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हाईकोर्ट ने कहा विशेषज्ञों की राय पर अदालत नहीं ले सकती प्रतिस्थापन, भर्ती प्रक्रिया पर बड़ा फैसला

चंडीगढ़  हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) प्रारंभिक परीक्षा-2026 की उत्तर कुंजी और परिणाम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अदालतें शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में विशेषज्ञों की राय का स्थान नहीं ले सकतीं। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि जब तक उत्तर कुंजी में त्रुटि प्रत्यक्ष, स्पष्ट और संदेह से परे साबित न हो, तब तक न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर यदि संदेह या अस्पष्टता हो तो उसका लाभ परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को दिया जाना चाहिए, न कि अभ्यर्थी को। हाईकोर्ट एचसीएस (कार्यकारी शाखा) एवं संबद्ध सेवाओं की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ताओं ने 26 अप्रैल को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और अंतिम उत्तर कुंजी को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने क्या पाया? उनका कहना था कि सामान्य अध्ययन और सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) के कई प्रश्नों के उत्तर गलत हैं तथा प्रमाणिक स्रोतों के विपरीत हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि परीक्षा के बाद हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) ने 28 अप्रैल को अस्थायी उत्तर कुंजी वेबसाइट पर अपलोड कर अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी थीं। प्राप्त आपत्तियों को विषय विशेषज्ञों के पास भेजा गया, जिनकी राय के आधार पर कुछ उत्तरों में संशोधन किया गया और 2 मई को संशोधित उत्तर कुंजी जारी की गई। इसके बाद 4 मई को परिणाम घोषित किया गया।हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश देकर यह भी जानकारी मांगी थी कि कुल कितनी आपत्तियां प्राप्त हुईं और उन्हें निपटाने में कितना समय लगा। इसके साथ ही विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की टिप्पणियां भी तलब की गई थीं। आयोग ने जवाब में बताया कि अदालत के निर्देश के बाद विवादित प्रश्नों पर विशेषज्ञों से दोबारा राय ली गई, लेकिन उन्होंने अंतिम उत्तर कुंजी में किसी अतिरिक्त बदलाव की आवश्यकता नहीं बताई।याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि अंतिम उत्तर कुंजी तैयार करने से पहले उन्हें अन्य अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देने का अवसर नहीं दिया गया। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि ऐसा कोई नियम, विनियमन या विज्ञापन की शर्त नहीं है जो आयोग को ऐसी प्रक्रिया अपनाने के लिए बाध्य करती हो। जस्टिस बंसल ने अपने फैसले में विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाले अभ्यर्थी पर यह साबित करने का दायित्व होता है कि त्रुटि इतनी स्पष्ट है कि उसके लिए किसी अनुमान या विस्तृत तर्क की आवश्यकता न पड़े। अदालत ने कहा कि रिकार्ड से यह साबित नहीं होता कि विशेषज्ञों द्वारा स्वीकार किए गए उत्तर प्रत्यक्ष रूप से गलत हैं। इसलिए विशेषज्ञों की राय को प्रतिस्थापित करने का कोई आधार नहीं बनता। फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि यदि हर आपत्ति पर पुन आपत्ति और फिर पुनर्विचार की अनुमति दी जाए तो भर्ती प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं हो सकेगी। चूंकि यह केवल प्रारंभिक परीक्षा थी और मुख्य परीक्षा इसी माह के अंत में प्रस्तावित है, इसलिए कुछ असफल अभ्यर्थियों की मांग पर पूरी चयन प्रक्रिया रोकना सार्वजनिक हित और सफल उम्मीदवारों दोनों के लिए नुकसानदेह होगा। इसी आधार पर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।  

