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मध्यप्रदेश बनेगा ग्लोबल फिल्म डेस्टिनेशन, CM मोहन यादव के विजन का दिखने लगा असर

भोपाल   मध्यप्रदेश के ग्रामीण पर्यटन और समृद्ध सांस्कृतिक वैभव को अब वैश्विक मंच पर एक नई और विशिष्ट पहचान मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी विजन और नेतृत्व में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश तेजी से एक 'ग्लोबल फिल्मिंग हब' के रूप में स्थापित हो रहा है। इसी कड़ी में स्पेन के प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस ‘कलर्स कम्युनिकेशन ग्रुप’ द्वारा निर्मित अंतर्राष्ट्रीय टेलीविजन सीरीज़ "रूरल टूरिज्म ऑफ द वर्ल्ड" की शूटिंग प्रदेश के विभिन्न पर्यटन अंचलों में हुई। इस गौरवशाली पहल से मध्यप्रदेश की अनूठी जीवन शैली और पर्यटन स्थलों का प्रदर्शन दुनिया के 80 से अधिक देशों में किया जाएगा, जिससे राज्य की पर्यटन संभावनाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई उड़ान मिलेगी। सावरवानी, धूसावानी, चिमटीपुर और तामिया की जनजातीय परंपरा का हुआ फिल्मांकन अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तहत छिंदवाड़ा जिले की नैसर्गिक सुंदरता और यहां की जीवंत जनजातीय संस्कृति ने स्पेनिश फिल्म क्रू को गहराई से प्रभावित किया है। टीम ने जिले के सावरवानी, धूसावानी, चिमटीपुर और तामिया क्षेत्र में प्रवास कर ग्रामीण जीवन, स्थानीय परंपराओं और पातालकोट की विशिष्ट जीवन शैली को कैमरे में कैद किया। विशेष रूप से पातालकोट में संपन्न जनजातीय विवाह की पारंपरिक रस्मों और प्राकृतिक सौंदर्य का फिल्मांकन किया गया है। स्पेनिश डायरेक्टर जुआन फ्रूटोस ने धूसावानी होमस्टे में मिले आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा कि यदि कोई वास्तविक भारत की जड़ों को जानना चाहता है, तो उसे मध्यप्रदेश के इन गांवों का अनुभव अवश्य लेना चाहिए। स्पेन में हुए एमओयू के मिल रहे सुखद परिणाम यह महत्वपूर्ण उपलब्धि इसी वर्ष जनवरी-2026 में स्पेन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मेले 'FITUR मैड्रिड 2026' के दौरान हुए रणनीतिक समझौतों और एमओयू (MoU) का सुखद परिणाम है। पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैया राजा टी. और अपर प्रबंध संचालक अभय अरविंद बेडेकर के मार्गदर्शन में प्रदेश को एक 'फिल्म फ्रेंडली डेस्टिनेशन' के रूप में वैश्विक पटल पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इस सीरीज़ में न केवल ग्रामीण संस्कृति, बल्कि सांची स्तूप, भीमबेटका की गुफाएं, सतपुड़ा नेशनल पार्क और उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जैसी ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक धरोहरों को भी शामिल किया गया है, जो प्रदेश के बहुआयामी पर्यटन वैभव को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेंगी। मध्यप्रदेश बनेगा ग्लोबल फिल्मिंग हब इस वैश्विक पहल से न केवल मध्यप्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग सुदृढ़ होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, होमस्टे और हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों को भी भारी प्रोत्साहन मिलेगा। कलेक्टर छिंदवाड़ा श्री हरेंद्र नारायन एवं जिला प्रशासन के समन्वय से संपन्न हुई यह शूटिंग राज्य को विश्व सिनेमा के मानचित्र पर एक जीवंत और सांस्कृतिक कैनवास के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में ऐसे अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स से मध्यप्रदेश का पर्यटन क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छुएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा शूटिंग के लिए आवश्यक अनुमति, लॉजिस्टिक सहयोग, सुरक्षा व्यवस्था और ऑन-ग्राउंड समन्वय उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल राज्य को “फिल्म फ्रेंडली डेस्टिनेशन” के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। बीते कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश ने फिल्म पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। बॉलीवुड फिल्मों, वेब सीरीज़ और अंतर्राष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट्स के लिए प्रदेश लगातार पसंदीदा लोकेशन बन रहा है। इससे न केवल राज्य की वैश्विक ब्रांडिंग मजबूत हो रही है, बल्कि स्थानीय रोजगार, ग्रामीण पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है। मध्यप्रदेश आज केवल “टाइगर स्टेट” नहीं, बल्कि विश्व सिनेमा के लिए प्रकृति, संस्कृति, अध्यात्म और अनुभवों से भरा एक जीवंत कैनवास बन चुका है।

