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Kuno Cheetah Update: जंगल से बाहर निकलने वाले चीतों की होगी खास निगरानी, 10 साल का लैंडस्केप प्लान तैयार

ग्वालियर  श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ अब उनके दायरे की निगरानी भी कूनो की सीमाओं से आगे बढ़ाई जा रही है। चीते जब पार्क से निकलकर आसपास के जंगलों या दूसरे जिलों की ओर रुख करें तो उनकी सुरक्षित निगरानी और बेहतर प्रबंधन के लिए ‘चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान’ तैयार किया जा रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और देहरादून के वन विशेषज्ञ ग्वालियर-चंबल संभाग के वन अधिकारियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दे रहे हैं। योजना का मकसद ऐसे वन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां चीतों के लिए अनुकूल वातावरण मौजूद है। साथ ही, किसी चीते के दूसरे जिले में पहुंचने की स्थिति में वन अमले को उसकी निगरानी और प्रबंधन के लिए तैयार किया जाएगा। 5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन में जुटेगा पूरा डेटा योजना के तहत वन क्षेत्रों में 5×5 किलोमीटर के सैंपल जोन बनाए जाएंगे। प्रत्येक जोन में सिर्फ चीतों की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का डेटा जुटाया जाएगा। इसमें पेड़-पौधे, घास, मवेशी, शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीवों के साथ पक्षियों की मौजूदगी तक दर्ज की जाएगी। क्षेत्र की प्राकृतिक स्थिति और उपलब्ध संसाधनों का भी रिकॉर्ड तैयार होगा। इसी विस्तृत डेटा के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि संबंधित क्षेत्र चीतों के लिए कितना अनुकूल है और वहां उनकी मौजूदगी की स्थिति में किस तरह के प्रबंधन की जरूरत होगी। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से शुरू होगा सर्वे चीता लैंडस्केप मैनेजमेंट प्लान के तहत डेटा कलेक्शन और अन्य प्रक्रिया अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। पूरी प्रक्रिया में करीब दो महीने लगने का अनुमान है। फिलहाल यह योजना आगामी 10 वर्षों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इसके लागू होने के बाद चीतों की आवाजाही वाले इलाकों में वन विभाग के पास उनके आवास, भोजन, पानी और आसपास मौजूद वन्यजीवों से जुड़ा विस्तृत डेटा उपलब्ध रहेगा। इससे किसी चीते के कूनो से बाहर निकलने पर तत्काल प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलेगी। दूसरे जिले और राज्य तक पहुंच चुके हैं चीते कूनो से चीतों का बाहर निकलना कोई नई बात नहीं है। अब तक कुछ चीते कूनो की सीमा से बाहर निकलकर पड़ोसी जिलों और यहां तक कि दूसरे राज्य के इलाकों तक पहुंच चुके हैं और बाद में वापस लौटे हैं। फिलहाल बाहर निकलने वाले चीतों की ट्रैकिंग मुख्य रूप से कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन की टीम करती है। नए लैंडस्केप प्लान के बाद ग्वालियर-चंबल संभाग के दूसरे वन क्षेत्रों में भी स्थानीय अमले को इस जिम्मेदारी के लिए तैयार किया जाएगा। कूनो की टीम जैसा प्रशिक्षित होगा स्थानीय वन अमला इस योजना का एक अहम हिस्सा वन अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष ट्रेनिंग है। कूनो के विशेषज्ञों की तरह ही ग्वालियर-चंबल के वन अमले को चीतों के व्यवहार और उनकी शारीरिक स्थिति को समझने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में चीते की चाल, बैठने का तरीका, व्यवहार और गतिविधियों से उसकी स्थिति का अंदाजा लगाने जैसी बारीकियां सिखाई जाएंगी। यहां तक कि उसके पेट की स्थिति, शिकार करने की स्थिति, पानी की जरूरत और किसी तरह की परेशानी के संकेतों को भी पहचानने पर जोर रहेगा। इसका फायदा यह होगा कि यदि कोई चीता कूनो से निकलकर संभाग के किसी दूसरे वन क्षेत्र में पहुंचता है तो वहां तैनात कर्मचारी शुरुआती स्तर पर ही उसकी स्थिति को समझकर जरूरी कदम उठा सकेंगे। हर सैंपल जोन का बनेगा अलग रिकॉर्ड प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को अलग-अलग सैंपल जोन आवंटित कर डेटा कलेक्शन कराया जाएगा। इसमें क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राकृतिक परिस्थितियां, वनस्पति, वन्यजीव और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाएंगी। आने वाले समय में यही डेटा चीतों की निगरानी और उनके प्रबंधन का आधार बनेगा।  

बुंदेलखंड में चीतों की नई दहाड़, CM मोहन यादव आज 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती रिजर्व में छोड़ेंगे 2 चीते

