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प्रधानमंत्री मोदी की विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर रहा मध्यप्रदेश

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश आज अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में तेजी से एक नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की “विकसित भारत” की परिकल्पना को मध्यप्रदेश साकार कर रहा है। प्रदेश में अभूतपूर्व गति से सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे और आधुनिक सार्वजनिक अधोसंरचना निर्माण हो रहा है। लोक निर्माण विभाग ने “लोक निर्माण से लोक कल्याण” को अपना मूल मंत्र बनाकर विकास को सीधे जनता की सुविधा, आर्थिक प्रगति और सामाजिक समृद्धि से जोड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मजबूत अधोसंरचना किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी आवश्यकता होती है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देशभर में सड़क, रेलवे, एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विस्तार हुआ है। प्रदेश में सड़क संपर्क, शहरी यातायात, औद्योगिक कनेक्टिविटी और ग्रामीण अधोसंरचना के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। वैज्ञानिक तरीके से तैयार हो रहा सड़क नेटवर्क मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश के सड़क नेटवर्क को अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सड़क श्रेणियों के पुनर्गठन तथा रोड नेटवर्क रैशनलाइजेशन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, जिससे सड़क निर्माण और रखरखाव की प्राथमिकताएँ अधिक स्पष्ट हुई हैं। विभाग द्वारा “लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप” विकसित किया गया है। यह ऐप GIS आधारित तकनीक पर कार्य करता है और इसके माध्यम से प्रदेश में 71 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों, लगभग 3 हजार भवनों तथा 1400 से अधिक पुलों का विस्तृत सर्वेक्षण किया जा चुका है। इस सर्वेक्षण से विभाग को अधोसंरचना की वास्तविक स्थिति का डिजिटल डेटा प्राप्त हुआ है, जिसके आधार पर योजनाएँ अधिक सटीक और व्यावहारिक तरीके से तैयार की जा रही हैं। रोड नेटवर्क मास्टर प्लान से बेहतर कनेक्टिविटी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया है। मास्टर प्लान के अंतर्गत शहरों के लिए बायपास मार्ग, औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बेहतर सड़क संपर्क, जिला मुख्यालयों के बीच तेज कनेक्टिविटी तथा यातायात दबाव कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही यात्रा दूरी और समय कम करने के उद्देश्य से 6 नए ग्रीनफील्ड सड़क मार्गों की पहचान की गई है। इन परियोजनाओं से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि एवं पर्यटन क्षेत्रों को नई गति मिलने की संभावना है। जीआईएस आधारित डिजिटल बजट प्रणाली से बढ़ी पारदर्शिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था के अनुरूप लोक निर्माण विभाग ने जीआईएस आधारित बजट मॉड्यूल लागू किया है। इस प्रणाली से प्रत्येक सड़क प्रस्ताव को डिजिटल नक्शे पर दर्ज किया जाता है। इससे यह तुरंत स्पष्ट हो जाता है कि संबंधित सड़क पहले से किसी अन्य योजना में शामिल है या नहीं। इस व्यवस्था ने योजनाओं में दोहराव को समाप्त करने के साथ विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया है। लोकपथ 2.0 : नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल सुविधा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग द्वारा विकसित “लोकपथ” ऐप को अब उन्नत स्वरूप में “लोकपथ 2.0” के रूप में विकसित किया गया है। यह ऐप नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल गाइड की तरह कार्य कर रहा है। इस ऐप में रूट प्लानर, टोल जानकारी, अस्पताल एवं पेट्रोल पंप की लोकेशन, एसओएस सुविधा और सड़क दुर्घटना संभावित स्थानों की चेतावनी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। ऐप ब्लैक स्पॉट से लगभग 500 मीटर पहले अलर्ट जारी करता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में सहायता मिल रही है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था, 25 ठेकेदार किये गये ब्लैक लिस्टेड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की है। इसके अंतर्गत 875 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया गया। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर 25 ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट किया गया तथा कई मामलों में दंडात्मक कार्रवाई भी की गई। इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम (PMS 2.0) लागू किया जा रहा है। इससे योजना निर्माण से लेकर भुगतान तक की संपूर्ण प्रक्रिया डिजिटल रूप से मॉनिटर की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण के साथ अधोसंरचना विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान खुदाई से निर्मित गड्ढों को “लोक कल्याण सरोवर” के रूप में विकसित किया जा रहा है। अब तक 506 सरोवर तैयार किए जा चुके हैं और 600 नए सरोवर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही सड़क किनारे भूजल रिचार्ज व्यवस्था, फ्लाई-ओवर पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तथा ग्रीन बिल्डिंग निर्माण जैसे नवाचारों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग द्वारा शासकीय भवनों को ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। तेजी से आगे बढ़ रहा सड़क और पुल निर्माण कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण कार्यों को अभूतपूर्व गति मिली है। वर्तमान में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत 77 हजार किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क विकसित किया जा चुका है। पिछले दो वर्षों में विभाग द्वारा 11,632 किलोमीटर सड़कों का निर्माण एवं मजबूतीकरण, 5,741 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण और 190 पुल एवं फ्लाईओवर का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त वर्तमान में 16,954 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य तथा 531 पुल एवं फ्लाईओवर परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम होगा तथा आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। एक्सप्रेस-वे और रिंग रोड परियोजनाओं से मिलेगा नया आयाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बड़े स्तर पर कनेक्टिविटी विस्तार के लिए 6 प्रमुख विकास पथ (एक्सप्रेसवे) परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ किया गया है। इसके साथ ही भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में रिंग रोड परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद शहरों में यातायात दबाव कम होगा, यात्रा समय घटेगा और औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी। NHAI के साथ लगभग 1 लाख करोड़ का समझौता मुख्यमंत्री … Read more

महंगाई ने तोड़ी 42 महीनों की सीमा, जानिए किन चीजों के दाम सबसे ज्यादा बढ़े

नई दिल्ली महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है. अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर यानी WPI (Wholesale Price Index) बढ़कर 8.30 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले करीब 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. मार्च 2026 में यह आंकड़ा 3.88 फीसदी था. बाजार को उम्मीद थी कि महंगाई करीब 5.50 फीसदी रह सकती है, लेकिन असली आंकड़े ने सभी अनुमान पीछे छोड़ दिए. इससे साफ है कि देश में लागत और ईंधन से जुड़ा दबाव तेजी से बढ़ रहा है।  वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले DPIIT द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस बार महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र रहा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर भारत के थोक बाजार पर दिखाई दिया है।  ईंधन और तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता अप्रैल महीने में फ्यूल एंड पावर कैटेगरी की महंगाई मार्च के 1.05 फीसदी से बढ़कर सीधे 24.71 फीसदी पर पहुंच गई. यह उछाल बेहद बड़ा माना जा रहा है। कच्चे तेल की थोक महंगाई 88 फीसदी से ऊपर पहुंच चुकी है. वहीं, पेट्रोल की कीमतों में 32.40 फीसदी और डीजल में 25.19 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. घरेलू LPG गैस भी महंगी हुई है और इसकी महंगाई दर 10.92 फीसदी रही।  विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान संकट और खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. इससे कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े और इसका असर सीधे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ा. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए ग्लोबल मार्केट में बदलाव का असर घरेलू कीमतों पर जल्दी दिखता है।  खाने-पीने की चीजों से राहत हालांकि राहत की बात यह रही कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई अभी ज्यादा नहीं बढ़ी है. अप्रैल में फूड इन्फ्लेशन बढ़कर 2.31 फीसदी रही, जबकि मार्च में यह 1.85 फीसदी थी. प्याज और आलू जैसी जरूरी सब्जियों के दाम अभी भी पिछले साल के मुकाबले कम बने हुए हैं. इससे आम लोगों को थोड़ी राहत मिली है।  लेकिन दूसरी ओर प्राइमरी आर्टिकल्स यानी कच्चे सामान की महंगाई 6.36 फीसदी से बढ़कर 9.17 फीसदी हो गई. वहीं, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई भी 3.39 फीसदी से बढ़कर 4.62 फीसदी पहुंच गई है. इसका मतलब है कि फैक्ट्रियों में बनने वाले सामान की लागत भी बढ़ रही है।  अन्य सेक्टर्स पर दबाव Core WPI यानी खाने-पीने की चीजों और ईंधन को छोड़कर बाकी वस्तुओं की महंगाई भी बढ़कर 5 फीसदी पर पहुंच गई है, जो 43 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. मार्च में यह 3.7 फीसदी थी. इससे यह संकेत मिल रहा है कि महंगाई का दबाव अब सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है बल्कि बाकी सेक्टरों में भी फैलने लगा है।  