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उत्तर प्रदेश में बिजली हुई महंगी, अब हर महीने ज्यादा ढीली होगी जेब

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद बुरी खबर है। प्रदेश में भीषण गर्मी, भारी बिजली कटौती और किल्लत के बीच अब जनता पर महंगाई की एक और मार पड़ने वाली है। यूपी पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) ने राज्य में बिजली दरों को महंगा करने का एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। इसके तहत अब उपभोक्ताओं के बिजली बिल में सीधे 10% का इजाफा होने जा रहा है। ‘ईंधन अधिभार’ के नाम पर वसूला जाएगा अतिरिक्त शुल्क जानकारी के मुताबिक, बिजली दरों में यह बढ़ोतरी ‘ईंधन अधिभार’ (Fuel Surcharge) के नाम पर की जा रही है। इसका मतलब यह है कि उपभोक्ताओं को अब अपनी सामान्य बिजली खपत के लिए तय दर से 10% राशि अलग से (अतिरिक्त शुल्क के रूप में) चुकानी होगी। पावर कॉरपोरेशन के इस फैसले से प्रदेश के करोड़ों घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क बढ़ा सामने आया है कि, अगले महीने से उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगने जा रहा है. यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिजली बिल में 10 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क वसूलने का फैसला किया है. यह राशि फ्यूल सरचार्ज पर बढ़ोतरी के कारण बढ़ी है. जारी आदेश के अनुसार, बढ़ा हुआ शुल्क जून महीने के बिजली बिल के साथ जोड़ा जाएगा. यानी उपभोक्ताओं को अपने नियमित बिजली बिल के अलावा 10 फीसदी अतिरिक्त राशि भी चुकानी होगी।  फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने के कारण बढ़ोतरी इस फैसले का असर प्रदेश के लाखों घरेलू, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. बिजली विभाग का कहना है कि बिजली उत्पादन और खरीद में आने वाली अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए फ्यूल सरचार्ज लगाया जा रहा है. इसके तहत उपभोक्ताओं के बिल में अलग से शुल्क जोड़ा जाएगा।  कई इलाकों में बिजली कटौती से जूझ रहे हैं लोग हालांकि ऐसे समय में बिजली दरों में बढ़ोतरी का फैसला आया है, जब प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली कटौती और आपूर्ति संबंधी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं. गर्मी के मौसम में बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ता पहले से ही बिजली संकट और अनियमित आपूर्ति की समस्या से जूझ रहे हैं. ऐसे में बिजली बिल में 10 फीसदी अतिरिक्त भार पड़ने से आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।  जून के बिल के साथ जुड़कर आएगी बढ़ी हुई दरें राहत की उम्मीद लगाए बैठे उपभोक्ताओं को यह झटका बहुत जल्द लगने वाला है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, बिजली का यह बढ़ा हुआ दाम आगामी जून के बिल के साथ जुड़कर आएगा। यानी जून महीने में आप जो बिजली इस्तेमाल करेंगे, उसका बिल 10% अतिरिक्त शुल्क के साथ आपके हाथ में आएगा। भारी कटौती और किल्लत के बीच जनता को झटका एक तरफ जहाँ उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इस समय भीषण गर्मी के कारण बिजली की भारी किल्लत देखी जा रही है और अघोषित बिजली कटौती से लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ बिजली की दरों में इस तरह की बढ़ोतरी ने आम जनता की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। इस फैसले के सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

CM मोहन यादव ने किए माता वैष्णो देवी के दर्शन, श्राइन बोर्ड की व्यवस्था की जमकर तारीफ