वैश्विक मंच पर भारत का दम! प्रधानमंत्री मोदी की 5 देशों की अहम यात्रा आज से शुरू

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 15 मई से अपनी पांच देशों की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा शुरू कर रहे हैं। इस 5 दिवसीय दौरे (15-20 मई) के दौरान पीएम मोदी संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस के बीच यह दौरा भारत के लिए रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। जानें क्या है दौरे का मुख्य एजेंडा? होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच पीएम मोदी का प्राथमिक लक्ष्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को पुख्ता करना है। इस यात्रा में पारंपरिक ईंधनों के साथ-साथ ग्रीन हाइड्रोजन और न्यू टेक्नोलॉजी पर विशेष जोर रहेगा। सबसे पहले जायेंगे UAE दौरे के पहले दिन पीएम मोदी सबसे पहले अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। जिसके बाद IOC और ADNOC के बीच LPG सप्लाई को लेकर रणनीतिक सहयोग होगा। भारत में Strategic Petroleum Reserve बनाने के लिए ISPRL और ADNOC के बीच अहम डील होने की उम्मीद है। वहीं UAE में रह रहे 45 लाख भारतीयों के हितों पर भी चर्चा होगी। यूरोप दौरा नीदरलैंड (16-17 मई): पीएम मोदी नीदरलैंड्स के पीएम रॉब जेटन के साथ सेमीकंडक्टर और जल प्रबंधन पर बात करेंगे। स्वीडन (17-18 मई): गोथेनबर्ग में स्वीडिश पीएम के साथ सप्लाई चेन और ग्रीन ट्रांजिशन पर चर्चा होगी। यहां पीएम मोदी 'यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' को भी संबोधित करेंगे। नॉर्वे: 43 साल बाद ऐतिहासिक यात्रा 43 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री नॉर्वे जा रहा है। 19 मई को ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता शामिल होंगे। यहां मुख्य फोकस ब्लू इकोनॉमी (समुद्री अर्थव्यवस्था) और आर्कटिक सहयोग पर रहेगा। इटली: दौरे का समापन 20 मई को यात्रा के अंतिम चरण में पीएम मोदी इटली पहुंचेंगे। वहां प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ रक्षा और व्यापार संबंधों पर द्विपक्षीय बातचीत के बाद वे दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे। जानें क्यों जरूरी है यह दौरा? जनवरी 2026 में भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद यह पीएम की पहली बड़ी यूरोप यात्रा है। इसका उद्देश्य भारतीय निर्यात के लिए नए रास्ते खोलना और भारत को दुनिया के लिए एक भरोसेमंद 'सप्लाई चेन पार्टनर' के रूप में स्थापित करना है।

ट्रिपल झटका: पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG ने भी बढ़ाई लोगों की टेंशन

नई दिल्ली एलपीजी सिलेंडर के दामों में इजाफा होने के बाद अब तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में भी इजाफा किया गया है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, देश भर में ईंधन (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) की कीमतें बढ़ गई हैं. एक ओर जहां पेट्रोल की कीमतें 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं, जबकि डीज़ल की कीमतें 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं. पेट्रोल के साथ ही सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों में चलना भी महंगा होने जा रहा है।  जानकारों का कहना है कि म‍िड‍िल ईस्‍ट में जारी संकट के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेल विपणन कंपनियों ने 3-3 रुपये लीटर का इजाफा कर द‍िया. तेल की कीमत में यह बढ़ोतरी 15 मई यानी शुक्रवार सुबह 6 बजे से देशभर में लागू हो गई है.  देश की राजधानी द‍िल्‍ली की बात करें तो पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रत‍ि लीटर हो गया. वहीं, डीजल 87.67 रुपये लीटर से बढ़कर 90.67 रुपये लीटर पर पहुंच गया।  किराए में हो सकती है बढ़ोतरी  मुंबई में जब दो रुपये प्रति किलो सीएनजी के दाम में बढ़ने के साथ यूनियनों ने किराए में बढ़ोतरी की मांग की है. ऑटो रिक्शा संगठनों ने न्यूनतम किराए में कम से कम 1 रुपये की बढ़ोतरी की डिमांड रखी है. यूनियन नेताओं के अनुसार, मौजूदा किराए में वाहन चलाना आर्थिक रूप से कठिन हो गया है. अब दिल्ली में भी सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं. इसका सीधा असर कैब ड्राइवरों पर पड़ेगा. ऑटो-टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी संभव है. डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट लागत में बढ़ोतरी हो सकती है. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है।  CNG Price Hike कितनी महंगी गई सीएनजी पेट्रोल और डीजल के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में इंद्रप्रस्‍थ गैस ल‍िम‍िटेड (IGL) ने सीएनजी की कीमत में 2 रुपये क‍िलो का इजाफा कर द‍िया है. इससे कुछ देर पहले ही तेल कंपन‍ियों ने पेट्रोल-डीजल दो रुपये महंगा कर द‍िया. नई दरों को शुक्रवार सुबह 6 बजे से लागू कर द‍िया गया है. ऐसे में पिछले एक पखवाड़े के दौरान महंगाई का ट्रिपल अटैक हुआ है।  पेट्रोल, डीजल और CNG महंगा करने पर सरकार का घेराव कांग्रेस ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ने को लेकर सरकार का घेराव किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस ने लिखा-  'महंगाई मैन मोदी ने आज फिर जनता पर हंटर चलाया. पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए महंगा कर दिया गया. वहीं, CNG के दाम भी 2 रुपए बढ़ा दिए गए. चुनाव खत्म, मोदी की वसूली शुरू।  कांग्रेस नेता कुमारी सेलजा ने आरोप लगाते हुए कहा, 'चुनाव खत्म होते ही बीजेपी सरकार ने जनता को महंगाई का तोहफा दे दिया. अब पेट्रोल और डीजल पर 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर आम आदमी की जेब पर सीधा हमला किया गया है. चुनाव तक राहत का दिखावा. चुनाव के बाद जनता पर बोझ डालना बीजेपी सरकार की पहचान बन चुका है।  TMC नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने भी बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, 'पहले वो आपका वोट लूटते हैं, फिर आपको वहां लात मारते हैं जहां दर्द होता है. इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ गए हैं. क्या बंगाल सरकार पेट्रोल और डीजल पर VAT कम करेगी, अब जब दिल्ली के कंट्रोल वाली सरकार है जिसे केंद्र के फंड रोके जाने की चिंता नहीं करनी पड़ती?' वहीं, पेट्रोल-डीजल महंगा होने पर बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने प्रतिक्रया दी. उन्होंने कहा, 'पिछले 3 साल से दुनिया में जंग चल रही है. इसकी वजह से दूसरे देशों में कई तरह के संकट पैदा हुए हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने हमारा कुछ नहीं बिगड़ने दिया. सिर्फ गैस के दाम बढ़े हैं. कम से कम दाम तो कम से कम बढ़ाए हैं। 

