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ग्वालियर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अल्पसंख्यक संस्थान तय करेंगे प्राचार्य, सरकार नहीं लगा सकेगी नियम

ग्वालियर  ग्वालियर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगल पीठ ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अधिकारों को लेकर अहम और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों को अपने प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य के चयन का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है। राज्य सरकार इन संस्थानों पर वरिष्ठता आधारित नियम लागू करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। सुनवाई के दौरान पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान में प्राचार्य की भूमिका केंद्रीय होती है, जो अनुशासन, प्रशासन और शिक्षा की गुणवत्ता को निर्धारित करता है। ऐसे में संस्थान को यह स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वह अपनी आवश्यकता और योग्यता के आधार पर नेतृत्व का चयन करे, भले ही वह व्यक्ति वरिष्ठतम न हो। कोर्ट ने 25 अगस्त 2021 और 8 सितंबर 2021 को जारी उन सरकारी सर्कुलरों को अल्पसंख्यक संस्थानों पर लागू होने के मामले में निरस्त कर दिया, जिनमें वरिष्ठतम शिक्षक को ही प्रभारी बनाने का प्रावधान था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि एक बार प्रबंधन द्वारा किसी योग्य व्यक्ति का चयन कर लिया जाए, तो उसकी उपयुक्तता पर सरकार या न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेंगे। विदिशा से ग्वालियर तक की कानूनी जंग वरिष्ठ अधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी के मुताबिक, यह मामला विदिशा स्थित एसएसएल जैन पीजी कॉलेज से शुरू हुआ। कॉलेज की तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य डॉ. शोभा जैन के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रबंधन समिति ने डॉ. एसके उपाध्याय को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया। हालांकि, शासन के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक ने इस फैसले को निरस्त करते हुए वरिष्ठता के आधार पर डॉ. अर्चना जैन को प्रभार सौंपने का आदेश जारी कर दिया। प्रबंधन ने इसे अपनी स्वायत्तता में हस्तक्षेप मानते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी। शुरुआत में सिंगल बेंच ने शासन के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन अब ग्वालियर की युगल पीठ ने उस आदेश को पूरी तरह पलटते हुए प्रबंधन के अधिकार को सही ठहराया।

हाईकोर्ट ने खारिज किया केस: सगी बहनें पतियों का आदान-प्रदान करना चाहती थीं, बड़ी बहन को हुआ छोटी के पति से प्यार

ग्वालियर एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर सभी लोग हैरान हैं। ये मामला दो बहनों का है, जो आपस में अपनी पतियां बदलना चाहती हैं। बड़ी बहन को छोटी बहन के पति से प्यार हो गया है। वहीं, छोटी का दिल भी अपने जीजा पर आ गया है। इसके बाद यह मामला पूरी तरह से उलझ गया है। दतिया निवासी ने लगाई थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दरअसल, दतिया के रहने वाले गिरिजा शंकर ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मायाराम नाम के व्यक्ति ने मेरी पत्नी और बेटी को बंधक बना रखा है। इसके बाद हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए कि महिला को कोर्ट में पेश किया जाए। महिला की एंट्री से केस में ट्विस्ट वहीं, एमपी हाईकोर्ट के निर्देश पर महिला कोर्ट में पेश हुई है। इसके बाद पूरे मामले में ट्विस्ट आ गया। महिला ने कोर्टरूम में कहा कि उसका अपहरण नहीं हुआ है। मैं अपनी मर्जी से मायाराम के साथ गई हूं। मायाराम महिला की छोटी बहन का पति है। साथ ही महिला ने कहा कि हमने अपने पति से तलाक के लिए याचिका लगा रखी है। छोटी बहन ने नहीं जताई आपत्ति यह मामला सुनवाई के दौरान तब और दिलचस्प हो गया, जब मायाराम की पत्नी और उस महिला की छोटी बहन ने कोई आपत्ति नहीं जताई। उसने कह दिया कि हमारी बड़ी बहन हमारे पति के साथ रहना चाहती है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मुझे भी अपने जीजा के साथ रहने की अनुमति दें। अपने-अपने पतियों के साथ नहीं रहना चाहती हैं महिलाएं     ग्वालियर हाईकोर्ट में हैरान करने वाला मामला सामने आया     दो सगी बहनें आपस में बदलना चाहती हैं पति     दोनों को एक-दूसरे के पति से हो गया है प्यार     हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज वैवाहिक जीवन से संतुष्ट नहीं हैं दोनों बताया जा रहा है कि दोनों बहनें अपनी शादीशुदा जिंदगी से संतुष्ट नहीं हैं। दोनों सहमति और मर्जी से एक-दूसरे के पति के साथ वैवाहिक जीवन शुरू करना चाहती हैं। वहीं, दोनों बहनों के बच्चे भी हैं लेकिन बच्चे को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज वहीं, दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही कह दिया है कि यह अपहरण का मामला नहीं है। यह पूरी तरह से पारिवारिक विवाद का मामला है। दोनों महिलाएं बालिग हैं, अपनी मर्जी से फैसला ले रही हैं।