सागर  वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर आज सात अक्तूबर को सागर के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस रिजर्व में दो चीतों को खुले वातावरण में छोड़ेंगे। इस पहल से बुंदेलखंड की धरती पर वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी। उक्त आशय की जानकारी खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने दी है। उन्होंने कहा कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों का आगमन सागर सहित पूरे बुंदेलखंड के लिए अत्यंत गौरव की बात है। खुले मैदानों और घास के क्षेत्रों के प्रमुख वन्यजीव चीते की मौजूदगी से इस क्षेत्र की जैव विविधता को एक विशिष्ट पहचान मिलेगी। वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर सागर और बुंदेलखंड के लिए वन्यजीव संरक्षण का एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो से लाए गए दो चीतों को विमुक्त करेंगे। इसके साथ ही यह मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन जाएगा। चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर सृजित होंगे। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों के यहां पहुंचेंगे, जिससे होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, छोटे व्यवसाय और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। सागर और बुंदेलखंड के लिए बड़ी सौगात मंत्री राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। यह योजना केवल वन्यजीवों को बसाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सागर और बुंदेलखंड में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। चीतों की सुरक्षा और मेहमाननवाजी के लिए रिजर्व क्षेत्र में लगभग 439 हेक्टेयर का विशेष सुरक्षित और अनुकूल वातावरण वाला क्षेत्र विकसित किया गया है। वन विभाग द्वारा चीतों की सतत निगरानी, सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सभी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। 439 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतों के लिए विशेष व्यवस्थाएं कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को मध्यप्रदेश में चीतों के तीसरे आवास के रूप में विकसित किया गया है। चीतों की सुरक्षा और अनुकूलन के लिए लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आधुनिक बाड़ों (बोमा) और अन्य सुविधाओं से युक्त सुरक्षित आवास तैयार किया गया है। वन विभाग द्वारा चीतों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। साथ ही, क्षेत्र में मौजूद अन्य वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है। प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है, सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। वर्ष 1997 में स्थापित इस क्षेत्र को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के साथ एकीकृत करने के बाद 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। यह क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू सहित विविध वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है तथा संकटग्रस्त भारतीय गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। चीता पुनर्स्थापना अभियान को मिला नया विस्तार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए। अब यह अभियान मध्यप्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों तक विस्तार ले रहा है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की विमुक्ति इसी व्यापक संरक्षण अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 5 अक्टूबर 2026 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें 41 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं। 7 अक्टूबर को कूनो से नर थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीतें रहेंगे। गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक, मादा धीरा तथा सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाकर विमुक्त की गई मादा राधा मौजूद हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों की विमुक्ति के साथ मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान एक नए चरण में प्रवेश करेगा। बढ़ेगा वन्यजीव पर्यटन और स्थानीय रोजगार मंत्री राजपूत के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की ओर आकर्षित होंगे। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, छोटे व्यवसायी और हस्तशिल्प कलाकारों को रोजगार तथा आय के नए अवसर मिलेंगे। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियों को तीव्र गति मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को छोड़कर देश में चीता पुनर्स्थापना अभियान की ऐतिहासिक शुरुआत की थी। उसी व्यापक अभियान की अगली कड़ी के रूप में अब प्रदेश के अन्य उपयुक्त वनों में चीतों को बसाया जा रहा है। 

UPI पर चार्ज पड़ा तो बदलेंगे पेमेंट का तरीका! 76% यूजर्स एक्स्ट्रा फीस देने को तैयार नहीं