प्रभावित नागरिकों की पूरी मदद के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर पहुंचकर देवास हादसे के घायलों से की भेंट प्रभावित नागरिकों की पूरी मदद के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमवाय और चोइथराम अस्पताल में भर्ती घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए इंदौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देवास जिले के टोंककला में पटाखा फैक्ट्री में हुए हादसे के घायल नागरिकों से भेंट कर उनके उपचार की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस हादसे से प्रभावित लोगों की हरसंभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध है। दिल्ली से सीधे इंदौर पहुंचे और घायलों से मिले मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अन्य कार्यक्रम निरस्त कर नई दिल्ली से इंदौर पहुंचकर अस्पतालों में उपचार के लिए भर्ती घायलों से भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर्वप्रथम एयरपोर्ट से चोइथराम हॉस्पिटल पहुंचकर देवास के हादसे के कारण घायल हुए नागरिकों से मुलाकात की और उनका उपचार कर रहे चिकित्सकों को आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमवाय अस्पताल में दाखिल घायलों से भी मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अमलतास अस्पताल में इलाज करवा रहे घायल नागरिकों से भी भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी घायलों के समुचित उपचार के निर्देश चिकित्सा अधिकारियों को दिए। इस अवसर पर अन्य जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज पूर्वान्ह में इस हादसे की जानकारी प्राप्त होते ही देवास जिला प्रशासन को हादसे से प्रभावित नागरिकों की हर संभव सहायता के निर्देश दिए थे। इंदौर में उपचार करवा रहे घायलों का पूरा ध्यान रखने के निर्देश भी दिल्ली से ही दिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिवंगत नागरिकों के परिजन को मध्यप्रदेश शासन की ओर से 4-4 लाख रूपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने एवं घायलों का निःशुल्क इलाज करने के लिये निर्देश दिये।  

48 घंटे में 3 बड़े फैसले, क्या अब महंगा होने वाला है पेट्रोल? RBI ने दिए संकेत

नई दिल्ली भारत में पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों की आशंकाओं को लेकर चिंता का दौर जारी है। हालांकि, सरकार ने अब तक ऐसा ऐलान नहीं किया है। इसी बीच महज दो दिनों के अंदर ही तीन बड़े फैसले सामने आ चुके हैं। इनमें गोल्ड इम्पोर्ड ड्यूटी से लेकर शक्कर एक्सपोर्ट बैन तक शामिल है। इधर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर ने भी दाम बढ़ने की आशंका जताई है। खास बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही दफ्तरों से WFH यानी वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेज की अपील कर चुके हैं।  पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एक स्तर पर इस बात का आकलन करना होगा कि पेट्रोलियम कंपनियां लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और LPG कब तक बेच सकती हैं। हालांकि, उन्होंने कीमतों में बढ़ोतरी की किसी भी संभावना पर कुछ कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि भारत के पास इस वक्त लगभग 60 दिन का कच्चे तेल का भंडार, 60 दिन का LNG भंडार और 45 दिन का LPG भंडार है। RBI गवर्नर क्या बोले गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने  स्विट्जरलैंड में कहा है कि अगर पश्चिम एशिया संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा और उर्वरकों के इम्पोर्ट पर खासा निर्भर है और मौजूदा रुकावटों का असर भारत पर पड़ना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर यह लंबे समय तक जारी रहता है तो 'सरकार वास्तव में इन मूल्य वृद्धि का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाल सकती है। यह सिर्फ समय की बात है।' सरकार ने 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में वृद्धि नहीं की है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध में सबसे ज्यादा प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हुआ है, जिसके चलते जहाजों की आवाजाही धीमी या ठप हो गई है। गोल्ड महंगा हुआ विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ रहे दबाव को रोकने और गैर-जरूरी आयात पर रोक लगाने के लिए सोने तथा चांदी पर आयात शुल्क  बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। खास बात है कि भारत महंगी धातुओं का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। कच्चे तेल के बाद सोने का भारत के आयात में दूसरा बड़ा हिस्सा है और बढ़ती खरीद से विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है। सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है जबकि प्लैटिनम पर इसे 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत किया गया है। यह 13 मई से प्रभावी माना जाएगा। सोने/चांदी के डोरे, सिक्के, अन्य वस्तुएं आदि पर भी टैक्स में बदलाव किए गए हैं। अमूल दूध के दाम बढ़े अमूल ने बढ़ती लागत के कारण पूरे भारत में दूध की कीमतें दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाने की घोषणा की। नई दरें आज यानी 14 मई, गुरुवार से लागू हो गईं हैं। इससे पहले अमूल दूध के दाम बीते साल 1 मई को बढ़ाए गए थे। GCMMF यानी गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन का कहना है कि दूध की कीमतें इसलिए बढ़ाई जा रही हैं क्योंकि दूध तैयार करने और उसे बाजार तक पहुंचाने का खर्चा बढ़ गया है। साथ ही कहा, 'इस साल पशु आहार, दूध की पैकेजिंग सामग्री और ईंधन की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है।' चीनी का निर्यात बंद देश ने चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर तक तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 13 मई को जारी अधिसूचना में कहा, 'चीनी की निर्यात नीति को तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर, 2026 तक या अगले आदेश तक (जो भी पहले हो) 'प्रतिबंधित' से 'निषिद्ध' कर दिया गया है।'