भोपाल में जीएसटी नियमों में बदलाव: मालवाहक वाहन को अब सिर्फ नंबर या नाम पर नहीं रोका जाएगा, जानकारी देना जरूरी

भोपाल मध्यप्रदेश में अब व्यापारियों के माल से भरे वाहनों को मनमाने ढंग से रोकना आसान नहीं होगा। कमर्शियल टैक्स विभाग ने नया सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि जीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई का अधिकार मुख्य रूप से उसी विभाग के पास रहेगा।मध्यप्रदेश में जीएसटी ऑडिट की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए वाणिज्यिक कर विभाग ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू की है। अब ऑडिट के दौरान अधिकारी बार-बार डॉक्यूमेंट नहीं मांगेंगे। एक बार में ही पूरी सूची देंगे। इसके अलावा व्यापारियों को जवाब देने के लिए 29 दिन का समय मिलेगा। जानकारी न देने पर लगेगा जुर्माना नई व्यवस्था के मुताबिक अधिकारी व्यापारियों को पहले 15 दिन का समय देंगे। इसके बाद सात-सात दिन के दो रिमाइंडर भेजे जाएंगे। तय समय में जानकारी नहीं दी गई तो राज्य और केंद्रीय जीएसटी नियमों के तहत 10-10 हजार रुपए, यानी कुल 20 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। विभाग का कहना है कि समय पर जानकारी न मिलने से राजस्व संग्रह और ऑडिट प्रक्रिया पर असर पड़ता है। गलत जानकारी पर लाइसेंस रद्द 01 मई 2026 से विभाग उन व्यापारियों की जांच शुरू करेगा जो लंबे समय से एक जैसा टर्नओवर दिखा रहे हैं। एक करोड़ 25 लाख से एक करोड़ 50 लाख रुपए तक के टर्नओवर वाले माल व्यापारी और 35 से 50 लाख रुपए के सर्विस प्रोवाइडर खास ध्यान में रहेंगे। गलत जानकारी मिली तो उनका कम्पोजीशन लाइसेंस रद्द कर कार्रवाई की जाएगी। इनफार्मर पर भी सख्ती नई व्यवस्था में सूचना देने वाले (इनफार्मर) की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि जांच में सूचना गलत पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को दस्तावेजों के साथ बुलाया जा सकता है। इससे विभाग को उम्मीद है कि झूठी या अपुष्ट सूचनाओं में कमी आएगी। कारोबारियों को राहत अब टैक्स चोरी की सूचना पर छापा या जब्ती की कार्रवाई करने से पहले संबंधित सर्किल प्रभारी को वेब पोर्टल पर इसकी जानकारी दर्ज करनी होगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी। व्यापारियों को दी सलाह कर सलाहकार पलाश खुरपिया का कहना है कि इस सर्कुलर से ऑडिट प्रक्रिया में एकरूपता आएगी। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। उन्होंने व्यापारियों को सलाह दी है कि वे तय समय में जानकारी दें।

