samacharsecretary.com

असम में सीट शेयरिंग पर BJP की चिंता, क्या NDA के साथी देंगे चुनौती?

गुवाहाटी असम में 2026 की चुनावी बिसात बिछ चुकी है, लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों के भीतर सीटों के गणित को लेकर तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। गठबंधन की राजनीति के इस दौर में सहयोगी दलों की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं ने रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। हालात यह हैं कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में गठबंधन के सहयोगियों के बीच ही 'मैत्रीपूर्ण मुकाबला' होने की संभावना प्रबल हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार एक तरफ विकास के दावों के साथ मैदान में है, वहीं दूसरी ओर उसे अपने सहयोगियों असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) को संतुष्ट रखने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। असम गण परिषद (AGP) 2014 से भाजपा की वफादार साथी रही है। इस बार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए दबाव बना रही है। पिछले 2021 के चुनावों में एजीपी ने 29 सीटों पर दांव आजमाया था, जिनमें से 26 पर उसने अकेले चुनाव लड़ा और 3 सीटों पर भाजपा के साथ दोस्ताना मुकाबला किया था। अंततः पार्टी 9 सीटें जीतने में सफल रही थी। इस बार एजीपी के जमीनी कार्यकर्ताओं की मांग है कि पार्टी को अधिक सीटों पर मौका मिलना चाहिए, जिससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संकेत दिया है कि एजीपी के साथ शुरुआती दौर की चर्चा शुरू हो चुकी है और 9 या 10 मार्च तक सीटों का अंतिम खाका तैयार हो सकता है। हालांकि, जब उनसे सहयोगियों की बढ़ती मांगों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी औपचारिक मांग से अवगत नहीं हैं, लेकिन उन्होंने 'फ्रेंडली फाइट' की संभावना से इनकार भी नहीं किया। बोडोलैंड का पेच गठबंधन की सबसे पेचीदा स्थिति बोडोलैंड क्षेत्र में देखने को मिल रही है। यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) ने अपनी आक्रामक रणनीति का ऐलान करते हुए 21 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इनमें से 15 सीटें बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) क्षेत्र की हैं और 6 सीटें उससे बाहर की हैं। सबसे बड़ी बाधा यह है कि बीपीएफ (BPF) और यूपीपीएल (UPPL) के बीच की कड़वाहट खत्म होने का नाम नहीं ले रही। दोनों दलों ने साफ कर दिया है कि वे न तो साथ चुनाव लड़ सकते हैं और न ही किसी सीट-शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमत होंगे। यह स्थिति भाजपा के लिए सिरदर्द बन गई है, क्योंकि उसे इन दोनों क्षेत्रीय ताकतों के बीच संतुलन बनाना है। विपक्ष की एकजुटता दूसरी ओर सत्ता से बाहर कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर चार प्रमुख विपक्षी दलों ने हाथ मिलाया है और संयुक्त अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने गठबंधन की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि सभी सहयोगी दल जल्द ही पूरे राज्य में समन्वयित अभियान बैठकें करेंगे। गोगोई ने कहा, "हमारे पास केवल 30 दिन बचे हैं और ये 30 दिन असम के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमें एकजुट होकर जनता के बीच जाना होगा।" विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे कितनी जल्दी अपनी सीटों का बंटवारा कर पाते हैं, ताकि प्रचार के आखिरी दिनों में कोई आंतरिक कलह सामने न आए। जैसे-जैसे नामांकन की तारीखें नजदीक आ रही हैं, असम की राजनीति में गठबंधन धर्म और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के बीच का संघर्ष गहराता जा रहा है। जहां भाजपा के लिए अपने सहयोगियों की नाराजगी को दूर करना एक बड़ी परीक्षा है, वहीं विपक्ष के लिए 30 दिनों के भीतर एक साझा और प्रभावी नैरेटिव तैयार करना आसान नहीं होगा।

BJP में शामिल काबिल नेताओं को निगम-मंडल नियुक्तियों में मिल सकता है बड़ा पद, दिया गया संकेत