अब बाजार और आम लोगों की नजरें मई महीने के आंकड़ों पर टिकी हैं. DPIIT के अनुसार मई 2026 के WPI आंकड़े 15 जून को जारी किए जाएंगे. अगर तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव तैयारियों की कर रहे नियमित समीक्षा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सिंहस्थ: 2028 महापर्व आयोजन की तैयारियों को लेकर निरंतर निरीक्षण जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर शिप्रा नदी के 29 किलोमीटर क्षेत्र में नव निर्माणाधीन घाटों से 24 घंटे करोड़ों श्रद्धालुओं को शिप्रा में स्नान कराने के बाद सुरक्षा और सुविधा के साथ गंतव्य तक पहुंचाया जा सकेगा। सिंहस्थ के लिए सभी विभागों ने निर्माणाधीन विकास कार्यों की गति तेज कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नियमित रूप से सिंहस्थ तैयारियों की समीक्षा कर जानकारी प्राप्त कर आवश्यक निर्देश दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर सिंहस्थ के लिए विकास कार्य प्रगतिरत है। सिंहस्थ में विश्व भर से आने वाले श्रद्धालुओं को वाहन पार्किंग के साथ ही स्नान के लिए घाट तक पहुंचाने के लिए सुविधाजनक एप्रोच रोड का निर्माण किया जा रहा है। व्यवस्थित पार्किंग क्षेत्र और घाट तक सुविधाजनक आने जाने के मार्ग होने से आवश्यक प्रबंधन करने में सुविधा होगी। हाल ही में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने उज्जैन पहुंचकर सिंहस्थ की तैयारियों का जायजा लिया है। 18 स्थान एप्रोच रोड के लिए हुए चिन्हित सिंहस्थ: 2028 के तहत नियमित निरीक्षण में संभागायुक्त सह सिंहस्थ मेला अधिकारी  आशीष सिंह, कलेक्टर उज्जैन  रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के दल मेला क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थानों में की जाने वाली व्यव्स्थाओं का निरंतर जायजा ले रहे हैं। अधिकारी दल ने  विक्रांत भैरव मंदिर के समीप स्थित ब्रिज से निरीक्षण प्रारंभ कर करीब 5 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण किया। उन्हेल रोड ब्रिज के समीप तक शिप्रा नदी पर निर्माणाधीन नवीन घाट को जोड़ने के लिए प्रस्तावित 18 स्थानों को एप्रोच रोड के लिए चिन्हित किया है। संवरने लगा है उज्जैन सिंहस्थ : 2028 महापर्व के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर विश्व भर से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुविधाजनक रूप से मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में स्नान करवाने और श्रद्धालुओं की मेजबानी के लिए उज्जैन संवरने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नियमित रूप से सिंहस्थ तैयारियों की जानकारी प्राप्त कर निर्देश देते है। हाल ही में प्रशासनिक अधिकारियों ने द्वितीय चरण में शिप्रा किनारे पैदल 36 किलोमीटर भ्रमण किया। अधिकारी दल ने इस दौरान शिप्रा घाट से जोड़कर बनाए जाने वाले प्रस्तावित मार्गों के लिए 140 स्थान चिन्हित कर तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री  मोदी के आह्वान पर किया अमल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आह्वान और मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर पेट्रोल-डीजल की मितव्ययिता के नियम का अनुसरण करते हुए अधिकारी बस में सवार होकर निरीक्षण के लिए पहुंचे। सिंहस्थ : 2028 के लिए निर्माणाधीन विकास कार्यों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रस्तावित मार्ग चिन्हित करने के लिए नियमित निरीक्षण के तहत अधिकारियों की टीम सुबह पेट्रोल-डीजल बचाने का संदेश देते हुए एक ही बस में यात्रा कर निरीक्षण स्थल पहुंचे। अधिकारी दल ने विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया। भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन सिंहस्थ : 2028 के अंतर्गत निर्माणाधीन नए घाट और सभी घाटों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले प्रस्तावित एप्रोच रोड के लिए स्थान चिन्हित किए। निरीक्षण में अधिकारियों ने लाल पुल ब्रिज के नीचे स्थित घाट क्षेत्र से निरीक्षण शुरू करते हुए गऊघाट, वेधशाला के पीछे, वाकणकर ब्रिज के समीप, जीवन खेड़ी,  शनि मंदिर के समीप पुराने और निर्माणाधीन नवीन घाट तक पहुंच मार्ग तैयार करने के लिए प्रस्तावित स्थानों को चिन्हित किया। निरीक्षण के दौरान शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर स्थान चिन्हित किए । एप्रोच रोड निर्माण के लिए शिप्रा नदी के किनारों पर निर्माणाधीन नवीन घाट और पुराने घाट भी शामिल किए गए है। घाट से 200 मीटर एरिया में जो स्थान चिन्हित किए है उन स्थानों पर श्रद्धालुओं को घाट तक आने और जाने के लिए प्रस्तावित एप्रोच रोड का निर्माण सुविधाजनक और सहज हो, इस उद्देश्य से स्थान चिन्हित किए गए हैं। पुलिस विभाग के माध्यम से इन चिन्हित स्थानों पर भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन को लेकर प्लान तैयार किया जाएगा।  

आखिरकार हुआ ऐलान: वीडी सतीशन के हाथों में केरल की कमान