वैश्विक आर्थिक संकट की आहट! जानिए मंदी की चेतावनी के बीच भारत की स्थिति कैसी

नई दिल्ली  दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय संस्थाओं और जाने-माने अर्थशास्त्रियों ने पिछले एक हफ्ते में वैश्विक आर्थिक मंदी को लेकर गंभीर चेतावनियां जारी की हैं. इसके पीछे मुख्य वजहें हैं अमेरिका की आक्रामक टैरिफ पॉलिसी, ट्रेड वॉर का बढ़ता असर, कमजोर होता उपभोक्ता खर्च और AI निवेश में बने बुलबुले के फटने का डर. मुख्य तौर पर अमेरिका में इसका सबसे ज्यादा रिस्क है, मगर भारत समेत दुनिया के बाकी देश भी इससे अधूते नहीं रहने वाले।  सबसे बड़ी चेतावनी मेरिल लिंच (Merrill Lynch) के दिग्गज फोरकास्टर गैरी शिलिंग (Gary Shilling) की तरफ से आई है. ये वही शख्स हैं, जिन्होंने 1969-70 के दौर की आर्थिक मंदी की सटीक भविष्यवाणी की थी और इनका नाम हर किसी को याद हो गया था. हाल ही में बिजनेस इनसाइड को दिए इंटरव्यू में शिलिंग ने कहा कि 2026 के अंत तक अमेरिकी मंदी ‘लगभग तय’ है. उनके मुताबिक तीन बड़े खतरे हैं. पहला एक फ्रीज हो चुका हाउसिंग मार्केट, जहां खरीदार और विक्रेता दोनों सुस्त पड़े हैं, दूसरा कॉर्पोरेट कैपेक्स में तेज गिरावट, और कमजोर होता उपभोक्ता वर्ग. शिलिंग ने कहा, “शेयर बाजार बहुत महंगा है और जल्द ही बड़ा करेक्शन आने की पूरी आशंका है।  उनके अलावा, बिलेनियर निवेशक लियोन कूपरमैन (Leon Cooperman) भी शिलिंग के सुर में सुर मिला चुके हैं. फॉक्स बिजनेस पर उन्होंने कहा, “बाजार बहुत ऊंचे मूल्यांकन पर है और कई समस्याएं एक साथ मुंह बाए खड़ी हैं।  जेपी मॉर्गन (JP Morgan) ने पहले वैश्विक मंदी की 60 फीसदी संभावना जताई थी, जिसे अब घटाकर 40 फीसदी किया है. लेकिन साथ ही यह भी कहा कि “काफी डाउनसाइड रिस्क अभी भी बना हुआ है।  मैकिंजी (McKinsey) के ताजा ग्लोबल सर्वे का नतीजा और भी चौंकाने वाला है. करीब 70% बिजनेस एग्जीक्युटिव्स ने मंदी के किसी न किसी सीन को सबसे संभावित माना. इनमें से 61 प्रतिशत ने डिमांड से पैदा होने वाली मंदी की बात कही. यानी बढ़ती अनिश्चितता से उपभोक्ताओं का भरोसा टूट सकता है, जो मंदी तक ले जाने के लिए काफी होगा।  मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) के चीफ ग्लोबल इकॉनमिस्ट सेथ कारपेंटर (Seth Carpenter) ने कहा, “आर्थिक नुकसान शुरू हो चुका है. अगर टैरिफ अप्रैल के पीक पर वापस जाते हैं तो अमेरिका और पूरी दुनिया मंदी में चली जाएगी.” IMF ने भी ग्लोबल ग्रोथ 2024 के 3.3% से घटकर 2026 में 3.1% रहने का अनुमान जताया है और कहा है कि जोखिम नीचे की तरफ झुके हुए हैं।  भारत पर क्या होगा असर? भारत की अर्थव्यवस्था मुख्यतः घरेलू मांग पर टिकी है, इसीलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि देश वैश्विक मंदी की सीधी चपेट में नहीं आएगा. डेलॉयट इंडिया (Deloitte India) के अनुसार भारत 2026 में 6.5 से 7 फीसदी की दर से बढ़ता रह सकता है और वह दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. लेकिन बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के चीफ इकॉनमिस्ट मदन सबनवीस (Madan Sabnavis) की चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उनके मुताबिक भारत रुपये की तेज अस्थिरता से जरूर प्रभावित होगा. जब अमेरिका और यूरोप जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में मंदी आती है, तो निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी खींच लेते हैं, परिमाणस्वरूप रुपया कमजोर पड़ता है, शेयर बाजार में उठापटक होती है और आयात होने वाले कच्चे माल महंगे हो जाते हैं. भारत कच्चे तेल का बड़ा इम्पोर्टर है, इसलिए वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोई भी उथलपुथल सीधे महंगाई को हवा दे सकती है।  IT सेक्टर पर बड़ा खतरा एक बड़ा सेक्टोरल खतरा आईटी इंडस्ट्री के सामने है. नैस्कॉम (NASSCOM) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय आईटी सेक्टर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप जैसे पश्चिमी बाजारों पर टिकी हुई है. यदि इन देशों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है और वहां सेवाओं की मांग घटती है, तो इसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा. नए प्रोजेकट्स मिलना कम हो जाएंगे, कंपनियां अपने बजट में कटौती करेंगी और युवाओं के लिए नई नौकरियों के अवसर भी सिमट सकते हैं।  आईटी के अलावा कपड़ा, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे वे तमाम उद्योग भी दबाव महसूस करेंगे, जो अपना माल विदेशों में बेचते हैं. हालांकि, भारत के पास इस संभावित संकट से लड़ने के मजबूत साधन भी मौजूद हैं. सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर किया जा रहा भारी निवेश और भारतीय रिजर्व बैंक की संभली हुई नीतियां एक सुरक्षा कवच का काम करेंगी. इसके बावजूद, यदि वैश्विक आर्थिक हालात और अधिक बिगड़ते हैं, तो भारत की कुल विकास दर (GDP) में 0.3% से 0.5% तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। 

