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केजरीवाल से जुड़े केस में ईडी की याचिका पर हाईकोर्ट की सुनवाई, जज की टिप्पणी बनी चर्चा का विषय

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति मामले में ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों को हटाने की मांग को लेकर दायर ईडी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि जज की टिप्पणियां संभवतः मामले से सीधे जुड़ी नहीं हो सकतीं और वे सामान्य प्रकृति की भी हो सकती हैं। हाई कोर्ट ने कहा, “जज ने जो कहा है, वह जरूरी नहीं कि इसी मामले के संदर्भ में हो। कई बार जज इस तरह की सामान्य टिप्पणियां करते हैं।” हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हमारा सवाल यह है कि ये जो टिप्पणियां की गई हैं, वे सामान्य प्रकृति की हैं और इनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। आगे कहा कि वह आदेश के संबंधित हिस्सों को देखकर यह तय करेगी कि वे सामान्य टिप्पणियां हैं या फिर इस मामले से जुड़ी हुई हैं। हाई कोर्ट ने क्या कहा बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, “आप कह रहे हैं कि आदेश के कुछ पैराग्राफ इस फैसले के संदर्भ में हो सकते हैं? पूरा फैसला वैसे भी चुनौती के दायरे में है, इसलिए जब हम सीबीआई मामले पर सुनवाई करेंगे तो इस निर्णय को भी पढ़ेंगे। इस मामले में नोटिस जारी करेंगे और इसे उसी दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा रहा है, जिस दिन ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई होगी।” दरअसल, ईडी ने हाल ही में सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य को आरोपमुक्त करते हुए निचली अदालत द्वारा धनशोधन जांच के संबंध में की गई टिप्पणी को हटाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। ईडी का कहना था कि 27 फरवरी का आदेश "न्यायिक अधिकार क्षेत्र का स्पष्ट उल्लंघन" था क्योंकि अदालत ने एजेंसी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए उसके साक्ष्यों पर ना तो गौर किया और ना ही उसकी बात सुनी। अदालत ने क्या कहा था विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह की अदालत ने पीएमएलए और ईडी जांच के संबंध में कई टिप्पणियां की थीं। आदेश में विशेष रूप से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के विजय मदनलाल चौधरी मामले में कहा था कि एक बार मूल मामला (सीबीआई मामला) समाप्त होने पर ईडी मामला भी अनिवार्य रूप से खत्म हो जाएगा। ईडी की आपत्ति ईडी ने 7 मार्च को दायर अपनी याचिका में आदेश के कई पैराग्राफ का हवाला देते हुए कहा कि अदालत की उसके खिलाफ की गई टिप्पणियां "प्रतिकूल, व्यापक और अवांछित" थीं क्योंकि सुनवाई में ईडी पक्षकार नहीं थी और अदालत के समक्ष केवल सीबीआई की जांच के गुण-दोष पर ही विचार किया जा रहा था। एजेंसी ने यह भी कहा कि यदि इस प्रकार की व्यापक और निराधार टिप्पणियों को बरकरार रहने दिया गया, जिनका आधार ईडी द्वारा एकत्रित किसी भी सामग्री या साक्ष्य पर नहीं है तो इससे सार्वजनिक हित के साथ-साथ ईडी को भी गंभीर और अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।

