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कक्षा 5वीं और 8वीं की पुन:परीक्षा 1 जून से, अतिरिक्त शिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित

कक्षा 5वीं, 8वीं की पुन:परीक्षा 1 जून से, परीक्षा से पूर्व अतिरिक्त शिक्षण की व्यवस्था कराई जाएगी सुनिश्चित राज्य शिक्षा केन्द्र ने परीक्षा को लेकर जारी की समय सारिणी, सत्र 2025-26 की मुख्य परीक्षा में अनुत्तीर्ण/अनुपस्थित विद्यार्थी होंगे शामिल परीक्षा से पूर्व अतिरिक्त शिक्षण की व्यवस्था कराई जाएगी सुनिश्चित भोपाल शिक्षण सत्र 2025-26 की मुख्य परीक्षा में अनुत्तीर्ण/अनुपस्थित कक्षा 5वीं एवं 8वीं के विद्यार्थियों के लिए पुन: परीक्षा होगी। यह परीक्षा 1 से 6 जून 2026 के बीच होगी। इसमें प्रदेश के समस्त शासकीय, मान्यता प्राप्त अशासकीय एवं अनुदान प्राप्त शालाओं और पंजीकृत मदरसों में अध्ययनरत कक्षा 5वीं व 8वीं के विद्यार्थी शामिल होंगे। इस संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने दिशा निर्देश भी जारी कर दिए हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के पोर्टल से डाउनलोड कर सकेंगे प्रवेश पत्र कक्षा 5वीं एवं 8वीं की दोबारा परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थी अपना प्रवेश पत्र राज्य शिक्षा केन्द्र के परीक्षा पोर्टल www.rskmp.in के माध्यम से डाउनलोड कर सकेंगे। पुन: परीक्षा के लिए शाला प्रमुख/जनशिक्षा केन्द्र प्रभारी/बी.आर.सी.सी., डी.पी.सी. के लॉगिन अंतर्गत परीक्षा पोर्टल से परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र डाउनलोड करने की सुविधा रहेगी। सभी बी.आर.सी.सी. को निर्देशित किया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके ब्लॉक के सभी विद्यार्थियों को संबंधित शाला के प्रधान पाठक के माध्यम से 25 मई तक प्रवेश पत्र अनिवार्य रूप से प्राप्त हो जाएं। संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री हरजिंदर सिंह ने बताया कि जारी निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि पुन: परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा आयोजन से पूर्व शाला स्तर पर विषयवार अतिरिक्त शिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। परीक्षार्थियों द्वारा पूर्व में प्रोजेक्ट कार्य पूर्ण नहीं करने अथवा प्रोजेक्ट कार्य में 7 से कम अंक होने की स्थिति में छात्रों से अनुत्तीर्ण अथवा अनुपस्थित रहे विषयों के प्रोजेक्ट कार्य पूर्ण करवाकर शाला स्तर पर मूल्यांकन किया जाए एवं प्रोजेक्ट के प्राप्तांकों की प्रविष्टि परीक्षा पोर्टल पर कराई जाएगी। जन शिक्षा केन्द्र स्तर पर होंगे परीक्षा केन्द्र कक्षा 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के लिए परीक्षा केन्द्र केवल जनशिक्षा केन्द्र स्तर पर बनाए जाएंगे। अगर किसी जिले में किसी परीक्षा केन्द्र पर 500 से अधिक परीक्षार्थी सम्मिलित हो रहे हों तो उस स्थिति में राज्य शिक्षा केन्द्र से अनुमति उपरांत दूसरा परीक्षा केन्द्र निर्धारित किया जा सकेगा। परीक्षा केन्द्र निर्धारण उपरांत शाला की मैपिंग संबंधित बी.आर.सी.सी. द्वारा 15 मई तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रश्न पत्रों का परीक्षा केन्द्रों पर ही होगा स्थल मुद्रण दोबारा परीक्षा के लिए प्रश्नपत्रों की ऑन स्पॉट प्रिंटिंग निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर ही की जाएगी। परीक्षा पोर्टल से प्रश्नपत्रों को डाउनलोड एवं प्रिंट करने के लिए जिला परियोजना समन्वयक नोडल अधिकारी होंगे। इस सबंध में संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र ने निर्देशित किया है कि, निर्धारित परीक्षा केन्द्र पर न्यूनतम 2 कम्प्यूटर/लैपटॉप, 2 कार्यशील प्रिंटर, इंटरनेट, पर्याप्त ए-4 साईज पेपर, टोनर की उपलब्धता एवं सुगम विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पुन: परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों की परीक्षा में उपस्थिति एवं परीक्षा केन्द्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित शाला प्रमुख/शिक्षक को दी गई है। गर्मी से सुरक्षा के लिए होंगी आवश्यक व्यवस्थाएं राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा प्रत्येक परीक्षा केन्द्र पर शीतल पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही नियमित अंतराल पर बच्चों को पानी पिलाये जाने, लू-लपट व डिहाईड्रेशन से सुरक्षित रखने के लिए परीक्षा केन्द्रों में ओरल रिहाईड्रेशन साल्यूशन (ओ.आर.एस.) की उपलब्धता, पंखों की व्यवस्था एवं स्वास्थ्य संबंधी विषय स्थिति परिलक्षित होने की स्थिति में निकटस्थ स्वास्थ्य केन्द्र अथवा अस्पताल ले जाने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए हैं।  

