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अवैध शराब कारोबार पर सख्त हुए मंत्री देवांगन, बोले- परिवहन और बिक्री पर लगे रोक

मदिरा के अवैध परिवहन एवं बिक्री पर रोक लगाए: आबकारी मंत्री देवांगन पड़ोसी राज्यों से आने वाली शराब रोक लगाने के दिए निर्देश     रायपुर प्रदेश के वाणिज्यिक कर (आबकारी) मंत्री लखन लाल देवांगन नवा रायपुर स्थित जीएसटी भवन स्थित आबकारी आयुक्त कार्यालय में विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की और आगामी महीनों के लिए जिलेवार विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर आबकारी मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति हेतु ठोस रणनीति अपनाने, दुकानवार समीक्षा करने और अनुशासन के साथ कार्य संपादन के निर्देश दिए। बैठक में वाणिज्यिक कर आबकारी विभाग सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, आबकारी आयुक्त पदुम सिंह एल्मा, विशेष सचिव आबकारी देवेन्द्र भारद्वाज, आबकारी मुख्यालय , बेवरेजेस कारपोरेशन , मार्केटिंग कारपोरेशन के अधिकारियों सहित जिले से आए मैदानी अधिकारी उपस्थित थे।     आबकारी मंत्री देवांगन ने राज्य की अंतरराज्यीय सीमाओं पर स्थित आबकारी जांच चौकियों को अन्य राज्यों की मदिरा के विरुद्ध विशेष अभियान चलाने और सीसीटीवी कैमरों के सुचारू संचालन की निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने जिला अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि मदिरा के अवैध परिवहन एवं बिक्री पर कोचियों के विरूद्ध प्रभावी कार्य करें। सभी जिला अधिकारी यह सुनिश्चित करें आबकारी उपनिरीक्षक एवं नीचे का अमला अवैध शराब बिक्री करने वाले के विरूद्ध समझौता न करें।     इसके अलावा विभाग में प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मदिरा दुकानों में उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार मदिरा स्कंध (स्टाक) का संधारण सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया किया मदिरा दुकानों में उपभोक्ताओं के मांग के अनुरूप मदिरा की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर बिक्री न हो। उन्होंने अधिकारियों को मदिरा दुकानों में नियम और अनुशासन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के भी निर्देश दिए। दुकानों में उपलब्ध मदिरा को नियमानुसार दरों सहित रैकों में प्रदर्शित करने कहा गया, ताकि उपभोक्ताओं को पारदर्शिता और सुविधा मिल सके।     मंत्री ने बैठक में राजस्व लक्ष्य की जिलेवार समीक्षा करते हुए जिन जिलों ने अब तक लक्ष्य की प्राप्ति की है, उन्हें सतत् कार्य जारी रखने के निर्देश दिए गए। वहीं लक्ष्य से पीछे चल रहे जिलों को इसके कारणों की दुकानवार समीक्षा कर कमी की पूर्ति हेतु विस्तृत कार्य-योजना बनाकर तत्परता से अमल में लाने के निर्देश दिए गए। बैठक में अधिकारियों को इस बात की स्पष्ट हिदायत दी कि मदिरा में किसी प्रकार की मिलावट न होने पाए। इसके लिए सभी जिला अधिकारियों को समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण करने और वहां पाई गई अनियमितताओं पर तत्काल कार्रवाई और दोषी कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त कर ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, दुकानों में पेटीएम या अन्य कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पृथक काउंटर की व्यवस्था के भी निर्देश दिए गए।     आबकारी सचिव श्रीमती कंगाले ने प्रदेश में संचालित बारों, क्लबों, होटलों और ढाबों की आकस्मिक जांच करने तथा समय पश्चात संचालन अथवा अवैध मदिरा विक्रय करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अवैध मदिरा एवं अन्य मादक पदार्थों के निर्माण, परिवहन, तस्करी और विक्रय पर सख्त नियंत्रण रखने हेतु आवश्यकता पड़ने पर पुलिस विभाग से सहयोग लेने के निर्देश दिए गए।

TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह? काकोली घोष ने पार्टी के सभी पद छोड़े, ममता की बढ़ी टेंशन

