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28,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: मध्यप्रदेश में जल्द बनेंगी 5 चमचमाती फोर लेन रोड

भोपाल  मध्यप्रदेश में जबलपुर–दमोह और सतना–चित्रकूट सहित 5 प्रमुख सड़कों को फोर लेन बनाने की योजना तैयार की गई है। इस NHAI प्रोजेक्ट के लिए 28 हजार करोड़ रुपये का निवेश तय है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने प्रदेश की पांच प्रमुख सड़कों की डीपीआर तैयार की है। इनमें जबलपुर–दमोह, सतना–चित्रकूट रोड, उज्जैन–झालावाड़, रिंग रोड और ओरछा बायपास शामिल हैं। इसका सीधा असर 10 जिलों के रोज़ाना सफर करने वाले लगभग 7 लाख लोगों पर पड़ेगा। इंदौर और ओरछा जैसे शहरों में अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती थी। फोर लेन बनने से जाम कम होगा। ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और लोगों की यात्रा आसान होगी। वाइल्डलाइफ के लिए स्पेशल कॉरिडोर जहां सड़कें जंगल से गुजरेंगी, वहां साउंडप्रूफ वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाए जाएंगे ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा बनी रहे। 2026 तक इन सड़कों के निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। ठेकेदारों को काम पूरा करने के लिए डेढ़ से दो साल का समय मिलेगा। सभी बायपास फोर लेन होंगे और दोनों तरफ सर्विस लेन होंगी, जिससे सवारी और माल ढुलाई दोनों आसान होंगी। इससे आवागमन सुगम और सुरक्षित होगा तथा सफर कम समय में पूरा हो सकेगा।   एक हजार किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य NHAI ने बताया कि मध्यप्रदेश हाईवे के कुल 1000 किलोमीटर सड़कों पर काम प्रगति पर है। इसमें 500 किलोमीटर का ठेका दिया जा चुका है और बाकी सड़कों की डीपीआर अंतिम चरण में है। इस कदम से 10 जिलों के 7 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इंदौर और ओरछा में जाम और भारी वाहनों की समस्या कम होगी। आगरा–ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम जारी है। यह 88 किलोमीटर लंबा हाईवे है, जिसकी लागत 4613 करोड़ रुपये है।

मात्रा 2005 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट: 98 किमी फोरलेन के लिए 56 गांवों की भूमि पर प्रभाव

छतरपुर  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लखनऊ तक बनाए जा रहे इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत फोरलेन सड़क का निर्माण किया जा रहा है। छतरपुर जिले में इस कॉरिडोर के लिए नेशनल हाईवे-34 को फोरलेन में बदला जा रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) जिले की बड़ामलहरा तहसील की सांठिया घाटी से लेकर महाराजपुर तहसील के चौका गांव तक पहले चरण में और दूसरे चरण में चौका गांव से कैमाहा बैरियर तक फोरलेन रोड का निर्माण कर रहा है। छतरपुर जिले में इन दोनों चरणों में मिलाकर कुल मिलाकर 98 किमी. के नेशनल हाईवे 34 के हिस्से को फोरलेन किया जा रहा है जिसमें 2005 करोड़ रूपये लागत आ रही है। इन 56 गांवों की भूमि का अधिग्रहण इस परियोजना में छतरपुर जिले की बड़ामलहरा, छतरपुर, बिजावर और नौगांव तहसीलों के अंतर्गत आने वाले कुल 56 गांवों में भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। इनमें बड़ामलहरा तहसील के भिलवार, गोरा, बमनौराखुर्द, घिनौची, रजपुरा, टौरिया, मौली, मेलवार, किवलाई, अरोल, मवई, रानीखेरा जैसे गांव शामिल हैं। वहीं बिजावर तहसील में निवार, मड़देवरा, दरगुवां, गुलगंज, अनगौर जैसे गांवों से जमीन अधिग्रहण हुआ है। छतरपुर तहसील में पलटा, खैरो, मातगुवां, अतरार, रामगढ़ सहित कई गांव इस सूची में हैं जबकि नौगांव विकासखंड के महाराजपुर तहसील में कुर्राहा, ऊजरा, बेदर और गढ़ीमलहरा जैसे गांवों की भूमि ली जा रही है।   भोपाल-लखनऊ के बीच बन रहा इकोनॉमिक कॉरिडोर भोपाल-लखनऊ इकोनॉमिक कॉरिडोर की लंबाई 526 किमी. है और इसका निर्माण 11300 करोड़ रूपये की लागत से किया जा रहा है। अलग अलग चरणों में ये इकॉनोमिक कॉरिडोर बन रहा है। पहले चरण में उत्तर प्रदेश के कानपुर से करबई तक 112 किलोमीटर, दूसरे चरण में करबई से सागर तक 223 किलोमीटर और तीसरे चरण में मध्यप्रदेश के सागर से राजधानी भोपाल तक 150 किलोमीटर का रोड बन रहा है। भोपाल से लखनऊ इकोनॉमिक कॉरिडोर के एमपी के हिस्से में नया प्रयोग भी किया जा सकता है। यहां एरियल डिस्टेंस के आधार पर रोड बनाई जा सकती है जिससे मोड़ यानि घुमावदार रास्ते कम हो जाएंगे और सफर आसान हो जाएगा।