मुख्यमंत्री सैनी की बैठक में 1468 करोड़ के 32 विकास कार्यों को मंजूरी दी गई

 चंडीगढ़  हरियाणा में कृषि भूमि में नाइट्रोजन की जांच करने के लिए 52 प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी। कुल 12 लाख किसानों की कृषि भूमि से नमूने लिये जाएंगे जिससे वे यूरिया का निर्धारित मात्रा में उपयोग कर जमीन की उर्वरा शक्ति बढा सकें। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में एक दर्जन विभागों के 1468 करोड़ रुपये के 32 कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई। इनमें राजस्व, कृषि, कौशल विकास, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण, पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, बिजली निगम, लोक निर्माण विभाग, जनस्वास्थ्य, सिंचाई तथा हरियाणा राज्य औद्योगिक अवसंरचना विकास निगम शामिल हैं। बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा, सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और प्रधान सचिव अरुण गुप्ता मौजूद थे। किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। संबंधित जिलों में मंत्री एवं विधायकों के साथ मुख्यमंत्री भी अभियान से जुड़कर किसानों को जागरूक करेंगे। विशेषकर मोरनी क्षेत्र में 4000 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। कोर्ट केस के मामलों का सही निपटान सुनिश्चित करने के लिए राजस्व कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम को स्वीकृति दी गई है। बैठक में कौशल्या डैम पंचकूला का पक्का कार्य करने, यमुना वाटर सेवाएं सर्कल रोहतक में भालोठ सब ब्रांच की आरडी 124000 से 156014 तक का पुनर्निर्माण, बरवाला ब्रांच से हिसार एयरपोर्ट पर कच्चे पानी हेतु पंपिंग स्टेशन बनाने तथा राणा डिस्ट्रीब्यूटरी का निर्माण करने की स्वीकृति प्रदान की गई। पंचकूला बस स्टैंड रोटरी से ट्राफिक लाइट 4-11 चौक तक बरसाती पानी की निकासी हेतु ड्रेन का निर्माण होगा। पिंजौर कालका अर्बन कांप्लेक्स सेक्टर 29 में 10 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा। सिरसा, अंबाला और रेवाड़ी में शुरू होंगी कई नई परियोजनाएं सिरसा शहर में अतिरिक्त बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण और पाइपलाइन बिछाने तथा 4.50 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने तथा केलनिया रोड पर 10 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम किया जाएगा। सिरसा में पेयजल के लिए तीसरे जल घर में शुद्ध जल टैंक निर्माण के साथ बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण करवाया जाएगा। अंबाला शहर के देवीनगर में 60 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और अंबाला सदर टाउन के विभिन्न जलभराव वाले क्षेत्रों में वाटर ड्रेनेज बनाई जाएगी। रेवाड़ी शहर में नेताजी रोड पर 24 एमएलडी के प्राइमरी ट्रीटमेंट प्लांट को टीटीपी में अपग्रेड कर बिशनपुर में 17 गांवों में पर्याप्त मात्रा में पेयजल सुलभ करवाने के लिए नहर आधारित जल घर में रा वाटर पंपिंग स्टेशन का निर्माण कराया जाएगा। होडल टाउन में आगरा कैनाल वाटर टैंक से पाइप लाइन की क्षमता बढ़ाने और सीवर लाइन डलवाने के कार्य को स्वीकृति दी गई है।

जापान में दिखेगा भारत का टेनिस दम, झज्जर के सुमित नागल को मिली टीम की कप्तानी

झज्जर. जिले के गांव जैतपुर के होनहार खिलाड़ी और भारत के शीर्ष रैंकिंग वाले सिंगल्स टेनिस खिलाड़ी सुमित नागल आगामी 20वें एशियाई खेलों में भारतीय टेनिस दल की अगुवाई करेंगे। अखिल भारतीय टेनिस संघ द्वारा घोषित की गई टीम में उन्हें पुरुषों की चुनौती का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बता दे कि 20वें एशियाई खेलों (ऐची-नागोया 2026) का भव्य आयोजन जापान में इस वर्ष 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक किया जाना है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय पुरुष टेनिस टीम में सुमित नागल के साथ मानस धामने, दक्षिणेश्वर सुरेश, युकी भांबरी, एन श्रीराम बालाजी और अनिरुद्ध चंद्रशेखर जैसे दिग्गज खिलाड़ी देश के लिए कोर्ट पर उतरेंगे। पिता की प्रेरणा से क्रिकेट छोड़ थामा टेनिस का रैकेट 16 अगस्त 1997 को झज्जर में जन्मे सुमित नागल को बचपन में क्रिकेट का बेहद शौक था। हालांकि, उनके पिता सुरेश नागल, जो कि एक सेवा निवृत स्कूल शिक्षक हैं, चाहते थे कि सुमित किसी व्यक्तिगत खेल (इंडिविजुअल स्पोर्ट) में अपना करियर बनाएं। पिता की इसी प्रेरणा से सुमित ने महज 8 साल की उम्र में टेनिस खेलना शुरू किया। सुमित ने वर्ष 2015 में जूनियर विंबलडन का बायज डबल्स खिताब जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तहलका मचाया था। वह टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलिंपिक में भी भारतीय चुनौती का नेतृत्व कर चुके हैं। पिता सुरेश नागल ने जताई स्वर्ण पदक की उम्मीद सुमित नागल को भारतीय टीम की कमान मिलने की खबर से उनके परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। सुमित के पिता सुरेश नागल ने इस गौरवपूर्ण क्षण पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, "सुमित ने हमेशा अपनी कड़ी मेहनत और लगन से देश का नाम रोशन किया है। एक पिता के तौर पर मेरे लिए इससे बड़े गर्व की बात क्या होगी कि मेरा बेटा अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे का प्रतिनिधित्व कर रहा है। हमें पूरा विश्वास है कि वह जापान में होने वाले एशियाई खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाएगा और देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर झज्जर व पूरे देश का मान बढ़ाएगा।"

