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भारत की ताकत, गांवों-पंचायतों और जनसामान्य की सामूहिक शक्ति में निहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

खेत तालाबों के निर्माण में श्रेष्ठ कार्य के लिए अनूपपुर और बालाघाट को किया सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिलों के कलेक्टर एवं अधिकारियों को किया गया सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आत्मनिर्भर पंचायत-समृद्ध मध्यप्रदेश विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय व्यवस्था की मूल आत्मा स्थानीय स्वशासन रही है। हमारे यहां शासन गांव से शुरू होकर राष्ट्र की ओर बढ़ने वाला रहा है। इसी का परिणाम है कि भारतीय चिंतन में गांव को स्वराज और आत्मनिर्भरता की प्रथम इकाई माना गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब आत्मनिर्भर भारत और सुशासन का दृष्टिकोण रखा, तब उन्होंने स्पष्ट कहा था कि भारत की ताकत उसके गांवों, पंचायतों और जनसामान्य की सामूहिक शक्ति में निहित है। आत्मनिर्भर पंचायत-समृद्ध मध्यप्रदेश विषय पर आयोजित यह वर्कशॉप, ग्राम स्वराज, स्थानीय आत्मनिर्भरता और विकसित भारत@2047 के लिए उठाया गया निर्णायक कदम है। गर्व का विषय है कि पंचायतों को प्रशासनिक रूप से दक्ष, वित्तीय रूप से सक्षम और सामुदायिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की ठोस रणनीति तैयार करने की इस यात्रा का नेतृत्व प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधि कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचायत संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के उपाध्यक्ष अभी शिक्षा समितियों के अध्यक्ष होते हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान उनके सुझावों को शामिल नहीं किया जाता है। लेकिन अब उनके द्वारा किए विद्यालय के निरीक्षण और सुझावों को लिपिबद्ध किया जाएगा और शासन इन्हें अमल में लेकर कार्य करेगा। राज्य सरकार ने सरपंचों को पंचायत की गतिविधियों के लिए 25 लाख रूपए तक की राशि खर्च करने का अधिकार दिया है। यह तो केवल शुरुआत है, इस दिशा में आगे भी और पहल की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पंचायतों को आत्मनिर्भर व समृद्ध बनाने के लिए आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यशाला का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना वाटर शेड विकास 2.0 के अंतर्गत वॉटर शेड महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों, सहयोगी संस्थाओं और नॉलेज पार्टनर संस्थाओं को पुरस्कृत भी किया। पुरस्कृत अधिकारियों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव का समूह चित्र भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। कार्यशाला में पंचायत और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह सहित बड़ी संख्या में जन-प्रतिनिधि, विषय-विशेषज्ञ व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग कि यह कार्यशाला 26 नवंबर तक चलेगी। पंचायतें निवेश और निवास की बेहतर व्यवस्था के लिए बनाएं मास्टर प्लान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान में पुरस्कार प्राप्त करने वाले अधिकारी-कर्मचारी और संगठनों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पंचायतों को पीने के पानी का प्रबंध करने का अधिकार दिया है। पंचायतें विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़ें। निवेश और निवास की बेहतर व्यवस्था के लिए मास्टर प्लान बनाएं। इसकी शुरुआत विदिशा जिले से की जा रही है। राज्य सरकार किसानों को सोलर पंप योजना के माध्यम से लाभ पहुंचा रही है। अगर कोई किसान तीन हॉर्स पावर से 5 हॉर्स पावर तक का सोलर पंप लेता है तो उसे 90 प्रतिशत का अनुदान मिलेगा। पंचायतें इस योजना को भी आगे बढ़ाएं। राज्य सरकार किसानों को बिजली के लिए आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश सरकार ने पंचायतों के माध्यम से एक बगिया मां के नाम की शुरुआत की है। इस दिशा में भी ग्राम स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पधारे जिला पंचायत प्रतिनिधियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में जिला, जनपद और ग्राम पंचायतों को बनाया जा रहा है सशक्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश के गठन के बाद से इस कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में विभानसभा सत्र आयोजित होते थे, हमारी इच्छा है कि आप सभी (पंचायत प्रतिनिधि) नई विधानसभा तक पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा है कि आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी पंचायतें भी आत्मनिर्भर बने। उनके मार्गदर्शन में जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाया जा रहा है। गत वर्ष के समान दूसरे सम्मेलन का आयोजन कर पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार ने आपको आमंत्रित किया है। राज्य सरकार पंचायतों के समग्र विकास के लिए हर कदम पर साथ खड़ी है। जिला, जनपद और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक : मंत्री पटेल पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि यह राज्य स्तरीय कार्यशाला त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था बेहतर क्रियान्वयन के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। विकास और जनकल्याण गतिविधियों के बेहतर संचालन के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और जिला जनपद अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। भारत में परम्परागत रूप से ग्राम विकास की व्यवस्था समाज और सरकार की संयुक्त भागीदारी पर आधारित थी। वर्तमान में भी गतिविधियों के बेहतर संचालन के लिए सामुदायिक सहभागिता आवश्यक है। मंत्री पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की हर पंचायत में दिसम्बर 2026 तक शमशान घाट और उसके लिए सभी बुनियादी सुविधाएं जुटाने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पांचवें वित्त की राशि 6 हजार करोड़ की गई है, जो वर्तमान में पंचायतों के विकास का आधार बनी है। प्रदेश के दूरदराज के गांव पीएम जनमन योजना से पक्की सड़क से जुड़ रहे हैं। हमारा प्रदेश पीएम जनमन और पीएम आवास में देश में अग्रणी है। मंत्री पटेल ने कहा कि पंचायतों को आत्मनिर्भरता को केवल आर्थिक सम्पन्नता और स्वतंत्रता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। गांवों में बीमारियां न हों, स्वच्छता के हरसंभव उपाय हों, गांव नशामुक्त हों, गांव में आपसी विवाद न हों और सामाजिक बुराइयों को रोकने में ग्राम पंचायतें सामूहिक इच्छा शक्ति के साथ कार्य करें, यह भी आदर्श आत्मनिर्भर पंचायत के लिए आवश्यक है। जल गंगा संवर्धन अभियान में श्रेष्ठ कार्य करने वालों का हुआ सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत श्रेष्ठ कार्य करने वाले … Read more

