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सहरसा में पर्यटन का नया अध्याय: मत्स्यगंधा झील को मिलेगी विश्वस्तरीय पहचान

सहरसा सहरसा में मत्स्यगंधा झील के कायाकल्प के लिए 98 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो दिन पूर्व पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस परियोजना का शिलान्यास किया था। बुधवार को पूर्व मंत्री एवं स्थानीय विधायक डॉ. आलोक रंजन ने जिले के डीएम दीपेश कुमार के साथ स्थल पर कार्य योजना का औपचारिक शुभारंभ किया। पर्यटन और आस्था का नया केंद्र बनेगा मत्स्यगंधा झील विधायक डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि इस परियोजना के तहत झील के किनारे 400 मीटर का घाट, वृत्ताकार ग्लास ब्रिज और पार्किंग स्थल का निर्माण होगा। यह झील धार्मिक आस्था का केंद्र तो बनेगी ही, साथ ही इसे राष्ट्रीय स्तर का पर्यटन स्थल भी विकसित किया जाएगा। बिहार का दूसरा ग्लास ब्रिज यहां पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र होगा। रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा विधायक ने कहा कि इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हस्तशिल्प, होटल और परिवहन क्षेत्र में हजारों लोगों को काम मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और सहरसा जिले को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। आधुनिक सुविधाओं से होगा कायाकल्प परियोजना के अंतर्गत अनुभव केंद्र, शौचालय परिसर (शिशु देखभाल कक्ष सहित), स्मृति चिन्ह दुकान, परावर्तन कुंड, विशाल वृक्ष प्रतिरूप, संगीतमय फव्वारा, सेल्फी प्वाइंट, भोजनालय, प्रशासनिक भवन, शहरी हाट, वृत्ताकार लॉन, विशाल वाहन पार्किंग और भव्य मुख्य द्वार जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह परियोजना केवल सौंदर्यीकरण का काम नहीं है, बल्कि सहरसा के सर्वांगीण विकास, रोजगार और समृद्धि के अवसर सृजित करने का संकल्प है। विधायक डॉ. आलोक रंजन ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए एनडीए सरकार का आभार व्यक्त किया।

मौसम विभाग की बड़ी चेतावनी: बिहार में अगले 5 दिन भारी बारिश और बिजली गिरने का खतरा

पटना मौसम विज्ञान केंद्र ने बिहार के कई जिलों में तेज हवा, मध्यम बारिश और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक राज्य भर में मौसम बिगड़ा रह सकता है। मौसम विभाग ने 3 से 7 अक्टूबर तक पूरे बिहार में लगातार बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, इस महीने राज्य के दक्षिण- पश्चिम हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य, जबकि शेष क्षेत्रों में सामान्य से कम रह सकता है।  केंद्र ने जिन जिलों के लिये अलर्ट जारी किया है उनमें औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, पटना, गया जी, नालंदा, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, समस्तीपुर, बेगूसराय और मधुबनी शामिल हैं। इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने, मध्यम वर्षा और वज्रपात की संभावना जताई गई है। वहीं दो अक्टूबर को सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, शिवहर, समस्तीपुर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर और खगड़िया में बारिश हो सकती है। अक्टूबर में अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। पटना का तापमान दो अक्टूबर को अधिकतम 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस, तीन अक्टूबर को अधिकतम 31 डिग्री सेल्सिअस और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस और चार अक्टूबर को अधिकतम 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस  रहेगा।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने महात्मा गांधी को किया याद, दी श्रद्धांजलि

पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके बताए मार्ग और विचारों का अनुसरण करने से समाज में भाईचारे और सद्भाव का माहौल कायम होगा। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स' पर लिखा है, ‘‘राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को उनकी जयंती पर उन्हें नमन। बापू के विचार और आदर्श हमें निरंतर प्रेरणा देते हैं। हमें बापू के विचारों का अनुसरण करना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए। बापू के दिखाए मार्ग और शिक्षाओं का अनुसरण कर समाज में भाईचारे एवं सद्भाव का वातावरण बनेगा और राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा।'' राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी राजधानी पटना स्थित ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित समारोह में शामिल हुए, जहां राष्ट्रपिता की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव सहित राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों के सदस्य भी उपस्थित थे। बाद में मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने शहर के शास्त्री नगर स्थित पार्क पहुंचकर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें भी श्रद्धांजलि दी। नीतीश कुमार ने कहा, ‘‘शास्त्री जी का जीवन सादगी और देशभक्ति का अनुपम उदाहरण है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर हमें राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले – बिहार की हर सीट पर होगा गौ भक्त उम्मीदवार

