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इन्फेंट्री कमांडर्स’ कांफ्रेंस महू में शुरू, 9 से 11 दिसंबर तक आधुनिक हथियारों और प्रशिक्षण पर होगी चर्चा

महू  इन्फेंट्री स्कूल महू में 38वीं इन्फेंट्री कमांडर्स’ कांफ्रेंस का शुभारंभ किया गया। तीन दिवसीय यह सम्मेलन  11 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें इन्फेंट्री के परिचालन, प्रशिक्षण और प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा की जाएगी। सम्मेलन में सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम सहित देशभर से आए वरिष्ठ इन्फेंट्री अधिकारी भाग ले रहे हैं। इसमें फार्मेशन कमांडर, विभिन्न रेजीमेंटों के कर्नल, रेजीमेंटल सेंटर कमांडेंट और चयनित कमांडिंग आफिसर शामिल हैं। आयोजन महू में मुख्य रूप से हो रहा है, जबकि कई सैन्य केंद्र वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हैं। हथियारों का शक्ति प्रदर्शन होगा     कांफ्रेंस के दौरान इन्फेंट्री में हाल ही में शामिल अत्याधुनिक हथियारों और उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। नई हथियार प्रणालियों और शस्त्रास्त्रों का शक्ति प्रदर्शन कर उनकी क्षमता और उपयोगिता प्रस्तुत की जाएगी।     आधुनिकीकरण, पुनर्गठन, मानव संसाधन प्रबंधन और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने की रणनीतियों पर यह सम्मेलन विशेष रूप से केंद्रित है। चर्चा का उद्देश्य इन्फेंट्री को भविष्य की चुनौतियों के लिए और अधिक सशक्त बनाना तथा संचालन क्षमता को नई तकनीकों के अनुरूप उन्नत करना है।  

हाईकोर्ट का निर्णय: विवाहेतर यौन संबंध के मामले में तस्वीरों के आधार पर तलाक का फैसला सही

जबलपुर  विवाहेतर यौन संबंध में 65 बी सर्टिफिकेट के बिना तस्वीरों के आधार पर दिया गया तलाक का फैसला सही है. हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट और जस्टिस बी पी शर्मा की युगलपीठ ने अहम फैसले में कहा है कि शादी के मामले में इंडियन एविडेंस एक्ट पूरी तरह से लागू नहीं होता है. युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि 65-बी सर्टिफिकेट के बिना कुटुंब न्यायालय के द्वारा तस्वीर को देखते हुए विवाहेतर यौन संबंध के आधार पर तलाक की डिक्री जारी करने में कोई गलती नहीं की है. युगलपीठ ने इस आदेश के साथ दायर अपील को खारिज कर दिया. कुटुंब न्यायालय के फैसले को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती बालाघाट निवासी महिला की तरफ से कुटुंब न्यायालय के द्वारा तलाक की डिक्री जारी किये जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. अपील में कहा गया था कि उसका विवाह साल 2006 में अनावेदक के साथ हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार हुआ था. अनावेदक पति ने एक अन्य व्यक्ति के साथ उसकी आपत्तिजनक फोटो के साथ कुटुंब न्यायालय ने तलाक के लिए आवेदन किया था. फोटो के साथ इंडियन एविडेंस एक्ट के तहत प्रमाणिता के लिए 65-बी सार्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं किया गया था. अपील में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा गया था कि एविडेंस एक्ट, 1872 के सेक्शन 65-बी का पालन करना जरूरी है. अपीलकर्ता के मोबाइल में यह तस्वीर गलती से अनावेदक पति के मोबाइल पर ट्रांसफर हो गई थी. जिसके बाद पति ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया. एविडेंस एक्ट की सेक्शन 65-बी के तहत बिना प्रमाणिता सार्टिफिकेट के कुटुंब न्यायालय द्वारा पारित आदेश निरस्त करने योग्य है. 'पति के पास पत्नी के मोबाइल फोन पर उसके एडल्टरी के थे सबूत' हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट और जस्टिस बी पी शर्मा की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि "अपीलकर्ता ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि वह तस्वीरों में नहीं थी. सिर्फ यह कहा गया है कि तस्वीरें किसी ट्रिक का इस्तेमाल करके बनाई गई हैं. नकली तस्वीरें किसने और किस तरीके से क्यों बनाई हैं, इसका भी उल्लेख नहीं किया है. अपीलकर्ता ने अपने बयान में कहा था कि तस्वीरें उसके मोबाइल से पति के मोबाइल में ट्रांसफर की गईं, फिर पति ने उसका मोबाइल तोड़ दिया. पति के पास पत्नी के मोबाइल फोन पर उसके एडल्टरी के सबूत थे. कोई भी इंसान नहीं चाहेगा कि उसकी पत्नी एडल्टरी करती रहे. इसलिए पति ने गुस्से में पत्नी का मोबाइल फोन तोड़ दिया. जिससे उसकी अपने पार्टनर से बातचीत बंद हो जाए. जिस फोटोग्राफर ने फोटो खींची थी उससे भी कोर्ट में पूछताछ की गई थी." 'इंडियन एविडेंस एक्ट शादी के मामलों में पूरी तरह लागू नहीं होता' युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि "इंडियन एविडेंस एक्ट शादी के मामलों में पूरी तरह लागू नहीं होता है. फैमिली कोर्ट एक्ट के सेक्शन 14 के मुताबिक कुटुंब न्यायालय को सच्चाई का पता लगाने के लिए सबूत के तौर पर कोई भी रिपोर्ट, बयान, डॉक्यूमेंट्स लेने का अधिकार दिया गया है. कुटुंब न्यायालय ने इन तस्वीरों पर भरोसा करके विवाहेतर यौन संबंध के आधार पर तलाक की डिक्री जारी करके कोई गलती नहीं की. युगलपीठ ने इस आदेश के साथ महिला की अपील को खारिज कर दिया.

