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योगी सरकार की सख्ती का असर, पूरे यूपी में शांति और नियमों के बीच मनी बकरीद

 चंदौली/संभल/आगरा/अयोध्या उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में मुस्लिम समुदाय के अकीदतमंदों ने ईदगाहों और मस्जिदों के भीतर बकरीद की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से अदा की. राज्य सरकार की सख्त गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित कराने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी और भारी बल के साथ मुस्तैद रहे. चंदौली, अयोध्या, हापुड़, संभल, औरैया, कौशांबी, गाजीपुर, फिरोजाबाद, सुल्तानपुर, सहारनपुर और आगरा में तैनात मजिस्ट्रेटों की निगरानी में खुले में कुर्बानी और सड़कों पर नमाज को पूरी तरह रोका गया. नमाजियों ने मुल्क में भाईचारे, तरक्की और खुशहाली की सामूहिक दुआएं मांगीं और सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक-दूसरे को गले लगाकर त्योहार की मुबारकबाद दी। चंदौली में ड्रोन कैमरों से नजर और गाइडलाइन का पालन चंदौली में बकरीद का त्योहार बेहद हर्षोल्लास और शांति के साथ संपन्न हुआ. सुबह होते ही लोग ईदगाह और मस्जिदों की तरफ बढ़े और नमाज अदा की. जिले में तकरीबन 280 से अधिक चिन्हित स्थानों पर नमाज का आयोजन किया गया था. इमाम और नमाजियों ने बताया कि सरकार द्वारा जारी सभी निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन किया गया. चंदौली के एसपी आकाश पटेल ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी ईदगाहों पर भारी फोर्स तैनात की गई थी और संवेदनशील इलाकों पर ड्रोन कैमरों से पैनी नजर रखी गई थी। रामनगरी अयोध्या में शांतिपूर्ण माहौल और आला अफसरों की मौजूदगी रामनगरी अयोध्या में भी बकरीद का पर्व पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ. शहर के सिविल लाइन स्थित मुख्य ईदगाह में बड़ी संख्या में पहुंचे नमाजियों ने अकीदत के साथ सजदा किया. शासन के सख्त निर्देशों के कारण नमाज केवल मस्जिदों और ईदगाह परिसर के भीतर ही संपन्न कराई गई. सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए डीएम शशांक त्रिपाठी और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर स्वयं सुबह से मौके पर डटे रहे. नगर निगम की तरफ से ईदगाह परिसर में विशेष साफ-सफाई और पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था की गई थी। हापुड़ में अलर्ट मोड पर पुलिस और 57 मस्जिदों में नमाज हापुड़ जिले में बकरीद की नमाज को लेकर सुबह से ही पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आया. शहर के मुख्य ईदगाह सहित करीब 57 मस्जिदों में अलग-अलग निर्धारित समय पर अकीदतमंदों ने नमाज अदा की और देश में खुशहाली की मन्नतें मांगीं. पूरे क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. सुरक्षा चक्र को मजबूत बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी कविता मीणा और पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानंजय सिंह खुद अपनी टीम के साथ मौके पर मुस्तैद दिखाई दिए। फर्रुखाबाद में भाईचारे की मिसाल और अफसरों का गश्त फर्रुखाबाद में भी बकरीद का पावन त्योहार अमन, चैन और आपसी भाईचारे के संदेश के साथ संपन्न हो गया. जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों को मिलाकर कुल 229 स्थानों पर सुबह से ही नमाजियों की भारी भीड़ जुटने लगी थी. सभी ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज अदा कर देश की तरक्की और समृद्धि के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं. जिले के आला प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी लगातार क्षेत्रों में भ्रमण करते रहे. अधिकारियों ने नमाजियों को त्योहार की बधाई दी और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की। संभल में इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से निगरानी और जोनल व्यवस्था संभल जिले में बकरा ईद की नमाज को सकुशल संपन्न कराने के लिए कड़े प्रशासनिक प्रबंध देखने को मिले. पूरे जिले को 5 जोन और 16 सेक्टर में विभाजित किया गया था, जहां प्रत्येक सेक्टर में पुलिस के साथ मजिस्ट्रेट तैनात रहे. जिले के कुल 828 स्थलों पर नमाज शांतिपूर्ण ढंग से हुई और 14 निर्धारित स्थानों पर ही कुर्बानी की गई. तीन कंपनी पीएसी और आरआरएफ की तैनाती के साथ-साथ, ढाई सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरों के जरिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से संवेदनशील मिश्रित आबादी वाले इलाकों की निगरानी की गई। संभल में सोशल मीडिया पर नजर और अधिकारियों की मुस्तैदी संभल के डीएम अंकित खंडेलवाल और एसपी केके बिश्नोई के अलावा एएसपी, सीओ और एसडीएम सुबह से ही क्षेत्र में गश्त पर रहे. प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि सड़कों पर नमाज न हो और खुले में कुर्बानी न दी जाए. इसके अलावा, शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम इंटरनेट पर कुर्बानी के वीडियो या भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर पैनी नजर रख रही थी. खुफिया विभाग को भी पूरी तरह सक्रिय रखा गया ताकि किसी भी तरह के अफवाह को तुरंत रोका जा सके। औरैया में हजरत बाबा शाह जमाल शाह ईदगाह पर उमड़ी भीड़ औरैया जिले में ईद उल अजहा का पर्व पूरे श्रद्धा भाव और उल्लास के साथ मनाया गया. सुबह से ही शहर काजी अब्दुल समद मियां चिश्ती की इमामत में हजरत बाबा शाह जमाल शाह स्थित मुख्य ईदगाह में हजारों की तादाद में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करने पहुंचे. नमाज मुकम्मल होने के बाद मुल्क में अमन और खुशहाली की दुआएं मांगी गईं और लोगों ने गले मिलकर मुबारकबाद दी. जिला और पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी के चलते ईदगाह और उसके आसपास के सभी इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। कौशांबी में चार सुपर जोन और संवेनशील क्षेत्रों पर पहरा यूपी के कौशाम्बी जिले में भी बकरीद का त्योहार भाईचारे और सौहार्दपूर्ण वातावरण के बीच मनाया गया. जिले की 84 ईदगाहों और 282 मस्जिदों में अकीदतमंदों ने नमाज अदा की. जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पूरे जिले को 4 सुपर जोन और 39 सेक्टरों में बांट रखा था. इन सभी सेक्टरों में भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई थी. संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरती गई, जिससे पूरा त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से निपट गया। गाजीपुर में 550 स्थानों पर नमाज और बच्चों को मिली टॉफी गाज़ीपुर जनपद में जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला और पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा की मौजूदगी में बकरीद का त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ. जिलाधिकारी के अनुसार, जनपद की लगभग 350 मस्जिदों और 150 ईदगाहों समेत कुल 550 स्थानों पर नमाज अदा की गई. शहर के विशेश्वरगंज स्थित मुख्य ईदगाह पर पहुंचे दोनों आला अधिकारियों ने नमाजियों को त्योहार की बधाई दी और नमाजी बच्चों के बीच टॉफियां बांटीं. शासन के निर्देशों के क्रम में जिले में … Read more