नई दिल्ली यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) भुगतान पर 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने के बाद UPI ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू में करीब 10% और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4% की गिरावट आ सकती है. LocalCircles के मर्चेंट और कंज्यूमर सर्वे के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है. सर्वे के मुताबिक, MDR लागू होने के बाद अधिक राशि वाले UPI भुगतान का एक हिस्सा कैश, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और बैंक ट्रांसफर की ओर जा सकता है।  ₹2,000 से अधिक के भुगतान UPI वैल्यू का 67% LocalCircles के CEO सचिन तापड़िया के मुताबिक, यह अनुमान MDR लागू होने से पहले किए गए अलग-अलग मर्चेंट और कंज्यूमर सर्वे पर आधारित है. अगस्त में ₹2,000 से अधिक के भुगतान मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का केवल करीब 4% थे, लेकिन इनका हिस्सा कुल मर्चेंट UPI भुगतान की वैल्यू में 67% था. इन भुगतानों की कुल राशि करीब ₹6 लाख करोड़ प्रति माह बैठती है।  अगस्त 2026 में UPI के जरिए कुल 24.51 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ रही. इनमें मर्चेंट भुगतान की संख्या 15.51 अरब और वैल्यू ₹8.95 लाख करोड़ रही. ऐसे में ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट भुगतान संख्या में कम होने के बावजूद UPI की कुल वैल्यू पर बड़ा असर डाल सकते हैं।  MDR लगने पर 76% यूजर्स बदल सकते हैं भुगतान का तरीका 2 अक्टूबर को जारी LocalCircles के कंज्यूमर सर्वे में 76% लोगों ने कहा कि अगर UPI इस्तेमाल करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो वे बड़े भुगतानों के लिए कैश, कार्ड या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल कर सकते हैं. केवल 14% लोगों ने कहा कि अगर मर्चेंट MDR का बोझ उन पर डालता है तो वे अतिरिक्त राशि देकर भी UPI का इस्तेमाल जारी रखेंगे।  अगर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर मर्चेंट ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क लेता है, तो 27% लोग कैश का इस्तेमाल करेंगे, जबकि 26% क्रेडिट कार्ड की ओर जाने की बात कही. 14% डेबिट कार्ड और 4% बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS का इस्तेमाल कर सकते हैं. भविष्य में ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए 26% लोगों ने क्रेडिट कार्ड और इतने ही लोगों ने कैश को पसंदीदा विकल्प बताया. 13% ने डेबिट कार्ड और 11% ने बैंक ट्रांसफर को प्राथमिकता दी. वहीं, केवल 20% लोगों ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क लगने के बावजूद UPI उनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला माध्यम रहेगा।  UPI वॉल्यूम पर 4% असर का अनुमान LocalCircles के मुताबिक, MDR लागू होने के पहले पूरे महीने में UPI की कुल वैल्यू में करीब 10% की गिरावट आ सकती है. वहीं, ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4% की कमी का अनुमान है।  इस 4% गिरावट में करीब 1% सीधा असर उन ट्रांजैक्शन पर पड़ सकता है जिन पर MDR लागू होगा. बाकी करीब 3% गिरावट उपभोक्ताओं के भुगतान व्यवहार में बदलाव से हो सकती है. यानी जहां मर्चेंट अतिरिक्त शुल्क लगाएंगे, वहां ग्राहक UPI के बजाय दूसरे भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं।  ### ₹2,000 तक UPI भुगतान पर नहीं लगेगा शुल्क MDR एक तरह का शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के लिए मर्चेंट की ओर से बैंक और भुगतान कंपनियों को दिया जाता है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के व्यक्ति से मर्चेंट (P2M) UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा।  सरकार ने 14 सितंबर को ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर जीरो चार्ज जारी रखने का फैसला किया था. UPI QR कोड के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट भी प्रस्तावित MDR से बाहर रहेंगे. LocalCircles का अनुमान है कि मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का करीब 96% हिस्सा इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होगा।  सरकार ने कहा- ग्राहकों से MDR नहीं वसूला जाएगा सरकार का कहना है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सितंबर में कहा था कि इस शुल्क की जिम्मेदारी ग्राहकों की नहीं है. सरकार भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ मिलकर ऐसा तंत्र तैयार कर रही है, जिसके जरिए बैंक मर्चेंट्स की निगरानी कर सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि MDR ग्राहकों से न वसूला जाए।  ज्यादातर मर्चेंट MDR का बोझ उठाने को तैयार नहीं LocalCircles के 32,796 मर्चेंट्स के सर्वे में 41% ने कहा कि वे ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं देंगे. वहीं, 9% मर्चेंट UPI भुगतान स्वीकार ही नहीं करते. सिर्फ 17% मर्चेंट 0.4% या उससे अधिक MDR वहन करने के लिए तैयार दिखे. 15% ने कहा कि वे अधिकतम 0.04% MDR ही स्वीकार करेंगे।  LocalCircles के मुताबिक, MDR का बोझ उठाने को तैयार नहीं होने वाले मर्चेंट कीमत बढ़ा सकते हैं, अलग से शुल्क लगा सकते हैं या ग्राहकों को कैश, कार्ड और बैंक ट्रांसफर जैसे विकल्पों की ओर भेज सकते हैं।  जीरो MDR व्यवस्था में हो रहा बदलाव प्रस्तावित MDR व्यवस्था UPI पर लंबे समय से चली आ रही जीरो-MDR व्यवस्था में बड़ा बदलाव है. UPI के विस्तार में इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. अगस्त में संसद ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में संशोधन किया था. इससे RuPay डेबिट कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने पर लगी व्यापक रोक हट गई और केंद्र को यह तय करने की अनुमति मिली कि किन भुगतान माध्यमों को शुल्क मुक्त रखा जाएगा।  सरकार ने UPI सिस्टम को बनाए रखने की लागत का भी हवाला दिया है. UPI ट्रांजैक्शन के लिए प्रोत्साहन राशि वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर ₹3,631 करोड़ पहुंच गई थी, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है. वित्तीय सेवा विभाग ने संसदीय समिति को बताया है कि लंबे समय तक जीरो MDR व्यवस्था को बनाए रखना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं हो सकता।  नई व्यवस्था में ₹2,000 तक के भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं होगा. ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट से जुड़े भुगतान पर ₹5 का फ्लैट शुल्क होगा, जबकि कैपिटल मार्केट से जुड़े भुगतान पर 0.02% … Read more

8th Pay Commission: जनवरी 2026 से लागू होंगी सिफारिशें तो DA पर भी पड़ेगा असर, जानें क्या बदलेगा

