samacharsecretary.com

14616 अभ्यर्थियों की परीक्षा को लेकर पुलिस अलर्ट, होटल-धर्मशाला की होगी चेकिंग

करनाल  हरियाणा लोक सेवा आयोग की 26 अप्रैल को जिले में 48 केंद्रों पर एचसीएस की परीक्षा आयोजित होगी। परीक्षा के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के उद्देश्य से जिला पुलिस करनाल ने विशेष सुरक्षा प्रबंध किए हैं। पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारणिया ने सभी थाना प्रबंधकों व पुलिस चौकी प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में स्थित होटल, धर्मशाला, सराय आदि स्थानों की नियमित चेकिंग सुनिश्चित करें। साइबर सेल करनाल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रामक सूचना या संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत प्रभाव से कार्रवाई की जा सके। पुलिस अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के मिलने पर गहनता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाए। इसके अतिरिक्त होटल, धर्मशाला व सराय संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक ठहरने वाले व्यक्ति के वैध पहचान दस्तावेज प्राप्त कर नियमानुसार रिकॉर्ड में दर्ज करें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के आने की सूचना तुरंत संबंधित थाना या पुलिस चौकी को दें। 14616 अभ्यर्थी देंगे परीक्षा करनाल में 48 केंद्रों पर दो चरणों में परीक्षा होगी, जिसमें 14616 अभ्यर्थी हिस्सा लेंगे। परीक्षा के समय से 10 मिनट पहले तक प्रवेश दिया जाएगा। सुबह के सत्र की परीक्षा में हिस्सा लेने के लिए बाहर से आने वाले अभ्यर्थियों के रहने के इंतजाम भी प्रशासन करेगा। केंद्रों तक पहुंचने और वापस लाने के लिए बसों की व्यवस्था भी की जाएगी। यह रहेगा समय सुबह का सत्र : सुबह 10 से 12 बजे तक परीक्षा होगी। सुबह 8.30 से 9.50 बजे तक केंद्र में प्रवेश मिलेगा। शाम का सत्र : दोपहर 3 से 5 बजे तक परीक्षा होगी। दोपहर 1.30 से 2.50 बजे तक केंद्र में प्रवेश मिलेगा।  

सब्जी मंडी पुल प्रकरण: दुष्यंत-दिग्विजय चौटाला से पूछताछ के लिए SIT सक्रिय

हिसार हिसार में पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला-सीआईए इंचार्ज पवन कुमार के विवाद के मामले में एसआईटी इंचार्ज डीएसपी कमलजीत ने पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला को नोटिस जारी कर अपना जवाब देने के लिए बुलाया है। डीएसपी कमलजीत ने इस मामले सीआईए इंचार्ज पवन सहित सभी 6 पुलिस कर्मियों को भी नोटिस दिया है। अभी दुष्यंत चौटाला-दिग्विजय चौटाला ने जांच में शामिल होने के लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। जजपा प्रवक्ता एडवोकेट मनदीप बिश्नोई का कहना है कि पुलिस ने अभी तक शिकायत व एफआईआर की कॉपी उपलब्ध नहीं करवाई है। उसे देखने के बाद ही जवाब दिया जा सकता है। आज दुष्यंत चौटाल कार्यकर्ताओं की बैठक लेने आएंगे। जिसके बाद इस विषय पर भी विमर्श किया जाएगा। एसआईटी इंचार्ज कमलजीत ने कहा कि अभी इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी। हमने दोनों पक्षों से साक्ष्य मांगे हैं। उनके बयान भी लेंगे। इसके बाद मौके से जुटाए गए अन्य वीडियो का भी विश्लेषण करेंगे। पूरी जांच के बाद एसपी सिद्धांत जैन को रिपोर्ट सौंपेंगे। यह था मामला गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन के बाद जजपा व इनसो नेताओं पर एफआईआर दर्ज होने के बाद 17 अप्रैल को दुष्यंत चौटाला और उनके भाई दिग्विजय चौटाला मामले के विरोध में गिरफ्तारी देने सिटी थाना पहुंचे थे। इसके बाद एसपी ऑफिस जा रहे थे तो रास्ते में सब्जी मंडी पुल पर सीआईए इंचार्ज पवन कुमार के साथ पुलिस कर्मियों से काफी बहस हुई थी। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने आरोप लगाया था कि सीआईए इंचार्ज पवन कुमार की गाड़ी से उन्हें सब्जी मंडी पुल पर कुचलने का प्रयास किया। पवन कुमार ने उन्हें हथियार दिखाया। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से एक दूसरे के खिलाफ शिकायत दी ई है। जिसकी जांच के लिए एसपी ने डीएसपी कमलजीत के नेतृत्व में एसआईटी बनाई थी।  

