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प्रतिस्पर्धात्मक दौर में अपेक्स बैंक के शाखा प्रबंधक उत्कृष्ट कार्य निष्पादित करें – मनोज गुप्ता

अपेक्स बैंक के शाखा प्रबंधकों की बैठक समन्वय भवन में आयोजित। भोपाल अन्तर्राष्ट्रीय सहकारी वर्ष, 2025 के दौरान अपेक्स बैंक के सम्पूर्ण प्रदेश के शाखा प्रबंधकों की बैठक आज अपेक्स बैंक समन्वय भवन स्थित सभागार में आयोजित हुई । इस अवसर पर बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने दिनांक 30.09.25 की स्थिति पर शाखाओं द्वारा की अमानत संग्रहण, ऋण वितरण, वसूली एवं बीमा योजनाओं  की समीक्षा करते हुये निर्देशित किया कि प्रतिस्पर्धा के दौर में अपने आप को बेहतर साबित करने की दिशा में सभी अधिकारीगण पूरी ईमानदारी एवं लगन से अपने उत्तरदायित्वों का निवर्हन करते हुए दिनांक 22 अक्टूबर, 25 तक चलने वाले बचत माह के दौरान व्यक्तिगत हितग्राहियों को विभिन्न प्रयोजनों यथा – आवास एवं अचल सम्पत्ति के बंधक पर ऋण पर 8.00 प्रतिशत, वाहन ऋण 8.50 प्रतिशत एवं आवास ऋण 9.00 प्रतिशत पर उपलब्ध कराने के प्रयास करें। उन्होंने बैंक की शाखाओं के माध्यम से माईक्रो एटीएम एवं प्रधानमंत्री जीवन ज्योति, प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा योजना तथा प्रधानमंत्री अटल पेंशन योजना की अधिक से अधिक जानकारी अपने ग्राहकों एवं आमजन तक पहुॅंचाकर लोगों को इसका अधिकतम लाभ प्राप्त करने हेतु प्रेरित करने तथा एन.पी.ए. प्रकरणों के निराकरण करने तथा केन्द्र सरकार की ’’स्वच्छता पखवाड़ा’’ योजना का सतत् वर्षभर आयोजन करने के निर्देश भी प्रदान किये।  आरंभ में बैंक के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी श्री संजय मोहन भटनागर ने महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा करते हुये शाखा प्रबंधकों से अपेक्षा की अपेक्स बैंक द्वारा समय-समय पर प्रदान किये जाने वाले निर्देशों का पालन निश्चित समय-सीमा में करना सुनिश्चित करें।  उप महाप्रबंधक (ऋण/परिचालन) श्री के.टी.सज्जन ने अधिक से अधिक ऋण वितरण व वसूली समय पर करने की अपेक्षा की, जबकि वि.क.अ.(सीबीएस) श्री अरविंद बौद्ध ने तकनीकी बिन्दुओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया।   बैठक में श्री आशीष राजौरिया, श्री करूण यादव, श्री विवेक मलिक, श्री समीर सक्सेना व श्री अजय देवड़ा के साथ प्रदेश की समस्त संभागीय एवं अमानत शाखाओं के प्रबंधकगण एवं अन्य अधिकारीण भी उपस्थित हुए। उक्त जानकारी अपेक्स बैंक के जनसम्पर्क अधिकारी अभय प्रधान ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में दी ।

कैशलेस इलाज में ठगी! MP के कई अस्पताल आयुष्मान कार्डधारकों से वसूल रहे एक्स्ट्रा चार्ज