छपरा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती  ने बिहार में सनातनी राजनीति का शंखनाद कर दिया है। गौ मतदाता संकल्प यात्रा के दौरान उन्होंने घोषणा की कि बिहार की सभी विधानसभा क्षेत्रों में गौ भक्तों को चुनाव लड़ाया जाएगा और उनके लिए व्यापक स्तर पर प्रचार भी किया जाएगा। साथ ही सनातनी हिन्दुओं से अपील की गई कि वे गौ माता को राष्ट्र माता घोषित कराने के लिए मतदान करें। छपरा में गौ सेवकों और गौ रक्षकों को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि “आप जो कर रहे हैं वही धर्म है और वही अधर्म भी हो सकता है। यदि आपका वोट धर्म हो सकता है, तो अधर्म भी हो सकता है। अगर आपने गौ हत्या समर्थकों को वोट दिया तो वह अधर्म होगा।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वोट की ताकत से देश में गौ हत्या पर रोक लग सकती है। अपने संबोधन में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के लिए आठ हजार करोड़ का विमान खरीदा गया है और यह उनकी चाय बेचने की कमाई से नहीं आया, बल्कि जनता के वोट की ताकत से आया है। “हमारी ही मां (गौ माता) के हत्यारों को सत्ता दिलाकर हम खुद शर्मिंदा हैं।” शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा तभी संभव है जब गौ माता का संरक्षण होगा। गौ रक्षा सिर्फ आस्था का विषय नहीं है, बल्कि समाज और संस्कृति की आधारशिला है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बिहार की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए “आई लव मोहम्मद” और “आई लव महादेव” जैसी बयानबाजी कराई जा रही है। इससे जागरूक मतदाताओं का ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब नरेंद्र मोदी सत्ता में आने से पहले देशभर में गौ हत्या पर रोक की बातें करते थे, तो लोग उनसे उम्मीद करते थे। लेकिन बीते 12 वर्षों में गौ हत्या पर पाबंदी लगाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। शंकराचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में बड़ा अंतर साफ झलक रहा है।

पटना से दिल्ली तक BJP में हलचल, 18 से अधिक MLA के टिकट पर भारी विवाद

पटना  बिहार में एनडीए आगामी विधानसभा चुनावों (Bihar Elections) की तैयारी में जोरों से लगा है। इस बीच, सत्ता के गलियारे से एक बड़ी जानकारी सामने आई है। इस बार भाजपा (BJP) के 18 से ज्यादा विधायकों के टिकट पर संकट मंडरा रहा है। पार्टी सूत्रों ने बिहार में कई भाजपा विधायकों के टिकट (BJP Ticket Strategy) कटने का संकेत दिया है। माना जा रहा है कि भाजपा चुनाव में इस बार ऐसे विधायकों को मैदान में उतारने से बच रही है, जिनके खिलाफ क्षेत्र में विरोध की भावना है। 6 अक्टूबर के बाद हो सकती है उम्मीदवारों की घोषणा साथ ही यह जानकारी भी सामने आ रही है कि पार्टी ने अपने सभी उम्मीदवारों की सूची लगभग तैयार कर ली है। जिसकी औपचारिक घोषणा 6 अक्टूबर के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम जारी करने के बाद होने की संभावना है। बिहार भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का हवाला हुए 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री और पार्टी के मुख्य रणनीतिकार अमित शाह ने 145-150 से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर विस्तार से चर्चा की है। इनमें बेतिया, समस्तीपुर, अररिया और सीमांचल क्षेत्र की कई सीटें शामिल हैं। बता दें कि 2020 के विधानसभा चुनाव में, भाजपा सीवान, सोनपुर, राघोपुर, मुजफ्फरपुर, किशनगंज, भागलपुर, दानापुर और मनेर सहित लगभग 35 क्षेत्रों में मामूली अंतर से हारी थी। मनेर सीट से निखिल को मिल सकता है टिकट राघोपुर से फिलहाल बिहार में विपक्ष के नेता राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव विधायक हैं। ऐसा माना जा रहा है कि मनेर सीट से निखिल आनंद को चुनाव लड़ाने की तैयारी है। वह भाजपा के राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के महासचिव हैं। पिछले चुनाव में भी भाजपा ने निखिल को इस सीट से उतारा था। नए चेहरों का मिल सकता है मौका फिलहाल मनेर सीट से राजद के भाई बीरेंद्र विधायक हैं। निखिल भाजपा का टिकट मिलने से पहले ही क्षेत्र में लगातार जन-संपर्क अभियान चला रहे हैं। वहीं, भाजपा के अंदर यह भी चर्चा है कि क्षेत्र में जिन मौजूदा विधायकों के खिलाक लहर, उनकी जगह पर पार्टी नए चेहरों को मौका दे सकती है। यह भी माना जा रहा है कि भाजपा इस बार नारी-शक्ति और युवा-शक्ति को ध्यान में रखते हुए टिकटों का बंटवारा कर सकती है। बिहार में अधिकांश सीटों पर महिलाओं और युवाओं को भाजपा कैंडिडेट बना सकती है। बिहार चुनाव के लिए ये है रणनीति भाजपा सूत्रों का यह भी दावा है कि इस बार बिहार चुनाव में भाजपा मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव मॉडल को फॉलो कर सकती है। राज्य चुनाव में भाजपा इस बार मौजूदा और पूर्व सांसदों को भी मैदान में उतारने का विचार कर रही है। सारण से सांसद राजीव प्रताप रूडी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और राम कृपाल यादव व आरके सिंह जैसे पूर्व सांसदों को इस बार विधानसभा चुनाव लड़ाया जा सकता है। मंगल पांडे सहित राज्य के कई मंत्रियों को भी उनके क्षेत्र से मैदान में उतारने की तैयारी चल रही है।