चुनाव आयोग सख्ती: खर्च विवरण नहीं देने पर 115 प्रत्याशी अयोग्य

चंडीगढ़ हरियाणा राज्य चुनाव आयोग ने निकाय चुनाव से पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए 115 उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ये सभी उम्मीदवार अगले पांच वर्षों तक कोई चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यह कदम उन प्रत्याशियों के खिलाफ उठाया गया है जिन्होंने चुनाव खर्च का अनिवार्य विवरण समय पर जमा नहीं कराया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए खर्च का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य है और इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह और निष्पक्ष बनाना है। नियमों के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार को चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर अपने चुनावी खर्च का पूरा विवरण जमा कराना अनिवार्य होता है। तय समय सीमा में यह जानकारी उपलब्ध न कराने पर उम्मीदवार को आगामी चुनावों के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इसी क्रम में राज्य चुनाव आयोग ने हाल ही में अयोग्य उम्मीदवारों की सूची अपडेट करते हुए 115 प्रत्याशियों को पांच वर्ष के लिए चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार भी नियमों के पालन को लेकर सख्ती बरती जाएगी। उम्मीदवारों को अपने चुनावी खर्च का विधिवत रजिस्टर बनाए रखने और हर विवरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर वे इस संबंध में पर्यवेक्षकों से मार्गदर्शन भी ले सकते हैं, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि से बचा जा सके। निकाय उम्मीदवार कितना पैसा खर्च कर सकते हैं आयोग समय-समय पर उम्मीदवारों के लिए खर्च की सीमा तय करता आया है। चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवार तय सीमा से ज्यादा खर्च नहीं कर सकते। नगर निगम महापौर के लिए उम्मीदवार अधिकतम 30 लाख रुपये खर्च कर सकते हैं। निगम में पार्षद के उम्मीदवार साढ़े 7 लाख रुपए खर्च कर सकते हैं। वहीं नगर काउंसिल के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार 20 लाख रुपये, नगर काउंसिल के मेंबर की खर्च सीमा चार लाख रुपये तय की गई है। पंचायती राज में सरपंच के लिए यह सीमा 2 लाख रुपये और जिला परिषद सदस्य के लिए 6 लाख रुपये रखी गई है। चुनाव परिणाम आने के 30 दिनों के भीतर यदि उम्मीदवार खर्च का ब्योरा जमा नहीं करते हैं तो जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से नोटिस जारी किया जाता है। उसके बाद भी खर्च का ब्यौरा नहीं देते हैं तो जिला अधिकारी उन्हें अयोग्य घोषित कर देते हैं और इसकी जानकारी राज्य चुनाव आयोग को भिजवाई जाती है। कहां कितने उम्मीदवार अयोग्य घोषित किए गए चुनाव आयोग के मुताबिक सोनीपत नगर निगम के 18 उम्मीदवार, नगर परिषद झज्जर के 5, नूंह नगर परिषद के 14, पुन्हाना नगर पालिका के 17, नगर पालिका फिरोजपुर झिरका के पांच, नगर परिषद नारनौल के 41, नगर पालिका राजौंद के 13, नगर पालिका टोहाना के एक उम्मीदवार को अयोग्य घोषित किया गया है।  

प्रॉपर्टी आईडी में गलती? अब नहीं होगी परेशानी: Panipat निगम खुद करेगा सुधार, NDC पोर्टल एक्टिव