ईडी की बड़ी कार्रवाई: बकिंघम पैलेस के पास 150 करोड़ की संपत्ति हुई कुर्क

इंदौर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी और धनशोधन मामले में लंदन में बकिंघम पैलेस के पास स्थित 150 करोड़ रुपये मूल्य की एक अचल संपत्ति कुर्क की है। ईडी की यह कार्रवाई कपड़ा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एस. कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड और उसके पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) नितिन कासलीवाल से जुड़ी है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने बुधवार को एक बयान में कहा कि इस संपत्ति को कुर्क करने के लिए मंगलवार को पीएमएलए के तहत एक अस्थायी आदेश जारी किया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बताया कि बकिंघम पैलेस के पास स्थित 150 करोड़ रुपये मूल्य की यह ‘उच्च मूल्य’ वाली संपत्ति नितिन शंभुकुमार कासलीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के ‘लाभकारी स्वामित्व’ में है। 1,400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला नितिन कासलीवाल पर भारतीय बैंकों के एक कंसोर्टियम (समूह) के साथ लगभग 1,400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि एस. कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड के माध्यम से बैंकों से लिए गए ऋण को गलत तरीके से विदेशी निवेश के नाम पर भारत से बाहर भेजा गया। ईडी के बयान के अनुसार, "नितिन कासलीवाल ने बैंकों के फंड को डाइवर्ट किया और विदेशी न्यायक्षेत्रों में निजी ट्रस्टों और कंपनियों की एक जटिल संरचना के माध्यम से इन संपत्तियों को छुपाया।" विदेशी ट्रस्टों और शेल कंपनियों का जाल एजेंसी की ओर से 23 दिसंबर को की गई छापेमारी और जब्त किए गए दस्तावेजों के विश्लेषण से एक बेहद जटिल नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि कासलीवाल ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI), जर्सी और स्विट्जरलैंड जैसे टैक्स हेवन देशों में ट्रस्टों और कंपनियों का जाल बिछाया था। 23 दिसंबर को ईडी ने की थी सर्चिंग ईडी के अनुसार यह संपत्ति नितिन शंभू कुमार कासलीवाल और उनके परिवार के स्वामित्व में थी। नितिन कासलीवाल मेसर्स एस. कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं। उन पर भारतीय बैंकों के एक कंसोर्टियम के साथ करीब ₹1400 करोड़ की धोखाधड़ी करने का आरोप है, जिसे लेकर कई एफआईआर दर्ज हैं। जांच के दौरान ईडी ने 23 दिसंबर 2025 को पीएमएलए 2002 की धारा 17 के अंतर्गत सर्चिंग की थी। इस छापेमारी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। स्विटजरलैंड, जर्सी, बीवीआई में ट्रस्ट और कम्पनियां खड़ी कीं ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि नितिन कासलीवाल ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI), जर्सी और स्विट्जरलैंड जैसे टैक्स हेवन देशों में ट्रस्ट और कंपनियों का एक नेटवर्क खड़ा किया था। जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने ‘कैथरीन ट्रस्ट’ (पूर्व में सूर्य ट्रस्ट) की स्थापना की थी, जिसमें वे और उनके परिवार के सदस्य मुख्य लाभार्थी थे। यह ट्रस्ट जर्सी और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स स्थित कंपनी मेसर्स कैथरीन प्रॉपर्टी होल्डिंग लिमिटेड (सीपीएचएल) को कंट्रोल करता था, जिसके माध्यम से लंदन स्थित इस महंगी संपत्ति का स्वामित्व रखा गया था। भारत का पैसा विदेश में प्रॉपर्टी खरीदने में लगाया ईडी का आरोप है कि नितिन कासलीवाल ने बैंक धोखाधड़ी से प्राप्त धन को विदेशी निवेश के रूप में भारत से बाहर भेजा और फिर विदेशों में अचल संपत्तियां खरीदीं, जिन्हें निजी ट्रस्टों और विदेशी कंपनियों के फ्रेम के जरिए छिपाया गया। अभी इस मामले में और खुलासे होने हैं, जिसकी जांच जारी है। ईडी के अनुसार, कासलीवाल पर भारतीय बैंकों के एक संघ ने लगभग 1,400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि नितिन कासलीवाल ने एस. कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड के माध्यम से बैंकों के एक संघ के साथ धोखाधड़ी की और ‘विदेशी निवेश’ की आड़ में धनराशि को भारत से बाहर भेज दिया। इसके बाद उन्होंने विदेशों में कई अचल संपत्ति खरीदीं जिन्हें विदेशी क्षेत्रों में निजी ट्रस्ट और कंपनियों की जटिल संरचना के माध्यम से ‘छिपाया’ गया। ईडी ने इस मामले में 23 दिसंबर को छापेमारी की थी और कुछ दस्तावेज तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे।

ED की अंतिम चालान से हड़कंप: शराब घोटाले में आशीष श्रीवास्तव फंसे, निलंबन की चर्चाएं तेज

