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पांच राज्यों के चुनाव में एमपी के 40 IAS अधिकारियों की ड्यूटी, आयोग ने किए ऑब्जर्वर तैनात

भोपाल  देश के विभिन्न राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के लिए मध्य प्रदेश कैडर के 40 भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों को चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों को चुनाव आयोग द्वारा अलग-अलग राज्यों में प्रेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में तैनात किया गया है। इससे प्रदेश सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों के कामकाज पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के कई वरिष्ठ और अनुभवी आईएएस अधिकारियों को चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए तैनात किया गया है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी चुनावी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना, निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर नजर रखना होगी।  जिन राज्यों में इन अधिकारियों को प्रेक्षक बनाया गया है, उनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, केरला, पुडुचेंरी और आसाम शामिल हैं। इन राज्यों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने के लिए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती की गई है। मध्य प्रदेश से जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है, उनमें प्रमुख रूप से प्रमुख सचिव संदीप यादव, जॉन किंग्सले, श्रीमन शुक्ला, स्वतंत्र कुमार सिंह, शिल्पा गुप्ता, सिबी चक्रवर्ती, अजय कटसेरिया, निधि निवेदिता, रोहित सिंह और अनुराग वर्मा के नाम शामिल हैं। इसके अलावा राहुल फटिंग हरिदास, दीपक आर्य, हरहिका सिंह, आशीष भार्गव, अभिजीत अग्रवाल, दिलीप कुमार, वंदना वैद्य, सपना निगम, केवीएस चौधरी, मनीष सिंह, प्रबल सिपाहा, सौरव सुमन, अवि प्रसाद, सतेंद्र सिंह और बुद्धेश वैद्य सहित अन्य अधिकारी भी चुनाव ड्यूटी पर भेजे गए हैं। सूत्रों के अनुसार सूची जारी होने के बाद कुछ अधिकारियों ने अपनी चुनावी ड्यूटी निरस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी। हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग के स्तर पर ही लिया जाएगा। वहीं, यह भी चर्चा है कि इनमें कई अधिकारी राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत हैं। ऐसे में उनके चुनावी ड्यूटी पर जाने से विभागीय कामकाज की गति कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है।   

गुड़ी पड़वा के मौके पर महाकाल मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज फहरेगा, 2000 साल पुरानी परंपरा का फिर से शुरुआत

उज्जैन  चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और गुड़ी पड़वा के अवसर पर 19 मार्च को श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज का आरोहण किया जाएगा। यह आयोजन लगातार दूसरे वर्ष किया जा रहा है। यह केवल ध्वजारोहण नहीं, बल्कि लगभग 2000 वर्ष पुरानी उस गौरवशाली परंपरा का पुनरुद्धार है, जिसकी शुरुआत सम्राट विक्रमादित्य के काल में हुई थी।  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर इस परंपरा को फिर से भव्य रूप दिया जा रहा है। विक्रमादित्य द्वारा प्रारंभ किया गया विक्रम संवत और ब्रह्म ध्वज की परंपरा भारत की सांस्कृतिक श्रेष्ठता और गौरव का प्रतीक मानी जाती है। ब्रह्म ध्वज की विशेषता विक्रमादित्य शोध संस्थान के निदेशक राम तिवारी के अनुसार ब्रह्म ध्वज शक्ति, साहस और चतुर्दिक विजय का प्रतीक है। केसरिया रंग के इस ध्वज की बनावट भी विशेष होती है। इसमें दो पताकाएं होती हैं, जो ध्वज के दोनों छोर पर स्थित रहती हैं। ध्वज के मध्य में सूर्य का चिन्ह अंकित होता है, जो तेज, ऊर्जा और विश्व विजय का प्रतीक माना जाता है। महिदपुर स्थित अश्विनी शोध संस्थान में आज भी वे प्राचीन मुद्राएं सुरक्षित हैं, जिन्हें सम्राट विक्रमादित्य ने इसी ब्रह्म ध्वज परंपरा को अमर बनाने के लिए जारी किया था। सम्राट विक्रमादित्य के काल में उज्जैन अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख केंद्र माना जाता था। उस समय की मुद्राओं पर बने चिह्न बताते हैं कि उज्जैन को पृथ्वी का मध्य बिंदु माना जाता था। इन सिक्कों के एक पक्ष पर भगवान शिव सूर्यदंड लिए दिखाई देते हैं, जबकि दूसरे पक्ष पर प्लस (+) का चिन्ह बना होता है, जिसकी चारों भुजाओं पर गोले बने रहते हैं। यह प्रतीक दर्शाता है कि उज्जैन जल, थल और नभ तीनों मार्गों से विश्व से जुड़ा हुआ था। 65 वर्षों तक सुरक्षित रखा गया था ध्वज शोधपीठ के निदेशक राम तिवारी ने बताया कि विक्रम संवत ज्ञान, संस्कृति, विज्ञान और अनुसंधान का महापर्व है। विक्रम संवत के अवसर पर ब्रह्म ध्वज विभिन्न स्थानों पर फहराया जाएगा। मध्यप्रदेश में मंदिरों, सार्वजनिक स्थलों और निजी स्थानों पर भी लोग स्वप्रेरणा से इस ध्वज को फहरा सकेंगे। उन्होंने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर पर स्थापित यह ध्वज लंबे समय तक पंडित सूर्यनारायण व्यास के परिवार ने अपने पूजा स्थल पर लगभग 65 वर्ष तक सुरक्षित रखा था। उसी ध्वज से प्रेरणा लेकर वर्तमान ब्रह्म ध्वज का निर्माण किया गया है। 