पानीपत. अब नगर निगम में बिना शिकायत ही प्रापर्टी आइडी में क्षेत्र, कैटेगरी और अन्य तरह की बड़ी गलतियां ठीक होंगी। नगर निगम अधिकारी और कर्मचारी ऐसी आइडी की तलाश खुद करेगा। इसके लिए शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय (यूएलबी) के एनडीसी पोर्टल का सहारा लिया जाएगा। नगर निगम के कर्मचारी कंप्यूटर सिस्टम में एनडीसी पार्टल खोलकर उसमें फिल्टर लगाकर गलतियां वाली आइडी की तलाश करेंगे। फिर ऐसी आइडी की खुद ही फाइल बनाकर उसकी प्रोसेस चलाएंगे। अभी शहर में 1.86 लाख प्रापर्टी आइडी हैं। इनमें करीब 50 हजार ऐसी आइडी हैं, जिनमें किसी न किसी प्रकार की गलतियां हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में नगर निगम ने 30.65 करोड़ रुपये प्रापर्टी टैक्स रिकवर किया था। जिसके साथ ही नगर निगम ने अपना ही रिकार्ड तोड़ा है अब मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026-27 में टैक्स रिकवरी और भी अधिक बढ़ाने का लक्ष्य अभी से बनाकर काम शुरू कर दिए गए हैं।  गलतियां ठीक होने पर संबंधित मालिकों को सूचित करेंगे ऐसी आइडी की गलतियां ठीक करके संबंधित प्रापर्टी मालिकों को सूचित भी किया जाएगा। हालांकि प्रोसेस चलाने के दौरान भी जो मोबाइल नंबर दिया हुआ है, उस पर काल करके ओटीपी भी लिए जाएंगे। इसके बाद जब आइडी की गलतियां ठीक हो जाएंगी तो नगर निगम की टीमें संबंधित मालिकों को सूचित करेंगे। इसके साथ-साथ बिल भरने के लिए प्रेरित भी करेंगे। अतिरिक्त आयुक्त विवेक चौधरी ने कहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में इस बार प्रापर्टी टैक्स रिकवरी पहले से भी बेहतर करने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए प्रापर्टी आइडी की गलतियां ठीक होना बहुत जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए ऐसी प्रापर्टी आइडी की तलाश करवा रहे हैं, जिनमें बड़ी गलतियां हैं। इसके लिए विशेष रूप से टीमें गठित करके जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। शहरवासियों को बेहतर सहयोग देने के साथ-साथ प्रापर्टी टैक्स जमा कराने के लिए भी प्रेरित करेंगे।

Ambala में BJP का नया समीकरण: पुराने-नए चेहरों का मिश्रण, बाहरी प्रत्याशियों को भी टिकट