भोपाल  मध्य प्रदेश के महाकाल, ओंकारेश्वर जैसे तीर्थ स्थानों पर क्राउड मैनेजमेंट का पूरा प्लान तैयार करने जम्मू के वैष्णो देवी मंदिर के भीड़ प्रबंधन का अध्ययन किया जाएगा. कटरा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बताया, " हमारे साथ पूरा एक प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जो यहां श्रद्धालुओं के दर्शन से लेकर मंदिर ट्रस्ट की सभी व्यवस्थाओं का अध्ययन कर रहा है. जिस पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और आगे मध्य प्रदेश के तीर्थ स्थलों में इसे लागू किया जाएगा।  माता वैष्णों देवी के दरबार में पहुंचे मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के कटरा पहुंचे. वे यहां पर माता वैष्णों देवी के दर्शन तो करेंगे ही, लेकिन यहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन भी होगा. उन्होंने बताया कि वे यहां माता वैष्णों के दर्शन के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन सहित सभी व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे. इन चीजों पर अध्ययन करने के लिए उनके साथ प्रतिनिधिमंडल भी है. केवल वैष्णों देवी नहीं देश के अलग-अलग तीर्थ स्थलों में किस तरह के प्रबंध है, ये जानने के लिए इसी तरह के अध्ययन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई अन्य प्रतिनिधिमंडल देश के अलग-अलग हिस्सों में भी भेजे हैं।  बताई दौरे की वजह कटरा पहुंचने पर सीएम डॉ. यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हम एक प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आए हैं, ताकि महाकाल मंदिर, महाकालेश्वर देवस्थान, ओंकारेश्वर देवस्थान तथा भोजशाला जैसे प्रमुख धार्मिक संस्थानों का अध्ययन किया जा सके। सीएम ने आगे बताया कि हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला को मां वाग्देवी के मंदिर की मान्यता दी है। हमारा उद्देश्य यह समझना है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन, जनसुविधाओं और धार्मिक सेवाओं के लिए एक उत्कृष्ट एवं प्रभावी मॉडल किस प्रकार विकसित किया जा सकता है। बताई दौरे की वजह कटरा पहुंचने पर सीएम डॉ. यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हम एक प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आए हैं, ताकि महाकाल मंदिर, महाकालेश्वर देवस्थान, ओंकारेश्वर देवस्थान तथा भोजशाला जैसे प्रमुख धार्मिक संस्थानों का अध्ययन किया जा सके। सीएम ने आगे बताया कि हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला को मां वाग्देवी के मंदिर की मान्यता दी है। हमारा उद्देश्य यह समझना है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन, जनसुविधाओं और धार्मिक सेवाओं के लिए एक उत्कृष्ट एवं प्रभावी मॉडल किस प्रकार विकसित किया जा सकता है। सीएम यादव ने बताया कि वह अधिकारियों के एक दल के साथ यहां आए हैं ताकि वैष्णो देवी मंदिर की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जा सके और इसे मध्य प्रदेश के प्रमुख मंदिरों के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि उनके राज्य में भी प्रमुख मंदिरों में भीड़ प्रबंधन, सार्वजनिक सेवाओं और श्रद्धालु सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के अलग-अलग धार्मिक स्थलों का अध्ययन कर एक प्रभावी प्रबंधन मॉडल तैयार किया जा रहा है। वैष्णो देवी मंदिर में बेहतर व्यवस्थाओं और सुचारू दर्शन व्यवस्था की उन्होंने सराहना की। मुख्यमंत्री ने बताया कि श्राइन बोर्ड द्वारा यहां शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कई संस्थान भी संचालित किए जा रहे हैं, जो श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह का समन्वित मॉडल अन्य मंदिरों में भी लागू करने की योजना है। इससे पहले हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक फैसले का भी उल्लेख किया गया जिसमें एक धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में ऐतिहासिक निर्णय दिया गया था। धार्मिक संस्थानों का होगा अध्ययन मीडिया से बात करते हुएमुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, " हम एक प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आए हैं, जिससे महाकाल मंदिर, महाकालेश्वर देवस्थान, ओंकारेश्वर देवस्थान व भोजशाला जैसे प्रमुख धार्मिक संस्थानों का अध्ययन किया जा सके. हाल ही में उच्च न्यायालय ने भोजशाला को मां वाग्देवी के मंदिर की मान्यता दी है. हमारा उद्देश्य यह समझना है कि धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन, जनसुविधाओं और धार्मिक सेवाओं के लिए कैसे एक मॉडल तैयार हो सके. जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाई जा सके।  बाकी तीर्थ स्थलों में भी जनसुविधाओं की लेंगे जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, "देश के अलग-अलग हिस्सों में भी जो दल गए हैं, वे अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट सौपेंगे. उसके हिसाब से मध्य प्रदेश के तीर्थ स्थलों में प्लान लागू होगा." उन्होंने कहा, "मुझे जानकारी दी गई है कि यहां मंदिर प्रबंधन के साथ-साथ एक विश्वविद्यालय, एक मेडिकल कॉलेज व अनेक सेवा-प्रधान संस्थाएं भी संचालित की जा रही हैं. हमारी सरकार भी अब रिलीजियस टूरिज्म के नए सर्किट तैयार कर उन्हें विकसित करने पर जोर दे रही है।   

तेल की कीमतों ने चौंकाया! पेट्रोल 115.69 और डीजल 100.92 रुपये पहुंचा, अपने शहर का रेट करें चेक