खाद्य मंत्री राजपूत का ऐलान, इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 1 अप्रैल से होगी गेहूँ खरीदी

इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 1 अप्रैल तथा शेष संभागों में 7 अप्रैल से होगी गेहूँ खरीदी : खाद्य मंत्री  राजपूत गेहूँ उपार्जन के लिये 19 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीदी इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में 1 अप्रैल से तथा शेष संभागों में 7 अप्रैल से की जाएगी। गेहूँ की खरीदी शासकीय कार्य दिवसों में सुबह 8 से रात 8 बजे तक की जाएगी। उन्होंने बताया है कि सरकार ने गेहूं खरीदी पर 40 रुपये अतिरिक्त बोनस देने का भी फैसला लिया है। अब प्रदेश में गेहूं की खरीदी 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। मंत्री  राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये कुल 19 लाख 4 हजार 651 किसानों ने पंजीयन कराया है। गत् वर्ष 15 लाख 44 हजार किसानों ने पंजीयन कराया था। जिला इंदौर में 71713, झाबुआ में 7120, धार में 44466, अलीराजपुर में 476, खण्डवा में 35104, बुरहानपुर में 523, बड़वानी में 4724, खरगोन में 27557, शाजापुर में 73878, नीमच में 19445, उज्जैन में 123281, आगर-मालवा में 42446, मंदसौर में 65195, देवास में 76442, रतलाम, 45912, अशोक नगर में 16454, दतिया में 19118, शिवपुरी में 21312, ग्वालियर में 13763, गुना में 22914, भिण्ड में 12788, मुरैना में 10893, श्योपुर में 17617, डिण्डौरी में 4478, मण्डला में 19611, जबलपुर में 49642, कटनी में 52126, सिवनी में 53288, नरसिंहपुर में 38416, छिन्दवाड़ा में 29163, बालाघाट में 4383, पांढुर्णा में 863, नर्मदापुर में 71831, बैतूल में 18686, हरदा में 40273, भोपाल में 37129, रायसेन में 76264, विदिशा में 86479, सीहोर में 101793, राजगढ़ 98537, सीधी में 12813, सिंगरौली में 10970, महूगंज में 8018, सतना में 56376, मैहर में 19787, रीवा में 46923, अनुपपुर में 882, शहडोल में 9479, उमरिया में 13445, टीकमगढ़ में 15552, निवाड़ी में 4116, सागर में 75791, पन्ना में 30052, दमोह में 39938 और जिला छतपुर में 34378 किसानों ने पंजीयन कराया है।  

सुप्रीम कोर्ट का यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे पर बड़ा निर्णय, याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट का रुख करने की दी सलाह

भोपाल भोपाल गैस त्रासदी के तीन दशक बाद भी यूनियन कार्बाइड संयंत्र का जहरीला कचरा कानूनी और पर्यावरणीय विवादों के केंद्र में है। सुप्रीम कोर्ट ने  इस कचरे को जलाने के बाद बची राख से पारे के संभावित रिसाव से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता संगठन भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति को राहत के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट की 20 साल पुरानी निगरानी का हवाला मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉय माल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यह संवेदनशील मामला पिछले दो दशकों से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सीधी निगरानी में चल रहा है। बेंच ने कहा कि तकनीकी साक्ष्यों और नई सामग्री के साथ हाईकोर्ट में आवेदन करना अधिक व्यावहारिक और उचित होगा। याचिका में दावा किया गया था कि कचरे के अवशेषों में भारी मात्रा में पारा हो सकता है, जो आसपास के भूजल और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है। क्या है विशेषज्ञों की राय? सुनवाई के दौरान अदालत ने तकनीकी बारीकियों पर टिप्पणी करने से परहेज किया। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि जब विशेषज्ञ समितियों और निजी विशेषज्ञों की राय अलग-अलग हो, तो कोर्ट सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता। याचिकाकर्ताओं ने डॉ. आसिफ कुरैशी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्रायल रन की पद्धति पर सवाल उठाए थे। यदि भविष्य में पारे के रिसाव से संबंधित कोई नई सामग्री या तकनीकी आपत्ति सामने आती है, तो याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के समक्ष आवेदन कर सकते हैं। हमें उम्मीद है कि हाईकोर्ट इस मुद्दे पर जल्द विचार करेगा। क्या है पूरा मामला? यह मामला पीथमपुर (धार) स्थित ट्रीटमेंट प्लांट और भोपाल के यूनियन कार्बाइड परिसर से जुड़ा है। दिसंबर 2024 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक नोटिस ने खलबली मचा दी थी, जिसमें दावा किया गया था कि जहरीले तत्व भूजल में रिस रहे हैं। याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि कंक्रीट की पेटियों में बंद राख की दोबारा जांच हो, जिसे फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया है।