नई दिल्ली  केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ता यानी डीए में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार है। साल की दूसरी छमाही के लिए डीए बढ़ोतरी का ऐलान इसी महीने यानी अक्टूबर में ही होने की उम्मीद है। आठवें वेतन आयोग के दौर में यह दूसरी बार होगा जब सरकार महंगाई भत्ते का ऐलान करेगी। इससे पहले अप्रैल महीने में भी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डीए को 2 पर्सेंट बढ़ाया गया था। कब हुआ था 8वें वेतन आयोग का गठन वैसे तो सरकार ने पिछले साल जनवरी महीने में ही आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया था लेकिन 2025 के नवंबर महीने में टर्म्स ऑफ रेफरेंस और समिति का गठन हुआ। इससे एक महीने पहले यानी अक्टूबर 2025 में सातवें वेतन आयोग के आखिरी दौर में सरकार ने डीए बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया था। बता दें कि सातवें वेतन आयोग की अवधि दिसंबर 2025 में खत्म हो गई। अब ऐसा माना जा रहा है कि सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें जब लागू करेगी तो जनवरी 2026 से ही प्रभावी होगा। अप्रैल में पहली बार डीए का ऐलान आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद सरकार ने अप्रैल महीने में पहली बार डीए का ऐलान किया था। यह ऐलान जनवरी से जून छमाही के लिए किया गया था। डीए में 2 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई और इसका कैल्कुलेशन सातवें वेतन आयोग के तहत ही किया गया। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का भत्ता 60 पर्सेंट है। कितनी हो सकती है बढ़ोतरी? केंद्र सरकार के कर्मचारियों को फिलहाल 60 पर्सेंट की दर से डीए मिल रहा है। AICPI-IW के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर DA में 4 से 5 पर्सेंट बढ़ोतरीका अनुमान लगाया जा रहा है। अगर यह बढ़ोतरी होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 64 पर्सेंट से 65 पर्सेंट का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। हालांकि, अंतिम डीए दर का फैसला सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। बता दें कि 8वां वेतन आयोग कर्मचारियों के पूरे वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन की समीक्षा कर रहा है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में फिटमेंट फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। इसके आधार पर नए वेतन ढांचे में बेसिक पे में बड़ा बदलाव हो सकता है। वहीं, डीए पर क्या फैसला होगा, इसके बारे में वेतन आयोग की सिफारिशें आने के बाद ही फैसला होगा। ऐसा अनुमान है कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशें मई या जून 2027 तक सरकार को सौंप देगा। इसके बाद सरकार इसे लागू करेगी।

लाड़ली बहना 41वीं किस्त: दुर्गा पूजा से पहले मिल सकते हैं ₹1,500, लाभार्थी जरूर करें ये काम

भोपाल  त्योहार के समय लोगों को उम्मीद है कि सरकारी योजनाओं के पैसे जल्द मिलेंगे. मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना चलायी जाती है. जिसमें हर महीने 1500 रुपये की किस्त सीधे बैंक अकाउंट में भेजे जाते हैं. सितंबर महीने में मध्य प्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना की 40वीं किस्त जारी की गई थी, जो 13 सितंबर को महिलाओं के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया था. वहीं अब महिलाओं को अक्टूबर महीने में आने वाली 41वीं किस्त का इंतजार है।  'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' राज्य की करीब 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं के लिए एक बड़ा आर्थिक संबल बन चुकी है. अब सभी लाभार्थियों को योजना की 41वीं किस्त का दुर्गा पूजा से पहले मिलने का बेसब्री से इंतजार है।  कब आएगी लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त? सरकार हर महीने लाड़ली बहना योजना की किस्त 10 से 15 तारीख के बीच जारी करती है. ऐसे में लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त 10 से 12 अक्टूबर के बीच जारी करने की पूरी संभावना है. सरकार ने कई बार त्योहार के अवसर पर समय से पहले योजना के पैसे जारी करती है. 11 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू होने वाली है तो माना जा रहा है कि सरकार दुर्गा पूजा से पहले ही महिलाओं के अकाउंट में 41वीं किस्त भेज सकती है. आधिकारिक घोषणा होते ही राशि सीधे महिलाओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से जमा कर दी जाएगी।  किस्त आने से पहले कर लें जरूरी काम कई बार तकनीकी समस्याओं या बैंक की जानकारी में गड़बड़ी की वजह से किस्त रुक जाती है. ऐसे में पैसे ट्रांसफर होने से पहले ये जरूरी काम जरूर जांच लें।  पात्र महिलाओं का बैंक अकाउंट आधार से लिंक होना जरूरी है. वरना किस्त रोकी जा सकती है।  बैंक में जाकर सुनिश्चित करें कि आपके खाते पर डीबीटी (Direct Benefit Transfer) सुविधा चालू है।  समग्र पोर्टल पर आपकी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए. अधूरा ई-केवाईसी होने पर अगली किस्त रुक सकती है।  कैसे चेक करे किस्त का स्टेटस? अगर आप देखना चाहते हैं आपका आवेदन स्वीकृत है या नहीं या पिछली किस्तों का स्टेटस क्या है, तो आप योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibehna.mp.gov.in पर जाएं. यहां आप आवेदन एवं भुगतान की स्थिति के ऑप्शन पर क्लिक करें और अपने समग्र आईडी या आवेदन नंबर दर्ज करें. आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा उससे वेरिफाई करें. इसके बाद आपके सामने भुगतान की सारी जानकारी दिखने लगेगी।  बैंक अकाउंट में किस्त नहीं आने पर कहां करें शिकायत? अगर सरकार द्वारा किस्त की घोषणा के बाद भी आपके अकाउंट में पैसा नहीं आता है, तो आप राज्य सरकार के हेल्पलाइन नंबर 0755-2700800 या 181 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकती हैं. इसके अलावा अपनी ग्राम पंचायत, वार्ड कार्यालय या महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के स्थानीय ऑफिस में संपर्क करके भी समस्या का तुरंत समाधान पा सकती हैं।  किस्त से पहले ये काम जरूर जांच लें किस्त आने से पहले लाभार्थी महिलाओं को अपने बैंक खाते और योजना की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए. सरकारी पोर्टल के मुताबिक, महिला के नाम पर अपना बैंक खाता होना जरूरी है. संयुक्त बैंक खाता मान्य नहीं है. बैंक खाते में आधार लिंक होना चाहिए और डीबीटी भी चालू होना जरूरी है. इसके अलावा समग्र पोर्टल पर आधार की ई-केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए. अगर बैंक खाते, आधार, मोबाइल नंबर या समग्र की जानकारी में कोई गलती है, तो उसे समय रहते ठीक करा लेना चाहिए. इससे किस्त आने के समय परेशानी नहीं होगी।  ऐसे चेक करें 41वीं किस्त का स्टेटस     सबसे पहले लाड़ली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट (cmladlibehna.mp.gov.in) खोलें.     वहां ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ विकल्प पर क्लिक करें.     अब अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी डालें     इसके बाद कैप्चा भरें.     रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को डालकर वेरिफिकेशन करें.     वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद स्क्रीन पर आवेदन और किस्त से जुड़ी जानकारी दिखाई देगी.     लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त कब आएगी? जानें लेटेस्ट अपडेट पैसा नहीं आए तो क्या करें? अगर किस्त जारी होने के बाद भी खाते में पैसा नहीं पहुंचता है तो महिला लाड़ली बहना योजना के हेल्पडेस्क नंबर 0755-2700800 पर संपर्क कर सकती है. योजना के आधिकारिक पोर्टल पर भी हेल्पडेस्क की जानकारी दी गई है।  इसके अलावा भुगतान से जुड़ी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 के जरिए भी दर्ज कराई जा सकती है. इसलिए किस्त जारी होने के बाद सबसे पहले बैंक खाते की स्थिति और योजना के भुगतान स्टेटस की जांच जरूर करें। 

पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी? ‘पश्चिम बंगा’ पर अगले विधानसभा सत्र में आ सकता है बिल

कलकत्ता पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि सीएम सुवेंदू अधिकारी की सरकार जल्द विधानसभा में नाम बदलने का विधेयक ला सकती है. उन्होंने दावा किया कि अगले विधानसभा सत्र में पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंगा’ करने का प्रस्ताव रखा जा सकता है. बीजेपी नेता के मुताबिक यह फैसला राज्य को उसके इतिहास और बंगाली पहचान से जोड़ने के मकसद से लिया गया है. पिछले 27 सान में तीन बार पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशें राज्‍य सरकारों की तरफ से की गई. हालांकि केंद्र और राज्‍य में अलग अलग पार्टी की सरकार होने के कारण पहले ऐसा नहीं हो सका. इस बार इस बात की संभावना प्रबल है कि वेस्‍ट बंगाल का नाम बदलकर पश्चिम बंगा रख दिया जाए।  अब वेस्‍ट बंगाल नहीं, पश्चिम बंगा? समिक भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोगों को जल्द ‘बांग्ला’ या ‘वेस्‍ट बंगाल जैसे नामों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बहुत जल्द विधानसभा में विधेयक पेश करेगी. हालांकि यह प्रस्ताव कब और किस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, इसकी अंतिम स्थिति विधानसभा में विधेयक आने के बाद ही साफ होगी. नाम बदलने का मुद्दा पश्चिम बंगाल में नया नहीं है. इसके पीछे बंगाली पहचान और औपनिवेशिक दौर से जुड़े नाम को बदलने की दलील पहले भी दी जाती रही है. लेकिन राजनीतिक सहमति और केंद्र की मंजूरी नहीं मिलने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका।  1999 से चल रही नाम बदलने की कहानी पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशों का इतिहास करीब ढाई दशक पुराना है. 1999 में ज्योति बसु के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार ने पश्चिम बंगा नाम रखने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा था. उस समय बांग्ला नाम पर भी चर्चा हुई थी. प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया लेकिन मंजूरी नहीं मिली. 2011 में ममता बनर्जी सरकार आने के बाद यह मुद्दा फिर उठा. उस समय पश्चिम बंगा नाम का प्रस्ताव रखा गया. सरकार का तर्क था कि अंग्रेजी वर्णक्रम में वेस्‍ट बंगाल नीचे आता है. इससे राष्ट्रीय बैठकों में राज्य के प्रतिनिधियों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है. हालांकि केंद्र ने इसे मंजूरी नहीं दी।  2016 में फिर बदला प्रस्ताव 2016 में नाम बदलने की कवायद दोबारा शुरू हुई. सरकार ने अलग-अलग भाषाओं में ‘बांग्ला’, ‘बंगाल’ और ‘बंगाल’ जैसे नामों पर विचार किया. 2018 में विधानसभा ने सर्वसम्मति से ‘बांग्ला’ नाम रखने का प्रस्ताव पास किया. यह प्रस्ताव भी केंद्र की मंजूरी हासिल नहीं कर सका. केंद्र की ओर से संवैधानिक संशोधन की जरूरत बताई गई. साथ ही बीजेपी के एक वर्ग ने ‘बांग्ला’ नाम को बांग्लादेश से मिलता-जुलता होने पर आपत्ति जताई थी. यानी नाम बदलने की कोशिश कई बार हुई लेकिन हर बार मामला राजनीतिक और संवैधानिक पेच में फंस गया।  वाराणसी में बनेगा पश्चिम बंगा भवन समिक भट्टाचार्य ने वाराणसी में प्रस्तावित ‘पश्चिम बंगा भवन’ की जानकारी भी दी. उनके मुताबिक राज्य का संस्कृति और पर्यटन विभाग केंद्र और कूचबिहार के राजपरिवार के वंशजों के साथ मिलकर इसकी योजना पर काम कर रहा है. यह भवन सांस्कृतिक केंद्र के साथ बंगाल से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए ठहरने की जगह भी होगा. इसमें सम्मेलन कक्ष, पुस्तकालय और बंगाली साहित्य व गीतों का संग्रह प्रस्तावित है. वाराणसी और बंगाल के पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध को भी इस परियोजना की बड़ी वजह बताया गया है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार पश्चिम बंगा नाम का प्रस्ताव विधानसभा से आगे निकलकर केंद्र की मंजूरी तक पहुंच पाएगा? पिछले अनुभवों को देखते हुए इस पर सबकी नजर रहेगी। 