भोपाल  नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) के निर्देश पर भोपाल में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला के पहले दिन योजना से जुड़ी चुनौतियों पर व्यापक चर्चा हुई। योजना के तहत हर मरीज को केशलेस और मुफ्त इलाज मिलना चाहिए, लेकिन कुछ अस्पताल एक्स्ट्रा चार्ज या अन्य बहानों से अवैध वसूली कर रहे हैं। ऐसे कई शिकायतें हमें मिली हैं। योगेश भरसट ने कहा कि इन शिकायतों का सत्यापन कर समाधान निकालना भी चुनौतीपूर्ण काम है। धोखाधड़ी रोकने के लिए नई व्यवस्था बनाई जा रही है। यदि किसी मरीज को इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ता है और वह प्रमाण के साथ शिकायत दर्ज कराता है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। मरीज को उसका पैसा दिलाने के साथ-साथ संबंधित अस्पताल पर तीन गुना तक का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि किसी अस्पताल के खिलाफ एक से अधिक शिकायतें पाई जाती हैं तो उनके खिलाफ कड़े कदम भी उठाए जाएंगे। कार्यशाला में कुल 27 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेशों से योजना से जुड़े दो-दो अधिकारी शामिल हुए। साथ में NHA के अधिकारियों ने भी भाग लिया। दूरदराज इलाकों में अस्पतालों की कमी भी समस्या योगेश भरसट ने यह भी स्वीकार किया कि भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर जैसे महानगरों में योजना से जुड़े अस्पतालों की संख्या अच्छी है और मरीजों को योजना के तहत इलाज आसानी से मिल रहा है। लेकिन अलीराजपुर, अनूपपुर, मऊगंज, पंडुगा, निवाड़ी जैसे दूरदराज जिलों में अस्पतालों की कमी है, जिससे वहां के मरीजों को बड़े शहरों में इलाज के लिए जाना पड़ता है और यात्रा, ठहरने व अन्य खर्च बढ़ जाते हैं। इस समस्या का समाधान करने के लिए इन क्षेत्रों में नए अस्पताल खोजकर उन्हें योजना से जोड़े जाने की कार्रवाई तेज की जाएगी। सात साल पूरे होने पर कार्यशाला यह कार्यशाला आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के सात साल पूरे होने पर इसे नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई है। इस योजना की शुरुआत 2018 में झारखंड से की गई थी और अब 2030 तक AB-PMJAY 2.0 के रूप में इसे और अधिक सक्षम बनाना लक्ष्य है। कार्यशाला में बीते सात वर्षों में मिली उपलब्धियों और आयी समस्याओं पर भी चर्चा हुई ताकि सफल मॉडलों को अन्य राज्यों में अपनाया जा सके। एमपी के इन इनिशिएटिवों पर अन्य राज्य भी काम करेंगे मध्यप्रदेश पहला राज्य है जिसने लाभार्थियों को योजना से जुड़ी जानकारी देने के लिए आयुष्मान चैटबॉट शुरू किया। यह व्यवस्था अब पूरे देश में लागू करने की रूपरेखा पर है। इसके अलावा मध्यप्रदेश आयुष्मान डिजिटल मिशन में भी अग्रणी राज्यों में शामिल है। यहां आयुष्मान आईडी बनाने से लेकर मरीजों के रिकॉर्ड डिजिटल रूप में अपलोड किए जा रहे हैं। क्वालिटी हेल्थ प्रोवाइडर सुनिश्चित करने की दिशा में प्रदेश ने बड़े शहरों में केवल NABH से मान्यता प्राप्त अस्पतालों को ही पैनल में शामिल करने का निर्णय लिया है। एमपी की 7 साल की प्रमुख उपलब्धियां • 4.30 करोड़ लाभार्थियों को योजना से जोड़ा गया। • 50 लाख रुपए का फ्री क्लेम पास किया गया। • 8,000 करोड़ रुपए के बिल पास किए गए। क्वालिटी सुनिश्चित करने के कदम योगेश भरसट ने कहा कि मध्यप्रदेश में लगभग 650 NABH-प्रमाणित अस्पताल हैं, जिनमें से करीब 200 सिर्फ भोपाल में स्थित हैं। प्रदेश का प्रयास है कि बड़े शहरों में केवल NABH-प्रमाणित अस्पतालों को ही योजना से जोड़ा जाए ताकि उपचार की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे। इस नीति पर अस्पतालों की कुछ आपत्तियों पर आगे चर्चा की जाएगी और एग्जीक्यूटिव कमेटी में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने गर्भवती माताओं की शत-प्रतिशत जांच सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

राहतगढ़ सिविल अस्पताल में शीघ्र होगी ब्लड स्टोरेज की सुविधा उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने गर्भवती माताओं की शत-प्रतिशत जांच सुनिश्चित करने के दिए निर्देश मातृ स्वास्थ्य पर सरकार का फोकस, डिप्टी सीएम शुक्ल ने दिए शत-प्रतिशत जांच के निर्देश गर्भवती महिलाओं की पूर्ण जांच सुनिश्चित करें: उप मुख्यमंत्री शुक्ल का स्वास्थ्य विभाग को निर्देश भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी शीघ्र दूर होगी। स्वास्थ्य विभाग में भर्ती प्रक्रिया प्रगतिरत है और शीघ्र ही पर्याप्त चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय स्टाफ की पूर्ति की जाएगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने सागर जिले के राहतगढ़ सिविल अस्पताल का अवलोकन कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पताल में तत्काल ब्लड स्टोरेज फ्रिज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आपातकालीन स्थिति में रक्त की उपलब्धता बनी रहे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि माह की 9 एवं 25 तारीख को आयोजित होने वाले गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों में शत-प्रतिशत जांच सुनिश्चित की जाए। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता है। हर गर्भवती महिला तक समय पर जांच और उपचार की सुविधा पहुँचे इसके लिए पूरे मनोयोग से प्रयास करें। उन्होंने अस्पताल में स्वच्छता और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जन-उपयोगी समस्त आवश्यक औषधियों की उपलब्धता हर समय बनी रहे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है। टेलीमेडिसिन सेवा से डॉक्टरों की अनुपलब्धता की समस्या काफी हद तक दूर होगी और समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा। 

