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वैदिक घड़ी का शुभारंभ: सूर्योदय से सूर्यास्त तक होगी समय की गणना, सीएम बोले- यही है असली भारतीय पद्धति

भोपाल   राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण और ऐप लॉन्च किया। इस घड़ी की खासियत है कि यह सूर्य की गति के साथ चलती है और सूर्योदय से नए दिन की शुरुआत करती है। इस मौके पर शौर्य स्मारक से युवाओं का बाइक व पैदल मार्च निकाला गया, जो मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचा। वहां “विक्रमादित्य वैदिक घड़ी : भारत के समय की पुनर्स्थापना की पहल” विषय पर युवा संवाद हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री ने युवाओं से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह केवल घड़ी नहीं, बल्कि भारत की गौरवशाली परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टि का आधुनिक स्वरूप है। वैदिक घड़ी हमारी संस्कृति को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाएगी।   कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से जुड़े मोबाइल ऐप का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम में मंत्री विश्वास सारंग ने कहा- 'अगर हम मंत्रियों को एक-एक घड़ी भेंट कर दी जाए तो हम भी अपने घरों में इसे स्थापित कर सकें।' वर्ष की गणना छह ऋतुओं के आधार पर की गई  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समय की गणना सूर्योदय से सूर्योदय तक होनी चाहिए, क्योंकि रात 12 बजे दिन बदलने का कोई औचित्य नहीं है। हमारे इतिहास में खगोल विज्ञान को सूर्य की छाया के आधार पर समझा और परिभाषित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे व्रत-त्योहार अंग्रेजी कैलेंडर पर नहीं, बल्कि भारतीय पंचांग पर आधारित हैं। वर्ष की गणना भी तिथियों और छह ऋतुओं के आधार पर की गई है।  सीएम ने कहा कि ये भारत का समय है…। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अब मोबाइल ऐप के माध्यम से भी उपलब्ध है। इसे डाउनलोड कर आप अपने फोन पर हर उपयोगी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मुझे प्रसन्नता है कि मुख्यमंत्री निवास के बाहर भी वैदिक घड़ी स्थापित की गई है।  सूर्योदय से होना चाहिए दिन की गणना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारे सभी त्योहार अंग्रेजी तिथियों के आधार पर नहीं आते। वर्ष की गणना भी तिथियों और छह ऋतुओं के आधार पर की गई है। इसलिए समय की गणना सूर्योदय से सूर्योदय तक होनी चाहिए। रात 12 बजे दिन बदलने का कोई औचित्य नहीं है। हमारी प्राचीन गणना पद्धति में 60 सेकेंड का मिनट नहीं, बल्कि 30 घंटे में 30 मुहूर्त माने जाते हैं। यह कोई बंधन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की धरोहर और विचार का विषय है। उन्होंने कहा कि अतीत के इतिहास में खगोल विज्ञान को सूर्य की छाया से समझा जाता था। भारत का सेंटर पॉइंट उज्जैन माना गया है, लेकिन यह भी समय के साथ दोलायमान हुआ और 32 किमी दूर डोंगला तक पहुंचा। भगवान श्रीकृष्ण भी समय गणना का केंद्र खोजने डोंगला के पास नारायणा गांव आए थे, जहां उनके साथ बलराम और सुदामा भी मौजूद थे। सीएम ने आगे कहा कि 10 हजार साल पहले सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण कब हुआ था, इसकी गणना आज का कंप्यूटर भी नहीं कर पाएगा, लेकिन हमारी वैदिक काल गणना तुरंत सटीक जवाब देती है। सावन के महीने में छाता लेकर चलने की परंपरा भी इसी अनुभवजन्य गणना का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ग्रह, नक्षत्र और तिथियों के आधार पर जीवन के सभी निर्णय तय किए जाते थे। हमने विधानसभा में भी यही परंपरा अपनाने का प्रयास किया है- रात में भी काम हो सकता है, लेकिन अमावस्या के दिन अवकाश होना चाहिए। पश्चिम का समय जब तक था, तब तक था। अब पूर्व का समय आया है। दुनिया में भारत की अच्छाइयों को लेकर जाने का यही समय सही समय है। 2014 में सरकार बनाने के 6 महीने में ही पीएम मोदी ने दुनिया मे योग को पुर्नस्थापित करने का काम किया। भारत का ज्ञान कौशल समूची मानवता के लिए है। ये घड़ी भारत की हलचल दुनिया को दिखा रही है। सबकी गति अलग- अलग है लेकिन हमारी ज्ञानगंगा की धारा और आगे तक जाए। हम सब इस घड़ी का उपयोग करते हुए इसकी चर्चा करेंगे। सीएम ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से कहा- मोबाइल ऊपर करके क्यूआर कोड से घड़ी डाउनलोड करो। CM ने सबके मोबाइल की टॉर्च ऑन करवाई। भरतीय पंचांग ऋतुओं और प्रकृति से जुड़ा हुआ  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के लोकार्पण एवं युवाओं से संवाद कार्यक्रम में कहा कि  काल गणना और वैदिक पद्धति हमारी वैज्ञानिक और सांस्कृतिक धरोहर है। अंग्रेजी तिथियां बदलती रहती हैं, लेकिन भारतीय पंचांग ऋतुओं और प्रकृति से जुड़ा हुआ है। सावन-भाद्रपद की वर्षा, क्वार-कार्तिक की ऋतु चक्र- सभी तिथि आधारित गणना का प्रमाण हैं। चंद्रमा और समुद्र के ज्वार-भाटा से लेकर मनुष्य के शरीर पर अमावस्या–पूर्णिमा का प्रभाव वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है। भारतीय गणना पद्धति में दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक माना जाता है, न कि रात 12 बजे से। 30 मुहूर्त, 24 घंटे और समय की संरचना भारतीय काल गणना की अद्वितीय प्रणाली है। सीएम हाउस मेरा नहीं, प्रदेश की जनता का  सीएम ने कहा कि हमारे यहां विचार व्यक्त करने और सत्य के आधार पर सुधार करने की स्वतंत्रता रही है, यही हमारी संस्कृति की ताकत है। उज्जैन भारत का काल गणना का केंद्र है, जो खगोलीय दृष्टि से प्रमाणित है। पंचांग और वैदिक गणित की सटीकता को दुनिया भी स्वीकार कर रही है, कंप्यूटर जहां असफल हो जाए वहां हमारे ज्योतिषी सही उत्तर दे सकते हैं। मुहूर्त का अर्थ केवल शुभ-अशुभ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन और प्रकृति के अनुकूल आचरण भी है। सीएम हाउस मेरा नहीं, प्रदेश की 9 करोड़ जनता का है। भारत के समय की नई परिभाषा लिखी जा रही इस दौरान भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि आज से भारत के समय की नई परिभाषा लिखी जा रही है। उन्होंने कहा- 'जब हम मां की कोख में आते हैं तो ईश्वर प्रारब्ध पहले ही लिख देता है। मुख्यमंत्री जी ने वैदिक घड़ी लगवाकर वास्तव में भारत के समय की पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक कदम उठाया है।' हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म हिंदू संस्कृति में हुआ है। यह घड़ी हमें काल गणना की वैदिक परंपरा से जोड़ेगी और भारत को सोने की चिड़िया बनने की दिशा में आगे बढ़ाएगी। मुख्यमंत्री निवास विरासत का साक्षी बन रहा मंत्री कृष्णा गौर ने कहा- … Read more