धान घोटाले की फाइल ठंडे बस्ते में? रडार पर आए 30 आरोपियों पर अब तक नहीं हुआ एक्शन

यमुना नगर. 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले के खुलासे के बाद 237 दिन बीत चुके हैं, पर जांच अभी भी धीमी गति से चल रही है। पांच थाना प्रभारियों की एसआइटी गठित होने के बावजूद कार्रवाई तीन आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित है। जांच के दौरान 30 से ज्यादा अधिकारी, कर्मचारी व अन्य लोगों के नाम सामने आ चुके हैं, पर अभी भी कई आरोपित पकड़ से बाहर हैं। घोटाले के मुख्य आरोपित छछरौली निवासी राइस मिलर संदीप सिंगला को फिलहाल जमानत नहीं मिली है। मामले की सुनवाई 27 जुलाई को होगी। गिरफ्तारी नहीं होने से जांच टीम पर भी सवाल उठने लगे हैं। संदीप सिंगला को दो दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। उसे तीन चरणों में 18 दिन तक एसआइटी ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। पूछताछ में सामने आया था कि उसके नियंत्रण में सात राइस मिलें हैं, जिनमें पांच पुरानी व दो नई हैं। पुलिस ने संदीप सिंगला व रीतिका सिंगला के खिलाफ तीन थानों में केस दर्ज किए थे। पावर आफ अटार्नी संदीप के नाम होने के कारण रितिका को राहत मिल गई थी। पूछताछ में 30 से ज्यादा अधिकारी व कर्मचारियों के नाम सामने आए थे। जांच प्रभावित न हो। इसलिए पुलिस ने नाम सार्वजनिक नहीं किए। नाम होने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है। महानिदेशक की जांच में घोटाले का खुलासा जांच में सामने आई गड़बड़ियों के बाद मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण, मंडी गेट पास, मिल आवंटन, स्टाक सत्यापन व सरकारी रिकार्ड की जांच की थी। आरोप है कि नियमों के विपरीत कम धान की खरीद दिखाकर स्टाक में हेराफेरी की गई और सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। 13 नवंबर को खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह की जांच में घोटाले का खुलासा हुआ था। जांच में धान के स्टाक और रिकार्ड में भारी अनियमितताएं सामने आने के बाद विशेष जांच दल का गठन किया गया था। इसमें पांच थाना प्रभारी शामिल किए गए थे, पर इसके बाद भी जांच की रफ्तार तेज नहीं हो सकी। मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां जांच में फर्जी गेट पास व दस्तावेजों के माध्यम से स्टाक में हेराफेरी कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई थी। जांच के दौरान 30 से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों के नाम सामने आए थे, लेकिन पुलिस ने इनके नाम सार्वजनिक नहीं किए। अब तक मामले में तीन ही गिरफ्तारियां हुई हैं। संदीप सिंगला के अलावा एसआइटी द्वारा हैफेड के सीनियर मैनेजर शैलेंद्र कुमार व परचेज मैनेजर अनिल कुमार को गिरफ्तार किया था। बर्खास्तगी के आगे नहीं बढ़ा जांच दायरा प्रशासनिक स्तर पर इंस्पेक्टर मनोज यादव, सविता, विनोद कुमार व एएफएसओ देवेंद्र कुमार को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। बावजूद इसके जांच अभी उन्हीं बिंदुओं तक सीमित है। कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं। प्रतापनगर में एक ही परिसर में चार लाइसेंस जारी होने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नियमानुसार एक स्थान पर एक लाइसेंस दिया जा सकता है, जबकि वहां एक से अधिक लाइसेंस संचालित पाए गए। अदालत ने हैफेड व खाद्य आपूर्ति विभाग को तीन माह में एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे, पर समय सीमा बीत चुकी है। कोर्ट ने कहा था कि जिम्मेदारी तय किए बिना केवल औपचारिक रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होगी। रणजीतपुर में एक ही स्थान पर दो राइस मिल चल रही थी। हैफेड व खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से मिल में धान भेजा गया था। घोटाले के बाद बचे धान पर दोनों विभागों ने अपना दावा किया था। बाद में कोर्ट के आदेश पर दोनों विभागों को 50-50 प्रतिशत धान उठाने की अनुमति दी थी। हैफेड ने अपना हिस्सा उठा लिया, पर डीएफएससी की ओर से धान उठाने में देरी की। जिस कारण काफी धान खराब भी हुआ। वहीं जगाधरी डीएसपी राजीव मिगलानी का कहना है कि इस मामले में जांच जारी है, इसमें अभी कुछ नया सामने नहीं आया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई निश्चित तौर पर होगी।