नई दिल्ली  पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों का ऐलान आज सुबह 6 बजे हो गया है। राहत की बात यह है कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के रेट में आज फिर कोई बढ़ोतरी नहीं की है। आखिरी बार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के द्वारा पिछले हफ्ते शनिवार को इजाफा किया गया था। इसके बाद से ही दाम स्थिर बने हुए हैं। इस बीच इंटरनेशनल मार्केट से अच्छी खबर आई है। कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, युद्ध के पूर्व स्तर से यह अब भी काफी अधिक है। सबसे महंगा पेट्रोल और डीजल कहां?  26 मई 2026 के रेट के अनुसार हैदराबाद में पेट्रोल सबसे अधिक रेट पर बिक रहा है। इस शहर में लोगों को एक लीटर पेट्रोल के लिए 115.69 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, डीजल के लिए तिरुअनंतपुरम् में लोगों को 115.49 रुपये प्रति लीटर देने पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ चंडीगढ़ में पेट्रोल का रेट 98.10 रुपये प्रति लीटर है। जोकि दिल्ली सहित अन्य शहरों की तुलना में काफी कम है। बता दें, भुवनेश्वर में डीजल का रेट 100.92 रुपये प्रति लीटर है। देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल का क्या है रेट?  दिल्ली – 102.12 रुपये मुंबई – 111.18 रुपये कोलकाता – 113.47 रुपये चेन्नई – 107.77 रुपये गुरुग्राम – 102.77 रुपये नोएडा – 102.12 रुपये बेंगलुरू – 110.93 रुपये भुवनेश्वर – 109.92 रुपये चंडीगढ़ – 98.10 रुपये हैदराबाद – 115.69 रुपये जयपुर – 112.66 रुपये लखनऊ – 102.05 रुपये पटना – 113.35 रुपये तिरुअनंतपुरम् – 115.49 रुपये डीजल का क्या चल रहा है रेट?  नई दिल्ली – 95.20 रुपये मुंबई – 97.83 रुपये कोलकाता – 99.82 रुपये चेन्नई – 99.55 रुपये गुरुग्राम – 95.444 रुपये नोएडा – 95.56 रुपये बेंगलुरू – 98.80 रुपये भुवनेश्वर – 100.92 रुपये चंडीगढ़ – 86.09 रुपये हैदराबाद – 103.82 रुपये जयपुर – 97.79 रुपये लखनऊ – 95.55 रुपये पटना – 99.36 रुपये तिरुअनंतपुरम् – 104.40 रुपये 4 बार हो सका इजाफा  मई के महीने में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार इजाफा हो गया है। इस दौरान पेट्रोल और डीजल का रेट करीब 7.5 रुपये बढ़ गया है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बाद से तेल कंपनियों पर कीमतों को बढ़ाने का काफी दबाव था। कीमतों में इजाफे से पहले तेल कंपनियों को हर दिन 1000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा। जोकि अब 500 करोड़ रुपये से कम हो गया है। सरकार ने भी कीमतों को संभालने की बहुत कोशिश की। एक्साइज ड्यूटी में कटौती भी की गई। लेकिन जब इंटरनेशनल मार्केट में स्थिति सामान्य नहीं हुई उसके बाद तेल कंपनियों को यह फैसला लेना पड़ा।

पंजाब में फिर चला आम आदमी पार्टी का जादू, 8 में से 5 नगर निगमों पर किया कब्जा

चंडीगढ़  पंजाब के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति की दिशा तय करने के संकेत दे दिए हैं. चुनाव नतीजों में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) सबसे मजबूत दल के रूप में उभरकर सामने आई है, जबकि कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) कुछ कम सफल रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों का असर आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति और राजनीतिक समीकरणों पर साफ दिखाई देगा।  नगर निगम, पंचायतों और परिषदों में AAP का दमदार प्रदर्शन शाम 8 बजे तक उपलब्ध नतीजों और रुझानों के अनुसार, AAP ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया. आठ नगर निगमों में से पांच पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा जमाया. पार्टी ने बरनाला, मोहाली, मोगा, बठिंडा और बटाला नगर निगमों में जीत हासिल की. वहीं कांग्रेस को कपूरथला नगर निगम में सफलता मिली. भाजपा ने अबोहर नगर निगम में जीत दर्ज की, जबकि पठानकोट नगर निगम में वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।  75 नगर परिषदों में से 40 पर पार्टी की जीत नगर परिषद चुनावों में भी AAP ने बढ़त बनाए रखी. राज्य की 75 नगर परिषदों में से 40 पर पार्टी ने जीत हासिल की. कांग्रेस 18 परिषदों तक सीमित रही, जबकि शिरोमणि अकाली दल को 10 परिषदों में जीत मिली. भाजपा के खाते में चार नगर परिषदें गईं, जबकि तीन परिषदों में निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।  11 नगर पंचायतों पर काबिज आम आदमी पार्टी नगर पंचायतों के नतीजों में भी आम आदमी पार्टी सबसे आगे रही. जिन 20 नगर पंचायतों में मतदान हुआ था, उनमें से 11 पर AAP ने जीत दर्ज की. कांग्रेस को पांच, शिरोमणि अकाली दल को दो और भाजपा को एक नगर पंचायत में सफलता मिली. एक सीट अन्य उम्मीदवारों के खाते में गई।  अगर सभी 104 निकायों के कुल प्रदर्शन को देखा जाए तो आम आदमी पार्टी ने 56 निकायों में जीत हासिल कर अपना दबदबा कायम रखा है. कांग्रेस 24 निकायों में जीत दर्ज करने में सफल रही, जबकि शिरोमणि अकाली दल के खाते में 12 निकाय गए. भाजपा ने 6 निकायों में जीत हासिल की. वहीं पठानकोट नगर निगम में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।  वार्ड स्तर पर भी आम आदमी पार्टी का दबदबा वार्ड स्तर पर भी आम आदमी पार्टी का दबदबा देखने को मिला. राज्य के सभी 1,977 वार्डों के नतीजे घोषित हो चुके हैं. इनमें आम आदमी पार्टी ने 958 वार्डों में जीत दर्ज कर सबसे बड़ा दल बनने में सफलता हासिल की. कांग्रेस 397 वार्डों के साथ दूसरे स्थान पर रही. शिरोमणि अकाली दल को 192 वार्डों में जीत मिली, जबकि भाजपा ने 172 वार्डों पर कब्जा जमाया. वहीं 251 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के उम्मीदवारों ने 7 वार्डों में जीत दर्ज की. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निकाय चुनावों के ये नतीजे 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं. आम आदमी पार्टी इन परिणामों को अपनी सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर के रूप में पेश कर सकती है. वहीं कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा के लिए यह परिणाम संगठन को मजबूत करने और नई रणनीति तैयार करने का अवसर भी माना जा रहा है. ऐसे में पंजाब की राजनीति में आने वाले महीनों में मुकाबला और अधिक दिलचस्प होने के आसार हैं।  कहां किसने दर्ज की जीत नगर निगम -8 आम आदमी पार्टी – 5 (बरनाला, मोहाली, मोगा, भटिंडा, बटाला) कांग्रेस – 1 (कपूरथला जीते) बीजेपी – 1  (अबोहर) पठानकोट – बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी लेकिन बहुमत नहीं। नगर काउंसिल – 75 आम आदमी पार्टी – 40 कांग्रेस – 18 शिरोमणि अकाली दल – 10 बीजेपी – 4 अन्य – 3 नगर पंचायत – 21 (एक पर कानूनी कारणों से चुनाव नहीं) – 20 आम आदमी पार्टी – 11 कांग्रेस – 5 शिरोमणि अकाली दल – 2 बीजेपी -1 अन्य -1 ओवरऑल पंजाब कुल निकाय – 104 आम आदमी पार्टी – 56 कांग्रेस – 24 बीजेपी – 6 शिरोमणि अकाली दल – 12 कुल वॉर्ड – 1977 नतीजे -1977 आम आदमी पार्टी – 958 कांग्रेस – 397 बीजेपी – 172 अकाली दल – 192 निर्दलीय – 251 बीएसपी – 7

होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव, ट्रंप बोले- शांति समझौता करीब; ईरान ने कहा- सब झूठ

तेहरान  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओऱ से ईरान के साथ संभावित समझौते का दावा किए जाने के तुरंत बाद ईरानी मिलिट्री के जुड़ी मीडिया ने उनके बयानों को खारिज कर दिया. ट्रंप ने कहा था कि तेहरान बिना किसी शुल्क के होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए 'मजबूर' हो गया है, लेकिन ईरान ने इसे तथ्यों और झूठ का मिश्रण बताते हुए कहा कि यह तेहरान में विचाराधीन समझौते का सही ड्रॉफ्ट नहीं है।  'काल्पनिक जीत दिखाने की कोशिश में ट्रंप' ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी समाचार एजेंसी फर्स न्यूज ने वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा कि ट्रंप के बयान "काल्पनिक जीत दिखाने की कोशिश" हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक, 'Commitment for Commitment' नाम से प्रस्तावित समझौता ईरान में अंतिम मंजूरी के चरण में है, हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. व्हाइट हाउस में वेस्ट एशिया क्राइसिस को लेकर एक अहम बैठक में शामिल होने से पहले ट्रंप ने दावा किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लगी पाबंदियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं और समुद्री यातायात सामान्य होने लगा है. यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।  क्या है अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा? ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'ईरान तुरंत बचे हुए बारूदी सुरंगों को हटाएगा या निष्क्रिय करेगा. हमारी अभूतपूर्व नौसैनिक नाकेबंदी अब हटाई जा रही है और जलडमरूमध्य में फंसे जहाज अपने घर लौटने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं.' उन्होंने यह भी कहा कि 'अगली सूचना तक कोई धनराशि का आदान-प्रदान नहीं होगा' और कुछ अन्य मुद्दों पर भी सहमति बन चुकी है।  'होर्मुज को फिर खोलने की प्रोसेस ईरान की शर्तों पर' हालांकि ईरानी मीडिया ने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की प्रक्रिया ईरान की शर्तों के अनुसार होगी. इसमें जहाजों की निगरानी, निरीक्षण, समुद्री सेवाएं और सुरक्षा संबंधी उपाय शामिल हो सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि बिना किसी शुल्क या शर्त के जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति बनने का ट्रंप का दावा गलत है और मसौदा समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।  फ्रीज संपत्तियों को जारी करना भी ड्राफ्ट का हिस्सा फर्स न्यूज ने ट्रंप के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान अपने परमाणु सामग्री भंडार को नष्ट करेगा. रिपोर्ट के अनुसार, जानकार सूत्रों ने इस दावे को पूरी तरह निराधार बताया है और कहा है कि समझौता ज्ञापन (MoU) में ऐसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते के ड्राफ्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान की लगभग 12 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को तत्काल जारी करना है. तेहरान का कहना है कि जब तक यह राशि जारी नहीं की जाती, तब तक वह बातचीत के अगले स्टेप में आगे नहीं बढ़ेगा।  इसके अलावा लेबनान में पूर्ण युद्धविराम, जो हिज्बुल्लाह के रुख के अनुरूप हो, भी बातचीत का एक अहम मुद्दा बताया गया है. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब उसकी प्रमुख शर्तें पूरी होंगी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि किसी भी अंतिम समझौते का आधार ईरान की "रेड लाइन्स" और अमेरिका के प्रति उसका 'पूर्ण अविश्वास' रहेगा।   