सिद्धारमैया ने सौंपा इस्तीफा, बोले- पार्टी ने जो कहा वही किया; अब DK शिवकुमार होंगे CM

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर अपने पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है. बेंगलुरु में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल इसे जल्द ही स्वीकार कर लेंगे. सत्ता परिवर्तन के इस बड़े कदम के बीच सिद्धारमैया ने यह भी साफ किया कि राज्य में कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत बरकरार है, इसलिए संविधान के अनुसार नई सरकार बनाने का अधिकार भी उनकी पार्टी को ही मिलना चाहिए. इस बड़े सियासी उलटफेर के दौरान उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का आभार जताया, जिन्होंने उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का यह अवसर प्रदान किया था. अब पूरे राज्य की नजरें राजभवन और अगले मुख्यमंत्री के चेहरे पर टिक गई हैं। कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे सत्ता हस्तांतरण के विवाद पर आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने निर्णायक कदम उठा लिया है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में चली कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर पद छोड़ने का दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने पर सहमति जता दी. बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में दो सप्ताह का समय मांगा था, ताकि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश कर सकें, लेकिन पार्टी नेतृत्व तत्काल नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में था. कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें याद दिलाया कि 2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ ढाई-ढाई साल के सत्ता साझेदारी फार्मूले पर सहमति बनी थी और सिद्दारमैया पहले ही तय अवधि से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं. ‘डेक्‍कन हेराल्‍ड’ की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान सिद्दारमैया से कहा कि पार्टी की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पुराने वादे का सम्मान जरूरी है. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में बताए जा रहे हैं. राहुल गांधी ने दोनों नेताओं (सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार) से संयुक्त और अलग-अलग बैठकें कर पार्टी एकता बनाए रखने की अपील की। बताया जाता है कि बैठक के दौरान सिद्दारमैया ने यह तर्क दिया कि 2025 में पद छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ था, लेकिन राहुल गांधी अपने रुख पर कायम रहे. पार्टी नेतृत्व ने यह भी कहा कि सिद्दारमैया पहले ही आठ वर्षों से अधिक समय तक मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं, इसलिए अब दूसरे नेताओं को अवसर देने का समय है. सूत्रों के मुताबिक, बाद में सिद्दारमैया ने वरिष्ठ नेताओं केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला से चर्चा की, जिन्होंने भी हाईकमान के निर्देश को मानने की सलाह दी. शाम को सिद्दारमैया ने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के आवास पर अपने करीबी सहयोगियों से मुलाकात की। कुछ मंत्रियों ने उन्हें जल्दबाजी में फैसला न लेने की सलाह दी, लेकिन सिद्धारमैया ने साफ कहा कि वह अब और इंतजार नहीं करेंगे. सूत्रों के अनुसार, सिद्दारमैया ने अपने सहयोगियों से कहा, ‘मैं शुरू से कहता आया हूं कि राहुल गांधी जब कहेंगे, मैं इस्तीफा दे दूंगा. अब जब उन्होंने कहा है, तो मैं तुरंत पद छोड़ दूंगा। कांग्रेस के लिए अहम कांग्रेस नेतृत्व इस फैसले को पार्टी अनुशासन और संगठनात्मक नियंत्रण के लिहाज से अहम मान रहा है. 2014 के बाद कांग्रेस कई राज्यों में क्षेत्रीय नेताओं पर नियंत्रण बनाए रखने में संघर्ष करती रही है. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता साझा करने के वादों के बावजूद नेतृत्व परिवर्तन नहीं हो सका था. ऐसे में कर्नाटक में हाईकमान का यह कदम पार्टी के भीतर स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व के फैसले सर्वोपरि होंगे।  इस्तीफा देने के प्रेस को संबोधित करते हुए भावुक हुए सिद्धारमैया सीएम सिद्दारमैया का इस्तीफा: कर्नाटक के राजनीति में एक बड़ा बदलाव हुआ है. कांग्रेस आलाकमान के निर्देशानुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए सिद्धारमैया काफी भावुक नजर आए. उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘हाई कमान के पहले ही इस्तीफा देने के लिए कहने के बाद, मैंने आज अपना इस्तीफा सौंप दिया है. मुझे पूरा भरोसा है कि जब राज्यपाल आएंगे, तो वे इसे स्वीकार कर लेंगे, क्योंकि यह संविधान के अनुसार ही किया जाना है.’ सिद्धारमैया ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है और संवैधानिक रूप से नई सरकार बनाने का अधिकार भी कांग्रेस को ही मिलना चाहिए. इस अवसर पर उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का मौका दिया।