अमित शाह का बिहार दौरा: मिथिला, कोसी और सीमांचल के नेताओं को मिलेगा बड़ा टास्क

पटना गृह मंत्री अमित शाह बिहार दौरे पर हैं। शुक्रवार को उन्होंने सारण और चंपारण के नेताओं के साथ बेतिया में बैठक की। इसके बाद पटना में भाजपा प्रदेश कार्यालय में बैठक की। आज यानी शनिवार को मिथिला, कोसी, सीमांचल और अंग प्रदेश के 70 से विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की तैयारियों का जायजा लेंगे। वह समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, बेगूसराय, खगड़िया, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, भागलपुर, बांका  भाजपा कोर कमेटी के नेताओं के साथ बैठक करेंगे। बैठक में इन इलाकों से आने वाले मंत्री, विधायक, सांसद और वरीय पदाधिकारी शामिल होंगे। गृह मंत्री पहले समस्तीपुर के सरायगंज में बैठक करेंगे। इसके बाद अररिया के फॉरबिसगंज जाएंगे। यहां करीब पांच हजार नेताओं और कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र देंगे। बैठक को लेकर सारी तैयारी पूरी इधर, सांगठनिक जिलों कोर कमेटी  बैठक में गृह मंत्री अमित शाह पहले सभी विधानसभा क्षेत्रों की प्रमुख समस्याओं की लिस्ट देखेंगे। इसके बाद यहां की तैयारियों का जायजा लेंगे। इसके बाद नेताओं को अपने क्षेत्र में आगामी चुनाव से जुड़े कुछ टास्क देंगे। बैठक को लेकर सारी तैयारी पूरी हो चुकी है। सुरक्षा को लेकर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कोर कमेटी के सदस्यों को शत-प्रतिशत तैयार होकर आने का निर्देश दिया है। भाजपा कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र दिया इधर, गृह मंत्री ने शुक्रवार को पहले पश्चिम चंपारण के चनपटिया में भाजपा कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र दिया। उन्होंने सारण, पश्चिम और पूर्वी चंपारण समेत 10 सांगठनिक जिलों के कोर कमेटी के नेताओं के साथ बैठक की। इसके बाद उन्होंने पटना में प्रदेश भाजपा कार्यालय में बैठक की। यहां पर नेताओं और कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र दिया। कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव हमारा लक्ष्य 225 सीटों पर जीत दर्ज करना है। इसलिए हर सीट पर कम से कम 225 बार जनसंपर्क करें। लोगों को एनडीए सरकार के विकास कार्यों को बताएं। महिला परिवार की केंद्र बिंदु हैं। उनकी समस्याओं को सुने। उनकी शिकायत और सुझावों को डायरी में नोट करें और उस पर काम करें। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की हर सीट को आप अपना समझें। अपनी पार्टी, उसकी पार्टी की बातों को मन में नहीं लाएं। हर एक सीट पर अपना 100 प्रतिशत दें। बगैर किसी भेदभाव के चुनाव जीतना ही एनडीए का लक्ष्य है।  