भोपाल   मध्यप्रदेश में लंबे समय से प्रतीक्षित निगम-मंडल की नियुक्तियों को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संकेत दिया है कि पार्टी की ओर से नाम लगभग तय कर लिए गए हैं और अब केंद्रीय नेतृत्व की मुहर के बाद सूची जल्द जारी की जा सकती है। होली के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में खंडेलवाल ने कहा कि प्रदेश संगठन अपने हिस्से का काम पूरा कर चुका है। अब अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होना है। उन्होंने बताया कि पार्टी की प्राथमिकता पहले संगठन की सभी नियुक्तियों को पूरा करना है, जिसके बाद निगम-मंडल की सूची जारी की जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि एल्डरमैन की नियुक्तियों के बाद ही निगम-मंडल के पदों की घोषणा की जाएगी। इससे संकेत मिल रहा है कि लंबे समय से इंतजार कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को जल्द जिम्मेदारी मिल सकती है। कांग्रेस से आए नेताओं को भी मिलेगा मौका खंडेलवाल ने यह भी इशारा किया कि कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए योग्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी मौका दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने साफ किया कि हारे हुए नेताओं और पूर्व मंत्रियों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। पार्टी युवाओं और काबिल कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने पर ज्यादा फोकस करेगी। अप्रैल में होगी पहली प्रदेश कार्यसमिति बैठक प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि नई प्रदेश कार्यकारिणी की पहली कार्यसमिति बैठक अप्रैल में आयोजित की जाएगी। इसके बाद हर तीन महीने में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक नियमित रूप से होगी।अब राजनीतिक गलियारों में नजर इस बात पर टिकी है कि निगम-मंडल की बहुप्रतीक्षित सूची कब जारी होती है और उसमें किन नेताओं को जगह मिलती है।

MP में सियासी बदलाव, 40 साल बाद कांग्रेस में नई पीढ़ी की एंट्री, BJP में भी नए चेहरे सामने आ रहे

भोपाल मध्य प्रदेश की राजनीति में अब नई पीढ़ी का दौर तेजी से दिखाई देने लगा है। लंबे समय तक वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में चलने वाली दोनों प्रमुख पार्टियों—Indian National Congress और Bharatiya Janata Party—में अब युवा नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के बाद प्रदेश स्तर पर नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है, वहीं भाजपा में भी नए चेहरे प्रभावी होते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस में नई पीढ़ी को नेतृत्व 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए वरिष्ठ नेता Kamal Nath को प्रदेश नेतृत्व से हटाकर युवा नेता Jitu Patwari को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया।साथ ही आदिवासी नेता Umang Singhar को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। अब पटवारी और सिंघार की जोड़ी प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और पार्टी को फिर से खड़ा करने के प्रयास में जुटी हुई है। संगठन सृजन अभियान में उम्र सीमा तय कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के दौरान पदाधिकारियों के लिए 50 वर्ष से कम उम्र की सीमा तय की। इसके तहत ब्लॉक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर करीब आधे पदों पर 50 वर्ष से कम उम्र के नेताओं को मौका दिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक पद पर पांच वर्ष से अधिक नहीं रखा जाएगा, ताकि संगठन में लगातार नए नेताओं को अवसर मिलते रहें। पटवारी–सिंघार बने नई रणनीति का चेहरा कांग्रेस की इस रणनीति का असर प्रदेश नेतृत्व में साफ दिखाई देता है। Jitu Patwari और Umang Singhar को लगभग 50 वर्ष की उम्र में ही बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। पार्टी इसे युवा नेतृत्व को आगे लाने की शुरुआत मान रही है। भाजपा में भी उभर रहे नए चेहरे मध्य प्रदेश में Bharatiya Janata Party में भी नेतृत्व परिवर्तन की झलक दिखाई दे रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में Mohan Yadav और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में Hemant Khandelwal को नई पीढ़ी के नेताओं में माना जा रहा है। भाजपा में यह बदलाव अपेक्षाकृत सहज तरीके से स्वीकार किया गया, जबकि कांग्रेस में शुरुआत में कुछ हिचक देखने को मिली थी। भाजपा की पुरानी पीढ़ी का लंबा दौर दरअसल, 1985-90 के दौर में भाजपा के नेतृत्व ने जिन नेताओं को आगे बढ़ाया था, वे लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। इनमें Shivraj Singh Chouhan, Kailash Vijayvargiya, Narendra Singh Tomar, Prahlad Patel, Narottam Mishra और Jayant Malaiya जैसे नेता शामिल रहे। वर्ष 2023 में करीब तीन दशक बाद भाजपा ने नया चेहरा सामने लाते हुए Mohan Yadav को मुख्यमंत्री बनाया। सियासी संकेत: मध्य प्रदेश में अब राजनीति धीरे-धीरे पुरानी पीढ़ी से नई पीढ़ी की ओर बढ़ती हुई नजर आ रही है। आने वाले वर्षों में दोनों ही दलों में युवा नेतृत्व की भूमिका और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।  