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत एक्टिव: रूस से भरोसा मिला तो अमेरिका से की खास अपील

 नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और पर्शियन गल्फ में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अमेरिका से रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट को आगे बढ़ाने की अपील की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई दिल्ली ने वॉशिंगटन से कहा है कि मौजूदा हालात में ऊर्जा सप्लाई बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि तेल बाजार में जारी अस्थिरता का असर सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ सकता है।  अमेरिका ने पहली बार मार्च में भारत और अन्य मुल्कों को रूसी तेल खरीदने के लिए विशेष छूट दी थी. इसके बाद इसे बढ़ाकर 16 मई 2026 तक कर दिया गया. इस छूट की वजह से भारत रियायती दरों पर रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद पा रहा है।  हालांकि, यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बनाता रहा है कि वह रूस से तेल खरीद कम करे ताकि मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके. लेकिन अब ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है।  इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी पक्ष से कहा है कि अगर तेल बाजार में उथल-पुथल जारी रहती है तो इसके गंभीर सामाजिक और आर्थिक असर हो सकते हैं. खासतौर पर भारत जैसे देश में, जहां 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतें काफी बड़ी हैं और पहले से ही कुकिंग गैस की कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं. भारत के तेल मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इस मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है. वहीं अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की तरफ से भी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।  रूस का एनर्जी सप्लाई पूरा करने का वादा नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने से पहले ब्रॉडकास्टर आरटी इंडिया से बातचीत में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि रूस यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के ऊर्जा हित पूरी तरह सुरक्षित रहें. उन्होंने कहा, "मैं गारंटी दे सकता हूं कि रूसी ऊर्जा सप्लाई से जुड़े भारत के हित प्रभावित नहीं होंगे. हम हरसंभव कोशिश करेंगे कि यह अनुचित कंपटीशन हमारे समझौतों को नुकसान न पहुंचाए।  रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने जोर देकर कहा कि रूस ने ऊर्जा क्षेत्र में कभी भी भारत या किसी अन्य साझेदार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में विफलता नहीं दिखाई है. उन्होंने तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट को भारत-रूस सहयोग का प्रमुख उदाहरण बताया और कहा कि नए पावर यूनिट्स पर काम जारी है. उन्होंने कहा, "भारत को और ऊर्जा की जरूरत है. हम गैस, तेल और कोयले जैसे हाइड्रोकार्बन की सप्लाई लगातार जारी रखे हुए हैं।  इस बीच भारत ने मई महीने में रिकॉर्ड स्तर पर रूसी तेल आयात किया है. इकोनॉमिक टाइम्स ने डेटा फर्म क्लेपेर के हवाले से बताया कि, मई में भारत रोजाना करीब 23 लाख बैरल रूसी तेल आयात कर रहा है. अनुमान है कि पूरे महीने का औसत करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकता है, जो अब भी बेहद बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा खिंचने की स्थिति में भारत रूस से सस्ते तेल पर अपनी निर्भरता और बढ़ा सकता है, क्योंकि इससे घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। 

नरेंद्र मोदी पर शिवराज सिंह चौहान की अनोखी प्रस्तुति, किताब में दिखा ‘अपनापन’ का जिक्र

