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छत्तीसगढ़ की नई नीति: ‘शहरी गैस वितरण नीति-2026’ से अब सीधे किचन तक पहुंचेगी गैस

रायपुर  स्वच्छ ऊर्जा और शहरी जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति, 2026 को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया यह निर्णय राज्य की ऊर्जा संरचना को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस (PNG) को सीधे घरों तक पहुंचाना है। इसके लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग, आपूर्ति में देरी या उपलब्धता को लेकर होने वाली अनिश्चितताओं से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।  रायपुर सहित राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से गैस पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे 24 घंटे निर्बाध और सुरक्षित गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। पारंपरिक सिलेंडर पर निर्भरता में कमी  राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में पाइपलाइन गैस वितरण प्रणाली पहले से संचालित है और इसे व्यापक रूप से प्रभावी माना गया है। इन महानगरों में रसोई गैस के पारंपरिक सिलेंडर पर निर्भरता में कमी आई है और आपूर्ति अधिक नियमित व सुगम बनी है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय उसी दिशा में एक तार्किक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में लंदन, टोक्यो और सिंगापुर जैसे शहरों में पाइपलाइन आधारित गैस वितरण लंबे समय से स्थापित व्यवस्था है। इन शहरों के अनुभव बताते हैं कि यह प्रणाली न केवल उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक है, बल्कि ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से भी बेहतर विकल्प प्रदान करती है। निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी नीति के लागू होने से राज्य में गैस अवसंरचना के विकास के साथ निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिससे निर्माण, वितरण और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इसके साथ ही स्वच्छ ईंधन के उपयोग से वायु प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है, जो तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल छत्तीसगढ़ को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक व्यवस्थित और भविष्य उन्मुख राज्य के रूप में स्थापित कर सकती है। उपभोक्ता सुविधा, औद्योगिक जरूरतों और पर्यावरणीय संतुलन—तीनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह नीति राज्य के शहरी विकास को नई गति देने की क्षमता रखती है।

