे.के. जैन तथा जेल विभाग की ओर से जेल अधीक्षक राकेश कुमार द्वारा हस्ताक्षर किये। रेस्को पद्धति के अंतर्गत संयंत्र की स्थापना एवं 25 वर्षों तक उसका संचालन एवं रख-रखाव पूर्णतः रेस्को विकासक इकाई द्वारा किया जाता है। इस अवधि में संयंत्र की वारंटी भी विकासक इकाई के पास रहती है। इस मॉडल की विशेषता यह है कि शासन को संयंत्र स्थापना के लिये कोई प्रारंभिक व्यय नहीं करना पड़ता। शासकीय कार्यालयों द्वारा उपयोग की गई ऊर्जा के लिए प्रति यूनिट निर्धारित दर से भुगतान किया जाता है। भोपाल जिले में यह दर ₹3.78 प्रति यूनिट निर्धारित है। निवेश शून्य, बचत पहले दिन से मंत्री शुक्ला ने बताया कि शासकीय संस्थान “शून्य निवेश, पहले दिन से बचत एवं नेट-जीरो की दिशा में अग्रसर” की अवधारणा को साकार कर सकेंगे। संयंत्र स्थापना का कार्य निविदा प्रक्रिया के माध्यम से चयनित रेस्को विकासक इकाइयों द्वारा किया जा रहा है। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा प्रदेश के शासकीय भवनों को रेस्को मोड में सौर ऊर्जा से आच्छादित करने के लिये “एक जिला-एक रेस्को” की तर्ज पर 55 जिलों के लिए 48 मेगावॉट क्षमता के लगभग 1300 शासकीय भवनों के लिये जिलेवार निविदाएं जारी की गई थीं। इस प्रक्रिया में 13 विकासकों का सफलतापूर्वक चयन कर 47 जिलों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। मंत्री शुक्ला ने बताया कि निविदा प्रक्रिया में न्यूनतम दर इंदौर जिले के लिए ₹3.40 प्रति यूनिट, ग्वालियर जिले के लिए ₹3.49 प्रति यूनिट, भोपाल जिले के लिए ₹3.78 प्रति यूनिट, उज्जैन जिले के लिए ₹3.97 प्रति यूनिट तथा अधिकतम ₹4.01 प्रति यूनिट की दर प्राप्त हुई है। इस योजना के प्रभावी एवं दक्षतापूर्ण क्रियान्वयन से प्रदेश निश्चित ही सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान स्थापित करेगा।  

छात्र-आश्रमों में अनुशासन और राष्ट्रभक्ति को बढ़ावा देने मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए निर्देश

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों और आश्रमों में अध्ययनशीलता और देशभक्ति के सकारात्मक वातावरण को प्रोत्साहित किया जाए। छात्रावासों और आश्रमों के प्रबंधन में जन अभियान परिषद और गायत्री परिवार जैसी संस्थाओं से भी सहयोग लिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को जनजातीय कार्य विभाग की मंत्रालय में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह वर्चुअल शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छात्रावासों और आश्रमों में खाना बनाने, सफाई और सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाए। छात्रावासों के संवेदनशील प्रबंधन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और मॉनिटरिंग की व्यवस्था हो। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग के लगभग 3000 आश्रम/ छात्रावास और अनुसूचित जाति विकास विभाग के लगभग 2000 आश्रम/ छात्रावास संचालित हैं। मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य विभाग गुलशन बामरा तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।