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गुजरात में बस्तर की गूंज: एकता परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

नए छत्तीसगढ़ की झलक देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हुए प्रभावित एकता नगर (गुजरात), गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आज आयोजित एकता परेड में इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी “बस्तर की धरती – संस्कृति, सृजन और प्रगति की गाथा” ने सभी का मन मोह लिया। यह झांकी छत्तीसगढ़ के जनजातीय जीवन, परंपराओं और विकास यात्रा का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परेड में सम्मिलित सभी झांकियों का अवलोकन किया और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलकियों की सराहना की। प्रधानमंत्री की उपस्थिति में प्रदर्शित छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपने सौंदर्य, प्रतीकात्मकता और सशक्त संदेश से सबका ध्यान आकर्षित किया। झांकी के अग्रभाग में पारंपरिक वेशभूषा में सजे माड़िया जनजाति के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गौर नृत्य ने बस्तर की आन-बान और सामूहिकता की भावना को सजीव कर दिया। उनके पास रखी पारंपरिक तुरही बस्तर के पर्वों की गूंज और लोक उल्लास की प्रतीक बनी। वहीं, नंदी का चित्रण बस्तर की गहरी लोक आस्था और शिव उपासना की परंपरा को अभिव्यक्त करता नजर आया। झांकी के मध्य भाग में बस्तर के विकास और परिवर्तन की यात्रा को कलात्मक रूप में दर्शाया गया। कभी नक्सलवाद से प्रभावित यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में बस्तर आज तेजी से बदलते भारत का प्रतीक बन चुका है। अब यहाँ बंदूक की नहीं, विकास की गूंज सुनाई देती है। झांकी के अंतिम भाग में टोकरी लिए महिला की प्रतिमा बस्तर की स्त्री शक्ति, श्रम और सृजनशीलता का प्रतीक बनी। संपूर्ण झांकी की ढोकरा शिल्पकला से की गई सजावट ने बस्तर के शिल्पकारों की अद्भुत कलात्मकता और परंपरागत कौशल को दर्शाया। छत्तीसगढ़ की यह झांकी न केवल अपनी संस्कृति और कला में समृद्ध है, बल्कि यह बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव की कहानी भी कहती है। झांकी ने दिखाया कि आज का नया बस्तर परंपरा, प्रकृति और विकास का सुंदर संगम बन चुका है। कभी दुर्गम और पहुँच से दूर रहने वाले इलाकों में अब सड़कों का जाल बिछ गया है, जिन पर बच्चों के स्कूल जाने की चहल-पहल सुनाई देती है और स्कूलों में घंटियाँ बजने लगी हैं। गांवों में बिजली की रौशनी और इंटरनेट की पहुँच ने नई आशाएँ जगाई हैं। युवाओं में कुछ करने, आगे बढ़ने का जोश दिखाई देता है। महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं—हस्तशिल्प, वनोपज , विभिन्न विकासात्मक योजनाओं ने उनके जीवन में नई दिशा दी है। लोग अब विकास पर भरोसा करने लगे हैं। यह झांकी इस विश्वास का प्रतीक है कि बस्तर अब सिर्फ़ अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से आगे बढ़ते एक नए युग के लिए भी जाना जा रहा है। एकता परेड के लिए झांकियों का चयन गृह सचिव की अध्यक्षता में गठित एक उच्चस्तरीय समिति और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने देशभर के राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय संगठनों के प्रजेंटेशन देखे। हर राज्य ने अपनी थीम, मॉडल और विचार समिति के सामने प्रस्तुत किए। इसी प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ की झांकी को उसकी मौलिकता, सांस्कृतिक समृद्धि और विकास के जीवंत चित्रण के लिए चयनित किया गया। अंतिम सूची में छत्तीसगढ़ के साथ एनएसजी, एनडीआरएफ, अंडमान-निकोबार द्वीप, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, मणिपुर, पुद्दुचेरी और उत्तराखंड की झांकियाँ शामिल हुईं।