BJP में बड़ा मंथन! राज्यसभा चुनाव और कैबिनेट विस्तार को लेकर दिल्ली में अहम बैठकें

भोपाल मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती नजर आ रही हैं। संगठन में नई नियुक्तियों और आगामी राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अब मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं ने भी सियासी गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। इसी बीच मुख्यमंत्री Mohan Yadav का अचानक दिल्ली दौरा कई नए राजनीतिक संकेत दे रहा है। सूत्रों की मानें तो भाजपा नेतृत्व आने वाले दिनों में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बड़े फैसले ले सकता है। राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीतिक बैठकों का दौर पहले से ही जारी है, वहीं प्रदेश मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और विस्तार को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री मोहन यादव का दिल्ली पहुंचना राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। दिल्ली पहुंचकर मुख्यमंत्री ने पार्टी और केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Arjun Ram Meghwal से भी सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी स्वयं अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए साझा की। आज नई दिल्ली में माननीय केंद्रीय विधि और न्याय (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल जी से सौजन्य भेंट की। हालांकि इस मुलाकात को औपचारिक बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे सामान्य शिष्टाचार भेंट से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मान रहे हैं। माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव, संगठनात्मक बदलाव और आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर दिल्ली में लगातार मंथन चल रहा है। प्रदेश भाजपा में पिछले कुछ दिनों से जिस तरह नियुक्तियों और बैठकों का सिलसिला बढ़ा है, उसने यह संकेत जरूर दे दिए हैं कि पार्टी आने वाले समय में बड़े राजनीतिक फैसलों की तैयारी में जुट चुकी है। अब सबकी नजर दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगली राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है।

बीजेपी ने बदले चार राज्यों के अध्यक्ष, जानिए दिल्ली की कमान किसे मिली

नई दिल्ली बीजेपी संगठन में बड़ा फेरबदल हुआ है. पार्टी ने गुरुवार (28 मई) को चार राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष बदलने का ऐलान किया है. दिल्ली में वीरेंद्र सचदेवा की जगह केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को कमान सौंपी गई है. इसके अलावा, भाजपा ने पंजाब, हरियाणा और त्रिपुरा के नए प्रदेश अध्यक्ष के नामों का ऐलान किया है. इसको लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने नोटिफिकेशन जारी किया है। बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, भारतीय जनता पार्टी दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया है. उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। कौन हैं दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा? हर्ष मल्होत्रा बीजेपी के सीनियर नेता और दिल्ली से सांसद हैं. वह अभी तक केंद्र सरकार में मंत्री पद संभाल रहे हैं. लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय मल्होत्रा ने दिल्ली भाजपा में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं. वह जनसंपर्क, संगठन क्षमता और विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका के लिए जाने जाते हैं। अर्चना गुप्ता बनीं हरियाणा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता को हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है, जबकि सरदार केवल सिंह ढिल्लो को पंजाब और अभिषेक देबरॉय को त्रिपुरा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कौन हैं पंजाब बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों बरनाला से दो बार विधायक रह चुके हैं. उन्होंने 2022 की संगरूर लोकसभा की उपचुनाव और 2024 में बरनाला विधानसभा की उपचुनाव बीजेपी के टिकट पर लड़ा था. ढिल्लों देश और पंजाब के एक बड़े उद्योगपति हैं. वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी रहे हैं, उन्हें बरनाला के लोग विकास पुरुष के तौर पर जानते हैं, उन्होंने अपनी राजनीति हमेशा विकास के मुद्दे पर लड़ी है, जबकि विरोधी खेमे के नेताओं के साथ कभी भी विवाद की राजनीति में वह नहीं पड़े। पंजाब बीजेपी की कमान केवल सिंह ढिल्लों को सरदार केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वह बरनाला से दो बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2022 में संगरूर लोकसभा उपचुनाव और 2024 में बरनाला विधानसभा उपचुनाव बीजेपी के टिकट पर लड़ा था। उद्योगपति से नेता तक का सफर केवल सिंह ढिल्लों पंजाब के बड़े उद्योगपतियों में गिने जाते हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी भी रहे हैं। बरनाला में लोग उन्हें विकास कार्यों के लिए जानते हैं। हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा में भी नए चेहरे को मौका मिला है। बीजेपी ने अर्चना गुप्ता को हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की जिम्मेदारी मिली है। वहीं, अभिषेक देवराय को त्रिपुरा बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है।