4 मई तक मध्य प्रदेश में खराब रहेगा मौसम, बाहर जाने से पहले जानें यह चेतावनी

भोपाल   भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक यू-टर्न ले लिया है.  प्रदेश के कई जिलों में तेज आंधी और बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई. जिससे कई शहरों के अधिकतम तापमान में 2 से 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई. इससे जहां एक ओर लोगों को तपती गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर तेज हवाओं और बेमौसम बरसात ने कई जिलों में जनजीवन को भी प्रभावित किया. जबलपुर में तेज आंधी के बीच बरगी डैम में क्रूज पलटने से कई लोगों की मौत की खबर भी सामने आई है।  आंधी-बारिश का डबल अटैक राजधानी भोपाल में दोपहर बाद मौसम ने करवट बदली और करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई. सड़कों पर पानी भर गया. वहीं टीकमगढ़ में आंधी-तूफान का असर इतना तेज रहा कि कंट्रोल रूम का टावर गिर गया. गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई. यहां 15 से 20 मिनट तक जमकर ओलावृष्टि भी हुई, जिससे खेत और फसलें प्रभावित हुईं. श्योपुर में तेज आंधी के चलते एक होटल का शेड उड़ गया, जिससे करीब 15 लोग घायल हो गए।  इसके अलावा रीवा, सतना, मैहर, उमरिया, सागर, रायसेन, बालाघाट, दमोह और ग्वालियर सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश दर्ज की गई. कई जगह तेज हवाओं के कारण पेड़ और बिजली के खंभे तक उखड़ गए, जिससे स्थानीय स्तर पर बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई. जबलपुर में भी तेज हवाओं के चलते क्रूज शिप डूबने से बड़ा हादसा हो गया।  तापमान में गिरावट, कई जिलों में मिली राहत मौसम में आए इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर तापमान पर देखने को मिला.  सीधी में अधिकतम तापमान गिरकर 31.6 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जिससे दिन-रात के तापमान का अंतर घटकर महज 6.5 डिग्री रह गया. वहीं रीवा में 33.2 डिग्री, पचमढ़ी में 33.4 और सतना में 33.5 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया. हालांकि, प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में गर्मी का असर अभी भी बना हुआ है. खरगोन में पारा 42.6 डिग्री तक पहुंच गया, जबकि रायसेन, बैतूल और गुना में भी 41 डिग्री के आसपास तापमान दर्ज किया गया. इंदौर और उज्जैन में पारा करीब 40 डिग्री रहा, जबकि जबलपुर में 38.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।  मौसम के पीछे ये सिस्टम कर रहे काम मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, '' मौसम में इस बदलाव के पीछे कई सक्रिय सिस्टम जिम्मेदार हैं. कश्मीर के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ने वातावरण में हलचल बढ़ाई है. इसके साथ ही उत्तर पंजाब और दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है. इसके साथ ही एक ट्रफ लाइन दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ होते हुए ओडिशा तक फैली हुई है, जो बंगाल की खाड़ी से नमी खींचकर प्रदेश में ला रही है. इसी वजह से प्रदेश में अचानक आंधी, बारिश और ओलावृष्टि जैसी स्थितियां बन रही हैं।  किसानों की बढ़ी चिंता, फसल पर बढ़ा खतरा प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर शुरू होने से भले ही आम लोगों को राहत मिली है, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ा दी है. बता दें कि कई जिलों में मंडियों और उपार्जन केंद्रों पर गेहूं की फसल खुले में रखी हुई है. अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसल के भीगने और खराब होने का खतरा मंडरा रहा है. यदि मौसम ऐसा ही बना रहा, तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।  मध्यप्रदेश में 4 मई तक आंधी और बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार  ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना समेत सागर और शहडोल संभाग में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. जबकि कुछ जिलों में हल्की बारिश और बौछारो की चेतावनी दी गई है. वहीं 2 से 4 मई के बीच प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और वज्रपात की संभावना जताई गई है।  इसके साथ ही शिवपुरी, ग्वालियर, रीवा, सागर, जबलपुर और शहडोल संभाग में भी मौसम खराब रहने की चेतावनी दी गई है. इस दौरान लोगों को मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा सलाह दी गई है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें. किसानों को अपनी फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने और ढंककर रखने की सलाह दी गई है। 