रायपुर शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 29 हजार 800 पन्नों की चार्जशीट पेश की, जिसमें आबकारी विभाग के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर आशीष श्रीवास्तव का नाम जोड़ा गया है. ईओडब्ल्यू की चार्जशीट में उनका नाम शामिल नहीं था. हालांकि अब आशीष श्रीवास्तव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. बताया जा रहा है कि सचिव कम आयुक्त आर संगीता के तीन जनवरी को छुट्टी से लौटने के बाद कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा मामले में आरोपी बनाए गए 31 अधिकारियों के खाते को सीज कर दिया गया है. कुल 38.21 करोड़ रुपए की संपत्ति सीज की गई है. साथ ही उन अफसरों की खाते कार्रवाई में शामिल हैं, जिनकी पत्नियों के कहते में संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिले हैं. बता दें कि ईओडब्ल्यू की चार्जशीट में 29 अफसर आरोपी बनाए गए थे. इनमें से 22 को 7 जुलाई 2025 को सस्पेंड कर दिया गया था. बाकी 7 रिटायर हो चुके हैं. हाल ही में आयुक्त निरंजन दास को भी गिरफ्तार किया गया है. 90 करोड़ की हुई बंदरबांट हंडी ने जांच में पाया है कि शराब घोटाले में अफसरों को करीब 90 करोड़ रुपए बांटे गए. इसमें पूर्व आयुक्त निरंजन दास को 18 करोड़ रुपए की रिश्वत दी गई. इकबाल खान को 12 करोड़, नोहर सिंह ठाकुर को 11 करोड़, नवीन प्रताप सिंह तोमर को 6.7 करोड़, राजेश जायसवाल को 5.79 करोड़, अनिमेष नेताम को 5.28 करोड़ और दिनकर वासनिक, गंभीर सिंह, अरविंद पटले, आशीष कोसम, अनंत सिंह, सौरभ बक्शी, प्रकाश पाल, गरीबपाल सिंह, मोहित जायसवाल को 2 करोड़ रुपए से अधिक की रिश्वत दी गई. आशीष श्रीवास्तव को भी 54 लाख रुपए दिए जाने के सबूत ईडी को मिले हैं. आय से अधिक संपत्ति का केस अधिकतर अफसरों के पास आय से अधिक संपत्ति मिली है. इसलिए इन पर एक केस आय से अधिक संपत्ति का भी चलेगा. इन्हें यह बताना होगा कि इतनी संपत्ति कहां से आई. क्योंकि अधिकतर अफसरों का वेतन वर्तमान में 1 से 1.5 लाख रुपए महीने है. ऐसे में 20 साल की नौकरी में औसत एक करोड़ से अधिक वेतन नहीं पा सकते. जबकि कई अफसरों के पास 5 करोड़ से अधिक की संपत्ति -मिली है.   इनकी संपत्ति अटैच कर चुकी है ईडी क्रमांक नाम अचल संपत्ति (₹) चल संपत्ति (₹) 1 नवीन प्रताप सिंह 2,44,92,905 36,19,524 2 गंभीर सिंह 1,14,15,275 49,76,561 3 मोहर सिंह ठाकुर 1,76,46,857 2,14,17,682 4 नीतू नोतानी 61,45,535 1,47,40,739 5 अरविंद पटले 1,34,06,000 92,12,729 6 प्रकाश पाल 65,41,000 70,30,866 7 अनंत कुमार सिंह 38,98,266 86,59,494 8 अश्वनी कुमार अनंत 34,08,000 8,86,559 9 अनिमेष नेताम 3,30,330 88,72,166 10 मंजूश्री केसर 34,88,000 97,17,938 11 जनार्दन सिंह कौरब 49,00,000 45,35,201 12 प्रमोद कुमार नेताम 45,23,300 28,92,454 13 देवलाल वैद्य 7,36,000 45,94,541 14 दिनकर वासनिक 45,19,582 69,12,733 15 बेदराम लहरे 48,51,000 8,42,799 16 इकबाल अहमद खान 15,61,650 49,89,359 17 मोहित जयसवाल 16,32,000 66,564 18 नितिन खंडूजा 81,81,897 3,04,391 19 जीतूराम मंडावी 30,54,324 40,85,030 20 अरलेखा राम सिदार   15,95,177 21 लखन लाल ध्रुव   1,36,51,570 22 आशीष कोसम   90,39,696 23 गरीबपाल सिंह   47,19,082 24 विजय सेन शर्मा   69,81,522 25 विकास गोस्वामी   84,595 26 सौरभ बक्शी   85,08,994 27 राजेश जायसवाल   14,11,529 28 सोनल नेताम   3,21,105 29 रामकृष्ण मिश्रा — 9,33,717 30 आशीष श्रीवास्तव 54,00,000   31 निरंजन दास 8,83,33,291   अफसरों ने कराई थी करोड़ों की एफडी क्रमांक नाम एफडी की राशि 1 अनंत सिंह ₹75.26 लाख 2 आलेख राम सिदार ₹3.90 लाख 3 देवलाल वैद्य ₹1.10 करोड़ 4 गंभीर सिंह नेताम ₹40 लाख 5 सौरभ बक्शी ₹9 लाख   अफसरों की बहाली अब कोर्ट के फैसले के बाद ही संभव सस्पेंड किए गए अफसरों को 50% वेतन दिया जाता है. नियमानुसार 90 दिन में चार्जशीट दाखिल नहीं होती है, तो वेतन 75% कर दिया जाता है. लेकिन अब ईडी ने अपनी अंतिम कंप्लेन दाखिल कर दी है, ऐसे में इन अफसरों की बहाली का रास्ता भी बंद हो गया है. अब न्यायालय से निर्णय आने के बाद ही बहाली संभव हो पाएगी. इसमें से कुछ अफसर अगले एक-दो साल में रिटायर होने वाले हैं. – वेतन लेने के लिए इन अफसरों को अब कोर्ट से अनुमति लेनी होगी, क्योंकि 5 इनके खाते ईडी ने सीज कर रखे हैं.

शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई: ED ने दाखिल किया 29,000+ पन्नों का अंतिम चालान, 82 आरोपी कटघरे में

रायपुर छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED ने आज कोर्ट में लगभग 29 हजार 800 से अधिक पन्नों का अंतिम चालान पेश किया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 82 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई है. अब मामले का ट्रायल शुरू होगा. क्या है शराब घोटाला ? छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है. ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है. दर्ज FIR में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है. इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है. ED ने अपनी जांच में पाया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था. अब तक इनकी हो चुकी है गिरफ्तारी शराब घोटाला मामले में अब तक कई बड़े नामों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, सौम्य चौरसिया शामिल हैं। इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

ED की रडार पर भूमाफिया रिजवान उर्फ राजा, टॉप-10 सूची में सबसे ऊपर, सरकार ने कसा शिकंजा

दरभंगा बिहार में नई सरकार के गठन के बाद भूमाफिया और बालू माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। इसी कड़ी में सरकार द्वारा जिन टॉप–10 भू माफियाओं की संपत्तियां जब्त करने की सूची प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भेजी गई है, उसमें दरभंगा के रिजवान उर्फ राजा का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड के मोदामपुर एकमीघाट निवासी मोहम्मद रिजवान उर्फ राजा को प्रदेश का बड़ा भूमाफिया माना जा रहा है। वह फिलहाल पिछले दो वर्षों से जेल में बंद है। रिजवान पर जमीन के अवैध कारोबार और धोखाधड़ी से जुड़े करीब 32 आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं। आरोप है कि रिजवान ने अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों से आलीशान मकान बनवाया है, जहां उसने अपने नाम के साथ जदयू के तीर निशान वाली बड़ी तस्वीर भी लगवा रखी है। इस मामले को लेकर इलाके में काफी चर्चा है। पीड़ित व्यवसायी ने लगाए गंभीर आरोप दरभंगा के बड़े व्यवसायी दिनेश दारुका ने सामने आकर रिजवान उर्फ राजा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित के अनुसार, एक जमीन के सौदे में उन्होंने 60 लाख रुपये दिए थे, जबकि उस जमीन का कुल सौदा 5 करोड़ 60 लाख रुपये में तय हुआ था। आरोप है कि इसके बावजूद उसी जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति से भी 1 करोड़ 40 लाख रुपये लिए गए। यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। सरकार द्वारा संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद पीड़ितों में यह उम्मीद जगी है कि अदालत के फैसले के बाद उन्हें उनका पैसा वापस मिल सकता है। आरोपी के भाई ने आरोपों को बताया साजिश आरोपी के भाई शम्स तबरेज ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रिजवान के नाम पर कोई संपत्ति नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जो संपत्तियां दिखाई जा रही हैं, वे पूर्वजों की हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि रिजवान उर्फ राजा जमीन के कारोबार में सक्रिय था, लेकिन उनका कहना है कि साफ-सुथरे कारोबार में भी कई बार झूठे आरोप लग जाते हैं। शम्स तबरेज ने कई मामलों को साजिश करार दिया। फिलहाल, राज्य सरकार की सख्ती और ED को भेजी गई सूची के बाद दरभंगा समेत पूरे बिहार में भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर माहौल गरमाया हुआ है।  