ममता की 3 घंटे की मौजूदगी और कार्यकर्ताओं का पहरा, टीएमसी के आरोप पर EC का जवाब

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग ख़त्म होने के एक दिन बाद ईवीएम और पोस्टल बैलट बॉक्स को रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर विवाद हो गया।  30 अप्रैल की दोपहर से शुरू हुआ ये विवाद शाम तक काफ़ी बढ़ गया और कई जगह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेताओं, उनके समर्थकों और प्रशासन-पुलिस के लोगों के बीच बहस देखने को मिली।  तृणमूल कांग्रेस के लोग स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर पुलिस-प्रशासन पर 'धांधली' करने के आरोप लगाते दिखे. वहीं बीजेपी ने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी हार रही है, इसलिए 'धांधली' के आरोप लगाए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे चरण में विधानसभा की 142 सीटों पर वोटिंग हुई थी. नतीजे 4 मई को आएंगे।   टीएमसी ने स्ट्रॉन्गरूम में पोस्टल बैलट से छेड़छाड़ का आरोप लगाया और इसके बाद पार्टी के नेताओं के संबंधित जगह पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद भी पहुंच गईं और धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया. विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे राजनीतिक ड्रामा बताया. मामले ने तूल पकड़ा तो चुनाव आयोग को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति साफ करनी पड़ी. इस दौरान क्या-क्या हुआ? शाम तीन बजे के बाद तक सब सामान्य था, फिर एक ई-मेल आया. ई-मेल में इस बात की सूचना थी कि शाम 4 बजे स्ट्रॉन्गरूम खुलेगा. टीएमसी नेता कुणाल घोष और शशि पांजा मौके पर पहुंचे, लेकिन उनको अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई. टीएमसी ने इस पर शक जताते हुए पार्टी प्रतिनिधियों के बिना पोस्टल बैलट और पिंक पेपर संभालने को लोकतंत्र के खिलाफ बताया. टीएमसी ने इसका वीडियो भी शेयर किया और इसके बाद सियासी पारा चढ़ता ही चला गया. कुणाल घोष और शशि पांजा स्ट्रॉन्गरूम के बाहर धरने पर बैठ गए. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौके पर पहुंच गईं।  सीएम की अपील पर बड़ी तादाद में टीएमसी समर्थक पहले से ही मौके पर थे. सीएम ने समर्थकों से 24 घंटे स्ट्रॉन्गरूम की निगरानी करने की अपील की थी. ममता सखावत मेमोरियल स्कूल में बने स्ट्रॉन्गरूम में पहुंचीं और करीब तीन घंटे तक रहीं. इस स्कूल में भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र की ईवीएम रखी हुई है, जहां से खुद ममता बनर्जी उम्मीदवार हैं. ममता बनर्जी करीब तीन घंटे तक स्ट्रॉन्गरूम में रहीं. स्ट्रॉन्गरूम से निकलने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों ने उनको अंदर जाने से रोक दिया. जब कहा कि मुझे जाने का अधिकार है, चुनाव नियमों के मुताबिक उम्मीदवार को सील कक्ष के बाहर तक जाने की अनुमति है, तब मुझे जाने दिया गया।  उन्होंने कई जगह गड़बड़ी मिलने का दावा करते हुए कहा कि अगर कोई गड़बड़ी हुई, तो हम लड़ेंगे. ईवीएम मशीन लूटने की कोई कोशिश करेगा, तो हम जिंदगी-मौत एक कर देंगे. टीएमसी के आक्रामक रुख, धरना-प्रदर्शन और आरोप के बीच कई घंटे तक माहौल गर्म बना रहा. इस दौरान टीएमसी और बीजेपी समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ममता बनर्जी का यह नाटकीय रवैया पश्चिम बंगाल के लिए सबसे साफ एग्जिट पोल है।  टीएमसी के आरोप टीएमसी ने चुनाव आयोग पर बीजेपी के साथ मिलकर लोकतंत्र से खिलवाड़ का आरोप लगाया और कहा कि स्ट्रॉन्गरूम के आसपास उनकी जानकारी के बगैर हलचल हो रही है, जो गलत है. कुणाल घोष ने कहा कि तय यह हुआ था कि बिना बताए स्ट्रॉन्गरूम की सील नहीं तोड़ी जाएगी. फिर ऐसा क्यों हुआ? उन्होंने विपक्ष पर भी हमला बोला और कहा कि हम जब गलत का विरोध कर रहे हैं, तब बीजेपी को इतनी मिर्ची क्यों लग रही है।  चुनाव आयोग का जवाब टीएमसी के आरोप पर चुनाव आयोग को रात के समय प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जवाब देना पड़ा. चुनाव आयोग ने टीएमसी के आरोप सिरे से खारिज कर दिए और कहा कि स्ट्रॉन्गरूम में रखे बैलट की छंटनी की जा रही थी. यह प्रक्रिया का हिस्सा है. चुनाव आयोग ने दावा किया कि सभी पार्टियों को इसकी जानकारी पहले ही दे दी गई थी. बैलट बॉक्स के साथ किसी तरह की कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. खुदीराम अनुशीलन केंद्र के सभी सात स्ट्रॉन्गरूम पूरी तरह से सुरक्षित हैं. पोस्टल बैलट की छंटनी का काम दूसरे कमरे में चल रहा था। 

मध्य प्रदेश में श्रमिकों को राहत: CM मोहन ने 600 करोड़ का ट्रांसफर किया, गिग वर्कर्स को भी लाभ