चंद्रयान-2 ने रीवा के सौरभ को ISRO में वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा दी

रीवा  कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो छोटे से गांव की मिट्टी भी आसमान छूने का हौसला दे देती है। ऐसा ही कर दिखाया है रीवा जिले की जवा तहसील के गांव पुरौना के होनहार युवा सौरभ द्विवेदी ने, जिनका चयन देश की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष संस्था इसरो (ISRO) में वैज्ञानिक पद पर हुआ है। साधारण परिवार से आने वाले सौरभ ने यह साबित कर दिया कि सफलता संसाधनों की मोहताज नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और सपनों की उड़ान पर टिकी होती है। उनके पिता शैलेन्द्र द्विवेदी एक शिक्षक हैं, जिन्होंने बेटे को शुरू से ही शिक्षा का महत्व समझाया, वहीं मां गीता द्विवेदी ने हर मुश्किल घड़ी में उनका हौसला बढ़ाया।  आईआईटी दिल्ली से एमटेक किया सौरभ की शुरुआती पढ़ाई शासकीय मार्तण्ड उत्कृष्ट क्रमांक-एक विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने भोपाल से बीटेक और देश के शीर्ष संस्थान आईआईटी दिल्ली से एमटेक की पढ़ाई पूरी की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। चंद्रयान- दो  के प्रक्षेपण से मिली थी प्रेरणा सौरभ बताते हैं कि उनका सपना तब आकार लेने लगा, जब उन्होंने चंद्रयान-दो  के प्रक्षेपण को देखा। उसी पल उन्होंने ठान लिया था कि एक दिन वे भी देश के अंतरिक्ष मिशनों का हिस्सा बनेंगे और आज उनकी मेहनत रंग लाई है। पुरौना गांव में जश्न का माहौल यह सफलता सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा है। सौरभ अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक के रूप में देश की अंतरिक्ष उपलब्धियों में योगदान देंगे और रीवा जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे। गांव पुरौना से लेकर पूरे रीवा जिले तक खुशी और गर्व का माहौल है। हर कोई सौरभ की इस उपलब्धि को सलाम कर रहा है। 

भोपाल की ट्रेनों में सस्ते एसी कोच की शुरुआत, अब कम किराए में मिलेगा एसी यात्रा का मजा