मोदी की गारंटी दम तोड़ चुकी — PCC चीफ बैज का PM मोदी से 21 सवालों वाला हमला

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर 1 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायपुर के एकदिवसीय दौरे पर आने वाले हैं। उनके आगमन से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री से 21 सवालों की सूची जारी करते हुए कहा कि मोदी सरकार की गारंटी दम तोड़ चुकी है। क्या राज्योत्सव में इसका जवाब देंगे। इसके अलावा कांग्रेस ने रोजगार, किसानों, महिलाओं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी जवाब मांगा है। कांग्रेस के 21 सवाल पीएम मोदी से     मोदी की गारंटी दम तोड़ चुकी है क्या आप राज्योत्सव में इसका जवाब देंगे?     आपने 1 लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा था, दो साल में 40 हजार नौकरी भी मिली नहीं।     संविदा कर्मचारियों को 100 दिन में नियमितीकरण करने का वादा कब पूरा होगा?     हर विवाहित महिला को महतारी वंदन के तहत 1000 रुपये प्रतिमाह देने का वादा था, काफी महिलाओं के नाम काटे गए, आपने 500 रुपये में सिलेंडर देने की बात कही थी?     आपके राज में हत्या, लूट, बलात्कार, आगजनी बढ़ी, कानून-व्यवस्था चरमराई?     छत्तीसगढ़ में बांग्लादेशी घुसपैठी आ रहे, पाकिस्तान से ड्रग्स आ रहे, इस पर लगाम क्यों नहीं?     सेंट्रल पुल में चावल क्यों नहीं खरीदा जा रहा, सोसाइटियों में आज भी धान का उठाव नहीं?     आपकी सरकार में साढ़े 18 लाख पीएम आवास दिए जाने की बात कही गई थी। शहरी और ग्रामीण कितने आवास स्वीकृत हुए? डिटेल बताएं?     किसानों को यूरिया-DAP की किल्लत क्यों?     प्रदेश में कितने स्कूल खोले गए, आपके राज में 10,000 से ज्यादा स्कूल बंद क्यों किए?     महादेव सट्टा ऐप चल रहा, शराब माफिया बेलगाम – कार्रवाई क्यों नहीं?     कोल माइंस बेचा जा रहा, अवैध रूप से पेड़ भी काटे जा रहे?     आपने हॉफ बिजली बिल योजना बंद कर, बिजली के दाम चार गुना बढ़ाए, लेकिन बिहार में 125 यूनिट फ्री बिजली ऐसा क्यों?     बस्तर बाढ़ पीड़ितों को केंद्र सरकार ने राहत पैकेज क्यों नहीं दिया?     छत्तीसगढ़ की यात्री ट्रेनें ही क्यों रद्द होती हैं?     नगरनार इस्पात संयंत्र का विनिवेशीकरण क्यों?     एनएमडीसी मुख्यालय बस्तर में कब खुलेगा?     बस्तर के खनिज संसाधनों को बेचा जा रहा?     रायपुर के इकलौते मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भटक रहे लोग, एक ही बेड पर दो प्रसूताएं क्यों?     सरकारी अस्पतालों में दवाएं और इलाज क्यों नहीं?     2 करोड़ नौकरी और लोगों के खाते में 15 लाख खाते में कब देंगे? भाजपा पर हमला कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा के बयान “कांग्रेस दिल्ली से नहीं, इटली से चलने वाली पार्टी” पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि भाजपा में पर्ची से मुख्यमंत्री बनते हैं, वे पसंदीदा मंत्री तक नहीं चुन पाते, दिल्ली से पर्ची आती है। भाजपा नेता कांग्रेस के लिए भी वही सपना देख रहे हैं। घुसपैठियों पर बैज का पलटवार घुसपैठियों को लेकर डिप्टी CM विजय शर्मा के बयान पर PCC चीफ दीपक बैज ने कहा कि आप गृह मंत्री हैं, सारे अधिकार आपके पास हैं। पाकिस्तान से ड्रग्स आ रहा है, बांग्लादेशी घुसपैठिए आ रहे हैं, कार्रवाई कौन करेगा? राज्योत्सव में बाहरी कलाकारों पर सवाल राज्योत्सव में बाहरी कलाकारों को बुलाने पर दीपक बैज ने कहा कि हम पहले दिन से कह रहे, स्थानीय कलाकारों को भी बाहरी कलाकारों जितना ही सम्मान और मंच मिलना चाहिए। ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान है जारी – दीपक बैज ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान को लेकर दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस का हस्ताक्षर अभियान जारी है। 10 से 12 लाख हस्ताक्षर फॉर्म आएंगे, जिन्हें हम AICC को भेजेंगे, चुनाव आयोग को भेजेंगे। चुनाव आयोग द्वारा यह बात कही जा रही थी कि राहुल गांधी को हलफनामा देना चाहिए। आम जनता इस पर सवाल उठा रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: फसल सर्वे और गिरदावरी सत्यापन की डेडलाइन में बढ़ोतरी

