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बड़वारा के समीप एनएच पर भीषण सड़क हादसा, कार और बाइक की सीधी भिड़ंत, बाइक सवार चार की मौत, कार सवार पांच घायल

कटनी कटनी जिले के बड़वारा थाना क्षेत्र में कटनी शहडोल राष्ट्रीय राजमार्ग पर रेलवे पुल के समीप गत मध्य रात्रि एक भीषण सड़क दुर्घटना हुई। यहां पर कार और बाइक की सीधी भिड़ंत में बाइक सवार चार युवकों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई, जबकि कार सवार पांचो लोग घायल हो गए। घायलों में से चार की हालत नाजुक बताई जा रही है। सभी घायलों को रेफर कर दिया गया है। कार चालक को अधिक चोटें नहीं आई हैं। इस तरह हुई घटना बड़वारा थाना क्षेत्र के रेलवे पुलिया के पास गत 9, 10 मार्च की मध्य रात्रि लगभग 12 बजे हुई घटना में कार और बाइक की आमने-सामने जोरदार टक्कर हुई। बताया जाता है की मानपुर निवासी एक युवक महाराष्ट्र से मजदूरी करके लौट रहे अपने तीन मित्रों को लेने कटनी स्टेशन आया था। वह अपने मित्रों को साथ लेकर अपनी बाइक से वापस घर जा रहा था, इसी दौरान बड़वारा रेलवे पुल के पास सामने से आ रही कार ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि घटनास्थल पर ही मानपुर निवासी बाइक सवार रामकिशोर सिंह, रामदास सिंह, जितेंद्र सिंह और इंद्रभान सिंह की मौत हो गई। राजगढ़ जा रहे थे कार सवार बताया जाता है कि राजगढ़ निवासी कार सवार किसी काम से अंबिकापुर गए हुए थे, वे लोग भी घर वापस लौट रहे थे। इसी बीच बड़वारा के समीप यह भीषण हादसा हो गया। कार सवार एक महिला सहित पांच लोगों में से चार की हालत नाजुक बताई जा रही है। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रेफर कर दिया गया है, जबकि कार चालक को मामूली चोटें आई है। तत्काल पहुंची पुलिस घटना की सूचना मिलते ही बड़वारा पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्राथमिक जानकारी के अनुसार बाइक पर चार लोगों का सवार होना और तेज रफ्तार हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है। राहगीरों के मुताबिक बाइक सवार युवकों ने हेलमेट नहीं पहन रखी थी। हादसे के बाद सभी बाइक सवार सड़क पर गिरे और उनके सर में गंभीर चोटें आई, जिसके कारण उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। यदि हेलमेट होता तो शायद जान बच सकती थी।

नगर निगम के इंजीनियर उदित गर्ग से पीएम आवास की जिम्मेदारी छीनी

भोपाल. नगर निगम में प्रशासनिक कार्य सुविधा के नाम पर कार्यपालन यंत्रियों के दायित्वों में बड़ा फेरबदल किया गया है। अपर आयुक्त वरुण अवस्थी द्वारा जारी इस आदेश ने निगम की आंतरिक सियासत और रसूख के समीकरण बदल दिए हैं। इस बदलाव में जहां कुछ अधिकारियों के पर कतरे गए हैं, वहीं लूप लाइन में माने जाने वाले कुछ चेहरों की दमदार वापसी हुई है। निगम के सबसे रसूखदार अधिकारियों में शुमार अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग को बड़ा झटका लगा है। उन्हें स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है। दूसरी ओर, अब तक मुख्य धारा से दूर रहे कार्यपालन यंत्री एके साहनी को नरेला विधानसभा की कमान सौंपकर ''''पावर'''' में लाया गया है। उन्हें नरेला का प्रभारी नगर निवेशक बनाने के साथ ही पीएमआइएस और अतिक्रमण स्टोर जैसी शाखाओं का प्रभार भी दिया गया है। आरआर जारोलिया को अब यांत्रिकी योजना प्रकोष्ठ के साथ जोन एक से 21 तक की विद्युत शाखा का प्रभार दिया गया है। वहीं अभी तक स्मार्ट सिटी और नगर निगम की विद्युत शाखा देख रहे आशीष श्रीवास्तव से नगर निगम की विद्युत शाखा का प्रभार वापस लेकर प्रभारी अधीक्षण यंत्री आरआर जारोलिया को दे दिया गया है। साथ ही आरआर जारोलिया के पास यांत्रिकी योजना प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी भी रहेगी। इसी तरह आरके गोयल को एचएफए का विभागाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि प्रमोद मालवीय को प्रोजेक्ट, झील संरक्षण और उद्यान शाखा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की कमान दी गई है। निगम ने भवन अनुमति की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए अब विधानसभा वार प्रभारी नगर निवेशक नियुक्त किए हैं। आदेश के अनुसार, अब सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी शाखाओं की नस्तियां संबंधित अपर आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत करनी होंगी । इन्हें दी विधानसभाओं की जिम्मेदारी – अनिल टटवाडे – उत्तर एवं मध्य विधानसभा के सिविल, अतिक्रमण और भवन अनुज्ञा शाखा में प्रभारी नगर निवेशक की जिम्मेदारी दी गई है। – एनके डेहरिया – दक्षिण-पश्चिम और गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी नगर निवेशक के साथ ही सिविल और अतिक्रमण शाखा की जिम्मेदारी संभालेंगे। – एके साहनी – नरेला विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी नगर निवेशक के साथ ही सिविल और अतिक्रमण शाखा का प्रभार दिया गया है। – एसके राजेश – हुजूर विधानसभा के प्रभारी नगर निवेशक और सिविल कार्य और अतिक्रमण शाखा के प्रभारी होंगे।