मान सरकार का बड़ा कदम! पंजाब में ग्रुप C-D भर्ती से खत्म हो सकता है ठेकेदारी सिस्टम

चंडीगढ़  पंजाब कैबिनेट की एक अहम बैठक दोपहर 12 बजे होगी। बैठक में ग्रुप सी और डी में ठेकेदारी सिस्टम खत्म करने पर फैसला लिया जा सकता है। इस मीटिंग में ग्रुप-सी और डी में ठेकेदारी सिस्टम को खत्म करने के फैसले पर मुहर लग सकती है। इसके बाद सरकार अपने सभी विभागों में खुद ही भर्तियां करेगी। पंजाब की मौजूदा सरकार शुरू से ही ठेका मुलाजिमों को लेकर गंभीर रही है। 22 मार्च 2022 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शपथ ग्रहण करने के कुछ ही दिनों बाद ही ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के 35 हजार कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य सचिव को इस संबंध में मसौदा (ड्राफ्ट बिल) तैयार करने के निर्देश दिए थे। फिर 5 सितंबर 2022 को पंजाब कैबिनेट ने संविदा शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को नियमित करने संबंधी कल्याणकारी नीति को औपचारिक मंजूरी दी। वहीं, 21 फरवरी 2023 को पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक में 14,417 संविदा कर्मचारियों की सेवाओं को तत्काल प्रभाव से नियमित करने के प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी प्रदान की गई। पंजाब सरकार ने अपने 4 वर्ष के कार्यकाल में कुल 65,264 युवाओं को पक्की सरकारी नौकरियां देने का दावा किया है। सरकार का दावा है कि उसके कार्यकाल के दौरान औसतन 45 युवाओं को प्रतिदिन सरकारी नौकरी मिली है। सरकारी नौकरियों के साथ-साथ औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देकर राज्य में करीब साढ़े 5 लाख निजी रोजगार के अवसर भी सृजित किए गए हैं।

बुजुर्गों के कल्याण और संरक्षण के लिए सरकार लगातार कर रही पहल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को नई दिशा और गति प्रदान की गई है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित योजनाएं और पहलें इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार उनके सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा एवं अधिकारों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। बदलते सामाजिक परिवेश में जहां पारिवारिक संरचना में निरंतर परिवर्तन हो रहा है, वहीं वरिष्ठजनों की देखभाल और उनके अधिकारों की रक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। कानूनी संरक्षण: अधिकारों की मजबूत नींव वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह अधिनियम वरिष्ठजनों को यह अधिकार देता है कि यदि वे स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, तो वे अपने बच्चों या संबंधितों से भरण-पोषण प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश में इस अधिनियम के तहत प्रत्येक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय को भरण-पोषण अधिकरण तथा जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय को अपील अधिकरण घोषित किया गया है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय विभाग के जिला अधिकारियों को भरण-पोषण अधिकारी के रूप में नामित किया गया है, जो इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से संचालित करते हैं। अधिनियम के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा या परित्याग को दंडनीय अपराध माना गया है, जिससे समाज में उनके प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही, भरण-पोषण हेतु मासिक राशि निर्धारित करने का प्रावधान भी वरिष्ठजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। संस्थागत व्यवस्था: आश्रय और देखभाल प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रय और देखभाल की सुदृढ़ व्यवस्था की गई है। विभिन्न संस्थाओं एवं स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित वरिष्ठ आश्रमों में जरूरतमंद वरिष्ठजनों को आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं एवं मनोरंजन की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसी कड़ी में भोपाल में विकसित “संध्या छाया” वरिष्ठजन निवास एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर वरिष्ठजनों को सुरक्षित, आरामदायक एवं गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करता है। यहां वातानुकूलित कक्ष, लाइब्रेरी, फिजियोथेरेपी, चिकित्सा सुविधाएं एवं मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल दर्शाती है कि राज्य शासन वरिष्ठजनों को केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। योजनाएं और कार्यक्रम: समग्र विकास की दिशा भारत सरकार की अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से भी राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस योजना के तहत स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, आजीविका, सामाजिक सहभागिता एवं जागरूकता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वरिष्ठजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अंतर-पीढ़ी संवाद, सामूहिक गतिविधियां और कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी सक्रियता बनी रहती है, बल्कि समाज में उनके अनुभवों का लाभ भी नई पीढ़ी को मिलता है। हेल्पलाइन और सहायता तंत्र: हर समय साथ वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए Elder Line 14567 जैसी पहल अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यह टोल-फ्री हेल्पलाइन वरिष्ठजनों को जानकारी, परामर्श, भावनात्मक सहयोग एवं आपात स्थिति में सहायता प्रदान करती है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से वरिष्ठजन अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं और उन्हें त्वरित समाधान प्राप्त होता है। यह सेवा न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाती है कि शासन हर समय उनके साथ खड़ा है। सम्मान और सामाजिक स्वीकृति वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर “शतायु सम्मान” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठजनों को सम्मानित किया जाता है। यह पहल समाज में वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान और प्रेरणा का वातावरण तैयार करती है। नवाचार और सुधार राज्य शासन द्वारा समय-समय पर नियमों में संशोधन कर व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, शासकीय कर्मचारियों द्वारा माता-पिता की उपेक्षा करने पर उनके वेतन से भरण-पोषण भत्ता काटकर सीधे माता-पिता के खाते में जमा करने का प्रावधान एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम है। यह व्यवस्था न केवल वरिष्ठजनों के अधिकारों की रक्षा करती है, बल्कि परिवारों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी बढ़ावा देती है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम एक समग्र, संवेदनशील और प्रभावी तंत्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं। कानूनी संरक्षण, संस्थागत व्यवस्थाएं, योजनाएं, हेल्पलाइन सेवाएं और सम्मान कार्यक्रम—इन सभी प्रयासों ने मिलकर वरिष्ठजनों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाया है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मध्यप्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयास न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। आने वाले समय में इन पहलों के माध्यम से वरिष्ठजनों के जीवन में और अधिक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे, जो एक संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  