‘ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी ज़मीं’ लिखने वाले मशहूर शायर बशीर बद्र नहीं रहे

भोपाल उर्दू के प्रसिद्ध शायद बशीर बद्र का गुरुवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बशीर बद्र ने 91 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। बशीर की पत्नी राहत बद्र ने शायर के निधन की जानकारी सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा करते हुए लिखा, बशीर साहब लेफ्ट अस…प्रेयर्स। बशीर बद्र के निधन से पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर है। बशीर बद्र को आधुनिक गजल के लिए उस्ताद माना जाता है।प्रसिद्ध उर्दू शायर आधुनिक ग़ज़ल के उस्ताद और पद्मश्री सम्मानित डॉ. बशीर बद्र का भोपाल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह 91 सालों के थे. मेरठ में एक जमाने में वह साहित्यिक आयोजन की शान होते थे. बाद में जब थोड़ी दूर पर स्थित उनके मकान के सामने से गुजरता था, तो उसकी दीवारों पर कुछ जले जैसे निशान नजर आते थे. मेरठ के 1987 के भीषण दंगों के बाद उन्होंने अपने इस शहर को हमेशा के लिए ही छोड़ दिया. लेकिन उनसे मुलाकातें, मुस्कुराहट और हर मौके के लिए मौजूं शायरियां अब तक याद तो हैं ही। बशीर बद्र को साहित्य क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री अवार्ड भी मिल चुका है। 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में जन्मे शायद बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्ष और पीएचडी की थी। बशीर बद्र ने यहीं पर उर्दू के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं भी दी थीं। बशीर बद्र को आसानी भाषाओं में गजलें लिखने में महाभारत हासिल थी। उन्होंने गजल विधा में कई नए और ठेठ शब्दों को शामिल किया था। बतादें कि बीमारी के कारण बशीर बद्र ने कई सालों से शायरी से किनारा कर लिया था। 1987 में मेरठ में दंगों में बशीर बद्र का जलाया गया था घर उर्दू शायरी से लोगों के दिलों पर राज करने वाले बशीर बद्र का 1987 के मेरठ के सांप्रदायिक दंगों में उनका घर जला दिया गया था। इस घटना में उनकी कई ऐतिहासिक रचनाएं और कविताएं हमेशा के लिए जलकर राख हो गई थीं। इस घटना के बाद से वे हमेशा के लिए भोपाल में शिफ्ट हो गए थे। मेरठ कॉलेज में लेक्चरार रह चुके हैं बशीर बद्र 1973 में बशीर बद्र ने एएमयू से पीएचडी की थी और 12 अगस्त 1974 को उन्होंने मेरठ कॉलेज के उर्दू विभाग में बतौर लेक्चरर ज्वाइन किया था। वे शायरी के ऊंचे मुकाम पर थे। जिस वक्त उन्होंने मेरठ कॉलेज ज्वाइन किया वे शायरी की दुनिया में जाने पहचने नाम थे।यही वजह रही कि जब तक उन्होंने नौकरी की, तब तक उन्हें पीएचडी की उपाधि की जरूरत नहीं पड़ी। उनका नाम ही पीएचडी से बड़ा हो गया था। शंहशाह-ए-गजल बशीर बद्र को 2018 में मिला था जोश-ए-उर्दू अवार्ड उर्दू शायद बशीर बद्र को जोश-ए-उर्दू-2018 अवार्ड से नवाजा गया था। दुबई की साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू के पदाधिकारियों ने भोपाल स्थित उनके घर पहुंचकर यह अवार्ड दिया था। 6 जुलाई शुक्रवार को डॉ. बशीर बद्र का आवास पर जब अवार्ड पहुंचा तो पूरा घर ही चहक उठा था। दुबई की नामचीन साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू ने डॉ. बशीर बद्र को ‘जोश-ए-उर्दू-2018 के तहत शॉल ओढ़ाकर चांदी की हैंडमेड शील्ड दी थी। बशीर बद्र उन चुनिंदा शायरों में थे, जिनकी गजलें सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रहीं. उनकी लाइनें लोगों की डायरी, वॉट्सऐप स्टेटस, मोहब्बत के खत और टूटे दिलों की जुबान बन गईं। उनका एक शेर तो जैसे हर दौर में जिंदा रहेगा- उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए…' और ये भी- मुझे मालूम है उसका ठिकाना फिर कहां होगा परिंदा आसमां छूने में जब नाकाम हो जाए…' बशीर बद्र की शायरी की सबसे बड़ी ताकत यही थी कि वो मुश्किल अल्फाज में नहीं, सीधे दिल में उतरती थी। मोहब्बत को उन्होंने मुश्किल नहीं, आसान बताया. उनकी शायरी में दर्द था, लेकिन उम्मीद भी थी. मोहब्बत थी, लेकिन दिखावा नहीं था. उन्होंने लिखा- 'सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है बा-वजू होके भी छूते हुए डर लगता है…' और फिर मोहब्बत को इतना आसान बना दिया कि पढ़ने वाला मुस्कुरा उठे- 'मैं तेरे साथ सितारों से गुजर सकता हूं कितना आसान मोहब्बत का सफर लगता है…' बशीर बद्र सिर्फ इश्क के शायर नहीं थे. उन्होंने जिंदगी के संघर्ष को भी उतनी ही खूबसूरती से लिखा। उनका ये शेर आज भी लाखों लोगों को हिम्मत देता है- 'जिस दिन से चला हूं मेरी मंजिल पे नजर है आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा…' और फिर जिंदगी की तकलीफ को कुछ यूं बयान किया- ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं तुमने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा…' उनकी शायरी में एक अजीब सी नरमी थी. ऐसा लगता था जैसे कोई बहुत धीरे से जिंदगी समझा रहा हो. 'कहां से आई ये खुशबू, ये घर की खुशबू है इस अजनबी के अंधेरे में कौन आया है… 'महक रही है जमीं चांदनी के फूलों से खुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है…' 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जन्मे बशीर बद्र बाद में भोपाल आकर बस गए. उन्होंने उर्दू साहित्य को कई यादगार गजलें, किताबें और अशआर दिए. कई बड़े सम्मानों से उन्हें नवाजा गया. लेकिन सच ये है कि उनका सबसे बड़ा सम्मान वो लोग थे, जिन्होंने उनकी शायरी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया। आज बशीर बद्र नहीं हैं. लेकिन उनकी लाइनें शायद हमेशा रहेंगी… किसी की याद में, किसी की मोहब्बत में, किसी की तन्हाई में. डॉ. बशीर बद्र के निधन की खबर सामने आने के बाद साहित्य और शायरी जगत में शोक की लहर है. उनके चाहने वाले सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