धार भोजशाला विवाद में 2189 पेज की रिपोर्ट MP हाईकोर्ट में दाखिल

धार. धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 98 दिनों तक चले वैज्ञानिक सर्वे के बाद 2189 पेज की विस्तृत रिपोर्ट मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में प्रस्तुत कर दी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद दोनों पक्षों में हलचल तेज हो गई है और अब 16 मार्च को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। भोजशाला परिसर में एएसआई की ओर से लगभग तीन महीने तक वैज्ञानिक पद्धति से सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान परिसर के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद संरचनात्मक अवशेषों, पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियों, स्तंभों और स्थापत्य शैली का विस्तृत अध्ययन किया गया। सर्वे के दौरान मिले अवशेषों का वैज्ञानिक परीक्षण कर उन्हें दस्तावेजी रूप से रिपोर्ट में शामिल किया गया। अदालत ने अध्ययन के लिए दिया समय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने दोनों पक्षों को रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। अब निर्धारित तिथि 16 मार्च को होने वाली सुनवाई में दोनों पक्ष अदालत के सामने अपने-अपने तर्क और आपत्तियां पेश करेंगे। इस कारण भोजशाला विवाद से जुड़े इस मामले की अगली सुनवाई को लेकर धार सहित पूरे प्रदेश में विशेष रुचि बनी हुई है। रिपोर्ट में स्थापत्य अवशेषों का उल्लेख सूत्रों के अनुसार एएसआई की रिपोर्ट में परिसर के भीतर मंदिर से जुड़े स्थापत्य अवशेषों और संरचनात्मक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। सर्वे के दौरान पत्थरों पर उत्कीर्ण आकृतियां, प्राचीन स्तंभ, नक्काशीदार हिस्से और अन्य अवशेषों का वैज्ञानिक परीक्षण किया गया। इन सभी तथ्यों को एएसआई ने विस्तृत रूप से दस्तावेजी रूप में अदालत के सामने प्रस्तुत किया है। दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया रिपोर्ट सामने आने के बाद मंदिर पक्ष में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। मंदिर पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट में मिले साक्ष्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भोजशाला परिसर में पहले मंदिर था और बाद में उसे तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया। उनके अनुसार एएसआई की रिपोर्ट से मंदिर पक्ष के दावों को मजबूती मिली है। वहीं दूसरी ओर कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने कहा कि वे एएसआई की रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 16 मार्च को होने वाली सुनवाई में रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं पर अपनी आपत्तियां और तर्क अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

फौज में जाने का नया रास्ता: अग्निवीर भर्ती नियमों में बदलाव, ज्यादा युवाओं को मिलेगा मौका