लाड़ली बहनों को मिलेगा बड़ा तोहफा! 36वीं किस्त जारी होगी इस दिन, जानें राशि

भोपाल  मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना का लाभ उठा रही महिलाओं के लिए अहम खबर सामने आई है। योजना की 36वीं किस्त को लेकर प्रदेश की लाखों महिलाओं का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। जानकारी के अनुसार, लाड़ली बहना योजना की 36वीं किस्त 10 से 15 तारीख के बीच जारी करने की संभावना है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। वहीं, किस्त जारी होने पर प्रदेश की 1.25 लाख से ज्यादा महिलाओं के खाते में सीधे 1500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मई 2023 में शुरु की गई थी। सीएम मोहन यादव अब तक इस योजना के तहत करोड़ों हितग्राहियों के खातों में 54 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि ट्रांसफर कर चुके हैं। समय के साथ-साथ बढ़ती मंहगाई को देखते हुए योजना राशि में वृद्धि की गई। ताकि, महिलाओं को घर खर्च आदि में राहत मिल सके। वर्ष 2025 में लाडली बहना योजना की राशि 1250 रुपए से बढ़ाकर 1500 रुपए प्रति माह कर दी गई है। इस योजना से प्रदेश की 1.25 लाख महिलाएं लाभ ले रही हैं। यह योजना महिलाओं के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। महिलाएं घर खर्च के साथ-साथ छोटी बचत और रोजगार के अवसर भी तलाश पा रही हैं। इस योजना का लाभ मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी महिलाओं को मिलता है। जिसमें विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा महिलाएं शामिल है। 21 से 60 वर्ष तक की आयु की महिलाओं को ही ये लाभ मिलता है। इसके अलावा महिला का खुद का बैंक खाता होना जरूरी है। बैंक खाते मे आधार लिंक एवं डीबीटी अनिवार्य है। वहीं, समग्र पोर्टल पर आधार के डाटा का ओटीपी या बायोमेट्रिक के माध्यम से वेरिफाई होना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने काशी विश्वनाथ में किया था ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का अवलोकन