देश की सर्वोच्च अदालत में नई नियुक्तियों की तैयारी, वरिष्ठ वकील वी. मोहना का नाम भी चर्चा में

भोपाल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्ट चीफ जस्टिस व एक वरिष्ठ अधिवक्ता को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की है. इस कॉलेजियम में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा समेत चार मुख्य न्यायधीशों को शामिल किया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में 4 चीफ जस्टिस सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 22 और 27 मई, 2026 को आयोजित अपनी बैठकों में निम्निलिखित मुख्य न्यायधीशों को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की अनुशंसा की है। मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा बनेंगे सुप्रीम कोर्ट के जज     न्यायमूर्ति शील नागू, मुख्य न्यायाधीश, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (पीएचसी: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय)     न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, मुख्य न्यायाधीश, बॉम्बे उच्च न्यायालय (पीएचसी: झारखंड उच्च न्यायालय)     न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (पीएचसी: दिल्ली उच्च न्यायालय)     न्यायमूर्ति अरुण पल्ली, मुख्य न्यायाधीश, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय (पीएचसी: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय)     वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना (सुप्रीम कोर्ट) चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा का दिल्ली से संबंध, चीफ जस्टिस नागू का एमपी से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा का संबंध दिल्ली उच्च न्यायालय से है. वर्तमान में चीफ जस्टिस रहते हुए उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कई चर्चित मामलों की सुनवाई की हैं और कई ऐतिहासिक फैसले भी दिए हैं. उन्हें भी इस कोलेजियम में शामिल किया गया है. वहीं, जस्टिस न्यायमूर्ति शील नागू वर्तमान में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं और उनका मूल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट है. इसके अलावा जम्मू और कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय से हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा यदि केंद्र सरकार द्वारा कॉलेजियम की सिफारिशों को मंजूरी दे दी जाती है, तो सभी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होंगे. वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहना बार से सीधे सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत होने वाली दसवीं अधिवक्ता होंगी. वे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ​​के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी महिला होंगी. 22 और 27 मई को हुई अपनी बैठक में, कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस जस्टिस शील नागू, बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस संजीव सचदेवा, जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस अरुण पल्ली, और सीनियर एडवोकेट वी मोहना को सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी दी। तमिलनाडु की रहने वाली मोहना, अगर केंद्र इन सिफारिशों को मंजूरी दे देता है, तो सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली दूसरी महिला वकील होंगी जिन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन मिलेगा। इससे पहले, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​पहली महिला सीनियर एडवोकेट थीं जिन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था. 2021 में, तीन महिला जज, जस्टिस हिमा कोहली, बेला एम. त्रिवेदी, और बीवी नागरत्ना को सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट (पदोन्नत) किया गया था। जस्टिस नागू मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से, जस्टिस चंद्रशेखर झारखंड हाई कोर्ट से, जस्टिस सचदेवा दिल्ली हाई कोर्ट से, और जस्टिस पल्ली पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से थीं। आगे क्या होगा? कॉलेजियम की इस सिफारिश को अब केंद्रीय कानून मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की अंतिम मुहर और वारंट जारी होने के बाद ये सभी नाम तय हो जाएंगे, जिसके बाद राष्ट्रपति भवन या सुप्रीम कोर्ट में इनका शपथ ग्रहण समारोह होगा।