तिरुवनन्तपुरम केरलम में 10 साल के बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस ने आखिरकार मुख्यमंत्री के नाम पर अपनी फाइनल मुहर लगा दी है. वीडी सतीशन नए मुख्यमंत्री होंगे, जिनके नाम का ऐलान गुरुवार को दिल्ली में केरलम की प्रभारी दीपा दास मुंसी ने किया. चार मई को आए चुनाव नतीजे के बाद से मुख्यमंत्री की रेस में केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला के नाम चल रहे थे, लेकिन सियासी बाजी सतीशन के हाथ लगी।  केरल के सीएम को लेकर दस तक शह-मात का खेल चलता रहा, जो किसी  किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं रहा. एक तरफ दिल्ली दरबार में राहुल गांधी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल हैं, तो दूसरी तरफ केरल विधानसभा में अपनी धारदार बहस से सरकार की नाक में दम करने वाले वीडी सतीशन थ।  सतीशन ने जिस तरह केरल में अपनी पकड़ मजबूत की है, उसने यह साफ कर दिया है कि राज्य की जमीनी सियासत में फिलहाल उनका पलड़ा भारी है. केरलम जीत के हीरो भी सतीशन को माना जाता है. जमीनी पकड़ ही वीडी सतीशन की कांग्रेस के संकटमोचक और राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले वेणुगोपाल पर भारी पड़ी।  दिल्ली की 'पकड़' पर भारी पड़ी जमीनी 'हकीकत' केरलम के मुख्यमंत्री के चुनाव करने में कांग्रेस ने ऐसे ही दस दिन नहीं लगाया बल्कि काफी मंथन और मशक्कत के बाद वीडी सतीशन के नाम पर अपनी फाइनल मुहर लगी है. साल 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत UDF की करारी हार के बाद केरलम के कांग्रेस में एक बड़े बदलाव की मांग उठी थी. उस वक्त तक केरलम में केसी वेणुगोपाल का दबदबा निर्विवाद माना जाता था।  केसी वेणुगोपाल को हाईकमान का 'आंख और कान' कहा जाता है, दिल्ली की राजनीति में उनकी पकड़ा है, लेकिन हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में यह संदेश गया कि अब पुराने चेहरों और 'ग्रुप पॉलिटिक्स' से काम नहीं चलेगा.  यहीं से वीडी सतीशन का उदय हुआ. सतीशन ने पार्टी के भीतर उस 'ग्रुपिज्म' (A और I ग्रुप) को चुनौती दी, जिसे वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला जैसे नेता नियंत्रित करते थे।  केरल कांग्रेस में कोई भी बड़ा फैसला वीडी सतीशन और प्रदेश अध्यक्ष के.सुधाकरन की मर्जी के बिना नहीं होता.  वेणुगोपाल अभी भी दिल्ली में शक्तिशाली हैं और टिकट बंटवारे में उनकी भूमिका अहम रहती है, लेकिन केरल के 'कैप्टन' अब सतीशन ही हैं।  हालांकि वेणुगोपाल राहुल गांधी के करीब हैं, लेकिन राहुल गांधी खुद राज्यों में मजबूत क्षेत्रीय नेतृत्व चाहते थे।, सतीशन की साफ-सुथरी छवि और पांच बार विधायक रहने के अनुभव को राहुल ने वेणुगोपाल की सिफारिशों के ऊपर तरजीह दी।  कैसे सतीशन केरल की रेस में सब पर भारी पड़े? सतीशन ने साबित कर दिया है कि दिल्ली की करीबी आपको पद दिला सकती है, लेकिन जनता और कार्यकर्ताओं का विश्वास आपको 'नेता' बनाता है। केरल में वेणुगोपाल की 'रिमोट कंट्रोल' वाली राजनीति पर सतीशन की 'डायरेक्ट एक्शन' वाली सियासत फिलहाल भारी पड़ती दिख रही है। सतीशन के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह गई कि उन्हें युवा विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं का भरपूर समर्थन मिला, जो बदलाव चाहते थे. केरलम में कांग्रेस को सत्ता में वापसी कराने में वीडी सतीशन का अहम रोल था. वेणुगोपाल का नाम सीएम के लिए जब उछला तो केरलम के अलग-अलग जिलों से सतीशन के पक्ष में आवाज उठने लगी. कांग्रेस हाईकमान ने जमीनी हकीकत को समझते हुए वेणुगोपाल के दिल्ली तो वीडी सतीशन को सूबे की सियासत में रखने का फैसला किया।  वेणुगोपाल को सीएम बनाने का फैसला करने पर दो सीटों पर उपचुनाव होता. केसी वेणुगोपाल लोकसभा सांसद हैं, जिनको अपनी सीट से इस्तीफा देना पड़ता. इसके बाद उन्हें विधानसभा सदस्यता के लिए किसी मौजूदा विधायक की सीट खाली करानी पड़ती. इस तरह एक लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने पड़ते. सतीशन को लिए ऐसा कुछ नहीं करना है, जिसके चलते ही हाईकमान की पहली पसंद बने।  केरल की सामाजिक इंजीनियरिंग में सतीशन फिट वीडी सतीशन  और केसी वेणुगोपाल दोनों ही 'नायर' समुदाय से आते हैं, जो केरल की राजनीति में एक प्रभावशाली जाति मानी जाती है. पारंपरिक रूप से नायर वोट कांग्रेस के आधार रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी की पैठ और एलडीएफ (LDF) की नीतियों के कारण इसमें बिखराव देखा गया था।  सतीशन पिछले पांच बार से नायर बहुल सीट से चुनाव जीतकर आ रहे हैं, जिसके चलते उनकी सियासी पकड़ कांग्रेस के दूसरे नेताओं से ज्यादा नायर समाज पर मानी जाती है. सतीशन को सीएम बनाकर कांग्रेस इस बड़े वोट बैंक को फिर से अपने पाले में पूरी तरह एकजुट कर सकती है. ऐसे में कांग्रेस के भीतर अन्य नायर नेताओं  रमेश चेन्निथला जैसे) के साथ सत्ता के संतुलन को भी बनाए रखना आसान होगा।  सतीशन को मुस्लिम लीग का खुला समर्थन केरलम की सियासत में सत्ता की चाबी अक्सर ईसाई और मुस्लिम समुदायों के हाथ में होती है. सतीशन की सबसे बड़ी ताकत उनकी मजबूत धर्मनिरपेक्ष छवि है. उन्होंने ईसाई समुदायों के विभिन्न संप्रदायों के साथ गहरे संबंध विकसित किए हैं. चर्च के कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी और बाइबिल के प्रति उनके ज्ञान ने उन्हें अल्पसंख्यकों के बीच एक 'भरोसेमंद हिंदू नेता' के रूप में स्थापित किया है।  