भोपाल  यात्रियों की सुविधा के लिए भोपाल रेल मंडल ने बड़ी कवायद की है। गर्मी के मौसम में मंडल ने सुरक्षित और ठंडक से भरा सफर कराने की पहल की है। इसके लिए ट्रेनों में इकोनॉमी एसी कोच लगाए जा रहे हैं। भोपाल रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इन कोचों में यात्रियों को कम किराए में एसी का आरामदायक सफर करने की सुविधा मिलेगी। इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल सकेगी। समर सीजन में हमेशा की तरह इस बार भी ट्रेनों में जबर्दस्त भीड़ चल रही है। भीषण गर्मी के कारण लोग एसी में यात्रा करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे खासतौर पर एसी थ्री कोच में लंबी वेटिंग चल रही है। ऐसे में यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। एसी का सस्ता विकल्प उपलब्ध कराने के लिए भोपाल रेल मंडल ने ट्रेनों में इकोनॉमी एसी कोच लगाने का निर्णय लिया यात्रियों को लंबी वेटिंग से निजात दिलाने और एसी का सस्ता विकल्प उपलब्ध कराने के लिए भोपाल रेल मंडल ने ट्रेनों में इकोनॉमी एसी कोच लगाने का निर्णय लिया है। भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए दस ट्रेनों में एसी इकोनॉमी कोच लगाए जाएंगे। रेल यात्रियों को जून से ये सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। मई के महीने में पहले ही 5 ट्रेनों में एसी इकोनॉमी के एक्सट्रा कोच लगाने का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। रेलवे का मानना है कि एसी इकॉनॉमी कोच के जुडऩे से ज्यादा यात्रियों को कम किराए में एसी सुविधा मिल सकेगी। रेलवे से संबंधित एक गंभीर वारदात इधर रेलवे से संबंधित एक गंभीर वारदात भी सामने आई है। हरदा जिले में टिमरनी के पास 5 मवेशियों को चुराकर रेलवे ट्रैक पर बांध दिया जिससे ट्रेन से कटने पर उनकी मौत हो गई। छिदगांव मेल के गंजालेश्वर आश्रम से चोरों ने शनिवार रात को पांच गोवंश को चुराकर रेलवे ट्रैक पर बांध दिया। ट्रेन की चपेट में आने से सभी की मौत हो गई। रविवार सुबह छिदगांव मेल में ट्रैक के पास मवेशियों के शव और रस्सी के टुकड़े मिले। जानकारी लगते ही विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के कार्यकर्ता सुबह मौके पर पहुंचे और छिदगांव मेल में हाइवे किनारे पर पांच घंटे तक प्रदर्शन करते हुए धरना दिया। इस बीच टिमरनी एसडीएम संजीव कुमार नागू, टिमरनी थाना प्रभारी मुकेश गौड़ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों को समझाइश दी। जल्द ही आरोपियों की तलाश कर गिरफ़्तारी का विश्वास दिलाया। बजरंग दल के विकास शर्मा ने कहा कि पुलिस को आरोपियों की गिरफ़्तारी के लिए 30 अप्रेल का समय दिया है। आरोपी नहीं पकड़े गए तो आंदोलन करेंगे। इस मामले में रेलवे ने भी नियमानुसार कार्यवाही शुरु कर दी है।

निगम की नई पहल: नैनो एरेटर तकनीक से तालाबों में पानी की गुणवत्ता में सुधार, 10 दिन में असर दिखा