भोपाल  काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी के पावन परिसर में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ ने अपनी सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आभा से डिजिटल दुनिया में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस अनूठी पहल ने सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर 78 लाख 42 हजार 167 से अधिक लोगों तक अपनी डिजिटल रीच दर्ज कराई है। प्रधानमंत्री के अवलोकन से मिला वैश्विक विस्तार प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक के इस संगम का अवलोकन बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के बाद किया था। प्रधानमंत्री  मोदी ने इस वैदिक घड़ी को प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टि का अद्भुत मेल बताया। उनके अवलोकन के बाद सोशल मीडिया पर वैदिक घड़ी को लेकर नया उत्साह देखा गया, जिससे यह देश-विदेश में चर्चा का केंद्र बन गई। प्रधानमंत्री  मोदी के अवलोकन से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर चर्चाओं का ऐसा वातावरण तैयार हुआ कि केवल सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म से ही लाखों उपयोगकर्ताओं तक इसकी गूँज पहुँची। प्रधानमंत्री  मोदी और अन्य आधिकारिक यूट्यूब चैनलों पर आयोजित लाइव स्ट्रीम को 5,933 दर्शकों ने सीधे देखा। साथ ही राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर हुए सीधे प्रसारण ने करोड़ों दर्शकों तक इसकी जानकारी पहुँचाई  सोशल मीडिया के माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर हैशटैग #विक्रमोत्सव_वाराणसी भारत के 'ट्रेंडिंग सेक्शन' में नंबर 1 स्थान पर काबिज रहा, जो सनातन संस्कृति और भारतीय कालगणना से जुड़े आयोजनों के लिए एक डिजिटल मील का पत्थर है। 16 से अधिक प्रमुख हैशटैग्स को ट्रैक किया गया, जिनमें #Varanasi, #विक्रमादित्य_वैदिक_घड़ी और #Vedic Ghadi जैसे हैशटैग ने लाखों लोगों को आकर्षित किया। इस व्यापक कवरेज ने इस गौरवशाली वैज्ञानिक विरासत को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सांस्कृतिक चेतना का नया संवाहक मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा निर्मित इस घड़ी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सादर भेंट किया गया था। 04 अप्रैल 2026 को स्थापित यह घड़ी भारतीय कालगणना, पंचांग, और ग्रहों की स्थिति जैसी जटिल गणनाओं को सरलता से प्रस्तुत करती है। भविष्य की योजनाएँ इस सफल डिजिटल आउटरीच ने सिद्ध कर दिया है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति के वैज्ञानिक आधारों को जानने के लिए उत्सुक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, वाराणसी की सफलता के बाद अब अयोध्या के  राम मंदिर सहित देश के सभी प्रमुख ज्योतिर्लिंग परिसरों में ऐसी वैदिक घड़ियाँ स्थापित करने की योजना है, ताकि भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रकाश जन-जन तक पहुँच सके。 यह न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि भारतीय काल-चिन्तन को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप (Vikramaditya Vedic Clock) जिन लोगों को वैदिक घड़ी अपने मोबाइल फोन पर चाहिए तो विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐपवैदिक घड़ी का डिजिटल संस्करण है, जो भारतीय काल गणना (तिथि, नक्षत्र, योग, करण) और 7000 वर्षों का पंचांग दिखाता है। यह ऐप 189+ भाषाओं में उपलब्ध है, जो सूर्योदय-सूर्यास्त, शुभ मुहूर्त और 30 घंटे के समय प्रारूप को Android/iOS पर दिखाता है। वैदिक घड़ी ऐप की मुख्य विशेषताएं भारतीय काल गणना: यह ऐप समय को 30 मुहूर्तों में बांटकर दिखाता है, जो सूर्योदय पर आधारित है। पंचांग विवरण: तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, और मास की सटीक जानकारी। 189+ भाषाएँ: यह ऐप हिंदी, अंग्रेजी सहित 189+ भाषाओं में उपलब्ध है। शुभ/अशुभ समय: यह दैनिक 'राहुकाल', 'शुभ मुहूर्त' और 'चौघड़िया' की जानकारी देता है इतिहास: इसमें महाभारत काल से लेकर अब तक के 7000 वर्षों का पंचांग समाहित है। अलार्म: आप वैदिक समय के अनुसार अलार्म भी सेट कर सकते हैं। ऐप कैसे डाउनलोड करें? यह ऐप Google Play Store (Android) पर "Vikramaditya Vedic Clock" नाम से उपलब्ध है। App Store (iOS/iPhone) से भी इसे डाउनलोड किया जा सकता है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा: प्रशासनिक और विधिक समन्वय से भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करें

प्रशासनिक, अंतर्विभागीय समन्वय एवं विधिक विषयों में विभागीय पक्ष तत्काल प्रस्तुत कर भर्ती प्रक्रिया शीघ्र करें पूर्ण : उप मुख्यमंत्री शुक्ल स्वास्थ्य विभाग में भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रियाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी आवश्यक औपचारिकताओं की समयबद्ध पूर्ति सुनिश्चित करते हुए भर्ती प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूर्ण की जाए। उन्होंने कहा कि सभी स्वीकृत पदों की मांग संबंधित चयन एजेंसी को समय पर भेजी जाए। प्रशासनिक, अंतर्विभागीय समन्वय एवं विधिक विषयों में विभागीय पक्ष तत्काल प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के लिए भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन के प्रस्ताव को सक्षम स्तर से स्वीकृति के लिए प्राथमिकता के आधार पर तैयार किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं नागरिकों की मूलभूत आवश्यकता हैं। गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आधुनिक अधोसंरचना, उन्नत उपकरणों के साथ-साथ पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण होने से चिकित्सकीय मैनपावर की भर्ती में तेजी आएगी, अतः इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के लिए शीघ्र प्रस्ताव तैयार करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि जिन पदों के लिए परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं, उनके परिणाम शीघ्र घोषित कर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण की जाए तथा जिन पदों की परीक्षाएं शेष हैं, उन्हें जल्द आयोजित किया जाए। चयन एजेंसी के साथ सतत समन्वय बनाए रखते हुए पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। बैठक में बताया गया कि बायोमेडिकल इंजीनियर, ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट सहित अन्य 31 पद, मेडिकल सोशल वर्कर, क्लिनिकल साइकियाट्रिस्ट एवं सहायक अस्पताल प्रबंधक के 200 पद, स्टाफ नर्स, कंपाउंडर एवं पैरामेडिकल स्टाफ के 373 पद, नर्सिंग ऑफिसर के 2099 पद, सिस्टर ट्यूटर के 218 पद तथा अस्पताल सहायक के 1200 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन सभी प्रक्रियाओं को आगामी 2 माह के भीतर पूर्ण कर शीघ्र नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन एवं अध्यक्ष कर्मचारी चयन मंडल संजय कुमार शुक्ल, आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस सहित विभाग एवं कर्मचारी चयन मंडल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