हाई कोर्ट का आदेश: भोजशाला विवादित स्थल का मुआयना करेंगे जज, 2 अप्रैल से पहले होगा दौरा

इंदौर/धार. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने धार जिले के अति-संवेदनशील भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर मामले में एक अहम टिप्पणी की है. जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा कि मामले से जुड़े कई विवादों को देखते हुए वे 2 अप्रैल की अगली सुनवाई से पहले स्वयं परिसर का मुआयना करेंगे। एक न्यूज एजेंसी ने बताया कि जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने इस विवादित परिसर से जुड़ी याचिकाओं की नियमित सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की. बेंच ने अपनी मौखिक टिप्पणियों में कहा, "कई विवादों को देखते हुए हम इस परिसर का दौरा करना और उसका मुआयना करना चाहेंगे. हम अगली तारीख (2 अप्रैल) से पहले इस परिसर का दौरा करेंगे." कोर्ट के दौरे की सख्त शर्तें हालांकि, बेंच ने यह भी साफ किया कि इस दौरे के दौरान मामले से जुड़ा कोई भी पक्ष विवादित जगह पर मौजूद नहीं रह पाएगा। लंबी दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने इस मामले में दायर अलग-अलग अंतरिम अर्जियों को स्वीकार कर लिया और कहा कि पक्ष इन अर्जियों से जुड़े दस्तावेज़ और हलफनामे कोर्ट में पेश कर सकते हैं। हाई कोर्ट ने जोर देकर कहा, "हम इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका देंगे। धार में स्थित यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है, जिसने हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए इसका वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया और एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की। ASI सर्वे रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु ASI की 2000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल इमारत मस्जिद से पहले से ही वहां मौजूद थी और मौजूदा विवादित इमारत को प्राचीन मंदिरों के हिस्सों का दोबारा इस्तेमाल करके बनाया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां से मिले वास्तुशिल्प के अवशेष, मूर्तियों के टुकड़े, साहित्यिक लेखों वाली शिलालेखों की बड़ी-बड़ी पट्टियां, खंभों पर बने नागकर्णिका शिलालेख आदि इस बात का संकेत देते हैं कि इस जगह पर साहित्यिक और शैक्षिक गतिविधियों से जुड़ी एक विशाल इमारत मौजूद थी। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि वैज्ञानिक जांच-पड़ताल और इस दौरान मिले पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर, इस पहले से मौजूद इमारत को परमार काल का माना जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, "वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण और की गई पुरातात्विक खुदाई, मिली चीजों के अध्ययन और विश्लेषण, वास्तुशिल्प अवशेषों, मूर्तियों और शिलालेखों, कला और मूर्तियों के अध्ययन के आधार पर, यह कहा जा सकता है कि मौजूदा ढांचा पहले के मंदिरों के हिस्सों से बनाया गया था। ASI ने रिपोर्ट में कहा कि सजाए गए खंभों और स्तंभों की कला और वास्तुकला से यह कहा जा सकता है कि वे पहले के मंदिरों का हिस्सा थे और बेसाल्ट के एक ऊंचे चबूतरे पर मस्जिद के स्तंभों की कतार बनाते समय उनका दोबारा इस्तेमाल किया गया था। दोनों पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें हिंदू समुदाय, जिसने पूरे विवादित परिसर की धार्मिक प्रकृति को तय करने की मुख्य मांग के साथ अदालत का रुख किया था, का दावा है कि ASI को अपने वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख यह साबित करते हैं कि यह ढांचा मूल रूप से एक प्राचीन मंदिर था। हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने इस दावे पर विवाद किया है और सर्वेक्षण पर सवाल उठाया है, यह आरोप लगाते हुए कि ASI ने उनकी पिछली आपत्तियों को नजरअंदाज किया और सर्वेक्षण में विवादित परिसर में रखी गई चीजों को शामिल कर लिया। न्यूज एजेंसी से बात करते हुए, मुस्लिम पक्ष के याचिकाकर्ताओं में से एक मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के नेता अब्दुल समद ने कहा, "हमने हाई कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि पूरे ASI सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी और रंगीन तस्वीरें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि हम यह साबित कर सकें कि सर्वेक्षण में शामिल कुछ चीजों को किस तरह पहले से तय योजना के तहत शामिल किया गया था। समद ने दावा किया कि विवादित परिसर के सर्वेक्षण के दौरान जैन और बौद्ध समुदायों से संबंधित मूर्तियां भी मिली थीं. उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड और एक 'मुतवल्ली'  ने भी परिसर से संबंधित अदालत में चल रहे मामले में अर्जी दाखिल की है। बता दें कि हिंदू समुदाय भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि 11वीं सदी की यह इमारत कमल मौला मस्जिद है. ASI के 7 अप्रैल 2003 के एक आदेश के अनुसार, हिंदुओं को हर मंगलवार को इस परिसर में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को हर शुक्रवार को नमाज पढ़ने की इजाजत है।