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है. अब पार्टी को बड़ा झटका लगा है. बारासात से TMC पार्टी की लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने संगठन में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. पिछले कुछ समय से उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद की खबरें आ रही थीं, जिस पर अब इस इस्तीफे ने मुहर लगा दी है। प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजा पत्र सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अपना इस्तीफा तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेज दिया है. अपने पत्र में उन्होंने साफ किया है कि वह पार्टी संगठन के सभी पदों को छोड़ रही हैं. बता दें कि इससे पहले उन्होंने बारासात के जिलाध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वह कोई बड़ा कदम उठा सकती हैं। सांसद बनी रहेंगी काकोली घोष हालांकि, काकोली घोष ने अभी तक तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है. वह लोकसभा में बारासात सीट से टीएमसी की सांसद बनी रहेंगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका यह कदम पार्टी नेतृत्व को एक कड़ा संदेश है, जिससे यह साफ है कि वह संगठन के कामकाज के तरीके से खुश नहीं हैं। पार्टी में बढ़ता असंतोष ममता के लिए चिंता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से ही टीएमसी के अंदर कई सांसद और विधायक नाराज चल रहे हैं. काकोली घोष जैसी सीनियर नेता का इस तरह पदों से किनारा करना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी चिंता का विषय बन सकता है. फिलहाल इस पूरे मामले पर टीएमसी आलाकमान की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ममता बनर्जी के इस कदम से काकोली घोष आहत और नाराज चल रही हैं. काकोली घोष ने सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. काकोली घोष को टीएमसी के चीफ व्हिप से हटाए जाने के कुछ ही घंटों में केंद्र सरकार ने उनको वाई सिक्योरिटी दे दी थी. ऐसा तब था, जब अभिषेक बनर्जी से लेकर टीएमसी के तमाम नेताओं की सिक्योरिटी में कटौती की गई थी। एक दिन पहले ही काकोली घोष टीएमसी के छह विधायकों के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में भी शामिल हुई थीं. काकोली घोष टीएमसी की स्थापना के पहले से ममता बनर्जी की करीबी रही हैं। I PAC को मैनर्स नहीं, बदतमीजी से बात करते थे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी संगठन, चुनावी हार, आई-पैक की भूमिका और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह पिछले 40 वर्षों से पार्टी के साथ जुड़ी हुई हैं। उन्होंने वह दौर भी देखा है, जब पार्टी सत्ता में नहीं थी और कार्यकर्ताओं को सड़कों पर प्रताड़ित किया जाता था, लेकिन कुछ लोग बाहर से आकर पार्टी को नुकसान पहुंचा गए। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उन्होंने पार्टी के कठिन समय में संघर्ष किया और मेहनत के दम पर संगठन को मजबूत बनाने में योगदान दिया। मैं अच्छे समय में पार्टी में नहीं आई थी। जब लोग सड़कों पर पीटे जाते थे, तब भी मैं पार्टी के साथ थी। हमने लंबे संघर्ष के बाद पार्टी को मजबूत किया और करीब 20 साल बाद सत्ता हासिल की। व्यक्तिगत लाभ के लिए पार्टी में आए कुछ लोग काकोली घोष ने इशारों में उन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी निशाना साधा, जो पार्टी के सत्ता में आने के बाद जुड़े। उनके अनुसार, ऐसे कई लोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति में आए। उन्होंने संगठन को मजबूत करने में कोई विशेष योगदान नहीं दिया। बंगालविधानसभा चुनावों में टीएमसी की हार और चुनावी रणनीति तैयार करने वाली एजेंसी आई-पैक की भूमिका पर काकोली घोष दस्तीदार ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एजेंसी का काम करने का तरीका गलत था और उसके प्रतिनिधियों का व्यवहार पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति अपमानजनक था। ममता बनर्जी के नौकर नहीं टीएमसी कार्यकर्ता काकोली ने कहा कि हमारे कार्यकर्ता किसी के नौकर नहीं हैं। वे ममता बनर्जी और पार्टी के प्रति प्रेम और विश्वास के कारण काम करते हैं, लेकिन आई-पैक के लोगों ने उनके साथ बुरा व्यवहार किया, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी के कुछ सदस्य खुद को बहुत बड़ी सत्ता मानने लगे थे और स्थानीय नेताओं की राय को महत्व नहीं देते थे। उनके अनुसार, चुनाव प्रचार का संचालन करने वाली इस बाहरी एजेंसी के पास जमीनी राजनीति का पर्याप्त अनुभव नहीं था, जबकि पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे हैं। I-PAC में काम करने का बिल्कुल भी सलीका नहीं था। वे बहुत ही बदतमीज़ी से बात करते थे। हमारे ये कार्यकर्ता कोई नौकर नहीं हैं। हम इन्हें कोई तनख्वाह नहीं देते। ये तो ममता दीदी और पार्टी के प्रति अपने प्यार की वजह से काम करते हैं। वे लोगों के साथ बुरा बर्ताव करते थे, और उनका घमंड इतना बढ़ गया था कि आखिरकार उन्होंने हमारे साथ भी बुरा बर्ताव करना शुरू कर दिया। उन्हें ऐसा लगता था मानो वे प्रधानमंत्री से भी ज़्यादा ऊंचे ओहदे पर बैठे हों। मुझे नहीं लगता कि I-PAC सीधे तौर पर उनके (ममता बनर्जी के) नियंत्रण में था, क्योंकि I-PAC एक अलग ही संस्था है।

पाकिस्तान में इतिहास पर बवाल: ख्वाजा आसिफ ने माना- हिंदू थे हमारे पूर्वज, किताबों में फैलाया गया झूठ