सिद्धारमैया के बेटे की कैबिनेट एंट्री के संकेत, कांग्रेस में चार डिप्टी CM मॉडल पर चर्चा

बेंगलुरु  मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के इस्तीफे के बाद से कर्नाटक की राजनीति में बड़ा उलफेर देखने को मिल रहा है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक में डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बनने जा रही नई सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए चार डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार आज दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलकर राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल पर चर्चा करेंगे। जिसमें चार डिप्टी सीएम को लेकर भी मंथन होगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्दरमैया, डीके शिवकुमार और AICC के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा करेंगे। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक के दौरान राज्यसभा उम्मीदवारों, MLC उम्मीदवारों और मंत्रिमंडल में फेरबदल पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाएगा। चार डिप्टी सीएम बनाने की संभावना सूत्रों ने आगे बताया कि सिद्दरमैया के मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों को डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना कम है। पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया कि सरकार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए चार उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं। सिद्दरमैया के बेटे को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी सूत्रों के अनुसार, सिद्दरमैया के बेटे और विधान परिषद के सदस्य यतींद्र को डीके शिवकुमार की कैबिनेट में शामिल किए जाने की पूरी उम्मीद है। उन्हें कोई अहम मंत्रालय मिलने की संभावना है, ताकि सिद्दरमैया की विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश दिया जा सके। कांग्रेस विधायक दल की बैठक की तारीख आज तय की जाएगी जो कि अब महज एक औपचारिकता ही लगती है। इसके बाद, कर्नाटक के मुख्यमंत्री के तौर पर डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय की जाएगी। कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों पर होने हैं चुनाव कर्नाटक में राज्यसभा की जिन चार सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से कांग्रेस दो सीटें आसानी से जीतती दिख रही है। तीसरी सीट पर भी उसे बढ़त हासिल है, जिसके लिए उसे बस कुछ और वोटों की जरूरत है। सूत्रों ने बताया कि AICC के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला तीन में से दो राज्यसभा सीटों के लिए नामों का पैनल पेश करेंगे, और खड़गे को राज्यसभा में दोबारा मौका दिया जाएगा। इसके अलावा, राज्य में विधान परिषद (MLC) की सात सीटों पर होने वाले चुनावों के लिए भी संभावित नामों का एक पैनल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंपा जाएगा। राज्यपाल ने स्वीकार किया इस्तीफा कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बीते गुरुवार अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने गुरुवार दोपहर तीन बजे लोकभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंप दिया, लेकिन राज्यपाल की अनुपस्थिति के कारण उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ था। आज राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सिद्दरमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। राज्यपाला ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए लिखा, "मैं थावरचंद गहलोत भारत के संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और उनके नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।" 

मध्य प्रदेश में ट्रांसफर सीजन शुरू, स्कूल शिक्षा विभाग ने मांगी स्कूलवार पदों की जानकारी