परीक्षा की तारीखों में बड़ा बदलाव: अब 15 दिन बाद होंगे हाफ इयरली एग्जाम

नर्मदापुरम  एसआईआर कार्य (SIR Survey) के कारण अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के समय में बदलाव किया गया है। शासकीय और निजी स्कूलों में 24 नवंबर से होने वाली अर्द्धवार्षिक परीक्षा अब 15 दिन बाद 8 दिसंबर से शुरु होंगी। तब तक एसआइआर का पहला चरण भी खत्म हो जाएगा। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा शासकीय प्राथमिक माध्यमिक वि‌द्यालयों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 24 से 29 नवंबर के बीच होना थी, अब इसे बदल दिया है। राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 8 दिसंबर से शुरु करने का आदेश जारी कर दिया है।  दो सत्रों में होगी परीक्षा दो सत्रों में होंगी परीक्षा अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं दो सत्रों में होंगी। पहला सत्र सुबह 10 से दोपहर 12.30 बजे तक रहेगा। जिसमें कक्षा 6 वीं से 8 वीं तक की परीक्षाएं होंगी। ये 13 दिसंबर को खत्म होंगी। दोपहर 1.30 से शाम चार बजे तक कक्षा 3 से 5 तक की परीक्षाएं होंगी। ये 12 दिसंबर को खत्म होंगी। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधान अनुसार नि:शक्त विद्यार्थियों को निर्देशानुसार अतिरिक्त समय, लेखक की सुविधा दी जाएगी। एसआईआर के कारण बदली गेट- एपीसी एसआईआर के काम के कारण अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के टाइम टेबल में बदलाव किया गया है। 24 नवंबर से शुरु होने वाली परीक्षाएं 8 दिसंबर से शुरू होंगी। नया टाइम टेबल भी राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी कर दिया है। – प्रदीप चौहान, एपीसी कक्षा 3 से 5वीं तक     8 दिसंबर- प्रथम भाषा     9 दिसंबर- गणित     10 दिसंबर- ‌द्वितीय भाषा     11 दिसंबर- विज्ञान     12 दिसंबर- तृतीय भाषा संस्कृत, हिन्दी, उर्दू     13 दिसंबर- सामाजिक विज्ञान

भोपाल में 10 दिन तक रूट डायवर्जन लागू, यात्रियों के लिए जारी हुई खास ट्रैफिक गाइडलाइन