राज्यसभा चुनाव का असर संगठन पर भी? MP के कई दिग्गजों को राष्ट्रीय टीम में मिल सकता है बड़ा रोल

भोपाल राज्यसभा चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी के संगठन में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि 16 मार्च के बाद भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान हो सकता है, जिसमें मध्य प्रदेश के कई नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यभार संभालने के बाद से ही नई टीम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। राज्यसभा चुनाव के बाद होगा बड़ा फैसला सूत्रों के अनुसार बिहार, छत्तीसगढ़ समेत करीब दस राज्यों में होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद भाजपा संगठन में फेरबदल पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इसके लिए केंद्रीय स्तर पर मंथन भी शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि संगठन को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत बनाने के उद्देश्य से अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और महिला चेहरों को भी टीम में जगह दी जा सकती है। राष्ट्रीय संगठन में पहले से मजबूत है मध्य प्रदेश भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में मध्य प्रदेश को पहले से ही खास महत्व मिलता रहा है। वर्तमान में प्रदेश से कई नेता राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनमें सत्यनारायण जटिया संसदीय बोर्ड के सदस्य हैं, जबकि ओमप्रकाश धुर्वे राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति मोर्चा में भी प्रदेश के नेताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। यही वजह है कि नई टीम में भी मध्य प्रदेश की मजबूत भागीदारी की संभावना जताई जा रही है। नड्डा की टीम में भी था प्रदेश का प्रभाव पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की टीम में भी मध्य प्रदेश के चार नेताओं को जगह मिली थी। उस समय कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव के पद पर थे। बाद में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट दिया और जीत के बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया। इससे पहले भी भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में एक ही समय में मध्य प्रदेश से दो-दो महासचिव—बावरचंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर—रह चुके हैं।   चार से पांच नेताओं को मिल सकती है जिम्मेदारी भाजपा सूत्रों का कहना है कि नई राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश से चार से पांच नेताओं को जगह मिल सकती है। इनमें एक-दो वरिष्ठ नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी अवसर मिलने की संभावना है। कुछ नेताओं को विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों में भी जिम्मेदारी दी जा सकती है। दरअसल, मध्य प्रदेश को भाजपा के लिए लंबे समय से एक मजबूत संगठनात्मक आधार माना जाता है। संघ और जनसंघ की जड़ों से जुड़ा यह प्रदेश पार्टी के लिए प्रयोगशाला की तरह रहा है। मजबूत संगठन और अनुभवी कार्यकर्ताओं के कारण यहां के नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार अवसर मिलता रहा है। ऐसे में नई टीम में मध्य प्रदेश की भूमिका फिर अहम रहने की संभावना है।

राजनीतिक नियुक्तियां जल्दी, निगम-मंडलों के 36 नामों की सूची तैयार, मंत्रिमंडल विस्तार फिलहाल नहीं