इस्लामाबाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पाकिस्तान में पहचान और इतिहास को लेकर नई बहस छेड़ दी है. आसिफ ने खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तान के बच्चों को "गलत इतिहास" पढ़ाया जा रहा है और देश के लोग अपनी असली जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा, "हम पाकिस्तानी मुसलमान अपने हिंदू पूर्वजों से नफरत करते हैं. पाकिस्तान के आधे लोग झूठा दावा करते हैं कि उनके पूर्वज सऊदी अरब या ईरान से आए थे." उन्होंने कहा कि यह सोच जानबूझकर तैयार की गई ताकि पाकिस्तान की नई पीढ़ी अपनी सभ्यता की पहचान से कट जाए। ख्वाजा आसिफ ने इतिहास की किताबों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान में हिंदू शासकों को इतिहास से लगभग मिटा दिया गया. उन्होंने कहा, "हमने चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक को इतिहास की किताबों से हटा दिया क्योंकि वे हिंदू थे." उन्होंने आगे कहा, "मेरे पूर्वज हिंदू थे. क्या इससे मैं कम पाकिस्तानी हो जाता हूं?" आसिफ के मुताबिक पाकिस्तान में पढ़ाई जाने वाली किताबें ऐसे लोगों ने लिखीं जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को एक खास मानसिकता में ढालने की कोशिश की। पाकिस्तानी समाज की सोच बदली गई! ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अमेरिका की लड़ाइयों में पाकिस्तान को इस्तेमाल करने के लिए समाज की सोच बदली गई और उसी हिसाब से इतिहास को पेश किया गया. उन्होंने कहा, "हमारे बच्चे तथ्यात्मक इतिहास नहीं पढ़ रहे. आज पाकिस्तान में कई लोगों को यह तक नहीं पता कि चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक कौन थे। ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब वह पहले से ही अमेरिका और इजरायल के मुद्दे पर विवादों में घिरे हुए हैं. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को मान्यता देने की अपील की थी। पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा- आसिफ इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आसिफ ने कहा था, "मुझे निजी तौर पर नहीं लगता कि हमें ऐसे किसी समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी बुनियादी सोच से टकराता हो." उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान का पुराना रुख आज भी कायम है और जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश नहीं बनता, तब तक इस्लामाबाद इजरायल को मान्यता नहीं देगा। पाकिस्तान ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी इजरायल को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है. यहां तक कि पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भी साफ लिखा होता है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है. आसिफ के बयान के बाद अमेरिका में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली. अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इजरायल के प्रति पाकिस्तान की सोच लंबे समय से नकारात्मक रही है और ऐसे में अमेरिका-ईरान या इजरायल से जुड़े मामलों में उसकी मध्यस्थता "समस्याओं से भरी" हो सकती है।

सनातन पर कथित टिप्पणी से बढ़ा विवाद, ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सिलीगुड़ी में ममता बनर्जी के खिलाफ एक वकील की शिकायत पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने पिछले साल कोलकाता में ईद के एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू धर्म को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिससे करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर ममता बनर्जी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। ममता के खिलाफ धारा 351 (1)- आपराधिक धमकी, धारा 352- शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर किया गया अपमान और धारा 353- विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी, नफरत या द्वेष की भावना को बढ़ावा देना के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह शिकायत वकील रिंकी चटर्जी द्वारा दर्ज कराई गई है। उन्होंने अपनी शिकायत में साल 2025 में कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित ईद-उल-फितर के कार्यक्रम में दिए गए ममता बनर्जी के भाषण का हवाला दिया है। क्या कहा था ममता ने? पिछले साल ईद के मंच से भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हमला बोलते हुए ममता बनर्जी ने कथित तौर पर कहा था, "मैं उस गंदे धर्म को नहीं मानती जिसे इस 'जुमला पार्टी' ने जानबूझकर गढ़ा है।" आरोप है कि उन्होंने भाजपा द्वारा प्रचारित हिंदू धर्म के स्वरूप को गंदा धर्म कहकर संबोधित किया था। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख ने 31 मार्च 2025 को एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था, 'क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री (तत्कालीन) ममता बनर्जी के लिए सनातन धर्म एक गंदा धर्म है? उनके शासनकाल में कई हिंदू-विरोधी दंगे होने के बावजूद, उनमें हिंदुओं का मजाक उड़ाने और उनकी आस्था का अपमान करने की हिम्मत है। एक बार फिर उन्होंने मुसलमानों को हिंदुओं को निशाना बनाने की खुली छूट दे दी है। इस बार एक ऐसे धार्मिक मंच से, जो ईद मनाने के लिए था। उन पर शर्म आती है।' वहीं, शिकायतकर्ता रिंकी चटर्जी का कहना है कि एक मुस्लिम धार्मिक सभा के मंच से सनातन धर्म को गंदा कहना पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इससे भारत सहित दुनिया भर के हिंदुओं का अपमान हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कानून इस मामले में उचित और सख्त कार्रवाई करेगा। रिंकी चटर्जी ने अपनी शिकायत में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्ववर्ती सरकार के मंत्रियों ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार हिंदू धर्म को निशाना बनाया है, जिसमें ममता बनर्जी का यह बयान सबसे गंभीर था। शिकायत में यह भी कहा गया है कि ममता बनर्जी ने साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी हिंदू समुदाय को परोक्ष रूप से धमकी दी थी। TMC के भीतर से उठे विरोध के सुर इस कानूनी कार्रवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही है। जब इस एफआईआर को लेकर टीएमसी की दार्जिलिंग इकाई के महासचिव और पेशे से वकील अत्री शर्मा से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने पार्टी प्रवक्ता के रूप में तो कुछ नहीं कहा लेकिन व्यक्तिगत तौर पर एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया। अत्री शर्मा ने स्वीकार किया कि जब तृणमूल सत्ता में थी तब भी पार्टी के भीतर कई लोग इस बयान के खिलाफ थे। उन्होंने कहा, "उस समय सत्ता की कमान संभालते हुए ममता बनर्जी के लिए इस तरह की टिप्पणी करना वास्तव में अनुचित था। यहां तक कि हममें से जो लोग उस समय से पार्टी के प्रति वफादार रहे हैं, उन्होंने भी उन विशेष टिप्पणियों का कभी समर्थन नहीं किया। देश के हर नागरिक को शिकायत दर्ज कराने का नैतिक अधिकार है।"