एमपी के IAS अफसर मोदी सरकार में बने प्रशासनिक रीढ़, अब नौ मंत्रालयों में लीडरशिप

भोपाल  पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की केंद्र सरकार में उत्तर भारतीय राज्यों के वरिष्ठ नौकरशाहों को बोलबाला है। मोदी सरकार (Modi Government) के चुस्त व नतीजे देने वाले प्रशासन की रीढ़ माने जाने वाले मंत्रालयों के सचिव पदों का जिम्मा मध्यप्रदेश सहित बिहार के आला अफसर संभाल रहे है। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार में जहां दक्षिण भारतीय अधिकारी प्रमुख मंत्रालयों की कमान संभाले हुए थे वहीं मोदी के शासन संभालने के बाद धीरे-धीरे ट्रेंड बदला है और मौजूदा दौर में उत्तर भारत की नौकरशाही प्रभावी है। अब मध्यप्रदेश के आइएएस अफसर सबसे आगे निकल गए है। फिलहाल 9 केंद्रीय मंत्रालयों की कमान मध्यप्रदेश और 7 मंत्रालयों की कमान बिहार के आइएएस अफसरों के पास है। वहीं उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य के 6 आइएएस अफसर केंद्रीय मंत्रालयों का नेतृत्व कर रहे है। राजस्थान के भी चार अफसर सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं। सचिव स्तर के अधिकारियों की संख्या में सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश व महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात जैसे बड़े राज्यों के अफसर पीछे हैं। कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन तमिलनाडु व गृह सचिव गोविंद मोहन सिक्किम काडर के आइएएस अफसर हैं। ये संभाल रहे जिम्मेदारी मध्यप्रदेश के IAS और उनके मंत्रालय     IAS दीप्ति गौड़ मुखर्जी- कारपोरेट मामलात     IAS विवेक अग्रवाल- संस्कृति     IAS अलका उपाध्याय- पशुपालन एवं डेयरी     IAS वीएल कांताराव- खनन     IAS पंकज अग्रवाल- ऊर्जा     IAS नीलम शमीराव- टैक्सटाइल     IAS हरि रंजन राव– खेल     IAS पल्लवी जैन गोविल, युवा कल्याण     IAS मनोज गोविल, सचिव समन्वय राजस्थान     IAS रजत कुमार मिश्रा, रसायन एवं उर्वरक     IAS तन्मय कुमार, पर्यावरण, वन व क्लाइमेट चेंज     IAS वी श्रीनिवास, प्रशासनिक सुधार एवं कार्मिक     IAS नरेशपाल गंगवार, पशुपालन डेयरी व मत्स्य छत्तीसगढ़     IAS अमित उठावाल, फार्मास्यूटिकल्स परफार्मेस की कद्र केंद्र में बेहतर परफार्मेंस की कद्र हो रही है। तो ये अच्छा है। एमपी के अफसर बेहतर परफार्मेंस वाले हैं इसलिए उनकी संख्या बढ़ रही रही है। -एसपीएस परिहार, पूर्व केंद्रीय सचिव