ग्वालियर मेला: 25 दिसंबर से 25 फरवरी तक, वाहन खरीद पर टैक्स छूट की सिफारिश

ग्वालियर ग्वालियर व्यापार मेला इस वर्ष भी 25 दिसम्बर से 25 फरवरी तक आयोजित होगा। पिछले वर्ष मेला में दुकान लगाने वाले ऐसे दुकानदार, जिन्होंने अब तक बकाया राशि जमा नहीं की है, ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण ने ऐसे सभी दुकानदारों से शीघ्र ही बकाया राशि जमा कर ‘नो-ड्यूज’ प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए कहा है। बकायादारों की सूची मेला प्राधिकरण के नोटिस बोर्ड पर उपलब्ध है। मेला प्राधिकरण के सचिव ने बताया कि इस वर्ष दुकान आवंटन के लिए विगत वर्ष का आवंटन आदेश, ‘नो-ड्यूज’ प्रमाण-पत्र, स्वयं का फोटो, पैन कार्ड एवं निवास प्रमाण पत्र पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। उन्होंने कहा कि दुकानदार ऑनलाइन आवेदन से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें, ताकि आवेदन के समय किसी प्रकार की असुविधा न हो। मेला की जान ऑटो मोबाइल सेक्टर रहता है। यह मेला पिछले 120 साल से अंचल की आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उन्नति की पहचान बन चुका है। यहां वाहन खरीद पर मिलने वाली रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट इसे और खास बना देती है। बुधवार को संभागीय आयुक्त मनोज खत्री ने मेला में वाहन खरीद पर मिलने वाली रोड टैक्स में 50 फीसदी की छूट के लिए शासन को पत्र लिखा है। जिससे मेला शुरू होने के साथ ही मेला से वाहन खरीद करने वालों को फायदा मिल सके। मेला में ऑटो मोबाइल सेक्टर के लिए 38 दुकानों के ऑनलाइन आवेदन भी आ चुके हैं। ग्वालियर मेला की तैयारियां अब शुरू हो गई हैं। मेले का इंतजार ग्वालियरवासी बेसब्री से करते हैं। इस वर्ष भी मेला अपनी गरिमा और भव्यता के साथ आयोजित हो। इसके लिए संभागीय आयुक्त मनोज खत्री द्वारा मेले की व्यवस्थाओं के संबंध में निरंतर समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। ग्वालियर व्यापार मेले में देश भर के व्यापारी अपनी भागीदारी कर सकें, इसके लिए मेले की दुकानों का आवंटन भी इस वर्ष ऑनलाइन प्रारंभ किया गया है।मेले के ऑटोमोबाइल सेक्टर में ऑनलाइन दुकानों के आवंटन का कार्य, शिल्प बाजार में दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। मेला सचिव सुनील त्रिपाठी ने बताया कि ग्वालियर व्यापार मेले में 32 बकायदार दुकानदारों द्वारा 4 लाख 79 हजार 660 रुपए जमा कर एनओसी प्राप्त कर ली गई है।साथ ही ऑटोमोबाइल सेक्टर में दुकान आवंटन के लिए एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर 18 दुकानदारों द्वारा पंजीयन कर 38 दुकानों के आवंटन के लिए आवेदन प्रस्तुत किए हैं। मेले की व्यवस्थाओं के साथ-साथ मेला परिसर की साफ-सफाई रंगाई-पुताई का कार्य भी तेजी के साथ किया जा रहा है।