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आगामी 10 दिनों के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई है। ये ट्रैपिक डायवर्जन शहर के चुनिंदा मार्गों पर कल से प्रभावी कर दिया जाएगा। दरअसल, शहर में मेट्रो निर्माण कार्य चल रहा है। इसी के चलते सोमवार 24 नवंबर से गुरुवार 4 दिसंबर 2025 तक रात में शहर के रूट डायवर्ट किए जाएंगे। करोंद से लाम्बाखेड़ा रोड (CIAE कैंपस) तक मेट्रो के लिए गार्डर लॉन्चिंग का काम किया जाएगा। ये कार्य 24 नंवबर से शुरु होकर 4 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि, क्षेत्र में वाहनों के भारी दबाव को मद्देनजर रखते हुए गार्डर लॉन्चिंग का काम रात से सुबह तक किया जाएगा। ऐसे में रात 11:00 बजे से सुबह 6 बजे के बीच यहां ट्रैफिक डायवर्जन प्रभावी रहेगा। दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए व्यवस्था हल्के वाहनों के लिए नया रूट- दोपहिया, चारपहिया वाहनों के साथ-साथ छोटे वाहन BHMRC अस्पताल के सामने से मित्तल कॉलेज रोड होते हुए राजवंश कॉलोनी से गोकुल मार्केट, मित्तल मार्केट, सेंट जॉर्ज स्कूल होते हुए मित्तल कॉलेज तिराहा होकर आ और जा सकते हैं।   भारी वाहन- बस और ट्रकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भारी वाहन, जिनमें बसें और ट्रक शामिल हैं। करोंद से लाम्बाखेड़ा जाने वाले भारी वाहन चीपड़ा कला से भानपुर या आचारपुरा मीना चौराहा होते हुए आशाराम बापू तिराहा होकर डायवर्ट मार्ग का उपयोग करेंगे। रात में आवागमन प्रभावित, संबंधित मार्गों पर निर्माण कार्य के कारण मुख्य रोड अस्थायी रूप से बंद रहेगा।   ट्रैफिक डिपार्टमेंट की अपील वहीं, शहर की ट्रैफिक पुलिस ने अपील की है कि, असुविधा से बचने के लिए सभी वाहन चालक निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का पालन करें।

जीवाजी यूनिवर्सिटी ने जारी किया नया शेड्यूल, लेट फीस के साथ अब दो दिन में करें आवेदन

ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2025–26 में प्रवेशित छात्रों के लिए नामांकन और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की संशोधित अधिसूचना जारी की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी अध्ययनशालाओं को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने छात्रों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करवाएं। अधिसूचना के अनुसार, सभी छात्रों को ऑनलाइन माध्यम से नामांकन/ रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य है और किसी भी परिस्थिति में तिथियों में बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। इस संशोधित अधिसूचना के अनुसार सामान्य छात्रों के लिए नामांकन शुल्क 100 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि मध्यप्रदेश के बाहर के छात्रों को 200 रुपये शुल्क जमा करना होगा। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि नामांकन/ रजिस्ट्रेशन के बाद संबंधित अध्ययनशालाओं में आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 24 नवंबर तय की गई है। इसमें उन्हें विलंब शुल्क 200 रुपये भी देना होगी।   इसके बाद सभी दस्तावेजों की जांच करके उन्हें विश्वविद्यालय में जमा करने की समय-सीमा 25 नवंबर निर्धारित की गई है। अधिसूचना में कहा गया है कि यह आदेश कौशल एवं उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रवेशित छात्रों पर लागू नहीं होगा। ऐसे विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय द्वारा अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी। दस्तावेज साथ रखें एमपी आनलाइन के पोर्टल पर फार्म भरते समय छात्रों को जन्मतिथि प्रमाणपत्र, 10वीं की अंकसूची, प्रोवेशन प्रमाणपत्र, पात्रता प्रमाणपत्र, गैप सर्टिफिकेट (यदि हो) और माइग्रेशन (यदि लागू हो) जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज साथ रखने होंगे। अगर इनमें कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होता है तो ऐसे में छात्र का परीक्षा फार्म नहीं भरा जा सकेगा। ऑनलाइन नामांकन भी अनिवार्य विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि सभी स्नातक और स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर में प्रवेशित छात्रों को नामांकन का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। जिन छात्रों के पास पहले से नामांकन नंबर मौजूद है, उन्हें भी यह प्रक्रिया दोबारा पूरी करनी होगी। विश्वविद्यालय ने चेतावनी दी है कि जो छात्र नामांकन फार्म नहीं भरेंगे, वे आगामी परीक्षा फार्म भरने से वंचित हो जाएंगे और ऐसे मामलों में संपूर्ण जिम्मेदारी छात्र तथा विभागाध्यक्ष की होगी।