अंबाला शहर. लंबे इंतजार के बाद वीरवार सुबह जैसे ही भाजपा ने 20 वार्डों के अपने पार्षद उम्मीदवारों की सूची जारी की, शहर की सियासत में हलचल तेज हो गई। यह सूची सिर्फ नामों का एलान नहीं, बल्कि उस राजनीतिक प्रयोग का खाका है जिसमें वफादारी से ज्यादा विजय क्षमता को तवज्जो दी गई है। इस बार का चुनाव सीधे-सीधे भाजपा बनाम कांग्रेस का मुकाबला जरूर दिख रहा है, लेकिन असल कहानी इससे कहीं ज्यादा पेचीदा है। वजह टिकट वितरण में पुराने चेहरों की वापसी, विपक्ष से आए नेताओं को मौका और नए चेहरों पर जोखिम भरा भरोसा। भाजपा की सूची में जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया है उनमें 11 ने पिछला चुनाव लड़ा था। इनमें से दो हार गए थे। 9 जितने वालों में एक कांग्रेस और एक हरियाणा जनचेतना पार्टी जोकि भाजपा में विलय हो गई और शेष 7 भाजपाई ही थे। अब जब भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं, तो सियासत का फोकस टिकट से हटकर टक्कर पर आ गया है। हर वार्ड में समीकरण अलग हैं कहीं जातीय गणित, कहीं व्यक्तिगत पकड़, तो कहीं विकास के मुद्दे चुनाव की दिशा तय करेंगे। इस बार का चुनाव एक तरह से हाइब्रिड माडल बन गया है जहां पुराने नेता, नए चेहरे और दल-बदल की राजनीति एक साथ मैदान में है। पुराने सिपाहियों पर भरोसा, लेकिन पूरी तरह नहीं…. भाजपा ने पिछले चुनाव में जीत दर्ज करने सातों चेहरों को दोबारा मैदान में उतारकर यह संकेत दिया है कि पार्टी अपने विनिंग काम्बिनेशन को पूरी तरह छोड़ने के मूड में नहीं है। मन्नी आनंद, अर्चना छिब्बर, मोनिका मल, मीना ढिंगरा, शोभा पूनिया, हितेष जैन और प्रीति सूद के पति दिनेश सूद, जैसे नाम फिर से टिकट पाकर यह साबित करते हैं कि पार्टी को अपने पुराने प्रदर्शन पर भरोसा है। लेकिन दिलचस्प यह है कि दो जीतने वाले चेहरों को किनारे कर नए समीकरण बनाए गए यहीं से राजनीति का असली खेल शुरू होता है। दल-बदलुओं पर दांव या मजबूरी… इस सूची का सबसे बड़ा संदेश है दल बदलने वालों के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं। कांग्रेस से आए राजेश मेहता, हरियाणा जनचेतना और हरियाणा डेमोक्रेटिक मोर्चों से जुड़े चेहरे, अब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। यह रणनीति साफ करती है कि भाजपा इस बार वोट बैंक इंपोर्ट करने की कोशिश कर रही है।यानी जहां संगठन कमजोर है, वहां विपक्ष के मजबूत चेहरों को शामिल कर सीधे मुकाबले को अपने पक्ष में मोड़ने की तैयारी है। दोधारी तलवार, पुरानों को टिकट ने मिलने से बेचैनी लेकिन भाजपा का यह दांव दोधारी तलवार भी है स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष और बगावत का खतरा भी उतना ही बड़ा है। पांच पूर्व पार्षदों को टिकट नहीं मिली। इनमें से एक ने तो खुद नामांकन नहीं भरा था, एक ने नामांकन भरा था लेकिन चुनाव नहीं लड़ने की बात भी खुद ही कह दी थी। तीन ऐसे हैं जिन्होंने टिकट मांगी थी लेकिन नहीं मिली। इनमें से एक भाजपा का सबसे पुराना चेहरा भी शामिल है जबकि दो चेहरे हरियाणा जनचेतना से चुनाव जीतने वाले पूर्व पार्षद हैं। लेकिन इनके बदले भाजपा ने इसी पार्टी से जुड़े बाद और अब भाजपा का हिस्सा बने दो अन्य उम्मीदवारों को टिकट देकर संतुलन भी साधने का काम किया है। परिवारवाद की सॉफ्ट एंट्री सूची में कुछ ऐसे नाम भी हैं जो सीधे तौर पर नहीं, लेकिन रिश्तों के जरिए राजनीति में उतर रहे हैं। शिवानी सूद और दिनेश सूद, गुरप्रीत साहनी जैसे उदाहरण बताते हैं कि पार्टी अब फैमिली कनेक्शन को भी चुनावी पूंजी मान रही है। यह ट्रेंड बताता है कि स्थानीय पहचान और नेटवर्क को प्राथमिकता दी जा रही है, चाहे उम्मीदवार खुद पहली बार मैदान में क्यों न हो। गुटबाजी की झलक भी साफ टिकट वितरण में अलग-अलग गुटों का संतुलन भी नजर आता है। कार्तिकेय शर्मा गुट से जुड़े दो उम्मीदवारों को टिकट मिलना इस बात का संकेत है कि पार्टी ने अंदरूनी समीकरणों को साधने की कोशिश की है। यह संतुलन फिलहाल कागज पर तो ठीक दिखता है, लेकिन चुनावी मैदान में यही गुटबाजी कभी-कभी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है। नए चेहरों पर रिस्क फैक्टर करीब 9 नए चेहरों को टिकट देकर भाजपा ने यह भी साफ कर दिया है कि वह सिर्फ पुराने फार्मूले पर निर्भर नहीं रहना चाहती। विशाल राणा, वरखा सहोता, वरिंद्र नाथ, गुरविंद्र सिंह, कविता सैनी, कमल अग्रवाल, बीनू गर्ग, सपना रानी, राजकुमार गुप्ता उम्मीदवारों को मौका देकर पार्टी ने फ्रेश फेस का कार्ड भी खेला है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये नए चेहरे जमीन पर उतनी ही मजबूती दिखा पाएंगे, जितनी उम्मीद पार्टी कर रही है?