भारतीय सेना में रीवा की बेटी आयुषी वर्मा का चयन, लेफ्टिनेंट पद पर मिली सफलता

रीवा  मध्य प्रदेश के रीवा की रहने वाली छात्रा आयुषी वर्मा ने जिले का नाम रोशन कर दिया है। यूपीएससी सीडीएस की परीक्षा में उन्होंने देशभर में 24वीं रैंक हासिल की है। छात्रा का सिलेक्शन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद पर हुआ है। यूपीएससी सीडीएस का रिटेन एग्जाम देने बाद उनके 5 इंटरव्यू हुए जिसमें उन्होंने सफलता हासिल की। आयुषी वर्मा ने स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही सेना में जाने का मन बना लिया था। पोस्टर देखकर किया सेना में जाने का फैसला आयुषी वर्मा ने कहा कि जब मैं स्कूल जाती थी उसे समय रीवा की रहने वाली अवनी चतुर्वेदी का सिलेक्शन भारतीय वायुसेना में हुआ था। उनके सिलेक्शन के बाद पूरे शहर में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए थे। इस होर्डिंग्स और पोस्टर को देखकर ही मैंने सोचा था कि मैं भी सेना में जाऊंगी। आयुषी वर्मा ने बताया कि वह ट्रेनिंग के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद संभालेंगी। रीवा में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए इंदौर गईं। इंदौर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने सीडीएस का एग्जाम दिया और उसमें सफलता हासिल कर भारतीय सेना में शामिल हुई हैं। आयुषी ने बताया कि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही सीडीएस की तैयारी शुरु कर दी थी। वह अपना ज्यादातर वक्त किताबों के साथ ही गुजारती थीं। कैसा है फैमिली बैकग्राउंड आयुषी वर्मा के पिता रमेश वर्मा एक विद्यालय में सपोर्ट टीचर हैं। उन्होंने कहा कि आयुषी बचपन से ही पढ़ने लिखने में काफी तेज थी। पढ़ाई के अलावा वह जूडो-कराटे की भी अच्छी खिलाड़ी है। उसने अपना एक लक्ष्य निर्धारित किया और जमकर पढ़ाई की और मेहनत का परिणाम है कि वह सीडीएस जैसी परीक्षा उत्तीर्ण कर सेना में लेफ्टिनेंट बन गई है। आयुषी की मां का नाम ममता वर्मा है और वह गृहणी हैं। मां ममता वर्मा ने कहा कि मेरा बेटा भी सेना में जाना चाहता था। उसने भी सीडीएस की परीक्षा पास कर ली थी लेकिन कुछ मेडिकल कारणों के वजह से नहीं जा पाया। आज बेटी ने उन सपनों को साकार कर दिया है।