खजुराहो में हुई निवेश पर बैठक, 5 औद्योगिक इकाइयों को मिली मंजूरी, मध्यप्रदेश की आर्थिक दिशा मजबूत

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में खजुराहो में हुई निवेश संवर्धन पर मंत्रि-परिषद समिति की बैठक 5 औद्योगिक इकाइयों को मिली मंजूरी आर्थिक संपन्नता की ओर मध्यप्रदेश, होगा निवेश-बढ़ेंगे रोजगार भोपाल  राज्य में निवेश संवर्धन और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खजुराहो में 9 दिसंबर को निवेश संवर्धन पर मंत्रि-परिषद समिति (CCIP) की अहम बैठक ली। बैठक में 5 औद्योगिक इकाइयों के निवेश प्रकरणों को मंजूरी दी गई। साथ ही प्रदेश के जिलों में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं को दी जाने वाली वित्तीय सुविधाओं के संबंध में अहम निर्णय लिए गए। बैठक में उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, एमएसएमई मंत्री  चैतन्य काश्यप, कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल, संस्कृति-पर्यटन-धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव  अनुराग जैन सहित प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे। जे.के. सीमेंट के साथ 1850 करोड़ का विस्तार, 800 लोगों को रोजगार मंत्रि-परिषद समिति की बैठक में जे.के. सीमेंट कंपनी के निवेश प्रकरण पर चर्चा हुई। कंपनी वर्तमान में पन्ना जिले में 2600 करोड़ रुपये के इंटीग्रेटेड क्लिंकर और सीमेंट प्रोडक्शन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है और 6 हजार से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रही है। जे.के. सीमेंट भविष्य में 1850 करोड़ रूपये से अधिक के अतिरिक्त निवेश से यूनिट का विस्तार कर रही है, जिससे 800 लोगों को रोजगार मिलेगा। अल्केम लैबोरेट्रीज का उज्जैन में 500 करोड़ का निवेश बैठक में अल्केम लैबोरेट्रीज कंपनी का निवेश प्रकरण भी रखा गया। यह कंपनी फार्मा क्षेत्र में फार्मूलेशन-एपीआई और बल्क ड्रग प्रोडक्शन कर रही है। इस कंपनी ने मुंबई में हुए रोड-शो के दौरान 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की इच्छा जताई थी। कंपनी ने उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी में टैबलेट, कैप्सूल, ड्राई सिरप और ड्राई पाऊडर इंजेक्शन के निर्माण के लिए यूनिट की स्थापना का प्रस्ताव दिया है। इससे 500 लोगों को रोजगार मिलेगा। नई अर्थव्यव्स्था को मजबूत करने डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में बड़ा निवेश राज्य में डिजिटल अवसंरचना, क्लाउड सेवाओं तथा डेटा-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में मेसर्स कंट्रोल एस डेटा सेंटर लिमिटेड द्वारा बड़वई आईटी पार्क, भोपाल में लगभग 500.20 करोड़ रूपये के निवेश से डेटा सेंटर सुविधा विकसित की जा रही है। परियोजना से प्रदेश में लगभग 870 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों का सृजन होगा। यह निवेश प्रदेश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय डेटा नीति, एवं मध्यप्रदेश आईटी और ईएसडीएम निवेश संवर्धन नीति-2023 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाएगा। ग्वालियर में 327.10 करोड़ सीसीएल मेन्युफेक्चरिंग यूनिट राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, ई.एस.डी.एम. (Electronic System Design and Manufacturing) सेक्टर को प्रोत्साहन प्रदान करने एवं स्थानीय उत्पादन क्षमताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केदारा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा ग्वालियर, मध्यप्रदेश में लगभग 327.10 करोड़ रूपये के निवेश सेकॉपर क्लैड लैमिनेट (CCL) निर्माण इकाई स्थापित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया। परियोजना से राज्य में लगभग 220 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर उपलब्ध होंगे। फूड प्रोसेसिंग में उज्जैन को मिलेगी नई पहचान विश्व की सबसे बड़ी पोटेटो फ्लेक्स निर्माताओं में शामिल अहमदाबाद की इस्कॉन बालाजी फूड्स ने उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी में 110 करोड़ रूपये के निवेश से यूनिट स्थापित कर उत्पादन शुरू कर दिया है। इससे 350 लोगों को रोजगार मिला है। औद्योगिक नीति के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक अनुमोदन बैठक में मंत्री मंडलीय समिति ने सभी प्रस्तावित एवं संचालित परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक अनुमोदन दिया। इसके तहत प्रचलित उद्योग संवर्धन समितियों में उपलब्ध प्रावधानों के साथ ही अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करने पर सहमति बनी। इस निर्णय से न केवल प्रदेश में औद्योगिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा बल्कि युवाओं के लिये बड़े पैमाने पर रोजगार अवसर भी उपलब्ध होंगे।  

स्कूल शिक्षा में डिजिटल इन्फ्रॉस्ट्रक्चर बढ़ाने पर ध्यान, शिक्षकों को मिले टैबलेट