BLO के लिए खुशखबरी! एसआइआर में अब मूवी टिकट + ₹500 गिफ्ट वाउचर का तोहफ़ा

जबलपुर  मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआइआर) में लापरवाही बरतने पर बीएलओ को नोटिस और निलबन से लेकर वेतन में कटौती की जा रही है। इससे भी काम में तेजी नहीं आ रही है। इसके उलट, प्रदेशभर में एसआइआर के काम के दबाव के बीच बीएलओ की मौत की खबरें आ रही हैं। ऐसे में जिला निर्वाचन कार्यालय ने बीएलओ को सम्मानित करना शुरू कर दिया है। नई पहल के तहत अब हर दिन अपने बूथ के शत-प्रतिशत गणना फार्म का डिजिटाइजेशन करने वाले बीएलओ और उनके सहयोगी को आकर्षक पुरस्कार दिए जा रहे हैं। मूवी के दो-दो टिकट कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जिले के आठों विधानसभा क्षेत्रों में शत-प्रतिशत मतदाताओं के गणना फॉर्म का डिजिटाइजेशन करने वाले एक-एक बीएलओ एवं उनके सहयोगी को मूवी के दो-दो टिकट और 500-500 रुपए का गिफ्ट वाउचर देने का निर्णय लिया है। शनिवार शाम तक मतदाताओं से प्राप्त भरे हुए गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के कार्य में पाटन विधानसभा क्षेत्र जिले की आठों विधानसभाओं में पहले स्थान पर है। यहां 48.93 फीसदी गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन हो चुका है। सिहोरा 48.20 फीसदी के साथ दूसरे तथा बरगी 47.68 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर है।   जिला पंचायत के सीईओ अभिषेक गहलोत ने बरगी विधानसभा क्षेत्र के बूथ 249 से 260 तक के पर्यवेक्षण के लिए नियुक्त बीएलओ सुपरवाइजर जनपद पंचायत जबलपुर के सहायक विकास विस्तार अधिकारी अनिल झारिया का नवबर का दो दिन का वेतन काटने के आदेश दिए हैं। नोटिस भी जारी किया गया है। शनिवार को बूथ के शत-प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन पूरा करने वाले बीएलओ का कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने प्रशस्ति पत्र प्रदान कर समान किया। सम्मानित होने वालों में विधानसभा क्षेत्र जबलपुर के मतदान केंद्र 116 की बीएलओ सोमलता,मतदान केंद्र 118 के बीएलओ अश्विनी तिवारी शामिल हैं। पनागर के मतदान केंद्र 61 कुशनेर की बीएलओ विमला चौधरी, पाटन के मतदान केंद्र 44 के बीएलओ हरिशंकर बर्मन, विधानसभा क्षेत्र जबलपुर पश्चिम के मतदान केंद्र 5 के बीएलओ मुकेश कोष्टा ने भी डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा किया है।