खेती को मिलेगा वैज्ञानिक आधार, हरियाणा में 52 नई प्रयोगशालाएं और किसानों पर 1468 करोड़ का निवेश

चंडीगढ़. हरियाणा में कृषि भूमि में नाइट्रोजन की जांच करने के लिए 52 प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी। कुल 12 लाख किसानों की कृषि भूमि से नमूने लिये जाएंगे जिससे वे यूरिया का निर्धारित मात्रा में उपयोग कर जमीन की उर्वरा शक्ति बढा सकें। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में एक दर्जन विभागों के 1468 करोड़ रुपये के 32 कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई। इनमें राजस्व, कृषि, कौशल विकास, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण, पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, बिजली निगम, लोक निर्माण विभाग, जनस्वास्थ्य, सिंचाई तथा हरियाणा राज्य औद्योगिक अवसंरचना विकास निगम शामिल हैं। बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा, सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और प्रधान सचिव अरुण गुप्ता मौजूद थे। किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। संबंधित जिलों में मंत्री एवं विधायकों के साथ मुख्यमंत्री भी अभियान से जुड़कर किसानों को जागरूक करेंगे। विशेषकर मोरनी क्षेत्र में 4000 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। कोर्ट केस के मामलों का सही निपटान सुनिश्चित करने के लिए राजस्व कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम को स्वीकृति दी गई है। बैठक में कौशल्या डैम पंचकूला का पक्का कार्य करने, यमुना वाटर सेवाएं सर्कल रोहतक में भालोठ सब ब्रांच की आरडी 124000 से 156014 तक का पुनर्निर्माण, बरवाला ब्रांच से हिसार एयरपोर्ट पर कच्चे पानी हेतु पंपिंग स्टेशन बनाने तथा राणा डिस्ट्रीब्यूटरी का निर्माण करने की स्वीकृति प्रदान की गई। पंचकूला बस स्टैंड रोटरी से ट्राफिक लाइट 4-11 चौक तक बरसाती पानी की निकासी हेतु ड्रेन का निर्माण होगा। पिंजौर कालका अर्बन कांप्लेक्स सेक्टर 29 में 10 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा। सिरसा, अंबाला और रेवाड़ी में शुरू होंगी कई नई परियोजनाएं सिरसा शहर में अतिरिक्त बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण और पाइपलाइन बिछाने तथा 4.50 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने तथा केलनिया रोड पर 10 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम किया जाएगा। सिरसा में पेयजल के लिए तीसरे जल घर में शुद्ध जल टैंक निर्माण के साथ बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण करवाया जाएगा। अंबाला शहर के देवीनगर में 60 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और अंबाला सदर टाउन के विभिन्न जलभराव वाले क्षेत्रों में वाटर ड्रेनेज बनाई जाएगी। रेवाड़ी शहर में नेताजी रोड पर 24 एमएलडी के प्राइमरी ट्रीटमेंट प्लांट को टीटीपी में अपग्रेड कर बिशनपुर में 17 गांवों में पर्याप्त मात्रा में पेयजल सुलभ करवाने के लिए नहर आधारित जल घर में रा वाटर पंपिंग स्टेशन का निर्माण कराया जाएगा। होडल टाउन में आगरा कैनाल वाटर टैंक से पाइप लाइन की क्षमता बढ़ाने और सीवर लाइन डलवाने के कार्य को स्वीकृति दी गई है।