ओवैसी का हमला: बराबरी चाहिए थी, मंत्री पद नहीं — बिहार की सियासत में मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर उठाए सवाल

पटना ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद और उनके पुत्र तेजस्वी यादव  पर आरोप लगाया कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर उनकी पार्टी की ओर से किए गए आग्रहों पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम ने केवल बराबरी का दर्जा मांगा था, मंत्री पद की कोई इच्छा जाहिर नहीं की थी। हमारी केवल यही मांग थी कि हमें बराबरी का दर्जा मिले… हैदराबाद के सांसद ओवैसी किशनगंज जिले में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। यह रैली उनके चार दिवसीय ‘‘सीमांचल न्याय यात्रा'' का हिस्सा है। सीमांचल क्षेत्र में अच्छी खासी मुस्लिम आबादी है। ओवैसी ने कहा, ‘‘हमारे बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव को तीन पत्र लिखकर ‘इंडिया' गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा कि हमने केवल छह सीट की मांग की थी, हमें किसी मंत्री पद की चाहत नहीं थी।'' ओवैसी ने कहा, ‘‘हमारी केवल यही मांग थी कि हमें बराबरी का दर्जा मिले, गुलाम की तरह व्यवहार न किया जाए। लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।'' राजद की ‘‘उपेक्षा'' को दोषी ठहराते हुए ओवैसी ने कहा कि बिहार में मुस्लिम समुदाय के पास अपनी कोई ठोस नेतृत्वकारी ताकत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘यादव, कुशवाहा, कुर्मी, मांझी, राजपूत और पासवान यानी हर जाति के अपने नेता हैं। लेकिन मुसलमानों का कोई अपना नेता नहीं है।'' उन्होंने सवाल किया, ‘‘जब तेजस्वी मुख्यमंत्री बनने का सपना देख सकते हैं तो सीमांचल का कोई युवा नेता क्यों नहीं बन सकता? ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी ने यह पहल इसलिए की ताकि उसपर भाजपा की मदद करने के आरोप न लगें। उन्होंने कहा, ‘‘राजद की ओर से सही प्रतिक्रिया नहीं आने से यह साफ हो जाएगा कि वास्तव में भाजपा की मदद कौन कर रहा है।'' एआईएमआईएम ने पिछला विधानसभा चुनाव 20 सीट पर लड़ा था और पांच सीट पर जीत हासिल की थी। हालांकि बाद में पांच में से चार विधायक राजद में शामिल हो गए और केवल अख्तरुल इमान ही पार्टी के साथ बने रहे। सीमांचल क्षेत्र में पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार जिले आते हैं। इस क्षेत्र में अच्छी खासी मुस्लिम आबादी है। ओवैसी दिन में बाद में अररिया जिले में भी जनसभाओं को संबोधित करेंगे।  

तेजस्वी ने क्यों चुनी राहुल से अलग राह? कांग्रेस बहिष्कार के बाद महागठबंधन पर मंडराया संकट

