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बरगी डैम में बड़ा हादसा: क्रूज पलटा, 4 की मौत; 15 को बचाया गया, रेस्क्यू जारी

जबलपुर जबलपुर स्थित बरगी बांध में एक बड़ा हादसा हो गया, जहां एक क्रूज डूब गया। जानकारी के अनुसार क्रूज में करीब 40 लोग सवार थे। अब तक चार लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 15 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। घटना के बाद मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी है। प्रशासन और बचाव दल अन्य लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। बताया जा रहा है कि हादसा शाम को लगभग छह बजे घटना के आसपास हुआ है, जब क्रूज पर्यटकों को लेकर बांध में जा रहा था। तभी अचानक तेज हवा चली।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल का आदेश: विभागीय अधिकारी और निर्माण एजेंसी समय-सीमा में कार्य पूरा करें

विभागीय अधिकारी एवं निर्माण एजेंसी आपसी समन्वय से समय-सीमा में पूर्ण करें कार्य: उप मुख्यमंत्री शुक्ल स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों की समीक्षा की भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रदेश में संचालित विभिन्न अधोसंरचना विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए कि कार्यों में बेहतर समन्वय स्थापित कर समय सीमा में कार्य पूर्ण किए जायें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि निर्माण एजेंसियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए अधोसंरचना विकास कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सभी परियोजनाओं की नियमित एवं सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, प्रगति, चुनौतियों एवं उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेज इंदौर में चल रहे सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने जिला चिकित्सालय पन्ना, सतना एवं सीधी में संचालित कार्यों की प्रगति का भी विस्तृत जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेज बुधनी, मंडला एवं छतरपुर में आवश्यक फर्नीचर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सभी आवश्यक संसाधनों की समय पर उपलब्धता से स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकेंगी एवं उनका संचालन समय सीमा में प्रारम्भ हो सकेगा। बैठक में आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस., एमडी एमपीबीडीसी तथा निर्माण एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