रायपुर छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खुशखबरी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के समस्त जिलों के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी के मोबाईल PV ऐप के माध्यम से सत्यापन की समय सीमा को एक माह के लिए बढ़ा दिया है। अब यह प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2025 की बजाय 30 नवंबर 2025 तक की जा सकेगी। बता दें कि इस संबंध में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा आज सभी कलेक्टरों को पत्र जारी किया गया है। विभाग ने पत्र में अपने 11 सितंबर 2025 के आदेश का संदर्भ देते हुए बताया कि पूर्व में यह प्रावधान किया गया था कि गिरदावरी एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे के संशोधन की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2025 तक रहेगी। इसके बाद केवल PV ऐप के माध्यम से भौतिक सत्यापन के बाद ही प्रविष्टियों में संशोधन किया जा सकेगा। यह ऐप 15 सितंबर 2025 से Go Live किया गया था, जिसके माध्यम से 31 अक्टूबर 2025 तक प्रविष्टियों में बदलाव करने की अनुमति थी। अब शासन ने किसानों की सुविधा और प्रशासनिक कार्यों को ध्यान में रखते हुए इस अवधि को 30 नवंबर 2025 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस अवधि में संबंधित अधिकारी PV ऐप के जरिए भौतिक सत्यापन उपरांत डेटा संशोधन कर सकेंगे। गौरतलब है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी का यह ऑनलाइन सत्यापन अभियान राज्य में कृषि डेटा के डिजिटलीकरण और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम है। इससे फसलों के वास्तविक रकबे का सटीक आंकलन किया जा सकेगा, जो आगे धान खरीदी, बीमा, एवं अन्य कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा।

मोंथा तूफान पहुंचा छत्तीसगढ़! आज इन इलाकों में झमाझम बारिश के आसार

रायपुर  गंभीर चक्रवाती तूफान मोंथा अब कमज़ोर होकर साधारण चक्रवाती तूफान बन गया है. अगले 6 से 12 घंटों में यह गहरे दबाव में बदल सकता है. इसका प्रभाव आज छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिलेगा. बुधवार को चक्रवात के असर से पूरे प्रदेश में बारिश की संभावना है. एक दो स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी दी गई है. साइक्लोन मोंथा से छत्तीसगढ़ में बदलेगा मौसम का मिजाज लेटेस्ट मौसम अपडेट के अनुसार मोंथा अब कमज़ोर होकर साधारण चक्रवाती तूफान बन गया है. तूफान लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है और अगले 6 से 12 घंटों में गहरे दबाव में बदल सकता है. प्रदेश में आज अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने और गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना जताई गई है. एक दो स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा होने की भी संभावना है. इस मौसमी तंत्र के प्रभाव से हवा की गति 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की चल सकती है. वर्षा का क्षेत्र मुख्यतः मध्य और दक्षिण छत्तीसगढ़ रहने की संभावना है. वर्षा का क्षेत्र धीरे धीरे मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ की ओर केंद्रित रहने की सम्भावना है. वर्षा की गतिविधि 31 अक्टूबर तक लगातार जारी रहने की सम्भावना है. अगले 2 दिनों में एक-दो स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना है. बिलासपुर और सरगुजा संभाग के एक-दो स्थानों पर मेघगर्जन के साथ भारी वर्षा होने की संभावना है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? मौसम विभाग ने राजधानी रायपुर में आसमान में बादल छाए रहने की संभावना जताई है. बादल गरजने-चमकने के साथ वर्षा हो सकती है. अधिकतम 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है.