रियासतकाल से आधुनिक युग तक की गौरव यात्रा वर्ष 1905 में ग्वालियर रियासत के तत्कालीन शासक महाराज माधौराव सिंधिया (प्रथम) ने इस मेले की नींव 'मेला मवेशियान' के रूप में रखी थी। पशुधन की नस्ल सुधारने, किसानों और पशुपालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा ग्वालियर अंचल के उत्पादों को देश के अन्य भागों तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह मेला शुरू किया था।उस समय यह ग्वालियर मेला सागरताल के 50 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में आयोजित होता था, जहां पानी की सुविधा और ग्रामीण संपर्क इसकी बड़ी ताकत थी। बढ़ती लोकप्रियता के साथ, यह मेला व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 1918 में इसे वर्तमान रेसकोर्स रोड स्थित 104 एकड़ भूमि पर स्थायी रूप से स्थापित किया गया और इसे नया नाम मिला व्यापार मेला एवं कृषि प्रदर्शनी”। आरंभ में मेला अवधि 20 दिसंबर से 14 जनवरी तक तय की गई। एक ऐसा समय जब ग्वालियर की सर्द हवा व्यापारिक उत्साह से सराबोर हो उठती है। व्यवसाय और संस्कृति का संगम समय के साथ-साथ ग्वालियर मेला केवल व्यापारिक आयोजन तक नहीं रहा, बल्कि यह संस्कृति, मनोरंजन और जनसंवाद का महाकुंभ बन गया। ग्रामीण कलाकारों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों का मंच यह मेला बना है। यह आयोजन हर वर्ग को जोड़ता है। वर्ष 1934 में काउंसिल ऑफ रीजेंसी ने इसके प्रबंधन के लिए “मेला व नुमायश ग्वालियर” की रूपरेखा बनाई, जिसे बाद में 'ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल, एग्रीकल्चरल एंड आर्ट्स एग्जीबिशन' के नाम से प्रसिद्धि मिली।राज्य स्तरीय गौरव और ऐतिहासिक पड़ाव ग्वालियर मेला को 23 अगस्त 1984 को राज्य स्तरीय ट्रेड फेयर का दर्जा प्राप्त हुआ। इसके बाद इसकी पहचान और प्रभाव दोनों कई गुना बढ़ गए। वर्ष 1967-68 में मेले की हीरक जयंती मनाई गई। इसी तरह वर्ष 1982-83 में प्लेटिनम जयंती एवं वर्ष 2004-05 मेले ने अपनी शताब्दी वर्षगांठ मनाई। शासन द्वारा वर्ष 2002 में मेले का नाम 'श्रीमंत माधवराव सिंधिया व्यापार मेला” घोषित किया गया। इसके बाद 30 दिसंबर 1996 को लागू ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण अधिनियम के तहत इसका प्रबंधन स्वतंत्र प्राधिकरण को सौंपा गया, जिससे मेले के संचालन और विकास को संस्थागत स्वरूप मिला। ग्वालियर मेला: परंपरा से तकनीक तक आज ग्वालियर मेला केवल परंपरा का प्रतीक नहीं, बल्कि नवाचार, आत्मनिर्भरता और डिजिटल युग की पहचान भी है। ऑनलाइन आवंटन प्रणाली, थीम आधारित पवेलियन और प्रदेशभर के उद्योगों की सहभागिता इसे आधुनिकता से जोड़ते हैं। साथ ही लोककला, हस्तशिल्प, झूले, और सांस्कृतिक कार्यक्रम इसकी जीवंतता को बनाए रखते हैं।