भोपाल केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों पर एक किताब लिखी है। किताब का नाम ' अपनापन ' है। इसका लोकार्पण 26 मई को नई दिल्ली में है। शिवराज सिंह चौहान ने खुद इसकी जानकारी दी है। किताब की कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिवराज सिंह चौहान के अनुभवों पर है। पीएम के साथ अनुभवों को किताब में लिखा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर लिखा कि तीन दशकों से अधिक के सार्वजनिक जीवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनेक भूमिकाओं और विभिन्न दायित्वों में कार्य करते हुए मुझे उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व, सेवा, संगठन, सुशासन और राष्ट्र समर्पण के अनेक दुष्टिकोणों से देखने समझने का अवसर मिला है। इन्हीं अनुभवों, भावनाओं, प्रेरणाओं और जीवन-मूल्यों को मैंने अपनी पुस्तक 'अपनापन' में संजोने का विनम्र प्रयास किया है। 26 मई को किताब का लोकार्पण शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मेरी इस कृति 'अपनापन' का लोकार्पण 26 मई 2026 को सुबह साढ़े दस बजे, एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में होगा। मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक सभी पाठकों को, विशेषकर हमारे युवा मित्रों को, सेवा, संवेदना, राष्ट्रभक्ति और जनकल्याण के विचारों के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देगी। पुस्तक का लोकार्पण पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा करेंगे। प्रधानमंत्री के साथ करीब से जिया है उन्होंने कहा कि मेरे लिए 'अपनापन' केवल एक पुस्तक नहीं है, यह उन तैंतीस वर्षों को शब्दों में उतारने का प्रयास है, जिनको मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बहुत करीब से जिया है। लोगों ने मंचों से उन्हें भाषण करते हुए देखा है, लेकिन मैंने उनमें उस व्यक्ति को देखा है, जो दिन भर देर रात तक काम करने के बाद भी अगली सुबह उसी ऊर्जा के साथ देश के लिए खड़ा होता है। लोग उनके निर्णय को देखते हैं, लेकिन मैंने देखा है कि कैसे उनका दिल हर गरीब, हर किसान, मां, बहन-बेटी और हर कार्यकर्ता के लिए धड़कता है। 1991 की एकता यात्रा का जिक्र शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुझे आज भी 1991 की एकता यात्रा याद है। तब कई लोग उसे राजनीतिक यात्रा के रूप में देखते थे, लेकिन मोदी जी ने उसे राष्ट्रीय चेतना का अभियान बना दिया। उनकी सोच स्पष्ट थी कि तिरंगा श्रीनगर के लाल चौक तक ही नहीं, देश के हर युवा के दिल तक पहुंचना चाहिए। और तब मैंने पहली बार महसूस किया कि नेतृत्व सिर्फ भाषण से नहीं आता, नेतृत्व तपस्या से आता है, नेतृत्व अनुशासन से आता है, नेतृत्व समर्पण से आता है और सबसे ज़्यादा नेतृत्व अपनेपन से आता है। क्यों लिखा 'अपनापन' उन्होंने कहा कि उन अनुभवों को यादों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि एक पुस्तक के रूप में जनता तक पहुंचाना चाहिए और इसी सोच ने मुझे लेखक बना दिया। 'अपनापन' यह पुस्तक आपके सामने है। इस पुस्तक में संगठन और सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले लोग यह देखेंगे कि बड़े लक्ष्य केवल भाषण से पूरे नहीं होते। बड़े लक्ष्य अनुशासन, समर्पण, तपस्या और सामूहिक प्रयासों से पूरे किए जा सकते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस पुस्तक में युवा देखेंगे कि कैसे जनता से जुड़कर, उनकी समस्या जानकर और उनको साथ लेकर मेहनत करके बदलाव लाया जा सकता है। वे लोग, जो भारत में सामाजिक और राजनीतिक बदलाव को देख रहे हैं, इस पुस्तक में एक ऐसी झलक देखेंगे कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े राष्ट्रीय परिवर्तन का वातावरण बनाया जा सकता है। और दुनिया में वे लोग, जो नरेंद्र भाई के नेतृत्व को देख रहे हैं, उनको इस पुस्तक में उनके व्यक्तित्व को ज़्यादा निकटता से समझने का अवसर मिलेगा। पुस्तक से देश बदलने का साहस मिलेगा इस पुस्तक 'अपनापन' में आपको सिर्फ घटनाएं नहीं, वह सोच मिलेगी जिसने देश को बदलने का साहस किया। वह अनुशासन मिलेगा, जिसने सपनों को सिद्धि में बदल दिया और वह अनुभव मिलेंगे, जो नेतृत्व को देखने के आपके नजरिये को बदल देंगे। इस पुस्तक को पढ़ते समय अगर आपने यह महसूस किया कि देश बदलने के लिए बड़े पद नहीं, बड़े संकल्प की जरूरत होती है, तो मैं मानूँगा कि मेरा प्रयास सार्थक हुआ।  