उज्जैन  शहर के तालाबों की बिगड़ती स्थिति को सुधारने के लिए नगर निगम ने नैनो डिफ्यूजर सॉफ्ट एरेटर तकनीक का प्रयोग शुरू किया है। इसकी शुरुआत क्षीरसागर तालाब से की गई है, जहां 10 दिनों से यह तकनीक काम कर रही है। अधिकारियों द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और शुरुआती निरीक्षण में पानी की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है। नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने हाल ही में स्थल निरीक्षण किया, जिसमें पानी पहले की तुलना में साफ नजर आया। शहर में शिप्रा नदी के साथ-साथ सप्त सागर का धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व है, लेकिन जल प्रवाह नहीं होने से तालाबों का पानी अक्सर दूषित हो जाता है। इससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मृत्यु होती है। गर्मी में बदबू के कारण आसपास रहना भी मुश्किल हो जाता है। क्षीरसागर में बड़ी संख्या में मछलियां हैं, लेकिन ऑक्सीजन की कमी के कारण उनकी मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए निगम ने यह तकनीक शुरू की है। सफल होने पर इसे शहर के अन्य तालाबों में भी लागू किया जा सकेगा। यह कार्य पर्यावरणविद एसपीएस रंधावा और उनकी टीम की देखरेख में किया जा रहा है। कैसे काम करती है तकनीक नैनो डिफ्यूजर सॉफ्ट एरेटर तकनीक के तहत तालाब में ऐसे उपकरण लगाए जाते हैं जो पानी के भीतर बेहद छोटे-छोटे हवा के बुलबुले छोड़ते हैं। ये नैनो बुलबुले पानी में घुलकर ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे गंदगी फैलाने वाले बैक्टीरिया खत्म होते हैं और पानी धीरे-धीरे साफ व पारदर्शी बनने लगता है। फाउंटेन से अलग क्यों है तालाबों में पहले से लगे फव्वारे मुख्य रूप से सतह पर ही असर करते हैं और सजावटी होते हैं। नैनो एरेटर तकनीक पानी की गहराई तक पहुंचकर वास्तविक सफाई करती है और लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखती है। इसके मुख्य फायदे पानी की गुणवत्ता में सुधार बदबू और गंदगी में कमी मछलियों और जलीय जीवों को बेहतर वातावरण मिलने से उनकी मौत नहीं होगी। किनारे पर जमने वाली काई (ग्रीन लेयर) पर नियंत्रण।

कूनो में चीतों का सफल प्रजनन, 4 मादा चीतों ने 3 महीने में दी संतान, जंगल में प्रजनन को बताया टास्क