प्रकृति की गोद में बसा रानीदाह जलप्रपात — जहाँ हर बूंद कहती है कहानी

रायपुर, रानीदाह जलप्रपात का सबसे आकर्षक रूप मानसून के दौरान देखने को मिलता है, जब पानी का बहाव चरम पर होता है और चारों ओर हरियाली व वादियां निखर उठती हैं। एडवेंचर, फोटोग्राफी, और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान अद्भुत अनुभव देता है। यहाँ की स्वच्छ बूंदें, हरियाली भरी घाटियाँ और झरने की गूंज हर आगंतुक को मंत्रमुग्ध कर देती है।       रानीदाह जलप्रपात छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर जिला मुख्यालय से लगभग 15 से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह झरना घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों के मध्य स्थित है और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। बरसात के मौसम में यहाँ का नजारा अत्यंत मनोहारी होता है, झरने की धाराएं विशाल चट्टानों से गिरती हैं और एक विशाल जलकुंड में मिल जाती हैं। आसपास जंगल, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, और ऊँची-नीची पहाड़ियाँ इस जगह को रोमांचक बनाते हैं। यहाँ के माहौल में शांति, ताजगी और हरियाली छायी रहती है, जिससे यह पिकनिक और प्रकृति प्रेमियों का आदर्श स्थल है।       रानीदाह जलप्रपात से जुड़ी एक रोचक किंवदंती भी है। कहा जाता है कि उड़ीसा की रानी शिरोमणि अपने प्रेमी के साथ भागकर जशपुर आई थीं, जहाँ उन्होंने अपने भाईयों से छिपते हुए इसी झरने के समीप आत्मसमर्पण किया। इसी वजह से इस स्थल का नाम रानीदाह पड़ा। आज भी यहाँ रानी की समाधि और पंचमैया नामक स्थल देखने को मिलता है, जो रानी के पाँच भाईयों को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाता है। जलप्रपात के निकट एक शिव मंदिर भी है, जिससे इसका धार्मिक महत्त्व बढ़ जाता है।        यह जलप्रपात वर्ष पर्यन्त विशेष रूप से जून से फरवरी तक चालू रहता है। जशपुर से आरा मार्ग पर लगभग 18 किमी दूरी और मुख्य सड़क से 5 किमी अंदर की ओर स्थित इस स्थल तक सड़क मार्ग, ट्रेन (रांची व अंबिकापुर रेलवे स्टेशन), और हवाई यात्रा (रांची व रायपुर एयरपोर्ट) से पहुँचा जा सकता है। यहाँ जिला प्रशासन ने व्यू प्वाइंट, सीढ़ियाँ, एवं पिकनिक के लिए सुरक्षित व्यवस्था की है ताकि पर्यटक पूर्ण रूप से प्रकृति का आनंद उठा सकें।       रानीदाह जलप्रपात न केवल छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण बिंदु है, बल्कि प्रकृति, इतिहास और रोमांच से भरपूर एक अविस्मरणीय स्थल भी है। यहाँ आकर मनुष्य को प्रकृति के शांत, पवित्र एवं रमणीय स्वरूप का गहरा अहसास होता है।

‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ का जिक्र, मुख्यमंत्री साय ने जताया पीएम मोदी का आभार

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को न्यू शांति नगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का प्रसारण सुना. इस दौरान भाजपा के सभी महामंत्री, प्रदेश, जिला एवं मंडल पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या व्यापारी मौजूद रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित गार्बेज कैफे का जिक्र किया. कैसे आधा किलो कचड़ा देकर नाश्ता और एक किलो कचड़ा देकर दिन या रात का खाना खा सकते हैं. इसके साथ उन्होंने कहा कि ये प्रेरक उदाहरण है कि जब ठान लिया जाए तो बदलाव भी किया जा सकता है. ‘मन की बात’ को सुनने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के हम आभारी हैं. उन्होंने कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ का कई बार जिक्र किया है. आज भी छत्तीसगढ़ का जिक्र किया है. अंबिकापुर नगर निगम स्वच्छता के मामले में अव्वल रहा है, जिसका भी जिक्र प्रधानमंत्री ने किया है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही है. नक्सली जमीन के अंदर बम गाड़ कर रखते हैं, जिसे देशी स्वान आसानी से डिटेक्ट करता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम में उसका भी जिक्र किया है.