सम्राट चौधरी सरकार में बड़ा फेरबदल तय, मंत्रियों की सूची पर नजर

पटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का मतदान खत्म होते ही बिहार के लोगों का फोकस मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की 15 दिन पुरानी सरकार के कैबिनेट विस्तार पर आ गया है। बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पहले सीएम बने सम्राट चौधरी ने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के दो उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के साथ 15 अप्रैल को शपथ ली थी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नई सरकार के पूरी तरह गठन के लिए बंगाल चुनाव के खत्म होने का इंतजार चल रहा था। ऐतिहासिक 92 फीसदी से ऊपर वोटिंग के साथ दो चरण में बंगाल का चुनाव खत्म हो चुका है। अब चर्चा है कि सम्राट चौधरी कैबिनेट का विस्तार 3 मई या 6 मई को हो सकता है। सम्राट कैबिनेट के विस्तार के लिए 3 मई और 6 मई की अटकल को भी बंगाल चुनाव से ही जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व बंगाल से चुनाव की आंतरिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसमें चुनाव नतीजों में पार्टी के संभावित प्रदर्शन का अनुमान होगा। बंगाल चुनाव की इंटरनल रिपोर्ट में अगर हर हाल में भाजपा की जीत का भरोसा जताया गया होगा तो पार्टी नतीजों के बाद 6 मई को बिहार कैबिनेट का विस्तार करवा सकती है। लेकिन, अगर बंगाल से आई रिपोर्ट में भाजपा की जीत को लेकर कोई किंतु-परंतु जैसी आशंका होगी तो पार्टी की कोशिश होगी कि सम्राट चौधरी कैबिनेट का विस्तार चुनाव नतीजों से पहले ही 3 मई को निबटा लिया जाए। बिहार में सीएम समेत 36 नेता मंत्री बन सकते हैं। सम्राट चौधरी कैबिनेट में भाजपा से ज्यादा होंगे जदयू के मंत्री, बड़े मंत्रालय भी मिलेंगे? सम्राट चौधरी की सरकार बनने के बाद से ही कैबिनेट में भाजपा और जदयू के मंत्रियों की संख्या को लेकर भी अटकलों का दौर चल रहा है। पूर्व सीएम नीतीश कुमार की कैबिनेट में भाजपा के मंत्रियों की संख्या जदयू से ज्यादा थी। जदयू के नेताओं का कहना है कि सम्राट चौधरी की सरकार में मॉडल वही रहेगा। यानी भाजपा का सीएम है तो जदयू के मंत्रियों की संख्या ज्यादा होगी। मंत्रालय बंटवारे में भी नीतीश के फॉर्मूले से चले तो जदयू को कई बडे़ मंत्रालय भी मिल सकते हैं। सम्राट सरकार में सीएम और दोनों डिप्टी सीएम के अलावा भाजपा के 14 और जदयू के 15 नेता मंत्री बन सकते हैं। सम्राट चौधरी कैबिनेट में 36 के 36 मंत्री पद नहीं भरे जाएंगे नीतीश कुमार की ही तरह सम्राट चौधरी कैबिनेट में 36 के 36 पद भरने के बदले 1-2 मंत्रियों की जगह बनाकर रख सकते हैं, ताकि भविष्य में दूसरे दलों में तोड़-फोड़ की जरूरत पड़े तो डील के लिए ऑफर का इंतजाम रहे। सरकार में 1-2 मंत्रियों की जगह खाली हो तो उसकी बदौलत सामने वाली पार्टी के कुछ विधायकों को अपने वश में करना आसान हो जाता है। भाजपा और जदयू दोनों अपने कोटे से कम से कम 1-1 पद खाली रख सकती है। पिछली सरकार में जदयू के ज्यादातर मंत्री फिर से जगह पाएंगे। भाजपा के भी ज्यादातर मंत्री फिर से आएंगे, लेकिन नीतीश मिश्रा, कृष्ण ऋषि, नीरज सिंह बबलू जैसे कुछ पुराने मंत्री फिर से सरकार में आ सकते हैं। सम्राट चौधरी की सरकार में पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा को क्या मिलेगा? सीएम सम्राट और डिप्टी सीएम विजय और बिजेंद्र को छोड़कर नीतीश कैबिनेट में मंत्री रहे सारे नेता फिलहाल पूर्व मंत्री बने हुए हैं। नीतीश की अगुवाई वाली सरकारों में मंत्री रहे ज्यादातर नेता इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि उनको फिर मौका मिलेगा या नहीं और मिला तो मंत्रालय पुराना रहेगा या बदल जाएगा। इन पूर्व मंत्रियों में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा की हो रही है, जिन्हें पहली किस्त में सरकार में जगह नहीं मिल पाई। सोशल मीडिया पर इसे लेकर पॉजिटिव और नेगेटिव चीजों की भरमार लगी है। विजय सिन्हा को मंत्री बनाया जाएगा, इस पर संशय नहीं है, लेकिन पुराने मंत्रालय ही मिलेंगे या और बड़ा मंत्रालय मिलेगा, इस पर अटकलबाजी चल रही है। नीतीश सरकार में विजय कुमार सिन्हा के पास राजस्व और भूमि सुधार, खनन और भूतत्व के अलावा भाजपा के अध्यक्ष बने नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद से नगर विकास और आवास विभाग भी था। राजस्व और भूमि सुधार में विजय का तेवर भरा रूप दिख रहा था। चर्चा है कि उन्हें पथ निर्माण विभाग का मंत्री बनाया जा सकता है, जो पिछली सरकार में नितिन नबीन के बाद दिलीप जायसवाल को मिला था। सम्राट चौधरी सरकार में दीपक कुशवाहा का क्या होगा, चिराग और मांझी बदलेंगे मंत्री? चिराग पासवान की लोजपा-आर, जीतनराम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो को पहले की तरह कैबिनेट में 2-1-1 मंत्री मिलेंगे, यह मोटा-माटी तय दिख रहा है। जीतनराम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा फिर से मंत्री बनेंगे, यह भी तय दिख रहा है। चिराग पासवान भी अपने दोनों पुराने मंत्री संजय पासवान और संजय सिंह को रिपीट करेंगे, इसकी प्रबल संभावना है।

राजा का परिवार हाईकोर्ट में उठाएगा सोनम की जमानत के खिलाफ मामला, मां ने कहा- ‘वो किसी के साथ कुछ भी कर सकती है