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आगमन भी प्रस्तावित

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुख्यमंत्री निवास (समत्व भवन) में ले. जनरल अरविंद चौहान और मेजर जनरल विकास लाल सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भेंट की। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सेना दिवस 15 जनवरी 2027 का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर "आर्मी डे परेड- 2027 आपकी सेना आपके पास" की अवधारणा की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया गया कि केंद्रीय रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह के इस आयोजन में आने की संभावना है। इसके अलावा अन्य विशिष्ट अतिथि भी भोपाल में हो रहे सेना दिवस कार्यक्रमों में सम्मिलित होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सेना दिवस के अवसर पर होने वाले प्रस्तावित कार्यक्रमों और विविध गतिविधियों और इस संबंध में की जा रही तैयारियों के बारे में भी अवगत करवाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेना दिवस के अवसर पर आयोजनों को गरिमामय बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा आवश्यक सहयोग किया जाएगा। विभिन्न आयोजनों में राज्य शासन के विभाग सहभागी होंगे। वर्ष 2027 प्रदेश में युवा वर्ष होगा। इसमें युवाओं की भागीदारी के समुचित प्रयास किए जाएंगे। कार्यक्रमों की रूपरेखा वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने जानकारी दी कि सेना दिवस के अंतर्गत 1 नवम्बर 2026 को संकल्प वृक्ष आयोजन में शौर्य स्मारक परिसर में पौध-रोपण किया जाएगा। माह जनवरी 2027 में सैन्य प्रदर्शनी और एकीकृत युद्ध प्रदर्शन प्रस्तावित है। भोपाल के भेल क्षेत्र में कालीबाड़ी मार्ग पर आर्मी डे मुख्य परेड का आयोजन 15 जनवरी को होगा। साथ ही तात्या टोपे नगर स्टेडियम में 15 जनवरी की शाम देशभक्ति से और ओतप्रोत शौर्य संध्या, रण हुंकार का आयोजन किया जाएगा। भेल के जंबूरी मैदान में भारतीय सेना के अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों के प्रदर्शन और भोजताल स्थित वीआईपी बोट क्लब क्षेत्र में सेना के शौर्य, सामरिक क्षमता और रणनीतिक कौशल पर आधारित इंटीग्रेटेड कॉम्बैट डिस्प्ले भी किया जाएगा। मुख्य परेड एवं उससे जुड़े कार्यक्रमों में लगभग 50 हजार प्रतिनिधियों के मौजूद रहने की संभावना है। इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। युवा शक्ति और नागरिक सहभागिता के प्रयास किए जा रहे हैं।  