युवाओं के लिए बड़ी खबर: छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की भर्ती शुरू होने वाली

रायपुर सरकारी नौकरी की राह देख रहे युवाओं के लिये खुशखरी है। छत्तीसगढ़ में पांच हजार शिक्षकों की भर्ती होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य शासन के वित्त विभाग ने 50 हजार शिक्षकों के पदों पर भर्ती की मंजूरी दे दी है। यह निर्णय मुख्यमंत्री साय की उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने प्रदेश के शैक्षणिक ढांचे को मज़बूत बनाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य की प्रगति की नींव होती है और छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य है कि हर बच्चे तक ज्ञान और अवसर दोनों पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह भर्ती न केवल शिक्षण व्यवस्था को गति देगी बल्कि युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर भी सृजित करेगी। 5000 पदों के लिये शिक्षा विभाग शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगा। इन पदों की पूर्ति से ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर होगी, जिससे शिक्षण की निरंतरता और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। राज्य शासन ने पिछले कुछ महीनों में शिक्षा सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। विद्यालय भवनों के निर्माण, डिजिटल शिक्षा सामग्री के प्रसार, और शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।  प्रदेश में शिक्षकों की कमी लंबे समय से एक प्रमुख चुनौती रही है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता सीमित थी। नई भर्ती से इन क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे बच्चों को अब अपने ही गाँव और क्षेत्र में बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, यह पहल प्रदेश में शिक्षण के स्तर को राष्ट्रीय औसत के बराबर लाने में सहायक सिद्ध होगी। प्रदेश सरकार शिक्षा को सर्वांगीण विकास का आधार मानते हुए लगातार निवेश कर रही है। स्कूल इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण से लेकर छात्रवृत्ति, मध्याह्न भोजन और छात्र हितैषी योजनाओं तक, सरकार का फोकस हर स्तर पर शिक्षा के दायरे को व्यापक बनाना है। शिक्षकों की यह नई भर्ती उसी दीर्घकालिक दृष्टि का हिस्सा है, जो ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के विज़न को साकार करने की दिशा में अग्रसर है। इस निर्णय से जहाँ शिक्षा प्रणाली को नई ऊर्जा मिलेगी, वहीं हजारों युवाओं के सपनों को साकार करने का मार्ग भी खुलेगा। यह पहल मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ‘शिक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़’ की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी।