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि श्रमिकों के हित में केन्द्र और राज्य सरकार की अनेक योजनाएं संचालित हैं। अब असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी संबल योजना का लाभ दिया जा रहा है। इनमें विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता सामग्री पहुंचाने वाले गिग वर्कर्स और प्लेटफार्म वर्कर्स को भी शामिल किया गया है। उन्होंने प्रदेश में 3529 गिक वर्कर्स को पहली बार योजना का लाभ प्रदान करने के लिये विभाग की सराहना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि इस क्षेत्र के पात्र श्रमिकों को पंजीकृत कर सहायता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करवाना हम सभी का दायित्व है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालयीन बैठक कक्ष से सिंगल क्लिक द्वारा मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना में 27 हजार से अधिक श्रमिक परिवारों के लिए 600 करोड़ रुपए की अनुग्रह सहायता राशि  अंतरित करते हुए ये बातें कहीं। इस अवसर पर श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल भी उपस्थित थे। राशि अंतरण के अवसर पर प्रदेश के जिलों में स्थित प्रशासनिक अधिकारी, श्रमिक भाई और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में श्रम स्टार रेटिंग की अनूठी पहल शुरू की गई है। इस व्यवस्था में औद्योगिक संस्थाओं द्वारा श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने का कार्य किया जा रहा है। श्रेष्ठ कार्य के लिए प्रतिष्ठानों को श्रम स्टार रेटिंग के माध्यम से आंकलन कर प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे श्रम कानूनों का बेहतर पालन करने वाले औद्योगिक संस्थानों की विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। प्रदेश में 554 कारखानों ने स्वेच्छा से श्रम स्टार रेटिंग की व्यवस्था को अपनाया है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रम विभाग, श्रम संगठनों के साथ ही नागरिकों का भी यह दायित्व है कि जिस प्रतिष्ठान से खरीदारी करते हैं, वहां श्रम स्टार रेटिंग की व्यवस्था लागू करने को प्रोत्साहित करें। ऐसे संस्थानों से उत्पाद क्रय करने और सेवाएं लेने को प्राथमिकता भी दी जाए जो श्रमिक भाइयों के अधिकारों और उनके कल्याण के लिए तत्पर रहते हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार ने 4 नई श्रम संहिताओं का प्रावधान किया है। राज्य सरकार भी इन संहिताओं के अनुरूप नियम तैयार कर लागू करेगी। श्रमिक हित में लागू की गई केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक श्रमिकों को दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबल योजना में श्रेष्ठ प्रदर्शन वाले 5 जिलों बालाघाट, धार, सागर, जबलपुर और खरगौन की तरह अन्य जिलों से भी श्रमिकों को अनुग्रह सहायता देने के कार्य में सक्रिय प्रदर्शन की अपेक्षा की।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव की श्रमिक हितैषी नीतियों में श्रम एवं पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री पटेल ने विश्वास व्यक्त कर श्रमिक कल्याण की प्राथमिकता के लिये आभार माना। मंत्री श्री पटेल ने बताया कि वर्ष 2018 में श्रमिकों के हित में प्रारंभ हुई योजना से अब तक एक करोड़ 83 लाख श्रमिक जुड़ चुके हैं। अब तक 8 लाख 27 हजार से अधिक प्रकरणों में 7 हजार 720 करोड़ रूपए से अधिक की सहायता हितग्राहियों को दी जा चुकी है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रमिकों को राशि अंतरित किए जाने के अवसर पर श्रम विभाग के अपर सचिव श्री संजय कुमार को उनके सेवानिवृत्ति दिवस पर भावी जीवन के लिए मंगलकामनाएं दीं। बैठक में सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय  आलोक सिंह, श्रम विभाग के सचिव एम. रघुराज सहित अन्य अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद – मुख्यमंत्री साय

मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण हेतु विशेष सत्र: एक तिहाई आरक्षण के संकल्प को मिला व्यापक समर्थन महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति किया आभार प्रकट रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा है कि मातृशक्ति उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि सृजन, संस्कार और सामर्थ्य की आधारशिला है। इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें संसद एवं देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के संकल्प पर व्यापक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की जो मजबूत नींव रखी गई है, उसी क्रम में उनकी राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त करना हमारा अगला महत्वपूर्ण कदम है। यह संकल्प देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण विषय पर विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव याद रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस विशेष सत्र में समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से आई महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के समर्थन में अपने विचार रखे और महिलाओं के अधिकारों तथा उनके सशक्तिकरण के लिए सशक्त स्वर प्रदान किया। सदन में वरिष्ठ विधायकों और महिला नेतृत्व ने भी पूरे मनोयोग से चर्चा में भाग लेते हुए अपने विचार साझा किए और इस महत्वपूर्ण संकल्प का समर्थन किया। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट रूप से कहा कि नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना न्यायसंगत नहीं है। यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस दिशा में हर सकारात्मक पहल का समर्थन आवश्यक है।

पंजाब में फ़्लोर टेस्ट की तैयारियां: अमन अरोड़ा पेश करेंगे प्रस्ताव, 6 BJP सांसदों के शामिल होने से टूट का खतरा