ED की सख्त कार्रवाई: सट्टेबाजी एप मामले में नेहा शर्मा की करोड़ों की संपत्ति जब्त

भागलपुर सट्टेबाजी एप और एक्स-बेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भागलपुर से तीन बार विधायक रह चुके अजीत शर्मा की बेटी तथा बॉलीवुड अभिनेत्री नेहा शर्मा की 1.26 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। यह कार्रवाई पीएमएलए के तहत जारी अंतिम आदेश के बाद की गई है। ईडी की जांच में सामने आया है कि अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी ऐप आईबेट भारत में बिना किसी वैधानिक अनुमति के संचालित किया जा रहा था। इस ऐप के प्रचार-प्रसार में फिल्म जगत से जुड़ी कई अभिनेत्रियों की भूमिका सामने आई है। नेहा शर्मा पर भी मीडिया, विज्ञापन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए इस ऐप का प्रमोशन करने और उससे प्राप्त राशि को मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से निवेश करने का आरोप है। ईडी सूत्रों के अनुसार, ऐप के प्रचार से मिली रकम को अलग-अलग माध्यमों से निवेश किया गया, जिसके बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई करते हुए 1.26 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। नेहा शर्मा मूल रूप से बिहार के भागलपुर की रहने वाली हैं। उनके पिता अजीत शर्मा कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता रहे हैं और भागलपुर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अजीत शर्मा को भागलपुर सीट से हार का सामना करना पड़ा था, और चुनाव परिणाम के महज एक माह बाद ईडी की यह कार्रवाई सामने आई है। हालांकि, अब तक ईडी की टीम ने भागलपुर में कोई छापेमारी नहीं की है। 50 करोड़ की संपत्ति का दावा सूत्रों के मुताबिक, अभिनेत्री नेहा शर्मा की कुल संपत्ति करीब 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मुंबई में उनके फ्लैट हैं, जबकि भागलपुर में भी उनके नाम से जमीन होने की जानकारी है। फिल्मों और वेब सीरीज के अलावा उनकी आय का बड़ा स्रोत ब्रांड एंडोर्समेंट, सोशल मीडिया प्रमोशन और फैशन ब्रांडिंग है। बताया जाता है कि वह एक फिल्म साइन करने के लिए लगभग एक करोड़ रुपये तक फीस लेती हैं। भागलपुर से बॉलीवुड तक का सफर नेहा शर्मा का जन्म 21 नवंबर 1987 को बिहार के भागलपुर में हुआ था। उन्होंने महेश भट्ट की फिल्म ‘क्रूक’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कई हिंदी फिल्मों और वेब सीरीज में काम किया। उनकी पहचान को नई मजबूती अजय देवगन अभिनीत फिल्म ‘तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर’ (2020) से मिली, जिसमें उन्होंने छोटे लेकिन प्रभावशाली किरदार निभाया। नेहा शर्मा नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान अपने पिता अजीत शर्मा के समर्थन में रोड शो में शामिल होने के लिए भागलपुर आई थीं और कांग्रेस प्रत्याशी के लिए वोट की अपील की थी।

ED का बड़ा एक्शन: 1xBet ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े सेलिब्रिटी के संपत्ति पर कार्रवाई

नई दिल्ली ऑनलाइन सट्टेबाजी 1x बेट ऐप मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह और रॉबिन उथप्पा समेत कई बॉलीवुड सेलिब्रिटिज की करोड़ों की संपत्ति जब्त कर ली है. 1xBet मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने नए प्रोविजनल अटैचमेंट किए हैं, जिन लोगों की संपत्तियां अटैच की गई हैं, उनमें युवराज सिंह, रॉबिन उथप्पा, उर्वशी रौतेला, सोनू सूद, मिमी चक्रवर्ती, अंकुश हाजरा और नेहा शर्मा के नाम शामिल हैं. – युवराज सिंह- 2.5 करोड़ रुपये – रॉबिन उथप्पा- 8.26 लाख रुपये – उर्वशी रोतैला- 2.02 करोड़ (यह संपत्ति  उर्वशी की मां के नाम पर रजिस्टर्ड है) – सोनू सूद- 1 करोड़ रुपये – मिमी चक्रबर्ती- 59 लाख रुपये – अंकुश हाजरा- 47.20 लाख रुपये – नेहा शर्मा- 1.26 करोड़ रुपये यह जांच कथित अवैध बेटिंग ऐप्स से जुड़ी है, जिन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने लोगों और निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी की है या बड़े पैमाने पर टैक्स की चोरी की है. कंपनी का दावा है कि 1xBet एक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त बुकी है, जो पिछले 18 सालों से बेटिंग इंडस्ट्री में है. इसके ग्राहक हजारों खेल आयोजनों पर दांव लगा सकते हैं. कंपनी की वेबसाइट और ऐप 70 भाषाओं में उपलब्ध है. आज की कार्रवाई में ED ने कुल 7.93 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की है. इससे पहले इस मामले में ईडी ने शिखर धवन की 4.55 करोड़ रुपये की संपत्तियां और सुरेश रैना की 6.64 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं. अब तक 1xBet मामले में ईडी ने कुल 19.07 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच कर चुका है.