इंदौर इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत मिलने के बाद अब राजा का परिवार उसकी जमानत खारिज कराने की कोशिश में जुट गया है. इसे लेकर राजा के भाई विपिन ने शिलांग के वकील से बात की है और हाईकोर्ट में जमानत रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. वकील ने उनसे संबंधित दस्तावेज भेज दिए हैं, जिन पर साइन कर वे दोबारा वापस भेजेंगे. मालूम हो कि राजा रघुवंशी हनीमून मनाने पत्नी सोनम के साथ शिलांग गए थे. जहां उनकी पत्नी ने ही प्रेमी के साथ मिलकर उनकी हत्या करवा दी थी. पिछले साल सामने आए इस केस ने पति-पत्नी के प्यार और भरोसे वाले रिश्ते पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. कई दिनों तक चली जांच के बाद सोनम को यूपी के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था. लेकिन अब सोनम को जमानत मिलने से इस मामले की यादें फिर से ताजा हो गई है।  हाई कोर्ट में सोनम की जमानत खारिज करने की दायर करेंगे याचिका राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने कहा, "मैंने वकील से बात की तो उन्होंने बताया कि सोनम को जब गाजीपुर से पुलिस ने गिरफ्तार किया था तो गिरफ्तारी की वजह नहीं बताई थी. इसी आधार पर कोर्ट ने सोनम को जमानत दी है. अब हाई कोर्ट में सोनम की जमानत खारिज करने के लिए अपील दायर करेंगे।  राजा की मां बोलीं- सोनम को फांसी देनी चाहिए थी राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी ने कहा, "हमें कानून पर पूरा भरोसा था, फिर भी सोनम को जमानत दे दी गई. सरकार को सोनम को नहीं छोड़ना चाहिए था, बल्कि उसे फांसी देनी चाहिए थी. गोविंद रघुवंशी पूरे मामले का मास्टरमाइंड है. गोविंद ने पैसा देकर सबको खरीद लिया है और जमानत में भी मदद की है. सोनम रघुवंशी अगर माफी मांगने भी इंदौर आती है तो उसे माफ नहीं करेंगे।  राजा की मां बोली- सोनम किसी के साथ कुछ भी कर सकती है उन्होंने कहा कि सोनम रघुवंशी को आखिर जमानत कैसे मिल गई, जब वह गुनहगार है? सोनम ने अपने पति को अपनी आंखों के सामने मरवाया था, तो जमानत किस आधार पर मिल गई? हमें तो भरोसा था कि इंसाफ मिलेगा, लेकिन नहीं मिला. प्रधानमंत्री से मांग की है कि सीबीआई की जांच कराई जाए. सोनम किसी के साथ मिलकर कुछ भी कर सकती है, इसलिए उनके परिवार को खतरा है।  26 मई को शिलांग से लापता हुए थे राजा, बाद में मिली थी लाश बता दें कि राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम 21 मई 2025 को हनीमून मनाने शिलांग गए थे. यहां से दोनों 26 मई को सोहरा घूमने गए, जहां दोनों लापता हो गए थे. पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय टीमों ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया. करीब एक हफ्ते बाद 2 जून 2026 को राजा का शव सोहरा के मशहूर वेई सादोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई में मिला था।  अदालत में क्या हुआ राज कुशवाहा की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. उसके वकील पी. योबिन ने कहा कि उन्होंने अदालत के सामने सभी जरूरी पक्ष रख दिए हैं और अब फैसले का इंतजार है. उन्होंने यह भी कहा कि बाकी आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी जल्द दायर की जाएंगी।  वकील से बात कर शुरू की प्रक्रिया  विपिन ने बताया कि जमानत खारिज कराने के लिए उन्होंने शिलॉन्ग में वकील से संपर्क किया है। वे खुद शिलॉन्ग नहीं जाएंगे, लेकिन सभी कागजी प्रक्रिया पूरी करेंगे, ताकि हाईकोर्ट में अपील की जा सके। वकील ने उनसे जुड़े दस्तावेज भेज दिए हैं। विपिन ने बताया कि कागज मिल चुके हैं और वे साइन कर जल्द ही वापस भेजेंगे, जिससे अपील दाखिल की जा सके। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में करीब एक हफ्ते का समय लग सकता है। 11 मई 2025 को शादी, 21 को हनीमून और 23 को हुई थी राजा की हत्या राजा रघुवंशी की सोनम से शादी इसी साल 11 मई 2025 को हुई थी। सोनम रघुवंशी और राजा 21 मई को हनीमून मनाने के लिए मेघालय के शिलॉन्ग गए थे, जहां 23 मई को हनीमून के दौरान लापता हो गए। 10 दिन बाद पुलिस ने 30 फीट गहरी खाई से उनका क्षत-विक्षत शव बरामद किया, जिस पर धारदार हथियार से किए गए कई घाव थे। सोनम तब लापता थी। इसके बाद यूपी में उसने सरेंडर किया था। उससे पूछताछ के बाद आकाश, आनंद और विशाल को पकड़ा था। सोनम के राज कुशवाहा से प्रेम सबंध थे। हालांकि, उसके परिवार ने इस बात से इनकार किया था। पत्नी सोनम राजा को दर्शनीय स्थलों की सैर के बहाने एक सुदूर स्थान पर बुलाकर ले गई थी। उनके पीछे अन्य तीनों हत्या के आरोपी भी चले गए थे। फिर दो छुरों से वार कर उसकी हत्या कर दी, जिनमें से एक छुरा बाद में जंगल से बरामद किया गया। सोनम घटनास्थल से भाग गई और बाद में उसने उत्तर प्रदेश में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। सोनम और राज सहित सभी पांचों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। सोनम को कैसे मिली जमानत सोनम रघुवंशी को जमानत देते समय अदालत ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए. अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में जिन धाराओं का उल्लेख किया गया था, उनमें त्रुटियां थीं. अदालत ने कहा कि आरोपी को यह स्पष्ट रूप से बताना जरूरी होता है कि उसे किस अपराध और किस धारा के तहत गिरफ्तार किया गया है. लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया सही तरीके से पूरी नहीं हुई. पुलिस ने इसे लिपिकीय गलती बताया, लेकिन अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. अदालत का मानना था कि यह गलती आरोपी के अधिकारों को प्रभावित करती है. अदालत ने एक और महत्वपूर्ण बिंदु पर ध्यान दिया. आदेश में कहा गया कि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि सोनम को गिरफ्तारी के बाद वकील की सुविधा दी गई थी. जब उसे पहली बार गाजीपुर अदालत में पेश किया गया, तब भी यह स्पष्ट नहीं था कि उसे कानूनी सलाह का अवसर मिला या नहीं।  जमानत की शर्तें हालांकि अदालत ने जमानत दी है, लेकिन इसके साथ … Read more