आम आदमी को झटका: सांची ने फिर बढ़ाए दूध के दाम, आज से लागू हुई नई दरें

भोपाल  लगातार बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता को एक और बड़ा झटका लगा है. दरअसल रसोई गैस, सब्जियों और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के बाद अब दूध भी महंगा हो गया है. देशभर में अमूल और मदर डेयरी द्वारा दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के ऐलान के बाद अब मध्य प्रदेश के प्रमुख सहकारी दुग्ध ब्रांड सांची ने भी दूध के दाम बढ़ाने की घोषणा कर दी है. सांची की नई दरें आज  15 मई 2026 से लागू होंगी, जबकि अमूल और मदर डेयरी की नई कीमतें 14 मई से प्रभावी हो जाएंगी. कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब उपभोक्ताओं को प्रति लीटर दूध पर 2 रुपये अधिक चुकाने होंगे।  2 रुपए प्रति लीटर बढ़ा सांची दूध का दाम जानकारी के अनुसार सांची ने दूध के सभी प्रमुख पैकेटों की कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. इसके तहत अब तक 34 रुपये में मिलने वाला आधा लीटर दूध पैकेट 35 रुपये में मिलेगा, जबकि 68 रुपये वाला एक लीटर पैकेट अब 70 रुपये में मिलेगा. डेयरी प्रबंधन का कहना है कि दुग्ध उत्पादन लागत, पशु आहार, पैकेजिंग और परिवहन खर्च में लगातार वृद्धि होने के कारण यह फैसला लिया गया है।  अमूल ने भी पूरे देश में बढ़ाया दाम अमूल ने भी पूरे देश में दूध के दाम बढ़ाने का ऐलान किया है. कंपनी ने अलग-अलग दूध उत्पादों की कीमतों में 1 से 3 रुपये तक की बढ़ोतरी की है. अमूल के अनुसार यह वृद्धि पशुओं के चारे, ईंधन और पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती लागत के कारण की गई है. गुजरात कोआपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन ने बयान जारी कर कहा है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी किसानों और डेयरी संचालन पर बढ़ते आर्थिक दबाव को संतुलित करने के लिए जरूरी थी. नई दरें 14 मई 2026 से लागू होंगी।  मदर डेयरी ने 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी मदर डेयरी ने भी अपने टोकन, फुल क्रीम और टोंड दूध समेत सभी प्रमुख वेरिएंट्स के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है. कंपनी ने बढ़ती उत्पादन लागत और परिवहन खर्च को इसकी मुख्य वजह बताया है. दूध की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है।    

प्रशासनिक व्यवस्था में फेरबदल, उत्तर प्रदेश सरकार ने 84 पीसीएस अफसरों को किया ट्रांसफर