भोपाल  प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से जारी इंतजार अब खत्म होने वाला है। सत्ताधारी दल के शीर्ष नेतृत्व ने निगम-मंडलों, प्राधिकरणों और विभिन्न सरकारी संगठनों में नियुक्तियों के लिए करीब तीन दर्जन नामों का प्रस्ताव तैयार किया है। यह सूची हाल ही में दिल्ली में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दी गई है। अंतिम मुहर लगने के बाद औपचारिक घोषणा की जाएगी।  सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित सूची में संगठन और सरकार से जुड़े ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी गई है, जो लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन अब तक किसी महत्वपूर्ण दायित्व से वंचित रहे हैं। सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। चरणबद्ध  होंगी नियुक्तियां बताया जा रहा है कि नियुक्तियां चरणबद्ध तरीके से की जाएंगी। कुछ प्रमुख निगमों और प्राधिकरणों में पहले चरण में नियुक्ति आदेश जारी हो सकते हैं, जबकि शेष पदों पर बाद में निर्णय लिया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इन नियुक्तियों से संगठन में उत्साह बढ़ेगा और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिलेगी। लंबे समय से टल रहा निर्णय बता दें, कि लोकसभा चुनाव के बाद से ही इन नियुक्तियों को लेकर चर्चा चल रही थी। कई बार सूची तैयार होने की बात सामने आई, लेकिन अंतिम निर्णय टलता रहा। अब माना जा रहा है कि इसी माह कभी भी इस संबंध में आधिकारिक रूप से सूची जारी की जा सकती है। भाजपा बचे हुए मोर्चो की कार्यकारिणी, जिला कार्यकारिणी, मंडल पदाधिकारियों, एल्डर मैन समेत अन्य पदों पर नियुक्ति के आदेश जल्द जारी करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी नगरीय निकाय और अन्य चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक संतुलन बनाना पार्टी की प्राथमिकता है। ऐसे में इन नियुक्तियों को रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। मंत्रिमंडल विस्तार अभी नहीं, प्रदेश कार्यसमिति की बैठक अगले माह उधर, मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें जारी हैं। सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल का विस्तार तय माना जा रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया अभी नहीं होगी और इसके लिए करीब दो से तीन महीने का समय लग सकता है। वहीं, मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक अप्रैल में होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हर तीन महीने में नियमित रूप से आयोजित की जा सकती है।

राज्यसभा चुनाव के लिए प्रदेश में हलचल, होली बधाई के दौरान नेता कर रहे दावेदारी, बायोडाटा सौंप रहे

रायपुर   छतीसगढ़ में राज्यसभा कि 2 सीटों पर होने वाले चुनावों के लिए हलचल तेज है। भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव के लिए कमर कस ली है। राज्यसभा की दोनो सीट पर 16 मार्च को चुनाव होगा,जिसके लिए हलचल तेज हो गई है। वहीं  अब होली के बहाने राज्यसभा दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरु कर दी है। होली  बधाई देने के बहाने पार्टी वरिष्ठ नेताओं से कर रहे  मुलाकात छत्तीसगढ़ के कोटे की दो राज्यसभा सीट पर 16 मार्च को चुनाव होगा। वर्तमान में दोनों सीट कांग्रेस के खाते में हैं, लेकिन इस बार के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के खाते में एक-एक सीट जाएगी। इसे देखते हुए कांग्रेस-भाजपा के दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। दरसअल राज्यसभा जाने के लिए लालयित  कुछ दावेदारों ने होली के बहाने अपनी दावेदारी पेश करने के लिए कोशिश शुरु कर दी है। दावेदार होली की बधाई देने के बहाने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करके अपनी मौजूदगी औऱ सक्रियता दिखा रहे है। यही नहीं  इस दौरान वे अपना बायोडाटा भी सौंप रहे हैं और माहौल को अपने पक्ष में करने की जुगत कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण है ये चुनाव वही राज्यसभा का ये चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए यह काफी अहम माना जा रहा है। इस फैक्ट के ध्यान में रखते हुए पार्टी दावेदारों के साथ-साथ उनका क्षेत्रीय के साथ जातिगत  समीकरणों को भी गौर से देखा जा रहा है। जहां भाजपा बस्तर या फिर दुर्ग संभाग से अपने किसी नेता को राज्यसभा का भेज सकती है,वहीं, कांग्रेस में सरगुजा संभाग से कई दावेदारों सामने आ रहे हैं। हालांकि बीजेपी कुछ नाम आलाकमान को भेज चुकी है तो वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज स्थानीय प्रत्याशी को मौका देने की बात बोल चुके है। लेकिन अभी देखने में आ रहा है  कि नेता लोग होली की शुभकामनाओं के बहाने भी अपनी दावेदारी पेश करके ताल ठोंक रहे है।