मुरैना से उज्जैन जा रही बारात हादसे का शिकार, दूल्हे की दादी समेत तीन की मौत

 राजगढ़ हंसी-खुशी, ढोल-नगाड़ों और शादी के गीतों के बीच निकली एक बारात कुछ ही देर में चीख-पुकार और मातम में बदल गई। मुरैना से उज्जैन जा रही तोमर परिवार की बारात गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गई। राजगढ़ जिले के ब्यावरा स्थित काचरी जोड़ के पास बारातियों से भरी बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस भीषण हादसे में दूल्हे की दादी समेत 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 19 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। 12 मीटर तक सड़क पर उछलती रही बारातियों से भरी बस जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र ट्रेवल्स (मुरैना) की बस क्रमांक एमपी 70 जेडडी 6654 में करीब 60- 70 बाराती सवार थे, जो रछेड़ गांव से उज्जैन शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। सुबह करीब 6 बजे काचरी जोड़ के पास अचानक चालक को झपकी आ गई। बस बेकाबू होकर सड़क किनारे खाई में उतर गई और दूसरी लेन पहुंच गई और पलट गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस करीब 12 मीटर तक पलटती उछलती रही। हादसा इतना भयावह था कि बस के अंदर बैठे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग सीटों के नीचे दब गए तो कुछ खिड़कियों से बाहर जा गिरे।  

लैंडिंग के दौरान बड़ा हादसा टला, Lucknow रनवे पर बंदर आने से यात्रियों की थमी सांसें

लखनऊ. राजधानी के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बड़ा हादसा टल गया। जब रायपुर जा रही एक फ्लाइट के रनवे पर अचानक एक बंदर आ गया।पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया, जिससे 132 यात्रियों और क्रू सदस्यों की जान बच गई। घटना की जांच के लिए नागरिक उड्डयन विभाग ने आदेश दिए हैं। बताया जा रहा है कि इस फ्लाइट में 132 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे। 132 में से आधे से ज्यादा यात्री रायपुर के रहने वाले थी। जानकारी के अनुसार फ्लाइट रनवे पर तेज गति से दौड़ रहा था और टेकऑफ की प्रक्रिया में था। इसी दौरान अचानक बंदर रनवे पर आ गया। जिसे तुरंत पायलट ने देख लिया और इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। पायलट की सूझबूझ से 132 लोगों की जान बच गई। घटना के दौरान कुछ समय के लिए विमान में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। एयरपोर्ट प्रशासन सूचना मिलते ही हरकत में आया और कुछ समय के लिए रनवे को बंद कर दिया गया। फिर बंदर को पकड़ने के लिए पूरे परिसर में अभियान चलाया गया। एयरपोर्ट से जुड़े अफसरों ने बताया कि फ्लाइट में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं और विमान को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। इधर, नागरिक उड्डयन विभाग ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने एयरपोर्ट प्रशासन से इस पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि फ्लाइट टेकऑफ के दौरान रनवे पर किसी भी जीव या वस्तु का आना खतरनाक साबित हो सकता है। इस स्थिति को बर्ड स्ट्राइक या रनवे इंट्रूजन कहा जाता है और इससे विमान के इंजन या पहियों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। पायलट ने यदि समय रहते एक्शन नहीं लिया होता तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।