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा का आज 11 बजे विशेष सत्र बुलाया गया है। सरकार की ओर से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके साथ ही AAP के 6 राज्यसभा सांसदों के BJP में शामिल होने के बाद सरकार पर भी खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में सरकार आज फ्लोर टेस्ट करवा सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, AAP ने अपने सभी विधायकों को विधानसभा में हाजिर रहने के लिए व्हिप भी जारी कर दी है। यही नहीं पार्टी ने सभी विधायकों को तय समय से एक घंटा पहले विधानसभा में बुला लिया था। दरअसल, पार्टी में टूट की सुगबुगाहट के बीच दो दिन पहले सभी सांसदों व विधायकों को जालंधर में बुलाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उस बैठक में 65 ही विधायक पहुंचे जबकि बाकी नदारद रहे। वहीं तीनों लोकसभा सांसद भी बैठक में नहीं पहुंचे। AAP के पास अभी 117 में से कुल 94 विधायक हैं, जबकि बहुमत के लिए 59 विधायक जरूरी होते हैं। भगवंत मानने खुद दी थी जानकारी सीएम भगवंत मान ने ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में जानकारी देते हुए बताया था कि पंजाब कैबिनेट द्वारा लिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले में यह तय किया गया है कि 1 मई को ‘मजदूर दिवस’ के अवसर पर विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा। यह एक दिवसीय सत्र उन मेहनती मजदूरों और कारीगरों को समर्पित होगा, जो देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में अहम योगदान देते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा सत्र के समय पर सवाल उठाया है। क्या बोले सुखजिंदर सिंह रंधावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा सत्र के समय पर आपत्ति जताते हुए कहा किइसे मजदूर दिवस के दिन बुलाया गया है। उन्होंने इसे सरकार की जल्दबाज़ी और संभावित विश्वास प्रस्ताव की तैयारी से जोड़ते हुए कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने दावा किया है कि AAP सरकार पहले ही अपना बहुमत खो चुकी है। उनका आरोप है कि जालंधर में हुई एक अहम बैठक में कई विधायक अनुपस्थित रहे और जो पहुंचे वो कथित तौर पर प्रशासनिक दबाव में थे। बीजेपी ने बताया फिजूलखर्ची बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने बुधवार को 1 मई को होने वाले पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र को फिजूलखर्ची और सरकारी खजाने पर बोझ बताया। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार विधानसभा जैसी संवैधानिक संस्था का दुरुपयोग न केवल अपनी कमजोर होती पार्टी और अस्थिर विधायकों को संभालने के लिए कर रही है, बल्कि पंजाब में अपनी नाकामियों, अक्षमता, टूटे वादों, माफिया राज, गुंडागर्दी और जबरन वसूली के जाल से उपजे बढ़ते जन आक्रोश से ध्यान भटकाने के लिए भी कर रही है। चुघ ने कहा कि इस तरह का सत्र बुलाने से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान को जनता को बताना होगा कि उनके तथाकथित ‘परिवर्तन’ ने चार वर्षों में क्या हासिल किया है। भ्रष्टाचार, अराजकता और आंतरिक कलह ने उनकी अपनी पार्टी को गहरे अविश्वास में धकेल दिया है। वड़िंग का दावा- 50 विधायक पार्टी छोड़ेंगे राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद लगातार कयास लगाए जा रहे हैं कि 30 से 35 विधायक राघव चड्‌ढा व संदीप पाठक के संपर्क में हैं। कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग भी AAP के 50 विधायकों के पार्टी छोड़ने का दावा कर चुके हैं। अकाली दल के नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया भी आप में टूट की बार-बार बात कर रहे हैं।

पंजाब में कमर्शियल सिलेंडर महंगा, इंडेन ने बढ़ाए दाम; ढाबों पर दाल-रोटी के दाम होंगे ऊंचे