क्षमा, अहंकार के निर्मूलन के साथ ही बढ़ाती है जीवन का आनंद और उत्साह

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि क्षमा मनुष्य का आभूषण है। बड़े मन का व्यक्ति ही क्षमा कर सकता है। क्षमा जहां अहंकार का निर्मूलन करती है, वहीं इससे जीने का आनंद और उत्साह भी बढ़ जाता है। आज क्षमावाणी का अवसर है। सरकार के मुखिया होने के नाते कई बार दायित्वों के निर्वहन के लिए कई लोगों के मन के विरुद्ध भी निर्णय करना पड़ता है। कभी कोई भूल-चूक होती है तो अंतरात्मा अहसास करवाती है और सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को विधानसभा परिसर में सामूहिक क्षमावाणी महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। परम पूज्य आचार्य 108 समयसागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर, लघु, सूक्ष्म, मध्यम एवं उद्यम मंत्री  चैतन्य कुमार काश्यप विशेष रूप से उपस्थित थे। प्रधानमंत्री  मोदी ने जियो और जीने दो के उदात्त भाव से दुनिया को दिखाया शांति का मार्ग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकतंत्र के पावन मंदिर विधानसभा भवन में आचार्य  समयसागर जी महाराज पधारे हैं। यह संयोग है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने "जियो और जीने दो" के उदात्त भाव से दुनिया को शांति का मार्ग दिखाया है। अब रूस और यूक्रेन जैसे दोनों देश कहते हैं कि प्रधानमंत्री  मोदी ने हमें युद्ध के संकट से बाहर निकलने का मार्ग दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय मूल के पायलट कैप्टन स्मित मछार ने अपने साहस से नागरिकों की जिंदगी बचाई और पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति से जुड़ा मानवता का संदेश दिया। गौसेवा के संकल्प को पूरा कर रही है राज्य सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की धरती पर सभी जीव निर्भय होकर, समान भाव और सहअस्तित्व के साथ जीवन जियें, इस उद्देश्य से राज्य सरकार ने भोपाल के पास रातापानी अभयारण्य का नामकरण डॉ. विष्णु धर वाकणकर के नाम पर करते हुए टाइगर रिजर्व की स्थापना की। उन्होंने कहा कि ग्वालियर के पास माधव नेशनल पार्क भी स्थापित किया गया है। बुधवार 7 अक्टूबर को सागर जिले में 2 चीतों को विमुक्त किया जा रहा है। एक समय एशिया से लुप्त हो चुके चीतों के रहवास का प्रदेश में यह तीसरा स्थल होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में गौपालन को प्रोत्साहित करने, दूध उत्पादन बढ़ाने और गौसेवा के संकल्प को पूरा करने के लिए गत अक्टूबर को राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन आयोजित किया गया। मध्यप्रदेश को दूध उत्पादन में देश में तीसरे से पहले स्थान पर ले जाने के लिये हम संकल्पबद्ध हैं। अहिंसा ही सुख-शांति का आधार परम पूज्य आचार्य  108 समयसागर जी महाराज ने कहा कि अहिंसा किसी व्यक्ति विशेष का धर्म नहीं, अपितु सुख-शांति का आधार है। धर्म की उपासना किए बिना कोई भी व्यक्ति शांतिपूर्वक जीवन निर्वहन नहीं कर सकता। सम्पूर्ण जीव जगत के संरक्षण, करूणा, दया और अनुकम्पा के भाव के बिना विश्व में शांति नहीं रह सकती। समाज में अहिंसा का भाव बढ़े, इस दिशा में सभी स्तर पर प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि क्रोधरूपी अग्नि को क्षमा से ही शांत किया जा सकता है। भारत में क्षमा मांगने की परम्परा लंबे समय से रही है, इसी संदर्भ में क्षमा को वीरस्य भूषणम माना गया है। आत्मानुशासन के बिना हम सक्षम नहीं हो सकते। विवेकपूर्ण जीवन यापन से ही उन्नति संभव है। उन्होंने कहा कि गरीबों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में विशेष प्रयास आवश्यक हैं। आचार्य  समय सागर जी महाराज के पदार्पण से विधानसभा परिसर हुआ है गौरवान्वित विधानसभा अध्यक्ष  तोमर ने कहा कि पूज्य आचार्य  समयसागर जी महाराज के पदार्पण से विधानसभा परिसर गौरवान्वित हुआ है। आचार्य  गौसेवा को विशेष महत्व देते हैं। वर्तमान में मध्यप्रदेश में जिस तरह गौशालाओं का संचालन किया जा रहा है, वह प्रशंसनीय है। विधानसभा अध्यक्ष  तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में केंद्र और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार आचार्य  के संकल्पों को क्रियान्वित कर रही है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में हम अहिंसा और शांति के रास्ते पर चलते हुए भारत को फिर विश्वगुरू बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। संतों की महिमा है कि दुनिया का कोई भी देश हमारे आध्यात्म की अनदेखी नहीं कर पाता, यह हमारे लिए गर्व का विषय है। भारत युद्ध नहीं, सदैव शांति के पक्ष में रहा है। आचार्य  समयसागर जी महाराज से प्रदेशवासियों को सकारात्मकता, देश भक्ति के संस्कार और देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता का आशीर्वाद प्रदान करने की विनती की। उन्होंने कहा कि आचार्य  के आशीर्वाद से हम लोकतंत्र को सशक्त करते हुए अपने वर्तमान लोक को बेहतर बनाएंगे और विश्व को भी इससे लाभान्वित करेंगे। क्षमा मांगने का भाव जैन पंथ में रखता है विशेष महत्व सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री  चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि क्षमा मांगने का भाव जैन पंथ में विशेष महत्व रखता है। पंथ के हजारों आचार्य और विद्वानगण भारत सहित सम्पूर्ण विश्व में जैन सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। कार्यक्रम में पूर्व मंत्रीगण  जयंत मलैया और  अजय विश्नोई, मप्र गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष  ओम जैन,  राहुल कोठारी तथा बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।  

बांधों में घटा जलस्तर, महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला; 16 अक्टूबर से 10% कम मिलेगा पानी