भोपाल  प्रदेश  में तबादलों का काउंटडाउन शुरू हो गया है। सरकार द्वारा लंबे समय से एक ही जगह पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने की तैयारी तेज कर दी गई है। खासतौर पर राजस्व विभाग और पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। विभागीय स्तर पर अधिकारियों की सूचियां तैयार होना शुरू हो गई हैं। तीन साल या उससे अधिक समय से एक ही जिले और अनुभाग में पदस्थ अधिकारियों की जानकारी जुटाई जा रही है। इससे एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों सहित कई अधिकारी प्रभावित होंगे। तबादले की अवधि नजदीक आने के साथ प्रदेश के अलग-अलग विभागों के विभागाध्यक्षों ने विभागीय तबादला नीति जारी करने के साथ जिलों में पदस्थ अलग-अलग कैडर के अफसरों का ब्यौरा जुटाना शुरू कर दिया है। लोक निर्माण और जल संसाधन विभाग ने इंजीनियरों की वर्तमान पोस्टिंग, पदनाम और अतिरिक्त प्रभार की जानकारी मांगी है तो स्कूल शिक्षा विभाग ने हर विद्यालय में पदस्थ एक-एक शिक्षक का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा कर्मचारियों के तबादले के लिए 2 जून तक ऑनलाइन आवेदन बुला लिए हैं, तो पीएचक्यू ने आरक्षक से सब इंस्पेक्टर तक के तबादले पांच जून तक करने की डेडलाइन तय कर दी है। मोहन कैबिनेट के फैसले के बाद 22 मई को सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रदेश के कर्मचारी अधिकारियों के राज्य और जिला संवर्ग स्तर पर तबादले की पॉलिसी जारी कर दी है। इसमें तबादले की अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर विभागों को ऑनलाइन आवेदन मंगाने के लिए कहा गया है। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि अगर कोई अधिकारी कर्मचारी सरकार द्वारा तय टारगेट को अचीव नहीं कर पाता है तो उसे प्रशासनिक आधार पर तीन साल की अवधि के पहले भी स्थानांतरित किया जा सकता है। जल संसाधन विभाग ने मांगी इंजीनियरों की पदस्थापना, अतिरिक्त प्रभार की जानकारी जल संसाधन विभाग ने आयुक्त कमांड क्षेत्र और विकास संचालनालय, आयुक्त भू अर्जन और पुनर्वास बाणसागर रीवा, सभी मुख्य अभियंता, परियोजना संचालक, अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि विभाग के प्रथम, द्वितीय, तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के नाम, पदनाम, पदस्थापना स्थल, जहां से वेतन निकलता है वहां की जानकारी के साथ गृह जिला, सेवानिवृत्ति तिथि, जिन पदों के अतिरिक्त प्रभार में हैं उस पद और कार्यालय का नाम तथा तारीख की जानकारी शासन को भेजें। स्कूल शिक्षा विभाग ने तबादले के पहले मांगा हर टीचर की पोस्टिंग का ब्यौरा उधर स्कूल शिक्षा विभाग ने भी एजुकेशन 3.0 पोर्टल पर हर विद्यालय में विषय वार पदस्थ शिक्षकों का ब्यौरा एंट्री करने के लिए कहा है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि विद्यालय वार और विषय वार एंट्री कराएं और जिन शिक्षकों की मृत्यु हो गई है या रिटायर हो गए हैं, उनके नाम विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों की सूची से हटाएं ताकि जब विभाग द्वारा तबादले की कार्यवाही की जाए तो यह स्थिति न बने कि विद्यालय में पहले से पर्याप्त शिक्षक पदस्थ हों और अतिरिक्त पदस्थापना हो जाए या फिर पद भरे होने की जानकारी पोर्टल पर हो जबकि वास्तव में टीचर न हों तो वहां पोस्टिंग न हो पाए। लोक शिक्षण आयुक्त इसकी जिलावार समीक्षा 30 मई को करेंगे। जनगणना में लगे शिक्षकों के तबादले फरवरी 2027 तक नहीं होंगे लोक शिक्षण आयुक्त ने एक अन्य निर्देश जारी कर कहा है कि जिन शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगी है उनके तबादले फरवरी 2027 तक नहीं होंगे। ऐसे शिक्षकों की संख्या 58 हजार से अधिक है जो जनगणना ड्यूटी में लगे हैं। इसलिए एक जून 2026 तक ऐसे सभी शिक्षकों की जानकारी एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर एंट्री करने के लिए कहा गया है जो जनगणना में लगे हैं। एनएचएम ने 2 जून तक मांगा संविदा कर्मचारियों की डिटेल दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने भी इस पर काम शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की अपर मिशन संचालक दिशा नागवंशी ने एनएचएम में काम करने वाले संविदा कर्मचारियों के स्वैच्छिक स्थानांतरण के ऑनलाइन प्रस्ताव 2 जून तक मांगे हैं। इसके लिए संविदा तबादले की पॉलिसी भी जारी कर दी गई है। ऑनलान आवेदन 27 मई से लेने का सिलसिला पोर्टल पर शुरू हुआ है और 2 जून की रात 12 बजे तक आवेदन किए जा सकेंगे। इसके बाद तबादले किए जाएंगे। निर्देशों में कहा गया है कि तबादले के लिए तीन माह की सार्थक एप की उपस्थिति भी अपलोड करनी होगी। आवेदन सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र से शहरी क्षेत्र के लिए किए जा सकेंगे। रिक्त पद पर तबादले के लिए कम से कम और अधिकम 5 संस्थाओं की एंट्री आवेदन में करनी होगी। ऐसे कर्मचारी जिनकी नियुक्त दो साल के भीतर हुई है तथा दो साल में जिनका तबादला हो चुका है, उनके तबादले पर प्रतिबंध रहेगा। 5 जून तक आरक्षक से एसआई तक के तबादले करेंगे पुलिस आयुक्त-एसपी इसी तरह गृह विभाग के अंतर्गत पुलिस मुख्यालय ने भोपाल, इंदौर के पुलिस आयुक्त, एसपी रेल समेत सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि किसी एक थाने में आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के कर्मचारी की एक पद पर पदस्थापना पांच साल से अधिक नहीं होना चाहिए। साथ ही एक बार पोस्टिंग के बाद संबंधित कर्मचारी की पदस्थापना दोबारा उसी थाने में नहीं होनी चाहिए। अलग-अलग पदों पर पदस्थापना के मामले में किसी भी कर्मचारी की पोस्टिंग में तीन साल का अंतर होना चाहिए। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर तक के कर्मचारी को एक ही पुलिस अनुविभाग में दस साल से अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। पुलिस मुख्यालय ने इस आधार पर पांच जून तक तबादला करके सूची मुख्यालय को भेजने कहा है। सूत्रों के मुताबिक राज्य शासन जल्द ही तबादला नीति जारी कर सकता है। इसके पहले ही विभागों में अंदरखाने हलचल बढ़ गई है। कई अधिकारी अपने पसंदीदा जिलों में पदस्थापना के लिए राजनीतिक संपर्क साधने में जुट गए हैं। नेताओं और जनप्रतिनिधियों के यहां सिफारिशी पत्रों का दौर भी शुरू हो गया है। राजधानी भोपाल से लेकर जिला मुख्यालयों तक तबादलों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजस्व … Read more