कांग्रेस बोली- जीतू पटवारी पर खतरा, रतलाम घटना के बाद सुरक्षा की जरूरत

भोपाल   मध्य प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर हुए हमले ने पार्टी नेताओं की टेंशन बढ़ा दी है। रतलाम में कांग्रेस नेता की सुरक्षा में हुई चूक के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाने की मांग होने लगी है। पूर्व कानून मंत्री व कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने कहा कि जीतू पटवारी पार्टी के चीफ हैं, उनकी सुरक्षा में चूक न हो इसका ध्यान रखना चाहिए। कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने जीतू पटवारी की सुरक्षा की मांग करते हुए कहा कि जीतू पटवारी कांग्रेस के पीसीसी चीफ हैं, किसी भी पार्टी के नेता हो, उनकी सुरक्षा में चूक न हो इसका ध्यान रखा जाए। हर नागरिक को सुरक्षा मिलनी चाहिए। दरअसल, रतलाम जिले में वोट चोर गद्दी छोड़ जन समर्थन रैली में शामिल होने आए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को धाकड़ समाज के लोगों का विरोध झेलना पड़ा। महू नीमच हाइवे पर धाकड़ समाज के लोगों ने जीतू पटवारी के खिलाफ नारेबाजी की और काले झंडे दिखाए। धाकड़ समाज का विरोध देख पटवारी गाड़ी से नीचे उतरे और अपने बयान को लेकर माफी मांगी। इसके साथ ही उनके गाड़ी के अज्ञात लोगों ने कांच भी फोड़ दिए। क्या है पूरा मामला जीतू पटवारी ने विगत दिनों बीजेपी के नेता मनोहर लाल धाकड़ के 8 लेन कांड को लेकर बयान दिया था। इसको लेकर धाकड़ समाज के लोग विरोध कर रहे थे। अपने बयान पर पटवारी ने धाकड़ समाज के लोगों के बीच पहुंचकर कहा कि अगर आप लोगों को मेरे बयान से ठेस पहुंची हो तो सॉरी मैं आपसे माफी मांगता हूं। मैं भी धाकड़ हूं धाकड़ समाज से ही हूं कोई गलती हुई हो तो क्षमा मांगता हूं। जिसके बाद धाकड़ समाज के लोगों से गले मिलकर पटवारी रतलाम जन समर्थन रैली में पहुंचे। इस दौरान पटवारी के गाड़ी के कांच भी अज्ञात लोगों ने कांच फोड़ दिए।

मध्य प्रदेश के नीमच-मंदसौर से डोडा चूरा तस्करी का नया मार्ग, अधिकारियों में चिंता

 नीमच  अफीम उत्पादन के लिए देशभर में प्रसिद्ध मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिले मंदसौर और नीमच इन दिनों डोडा चूरा तस्करी का नया केंद्र बनकर उभर रहे हैं। राजस्थान के रास्ते दिल्ली, पंजाब और हरियाणा तक डोडा चूरा सप्लाई का रूट तस्करों ने तैयार कर लिया है। सात माह में 30 किलो से लेकर 300 किलो तक डोडा चूरा तस्करी के दो दर्जन से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में नीमच जिले का एक पुलिसकर्मी खुद डोडा चूरा तस्करी के आरोप में पकड़ा जा चुका है। प्रतिबंधित डोडा चूरा को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के बाहरी इलाकों में पानी या चाय में मिलाकर नशे के रूप में उपयोग किया जाता है। सस्ता नशा होने से इसकी बड़ी मांग रहती है। ट्रक, एंबुलेंस और निजी वाहनों के माध्यम से इसकी तस्करी के मामले में सामने आए हैं। सिर्फ मप्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के अधीन अफीम की खेती होती है। अफीम वर्ष 2024-25 में समूचे देश में 1 लाख 6 हजार 390 किसानों को अफीम की खेती का लाइसेंस दिया गया, इनमें से 56 हजार 874 चीरा और 49 हजार 516 सीपीएस पद्धति से दिए गए। अकेले मप्र में चीरा पद्धति से 26 हजार 96 किसानों को लाइसेंस दिए गए। इन लाइसेंसी किसानों के पास लगभग 18 लाख 26 हजार 720 किलो डोडा चूरा की पैदावार होने का अनुमान है। वास्तविकता यह है कि 1 अप्रैल 2016 से केंद्र सरकार डोडाचूरा पर प्रतिबंध लगा चुकी है और नष्टीकरण कराने की बात कह चुकी है। इसके बाद से ही मप्र की आबकारी नीति से डोडा चूरा को हटा दिया गया है लेकिन नष्टीकरण को लेकर आज तक को कोई स्पष्ट नीति नहीं है, जिसका फायदा उठाकर तस्कर डोडा चूरा को प्रदेश से बाहर नशे के आदी लोगों तक पहुंचा रहे हैं और काली कमाई कर रहे हैं। डोडाचूरा का उपयोग डोडा चूरा का विशुद्ध रूप से उपयोग नशे के लिए किया जाता है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और अन्य स्थानों पर डोडा चूरा की मांग रहती है। इन क्षेत्रों में नशे के आदी लोग डोडा चूरा को पानी में गलाकर व छानकर उस पानी का उपयोग नशे के लिए करते हैं। इसे चाय में मिलाकर भी पीया जाता है। डोडा चूरा में मार्फिन का प्रतिशत काफी कम 0.02 प्रतिशत होने से भी यह हल्के नशे के रूप में प्रयोग किया जाता है। अब तक हुई कार्रवाई     26 जुलाई को नीमच कैंट थाने के आरक्षक राजेंद्र सिंह को नारायणगढ़ पुलिस ने डोडा चूरा की तस्करी करते पकड़ा। इसके बाद एसपी अंकित जायसवाल ने आरक्षक को बर्खास्त कर दिया।     21 अगस्त को नीमच सिटी पुलिस ने एक आरोपित के पास से 300 किलो डोडा चूरा पकड़ा।     1 सप्ताह पहले नयागांव पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार कर 280 किलो डोडा चूरा व दो अवैध पिस्टल मय कारतूस के जब्त की।     मंदसौर और नीमच में पहले भी डोडा चूरा तस्करी में एबुलेंस तक का उपयोग हुआ है और कार्रवाई कर एंबुलेंस जब्त की गई है। पुलिस के अलावा केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और मप्र पुलिस की नारकोटिक्स विंग भी तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करती है। डोडा चूरा नष्ट करने के लिए समिति गठित     जिला स्तर पर डोडा चूरा नष्टीकरण की प्रक्रिया के लिए समिति गठित है। इसमें कलेक्टर, एसपी, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के अधिकारी व जिला आबकारी अधिकारी सदस्य हैं। विकासखंड स्तर पर इसी अनुक्रम में समिति है। डोडा चूरा नष्टीकरण के संबंध में आधिकारिक रूप से स्पष्ट नीति नहीं है। – एनपी सिंह, जिला आबकारी अधिकारी नीमच तस्करी रोकने के लिए निरंतर हो रही कार्रवाई     जिला स्तरीय समिति की दो बार बैठक हो चुकी है। डोडा चूरा नष्टीकरण का विषय नीतिगत है। इसके संबंध में राज्य शासन स्तर पर निर्णय लिया जाना है। रही बात डोडा चूरा नष्टीकरण की तो पुलिस और अन्य एजेंसियों द्वारा जब्त डोडा चूरा का नष्टीकरण समय-समय पर किया जाता है। तस्करी रोकने के लिए भी निरंतर कार्रवाई की जाती है। – अंकित जायसवाल, एसपी नीमच तस्करों के खिलाफ की जाती है कार्रवाई     डोडा चूरा नष्टीकरण का विषय नीतिगत विषय है। इसके संबंध में मैं कुछ नहीं कहना चाहूंगा। मादक पदार्थ के नियंत्रण के लिए जिला स्तरीय समन्वय समिति की मासिक एवं त्रैमासिक बैठक होती है, जिसमें सभी संबंधित विभाग के अधिकारी शामिल होते हैं। कार्रवाई की जानकारी भी बैठक में रखी जाती है। जिले में तस्करों के खिलाफ कार्रवाई भी जारी है। – हिमांशु चंद्रा, कलेक्टर नीमच  