सोना-चांदी खरीदने वालों की बल्ले-बल्ले! चांदी में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम गोल्ड का भाव भी टूटा

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमत (Gold-Silver Price Fall) में तीसरे कारोबारी दिन एक बार फिर बड़ी गिरावट आई है. मंगलवार को रेड जोन में बंद होने के बाद बुधवार को MCX पर वायदा कारोबार की ओपनिंग के कुछ देर बाद अचानक चांदी के दाम में बड़ी गिरावट आ गई और एक झटके में 4000 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हो गई. तो वहीं दूसरी ओर सोने का भाव भी फिसला है और 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट 600 रुपये से ज्यादा घट गया। सप्ताह के तीन दिनों में ही अब तक चांदी 5600 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हुई है और इस कीमती धातु का भाव 2,71,846 रुपये से गिरकर 2,66,200 रुपये पर आ गया है. वहीं सोना इस ताजा गिरावट के बाद अब अपने हाई लेवल से 46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है। MCX पर सोना-चांदी में गिरावट मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार को 3 जुलाई वाली चांदी की वायदा कीमत खुलते ही उछली और 2,72,628 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई, लेकिन फिर अचानक इस कीमती धातु के दाम में बड़ी गिरावट शुरू हो गई और देखते ही देखते ये अपने पिछले बंद 2,70,628 रुपये से कम होकर झटके में 2,66,200 रुपये पर आ गया. यानी 1 Kg Silver Price 4428 रुपये कम हो गया। चांदी की कीमत में इस सप्ताह सिर्फ 3 कारोबारी दिनों में ही अब तक 5646 रुपये प्रति किलो की गिरावट आ चुकी है. वहीं जनवरी के अपने हाई लेवल 4,57,328 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में अब चांदी 1,91,128 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई है। अब दूसरी कीमती धातु सोना की बात करें, तो एमसीएक्स पर कारोबार के दौरान ये पीली धातु भी फिसली है. अपने पिछले बंद 1,57,616 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम होकर बुधवार को मार्केट ओपन होने के कुछ देर बाद गिरते हुए 1,56,953 रुपये पर आ गया. वहीं 5 जून की एक्सपायरी वाले वायदा सोना (10 Gram 24 Karat Gold Rate) अपने हाई लेवल 2,02,984 रुपये से अब 46,031 रुपये कम हो चुका है।     दिल्ली में क्या है Gold-Silver का हाल? एमसीएक्स के बाद अब घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की कीमत में आए बदलाव पर बात करें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का रेट पिछले बंद 1,57,611 रुपये से गिरकर 1,57,040 रुपये पर आ गया. वहीं चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और ये मंगलवार के बंद 2,66,213 रुपये प्रति किलो से 4503 रुपये सस्ती होकर 2,61,710 रुपये प्रति किलो पर खुली। सोने-चांदी में गिरावट की वजह सोने-चांदी के दाम में गिरावट के पीछे के कारणों को देखें, तो एक बड़ी वजह जियो-पॉलिटिकल तनाव है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बात नहीं बन पा रही है, ट्रंप की धमकियों का सिलसिला, होर्मुज पर चिंता और बढ़ा रहा है. इस बीच टेंशन में इजाफे से डॉलर में तेजी आ रही है और इससे सोना-चांदी पर दबाव बढ़ा है. निवेशकों के मुनाफावसूली करने की वजह से गोल्‍ड-सिल्‍वर के दाम में गिरावट दिखी है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण संवैधानिक करार

नई दिल्ली मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्य (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव आयोग के पास SIR का अधिकार है. एसआईआर पर दायर यायिकाओं से जुड़े मामले में सर्वोच्च अदालत ने मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करने के भारत निर्वाचन आयोग के अधिकार को बरकरार रखा है. अदालत ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि ECI ने SIR का प्रयोग करके अपनी वैधानिक शक्तियों के बाहर जाकर कार्य किया है. इसे 'अल्ट्रा वायर्स' भी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह कार्य-प्रणाली उस सामान्य प्रक्रिया से भिन्न है जो आमतौर पर अपनाई जाती है।  SIR पर सीजेआई ने क्या कुछ कहा? SIR पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि सभी पक्षों की अलग-अलग दलीलों पर गौर करने के बाद, और घटनाओं के क्रम को देखने के बाद, पार्टियों की ओर से पेश की गई दलीलों और रिकॉर्ड में रखी गई सामग्री को देखने के बाद, हमारा मानना ​​है कि इन मुद्दों का एनालिसिस करने की ज़रूरत है. सीजेआई ने तीन सवालों के जरिए अपनी बात रखीं।  SIR पर सीजेआई के तीन सवाल     क्या भारत के इलेक्शन कमीशन के पास SIR जैसी कार्रवाई करने का अधिकार है?     क्या SIR के तहत जांच किसी जायज़ मकसद पर आधारित है और अगर ऐसा है, तो क्या इलेक्शन कमीशन द्वारा अपनाए गए उपाय, हासिल किए जाने वाले लक्ष्यों के हिसाब से सही हैं?     क्या SIR के तहत जांच करने में इलेक्शन कमीशन द्वारा अपनाया गया तरीका रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट, 1950 के नियमों के खिलाफ़ है या उनका उल्लंघन करता है? मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर चुनाव आयोग को एसआईआर कराने का अधिकार है, तो यह भी देखना होगा कि उसकी प्रक्रिया क्या होगी। हालांकि, केवल प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के आधार पर पूरे एसआईआर को अवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। पीठ ने यह भी कहा कि यह सवाल उठाया गया कि क्या इस समय एसआईआर कराने की कोई वैध आवश्यकता है। अदालत की राय में एसआईआर के दौरान उठाए गए कदम जरूरत के मुताबिक थे। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एसआईआर बिहार में चुनाव प्रक्रिया और स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक दायित्व से ध्यान नहीं भटकाता। उन्होंने मतदाताओं पर खुद को साबित करने का बोझ डालने वाली दलील को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने पुराने निवास स्थान से कहीं और रहने लगा है, तब भी वह पुरानी एसआईआर प्रक्रिया से बाहर नहीं हो जाता। उसका या उसके परिवार का नाम पुराने रिकॉर्ड में मौजूद होगा। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग ने दस्तावेजों की विश्वसनीयता के आधार पर उन्हें सूची में शामिल किया है और इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह नहीं माना जा सकता कि एसआईआर का उद्देश्य लोगों को मतदाता सूची से बाहर करना था। अगर कोई दस्तावेज सही नहीं पाया जाता है, तो चुनाव आयोग मतदाता सूची में नाम शामिल करने से इनकार कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आयोग नागरिकता तय कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए क्या-क्या टिप्पणी की, उन्हें बिंदुवार जानते हैं- 1. चुनाव आयोग की शक्तियां बरकरार सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे निष्पक्ष और शुद्ध मतदाता सूची तय करने का अधिकार है. अदालत ने यह भी माना कि विशेष परिस्थितियों में अलग प्रक्रिया अपनाना संविधान और कानून के खिलाफ नहीं है. इसलिए SIR पूरी तरह वैध है और इसे प्रोसेस करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है. आयोग इसकी शक्ति रखता है. 2. कोई प्रक्रिया थोड़ी अलग हो तो अवैध नहीं हो जाती है- सुप्रीम कोर्ट बिहार में यह प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह सामान्य संशोधन प्रक्रिया से अलग है और मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है. अदालत ने कहा, 'यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है. 11 दस्तावेजों पर विचार करने और हमारे आदेश के माध्यम से आधार कार्ड को शामिल किए जाने के बाद हम इस तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते कि चुनाव द्वारा मांगे गए दस्तावेजों का समूह मनमाना है." सुप्रीम कोर्ट की खास टिप्पणी- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि SIR प्रक्रिया को केवल इसलिए 'अल्ट्रा वायर्स' (अवैध) करार देकर रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह मतदाता सूचियों के संशोधन की सामान्य प्रोसेस से अलग है. 3. वोटर लिस्ट से नाम हटना, नागरिकता जाना नहीं- सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने SIR की प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मतलब यह नहीं है कि किसी की नागरिकता खत्म हो गई. यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि याचिकाकर्ताओं और विपक्षी दलों का कहना था कि चुनाव आयोग का SIR अभियान 'पिछले दरवाजे से नागरिकता जांच' जैसा है. 4. नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं- सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग नागरिकता के सवाल को सिर्फ इस सीमित दायरे में देख सकता है कि किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए या हटाया जाए. अदालत ने साफ कहा कि चुनाव आयोग किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है वह व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं रहा. नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं है. 5.  SIR 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' और संबंधित नियमों के विपरीत नहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि SIR कानूनी रूप से मान्य और उचित है इसलिए यह 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' (RP Act) का उल्लंघन भी नहीं करता है. पीठ ने कहा कि अदालत का निष्कर्ष है कि एसआईआर संविधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की कसौटी पर खरा उतरता है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इतने विस्तृत कार्य को देखते हुए चुनाव आयोग को नियम और प्रक्रिया तय करने का अधिकार है। चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं करता। हालांकि, वह संदिग्ध लोगों के मामलों को … Read more

नौतपा में भी नहीं मिली राहत, MP में भीषण गर्मी जारी; अब आंधी-बारिश की चेतावनी

भोपाल  मध्यप्रदेश में नौतपा की शुरुआत भले ही आंधी और बूंदाबांदी के साथ हुई हो, लेकिन गर्मी का सितम कम नहीं हुआ। प्रदेश के 16 शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि 28 मई से अगले तीन दिन तक कई जिलों में प्री-मानसून एक्टिविटी तेज हो सकती है। तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।   एमपी में नौतपा के शुरुआती 2 दिन आंधी-बारिश का दौर रहा। वहीं, 28 मई से लगातार 3 दिन तक प्रदेश के अधिकांश हिस्से में पानी गिरने का अलर्ट है। IMD (मौसम केंद्र) भोपाल की माने तो यह प्री-मानसून की दस्तक है। 10 से 16 जून के बाद प्रदेश में मानसून एंट्री कर सकता है।  बुधवार को निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में तीव्र लू का रेड अलर्ट है। टीकमगढ़ में रात में पारा बढ़ा हुआ रहेगा। वहीं, ग्वालियर, जबलपुर में तीव्र लू का अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल में भी लू चल सकती है। खजुराहो और नौगांव बने हीट सेंटर मंगलवार को छतरपुर का खजुराहो प्रदेश में सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। नौगांव में पारा 45.6 डिग्री तक पहुंच गया। दतिया में 45.2 डिग्री, दमोह, सतना और टीकमगढ़ में 45 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। रीवा 44.8 डिग्री और राजगढ़ 44.6 डिग्री के साथ भीषण गर्मी की चपेट में रहे। ग्वालियर, श्योपुर, गुना, नरसिंहपुर, सागर, मंडला, मुरैना और रायसेन समेत कई शहरों में भी पारा 44 डिग्री के आसपास पहुंच गया। बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ज्यादा गर्म रहा, जहां तापमान 44.1 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 43.2 डिग्री, जबलपुर में 43.9 डिग्री, उज्जैन में 42 डिग्री और इंदौर में 41.2 डिग्री तापमान रहा। नौतपा में पहली बार नहीं बदला मौसम भोपाल में नौतपा के दौरान बारिश या बूंदाबांदी का सिलसिला नया नहीं है। पिछले 14 साल में 7 बार नौतपा के दौरान बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि 2 बार हल्की बूंदाबांदी हुई थी। इस बार भी शुरुआती दिनों में मौसम ने करवट ली है। हालांकि 2018 और 2019 जैसे साल में नौतपा के दौरान रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी थी और औसत तापमान 43 डिग्री से ऊपर पहुंच गया था। कई जिलों में लू और तीव्र लू का अलर्ट रेड अलर्ट: निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा। ऑरेंज अलर्ट: ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, सीधी, सिंगरौली, मंडला, बालाघाट समेत 19 जिले। येलो अलर्ट: भोपाल, उज्जैन, विदिशा, रायसेन, सीहोर, देवास, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर सहित 22 जिले। इधर, इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, हरदा और नर्मदापुरम जैसे जिलों में तेज गर्मी का असर बना रहेगा। दोपहर में बाहर निकलने से बचने की सलाह मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे के बीच विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जरूरी काम होने पर ही बाहर निकलें, पर्याप्त पानी पीते रहें और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें। बच्चों और बुजुर्गों को खास सतर्क रहने को कहा गया है।  

मौसम का बड़ा यू-टर्न! कल से आंधी-तूफान और तेज बारिश की चेतावनी

नई दिल्ली देश के अलग-अलग राज्यों में अगले 24 से 48 घंटों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिल सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने पूर्वानुमान में इसकी जानकारी दी है। आईएमडी ने कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके अगले 2-3 दिनों में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में दस्तक देने की संभावना है। इसके लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में 28 मई से आंधी-बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान 60-80 किमी/घंटे की रफ्तार से चक्रवाती तूफान भी आ सकता है। आईएमडी के मुताबिक, अगले 24 घंटे के दौरान उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लू और रात में उमस वाली गर्मी का प्रकोप रहेगा। हालांकि, इसके बाद राहत मिल सकती है। 28 और 29 मई को पूरे उत्तर प्रदेश में धूल भरी आंधी चलने की आशंका है। इस दौरान 60 से 80 किमी/घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। अलग-अलग हिस्सों में ओलावृष्टि की भी चेतावनी है। इसके बाद तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। बिहार में आंधी-तूफान का अलर्ट 27 से 30 मई के दौरान बिहार में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होगी। 27 और 29 मई को बिहार में कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। सबसे गंभीर चेतावनी 29 मई के लिए है। इस दिन 80 किमी/घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी और तूफान आने की आशंका है। दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में भीषण लू की स्थिति बनी रहेगी। 28-29 मई को इन राज्यों में मौसम पूरी तरह पलट जाएगा। दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में ओलावृष्टि के साथ 60 से 80 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज आंधी की संभावना है, जिससे तपती गर्मी से भारी राहत मिलेगी। पहाड़ों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में छिटपुट स्थानों पर लू चलेगी। गरज-चमक के साथ अलग-अलग जगहों पर बारिश होगी। 28 और 29 मई को इन तीनों पहाड़ी राज्यों में ओलावृष्टि की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 50 से 70 किमी/घंटे रहने की संभावना है। आईएमडी ने इसके लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कैसा रहेगा बंगाल का मौसम पश्चिम बंगाल में 27 से 29 मई के दौरान 50 से 70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान की संभावना है। 27 मई को भारी बारिश हो सकती है। वहीं, झारखंड में अगले 7 दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा। 27 से 29 मई के बीच यहां 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ चलने की संभावना है। 27 मई को यहां लू का भी असर रहेगा। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का मौसम मध्य प्रदेश में 27 मई को भीषण लू की स्थिति रहेगी। 28 से 30 मई के बीच 40-50 किमी/घंटे की तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश शुरू होगी, जिससे तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। छत्तीसगढ़ में 27 और 28 मई को लू चलने के बाद 27 से 30 मई के दौरान राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ेंगी, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी।

सिंहस्थ 2028 में शिप्रा स्नान का मिलेगा दिव्य लाभ, CM डॉ. यादव का बड़ा ऐलान

सिंहस्थ: 2028, श्रद्धालुओं को मिलेगा माँ शिप्रा के जल से स्नान का पुण्य लाभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव गरिमामय रहा शिप्रा तीर्थ परिक्रमा का समापन समारोह सुगम संगीत संध्या में दरभंगा की सुश्री मैथिली ठाकुर ने दी संगीतमयी प्रस्तुति भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ : 2028 में 30 किलोमीटर से अधिक लंबाई में निर्मित शिप्रा के घाट श्रद्धालुओं को पुण्य स्नान का लाभ प्रदान करेंगे। मां शिप्रा के स्वच्छ जल की उपलब्धता आयोजन को पावन बनाएगी। लगभग छह दशक बाद यह संभव होगा जब श्रद्धालु सिर्फ माँ शिप्रा के प्रवाहमान जल से सिंहस्थ के लिए पहुंचकर स्नान कर सकेंगे। गत सिंहस्थ : 2016 में माँ नर्मदा के जल से स्नान की सुविधा प्राप्त होने के बावजूद श्रद्धालुओं ने कामना की थी कि मां शिप्रा का जल पूरी तरह से प्रवाहित हो और स्नान लाभ ले सकें। श्रद्धालुओं की आकांक्षा को पूर्ण करने के लिए राज्य सरकार ने आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। बाबा महाकाल और संतों के आशीर्वाद से श्रेष्ठ प्रबंध कर हम सिंहस्थ: 2028 को यादगार बनाएंगे। सिंहस्थ के आयोजन से नए कीर्तिमान बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शिप्रा तीर्थ परिक्रमा के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मां शिप्रा के आशीर्वाद से समारोह में अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहे हैं। दीपामलिकाएं देखकर लगता है जैसे दीप पर्व आ गया हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कामना की कि सभी को यश प्राप्त हो। त्रिवेणी से सिद्धनाथ तक शिप्रा जी के घाट पवित्र माने जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ की दृष्टि से अनेक कार्य संचालित हैं, जो सिंहस्थ के आयोजन को श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने का कार्य करेंगे। भारत की मेलजोल की उत्कृष्ट परम्परा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास के साथ विरासत का संरक्षण भी हो रहा है। हाल ही में हुए न्यायालय के निर्णय भी परिपालन की दृष्टि से स्वर्णकाल का आभास करवाते हैं। देश के नागरिक सभी निर्णयों पर भरोसा करते हुए परस्पर सहयोग और समरसता का परिचय दे रहे हैं। अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के भूमि-पूजन और लोकार्पण में ऐसे सभी लोग उपस्थित हुए जिन्होंने मंदिर के संबंध में वर्षों तक न्यायालय में मुकदमा लड़ा। हमारे देश में मेलजोल की उत्कृष्ट परम्परा है। राजभोज का उज्जैन से लेकर भोपाल तक संबंध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजाभोज का उज्जैन से लेकर भोपाल तक संबंध है। धार में भोजशाला में मां वागदेवी की प्रतिमा स्थापित होगी। न्यायालय के निर्णय के बाद यह मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का शासन काल सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल की याद दिलवाता है, जिसमें प्रत्येक नागरिक का हित सर्वोपरि रहा। जल गंगा संवर्धन अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने तीन माह से अधिक अवधि के जल गंगा संवर्धन अभियान में कुओं- तालाबों, नदियों, पोखर, जलाशय और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण संवर्धन के कार्यों का संचालन किया है। इसमें जनता की भागीदारी भी हो रही है। मध्यप्रदेश नदी जोड़ो अभियान के क्रियान्वयन में अग्रणी बना है। समारोह में दरभंगा से कार्यक्रम प्रस्तुति के लिए आई गायिका और बिहार विधानसभा की सदस्य सुश्री मैथिली ठाकुर ने भजन प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांस्कृतिक कार्यक्रम से पूर्व सुश्री ठाकुर का मध्यप्रदेश आगमन पर स्वागत किया।  

CM डॉ. यादव आज करेंगे ‘सदानीरा समागम’ का शुभारंभ, भारत भवन में होगा आयोजन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को भारत भवन में सदानीरा समागम का करेंगे शुभारंभ जल संरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा पर होगा राष्ट्रीय विमर्श भारत भवन में 27 मई से 2 जून तक चलेगा सात दिवसीय समागम देश-विदेश के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और कलाकार होंगे शामिल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, चित्रकला कार्यशाला और जल-केंद्रित प्रदर्शनियां होंगी मुख्य आकर्षण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बुधवार 27 मई को भारत भवन में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक उत्सव “सदानीरा समागम” का शुभारंभ करेंगे। वीर भारत न्यास द्वारा जल संरक्षण, भारतीय संस्कृति, पंचमहाभूतों तथा सतत विकास के विषयों पर केंद्रित यह गरिमामयी आयोजन 2 जून तक चलेगा, जिसमें देश-विदेश के विद्वान, पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और कलाकार सहभागिता करेंगे। उद्घाटन समारोह में खेल एवं युवा कल्याण और सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर और संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी उपस्थित रहेंगे। वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि इस सात दिवसीय समागम में भारतीय दर्शन के पंचमहाभूत-जल, पृथ्वी, वायु, आकाश और अग्नि-पर आधारित विभिन्न वैचारिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में भूगर्भीय जल स्रोत, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण और पारंपरिक ज्ञान पर देश-विदेश के विशेषज्ञ गहराई से मंथन करेंगे। इस राष्ट्रीय विमर्श में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), आईआईएम बोधगया जैसी देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभिन्न कॉर्पोरेट घरानों के सीएसआर प्रमुख भी शामिल होकर अपने विचार साझा करेंगे। समागम में वैचारिक मंथन के साथ प्रतिदिन सायंकाल सांस्कृतिक और रचनात्मक आयोजनों की धूम रहेगी, जिसमें नृत्य-नाटिकाएं, लोकगायन और रंगमंचीय प्रस्तुतियां शामिल हैं। इस दौरान भारतीय नौसेना बैंड की सिम्फनी, 'गोवर्धन लीला' और 'गंगा यात्रा' की प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण होंगी। इसके साथ ही 'जल, जंगल, जीवन' पर केंद्रित राष्ट्रीय जनजातीय चित्रांकन कार्यशाला और पारंपरिक चित्र शैलियों में जल कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर के नामचीन कलाकार हिस्सा लेंगे। आयोजन स्थल पर म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, बरकतुल्ला विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय के सहयोग से जलचर जीवन, मध्यप्रदेश के जल गंगा संवर्धन अभियान, लघु चित्रों में जल और भूगर्भीय जल स्रोतों पर आधारित चार विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। कार्यक्रम में जल और संस्कृति पर आधारित महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा, जिनमें वीर भारत न्यास और मैपकॉस्ट द्वारा प्रकाशित 'अंतर्जली यात्रा', 'पुरोवाक्', प्रेमशंकर शुक्ल की 'आत्मा की घाटी में पानी का संगीत' और राजेश्वर त्रिवेदी की 'जल, संस्कृति और स्थापत्य' शामिल हैं। इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में भारत भवन, मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय, जनसंपर्क विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, दत्तोपन्त ठेंगड़ी शोध संस्थान, यूनाइटेड कॉन्शसनेस, सेज, एलएनसीटी और सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी सहित केन्द्रीय भूजल बोर्ड, नर्मदा समग्र जैसी अनेक संस्थाएं और जिला प्रशासन भोपाल सहयोगी के रूप में अपना सक्रिय योगदान देंंंगे।