भोपाल के बड़े तालाब में होगी 8वीं इंटर स्टेट चैलेंजर्स एवं 45वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप

मुख्मंत्री डॉ. यादव करेंगे प्रतियोगिता का शुभारंभ मंत्री सारंग ने आयोजन स्थल का किया निरीक्षण भोपाल भोपाल के बड़े तालाब में खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा भारतीय रोइंग संघ के तत्वावधान में 8वीं इंटर स्टेट चैलेंजर्स एवं 45वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप का आयोजन 26 से 30 नवंबर तक किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में 23 राज्यों के लगभग 500 खिलाड़ी प्रतिभागिता करेंगे।खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को आयोजन स्थल पहुंचकर तैयारियों का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएँ अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिससे देशभर से आने वाले खिलाडियों और अधिकारियों को उत्कृष्ट अनुभव प्राप्त हो सकें। निरीक्षण के दौरान मंत्री सारंग ने आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं, सुरक्षा प्रबंधों, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण क्षेत्रों, उपकरणों की उपलब्धता एवं तकनीकी तैयारियों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ यादव करेंगे शुभारंभ मंत्री सारंग ने बताया कि प्रतियोगिता का शुभारंभ 26 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बड़े तालाब के प्राकृतिक और अद्भुत सौंदर्य के बीच होने वाली यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों और दर्शकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान करेगी। राष्ट्रीय स्तर की वॉटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता का प्रमुख केंद्र बन रहा मध्यप्रदेश मंत्री सारंग ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की वॉटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता का मध्यप्रदेश प्रमुख केंद्र बन रहा है। इस तरह के चैंपियनशिप के आयोजन से मध्यप्रदेश में वॉटर स्पोर्ट्स को और बढ़ावा मिलेगा तथा युवा खिलाड़ियों को नए अवसर प्राप्त होंगे। बड़े तालाब का विस्तृत क्षेत्र और अनुकूल जल परिस्थितियाँ देश के प्रमुख वॉटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता स्थलों में से एक हैं। भोपाल का बड़ा तालाब वॉटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं के लिए एक बेहद खूबसूरत और उपयोगी डेस्टिनेशन मंत्री सारंग ने कहा कि भोपाल में इस स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन होना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। भोपाल का बड़ा तालाब वॉटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं के लिए एक बेहद खूबसूरत और उपयोगी डेस्टिनेशन है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वर्तमान में नेशनल रोइंग खेल में नेशनल चैंपियन भी है। यह हमारे खिलाड़ियों की मेहनत और प्रदेश की खेल नीतियों का परिणाम है। इस तरह की प्रतियोगिताओं से प्रदेश के वॉटर स्पोर्ट्स खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक उत्कृष्ट मंच मिलेगा। विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं करें सुनिश्चित मंत्री सारंग ने निरीक्षण के दौरान प्रतियोगिता के लिए सुरक्षा, चिकित्सा, जलपोत प्रबंध, टेक्निकल टीम, रेस ट्रैक मार्किंग सहित सभी व्यवस्थाओं को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों, अधिकारियों एवं दर्शकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।  

डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के प्रावधानों को बनायें और पारदर्शी : मंत्री पटेल

भोपाल पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने सोमवार को मंत्रालय में बैठक लेकर विभागीय कार्यक्रमों और योजनाओं की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री पटेल ने विशेष कर गौसंवर्धन गौसंरक्षण तथा प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिये नई प्रचलित डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के विषय में विस्तृत समीक्षा की। योजना के प्रावधानों को और अधिक पारदर्शी बनाए जाने के विषय में निर्देशित किया। विभाग में प्रचलित डेयरी प्लस योजना के अंतर्गत पशुओं के वितरण व्यवस्था को सुधार किए जाने की आवश्यकता के लिये निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव, संचालक डॉ. पी.एस. पटेल, पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के कार्यपालिक संचालक डॉ. प्रवीण शिंदे और उपसंचालक डॉ. प्रियकांत पाठक उपस्थित रहे।  

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए 8 आईएएस नोडल अधिकारी नियुक्त

भोपाल  प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत प्रदेश के चयनित जिलों के लिए राज्य शासन द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला नोडल अधिकारी, भारत सरकार द्वारा निर्धारित टैम्पलेट्स अनुसार योजना के क्रियान्वयन के लिए अपने मार्गदर्शन में आवंटित जिलों की जिला कार्य योजना तैयार कराकर विकसित पोर्टल (Dashboard) पर अपलोड करायेंगे एवं जिले में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियमित रूप से निगरानी एवं सघन अनुश्रवण करेंगे।   सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार किसान कल्याण तथा कृषि विकास संचालक  अजय गुप्ता को उमरिया, वि.क.अ., सह आयुक्त सह पंजीयक, सहकारी समिति  मनोज पुष्प को डिंडौरी, प्रबंध संचालक, मत्स्य महासंघ सु निधि निवेदिता को अलीराजपुर, प्रबंध संचालक, कृषि विपणन बोर्ड सह आयुक्त मंडी  कुमार पुरूषोत्तम को शहडोल, उप सचिव, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग  संतोष कुमार वर्मा को सीधी, सदस्य सचिव नीति आयोग  ऋषि गर्ग को निवाड़ी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, रोजगार गांरटी परिषद  अवि प्रसाद को टीकमगढ़ और उप सचिव, नर्मदा घाटी विकास  राहुल धोटे को अनूपपुर का जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।      

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय जल पुरस्कार पाने वाले जिलों के कलेक्टर्स को वाटर शेड महोत्सव में दी बधाई