किसानों को मिली बड़ी राहत, गेहूं उपार्जन की तारीख बढ़ाई गई, नया अपडेट जानें

भोपाल  मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गेहूं उपार्जन की तारीखों को आगे बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री के इस फैसले से अबतक अपनी फसलें सरकार को न बेच पाने वाले किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। गेहूं उपार्जन व्यवस्था में आ रही दिक्कतों के बीच राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए अहम निर्णय लिए हैं। सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्जाट करते हुए कहा कि, जिन किसानों का अब तक स्लॉट नहीं मिल पाया है, उन्हें अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, ताकि वो अपनी फसल आसानी से बेच सकें। आपको बता दें कि, अबतक समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन खरीदी की तारीख 9 मई 2026 निर्धारित थी, जिसे मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने बढ़ाकर 23 मई तक कर दिया है। यानी किसान सरकार को अपनी फसल समर्थन मूल्य पर नई निर्धारित तारीख तक बेच सकते हैं। इसी के साथ, मुख्यमंत्री डॉ यादव ने प्रदेश में गेहूं उपार्जन केंद्रों पर सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के भी निर्देश दिए हैं। लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा- सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि, गेहूं उपार्जन केंद्रों पर किसानों को निर्देशानुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध करने की व्यवस्था कर स्थितियां सुनिश्चित करें। उपार्जन केंद्र पर चल रही गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। गेहूं के लिए FAQ क्राइटेरिया में रिलेक्सेशन सीएम के निर्देश पर उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाएं आदि की व्यवस्था कर ली गई है। किसान जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज का विक्रय आसानी से कर सकेगा। गेहूं के लिए एफएक्यू मापदंड में शिथिलता प्रदान की गई है। किसानों की उपज की तौल समय पर करने के लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, कूपन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। खरगोन में सीएम का औचक निरीक्षण इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को खरगोन जिले की मंडलेश्वर तहसील के कतरगांव स्थित उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण करने पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद किसानों से बातचीत की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। बताया गया कि, महेश्वर प्रवास के दौरान वो अचानक केंद्र पहुंचे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण भी कर सकते हैं। केंद्रों पर की गई ये व्यवस्थाएं उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों से 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और राज्य सरकार द्वारा 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि समेत 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के लिए गेहूं उपार्जन एवं स्लॉट बुकिंग की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई कर दी है। अब तक कितनी गेहूं खरीदी? बता दें कि अबतक प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए 9.83 लाख किसानों द्वारा 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। प्रदेश में अभी तक 5 लाख 8 हजार 657 किसानों से 22 लाख 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस साल युद्ध के विपरीत हालातों के बावजूद किसानों के हित में सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य तय किया है।

सिवनी हवाला कांड में हाईकोर्ट ने दी राहत, डीएसपी समेत 3 की एफआईआर रद्द, कोर्ट ने कहा- काल डिटेल से अपराध सिद्ध नहीं होता