इंदौर में एमपी का सबसे बड़ा हॉस्पिटल बनेगा, 320 ICU बेड्स और 34 ऑपरेशन थिएटर से होगी सेवा

इंदौर  मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा हॉस्पिटल इंदौर में बनने जा रहा है। यह हॉस्पिटल वर्तमान एमवाय हॉस्पिटल से भी बड़ा होगा। इससे बनाने के लिए तैयारी शुरू हो गई है। इंदौर में बनने वाले प्रदेश के सबसे बड़े हॉस्पिटल का नाम न्यू एमवाय हॉस्पिटल रखा जाएगा। चिकित्सा शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 1610 बेड वाले अत्याधुनिक टीचिंग हॉस्पिटल का प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया है। इस हॉस्पिटल को तैयार करने के लिए प्रशासनिक रूप से 773.07 करोड़ रुपए की मंजूरी दी जा चुकी है। इंदौर में बनने वाले नए एमवाय हॉस्पिटल को तैयार करने में अनुमानित लागत लगभग 586.65 करोड़ रुपए आएगी। इसकी टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। विधायक गोलू शुक्ला ने बताया कि एमवाय हॉस्पिटल हमारे मालवा निमाड़ की संजीवनी बूटी है। अब हम नया हॉस्पिटल 1610 बेड का बनाने जा रहे हैं। नए हॉस्पिटल बनाने का काम अब शुरू होने वाला है। दो से चार दिन में ही इसका काम शुरू हो जाएगा। तीन साल में अस्पताल पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। ऐसा होगा नए अस्पताल का सेट अप मध्य प्रदेश भवन विकास निगम द्वारा निर्मित किए जाने वाले नए अस्पताल भवन में मेडिसिन वार्ड में कुल 330 बिस्तर, सर्जरी विभाग में 330 बिस्तर, ऑर्थोपेडिक्स विभाग में 180 बिस्तर, शिशु रोग सर्जरी विभाग में 60, शिशु रोग वार्ड में 100, न्यूरो सर्जरी में 60, नाक कान गला विभाग में कुल 30, दंत रोग विभाग में 20, त्वचा रोग विभाग में कुल 20, मातृ एवं शिशु वार्ड में 100, नेत्र वार्ड में 80 तथा इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए 180 बिस्तरीय सुविधा उपलब्ध रहेगी. नए अस्पताल भवन में कुल 1450 बिस्तरीय वार्डों के निर्माण पर कुल 528 करोड़ रुपए व्यय होंगे. इसके अलावा 550 बिस्तरीय नर्सिंग हॉस्टल के निर्माण पर 21.37 करोड रुपए, 250 सीटर मिनी ऑडिटोरियम के निर्माण पर 1.60 करोड. रुपए व्यय किए जाएंगे. इसके अलावा सार्वजनिक पार्किंग के निर्माण पर 31.50 करोड़ रुपए, विद्युतीकरण, बाउंड्रीवॉल एवं सोलर पैनल स्थापना पर 25.53 करोड रुपए तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, प्लंबिंग एवं वाटर सप्लाई संबंधी कार्यों कार्य पर लगभग 10 करोड़ रुपए लागत आएगी. 81.5 एकड़ में बनकर तैयार होगा हॉस्पिटल 3D विजुअलाइजेशन में अस्पताल देखने में बिल्कुल आधुनिक लग रहा है। सोलर पैनल, हरे-भरे गार्डन, फाउंटेन, वाइड प्लाजा, एंबुलेंस एंट्री और भव्य प्रवेश द्वार। MPBDC के जरिए यह ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट 81.5 एकड़ में बन रहा है। डीडीएफ कंसल्टेंट्स आर्किटेक्ट हैं और आयरन ट्रायंगल लिमिटेड ने इसको बनाने का ठेका लिया है। इस हॉस्पिटल को पूरा करने के लिए सरकार ने 36 महीने की समय सीमा तय की है। न्यू एमवाय के पास में मौजूद कई पुरानी इमारतें (ओल्ड क्वार्टर्स, कुछ ब्लॉक) तोड़े जाएंगी। वहीं एमजीएम मेडिकल कॉलेज, चाचा नेहरू हॉस्पिटल, सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक, कैंसर हॉस्पिटल बरकरार रहेंगे इनका सिर्फ रिनावेशन कार्य किया जाएगा। प्रदेश का सबसे बड़ा हॉस्पिटल होगा न्यू एमवाय एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन का यह प्लान है कि नया एमवाय हॉस्पिटल बनाया जाए। क्योंकि वर्तमान एमवाय में चौदह सौ पचास बेड है, जो की हमेशा ओवरलोडेड रहते हैं। पेशेंट की संख्या ज्यादा होने की वजह से लोड ज्यादा होने की वजह से एक नए अस्पताल की आवश्यकता है। जिसके तहत एक नई बिल्डिंग बनाई जा रही है। वर्तमान में एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रदेश में सबसे ज्यादा बिस्तरों की संख्या के साथ आज भी मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा अस्पताल है। अब यह नया एमवाय बन जाएगा तो हमारी क्षमता ओर अधिक हो जाएगी, जिससे हम दिल्ली और मुंबई के बराबर में खड़े हो जाएंगे।