स्कूल शिक्षा में डिजिटल इन्फ्रॉस्ट्रक्चर बढ़ाने पर दिया गया विशेष ध्यान शिक्षकों की डिजिटल क्षमता के लिये प्रदान किये गये टैबलेट भोपाल प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये शिक्षकों को डिजिटल उपकरण प्रदान कर सक्षम बनाया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में डिजिटल टेक्नोलॉजी के विकास और स्कूल के सभी स्तरों पर प्रौद्योगिकी के उभरते हुए भविष्य को देखते हुए डिजिटल इन्फ्रॉस्ट्रक्चर, ऑनलाइन शिक्षण मंच और उपकरणों की उपलब्धता की सिफारिश की गयी है। प्रदेश में प्राथमिक एवं माध्यमिक शासकीय विद्यालयों के 2 लाख 43 हजार शिक्षकों को टैबलेट प्रदान किये गये हैं। विभाग ने सरकारी हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूलों के 44 हजार शिक्षकों को भी टैबलेट उपलब्ध कराये हैं। शिक्षक इन टैबलेट का उपयोग बच्चों की शिक्षण व्यवस्था में कर रहे हैं। रोबोटिक्स लैब विभाग ने प्रदेश के 52 सांदीपनि विद्यालयों में रोबोटिक्स लैब स्थापित किये हैं। इस वर्ष विभाग ने 458 पीएम स्कूलों में अटल टिकरिंग लैब विकसित की हैं। राज्य के 100 प्रतिशत जनशिक्षा केन्द्र, जिनकी संख्या 3063 है, उन केन्द्रों में हाई परफार्मेंस पीसी प्रिंटर और यूपीएस की उपलब्धता सुनिश्चित की है। शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए छात्रों को विज्ञान एवं गणित विषय के डिजिटल ई-कंटेंट उपलब्ध कराये गये हैं। व्यावसायिक शिक्षा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिये जाने की सिफारिश की गयी है। प्रदेश के 3367 सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा दिये जाने की व्यवस्था की गयी है। प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम में 17 ट्रेड मंजूर किये गये हैं। पिछले वर्ष 4 लाख से अधिक छात्रों का नामांकन कक्षा-9 से 12 तक किया गया था। इस वर्ष नामांकित छात्रों की संख्या करीब 6 लाख है। पिछले 2 वर्षों में 690 शासकीय विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है। प्रदेश में कॅरियर सप्ताह का आयोजन सरकारी स्कूलों के बच्चों को पढ़ाई के दौरान कॅरियर संबंधी सलाह के लिये इस वर्ष कॅरियर सप्ताह का आयोजन किया जा चुका है। सप्ताह के दौरान 4311 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के 2 लाख विद्यार्थियों को कॅरियर चयन संबंधी सलाह दी गयी है।  

SIR रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: मध्यप्रदेश में 8.13 लाख मृत मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल, 99% फॉर्म डिजिटलाइज