ललिताराम जन विकास कल्याण समिति ने 300 मेधावी छात्रों का किया भव्य सम्मान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजा आयोजन

भोपाल. ललिताराम जन विकास कल्याण समिति के द्वारा 10 बी 12 बी कक्षा में प्रवीण सूची  के छात्र-छात्रा का सम्मान समारोह आज नार्मदीय मंदिर सेकंड स्टॉप तुलसी नगर में आयोजित किया गया  एव बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया मध्य प्रदेश में 12वीं कक्षा में प्रथम मेरिट लिस्ट में आने वाली चांदनी विश्वकर्मा जी आदित्य तिवारी दसवीं कक्षा में प्रवीण सूची में आए उनको  सम्मानित किया गया  कार्यक्रम के आयोजक कर्ता वीरेंद्र मिश्रा ने बताया है  300 बच्चों का सम्मान लजस संस्था  के माध्यम से किया गया  समर कैंप में विजेता बच्चों का भी सम्मान किया गया कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पीसी शर्मा अमित शर्मा  ममतेश शर्मा जी अवनीश भार्गव  आशुतोष चौकसे  प्रियक सकबार सुमित गुर्जर  राजू सावडे उपस्थित थे।

80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं उपार्जन के स्लॉट बुक, प्रदेश में लगातार बढ़ रहा आंकड़ा: CM यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में गेहूँ उपार्जन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। किसान भाइयों ने बड़ी संख्या में स्लॉट बुक किए हैं। अब तक 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ उपार्जन के लिए स्टॉल बुक हो चुके है। यह एक सकारात्मक संदेश है। स्टॉल बुकिंग का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के किसानों से गेहूँ उपार्जन करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। किसानों की सुविधा के लिए उपार्जन केन्द्रों पर सभी संभव व्यवस्थाएं की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूँ उपार्जन प्रक्रिया में व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के लिए आकस्मिक निरीक्षण लगातार चलता रहेगा और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। सभी मंत्री, विधायक और संबंधित अधिकारियों को उपार्जन प्रक्रिया में पूरी सक्रियता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने और किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए निर्देशित किया गया है। 23 मई तक गेहूं खरीदी की बढ़ी तारीख  न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उपज बेचने में हो रही परेशानी को देखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 23 मई कर दी है। इसके साथ ही खरीदी केंद्रों की क्षमता और सुविधाओं में भी इजाफा किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि जिन किसानों को अब तक स्लॉट नहीं मिल पाया है, उन्हें अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, ताकि वे अपनी फसल आसानी से बेच सकें। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी समयसीमा बढ़ाई गई थी, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होने के कारण दोबारा अवधि बढ़ानी पड़ी।  जिलों में बढ़ा रही तौल कांटों की संख्या  मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के लिए उपार्जन केंद्रों पर छाया, बैठक और कई अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की है। अब किसान जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय कर सकते हैं। इतना ही नहीं, किसानों को गेहूं की तौल के लिए इंतजार नहीं करना पड़े इसके लिए उपार्जन केन्द्रों में तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है। सरकार जिलों में और भी तौल कांटे बढ़ा रही है। सरकार ने चमक विहीन गेहूं की सीमा भी 50 प्रतिशत कर दी है। सूकड़े दाने की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक की गई है। क्षतिग्रत दानों की सीमा बढ़ाकर 6 प्रतिशत तक की गई है। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, कूपन ,गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।  विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। सभी जिलों में लघु सीमांत के साथ ही मध्यम एवं बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बड़े एवं मध्यम वर्ग के एक लाख 60 हजार किसानों ने स्लॉट बुक कराया है। पूरे प्रदेश में स्लॉ्ट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 9 मई तक की गई है। किसानों की सुविधा के लिए खरीदी के लिये प्रत्येक शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन का कार्य जारी रहेगा। अभी तक प्रदेश मे समर्थन मूल्य् पर गेहूं उपार्जन के लिये 9.60 लाख किसानों द्वारा 57.75 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय में किसी प्रकार की परेशानी न हो एवं उपज विक्रय के लिए इंतजार न करना पड़े इसके लिये किसानों को जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाएं आदि की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिये बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है।  