पद्मश्री सम्मानित शायर बशीर बद्र का जीवन और साहित्यिक योगदान

मेरठ उर्दू के प्रसिद्ध शायद बशीर बद्र का गुरुवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बशीर बद्र ने 91 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। बशीर की पत्नी राहत बद्र ने शायर के निधन की जानकारी सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा करते हुए लिखा, बशीर साहब लेफ्ट अस…प्रेयर्स। बशीर बद्र के निधन से पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर है। बशीर बद्र को आधुनिक गजल के लिए उस्ताद माना जाता है। बशीर बद्र को साहित्य क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री अवार्ड भी मिल चुका है। 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में जन्मे शायद बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्ष और पीएचडी की थी। बशीर बद्र ने यहीं पर उर्दू के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं भी दी थीं। बशीर बद्र को आसानी भाषाओं में गजलें लिखने में महाभारत हासिल थी। उन्होंने गजल विधा में कई नए और ठेठ शब्दों को शामिल किया था। बतादें कि बीमारी के कारण बशीर बद्र ने कई सालों से शायरी से किनारा कर लिया था। 1987 में मेरठ में दंगों में बशीर बद्र का जलाया गया था घर उर्दू शायरी से लोगों के दिलों पर राज करने वाले बशीर बद्र का 1987 के मेरठ के सांप्रदायिक दंगों में उनका घर जला दिया गया था। इस घटना में उनकी कई ऐतिहासिक रचनाएं और कविताएं हमेशा के लिए जलकर राख हो गई थीं। इस घटना के बाद से वे हमेशा के लिए भोपाल में शिफ्ट हो गए थे। मेरठ कॉलेज में लेक्चरार रह चुके हैं बशीर बद्र 1973 में बशीर बद्र ने एएमयू से पीएचडी की थी और 12 अगस्त 1974 को उन्होंने मेरठ कॉलेज के उर्दू विभाग में बतौर लेक्चरर ज्वाइन किया था। वे शायरी के ऊंचे मुकाम पर थे। जिस वक्त उन्होंने मेरठ कॉलेज ज्वाइन किया वे शायरी की दुनिया में जाने पहचने नाम थे।यही वजह रही कि जब तक उन्होंने नौकरी की, तब तक उन्हें पीएचडी की उपाधि की जरूरत नहीं पड़ी। उनका नाम ही पीएचडी से बड़ा हो गया था। शंहशाह-ए-गजल बशीर बद्र को 2018 में मिला था जोश-ए-उर्दू अवार्ड उर्दू शायद बशीर बद्र को जोश-ए-उर्दू-2018 अवार्ड से नवाजा गया था। दुबई की साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू के पदाधिकारियों ने भोपाल स्थित उनके घर पहुंचकर यह अवार्ड दिया था। 6 जुलाई शुक्रवार को डॉ. बशीर बद्र का आवास पर जब अवार्ड पहुंचा तो पूरा घर ही चहक उठा था। दुबई की नामचीन साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू ने डॉ. बशीर बद्र को ‘जोश-ए-उर्दू-2018 के तहत शॉल ओढ़ाकर चांदी की हैंडमेड शील्ड दी थी।

कलेक्टरों की कार्यशैली पर CS अनुराग जैन नाराज, बोले- लोग आत्मदाह कर रहे, सिस्टम कहां है?