राशन संकट गहराया: मोहलत पूरी, हजारों कार्डधारकों पर बंद होने का खतरा

रतलाम  रतलाम जिले में अब भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत राशन प्राप्त करने वाले 40 हजार ऐसे हितग्राही है जिन्होंने अब तक ई केवाईसी नहीं कराई है। सरकार जून से इन्हें राहत देते हुए आ रही हैं, लेकिन छह माह बाद भी करीब हजारों उपभोक्ताओं ने ई केवाईसी (e-KYC) नहीं करवाई, इनका भी आगामी माह में राशन बंद हो सकता हैं। इसके पूर्व 1 जनवरी से 31 मई तक विभागीय स्तर पर ई केवाईसी नहीं कराने वाले 60 हजार उपभोक्ताओं के नाम कटे थे।  40 हजार हितग्राहियों ने नहीं कराया ई-केवाईसी जिले के करीब 9 लाख 75 हजार हितग्राही है, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत राशन में गेहूं, चावल, शक्कर, नमक उचित मूल्य की दुकान से प्राप्त कर रहे हैं। इनमें से 40 हजार हितग्राही अब भी ऐसे बचे हुए है जिन्होंने आज तक ई-केवाईसी नहीं करवाया हैं। सरकार छह माह से इन्हे ई केवाईसी कराने के लिए अवसर दे रही हैं, लेकिन जिन्होंने अब भी ईकेवाईसी नहीं करवाया, उनका आगामी माह में सरकार राशन बंद कर सकती हैं। साल की शुरुआत में जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम अन्तर्गत कार्डधारी 10 लाख 20 हजार से अधिक उपभोक्ता थे, जिनकी ई केवाईसी नहीं थी। जिन्होंने ई केवाईसी करवा ली, अब उन हितग्राहियों को राशन का लाभ मिल रहा हैं। अब तक जिन्होंने ई केवायसी नहीं करवाई, उनसे छह माह से हितग्राहियों से ई केवाईसी के लिए विभागीय अधिकारी के साथ ही दुकान संचालक आग्रह कर रहे हैं। इसके अलावा जो अब भी नहीं करवा रहे हैं उनका राशन बंद हो सकता हैं।   जिला आपूर्ति अधिकारी आनंद गोले ने बताया – जून से ई केवाईसी के लिए राशन प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं को आग्रह किया है जा रहा हैं, वे यह कार्य करवा लें, नहीं आएंगे तो आगामी माह में राशन बंद हो सकता हैं। जिले में अब भी 40 हजार उपभोक्ता है, जिनकी ई केवाईसी शेष हैं। नए पात्रता पर्ची वाले ई केवाइसी करवा भी रहे हैं और नई पर्चियां भी बन रही हैं। नोटिस वालों के भी जवाब अधिकांश आ गए हैं, जिन्होंने नहीं दिए उनका राशन बंद हो जाएगा।  

सड़क हादसे में एक ही परिवार के 4 सदस्य खत्म, भैंस ढूंढकर लौटते वक्त हुआ हादसा

सागर  सागर के रहली थाना क्षेत्र में रविवार सुबह एक भयानक सड़क हादसा हो गया, जिसमें एक ही परिवार के 4 किशोरों की मौत हो गई। सभी किशोर सुबह-सुबह गुमी हुई भैंस की तलाश करने के लिए निकले थे। घटना के बाद परिवार और गांव में मातम पसरा हुआ है। रहली-देवरी मार्ग पर अनंतपुरा के पास रविवार सुबह साढ़े सात बजे के करीब हादसा होने की जानकारी सामने आई है।   एक परिवार के सदस्य है मृतक मृतक अनंतपुरा गांव के एक ही परिवार के सदस्य हैं। यह भैंस खोने के बाद इसे तलाशने के लिए अनंतपुरा से पास के ही बरखेरा गांव जा रहे थे। इसी बीच रास्ते में सड़क हादसा हो गया। घटना के बाद से अनंतपुरा गांव में मातम पसरा है। ऐसे हुआ था हादसा जानकारी के मुताबिक रहली के सिमरिया गांव से दमोह के लिए सुबह के समय बस क्रमांक सीजी 18 एम 3199 जाती है। यह बस रोज की तरह रविवार को भी सिमरिया से दमोह के लिए रवाना हुई थी, लेकिन अनंतपुरा गांव के पास यह सामने से आ रही बाइक से भिड़ गई। बस से टकराते ही बाइक सवार 17 वर्षीय उमेश पाल, 16 वर्षीय कृसु पाल, 15 वर्षीय शिवम पाल व 16 वर्षीय सत्यम पाल हवा में उछल गए। यह लोग सड़क किनारे पड़े पत्थरों से जा टकराए, जिससे इनकी मौके पर ही मौत हो गई। भैंस ढूंढने बाइक से निकले थे चारों युवक प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक चारों किशोर भैंस चोरी होने के बाद उसे तलाशने के लिए बरखेरा गांव जा रहे थे। तभी यह हादसा हुआ। गांववालों का कहना है कि सड़क किनारे खेत वालों ने खखरी बनाने के लिए सड़क पर पत्थर डाल रखे हैं। इससे सड़क बहुत संकरी हो गई। इसी वजह से बस व बाइक में भिड़ते हुई है। हादसे की जानकारी मिलते ही रहली पुलिस मौके पर पहुंची।