लुधियाना  पंजाब में कमर्शियल सिलेंडर का रेट बढ़ गया है। 19 किलो के सिलेंडर का रेट 1 हजार रुपए तक बढ़ाया गया है। अलग-अलग कंपनियों के रेट में 7 से लेकर 10 रुपए तक का अंतर है। इसी तरह इंडियन ऑयल की तरफ से दी गई जानकारी में बताया गया कि इंडेन का 19 किलोग्राम वाला सिलेंडर पर 993 रुपए महंगा मिलेगा। बता दें कि, तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है। राजधानी दिल्ली में अब यह सिलेंडर 3071.50 का हो गया है, जो पहले 2078.50 में मिलता था। इसका सबसे बड़ा असर होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग बिजनेस पर पड़ेगा। बढ़ती लागत के कारण खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। चाय, नाश्ता, थाली और शादी-विवाह के खाने का खर्च बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। आज सुबह कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में करीब एक हजार रुपये के उछाल की खबर आई ही थी कि अब 'छोटू' यानी 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर ने भी बजट बिगाड़ दिया है। सूत्रों के मुताबिक, 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में ₹261 प्रति सिलेंडर की भारी बढ़ोतरी की गई है। महंगाई का यह दोहरा वार सीधे तौर पर उन लोगों की जेब पर पड़ा है, जो रोज कमाते और रोज खाते हैं। कीमतों में हुई इस बेतहाशा वृद्धि के बाद 5 किलो वाले सिलेंडर के दाम अब आसमान छूने लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जो सिलेंडर कल तक ₹549 में मिलता था, उसकी कीमत अब बढ़कर ₹810 हो गई है। एक साथ ₹261 का इजाफा छोटे उपभोक्ताओं के लिए बहुत बड़ा झटका है। इससे पहले सुबह ही 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में ₹993 की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर ₹2,078.50 की बजाय अब ₹3,071.50 का मिलेगा। छात्रों और मजदूरों पर बढ़ेगा सबसे ज्यादा बोझ 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर का इस्तेमाल सबसे ज्यादा वो लोग करते हैं जिनके पास स्थाई ठिकाना नहीं होता या जो अकेले रहते हैं। अपना गांव-घर छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने वाले लोग इसी सिलेंडर पर निर्भर हैं। वहीं, पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में रहने वाले छात्रों के मासिक खर्च में अब बड़ी बढ़ोत्तरी होगी। डेली वेज वर्कर्स और छोटे दुकानदार: रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे ढाबा चलाने वालों के लिए अब चूल्हा जलाना महंगा हो जाएगा। ईरान संकट का दिख रहा है असर गैस की कीमतों में इस आग के पीछे वैश्विक परिस्थितियां जिम्मेदार बताई जा रही हैं। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी (LPG) का संकट गहरा गया है। भारत में इसका असर पहले से ही दिख रहा था, जिसकी वजह से दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे बड़े शहरों से प्रवासी मजदूरों का पलायन भी शुरू हो चुका है। अब कीमतों में इस ताजा बढ़ोतरी ने स्थिति को और भी दयनीय बना दिया है।

विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को रोल मॉडल बनाने की अपील, मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान

विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को बनाएं रोल मॉडल : मुख्यमंत्री डॉ.यादव प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में जोड़ें नए आयाम रीवा से सर्वाधिक 24 हजार यात्रियों ने लिया हवाई सेवाओं का लाभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को देश का रोल मॉडल बनाने के प्रयास किए जाएं। प्रदेश के दूरस्थ इलाकों के साथ ही पड़ौसी राज्यों के यात्रियों को भी विमानन सेवाएं लाभान्वित करती हैं। मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र का महत्व बढ़ाने की दृष्टि से भी ये सेवाएं महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में हुई बैठक में विमानन विभाग के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विकसित होने वाले मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के परिसर में हैलीपेड निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। हैली सेवाओं के विस्तार के लिए हैलीपेड निर्माण में निजी क्षेत्र का सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने उज्जैन एयरपोर्ट के विकास के लिए संचालित कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि उज्जैन एयरपोर्ट में एयरफील्ड का कुल क्षेत्रफल 95 एकड़ है। राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार उज्जैन एयरपोर्ट 2700 मीटर लंबाई के रनवे के साथ कुल 4 हजार 100 मीटर लंबाई में विकसित होगा। इसके लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए 590 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि स्वीकृत की जा चुकी है। सिंहस्थ:2028 के दृष्टिगत श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए एयरपोर्ट उपयोगी होगा। उन्होंने निर्देशित किया कि एयरपोर्ट के विकास के सभी कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए। बैठक में पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा के संचालन के संबंध में भी चर्चा हुई। रोजगारपरक एविएशन पाठ्यक्रम का लाभ युवाओं को दिलवाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विमानन सेवाओं के विस्तार के साथ दक्ष पायलट और अन्य प्रशिक्षित अमले की आवश्यकता होगी। नई शिक्षा नीति में एविएशन पाठ्यक्रम को रोजगारपरक शिक्षा की श्रेणी में शामिल किया गया है। उन्होंने प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा एविएशन कोर्स का लाभ युवाओं को दिलवाने के लिये प्रयास करने के ‍निर्देश दिये। सफल है प्रदेश की विमानन नीति, रीवा से 24 हजार यात्रियों ने उठाया हवाई सेवा का लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 गत फरवरी 2025 में जारी की गई थी। नीति में विमानन क्षेत्र की समग्र वैल्यू चैन के लिए कई तरह के प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश से बनारस और पटना जैसे बड़े नगरों के लिए विमान सेवा प्रारंभ करने का प्रयास किया जाए ताकि धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिले। प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में नए आयाम जोड़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन नीति की सफलता के लिए विभाग के अधिकारियों को बधाई दी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के एयरपोर्ट से नए गंतव्यों को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए वित्तीय सहायता भी शिड्यूल्ड ऑपरेटर्स को दी जा रही है। मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 की सफलता का ही यह प्रमाण है कि गत छह माह में रीवा से 24 हजार यात्रियों ने हवाई सेवा का लाभ उठाया है। रीवा से दिल्ली, रीवा से रायपुर सप्ताह में तीन दिन और रीवा से इंदौर प्रतिदिन फ्लाइट उपलब्ध है। गत चार माह में रीवा से इंदौर की ऑक्यूपेंसी 85 प्रतिशत और गत डेढ़ माह में रीवा से रायपुर की ऑक्यूपेंसी 80 प्रतिशत से अधिक है। रीवा- नई दिल्ली फ्लाइट की ऑक्यूपेंसी भी 70 प्रतिशत से अधिक है। बैठक में अपर मुख्य सचिव विमानन विभाग श्री संजय कुमार शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव श्री आलोक कुमार सिंह, सचिव वित्त श्री लोकेश जाटव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।  

नर्मदा में क्रूज डूबने से 9 की मौत, 9 लापता; पर्यटन मंत्री ने पेट्रोल-डीजल बोट पर रोक की जानकारी न होने की बात कही