30 से ज्यादा नाम सामने आए, फिर भी कार्रवाई सीमित; धान घोटाले में कई आरोपी अब भी फरार

यमुनानगर 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले के खुलासे के बाद 237 दिन बीत चुके हैं, पर जांच अभी भी धीमी गति से चल रही है। पांच थाना प्रभारियों की एसआइटी गठित होने के बावजूद कार्रवाई तीन आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित है। जांच के दौरान 30 से ज्यादा अधिकारी, कर्मचारी व अन्य लोगों के नाम सामने आ चुके हैं, पर अभी भी कई आरोपित पकड़ से बाहर हैं। घोटाले के मुख्य आरोपित छछरौली निवासी राइस मिलर संदीप सिंगला को फिलहाल जमानत नहीं मिली है। मामले की सुनवाई 27 जुलाई को होगी। गिरफ्तारी नहीं होने से जांच टीम पर भी सवाल उठने लगे हैं। संदीप सिंगला को दो दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। उसे तीन चरणों में 18 दिन तक एसआइटी ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। पूछताछ में सामने आया था कि उसके नियंत्रण में सात राइस मिलें हैं, जिनमें पांच पुरानी व दो नई हैं। पुलिस ने संदीप सिंगला व रीतिका सिंगला के खिलाफ तीन थानों में केस दर्ज किए थे। पावर आफ अटार्नी संदीप के नाम होने के कारण रितिका को राहत मिल गई थी। पूछताछ में 30 से ज्यादा अधिकारी व कर्मचारियों के नाम सामने आए थे। जांच प्रभावित न हो। इसलिए पुलिस ने नाम सार्वजनिक नहीं किए। नाम होने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है। महानिदेशक की जांच में घोटाले का खुलासा जांच में सामने आई गड़बड़ियों के बाद मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण, मंडी गेट पास, मिल आवंटन, स्टाक सत्यापन व सरकारी रिकार्ड की जांच की थी। आरोप है कि नियमों के विपरीत कम धान की खरीद दिखाकर स्टाक में हेराफेरी की गई और सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। 13 नवंबर को खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह की जांच में घोटाले का खुलासा हुआ था। जांच में धान के स्टाक और रिकार्ड में भारी अनियमितताएं सामने आने के बाद विशेष जांच दल का गठन किया गया था। इसमें पांच थाना प्रभारी शामिल किए गए थे, पर इसके बाद भी जांच की रफ्तार तेज नहीं हो सकी। मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां जांच में फर्जी गेट पास व दस्तावेजों के माध्यम से स्टाक में हेराफेरी कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई थी। जांच के दौरान 30 से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों के नाम सामने आए थे, लेकिन पुलिस ने इनके नाम सार्वजनिक नहीं किए। अब तक मामले में तीन ही गिरफ्तारियां हुई हैं। संदीप सिंगला के अलावा एसआइटी द्वारा हैफेड के सीनियर मैनेजर शैलेंद्र कुमार व परचेज मैनेजर अनिल कुमार को गिरफ्तार किया था। बर्खास्तगी के आगे नहीं बढ़ा जांच दायरा प्रशासनिक स्तर पर इंस्पेक्टर मनोज यादव, सविता, विनोद कुमार व एएफएसओ देवेंद्र कुमार को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। बावजूद इसके जांच अभी उन्हीं बिंदुओं तक सीमित है। कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं। प्रतापनगर में एक ही परिसर में चार लाइसेंस जारी होने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नियमानुसार एक स्थान पर एक लाइसेंस दिया जा सकता है, जबकि वहां एक से अधिक लाइसेंस संचालित पाए गए। अदालत ने हैफेड व खाद्य आपूर्ति विभाग को तीन माह में एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे, पर समय सीमा बीत चुकी है। कोर्ट ने कहा था कि जिम्मेदारी तय किए बिना केवल औपचारिक रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होगी। रणजीतपुर में एक ही स्थान पर दो राइस मिल चल रही थी। हैफेड व खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से मिल में धान भेजा गया था। घोटाले के बाद बचे धान पर दोनों विभागों ने अपना दावा किया था। बाद में कोर्ट के आदेश पर दोनों विभागों को 50-50 प्रतिशत धान उठाने की अनुमति दी थी। हैफेड ने अपना हिस्सा उठा लिया, पर डीएफएससी की ओर से धान उठाने में देरी की। जिस कारण काफी धान खराब भी हुआ। वहीं जगाधरी डीएसपी राजीव मिगलानी का कहना है कि इस मामले में जांच जारी है, इसमें अभी कुछ नया सामने नहीं आया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई निश्चित तौर पर होगी।