सिंगोली परियोजना से प्रदेश में हरित ऊर्जा उत्पादन को मिली नई गति

भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रहा है। जीआईएस-भोपाल के शुभारंभ अवसर पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा था कि पिछले दशक में देश के ऊर्जा क्षेत्र ने अभूतपूर्व प्रगति की है। इसमें मध्यप्रदेश का योगदान उल्लेखनीय है। राज्य की 31 हजार मेगावॉट क्षमता में हरित ऊर्जा उत्पादन का 30 प्रतिशत से अधिक योगदान है। प्रदेश का नीमच जिला सौर ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। जिले में वर्तमान में 500 मेगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। नीमच: प्रदेश का सौर ऊर्जा उत्पादन हब नीमच जिला 500 मेगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता के साथ प्रदेश का हरित ऊर्जा उत्पादन का हब बन रहा है। जिले की सिंगोली यूनिट-3 ग्राम बडी में 170 मेगावॉट, बडावदा यूनिट-1 में 160 मेगावॉट और कवई यूनिट-2 में 170 मेगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। साथ ही आगर जिले में 330 मेगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। टी.सी. सूर्या कंपनी द्वारा स्थापित ये परियोजनाएँ प्रतिवर्ष 68 मिलियन यूनिट हरित बिजली का उत्पादन कर रही हैं, जो भारतीय रेल और राज्य की विद्युत कंपनियों को उपलब्ध कराई जा रही है। सिंगोली परियोजना में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग 704 हेक्टेयर में फैली इस परियोजना की इकाइयाँ बडावदा, बडी कवई, खेड़ा माँ का डोल, थडोद और अननिया गांवों में स्थापित हैं। परियोजना की विशेषताओं में सिंगल एक्सेस ट्रैकर तकनीक, उच्च दक्षता वाले पैनल और मल्टी-लोकेशन यूनिट्स शामिल हैं। भगवानपुरा सौर इकाई कर रही प्रदेश के कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कटौती जावद जनपद के ग्राम भगवानपुरा में 151 मेगावॉट क्षमता की सौर ऊर्जा इकाई वेल्सपन सोलर एमपी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्थापित की गई है। फरवरी 2014 से लगातार इसमें उत्पादन हो रहा है। सौर ऊर्जा उत्पादन से यह इकाई प्रतिवर्ष 2 लाख 16 हजार 372 टन कार्बन उत्सर्जन कम कर रही है। यहां हो रहे उत्पादन से 6.24 लाख घरों को ऊर्जा आपूर्ति की जा रही है। इकाई में 235 वॉट क्षमता के पॉली-क्रिस्टलाइन पीवी पैनल लगाये गये हैं। यह देश की उन बड़ी इकाइयों में से एक है जो 132 केवी हाई वोल्टेज उत्पादन कर रही हैं। मध्यप्रदेश ने 12 वर्षों में 19 गुना उत्पादन बढ़ाकर दिया महत्वपूर्ण योगदान प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश के लिए 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। मध्यप्रदेश इन लक्ष्यों के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ आगे बढ़ रहा है। राज्य की ऊर्जा नीति, तकनीकी नवाचार और निवेशक-हितैषी दृष्टिकोण ने हरित ऊर्जा उत्पादन में 12 वर्षों में 19 गुना अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। रीवा और ओंकारेश्वर हरित ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश के 2 स्तंभ है। रीवा सोलर पार्क देश के सबसे बड़े और सफल सोलर एनर्जी पार्कों में से एक है। यहाँ से दिल्ली मेट्रो को बिजली आपूर्ति की जा रही है। ओंकारेश्वर में देश का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित किया गया है। ओंकारेश्वर का 278 मेगावॉट फ्लोटिंग सोलर प्लांटहरित ऊर्जा उत्पादन के लिए जलाशयों के बेहतर उपयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मुरैना में देश की पहली ‘सोलर प्लस बैटरी स्टोरेज’ परियोजना स्थापित की जा रही है। इस परियोजना से ₹2.70 प्रति यूनिट दर पर 24 घंटे हरित ऊर्जा की आपूर्ति की जायेगी। यह परियोजना पीक और नॉन-पीक दोनों समय में समान ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। इस परियोजना में 95% वार्षिक उपलब्धता रहेगी। इसे रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड द्वारा विकसित किया जा रहा है। वर्ष-2030 तक 20 गीगावॉट का लक्ष्य, 5 प्रमुख सौर परियोजनाओं से 2.75 गीगावॉट उत्पादन राज्य में वर्तमान में कार्यरत 5 प्रमुख सौर परियोजनाओं की कुल उत्पादन क्षमता 2,750 मेगावॉट है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 20 गीगावॉट उत्पादन क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है। टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक पॉलिसी : निवेशकों के लिए नया अवसर मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने ‘टेक्नोलॉजी एग्नोस्टिक’ रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी लागू की है। यहां सौर, पवन और मिश्रित ऊर्जा के विकास के लिए निवेशकों को आकर्षक अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। कुसुम-सी योजना में 18,000 मेगावॉट क्षमता के लिए निविदाएँ प्राप्त हुई हैं। किसानों, एमएसएमई और निजी डेवलपर्स की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हुआ है। किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने के लिये 100% फीडर सोलरीकरण का प्रयास किया जा रहा है। पंप-हाइड्रो और बायोफ्यूल परियोजनाएँ : भविष्य की नई दिशा पंप-हाइड्रो परियोजनाओं के लिये 14,850 मेगावॉट उत्पादन के आवेदन प्राप्त हुये हैं। इनमें से 8,450 मेगावॉट परियोजनाओं का पंजीयन किया जा चुका है। कम्प्रेस्ड बायोगैस और बायोमास पैलेट परियोजनाओं के लिए 6,500 टन प्रतिदिन क्षमता प्रस्तावित की गई है। सरकारी भवनों का सौरीकरण और युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण के साथ रोजगार के अवसर राज्य के सभी जिलों में रिन्यूएबल सर्विस कंपनी मॉडल पर सरकारी भवनों का सोलराईजेशन किया जा रहा है। साथ ही सूर्य मित्र योजना, आईटीआई सहयोग कार्यक्रम, स्किल डेवलपमेंट कोर्सेस योजनाएं भी संचालित हैं।इन सभी ने हजारों युवाओं को सौर ऊर्जा क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षण मिला है और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।  