मध्य भारत को मिलेगा नया हाईवे कॉरिडोर, सिवनी से सावनेर तक सफर होगा तेज और आसान

सिवनी/छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच संपर्क पहले की तुलना में आधुनिक और सुरक्षित होगी। इस दिशा में सिवनी-छिंदवाड़ा-सावनेर फोरलेन परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। एनएचआई की तरफ से एनएच-547 और एनएच-347 के अंतर्गत प्रास्तावित परियोजना के लिए डीपीआर का कार्य प्रगति पर है। 158 किमी लंबा है यह कॉरिडोर करीब 158 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित कॉरिडोर का उद्देश्य महाराष्ट्र के सावनेर-नागपुर औद्योगिक क्षेत्र को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा एवं सिवनी के माध्यम से मध्य और उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश से बेहतर ढंग से जोड़ना है। वर्तमान में यह मार्ग महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच यातायात, औद्योगिक परिवहन, कृषि व्यापार एवं पर्यटन गतिविधियों के लिए प्रमुख संपर्क माध्यम के रूप में उपयोग किया जाता है। अब इसे फोर लेन में परिवर्तित किया जा रहा है। दोनों राज्यों के औद्योगिक ग्रोथ को मिलेगी नई दिशा वहीं, सिवनी–छिंदवाड़ा–सावनेर कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच आर्थिक, औद्योगिक एवं व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मार्ग माना जा रहा है। यह कॉरिडोर नागपुर एवं सावनेर जैसे महाराष्ट्र के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर एवं मध्य भारत के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। फोरलेन निर्माण के बाद महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश की ओर माल परिवहन अधिक तेज और सुगम हो सकेगा। छिंदवाड़ा–नागपुर कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा प्रस्तावित फोरलेन परियोजना छिंदवाड़ा और नागपुर के बीच संपर्क को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच यात्रा के दौरान भारी वाहनों का दबाव,सीमित सड़क क्षमता एवं कई स्थानों पर धीमी यातायात गति यात्रियों और व्यापारिक परिवहन के लिए चुनौती बनी रहती है। फोरलेन निर्माण के बाद नागपुर से छिंदवाड़ा की यात्रा अधिक तेज और सुगम हो सकेगी। यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत अभी छिंदवाड़ा से सिवनी, नागपुर और आसपास के क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मार्ग अधिकांश हिस्सों में दो-लेन या सीमित क्षमता वाला है, जबकि भारी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोयला परिवहन, औद्योगिक ट्रैफिक एवं लंबी दूरी के मालवाहक वाहनों के कारण कई स्थानों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती रहती है। पर्यटन एवं इको-टूरिज्म को मिलेगा लाभ यह कॉरिडोर मध्य प्रदेश के कई महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों तक पहुंच का प्रमुख मार्ग है। पेंच नेशनल पार्क, तामिया, पचमढ़ी, देवगढ़ किला, जाम सांवली हनुमान मंदिर एवं छिंदवाड़ा-सिवनी के प्राकृतिक वन क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। मार्ग के निर्माण से पर्यटक इन स्थलों तक जल्दी पहुंच सकेंगे। सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखकर डीपीआर यह कॉरिडोर वर्तमान में कई सड़क सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए परियोजना की DPR तैयार की जा रही है, जिसमें सड़क सुरक्षा को प्रमुख प्राथमिकता दी गई है। यातायात घनत्व, दुर्घटना संभावित स्थानों, शहरी क्षेत्रों में बढ़ते दबाव और भविष्य की यातायात आवश्यकताओं का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। क्षेत्रीय और रणनीतिक महत्त्व सिवनी–छिंदवाड़ा–सावनेर कॉरिडोर मध्य भारत के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का हिस्सा है। यह मार्ग NH-44, NH-47 तथा अन्य प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से संपर्क स्थापित करता है, जिससे नागपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, जबलपुर, बैतूल और सागर जैसे शहरों के बीच तेज संपर्क उपलब्ध होता है। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र नागपुर को मध्य प्रदेश के वन, खनन, कृषि और पर्यटन क्षेत्रों से जोड़ता है। भविष्य में यह मार्ग वैकल्पिक उत्तर-दक्षिण संपर्क कॉरिडोर के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिससे NH-44 पर यातायात दबाव कम करने में सहायता मिलेगी।