मुंबई  महाराष्ट्र में पानी की कमी को लेकर सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. कम बारिश और अल-नीनो के असर की चिंता के बीच राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर से कम से कम 10% पानी की कटौती करने का फैसला लिया है. यह कटौती महानगरपालिका, नगरपालिका और ग्राम पंचायतों समेत स्थानीय निकायों में लागू होगी. सरकार का कहना है कि इसका मकसद आने वाले महीनों के लिए पानी बचाना और लोगों के लिए पीने का पानी सुरक्षित रखना है।  जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन के मुताबिक, इस साल मॉनसून के बाद महाराष्ट्र के बांधों में औसतन 75.25% पानी बचा है. पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 88.82% था. यानी पिछले साल के मुकाबले इस बार बांधों में कम पानी है. राज्य के 265 तालुकों में सूखे की स्थिति घोषित की गई है. ऐसे में सरकार ने अभी से पानी बचाने और उसके इस्तेमाल को कम करने का फैसला लिया है।  सरकार ने बांधों और जलाशयों में मौजूद पानी के इस्तेमाल की योजना 31 अगस्त 2027 तक के लिए बनाई है. इसमें सबसे पहले लोगों के पीने के पानी की जरूरत पूरी की जाएगी. पानी का हिसाब लगाते समय गर्मी में पानी के उड़ने, बांधों में जमा गाद और बिना अनुमति पानी निकालने जैसी चीजों को भी ध्यान में रखा जाएगा. हर बांध में 10% अतिरिक्त पानी आपात स्थिति के लिए बचाकर रखा जाएगा. अगर पानी की कमी बहुत ज्यादा होती है तो तकनीकी जांच के बाद बांध के सबसे नीचे जमा पानी यानी डेड स्टोरेज का इस्तेमाल किया जा सकता है।  पानी की लीकेज रोकने पर जोर 16 अक्टूबर से पानी की कटौती लागू होने के साथ स्थानीय निकायों को पानी की बर्बादी रोकने के लिए भी काम करना होगा. पाइपलाइन से पानी लीक होने की समस्या को दूर करने के लिए अभियान चलाया जाएगा. सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी को पूरी क्षमता से चलाने को भी कहा है. यहां गंदे पानी को साफ किया जाता है. इस पानी का इस्तेमाल बागवानी, निर्माण और सफाई जैसे कामों में किया जा सकता है. इससे इन कामों के लिए साफ पानी कम इस्तेमाल होगा।  उद्योगों को भी पानी बचाना होगा सरकार ने उद्योगों से भी पानी बचाने को कहा है. उद्योगों को अपने इस्तेमाल किए गए पानी का कम से कम 30% पानी दोबारा इस्तेमाल या रिसाइकिल करना होगा. इसके अलावा बांधों, नदियों और नहरों से बिना अनुमति पानी निकालने पर भी कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने संबंधित विभागों को ऐसे मामलों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं. बिना अनुमति पानी निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाले पंप और दूसरे सामान को जब्त भी किया जा सकता है।  खेती के लिए पानी का इस्तेमाल भी तय होगा पानी की कमी का असर खेती पर भी पड़ सकता है. सरकार की योजना के मुताबिक, सिंचाई के लिए पानी देने से पहले पीने के पानी, जानवरों और चारे की जरूरत पूरी की जाएगी. रबी की अनाज वाली फसलों और चारे वाली फसलों को पहले पानी दिया जाएगा. इसके बाद दूसरी रबी फसलों की जरूरत पूरी की जाएगी. बारहमासी फसलों को पानी तभी मिलेगा, जब जरूरी जरूरतों को पूरा करने के बाद पानी बचा होगा।  महाराष्ट्र में इस साल बारिश की कमी का असर कई इलाकों में दिखा है. राज्य के 265 तालुकों में सूखे की स्थिति घोषित की गई है. इन इलाकों में बारिश कम होने के साथ लंबे समय तक सूखा रहने जैसी स्थिति भी सामने आई है. सरकार को चिंता है कि अल-नीनो का असर आगे भी रह सकता है।   इसी वजह से अगले मॉनसून तक पानी का हिसाब पहले से रखने की तैयारी की जा रही है. सरकार की कोशिश है कि आने वाले महीनों में लोगों को पीने के पानी की परेशानी न हो. 16 अक्टूबर से लागू होने वाली 10% पानी की कटौती इसी तैयारी का हिस्सा है। 

मंदसौर में बलराम कृषि महोत्सव को मुख्यमंत्री ने वर्चुअल संबोधित किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खेती किसानी तथा औषधीय फसलों में समृद्ध मंदसौर जिला अब तरक्की के नए आयामों को स्पर्श कर रहा है। 8-लेन एक्सप्रेस वे, गांधी सागर चीता प्रोजेक्ट, पशुपतिनाथ लोक जैसी कई सौगातें जिले को मिली हैं। आगामी दिनों में मंदसौर नीमच जिले को एयरपोर्ट सुविधा, परिवहन सेवा की बसों के माध्यम से भोपाल की सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। मुख्यमंत्री वर्चुअल माध्यम से मंदसौर जिले से जुड़कर बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में नवीन तकनीक के माध्यम से मंदसौर जिला श्रेष्ठ खेती किसानी कर रहा है। जिले में औषधीय फसलें भी उल्लेखनीय हैं। एक जिला एक उत्पाद के तहत मंदसौर जिले के लहसुन की ब्रांडिंग राज्य शासन द्वारा की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली दी जाएगी, जिससे किसानों को रात में सिंचाई का झंझट नहीं रहेगा। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब गांव-गांव में दुग्ध समितियां बनाई जा रही हैं। ऑर्गेनिक घी और दूध की योजना साकार हो रही है, दुग्ध उत्पादन 12 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत वृद्धि करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने आगामी त्योहारों की बधाई देते हुए कहा कि गोवर्धन पूजा पर कार्यक्रम आयोजित करके उन्नत पशुपालकों को पुरस्कार भी दिया जाएगा। सांसद श्री सुधीर गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश शासन किसान कल्याण के लिए कृत संकल्पित है। शासन ने सिंचाई योजनाओं के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसान हित को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। कार्यक्रम में जिले के उन्नत कृषकों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। अपेक्स बैंक चेयरमैन श्री महेंद्र सिंह यादव, श्री राजेश दीक्षित, श्री कप्तान सिंह और पूर्व विधायक श्री यशपाल सिंह सिसोदिया ने भी संबोधित किया। कृषि उपज मंडी परिसर मंदसौर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में जिला पंचायत अध्यक्ष  दुर्गा विजय पाटीदार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष डॉ मनुप्रिया यादव, नगर पालिका अध्यक्ष  रमादेवी बंशीलाल गुर्जर तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।