नगर निगम की गलती? इंदौर में चौराहों के नाम बदलने पर कार्रवाई संभव

 इंदौर  चंदन नगर में रातोरात चौराहों के नाम बदलकर बोर्ड लगाने के मामले में जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट निगमायुक्त शिवम वर्मा को सौंप दी है। रिपोर्ट में सहायक इंजीनियर वैभव देवलासे और सब इंजीनियर राम गुप्ता की गलती सामने आई है। निगमायुक्त सोमवार को रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे सकते हैं। चंदन नगर क्षेत्र में पिछले दिनों कई सड़कों के नाम बदलते हुए बोर्ड लगा दिए गए थे। चंदूवाला रोड को गौसिया रोड, मिश्रावाला रोड को ख्वाजा रोड और लोहा गेट रोड को रजा गेट नाम दे दिया गया था। सोशल मीडिया पर इन बोर्ड की तस्वीर वायरल होने के बाद पूरे शहर में बवाल मचा था। शिकायत महापौर पुष्यमित्र भार्गव तक पहुंची जिसके बाद निगम ने कार्रवाई करते हुए बोर्ड हटा दिए थे। इस मामले में जांच के लिए निगमायुक्त ने अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट निगमायुक्त को सौंप दी है। रिपोर्ट में प्रथमदृष्टत: सहायक इंजीनियरों को इस गड़बड़ी के लिए दोषी माना गया है। रिपोर्ट में कहा है कि सहायक इंजीनियर देवलासे ने बोर्ड पर नाम गलत होने के बावजूद ठेकेदार द्वारा दी गई डिजाइन को जस का तस स्वीकार कर लिया। उन्हें बोर्ड पर नाम गलत होने की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसी तरह गलत नाम वाले बोर्ड की डिजाइन सब इंजीनियर गुप्ता ने देखी, उन्होंने ही इस डिजाइन को अप्रूव किया था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि ठेकेदार कंपनी ने अधिकारियों को नामों की जानकारी दिए बगैर डिजाइन बनाई और सोशल मीडिया पर ही इसकी मंजूरी लेकर बोर्ड तैयार कर लगवा दिए। हमने रिपोर्ट दे दी है     जांच समिति ने मामले की जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट निगमायुक्त को सौंप दी है। रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई होनी है, वह निगमायुक्त ही तय करेंगे। – अभय राजनगांवकर, अपर आयुक्त इंदौर नगर निगम  