बाघों की शिफ्टिंग पर मुहर, MP से 10 टाइगर जाएंगे तीन राज्यों में

भोपाल  मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व में स्वच्छंद विचरण कर रहे दस नर और मादा बाघ ओडिशा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के जंगलों में भेजे जाएंगे। पंद्रह दिन पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक में इसकी सहमति दी।  वन विभाग के पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ शुभरंजन सेन ने उड़ीसा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ को भेजे पत्र में कहा है कि वे अपने यहां एमपी से ट्रांसलोकेट किए जाने वाले नर और मादा टाइगर के लिए बाड़ा बनाने, बाघों की ट्रेकिंग और मानिटरिंग के लिए रेडियो कॉलर लगाने और अन्य व्यवस्थाएं पूरी कर लें ताकि बाघों की शिफ्टिंग होने पर उन्हें अनुकूल और सुरक्षित वातावरण मिल सके। एमपी के दस बाघ कान्हा टाइगर रिजर्व, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और पेंच टाइगर रिजर्व से इन राज्यों में भेजे जाएंगे। इनके लिए उचित रहवास का इंतजाम करना संबंधित राज्य के वन विभाग की जिम्मेदारी होगी। इन राज्यों में जाएंगे इतने टाइगर     तीन बाघ ओडिशा के देवरीगढ़ वन्य जीव अभयारण्य में शिफ्ट होंगे।     इसमें एक नर बाघ और दो मादा बाघ शामिल होंगे।     राजस्थान में चार मादा टाइगर भेजे जाएंगे जिसमें रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में 3, मुकुंद्रा टाइगर रिजर्व में एक बाघ शामिल हैं।     छत्तीसगढ़ के लिए तीन टाइगर भेजे जाना है जिसमें दो नर बाघ और एक मादा बाघ शामिल हैं। सीएम ने कहा था, दूसरे राज्यों के वन्य प्राणी भी लाएं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 27 सितंबर को राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक में कहा था कि दूसरे राज्यों को प्रदेश में उपलब्ध वन्य प्राणी अवश्य दें, परन्तु उनसे भी उनके यहां उपलब्ध वन्य प्राणी प्राप्त कर प्रदेश की वन विविधताओं को और अधिक समृद्ध करें। मुख्यमंत्री ने आसम से गेंडा या एक सींग वाला गेंडा लाने के प्रयास करने को कहा है। इस बैठक में तीन राज्यों ओडिशा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ को तीन जोड़े टाइगर देने का निर्णय लिया गया था। राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की 30वीं बैठक में मुख्यमंत्री यादव ने यह भी कहा था कि मध्यप्रदेश में पाई जाने वाली फ्लोरल एंड फौनल डायवर्सिटी (वानस्पतिक एवं जैविक विविधताओं) की प्रॉपर ब्रांडिंग की जाए। प्रदेश के समृद्ध वन क्षेत्रों एवं यहां के वनों में वन्य जीवों की सहज उपलब्धता का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। फिल्मों के माध्यम से किया जाएगा प्रचार मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय फिल्म डिवीजन, डिस्कवरी और अन्य चैनलों के साथ मिलकर शॉर्ट फिल्म्स, डाक्यूमेंट्री फिल्म, प्रमोशनल्स कैपसूल्स तैयार करें और इस तरह प्रदेश की वन विशिष्टताओं के बारे में पूरे विश्व को बताएं। कर्नाटक से हुई थी अदला—बदली बता दें कि पिछले महीनों में मध्य प्रदेश ने कर्नाटक को दो बाघ दिया था और वहां से दो किंग कोबरा लेकर आए थे। हालांकि बाद में पांच वर्षीय नर किंग कोबरा की भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में मौत हो गई थी। अब केवल एक किंग कोबरा बचा है, जो इंदौर में है। सीएम ने प्रदेश में हो रही हाथियों के साथ द्वंद पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जंगली हाथियों के कारण हो रही दुर्घटनाओं एवं मानव द्वंद्व को रोकने के लिए और बेहतर उपाय करें।

दिवाली नसीहत पर तीखी टिप्पणी: बाबा बागेश्वर ने कहा— गलत लोगों के खिलाफ सख्ती जरूरी, बयान पर मिली आलोचना

छतरपुर दीवाली पर पटाखा चलाने की नसीहत देने वालों पर तीखा हमला करने के चलते मशहूर कवि डॉ कुमार विश्वास और बागेश्वर धाम के शास्त्री धीरेंद्र कृष्ण के बयान खूब चर्चाओं में हैं। धीरेंद्र शास्त्री ने नसीहत देने वालों पर बरसते हुए कहा- "दोपक्षीय नियम लगाने की जो बात करते हैं, ऐसे लोगों के ऊपर हमें सुतली बम रखवाना है।" धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, एक साहब ने कहा कि पटाखों से प्रदूषण होता है। 1 जनवरी को इनका ज्ञान गायब हो जाता है। हैप्पी न्यू के नाम पर पूरी दुनिया में पटाखे होते हैं। तब प्रदूषण नहीं होता है, लेकिन दीवाली आती है तो प्रदूषण होता है। होली आती है तो पानी खराब होता है। बाबा बागेश्वर ने आगे कहा- "खून खराबा होता है तो ये लोग तब ऐसे स्टेटमेंट नहीं देते हैं। तब ये मांग नहीं करते। तब ये ऐसे कानून लगाने की बात नहीं करते। बाबा बागेश्वर ने हमलावर होते हुए कहा- ये दोपक्षीय नियम लगाने की जो बात करते हैं, ऐसे लोगों के ऊपर ही हमें सुतली बम रखवाना है। भैया हम दीवाली अच्छे से मनाएंगे। हमने सुतली बम खरीद लिया है।" चलते-चलते पढ़ते जाइए कि आखिर कुमार विश्वास ने ऐसा क्या कह दिया कि उनके बयान भी सुर्खियों में बने हुए हैं। कुमार विश्वास ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा- “तीन साल से यूक्रेन और रूस आपस में भिड़े हुए हैं। इतना गोला बारूद बर्बाद कर दिया। हमारा भी पाकिस्तान के बीच थोड़ा वॉर्म अप हुआ था।” विश्वास ने तंज कसते हुए कहा- “इतना गोला बारूद हुआ लेकिन ओजोन परत एकदम सुरक्षित रही। अभी दीवाली पर चार फुलझड़ी चलेंगी और ओजोन परत में इतना बड़ा वाला छेद हो जाएगा कि उसमें से बहुत सारे बुद्धजीवि ऊपर जाएंगे और नीचे आएंगे।”

शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान: मनमोहन सिंह को बताया पूरे देश का प्रधानमंत्री

भोपाल  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इस देश की संस्कृति और परंपरा की कोई समझ नहीं है. इस कारण वह विदेश की धरती पर देश की आलोचना करते हैं. उन्होंने कहा कि इस देश पर कांग्रेस की सरकारों का भी राज रहा है. उन्होंने दिवंगत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उस वक्त वह बतौर मुख्यमंत्री अमेरिका गए थे और अमेरिका में उनसे पूछा गया कि क्या मनमोहन सिंह ‘अंडर एचीवर’ पीएम हैं? उन्होंने जवाब दिया था कि मनमोहन सिंह कांग्रेस पार्टी के पीएम नहीं हैं. बल्कि वह भारत के प्रधानमंत्री हैं. उनके बारे में वह ऐसी कोई बात नहीं कर सकते. एक साथ चुनाव की वकालत शिवराज सिंह ने इस कार्यक्रम में पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की वकालत की और कहा कि इसको लेकर सहमति बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस देश में कुछ हो या नहीं लेकिन कहीं न कहीं चुनाव जरूर होते रहते हैं. उन्होंने कहा कि पिछले साल वह कृषि मंत्री बने तो उसके कुछ दिनों बाद ही झारखंड के चुनाव शुरू हो गए. अब बिहार चुनाव चल रहा है. अगले साल बंगाल और फिर असम में चुनाव है. उन्होंने कहा कि इन चुनावों में काफी ऊर्जा लगती है. पार्टी मंत्री से लेकर कार्यकर्ता तक सबसे चुनाव में लगा देती है. इस कारण काम पर पूरा समय देना मुश्किल हो जाता है. उन्होंने देश में अनाज के पर्याप्त भंडार होने की बात कहते हुए कहा कि बीते 11 साल साल में खाद्यान्न उत्पादन 44 फीसदी बढ़ा है. देश में गेहूं-चावल का पर्याप्त भंडार है. उन्होंने कहा कि देश में थोड़ा दलहन और तेलहन की कमी है. उन्होंने बिहार चुनाव को लेकर कहा कि जेडीयू और भाजपा के बीच स्वाभाविक गठबंधन है. दूसरी तरफ, महागठबंधन आपस में उलझा हुआ है. बिहार में एनडीए का चेहरा नीतीश कुमार हैं. वह सुशासन बाबू हैं. उनके नेतृत्व में एनडीए चुनाव लड़ रहा है.

EOW की एंट्री: रतलाम में करोड़ों के स्विमिंग पूल की लीज सिर्फ ₹1.5 लाख, टेंडर गड़बड़ी की जांच शुरू