MLM फ्रॉड पर ED की सख्ती, रांची में 307 करोड़ के घोटाले में मैक्सिजोन टच के कर्ताधर्ता अरेस्ट

रांची झारखंड के रांची जोनल कार्यालय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 307 करोड़ रुपये के मल्टी लेवल मार्किटंग (एमएलएम) घोटाले में बड़ी कारर्वाई करते हुए एम/एस मैक्सिजोन टच प्रा. लि. के निदेशक चंदर भूषण सिंह और उनकी पत्नी प्रियांका सिंह को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।          21 से अधिक बैंक खातों में जमा कराए गए 307 करोड़ रुपये ईडी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रांची जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह गिरफ्तारी की है। आरोप है कि दोनों ने सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़ी एक बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया और अवैध तरीके से करोड़ों रुपये की कमाई की। ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने एक फर्जी मल्टी-लेवल मार्किटंग योजना चलाई, जिसमें आम लोगों को हर महीने ऊंचे रिटर्न और आकर्षक रेफरल लाभ का लालच दिया गया। इस योजना के माध्यम से 21 से अधिक बैंक खातों में करीब 307 करोड़ रुपये की अवैध राशि जमा कराई गई, जिसे अपराध से अर्जित धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) बताया गया है। तीन साल से फरार थे आरोपी, फर्जी पहचान का किया इस्तेमाल        जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि चंदर भूषण सिंह और प्रियांका सिंह इस अवैध धन के साथ फरार हो गए थे। पिछले तीन वर्षों से वे झारखंड, राजस्थान और असम की पुलिस समेत अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों से जानबूझकर बचते रहे। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने लगातार अपने ठिकाने बदले और फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। ईडी के अनुसार, आरोपी ने‘दीपक सिंह'जैसे छद्म नामों का भी प्रयोग किया। बेनामी लेनदेन के जरिए रियल एस्टेट में किया गया निवेश       ईडी ने बताया कि आरोपियों ने अवैध धन को सफेद करने के लिए बेनामी लेनदेन के जरिए कई रियल एस्टेट संपत्तियां खरीदीं और बाद में उन्हें नकद में बदल दिया। इस मामले की जांच कई राज्यों-झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक-में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। जांच के सिलसिले में ईडी ने 16 सितंबर 2025 और 3 दिसंबर 2025 को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, वैशाली (बिहार), मेरठ, रांची और देहरादून में कई ठिकानों पर पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया। इन छापों के दौरान नकली पहचान पत्र, हस्तलिखित नोट्स और डायरियां, करीब 10 लाख रुपये से अधिक की नकदी, सहयोगियों की सूची, विभिन्न संस्थाओं की खाता पुस्तिकाएं, लैपटॉप और मोबाइल फोन, लगभग 15 हजार अमेरिकी डॉलर मूल्य की क्रिप्टो करेंसी तथा कई रियल एस्टेट संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए। ईडी हिरासत में भेजे गए आरोपी        ईडी ने बताया कि आरोपी चंदर भूषण सिंह को विशेष पीएमएलए न्यायालय, रांची के आदेश पर पांच दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है और ईडी को इस घोटाले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी आशंका है।  