जबलपुर  मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में गुरुवार शाम पर्यटन विभाग का एक क्रूज अचानक आई तेज आंधी के चलते डूब गया। अब तक 9 शव मिल चुके हैं। 24 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। प्रशासन के मुताबिक 9 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। हादसा किनारे से करीब 300 मीटर दूर हुआ। बरगी सिटी सीएसपी अंजुल मिश्रा ने बताया कि शुरुआती रेस्क्यू में SDRF ने कई लोगों को बचाया, लेकिन अंधेरा और खराब मौसम से राहत कार्य प्रभावित हुआ। शुक्रवार सुबह फिर से रेस्क्यू जारी है। वहीं प्रदेश के पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी जबलपुर पहुंचे हैं, लेकिन उनका हैरान करने वाला बयान सामने आया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- नर्मदा में पेट्रोल-डीजल बोट पर रोक है। उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।चना मिलते ही SDRF और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और युद्ध स्तर पर राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।   मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। उन्होंने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी सहित वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और हर संभव मदद दी जाएगी। यह हादसा एक बार फिर पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों और मौसम की सतर्क निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और लापता लोगों की तलाश तेज कर दी गई है। सेना और स्पेशल टीमों ने संभाला मोर्चा हादसे की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन के साथ अब राष्ट्रीय स्तर की टीमें भी तैनात की गई हैं। आर्मी भी मौके पर मौजूद है। हैदराबाद से एक स्पेशल टीम और हेलिकॉप्टर रवाना किया गया है। कोलकाता से पैरामिलिट्री की एक विशेष टीम जबलपुर पहुंच चुकी है। हाइड्रॉलिक मशीनों और पोकलेन की मदद से 20 फीट गहरे पानी में फंसे क्रूज को बाहर निकालने की कोशिश जारी है। क्रूज पायलट बोले- संभलने का मौका ही नहीं मिला क्रूज के पायलट महेश ने बताया, 'सुरक्षा के इंतजाम तो थे, लेकिन अचानक आए तेज तूफान के चलते क्रूज अनियंत्रित हो गया। किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।' महेश को 10 साल का अनुभव है। खमरिया के एक परिवार के 15 लोग सवार थे ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया के A3 सेक्शन में कार्यरत कर्मचारी कामराज आर्य परिवार के 15 लोगों के साथ घूमने गए थे। कामराज के माता-पिता भी साथ में थे, लेकिन वे किनारे बैठे हुए थे। कामराज के साथ उनकी पत्नी, भाभी और बच्चे क्रूज में घूमने गए हुए थे। कामराज मूलत: कर्नाटक के रहने वाले हैं। उनके एक बेटे को बचा लिया गया। वहीं कामराज, उनकी पत्नी और एक बेटा अब भी लापता है। पर्यटन विभाग बोला- क्रूज 20 साल पुराना पर्यटन विभाग के एक अधिकारी योगेंद्र रिछारिया ने बताया, ‘बरगी डैम में फिलहाल एक क्रूज ऑपरेट किया जा रहा है। इसे 2006 में बनाया गया था। इसकी कैपेसिटी 60 यात्रियों की है। एक अन्य क्रूज खराब है।’ अब तक इन मृतकों की पहचान हुई     श्रीमती नीतू सोनी (43), निवासी कोतवाली, जबलपुर     श्रीमती सौभाग्यम अलागन (42), निवासी अन्नानगर, वेस्ट तारापुरम, तमिलनाडु     श्रीमती मधुर मैसी (62), निवासी खाजन बस्ती, नई दिल्ली     श्रीमती काकुलाझी (38), निवासी वेस्ट लैंड खमरिया, जबलपुर     श्रीमती रेशमा सैयद (66)     शमीम नकवी (66)     मरिना मैसी पति प्रदीप मैसी (39)     त्रिशान पिता प्रदीप मैसी (4) एक डेडबॉडी की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

राजनांदगांव में खेल सुविधाओं का विस्तार: 5 एकड़ भूमि पर खेल मैदान और क्रिकेट अकादमी, मुख्यमंत्री साय को धन्यवाद

राजनांदगांव को मिली खेल विकास की बड़ी सौगात: आधुनिक खेल मैदान व क्रिकेट अकादमी के लिए 5 एकड़ भूमि आवंटित, राजनांदगांववासियों के साथ विस अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने जताया मुख्यमंत्री साय का  आभार युवाओं के सपनों को मिलेगा नया आसमान: कैबिनेट के ऐतिहासिक निर्णय से राजनांदगांव में खेल अधोसंरचना को बढ़ावा रायपुर  विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के पश्चात राजनांदगांव के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी से उनके विधानसभा स्थित कक्ष में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान हाल ही में आयोजित कैबिनेट बैठक में राजनांदगांव के खेल विकास को लेकर लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय पर विस्तार से चर्चा हुई। कैबिनेट द्वारा आधुनिक खेल मैदान एवं क्रिकेट अकादमी के निर्माण हेतु जिला क्रिकेट एसोसिएशन राजनांदगांव को सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा अंतर्गत दर्ज भूमि में से 5 एकड़ भूमि रियायती दर पर आवंटित करने के निर्णय पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने इस निर्णय को क्षेत्र के खेल प्रतिभाओं के लिए एक नई दिशा देने वाला कदम बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। इस पहल से न केवल क्षेत्र में खेल अधोसंरचना सुदृढ़ होगी, बल्कि युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के बेहतर अवसर भी प्राप्त होंगे।

UP में गंगा एक्सप्रेसवे से आगे, 10 और सुपर हाईवे का निर्माण, जुड़ेंगे विंध्य, चित्रकूट और नोएडा