रतलाम   करोड़ों रुपए की लागत से बने तरण ताल को ओने पौने दाम पर ठेके पर देने की शिकायत की जांच के लिए ईओडब्ल्यू की टीम रतलाम पहुंची है. टीम ने यहां टेंडर से संबंधित दस्तावेज और तरण ताल पहुंचकर फिजिकल वेरिफिकेशन किया है. EOW में की गई शिकायत के अनुसार रतलाम नगर निगम ने इस तरणताल को बेहद कम दरों पर चलाने के लिए एक निजी फर्म को दिया गया है. इसकी टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और नगर निगम को हुए आर्थिक नुकसान की जांच के EOW उज्जैन की टीम पहुंची है. क्या है स्विमिंग पूल में गड़बड़ी का मामला? 8 साल पहले बनकर तैयार हुए इस तरणताल को शुरू होने में लंबा वक्त लग गया, जिसके बाद जैसे तैसे नगर निगम ने इसका संचालन शुरू किया था लेकिन एक हादसे में 12 वर्षीय बालक की डूब कर हुई मौत के बाद ये स्विमिंग पूल बंद ही पड़ा हुआ था. इसके बाद इस वर्ष की शुरुआत में दिल्ली की एक निजी फॉर्म को 12,हजार 600 रुपए प्रति माह की दर पर 10 वर्षों के लिए इसे लीज पर दिया गया है. जिसकी शिकायत ईओडब्ल्यू उज्जैन को की गई थी. नगर निगम को हुआ 3 करोड़ का नुकसान शिकायत में बताया गया था कि करीब 3 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान रतलाम नगर निगम और शासन को हुआ है. इसके बाद इस मामले की जांच के लिए ईओडब्ल्यू की टीम के निरीक्षक रामनिवास यादव और लोकेंद्र सिंह ने नगर निगम पहुंचकर टेंडर से संबंधित दस्तावेज कब्जे में लिए. शास्त्री नगर स्थित स्विमिंग पूल पहुंचकर टीम ने इसका निरीक्षण भी किया. इस दौरान नगर निगम के कर्मचारी और सब इंजीनियर से भी पूछताछ की गई. ईओडब्ल्यू उज्जैन के निरीक्षक रामनिवास यादव ने बताया कि कम दरों पर टेंडर देने की शिकायत की जांच की जा रही है. टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत तरण ताल को कम दाम पर ठेके पर देने की शिकायत स्थानीय स्विमिंग पूल संचालक द्वारा की गई है. शिकायत में उनके द्वारा नगर निगम पर पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं करने और महज डेढ़ लाख रुपए प्रति वर्ष की दर पर निजी फॉर्म को लाभ पहुंचते हुए स्विमिंग पूल देने की बात कही गई है. इस मामले में पहले तो करोड़ों रुपए की लागत से बने तरण ताल का लंबे समय तक संचालन ही नहीं किया गया, जिसके बाद अब निजी फर्म को दिए गए टेंडर पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. वर्तमान में निजी फर्म द्वारा मेंटेनेंस के चलते स्विमिंग पूल का संचालन नहीं किया जा रहा है. वहीं, इस मामले को लेकर ईओडबल्यू उज्जैन के निरीक्षक रामनिवास यादव ने कहा, '' नगर नगम टेंडर से लीज पर दिए गए स्विमिंग पूल को लेकर शिकायत आई थी. टेंडर प्रक्रिया को लेकर गड़बड़ी की शिकायत मिली थी, जिसकी जांच की जा रही है.''  

जयपुर-अंबेडकर नगर के बीच त्योहारों पर विशेष ट्रेन, इंदौर-रतलाम समेत कई स्टेशनों पर रुकेगी

इंदौर  त्योहारों में बढ़ती यात्रियों की भीड़ को देखते हुए पश्चिम रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए डॉ. अंबेडकर नगर और जयपुर के बीच विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन सीमित अवधि के लिए दोनों दिशाओं में कुल तीन-तीन फेरों में चलाई जाएगी। रेल प्रशासन के अनुसार, जयपुर–डॉ. अंबेडकर नगर स्पेशल (गाड़ी संख्या 09727) और डॉ. अंबेडकर नगर–जयपुर स्पेशल (गाड़ी संख्या 09728) अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े से संचालित होंगी। हर शुक्रवार चलेगी ट्रेन गाड़ी संख्या 09727 जयपुर–डॉ. अंबेडकर नगर स्पेशल ट्रेन जयपुर से 17, 24 और 31 अक्टूबर 2025 को प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन अगले दिन शनिवार तड़के 1 बजकर 30 मिनट पर डॉ. अंबेडकर नगर पहुंचेगी। रतलाम मंडल में इसका ठहराव चित्तौड़गढ़, नीमच, मंदसौर, रतलाम और इंदौर स्टेशनों पर निर्धारित किया गया है। शनिवार को होगी वापसी वहीं, वापसी दिशा में गाड़ी संख्या 09728 डॉ. अंबेडकर नगर–जयपुर स्पेशल 18 अक्टूबर, 25 अक्टूबर और 1 नवंबर 2025 को प्रत्येक शनिवार सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर डॉ. अंबेडकर नगर से रवाना होगी और उसी दिन शाम 6 बजकर 10 मिनट पर जयपुर पहुंचेगी। इस दिशा में भी ट्रेन का ठहराव इंदौर, रतलाम, मंदसौर, नीमच और चित्तौड़गढ़ सहित कई प्रमुख स्टेशनों पर रहेगा। इन स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन दोनों दिशाओं में यह विशेष ट्रेन किशनगढ़, अजमेर, नसीराबाद, बिजयनगर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, नीमच, मंदसौर, रतलाम और इंदौर जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकेगी। ट्रेन एलएचबी कोच रेक से संचालित होगी, जिसमें सेकंड एसी, थर्ड एसी, थर्ड एसी इकोनॉमी, स्लीपर और सामान्य श्रेणी के डिब्बे शामिल होंगे।