ग्वालियर भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा का सपना देखने वाले युवाओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। रक्षा मंत्रालय और सेना भर्ती बोर्ड ने अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। फौजी बनने की हसरत रखने वाले युवाओं की आयु सीमा एक साल बढ़ा दी गई है। अभी तक अग्निवीर बनने की अधिकतम आयु सीमा 21 वर्ष थी। भर्ती में एक साल की बढ़ोतरी होने से हजारों युवाओं को फौजी की वर्दी पहनने का मौका मिलेगा। सेना भर्ती बोर्ड के अनुसार इस फैसले से युवाओं में अग्निवीर बनने का जुनून और बढ़ा है। पिछले 15 दिनों में 13,499 आवेदन प्राप्त हुए है, जिनमें मुरैना और भिंड के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। सेना भर्ती बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि फौजी बनने का जज्बा युवाओं में लगातार बढ़ रहा है। पिछली भर्ती में करीब 1700 युवाओं ने सेना जॉइन की थी। इस बार आवेदनों की संख्या देखकर लग रहा है कि पिछला आंकड़ा टूट सकता है। 13 फरवरी से अग्निवीर भर्ती के लिए आवेदन लिए जा रहे है। भिंड-मुरैना के युवा आगे… सबसे ज्यादा 7271 आवेदन भिंड और मुरैना के युवाओं के हैं। बोर्ड 1 अप्रैल तक आवेदन स्वीकार करेगा, इसलिए संख्या और बढ़ने की संभावना है। उम्र बनी थी रोड़ा, अब मौका अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में आवेदकों की अधिकतम आयु सीमा अब 22 वर्ष कर दी गई है। पिछली बार उम्र सीमा की वजह से जो अभ्यर्थी भर्ती से बाहर हो गए थे. उनके लिए यह बड़ा मौका है। उम्र में रियायत देकर सेना ने हजारों युवाओं के लिए रास्ता खोल दिया है। जिस तेजी से आवेदन आ रहे हैं. उससे उम्मीद है कि इस बार आवेदकों की संख्या पिछले आंकड़ों को पीछे छोड़ देगी। – पंकज कुमार, कर्नल, सेना भर्ती बोर्ड, ग्वालियर

जबलपुर से प्रमुख शहरों की ट्रेनें भरी, यात्रियों को टिकट न मिलने की दिक्कत

जबलपुर होली पर घर पहुंचे लोगों की कार्यस्थल की ओर वापसी का दौर जारी है। त्योहार के बाद रविवार को सप्ताहांत पर जबलपुर से जाने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनें फुल रही। दिल्ली, इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद जैसे शहरों के लिए जाने वाली ट्रेनों में अभी पांच दिनों तक कन्फर्म टिकिट उपलब्ध नहीं है। सबसे ज्यादा भार दिल्ली और इंदौर जाने वाली ट्रेन पर है। प्रमुख ट्रेनों की तत्काल टिकिट में भी लंबी प्रतीक्षा सूची बन रही है। यात्रियों की सुविधा के लिए पश्चिम मध्य रेल ने दिल्ली, दानापुर, कोटा, अयोध्या के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई है। इन ट्रेनों में स्लीपर श्रेणी की टिकिट बुक हो चुकी है। वातानुकूलित श्रेणी की कुछ टिकिट ही खाली है। वहीं, उत्तर भारत से महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के बीच चलने वाली ट्रेनें यात्रियों से खचाखच भरी हुई है।   मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरू के लिए एक सप्ताह तक नियमित ट्रेनों में सीट उपलब्ध नहीं है। ट्रेन में कन्फर्म टिकिट नहीं मिलने पर पुणे, इंदौर, हैदराबाद, अहमदाबाद के लिए यात्री बसों का सहारा ले रहे है। यात्रियों को राहत देने रेलवे लंबी दूरी की स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की भी तैयारी कर रहा है। सुरक्षा और सतर्कता बढ़ाई, लगातार निगरानी त्योहार के बाद घर से वापसी के बीच रविवार को आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में यात्रा जबलपुर स्टेशन पहुंचे। शहर से चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों की सवारी के चलते मुख्य स्टेशन पर यात्रियों का दबाव रहा। भीड़ को देखते हुए रेल सुरक्षा बल और शासकीय रेल पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई। आरपीएफ के साथ ही होमगार्ड के जवान स्टेशन के प्रवेश द्वार पर तैनात रहे। यात्रियों के सामान की जांच और ट्रेन के प्रस्थान करने के एक घंटे पूर्व यात्रियों को प्रवेश दिया गया। रेल प्रशासन भी सतर्क रहा। ट्रेन के समय से कई घंटे पहले पहुंचने वाले यात्रियों को होल्डिंग एरिया में ठहराया गया। स्पेशल ट्रेनों की स्थिति     सोमवार को जाने वाली जबलपुर-निजामुद्दीन (01701) ट्रेन के स्लीपर में वेटिंग। सेकेंड एसी में आरएसी। थर्ड एसी में कुछ सीटें खाली।     सोमवार को चलने वाली दानापुर-सोगरिया (09822) ट्रेन के स्लीपर, थर्ड एसी इकोनोमी एवं सेकेंड एसी लगभग फुल।     मंगलवार को जाने वाली जबलपुर-अयोध्या (01705) ट्रेन के स्लीपर और सेकेंड एसी में वेटिंग। थर्ड एसी में कन्फर्म सीट उपलब्ध है। शहर से चलने वाली ट्रेनों     हजरत निजामुद्दीन सुपरफास्ट, श्रीधाम और महाकोशल एक्सप्रेस में दिल्ली के लिए एक सप्ताह तक वेटिंग।     जबलपुर-वेरावल सोमनाथ एक्सप्रेस में अहमदाबाद के लिए एक सप्ताह तक किसी श्रेणी में कन्फर्म टिकिट नहीं है।     ओवरनाइट और नर्मदा एक्सप्रेस में इंदौर के लिए एक सप्ताह तक प्रत्येक श्रेणी के टिकिट प्रतीक्षा सूची में है।     जबलपुर-अजमेर दयोदय एक्सप्रेस में जयपुर के लिए कन्फर्म टिकिट नहीं है।     जबलपुर-लखनऊ चित्रकूट एक्सप्रेस में लखनऊ के लिए अगले दिन तक टिकिट प्रतीक्षा सूची में है। साप्ताहिक ट्रेनों के हाल     जबलपुर-श्रीमाता वैष्णोदेवी एक्सप्रेस में स्लीपर में वेटिंग सौ और थर्ड एसी में 50 पार पहुंच गई है।     रविवार को जबलपुर-पुणे स्पेशल फुल थी। उसके अगले फेरे में भी समस्त श्रेणियों का टिकिट अभी से प्रतीक्षा सूची पर है।