दतिया जिले के किसानों को मिलेगी अब और अधिक गुणवत्तापूर्ण बिजली :ऊर्जा मंत्री तोमर

एम.पी. ट्रांसको ने 132 के व्ही सबस्टेशन भांडेर में ऊजीकृत किया 50 एम.व्ही.ए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफार्मर भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के निर्देश पर दतिया जिले की पारेषण व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण करते हुए मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने 132 के.व्ही. सबस्टेशन भांडेर में 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का एक अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित कर इसे ऊर्जीकृत किया है। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया है कि इससे सबस्टेशन मे जहां एक अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर की उपलब्धता हो गई है, वहीं दतिया जिले मे भांडेर क्षेत्र के कृषि विद्युत उपभोक्ताओं को रबी सीजन में सिंचाई के लिये निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली प्राप्त हो सकेगी। इस ट्रांसफार्मर के सफलतापूर्वक उर्जीकृत होने से सबस्टेशन की क्षमता 63 एम.व्ही.ए. से बढ़कर अब 113 एम.व्ही.ए. की हो गयी है। दतिया जिले की पारेषण क्षमता मे हुई वृद्धि एम.पी. ट्रांसको के अधीक्षण अभियंता श्री राजीव तोतला ने बताया कि इससे पिछौर, डबरा, सीतापुर, डगराई, भांडेर, राजघाट, दतिया क्षेत्र के घरेलू एवं कृषि विद्युत उपभोक्ताओं सहित इस सबस्टेशन से निकलने वाले 33 के.व्ही. इंडस्ट्रियल फीडर को भी फायदा मिलेगा। दतिया जिले मे एम.पी. ट्रांसको 132 के.व्ही. सबस्टेशन भांडेर सहित अपने कुल 05 एक्स्ट्रा हाईटेंशन सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है। इसमें 220 के.व्ही. सबस्टेशन दतिया एवं 132 के.व्ही. के दतिया, सेंधवा तथा इंदरगढ सबस्टेशन शामिल है, जिनकी कुल ट्रांसफारमेशन क्षमता 796 एम.व्ही.ए. से बढकर 846 एम.व्ही.ए. की हो गई है।