जिला अस्पताल में बच्चों को मिल रहा था दूषित सिरप, एजीथ्रोमिसिन की बोतलों में निकले कीड़े

ग्वालियर  छिंदवाड़ा में कफ सिरप से 22 बच्चों की मौत का मामला गर्माया अभी हुआ हुआ ही है कि, मध्य प्रदेश के ग्वालियर से सिरप को लेकर नया मामला सामने आ गया. यहांं बच्चों के एंटीबायोटिक सिरप में कीड़े निकलने की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एंटीबायोटिक एजीथ्रोमिसिन सिरप की शीशियां जब्त कर सैंपल लिए हैं. दवाओं की ये बोतलें जिला अस्पताल में वितरित की जा रही थीं. जिला अस्पताल में हो रहा था दवा का वितरण पिछले दिनों कफ सीरप कोल्ड्रिफ के बाद अब बच्चों को दिए जाने वाले एंटीबायोटिक एजीथ्रोमिसिन ओरल सस्पेंशन सिरप में कीड़े निकलने की बात सामने आई है. जिला अस्पताल में दवाओं के वितरण के दौरान एंटीबायोटिक दवा की शीशी में कीड़ों की शिकायत मुरार जिला अस्पताल के सिविल सर्जन से की गई है. जिसके बाद ड्रग डिपार्टमेंट ने संज्ञान लिया है. एंटीबायोटिक एजीथ्रोमिसिन सिरप के वितरण पर रोक लगाते हुए सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं. दवा की शीशी में निकला कीड़े जैसा एलीमेंट मामला ग्वालियर के जिला अस्पताल मुरार के अधीन प्रसूति गृह अस्पताल का है, जहां ओपीडी में एक महिला अपने बच्चे को लेकर आई थी, डॉक्टर द्वारा लिखे जाने पर एंटीबायोटिक एजीथ्रोमिसिन सिरप दवा वितरण केंद्र से दी गई थी. लेकिन जब महिला ने सिरप की बोतल को खोला तो उसमें काले रंग का कीड़े की तरह दिखने बाला कोई एलिमेंट दिखा. जिसके बाद महिला के द्वारा तुरंत इसकी शिकायत सिविल सर्जन डॉ आरके शर्मा से की गई. सैंपल के साथ दवा वितरण पर रोक शिकायत मिलते ही सिविल सर्जन ने ड्रग डिपार्टमेंट को सूचना दी और ड्रग इंस्पेक्टर अनुभूति शर्मा के नेतृत्व में जांच टीम सिविल सर्जन दवा स्टोर पर पहुंची, जहां से एंटीबायोटिक ओरल सस्पेंशन सिरप एजीथ्रोमिसिन के सैंपल कलेक्ट किए गए. साथ ही दवा का वितरण तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया. इसके अलावा वितरण केंद्रों पर जो सिरप सप्लाई की गई है वहां से इसे रिकॉल कर कलेक्ट किया गया है. सभी अस्पतालों में वितरण पर लगेगी रोक ड्रग इंपेक्टर अनुभूति शर्मा का कहना है कि, "इस गंभीर मुद्दे से जुड़ी खबर सामने आने के बाद न सिर्फ एजीथ्रोमिसिन के सैंपल लिए गए हैं, बल्कि कुछ अन्य दवाओं को भी जांच के दायरे में लिया गया है." बताया जा रहा है कि, ये दवा भोपाल स्थित सरकारी स्टोर से सप्लाई की गई थी. ऐसे में बैच नंबर के आधार पर जानकारी भी जुटाई जा रही है, ताकि इस बैच के सिरप मध्य प्रदेश के जिन जिलों में सप्लाई हुए हैं वहां इंफॉर्मेशन देकर उनके वितरण पर रोक लगाई जा सके.'' ड्रग इंस्पेक्टर अनुभूति शर्मा ने स्पष्ट कहा है कि "यदि सैंपलों की जांच में अमानक तत्व पाए जाते हैं तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.''