खसरे की चपेट में रतलाम के बच्चे, तुरंत कार्रवाई में जुटी स्वास्थ्य टीम

रतलाम रतलाम जिले के बाजना विकासखंड में मीजल्स (खसरा) के केस सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। शनिवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संध्या बेलसरे ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा रात करीब नौ बजे तक किया। इस दौरान बताया गया कि 10 बच्चों में मीजल्स के लक्षण मिले। इनकी हालत अब नियंत्रण में है। होली पर बाहर से आए कुछ बच्चे वापस पलायन भी कर गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा क्षेत्र में भ्रमण कर उपचार एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवा दे रही है। मामले में संबंधित एएनएम पर कार्रवाई के लिए प्रस्ताव बनाया गया है। शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. रितेश बजाज, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील, बीएमओ बाजना डॉ. जितेंद्र जायसवाल व स्वास्थ्य विभाग का अमला प्रभावितों के पास पहुंचा था।   बाजना ब्लाक के ग्राम बोरपाड़ा और ग्राम रूपाखेड़ा में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को एमआर वैक्सीनेशन करने के साथ ही विटामिन-ए का घोल पिलाया जा रहा है। निर्धारित प्रोटोकाल के अनुसार नोटिफिकेशन जनरेट करने, घर-घर जाकर स्वास्थ्य शिक्षा देने तथा अतिरिक्त टीकाकरण सत्र आयोजित करने की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। 10 से 14 दिन तक दिखाई देते हैं लक्षण जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील ने बताया कि खसरा (मीजल्स) एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसके प्रमुख लक्षण तेज बुखार, खांसी, बहती नाक, लाल और पानी भरी आंखें तथा पूरे शरीर पर लाल-भूरे रंग के दाने हैं। वायरस के संपर्क में आने के 10 से 14 दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं और दानों से पहले मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे (कोप्लिक स्पाट्स) भी नजर आ सकते हैं।  

आदिवासी महोत्सव में पहुंचेंगे Amit Shah, एमपी के कई क्षेत्रों को मिलेंगी बड़ी सौगातें