प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

एचपीवी टीकाकरण अभियान: मध्यप्रदेश में 14 वर्ष की एक लाख से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण हुआ पूर्ण प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने प्रदेश में 14 वर्ष आयु वर्ग की एक लाख से अधिक किशोरी बालिकाओं के सफल एचपीवी टीकाकरण पर स्वास्थ्य विभाग की टीम, जिला प्रशासन तथा सहयोगी संस्थाओं को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने 28 फरवरी 2026 को अजमेर, राजस्थान से इस विशेष एचपीवी टीकाकरण अभियान का राष्ट्रीय शुभारंभ किया था। मध्यप्रदेश इस अभियान के अंतर्गत एक लाख से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण कर देश में सर्वाधिक एचपीवी टीकाकरण वाला राज्य बन गया है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मंडला, बालाघाट, डिंडोरी, राजगढ़ और खरगोन जिलों का इस उपलब्धि में विशेष योगदान रहा है। प्रदेश में अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर कलेक्टरों की अध्यक्षता में समन्वय स्थापित किया गया और स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत विभाग सहित विभिन्न स्वैच्छिक संगठनों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी 14 वर्ष आयु की बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण अवश्य कराएं, ताकि सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बेटियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है और शेष पात्र बालिकाओं का टीकाकरण भी शीघ्र पूर्ण किया जाएगा।  