एम्स, हमीदिया और जेपी अस्पताल में बदलते मौसम के चलते मरीजों की संख्या बढ़ी

भोपाल भोपाल में मौसम अचानक करवट बदल रहा है। कभी तेज बारिश, कभी कड़ी धूप और फिर उमस। इस वजह से लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। एम्स, हमीदिया और जेपी अस्पताल की ओपीडी में बीते दो दिन में ही 20 हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे। यह संख्या पिछले हफ्ते की तुलना में करीब चार हजार ज्यादा है। सबसे ज्यादा असर बच्चों पर दिख रहा है। जेपी अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। सामान्य दिनों में जहां 60 बच्चे आते थे, अब यह संख्या 170 तक पहुंच गई है। इनमें ज्यादातर बच्चे वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से पीड़ित हैं। करीब सात से आठ प्रतिशत बच्चों को गंभीर हालत में भर्ती करना पड़ रहा है। इनमें सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों का इंफेक्शन देखने को मिल रहा है। आरएसवी वायरस बना चिंता की वजह डॉक्टरों के मुताबिक, इस समय रेस्पीरेट्री सिंसेशियल वायरस (आरएसवी) बच्चों में ज्यादा एक्टिव है। यह वायरस सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण देता है, लेकिन छोटे बच्चों में यह न्यूमोनिया और ब्रोंक्योलाइटिस का कारण बन सकता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, हर साल दुनियाभर में करीब 30 लाख बच्चे आरएसवी से प्रभावित होते हैं। हालांकि, यह वायरस बच्चों को ज्यादा प्रभावित करता है, लेकिन कमजोर इम्यूनिटी वाले बुजुर्ग और दिल या अस्थमा के मरीज भी इसके शिकार हो सकते हैं। दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण टाइफाइड और उल्टी-दस्त के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने बचाव के तरीके बताए जेपी अस्पताल के डॉ. पियूष पंचरत्न का कहना है कि कई परिजन मेडिकल स्टोर से मनमर्जी की दवाएं देकर बच्चों का इलाज करने की कोशिश करते हैं, जिससे स्थिति बिगड़ जाती है। बच्चों को केवल पैरासिटामाल दी जा सकती है, लेकिन लक्षण बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि इस बार ह्यूमन राइनोवायरस और ई-कोलाई बैक्टीरिया भी सक्रिय हैं, जो वयस्क मरीजों को प्रभावित कर रहे हैं। ज्यादातर मरीज एक से दो हफ्ते में सामान्य दवाओं से ठीक हो जाते हैं। लेकिन मरीजों को सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। यह लक्षण दिखने पर सतर्क रहें गले में खराश, तेज सर्दी, लगातार खांसी, बुखार, पेट दर्द या थकान जैसे लक्षण दिखें तो लापरवाही न करें और तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। ये उपाय करना जरूरी     हमेशा उबला या शुद्ध पानी पिएं।     ठंडी और बासी चीजों से बचें।     बच्चों को अन्य बीमार बच्चों से दूर रखें और बीमारी की स्थिति में स्कूल न भेजें।     गले में खराश हो तो गुनगुने पानी से गरारे करें।     मास्क का इस्तेमाल करें और स्वच्छता का ध्यान रखें। क्यों बढ़ रहीं बीमारियां     लगातार बदलता मौसम     धूल और गंदगी से फैलता संक्रमण     लोगों द्वारा लापरवाही और सावधानी न बरतना इसका प्रमुख कारण है। बदलते मौसम का दिख रहा असर     मौसम बदलते ही मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं कि हर मरीज को पर्याप्त समय दें और उन्हें विस्तार से समझाएं कि बीमारी से कैसे बचा जा सकता है। – डॉ. राकेश श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, जेपी अस्पताल  

जिम में ड्रग्स डोज़ देने का खुलासा, पुलिस पकड़ने से पहले संचालक हुआ फरार

भोपाल  भोपाल के हाई प्रोफाइल ड्रग तस्करी, रेप-ब्लैकमेलिंग और जमीन कब्जाने के गिरोह से जुड़ा बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपी चाचा शाहवर और भतीजे यासीन मछली के गुर्गों से भोपाल के एक फेमस जिम का संचालक मोनिस खान सबसे ज्यादा ड्रग्स खरीदता था।  इसका खुलासा 18 जुलाई 2025 को सबसे पहले गिरफ्तार किए गए सैफउद्दीन ने पूछताछ में किया था। मोनिस जिम संचालन करने से पहले फिटनेस ट्रेनर भी रह चुका है। क्राइम ब्रांच ने मेमोरेंडम के आधार पर मोनिस को आरोपी बनाया है, लेकिन केस में नाम आने के बाद वह मलेशिया भाग गया। अब पुलिस उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कराने की तैयारी में है। सैफउद्दीन की ही निशानदेही पर मछली चाचा-भतीजे अरेस्ट सैफउद्दीन की ही निशानदेही पर पुलिस ने शाहवर और यासीन की गिरफ्तारी की थी। पूछताछ में उसने दोनों से ड्रग लेकर बेचने की बात स्वीकार की थी। तब मेमोरेंडम में पुलिस ने चाचा और भतीजे को आरोपी बना दिया था। इसकी जानकारी इन दोनों को नहीं थी। 21 जुलाई को घेराबंदी कर अलग-अलग जगहों से टीम ने चाचा-भतीजे को गिरफ्तार कर लिया। यासीन के मोबाइल से नाबालिग किशोर, युवक और युवतियों को टॉर्चर करते वीडियो मिले थे। जिसके बाद उसके खिलाफ रेप पॉक्सो और धोखाधड़ी की शिकायतें अलग-अलग थानों में दर्ज की गईं। बेन नाम के नाइजीरियन से अंशुल खरीदता था एमडी चाचा-भतीजे की निशानदेही पर पुलिस ने पुराने बदमाश अंशुल सिंह उर्फ भूरी को गिरफ्तार किया। शाहवर और यासीन इसी से ड्रग खरीदते थे। अंशुल ने पूछताछ में बताया था कि वह बेन नाम के नाइजीरियन नागरिक से एमडी ड्रग खरीदकर भोपाल लाता था और पार्टियों में खास ग्राहकों को बेचा करता था। यासीन और शाहवर भी उसके ग्राहक थे। सैफउद्दीन से ड्रग खरीदकर आगे बेचने का काम करते थे सैफउद्दीन ने ही पूछताछ में इस बात का भी खुलासा किया था कि कोहेफिजा और चूना भट्‌टी में स्थित जिम का संचालन करने वाले मोनिस खान और जहांगीराबाद के उमेर पट्‌टी भी ड्रग की तस्करी करते हैं। ये लोग उससे नशे का सामान लेकर आगे बेचने का काम करते थे। मोनिस इस ड्रग्स को अपने जिम में आने वाली युवतियों सहित युवकों को वजन कम कराने की दवा बताकर बेचता था। अरेरा कॉलोनी निवासी विशाल उर्फ सावन और अशोका गार्डन निवासी लारिब उर्फ बच्चा भी सैफउद्दीन से ड्रग खरीदकर आगे बेचने का काम करते थे। शाहिद मछली को सालाना 30 हजार कारतूस की लिमिट ड्रग्स तस्करी के बाद भोपाल के मछली परिवार का कनेक्शन अब शूटिंग की आड़ में कारतूसों की हेराफेरी से भी जुड़ गया है। जांच के दौरान पता चला है कि मछली परिवार के बुधवारा निवासी शाहिद अहमद पिता शरीफ अहमद का आपराधिक रिकॉर्ड है। इसी वजह से उसके तीन गन लाइसेंस निरस्त कर दिए गए। शाहिद मछली को 2012 में लाइसेंस मिला था। उसके पास तीन हथियार 0.32 बोर रिवॉल्वर, 12 बोर सेमी-ऑटोमैटिक गन और 30.06 राइफल (विदेश से खरीदी गई) थे। उसे सालाना 30 हजार कारतूस की लिमिट मिली थी। शाहिद ने किसी शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया जांच में सामने आया कि शाहिद ने किसी शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया। न इस आधार पर कारतूस खरीदे। उसने सिर्फ आत्मरक्षा के लिए जरूरी कारतूस खरीदे। जिला प्रशासन के मुताबिक मछली परिवार से जुड़े कुल 5 लोगों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं। शाहिद के अलावा सोहेल, शहरयार, शफीक और शावेज के नाम पर भी शस्त्र लाइसेंस थे। इन पर कुल 8 हथियार दर्ज थे।