श्योपुर मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क अब चीतों का केवल आश्रय स्थल नहीं रहा, बल्कि एक सफल चीता प्रजनन केन्द्र के रूप में दुनिया भर में अलग पहचान बना चुका है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते यहां की जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र में पूरी तरह से रच बस गये हैं। कूनो की धरती अब आये दिन नन्हे शावकों की किलकारियों से गूंज रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का लुप्त हो चुके चीतों के देश में फिर से बसाने का सपना ‘प्रोजेक्ट चीता’ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में केन्द्र-राज्य के विभागों के समन्वय और प्रबंधन से वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में नये इतिहास लिखे जाने के साथ साकार हो रहा है। चुनौतियों पर विजय के बाद मिली ऐतिहासिक सफलता प्रोजेक्ट चीता का प्रारंभिक चरण शुरुआती चुनौतियों से भरा हुआ था, लेकिन कूनो की आबोहवा और विभाग के विशेषज्ञों के कुशल प्रबंधन ने सभी चुनौतियों से पार पाते हुए वन्य-जीव संरक्षण की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लुप्त प्रजाति की पुनर्स्थापना का सफलतम पर्याय बना दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और पर्याप्त शिकार चीतों के प्रजनन के लिए बेहद अनुकूल सिद्ध हुए हैं। मादा चीतों द्वारा लगातार शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि वे तनावमुक्त हैं और कूनो को अपना प्राकृतिक आवास मान चुकी हैं। क्यों बढ़ा कूनो पर दबाव?  कूनो में लगातार बढ़ रही चीतों की आबादी के कारण संसाधनों पर असर पड़ रहा है। वन क्षेत्र की सीमित क्षमता के चलते सभी चीतों को एक ही स्थान पर रखना चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा संख्या होने पर भोजन और क्षेत्र को लेकर संघर्ष बढ़ सकता है। इसके अलावा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होता है। इन्हीं कारणों से चीतों को दूसरे उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है। वन विभाग इस दिशा में वैज्ञानिक तरीके से निर्णय ले रहा है। ताकि चीतों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।   गांधी सागर बन रहा नया ठिकाना  गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के नए आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह क्षेत्र भौगोलिक और पर्यावरणीय दृष्टि से चीतों के लिए उपयुक्त माना गया है। फिलहाल यहां तीन चीतों को पहले ही बसाया जा चुका है। आने वाले समय में और चीतों को यहां शिफ्ट करने की योजना है। इससे कूनो पर दबाव कम होगा और चीतों को नया क्षेत्र मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग स्थानों पर आबादी फैलाने से उनकी संख्या सुरक्षित रूप से बढ़ेगी। यह रणनीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाई जाती है। गांधी सागर को चीता हब के रूप में तैयार किया जा रहा है। भारत बना वन्यजीव संरक्षण का उदाहरण  ‘प्रोजेक्ट चीता’ की सफलता ने भारत को दुनिया के सामने एक उदाहरण के रूप में स्थापित किया है। यह पहल दिखाती है कि सही योजना और दृढ़ इच्छाशक्ति से विलुप्त प्रजातियों को फिर से बसाया जा सकता है। कूनो अब केवल एक राष्ट्रीय पार्क नहीं, बल्कि एक ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर के रूप में उभर रहा है। दुनियाभर के वन्यजीव विशेषज्ञ इस परियोजना पर नजर बनाए हुए हैं। यह उपलब्धि भारत के संरक्षण प्रयासों की बड़ी जीत मानी जा रही है। साथ ही यह अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।   बढ़ता कुनबा : प्रोजेक्ट चीता की नई उड़ान              नए शावकों का जन्म: अप्रैल 2026 में मादा चीता गामिनी ने 3 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इससे पहले फरवरी-मार्च 2026 में ज्वाला, निर्वा और आशा भी शावकों को जन्म दे चुकी हैं।              कुल संख्या: कूनो में चीतों की संख्या अब 57 हो चुकी है।              भारत में जन्मे शावक: 27 से अधिक शावकों का जन्म भारत में ही हुआ है, जो इस परियोजना की सबसे बड़ी सफलता है।              विदेशी सहयोग: फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 8-9 नए चीते लाए गए, जिससे परियोजना को और मजबूती मिली। पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट कूनो का ब्रीडिंग सेंटर बनना केवल पर्यावरणीय उपलब्धि नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चीतों की बढ़ती संख्या के साथ यहां वाइल्डलाइफ टूरिज्म की संभावनाएं कई गुना बढ़ गई हैं। इससे श्योपुर और आसपास के जिलों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और स्थानीय युवाओं के लिए नई संभावनाएं खुल रही हैं। प्रोजेक्ट चीता-एक ऐतिहासिक यात्रा              17 सितंबर 2022: प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नामीबिया से आए 8 चीतों को कूनो में छोड़ा— यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बिग प्रेडेटर स्थानांतरण पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट था।              फरवरी 2023: दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते आए।              मार्च 2023: ज्वाला ने 70 वर्षों बाद भारत में पहले शावकों को जन्म दिया।              2024: आशा और गामिनी जैसी मादा चीतों ने नई पीढ़ी को जन्म दिया, जिसमें गामिनी ने एक साथ 5 शावकों का रिकॉर्ड बनाया।              2025-26: नई खेप के साथ प्रोजेक्ट का विस्तार और शावकों की संख्या में निरंतर वृद्धि होती गई। नई पीढ़ी और भविष्य की दिशा कूनो में अब दूसरी पीढ़ी के चीते भी विकसित हो रहे हैं। मुखी जैसी भारत में जन्मी मादा चीता का शावकों को जन्म देना पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट में जैनेटिक ब्रीडिंग के रूप में मील का पत्थर माना जा रहा है। वन विभाग अब शावकों की पहचान नामों के बजाय कोड (जैसे KP-1, KP-2) से कर रहा है, ताकि उनकी वंशावली को वैज्ञानिक तरीके से ट्रैक किया जा सके। आगे की योजना-दूसरा घर तैयार कूनो पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के दूसरे घर के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे प्रोजेक्ट चीता को और विस्तार मिलेगा और भारत में चीतों की स्थायी वापसी सुनिश्चित होगी। कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या और सफल प्रजनन ने यह साबित कर दिया है कि भारत में चीतों की वापसी का सपना अब साकार हो रहा है। यह … Read more