मुख्यमंत्री साय पंडवानी महासम्मेलन के समापन समारोह में हुए शामिल

नागरिक कल्याण महाविद्यालय नंदिनी में स्नातकोत्तर कक्षाएं, अछोटी में बीएड महाविद्यालय, मेड़ेसरा को आदर्श ग्राम बनाने, समुदायिक भवन हेतु 20 लाख रुपये एवं सभी पंचायतों में सीसी रोड निर्माण की घोषणा रायपुर   पंडवानी एक ऐसी विधा है, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ को पूरी दुनिया में पहचान मिली है। हमारे पंडवानी कलाकारों ने न्यूयॉर्क, पेरिस और लंदन तक महाभारत की कथाओं पर आधारित प्रस्तुतियों से लोगों को मंत्रमुग्ध किया है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से न केवल छत्तीसगढ़ की परंपरा को जीवित रखा है, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा को वैश्विक मंचों तक पहुँचाया है। पंडवानी आज हमारी लोक चेतना, नारी सशक्तिकरण और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर दुर्ग जिले के ग्राम मेड़ेसरा में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग रायपुर के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, साजा विधायक ईश्वर साहू, राज्य तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, पूर्व मंत्री श्रीमती रमशीला साहू एवं जागेश्वर साहू, पूर्व विधायक लाभचंद बाफना एवं डॉ. दयाराम साहू, जिला पंचायत दुर्ग की अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती बंजारे तथा दुर्ग नगर निगम की महापौर श्रीमती अलका बाघमार भी उपस्थित थीं।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुझे पंडवानी के पुरोधा स्वर्गीय झाड़ूराम देवांगन जी की स्मृति भी हो रही है। जब वे हाथ में तंबूरा लेकर प्रस्तुति देते थे, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। पंडवानी गायन में महिला कलाकारों की विशेष सफलता उल्लेखनीय रही है। मुझे स्वर्गीय लक्ष्मी बंजारे जी का भी स्मरण हो रहा है। यह छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि हमारी धरती पर तीजन बाई जैसी विभूति हुईं, जिन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण तीनों सम्मान प्राप्त हुए हैं। जब वे तंबूरा लेकर आलाप भरती हैं, तो ऐसा लगता है मानो आकाश के देवी-देवता भी उन्हें सुन रहे हों। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मैंने अनेक अवसरों पर तीजन बाई जी की पंडवानी सुनी है। श्याम बेनेगल की भारत एक खोज में उनका पंडवानी गायन दृश्य मन को आनंद और उत्सुकता से भर देता है। पद्मश्री डॉ. उषा बारले जी हमारे बीच उपस्थित हैं, जिन्होंने अपने अद्भुत पंडवानी गायन से सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडवानी हमारी अमूल्य धरोहर है। आज इस महासम्मेलन के आयोजन के माध्यम से आप सभी ने इस धरोहर को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का अत्यंत सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि हम लोगों ने बचपन में रामलीला मंडलियों के माध्यम से रामायण की कथाएं और पंडवानी के माध्यम से महाभारत की कथाएं सुनीं। पीढ़ी दर पीढ़ी इन लोककलाकारों ने रामायण और महाभारत जैसी महान कथाओं को जन-जन तक पहुँचाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडवानी गायन इस मायने में भी अद्वितीय है कि इसमें स्त्री-पुरुष का कोई भेद नहीं है। तीजन बाई और डॉ. उषा बारले जैसी कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से यह साबित किया है कि यह विधा महिलाओं के कौशल और संवेदनशीलता की प्रतीक है। पंडवानी गायन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सामाजिक तासीर भी झलकती है – यहां मातृशक्ति की भागीदारी कला के क्षेत्र में भी अग्रणी है और उन्हें सदैव प्रोत्साहित किया जाता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरगुजा से लेकर बस्तर तक हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट संस्कृति है। हमारी सरकार छत्तीसगढ़ी लोककला और संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। कलाकारों की पेंशन राशि में वृद्धि की गई है और अवसरों की संख्या भी बढ़ाई गई है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी की स्थापना का निर्णय लेकर हमने छत्तीसगढ़ी सिनेमा को सशक्त बनाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि जब अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया था, तब उनके मन में विकास के साथ-साथ संस्कृति को सहेजने की भी गहरी मंशा थी। आज जब ऐसा सुंदर आयोजन देखता हूं, तो मन को सुकून मिलता है कि अटल जी की मंशा पूर्ण हुई है। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर को प्रदेश की रजत जयंती मनाई जाएगी, जो हमारी लोकसंस्कृति का महोत्सव होगा। इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का भी आगमन होगा। मुख्यमंत्री ने सभी से आग्रह किया कि वे राज्योत्सव में सम्मिलित होकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाएं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा विभाग शीघ्र ही 5000 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करेगा। इन पदों की पूर्ति से ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर होगी, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और निरंतरता में उल्लेखनीय सुधार होगा। मुख्यमंत्री साय ने  नागरिक कल्याण महाविद्यालय नंदिनी में स्नातकोत्तर कक्षाएं प्रारंभ करने, अछोटी में बीएड महाविद्यालय खोलने, मेड़ेसरा को आदर्श ग्राम बनाने, समुदायिक भवन हेतु 20 लाख रुपये और क्षेत्र के सभी पंचायतों में सीसी रोड निर्माण की घोषणा की। कार्यक्रम के अध्यक्ष उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर सभी पंडवानी कलाकारों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कला और संस्कृति के लिए देश और दुनिया में विशिष्ट पहचान रखता है। यह कलाकारों से परिपूर्ण राज्य है। उन्होंने 1 नवंबर को राज्योत्सव में सभी को रायपुर आमंत्रित किया। कार्यक्रम की संयोजक पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस और पंडवानी महासम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री साय सहित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर, आईजी आर.जी. गर्ग, कलेक्टर अभिजीत सिंह, एसएसपी विजय अग्रवाल सहित अन्य अधिकारीगण, पंडवानी के लोककलाकार तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।  

छत्तीसगढ़ रजत जयंती पर विशेष लेख :सुशासन की नई पहल: समयबद्ध छात्रवृत्ति से शिक्षा की राह हुई आसान