तीन दिन में 83 हजार रुपए का जुर्माना वसूला, MP फ्लाईओवर पर रीलबाजों की धूम

जबलपुर कुछ दिन पहले जबलपुर में मध्यप्रदेश के सबसे लंबे फ्लाईओवर का केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उद्घाटन किया था. उद्घाटन के बाद से ही फ्लाईओवर पर बड़ी संख्या में रील बनाने के लिए लोग पहुंच रहे थे, जिससे यातायात पर असर पड़ रहा था और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई थी. लेकिन अब ऐसे रीलबाज़ों और पुल पर स्टंट करने वालों के खिलाफ जबलपुर पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए 190 लोगों का चालान काटा है. उद्घाटन के बाद से ही रोमांच और मनोरंजन का केंद्र बन गया है दरअसल, 23 अगस्त को एमपी के इस सबसे लंबे फ्लाईओवर का उद्घाटन किया गया, लेकिन उसके बाद से ही यह फ्लाईओवर लोगों के लिए अब रोमांच और मनोरंजन का केंद्र बनता जा रहा है. सोशल मीडिया पर कई ऐसी रील्स और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें युवा फ्लाईओवर पर स्टंट, डांस और फोटोशूट करते नजर आ रहे हैं.  190 से ज्यादा लोगों के चालान काटे गए रीलबाजों की इन हरकतों से फ्लाईओवर के उपर ट्रैफिक व्यवस्था बाधित होने लगी और ब्रिज पर भीड़ के चलते कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा, जिसके बाद पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी. जबलपुर एसपी सूर्यकांत शर्मा के निर्देश पर मदनमहल थाना पुलिस ने फ्लाईओवर पर गश्त बढ़ाई और बीते तीन दिनों में पुल पर नियम तोड़ने वाले 190 से ज्यादा लोगों के चालान काटे गए, जिससे करीब 83 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया. पुलिस का कहना है कि फ्लाईओवर का इस्तेमाल सिर्फ यातायात के लिए किया जाए. रील बनाने, डांस, स्टंट, फोटोशूट करने वालों पर पुलिस की लगातार नजर रहेगी और ऐसे मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.

मध्य प्रदेश में बारिश का कोटा फुल, 17 जिलों में जारी है मूसलाधार बारिश

 भोपाल  मध्य प्रदेश में दो स्ट्रांग सिस्टम एक्टिव होने की वजह से लगातार तेज बारिश का दौर चल रहा है। सोमवार को प्रदेश के 17 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इनमें इंदौर, उज्जैन, देवास, सीहोर, खरगोन, खंडवा, हरदा, बुरहानपुर, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर शामिल हैं। यहां अगले 24 घंटे में ढाई से साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। भोपाल में सुबह से ही बारिश का दौर जारी है। 2 और 3 सितंबर को भी तेज बारिश की चेतावनी है। वहीं, 4 सितंबर को ग्वालियर-चंबल में तेज बारिश का अलर्ट है।  इंदौर और उज्जैन संभाग में अगले 3 दिन भारी बारिश का अलर्ट है। मध्य प्रदेश में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है यहां 37.8 डिग्री पानी गिर चुका है। इसलिए हो रही प्रदेश में तेज बारिश मौसम विभाग की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया- प्रदेश के बीचोंबीच से एक मानसून टर्फ गुजर रही है। वहीं, रविवार को तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) की एक्टिविटी भी बनी रही। इस वजह से कई जिलों में तेज बारिश का दौर रहा। सोमवार को भी सिस्टम की एक्टिविटी देखने को मिलेगी। रतलाम में 1 इंच से ज्यादा बारिश मध्यप्रदेश में रविवार को बारिश का दौर जारी रहा। 18 से अधिक जिलों में पानी गिरा। रतलाम में सबसे ज्यादा 1 इंच पानी गिर गया। गुना में पौन इंच और पचमढ़ी में आधा इंच बारिश हुई। भोपाल, इंदौर, शाजापुर, उज्जैन, छतरपुर, दतिया, मुरैना, रायसेन, विदिशा, सीहोर, बैतूल, गुना, पचमढ़ी, रतलाम, छिंदवाड़ा, सतना, सीधी में भी बारिश का दौर जारी रहा। प्रदेश में बारिश का कोटा पूरा मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक 37.1 इंच बारिश हो चुकी है। शनिवार-रविवार की रात में हुई बारिश से आंकड़ा बढ़ गया। पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। इस बार बारिश के मामले में गुना सबसे बेहतर है। यहां 55.4 इंच बारिश हो चुकी है। गुना में 24 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मंडला में 54 इंच बारिश हो चुकी है। श्योपुर में साढ़े 51 इंच, अशोकनगर में 51.1 इंच और रायसेन में 50.5 इंच पानी गिरा है। वहीं, सबसे कम बारिश वाले 5 जिले इंदौर और उज्जैन संभाग के हैं। शाजापुर में सबसे कम 21 इंच बारिश हुई है। इंदौर में