बिम्सटेक विविध संस्कृतियों को समझने स्थायी मित्रता का अवसर

भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि स्काउटिंग और गाइडिंग के मूल मंत्र ईश्वर, देश के प्रति कर्तव्य तथा दूसरों की सेवा और चरित्र निर्माण मानवता का आधार है। उन्होंने कहा कि बिम्सटेक भारत सहित बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सदस्य देशों की युवा चेतना के लिए सीखने, समझने और आत्म-विकास का प्रेरक मंच है। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं का आह्वान किया कि वह भौगोलिक सीमाओं से परे मानवता, सह-अस्तित्व और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करें। समूचे क्षेत्र के सतत विकास, शांतिपूर्ण, समृद्ध भविष्य के निर्माण में योगदान करें। राज्यपाल पटेल मंगलवार को बिम्सटेक द्वारा यूथ कल्चरल हेरिटेज एंड सस्टेनेबिलिटी इमर्शन प्रोग्राम के तहत आयोजित शुभारंभ समारोह में सदस्य देशों बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल,लंका, थाईलैंड भारत के स्काउट्स-गाइड्स, रोवर्स-रेंजर्स और पदाधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के तत्वावधान में स्काउट्स और गाइड्स द्वारा आयोजित किया गया था। समारोह का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया गया। इस अवसर पर सेंट माउंट फोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल पटेल नगर की छात्राओं ने स्वागत नृत्य की प्रस्तुति दी। राज्यपाल पटेल ने कहा कि बिम्सटेक दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के साझा इतिहास, समुद्री परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहर और विकास की सामूहिक आकांक्षाओं का जीवंत स्वरूप है। भारत की सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की भावना “वसुधैवकुटुम्बकम्” का आधुनिक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि आयोजन का विषय “विरासत, प्रकृति और सतत भविष्य के लिए नेतृत्व”, भौगोलिक सीमाओं से परे मानवता, सह-अस्तित्व और साझा उत्तरदायित्व के भाव को सुदृढ़ करने वाली महत्वपूर्ण पहल है। युवाओं से कहा कि एक-दूसरे की विविध संस्कृतियों को समझने और सीमाओं से परे स्थायी मित्रता स्थापित करने के इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के विजनरी नेतृत्व में जन-केंद्रित, युवा-संचालित और प्रकृति के प्रति उत्तरदायी विकास के विभिन्न आयामों को भारत ने अपनाया है। इनका अध्ययन कर विकसित एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र निर्माण के प्रयासों को समझा जा सकता है। संयुक्त सचिव बिम्सटेक एवं सार्कविदेश मंत्रालय सी.एस.आर. राम ने बताया कि मध्य प्रदेश में आयोजित बिम्सटेक कार्यक्रम के माध्यम से 'इंडो-पैसिफिक' और 'ग्लोबल साउथ' के विजन को मजबूती दी गई। 'महासागर' पहल और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के सहयोग से इसे सरकारी नीतियों के बजाय एक जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। युवाओं को सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास से जोड़ने की पहल है। दिल्ली से बाहर निकलकर गुवाहाटी और महाराष्ट्र के क्रम में आयोजन की चौथी कड़ी मध्यप्रदेश का आयोजन है। उन्होंने कहा है कि नागरिक समाज की यह सक्रियता दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सहयोग का नया अध्याय लिखेगी। चीफ नेशनल कमिश्नर भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स डॉ. के.के. खंडेलवाल ने संगठन की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिम्सटेक दक्षिण एवं दक्षिण एशियाई क्षेत्र की साझा संस्कृति और इतिहास का स्वरूप है। उन्होंने बिम्सटेक को बंगाल की खाड़ी को जोड़ने वाला एक सेतु बताते हुए क्षेत्र के युवाओं के लिए नेतृत्व और सहकार के अनुभव प्राप्त करने की पहल बताया है। स्काउट्स-गाइड्स को विरासत, प्रकृति संरक्षण, चरित्र निर्माण और भविष्य के नेतृत्व की जिम्मेदारी उठाने के लिएप्रेरित किया। स्वागत उद्बोधन सेक्रेट्री जनरल एण्ड प्रेसीडेंट इन काऊंसिल भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स पी.जी.आर. सिंधिया ने दिया। डायरेक्टर स्काउट ब्यूरों एशिया पेसिफिक एस. प्रसन्नावास्तव ने कार्यक्रम की गतिविधियों का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत किया। आभार प्रदर्शन नेशनल कमिश्नर ऑफ स्काउट्स भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स मनीष मेहता ने दिया। कार्यक्रम में स्टेट चीफ कमिश्नर भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स मध्यप्रदेश पूर्व मंत्री पारस चंद्र जैन, सेवानिवृत्त वरिष्ठ आई.पी.एस. पवन कुमारवास्तव, डायरेक्टर भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स सुश्री दर्शना पावस्कर, एडिशनल चीफ कमिश्नर भारत स्काउट्स एण्ड गाइड्स एम.ए. खालिद मंचासीन थे।  