एंबुलेंस देरी पर सवाल: हाईकोर्ट में जनहित याचिका, ओला-उबर से हुई तुलना

जबलपुर  हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने प्रदेश से गुजरने वाले राजमार्गों में अवैध कट-प्वाइंट्स को चुनौती के मामले में जवाब-तलब कर लिया है। इस सिलसिले में सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव, एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग के एसीएस सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। जनहित याचिकाकर्ता डिंडौरी निवासी सेवानिवृत्त अधिकारी महावीर सिंह ने अपना पक्ष स्वयं रखा। उन्होंने दलील दी कि जब ओला-उबर जैसी गाड़ियां दो मिनट के भीतर पहुंच जाती हैं, तो एंबुलेंस क्यों नहीं पहुंचती है। उन्होंने बताया कि भोपाल-जबलपुर हाईवे में डिवाइडर तोड़कर 300 कट बना लिए हैं, इससे स्पीड कम होती है और दुर्घटनाएं भी बढ़ती हैं। प्रदेश से गुजरने वाले राजमार्गों में अवैध कट-प्वाइंट्स के कारण एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती हैं, यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। लिहाजा, जनहित याचिका को बेहद गंभीरता से लिया जाए। कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। जवाब आने के बाद आगे दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

विज्ञान के प्रति नई दृष्टि हुई विकसित

भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा आयोजित 18वीं विज्ञान मंथन यात्रा का समापन सोमवार को नेहरू नगर स्थित विज्ञान भवन भोपाल में उत्साहपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में हुआ। 21 से 27 अप्रैल तक आयोजित इस ज्ञानयात्रा में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों ने सहभागिता करते हुए विज्ञान के प्रति नई दृष्टि विकसित की।यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक कक्षा शिक्षा से आगे बढ़ाकर विज्ञान के व्यावहारिक एवं अनुप्रयुक्त स्वरूप से परिचित कराना था। इस दौरान प्रतिभागियों ने देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों का शैक्षणिक भ्रमण किया, जिसमें श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, बेंगलुरु स्थित इसरो के उन्नत अनुसंधान प्रतिष्ठान, इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क और चेन्नई के वैज्ञानिक संग्रहालयों एवं प्लेनेटेरियम का अवलोकन शामिल रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिवकुमार शर्मा ने ‘विज्ञान’ एवं ‘मंथन’ की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि विज्ञान सत्य की खोज की सतत प्रक्रिया है, जबकि मंथन निरंतर चिंतन एवं आत्मविश्लेषण का प्रतीक है। दोनों के समन्वय से नवाचार एवं सृजन की संभावनाएँ विकसित होती हैं। इस अवसर पर मैपकास्ट के निदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा कि विज्ञान केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रयोग एवं अनुभव के माध्यम से जीवन में उतरने वाली प्रक्रिया है। कार्यक्रम में डॉ. वी.के. कटारे, मिशन एक्सीलेंस प्रभारी डॉ. सुनील गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न समूहों के चयनित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने बताया कि रॉकेट प्रक्षेपण स्थल, उपग्रह नियंत्रण प्रणाली तथा अंतरिक्ष अनुसंधान की जटिल प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष देखने से उनके ज्ञान, जिज्ञासा एवं आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।ग्रुप हेड डॉ. रामानुज पाठक, डॉ. राजकुमार शर्मा एवं सीमा अग्निहोत्री सहित शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस यात्रा से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, अनुशासन, टीमवर्क एवं जिज्ञासा का विकास हुआ है तथा कक्षा-कक्ष से बाहर सीखने की यह पद्धति अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है।कार्यक्रम के अंत में मिशन एक्सीलेंस प्रभारी डॉ. सुनील गर्ग ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी प्रतिभागियों, आयोजकों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। समापन अवसर पर यह स्पष्ट हुआ कि विज्ञान मंथन यात्रा केवल एक शैक्षणिक भ्रमण नहीं, बल्कि एक प्रभावी ज्ञानयात्रा है, जो विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर उन्हें भविष्य में नवाचार एवं अनुसंधान के लिए प्रेरित करती है। 