शादी का जश्न बना मातम: Sirsa में वीडियो शूट कर रहे कैमरामैन को कार ने कुचला

सिरसा. शादी समारोह में दुल्हन की विदाई की फोटोग्राफी कर रहे एक कैमरामैन को बीच सड़क खड़ा होना भारी पड़ गया। सोमवार सुबह दिल्ली पुल के पास तेज रफ्तार कार ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कैमरामैन कई मीटर दूर जा गिरा और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। मृतक मनजीत सिंह अपने परिवार में माता-पिता और एक छोटे भाई के साथ रहता था। वह फ्रीलांसर फोटोग्राफर के तौर पर काम कर परिवार का खर्चा चला रहा था। जानकारी के अनुसार रानियां क्षेत्र के गांव अभोली निवासी 28 वर्षीय मनजीत सिंह फ्रीलांसर फोटोग्राफर के तौर पर काम करता था। सोमवार सुबह वह दिल्ली पुल के पास स्थित एक होटल में आयोजित विवाह समारोह में दुल्हन की विदाई के दौरान फोटो व वीडियो बना रहा था। विदाई के बाद बेहतर एंगल लेने के लिए वह हाईवे के बीच सड़क पर खड़ा होकर फोटोग्राफी कर रहा था। इसी दौरान सिरसा की ओर से तेज रफ्तार में आ रही एक कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही मनजीत सिंह हवा में उछलकर कई मीटर दूर जाकर सड़क पर गिर पड़ा। टक्कर के बाद कार भी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे डिवाइडर से टकराकर रुक गई। मौके पर मौजूद लोगों व कार चालक ने मनजीत सिंह को संभालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना डायल 112 पर दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नागरिक अस्पताल भिजवाया। बाद में स्वजन के बयान के आधार पर पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने कार चालक और वाहन को सिविल लाइन थाना ले जाकर जांच शुरू कर दी है। मृतक के पिता हरजिंद्र के बयान पर रिट्ज कार चालक फतेहाबाद के शक्तिनगर निवासी संदीप कुमार के खिलाफ तेज गति व लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। हादसे की पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कैमरामैन हाईवे के बीच खड़ा होकर फोटो ले रहा है। इसी दौरान तेज रफ्तार कार उसे टक्कर मार देती है और वह उछलकर दूर जा गिरता है। यह वीडियो दिनभर इंटरनेट मीडिया पर वायरल होता रहा।

Panchkula में भाजपा का दांव: वार्डवार उम्मीदवार घोषित, Gyan Chand Gupta की मजबूत पकड़

पंचकूला. भाजपा ने नगर निकाय चुनाव 2026 के तहत पंचकूला नगर निगम के लिए पार्षद उम्मीदवारों की वार्डवार आधिकारिक सूची जारी कर दी है। अधिकांश उम्मीदवारों को पूर्व स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता का समर्थक माना जा रहा है। खास तौर पर उनके पौते पार्थ गुप्ता को वार्ड-6 से टिकट दिए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। यह सूची केंद्रीय नेतृत्व से विचार-विमर्श के बाद जारी की गई है। वार्ड नंबर 1 से 20 तक उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। पार्टी ने इस बार महिला उम्मीदवारों को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है। पूर्व पार्षद रितु गोयल, ओमवती पूनिया, सोनिया सूद और सुशील गर्ग नरवाना को टिकट दिया गया है। सूची जारी होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। सभी उम्मीदवारों ने अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। पार्टी अब बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करते हुए चुनाव जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रही है। वार्डवार उम्मीदवारों की सूची वार्ड नंबर     उम्मीदवार का नाम 1     परमजीत कौर 2     पमरजीत कौर 3     सुरेश वर्मा 4     भारत हितैषी 5     जय कौशिक 6     पार्थ गुप्ता 7     ज्योति प्रसाद 8     राजकुमार जैन 9     हरेंद्र मलिक 10     शेखर पांडेय 11     अनुराधा पुरी 12     राकेश जगोता 13     दीपक गर्ग 14     राकेश गोयल 15     प्रियंका 16     निर्मल देवी 17     सुदेश बिडला 18     पूजा देवी 19     मनीषा रानी 20     गौतम राणा

Railway Bomb Threat: Ambala-Delhi रूट पर अलर्ट, हरियाणा के स्कूलों में दहशत फैलाने वाले ईमेल