कांग्रेस की सबसे मजबूत सहयोगी  इंडिया युनियन मुस्लिम लीग (IUML) के साथ सतीशन के मधुर संबंध हैं. मुस्लिम लीग शुरू से ही वीडी सतीशन को सीएम बनाने के पैरोकारी करती रही है. इसकी एक वजह यह भी है कि मुस्लिम लीग नहीं चाहती थी कि कोई दिल्ली से आकर सीएम बने बल्कि सतीशन को सीएम बनाने के मजबूती से बात रख रही थी।  वीडी सतीशन ने केरलम का चुनाव सिर्फ कांग्रेस के नाम पर नहीं बल्कि यूडीएफ के नाम पर लड़ा था. ऐसे में कांग्रेस ने कोई नया राजनीतिक प्रयोग करने के बजाय वीडी सतीशन के नाम पर मोहर लगाने का काम किया. इस तरह एक तीर से कांग्रेस ने उन तमाम समीकरण को साधने की कवायद की है, जो उसका अपना सियासी आधार है. मुस्लिम लीग यूडीएफ गठबंधन को स्थिरता प्रदान करते हैं,जिससे मुस्लिम मतदाताओं में यह संदेश जाता है कि कांग्रेस एक ऐसे नेता को आगे बढ़ा रही है जो सबको साथ लेकर चल सकता है।  'नेहरूवादी वामपंथ' … Read more

भीषण आंधी-बारिश से यूपी में भारी तबाही, योगी सरकार ने 24 घंटे में राहत राशि देने को कहा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में खराब मौसम, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली ने भारी तबाही मचाई है। प्रदेश में पिछले 24 घंटे में आंधी-तूफान व आकाशीय बिजली गिरने से 111 लोगों की मौत हुई है, जबकि 72 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा 170 पशुहानि और 227 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों को प्रभावित परिवारों से मुलाकात करने और हालात का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को 24 घंटे के भीतर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के भी निर्देश दिए हैं। राहत आयुक्त कार्यालय को खराब मौसम से प्रभावित 26 जिलों से भेजी रिपोर्ट के मुताबिक प्रयागराज में सबसे ज्यादा 21 लोगों की मौत हुई है। मीरजापुर में 19, संत रविदास नगर में 16 और फतेहपुर में 11 लोगों की जान गई। रायबरेली और उन्नाव में छह-छह लोगों की मौत दर्ज की गई है। वहीं बदायूं में पांच लोगों की मौत हुई है। प्रतापगढ़ में चार, सोनभद्र व सीतापुर में तीन-तीन और हरदोई, बहराइच, बरेली,चंदौली, कानपुर देहात व संभल में दो-दो लोगों की मौत हुई है। राहत आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार मीरजापुर में 18, फतेहपुर में 15 व संत रविदास नगर में 11 लोग घायल हुए हैं। वहीं कानपुर देहात में सर्वाधिक 33 पशुहानि हुई है, जबकि संत रविदास नगर में 29, रायबरेली में 24, प्रयागराज में 20 व मीरजापुर में 16 पशुहानि के मामले सामने आए हैं। सोनभद्र में सर्वाधिक 75 मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इसके अलावा मीरजापुर में 46, बरेली में 21, बदायूं व प्रयागराज में 16-16 और संत रविदास नगर व सीतापुर में 14-14 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत कार्य करने व 24 घंटे के भीतर मुआवजा जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों व अपर जिलाधिकारियों को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं प्रभावित परिवारों से मिलकर आवश्यक मदद उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि राहत आयुक्त कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से निरंतर मानिटरिंग की जा रही है। मौसम विभाग द्वारा जारी खराब मौसम की चेतावनी के उपरान्त राहत आयुक्त कार्यालय स्थित कंट्रोल रूम द्वारा सचेत पोर्टल के माध्यम से आम जनमानस को 34.64 करोड़ रेड एवं आरेंज चेतावनी संदेश भेजे गये हैं। उन्होंने बताया कि राहत आपदा हेल्प लाइन नम्बर 1070 पर काल आते ही तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों को जन प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को सहायता राशि का वितरण कराने का निर्देश दिया है। सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि राहत और बचाव कार्यों में पूरी गंभीरता बरती जाए। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुचारु किया जाए। जनता की सुरक्षा और सहायता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जरूर कराएं पोस्टमार्टम आपदा से होने वाली मौतों के मामले में सरकार द्वारा चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। मुआवजे की यह राशि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के आधार पर दिए जाने की व्यवस्था है। इस व्यवस्था की जानकारी कई लोगों को न होने के कारण पोस्टमार्टम के बिना मृतकों का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है, इससे संबंधित परिवारों को मुआवजे की राशि नहीं जारी की जाती है।  