हाई कोर्ट से राहत के बाद बंगाल में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, अमित शाह दिखाएंगे परिवर्तन यात्रा को हरी झंडी

कोलकाता बंगाल में भाजपा की प्रस्तावित ‘परिवर्तन यात्रा’ को लेकर चल रही कानूनी रस्साकशी के बीच कोलकाता हाई कोर्ट ने सशर्त अनुमति दे दी है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष की पीठ में हुई सुनवाई के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि एक और दो मार्च को दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक यात्रा निकाली जा सकेगी, लेकिन किसी भी स्थान पर एक हजार से अधिक लोगों की भीड़ नहीं होनी चाहिए। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन को सुनिश्चित करनी होगी।   हाई कोर्ट 'परिवर्तन यात्रा' को दी सशर्त अनुमति अदालत ने यात्रा के समय को भी सीमित कर दिया है, जिसके तहत दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक ही जुलूस निकालने की इजाजत होगी। भाजपा सूत्रों के अनुसार, होली के त्योहार के मद्देनजर तीन और चार मार्च को यात्रा स्थगित रहेगी। ऐसे में पार्टी ने रणनीति बनाई है कि एक और दो मार्च को ही यात्रा का भव्य उद्घाटन कर दिया जाए, जबकि पांच मार्च से इसे पुनः सुचारू रूप से शुरू किया जाएगा। इस दौरान कूचबिहार, कृष्णनगर, कुल्टी, इस्लामपुर और संदेशखाली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से यात्रा गुजरेगी।   अब दो मार्च को शाह आएंगे कोलकाता इस राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में केंद्रीय मंत्रियों और दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगने वाला है। विशेष रूप से, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम में मामूली बदलाव हुआ है; अब वे एक मार्च की बजाय दो मार्च को दक्षिण 24 परगना जिले के रायदिघी से इस यात्रा का शुभारंभ कर सकते हैं। भाजपा ने पूरे राज्य को 10 संगठनात्मक संभागों में बांटा है, जिनमें से नौ संभागों में यह यात्रा निकलेगी। कोलकाता संभाग को इस यात्रा से मुक्त रखा गया है क्योंकि वहां 14 मार्च को होने वाली ब्रिगेड रैली की तैयारियां चल रही हैं, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संबोधित करेंगे।  

नितेन्द्र सिंह राठौर ने दिया बड़ा बयान, भाजपा में शामिल होने की अफवाहों पर कांग्रेस में मची हलचल

भोपाल   हाल ही में मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर हाइलाइट हुई है। इन तस्वीरों ने क्षेत्र में यह माहौल बना दिया है कि अब पृथ्वीपुर से विधायक नितेन्द्र सिंह राठौर कांग्रेस छोडक़र भाजपा में शामिल हो जाएंगे। इतना ही नहीं कई राजनैतिक पंडित तो यह भी कह रहे हैं कि नितेन्द्र सिंह राठौर अगला चुनाव भी भाजपा से लड़ेंगे। हालांकि इस बात की पुष्टि हम नहीं करते, परन्तु इन दिनों नितेन्द्र सिंह राठौर का रहन-सहन यह बता रहा है कि अंदरखाने कुछ तो चल रहा है। तस्वीरों से बढ़ीं सियासी अटकलें पिछले कुछ महीनों में विधायक नितेन्द्र सिंह राठौर की प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ कई मुलाकातें सामने आई हैं। खासतौर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव से उनकी बार-बार की मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े किए हैं। इसके अलावा पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल और कैबिनेट मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के साथ बैठकों की तस्वीरें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा नेताओं से उनकी बढ़ती नजदीकियां किसी बड़े राजनीतिक फैसले का संकेत हो सकती हैं। हालांकि अभी तक यह केवल अटकलों के दायरे में है। विधायक का जवाब: “जनता के काम के लिए मिलना जरूरी” नितेन्द्र सिंह राठौर ने कहा ये निराधार बातें हैं जिनका कोई औचित्य नहीं हैं। किसी फंक्शन में जाने की तस्वीर को लेकर या मुख्यमंत्री से मिलने का मतलब ये नहीं कि मैं पार्टी बदल रहा हूं। सीएम मोहन यादव प्रदेश के मुखिया हैं उनसे सत्ता पक्ष के विधायक भी मिलते हैं और विपक्ष के विधायक भी मिलते हैं। क्योंकि, जनता ने चुनकर भेजा है तो हम क्षेत्र के काम मांगने या जनता की समस्याओं से अवगत कराने के लिए किसके पास जाएंगे? विपक्ष का विधायक यदि प्रदेश के मुखिया से मिलता है तो इसीलिए मिलता है ताकि जनता के हितों का ध्यान रख सके। क्योंकि, मुझे जनता ने चुनकर भेजा है। पृथ्वीपुर विधायक ने कहा मैं तो कहता हूं कि जनता के लिए मुझे प्रधानमंत्री जी से मिलना पड़े या किसी केन्द्रीय मंत्री से मिलना पड़े तो उनसे भी मिलूंगा। इसमें क्या गलत है? लेकिन, इन मुलाकातों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना। ये बहुत दुखद और निराधार है। मैं इतना ही कहूंगा कि ऐसी खबरों से पत्रकारों को बचना चाहिए। क्योंकि इससे एक जनप्रतिनिधि जी जनता के द्वारा चुनकर आता है उसकी छवि खराब करने का प्रयास है। जनता के काम के लिए और विकास कार्यों के लिए किसी से भी काम के लिए मिलना होगा मैं मिलूंगा।  माह पहले संभावित बदलाव की चर्चा सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि यदि कोई राजनीतिक बदलाव होता है तो वह चुनाव से लगभग छह माह पहले हो सकता है। फिलहाल वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे, ताकि कानूनी या दल-बदल से जुड़ी जटिलताएं न खड़ी हों। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समय से पहले कदम उठाने पर सदस्यता और अयोग्यता से जुड़े प्रश्न उठ सकते हैं। हालांकि यह पूरी तरह अटकलों पर आधारित है और विधायक या पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान इस संबंध में सामने नहीं आया है। बदली हुई राजनीतिक शैली स्थानीय मीडियाकर्मियों का कहना है कि पहले भाजपा सरकार के खिलाफ मुखर रहने वाले विधायक अब अपेक्षाकृत शांत नजर आते हैं। विपक्षी तेवरों में आई इस कमी को भी लोग संभावित राजनीतिक बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि मध्य प्रदेश की राजनीति में पृथ्वीपुर क्षेत्र से जुड़ी यह चर्चा आने वाले समय में और गर्मा सकती है। आने वाले महीनों में ही यह साफ होगा कि यह केवल सियासी कयास हैं या किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की भूमिका।  

BJP का संगठनात्मक फेरबदल: मंडल अध्यक्षों व जिला प्रतिनिधियों की नई टीम घोषित, देखें पूरी लिस्ट

लखनऊ उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से भारतीय जनता पार्टी संठन को मजबूत करने में जुटी है। Bharatiya Janata Party उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अवध क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष Kamlesh Mishra ने मंडल अध्यक्षों और जिला प्रतिनिधियों की नई सूची जारी कर दी है। जारी सूची में अवध क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई जनपदों की विधानसभा सीटों के तहत मंडल अध्यक्ष और जिला प्रतिनिधियों के नामों की घोषणा की गई है। संगठन विस्तार पर जोर क्षेत्रीय अध्यक्ष कमलेश मिश्रा ने बताया कि पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से यह नियुक्तियां की गई हैं। नए पदाधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यकर्ताओं में उत्साह नई सूची जारी होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों और संगठनात्मक कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव अहम साबित होगा। भाजपा नेतृत्व ने सभी नव-नियुक्त मंडल अध्यक्षों और जिला प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए संगठन हित में सक्रिय योगदान देने की अपील की है।  

चीन-नीति पर फिर घिरे पंडित नेहरू: BJP ने उठाए पुराने समझौते, लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार (25 फरवरी) को कांग्रेस पर आरोप लगाया कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने पूरे कार्यकाल में बार-बार 'क्षेत्रीय समझौते' किए और भारत की सीमाओं का हमेशा के लिए 'पुन: निर्धारण' कर दिया। भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सरकार पर कांग्रेस के हमले की पृष्ठभूमि में भाजपा ने विपक्षी दल पर पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता अनिल बलूनी ने 'कम्प्रोमाइज्ड कांग्रेस' हैशटैग के साथ सोशल मीडिया 'एक्स' पर लिखा, ''प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में नेहरू का पहला कर्तव्य: भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना था लेकिन उन्होंने इसके बजाय अपने पूरे शासनकाल में क्षेत्रीय समझौते किए।" बलूनी ने आगे लिखा, "तिब्बत को टुकड़े-टुकड़े में गंवा दिया गया। अक्साई चिन को लेकर समझौता कर लिया गया। बेरुबारी को लेकर समझौता कर लिया गया। पंजाब के गांवों को लेकर समझौता कर लिया गया। रण के कच्छ को लेकर समझौता किया गया। और कश्मीर को लेकर भी करीब-करीब टुकड़ों में समझौता कर लिया गया।'' भाजपा सांसद ने दावा किया, ''बार-बार समझौते। यह नेहरू का नेतृत्व था। एक व्यक्ति के समझौते करने की वजह से भारत का नक्शा हमेशा के लिए बदल गया।'' ''डाक, टेलीग्राफ और फोन सेवाएं चीन को सुपुर्द कर दी गईं बलूनी ने आरोप लगाया कि नेहरू ने तिब्बत में भारत के अधिकारों को छोड़ दिया। उन्होंने दावा किया, ''डाक, टेलीग्राफ और फोन सेवाएं चीन के सुपुर्द कर दी गईं। तिब्बत को चीन के क्षेत्र के रूप में पहचाना गया। माओ को पूरा बफर जोन मुफ्त में सौंप दिया गया।'' भाजपा नेता ने कहा, ''अक्साई चिन: चीन ने 1951 से सैन्य सड़क बनाना शुरू किया। तत्कालीन आईबी प्रमुख बीएन मलिक ने 1952 में नेहरू को आगाह किया था लेकिन उन्होंने पूरी तरह अनदेखी की। सड़क 1957 में बनकर तैयार हो गई। 1959 में नेहरू ने संसद में कहा: 'इन अफवाहों पर ध्यान मत दो'। आठ साल का झूठ, जबकि भारत की जमीन को हथिया लिया गया।'' पश्चिम बंगाल का आधा क्षेत्र पाकिस्तान को दे दिया बेरुबारी पर नेहरू-नून के समझौते का जिक्र करते हुए बलूनी ने आरोप लगाया कि प्रथम प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल का आधा क्षेत्र बिना कैबिनेट मंजूरी के पाकिस्तान को दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया, ''कोई कैबिनेट मंजूरी नहीं। पश्चिम बंगाल सरकार से कोई परामर्श नहीं। उच्चतम न्यायालय ने नाखुशी जताते हुए कहा था: प्रधानमंत्री भारतीय जमीन को उपहार में नहीं दे सकते। नेहरू ने अपने समर्पण को कानूनी रूप देने के लिए नौवां संविधान संशोधन कराया।'' जनमत संग्रह का ऐलान पाक को कूटनीतिक हथियार भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि नेहरू ने मंत्रिमंडल की मंजूरी के बिना कश्मीर में 'सार्वजनिक रूप से' जनमत संग्रह का ऐलान कर दिया और पाकिस्तान को ''एक स्थायी कूटनीतिक हथियार'' दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू ने 1960 में सारजा माजरा, रख हरदित सिंह, पठानके और फिरोजपुर के हिस्सों को पाकिस्तान को सौंप दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका समझौते के खिलाफ मंगलवार को आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री ने 'एपस्टीन फाइल्स' जारी होने की धमकियों के बाहरी दबाव में समझौते को मंजूरी दी।