भोपाल प्रदेश का पहला बैगा महोत्सव शहडोल में नहीं, बल्कि बालाघाट में होगा। जिले में स्थान के चयन की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। यह जिला मुख्यालय या आसपास के क्षेत्रों में मार्च के अंत या अप्रैल के पहले सप्ताह में होगा। इसमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शामिल होंगे। आदिवासी समाज से आने वाले अन्य केंद्रीय व राज्य के मंत्री व प्रमुख जन भी हिस्सा लेंगे। प्रदेश में नक्सलियों के खात्मे के बाद सरकार पहला बड़ा आयोजन करने जा रही है, इसका मकसद आदिवासी समाज को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना और नक्सली गतिविधियों के कारण विकास से पिछड़े बालाघाट, मंडला जैसे जिलों पर अतिरिक्त ध्यान देना है। गृह मंत्री ने कार्य योजना को सराहा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर उक्त महोत्सव की कार्य योजना बनाई गई, इसे केंद्रीय गृहमंत्री के सामने रखा गया, उन्होंने भी इसे सराहा है साथ ही उक्त महोत्सव में सहभागी बनने की इच्छा भी जताई है। बता दें, केंद्र ने नक्सलियों के खात्मे के लिए राज्य को मार्च-अप्रैल तक की गाइडलाइन दी थी लेकिन उसके तीन महीने पहले ही मप्र पुलिस और एजेंसियों ने मिलकर चिह्नित नक्सलियों का खात्मा कर दिया। कई को मार गिराया तो कुछ ने सरकार के समक्ष समर्पण किए थे। नक्सल से प्रभावित क्षेत्र को मिलेंगी सौगातें बैगा महोत्सव में आदिवासी समाज के उन लोगों को बड़ी सौगात मिल सकती है जो लंबे समय तक नक्सलियों के चंगुल में रहे। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसे क्षेत्रों की जरुरतों का अलग से रोडमैप तैयार कर लिया है। इसका मकसद आदिवासी समाज को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना और नक्सली गतिविधियों के कारण विकास से पिछड़े बालाघाट, मंडला जैसे जिलों पर अतिरिक्त ध्यान देना है। हालांकि अभी भी सरकार ने नक्सलियों के विरुद्ध अभियान को बंद नहीं किया, बल्कि यह आगे भी जारी रहेगा। क्षेत्र में सख्ती के साथ सर्च अभियान जारी है।

लाडली बहनों को फिर सौगात: जल्द खातों में ट्रांसफर होंगे 1500 रुपए

ग्वालियर  मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी लाडली बहना योजना की पात्र महिलाओं के लिए बड़ी खबर है। लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त जल्द ही जारी होने वाली है। इस बार प्रदेश की करीब 1.28 करोड़ महिलाओं के खातों में सीधे 1500-1500 रुपए की राशि भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री Mohan Yadav सिंगल क्लिक के माध्यम से यह राशि पात्र महिलाओं के खातों में ट्रांसफर करेंगे। 1.28 करोड़ को मिलेगा योजना का लाभ वर्तमान में 1.28 करोड़़ लाडली बहनें इस योजना (Ladli Behna Yojana) का लाभ ले रही हैं। इन महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1500-1500 रुपए की राशि ट्रांसफर की जाती है। इस सरकारी आंकड़े के मुताबिक मार्च महीने में आने वाली लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त के कुल 1920 रुपए मोहन सरकार पात्र महिलाओं के खातों में ट्रांसफर करेगी। यह पैसा सीधे DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से महिलाओं के बैंक में पहुंचाया जाएगा। प्रदेश की बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बता दें कि लाडली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) प्रदेश की बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। जो प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी गेम चेंजर योजना साबित हुई है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर करना है। शुरुआत में इस योजना की पात्र महिलाओं को 1000 रुपए की राशि दी जाती थी। जिसे बढ़ाकर पहले 1250 रुपए किया गया और अब यह राशि 1500 तक बढ़ाई जा चुकी है। सरकार का दावा, महिलाएं हुईं आत्मनिर्भर, मिला सम्मान मध्य प्रदेश की मोहन सरकार का दावा है कि इस योजना का शुरू होने से प्रदेश की करोड़ों महिलाओं को बड़ा सहारा मिला है। वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनी हैं, परिवार में उनके आर्थिक योगदान से उनका सम्मान बढ़ा है और वे अब निर्णायक भूमिका में आ गई हैं। घर खर्च के साथ ही वे बच्चों की पढ़ाई और अपनी छोटी-मोटी जरूरतें खुद पूरी कर रही हैं।