दिल्ली में बस्तर विकास मॉडल पर मंथन : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर में तेजी से बदल रहे हालात और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा उपस्थित थे। बैठक में विशेष रूप से बस्तर में चल रहे ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ पर चर्चा हुई।मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह को बताया कि जिन इलाकों में कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था, वहां अब डॉक्टर, दवाइयां और स्वास्थ्य टीमें नियमित रूप से पहुंच रही हैं। दूरस्थ गांवों में पैदल जाकर लोगों की जांच की जा रही है और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मात्र एक महीने में 21.86 लाख से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य जांच हो चुकी है और उनके डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार कर लिए गए हैं। हजारों मरीजों को समय पर उपचार और उच्च अस्पतालों में रेफर किया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर में अब पुराने सुरक्षा शिविर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। इन्हें धीरे-धीरे “जन सुविधा केंद्र” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां गांव के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इन केंद्रों के जरिए दूरस्थ  क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहली बार कई बुनियादी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। ग्रामीण अब इलाज, बैंक खाते, दस्तावेज और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की शुरुआत 13 अप्रैल 2026 से सुकमा से हुई है। इस अभियान में 36 लाख लोगों को लक्षित किया गया है। इसके अलावा बस्तर मुन्ने ( अग्रणी बस्तर) अभियान के जरिए 31 महत्वपूर्ण योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है। जगदलपुर में नया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हो गया है, जहां अब बस्तर के लोगों को महंगे इलाज के लिए रायपुर या बिलासपुर नहीं जाना पड़ेगा। डायल-112 की नेक्स्ट जेन सेवा का विस्तार और पुराने सुरक्षा शिविरों को “जन सुविधा केंद्र” में बदलने की योजना भी बस्तर के स्थायी विकास की दिशा में अहम कदम हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जो इलाके कभी नक्सल प्रभाव के कारण मुख्यधारा से कटे हुए थे, वहां आज सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है। हाल ही में सुकमा के एक अत्यंत दुर्गम गांव से गंभीर मरीज को सैकड़ों किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलाना इस बदलाव का बड़ा उदाहरण बना है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह को बस्तर के लिए तैयार विकास रोडमैप की जानकारी दी। इसमें सड़क, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन से बस्तर में तेजी से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह का 18 और 19 मई को बस्तर प्रवास  संभावित है।

इंडियन शिप पर हमले से बढ़ा तनाव, भारत बोला- ऐसी हरकत बिल्कुल बर्दाश्त नहीं

बेंगलुरु  ओमान तट के पास एक भारतीय ध्वज वाले जहाज पर हुए मिसाइल हमले को लेकर भारत ने कड़ी नाराजगी जताई है. विदेश मंत्रालय ने इस घटना को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और सिविलियन नाविकों को निशाना बनाना किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और आसपास के अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम भले ही फिलहाल लागू हो, लेकिन दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर स्थिति अभी भी बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।  विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि ओमान तट के पास भारतीय ध्वज वाले जहाज पर हुआ हमला अस्वीकार्य है. हम इस बात की निंदा करते हैं कि लगातार कमर्शियल शिपिंग और नागरिक नाविकों को निशाना बनाया जा रहा है. मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि जहाज पर मौजूद सभी भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं. भारत ने बचाव अभियान चलाने के लिए ओमान प्रशासन का धन्यवाद भी किया. बयान में कहा गया कि भारत दोहराता है कि कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना, निर्दोष नागरिक क्रू मेंबर्स की जान खतरे में डालना और समुद्री व्यापार व नेविगेशन की स्वतंत्रता में बाधा डालने जैसी घटनाओं से बचा जाना चाहिए. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में इससे पहले भी भारतीय हजार पर हमले हुए हैं।  किसने किया हमला? अभी साफ नहीं हालांकि भारत सरकार ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि जहाज पर हमला किसने किया. लेकिन यह घटना ऐसे समय हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट के आसपास हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ईरान-अमेरिका टकराव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण इस इलाके में वैश्विक चिंता लगातार बढ़ रही है।  क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. भारत समेत कई एशियाई देशों की ऊर्जा जरूरतें इस समुद्री मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं. ऐसे में यहां किसी भी तरह का हमला या अस्थिरता सीधे वैश्विक व्यापार और तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है. जानकारों का कहना है कि हाल के महीनों में इस क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर खतरा तेजी से बढ़ा है. यही वजह है कि भारत ने इस हमले को केवल एक सुरक्षा घटना नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।  भारत की बढ़ी चिंता भारत लंबे समय से समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और फ्रीडम ऑफ नेविगेशन की वकालत करता रहा है. भारतीय जहाज पर हुए इस हमले के बाद यह साफ हो गया है कि पश्चिम एशिया का तनाव अब सीधे भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को भी प्रभावित करने लगा है. हालांकि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव और बढ़ा, तो उसका असर वैश्विक सप्लाई चेन और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कितना गंभीर हो सकता है।   