उज्‍जैन के गुरुकुल से शिक्षा प्राप्‍त कर कृष्‍ण बने जगत गुरु सम्राट विक्रमादित्य का नाम जुड़ने पर विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों का बढ़ा गौरव : मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि आज विक्रम विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होकर अत्यधिक आनन्द का अनुभव हो रहा है। उन्होंने दीक्षान्त समारोह में उपाधियां प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए सभी के यशस्वी एवं मंगलमय भविष्य की कामना की। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि उज्‍जैन नगरी में आते ही एक अलग प्रकार की अनुभूति होती है। सम्राट विक्रमादित्‍य विश्‍वविद्यालय में ही एक विद्यार्थी ने शिक्षा प्राप्‍त की और आज वे प्रदेश के मुख्‍यमंत्री बने। मंगलवार को राज्यपाल  पटेल की अध्यक्षता और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30 वां दीक्षांत समारोह स्‍वर्ण जयंती सभागृह सम्पन्न हुआ। राज्‍यपाल  पटेल ने कहा कि प्रदेश का राज्‍यपाल बनने के अगले ही दिन वे भगवान  महाकालेश्‍वर के दर्शन के लिए आए और यहीं से उन्‍हें प्रदेश के सतत विकास और देश की प्रगति के लिए प्रयासरत रहने की प्रेरणा प्राप्‍त हुई। राज्‍यपाल  पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि आज दीक्षांत के साथ आप सभी ने समाज के उत्‍थान और देश की एकता के लिए शपथ ली है। विश्‍वविद्यालय से जो संस्‍कार आपको मिले है उन्‍हें जीवन भर स्‍मरण रखकर कार्य करें। आपके माता-पिता ने आपको शिक्षित करने के लिए बहुत कष्‍ट उठाए है इसलिए पढ़ लिखकर अपने माता-पिता की सेवा करें। आप जीवन में कुछ भी बन जाओं परंतु अपने माता-पिता और गुरु के प्रति सदैव आभारी रहना, उनकी सेवा करना। शिक्षित होने का उद्देश्‍य मात्र उपाधि अथवा प्रमाण-पत्र पाना नहीं बल्कि समाज और देश की उन्‍नति में योगदान देकर एक जिम्‍मेदार नागरिक भी बनना है। भगवान कृष्ण ने उज्जैन को बनाया अपनी शिक्षा स्थली : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ज्ञान-विज्ञान और ध्यान के वैश्विक केन्द्र उज्जैन को भगवान कृष्ण ने अपनी शिक्षास्थली के रूप में चुना। चौसठ कलाओं और 14 विद्याओं की यह धरती शौर्य के प्रतीक सुशासन के पुरोधा, विक्रम संवत के प्रवर्तक, भारतीय सांस्कृतिक चेतना के रक्षक और न्यायप्रियता के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य की कर्मस्थली रही है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण नहीं बल्कि 7 दशकों के उस समर्पण का परिणाम है, जिसने दुनिया को कुशल मानव संसाधन और श्रेष्ठ स्कॉलर सौंपे हैं। विश्वविद्यालय से सम्राट विक्रमादित्य का नाम जुड़ने से विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों का गौरव बढ़ा है। ऐसे विश्वविद्यालय की उपाधियों से विभूषित होना विद्यार्थियों के लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीक्षांत समारोह में डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डी-लिट), गोल्ड मेडल और स्नातक उपाधियां प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं बल्कि जीवन में सीखने की एक नई शुरुआत है, यह जीवन का महत्वपूर्ण टर्निंग पाइंट है। बेहतर जीवन के लिए विद्यार्थियों को सीखने की ललक सदैव बनाए रखना होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी देश और प्रदेश के समग्र विकास में सहभागी बनेंगे और जीवन के सभी क्षेत्रों में अपने कर्तव्य का पूर्ण निष्ठा के साथ निवर्हन करते हुए अपने परिवार, समाज और देश का गौरव बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को ससम्मान उपाधियां प्रदान करने के लिए दीक्षांत समारोह की परम्परा आरंभ की गई है। यह विश्वविद्यालय प्रसिद्ध कवि  शिवमंगल सिंह सुमन और पद्म विष्णु धर वाकणकर जैसी महान विभूतियों की कर्मस्थली रहा है। नवाचार में अग्रणी यह विश्वविद्यालय, कृषि अध्ययन शाला और डेयरी टेक्नालॉजी जैसे आधुनिक विषयों को आरंभ करने के लिए पहल करने में भी प्रदेश में प्रथम रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय को विभिन्न यंत्रों के लिए 51 लाख रुपए, 5 ड्रोन तथा अध्ययन यात्रा के लिए एक बस प्रदान करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर है। पिछला वर्ष प्रदेश में निवेश और रोजगार के रूप में मनाया गया। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उज्जैन वर्ष 2028 में भव्य और दिव्य सिंहस्थ का साक्षी बनेगा। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन से लेकर उनके मां क्षिप्रा के जल से स्नान तक की व्यवस्था के लिए राज्य सरकार अभी से हर संभव तैयारी कर रही है। सिंहस्थ के आयोजन में स्वच्छता, यात्री मार्गदर्शन, डिजिटल हेल्प आदि का विशेष रूप से ध्यान रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को नवरात्रि और गुड़ी पड़वा की मंगलकामनाएं भी दीं। नवीन कृषि अध्ययनशाला भवन और भर्तृहरि छात्रावास भवन का किया लोकार्पण राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 17 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित नवीन कृषि अध्ययनशाला भवन का लोकार्पण एवं एमईआरयू परियोजना अंतर्गत नव श्रृंगारित भर्तृहरि छात्रावास का लोकार्पण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सम्पादित पुस्तकों ईकोस एण्ड एक्सप्रेशन्स, कंटूर्स ऑफ थॉट, रागात्मिका सहित 4 पुस्तकों का विमोचन भी किया। उपाधियाँ प्रदान करने के बाद विश्‍वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने सभी उपाधि प्राप्तकर्ता विद्यार्थियों को उपदेश देकर शपथ दिलाई। निकली अकादमिक शोभायात्रा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के प्रारंभ में राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यपरिषद सदस्‍यों व संकाय अध्‍यक्षों के साथ समूह चित्र खिंचवाया। इसके बाद दीक्षांत समारोह की अकादमिक शोभा यात्रा निकाली गई। कार्यक्रम में सांसद  अनिल फिरोजिया, विधायक  अनिल जैन कालूहेड़ा और नगर निगम अध्‍यक्ष  कलावती यादव शामिल रहें। सम्राट विक्रमादित्य के मूर्तिशिल्प पर अर्पित की पुष्पांजलि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक परिसर स्थित सम्राट विक्रमादित्य के मूर्तिशिल्प पर पुष्पांजलि अर्पित की। एनसीसी कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। समारोह के प्रारंभ में राष्ट्रगीत वंदेमातरम और राष्ट्रगान जन-गण-मन हुआ। अतिथियों ने माँ वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। हथकरघा इकाई की प्रदर्शनी का किया अवलोकन राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य अतिथियों ने हथकरघा इकाई की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। आचार्य विद्यासागर पीठ एवं संस्‍था द्वारा अतिथियों को हाथ से बनी हथकरघा सामग्री भेंट की। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज और कुल सचिव  अनिल कुमार शर्मा ने राज्यपाल  पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प-गुच्छ, पारिजात का पौधा, शॉल, फल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्य परिषद के सदस्यों के द्वारा अन्य अतिथियों का भी सम्मान और स्वागत किया गया। … Read more