भोपाल ये बात मध्य प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया यानी मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बुधवार को कही। जैन की यह नाराजगी वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के एजेंडों पर किए जा रहे एक्शन की समीक्षा के दौरान सामने आई। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा कि खनिज के अवैध परिवहन में लगे बिना नंबर प्लेट और टूटी-फूटी नंबर प्लेट वाले वाहनों को राजसात करें। जितनी जल्दी हो, ऐसे वाहनों को नीलाम भी किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि खनन अपराधों के पुराने केस निकाले जाएं। पता लगाएं कि किन मामलों में अब तक सजा हुई है और यदि सजा नहीं हुई है तो तुरंत औपचारिकता पूरी कर सजा दिलाने के प्रयास किए जाएं। सीएस जैन ने कहा- सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई सर्विस डिलेवरी का सशक्त माध्यम हैं। यहां आने वाले मामलों में प्रशासन को संवेदना के साथ काम करना चाहिए। जनसुनवाई के दौरान अधिकारी मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं और शिकायत का संतुष्टिपूर्वक निराकरण करें। सीएम हेल्पलाइन के शत-प्रतिशत प्रकरणों को अटेंड करने की कार्यवाही करें। जनसुनवाई में जहर, सीएस का सवाल मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन बुधवार को एकदम कड़े मूड में थे। कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सीधे पूछा कि जनसुनवाई में लोग जहर खा रहे हैं, आत्मदाह कर रहे हैं, तो यह कैसा सुशासन है? उन्होंने कहा कि अवैध खनन करने वालों पर पुलिस और प्रशासन का कोई खौफ नहीं है। इसीलिए कोई भी आसानी से ट्रैक्टर या बाइक चढ़ाने की हिम्मत कर लेता है। यह हालत बदलनी ही होगी।सीएस ने साफ कहा कि कलेक्टर और एसपी की यह जिम्मेदारी है कि ऐसे लोगों पर सख्त एक्शन लिया जाए। ताकि दोबारा ऐसी घटनाएं न हों। खनन माफिया पर नई सख्ती मुख्य सचिव ने अवैध खनन और परिवहन पर बड़ा आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर एक भी गाड़ी बिना नंबर प्लेट या टूटी नंबर प्लेट के पकड़ी गई तो उसे सिर्फ जब्त नहीं किया जाएगा। उसे सीधे राजसात करके तुरंत नीलाम किया जाएगा। 104 हैंडपंप निजी कब्जे में होने पर नाराजगी जताई बैठक में पेयजल की समीक्षा के दौरान यह जानकारी सामने आई कि अलग-अलग जिलों में 104 हैंडपंप निजी लोगों के कब्जे में हैं। सीएस जैन ने इस बात पर नाराजगी जताते हुए कहा- ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई सरकारी हैंडपंप पर ही कब्जा कर ले। पानी सभी को मिलना चाहिए। संबंधित कलेक्टर ऐसे मामले में जल्द कार्यवाही कर जानकारी देंगे। इसके अलावा शहरों में पेयजल व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखने के निर्देश भी सीएस जैन ने कलेक्टरों को दिए। सिर्फ डीएपी नहीं, एनपीके के लिए भी दें टोकन खरीफ सीजन के लिए खाद वितरण की समीक्षा करते हुए सीएस जैन ने कहा- खाद का पर्याप्त भंडारण है। किसानों को ई-विकास पोर्टल के जरिये पंजीयन कर खाद देने का काम किया जाए। सिर्फ डीएपी के लिए ही टोकन न दें बल्कि एनपीके के लिए भी टोकन दें ताकि भीड़ की स्थिति न बने। जैन ने दुग्ध उत्पादन के लिए क्षीर धारा कार्यक्रम और नस्ल सुधार के कार्यक्रम भी ग्रामीण इलाकों में तेजी से चलाने के लिए कहा। पुल-पुलिया की मरम्मत कराने के निर्देश मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा- किसी भी जिले की प्रगति वहां होने वाले बैंक फाइनेंस से पता चलती है, कलेक्टर इसके लिए तेजी से काम कराएं। बारिश का मौसम आने वाला है, इसलिए पुल-पुलिया की मरम्मत और नवीनीकरण का काम पूरा करा लिया जाए। बरगी क्रूज हादसे की घटना के मद्देनजर सीएस ने कलेक्टरों से कहा है कि वे अपने जिले के जलाशयों में पहुंचने वाले पर्यटकों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। साथ ही पुराने खनन माफियाओं की फाइलें दोबारा खोलने का आदेश भी दिया गया है। यह देखा जाएगा कि किन मामलों में अब तक सजा नहीं हुई है। जहां भी सजा रुकी हुई हो, वहां तुरंत औपचारिकता पूरी करके सजा दिलाने की कोशिश की जाए। भोपाल-सिंगरौली कलेक्टर को फटकार राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान भोपाल कलेक्टर (आईएएस प्रियंक मिश्रा) को कड़ी फटकार लगाई गई है। जमीनों के नामांतरण और बंटान के मामलों में पेंडेंसी बढ़ती जा रही थी और समीक्षा भी नहीं हो रही थी। इस पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जाहिर की। वहीं सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल की भी जमकर क्लास लगाई गई। प्रदूषण, पेयजल संकट और कानून व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिए जाने पर उन्हें सख्त चेतावनी दी गई। सीएस अनुराग जैन ने एक बात और बिल्कुल साफ कर दी। उन्होंने कहा कि अब पुराने ढर्रे पर काम नहीं चलेगा। हर जिले को अपनी अर्थव्यवस्था खुद खड़ी करनी होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो जवाबदेही तय की जाएगी। जनसुनवाई में लापरवाही नहीं चलेगी सीएस ने यह भी कहा कि लोक सेवा गारंटी, सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई में आम जनता के साथ संवेदनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी। अगर ऐसा हुआ तो संबंधित अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई होगी। उन्होंने याद दिलाया कि इन तीनों माध्यमों से ही सरकार की छवि बनती और बिगड़ती है। औद्योगिक नीति की समीक्षा में कलेक्टरों को कहा गया कि अपनी नाकामी छुपाने के बजाय कृषि और उद्यानिकी से तालमेल बिठाकर जिले में औद्योगिक माहौल बनाएं। उन्होंने बताया कि जीएसडीपी (Gross State Domestic Product) में कृषि का हिस्सा 37 से बढ़कर 43 फीसदी हो गया है। वहीं, सिर्फ खेती से जिलों का पूरा विकास नहीं होगा, इसलिए उद्योगों पर भी ध्यान देना जरूरी है। ड्रग्स-नारकोटिक्स पर विशेष अभियान डीजीपी कैलाश मकवाना ने सभी एसपी को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों के आसपास फैले ड्रग्स के जाल को खत्म करके ड्रग फ्री जोन बनाया जाए। पोक्सो एक्ट और विस्फोटक अधिनियम का उल्लंघन करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। शांति भंग करने वाले और हुड़दंगियों से भी सख्ती से निपटने के निर्देश दिए गए। बैठक में कई और अहम फैसले बैठक में कई और जरूरी बातें भी सामने आईं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में 104 सरकारी हैंडपंपों पर रसूखदार या निजी लोगों ने कब्जा कर रखा है। कलेक्टरों को आदेश दिया गया है कि तुरंत कब्जा हटाएं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करें। नरवाई जलाने के मामले में लापरवाही पर जबलपुर और नरसिंहपुर के कलेक्टरों को भी फटकार लगाई गई। खरीफ सीजन में किसानों को खाद के टोकन सिर्फ डीएपी (Di-Ammonium Phosphate) के लिए नहीं, … Read more