 डॉ. ओम प्रकाश डहरिया,   सहा. जनसम्पर्क अधिकारी  रायपुर, मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की विशेष पहल पर राज्य के शैक्षणिक संस्थानों, आश्रम-छात्रावासों और तकनीकी एवं प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में पढ़ाई करने वाले अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति एवं छात्रवृत्ति का भुगतान निर्धारित समय-सीमा में उनके बैंक खाते में ऑनलाईन होने से अब उक्त वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा की राह आसान हो गई है। मुख्यमंत्री श्री साय ने हाल ही में मंत्रालय, महानदी भवन से इन वर्गों के लगभग 2 लाख विद्यार्थियों के बैंक खातों में 84.66 करोड़ रूपए की शिष्यवृत्ति एवं छात्रवृत्ति ऑनलाईन अंतरित की है। उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति और छात्रवृत्ति ऑनलाईन भुगतान की शुरूआत मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के हाथों पहली बार 10 जून 2025 को हुई। राज्य में संचालित सभी प्री. मैट्रिक छात्रावासों एवं आश्रमों में प्रवेशित बच्चों को शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के पूर्व ही शिष्यवृति की प्रथम किश्त राशि 77 करोड़ रूपए एवं पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में अध्ययनरत छात्रों हेतु भोजन सहाय की प्रथम किश्त के रूप में राशि 8.93 करोड़ रूपए, इस प्रकार कुल 85 करोड़ रूपए की राशि जारी कर एक अभिनव पहल की गई थी। इसके ठीक बाद दूसरे चरण में 17 जून 2025 को 8370 विद्यार्थियों को छात्रवृति की राशि 6.2 करोड़ रूपए का ऑनलाइन अंतरण किया गया था। मुख्यमंत्री श्री साय के हाथों आश्रम-छात्रावासों के 1 लाख 86 हजार 50 विद्यार्थियों को शिष्यवृति की द्वितीय किश्त की राशि 79 करोड़ 27 लाख रूपए एवं पो. मैट्रिक छात्रवृत्ति के 12 हजार 142 विद्यार्थियों को 5 करोड़ 38 लाख 81 हजार रूपए उनके बैंक खातों में राशि अंतरित की गई है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षा को सबके लिए आसान बनाने  के उद्देश्य से अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग तथा कमजोर वर्गों के छात्र-छात्राओं की शिक्षा चिंता की और उन्होंने आदिमजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित आश्रम -छात्रावास में रहकर शिक्षा अध्ययन कर रहे के बच्चों के शिक्षा को आसान बनाने के लिए यह नयी पहल की है। आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम के नेतृत्व और विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणी बोरा के गहन प्रयासों से  कमजोर वर्गाें के विकास एवं उन्हें विकास की मुख्यधारा में लाने बिना रूकावट के शिक्षा ग्रहण हेतु सुविधा प्रदान करने का यह प्रयास सार्थक हो रहा है। आदिम जाति कल्याण विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के प्रयासों से प्री. मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति तथा शिष्यवृत्ति भुगतान के लिए नयी व्यवस्था में माह जून, सितंबर, अक्टूबर एवं दिसंबर में विद्यार्थियों को अब ऑनलाईन भुगतान किया जा रहा है। इस पहल से विद्यार्थियों को शैक्षणिक अध्ययन के दौरान होने वाली आर्थिक समस्या से निजात मिली है। यहां यह उल्लेखनीय है कि इस नयी व्यवस्था से पूर्व विद्यार्थियों को दिसंबर एवं फरवरी-मार्च में वर्ष में एक बार छात्रवृति एवं शिष्यवृति की राशि प्रदान की जाती थी।   दरअसल आश्रम छात्रावास में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थी हो या यहां रहकर अध्ययन कर चुके विद्यार्थी हो अथवा आश्रम छात्रावासों में रहकर उच्च पदों में कार्य कर रहे विद्यार्थी क्यों न हो। वे समय पर स्कॉलरशिप नहीं मिलने के कारण की परेशानियों से भलीभांति वाकिफ हैं। वास्तव में एक विद्यार्थी को अध्ययन सामग्री क्रय करने के लिए जब पैसे की जरूरत हो उस वक्त छात्रवृत्ति और शिष्यवृत्ति की राशि उनके बैंक खातों में पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण होता है। छात्रावासी विद्यार्थियों की इस परेशानी को दूर करने के लिए प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा सहित विभागीय अमलों ने संवेदनशीलता के साथ कितनी मशक्कत की होगी यह किसी से छिपा नहीं है। इसी का परिणाम है कि विभाग आश्रम छात्रावास के बच्चों के छात्रवृत्ति के लिए की गई तय सीमा से लाखों विद्यार्थियों को लाभ मिलना लाजिमी है। छात्रावास में रहने वाले बच्चों की अधिकतर आवश्यकताएँ सरकार द्वारा पूरी की जाती हैं, लेकिन छात्रवृत्ति उन्हें व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने की स्वतंत्रता देती है। इससे वे किताबें, स्टेशनरी व अन्य जरूरी सामान स्वयं खरीद सकते हैं। जब यह सहायता समय पर मिलती है, तो विद्यार्थी बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई जारी रख पाते हैं और उनका ध्यान पढ़ाई से भटकता नहीं है। समय पर छात्रवृत्ति मिलने से बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है। समय पर छात्रवृत्ति मिलने से न केवल बच्चों की शैक्षिक यात्रा आसान होती है, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा की ओर बढ़ने का प्रोत्साहन भी मिलता है। वे यह सोचने लगते हैं कि यदि अभी उन्हें सहायता मिल रही है तो आगे भी मिलेगी, जिससे वे कॉलेज या व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर अग्रसर होते हैं। इससे राज्य में एक शिक्षित, आत्मनिर्भर और जागरूक युवा पीढ़ी का निर्माण होता है। अंत में, यह कहा जा सकता है कि विद्यार्थियों को निर्धारित समय पर स्कॉलरशिप देने की प्रक्रिया से छत्तीसगढ़ में समावेशी शिक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने में आसान होगी।