  भोपाल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा विगत 18 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित छठवें राष्ट्रीय जल पुरस्कार वितरण समारोह में मध्यप्रदेश के तीन जिलों को उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया था। इस विशिष्ट उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल में आयोजित वाटर शेड महोत्सव में जल संचय के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले जिला कलेक्टर्स एवं संबंधित अधिकारियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को मिला यह सम्मान सरकार के सतत प्रयासों, नवाचारों और जल संरक्षण की दिशा में समाज एवं प्रशासन के साझा संकल्प का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों से अन्य जिले भी प्रेरित होंगे और जल संवर्धन, जल सुरक्षा तथा जन भागीदारी आधारित विकास का यह सफल मॉडल पूरे प्रदेश में और मजबूत होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी से जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने में निरंतर योगदान देने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्वारा खरगोन जिले को सर्वश्रेष्ठ जिला श्रेणी (West Zone) में प्रथम पुरस्कार, खंडवा जिले को जल संचय–जन भागीदारी पहल (Western Zone) में प्रथम पुरस्कार तथा नगर पालिका परिषद गुना, जिला गुना को Best Urban Local Body श्रेणी में प्रथम पुरस्कार दिया गया है।

SIR फॉर्म 2025: MP में भाग और क्रमांक संख्या कैसे पता करें, पढ़ें स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

भोपाल  मध्य प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। बीएलओ लोगों के घर पर फॉर्म देकर आ रहे हैं। लेकिन इस फॉर्म को भरने में बड़ी भारी उलझन है। सबसे ज्यादा कंफ्यूजन लोगों को रिश्तेदारों और परिजनों के कॉलम में हो रही है। इसमें उनका इपिक नंबर के साथ-साथ भाग संख्या और क्रमांक संख्या भरना होता है। ऐसे में लोगों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि यह होता क्या है, इसके बाद बीएलओ को सूचित करते हैं, तब उन्हें जानकारी मिलती है। आइए हम आपको बताते हैं कि फॉर्म भरने के दौरान आपको भाग संख्या और क्रमाक संख्या कहां मिलेगा। यहां हो रही है परेशानी दरअसल, एसआईआर के लिए सभी मतदाताओं को फॉर्म दिया जा रहा है। फॉर्म के सबसे ऊपरी भाग में मतदाताओं को अपना विवरण देना हैं। यहां तक लोगों को कोई समस्या नहीं होती है। इसके बाद नीचे में दो कॉलम हैं। बायीं ओर वाले कॉलम को मतदाता को खुद का विवरण भरना है। अगर वह 2003 के एसआईआर के समय मतदाता रहा हो। अगर आप नहीं रहें तो दायीं ओर वाले कॉलम में आपको उनके रिश्तेदारों या परिजनों के विवरण भरने हैं, जो 2003 में मतदाता रहे हों। इसी विवरण के दौरान भाग और क्रमांक संख्या की जरूरत इसी दौरान मतदाताओं को अपने रिश्तेदारों या परिजनों को भाग और क्रमांक संख्या की जरूरत पड़ती है। रिश्तेदारों या परिजनों से जब आप इसकी जानकारी मांगते हैं तो उन्हें भी नहीं पता होता है। उनके पास सिर्फ इपिक होता है और इपिक में मतदाता के बारे में ही जानकारी होती है। यहां से सिर्फ आपको उनका इपिक नंबर और विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानकारी मिल सकती है। कहां से मिलेगा भाग और क्रमांक संख्या आइए हम आपको बताते हैं कि कहां से आपको भाग संख्या और क्रमांक संख्या मिलेगा। इसके लिए आपको सिंपल स्टेप्स को फॉलो करना है। सबसे पहले आपको मोबाइल के प्ले स्टोर में जाना है। वहां जाकर आपको वोटर हेल्पलाइन टाइप करना है। टाइप करने के बाद प्ले स्टोर के इंटरफेस पर यह एप आ जाएगा। इसके बाद इसे डाउनलोड करना है।  एप डाउनलोड करने के बाद इसको खोलना है। इसे खोलना के बाद ऊपर में आपको सर्च बार दिखेगा। सर्च बार पर आप जैसे ही क्लिक करेंगे तो नया इंटरफेस खुलेगा। यहां पर आपको चार ऑप्शन मिलेगा। इसमें पहले होगा कि आप मोबाइल नंबर के जरिए सर्च करिए। दूसरा बार कोड के जरिए, तीसरा अपना डिटेल्स डालकर सर्च करें। वहीं, चौथा ऑप्शन ज्यादा इजी है, इसमें सिर्फ आपको अपना इपिक नंबर डालना होगा। इसलिए हमें इपिक नंबर वाले ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।  इसमें इपिक नंबर भरने के बाद सर्च टैब को दबा दीजिए। भाग संख्या और क्रमांक संख्या आपको मिल गया भाग और क्रमांक नंबर वहीं, इपिक नंबर वाले पर क्लिक करने के बाद आपके सामने नया इंटरफेस होगा। इसमें इपिक नंबर भरने का ऑप्शन आएगा। इपिक नंबर भरने के बाद सर्च ऑप्शन पर क्लिक कर दें। इस पर क्लिक करते ही आपका पूरा डिटेल आ जाएगा। इसमें में जो पार्ट नंबर होगा वह आपका भाग संख्या होगा। वहीं, सीरियल नंबर आपका क्रमांक संख्या होगा। इस तरह से आप बिना परेशानी फॉर्म भर सकते हैं।  

पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने की प्रक्रिया में लायें तेजी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में प्राकृतिक सौंदर्य, विरासत और सांस्कृतिक विविधता का है अद्भुत खजाना भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के पास प्राकृतिक सौंदर्य, विरासत और सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत खजाना है, जिसे और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने से पर्यटन क्षेत्र को राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों का लाभ मिल सकेगा। इससे पर्यटन निवेश को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि पर्यटन उद्योग का दर्जा मिलने पर होटल, रिसॉर्ट, एडवेंचर टूरिज़्म, ट्रेवल सर्विसेज़ सहित पर्यटन से जुड़े अन्य क्षेत्रों को विभिन्न प्रकार की सब्सिडी (अनुदान सहायता), कर रियायतें और अन्य प्रोत्साहन उपलब्ध होंगे। इससे निजी निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा और पर्यटन ढाँचा और अधिक मजबूत होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में पर्यटन विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए बीते दिनों पर्यटन विभाग के अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक ली। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को पर्यटन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की दिशा में ठोस और त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि पर्यटन विकास से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि इस क्षेत्र में इंट्रेस्ट रखने वाले निवेशकों एवं उद्यमियों को सुगमता हो और मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख पर्यटन राज्य के रूप में स्थापित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार के इस बड़े निर्णय से राज्य में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि निवेशकों को राज्य की पर्यटन विकास नीति एवं प्रोत्साहन नियमों का भरपूर लाभ मिले।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन और प्रयासों से म.प्र. बना आइडियल इंवेस्टमेंट स्टेट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश में निवेश और औ‌द्योगिक विकास की दिशा को एक नई स्पष्टता और मजबूती दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में उद्योगों से जुड़े नवाचार अब नीतियाँ और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वास्तविक परियोजनाओं, निवेशकों के बढ़ते विश्वास और जमीन पर दिखाई देने वाली औ‌द्योगिक गतिविधियों के रूप में सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुरुआत से ही यह लक्ष्य तय किया कि मध्यप्रदेश को ऐसा निवेश-अनुकूल राज्य बनाया जाए, जहाँ उद्‌द्योगों को दीर्घकालिक अवसर मिले, युवाओं के लिए रोजगार का विस्तार हो और प्रदेश की अर्थव्यवस्था अधिक स्थिर, सक्षम और टिकाऊ बने। उनकी कार्यशैली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वे प्रत्येक नवाचार को व्यावहारिक और क्रियान्वयन-केंद्रित तरीके से आगे बढ़ाते हैं। निवेशकों से संवाद, नीतियों का सरलीकरण, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और औ‌द्योगिक अवसंरचना के विस्तार आदि हर स्तर पर उन्होंने समयबद्ध और परिणाम-केंद्रित कार्य शैली को प्राथमिकता दी है। इसी कारण आज प्रदेश में उ‌द्योग स्थापना की गति पहले की तुलना में तेज दिखाई देती है, बड़े निवेश वास्तविक रूप से जमीन पर उतर रहे हैं और नए रोजगार अवसर निरंतर बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश की वर्तमान औ‌द्योगिक प्रगति यह दर्शाती है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का नेतृत्व दूरदर्शी होने के साथ स्थिर, भरोसेमंद और परिणाम देने वाला है। प्रदेश अब केवल निवेश आकर्षित करने वाला राज्य नहीं, बल्कि उ‌द्योगों के लिए एक विश्वसनीय विकल्प और रोजगार सृजन के लिए एक मजबूत आधार के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश ने औ‌द्योगिक विकास और निवेश आकर्षण के नए आयाम स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में निवेश से जुड़े प्रयास व्यापक और बहु-स्तरीय रहे, जिनमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर निवेशक समुदाय के साथ संवाद को नए आयाम दिए गए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, जापान, दुबई और स्पेन में आयोजित सत्र महत्वपूर्ण साबित हुए, जिनसे प्रदेश को 89 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निवेश अभिरुचि प्राप्त हुई। राष्ट्रीय स्तर पर मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, पुणे, नई दिल्ली, कोयम्बटूर, सूरत, लुधियाना और असम में आयोजित संवादों ने 2.3 लाख करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव और लगभग 2 लाख रोजगार अवसरों का आधार निर्मित किया। प्रदेश के विभिन्न संभागों और जिलों जैसे उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा, नर्मदापुरम और शहडोल में आयोजित क्षेत्रीय उ‌द्योग सम्मेलन (RIC) तथा रतलाम के राइज- रीजनल इंडस्ट्री स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट कॉन्क्लेवकार्यक्रम ने 2.65 लाख करोड़ रुपये के निवेश और 3 लाख रोजगार अवसरों का सुदृढ़ आधार तैयार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्देश्य केवल संवाद बढ़ाना नहीं रहा, बल्कि निवेश को वास्तविक रूप से धरातल पर उतारना उनकी प्रमुख प्राथमिकता रही है। इसी दृष्टि से मध्यप्रदेश जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम 2025 के माध्यम से 20 अधिनियमों के 44 प्रावधानों को अपराधमुक्त किया गया, जिससे निवेशकों और उ‌द्यमियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और उ‌द्योग अनुकूल बनी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों के प्रत्यक्ष परिणाम जीआईएस 2025 में स्पष्ट रूप से दिखाई दिए, जहाँ प्रदेश को 26.61 लाख करोड़ रूपये की निवेश प्रस्ताव और लगभग 17 लाख रोजगार सृजित होंगे। इनमें से 6,20,325 करोड़ रुपये का निवेश वास्तविक रूप से जमीन पर उतर चुका है, जो निवेशकों के विश्वास और प्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों का मजबूत प्रमाण है। औ‌द्योगिक अधोसंरचना के विस्तार में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। पिछले दो वर्षों में 4,237 एकड़ भूमि उद्‌द्योगों को आवंटित की गई, जिससे 2 लाख करोड़ रूपये से अधिक निवेश और करीब 2.5 लाख रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश के 16,936 हेक्टेयर में विकसित 25 नए औ‌द्योगिक पार्क उ‌द्योगों के विस्तार के नए केंद्र बनकर उभर रहे हैं। विशेष औ‌द्योगिक पार्कों के विकास में भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदर्शिता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। धार में पीएम मिही पार्क वस्त्र उ‌द्योग के लिए नई संभावनाओं का केंद्र बन रहा है। यहाँ 2,158 एकड़ क्षेत्र में विकसित पार्क प्रदेश में 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क चिकित्सा उपकरण निर्माण के क्षेत्र में प्रदेश को नई पहचान दे रहा है। मुरैना का मेगा लेदर फुटवियर पार्क चमड़ा और फुटवियर उ‌द्योग के लिए बड़े पैमाने पर अवसर तैयार कर रहा है। मोहासा-बाबई, नर्मदापुरम में विकसित नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र में दोनों चरणों में 1050 एकड़ से अधिक भूमि अग्रणी कंपनियों को आवंटित की गई है, जो प्रदेश की ग्रीन एनर्जी क्षमता को मजबूत कर रहा है। नीति सुधारों ने भी प्रदेश में उद्योग-अनुकूल वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जीआईएस-2025 के दौरान राज्य सरकार ने 18 नई प्रगतिशील नीतियाँ जारी कीं, जिनमें औ‌द्योगिक प्रोत्साहन नीति 2025, निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025 और लॉजिस्टिक्स नीति 2025 जैसी नीतियों विशेष रूप से प्रभावकारी रही हैं। प्रदेश ने 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सिल्वर अवार्ड 2024 प्राप्त किया। समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 दृष्टि-पत्र का विमोचन, उ‌द्योग एवं रोजगार वर्ष 2025 की उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण और इन्वेस्ट एमपीपोर्टल का शुभारंभ प्रदेश के निवेश-केंद्रित दृष्टिकोण को और मजबूती प्रदान करते हैं। इन सभी प्रयासों का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि अब प्रदेश में केवल प्रस्तावों की बात नहीं रही, बल्कि निवेशक वास्तविक रूप से उ‌द्योग स्थापित कर रहे हैं। रोजगार सृजन की गति तेज हुई है, औ‌द्योगिक गतिविधियाँ बढ़ी हैं और निवेशकों तथा सरकार के बीच भरोसे का वातावरण और मजबूत हुआ है। मध्यप्रदेश अपने औ‌द्योगिक सफर के उस चरण में प्रवेश कर चुका है, जहाँ नेतृत्व की स्पष्ट दिशा, प्रशासनिक प्रतिबद्धता और नीति-आधारित स्थिरता मिलकर एक ऐसा निवेश-अनुकूल माहौल निर्मित कर रहे हैं, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश को देश के प्रमुख औ‌द्योगिक राज्यों की पंक्ति में मजबूती से स्थापित करता दिखाई देता है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव जतारा विधायक खटीक की सुपुत्री के विवाह समारोह में हुए शामिल