भोपाल   मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम लगातार जारी है। जिसके तहत एन्युमरेशन फॉर्मों को डिजिटलाइज करने का काम जारी है। निर्वाचन सदन के मुताबिक 99 प्रतिशत से ज्यादा फॉर्म डिजिटलाइज किए जा चुके है। जिसके तहत मध्यप्रदेशमें अब तक 8.13 लाख मृत मतदाताओं की पहचान की जा चुकी है। 2,43 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं। जिनके दो जगह नाम मिले है। 10 दिसंबर तक बैठकें आयोजित निर्वाचन सदन द्वारा फॉर्म प्रकाशन और प्राप्ति के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की पहचान और सत्यापन के लिए बैठकें होंगी। सभी मतदान केंद्रों पर 6 दिसंबर से 10 दिसंबर तक बीएलओ बीएलए और अन्य सहयोगियों की बैठकें आयोजित की जाएगी। चुनाव आयोग के निर्देश पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय सभी जिलों में एसआईआर प्रक्रिया तेजी से करवा रहा है और दिन में तीन बार कलेक्टरों से रिपोर्ट ले रहा है। 27 अक्टूबर को वोटर लिस्ट फ्रीज होने के बाद 4 नवंबर से एसआईआर का कार्य शुरू हुआ था, जिसका प्रारूप परिणाम 16 दिसंबर को प्रकाशित होगा। अभी शिफ्टेड मतदाताओं की सूची प्राप्त नहीं हुई है, जो प्रकाशन से पहले स्पष्ट की जाएगी। फार्म नहीं भरा तो कट सकता है वोट मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं को एसआईआर फार्म मिला है, उन्हें 2003 की एसआईआर के आधार पर परिजनों/खुद की जानकारी देना अनिवार्य है। यदि कोई मतदाता बीएलओ के लगातार प्रयासों के बाद भी फार्म जमा नहीं करता, तो उसका नाम भी 16 दिसंबर की सूची से हटाया जा सकता है। संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपीएस जादौन ने अपील की है कि सभी मतदाता समय रहते फार्म जमा करें, ताकि नाम कटने की स्थिति से बचा जा सके। किन जिलों में सबसे अधिक मृत वोटर्स? सूत्रों के अनुसार जबलपुर और सागर में मृत मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा, जबकि सीहोर और पन्ना में सबसे कम पाई गई है। हालांकि आयोग ने इन आंकड़ों को अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है। 10 दिसंबर तक होगा सत्यापन एसआईआर कार्यवाही के तहत अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डबल-एंट्री वाले मतदाताओं की पहचान के लिए 10 दिसंबर तक हर मतदान केंद्र पर BLO–BLA की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। प्रदर्शित सूचियों का राजनीतिक दलों से अवलोकन कराने और 11 दिसंबर तक आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा तय की गई है, ताकि BLO ऐप के माध्यम से समय पर संशोधन किया जा सके। जबलपुर और साग्र में सबसे ज्यादा मामले एसआइआर से मिले अब तक के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा मृत मतदाता प्रदेश के जबलपुर और सागर जिले में चिह्नित हुए हैं। और सबसे कम सीहोर और पन्ना में मिले है। हालांकि एसआइआर प्रक्रिया अभी जारी होने से आंकड़ों में बढ़ोत्तरी संभव है। इन नामों को सूची से बाहर किया जाएगा। वहीं गणना पत्रक प्राप्त होने पर अनुपस्थित स्थानांतरित, मृत एवं वोहरी प्रविष्टि को छोड़कर अन्य के नाम प्रारूप सूची में शामिल होंगे।

वक्फ विवाद में बड़ा फैसला: गांव पर किया गया दावा खारिज, खंडवा में कार्रवाई तेज

खंडवा  एमपी के खंडवा जिले के सिहाड़ा गांव में मंगलवार को तब हड़कंप मच गया जब प्रशासन ने दरगाह पीर मौजा परिसर के आसपास अवैध कब्जों पर बुलडोजर चला दिया। इस दौरान 6 थाने की पुलिस मौजूद रही। इससे पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई। दरगाह कमेटी में इस जमीन को वक्फ की बताया था। कमेटी में जिस खसरा नंबर पर दावा किया था वह खसरा पूरे गांव का खसरा था। खसरे के मुताबिक पूरे गांव की जमीन को वक्फ प्रॉपर्टी बता दिया गया था। इसको लेकर हड़कंप मच गया था। मामले की शुरुआत तब हुई जब सिहाड़ा ग्राम पंचायत ने सरकारी जमीन पर दुकान निर्माण के लिए दरगाह कमेटी को नोटिस भेजा था। सिहाड़ा ग्राम पंचायत सरपंच प्रतिनिधि हेमंत सिंह चौहान का कहना है कि जिस जगह पर अवैध कब्जा किया गया है। वह सरकारी जमीन है। ग्राम पंचायत ने जमीन पर बाजार बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए ग्राम पंचायत ने फरवरी में संबंधित पक्ष को नोटिस दिया था। कब्जाधारी पक्ष की ओर से कहा गया कि जमीन वक्फ की है आप वहां बाजार नहीं बना सकते हैं। इसके बाद सिहाड़ा ग्राम पंचायत ने तहसीलदार से गुहार लगाई थी। तहसीलदार की ओर से भी कब्जाधारियों को नोटिस जारी किया गया था लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बजाए दरगाह कमेटी ने दुकान की जमीन समेत पूरे सिहाड़ा गांव की 14.500 हेक्टयर भूमि (जिस पर गांव बसा है) को वक्फ की बता दिया था। इतना ही नहीं कब्जाधारियों ने पूरे गांव को वक्त की संपत्ति बताकर भोपाल वक्फ ट्रिब्यूनल में अपील तक कर दी थी। इधर जिस रकबे पर पूरा गांव बसा है उसे वक्फ का बताए जाने को लेकर सिहाड़ा के लोगों में खलबली मच गई थी। हालांकि समिति ने बाद में कहा कि देखिए जी खसरा नंबर में टाइपो एरर होने के चलते यह स्थिति बन गई है। फिर वक्फ ट्रिब्यूनल में सुनवाई शुरू हो गई। वक्फ ट्रिब्यूनल ने ग्राम पंचायत को नोटिस जारी किया था। साथ ही वक्फ बोर्ड से भी दावे के पक्ष में दस्तावेज मांगे थे। वक्फ बोर्ड को इसके लिए टाइम दिया गया था। सरपंच प्रतिनिधि हेमंत चौहान ने भी अपने अधिवक्ता के माध्यम से गांव का पक्ष रखा। आखिरकार ट्रिब्यूनल का फैसला आया और उसने कब्जाधारियों के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वक्फ बोर्ड ने निर्धारित समय में अपने दावे के पक्ष में जरूरी दस्तावेज पेश नहीं किए हैं इसलिए उनका दावा खारिज किया जाता है। ग्राम पंचायत ने सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने के लिए जिला प्रशासन को आवेदन दिया था। फैसला आते ही प्रशासन का अमला पूरे दलबल के साथ मौके पर पहुंचा और अवैध कब्जे के खिलाफ ऐक्शन शुरू कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि फैसले के बाद दरगाह पीर मौजा परिसर के आसपास का अतिक्रमण हटाया गया। दरगाह पीर मौज परिसर में दुकान तक बना दी गई गई थी जिसे बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। एक शौचालय और तार फेंसिंग को भी बुलडोजर चलाकर हटा दिया गया। बताया जाता है कि दरगाह परिसर में ही सामुदायिक भवन था। गौर करने वाली बात यह कि इस सामुदायिक भवन में मदरसा चलाया जा रहा था। प्रशासन के ऐक्शन के बाद मदरसे का संचालन बंद करा दिया गया है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान राजस्व और पुलिस के आला अधिकारी मौजूद रहे। खंडवा एसडीएम बजरंग बहादुर ने बताया कि ग्राम सिहाड़ा में कुछ लोगों ने सरकार की जमीन को वक्फ की संपत्ति बता कर अवैत तरीके से कब्जा कर लिया था। दुकान बना ली गई थी। प्रशासन ने बुलडोजर लगाकर अवैध कब्जों को हटा दिया है। दरगाह क्षेत्र से पूरे अतिक्रमण को हटा दिया गया है। 

मध्यप्रदेश–महाराष्ट्र पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से बड़ी सफलता

6 वर्षीय मासूम बालिका महाराष्ट्र के ट्यूशा गांव से सकुशल बरामद भोपाल पुलिस की सतत मॉनिटरिंग और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर बैतूल पुलिस टीम ने महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से संयुक्त कार्रवाही कर महाराष्ट्र राज्य के ट्यूशा गांव (मोर्शी क्षेत्र) से 6 वर्षीय मासूम बालिका को सुरक्षित दस्‍तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया। फरियादी ने 07 दिसंबर 2025 को सूचना दी कि उसकी बालिका घर के सामने खेल रही थी, तभी गांव का ही एक आदतन अपराधी उसे मोटरसाइकिल से ले गया। परिजनों द्वारा तलाश के बाद भी बालिका नहीं मिली। सूचना पर थाना कोतवाली में प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक नर्मदापुरम जोन श्री मिथिलेश शुक्ला, उप पुलिस महानिरीक्षक नर्मदापुरम श्री प्रशांत खरे, पुलिस अधीक्षक बैतूल श्री वीरेंद्र जैन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमला जोशी ने स्वयं निरीक्षण कर आवश्यक दिशा–निर्देश जारी किए। शुरुआती जांच में अनिल कुशराम निवासी खड़का जामगांव, जिला अमरावती (महाराष्ट्र) पर शंका व्यक्त की गई, जो हाल ही में अमरावती जेल से पैरोल पर रिहा हुआ है। आरोपी के विरुद्ध पूर्व में हत्या, दुष्कर्म एवं चोरी जैसे गंभीर अपराध दर्ज हैं। वरिष्‍ठ अधिकारियों के निर्देशन में मुलताई, आमला, आठनेर, बोरदेही एवं मासौद चौकी की पुलिस टीमों को तत्काल सक्रिय किया गया। आरोपी के महाराष्ट्र की ओर भागने की संभावना को देखते हुए महाराष्ट्र पुलिस को भी तुरंत सूचना दी गई और संयुक्त टीम गठित कर दी गई। संयुक्त सर्च ऑपरेशन में तकनीकी टीमों, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और सर्चिंग पार्टियों को सक्रिय किया गया। लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप आरोपी की लोकेशन महाराष्ट्र के मोर्शी क्षेत्र में ट्रेस हुई, जिसके बाद ट्यूशा गांव में बालिका को सुरक्षित दस्‍तयाब किया गया। बालिका पूरी तरह सुरक्षित है और उसे परिजनों के सुपुर्द किया जा चुका है। आरोपी अनिल कुशराम घटना के बाद फरार है। उसकी गिरफ्तारी हेतु बैतूल पुलिस की विशेष टीम लगातार महाराष्ट्र एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में खोज कर रही है।  

मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी सफलता

रीवा और ग्वालियर में दो अपराधों का खुलासा कर 57 लाख से अधिक की संपत्ति जब्‍त कर 62 घटनाओं में लिप्‍त गिरोह पकड़े गए भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस ने संगठित आपराधिक नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई करते हुए रीवा और ग्वालियर जिलों में दो बड़ी सफलताएँ हासिल की हैं। रीवा पुलिस ने विगत दो वर्षों से सक्रिय विद्युत तार चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 50 लाख रुपये मूल्य का माल बरामद किया, जबकि ग्वालियर पुलिस ने मैरिज गार्डन में हुई चोरी का त्वरित खुलासा कर 7 लाख 80 हजार रूपए नगद बरामद किए गए। रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई — अंतरराज्यीय विद्युत तार चोरी गिरोह का पर्दाफाश रीवा पुलिस ने एमपीईबी विभाग के विद्युत तार चोरी एवं सोलर पावर प्लांट से कॉपर केबल चोरी की कुल 62 घटनाओं का खुलासा करते हुए 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पुलिस ने लगभग 50 लाख रुपये मूल्य के एल्यूमिनियम और कॉपर तार, पाँच वाहन तथा चोरी में इस्तेमाल उपकरण (कटर, इलेक्ट्रिक डिटेक्टर, सीढ़ी आदि) बरामद किए हैं। पुलिस ने 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के विश्लेषण के साथ उत्तर प्रदेश और अन्य जिलों की पुलिस से समन्वय स्थापित किया। जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य पूर्व में बिजली विभाग के ठेकेदारों से जुड़े थे और चोरी का माल कबाड़ियों को बेचते थे। इस कार्रवाई से जिले में लंबे समय से जारी विद्युत संरचना चोरी की घटनाओं पर निर्णायक अंकुश लगा है। ग्वालियर के थाना महाराजपुरा क्षेत्र स्थित अभिनंदन वाटिका में एक लगुन कार्यक्रम के दौरान 11 लाख की चोरी हुई थी। क्राइम ब्रांच और थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर सूचना के आधार पर आरोपी संतोष सिसोदिया को गिरफ्तार किया, जिसके पास से 7 लाख 80 हजार रूपए नगद बरामद हुए। पूछताछ में खुलासा हुआ कि चोरी शिवा सिसोदिया और एक विधिविरुद्ध बालक ने की थी और राशि संतोष को छिपाने हेतु सौंपी थी। रीवा और ग्वालियर की इन प्रभावी कार्यवाहियों ने यह साबित किया है कि मध्यप्रदेश पुलिस संगठित अपराध, सार्वजनिक संपत्ति की चोरी और नेटवर्क आधारित आपराधिक गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलेरेंस की नीति पर कार्य कर रही है।  

स्कूल शिक्षा में डिजिटल इन्फ्रॉस्ट्रक्चर बढ़ाने पर दिया गया विशेष ध्यान

शिक्षकों की डिजिटल क्षमता के लिये प्रदान किये गये टैबलेट भोपाल  प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये शिक्षकों को डिजिटल उपकरण प्रदान कर सक्षम बनाया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में डिजिटल टेक्नोलॉजी के विकास और स्कूल के सभी स्तरों पर प्रौद्योगिकी के उभरते हुए भविष्य को देखते हुए डिजिटल इन्फ्रॉस्ट्रक्चर, ऑनलाइन शिक्षण मंच और उपकरणों की उपलब्धता की सिफारिश की गयी है। प्रदेश में प्राथमिक एवं माध्यमिक शासकीय विद्यालयों के 2 लाख 43 हजार शिक्षकों को टैबलेट प्रदान किये गये हैं। विभाग ने सरकारी हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूलों के 44 हजार शिक्षकों को भी टैबलेट उपलब्ध कराये हैं। शिक्षक इन टैबलेट का उपयोग बच्चों की शिक्षण व्यवस्था में कर रहे हैं। रोबोटिक्स लैब विभाग ने प्रदेश के 52 सांदीपनि विद्यालयों में रोबोटिक्स लैब स्थापित किये हैं। इस वर्ष विभाग ने 458 पीएमश्री स्कूलों में अटल टिकरिंग लैब विकसित की हैं। राज्य के 100 प्रतिशत जनशिक्षा केन्द्र, जिनकी संख्या 3063 है, उन केन्द्रों में हाई परफार्मेंस पीसी प्रिंटर और यूपीएस की उपलब्धता सुनिश्चित की है। शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए छात्रों को विज्ञान एवं गणित विषय के डिजिटल ई-कंटेंट उपलब्ध कराये गये हैं। व्यावसायिक शिक्षा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिये जाने की सिफारिश की गयी है। प्रदेश के 3367 सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा दिये जाने की व्यवस्था की गयी है। प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम में 17 ट्रेड मंजूर किये गये हैं। पिछले वर्ष 4 लाख से अधिक छात्रों का नामांकन कक्षा-9 से 12 तक किया गया था। इस वर्ष नामांकित छात्रों की संख्या करीब 6 लाख है। पिछले 2 वर्षों में 690 शासकीय विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है। प्रदेश में कॅरियर सप्ताह का आयोजन सरकारी स्कूलों के बच्चों को पढ़ाई के दौरान कॅरियर संबंधी सलाह के लिये इस वर्ष कॅरियर सप्ताह का आयोजन किया जा चुका है। सप्ताह के दौरान 4311 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के 2 लाख विद्यार्थियों को कॅरियर चयन संबंधी सलाह दी गयी है।  

प्रसंस्करण केन्द्र के उत्पादों की ब्रांडिग मार्केटिंग कर बढ़ाएं सेल : अशोक बर्णवाल

भोपाल  अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल ने कहा है कि वनों में बांस भिर्रा कटाई-सफाई का कार्य प्रतिवर्ष नियमित कराया जाये। लघुवनोपज आधारित प्रजातियों का पौधारोपण अधिक संख्या में हो। उन्होंने प्रसंस्करण केन्द्र में तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और विपणन पर जोर देते हुए कहा कि विक्रय बढ़ाने के लिये समन्वित प्रयास किये जायें। अपर मुख्य सचिव श्री बर्णवाल सोमवार को पन्ना में त्रिफला प्रसंस्करण केन्द्र आंवला उद्यान सकरिया में ग्राम वन समिति हीरापुर के सदस्यों की बैठक में शामिल हुए। बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही.एन. अम्बाड़े भी उपस्थित रहे। अपर मुख्य सचिव श्री बर्णवाल ने पन्ना में त्रिफला प्रसंस्करण केन्द्र में तैयार आंवला मुरब्बा, आंवला कैण्डी, आंवला सुपाड़ी, आंवला अचार का निरीक्षण किया। उन्होंने बीट गढ़ी पड़रिया के एन.पी.व्ही. कैम्पा मिश्रित रोपण (वर्ष 2024 रकवा 40 हेक्टे.), आर.डी.एफ. रोपण (वर्ष 2025 रकवा 50 हेक्टे.) और एन.पी.व्ही. कैम्पा मिश्रित रोपण (वर्ष 2021 रकवा 50 हेक्टे.) का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वन संरक्षक श्री नरेश यादव, डीएफओ (उत्तर पन्ना) श्री गर्वित गंगवार, डीएफओ (साउथ पन्ना) श्री अनुपम शर्मा, आईएफएस प्रशिक्षु श्री अक्षत जैन उपस्थित रहे।