फर्जी कफ सीरप माफिया बेनकाब: झारखंड समेत कई राज्यों में ED की बड़ी कार्रवाई

रांची   प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कथित अवैध कफ सिरप के निर्माता से जुड़े धन शोधन के मामले में तीन राज्यों के 25 ठिकानों पर छापे मारे। ये छापे आज सुबह 7:30 बजे शुरू हुए और मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल, उसके सहयोगी आलोक सिंह और अमित सिंह, तथा चाटर्डर् अकाउंटेंट विष्णु अग्रवाल से संबंधित परिसरों पर कार्रवाई की गयी। ईडी उन आरोपी कफ सिरप निर्माताओं के ठिकानों पर भी कार्रवाई कर रही है जिन पर धोखाधड़ी करके कफ सिरप की आपूर्ति की और इसके अवैध व्यापार को बढ़ावा दिया। ये छापे उत्तर प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर, सहारनपुर तथा पड़ोसी राज्य झारखंड की राजधानी रांची तथा गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में मारे गए। सूत्रों के अनुसार, ईडी की टीमें इन विभिन्न स्थानों पर वित्तीय लेनदेन से संबंधित दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉडर् और कई अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। गौरतलब है कि ईडी ने पिछले दो महीनों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों लखनऊ, वाराणसी, सोनभद्र, सहारनपुर और गाजियाबाद में दर्ज 30 से अधिक प्राथमिकियों के आधार पर यह मामला दर्ज किया है। ये मामले कोडीन-आधारित कफ सिरप के अवैध भंडारण, परिवहन, व्यापार और सीमा पार तस्करी से संबंधित हैं। इस काले व्यापार से करीब एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की आय होने का अंदाजा लगाया गया है। ईडी अधिकारियों ने बताया कि मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल फरार है और माना जा रहा है कि वह दुबई में है। उसके पिता भोला प्रसाद को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस अब तक कुल 32 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की समन्वित जांच के लिए एक विशेष जांच दल का भी गठन किया है।  

SC का बड़ा आदेश: ED, CBI और पुलिस को गिरफ्तारी से पहले बताना होगा कारण

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए कहा कि अब किसी भी नागरिक की गिरफ्तारी से पहले पुलिस, ED, CBI या कोई भी जांच एजेंसी आरोपी को लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी मनमाने ढंग से नहीं हो सकती, बल्कि उसके पीछे ठोस, स्पष्ट और कानूनी आधार होना जरूरी है। अदालत ने कहा कि गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को यह जानने का संवैधानिक अधिकार है कि उसे किस मामले में और किस धारा के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है। इसके साथ ही एजेंसी को गिरफ्तारी के समय लिखित नोटिस/गिरफ्तारी मेमो देना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पुलिस, ईडी, सीबीआई सहित सभी जांच एजेंसियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले या गिरफ्तार करने के तुरंत बाद, उसे उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य होगा। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि यदि गिरफ्तारी की वजह आरोपी को उसकी भाषा में लिखित रूप से नहीं बताई गई, तो ऐसी गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा। बता दें कि यह फैसला जुलाई 2024 में मुंबई में हुए बहुचर्चित बीएमडब्ल्यू हिट-एंड-रन केस से जुड़े ‘मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र सरकार’ मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी से पहले या तुरंत बाद उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताना आवश्यक है। इस फैसले में न्यायमूर्ति मसीह ने 52 पन्नों का विस्तृत निर्णय लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मौलिक सुरक्षा है।अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को कारणों की जानकारी ‘यथाशीघ्र’ दी जानी चाहिए, ताकि आरोपी को अपने अधिकारों और कानूनी स्थिति का स्पष्ट ज्ञान हो सके। अदालत ने अपने फैसले में निम्न प्रमुख बिंदु निर्धारित किए हैं गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार बताना संविधान का आदेश है, और यह किसी भी परिस्थिति में टाला नहीं जा सकता। गिरफ्तारी का कारण लिखित रूप में दिया जाना अनिवार्य होगा, और वह भाषा वही होनी चाहिए जिसे आरोपी समझ सके। यदि गिरफ्तारी के समय अधिकारी तत्काल लिखित कारण देने में असमर्थ हो, तो पहले मौखिक रूप से कारण बताए जाएं, और बाद में लिखित नोटिस, रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने से कम से कम दो घंटे पहले, आरोपी को सौंपा जाना चाहिए। यदि गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में नहीं बताए गए, तो गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा, और आरोपी को रिहा होने का अधिकार होगा। देशभर में लागू होगा आदेश सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस आदेश की प्रति देश के सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजी जाएगी। इससे सुनिश्चित होगा कि यह फैसला पूरे भारत में तुरंत प्रभाव से लागू हो।