राष्ट्रपति का सम्मान: छत्तीसगढ़ को आदि कर्मयोगी अभियान और पीएम जनमन योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए किया गया सम्मानित

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं मंत्री नेताम ने दी बधाई एवं शुभकामनाएं राष्ट्रपति के हाथों राज्य सरकार की ओर से प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने किया सम्मान ग्रहण रायपुर, छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर अपनी सशक्त पहचान दर्ज कराई है। आदि कर्मयोगी अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए राज्य को आज भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य’ के रूप में सम्मानित किया गया। यह सम्मान राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया। राज्य सरकार और जनजातीय विकास विभाग की ओर से यह सम्मान प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने राष्ट्रपति के करकमलों से प्राप्त किया। प्रमुख सचिव  बोरा ने इस मौके पर पीएम जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में जनजातियों और विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए किए जा रहे कार्यो के संबंध में विस्तार से प्रस्तुती दी। वहीं मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने जिलों में जनजातियों के विकास में किए जा रहे कार्यो की जानकारी दी। कार्यक्रम में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुआल ओराम तथा राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके, जनजातीय कार्य मंत्रालय के सचिव विभु नायर भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर समस्त विभागीय अधिकारियों और फील्ड टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान राज्य के उन कर्मयोगियों के परिश्रम और समर्पण की पहचान है, जिन्होंने जनजातीय सशक्तिकरण को धरातल पर साकार किया है। कार्यक्रम में धमतरी और कोरिया जिलों को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। इसके साथ ही जनजाति विभाग के स्टेट ट्रेनर ललित शुक्ला को भी व्यक्तिगत श्रेणी में पुरस्कार प्राप्त हुआ। आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत मोहला-मानपुर, बालोद, दंतेवाड़ा और धमतरी जिलों को ‘स्क्रीन फेलिसिटेशन अवार्ड’ मिला, जो इस बात का प्रमाण है कि जनजातीय सेवा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को राज्य के प्रत्येक जिले में प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इस मौके धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा, कोरिया कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी, बालोद कलेक्टर दिव्या मिश्रा एवं दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत उपस्थित थे। आदिम जाति विकास मंत्री राम विचार नेताम ने इस उपलब्धि पर पूरे विभाग को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जनजातीय विकास विभाग ने जन-कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर सफलतापूर्वक लागू किया है। उन्होंने कहा कि “यह पुरस्कार हमारे अधिकारियों, फील्ड कर्मचारियों और उन जनप्रतिनिधियों की मेहनत का परिणाम है, जो राज्य के दूरस्थ अंचलों तक योजनाओं की रोशनी पहुँचाने में दिन-रात जुटे हैं।” गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ ने हाल के वर्षों में जनजातीय शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य और प्रशिक्षण के क्षेत्र में कई अभिनव कदम उठाए हैं। आदि कर्मयोगी अभियान ने प्रशासनिक दक्षता को नई दिशा दी है, वहीं पीएम जनमन योजना ने आदिवासी समाज के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार लाया है। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के जनजातीय कल्याण विभागों के अधिकारी, परियोजना निदेशक, विकास सहयोगी संस्थाएँ और जनजातीय प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए।