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ज्योति बसु और ममता सरकार में नहीं हुआ जो, क्या अब सुवेंदु अधिकारी करेंगे बड़ा फैसला?

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की राजनीति बदलते ही अब उन मुद्दों पर भी तेजी दिखने लगी है, जो दशकों तक फाइलों और विवादों में दबे रहे. कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के भीतर मौजूद 136 साल पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद को लेकर फिर से हलचल तेज हो गई है. यह वही मस्जिद है, जिसे लेकर पिछले करीब 30 साल से केंद्र सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी लगातार चिंता जताती रही थी. लेकिन हर बार मामला धार्मिक संवेदनशीलता और राजनीतिक टकराव के कारण आगे नहीं बढ़ पाया. अब बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तस्वीर बदलती दिख रही है. सूत्रों के मुताबिक नई सरकार और केंद्र के बीच तालमेल बढ़ने के बाद मस्जिद को एयरपोर्ट परिसर से बाहर शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. यही वजह है कि प्रशासन, एयरपोर्ट अथॉरिटी और जिला अधिकारियों की लगातार बैठकें हो रही हैं. सवाल सिर्फ एक इमारत का नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों और बंगाल की नई राजनीतिक दिशा का भी बन चुका है।  दिलचस्प बात यह है कि यह मस्जिद एयरपोर्ट बनने से भी पहले की बताई जाती है. स्थानीय लोग इसे बांकड़ा मस्जिद के नाम से जानते हैं. मस्जिद रनवे के बेहद करीब मौजूद है और इसी कारण एयरपोर्ट संचालन में लंबे समय से दिक्कतें आ रही हैं. एविएशन अधिकारियों का दावा है कि मस्जिद की वजह से सेकेंडरी रनवे का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा. बड़े इंटरनेशनल विमानों की लैंडिंग और आधुनिक ILS सिस्टम लगाने में भी रुकावट बनी हुई है. यही कारण है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी लंबे समय से इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव देती रही. अब सूत्र बता रहे हैं कि ईद-उल-अजहा के बाद इस मुद्दे पर बड़ा फैसला हो सकता है. हालांकि प्रशासन फिलहाल इसे पूरी तरह आपसी सहमति और शांति के साथ हल करने की रणनीति पर काम कर रहा है. मस्जिद कमेटी से भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है और अगले हफ्ते फिर अहम बैठक होने की संभावना है।  एयरपोर्ट सुरक्षा बनाम धार्मिक ढांचा, अब तेज हुई हलचल     कोलकाता एयरपोर्ट के भीतर मौजूद यह मस्जिद सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एयर ट्रैफिक ऑपरेशन के लिए भी बड़ी चुनौती मानी जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह ढांचा एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल से करीब 150 मीटर अंदर और सेकेंडरी रनवे से सिर्फ 165 मीटर की दूरी पर मौजूद है. अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों के अनुसार सक्रिय रनवे के 240 मीटर के दायरे में कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए. इसी वजह से एयरपोर्ट अधिकारियों को रनवे के टचडाउन पॉइंट को 88 मीटर पीछे शिफ्ट करना पड़ा था।      हालांकि मौजूदा रनवे छोटे और मीडियम साइज के विमानों के लिए पर्याप्त है, लेकिन बोइंग 787 और एयरबस A330 जैसे बड़े विमानों के संचालन में परेशानी आती है. एयरपोर्ट सूत्रों का कहना है कि अगर यह बाधा हटती है तो कोलकाता एयरपोर्ट की इंटरनेशनल क्षमता और बढ़ सकती है. यही नहीं, कोहरे के दौरान इस्तेमाल होने वाला एडवांस ILS सिस्टम भी इस क्षेत्र में पूरी तरह इंस्टॉल नहीं हो पाया है. इससे सर्दियों में फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित होते हैं।  30 साल तक क्यों अटका रहा मामला?     एयरपोर्ट अथॉरिटी ने पहली बार इस मस्जिद को शिफ्ट करने का प्रस्ताव करीब तीन दशक पहले दिया था. उस दौरान ज्योति बसु सरकार थी. इसके बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य और फिर ममता बनर्जी सरकार के समय भी यह मुद्दा उठा, लेकिन हर बार राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलता के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया. प्रशासन को डर था कि किसी भी जल्दबाजी से तनाव पैदा हो सकता है।      अब सत्ता परिवर्तन के बाद माहौल बदला हुआ दिखाई दे रहा है. नई सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रही है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहले भी सार्वजनिक रूप से एयरपोर्ट सुरक्षा और ऑपरेशनल दिक्कतों का मुद्दा उठा चुके हैं. सूत्रों का दावा है कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बढ़ने के बाद अब इस प्रोजेक्ट को गंभीरता से आगे बढ़ाया जा रहा है।  मस्जिद कमेटी ने क्या कहा? सूत्रों के मुताबिक मस्जिद कमेटी ने भी बातचीत में सहयोग का संकेत दिया है. कमेटी का कहना है कि वे एयरपोर्ट के विकास और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के खिलाफ नहीं हैं. लेकिन वे चाहते हैं कि पूरी प्रक्रिया सम्मानजनक और सहमति के साथ हो. कमेटी ने यह भी मांग रखी है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठनों से भी राय ली जाए।  फिलहाल प्रशासन वैकल्पिक जमीन और नई मस्जिद के ब्लूप्रिंट पर काम कर रहा है. बताया जा रहा है कि नई जगह पहले से ज्यादा बड़ी और सुविधाजनक हो सकती है. अधिकारियों की कोशिश है कि ईद के बाद इस मुद्दे पर सहमति का अंतिम फार्मूला तैयार कर लिया जाए।  हाई सिक्योरिटी के बीच होती है नमाज मौजूदा समय में इस मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई जाती है. नमाजियों को CISF की जांच से गुजरना पड़ता है. इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट के हाई सिक्योरिटी जोन के भीतर बस से मस्जिद तक ले जाया जाता है. रोजाना 10 से 25 लोग यहां नमाज पढ़ने आते हैं, जबकि शुक्रवार को यह संख्या 80 तक पहुंच जाती है।  सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि एयरसाइड के भीतर किसी भी सिविलियन मूवमेंट से ऑपरेशन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. यही कारण है कि लंबे समय से इसे सुरक्षा जोखिम भी माना जाता रहा है. एयरपोर्ट प्रशासन चाहता है कि भविष्य में ऐसी स्थिति पूरी तरह खत्म हो और रनवे क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित जोन बना रहे।  क्या बंगाल में अब बदल रही है राजनीति की दिशा? राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ एयरपोर्ट या मस्जिद का मुद्दा नहीं है. यह बंगाल की नई राजनीतिक कार्यशैली का संकेत भी माना जा रहा है. भाजपा लंबे समय से इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात करती रही है. अब जब राज्य और केंद्र की सोच एक दिशा में दिखाई दे रही है, तो कई पुराने विवादित प्रोजेक्ट्स भी तेजी पकड़ सकते हैं।  हालांकि विपक्ष इस पूरे मामले को राजनीतिक नजरिए से भी देख रहा है. उनका कहना है कि धार्मिक मामलों में सरकार … Read more

राज्यसभा सीटों पर बीजेपी की रणनीति तैयार, नए चेहरों को मिल सकता है मौका

भोपाल  केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम जारी कर मध्यप्रदेश की तीन सीटों में होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। प्रदेश में तीन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इनमें भाजपा से सांसद और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी है। कांग्रेस से दिग्विजय सिंह हैं। उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। नए उम्मीदवारों के चयन को लेकर भाजपा में मंथन शुरू हो गया है। बीजेपी सूत्रों के अनुसार पार्टी में नए चेहरे पर विचार किया जा रहा है। अंतिम चर्चा के बाद उम्मीदवारों के नाम बंद लिफाफे में केंद्रीय समिति को भेजे जाएंगे। कांग्रेस की एक सीट पर भाजपा किसी डमी प्रत्याशी को समर्थन दे सकती है भाजपा राज्यसभा चुनाव के बहाने कांग्रेस की थाह भी नाप सकती है। चर्चा है कि कांग्रेस की एक सीट पर भाजपा किसी डमी प्रत्याशी को समर्थन दे सकती है। हाल ही में वर्चुअली बैठक भी बुलाई गई थी। शुरुआती चर्चा पूरी हो गई है। राज्यसभा का चुनाव कार्यक्रम जारी होने के बाद पार्टी द्वारा दिल्ली से मार्गदर्शन मांगकर पार्टी मुख्यालय में बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक बुलाई जाएगी। केंद्रीय मंत्री कुरियन केरल में कांजिरापल्ली सीट से चुनाव लड़े थे, चुनाव हारने के कारण बदले समीकरण केंद्रीय मंत्री कुरियन केरल में कांजिरापल्ली सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा दोबारा उन्हें मप्र से उच्च सदन में भेजने पर विचार कर रही है। वजह यह भी है कि वे केंद्र में मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हैं। जमीनी कार्यकर्ताओं में शुमार हैं। यदि मध्यप्रदेश मूल के व्यक्ति को भेजने की बात का मुद्दा उठा तो तस्वीर बदल सकती है। सुमेर सिंह की संघ में अच्छी पकड़ लेकिन उनके नाम पर संशय के बादल इतिहास के प्रोफेसर से राज्यसभा तक का सफर तय करने वाले बड़वानी के डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी की जगह पार्टी किसी अन्य युवा चेहरे पर विचार कर सकती है। शीर्ष नेताओं का मानना है कि भाजपा के पास कई अन्य चेहरे हैं जिन्हें अवसर मिलना चाहिए। राजनैतिक जीवन का पहला चुनाव ही राज्यसभा का लड़ा, सुमेर सिंह को प्रदेश में बीजेपी के आदिवासी चेहरे के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता है हालांकि यह काम इतना आसान भी नहीं है। सांसद सुमेर सिंह की संघ में अच्छी पकड़ मानी जाती है। उन्होंने अपने राजनैतिक जीवन का पहला चुनाव ही राज्यसभा का लड़ा था। सुमेर सिंह को प्रदेश में बीजेपी के आदिवासी चेहरे के रूप में भी प्रस्तुत किया जाता रहा है।

गैस उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव! डबल कनेक्शन पर रोक, नए नियम नहीं माने तो ब्लॉक होगी सप्लाई

भोपाल  देश में रसोई गैस (LPG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के इस्तेमाल को लेकर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा नए और कड़े नियम प्रभावी कर दिए गए हैं. सरकार की 'एक परिवार, एक गैस कनेक्शन' नीति के तहत जारी की गई इन गाइडलाइंस का मुख्य उद्देश्य गैस की जमाखोरी, कालाबाजारी को रोकना और सब्सिडी के वितरण को पारदर्शी बनाना है. यदि उपभोक्ता तय समय सीमा के भीतर इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उनकी गैस आपूर्ति रोकी जा सकती है।  नए नियमों के तहत प्रमुख बदलाव और आवश्यक दिशा-निर्देश निम्नलिखित हैं 1. पीएनजी और एलपीजी का दोहरा कनेक्शन प्रतिबंधित नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन घरों में पीएनजी (PNG) कनेक्शन चालू है, वे अब घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर का उपयोग नहीं कर सकेंगे. सरकार ने साफ किया है कि पीएनजी नेटवर्क वाले क्षेत्रों में सिलेंडर की आवश्यकता नहीं है. ऐसे उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन स्वेच्छा से सरेंडर करना होगा. ऐसा न करने पर तेल कंपनियों (Indane, Bharat Gas, HP Gas) द्वारा एलपीजी कनेक्शन को ब्लॉक कर दिया जाएगा और रिफिल बुकिंग रोक दी जाएगी. उपभोक्ता अपने वितरक के पास सिलेंडर और रेगुलेटर जमा कर सुरक्षा राशि वापस पा सकते हैं।  2. सिलेंडर बुकिंग के लिए 'लॉक-इन पीरियड' तय सिलेंडरों की अवैध जमाखोरी और एडवांस बुकिंग पर अंकुश लगाने के लिए दो बुकिंग के बीच न्यूनतम समयावधि निर्धारित की गई है: शहरी क्षेत्र: उपभोक्ता अपने पिछले सिलेंडर की डिलीवरी के कम से कम 25 दिन बाद ही अगला सिलेंडर बुक कर सकेंगे. ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में दो सिलेंडरों की बुकिंग के बीच 45 दिनों का अनिवार्य अंतर रखना होगा।  3. ई-केवाईसी (e-KYC) और बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य सभी सक्रिय एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके बिना उपभोक्ताओं की रिफिल बुकिंग स्वीकार नहीं की जाएगी. साथ ही, जिन उपभोक्ताओं की वार्षिक कर योग्य आय ₹10 लाख या उससे अधिक है, उन्हें एलपीजी सब्सिडी के दायरे से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।  4. सुरक्षित डिलीवरी के लिए DAC व्यवस्था गैस चोरी रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है. सिलेंडर की डिलीवरी तभी होगी जब उपभोक्ता अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी (OTP) को डिलीवरी एजेंट के साथ साझा करेंगे. उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी असुविधा से बचने के लिए अपने नजदीकी गैस वितरक से संपर्क कर ई-केवाईसी की स्थिति जांच लें और नियमों का समय पर पालन करें।   

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंगरौली में बस से पहुंचे कार्यक्रम स्थल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को सादगी से जनसेवा की एक अलग मिसाल पेश की। सिंगरौली की धरा पर उतरते ही मुख्यमंत्री ने मितव्ययिता के जरिए जनसेवा का अटल संकल्प व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ एक टूरिस्ट बस में बैठकर कार्यक्रम स्थल (एनसीएल ग्राउंड) पहुंचे। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सादगी, जनसरोकार और संसाधनों के संयमित एवं समुचित उपयोग के संदेश को आत्मसात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगरौली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री अपने कारकेड और विशेष काफिले के बजाय टूरिस्ट बस से कार्यक्रम स्थल पहुंचे, जिससे उनकी सादगीपूर्ण और जनसामान्य से जुड़ी कार्यशैली की झलक मिली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ बस में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री एवं सिंगरौली जिले की प्रभारी मंत्री मती संपतिया उइके, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री मती राधा सिंह, सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, विधायक सिंगरौली  रामनिवास शाह, विधायक देवसर  राजेंद्र मेश्राम, विधायक धौहनी  कुंवर सिंह टेकाम, विधायक सिंहावल  विश्वामित्र पाठक तथा मध्यप्रदेश गृह एवं अधोसंरचना निर्माण मंडल के अध्यक्ष  ओम जैन भी मौजूद थे। साथ ही सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  वीरेंद्र गोयल, नगर निगम अध्यक्ष  देवेश पाण्डेय, जनप्रतिनिधि  कांतदेव सिंह एवं  सुंदरलाल शाह भी बस में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह सरल और सहज अंदाज नागरिकों को भा गया। बस से कार्यक्रम स्थल पहुंचकर मुख्यमंत्री ने यह संदेश दिया कि जनप्रतिनिधियों की पहचान केवल पद और प्रोटोकॉल से नहीं, बल्कि जनता से जुड़ाव, सादगी और सेवा भावना से होती है। मुख्यमंत्री का यह कदम प्रधानमंत्री  मोदी के उस मितव्ययितापूर्ण दृष्टिकोण को भी प्रतिबिंबित करती है, जिसमें जनप्रतिनिधियों को सादगी, अनुशासन और जनसेवा के मूल्यों के साथ काम करने की प्रेरणा दी जाती है।    

विंध्य औद्योगिक और पर्यटन विकास की नई कहानी लिख रहा, इसका केंद्र बिन्दु है सिंगरौली विंध्य अब बन रहा है रिन्यूएबल एनर्जी का हब

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गरीब, युवा, नारी और किसान हमारी प्राथमिकता है। गरीबों का कल्याण, बहनों का सम्मान, युवाओं को अवसर और किसानों के हित में जो भी मदद संभव होगी, हम वो सब करेंगे। मध्यप्रदेश में 89 लाख से अधिक बहनों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ मिल रहा है। प्रदेश में जुलाई 2023 से मात्र 450 रुपये में बहनों को निरंतर घरेलू गैस सिलेण्डर दिलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मई के महीने में प्रदेश की बहनों को डबल सौगात मिली है। इसी माह 13 तारीख को प्रदेश की सवा करोड़ बहनों के खातों में लाड़ली बहना के 1500-1500 रुपये पहुंचे है और आज (23 मई को) गैस सिलेंडर भरवाने की सब्सिडी राशि भी उन्हें मिल रही है। वृद्धजनों के सम्मान में भी सरकार ने कभी कोई कमी नहीं की। इसी कार्यक्रम के जरिये प्रदेश के 33 लाख 71 हजार से अधिक पात्र हितग्राहियों को अप्रैल माह की 202 करोड़ 26 लाख रुपये की सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि भेजी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सिंगरौली नगर के एनसीएल ग्राउण्ड में महिलाओं को गैस रिफिलिंग सब्सिडी एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि वितरण तथा विकास कार्यों के लोकार्पण-भूमिपूजन के राज्यस्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से पात्रतानुसार राशि का अंतरण संबंधित हितग्राहियों के खातों में किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार अंत्योदय और विकास के पथ पर अभूतपूर्व कार्य कर रही है। समाज के अंतिम व्यक्ति का कल्याण और गांवों की गली-गली का विकास ही हमारा लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने कहा किआज यदि हमारा विंध्य क्षेत्र प्रगति, उन्नति, पर्यटन और आधुनिक अधोसंरचनाओं के विकास की नई कहानी लिख रहा है, तो इसका केंद्र बिन्दु सिंगरौली ही है। उन्होंने कहा कि विंघ्य अब रिन्यूएबल एनर्जी का भी हब बन रहा है। रीवा जिले में एशिया के सबसे बड़े सोलर पार्क का प्लांट बना है। जल्द ही यह क्षेत्र एनर्जी-इंडस्ट्री-स्पिरिचुअल कॉरिडोर के रूप में उभरेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऊर्जाधानी सिंगरौली पूरे देश की ऊर्जा शक्ति का मजबूत आधार बन चुका है। सिंगरौली मध्यप्रदेश का पॉवर हाउस है। यह प्रदेश का ग्रोथ सेन्टर भी है। इसके विकास के लिए हम कोई कसर नहीं रखेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोयला किंग सिंगरौली अब गोल्ड सिटी बनने जा रही है। सिंगरौली में प्रदेश के पहले चकरिया गोल्ड ब्लॉक के लिए अनुबंध हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगरौली गौरव दिवस की पूर्व संध्या अवसर पर पूरे जिले को 552 करोड़ 12 लाख रुपये की लागत वाले 71 विकास कार्यों की ऐतिहासिक सौगात दी। सिंगरौली जिले का गठन 24 मई 2008 को किया गया था। यह राज्य का 50वां जिला है। इसका जिला मुख्यालय वैढ़न (बैढ़न) में स्थित है। मुख्यमंत्री ने यहां 486 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत से 50 विकास कार्यों का भूमि पूजन तथा 65 करोड़ 59 लाख रुपये की लागत से 21 नवनिर्मित विकास कार्यों का लोकार्पण भी किया। इनमें सीएसआर के तहत 19 करोड़ 83 लाख रुपये की लागत वाले 4 विकास कार्यों (सिंगरौली में 13.30 करोड़ से स्पोर्टस काम्प्लेक्स के निर्माण सहित) का भूमि पूजन भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने मंच से शासन की विभिन्न योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुछ दिव्यांग भाई-बहनों को ट्राय सायकिल देकर उनके जीवन में खुशियों का नया रंग भर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई विभिन्न मांगों के संबंध में कहा कि आपकी भावना ही हमारी भावना है। क्षेत्र के विकास के लिए जो भी मांग की गई है, वे सभी पूरी की जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में अपनी अलग ही पहचान बना रहा है। मध्यप्रदेश भी इस विकास यात्रा में कंधे से कंधा मिलाकर साथ चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहनों के कल्याण के लिए प्रदेश के खजाने में कोई कमी नहीं है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश की बहनें समृद्ध हुई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल बचाना हमारी जरूरत है। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण का महाभियान चल रहा है। सोमवार, 25 मई को प्रदेशव्यापी गंगा दशहरा महोत्सव भव्य रूप से मनाया जाएगा। इस दिन प्रदेश के हर गांव-शहर में शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधि, आमजन सब एक साथ मिल-जुलकर पुराने जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए कार्य करेंगे। कार्यक्रम में सरकार के तीन माह तक लगातार चल रहे 'जल गंगा संवर्धन अभियान' पर केन्द्रित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सिंगरौली जिले के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सिंगरौली को रेल, सड़क और हवाई मार्ग की सौगातें मिली हैं। एक दौर में यहां की जनता आवागमन के लिए परेशान होती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष की एमपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में सिंगरौली जिले के 5 विद्यार्थियों ने प्रदेश की मेरिट लिस्ट में स्थान हासिल किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह ज्ञान-विज्ञान-अनुसंधान और संभावनाओं की धरती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंगरौली जिले के 4 सांदीपनि विद्यालयों में कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम 90.14 प्रतिशत तथा कक्षा 12वीं का 89.14 प्रतिशत आया है। यह भगवान कृष्ण के गुरु महर्षि सांदीपनि के नाम पर प्रदेश में विद्यालय खोलने का सरकार को मिला इनाम है। भगवान कृष्ण ने महाभारत में कर्मवाद के सिद्धांत पर पवित्र गीता का संदेश दिया। भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग हम सभी को मित्रता की महत्ता बताता है। राज्य सरकार प्रदेशभर में गीता भवनों का निर्माण कर रही है। गांवों की समृद्धि के लिए बिजली और पानी के लिए नई योजनाएं शुरू की गई हैं। प्रदेश में सबसे पहले नदी जोड़ो अभियान की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण के लिए समर्पित किया है। किसानों को सिंचाई के लिए दिन में भी बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। देश की आजादी के बाद के 55 साल तक प्रदेश में बिजली का उत्पादन सिर्फ 5000 मेगावाट हुआ करता था। लेकिन बीते 20 सालों में … Read more

अब तक 100 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन हुआ, अभी भी जारी

भोपाल  मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 13 लाख 10 हजार किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में नंबर-1 स्थान पर है। इस तरह से मध्यप्रदेश समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के मामले में सर्वाधिक किसानों को लाभांवित करने वाला राज्य है। यही नहीं अब तक लगभग 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन कर मध्यप्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में सतत कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। मुख्यमंत्री कर रहे सतत मॉनिटरिंग मंत्री  राजपूत ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन लक्ष्य को केन्द्र सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये हैं, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी है। किसानों को 20,680 करोड़ से अधिक का भुगतान किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 20,680.83 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया है। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया जा रहा है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों को उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल काटें, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई।  

तेल संकट की खबरों के बीच इंडियन ऑयल का बयान, जानें पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता पर क्या कहा

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने देश में पेट्रोल एवं डीजल की समग्र किल्लत से इनकार करते हुए शनिवार को कहा कि कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी होने से संबंधित खबरें 'बेहद स्थानीय' और अस्थायी प्रकृति की हैं जो क्षेत्रीय मांग-आपूर्ति असंतुलन और बिक्री के प्रारूप में बदलाव का नतीजा हैं। क्या कुछ कहा है IOC ने  आईओसी ने कहा कि कुछ पेट्रोल पंपों पर बढ़ी हुई मांग का कारण फसल कटाई के समय डीजल की खपत में मौसमी वृद्धि, अपेक्षाकृत अधिक कीमत वाले निजी पेट्रोल पंपों से ग्राहकों का सरकारी क्षेत्र के पंपों की तरफ स्थानांतरण और थोक ईंधन की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुरूप वृद्धि के कारण संस्थागत खरीद में बढ़ोतरी है। पेट्रोल की बिक्री में हुआ इजाफा पब्लिक सेक्टर की कंपनी ने एक बयान में कहा कि एक से 22 मई के दौरान पेट्रोल की बिक्री में सालाना आधार पर 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि डीजल की बिक्री लगभग 18 प्रतिशत बढ़ी जो मांग में निरंतर और अत्यंत उच्च वृद्धि को दर्शाता है, जिसे वह देशभर में पूरा कर रही है। आईओसी ने कहा, "हम ग्राहकों और आम जनता को यह आश्वस्त करना चाहते हैं कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई समग्र किल्लत नहीं है। कुछ खुदरा केंद्रों पर देखी जा रही स्थिति अत्यंत स्थानीय और अस्थायी है, जो स्थानीय मांग-आपूर्ति असंतुलन तथा चुनिंदा क्षेत्रों में बिक्री प्रवृत्ति के पुनर्संतुलन के कारण उत्पन्न हुई है।" लगभग सभी पेट्रोल पंप पर तेल : IOC बयान के मुताबिक, आईओसी के 42,000 से अधिक पेट्रोल पंपों के नेटवर्क में बहुत ही कम जगहों पर आपूर्ति बाधित हुई है, जबकि अधिकांश पंपों पर भंडार और आपूर्ति सामान्य एवं पर्याप्त बनी हुई है। आईओसी ने कहा कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां देशभर में पर्याप्त ईंधन भंडार बनाए हुए हैं तथा अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पन्न इन सीमित बाधाओं को दूर करने और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही हैं। आईओसी ने कहा, "मांग में इस निरंतर और अत्यंत उच्च वृद्धि के बावजूद इंडियन ऑयल देशभर में ग्राहकों की जरूरतों को लगातार पूरा कर रही है।" कंपनी ने उपभोक्ताओं से घबराकर खरीदारी से बचने की अपील करते हुए निर्बाध ईंधन उपलब्धता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में कहा गया, "इंडियन ऑयल अन्य तेल विपणन कंपनियों के साथ मिलकर देशभर में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार एवं आपूर्ति बनाए हुए है।"

यूपी सरकार का बड़ा फैसला, दिल्ली-जेवर RRTS से सफर होगा सुपरफास्ट

नोएडा  उत्तर प्रदेश सरकार ने दिल्ली को जेवर में बनने वाले आगामी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने वाले रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी दे दी है. इस हाई-स्पीड ट्रांजिट रूट से दिल्ली और एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी में काफी सुधार होने और यात्रा का समय घटकर लगभग 21 मिनट रह जाने की उम्मीद है।  राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद, अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी के लिए आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) को भेज दिया गया है. यदि इसे मंजूरी मिल जाती है, तो यह कॉरिडोर NCR के तेजी से विकसित हो रहे ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।  प्रस्तावित दिल्ली-जेवर एयरपोर्ट RRTS कॉरिडोर के वर्तमान में दिल्ली-मेरठ मार्ग पर चल रही 'नमो भारत' रैपिड रेल प्रणाली की तर्ज पर ही काम करने की उम्मीद है. इन ट्रेनों को अधिकतम 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिज़ाइन किया गया है और ये 160 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से चल सकती हैं।  वर्तमान में, दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर भारत की एकमात्र चालू RRTS लाइन है. यह 82.15 किलोमीटर लंबा मार्ग दिल्ली के सराय काले खां को उत्तर प्रदेश के मोदीपुरम से जोड़ता है और देश में क्षेत्रीय हाई-स्पीड शहरी परिवहन  का पहला उदाहरण है।  उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता के अनुसार, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में एयरपोर्ट टर्मिनल पर एक समर्पित स्टेशन के माध्यम से दिल्ली-जेवर RRTS को आगामी दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल परियोजना से जोड़ने का भी प्रस्ताव दिया गया है. इस कदम से एक एकीकृत परिवहन नेटवर्क  तैयार हो सकता है, जो हवाई यात्रा को हाई-स्पीड रेल बुनियादी ढांचे से जोड़ेगा।  एयरपोर्ट कनेक्टिविटी यह विकास ऐसे समय में हुआ है जब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उड़ान संचालन की तैयारी कर रहा है, जिसके 15 जून से शुरू होने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल की शुरुआत में 28 मार्च को इस एयरपोर्ट परियोजना का उद्घाटन किया था।  अधिकारियों को उम्मीद है कि नया हवाई अड्डा उत्तर भारत में एक बड़े विमानन और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभरेगा, जिससे यात्रियों और व्यवसायों के लिए कुशल कनेक्टिविटी बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी. एक्स (X) पर एक पोस्ट में, गुप्ता ने कहा कि एक उच्च स्तरीय बैठक में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र के "समग्र और नियोजित विकास" की समीक्षा की गई, जिसमें जेवर एयरपोर्ट से जुड़ी कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया।  मंत्री ने अधिकारियों को विकास कार्यों को प्रभावित करने वाली कानूनी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के निर्देश भी दिए. इसके साथ ही, विभिन्न विभागों को पारदर्शिता में सुधार करने और स्थानीय निवासियों व किसानों के लिए मुआवजा तंत्र NOC की प्रक्रियाओं को सरल बनाने के निर्देश दिए गए।  जेवर एयरपोर्ट के चालू होने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में तेजी से औद्योगिक विस्तार होने की भी उम्मीद है. अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र को प्रमुख परिवहन गलियारों से जोड़ा जा रहा है, जिनमें आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे शामिल हैं. बैठक के दौरान इस क्षेत्र के लिए नियोजित कई औद्योगिक और विनिर्माण परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई, जो इस पूरे इलाके को एक लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास हब में बदलने के सरकार के व्यापक विजन को रेखांकित करती है। 

20 करोड़ से बनेगा भव्य रुद्रेश्वर धाम कॉरिडोर

रायपुर धमतरी शहर से लगे रुद्री स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल भर नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में यह प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरेगा। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित रुद्रेश्वर धाम कॉरिडोर परियोजना के माध्यम से मंदिर परिसर का समग्र विकास किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से तीन चरणों में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। विशेष बात यह है कि पूरे विकास कार्य में मंदिर की मूल संरचना और उसकी आध्यात्मिक गरिमा को अक्षुण्ण रखा जाएगा। बिना किसी बड़े विध्वंस या संरचनात्मक क्षति के मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली के समन्वय से नया स्वरूप दिया जाएगा। प्रस्तावित डिजाइन में शिखर, त्रिशूल, ओम् प्रतीक, तोरण द्वार, अलंकृत स्तंभ, नंदी प्रतिमा, दीप स्तंभ और जाली कार्य जैसे पारंपरिक तत्व शामिल किए गए हैं। प्राकृतिक सैंडस्टोन क्लैडिंग और पत्थर आधारित फिनिश मंदिर परिसर को भव्य, आकर्षक और कालातीत स्वरूप प्रदान करेंगे। परियोजना का उद्देश्य केवल मंदिर सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। इसके तहत चौड़े पैदल मार्ग, सुव्यवस्थित प्रवेश और निकास द्वार, परिक्रमा पथ, घाट, मंडप और सार्वजनिक उपयोग के क्षेत्रों का सुनियोजित विकास किया जाएगा। परिसर में डिजिटल सूचना स्क्रीन, प्रसाद एवं स्मृति चिन्ह दुकानें, फूड कोर्ट, विश्राम क्षेत्र, शिशु आहार कक्ष, भुगतान आधारित स्वच्छ शौचालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित होंगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग के तहत एआई आधारित हेल्थ चेकअप कियोस्क भी स्थापित किए जाएंगे। वृद्धजनों और दिव्यांगजनों के लिए रैम्प आधारित बाधारहित आवागमन व्यवस्था परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। घाट क्षेत्र को भी विशेष रूप से विकसित किया जाएगा। यहां रेलिंग युक्त विसर्जन कुंड, सुरक्षित सीढ़ियां और श्रद्धालुओं के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी, ताकि धार्मिक गतिविधियां सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकें। इसके अलावा गार्डन, सांस्कृतिक मंडप, खुला मंच, रिवर फ्रंट कॉटेज और भविष्य में विकसित होने वाली मेरीन ड्राइव जैसी अवधारणाएं इस परियोजना को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक और पारिवारिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनाएंगी। पूरे लेआउट को वास्तु सिद्धांतों, प्राकृतिक वेंटिलेशन, खुले प्रांगण और श्रद्धालुओं की क्रमिक आध्यात्मिक यात्रा की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। डिजाइन में सोमनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और जगन्नाथ मंदिर की स्थापत्य अवधारणाओं से प्रेरणा ली गई है। पर्यावरण संरक्षण को भी परियोजना का अहम हिस्सा बनाया गया है। इसके तहत सौर ऊर्जा आधारित पार्किंग शेड, ईवी चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक प्रकाश और वायु संचार आधारित डिजाइन, हरित क्षेत्र विकास तथा वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं। स्थानीय और टिकाऊ निर्माण सामग्री के उपयोग से पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के साथ स्थानीय कारीगरों और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा के अनुसार यह परियोजना केवल अधोसंरचना निर्माण नहीं, बल्कि धमतरी की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान देने वाला प्रयास है। आने वाले समय में रुद्रेश्वर धाम प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में शामिल होगा

तेल कीमतों में बढ़ोतरी पर सरकार का बड़ा दावा, कहा- वैश्विक संकट के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल सबसे कम महंगा

नई दिल्ली देश में मई 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन बार संशोधन किया गया- 15 मई, 19 मई और 23 मई को. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन तीनों चरणों के बाद कुल मिलाकर पेट्रोल 4 रुपये 74 पैसे और डीजल 4 रुपये 82 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ. CNG की कीमत भी 1 रुपये प्रति किलो बढ़ाई गई. यह लगभग चार वर्षों में पहली बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है. लेकिन इस बढ़ोतरी को समझने के लिए उसका पूरा संदर्भ देखना जरूरी है।  कंज्यूमर्स ने नहीं सरकार ने खुद उठाया बोझ 28 फरवरी 2026 को होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. इतनी बड़ी वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत में 76 दिनों तक पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए. इस दौरान तेल कंपनियां रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा खुद वहन करती रहीं. 27 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर SAED यानी एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की. डीजल पर केंद्रीय ड्यूटी शून्य हो गई. इस फैसले से सरकार को इस वित्त वर्ष में लगभग 30,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. यानी यह बोझ सीधे उपभोक्ता पर नहीं डाला गया, बल्कि सरकार ने खुद उठाया।  साथ ही सरकार ने डीजल पर 21 रुपये 50 पैसे और ATF पर 29 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर एक्सपोर्ट लेवी लगाई, ताकि देश में तैयार तेल विदेश न जाए और घरेलू बाजार में आपूर्ति बनी रहे।  19 मई को सरकार ने माना कि दो चरणों की बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों का दैनिक घाटा 1000 करोड़ से घटकर 750 करोड़ रुपये रह गया था. 23 मई की तीसरी बढ़ोतरी के बाद भी बड़ा हिस्सा तेल कंपनियां खुद वहन कर रही हैं।  अब वैश्विक तुलना देखिए. होर्मुज संकट के बाद म्यांमार में पेट्रोल लगभग 90%, मलेशिया में 56%, पाकिस्तान में 55%, अमेरिका में 44%, फिलीपींस में 40%, श्रीलंका में 38%, फ्रांस में 21% और ब्रिटेन में 19% तक महंगा हुआ. भारत में यह बढ़ोतरी केवल लगभग 5% रही।  सऊदी अरब ने दाम नहीं बढ़ाए क्योंकि वह स्वयं बड़ा तेल उत्पादक देश है और सीधे सब्सिडी देता है. उसे छोड़ दिया जाए तो भारत दुनिया में सबसे कम बढ़ोतरी करने वाले देशों में रहा. यह पहली बार नहीं है जब वैश्विक संकट के दौरान भारत ने उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की हो।  रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान, जब पूरी दुनिया में ईंधन महंगा हो रहा था, तब भारत ने नवंबर 2021 और मई 2022 में पेट्रोल 8 रुपये और डीजल 6 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया था. G20 देशों में भारत अकेला देश था जिसने उस दौर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाई थीं।  अब सवाल आता है कि अलग-अलग राज्यों में कीमतें अलग क्यों हैं? केंद्र की एक्साइज ड्यूटी पूरे देश में समान रहती है, लेकिन हर राज्य अपनी तरफ से अलग VAT लगाता है. यही वजह है कि पंप पर कीमतें अलग दिखती हैं. 23 मई 2026 के बाद आंध्र प्रदेश में पेट्रोल लगभग 117.80 रुपये, तेलंगाना में 115.70 रुपये और केरल में 112.30 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में यह करीब 99.50 रुपये के आसपास रहा. आंध्र प्रदेश में VAT लगभग 31% है, जिसके साथ अतिरिक्त रोड डेवलपमेंट सेस भी लगाया जाता है. इससे प्रभावी कर दर करीब 35% तक पहुंच जाती है।  सरकारी पक्ष का दावा है कि जिन दलों ने केंद्र से एक्साइज कम करने की मांग की, उनके शासन वाले कई राज्यों में VAT सबसे अधिक बना रहा. 27 मार्च की एक्साइज कटौती के बाद BJP शासित राज्यों ने पूरी राहत उपभोक्ताओं तक पहुंचाई, जबकि कांग्रेस और INDIA ब्लॉक शासित राज्यों ने VAT में समान कटौती नहीं की. इसलिए इन राज्यों में अंतिम कीमतें अपेक्षाकृत अधिक बनी रहीं।  अब 2014 के '71 रुपये वाले पेट्रोल' की चर्चा. कांग्रेस अक्सर कहती है कि 2014 में पेट्रोल 71 रुपये था और अब लगभग 98 रुपये है. लेकिन सरकारी पक्ष के अनुसार उस समय कीमतें कम रखने के लिए 2005 से 2010 के बीच लगभग 1.34 लाख करोड़ रुपये के ऑयल बॉन्ड जारी किए गए थे।  यह सीधे सरकारी उधार थे, जिनका भुगतान बाद की सरकारों और करदाताओं को करना पड़ा।  सरकारी आंकड़ों के अनुसार: FY 2021-22 में 10,000 करोड़ रुपये, FY 2023-24 में 31,150 करोड़ रुपये, FY 2024-25 में 52,860 करोड़ रुपये, और FY 2025-26 में 36,913 करोड़ रुपये ऑयल बॉन्ड भुगतान में खर्च किए गए. इसके ऊपर ब्याज अलग है. सरकारी तर्क यह है कि 2014 का सस्ता पेट्रोल वास्तव में उधारी पर आधारित था, जिसकी कीमत बाद की पीढ़ियां चुका रही हैं।  चार साल का पूरा हिसाब 2022 से 2026 के बीच भारत में पेट्रोल चार बार सस्ता हुआ और एक बार बढ़ा. केंद्र सरकार ने इस पूरे दौर में एक्साइज कटौती के जरिए करीब 30,000 करोड़ रुपये का राजस्व छोड़ा तेल कंपनियों ने रूस-यूक्रेन दौर में 24,500 करोड़ और LPG संरक्षण में 40,000 करोड़ का घाटा उठाया. कोई बॉन्ड नहीं, कोई उधारी नहीं, कोई अगली पीढ़ी पर बोझ नहीं।