नवविवाहित जोड़े को दीं बधाई और शुभकामनाएं भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार का टीकमगढ़ जिले में जतारा विधायक हरिशंकर खटीक की सुपुत्री के विवाह समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवविवाहित जोड़े को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। साथ ही नवविवाहित जोड़े के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में जतारा विधायक हरिशंकर खटीक ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया और विवाह समारोह में शामिल होने पर उनका आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण विभाग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा टीकमगढ़ जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, जतारा विधायक हरिशंकर खटीक, पूर्व विधायक टीकमगढ़ राकेश गिरि गोस्वामी, पूर्व विधायक पृथ्वीपुर डॉ. शिशुपाल सिंह यादव, जनप्रतिनिधि, आईजी सागर श्रीमती हिमानी खन्ना, कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय, पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह मंडलोई सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे। पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को टीकमगढ़ जिले के प्रवास के दौरान स्थानीय पुलिस लाईन परिसर स्थित मां की बगिया में पौधरोपण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कदंब का पौधा रोपा और पर्यावरण-संरक्षण का संदेश दिया। यह कार्यक्रम "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति सम्मान को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा टीकमगढ़ जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, जतारा विधायक हरिशंकर खटीक, पूर्व विधायक पृथ्वीपुर डॉ. शिशुपाल सिंह यादव सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं नागरिक उपस्थित रहे।  

भावांतर योजना में सोयाबीन का मॉडल रेट आज भी 4282 रुपये, किसानों की नजर बाजार पर

भोपाल भावांतर योजना 2025 के अंतर्गत  सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए 24 नवंबर को 4282 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। रविवार 23 नवंबर को भी यही रेट जारी हुआ था। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट और न्यूनतम समर्थन मूल्य के भावांतर की राशि राज्य सरकार द्वारा दी जा रही है। सोयाबीन का पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए, 12 नवंबर को 4077 रुपए, 13 नवंबर को 4130 रुपए, 14 नवंबर को 4184 रुपए, 15 नवंबर को 4225 रुपए, 16 नवंबर को 4234 रुपए, 17 नवंबर को 4236 रुपए, 18 नवंबर को 4255 रुपए, 19 नवंबर को 4263 रुपए, 20 नवंबर को 4267 रुपए, 21 नवंबर को 4271 रुपए और 22 नवंबर को 4285 रुपए प्रति क्विंटल  का मॉडल रेट जारी हुआ था। राज्य सरकार की गारंटी है कि किसानों को हर हाल में सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य की 5328 रुपए   प्रति क्विंटल की राशि मिलेगी।