पटना  क्या बिहार महागठबंधन में सब कुछ ठीक है? यह सवाल तब से खड़ा होना शुरू हुआ है जब से तेजस्वी यादव ने अपनी अलग ‘बिहार अधिकार यात्रा’ निकालने की घोषणा की है. अब तक महागठबंधन के प्रमुख दल राजद और कांग्रेस के बीच की खटपट साफ तौर पर सियासी सतह पर दिखाई देने लगी है. हाल में ही इसकी एक बानगी बिहार के औरंगाबाद में तब दिखी जब कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम के आमंत्रण के बावजूद राजद का कोई भी नेता वहां नहीं पहुंचा. जानकारी के अनुसार, औरंगाबाद के कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र में बीते 13 दिसंबर को एक सम्मेलन बुलाया गया था. कांग्रेस अध्यक्ष के बुलाए गए इस सम्मेलन में राजद नेताओं के नहीं आने से कांग्रेस के अंदर इसको लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है. खास बात यह है कि अब इसी विवाह भवन में आरजेडी सम्मेलन अपना सम्मेलन कर रहा है. सवाल यह है कि क्या कांग्रेस और राजद के भीतर तल्खी इतनी बढ़ गई हैं कि दोनों दलों के बीच की दरारें साफ-साफ नजर आने लगी हैं! कांग्रेस का आमंत्रण और राजद का बहिष्कार दरअसल, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के आयोजित सम्मेलन में राजद के नेताओं के नहीं पहुंचने की खबर ने गठबंधन के उठापटक को और हवा दी है. बता दें कि राजद के नेता तेजस्वी यादव 16 सितंबर से अपनी अलग राजनीतिक यात्रा निकाल रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह स्थिति कांग्रेस के तेवरों को भांपते हुए गठबंधन में राजद के अलगाव की स्थिति की ओर इशारा कर रही है. तेजस्वी यादव के अलग कार्यक्रम और इससे पहले औरंगाबाद में कांग्रेस के कार्यक्रम का राजद नेताओं के बायकाट के साथ ही राजद की ‘एकला चलो’ वाली सक्रियता यह संकेत दे रही है कि महागठबंधन में कुछ तो गड़बड़ है. बताया जा रहा है कि तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सीएम फेस घोषित नहीं किये जाने से आरजेडी असंतुष्ट है. जानकारों की नजर में कांग्रेस-आरजेडी की इस तल्खी से महागठबंधन में समन्वय बिगड़ रहा है और सहयोगी दलों के बीच दूरियां बढ़ रही हैं. तेजस्वी की बिहार यात्रा का रोडमैप तेजस्वी यादव की मंगलवार से शुरू हो रही 'बिहार अधिकार यात्रा' का आगाज़ जहानाबाद से होगा. इसके बाद तेजस्वी नालंदा, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, समस्तीपुर के रास्ते वैशाली तक का सफर तय करेंगे. इस तरह तेजस्वी यादव अपनी यात्रा के दौरान नीतीश कुमार के गढ़ नालंदा जिले से होकर गुजरेंगे तो गिरिराज सिंह के गढ़ बेगूसराय और पप्पू यादव के मधेपुरा और सुपौल की यात्रा भी करेंगे. बिहार के जिन जिलों से होकर तेजस्वी यादव गुजरेंगे, वो इलाका बीजेपी और जेडीयू का मजबूत गढ़ माना जाता है. इस तरह से एक बात साफ है कि तेजस्वी 'बिहार अधिकार यात्रा' के जरिए अपने कमज़ोर माने जाने वाले गढ़ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर आरजेडी के पक्ष में सियासी माहौल बनाने की कवायद करेंगे. तेजस्वी को क्यों निकालनी पड़ रही यात्रा? राहुल गांधी की यात्रा समाप्त हुए अभी 15 दिन ही गुज़रे हैं कि तेजस्वी यादव अकेले बिहार यात्रा पर निकलने जा रहे हैं. राहुल गांधी के साथ तेजस्वी ने वोटर अधिकार यात्रा के जरिए 1300 किलोमीटर का सफर तय किया है और अब तेजस्वी अकेले दस जिलों की यात्रा पर निकल रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो राहुल गांधी ने अपनी वोटर अधिकार यात्रा से बिहार कांग्रेस में एक नई जान फूँक दी है. राहुल गांधी के साथ यात्रा के दौरान तेजस्वी यादव को भी प्रमुखता मिली, लेकिन कांग्रेस के बड़े नेताओं ने भी जनता का ध्यान अपनी तरफ खींचा. राहुल की यात्रा का सियासी लाभ आरजेडी को कम, कांग्रेस को ज़्यादा मिला है. यात्रा से कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं और सीट शेयरिंग से लेकर मुख्यमंत्री चेहरे के सवाल पर अपनी मर्ज़ी की बात रख रही है. कांग्रेस यह बताने में जुट गई है कि वो आरजेडी के बैसाखी के सहारे नहीं, बल्कि उसका अपना जनाधार और राजनीतिक कद है. राहुल गांधी ने अपने भाषणों से जनता को यह संदेश दिया कि कांग्रेस बिहार के मुद्दों को लेकर गंभीर है. तेजस्वी यादव अकेले यात्रा निकालकर आरजेडी नेताओं और कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने की रणनीति अपनाए हैं. यही वजह है कि आरजेडी की तरफ से तेजस्वी के यात्रा का संदेश सिर्फ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को भेजा गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव अपनी खुद की यात्रा से यह साबित करना चाहते हैं कि वह महागठबंधन के निर्विवाद नेता हैं और मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में जनता की पहली पसंद हैं. तेजस्वी जनता से सीधे जुड़ने का प्लान तेजस्वी यादव अपनी यात्रा के जरिए एक तरफ जहां अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ जनता से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं. आरजेडी नेता संजय यादव कहते हैं कि राहुल गांधी के साथ जो यात्रा थी, वो एसआईआर के मुद्दे पर रही है. वह वोटर अधिकार यात्रा थी और अब तेजस्वी बिहार के अधिकार के लिए यात्रा पर निकल रहे हैं. संजय कहते हैं कि तेजस्वी यादव अपनी यात्रा के दौरान किसान, नौजवान, महिलाएं, बुजुर्ग और रोज़गार के मुद्दे को उठाएंगे और लोगों के साथ संवाद करेंगे. चुनाव के दौरान हर पार्टी अपने लिहाज़ से रणनीति बनाती है, उसी तरह आरजेडी ने अपनी रणनीति बनाई है. तेजस्वी की लोकप्रियता बिहार में सबसे ज़्यादा है और वे प्रदेश के सभी क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं, जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं. वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी का यह कदम सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. तेजस्वी अपने पिता आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की तरह जनता से सीधे तौर पर संवाद और उनसे जुड़ना चाहते हैं. लालू यादव भी हमेशा यात्राओं और रैलियों के जरिए लोगों से सीधे संवाद करते थे. तेजस्वी की यह यात्रा लालू की उस विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है. आरजेडी ने तेजस्वी की यात्रा को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है. पार्टी ने सभी जिलाध्यक्षों और विधायकों को साफ निर्देश दिया है कि वे तैयारी में कोई कसर न छोड़ें. यात्रा जिन-जिन विधानसभा क्षेत्रों से गुज़रेगी, वहाँ पर भीड़ जुटाएँ ताकि तेजस्वी यादव जनता से सीधे संवाद कर सकें. खास बात यह होगी कि … Read more

बेगूसराय में उड़ान की तैयारी! एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी पर सरकार की खास योजना

बेगूसराय बिहार के बेगूसराय में जल्द ही लोगों को एयरपोर्ट की सौगात मिलने वाली है. इस एयरपोर्ट पर सेवाएं शुरू होने के बाद व्यावसायिक उड़ान सेवा का लाभ मिल सकेगा. इसके साथ ही जिले का जुड़ाव हल्दिया रक्सौल एक्सप्रेसवे से भी होगा. यह बातें बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कही. इससे लोगों को बड़ी सहूलियत मिलने वाली है. बिहार सरकार की तरफ से इसे लेकर खास प्लानिंग की गई है. डिप्टी सीएम ने रखी अपनी बात बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने इसे लेकर एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखी. सम्राट चौधरी ने कहा कि श्रेष्ठ भारत के लिए समृद्ध बिहार बनना जरूरी है. एनडीए की सरकार एक बार फिर से बिहार में बनानी पड़ेगी. मोदी जी ने अर्थव्यवस्था के विकास के लिए स्वदेशी अभियान पर जोर दिया है. एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा बेगूसराय सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी जमकर तारीफ की और कहा कि सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी के नेतृत्व में लगातार विकास हो रहा. ऐसे में बदलते बिहार में अब हल्दिया रक्सौल एक्सप्रेसवे से बेगूसराय भी जुड़ेगा. हालांकि, इस दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने विपक्ष पर तंज भी कसा. बेगूसराय से कोलकाता की दूरी घटी दरअसल, हल्दिया रक्सौल एक्सप्रेसवे के बनने से सिर्फ 5 से 6 घंटे में ही बेगूसराय से कोलकाता की दूरी तय की जा सकेगी. इसके निर्माण के लिए 950 एकड़ में जमीन का अधिग्रहण किया जायेगा. इसके अलावा जिले में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाया जाएगा. इन योजनाओं के जरिये जिले में अर्थव्यवस्था के साथ-साथ रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा. उलाव हवाई पट्टी पर हुई थी लैंडिंग दूसरी तरफ बेगूसराय के उलाव हवाई पट्टी पर सालों बाद किसी विमान की सफलतापूर्वक लैंडिंग हुई थी. जिला प्रशासन ने 8 यात्रियों वाले एवर डेलिवर लॉजिस्टिक्स के एयरक्राफ्ट को लैंडिंग की अनुमति दी थी. हालांकि, जिले में अब ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण की बात कही गई है. ऐसे में देखना होगा कि जिले में एयरपोर्ट को लेकर सरकार अंतिम फैसला क्या कुछ लेती है.