लखनऊ  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया. हरदोई में हुए इस लोकार्पण कार्यक्रम के बाद प्रदेश में संचालित एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की कुल लंबाई 1910 किलोमीटर हो गई है. यह एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है, जिससे दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं और प्रयागराज के बीच पहुंच काफी आसान हो गई है।  पीएम मोदी ने इस एक्सप्रेस वे के उद्घाटन के दौरान कहा कि आधुनिक प्रगति के इस दौर में उनके समीप से गुजरता यह एक्सप्रेस-वे यूपी के विकास की नई लाइफलाइन बनेगा. अब कुछ ही घंटों में आप प्रयागराज के संगम पहुंच सकते हैं और काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करके वापस आ सकते हैं. इसी के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश में आगे की आने वाली एक्सप्रेस वे परियोजनाओं की भी जानकारी दे दी।  पीएम मोदी ने भविष्य के रोडमैप का जिक्र करते हुए कहा, देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस-वे में शुमार, यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे 5 साल के भीतर बनकर तैयार हो गया है. उन्होंने कहा- एक ओर गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा हुआ है, तो इसके विस्तार पर भी काम चल रहा है. यह मेरठ से आगे बढ़कर हरिद्वार तक पहुंचेगा. इसके और बेहतर उपयोग के लिए फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण करके इसे अन्य एक्सप्रेस-वे से भी जोड़ा जाएगा।  पीएम मोदी ने असल में बताया कि गंगा एक्सप्रेस वे के लोकार्पण के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश में 10 और एक्सप्रेस वे व लिंक एक्सप्रेस वे पर काम कर रही है.  इसमें कई छोटी दूरी के लिंक एक्सप्रेसवे भी हैं जो बड़े और प्रमुख एक्सप्रेस वे सीधे जुड़ेंगे और सुदूर गांवों तक को एक्सप्रेस वे से कनेक्ट करेंगे।  इन एक्सप्रेस वे के जरिए विंन्ध्याचल (मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी) को पूर्वांचल से, फर्रुखाबाद को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से, जेवर को गंगा एक्सप्रेस वे से, लखनऊ और कानपुर को आपस में कनेक्ट करते हुए और चित्रकूट को भी गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है. इसके लिए 50 किमी तक के छोटे लिंक एक्सप्रेस वे बनाए जाने पर काम हो रहा है।  ये 10 एक्सप्रेस वे हैं, जिन पर काम जारी विंध्य एक्सप्रेसवे – 320 किमी मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे – 136 किमी झांसी लिंक एक्सप्रेसवे – 118 किमी विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे – 100 किमी फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे – 91 किमी जेवर-गंगा लिंक एक्सप्रेसवे – 74 किमी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे – 64 किमी लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे – 50 किमी नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे – 50 किमी चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे – 15.17 किमी बता दें कि उत्तर प्रदेश में अभी सात एक्सप्रेस वे ऐसे हैं जो ऑपरेशल हैं. ये एक्सप्रेस वे प्रदेश में एक छोर से दूसरे छोर तक अलग-अलग दूरियों में कनेक्टिविटी के लिहाज से सुविधाजनक बने हैं।  यमुना एक्सप्रेसवे – 165 किमी (ग्रेटर नोएडा से आगरा) आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे – 302 किमी (आगरा से लखनऊ) पूर्वांचल एक्सप्रेसवे – 341 किमी (लखनऊ से गाजीपुर) गंगा एक्सप्रेसवे – 594 किमी (मेरठ से प्रयागराज) बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे – 296 किमी (चित्रकूट से इटावा) दिल्ली-Meerut एक्सप्रेसवे – 82 किमी (दिल्ली से मेरठ) गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे – 91 किमी (गोरखपुर से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे) बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेसवे से कई उभरते हुए क्षेत्रों में आवासीय और वाणिज्यिक रियल एस्टेट की मांग में भारी उछाल आने की उम्मीद है. इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के चालू होने से न केवल यात्रा के समय में भारी कमी आएगी, बल्कि यह माल और यात्रियों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाएगा. सरकार को उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास को जबरदस्त बढ़ावा देगा. इसके अलावा, यह एक्सप्रेसवे किसानों के लिए अपनी उपज को बड़ी मंडियों तक तेजी से पहुंचाने में सहायक होगा।