हाईकोर्ट ने खारिज की HCS परीक्षा परिणाम चुनौती, कहा- HPSC की चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी

चंडीगढ़. हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) प्रारंभिक परीक्षा-2026 की उत्तर कुंजी और परिणाम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अदालतें शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में विशेषज्ञों की राय का स्थान नहीं ले सकतीं। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि जब तक उत्तर कुंजी में त्रुटि प्रत्यक्ष, स्पष्ट और संदेह से परे साबित न हो, तब तक न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर यदि संदेह या अस्पष्टता हो तो उसका लाभ परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को दिया जाना चाहिए, न कि अभ्यर्थी को। हाईकोर्ट एचसीएस (कार्यकारी शाखा) एवं संबद्ध सेवाओं की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ताओं ने 26 अप्रैल को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और अंतिम उत्तर कुंजी को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने क्या पाया? उनका कहना था कि सामान्य अध्ययन और सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) के कई प्रश्नों के उत्तर गलत हैं तथा प्रमाणिक स्रोतों के विपरीत हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि परीक्षा के बाद हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) ने 28 अप्रैल को अस्थायी उत्तर कुंजी वेबसाइट पर अपलोड कर अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी थीं। प्राप्त आपत्तियों को विषय विशेषज्ञों के पास भेजा गया, जिनकी राय के आधार पर कुछ उत्तरों में संशोधन किया गया और 2 मई को संशोधित उत्तर कुंजी जारी की गई। इसके बाद 4 मई को परिणाम घोषित किया गया।हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश देकर यह भी जानकारी मांगी थी कि कुल कितनी आपत्तियां प्राप्त हुईं और उन्हें निपटाने में कितना समय लगा। इसके साथ ही विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की टिप्पणियां भी तलब की गई थीं। आयोग ने जवाब में बताया कि अदालत के निर्देश के बाद विवादित प्रश्नों पर विशेषज्ञों से दोबारा राय ली गई, लेकिन उन्होंने अंतिम उत्तर कुंजी में किसी अतिरिक्त बदलाव की आवश्यकता नहीं बताई।याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि अंतिम उत्तर कुंजी तैयार करने से पहले उन्हें अन्य अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देने का अवसर नहीं दिया गया। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि ऐसा कोई नियम, विनियमन या विज्ञापन की शर्त नहीं है जो आयोग को ऐसी प्रक्रिया अपनाने के लिए बाध्य करती हो। जस्टिस बंसल ने अपने फैसले में विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाले अभ्यर्थी पर यह साबित करने का दायित्व होता है कि त्रुटि इतनी स्पष्ट है कि उसके लिए किसी अनुमान या विस्तृत तर्क की आवश्यकता न पड़े। अदालत ने कहा कि रिकार्ड से यह साबित नहीं होता कि विशेषज्ञों द्वारा स्वीकार किए गए उत्तर प्रत्यक्ष रूप से गलत हैं। इसलिए विशेषज्ञों की राय को प्रतिस्थापित करने का कोई आधार नहीं बनता। फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि यदि हर आपत्ति पर पुन आपत्ति और फिर पुनर्विचार की अनुमति दी जाए तो भर्ती प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं हो सकेगी। चूंकि यह केवल प्रारंभिक परीक्षा थी और मुख्य परीक्षा इसी माह के अंत में प्रस्तावित है, इसलिए कुछ असफल अभ्यर्थियों की मांग पर पूरी चयन प्रक्रिया रोकना सार्वजनिक हित और सफल उम्मीदवारों दोनों के लिए नुकसानदेह होगा। इसी आधार पर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