4 लाख 20 हजार किसानों से 17 लाख 82 हजार मीट्रिक टन गेहूं का हुआ उपार्जन

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्ध की विपरीत परिस्थिति के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिकटन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। सभी जिलों में लघु सीमांत के साथ ही मध्यम एवं बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही गेहूं का उपार्जन भी किया जा रहा है। दो दिन में बड़े एवं मध्यम वर्ग के एक लाख 36 हजार किसानों ने स्लॉट बुक कराया है। पूरे प्रदेश में स्लॉ्ट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 9 मई तक की गई है। किसानों की सुविधा के लिए खरीदी के लिये प्रत्येक शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन का कार्य जारी रहेगा। अभी तक प्रदेश मे समर्थन मूल्य् पर गेहूं उपार्जन के लिये 9.23 लाख किसानों द्वारा 52.53 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किए जा चुके है। प्रदेश में 4 लाख 20 हजार 277 किसानों से 17 लाख 82 हजार 984 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय करने वाले किसानों को 2546.92 करोड़ रुपये के भुगतान के लिये ईपीओ जनरेट किए गए। उपार्जन केन्द्र की क्षमता अनुसार उपज की तौल की जा सके एवं अधिक से अधिक किसानों से उपार्जन किया जा सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रो पर प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्द्र पर गेहूं विक्रय के लिये स्लॉट बुकिंग की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन प्रति उपार्जन केन्द्र किया गया। तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है। किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय में किसी प्रकार की परेशानी न हो एवं उपज विक्रय के लिए इंतजार न करना पड़े इसके लिये किसानों को जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थाल, जन सुविधाएं आदि की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिये समस्त आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं, जिसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि की व्यवस्थाए की गई है। उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो ग्राफ्स भारत सरकार के पीसी सेप पोर्टल पर अपलोड करने की कार्यवाही की जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यसवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूं की भर्ती जूट बारदाने के साथ-साथ PP/HDP बेग एवं जूट के एक भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिये भण्डारण की पर्याप्त व्यावस्था की गई है, जिससे उपार्जित गेहूं का सुरक्षित भण्डारण किया जा सके।  

‘‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ को वैज्ञानिक दिशा प्रदान करेगी विशेषज्ञ समिति

भोपाल देश में वन्य जीव संरक्षण को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने ‘‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति का गठन देशभर के चिड़ियाघरों में संचालित ‘‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ गतिविधियों की समीक्षा, मार्गदर्शन और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। समिति में पहली बार मध्यप्रदेश कैडर के आईएफएस अधिकारी डॉ. ए. अंसारी को शामिल किया गया है। डॉ. अंसारी प्रदेश के सिवनी में वर्किंग प्लान अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। समिति में विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें- डॉ. ए. अंसारी (वर्किंग प्लान ऑफिसर, सिवनी, मध्यप्रदेश), डॉ. मनोज वी. नायर (अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, ओडिशा), डॉ. कार्तिकेयन वासुदेवन (वैज्ञानिक, हैदराबाद) और डॉ. अभिजीत पावडे (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली) शामिल हैं। समिति का कार्यकाल आदेश जारी होने की तिथि से 6 माह निर्धारित किया गया है। गैर-सरकारी सदस्यों को बैठक शुल्क एवं यात्रा भत्ता केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा प्रदान किया जाएगा। प्राधिकरण समिति को आवश्यक प्रशासनिक एवं सचिवीय सहयोग भी उपलब्ध कराएगा। ‘‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ समिति का गठन देश में वन्यजीव संरक्षण और लुप्तप्राय प्रजातियों के वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से संरक्षण प्रजनन कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी, संगठित और परिणामोन्मुख बनाने में मदद मिलेगी। इस समिति के गठन से देशभर के चिड़ियाघरों में संचालित संरक्षण प्रयासों को नई दिशा और मजबूती मिलने की उम्मीद है। समिति चिड़ियाघरों में संरक्षण प्रजनन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। इनमें—संरक्षण प्रजनन प्रस्तावों की समीक्षा एवं सिफारिशें, वित्तीय सहायता के प्रस्तावों का परीक्षण, प्राथमिकता वाली प्रजातियों की पहचान और सूची का पुनरीक्षण, समन्वयक और सहभागी चिड़ियाघरों की भूमिका निर्धारित करना,कार्यक्रम के मूल्यांकन और मॉनिटरिंग के लिए मानकीकृत प्रक्रियाओं का विकास, प्रगति रिपोर्ट के लिए प्रारूप तैयार करना और चिड़ियाघरों के मूल्यांकन हेतु प्रश्नावली विकसित करना शामिल हैं। समिति मास्टर प्लान प्रस्तुत करने के लिए प्रारूप भी तैयार करेगी और आवश्यकतानुसार अन्य कार्य भी संपादित करेगी।  