एमपी में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत ₹993 बढ़ी, 20 हजार से ज्यादा शादियों पर पड़ेगा असर

भोपाल  दो महीने की किल्लत के बीच मध्य प्रदेश में कमर्शियल LPG सिलेंडर 993 रुपए महंगा हो गया है। भोपाल में 3074 रुपए, इंदौर में 3179 रुपए, जबलपुर में 3290 रुपए, ग्वालियर में 3296 रुपए और उज्जैन में 3241 रुपए में सिलेंडर मिलेगा। दो महीने में रेट 1248 रुपए बढ़ चुके हैं। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। कमर्शियल सिलेंडर के रेट ऐसे समय बढ़े हैं, जब होटल, रेस्टोरेंट-ढाबों को जरूरत की 50 प्रतिशत गैस ही मिल रही है। जुलाई तक प्रदेश में 20 हजार से ज्यादा शादियां होनी हैं, ऐसे में आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 500 लोगों के खाने पर 50 हजार रुपए खर्च बढ़ेगा मध्य प्रदेश टेंट कैटर्स एसोसिएशन के रामबाबू शर्मा ने बताया कि सिलेंडर के रेट बढ़ने से होटल और कैटर्स में 10 प्रतिशत तक कॉस्टिंग का फर्क पड़ेगा। 500 लोगों के 5 लाख रुपए के खाने का बजट अब 45 से 50 हजार रुपए तक बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि सिलेंडर पर 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी ठीक थी, लेकिन करीब 50 प्रतिशत बढ़ोतरी न्याय संगत नहीं है। सरकार को फैसला वापस लेना चाहिए। होटल संचालक बोले- खाना महंगा करना पड़ेगा भोपाल होटल एवं रेस्टोरेंट संघ के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली ने कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडर 2 महीने में साढ़े 12 सौ रुपए तक महंगा हुआ है। यानी पहले की तुलना में 60% रेट बढ़े हैं। फरवरी तक सिलेंडर 1800 रुपए में मिल जाता था, लेकिन अब 50 प्रतिशत आपूर्ति ही हो रही है। कमर्शियल गैस नहीं मिलने से डीजल भट्‌टी और इंडक्शन का उपयोग हो रहा है। इससे डीजल और बिजली का खर्च बढ़ा हुआ है। अब खाने के रेट बढ़ाने पड़ेंगे। 3323 रुपए में रीवा में मिलेगा सबसे महंगा सिलेंडर प्रदेश में सबसे महंगा सिलेंडर रीवा में 3323 रुपए में मिलेगा। सिंगरौली और सतना-नरसिंहपुर में 3321 रुपए, कटनी में 3320 रुपए, बालाघाट में 3319 रुपए, पन्ना में 3318 रुपए, शहडोल में 3317 रुपए, अनूपपुर, सीधी, मंडला, उमरिया और डिंडौरी में 3315 रुपए, सिवनी में रेट 3308 रुपए हो गए हैं। भोपाल में रेट सबसे कम 3074 रुपए है। शाजापुर-सीहोर में 3081 रुपए, हरदा में 3104 रुपए, सागर में 3105 रुपए, विदिशा-नर्मदापुरम में 3109 रुपए में सिलेंडर मिलेगा। रेस्टोरेंट में खाने का रेट 10 से 20 प्रतिशत बढ़ेगा नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के एमपी हेड अभिषेक बहेती ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें हर महीने बढ़ रही हैं। पहले 60 रुपए, फिर 195 रुपए और अब 993 रुपए तक रेट बढ़े हैं। इससे रेस्टोरेंट में खाने का रेट 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। यह आम लोगों पर बोझ डालेगा।