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मध्यप्रदेश में बिना TET योग्यता के शिक्षक नियुक्ति पर रोक

भोपाल   मध्यप्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षकों को देश की सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के मामले पर सुनवाई करते हुए एक स्पष्ट निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि- पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले ही दी जा चुकी है, ऐसे में अब बिना परीक्षा पास किए कोई भी शिक्षक नहीं बन सकता है। बता दें कि साल 1998 से 2009 के बीच नियुक्त किए गए शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने की मांग करते हुए याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं। 'बिना परीक्षा पास किए कोई टीचर नहीं बन सकता' बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा में छूट दिए जाने की मांग को लेकर दायर की गई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले दी जा चुकी है। अब इसमें कोई छूट की गुंजाइश नहीं है और शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 में जब नियम लागू हुए थे, उसके बाद 5 साल की रियायत दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। हालांकि इस मामले में अभी कोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट का पुराना आदेश सुप्रीम कोर्ट ने 1998-2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के TET एक्जाम को लेकर 1 सितंबर 2025 को कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उनके लिए भी TET अनिवार्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर मांग की थी कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए। पूर्व में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। क्या है TET परीक्षा ? शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) एक अनिवार्य योग्यता है जिसे NCTE ने 2010 में लागू किया था। यह सुनिश्चित करता है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों में न्यूनतम शैक्षणिक स्तर और कौशल मौजूद है। मध्य प्रदेश में वर्तमान में स्थिति यह है कि अगर कोर्ट राहत नहीं देता है, तो करीब 1.5 लाख अनुभवी शिक्षकों को फिर से छात्र बनकर परीक्षा देनी होगी। TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं जिनमें से एक में पहली से पांचवी और दूसरे में पांचवी से आठवीं तक के लिए परीक्षा होती है। जातीय और श्रेणीवार विवरण की मांग सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार से शिक्षकों का विस्तृत डेटा मांगा है। अधिवक्ता पृथ्वीराज सिंह के अनुसार, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पूर्व शिक्षकों की एक श्रेणीवार (Category-wise) सूची प्रस्तुत की जाए। इसमें सामान्य, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षकों की सटीक संख्या स्पष्ट होनी चाहिए। बता दें कि मध्य प्रदेश में लगभग 1.50 लाख शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक टीईटी पास नहीं की है, उनके भविष्य के लिए यह फैसला निर्णायक साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट के पहले का क्या था आदेश?-सुप्रीम कोर्ट ने 1998-2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के TET एक्जाम को लेकर 1 सितंबर 2025 को कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उनके लिए भी TET अनिवार्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर मांग की थी कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए। पूर्व में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश के 1.50 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया था। गौरतलब है कि TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं जिनमें से एक में पहली से पांचवी और दूसरे में पांचवी से आठवीं तक के लिए परीक्षा होती है।  

वोटर लिस्ट जांच को लेकर बड़ा अभियान, पंजाब-चंडीगढ़ में BLO करेंगे डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन

चंडीगढ़  पंजाब और चंडीगढ़ में चुनाव आयोग ने 15 जून से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू करने का ऐलान किया है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और राज्य में करीब 2.14 करोड़ मतदाता हैं। SIR के तीसरी चरण के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस दौरान नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे, जबकि गलत, फर्जी या दोहराए गए नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे। इस मुद्दे पर नेता विपक्ष और कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह ने कहा कि SIR के दौरान लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा- गांव उसी का बचता है, जिसका चौकीदार जागता है। ऐसा न हो कि बाद में पछताना पड़े। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी आखिरी दम तक अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी रहेगी और SIR प्रक्रिया पर पूरी नजर रखेगी। पार्टी अपने वोटरों का ध्यान रखेगी और जिन लोगों की नई वोट बननी है, उनकी वोट भी बनवाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस हर बूथ पर अपने बीएलए तैनात कर रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी की वोट गलत तरीके से न काटी जा सके। SIR की प्रोसेस को 6 सवाल-जवाब में जानें 1. SIR क्या है? यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाकर वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। 18 साल से ज्यादा के नए वोटरों को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पते में गलतियों को भी ठीक किया जाता है। 2. पहले किस राज्य में हुआ? पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। दूसरे फेज के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में SIR की घोषणा हुई। 3. कौन करता है? ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों का वेरिफिकेशन करते हैं। 4. SIR में वोटर को क्या करना होगा? SIR के दौरान BLO/BLA वोटर को फॉर्म देंगे। वोटर को उन्हें जानकारी मैच करवानी है। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। 5. SIR के लिए कौन से दस्तावेज मान्य?     पेंशनर पहचान पत्र     किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र     जन्म प्रमाणपत्र     पासपोर्ट     10वीं की मार्कशीट     स्थायी निवास प्रमाणपत्र     वन अधिकार प्रमाणपत्र     जाति प्रमाणपत्र     राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम     परिवार रजिस्टर में नाम     जमीन या मकान आवंटन पत्र     आधार कार्ड 6. SIR का मकसद क्या है? 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने BJP को घेरा, अपराध के मुद्दे पर साधा निशाना

चंडीगढ़  पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने अपराध के मुद्दे पर भाजपा शासित राज्यों को घेरते हुए बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि जिन राज्यों में लंबे समय से भाजपा की सरकार है, वहां अपराध तेजी से बढ़े हैं। चीमा कहा कि पंजाब में सख्त कार्रवाई और विशेष बलों के गठन के कारण अपराध की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में काफी नियंत्रित है। अपराध के आंकड़ों में दिल्ली सबसे ऊपर है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में अपराध दर 1602 अंक तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और चंडीगढ़ का भी उन्होंने जिक्र किया। चीमा ने कहा कि पंजाब में अपराध दर 227.1 अंक बताई गई है, जो अन्य कई राज्यों की तुलना में काफी कम है। वित्त मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने कानून व्यवस्था मजबूत करने के लिए अलग-अलग विशेष बल तैयार किए हैं और अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पंजाब में लोगों को सुरक्षित माहौल देना है। चंडीगढ़ मेें बढ़ने लगा अपराध हरपाल चीमा ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि जहां भी भाजपा जाती है, वहां कानून व्यवस्था खराब होने लगती है। उन्होंने चंडीगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले लोग यहां केवल यातायात नियमों को लेकर सतर्क रहते थे, लेकिन अब यहां हत्या जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं। उन्होंने गायक दिलजीत दोसांझ से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। चीमा ने आरोप लगाया कि पहले भाजपा की ओर से उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश की गई और अब उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि दिलजीत दोसांझ के प्रबंधक के घर पर हमला कर डराने की कोशिश की गई। चीमा ने इसे पंजाब विरोधी सोच बताया। लॉरेंस के मुद्दे पर भाजपा को घेरा वित्त मंत्री ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि लॉरेंस गुजरात की जेल में बंद है, लेकिन अलग-अलग राज्यों को जांच के लिए उसकी जरूरत होने के बावजूद उसे सुरक्षित रखा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उसके नाम का इस्तेमाल कर विभिन्न राज्यों में लोगों को डराने का माहौल बनाया जा रहा है। ईवीएम के बजाय मतपत्र से चुनाव कराने की मांग पर पूछे गए सवाल के जवाब में हरपाल चीमा ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास उम्मीदवार नहीं हैं, इसलिए वे इस तरह के आरोप लगाकर माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।