बीते चार वर्ष में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आया सकारात्मक बदलाव

भोपाल  मध्यप्रदेश में संचालित सांदीपनि विद्यालय शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की अनूठी नजीर पेश कर रहे हैं। एमपी बोर्ड के हाल ही जारी 10वीं-12वीं के परीक्षा परिणामों में सांदीपनि विद्यालयों के 58 विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय मेरिट में स्थान पाने में सफलता हासिल की है। इतना ही नहीं, एमपी बोर्ड की इन परीक्षाओं में सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम साल दर साल बेहतर हो रहा है। विगत चार वर्षों में सांदीपनि विद्यालयों ने 10वीं-12वीं के परीक्षा परिणामों में 20 से 28 प्रतिशत तक का सुधार दर्ज कराया है। वर्ष 2026 में कक्षा 10 की राज्य स्तरीय मेरिट सूची में जहां 41 विद्यार्थी सांदीपनि विद्यालयों से हैं, वहीं कक्षा 12 में विज्ञान, वाणिज्य, कला और कृषि संकायों की मेरिट सूची में 17 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। 10वीं में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ी वर्ष 2023 से संचालित इन सांदीपनि विद्यालयों के वर्ष 2026 तक के परीक्षा परिणामों में वर्ष दर वर्ष प्रगति हो रही है। वर्ष 2023 में एमपी बोर्ड की कक्षा 10वीं में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत 68 था, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 88 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं 10वीं कक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत भी 46 से बढ़कर 75 प्रतिशत से अधिक हो गया है। 12वीं का परीक्षा परिणाम 28 प्रतिशत तक सुधरा कक्षा 12वीं में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत वर्ष 2023 के 59 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2026 में बढ़कर 87 प्रतिशत से अधिक हो गया। वहीं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत 42 से बढ़कर 75 प्रतिशत तक हो गया। सांदीपनि विद्यालयों के प्रयास उत्कृष्ट परिणाम देने पर केंद्रित इन उपलब्धियों के पीछे सांदीपनि विद्यालयों में सुदृढ़ शैक्षणिक वातावरण, नियमित एवं प्रभावी मॉनिटरिंग, शिक्षक-छात्रों के बीच बेहतर संवाद तथा परिणाम आधारित रणनीतियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रथम श्रेणी में विद्यार्थियों के उत्तीर्ण होने के प्रतिशत में निरंतर वृद्धि इस बात का संकेत है कि अब प्रयास केवल परीक्षा पास करने तक सीमित न रहकर उत्कृष्ट परिणाम देने पर केंद्रित हो रहे हैं। इन प्रयासों ने शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, प्रतिस्पर्धा की भावना तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रेरणा भी विकसित की है। परिणामोन्मुख और छात्र-केंद्रित शिक्षा का प्रेरणादायक मॉडल सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश के लिए किसी प्रकार की मेरिट या चयन परीक्षा की अनिवार्यता नहीं होती है। इन विद्यालयों में स्थानीय या आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। इन विद्यालयों के कारण सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के विद्यार्थियों को भी शिक्षा के आदर्श और आधुनिक वातावरण में अध्ययन करने का अवसर मिलता है। ऐसे में सांदीपनि विद्यालय आज गुणवत्तापूर्ण, परिणामोन्मुख और छात्र-केंद्रित शिक्षा का एक सशक्त और प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रहे हैं।