मध्य प्रदेश अधिवक्ता परिषद चुनाव: 12 मई को मतदान, 16 जून से गिनती; 87 हजार वकील तय करेंगे नई टीम

इंदौर राज्य अधिवक्ता परिषद के पांच साल में एक बार होने वाले चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके अनुसार पूरे प्रदेश में 12 मई 2026 को एक साथ मतदान कराया जाएगा, जबकि मतगणना 16 जून 2026 से शुरू होगी। कार्यकारिणी सदस्य के कुल 25 पदों में से इस बार सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें से पांच पदों पर चुनाव होगा, जबकि दो पदों पर मनोनयन किया जाएगा। इस चुनाव में प्रदेशभर के लगभग 87 हजार वकील हिस्सा लेंगे। राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव के लिए प्रारंभिक मतदाता सूची 16 मार्च 2026 को जारी की जाएगी। इस सूची को लेकर 24 मार्च 2026 तक दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकेंगी। इसके बाद एक अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी। मतदान का अधिकार केवल उन्हीं वकीलों को मिलेगा, जिन्होंने निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अपना सत्यापन करा लिया है।   नामांकन के लिए तीन दिन का समय प्रत्याशियों को नामांकन फार्म जमा करने के लिए तीन दिन का समय मिलेगा। आठ, नौ और दस अप्रैल को नामांकन फार्म जमा किए जा सकेंगे। 15 और 16 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। वहीं 20 से 22 अप्रैल शाम चार बजे तक नाम वापस लिया जा सकेगा। 22 अप्रैल 2026 को शाम पांच बजे प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। दो महीने से अधिक चलती है मतगणना मतदान के बाद सभी मतपेटियों को सीलबंद कर जबलपुर भेजा जाएगा। वहां 16 जून 2026 से मतगणना शुरू होगी। आमतौर पर राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव की मतगणना लगभग दो महीने तक चलती है। महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना तय है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 25 में से सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। पिछली कार्यकारिणी में 25 सदस्यों में से केवल एक महिला थी, लेकिन इस बार यह संख्या सात तक पहुंच जाएगी। प्रत्याशियों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा चुनाव पिछले चुनाव की तुलना में इस बार चुनाव अधिक चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसका कारण यह है कि पुरुष प्रत्याशियों के लिए 25 के बजाय सिर्फ 18 पद ही उपलब्ध होंगे। अनुमान के अनुसार प्रथम वरीयता के लगभग 2500 मत पाने वाले प्रत्याशी खुद को सुरक्षित स्थिति में मान सकते हैं। इंदौर से 30 से ज्यादा संभावित प्रत्याशी नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही संभावित प्रत्याशियों ने प्रचार शुरू कर दिया है। इंटरनेट मीडिया के साथ-साथ प्रत्यक्ष संपर्क के माध्यम से भी प्रचार किया जा रहा है। प्रत्याशी वकीलों के कार्यालयों और घरों तक पहुंचकर प्रथम वरीयता का मत देने की अपील कर रहे हैं। इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव में अकेले इंदौर से 30 से अधिक प्रत्याशियों के मैदान में उतरने की तैयारी है, जिनमें वर्तमान कार्यकारिणी के पांच सदस्य भी शामिल हैं।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मुकेश मल्होत्रा की विधायकी रद्द, बीजेपी को मिली सीट

ग्वालियर मध्य प्रदेश की विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव ग्वालियर हाईकोर्ट ने शून्य (रद्द) घोषित कर दिया है। हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने निर्वाचन प्रक्रिया में गड़बड़ी और तथ्यों को छुपाने के आधार पर यह निर्णय लिया है। आपराधिक रिकॉर्ड छुपाने का आरोप मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ यह याचिका भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुकेश मल्होत्रा ने अपने चुनावी हलफनामे में अपने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी छुपाई थी। कोर्ट ने याचिका के तथ्यों को सही पाया और माना कि जानकारी छुपाना चुनाव नियमों का उल्लंघन है।   रामनिवास रावत घोषित हुए विजयपुर के विधायक चुनाव शून्य घोषित करने के साथ ही हाईकोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। चुनाव के दौरान दूसरे नंबर पर रहने वाले भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत को विजयपुर विधानसभा सीट से विधायक घोषित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद अब विजयपुर सीट पर भाजपा का प्रतिनिधित्व हो गया है।