CBI का शिकंजा कसा! IDFC बैंक फ्रॉड केस में वरिष्ठ IAS अधिकारी के आवास पर रेड

 पंचकूला IDFC बैंक के FD घोटाले मामले में वरिष्ठ IAS अधिकारी के आवास पर रेड जारी है। सीबीआई कि तरफ से मामले में चार्जशीट पेश की जा चुकी है। CBI अग्रिम कार्रवाई को अंजाम दे रही है। मामले में मनी ट्रेल व IAS अधिकारीयों कि भूमिका की जांच हो रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुए 657 करोड़ रुपये के फंड गबन मामले में शुक्रवार को दो अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की थी। यह मामले हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) से जुड़े हैं। सीबीआई ने हरियाणा सरकार के फंड के दुरुपयोग से संबंधित चार्जशीट पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में दाखिल की। इस मामले में चंडीगढ़ के रियल एस्टेट इन्वेस्टर विक्रम वधवा और सावन ज्वेलर्स के मालिक राजन सिंह कदोदिया आरोपित बनाया गया, जिन्हें अपराध से अर्जित धन का लाभार्थी बताया गया। पहले सीबीआई 15 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है इससे पहले सीबीआई 15 आरोपितों और कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें तीन सरकारी कर्मचारी, छह बैंक अधिकारी, दो कंपनियां और चार निजी व्यक्ति शामिल हैं। वहीं, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े मामले में सीबीआई ने चंडीगढ़ की विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की है। इसमें सात आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें पांच बैंक अधिकारी, सीएससीएल का एक अधिकारी और एक निजी व्यक्ति शामिल है। जांच के दौरान पाया गया कि 250 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सावन ज्वेलर्स के द्वारा रिभव ऋषि, अभय कुमार, अभिषेक सिंगला, स्वाति सिंगला व अन्य आरोपितों की विभिन्न कंपनियों से प्राप्त की है। इन कंपनियों/फर्मों में पैसा सरकारी खातों से गैर कानूनी तरीके से ट्रांसफर किए गए थे। प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया? प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि सावन ज्वेलर्स के मालिक राजन के द्वारा मुख्य आरोपितों के लिए कैश कन्वर्जन का काम किया गया व इसके लिए भारी कमीशन प्राप्त किया। आरोपित द्वारा इन फर्मों/कंपनियों के नाम सोने के आइटम्स बेचे हुए दिखाए गए। आरोपित राजन ने इस मामले में धोखाधड़ी की शुरुआत से ही षड्यंत्र रचने में अहम भूमिका निभाई तथा पूर्व योजना के तहत अपराध को अंजाम देने में सक्रिय योगदान दिया। जांच में यह भी सामने आया था कि सावन ज्वेलर्स को अनधिकृत तरीके से पैसा तीन फर्मों से मिला है। वहीं विक्रम वधवा ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ निगम के साथ साथ चंडीगढ़-पंचकूला के दो निजी स्कूलों के बैंक खातों से भी करोड़ों का गबन किया। ईडी के अनुसार सरकारी फंड की हेराफेरी से जुड़े इस मामले में विक्रम वाधवा के निजी खाते में 70 करोड़ रुपये से अधिक की रकम पहुंची थी, जिसे बाद में अलग-अलग कंपनियों और संपत्तियों में लगाया गया। उस पर रिभव ऋषि, अभय कुमार, बैंक अधिकारियों व कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी धन की हेराफेरी का आरोप है। वाधवा ने अवैध रकम को छिपाने, अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और उसे वैध दिखाने में अहम भूमिका निभाई। गबन की रकम को कई शेल कंपनियों के जरिए घुमाया। कौनसी कंपनियों के नाम? इनमें कैपको फिनटेक सर्विसेज, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, आरएस ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम हैं। एजेंसी के अनुसार इनके खातों में सरकारी विभागों से पैसे ट्रांसफर किए गए। गौरतलब है कि सीबीआई ने हरियाणा सरकार के आठ विभागों से जुड़े मामले को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अपने हाथ में लिया था। वहीं चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और क्रेस्ट चंडीगढ़ से जुड़े दो मामलों की जांच आर्थिक अपराध थाना, चंडीगढ़ से सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में करीब 504 करोड़ रुपये तथा चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़े मामले में 153 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सीबीआई ने कहा कि मामलों की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।  