अपर मुख्य सचिव ने की पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने पश्चिम एशिया में चल रहे घटनाक्रम के मद्देनजर अधिकारियों को प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। इसी तारतम्य में अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण रश्मि अरूण शमी ने मंत्रालय मे खाद्य विभाग के अधिकारियों तथा ऑइल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ पेट्रोल, डीजल, पीएनजी, सीएनजी तथा घरेलू गैस की आपूर्ति के संबंध में समीक्षा की गई। एसीएस शमी द्वारा सिलेन्डर की वितरण व्यवस्था सुचारू बनाए रखने तथा घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये हैं। ऑइल कंपनियो के प्रतिनिधि द्वारा बताया गया कि पूर्व में जहां 84% उपभोक्ता ऑनलाइन बुकिंग करवा रहे थे वह संख्या बढकर 90% हो गयी है। कंपनियों ने मोबाइल ऐप, एसएमएस, व्हाट्सएप तथा आईवीआरएस कॉल द्वारा गैस बुकिंग की सुविधा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता बुकिंग के लिए इन डिजिटल माध्यम का प्रयोग करें तथा अनावश्यक रूप से एजेंसी पर जाने से बचे | घरेलू एलपीजी के उत्पादन में 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है तथा निरंतर आपूर्ति जारी है। शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों को आवश्यकता की 100 प्रतिशत गैस की आपूर्ति की जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन के लिए विशेष छूट के निर्देश भी जारी किये है। बैठक में गैस एजेंसियों के संचालन, सिलेंडर वितरण की समयबद्धता और उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों की स्थिति की भी समीक्षा की जा रही है। समस्त जिला कलेक्टर को निर्देश दिए गए है कि सूचना तंत्र मजबूत कर अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही करें। यदि कहीं वितरण व्यवस्था में अनियमितता या विलंब की शिकायत मिलती है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए और उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराई जाए। प्रदेश में एलपीजी की कालाबाजारी तथा जमाखोरी के विरुद्ध लगातार कार्यवाही की जा रही है। प्रदेश मे 1341 स्थानों पर कार्यवाही कर 1827 सिलेंडर जब्त किये गए। पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी तथा घरेलू एलपीजी गैस की उपलब्धता के सम्बन्ध में ऑयल कंपनियों से समन्वय के लिए राज्य स्तर पर 6 सदस्यीय समिति भी गठित की गयी है, जो प्रदेश में कामर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर की सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए निरंतर निगरानी करेगी। औ‌द्योगिक एवं वाणिज्यिक संस्थाओ से आग्रह है कि वे उपलब्धता अनुसार पीएनजी के कनेक्शन लें। पीएनजी की आपूर्ति लगातार बनी हुई है और आगे भी जारी रहेगी। पेट्रोल, डीजल घरेलू पीएनजी तथा सीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है और इनकी आपूर्ति भी निरंतर एवं बिना कटौती के जारी रहेगी। ऑयल कंपनी के स्टेट नोडल ऑफिसर श्री अजय श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में गैस सिलेण्डर का पर्याप्त स्टॉक है तथा प्रदेश के बॉटलिंग प्लांट एवं वितरकों के गोदाम में पर्याप्त सिलेण्डर उपलब्ध हैं। घरेलू उपभोक्ताओं से अपील की गयी है कि विगत अंतिम रिफिल के 25 दिन बाद पुनः बुकिंग करायें। प्रशासन द्वारा वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध स्टॉक का विवेकपूर्ण उपयोग करने एवं वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को अपनाने की सलाह भी दी गयी है। जिन कामो में गैस ज्यादा खर्च होती है उनको नियंत्रित करने एवं विकल्प तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाए। प्रदेश में घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति जारी है, उपभोक्ता अनावश्यक रूप से अफवाहों से भ्रमित न हों। देश की रिफायनरी उच्च क्षमता पर कार्य कर रही हैं तथा पश्चिम एशिया के अतिरिक्त अन्य स्थानों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। सिलेण्डर बुकिंग संबंधित शिकायत / सुझाव के लिये इन टोल फ्री नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है : भारत गैस हेल्पलाइन नंबर 1800-22-4344 (टोल फ्री) इंडेन गैस कस्टमर केयर नंबर 1800-2333-555 (टोल फ्री) एचपी गैस कस्टमर केयर नंबर 1800-2333-555 (टोल फ्री)