बौखलाया ईरान! बंदर अब्बास पर वार के बाद US एयरबेस को बनाया निशाना

   तेहरान अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता लगातार विफल होती नजर आ रही है. इसी बीच ईरानी की IRGC ने दावा किया है कि उसने बंदर अब्बास पोर्ट के पास हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाते हुए हमला किया है. उधर, कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वह अपने देश की ओर दागी गई मिलाइलों और ड्रोन्स को रोक रहे हैं। तसनीम समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने स्थानीय समयानुसार सुबह 4:50 बजे बंदर अब्बास पोर्ट के पास हुए अमेरिकी हमले के बाद एक अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की है. हालांकि,  आईआरजीसी ने ये नहीं बताया कि उसने अमेरिका के किस बेस को निशाना बनाया है। IRGC ने अमेरिका को दी चेतावनी ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका को सीधे तौर पर बेहद सख्त चेतावनी जारी की है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि इस तरह के हमलों को दोबारा दोहराया गया तो ईरान की तरफ से इससे भी ज्यादा निर्णायक और घातक प्रतिक्रिया दी जाएगी और इसके गंभीर परिणामों के लिए केवल हमलावर जिम्मेदार होगा। इस भीषण गोलाबारी का असर अब पड़ोसी देशों पर भी साफ दिखने लगा है. क्षेत्र में बढ़े अचानक खतरे को देखते हुए कुवैत ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह अपनी एयरस्पेस की ओर दागे जा रहीं मिसाइलों और यूएवी (UAVs) को लगातार इंटरसेप्ट कर हवा में ही नष्ट कर रहे हैं। बंदर अब्बास पोर्ट के धमाके इससे पहले बुधवार रात को अमेरिका ने ईरान के अंदर एक और बड़े हवाई हमले को अंजाम दिया. रिपोर्ट के अनुसार, लगभग रात 1:30 बजे (स्थानीय समय) ईरान के बंदर अब्बास शहर के पूर्वी हिस्से से तीन धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिकी सेना ने रात भर ईरान में नए हमले किए, जिसमें एक ऐसे सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया, जिसके बारे में अधिकारियों का मानना ​​था कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सेना और कमर्शियल समुद्री आवाजाही के लिए खतरा पैदा कर रहा था. यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई है।

यूपी ने रचा इतिहास! गन्ना किसानों को 3.22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान

उत्तर प्रदेश ने गन्ना किसानों को किया 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऐतिहासिक भुगतान सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला राज्य है उत्तर प्रदेश, गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में भी शीर्ष पर प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना मूल्यों की दरों में 30 रुपये प्रति कुंतल की ऐतिहासिक वृद्धि भी की औसत चीनी परता में महाराष्ट्र व कर्नाटक से भी आगे निकला उत्तर प्रदेश लखनऊ, योगी सरकार गन्ना किसानों के लिए मसीहा साबित हुई है। किसानों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसानों को नियमित व समयबद्ध गन्ना मूल्य भुगतान कराया जा रहा है। योगी सरकार की नीतियों, पारदर्शी व तकनीक आधारित व्यवस्था ने गन्ना किसानों को वर्ष 2017 से अब तक कुल 3,22,722 करोड़ का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान कर इतिहास रचा है। भुगतान की धनराशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त हो गई। गन्ना एवं चीनी उद्योग अब प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। योगी सरकार किसानों की समृद्धि, युवाओं के रोजगार एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। औसत चीनी परता में भी उत्तर प्रदेश ने लंबी छलांग लगाते हुए अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। 9 साल में योगी सरकार ने रिकॉर्ड 3,22,722 करोड़ रुपये का भुगतान किया गन्ना किसानों को समय से भुगतान करने में योगी सरकार की नीति पूर्ववर्ती सरकारों पर भारी पड़ी। 9 साल में योगी सरकार ने रिकॉर्ड 3,22,722 करोड़ रुपये का भुगतान किया। योगी सरकार के निर्देश पर गन्ना किसानों को निरंतर भुगतान किया जा रहा है। पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना किसानों को 30831.81 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है, यानी लगभग 90 प्रतिशत किसानों को भुगतान किया जा चुका है। कुछ चीनी मिलों का भुगतान शेष है, जिन्हें भी जल्द भुगतान का निर्देश दिया गया है। योगी सरकार की पहल ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली के माध्यम से गन्ना क्षेत्रफल, सट्टा, कैलेंडरिंग और पर्ची जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। अब किसानों को उनकी गन्ना पर्ची सीधे मोबाइल पर प्राप्त होती है और भुगतान डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में पहुंचता है। औसत चीनी परता में महाराष्ट्र व कर्नाटक से भी आगे निकला उत्तर प्रदेश पेराई सत्र 2025-26 की बात करें तो उत्तर प्रदेश में कुल 121 चीनी मिलें संचालित हैं। इनमें उप्र राज्य चीनी निगम की 3, उप्र सहकारी चीनी मिल्स संघ की 23 व निजी क्षेत्र की 95 चीनी मिलें संचालित की जा रही हैं। इनके द्वारा 877.96 लाख टन गन्ने की पेराई कर 89.68 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया। उत्तर प्रदेश में 121, महाराष्ट्र में 210 चीनी मिलें संचालित हैं। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश का औसत चीनी परता (एवरेज शुगर रिकवरी) 10.21 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश ने इस मामले में भी अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया। महाराष्ट्र का चीनी परता 9.49 प्रतिशत, कर्नाटक का 8.19 प्रतिशत है। 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को दी आर्थिक मजबूती योगी सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना मूल्य की दरों में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि भी की। अगेती प्रजातियों के लिए 400 रुपये व सामान्य प्रजातियों के लिए 390 रुपये प्रति कुंतल की दर निर्धारित की गई। इस बढ़ोत्तरी से गन्ना किसानों को लगभग 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त गन्ना मूल्य भुगतान प्राप्त हुआ है। योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई। समय से भुगतान होने से प्रदेश के 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने में गन्ना विकास विभाग का भी महत्वपूर्ण योगदान है।