अंबाला. पंजाब और हरियाणा में रेलवे ट्रैकों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। 24 अप्रैल को 8:11 मिनट पर अंबाला से लेकर दिल्ली तक रेलवे ट्रैक पर धमाके करने की धमकी दी गई है। इसके अलावा पंजाब में भी लुधियाना अमृतसर बठिंडा फिरोजपुर में रेलवे ट्रैक उड़ाने की धमकी दी गई है। ईमेल के माध्यम से भेजी गई इस धमकी में हरियाणा के मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और पंजाब के मुख्यमंत्री को भी जान से मारने की धमकी दी गई है। ईमेल में कहा गया है कि 24 अप्रैल को अपने बच्चों को स्कूल में मत भेजो और रेल से सफर मत करो। लुधियाना के स्कूलों को एक बार फिर से बम से उड़ाने की धमकी भरा ई-मेल जारी हुआ है। फिलहाल चार स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इनमें स्प्रिंग डेल पब्लिक स्कूल, पौदार इंटरनेशनल स्कूल, मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल, बीआरएस नगर का डीएवी पब्लिक स्कूल शामिल है। धमकी भरा ई-मेल जारी होने के बाद स्कूलों ने अभिभावकों के ग्रुपस में जानकारी शेयर की और पुलिस प्रशासन को भी सूचित कर दिया। स्प्रिंग डेल स्कूल ने तो बच्चों की छुट्टी कर दी। फिलहाल स्कूल में पुलिस की ओर से चैकिंग चल रही है। वहीं आज ही बठिंडा के दो प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों—सेंट जेवियर स्कूल और मिलेनियम स्कूल— को बम से उड़ाने की धमकी मिली। इसके साथ ही बठिंडा रेलवे स्टेशन को भी निशाना बनाने की चेतावनी भरा ईमेल सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों के बीच हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया और पूरे शहर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया।

राजनीति गरमाई: Anil Vij ने Mallikarjun Kharge के बयान पर किया जोरदार पलटवार

चंडीगढ़. हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड्गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आतंकवादी कहे जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश का कोई भी नागरिक अपने प्रधानमंत्री के बारे में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इनके अंदर तो विदेशियों की आत्माएं बोलती है जिनमें पाकिस्तान, चीन जैसे देश के दुश्मनों की बोलती है जो यह इस प्रकार के शब्द कहने का दुसाहस भी कर पाते हैं। विज आज पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। बंगाल व तमिलनाडू में कल से मतदान को लेकर ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि देश में मोदी की लहर चल रही है सारे देश में विकास की राजनीति की लहर चल रही है। फिर चुनाव किसी भी प्रदेश में हो असर हर जगह है। हम इससे पहले हरियाणा, दिल्ली, बिहार, मुंबई में जीते हैं उसी प्रकार से आगे भी जहां-जहां चुनाव होंगे, भाजपा ही जीतेगी। सांसद पप्पू यादव द्वारा राजनीतिक क्षेत्र में आई महिलाओं पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर ऊर्जा मंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस प्रकार की शब्दावली का इस्तेमाल करना निंदनीय है। हो सकता है कि उनकी अपनी पार्टियों में ऐसा कुछ होता हो, मगर सारी पार्टियों, महिलाओं व देश को ऐसा नहीं कह सकते।

ESI अस्पताल घोटाले पर बड़ा एक्शन: Panipat में फर्जी रेफरल केस की जांच ACB को

पानीपत. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाते हुए पानीपत ESI अस्पताल में हुए करोड़ों के रेफरल घोटाले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंप दी है। वर्ष 2020 से 2024 के बीच हुए इस घोटाले में मरीजों को निजी अस्पतालों में फर्जी तरीके से रेफर किया गया था। सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल के तीन कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। जांच में सामने आया है कि अस्पताल के 3 कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से पिछले चार वर्षों में मरीजों को बिना जरूरत के निजी अस्पतालों (पैनल अस्पतालों) में रेफर किया। रेफरल फॉर्म पर डॉक्टरों के जाली हस्ताक्षर कर निजी अस्पतालों को फायदा पहुंचाया। इस खेल के जरिए सरकारी धन का बड़े स्तर पर दुरुपयोग किया गया। CM नायब सैनी का कड़ा रुख मुख्यमंत्री ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए न केवल ACB जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि राज्य के अन्य 133 पैनल अस्पतालों के रिकॉर्ड की भी गहनता से जांच करने के निर्देश दिए हैं। ताकि यह पता चल सके कि क्या यह नेटवर्क पूरे प्रदेश में सक्रिय है। पानीपत शहरी विधायक प्रमोद विज ने इस बड़े भ्रष्टाचार की आशंका को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था। वर्तमान मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. वंदना ने बताया कि दोषी तीन लोगों पर विभागीय कार्रवाई कर दी गई है। वर्तमान में रेफरल प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया गया है कि फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। अब अधिकांश मरीजों का इलाज अस्पताल के भीतर ही किया जा रहा है, जिससे वार्ड फुल हैं और रेफरल की संख्या बहुत कम रह गई है।