1 जुलाई तक आवेदन, सर्च कमेटी करेगी हरियाणा आयोग के नए पदों पर चयन

 चंडीगढ़  हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग में मुख्य आयुक्त के साथ ही आयुक्त के एक पद पर नियुक्ति की जाएगी। पहली जुलाई तक आवेदन किए जा सकते हैं। पात्र उम्मीदवारों के नामों पर विचार के लिए प्रदेश सरकार ने सर्च कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी वैधानिक समिति को अपनी सिफारिशें भेजेगी। पिछले महीने आयोग के मुख्य आयुक्त पद से सेवानिवृत्त हुए रिटायर्ड आइएएस टीसी गुप्ता के बाद मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी यह जिम्मेदारी अतिरिक्त कार्यभार के रूप में संभाल रहे हैं।मुख्य सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार आयोग में एक मुख्य आयुक्त तथा चार आयुक्त नियुक्त किए जा सकते हैं। मुख्य आयुक्त पद के लिए हरियाणा के मुख्य सचिव अथवा केंद्र सरकार के सचिव स्तर एवं समकक्ष पद पर कार्यरत या सेवानिवृत्त अधिकारी पात्र हैं। आयुक्त का रिक्त पद हरियाणा सरकार के ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारियों में से भरा जाएगा, जिन्होंने प्रशासनिक सचिव अथवा राज्य सेवा में समकक्ष पद एवं दर्जा धारण किया हो। हरियाणा काडर के अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी भी इस पद के लिए पात्र होंगे। चयनित अभ्यर्थी पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि अथवा 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, पद पर कार्य करेंगे। इस पद पर पुनर्नियुक्ति का प्रविधान नहीं है। वेतन, भत्ते एवं सेवा शर्तें हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम 2014 तथा 28 जून 2019 को किए गए संशोधनों के अनुसार लागू होंगी। पात्र एवं इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप में अपने आवेदन सामान्य प्रशासन विभाग के आयुक्त एवं सचिव के कार्यालय में पहली जुलाई तक जमा करवा सकते हैं। केंद्र अथवा राज्य सरकार में कार्यरत अधिकारियों को अपने आवेदन उचित माध्यम से भेजने होंगे।

हरियाणा के 5 जिलों को NCR से बाहर करने की अटकलों पर विराम, CM सैनी ने रखा रोडमैप

चंडीगढ़. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की 42वीं अहम बैठक नई दिल्ली में संपन्न हुई। केंद्रीय विद्युत, आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के भविष्य के विकास और ढांचागत योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सीएम सैनी ने दी जानकारी हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इस महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि बैठक में लिए गए एक बड़े फैसले के तहत अब दिल्ली एनसीआर (NCR) का दायरे में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। यानी पांच राज्य एनसीआर से बाहर नहीं जाएंगे। सीएम सैनी ने स्पष्ट किया कि आज की बैठक के निर्णयों के तहत, हरियाणा के एनसीआर (NCR) क्षेत्र में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। वायु प्रदूषण से जुड़ी पाबंदियों को किया जाएगा विभाजित हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा एनसीआर क्षेत्र के हरियाणा से जुड़े जिलों में कई बदलाव नहीं हुआ है। इसे लेकर चर्चा जरूरी की गई है। वायु प्रदूषण से जुड़ी पाबंदियों को विभाजित किया जाएगा। अरावली संरक्षण पर और जोर देते हुए परिवहन सेवाओं को अत्याधुनिक बनाने पर जोर दिया जाएगा। बी-6 वाहनों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। मेट्रो तथा नमो भारत के विस्तार पर भविष्य में बढ़ती आबादी को देखते हुए जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में शामिल होने के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। बैठक केंद्रीय शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में हुई। सीएम ने रेखा गुप्ता को किया सम्मानित बैठक के दौरान सौहार्दपूर्ण माहौल देखने को मिला। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को सम्मानित किया और उनका आभार जताया। बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण रही, जहाँ उन्होंने दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों के विकास को लेकर अपने सुझाव रखे।