सिवनी सिवनी हवाला कांड एक बार फिर सुर्खियों में है, जब इस मामले की सुनवाई कर रही हाई कोर्ट ने आरोपियों को बड़ी राहत प्रदान की है। कोर्ट ने डीएसपी पंकज मिश्रा, आरक्षक प्रमोद सोनी और व्यापारी पंजू गिरी गोस्वामी की याचिका पर सुनवाई के बाद एफआईआर रद्द करने के आदेश जारी किए हैं। हालांकि, इसी केस में आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका खारिज कर दी गई है। यह मामला पिछले साल अक्टूबर में सामने आया था, जब पुलिस ने सीलादेही चौक पर महाराष्ट्र के हवाला कारोबारी सोहन लाल परमार की कार से 2.96 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की थी। विवाद तब शुरू हुआ जब पुलिस रिकॉर्ड में केवल 1.45 करोड़ रुपये की रकम दर्ज की गई। इस पर आरोप लगे कि रकम की असली मात्रा छुपाई गई। इसके बाद लखनवाड़ा थाना में सिवनी पुलिस की तत्कालीन एसडीओपी पूजा पाण्डेय और डीएसपी पंकज मिश्रा सहित 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। 81 फोन कॉल और व्हाट्सएप चैट थे आधार राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया कि घटना के दौरान मिश्रा और पूजा पांडे के बीच 81 बार फोन पर बातचीत हुई थी। साथ ही आरोप लगाया गया कि मिश्रा ने अपने मोबाइल से कुछ अहम व्हाट्सएप चैट और वीडियो हटाए (डिलीट किए), जिससे उनकी भूमिका संदिग्ध बनती है। हाईकोर्ट ने खारिज कर दी FIR? जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने केस डायरी का विश्लेषण करते हुए पाया कि केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) किसी अपराध को साबित करने के लिए काफी नहीं है। कोर्ट ने साफ कहा कि बातचीत का कोई रिकॉर्ड या ट्रांसक्रिप्ट पेश नहीं किया गया, जिससे साजिश साबित हो सके। पंकज मिश्रा को न पैसा मिला, न नाम आया कोर्ट ने यह भी माना कि मिश्रा के पास से कोई भी रकम बरामद नहीं हुई और न ही किसी गवाह या शिकायतकर्ता ने उनका नाम लिया। साथ ही यह भी कहा गया कि सूचना साझा करना एक पुलिस अधिकारी की ड्यूटी का हिस्सा हो सकता है। SC केस का हवाला देकर FIR और चार्जशीट की रद्द जबलपुर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित भजन लाल केस का हवाला देते हुए कहा कि जब FIR में प्रथमदृष्टया (पहली नजर में) अपराध नहीं बनता, तो ऐसी कार्यवाही जारी रखना न्याय के खिलाफ है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संदेह कितना भी गहरा हो, वह सबूत की जगह नहीं ले सकता। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने DSP पंकज मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दर्ज FIR और चार्जशीट को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही, उन्हें पूरी तरह आरोपों से मुक्त कर दिया है। हाई कोर्ट ने दी तीन आरोपियों को राहत हाई कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई में तीन आरोपियों के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पैरवी की। कोर्ट ने याचिकाओं को स्वीकार करते हुए एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। कोर्ट के अनुसार, मामले में कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं जो साजिश या आपसी मिलीभगत साबित करते हों। 2.96 करोड़ जब्त किए रिकॉर्ड में 1.45 करोड़ दिखाए यह मामला 8 अक्टूबर 2025 को सिवनी में सामने आए हवाला कांड से जुड़ा है। उस समय डीएसपी पूजा पाण्डेय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सीलादेही चौक पर महाराष्ट्र के हवाला कारोबारी सोहनलाल परमार की कार से करीब 2.96 करोड़ रुपए नकद जब्त किए थे। आरोप था कि पुलिस टीम ने पूरी रकम जब्त की, लेकिन रिकॉर्ड में सिर्फ 1.45 करोड़ रुपए ही दिखाए गए। मामला सामने आने पर लखनवाड़ा थाना में एसडीओपी पूजा पाण्डेय, डीएसपी पंकज मिश्रा सहित 11 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज किया गया था। साजिश या समझौते का ठोस सबूत नहीं मामले की सुनवाई जस्टिस हिमांशु जोशी की अदालत में हुई। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों के बीच पहले से कोई साजिश या आपसी समझौता था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोप केवल शक और अनुमान पर आधारित हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मात्र से अपराध सिद्ध नहीं होता। साजिश के आवश्यक तत्व मौजूद नहीं हैं। ऐसे में मुकदमा चलाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 310(2), 126(2), 140(3), 61(2) और 238(b) के आवश्यक तत्व इन आरोपियों पर लागू नहीं होते, इसलिए चार्जशीट और सभी आपराधिक कार्यवाही रद्द की जाती है। नीरज राजपूत को राहत नहीं सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जिस टीम ने कार रोकी और नकदी बरामद की, उसमें उसकी भूमिका महत्वपूर्ण थी, इसलिए उसके खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि केवल कॉल रिकॉर्ड या संदेह के आधार पर किसी को आपराधिक मुकदमे में नहीं फंसाया जा सकता। जांच एजेंसियों को गंभीर मामलों में भी ठोस साक्ष्य पेश करना अनिवार्य है। कोर्ट का निर्णय: आरोप आधारहीन और शक पर आधारित हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामला केवल अनुमान और संदेह पर आधारित है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर कोई अपराध सिद्ध नहीं होता। इसका कोई सुनिश्चित सबूत नहीं मिला है कि आरोपितों के बीच मिलीभगत या अपराधिक साजिश रची गई हो। चार्जशीट और आपराधिक कार्यवाही पर रोक कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 310(2), 126(2), 140(3), 61(2) और 238(b) के अनुसार यह माना कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाना कानून का दुरुपयोग होगा। इसलिए चार्जशीट को निरस्त करते हुए आपराधिक कार्यवाही रद्द करने का निर्देश दिया। आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका खारिज हालांकि, आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका को कोर्ट ने खारिज किया है। कोर्ट के अनुसार, उसने टीम के साथ कार रोकी और रकम की जब्ती में भूमिका निभाई थी, इसलिए उसके खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल शक और कॉल रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति को बिना ठोस सबूत के आपराधिक मुकदमे में नहीं लाया जा सकता। यह फैसला जांच एजेंसियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल है कि अब उन्हें गंभीर मामलों में स्पष्ट और मजबूत साक्ष्य पेश करना होगा।