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गुरुवार की शाम बड़े पैमाने पर प्रशासनिक अफसरों का फेरबदल कर दिया। प्रदेश के 84 पीसीएस (PCS) अधिकारियों का एक साथ तबादला कर दिया गया है। इस व्यापक फेरबदल की जद में कई महत्वपूर्ण जिलों के अपर जिलाधिकारी (एडीएम), नगर मजिस्ट्रेट, विकास प्राधिकरणों के सचिव और अपर नगर आयुक्त आए हैं। वाराणसी, लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर और गोरखपुर जैसे प्रमुख शहरों के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए गए हैं। कौन कहां से कहां भेजा गया 1. आलोक कुमार वर्मा: अपर जिलाधिकारी (नगर), वाराणसी से मुख्य राजस्व अधिकारी, सुल्तानपुर । 2.  प्रियंका सिंह: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), हरदोई से कमाण्डेन्ट नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान, लखनऊ । 3. डा० वैभव शर्मा: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), बदायूँ से अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), गोरखपुर । 4. अजीत कुमार सिंह: सचिव, प्रयागराज विकास प्राधिकरण से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), मुजफ्फरनगर । 5. अतुल कुमार- ।: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), गौतमबुद्धनगर से संयुक्त निदेशक (प्रशासन), नागरिक उड्डयन निदेशालय व संयुक्त सचिव, लखनऊ विकास प्राधिकरण। 6. संजय कुमार: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), जालौन से सचिव, आगरा विकास प्राधिकरण । 7. गजेन्द्र कुमार: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), मुजफ्फरनगर से अपर जिलाधिकारी (नगर), गोरखपुर । 8. सुशील प्रताप सिंह: प्रभारी अपर निदेशक (प्रशासन), नागरिक उड्डयन निदेशालय व संयुक्त सचिव, लखनऊ विकास प्राधिकरण से परीक्षा नियंत्रक, उ०प्र० विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड, लखनऊ । 9.  श्रद्धा शांडिलयायन: सचिव, आगरा विकास प्राधिकरण से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), गौतमबुद्धनगर । 10. शादाब असलम: प्रधान प्रबन्धक, उ०प्र० सहकारी चीनी मिल संघ से अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, प्रयागराज । 11. जय प्रकाश: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), संतकबीरनगर से अपर आयुक्त, गोरखपुर मण्डल, गोरखपुर । 12.  नीता: कमाण्डेन्ट, नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान, लखनऊ से अपर आयुक्त, प्रयागराज मण्डल, प्रयागराज । 13. अमरेन्द्र कुमार वर्मा: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), श्रावस्ती से अपर जिलाधिकारी (प्रोटोकॉल), आगरा । 14. विनीत कुमार सिंह: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), गोरखपुर से सचिव, प्रयागराज विकास प्राधिकरण, प्रयागराज । 15.  पूजा मिश्रा: अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), प्रयागराज से अतिरिक्त मिशन निदेशक, उ०प्र० कौशल विकास मिशन । 16.  रत्नप्रिया: अपर आयुक्त, प्रयागराज मण्डल, प्रयागराज से अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), सुल्तानपुर । 17. मो० मोइनुल इस्लाम: अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति), महोबा से प्रधान प्रबन्धक, उ०प्र०सहकारी चीनी मिल संघ । 18. विपिन कुमार: अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), वाराणसी से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), इटावा । 19. अभिनव रंजन श्रीवास्तव: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), इटावा से अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, लखनऊ । 20. सूर्यकान्त त्रिपाठी: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), मेरठ, उप संचालक चकबन्दी, मेरठ से अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति), महोबा । 21. संजीव कुमार: कुल सचिव, अटल बिहारी बाजपेई चिकित्सा विश्वविद्यालय से अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), आजमगढ़ । 22.  दीपाली भार्गव: सचिव, अलीगढ़ विकास प्राधिकरण से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), हरदोई। 23.  ज्योत्स्ना: सचिव, खुर्जा बुलन्दशहर विकास प्राधिकरण से कुल सचिव, अटल बिहारी बाजपेई चिकित्सा विश्वविद्यालय। 24. पंकज कुमार: अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), अलीगढ़ से अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), वाराणसी। 25. प्रदीप वर्मा: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), संभल से अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), लखनऊ। 26. ललित कुमार: अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, लखनऊ से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), श्रावस्ती। 27. अविनाश त्रिपाठी: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), फतेहपुर से अपर जिलाधिकारी (नगर), बरेली। 28. दुर्गेश मिश्रा: अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, गोरखपुर से अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, वाराणसी। 29.  अमृता सिंह: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), रायबरेली से अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, कानपुर। 30.  पल्लवी मिश्रा: उप आवास आयुक्त, आवास विकास परिषद, लखनऊ से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), झाँसी। 31. अंजनी कुमार सिंह-2: अपर जिलाधिकारी (नगर), गोरखपुर से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), गाजियाबाद। 32. अर्पित गुप्ता: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), अमेठी से सचिव, मेरठ विकास प्राधिकरण। 33. कुँवर वीरेन्द्र मौर्य: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), भदोही से अपर जिलाधिकारी (वि/रा) मेरठ, उप संचालक चकबन्दी मेरठ । 34.  उपमा पाण्डेय: सचिव, झाँसी विकास प्राधिकरण से अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), प्रयागराज । 35. राजेश कुमार-6: अपर जिलाधिकारी (नगर), कानपुर नगर से अपर जिलाधिकारी (नगर), वाराणसी । 36. दिनेश कुमार: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), गाजीपुर से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), ललितपुर । 37. देवेन्द्र पाल सिंह: मुख्य राजस्व अधिकारी, बहराइच, उप संचालक चकबन्दी, बहराइच से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), बिजनौर । 38. अनिरूद्ध प्रताप सिंह: अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), अयोध्या से अपर जिलाधिकारी (नगर), मेरठ । 39. सौरभ दुबे: अपर जिलाधिकारी (नगर), बरेली से मुख्य राजस्व अधिकारी, बहराइच, उप संचालक चकबन्दी, बहराइच । 40. बृजेश कुमार सिंह: अपर जिलाधिकारी (नगर), मेरठ से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), सीतापुर । 41. सुश्री प्रिया सिंह: अतिरिक्त मिशन निदेशक, उ०प्र० कौशल विकास मिशन से उप निदेशक, डा राम मनोहर लोहिया राज्य प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी । 42. मो० अवेश: अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, कानपुर से अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), शाहजहाँपुर । 43.  पूजा: अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, स्टेट एजेन्सी फॉर कांप्रीहेंसिव हैल्थ एंड इंटेग्रटेड सर्विसेज से अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), आगरा । 44. अंकुर श्रीवास्तव: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), ललितपुर से अपर जिलाधिकारी (नगर), मुरादाबाद । 45. गौरव शुक्ला: अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), सुल्तानपुर से सचिव, झाँसी विकास प्राधिकरण । 46. वरूण कुमार पाण्डेय: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), झाँसी से कुलसचिव, डा० राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, प्रयागराज । 47.  शुभी काकन: अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), लखनऊ से उप आवास आयुक्त, आवास विकास परिषद, लखनऊ । 48. सुश्री ज्योति सिंह: अपर जिलाधिकारी (नगर), मुरादाबाद से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), अमेठी । 49. आनन्द कुमार सिंह: सचिव, मेरठ विकास प्राधिकरण से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), रामपुर । 50. सत्यप्रिय सिंह: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), मऊ से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), संभल । 51. राहुल कश्यप विश्वकर्मा: अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), आजमगढ़ से सचिव, अलीगढ विकास प्राधिकरण । 52. दीपेन्द्र: अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, प्रयागराज से प्रधानाचार्य, स्पोर्ट्स कालेज, लखनऊ तथा सचिव, प्रबंध समिति, उ०प्र० स्पोर्ट्स कालेज सोसाइटी । 53. सत्य प्रकाश-3: अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), एटा से अपर जिलाधिकारी (वि/रा) संतकबीरनगर । 54.  अंजुम बी: अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), गाजियाबाद से अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) बदायूँ । 55. प्रशान्त तिवारी: अपर जिलाधिकारी (प्रोटोकॉल), आगरा से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), हाथरस । 56. सौरभ भट्ट: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), गाजियाबाद से अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), अलीगढ़ । 57. नितीश कुमार सिंह: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), सीतापुर से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), जालौन । 58. विशु राजा: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), फिरोजाबाद से अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), अयोध्या । 59. सुश्री शुभांगी शुक्ला: अपर जिलाधिकारी (वि/रा), आगरा से अपर जिलाधिकारी (वि/रा), भदोही । 60. धीरेन्द्र सिंह: अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), आगरा से प्रधान प्रबन्धक, उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ । 61. डॉ. संतोष कुमार उपाध्याय: … Read more