डिजिटल क्रांति: छत्तीसगढ़ में अब घर बैठे मिलेंगी भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन सेवाएं

राजस्व विभाग की नई पहल ​डिजिटल क्रांति: छत्तीसगढ़ में अब घर बैठे मिलेंगी भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन सुविधाएँ ​रायपुर          मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए भूमि और राजस्व संबंधी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 'सुशासन' के संकल्प को साकार करते हुए, अब नागरिकों को खसरा-बी-1, नामांतरण और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। नागरिकों की सुविधा हमारी प्राथमिकता-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजस्व विभाग की इस डिजिटल पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार तकनीक के माध्यम से शासन को जनता के द्वार तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। राजस्व सेवाओं का डिजिटलीकरण आम आदमी के समय और श्रम की बचत सुनिश्चित करेगा। यह पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। ​ भ्रष्टाचार मुक्त और सुगम राजस्व प्रशासन का लक्ष्य – राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा      राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने जानकारी दी कि विभाग अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन कर रहा है। हमारा उद्देश्य तकनीक के उपयोग से मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आए। 'डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम' (DILMP) के माध्यम से हम राज्य को अत्याधुनिक राजस्व तंत्र प्रदान कर रहे हैं, जिससे नागरिक घर बैठे अपनी भूमि का विवरण प्राप्त कर सकें। ​निःशुल्क डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रति ​मोबाइल ऐप की सुविधा और SMS से अपडेट       ​राजस्व विभाग द्वारा दी जा रही प्रमुख ऑनलाइन सुविधाओं में नागरिक अब ​निःशुल्क    खसरा और बी-1 की डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रति राज्य के किसी भी कोने से कभी भी बिल्कुल मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं। खसरा या बी-1 में किसी भी संशोधन या बदलाव की सूचना सीधे पंजीकृत मोबाइल नंबर पर रियल-टाइम SMS अलर्ट  के माध्यम से प्राप्त होती है, जो किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को रोकने में सहायक है। कृषि ऋण के लिए बैंक में गिरवी रखी गई भूमि की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे खरीद-बिक्री के समय पारदर्शिता बनी रहती है। अब नामांतरण के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ता। उप पंजीयक कार्यालय में पंजीयन होते ही स्वतः नामांतरण प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसी तरह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध विशेष मोबाइल ऐप के जरिए नागरिक कहीं से भी अपने स्मार्टफोन से जमीन का रिकॉर्ड देख और डाउनलोड कर सकते हैं। राजस्व विभाग के इन नवाचारों से छत्तीसगढ़ राज्य राजस्व प्रशासन में एक नई डिजिटल क्रांति का गवाह बन रहा है।       ​       अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित राजस्व प्रशासन DILMP के तहत राज्य की सभी तहसीलों में 'मॉडर्न रिकॉर्ड रूम' स्थापित कर राजस्व प्रशासन को पूरी तरह अत्याधुनिक और पेपरलेस बनाना है। इन सुविधाओं का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना और समय की बचत करना है। डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILMP) ​वर्ष 2008-09 में शुरू हुई। यह केंद्र-प्रवर्तित योजना 1 अप्रैल 2016 से पूर्णतः केंद्रीय योजना के रूप में संचालित है।​ वर्तमान में  राज्य के 20 हज़ार 286 गांवों के खसरा और 19 हज़ार 694 गांवों के नक्शों का कंप्यूटरीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इसके साथ ही, 'प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना' के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कर उन्हें अत्याधुनिक बनाया गया है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों के साथ ऑनलाइन जोड़कर एक एकीकृत नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे काम में गति और सटीकता आई है। ​असर्वेक्षित ग्रामों का सर्वेक्षण         राज्य के 1 हज़ार 89 ग्रामों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 1,018 का नक्शा उपलब्ध कराया गया है। प्रथम चरण में 717 गांवों का और 454 गांवों का द्वितीय चरण में सत्यापन पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही 233 गांवों का डेटा 'भुईयां' एवं 'भू-नक्शा' सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जा चुका है।         ​इसी तरह राज्य की 50 तहसीलों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर राजस्व सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 252 में से 172 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत हैं, जिनमें से 155 का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही राज्य के राजस्व ​कार्यालयों का डिजिटलीकरण एवं इंटरकनेक्टिविटी का कार्य तेजी से किया जा रहा है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को ऑनलाइन कर उन्हें तहसील कार्यालयों के साथ इंटरनेट के माध्यम से जोड़ दिया गया है। ​प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत राज्य के सभी राजस्व ग्रामों के खसरा नक्शों का जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 19,694 गांवों में से 18,959 गांवों में यह कार्य पूर्ण हो चुका है।       इस डिजिटल पहल से आम नागरिकों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिली है और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में स्पष्टता और सुगमता आई है, जो निश्चित रूप से राज्य के चहुंमुखी विकास में सहायक सिद्ध होगी।​

सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 40 साल से यूपी में बंजर है कांग्रेस, अब सपा की बारी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. सीएम योगी ने कहा कि सपा ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारों पर डकैती डालने का काम किया है. आज विपक्ष महिलाओं के श्राप से श्रापित हो चुका है. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि 40 वर्ष बीत गए, लेकिन उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से बंजर जमीन बन गई है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सपा ने कांग्रेस का समर्थन किया है, इसलिए सपा भी जल्द ही बंजर बन जाएगी।  सीएम योगी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ हुए अन्याय और मौलवियों के सामने नाक रगड़ने की वजह से कांग्रेस की दुर्गति हुई. उन्होंने याद दिलाया कि यदि शाहबानो मामले में न्याय मिल गया होता तो कांग्रेस की यह हालत नहीं होती. कांग्रेस ने तीन तलाक की कुप्रथा का समर्थन किया और अब भी सुधरने के बजाय देश को कठमुल्लापन की ओर ले जाना चाहती है।  देख सपाई बिटिया घबराई मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 वर्ष में डबल इंजन कि सरकार के कार्यों के परिणाम सामने है. पहले देख सपाई बिटिया घबराई का नारा पब्लिक लगाती थी. पहले लोग अपने बेटियों को पढ़ने के लिए UP से बाहर भेजते थे. आज महिला वर्क फ़ोर्स 26% और अर्थव्यवस्था 3 गुणा बढ़ी है. NCRB के मुताबिक हत्या में 43% गिरावट आई. दहेज़ उत्पीड़न में 19%, रेप दुष्कर्म में 67% की कमी आई. आज देश के सबसे बड़े राज्य के सदन में आधी आबादी के सम्मान पर चर्चा हो।  पूजा पाल का किया जिक्र  मुख्यमंत्री ने सपा पर माफियाओं के सामने नतमस्तक होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा विधायक पूजा पाल इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं. उन्होंने कहा कि जब राजू पाल की हत्या हुई थी, तब सपा माफियाओं के सामने झुक गई थी. सीएम ने आरोप लगाया कि सपा की सहानुभूति न तो पिछड़ों, दलितों और न ही पूजा पाल जैसे लोगों के प्रति है।  महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष की आलोचना योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर संसद में महिला आरक्षण बिल गिराने का आरोप लगाया और कहा कि बिल गिराने के बाद सपा और कांग्रेस के नेता एक-दूसरे को बधाई दे रहे थे. उन्होंने कहा कि विपक्ष के इस आचरण से पूरा देश आहत है. सीएम ने सदन में कुछ पुरानी घटनाओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने मई 2014 में बदायूं की चचेरी बहनों से हुई घटना, जुलाई 2016 में बुलंदशहर के राजमार्ग पर हुए सामूहिक बलात्कार और आजम खान द्वारा इसे “राजनीतिक साजिश” बताने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि एक महिला ने एक विधायक पर बलात्कार का आरोप लगाया था, लेकिन न्याय मिलने के बजाय उस महिला की हत्या कर दी गई. लखनऊ के मोहनलालगंज में हुई शर्मनाक घटना का भी उन्होंने जिक्र किया. सीएम योगी ने कहा कि आजम खान और एसटी हसन जैसे नेता जेल से बयान देते थे और विपक्ष आज भी महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के प्रति संवेदनशील नहीं है।